120 रूपये लीटर मिलेगा यह दूध, कम्पनी हवाई जहाज़ से करेगी सप्लाई

अब आपके घर तक दूध एयरलिफ्ट करके पहुंचाया जायेगा, आइये जानते हैं की कैसे….पराग मिल्क फूड्स लिमिटेड ने दिल्ली-एनसीआर में 120 रुपये प्रति लीटर गाय का प्रीमियम दूध बेचने का फैसला किया है।

इस दूध को पुणे की डेयरी से हर दिन एयरलिफ्ट करके यहां लाया जाएगा। कंपनी के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में हर दिन 10 हजार लीटर दूध डायरेक्ट ग्राहकों तक भेजने का प्लान है।

ये प्रोडक्ट्स बेचती है कंपनी

पिछले वित्त वर्ष में 1,950 करोड़ रुपये का टर्नओवर अर्जित करने वाली कंपनी के तीन प्लांट्स महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में हैं, जिनकी कुल क्षमता प्रति दिन 29 लाख लीटर दूध प्रोसेस करने की है।

कंपनी ‘गोवर्धन’, ‘गो’ और ‘प्राइड ऑफ काउज’ ब्रैंड के तहत दूध और दूसरे डेयरी प्रॉडक्ट्स बेचती है।  कंपनी ने सोनीपत में एक प्लांट के अधिग्रहण के बाद अगस्त में दिल्ली-एनसीआर में गाय के दूध की सप्लाई शुरू की थी।

पराग मिल्क फूड्स चेयरमैन देवेंद्र शाह ने कहा, ‘हम प्रीमियम मिल्क ब्रैंड ‘प्राइड ऑफ काउज’ दिल्ली एनसीआर में लॉन्च करने जा रहे हैं। हम इस दूध को 120 रुपये प्रति लीटर बेचेंगे। शुरुआत में हम 10 हजार लीटर प्रति दिन सप्लाई करेंगे और अगले छह महीने में इसे 20 हजार लीटर तक पहुंचाया जाएगा।’

यहां बिक रहा है यह प्रीमियम मिल्क

उन्होंने कहा कि कंपनी यह प्रीमियम दूध मुंबई, पुणे और सूरत में औसतन करीब 34 हजार लीटर बेच रही है। पुणे और मुंबई में यह 95 रुपये लीटर है। शाह ने कहा, ‘प्राइड ऑफ काउज ‘फार्म टु होम’ कॉन्सेप्ट पर आधारित है। यह उन उपभोक्ताओं के लिए है जो सेहतमंद जीवनशैली और शुद्ध उत्पादों के उपभोग में विश्वास करते हैं।

मोदी सरकार दे रही है घर बैठे बिजनेस करने का मौका, ऐसे उठाएं फायदा, होगी मोटी कमाई

मोदी सरकार ने पिछले कुछ सालों में कई ऐसी योजनाएं शुरू कीं, जो आपको बिजनेस करने का मौका देती हैं. ये बिजनेस आप अपने घर बैठे कर सकते हैं. कमाई भी अच्‍छी खासी होती है. इन स्‍कीम्‍स का फायदा उठाने के लिए कुछ खास नहीं करना पड़ेगा. मोदी सरकार ने इन स्‍कीम्स की प्रक्रिया बहुत आसान बनाई है.

इससे ज्यादा से ज्‍यादा लोग इन स्‍कीम्‍स से जुड़ सकेंगे. दरअसल, मोदी सरकार चाहती है कि लोग जॉब सिकर्स के बजाय जॉब क्रिएटर्स बनें, इसलिए इस तरह की स्‍कीम्‍स लॉन्‍च की गईं. मकसद है कि लोग आंत्रप्रिन्‍योर बनने के लिए आगे आएं. आइये जानते हैं इन स्‍कीम्‍स के बारे में…

घर की छत से होगी कमाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्‍ता संभालने के बाद सबसे पहले देश में सोलर पावर प्रोडक्‍शन का टारगेट लगभग पांच गुणा बढ़ाया. सरकार ने लोगों से अपील की कि वे अपने घर की छत पर सोलर प्‍लांट लगाएं और इस प्‍लांट से बनने वाली बिजली सरकार या बिजली कंपनियों को बेचें. इसके लिए आप अप्‍लाई करना चाहते हैं तो मोदी सरकार ने बेहद आसान प्रक्रिया बनाई है.

अगर आप इसके बारे में पूरी जानकारी लेना चाहते हैं तो आप मोबाइल ऐप अरुण (ARUN) डाउनलोड कर स्‍कीम की पूरी जानकारी ले सकते हैं. अगर आप अप्‍लाई करना चाहते हैं तो आप http://solarrooftop.gov.in/login पर जाकर करके आसानी से अप्‍लाई कर सकते हैं.

घर बैठे ऑनलाइन करें ये बिजनेस

अगर आप घर बैठकर बिजनेस करना चाहते हैं तो मोदी सरकार ने सरकार ने ई-पोर्टल के जरिए Gem (गवर्नमेंट ई-मार्केट) यानी ऑनलाइन बाजार तैयार किया है. आप अपने घर में रह कर ही GeM से जुड़कर सरकार के साथ बिजनेस कर सकते हैं. इसलिए आपको GeM पर रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा.

रजिस्‍ट्रेशन के बाद आप सरकारी विभागों की डिमांड के हिसाब से सप्‍लाई कर सकते हैं. ऐसा करने के लिए आपको मैन्‍युफैक्चरर्स से संपर्क करना होगा और डिमांड आने पर वहां से माल आगे सप्‍लाई कर सकते हैं.

यह ऑनलाइन ट्रेडिंग शुरू करने के लिए आपको https://gem.gov.in/ पर जाना होगा यहां साइनअप सेक्शन में आप अपना विकल्प चुन सकते हैं. सीधे संपर्क के लिए https://mkp.gem.gov.in/registration/signup#!/buyer पर क्लिक करना होगा.

महिलाएं भी कर सकती है बिजनेस

मोदी सरकार ने महिलाओं को भी घर पर रहकर बिजनेस करने का मौका दिया है. इस स्‍कीम को महिला ई-हाट नाम दिया गया है. महिलाएं इस ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर घर पर बनाए गए प्रोडक्‍ट्स भी बेच सकती हैं. इसके अलावा मैन्‍युफैक्‍चरर्स से सामान बनवाकर आगे बेच सकती हैं. यह प्‍लेटफॉर्म मिनिस्‍ट्री़ ऑफ वूमेन एंड चाइल्‍ड डेवलपमेंट द्वारा तैयार किया गया है.

इस प्‍लेटफॉर्म पर महिलाएं फ्री में अपना रजिस्‍ट्रेशन कराकर अपने प्रोडक्‍ट डिस्‍पले कर सकते हैं, यदि किसी सेलर्स को आपका प्रोडक्‍ट पसंद आता है तो वह सीधे आपसे संपर्क कर सकता है. आपको दूसरे ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल की तरह कमीशन भी नहीं देना होगा. अगर आप इस पोर्टल के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो क्लिक करें- http://mahilaehaat-rmk.gov.in/en/join-us/

डिजिटल कमाई भी है जरिया

मोदी सरकार समय-समय पर माय गवर्नमेंट पोर्टल पर अलग-अलग क्विज निकालती है. इन क्विज के जरिए भी कमाई होती है. वहीं, सरकार की डिजिटल पेमेंट ऐप BHIM के जरिए भी पैसा कमाया जा सकता है.

भीम ऐप से एक व्‍यक्ति को जोड़ने और उस व्‍यक्ति द्वारा तीन ट्रांजैक्‍शन करने पर 10 रुपए मिलते हैं. इस तरह महिलाएं या स्‍टूडेंट्स यदि रोज 20 लोगों को जोड़ते हैं तो वे 200 रुपए तक की कमाई कर सकते हैं. वहीं, कोई दुकानदार अपनी दुकान पर भीम ऐप को लागू करेगा, उसके खाते में 25 रुपए आएंगे.

जानिए किस कलर की कार खरीदना सब से ज्यादा पसंद करते हैं भारत के लोग

इस कलर की कार खरीदना सब से ज्यादा पसंद करते हैं भारत के लोग..साल 2018 कई मायनों में अहम रहा। लेकिन इस साल भारतीयों के कलर की च्वाइस को लेकर दिलचस्प खुलासा हुआ है। ग्लोबल पेंट BASF के मुताबिक साल 2018 में भारतीयों को सबस सफेद रंग पसंद आया। इस साल 43 फीसदी भारतीयों ने सफेद कलर की कार खरीदी।

इसके अलावा ग्रे और सिल्वर कलर की कार पसंद की गई। इन दोनों कलर की 15 फीसदी कार खरीदी गई। देश में 9 फीसदी लोगों ने रेड कलर की कार खरीदी, जबकि 7 फीसदी लोगों ब्लू, 3 फीसदी ने ब्लैक कार खरीदी।

सफेद कलर खरीदने की वजह

BASF हेड ऑफ डिजाइन (एशिया पैसेफिक) Chiharu Matsuhara ने कहा कि भारतीय सफेद कलर सबसे ज्यादा पसंद करते है, क्यों कि यह कलर जल्द गर्म नहीं होता है। उन्होंने कहा ट्रेंड एनालिस्ट के मुताबिक सफेद कलर की कार खरीदने की दूसरी सबसे बड़ी वजह इस कलर का फील लग्जरी तौर होना है। एंट्री लेवल सब कॉम्पैक्ट सेगमेंट में 42 फीसदी लोगों ने सफेद कलर की कार, 17 फीसदी ने ग्रे, 16 फीसदी ने सिल्वर कार खरीदी।

वहीं 12 फीसदी लोगों ने रेड कलर की कार पसंद की। बेसिक कॉम्पैक्ट सेगमेंट में 35 फीसदी के साथ सफेद कलर की कार सबसे ज्यादा खरीद गई। ग्रे कलर 17 फीसदी, रेड कलर 9 फीसदी पर रहा। कॉम्पैक्ट (प्रीमियम) सेगमेंट में सफेद कार लोगों की पहली पसंद बनी।

साल 2018 में कारों की बिक्री में रही मामूली बढ़त

ऑटो इंडस्ट्री बॉडी सोसाइटी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल्स मैनुफैक्चर्स के मुताबिक देश में साल 2018 में 33,94,756 यूनिट पैसेंजर व्हीकल की बिक्री हुई, जबकि 2017 में 32,30614 यूनिट बिकी थी।

महिंद्रा का बड़ा ऑफर, उनकी कार को दें एक भारतीय नाम, मुफ्त में घर ले जाएं 2 कार

आनंद महिंद्रा ट्विटर पर काफी सक्रिय रहते हैं और इसी के जरिए आम लोगों से जुड़कर संवाद स्थापित करते हैं। इसी कड़ी में आनंद महिंद्रा ने बुधवार को एक ट्वीट किया और लोगों से अपनी कार के लिए भारतीय नाम का सुझाव मांगा। उन्होंंने ट्वीट में लिखा कि उन्हें Alturas G4 की डिलीवरी मिल गई है और इसकी सूचना सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर दी। आनंद महिंद्रा ने इसके नामकरण में अपने फॉलोअर्स से सुझाव मांगे हैं। बता दें कि महिंद्रा की ये दोनों कारें बाज़ार में बेची जाएंगी।

आनंद ने ट्वीट में लिखा है कि इस खूबसूरत गाड़ी के लिए एक नाम चाहिए। सभी विचारों का स्वागत है। उन्होंने ऐलान किया कि जिस व्यक्ति का सुझाया नाम पसंद किया जाएगा, उसे महिन्द्रा की दो गाड़ियां मुफ्त में मिलेगी। आनंद महिंद्रा ने अल्तुरस से पहले TUV300 खरीदी थी। इस करा का नाम Grey Host नाम रखा था।

आनंद महिंद्रा के ट्वीट पर कई दिलचस्प जवाब आए।राजेश ने लिखा कि आनंद को अपनी गाड़ी का नाम जटायु रखना चाहिए। एक अन्य यूजर ने कार का नाम बघिरा रखने का सुझाव दिया।

इसमें एक यूजर ने आनंद को सलाह दिया कि वह अपनी गाड़ी का नाम कालभस्म रखें। यह एक संस्कृत शब्द है। वहीं चैतन्य ने लिखा कि इस कार का नाम बुद्दुसुरी नाम रखना चाहिए। यह कन्नड़ शब्द है, जिसका मतलब होता है ग्रे एनिमल। शिवेंदु ने लिखा कि इस कार का नाम शिव एंड रुद्रा रख दें।

SUV महिंद्रा Alturas G4 की दिल्ली में एक्सशोरूम कीमत 26.95 लाख रुपए है जो कार के टॉप मॉडल के लिए 29.95 लाख रुपए तक जाती है. यह कंपनी की अबतक की सबसे महंगी SUV है और कंपनी के लिए यह कार एक नए सैगमेंट की शुरुआत भी करती है.

भारत में इस SUV का मुकाबला टोयोटा फॉर्च्यूनर, फोर्ड एंडेवर, इसुज़ु एमयू-एक्स, स्कोडा कोडिएक और ऐसी ही कई और कारों से होने वाला है. यह SUV कंपनी की पुरानी जनरेशन वाली सैंगयंग रैक्स्टन की जगह लेगी और इस कार को महिंद्रा की बैजिंग के साथ लॉन्च किया गया है. लुक के मामले में कंपनी ने अल्तुरस को काफी आकर्षक बनाया है और इंटीरियर के मामले में भी ये कार काफी प्रिमियम है.

अब आप मुफ्त में देख सकेंगे सारे टीवी चैनलस, बस करना होगा यह काम

आज हम आपको बताएंगे की आप सारे टीवी चैनल्स मुफ्त में कैसे देख सकते हैं, इसके लिए आपको क्या करना होगा, आइये जानते हैं… टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के नए नियमों के मुताबिक आपको सौ चैनल्स देखने के लिए सिर्फ 153 रुपए चुकाने होंगे।

नए नियम के तहत चैनल्स की कीमतें 1 फरवरी से लागू हो जाएंगी। लेकिन एक उपाय से सारे टीवी चैनल्स मुफ्त में देख सकते हैं। इसके लिए कोई मंथली रिचार्ज नहीं करना होगा और न ही कोई अतिरिक्त पैसे देने होंगे। एक बार 2 हजार से 4 रुपए खर्च करके इसका फायदा उठाया जा सकता है।

कैसे उठाएं मुफ्त डीटीएच चैनल का फायदा

आज के दौर में अमूमन हर एक घर में इंटरनेट और एचडीएमआई टीवी मौजूद होता है। ऐसे में आप मुफ्त टीवी की HDMI से Amazon Fire TV Stick, Xiaomi Mi box जैसी डिवाइस कनेक्ट करके टीवी को स्मार्ट बना सकते हैं। इस डिवाइस के साथ रिमोट, पॉवर केबल और एचडीएमआई केबल मिलता है।

एचडीएमआई केबल को टीवी के एचडीएमआई से कनेक्ट करके कनेक्ट किया जा सकता है। इस तरह आपक टीवी ऐप बेस्ड हो जाएगा। इसके लिए एक Jio ऐप का आईडी पासवर्ड होना चाहिए। साथ ही इंटरनेट कनेक्शन भी चाहिए।

डिवाइस को कैसे करें कनेक्ट

इस डिवाइस की मदद से टीवी पर फेसबुक और यू-ट्यूब, नेटफ्लिक्स,अमेजन प्राइस जैसी ऐप का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए आपकी टीवी में एचडीएमआई पोर्ट होना चाहिए। साथ ही इंटरनेट कनेक्शन होना जरुरी है। यूएसबी पोर्ट से पैन ड्राइव और बाकी एक्सटर्नल डिवाइस की मदद से मूवी देखा जा सकता है। साथ ही स्पीकर से भी कनेक्ट किया जा सकता है।

कीमत

डिवाइस                                                            कीमत
Amazon Fire TV Stick                             3999 रुपए
Xiaomi Mi box                                           4500 रुपए
Tanix TX3 MAX Android Box              2000 रुपए

बिहार के किसानों ने सूखे में ही ऊगा दी स्ट्रॉबेरी की खेती, अब एक बीघे से होती है 2.5 से 3 लाख की कमाई

बिहार का एक छोटा सा गांव है चिल्हाकी बीघा जो एक सूखा प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आता है, यहां सिर्फ 60 घर हैं। यह गांव रबी, गेहूं, दालों, सरसों और सब्ज़ियों की खेती के लिए जाना जाता था। कृषि के अवसर होने के बावजूद गांव के लोग अक्सर पलायन कर जाते हैं क्योंकि उन्हें कृषि से कम ही लाभ मिल पाता है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस गांव में, जो न तो हिल स्टेशन है और न ही यहाँ की ज़मीन ही उपजाऊ है परन्तु यहाँ के लोगों ने स्ट्रॉबेरीज की फसल उगाने में सफलता प्राप्त की है। इससे गांव वालों के न केवल लाभ की सीमा में बढ़ोत्तरी हुई है बल्कि इस अविकसित इलाक़े में रोजगार के अवसर में भी वृद्धि हुई है।

इस गांव में यह परिवर्तन बृजकिशोर मेहता के बेटे गुड्डू कुमार की वजह से आया जो हरियाणा के हिसार में एक फार्म में काम करता है। जब बृजकिशोर ने अपने बेटे से हिसार के उसके काम के बारे में पूछा तब उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में बताया।

इस गांव की जलवायु हिसार से काफ़ी मिलती जुलती थी। बृजकिशोर ने इसीलिए इसे लगाने के बारे में सोचा। जोखिम लेने से पूर्व बृजकिशोर औरंगाबाद के कृषि विज्ञान केंद्र गए। उन्होंने बृजकिशोर को समस्तीपुर जिले के सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी इन पूसा जाने की सलाह दी। वहां पर कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि बिहार में स्ट्रॉबेरी की खेती करना असंभव है। बृजकिशोर यह सुनकर दुःखी और निराश हो गए।

यह सब सुनकर भी बृजकिशोर जोख़िम लेने पर अड़े थे। वे अपने बेटे के साथ हिसार के किसानों से मिले। आख़िर में उन्होंने अपने फार्म में 2013 में स्ट्रॉबेरी के सात पौधे लगाए।

स्ट्रॉबेरी की खेती की सफलता को देखकर गांव के लोगों ने भी बृजकिशोर से सलाह लेकर इसकी खेती प्रारम्भ कर दी। यह बदलाव पूरे गांव और आस-पास के क्षेत्रों में पहुंच गया और इससे खेती में फायदा भी होने लगा। गांव के लोग जो पलायन कर बाहर चले गए थे वे भी वापस लौटने लगे।

विलेज स्क्वायर से बातचीत के दौरान एक स्थानीय निवासी प्रेमानंद कुमार कहते हैं, “ मैं बहुत खुश हूँ कि मैं इससे महीने में 7000 रुपये कमा लेता हूँ।”

आज ब्रजकिशोर और उनके तीन लड़के ने अपने काम के लिए 15 परमानेंट कर्मचारी और 30 टेंप्रेरी कर्मचारी रखे हुए हैं। वे अपने दो बीघा जमीन के अलावा लीज में 6 बीघा जमीन लेकर स्ट्रॉबेरी बो रहे हैं। पड़ोसी गांवों की बहुत सारी महिलाओं को भी इस गांव में नौकरी मिल रही है। उन्हें इसके लिए 1 दिन का ₹200 और खाना मिल रहा है।

कुछ किसान स्ट्रॉबेरी की खेती लगाने से जुड़े जोखिम से डरे हुए हैं क्योंकि इसमें शुरूआती इन्वेस्टमेंट और जमीन की तैयारी की काफी जरूरत होती है अगर यह अच्छे से हो गया तो बेहतर लाभ प्राप्त होता है। शुरुआत में इस गांव में स्ट्रॉबेरी के वितरण को लेकर बड़ी चुनौती थी क्योंकि खरीददार विश्वास ही नहीं कर पाते थे कि यह बिहार में संभव है। पर जैसे-जैसे संख्या बढ़ी, व्यापारियों ने खरीदने से मना कर दिया।

इस स्थिति को देखते हुए किसानों कीमत घटाकर स्ट्रॉबेरी बेचने लगे। वह ₹200 और ₹300 प्रति किलो की दर से होलसेल व्यापारियों को बेचते थे। आखिर में बहुत संघर्ष के बाद व्यापारियों ने गांव वालों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया। कोलकाता से 10 व्यापारियों ने जो होलसेल फ्रूट मार्केट से आते थे वह सीधे चिल्हाकी बीघा के खेतों से ताजे स्ट्रोबेरी रोजाना ले जाते थे।

इस गांव में और आस-पास के क्षेत्रों में स्ट्रॉबेरी की खेती की डिमांड बढ़ने लगी। इससे गांव वालों को बहुत फायदा पहुंचने लगा। यहां के किसान कम समय में एक बीघे से 2.5 से 3 लाख तक कमा लेते थे। इस खेती का कांसेप्ट कृषि के किसी भी रिसर्च पेपर में नहीं मिलता था। वहां के कृषि विज्ञान केंद्र ने चिल्हाकी बीघा गांव के कुछ किसानों के स्ट्रॉबेरी की खेती के मॉडल को लेकर ट्रेनिंग की शुरुआत की। वे खेती की प्लानिंग और खेती से जुड़ी हर चीज में किसानों की हर संभव मदद करने लगे।

अपनी बाइक और गाड़ी में लगाएं 1999 रूपये का यह डिवाइस, कभी नहीं होगी चोरी

अपनी बाइक और गाड़ी में यह डिवाइस लगाने के बाद अगर आपकी गाडी चोरी भी होगी तो भी आपको एक मिनट में पता चल जायेगा। भारत के लोग हर काम जल्दी में करते हैं और उनकी जल्दबाजी अक्सर अपने वाहन को कहीं भी खड़ा कर भागने में दिख जाती है।

अब आप अपने मोबाइल से अपने वाहन को कनेक्ट कर उसे सुरक्षित रख सकते हैं आइए बताते हैं कैसे? अक्सर आपने देखा होगा के कोई भी वाहन अगर चोरी हो जाए तो उसकी लोकेशन ट्रैक करके उस तक पहुंचा जा सकता है,बाजार में आजकल ऐसी ही एक डिवाइस मौजूद है जिसमें सिम लगाकर आप उसे अपने वाहन में छिपा सकते हैं और व्हीकल के चोरी होने पर उसे तुरंत ट्रैक कर सकते हैं।

बता दें, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाने वाली कंपनी iMars ने एक ऐसा माइक्रो GPS ट्रैकर लांच किया है, जिसमें सिम लगाया जा सकता है। और इसके बाद उसे वाहन की बैटरी से कनेक्ट कर छिपा दिया जाता है। इसके लिए जरूरी है कि यूजर स्मार्टफोन में इससे जुड़ा ऐप इन्सटॉल कर ले।

इससे जब भी कोई आपके बिना गाड़ी चलाने की कोशिश करेगा तो आपके फोन पर अलर्ट आ जाएगा। डिवाइस को खरीद कर आपको इसमें एक माइक्रो सिम लगाना होगा, इस डिवाइस में 3 वायर दिए गए हैं, जिसमें से दो बैटरी में और एक इग्निशियन में लगाना होता है।

इसमें ब्लैक वायर को बैटरी के निगेटिव, रेड को बैटरी के पॉजिटिव प्वाइंट और ऑरेंज कलर के वायर को इग्निशियन के निगेटिव प्वाइंट से कनेक्ट करना होता है। गाड़ी में डिवाइस को फिट करने के बाद डिवाइस की लाइट ऑन हो जाएगी और यह अपना काम करना शुरू कर देगी।

इसके बाद आपको इस डिवाइस के मैनयुअल में दिए गए QR कोड को स्कैन करना होगा और फिर आपके LKGPS ऐप का लिंक ओपन हो जाएगा। आप इस डिवाइस को स्पीकर्स के अंदर, सीट के नीचे,फ्रंट और रियर बंपर के पीछे जैसी कई अन्य जगह रख सकते हैं। तो बस आपको इसके बाद उस लिंक से ऐप को इन्स्टॉल करना है और फिर लॉगिन।

यहां से आप कहीं भी बैठें अपनी गाड़ी की लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं। इस ऐप में आप गाड़ी की रीडिंग भी देख सकते हैं।अब अगर आपकी गाड़ी के साथ कोई छेड़छाड़ होती है तो तुरंत आपके पास अलर्ट आ जाएगा। तो हुआ ना फायदे का सौदा। बता दें, यह डिवाइस आप किसी भी आॅनलाइन वेबसाइट से मात्र 3000 रुपए तक में खरीद सकते हैं।

आखिर अंडा मांसाहारी है या शाकाहारी? साइंस के मुताबिक ये रहा जवाब

दुनिया में ऐसे कई सवाल हैं, जिन्हें हम बचपन से सुनते तो आ रहे हैं लेकिन उनके जवाब हमें अभी तक नहीं पता। जैसे, दुनिया में पहले मुर्गी आई या अंडा? लेकिन आज हम आपको एक ऐसे सवाल का जवाब देने जा रहे हैं, जिसके ऊपर लंबे समय से बहस चल रही है।

अंडा शाकाहारी है या मांसाहारी…

कई शाकाहारी लोग अंडे को मांसाहारी समझकर नहीं खाते। उनका लॉजिक होता है कि चूंकि अंडे मुर्गी देती है, इस कारण वो नॉन-वेज है। लेकिन अगर ऐसी बात है तो दूध भी जानवर से ही निकलता है, तो वो शाकाहारी कैसे है?

अगर आपको ऐसा लगता है कि अंडे से बच्चा निकल सकता था, इस कारण वो मांसाहारी है, तो आपको बता दें कि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर अंडे अनफर्टिलाइज्ड होते हैं। इसका मतलब, उनसे कभी चूजे बाहर नहीं आ सकते। इस गलतफहमी को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने भी साइंस के जरिए इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है। उनके मुताबिक, अंडा शाकाहारी होता है।

यह तो हर किसी को पता है कि अंडे के तीन हिस्से होते हैं- छिलका, अंडे की जर्दी और सफेदी। रिसर्च के मुताबिक, अंडे की सफेदी में सिर्फ प्रोटीन मैजूद होता है। उसमें जानवर का कोई हिस्सा मौजूद नहीं होता। ता कारण,तकनीकी रूप से एग वाइटशाकाहारी होता है।

अंडे की जर्दी

एग वाइट की ही तरह एग योक में भी सबसे ज्यादा प्रोटीन, कोलेस्ट्रोल और फैट मौजूद होता है। लेकिन जो अंडे मुर्गी और मुर्गे के संपर्क में आने के बाद दिए जाते हैं, उनमें गैमीट सेल्स मौजूद होता है, जो उसे मांसाहारी बना देता है।

मुर्गी कैसे देती है अंडा?

आपको बता दें, कि 6 महीने की होने के बाद मुर्गी हर 1 या डेढ़ दिन में अंडे देती ही है, भले ही वो किसी मुर्गे के संपर्क में आए चाहे ना आए। इन अंडों को ही अनफर्टिलाइज्ड एग कहा जाता है। इनसे कभी चूजे नहीं निकल सकते। तो अगर आपने अभी तक मांसाहारी समझ अंडे नहीं खाए, तो इसे अभी से खाना शुरू कर दीजिए।

न लगाई फैक्ट्री और न जॉब की, इस शख्स ने 35 हजार से ऐसे बना दिए 500 करोड़

आज हम एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने 35 हजार को अपनी मेहनत के बल पर 500 करोड़ रुपए बना दिया। इसके लिए इस शख्स ने न कोई फैक्ट्री लगाई और न जॉब किया। आइए जानते हैं कौन है ये शख्स और कैसे हासिल किया यह मुकाम।हम बात कर रहे हैं केडिया सिक्युरिटीज के एमडी विजय केडिया की।

विजय केडिया ने बताया कि महज 18 साल की उम्र में उन्‍होंने स्‍टॉक मार्केट में ट्रेडिंग का काम करना शुरू किया था। एक स्टॉक ब्रोकर के परिवार में जन्में केडिया को ब्रोकिंग में कोई रुचि नहीं थी। लेकिन आज इन्वेस्टमेंट की दुनिया में उनकी एक पहचान बन चुकी है। ट्रेडिंग में गलतियों से सबक लेते हुए आज वो स्टॉक मार्केट के एक सफल इन्वेस्टर बन गए हैं।

कठिन काम था ट्रेडिंग

विजय केडिया ने 18 साल की उम्र में कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग की शुरुआत की। 10 साल तक ट्रेडिंग के दौरान उन्होंने पाया कि मार्केट में ट्रेडिंग बड़ा कठिन काम है। मार्केट से पैसे बनाने से ज्यादा नुकसान हो रहा था। इस वजह से वो ट्रेडिंग से ज्यादा पैसा नहीं बना पा रहे थे। वो कहते हैं कि ट्रेडिंग में सफलता की दर महज 1 फीसदी ही है।

कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है। इसलिए मैंने कोलकाता से मुंबई जाने का फैसला किया। वो कहते हैं कि शेयर मार्केट एक समंदर है और आपके पर्सेप्शन से शेयर मार्केट ट्रिट करता है।उन्होंने बताया कि वो 15 से 20 हजार रुपए लेकर मुंबई आए थे। शुरुआती दौर में यहां काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वो कहते हैं कि कभी उनके पास खाने तक के पैसे नहीं रहते थे। मुंबई आकर उन्होंने ट्रेडिंग का काम शुरू किया था।

पंजाब ट्रैक्टर्स से की शुरुआत 

स्टॉक मार्केट में इन्वेस्टमेंट की शुरुआत केडिया ने पंजाब ट्रैक्टर्स से की। उन्होंने अपनी जमा पूंजी 35 हजार रुपए पंजाब ट्रैक्टर्स के स्टॉक्स में निवेश किए। पंजाब ट्रैक्टर्स में उनको का भी मुनाफा हुआ। इसमें से मिले पैसे से उन्होंने एसीसी के 10,000 शेयर 300 रुपए प्रति शेयर के भाव से खरीदे। पहले साल एसीसी की चाल सपाट रही। लेकिन अगले 6 महीने में एसीसी के स्टॉक की कीमत 3000 रुपए प्रति शेयर हो गई।

एसीसी से मिले पैसे से खरीदा पहला फ्लैट

केडिया ने एसीसी में प्रॉफिट बुकिंग की और इससे मिले पैसे से उन्होंने जोगेश्वरी में एक फ्लैट खरीदा। 1993 में इस फ्लैट की कीमत 4 लाख रुपए थी। इसके बाद केडिया ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वो एक सफल इन्वेस्टर हैं और वो कई कंपनियों में सफलतापूर्वक इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं। आज उनका पोर्टफोलिया करीब 500 करोड़ रुपए का हो चुका है।

नए इन्वेस्टर्स के लिए कुछ सुझाव दिए हैं-

  • नए इन्वेस्टर्स सबसे पहले म्युचुअल फंड में पैसे लगाएं।
  • ट्रेडिंग की जगह इन्वेस्टमेंट करें।
  • खुद को समझें, फिर निवेश करें।
  • स्टॉक मार्केट में निवेश करने से पहले स्टडी करें।
  • लॉन्ग टर्म का अप्रॉच रखें।

News Source -Moneybhasker News

नए साल में मुकेश अंबानी को लगा सबसे बड़ा झटका, छिन गया सब से अमीर होने का ताज

मुकेश अम्बानी को नए साल में सब से बड़ा झटका लगा है, उनका सब से अमीर होने का ताज छिन चुका है, आइये जानते हैं कैसे… भारतीय कारोबारी मुकेश अंबानी अकूत संपत्ति के मालिक हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, उनकी नेट वर्थ 44.3 बिलियन डॉलर या 3 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है।

इतना ही नहीं मुकेश अंबानी एशिया के सबसे अमीर शख्स हैं और दुनिया के अरबपतियों की सूची में 12वें नंबर पर आते हैं। लेकिन अगर बात नकद दौलत की जाए तो मुकेश अंबानी इस मामले में देश के दूसरे अरबपतियों से बहुत पीछे हैं। इस मामले में मुकेश अंबानी पहले नहीं, दूसरे नहीं बल्कि चौथे स्थान पर आते हैं।

मुकेश अंबानी से आगे निकले ये अरबपति

नकद दौलत के मामले में मुकेश अंबानी से आगे हैं विप्रो के अजीम प्रेमजी। बीते तीन सालों से अजीम प्रेमजी ने मुकेश अंबानी को पछाड़ कर रखा हुआ है। इन तीन सालों में अजीम प्रेमजी ने 10,115 करोड़ रुपए की नकद कमाई की है। अजीम प्रेमजी के अलावा भी कई और बिजनेसमैन हैं जो मुकेश अंबानी से आगे है।

वेदांता के अनिल अग्रवाल 9159 करोड़ की नकद कमाई के साथ दूसरे नंबर पर है। वहीं एचसीएल टेक्नोलॉजी के शिव नाडर 6492 करोड़ की कमाई के साथ तीसरे नंबर पर है। बीते तीन सालों में इन अरबपतियों ने इक्विटी डिवीडेंड और शेयर बायबैक के जरिए 20 हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई की है।

नकद कमाई के मामले में चौथे नंबर पर आते हैं मुकेश अंबानी। भले ही मुकेश अंबानी नकद दौलत के मामले में पीछे हों। लेकिन संपत्ति के मामले में देश के हर बिजनेसमैन से कई आगे हैं। आंकड़े बताते हैं कि मुकेश अंबानी की संपत्ति भारत की कुल जीडीपी का 1.6 फीसदी है। इतना ही नहीं दुनिया के 500 सबसे अमीर लोगों की कुल संपत्ति में मुकेश अंबानी की हिस्सेदारी 0.9 फीसदी है।