सफेद चंदन की करें खेती, 80 हजार लगाकर कमा सकते हैं 60 लाख रूपये

चंदन की खुशबू और इसके औषधीय गुणों के चलते इसकी देश-दुनिया में बड़ी मांग है। चंदन की लकड़ी देश में 8 से 10 हजार रुपए प्रति किलो, तो विदेश में 20 से 25 हजार रुपए प्रति किलो तक में बिकती है। इसकी खेती करने वाले गोरखपुर के किसान अविनाश कुमार के मुताबिक आने वाले 25-30 वर्षों में सफेद चंदन की अच्छी मांग रहेगी,

ऐसे में आप अगर मोटी कमाई करना चाहें तो सफेद चंदन की खेती कर सकते हैं। इसमें आपको सिर्फ 80 हजार से 1 लाख रुपए लगाने होंगे, जिसके बाद आपको कम से कम 60 लाख रुपए का मुनाफा होगा।

वैध है इसकी खेती

अमूमन लोगों को लगता है कि चंदन की खेती अवैध है, जबकि ऐसा नहीं है। अविनाश कुमार के मुताबिक सरकार ने सफेद चंदन की खेती करने को वैधता दी है।

एक पेड़ से निकलती है इतनी लकड़ी

चंदन के एक भरे-पूरे पेड़ से आपको आसानी से 6 से 10 किलो लकड़ी मिल सकती है। अगर आप एक एकड़ में चंदन के पेड़ लगाते हैं तो इसके बाजार भाव के हिसाब से आपको बहुत आसानी से 60 लाख का मुनाफा हो जाएगा।

हालांकि इसमें आपको लगभग 10 से 12 साल का इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि चंदन के पेड़ को बड़ा होने में कम से कम इतना समय लगता है। और यह भी तब जब आप पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती करेंगे। अगर आप सामान्य तरीके से खेती करते हैं तो आपको 20 से 25 साल का भी इंतजार करना पड़ेगा।

ऐसे कर सकते हैं खेती

अविनाश कुमार के मुताबिक अगर आपके पास कोई एक-दो एकड़ की खाली जमीन है, तो इसमें आप आसानी से यह खेती कर सकते हैं। इसमें आपको सिर्फ पौधे खरीदने, सिंचाई व्यवस्था करने, खाद डालने और खेत के चारों ओर बाड़ लगाने के लिए एक लाख रुपए तक खर्च करने होंगे। वैसे तो चंदन का पौधा बाकी पौधों की तुलना में काफी महंगा आता है,

लेकिन अगर आप कई सारे पौधे खरीदेंगे तो यह आपको 200 रुपए तक में मिल जाएगा। शहरी इलाकों में जिन लोगों ने प्लॉट लेकर खाली छोड़ रखे हैं उनके लिए सफेद चंदन की खेती बहुत फायदेमंद हो सकती है। जब तक आपकी जमीन की कीमत बढ़ेगी, तब तक आप चंदन की लकड़ियों से भी कमाई कर लेंगे।

अब नए तरीके की खेती में है फायदा

अविनाश कुमार के मुताबिक अब पारंपरिक खेती में उतना मुनाफा नहीं मिलता है। इसलिए उन्होंने पारंपरिक खेती को छोड़कर दो साल पहले पत्नी किरण यादव के साथ मिलकर औषधीय पौधों की खेती शुरू की। उनकी संस्था ‘शबला सेवा संस्थान’ के तहत लोगों को पारंपरिक खेती से हटकर नए प्रकार की खेती के बारे में जानकारी दी जाती है।

उनकी पत्नी इस संस्थान की अध्यक्ष हैं। उन्होंने यह भी बताया कि खेती में ‘पहले आओ पहले पाओ’ का सिद्धांत काम करता है। आगे आने वाले वर्षों में बाजार में चंदन की काफी अच्छी मांग होने की उम्मीद है। ऐसे में जितना जल्दी आप इसकी खेती शुरू करेंगे उतना जल्दी आपको मुनाफा होगा।

सिर्फ 50 रुपए प्रति दिन के खर्च से होगी 35 लाख की कमार्इ ! साथ में मिलेगा यह फायदा

निवेश व बचत के लिए हर कोर्इ बेहतर से बेहतर विकल्प की तलाश में रहता है। एेसे में यदि आपसे कहा जाए कि मात्र 50 रुपए के प्रति दिन निवेश से आप 35 लाख रुपए तक की कमार्इ कर सकते हैं तो शायद आप यकीन नहीं कर पाएंगे।

आमतौर देखा जाए तो आप पाॅकेट खर्च के नाम पर 50 रुपए से कहीं अधिक रुपए प्रतिदिन खर्च करते हैं। अगर आप वित्तीय रूप से अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं तो चिंता न करें। आज हम आपको निवेश को लेकर एक एेसे तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें आप केवल 50 रुपए के निवेश करने की वजह बड़ी रकम जमा कर सकते हैं।

एेसे करें बचत

मानी लीजिए कि आपकी उम्र 25 वर्ष है आैर आप प्रति दिन के हिसाब से सालाना 18 हजार रुपए खर्च कर सकते हैं। साथ ही आपको पीपीएफ खाता भी खोल सकते हैं। मौजूदा समय में इसपर आपको 8 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है। इस हिसाब से यदि आप 50 रुपए प्रति दिन का निवेश करते हैं तो 35 साल में आप 3.5 लाख रुपए कमा लेंगे।

इस हिसाब से यदि आप 50 रुपए प्रति दिन व अपने पीपीएफ खाते में प्रति वर्ष 18 हजार रुपए का निवेश करते हैं तो 60 साल में आप 35 लाख रुपए के मालिक बन सकते हैं। मौजूदा समय में यदि आप एलआर्इसी जीवन शांति प्लान में निवेश करते हैं तो आपको 25 हजार रुपए प्रतिमाह का पेंशन मिलता है।

महंगार्इ का मात देने में मिलेगी मदद

एेसे में यदि आप मात्र 50 रुपए प्रति दिन की बचत से आप रिटायरमेंट के समय इतनी बड़ी रकम बना सकते हैं तो आप सोच सकते हैं कि अधिक पैसे के निवेश से कितना कमा सकते हैं।

इसके अलावा आप नेशनल पेंशन स्कीम, इक्विटी व फिक्स्ड डिपाॅजिट में भी पैसे निवेश कर सकते हैं। इस प्रकार भविष्य में बढ़ने वाली महंगार्इ के हिसाब से भी खुद को वित्तीय तौर पर मजबूत कर सकते हैं।

खरगोश पालने के शौक ने बदली किस्मत ,अब रेबिट फार्मिंग से सालाना कमाता है 10 लाख रुपये

जींद के संजय कुमार देशभर के पेट शॉप्स में रैबिट सप्लाई करते हैं। उनके इस प्रोफेशन की कामयाब कहानी के पीछे बड़ी दिलचस्प कहानी है। संजय को बचपन से रैबिट पालने का शौक था और घरवाले इससे नाराज थे।

बावजूद इसके उन्होंने अपने शौक को जिंदा रखने के लिए इंटरनेट से जानकारी जुटाने के बाद ट्रेनिंग ली और 9 साल में शौक इतना बड़ा प्रोफेशन बन गया। अपने रैबिट फार्म से संजय कुमार लगभग 10 लाख सालाना कमा रहे हैं।

घरवालों ने कर दिया था पैसे देने से इनकार…

  • शहर के रोहतक रोड बाईपास पर आधा एकड़ जमीन पर बना उनका रैबिट फार्म प्रदेश में सबसे बड़ा रैबिट फार्म है। इन दिनों इस फार्म में 6 नस्लों के 500 से ज्यादा खरगोश हैं।
  • संजय कुमार बताते हैं कि वर्ष 2008 में सिर्फ 100 खरगोश से व्यवसाय शुरू किया था। इसके बाद धीरे-धीरे खरगोशों की संख्या बढ़ाई।
  • दूर-दूर से लोग उनसे रैबिट फार्मिंग के बारे में जानकारी लेने के लिए आते हैं। रैबिट फार्मिंग के इस कारोबार से संजय कुमार को आय भी अच्छी-खासी प्राप्त हो रही है।
  • संजय की मानें तो उनके यहां से हर महीने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार समेत दूसरी यूनिवर्सिटी में रिसर्च के लिए खरगोश भेजे जाते हैं। वहीं, देश-विदेश के खरगोश पालने का शौक रखने वाले लोग भी यहीं से लेकर जाते हैं।
  • देशभर की पेट शॉप में उनके फार्म से खरगोश की सप्लाई होती है। साथ ही, अपने व्यवसाय के सिद्धांत के बारे में संजय बताते हैं कि वह मीट के लिए रैबिट की सप्लाई नहीं करते।

पहले इंटरनेट से जानकारी ली, फिर ट्रेनिंग

संजय कुमार के मुताबिक, उन्हें बचपन में ही खरगोश पालने का शौक था, लेकिन घरवाले इससे सख्त नाराज थे। बावजूद इसके उन्होंने जिद पाल ली कि वह एक दिन प्रदेश का सबसे बड़ा रैबिट फार्म बनाएंगे। एक-दो बार ऐसा भी हुआ, जब घरवालों ने खरगोश खरीदने के लिए उसे पैसे नहीं दिए तो चोरी-छुपे पैसे निकालकर खरगोश खरीद लाए।

फिर मैट्रिक करने के बाद संजय ने कुछ दिन गुड़गांव में ठेकेदारी की। इसी दौरान उन्होंने गूगल पर रैबिट फार्मिंग की जानकारी ली। इसके बाद वह राजस्थान के अविकानगर में भारत सरकार के ट्रेनिंग सेंटर से एक सप्ताह की ट्रेनिंग लेकर आए। शुरुआत में कर्नाटक से 100 रैबिट अपने फार्म पर रखे।

रैबिट फार्मिंग में देखभाल जरूरी, खर्च काफी कम

  • रैबिट फार्मिंग शुरू करने के इच्छुक किसानों के लिए संजय कुमार का कहना है कि शुरुआत में शेड तैयार करने, खरगोश खरीदने पर पैसा खर्च होता है, लेकिन उसके बाद खर्च काफी कम है।
  • पोल्ट्री व्यवसाय से काफी कम खर्च व कम जोखिम का यह कारोबार है। रैबिट फार्म से न कोई बदबू आती और न ही किसी प्रकार कोई और पॉल्यूशन होता है। बस रैबिट की देखभाल पर ध्यान देना काफी जरूरी है। एक खरगोश के लिए दिनभर में एक मुट्ठी फीड, एक मुट्ठी चारा और दो-तीन कटोरी पानी पीता है।
  • चार महीने में खरगोश दो किलो वजन से ज्यादा का हो जाता है और फिर 350 से लेकर 500 रुपए तक में बिक जाता है। रैबिट फार्मिंग के लिए सरकार द्वारा 25 से 30 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।

अगर आपके पास है ड्राइविंग लाइसेंस तो हर महीने कमा सकते हैं 20 से 25 हजार रुपए

देश में इस समय बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। नौकरी के लिए कई राज्यों में युवा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तक कर रहे हैं। लेकिन आज भी कई काम एेसे हैं जिन्हें युवा आसानी से करके हर माह 20 से 25 हजार रुपए कमा सकते हैं।

अब उत्तर प्रदेश में सरकार ने भी युवाओं के लिए एक नियम में बदलाव किया है। इस बदलाव के बाद युवाओं को आसानी से रोजगार मिल सकता है और वे हर महीने अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं।

सरकार ने किया ये बदलाव

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक बदलाव करते हुए टैक्सी, ऑटो और कैब चलाने के लिए कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत को खत्म कर दिया है। इस बदलाव के बाद कोई भी व्यक्ति अपने लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस के जरिए टैक्सी, कैब, ऑटो, ई-रिक्शा आदि चलाकर हर महीने कमाई कर सकते हैं।

यदि आप अपना वाहन नहीं चलाना चाहते हैं तो 20 से 25 हजार रुपए महीने में ड्राइवर की नौकरी भी कर सकते हैं। आप कोई भी अच्छी कंपनी की ड्राइवर की नौकरी करके हर महीने कमाई कर सकते हैं।

गुड्स व्हीकल चलाने के लिए भी कमर्शियल लाइसेंस की जरुरत नहीं

सरकार के इस बदलाव के बाद आप माल ढोने वाले वाहन चलाकर भी कमाई कर सकते हैं। दरअसल यूपी सरकार ने बिना कमर्शियल लाइसेंस ही गुड्स व्हीकल चलाने को भी मंजूरी दे दी है। इस श्रेणी में व्यावसायिक वाहन जिनकी माल ढोने की क्षमता 7500 किग्रा (मसलन छोटा हाथी, पिकअप सरीखी माल ढोने वाली गाड़ियां) से कम वाले वाहन आते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने यह बदलाव कोर्ट के एक आदेश के बाद किया है। इसके तहत लाइट मोटर व्हीकल की श्रेणी में आने वाले वाहनों को चलाने के लिए कमर्शियल लाइसेंस की जरुरत नहीं है। परिवहन आयुक्त के निर्देश के बाद प्रदेश के सभी जिलों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।

तीन एकड़ में बुल्गारिया गुलाब की खेती कर किसान कमा रहा है 10 लाख सालाना

जिला कैथल के गांव बरोला का प्रगतिशील किसान कुशलपाल सिरोही तीन एकड़ में बुल्गारिया गुलाब की खेती कर दस लाख रुपए सालाना कमा रहा है। पहले छह एकड़ गुलाब की खेती करते थे, लेकिन अब तीन एकड़ में कर रहे हैं। कुशलपाल सिरोही पिछले करीब 15 सालों से बुल्गारिया गुलाब की खेती कर रहा है।

वैसे तो गुलाब की हजारों किस्म होती हैं, लेकिन इत्र बुल्गारिया गुलाब से ही निकलता है। वैसे इस किस्म का नाम दमस्त है। लेकिन बुल्गारिया देश में ज्यादा होने के कारण इसका नाम बुल्गारिया ही पड़ गया। नवंबर व दिसंबर में इसकी कलम लगाई जाती है।

प्रैल माह में यह तैयार हो जाता है। एक बार लगाने के बाद 15 साल तक दोबारा लगाने की जरुरत नहीं पड़ती। अप्रैल माह में जितनी ज्यादा गर्मी पड़ेगी, उतनी ही ज्यादा पैदावार होगी। गर्मी ज्यादा पड़ने से बुल्गारिया गुलाब ज्यादा खिलता है।

कैसे बनाते हैं इत्र…

  • कुशलपाल सिरोही के अनुसार तांबे के बड़े बर्तन में पानी और गुलाब के फूल डाल दिए जाते हैं।
  • इसके बाद ऊपर से मिट्टी का लेप कर बर्तनों के नीचे आग जलाई जाती है।
  • भाप के रूप में गुलाब जल व गुलाब इत्र एक बर्तन में एकत्रित हो जाते हैं, जिस बर्तन में भाप बनकर इत्र जाता है, उसे पानी में डाल दिया जाता है।
  • गुलाब का इत्र केवल तांबे के बर्तन में निकाला जाता है। कई जगह कंडेंसिंग विधि से भी अर्क निकाला जाता है।
  • लेकिन आसवन विधि ज्यादा कारगर है। एक क्विंटल फूलों में मात्र 20 ग्राम इत्र निकलता है।
  • इंटरनेशनल मार्केट में एक किलोग्राम इत्र का मूल्य करीब सात से आठ लाख रुपए है।

इंटरनेट के माध्यम से बेचते हैं विदेशों में

गुलाब के इत्र की अमेरिका सहित अरब के देशों में डिमांड है। किसान ने बताया कि भारत में इसकी कोई मार्केट नहीं है। इसलिए बाहर इंटरनेट के माध्यम से बेचना पड़ता है। साऊदी अरब में सबसे ज्यादा डिमांड है। प्रति एकड़ 400 से 500 ग्राम निकलता है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में इत्र 7 से 8 लाख रुपए प्रति एक किलोग्राम के हिसाब से बिकता है।

प्रति एकड़ खेती पर चार हजार रुपए आता है खर्च

नवंबर व दिसंबर में गुलाब के पौधों की कटाई व छंटाई होती है। इसी दौरान नई कलमें भी लगाई जा सकती हैं। कुशपाल के मुताबिक, एक एकड़ में बुल्गारिया गुलाब लगाने में चार हजार रुपए के करीब खर्च आता है। एक एकड़ में करीब दो हजार कलम लगाई जा सकती हैं। यह तीन माह में तैयार हो जाता है। एक बार लगाया गुलाब 15 साल तक फूल देने के काम आता है।

ये है सबसे पौष्टिक चारा ,एक बार लगाने पर पांच साल के लिए मिलेगा चारा

पशुपालकों को गर्मियों में हरे चारे की सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बरसीम, मक्का, ज्वार जैसी फसलों से तीन-चार महीनों तक ही हरा चारा मिलता है। ऐसे में पशुपालकों को एक बार नेपियर घास लगाने पर चार-पांच साल तक हरा चारा मिल सकता है।

इसमें ज्यादा सिंचाई की जरूरत भी नहीं पड़ती है। गन्ने की तरह दिखने वाली नेपियर घास लगाने के महज 50 दिनों में विकसित होकर अगले चार से पांच साल तक लगातार दुधारू पशुओं के लिए पौष्टिक आहार की जरूरत को पूरा कर सकती है।

पशुपालन विभाग के उप निदेशक वीके सिंह नेपियर घास के बारे में बताते हैं, “प्रोटीन और विटामिन से भरपूर नेपियर घास पशुओं के लिए एक उत्तम आहार की जरूरत को पूरा करती है। दुधारू पशुओं को लगातार यह घास खिलाने से दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है और साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

हाइब्रिड नेपियर की जड़ को तीन-तीन फीट की दूरी पर रोपित किया जाता है। इससे पहले खेत की जुताई और समतलीकरण करने के बाद घास की रोपायी की जाती है और रोपाई के बाद सिंचाई की जाती है। घास रोपण के मात्र 50 दिनों बाद यह हरे चारे के रूप में विकसित हो जाती है।

एक बार घास के विकसित होने के बाद चार से पांच साल तक इसकी कटाई की जा सकती है और पशुओं के आहार के रूप में प्रयोग की जा सकती है। नेपियर घास का उत्पादन प्रति एकड़ लगभग 300 से 400 कुंतल होता है। इस घास की खासियत यह होती है कि इसे कहीं भी लगाया जा सकता है।

एक बार घास की कटाई करने के बाद उसकी शाखाएं पुनः फैलने लगती हैं और 40 दिन में वह दोबारा पशुओं के खिलाने लायक हो जाती है। प्रत्येक कटाई के बाद घास की जड़ों के आसपास हल्का यूरिया का छिड़काव करने से इसमें तेजी से बढ़ोतरी भी होती है। वैसे इसके बेहतर उत्पादन के लिए गोबर की खाद का छिड़काव भी किया जाना चाहिए।

सब्जी की खेती ने बदली किस्मत, सालाना 3 फसलें और 3 गुना आमदनी

गांव अभोली के किसान गुरदीप सिंह ने अपने खेतों में उत्तम क्वालिटी का आलू उत्पादन कर न केवल खेती में बड़ा मुकाम हासिल किया है, बल्कि वह पारंपरिक खेती से तीन गुणा आमदनी सब्जियों से लेता है।

उसके खेत में उत्पादित आलू चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में उत्तम क्वालिटी सब्जी कंपीटीशन में तीन बार प्रथम स्थान रहा है। इसी उपलब्धि पर किसान को बड़े किसान मेले में पांच बार मुख्यातिथि से सम्मान भी मिला है। वहीं गुरदीप सिंह अब दूसरे किसानों को सब्जी की खेती के लिए प्रेरित भी करता है।

किसान गुरदीप सिंह का सब्जी उत्पादन में कोई सानी नहीं है, क्याेंकि उसके खेत में उत्पादित सब्जियां उत्तम क्वालिटी की होती हैं। कृषि विभाग के अधिकारी भी इसकी पुष्टि करते हैं। किसान गुरदीप सिंह ने बताया कि उसके पास 14 एकड़ जमीन है। घाटे का सौदा बनी पारपंरिक खेती से उसके परिवार का गुजारा मुश्किल था, लेकिन 20 साल पहले वह कृषि विशेषज्ञों के संपर्क में आया, तो उसको सब्जियाें की खेती की सलाह मिली।

उसके बाद उसने सब्जियों की खेती करना शुरू कर दिया। सब्जियों के उत्पादन से पारंपरिक खेती के मुकाबले तीन गुणा प्रति एकड़ आमदन होती है, क्योंकि साल में वह तीन सब्जियों की फसलें लेता है। वहीं उसके खेतों में उत्पादित आलू चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में उत्तम क्वालिटी में प्रथम रहता है। उसको हर साल किसान मेले में मुख्यातिथि की ओर से आलू की उत्तम क्वालिटी पर सम्मान मिलता है।

गांव अभोली के किसान गुरदीप सिंह के खेत में उत्पादित आलू अच्छी क्वालिटी में पांच बार हरियाणा में प्रथम रहा

भिंडी की फसल से खरपतवार की निराई करवाता किसान गुरदीप सिंह।

सब्जियों की खेती से दर्जनों को मिलता है रोजगार:गुरदीप सिंह ने बताया कि सब्जियों के उत्पादन से किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकता है। इसके अलावा ग्रामीण स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलता है, क्योंकि वह अपने खेतों में 20 सालों से सब्जी उगाता है।

जहां रोजाना करीब 25 लोगों को रोजगार मिलता है। इसके अलावा उसके खेतों में प्रतिदिन दर्जनों किसान विजिट करने पहुंचते हैं। किसान उनको सब्जी उत्पादन के लिए प्रेरित करता है।

सब्जियों की खेती से किसान ले सकते हैं अच्छी आमदनी

कृषि विज्ञान केंद्र में मृदा विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र जांखड़ ने बताया कि सब्जियों के उत्पादन से जहां किसान अच्छी आमदन ले सकते हैं। वहीं भूमि की उपजाऊ शक्ति में भी इजाफा होता है। इसका उदाहरण गांव अभोली में किसान गुरदीप सिंह सब्जियों के उत्पादन से पारंपरिक खेती के मुकाबले तीन गुणा आमदन खेती से लेता है। यह किसान के खेत में उत्पादिक आलू उत्तम क्वालिटी का भी होता है, क्योंकि यह किसान की मेहनत व लग्न का नतीजा है।

किचन में गैस लीक होगी तो मोबाइल पर आएगा अलर्ट, स्कूल के छात्र ने बनाई डिवाइस

किचन में मौजूद एलपीजी सिलेंडर से गैस लीक होगी तो मोबाइल में हर 3 सेकेंड पर अलर्ट मैसेज आएगा। यही नहीं, घर के बिजली उपकरणों के साथ लगा एमसीवी डाउन हो जाएगा। सबसे अहम बात, सिलेंडर में लगा रेगुलेटर भी तुरंत ऑफ हो जाएगा। यह तकनीक किसी आईआईटीयन ने नहीं, बल्कि स्कूल के छात्र ने डेवलप किया है।

डीएवी कोयलानगर में 8 वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र विशाल रंजन ने एलपीजी लीकेज डिटेक्टर होम ऑटोमेशन बनाया है। इस तकनीक को अब यूएसए में आयोजित इंटरनेशनल शोकेस में प्रस्तुत किया जाएगा।

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन की ओर से नई दिल्ली के मानेकशाव ऑडिटोरियम में मेक टुमारो फॉर फ्यूचर इनोवेशन जेनरेशन विषय पर नेशनल शोकेस का आयोजन किया गया था। विशाल रंजन का प्रोजेक्ट सहित कुल 10 प्रोजेक्ट का सिलेक्शन इंटरनेशनल शोकेस के लिए किया गया।

खत्म होगा गैस लीक से हादसे का डर

विशाल ने बताया- कभी सिलेंडर तो कभी पाइप से गैस लीक होती है। कई बार चूहे भी पाइप को कुतर देते हैं। ऐसे में हादसे का डर बना रहता है। यह डिवाइस गैस लीक होते ही सबसे पहले सिलेंडर में लगा रेगुलेटर बंद कर देता है। डिवाइस मेन स्विच के साथ लगा एमसीवी को डाउन कर देता है। इससे पूरे घर की बिजली चली जाती है और गैस बिजली के संपर्क में नहीं आ पाता।

इसके साथ ही डिवाइस आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर हर 3 सेकेंड में अलर्ट का नोटिफिकेशन भेजता है, ताकि आप तुरंत उसे ठीक कर दें। विशाल के पिता हरेंद्र कुमार सिंह सीएमपीएफ में कार्यरत हैं और मां आशा देवी गृहिणी हैं।

Tata Nexon ने रचा इतिहास, इस टेस्ट में 5 स्टार पाने वाली बनी पहली भारतीय कार

टाटा मोटर्स की कॉम्पैक्ट एसयूवी Tata Nexon देश की पहली ऐसी कार बन गई है, जिसे वैश्विक स्तर पर हुए कार क्रैश टेस्ट में पूरे अंक मिले हैं। NCAP (New Car Assesment Program) की ओर से इस मामले में शुक्रवार को एक लिस्ट जारी की गई,

जिसमें ग्लोबल कार सेफ्टी परफॉर्मेस में टाटा नेक्सन को 5 स्टार मिले। इस कार ने वयस्क की सुरक्षा के लिहाज से पूरे अंक हासिल किए, जबकि बच्चों की सुरक्षा में कार को तीन स्टार हासिल हुए हैं।

क्रैश टेस्ट में सबसे ज्यादा 17 में से 16.6 अंक मिले

कार को इस साल की शुरुआत में हुए सेफ्टी टेस्ट में चार अंक मिले थे। पिछले क्रैश टेस्ट की तुलना में इस बार टेस्ट की गई कार में बॉडी शेल और स्ट्रक्चर को समाने रखा गया है और कार में डुअल एयरबैग्स दिए गए हैं।

टाटा मोटर्स ने इस बार कई सारे सेफ्टी फीचर्स जैसे सीट बेल्ट रिमाइंडर, ड्राइवर और पैसेंजर के लिए कार के सभी वेरिएंट में कुछ सेफ्टी स्टैंडर्ड तक करना शामिल किया। इसके अलावा एंटीलॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) दिया गया है। ऐसे में नेक्सन ने इस क्रैश टेस्ट में 17 में से सबसे ज़्यादा 16.6 अंक प्राप्त किए है।

कार ने रचा इतिहास

यह भारतीय कार निर्माता कंपनियों के इतिहास में पहली बार हुआ है। यह तब हुआ है जब भारत में विदेशों की कंपनियों ने बाज़ार पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है। टाटा मोटर्स ने टाटा Nexon सबकॉम्पैक्ट SUV को पिछले साल सितंबर में लॉन्च किया था। कंपनी ने इसे मई 2018 में ऑटोमेटेड मैन्युअल ट्रांसमिशन के साथ लॉन्च किया।

जुड़ेंगे वैश्विक स्तर के सैफ्टी फीचर्स

Nexon की इस उपलब्धि पर डॉ. टाटा मोटर्स के प्रेसीडेंट (पैसेंजर व्हीकल बिजनेस यूनिट) मयंक प्रतीक ने कहा कि भारतीय कार निर्माता सेफ्टी फीचर में बढ़ोतरी कर रहे हैं। उन्होंने कार मे वैश्विक स्तर के मुताबिक सेफ्टी फीचर जोड़ने की बात कही।

महिंद्रा की ये कार देगी 140 KM का माइलेज, अगले साल होगी लॉन्च

महिंद्रा कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक कार KUV100 EV के प्रोडक्शन वर्जन को भारत में वर्ष 2019 के मध्य तक लॉन्च कर सकती है। इस एसयूवी में एक नई टेक्नोलॉजी वाली बैटरी का इस्तेमाल किया जाएगा, जो कम समय में चार्ज हो सकेगी।

साथ ही बैटरी बैकअप भी ज्यादा मिलेगा। कंपनी की ओर से दावा किया जा रहा है कि कार को एक चार्जिंग में 120-140 किमी. से ज्यादा दूरी तक चलाया जा सकेगा।

100 किमी. होगी अधिकतम स्पीड

महिंद्रा पहले से ही भारत में eVertio कार को भारत में बिक्री कर रही है। ऐसे में नई KUV100 EV भी इसी 72 वोल्टेज LFP (लीथियम आयरन फॉस्फोरस) प्लेटफार्म पर होगी। इस कार का इंजन 40.2‌bhp का पॉवर जनरेट करेगा।

कार की अधिकतम स्पीड 100 किमी. प्रति घंटा हो सकती है। महिंद्रा की रिसर्च एडं डेवल्पमेंट टीम कार की बैटरी को इस तरह से विकसित कर रही है। जिससे इसे 0 से 80 फीसदी तक चार्ज में एक घंटे से कम वक्त लगे। कंपनी की ओर से इस कार की डिजाइन के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया गया है।

इंटीरियर में मिलेंगे कमाल के फीचर

महिंद्रा की इस नई एसयूवी में नए तरह के एलॉय व्हील मिलेंगे। साथ ही नई हेडलाइट के साथ नए डिजाइन का बंपर होगा। इसके अलावा कार के इंटीरियर में टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, रिवर्स कैमरा के साथ पार्किंग सेंसर मिलेगा।

कंपनी की ओर से एक मोबाइल एप्लीकेशन ऑफर किया जाएगा, जिसमें लाइव रेंज, पार्किंग लोकेशन और अन्य जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।