5.5 लाख की इस मशीन से शुरू करें पेपर बैग बनाने का बिज़नेस

आज हर शहर में प्लास्टिक बैग पर बैन लगा दिया गया है जो वातावरण के लिए काफी नुकसानदयाक था । ऐसे में आप पेपर बैग का बिजनेस कर के काफी अच्छा इनकम कर सकते हैं ।

पेपर बैग आम तौर पैकेजिंग की सामग्री है जो आज हर बेकरी स्टोर, ग्रोसरी स्टोर, मॉल शॉप, बड़ी से बड़ी ब्रांडेड कपड़े की कंपनी पेपर पैग का इस्तेमाल करते हैं ।पेपर बैग काफी यूजफुल रहता है और स्टाइलिश भी होता है जो बड़े बड़े ब्रांडेड कंपनियां आजकल यूज करते हैं । इस लिए इसके बिजनेस बहुत तेजी से बढ़ने की सम्भावना है ।

पेपर बैग के बिजनेस को स्टार्ट करने के लिए आपके पास आप को नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा और इसके साथ साथ उद्योग आधार नंबर भी लेना होगा । कच्चे मॉल के लिए आप को पेपर रोल ,प्रिंटिंग इंक आदि की जरूरत पड़ेगी जिसे आप आसानी से खरीद सकते है । सरकार इस बिजनेस के लिए फंड भी प्रोवाइड करवाती है ।

पेपर बैग को बनाने के लिए आपको एक मशीन खरीदना होगा । जो पेपर बैग बनाने का काम करती है । वैसे तो आप को मार्किट में बहुत सी मशीन मिल जायँगी और आप अपने हिसाब से किसी भी कंपनी की मशीन ले सकते है । लेकिन आज हम किसी एक कंपनी की मशीन के बारे बता रहे है ।

आज हम जिस कंपनी के बारे में बता रहे है उसका नाम है मोहिंद्रा इंजीनिरिंग कंपनी। यह कंपनी कई तरह की मशीन त्यार करती है जिसमे पेपर बैग मेकिंग मशीन भी है । इस मशीन से आप एक घंटे में 10000 बैग बना सकते है । बैग की चौड़ाई 100 से 430 मिलीमीटर तक हो और चौड़ाई 180 से 690 मिलीमीटर तक हो सकती है । इस मशीन की कीमत 5.5 लाख रुपये है।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

इस मशीन को खरीदने के लिए जा और जानकारी के लिए निचे दिए हुए पते पर सम्पर्क करें

Address:Mohindra Engineering Company
Azad Vinder Singh(Owner)
RZ- 73, Nursing Garden, Near Khyala Village, New Delhi – 110018, Delhi, India
Call Us:08071807710
Send SMS Mobile:+91-9999778804,+91-9212658395

नोट : कृपया कोई भी मशीन खरीदने से पहले अपनी तसल्ली कर लें यह पोस्ट सिर्फ जानकरी देने के लिए ही डाली गई है ।

सिर्फ 7 दिन में तैयार होगा यह घर, कीमत सिर्फ 2 लाख रुपये

अगर आप कम जगह में अधिक से अधिक सुविधाओं में रहना चाहते हैं और वह भी कम दाम में, तो यह घर आपके लिए हैं। इनकी खासियत यह है कि ये आपकी जरूरत के मुताबिक डिजायन किए जाते हैं और आप इन्हें कभी भी, कहीं भी शिफ्ट कर सकते हैं। ये हैं पोर्टेबल यानी मोबाइल होम्स जिनकी कीमत लाख रुपए से भी कम से शुरू है। इंडियामार्ट (IndiaMart) वेबसाइट पर एेसी कई कंपनियां हैं जो आपको ये घर बनाकर देंगी, जो पोर्टेबल होने के साथ ईको-फ्रेंडली भी होंगे।

7 दिन में हो जाएगा तैयार

मुंबई की Zigma Cabin Private Limited कंपनी के अधिकारी ने मनी भास्कर को बताया कि 1Bhk दो लाख रुपए में तैयार हो जाएगा। इसकी कीमत 1000 रुपए प्रति square feet रहेगी। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी पूरी देश में ऐसे घर और अन्य स्ट्रक्चर बनाकर ट्रांसपोर्ट करती है। उन्होंने कहा कि लोगों की जरूरत के मुताबिक घर का साइज कितना भी बढ़ाया जा सकता है और इसे सही सलामत डिलिवर करना कंपनी की जिम्मेदारी होगी।

जैसी जरूरत वैसा घर

IndiaMart पर देशभर की कई कंपनियां रजिस्टर्ड है जो आपको देश के किसी भी कोने में आपकी मर्जी के मुताबिक घर डिलिवर कर सकती हैं। ये घर आपकी जरूरतों के हिसाब से सस्ते और महंगे हो सकते हैं। नई दिल्ली की एक कंपनी जगदंबे प्री फैब सिर्फ 3.75 लाख रुपए में हाउस ऑन व्हील्स बनाकर दे रही है। यह घर वेदरप्रूफ होने के साथ दिखने में भी बेहद खूबसूरत हैं।

मिलेंगी सब सुविधाएं

अहमदाबाद की कंपनी आकाश इंटरप्राइज की नेहा रोहिरा ने मनी भास्कर को बताया कि उनकी कंपनी 20 गुणा 12 से लेकर 40 गुणा 12 तक के घर बनाती है। इसकी कीमत 1500 रुपए square feet है। कस्टमर की जरूरत के मुताबिक घरों में डायनिंग हॉल, लिविंग रूम, फर्नीचर और अन्य लक्जरी सुविधाएं के अलग-अलग रेट्स हैं। यह घर 30 से 35 दिनों में तैयार हो जाते हैं। कंपनी इन्हें कस्टमर की बताई हुई लोकेशन पर ट्रांसपोर्ट करती है। इसके बाद कस्टमर इन्हें अपनी मर्जी से कहीं भी ट्रांसपोर्ट कर सकते हैं।

लोगों को भा रहे हैं मोबाइल होम

मोबाइल होम्स का कॉन्सेप्ट लोगों को काफी पसंद आ रहा है। नेहा ने बताया कि फिलहाल हर महीने लगभग 200 मोबाइल होम्स और ऑफिस, केबिन और दुकानें बनाने के लिए उनके पास ऑर्डर आते हैं।

ऐसे शुरू करें फ्लेक्स प्रिंटिंग का बिज़नेस, हर महीने 2 लाख तक कमाने का मौका

फ्लेक्स प्रिंटिंग आउटडोर विज्ञापन छपवाने एवं लगवाने का एक बेहतरीन तरीका माना जाता है | कहने का आशय यह है की कंपनियों, राजनैतिक दलों, व्यक्तियों या अन्य किसी संस्था द्वारा फ्लेक्स में अपने बैनर छपवाकर होर्डिंग्स इत्यादि में लगाये जाते हैं ताकि इसके माध्यम से वे इसका प्रचार प्रसार कर पाने में सक्षम हों |

यही कारण है की वर्तमान में लगभग हर शहर में फ्लेक्स प्रिंटिंग का बिज़नेस किसी न किसी उद्यमी द्वारा किया जा रहा है और यह बिज़नेस करके अच्छी खासी लाभ की भी कमाई उद्यमियों द्वारा की जा रही है, इन सबके बावजूद इस प्रकार के सर्विस की बढती हुई मांगों के चलते शहर में ऐसी इकाइयाँ और स्थापित की जा सकती हैं |

फ्लेक्स प्रिंटिंग क्या है ?

Flex की यदि हम बात करें तो यह एक PVC अर्थात Poly Vinyl Chloride की एक शीट होती है जिसे अधिकतर तौर पर उच्च गुणवत्तायुक्त डिजिटल प्रिंटिंग के लिए उपयोग में लाया जाता है | चूँकि इस प्रकार की शीट का उपयोग आउटडोर होर्डिंग्स एवं बैनर बनाने के उपयोग में किया जाता है इसलिए यह हाथ से निर्मित बैनर इत्यादि से अधिक गुणवत्तायुक्त एवं अधिक चलने वाली होती है |

कितना होगा नवेश

यद्यपि Flex Printing Business में जो सबसे बड़ा निवेश होता है वह होता है फ्लेक्स मशीन पर वर्तमान में बाज़ार में तरह तरह के फ्लेक्स प्रिंटिंग मशीन उपलब्ध हैं इनमे से उद्यमी अपने बजट के एवं बिज़नेस प्लान के मुताबिक इनका चयन कर बिज़नेस शुरू कर सकता है | इसकी मशीन की कीमत 6 लाख से शुरू होकर 30 लाख तक चली जाती है |

शुरआत में आप 6 लाख वाली मशीन के साथ काम शुरू कर सकते है | इसके साथ आपको रा मॅट्रिअल के तोर पर PVC की शीट और कलर्ड इंक भी चाहिए जिसकी जानकारी आप को मशीन खरीदने वाले डीलर से मिल जाएगी | इसके साथ ही आपको आपको 2 कंप्यूटर और एक स्कैनर की जरूरत होगी |साथ में प्रिंटिंग मशीन के लिए 300 और ऑफिस के लिए 100 स्क्वायर फ़ीट की जरूरत होगी |तो कुल मिला कर 8 लाख में आपका बिज़नेस शुरू हो जायगा |

फ्लेक्स मशीन की कीमत की जानकारी के लिए आप निचे दिए हुए लिंक के ऊपर क्लिक कर सकते है |

https://dir.indiamart.com/impcat/flex-printers.html

कितने वर्कर चाहिए ?

उद्यमी को चाहिए की Flex printing Business को शुरूआती दौर में छोटे स्तर पर शुरू करे, इसके लिए उद्यमी को लगभग 3 कर्मचारी काम पर रखने पड़ सकते हैं इनमे एक Graphic Designer दूसरा मशीन ऑपरेटर एवं तीसरा ऑफिस बॉय कम सहायक हो सकते हैं जहाँ तक उद्यमी का सवाल है वह क्लाइंट रिलेशनशिप एवं बिलिंग इत्यादि संभाल सकता है, या उद्यमी खुद Graphic Designer है तो वह केवल दो आदमियों से भी शुरूआती दौर में काम चला सकता है |

यह मशीन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

मंडी में फसल बेचकर किसान को मिल सकता है ट्रैक्टर और पावर टिलर ,ये है पूरी स्कीम


अक्सर छोटे किसान अपनी उपज को सीधे मंडी में न लाकर गाँव में ही व्यापारियों को सस्ते में बेच देते हैं। गाँव में व्यापारी किसान की उपज की तौल में गड़बड़ी करके और दूसरे तरीकों से किसानों को उनके माल का पूरा पैसा नहीं देते हैं।

किसानों को अपनी उपज को खुद मंडी तक लाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मंडी परिषद किसानों को ट्रैक्टर, पावर टिलर और साइकिल उपहार के तौर पर दे रहा है।

किसानों खुद मंडी आकर वहां पर अपने सामान का सही दाम व उपज की सही तौल पाने के अलावा मंडी व्यापार का गणित खुद समझें इसके लिए मंडी परिषद , उत्तर प्रदेश ने मंडी आवक किसान उपहार योजना शुरू की है। इस योजना नें किसान अपनी उपज मंडी में बेचकर मंडी कार्यालय की मदद से किमती उपहार जीत सकते हैं।

मंडी आवक किसान उपहार योजना के बारे में नवीन गल्ला मंडी लखनऊ के सचिव डी के वर्मा बताते हैं, ” मंडी में किसान अपनी अपज को व्यापारी को बेचता है, तो व्यापारी उसे एक खरीद पर्ची यानी कि 6R स्लिप देता है।किसान इस पर्ची को मंडी समिति कार्यालय पर दिखा कर निशुल्क लकी ड्रॉ का कूपन ले सकता है। अगर ड्रॉ में किसान का कूपन चुना जाता है, तो उसे साइकिल, प्रेशर कुकर, पंपिंग सेट, स्प्रेयर ,पंखा जैसे इनाम मिल सकते हैं।

” वो आगे बताते हैं कि हर छठे महीने में मंडी में होने वाले बंपर ड्रॉ में कूपन शामिल होने पर किसानों को पावर टिलर , हार्वेस्टर और 35 हार्स पावर का ट्रैक्टर दिया जाता है।

मंडी में किसान की लाई गई उपज के बिक जाने पर उसे 6R स्लिप मिलती है, जिसमें उसकी बेची गई उपज की कीमत लिखी रहती है। 6R स्लिप पर लिखे हुए रेट के हिसाब से हर 5,000 रुपए की बिक्री होने पर किसान मंडी समिति के कार्यालय पर जाकर एक कूपन ले सकते हैं।

इस कूपन को हर महीने , तीन महीने और छठे महीने पर होने वाले लकी ड्रॉ में शामिल किया जाता है, कूपन चुने जाने पर मंडी की तरफ से किसानों को उपहार दिए जाते हैं। यह लकी ड्रॉ मंडलायुक्त द्वारा निकाला जाता है।

”मंडियों में किसानों को लाने के लिए कृषि में दुर्घटना सहायता, खलिहान आग दुर्घटना सहायता योजना और मंडी आवक किसान उपहार योजना चलाई जा रही हैं और किसान भी इन योजना का फायदा उठा रहे हैं। हाल ही में हुए ड्रॉ में हमने किसान किसानों को साइकिलें और दूसरे उपहार दिए हैं।” मंडी सचिव डी के वर्मा ने बताया।

मंडियों में किसानों के लिए होने वाले लकी ड्रॉ में मिलने वाले उपहार

हर महीने होने वाला लकी ड्रॉ-इनाम ( मोबाइल – 10 ,साइकिल -10 , प्रेशर कुकर – 10)
हर तीसरे महीने होने वाले लकी ड्रॉ-इनाम (पंपिंग सेट -एक , स्प्रेयर – दो , पंखा – तीन)
हर छठे महीने वाले लकी ड्रॉ – इनाम ( ट्रैक्टर – एक, पावर टिलर – दो , थ्रेशर – तीन)

सिर्फ एक मशीन दूध से बना देती है दही, पनीर, घी, छाछ और क्रीम, दूध से चौगुणा मुनाफा लेने के लिए आज ही खरीदें

देश में डेयरी उद्योग निरंतर प्रगति कर रहा है। जैसे-जैसे लोगों की आय में बढ़ोतरी हो रही है और जीवन स्तर सुधर रहा है डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर, घी, छाछ, क्रीम आदि की खपत बढ़ती जा रही है। यानी अब पहले की तरह डेयरी से जुड़े लोग सिर्फ दूध के व्यापार तक सीमित नहीं हैं। बल्कि अब डेयरी उद्योग में लगे किसानों और व्यापारियों के लिए दही, पनीर, देसी घी, खोया बनाकर बेचेने में भी अपार संभावनाएं हैं।

दूध की नहीं मिलती वाजिब कीमत

अक्सर देखा जाता है कि दूध गांवों और छोटे शहरों में पशुपालन करने वाले किसान अपना ध्यान सिर्फ दूध बेचने पर ही केंद्रित रखते हैं। जो किसान या डेयरी फार्म संचालक दूध सीधे बाजार में बेच देते हैं यानी सीधे ग्राहकों तक पहुुंचाते हैं उन्हें तो काफी फायदा हो जाता है लेकिन जो लोग ऐसा नहीं कर पाते उन्हें मजबूरन दूध को तमाम निजी डेयरी कंपनियों के केंद्रों पर ओने-पौने दाम पर बेचना पड़ता है।

पनीर, खोया, देसी घी बनाने में है फायदा

इन डेयरी किसानों को लगता है कि वो आखिर करें भी तो क्या?, आखिर उन्हें दूध की कीमत कैसे मिले। ऐसे में हम आपको कुछ तरीके बताते हैं जिनसे आप इसी दूध से ज्यादा पैसा कमा सकते हैं। जिन किसानों या डेयरी संचालकों के पास रोजना 100 लीटर से ज्यादा का दुग्ध उत्पादन होता है वे लोग खुद का पनीर, दही, छाछ, खोया और देसी घी बनाकर बेचे तो उन्हें काफी फायदा हो सकता है।

बाजार में गाय का दूध चालीस से पैंतालीस रुपये और भैंस का दूध 50 से 55 रुपये प्रति लीटर आसानी से बिकता है लेकिन किसान इसे सीधे ग्राहकों को नहीं बेच पाते हैं और उन्हें डेयरी कंपनियों की तरफ से गाय के दूध का 25 से 30 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 35 से 40 रुपये प्रति लीटर दाम मिलता है। लेकिन यही किसान यदि दूध के कुछ हिस्से का देसी घी, खोया, पनीर और दही बनाकर बाजार में बेचें तो उन्हें अच्छे दाम मिल सकते हैं।

एक मशीन से बनते हैं सभी डेयरी उत्पाद

इसके लिए आपको एक खोया, पनीर और देसी घी बनाने वाली मशीन खरीदनी होगी। एलपीजी गैस और बिजली से चलने वाली इस मशीन के जरिए मिनटों में दूध को गर्म किया जा सकता है और जरूरत के हिसाब से खोया, पनीर, दही और देसी घी बनाया जा सकता है। बाजार में 100 लीटर दूध की क्षमता वाली मशीन की कीमत करीब 80 हजार के आस-पास है।

ये मशीन 150 लीटर, 200 लीटर, 300 लीटर की क्षमता में भी मिलती है और इसका इस्तेमाल करना काफी आसान है। इन प्रोडक्ट को बनाने का फायदा ये भी है कि दूध को दो से चार घंटे तक ही रखा जा सकता है लेकिन यदि इससे खोया, देसी घी और पनीर जैसी चीजें बना दी जाएं तो एक से दो दिनों तक रखा जा सकता है और अच्छी कीमत पर बाजार में बेचा जा सकता है।

अपना ब्रांड भी बनाकर बेच सकते हैं

जिन डेयरी संचालकों के पास दूध की अधिकता है और मार्केट भी है तो वो अपना ब्रांड बनाकर भी इन उत्पादों को बेच सकते हैं। बाजार में शुद्ध और मिलावट रहित दूध, पनीर और देसी घी की खासी मांग है और ये अच्छे दामों पर आसानी से बिक जाते हैं।

खोवा बनाने वाली मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

अब नंबर प्लेट के साथ आएगी कारे

वाहन कंपनियां जल्द ही नंबर प्लेट लगी कारें लाएंगी। वाहनों की कीमत में नंबर प्लेट की लागत भी शामिल होगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी दी। वाहनों की नंबर प्लेट इस समय विभिन्न राज्यों द्वारा अलग-अलग निर्धारित एजेंसियों से खरीदी जाती हैं।

यह लाइसेंस प्लेट जिसे आम भाषा में ‘नंबर प्लेट’ कहा जाता है, वाहन का पंजीकरण नंबर लिखकर वाहन में लगाई जाती है। गडकरी ने बातचीत में कहा कि हमने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब विनिर्माता प्लेट लगाकर देंगे और उन पर अक्षर उभारने का काम बाद में मशीन के जरिए किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्लेट की लागत कार की कीमत में ही शामिल होगी और इससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलेगी। मंत्री ने कहा कि नई प्रौद्योगिकी वाली नंबर प्लेट का मकसद न केवल उपभोक्ताओं को राहत देना है, बल्कि इससे विभिन्न राज्यों में यह एकसमान हो सकेंगी।

उन्होंने बताया कि राज्यों द्वारा जो नंबर प्लेट खरीदी जाती हैं उनकी कीमत 800 से 40,000 रुपए तक होती है। अभी नंबर प्लेट या लाइसेंस प्लेट संबंधित राज्यों के जिला स्तरीय क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा जारी की जाती हैं। गडकरी ने कहा कि जहां तक वाहनों की सुरक्षा का सवाल है, इससे किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। वाहन सस्ता हो या महंगा नियम सभी के लिए समान होंगे।

उन्होंने कहा कि हम सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे। सस्ते वाहनों के लिए जो सुरक्षा नियम होंगे वे लक्जरी और एसयूवी वाहनों के लिए भी होंगे। सरकार ने हाल में सभी वाहन विनिर्माताओं के लिए जुलाई 2019 से ड्राइवरों के लिए एयर बैग्स और सीट बेल्ट रिमाइंडर को अनिवार्य कर दिया है।

इसके अलावा 80 किलोमीटर से अधिक की रफ्तार के लिए स्पीडिंग अलर्ट प्रणाली तथा रिवर्स पार्किंग के लिए सेंसर भी अनिवार्य किया गया है। गडकरी ने कहा कि प्रदूषण के मोर्चे पर भी किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। न ही इस बारे में उठाए गए कदमों को लेकर कोताही बरती जाएगी।

10 हजार ऐसे बन जाएंगे 49 लाख, ये हैं बड़ी रकम बनाने का हिट फॉर्मूला

अपने भविष्य को वित्तीय रूप से सुरक्षित रखने के लिए आपका फाइनेंस का पंडित बनने की जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ अपनी बचत की निरंतरता बनाए रखनी है और बाकी का काम चक्रवृद्धि समय के साथ करता रहेगा। चक्रवृद्धि का प्रभाव दीर्घावधि में देखते ही बनता है और यह लंबी अवधि में आपको धनवान बनाने में भरपूर मदद करता है। आइए, उदाहरण के जरिए समझते हैं कि किस उम्र में कितना निवेश करने पर आपको रिटायरमेंट पर 49 लाख मिलेंगे। 49 लाख की रकम उदाहरण के लिए ली गई है, आपकी या हमारी जरूरत इससे भिन्‍न भी हो सकती है।

कैसे काम करता है चक्रवृद्धि (Compound interest ) ?

मान लीजिए आप 100 रुपये कहीं जमा करते हैं और उस पर सालाना 10 प्रतिशत का ब्याज मिलता है। एक साल बाद आपके पास 110 रुपये होंगे। अगले वर्ष चक्रवृद्धि के कारण आपको 110 रुपये पर 10 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा और आपके पैसे बढ़ कर 121 रुपये हो जाएंगे। फिर अगले वर्ष 121 रुपये पर 10 प्रतिशत ब्याज प्राप्त होगा और यह सिलसिला साल दर साल चलता रहेगा। समय के साथ आपके पैसों में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

कब होंगे पैसे दोगुने

आपकी बचत के पैसे दोगुने कब होंगे इसकी गणना का एक आम नियम काफी प्रचलित है। रूल 72 है इसका नाम। फाइनेंस में इसका खूब इस्तेमाल होता है। रूल 72 के जरिए आप यह जान सकते हैं कि आपके निवेश के पैसे कितने समय में दोगुने हो जाएंगे। आइए इसका फॉर्मूला जानते हैं।

अगर आप 100 रुपये का निवेश करते हैं जिस पर सालाना 10 प्रतिशत का चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है तो रूल 72 के अनुसार इस निवेश को दोगुना होने में 72/10=7.2 साल लगेंगे। अगर आप इससे बड़ी राशि, मान लीजिए एक लाख रुपये, का निवेश करते हैं तो लगभग सात साल में वह दो लाख रुपया हो जाएगा। इसके लिए निवेश की निरंतरता और वर्तमान फंड में बढ़ोतरी करना न भूलें, यह आपको कहीं अधिक लाभ देगा।

पुरानी शराब जैसा है चक्रवृद्धि (Compound interest )

चक्रवृद्धि ब्याज शराब की तरह है। कहते हैं कि वाइन यानी शराब जितनी पुरानी होती है उतनी ही बेहतर होती है। इसी तरह, पैसों का निवेश भी अगर लंबी अवधि के लिए किया जाए तो इसके परिणाम काफी बेहतर होते हैं। इसलिए, अगर आप अपनी रिटायरमेंट के लिए करोड़ों रुपये की बचत करना चाहते हैं तो शुरुआत जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी किजीए। अपने पहले वेतन से या फिर 25 साल की उम्र से आप इसकी शुरुआत करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा। जब आप 60 साल की उम्र में रिटायर होंगे तो आपके पास पैसों की कमी नहीं होगी और आप शानदार जीवनशैली बरकरार रख सकते हैं।

अभी निवेश करने पर कितना मिलेगा

अगर आप 25 साल की उम्र से 5,000 रुपये का निवेश शुरू करते हैं और इस पर सालाना 10 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है तो 60 साल की उम्र में आपके पास एक करोड़ रुपये से अधिक का फंड होगा। हालांकि, अगर आप इसकी शुरुआत 40 साल की उम्र में करते हैं तो इतने पैसों के निवेश से आप रिटायरमेंट के समय लगभग 33 लाख रुपये प्राप्त कर पाएंगे। यह फर्क काफी अधिक है। 40 साल के व्यक्ति को एक करोड़ रुपये के लिए कितनी बार 5,000-5,000 रुपये अतिरिक्त जमा करने होंगे।

10,000 रुपये सालाना का निवेश 10 प्रतिशत की ब्याज दर के हिसाब से।

इस टेबल से आप समझ गए होंगे कि पांच साल का फर्क भी निवेश से प्राप्त होने वाले पैसों में भारी फर्क पैदा करता है। हो सकता है कि आप अधिक उम्र में निवेश की शुरुआत करें और 49 लाख रुपये के रिटायरमेंट फंड के लक्ष्य को प्राप्त करें जो 20 साल वाले व्यक्ति ने आसानी से प्राप्त किया था। आपको इसी लक्ष्य के लिए ज्यादा रकम का निवेश करना होगा ताकि आप बीते समय की भरपाई कर पाएं। इससे आपका बजट प्रभावित हो सकता है क्योंकि इस लक्ष्य के लिए आपको ज्यादा पैसे आवंटित करने होंगे। इसे समझने के लिए, दूसरा टेबल भी देखते हैं कि किस उम्र में व्यक्ति को कितने पैसों का निवेश करना होगा ताकि वह 49 लाख रुपये के लक्ष्य को पा सके।
49 लाख के लक्ष्य के लिए सालाना निवेश की राशि

निवेश के शुरुआत की उम्र रिटायरमेंट फंड

  • 20  6 लाख रुपये
  • 25  11 लाख रुपये
  • 30  18 लाख रुपये
  • 35  30 लाख रुपये
  • 40  49 लाख रुपये

नोट: यह लेख वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार मनीष मिश्रा के ब्लॉग सबसे बड़ा रुपइया से लिया गया है।

ऐसे शुरू करें सेनेटरी नैपकिन बनाने का बिजनेस

ऐसे शुरू करें सेनेटरी नैपकिन बनाने का बिजनेस …क्या आप भी अक्षय कुमार मूवी की तरह पैड बेच कर मुनाफा कामना चाहते है तो आप भी सेनेटरी नैपकिन बनाने का काम शुरू कर सकते है । जिसके लिए आप को सिर्फ 15000 रुपये का जुगाड़ करना होगा ।

उसके बाद आप भी छोटे शहरों और गांव में पैड बेच कर मुनाफे के साथ साथ समाज सेवा का काम भी कर सकते है ।जिस रफ्तार से भारत विकास की ओर बढ़ रहा है, उसी रफ्तार से इस बिजनेस के बढ़ने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। चलिये जानते हैं कैसे?

सैनिटरी नैपकिन ब्रांड इप्सॉस और स्वतंत्र शोधकर्ताओं ने भारत के ग्रामीण इलाकों में सर्वे किया और पाया कि 66 प्रतिशत लड़कियां पीरियड्स के समय सावधानियों और साफ-सफाई के बारे में नहीं जानती हैं। वहीं 12 फीसदी लड़कियों तक सैनिटरी पैड पहुंचता ही नहीं है। पैड के बारे में मालूम भी हो, तो भी 67 प्रतिशत महिलाएं इसका इस्तेमाल नहीं करतीं। इसका मात्र एक कारण है पैड का महंगा होना।

ऐसे में यदि आप किसी गांव या छोटे कस्बे में अपना उद्योग शुरू करते हैं और कम कीमत के पैड बनाते हैं, तो आपका बिजनेस जमकर चलेगा। और तो और चूंकि यह स्वच्छता से जुड़ा बिजनेस है, इसलिये स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, ग्रामीण मंत्रालय और समाजसेवी संगठन भी आपके उद्योग को बढ़ावा दे सकते हैं।यह स‍ब कैसे संभव होगा, उसके लिये हम आपको ले चलते हैं कर्नाटक के तोरणगल्लू।

यह एक छोटा सा कस्बा है बेल्लारी और होस्पेट के बीच। यहां पर सुरक्षा सैनिटरी नैपकिन प्रोडक्शन एवं ट्रेनिंग सेंटर में चार से पांच लोगों का स्टाफ है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिये सस्ती दरों पर सैनिटरी पैड बनाता है। यह केंद्र जेएसडब्ल्यू की सोशल सर्विस के तहत संचालित है।

बिज़नेस  की  लागत और बचत

इस बिज़नेस को 15000 रुपये की निजी लागत से भी शुरू किया जा सकता है. भारत सरकार द्वारा स्वच्छता पर अधिक ध्यान दिए जाने के कारण इस बिज़नेस में और भी चमक आ गयी है .

  • स्वयं की लागत: 15,000 रुपये
  • सरकारी मदद: 1.50 लाख रुपये
  • वार्षिक कमाई : 1.8 लाख रुपये

इस व्यापार को शुरू करने के लिए आपको लगभग 1.5 लाख रुपये की जरुरत होगी जिसमे 1.35 लाख का लोन प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिल जायेगा . यदि आप 1440 सेनेटरी नैपकिन एक दिन में तैयार करते हैं और एक पैकेट में 8 नैपकिन भी रखी जाती हैं तो एक साल में 54000 पैकेट तैयार किये जा सकते हैं .

यदि एक पैकेट की कीमत 13 रुपये रखी जाती है तो आप साल भर में लगभग 7 लाख रुपये की बिक्री के सकते हैं . और यदि इस आय में से पूरी लागत को निकाल दिया जाये तो साल में 2 लाख रुपये तक की बचत की जा सकती है .

कॉटन नहीं पल्प से बनते हैं पैड

ये सैनिटरी पैड कॉटन यानी रुई नहीं पल्प से बनते हैं, जो सोखने की क्षमता ज्यादा रखता है।कई सामाजिक संगठन ग्रामीण महिलाओं को कपड़े से मुक्त‍ि दिलाने की दिशा में कार्यरत हैं।अगर सस्ती दरों में पैड बनने लगे तो भारत के ग्रामीण इलाके और ज्यादा हाईजीनिक होंगे।अगर बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो दो मशीनों से शुरुआत कर सकते हैं।

अगर आपका बिजनेस ग्रामीण महिलाओं को मदद पहुंचाता है, तो सरकार भी आपकी मदद करेगी।कोई भी इस सेंटर में आकर ट्रेनिंग प्राप्त कर सकता है। यह सेंटर जिंदल स्टील वर्ल्ड द्वारा संचालित है।

ये मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

इस तरह शुरू करें कील बनाने का बिज़नेस, कभी नहीं होगा फेल

कील निर्माण का उद्योग एक लम्बे समय तक चलने वाला उद्योग है. इस उद्योग के लिए कुछ बड़े आयोजन की आवश्यकता होती है. इसके लिए विशेष तरह के मशीन की आवश्यकता होती है. यहाँ पर इसके कच्चे पदार्थ और मशीनरी की पूरी जानकारी दी जा रही है. इसके अलावा इस उद्योग को शुरू कैसे करें इसके बारे में भी यहाँ दिया जा रहा है.

कील बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 

इसके लिए काम आने वाली आवश्यक सामग्रियों में नेल वायर है. इसका प्रयोग करके विभिन्न तरह के कील बनाए जाते हैं. ये वायर अलग अलग क्रॉस सेक्शन में पाया जाता है. अतः अपने द्वारा बनाये जाने वाले कील के अनुसार वायर ख़रीद लें.

कील बनाने के लिए आवश्यक सामग्री कहाँ से ख़रीदें

मुख्य तौर पर इस वायर की फैक्ट्री पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर तथा छतीसगढ़ के रायपुर में है. यहाँ से स्टॉक में ये वायर अपने पते पर मंगाया जा सकता है. इसे ऑनलाइन मंगाने के लिए निम्नलिखित लिंक पर जा सकते हैं.

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कील बनाने के लिए मशीनरी 

नेल मेकिंग मशीन थोड़ी महंगी आती है, किन्तु एक बार यदि ये मशीन बैठा ली जाए, तो एक लम्बे समय तक कील बनाई जा सकती है. यह मशीन पूरी तरह से स्वचालित होती है, जिसे आसानी से नियंत्रित और नियमित किया जा सकता है. कील का निर्माण मुख्यतः दो तरह की मशीन से होता हैं. एक में कील बनती है और दूसरे मशीन में ये पोलिश किया जाता है. ये दोनों मशीन एक सेट में आते हैं.

कील बनाने का पूरा प्रोसेस जानने के लिए वीडियो देखें

कील बनाने के लिए मशीन कहाँ से ख़रीदें 

कील बनाने वाली मशीन के कई शोरूम होते हैं. जहाँ से इसे खरीदा जा सकता है. यदि आप ऑनलाइन ये मशीन पाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गये लिंक पर विजिट करें.

https://dir.indiamart.com/impcat/wire-nail-making-machine.html?price

कील बनाने की प्रक्रिया 

मशीन स्वचालित होने की वजह से कील बनने की प्रक्रिया बहुत आसान हो जाती है. मशीन के सामने वायर का डायल इस तरह से सेट किया जाता है, कि वह घूम सके. वायर का एक हिस्सा नेल मेकिंग मशीन में लगा दिया जाता है. मशीन के चलने पर उस वायर से कीलें खुद ब खुद बननी शुरू हो जाती हैं. एक मिनट में कम से कम 250 से 300 पीस कीलें बनती जाती हैं.

कील की पोलिशिंग 

इसके बाद बनी हुई कीलों को पोलिशिंग मशीन में डालना पड़ता है. पोलिशिंग से कीलें नयी दिखने लगती हैं. इसमें लकड़ी की भूसी का प्रयोग होता है. इसके बाद किसी तरह के लुब्रिकेंट का भी प्रयोग कर सकते है.

कील बनाने का व्यापार शुरू करने की कुल लागत 

इसमें उपयोग होने वाले नेल वायर की कीमत रू 30,000 से रू 40,000 प्रति टन है, और मशीन सेट की कीमत कम से कम 4 से 5 लाख तक की होती है. इस तरह ये व्यापार शुरू करने के लिए कम से कम 10 लाख रुपये की ज़रुरत होती है, जिसमे इलेक्ट्रिसिटी सेट अप मशीनरी आदि सभी कुछ शामिल होता हैं. एक किलो कील बनाने के लिए कच्ची सामग्री छोड़ के कम से कम 2 रू लागत पड़ती है. इस व्यापार को शुरू करने के लिए आपको 1000 स्क्वायर फिट की आवश्यकता पड़ सकती है.

कील बनाने के व्यापार के लिए लाइसेंस 

इसके लिए आवश्यक लाइसेंस लेना बहुत आवश्यक है, क्यों कि इस उद्योग में पूरा मशीनरी सेट अप चाहिए होता है. लाइसेंस के लिए अपने लोकल ऑथोरिटी को आवेदन पत्र दिया जा सकता है. यहाँ से बहुत जल्द आपको लाइसेंस प्राप्त हो जाएगा.

इस मशीन के साथ सिर्फ 35 हज़ार में शुरू करें मसाले बनाने का बिजनेस

भारतीय खाने में मसालों का स्थान हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहा हैं. विश्व में भारतीय खाने की पहचान इसमें डालें गये मसालें ही हैं इसलिए मसालों की मांग हमेशा मार्किट में बनी रहती हैं. अगर आप अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो आप आसानी से मसाले बनाने की यूनिट लगा सकते हैं. इस बिज़नस में लागत कम आती हैं और प्रॉफिट आपको ज्यादा मिल सकता हैं.

आप अपनी कैपिटल अमाउंट के अनुसार मसाले मैन्युफैक्चरिंग के बिज़नस को शुरू कर सकते हैं. आप इस बिज़नस को लघु स्तर पर, मध्यम स्तर पर और बड़े पैमाने पर शुरू कर सकते हैं. अत्यंत लघु स्तर पर मसाले मैन्युफैक्चरिंग इकाई आप अपने घर पर शुरू कर सकते हैं. हमारे यहाँ मसालों की मांग इतनी हैं कि लघुतम इकाई भी आपको लाभ ही पहुंचाएगी.

आज के आर्टिकल में हम आपको मसालों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट छोटे स्तर पर लगाने के विषय में जानकारी देंगे. भारत में सभी प्रकार के मसालों को उगाया जाता हैं. पहलें घरों में ही मसालों को कुटा जाता था लेकिन अब लोगों के पास इतना समय ही नहीं हैं. ऐसे में अगर आप ठीक रेट पर अच्छी क्वालिटी का मसाला उपभोक्ताओं को उपलब्ध करायेंगे तो आपके बिज़नस में आपको फायदा ही होगा.

ऐसे करें अपने बिज़नस का रजिस्ट्रेशन

आप अपनी मसाला मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को छोटे स्तर पर लगायें या बड़े स्तर पर आपको रजिस्ट्रेशन की सारी प्रक्रिया को फॉलो करनी पड़ेगी. इस बिज़नस के रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस कुछ इस तरह से हैं.

सबसे पहले आपको ROC का रजिस्ट्रेशन कराना होगा. छोटे स्केल पर या घर से ही मसाला मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने पर आप one person company रजिस्ट्रेशन भी करा सकते हैं.
आपको लोकल म्युनिसिपल अथॉरिटी से ट्रेड लाइसेंस भी लेना होगा.
फ़ूड ऑपरेटर लाइसेंस भी लेना आवश्यक हैं..

आपको BIS सर्टिफिकेट भी लेना होगा. मसालों के लिए आपको ये ISI के विभिन्न दिशा निर्देश उपलब्ध है .

  • Black whole and ground (काली मिर्च) ISI-1798-1961
  • Chilli powder (मिर्च पाउडर) ISI-2445-1963
  • Coriander powder (धनिया पाउडर) ISI-2444-1963
  • Curry powder (करी पाउडर) ISI-1909-1961
  • Turmeric powder (हल्दी पाउडर ) ISI-2446-1963
  • Methods of sampling and test of Spices and condiment ISI-1997-196

CFTRI, Mysore,ने एक तकनीकी दिशा निर्देश की जानकारी विकसित की है ,जो AGMARK की सर्टिफिकेशन के लिए आवश्यक मानीं जाती है .

मशीनरी व Raw मटेरियल

मसालों के प्रोडक्शन एरिया के लिए लगभग 75 स्क्वायर फीट की जगह की आवश्यकता होती हैं. पैकिंग एरिया और गोडाउन के लिए 150 स्क्वायर फीट की जगह चाहिए होगी. मसाले ग्राइंड करने के लिए और उन्हें प्रोसेस करने के लिए सिंपल मशीनरी और उपकरणों की आवश्यता होती हैं.

मसालों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए आपको dis integrator इंस्टाल कराना होगा. इसके साथ ही स्पाइस ग्राइंडर और पाउच सीलिंग मशीन की भी आवश्यता होगी. मसालों का भार तौलने के लिए वेट मशीन का होना भी आवश्यक हैं. इसके लिए आप पूरी तरह से आटोमेटिक मशीन भी ले सकते हैं. जिसमें ग्राइंडिंग, वेट मापना ओर पैकिंग सब एक प्रोसेस में अपने आप होता रहेगा.

कच्चे माल में आपको साबुत हलदी, साबुत काली मिर्च,मिर्ची,साबुत धनिये आदि की जरूरत होगी. जितना अच्छा आपका कच्चा माल होगा उतनी ही अच्छी क्वालिटी आपके प्रोडक्ट की भी होगी.

मसाले बनाने का प्रोसेस

मसाले बनाने के प्रोसेस में साबुत मसालों को साफ़ करना फिर उन्हें सुखाना, साफ़ व सूखे हुए मसालों में मसालों से कंकर या मिटी निकली जाती हैं. फिर मसालों को धुप में सुखाया जाता हैं. उसके बाद मसालों को ग्राइंड किया जाता हैं. मसाले ग्राइंड करने की मशीन 35000 रूपये से 85000 में मिल सकती हैं.जो एक दिन में 35 किलो से लेकर 70 किलो तक मसाला त्यार करती है . मसाला बनाने की क्षमता मशीन के आकार के साथ-साथ मसाले के ऊपर भी निर्भर करती है

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

और ज्यादा जानकारी के लिए आप निचे दिए पते पर संपर्क करें

M/s. Jas Enterprises ,Ahmedabad 380023 Gujarat India
Phone:– +91-79-22743454, 55
E mail:– info@jasenterprise.com
website :http://www.jasenterprise.com/

नोट:इस कंपनी के इलावा भी बहुत सारी कंपनी यह मशीन त्यार करती है आप कहीं से भी खरीद सकते है .