भारत में कल लॉन्च होगा Xiaomi का सबसे सस्ता स्मार्टफोन, कीमत जान कर उड़ जायेंगे होश

Xiaomi कल यानी 19 मार्च को अपने नए स्मार्टफोन redmi go को भारत में लॉन्च कर सकता है। इस लॉन्चिंग इवेंट के लिए कंपनी की तरफ से मीडिया को इनवाइट किया गया है। इसमें ‘GO’ को हाइलाइट किया गया है और इसकी लॉन्चिंग दिल्ली में की जाएगी। फोन को फुल HD डिस्प्ले के साथ उतारा जा रहा है।

माना जा रहा है कि Xiaomi अपने नए स्मार्टफोन Redmi Go को बेहद ही कम कीमत में लॉन्च करने वाला है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फोन को मात्र 3,499 रुपये की कीमत में पेश किया जा सकता है। शाओमी का यह पहला Android Go स्मार्टफोन है। बता दें कि एंड्रॉयड ऑरियो का Android Go लाइट वर्जन माना जाता है।

इस स्मार्टफन में स्नैपड्रैगन 425 प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है और इसमें 1 जीबी रैम और 8 जीबी इंटरनल स्टोरेज दी जा सकती है। फोटोग्राफी की बात करें तो फोन के रियर में 8 मेगापिक्सल का कैमरा और फ्रंट में 5 मेगापिक्सल का कैमरा दिया जाएगा। गौरतलब है कि आज शाओमी ने चीन में Redmi 7 को 6000 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया है।

इसके 2GB रैम व 16GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत चीन में 699 युआन (करीब 6,000 रुपये), 3GB रैम व 32GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 799 युआन (करीब 8,000 रुपये) और 4GB रैम व 64GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 999 युआन (करीब 10,000 रुपये) रखी गयी है।

पावर के लिए स्मार्टफोन में 4,000mAh की बैटरी दी गई है।Redmi 7 में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 632 प्रोसेसर का इस्तेंमाल किया गया है और इसमें 6.26 इंच एचडी डिस्प्ले दिया गया है, जिसका आस्पेक्ट रेशियो 19:9 है। स्मार्टफोन ऐंड्रॉयड पाई ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करता है।

फोटोग्राफी के लिए फोन के फ्रंट में सेल्फी व वीडियो कॉलिंग के लिए 8 मेगापिक्सल का कैमरा और बैक में 12 मेगापिक्सल व 2 मेगापिक्सल का कैमरा सेटअप दिया गया है। इस फोन को ग्राहक ब्लैक, रेड और ब्लू कलर ऑप्शंस में खरीद सकते हैं।

न्यूजीलैंड के बाद अब नीदरलैंड में हुई गोलीबारी, इतने लोग हो गए घायल

नीदरलैंड के उट्रेक्ट (Utrecht) शहर में गोलीबारी की वारदात में 1 की मौत हो गई वहीं, कई लोगों के ज़ख्मी होने की खबर है. समाचार एजेंसी रॉयटर के अनुसार, नीदरलैंड के उट्रेक्ट शहर में गोलीबारी में कई लोग घायल हो गए हैं.

उट्रेक्ट पुलिस ने ट्वीट कर कहा कि यह ट्राम में शूटिंग की घटना है. उन्होंने बताया कि लोगों की मदद के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं. ज्यादा जानकारी का इंतजार किया जा रहा है.

स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, मौके पर आतंकवाद निरोधी पुलिस दस्ते भी मौजूद थे. उट्रेक्ट पुलिस के ट्विटर अकाउंट में कहा गया है ‘‘गोलीबारी की घटना उट्रेक्ट में 24 ओक्टोबरप्लीन में हुई… कई लोगों के घायल होने की खबर है.

आसपास के इलाकों को घेर लिया गया है और हम मामले की जांच कर रहे हैं.” इसमें कहा गया है ‘‘गोलीबारी की यह घटना एक ट्राम में हुई. मदद के लिए कई हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं.”

स्थानीय मीडिया ने नकाबपोश, सशस्त्र पुलिस और ट्राम के आसपास आपातकालीन वाहनों की तस्वीरें दिखाईं जो सड़क पर बने एक पुल के किनारे रुक गए थे. समाचार एजेंसी एएनपी ने ट्राम का संचालन करने वाली क्यूबज का हवाला देते हुए कहा कि इलाके में ट्राम सेवा को रोक दिया गया है.

ग्रेनेड के हमले को भी झेल सकती है ये SUV, मशीन गन से है लैस

देश की प्रमुख एसयूवी वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा के डिफेंस विंग ने एक बेहद ही शानदार बख्तरबंद एसयूवी ‘Marksman’ का निर्माण किया है। इस एसयूवी को दिल्ली के इंदिरा गांधरी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात सेंट्रल इंडस्ट्रीयल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) को सौंपा ​गया है।

ये एसयूवी सीआईएसएफ के क्वीक रिएक्शल टीम को दी गई है ताकि वो तत्काल किसी भी तरह के आपात स्थिति से निपट सकें। प्राप्त जानकारी के अनुसार CISF को कुल 6 मार्क्समैन एसयूवी दी गई है। इस एसयूवी को किसी भी तरह के आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसमें एक साथ कुल 6 जवान आसानी से बैठ सकते हैं।

ये एक बुलेटप्रूफ एसयूवी है और इसे ‘Level B6’ के स्तर से सशस्त्र किया गया है। इसमें एक कपोला मशीन गन को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा ये पांचों तरफ से किसी बुलेटप्रूफ बॉडी से ढका हुआ है। इस एसयूवी को भीतर से दो हिस्सों में बांटा गया है। आगे वाले केबिन में चालक और सहचालक को बैठने की व्यवस्था की गई है।

वहीं इसके पिछले हिस्से में दोनों साइड पर सीट लगाए गए है। जिस पर जवान आसानी से बैठ सकते हैं। इसके अलावा इसमें बैलिस्टिक स्टील इंटीरियर फ़्रेम लगाया गया है जो कि विंडो आदि की सुरक्षा को और भी पुख्ता करता है। महिंद्रा मार्क्समैन में फ्लोर ब्लास्ट प्रोटेक्शन भी दिया गया है। जिससे ये एसयूवी दो डीएम -51 जर्मन ऑर्डनेंस हैंड ग्रेनेड या उनके समकक्ष धमाकों को भी आसानी से झेल सकता है।

इसके पिछले हिस्से के दरवाजे को बख्तरबंद स्वींग डोर्स से लैस किया गया है। इसमें गनपोर्ट और व्यू ग्लॅास भी दिया गया है। इस एसयूवी में कंपनी ने दो अलग अलग इंजन आप्सन दिया है। एक में कंपनी ने 2.2 लीटर की क्षमता का m-hawk CRDe इंजन का प्रयोग किया है। जो कि एसयूवी को 120 bhp की पॉवर और 280 Nm का टॉर्क प्रदान करता है।

वहीं दूसरे वैरिएंट में कंपनी ने 2.6 लीटर की क्षमता का DI इंजन प्रयोग किया है। जो कि 115 bhp का पावर और 228 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है। दोनो ही वैरिएंट में 5 स्पीड गियरबॉक्स को शामिल किया गया है।

LG से लेकर ESPN जैसी बड़ी कंपनियों के पूरे नाम आपको जरूर जानने चाहिए

रोज की जिंदगी में हम बहुत सारी ऐसी चीजों का नाम लेते हैं जिसका मतलब शायद हम ठीक से जानते भी नहीं. कुछ इसी तरह बहुत से ऐसे प्रोडक्ट हैं जिन्हें हम बोलते तो है लेकिन शायद ही हम उनके पूरे नाम जानते हों.

मगर क्या कभी आपने ऐसा सोचा है कि इन शॉर्ट नेम का फुल नेम क्या हो सकता है ? तो चलिए आज आपको इन बड़ी कंपनियों के पूरे नाम बताते हैं जिन्हें आप दूसरों को भी बताकर इंप्रेशन जमा सकते हैं.

बड़ी कंपनियों के पूरे नाम

LG

कंपनी का असली नाम गोल्डस्टार था. साल 1995 में लकी केमिकल्स में विलय के बाद इसके नाम में ‘लकी’ भी जोड़ दिया गया और इस तरह से इसका नाम LG हो गया.

FIAT

यह नाम फैब्रिका इटैलिएना ऑटो मोबाइली टोरिनो का शॉर्ट नेम है, जिसका अर्थ है “ट्यूरिन में इतालवी ऑटोमोबाइल फैक्ट्री”.

IBM

साल 1911 में बनी IT की बड़ी कंपनी कम्प्यूटिंग-टेब्यूलेटिंग-रिकॉर्डिंग, जहां काम करने के लिए सभी आईटी फील्ड के लोग तरसते हैं. इस कंपनी नाम साल 1924 में इसका नाम बदलकर इंटरनेशनल बिजनेस मशीन यानी IBM कर दिया गया था.

Amul

अमूल के कई प्रोडक्ट हम सभी यूज करते हैं. इसकी शुरूआत गुजरात के आणंद से हुई थी. जिसे आज भारत की दूध राजधानी भी कहा जाता है. अमूल का पूरा नाम आणंद मिल्क यूनियन है.

HTC

यह ताइवान की एक कंपनी है, जिसमें HTC का अर्थ है हाई टेक कंप्यूटर कॉर्पोरेशन.

BMW

महंगी गाड़ियों में BMW का नाम आपने कई बार सुना होगा लेकिन इसका पूरा नाम जानते हैं ? इसका पूरा नाम Bayerische Motoren Werke (बेरिशे मोटोरेन वेर्क) है जिसके पहले तीन अक्षरों को लेकर कंपनी का नाम BMW रखा गया. जिसका हेडक्वाटर जर्मनी में है.

BPL

इस कंपनी के फाउंडर टीपीजी नांबियार ने बड़े पैमाने पर ब्रिटेन में काम शुरु किया था. इसलिए जब उन्होंने अपनी कंपनी बनाई, तो उसका नाम इसी के आधार पर रखने का फैसला किया. इस वजह से BPL जैसी बड़ी कंपनी का पूरा नाम ब्रिटिश फिजिकल लैबोटरीज रखा गया.

ITC

मूल रूप से इस कंपनी की स्थापना इंपीरियल टोबैको कंपनी के रूप में की गई थी, लेकिन साल 1970 में इसका नाम बदल दिया गया. ITC यानी इंडियन तंबाकू कंपनी.

ICICI Bank

इस बैंक की शुरुआत आईसीआईसीआई इंडियन फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के रूप में की गई थी और उसी तर्ज पर इसका नाम ICICI रखा गया है. आईसीआईसीआई बैंक यानी इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया.

HDFC Bank

साल 1994 में लोकप्रिय बैंक एचडीएफसी बैंक लिमिटेड को पंजीकृत किया गया था. जिसे इंडियन हाउसिंग कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन द्वारा प्रमोट किया था जिस वजह से इस कंपनी का पूरा नाम यही पड़ा और इसका शॉर्ट नेम एचडीएफसी रखा गया.

ESPN

खेलों के प्रसारण के लिए ईएसपीएन प्रमुख टीवी चैनल है. इसका पूरा नाम ‘इंटरटेनमेंट एंड स्पोर्ट्स प्रोग्रामिंग नेटवर्क’ है और इसी से ईएसपीएन नाम बना है. ये चैनल साल 1979 को शुरू हुआ था.

हर महीने 1 लाख तक हो सकती है इनकम, FOI नूडल्स दे रही है बिजनेस का मौका, 11 लाख का है निवेश

देश में फास्ट फूड का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। मेट्रो सिटी से लेकर छोटे शहरों तक फास्ट फूड की लोकप्रियता बढ़ी है। इसलिए फास्ट फूड से जुड़ा बिजनेस शुरू करना फायदेमंद साबित हो सकता है।

कई फास्ट फूड कंपनियां अपने बिजनेस विस्तार के लिए फ्रेंचाइजी ऑफर रही हैं। FOI नूडल्स भी ऐसी ही एक फास्ट फूड कंपनी है, जो फ्रेंचाइजी बढ़ाकर अपना बिजनेस बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अगर आप भी फास्ट फूड बिजनेस में उतरना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छा मौका है।

कंपनी के साथ जुड़कर आप मंथली 1 लाख रुपए तक इनकम कर सकते हैं। कंपनी की फ्रेंचाइजी के लिए आपको 11 लाख रुपए निवेश करने होंगे। कंपनी के मुताबिक, फ्रेंचाइजी ओनर को उसका पूरा निवेश 6 से 8 महीने में निकल जाएगा।

4.5 लाख रु. है फ्रेंचाइजी फीस

FOI नूडल्स के मार्केटिंग एंड फ्रेंचाइजी हेड विनीत सिंह ने बताया कि कंपनी देश भर में अपना विस्तार कर रही है। इसलिए कंपनी फ्रेंचाइजी ऑफर कर रही है। इसकी फ्रेंचाइजी फीस 4.50 लाख रुपए है। देश में कंपनी के 68 आउटलेट काम रहे हैं। हालांकि पूरे आउटलेट पर फ्रेंचाइजी ओनर को करीब 11 लाख रुपए निवेश करने होंगे।

आउटलेट पर 5.60 लाख करना होगा निवेश

फ्रेंचाइजी फीस के अलावा सेंटर फर्निशिंग पर आपको 3.60 लाख रुपए खर्च करने होंगे, जिसमें फ्लोरिंग, पेंटिंग, फर्नीचर आदि शामिल है। इसके अलावा इक्विपमेंट्स जैसे कम्प्यूटर, एसी, सर्विंग क्रॉकरी,

डीप फ्रीज (500 लीटर), CCTV और अन्य आइटम्स पर 1.90 लाख रुपए का खर्च आएगा। कंज्मयुएबल्स पर 5,000 रुपए और लाइसेंस कॉस्ट पर 5 हजार रुपए का खर्च होगा। कुल मिलाकर आउटलेट के इंटीरियर औऱ इक्विपमेंट पर 5.60 लाख रुपए का निवेश होगा।

300 से 500 वर्ग फुट चाहिए स्पेस

FOI नूडल्स की फ्रेंचाइजी खोलने के लिए आपके पास 300 से 500 वर्ग फुट की जगह होनी चाहिए। वहीं आउटलेट ऐसी जगह होना चाहिए जो कस्टमर्स को आसानी से नजर आए।

कंपनी ये देगी सुविधा

कंपनी आपको स्टाफ की यूनिफॉर्म और ऑनलाइन मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर प्रोवाइड कराएगी। वहीं मेन्यू में नूडल्स के अलावा चीजी स्नैक्स, शेक्स और जूस, पास्ता शामिल हैं। इसके अलावा नेचुरल फ्लेवर आइसक्रीम भी सर्व की जाती है।

ऐसे होगी कमाई

विनीत के मुताबिक, फ्रेंचाइजी ओनर को उसका पूरा निवेश 6 से 8 महीने में निकल जाएगा। एवरेज रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट 100 फीसदी है, जिसके हिसाब से 11 लाख रुपए सालाना बैठता है। यानी आपको मंथली करीब 1 लाख रुपए तक इनकम हो सकती है।

गली-गली घूम साड़ी बेचने वाला बन गया 50 करोड़ की कंपनी का मालिक, कभी 2.50 रु दिहाड़ी पर करता था काम

कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो गरीबी या किसी तरह की मजबूरी भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती है। यह कहावत कोलकाता के रहने वाले बिरेन कुमार बसाक पर बिल्‍कुल सटीक बैठती है।

चार दशक पहले बिसाक अपने कंधे पर साड़ियों का बंडल लादकर गली-गली घूम हरेक घर का दरवाजा खटखटाकर साड़ी बेचा करते थे, तो कभी एक बुनकर के यहां 2.50 रुपए दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम किया करते थे। लेकिन आज वो अपनी मेहनत के दम पर बिरेन बसाक एंड कंपनी के मालिक बन गए हैं, जिसका सालाना टर्नओवर 50 करोड़ रुपए है।

गरीबी में गुजरा बचपन

बिरेन कुमार बसाक ने मनीभास्कर को अपनी संघर्ष की कहानी बताई। उन्होंने बताया कि उनका बचपन काफी गरीबी में गुजारा। बुनकर के परिवार में जन्मे बसाक के पिता के पास उतने पैसे नहीं थे कि परिवार का भरण-पोषण हो सके। उनके परिवार के पास एक एकड़ जमीन थी जिस पर अनाज उपजाकर कुछ खाने को मिल जाता था। पैसे की वजह से वो ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए।

2.50 रुपए दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का किया काम

उन्होंने बताया, कोलकाता के नादिया जिले के फुलिया में उन्हें एक बुनकर के यहां 2.50 रुपए दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम मिला। इस कंपनी में उन्होंने करीब 8 साल काम किए। इसके बाद उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने की ठानी और इसके लिए अपना घर गिरवी रखकर 10 हजार रुपए का लोन उठाया।

अपने बड़े भाई के साथ मिलकर वो बुनकर के यहां से साड़ी खरीद बेचने के लिए कोलकाता जाते थे। कुछ सालों तक यही सिलसिला चलता रहा। इस बिजनेस में कमाई होने लगी और दोनों भाई मिलकर करीब 50 हजार रुपए हरेक महीने कमाने लगे थे।

उन्होंने 1987 में साड़ी की अपनी पहली दुकान खोली। उस वक्त उनके पास सिर्फ 8 लोग काम करते थे। धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ता गया। आज वो हर महीने हाथ से बनी 16 हजार से ज्यादा साड़ियां देश भर में बेच रहे हैं। यहीं नहीं, अब उनके यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 24 हो गई और वो करीब 5 हजार बुनकरों के साथ काम कर रहे हैं।

भाई से अलग होकर शुरू किया बिजनेस

कमाई बढ़ने के साथ बसाक और उनके भाई ने कोलकाता में एक दुकान खरीदी और साड़ियां बेचने का काम शुरू किया। अगले एक साल में उनकी दुकान का टर्नओवर 1 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। लेकिन जल्दी ही वो अपने भाई से अलग होकर गांव लौट गए और यहीं पर साड़ी बेचने का बिजनेस शुरू किया।

फिर उन्होंने बिरेन बसाक एंड कंपनी की नींव रखी। बुनकरों से साड़ियां खरीद होलसेल रेट में साड़ी डीलर को बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ता गया और अब उनकी कंपनी का टर्नओवर 50 करोड़ रुपए हो गया है।

रूसी विज्ञानिकों ने 4000 फीट की गहराई तक खोदा और फिर उन्हें मिल गया नर्क का द्वार

रूस में एक ऐसी जगह है जहां दुनिया का सबसे गहरा गड्ढा (बोरहोल) है। कोला सुपरडीप बोरहोल नाम के इस होल को 1970 में रूस के वैज्ञानिकों ने खोदना शुरू किया था। अमेरिकी वैज्ञानिकों को चुनौती देने के लिए वे ज्यादा से ज्यादा गहरा खोदना चाहते थे।

लगातार 19 साल की खुदाई के बाद साइंटिस्ट 12.24 किमी गहराई (40,230 फीट) तक पहुंच चुके थे। ये इतनी गहराई है, जिसमें 240 फीट के 167 कुतुब मीनार समा जाएं। इस गहराई पर जाकर साइंटिस्ट्स को खुदाई रोकनी पड़ी थी।

इस वजह से रोक दी थी खुदाई

इस खुदाई के लिए Uralmash नामक भीमकाय ड्रिलिंग मशीन बनाई गई थी, जो किसी भी परिस्थित में ड्रिल करने में सक्षम थी। मल्टी लेयर ड्रिलिंग सिस्टम वाली इस मशीन की टारगेट डेप्थ 15000 मीटर (49000 फीट) थी।

सालों की कड़ी मेहनत के बाद जब रूसी वैज्ञानिक 262 मीटर (40,230 फीट) की गहराई पर पहुंचे, तब मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। उस वक्त जमीन का तापमान 180 डिग्री सेलसियस से भी ज्यादा मापा गया।

इतना ही नहीं तापमान तेजी से बढ़ने भी लगा था। इसे देख तत्काल काम रोक दिया गया। तब साइंटिस्ट्स ने इस होल का नाम Door to Hell (नर्क का दरवाजा) रख दिया। इसके बाद सोवियत संघ के विघटन के बाद इसकी खुदाई दोबारा शुरू नहीं की गई।

सतह से 0.2% ही हुई खुदाई

जमीन में 12 किलोमीटर की खुदाई करना अपने आप में के किसी अजूबे से कम नहीं है पर आपको जानकर हैरानी होगी कि सतह से लेकर धरती के कोर तक जितनी गहराई है ये उसका 0.2 पर्सेंट भी नहीं है। साइंटिसट के मुताबिक धरती का तल 6371 किलोमीटर नीचे है, जहां पहुंचने का सोचा भी नहीं जा सकता।

शादी से 3 महीने पहले डूब गया था बिजनेस, लेकिन चाय ने बदल दी किस्मत और खड़ा कर दिया स्टार्टअप

आप क्या करेंगे अगर आपको अपनी शादी से तीन महीने पहले पता चले कि आपका बिजनेस या स्टार्टअप डूब रहा है? शादी होने से जल्द ही आपकी जिम्मेदारी बढ़ने वाली है। ऐसे हाल में हर कोई आपको यही सलाह देगा कि नौकरी करो और खर्च कम करो तो चीजें बेहतर होंगी।

‘चायठेला’ ब्रांड को को-ओनर पंकज जज के साथ ऐसा ही हुआ। पंकज की शादी से एक महीने पहले उनके को-फाउंडर ने हाथ खड़े कर दिए और पुराने वेंचर से हट गए। उनका स्टार्टअप लगभग बंद होने की कगार पर था। पंकज के लिए नौकरी करना ऑप्शन नहीं था।

उन्होंने यह सभी अपनी होने वाली वाइफ को बताया। उनकी वाइफ को पता था कि सब खत्म होने वाला है लेकिन इसके बावजूद वो उनके साथ खड़ी रही। लेकिन फिर उन्होंने अपने लिए नए रास्ते निकाले..

चाय बेचने का आया आइडिया

पंकज ने फिर से बिजनेस शुरू करने के बारे में सोचा और वह अपने को-फाउंडर नितिन चौधरी से फिर से मिले। उन दोनों ने चाय के बिजनेस शुरू करने के बारे में प्लान किया। पंकज ने अपने पार्टनर को कहा कि शादी के बाद यही बिजनेस शुरू करेंगे। अपने पिछले स्टार्टअप के बाद उन्होंने प्लान बी पर काम किया। करीब 2 महीने बाद वह चाय का बिजनेस शुरू कर पाए।

ऐसे शुरूआत हुई चाय ठेले की..

इंडिया में चाय को नेशनल ड्रिंक की तरह माना जाता है। इंडिया में कॉफी से ज्यादा लोग चाय पीते हैं। कॉफी के बिजनेस में कैफे कॉफी डे, बरिस्ता और स्टारबक्स जैसे बड़े प्लेयर पहले ही थे, तो उन्होंने चाय का ही बिजनेस शुरू करने का प्लान किया। चाय ठेला की आउटलेट चेन है जो नोएडा के आसपास चाय का ठेला लगाते हैं। वह फ्रेश बनी हुई चाय सर्व करते हैं। वह डिमांड पर चाय बनाते हैं और उसे स्टोर नहीं करते।

बनाया कियॉस्क बेस्ट मॉडल

चाय ठेला कियॉस्क बेस्ड बिजनेस मॉडल है। वह अपने कियॉस्क आईटी पार्क, प्राइम मार्केट और कॉलेज के आसपास ज्यादा लगाते हैं। उन्होंने यह बिजनेस 2014 में शुरू किया था। अब उनके 6 से अधिक आउटलेट और 32 से अधिक कर्मचारी है। वह रोजाना 500 से 600 कप चाय बनाते हैं। वह अपने आउटलेट की संख्या 500 तक पहुंचाना चाहते हैं।

कैपिटल थी शुरुआती समस्या

पंकज ने कहा कि किसी भी कारोबार को शुरू करने में सबसे ज्यादा दिक्कत कैपिटल की होती है। नितिन उनके को-फाउंडर ने पैसा अपने भाई से लिया और पंकज ने अपने दोस्त से स्टार्टअप के लिए पैसा लिया। उन्होंने 10 करोड़ रुपए की फंडिंग शुरूआत में सामा कैपिटल से कराई थी। अब उनके चाय के बिजनेस में चाय प्वाइंट, चायोस उनके बड़े कंपिटिटर हैं।

33,000 करोड़ का है चाय मार्केट

अभी इंडिया में चाय की मार्केट करीब 33,000 करोड़ रुपए की है। यह सालाना 15 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इंडिया में 90 फीसदी से अधिक रिटेल चाय आउटलेट असंगठित है। बीते सालों में बिजी वर्किंग एरिया में चाय आउटलेट खुलने लगे हैं।

शादी के बाद आईं थोड़ी दिक्कतें

पंकज के इस नए बिजनेस का असर शादी पर भी पड़ा क्योंकि वह कारोबार के शुरूआती समय में अपनी वाइफ को समय नहीं दे पाए जबकि उनकी नई-नई शादी हुई थी।

इडली-डोसे के बिजनेस से मजदूर के बेटे ने खड़ी की 182 करोड़ की कंपनी, अब वड़ा बनाकर गेम बदलने की तैयारी

गांव में चाय की बागान में काम करने वाले एक मजदूर ने जब अपने बेटे से भी कुली का काम करने को कहा तो बेटे के मन में मजदूर बनने का डर बैठ गया। उसी डर से ने उसने अपनी किस्मत खुद बनाने की सोची और आज वह 182 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी का मालिक है।

हम बात कर रहे हैं आईडी फ्रेश फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक पीसी मुस्तफा की। मुस्तफा ने इडली और डोसा के लिए बैटर बनाकर यह मुकाम हासिल किया। उनकी कंपनी में बना पैकेज्ड फूड विदेशों में भी पॉपुलर है।

कंपनी ने हाल ही में अपना नया प्रोडक्ट वड़ा मेकर मार्केट में उतारा है, जो पॉपुलर हो गया है। इसी प्रोडक्ट के भरोसे कंपनी ने इस साल रेवेन्यू 286 करोड़ रुपए करने का लक्ष्‍य रखा है।

कंपनी रेडी टू कुक और रेडी टू यूज खाने सेल करती है। कंपनी ने वड़ा पाव मेकर मार्केट में उतारा है। इसके लिए खास तरह का पैकेट तैयार किया गया है, जिसे दबाने पर आसानी से वड़ा का शेप बन जाता है, जिसे बस फ्राई करना होता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कंपनी का कहना है कि वड़ा मेकर की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। अभी यह सिर्फ 8500 स्टोर पर मिल रहा है, जिसे कंपनी के नेटवर्क में शामिल सभी 8500 स्टोर पर सेल करने की प्लानिंग है। कंपनी ने इसके पेटेंट भी फाइल किया है। कंपनी का मानना है कि इस प्रोडक्ट के जरिए बैटर इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम हासिल किया जा सकता है।

मजदूरी करने से लगा डर

पीसी मुस्तफा केरल के एक छोटे से गांव में पले बढ़े हैं। उनके पिता अहमद कॉफी के बागान में मजदूरी करते थे। वह मुस्तफा को भी इसी बागान के काम में लगाना चाहते थे। मुस्तफा किसी भी कीमत पर मजदूर नहीं बनना चाहते थे।

बस यहीं से उन्हें लगा कि पढ़ लिखकर कुछ करना चाहिए। 12वी के बाद मुस्तफा ने इंजीनियरिंग का एंट्रेंस एग्जाम पास कर लिया। इंजीनियरिंग करने के बाद उनकी बंगलुरू में जॉब लगी। इसके बाद वह दुबई चले गए और सिटी बैंक ज्वॉइन किया। बाद में वापस आकर एमबीए करना शुरू किया।

आया एक आइडिया

मुस्तफा एक दिन किराना के दुकान पर गए थे, तो उन्होंने देखा कि कुछ महिलाएं इडली और डोसा बनाने के लिए आटे का घोल खरीद रही थीं। यहीं से उनके दिमाग में पैकेज्ड फूड का बिजनेस करने काआइडिया आया।

25 हजार से शुरू किया बिजनेस

शुरू में मुस्तफा ने 25 हजार रुपए लगाकर बिना केमिकल के आटे का घोल बनाकर बेचना शुरू किया। मुस्तफा ने आटे के घोल को पैक करके सैंपल के तौर पर खुद ही डिस्ट्रीब्यूट करना शुरू किया। 2008 में मुस्तफा ने किराए पर जगह लेकर बेस्ट फूड्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी की शुरुआत की। बाद में कंपनी का नाम बदलकर आईडी स्पेशल फूड्स प्राइवेट लिमिटेड किया।

साल 2014 तक उनकी कंपनी में कर्मचारियों की संख्‍या 500 से ज्यादा हो गई। कंपनी आगे बढ़ी तो फाइनेंसर भी मिल गए। अब उनकी कंपनी में 1000 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। उनका कारोबार बंगलुरू, मैसूर, मंगलौर, चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद, पुणे से लेकर शारजाह तक फैला हुआ है। वित्त वर्ष 2017-18 में कंपनी का टर्नओवर 182 करोड़ रुपए रहा है। 2020 तक इसे 400 करोड़ रुपए तक ले जाने का प्लान है।

सुलझ गई New Zealand में हमले की गुत्‍थी ,11 साल की इस लड़की की हत्या का बदला लेने के लिए ब्रेंटन ने किया था मस्जिद में हमला

हमलावर ब्रेंटन टैरंट के पत्र और वीडियो से साफ हो गया है कि आखिर उसने बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की हत्या क्यों की? 11 साल की बच्ची की मौत से उसका गुस्सा भड़क गया था। अपने पत्र में ब्रेंटन ने स्टॉकहोम में एक उज्बेक व्यक्ति द्वारा भीड़ पर ट्रक चढ़ाने की घटना का जिक्र किया है, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी।

साल 2017 में हुई उस घटना के दौरान वह पश्चिम यूरोप में घूम रहा था। इस हमले में 11 साल की एक स्वीडिश बच्ची की मौत ने उसे अंदर से झकझोर दिया था।

ट्रक चढ़ाने वाले हमलावर का नाम Rakhmat Akilov था, जो एक इस्लामिक आतंकवादी संगठन का था। बदला लेने के लिए ब्रेंटन टैरंट ने मस्जिद में मुसलमानों पर हमला किया।

किसी संगठन का सदस्य नहीं, कौन बना प्रेरणा?

करीब तीन महीने पहले उसने क्राइस्टचर्च को टारगेट करने की योजना बनाई। उसने दावा किया है कि वह किसी संगठन का सदस्य नहीं है। हालांकि, उसने यह भी लिखा है कि उसने कई अति राष्ट्रवादी संगठनों को दान दिया है। उसने एक ऐंटी-इमिग्रेशन ग्रुप से संपर्क भी किया था।

कई मकसद तय किए थे

गनमैन ने हमले का कई मकसद तय किया था। उसने उम्मीद जताई थी कि इसके बाद इमिग्रेशन घटेगा। वैसे तो उसने दावा किया कि वह नाजी नहीं है, लेकिन लाइव विडियो में उसकी राइफल पर 14 नंबर लिखा दिखा। इसे हिटलर के “14 वर्ड्‌स” से जोड़कर देखा जा रहा है। हमले के दौरान वह खुश दिख रहा था और शुरुआत में ही उसने कहा था, “आओ, पार्टी शुरू करते हैं।”