कभी सोचा है कि Mi Phones के साथ क्यों नहीं मिलता ईयरफोन, यह है वजह

क्या आपके पास भी Mi का फ़ोन है? और आपने कभी सोचा है की Xiaomi अपने किसी भी फोन के साथ ईयरफोन क्यों नहीं देता? तो आइये जानते हैं क्या है इसके पीछे की सचाई..आज के समय में हर किसी के पास स्मार्टफोन होता है. साथ में लोग कम कीमत में अच्छा स्मार्टफोन खरीदना पसंद करते हैं.

हालांकि बाजार में कई ऐसे बड़े ब्रांड हैं जो कम कीमत पर मोबाइल बेचते हैं. लेकिन जब बात ग्राहकों के भरोसे की आती है तो उन्हें Mi Phone सबसे बेस्ट ऑप्शन में से एक लगता है. अपने बेहतरीन फीचर्स की वजह से ये स्मार्टफोन सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.

लेकिन इस फोन के साथ कभी भी ईयरफोन क्यों नहीं मिलता? आज हम आपको इससे जानकारी देंगे. दरअसल जब भी हम Mi का स्मार्टफोन खरीदते हैं, तो हमें उसके साथ कभी भी ईयरफोन नहीं मिलता. हालांकि हम कभी इस बात पर ज्यादा ध्यान भी नहीं देते.

लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Mi कभी भी चार्जर और हैंडसेट के अलावा कुछ भी नहीं देती है. Mi अपने स्मार्टफोन अपने बॉक्स में से ईयरफोन ना रखकर अलग से बेचता है. जिस वजह से हैंडसेट की कीमत औरों के मुकाबले थोड़ी कम हो जाती है.

Mi कंपनी अच्छे से जानती है कि ग्राहक ईयरफोन कहीं से भी कीमत में खरीद सकते हैं. जिसका बखूबी फायदा उठाकर Mi कंपनी अपने ईयरफोन 700 से 2000 रुपए की कीमत में अलग से बेचती है. इस तरह हम ये कह सकते हैं कि Mi कंपनी जो कीमत अपने स्मार्टफोन में कम कर देती है. वही पैसे वो अपने ईयरफोन को बेचकर आसानी से कमा भी लेती है.

कोटा के किसान ने विकसित की आम की नई प्रजाति

फलों के राजा कहे जाने वाले आम का नाता हमारी सभ्यता से शुरू से ही रहा है। अमूमन गर्मी के सीजन में ही आम का उत्पादन होता है। लेकिन अब दिन-प्रतिदिन विज्ञान के बढ़ते कदम की वजह से आम का उत्पादन अन्य सीजनों में भी होने लगा है।

भारत में इस समय 1500 से अधिक आम की किस्में पाई जाती हैं। सभी किस्म अपने आप में अच्छा खासा महत्व रखती है। ऐसी ही एक किस्म खोज निकाली है कोटा के एक किसान ने। इन्होंने ऐसी प्रजाति विकसित की है जिसका साल के तीनों सीजन में उत्पादन होता है। यानी पूरे साल भर ये प्रजाति फल देती है, इसीलिए इसका नाम रखा गया है ‘सदाबहार।’

कोटा में बागवानी करने वाले गिरधरपुरा गांव के किसान किशन सुमन की बाग से उत्पादित होने वाला सदाबहार आम की कुछ खूबी अल्फांसो आम की तरह हैं। अल्फांसो भारत का सब से खास किस्म का आम है। इसे आम का सरताज कहा जाता है। बस इसी सरताज से मिलती जुलती चीजों जैसा सदाबहार आम है। आम की ये प्रजाति अपने आप में अलग तरीके की है।

किशन सुमन ने 1995 में गुलाब, मोगरा और मयूरपंखी (थूजा) की खेती शुरू की और तीन वर्षों तक फूलों की खेती करते रहे। इसी दौरान उन्होंने गुलाब के ऐसी किस्म को विकसित किया जिसमें एक ही पौधे मं सात रंग के फूल लगते हैं। उनके द्वारा उत्पादित इस किस्म का उन्हें अच्छा रिटर्न मिला। इसके बाद उन्होंने अन्य फसलों पर भी काम करना शुरू किया।

सुमन बताते हैं कि “मैंने सोचा है कि अगर मैं गुलाब की किस्म में परिवर्तन कर सकता हूं तो फिर आमों के साथ क्यों नहीं। मैंने विभिन्न किस्मों के आमों को इकठ‍्ठा किया और उन्हें पोषित किया। जब पौधे पर्याप्त बड़े हो गए, तो मैंने उन्हें रूटस्टॉक पर तैयार किया। इसके बाद फिर काफी हद तक परिवर्तन आया।

गुलाब किशन को कामयाबी 2000 में मिलती दिखी। उन्होंने अपने बगीचे में एक आम के पेड़ की पहचान की, जो तीन मौसमों में खिल गया था। जनवरी-फरवरी, जून-जुलाई और सितंबर-अक्टूबर। उन्होंने पांच पेड़ों को एक प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया।

इस पेड़ की अच्छी विकास आदत थी और इसमें गहरे हरे पत्ते थे। इन पेड़ों की एक खास बात यह भी थी कि इन पौधों में किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं थी। धीरे-धीरे वे अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध होते गए। हनी बी नेटवर्क के एक स्वयंसेवक सुंदरम वर्मा ने सुमन के नवाचार के बारे में जमीनी तकनीकी नवाचारियों और उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान के लिए संस्थागत अंतरिक्ष, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) को सूचित किया।

इसके बाद एनआईएफ ने सदाबहार पौधे बेचने या उपहार देने के लिए कहा, मैंने उन्हें पौधे दिए। एनआईएफ ने मुझे ये सलाह दी कि अपनी किस्म को सत्यापित कराएं। वे कहते हैं कि उनकी सलाह मानते हुए अपनी किस्म को प्रमाणित करने के लिए मैंने 11 वर्षों तक देश के विभिन्न स्थानों पर जाकर अपनी किस्म के पौधे लगाए। वह कहते है कि एनआईएफ को “मैंने 2012 में 20 पौधों का उपहार दिया था। अब पेड़ फल दे रहा है और जब फल पकता है, त्वचा नारंगी रंग प्राप्त करती है, जबकि अंदरूनी फल गेरुआ रंग का होता है।

खास प्रकार की किस्म को विकसित करने वाले किशन सुमन को अब तक कई अवार्ड भी दिए जा चुके हैं। मार्च 2017 में सुमन को 9वीं द्विवार्षिक ग्रासरूट इनोवेशन और राष्ट्रपति भवन में आयोजित उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान के दौरान फार्म इनोवेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

इनके फलों की तारीफ करते हुए हरदेव चौधरी कहते हैं कि सदाबाहर पूरे वर्ष खिलते हैं। फल का स्वाद मीठा होता है और एक बौने विविधता के रूप में विकसित होते हैं। वे कहते हैं कि आम की इस नस्ल को किचन ग्रार्डन में बर्तन में रखकर कुछ समय बाद उत्पादित किया जा सकता है।

वे कहते हैं कि मौजूदा किस्मों की स्थिति को देखते हुए इसकी क्षमता बड़ी है। ऑक्सीजन की अत्याधिक उपलब्धता होने के कारण ये उत्पादकों के लिए भी बेहद फायदेमंद हो सकता है। वे कहते हैं कि ये किस्म देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का एकमात्र हाईब्रिड आम है जो कि साल में तीन बार फल देता है।

राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन की शान बने है सदाबहार

किशन सुमन द्वारा उत्पादित की जा रही आम की ये किस्म अब राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन की शान बन चुके हैं। सदाबार आम किस्म के यहां पर चार पौधे लगाए गए है। किशन के अनुसार उनके चार बीघा खेत में आम के 22 मदर प्लांट्स और 300 ग्राफ्टेड प्लांट्स लगे हुए हैं।

सदाबहार नाम की आम की यह किस्म रोग प्रतिरोधी है। बौनी किस्म होने से इसे गमले में भी लगाया जा सकता है। इसमें वर्ष भर नियमित रूप से फल आते हैं और ये सघन रोपण के लिए भी उपयुक्त है। जब से राष्ट्रपति भवन में सुमन के आमों को लगाया गया था, तब से उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई है।

सुमन ने दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में नर्सरी और व्यक्तियों को 800 रुपये से अधिक, 800 रुपये के लिए उपलब्ध कराया है। सुमन ने कहा, “मुझे नाइजीरिया, पाकिस्तान, कुवैत, इराक, यूके और संयुक्त राज्य अमेरिका से भी लोग कॉल करके सदाबहार के बारे में पूछ रहे हैं।

सुमन के अनुसार एक पौधा लगभग 5 साल बाद फल देता है। मेरे लिए एक अच्छी बात यह है कि उत्पादक लंबे समय तक का इंतजार करते हैं लेकिन वे शिकायत नहीं करते हैं। ये सदाबार अन्य किस्मों से बहुत अलग है।

सेब की खेती से किसान ऐसे कमाते है सलाना 75 लाख रुपए

सेब की खेती भारत के कई प्रांतों में होती है। कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सेब की कई नस्लें पैदा की जाती हैं। इन प्रदेशों में उन्नत किस्म के सेब की खेती होती है। पर अगर अनुकूल वातावरण मिले तो यह सेब कहीं भी पैदा हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश में भी कई स्थानों पर किसान सेब पैदा करते हैं। तस्वीरों में देखें कश्मीर में सेब की खेती।

पूरी दुनिया मे साल 2013 में आठ करोड़ टन सेब पैदा हुआ था। इसमें से भी आधा तो केवल चीन में पैदा किया गया। अकेले अमरीका मे सेब का कारोबार क़रीब चार अरब डॉलर का माना जाता है।

सेब की विश्व में 7500 से अधिक नस्लें पाई जाती हैं। मतलब साफ है अगर एक दिन में एक सेब का स्वाद आप चखेंगे तो तकरीबन 25 साल खर्च हो जाएंगे। सेब में औसतन 10 बीज पाए जाते हैं।

आपको एक और जानकारी बताता हूं कि सेब का एक पेड़ चार-पांच साल की उम्र में फल देना शुरू कर देता है और लगभग सौ साल तक फल देता रहता है।

हिमाचल प्रदेश सेब की खेती के लिए पूरे विश्व में मशहूर है। यहां एक ऐसा गांव है जहां के एक-एक किसान सेब खेती से करीब 75 लाख रुपए सालाना कमाते हैं। सेब की खेती ने इस गांव को इतना विकसित कर दिया है कि यह कहा तो गांव जाता है पर यहां पर आलीशान मकानों की कमी नहीं है। यहां हर साल करीब 150 करोड़ रुपए का सेब पैदा होता है। अब आप को हम इसका नाम बताते हैं इसका नाम है मड़ावग गांव।

यह हैं जर्मनी से जुड़े 10 अजीबो गरीब रोचक तथ्य, जो आप नहीं जानते होंगे

जर्मनी विश्व के ताकतवर देशों में से एक है। जिसने विश्वयुद्ध के बाद कंगाल होने पर भी हार नहीं मानी और आज वह सफलता प्राप्त कर ली है जिस पर विश्वास करना भी मुमकिन नहीं है। आइए जानते हैं जर्मनी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य…

जर्मनी की जनसँख्या

जर्मनी की जनसंख्या लगभग भारत के देश आंध्र प्रदेश के बराबर ही है। जर्मनी की जनसंख्या मात्र 8 करोड़ है।

इस देश की ताकत के पीछे ताकत के देश के नागरिकों की देशभक्ति और मेहनत है जो मुश्किलों में भी मुस्कुराना जानते हैं.

कईं राज्यों से मिलकर बना है यह देश

यहां की राजधानी एक राज्य नहीं बल्कि कई राज्य रह चुके हैं जिनमें Aachen , Regensburg , Frankfun-am-main , Bonn and berlin शामिल है।

जेल से फरार होने पर नही मिलती सज़ा

जर्मनी में माना जाता है कि लोगों को अपनी आजादी से जीने का हक है इसलिए जेल से भागने पर भी उन्हें सजा नहीं दी जाती।

अटपटे देश के चटपटे लोग

जर्मनी के लोगों का अंदाज बड़ा अटपटा है वहां के लोग फोन पर बात शुरू करने पर ‘हेलो’ नहीं बल्कि अपना नाम लेकर बातचीत शुरू करते हैं।

नही है स्पीड लिमिट

जर्मनी के 70 परसेंट हाईवे पर वाहन की कोई स्पीड लिमिट नहीं है लेकिन वहां के वाहनों का रोड पर ही इंधन खत्म हो जाना गैरकानूनी माना जाता है।

किताबें छपने में है अव्वल

जर्मनी की पहली पत्रिका सन 1963 में शुरू की गई थी जहां पर अब तक दुनिया की सबसे अधिक किताबें छापी जा चुकी हैं।साल 1989 से साल 2009 के बीच Germany में 2 हज़ार से ज्यादा स्कूल बंद करने पड़े थे क्योंकि उनमें बच्चों की कमी थी।

लगातार कम हो रही है जनसंख्या

जर्मनी और जापान की जन्म दर संख्या सबसे कम है जर्मनी में पिछले 10 साल में दो लाख जनसंख्या कम हो चुकी है।

जर्मनी का बजट

जर्मनी का रक्षा बजट मात्र इतना है कि अमेरिका में एक कुत्ते को खाना खिलाया जा सके। यानी यह देश पालतू जानवरों पर इंसानों से अधिक खर्व्ह करता है.

कर्ज़ से उबरा देश

पहले विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी बिल्कुल कंगाल हो चुका था उन पर लगभग कितना कर्जा था कि उसकी तुलना 96000 टन सोने की कीमत के बराबर की गई थी।

जन्मदिवस को मानते हैं बुरा

जर्मनी में कभी एडवांस हैप्पी बर्थडे नहीं कहा जाता क्योंकि वह उसे अपना बैड लक मानते हैं।

दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले कारे जर्मनी में बनाई जाती है। जिनमें BMW और AUDi शामिल है।

Flipkart पर 1 रुपये में बहुत कुछ खरीदने का मौका, जानें कैसे उठाएं ऑफर का लाभ

Flipkart पर 1 रुपये में बहुत कुछ खरीदने का मौका..कुछ समय पहले ही WallMart के साथ समझौता के बाद से Flipkart ने कई शानदार और आकर्षक डील्स उपलब्ध कराई हैं। इस बार Flipkart ने घरेलू सामान को 1 रुपये में देने की पहल की है।

जी हां, ग्राहक अपने घर का सामान 1 रुपये में खरीद सकते हैं। यहां जानें कैसेFlipkart पर 1 रुपये में सेल के तहत ग्राहक घर का सामान खरीद सकते हैं। इस दौरान ग्राहक आटा, शैंपू, दाल-तेल आदि चीजें को बेहद कम कीमत में खरीद पाएंगे।

Flipkart पर ग्रॉसरी स्टोर SuperMart के नाम से दर्ज है। Flipkart पर आपको Today’s Steal Deals नजर आएगा। इसके तहत रोजाना ग्राहकों को तीन घर के सामान को एक रुपये में खरीद पाएंगे। हालांकि, इसके लिए एक शर्त है।

क्या है शर्त?

इस ऑफर का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को एक शर्त पूरी करनी होगी। इसके तहत ग्राहकों को 1 रुपये में तीन चीजें खरीदने के लिए कम से कम 599 रुपये की खरीदारी करनी होगी। ऐसा करने के बाद ग्राहक 1 रुपये में एक किलो दाल, 1 किलो चीनी और 1 लीटर सरसों तेल खरीद पाएंगे। इस सेल के दौरान अगर ग्राहक एक्सिस बैंक का कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें कैशबैक ऑफर भी दिया जाएगा।

जानें क्या है कैशबैक ऑफर?

Flipkart की साईट या ऐप से एक्सिस बैंक के क्रेडिट या डेबिट कार्ड के जरिए खरीदारी करने पर ग्राहकों को 15 फीसद की छूट दी जाएगी। इस कैशबैक ऑफर का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को न्यूनतम 1,500 रुपये की खरीदारी करनी होगी।

2019 में बंद हो सकती हैं ये 6 पॉपुलर कारें, जानें कारण

आज हम आपके लिए अपनी खबर में ऐसी गाड़ियां लेकर आए हैं, जो 2019 के दौरान बंद की जा सकती हैं। हमने इन कारों को आगामी बीएस-6 उत्सर्जन मानक, क्रैश टेस्ट मानदंडों और कम बिक्री के चलते चुना है।

Maruti Suzuki Gipsy

  • कीमत – 5.70 लाख रुपये से 6.40 लाख रुपये (एक्स शोरूम दिल्ली)
  • औसत मासिक बिक्री – 500 से कम यूनिट

मारुति सुजुकी जिप्सी ने 1980 के दशक में भारतीय कार बाजार में कदम रखा था और अब माना जा रहा है कि 2019 में कंपनी इसे बंद कर देगी। इसे बंद करने की मुख्य वजह इस साल से लागू होने वाले भारत न्यू व्हीकल सेफ्टी एसेस्मेंट प्रोग्राम (BNVSAP) माना जा रहा है।

Maruti Suzuki Omni

  • कीमत – 2.76 लाख रुपये
  • औसतन मासिक बिक्री – 6000 से 8000 यूनिट्स

मारुति ओम्नी भी जिप्सी की तरह देश में लंबे समय से बिकने वाली मारुति कारों में से एक है। मौजूदा ओमनी ना तो क्रैश टेस्ट को पूरा कर सकेगी और ना ही इसका पुराना 796cc कार्बोरेटेड इंजन कड़े BS-6 उत्सर्जन मानदंड़ों को पूरा करने में सक्षम है, ऐसे में कंपनी ओमनी को बंद कर सकती है।

Mahindra Xylo

  • कीमत – 9.17 लाख रुपये से 12 लाख रुपये (एक्स शोरूम दिल्ली)
  • औसतन मासिक बिक्री – 500 यूनिट्स

साल 2009 में लॉन्च हुई महिंद्रा जायलो को भी कंपनी इस साल बंद कर सकती है। बता दें, 2009 के बाद कंपनी ने इसका अभी तक नया जनरेशन मॉडल लॉन्च नहीं किया है। महिंद्रा जायलो को पहली जनरेशन स्कॉर्पियो के प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है, जो आगामी क्रैश टेस्ट को पास करने में असमर्थ है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कंपनी जायलो को भारत में बंद कर देगी

Tata Nano

  • कीमत – 2.36 लाख रुपए से 3.34 लाख रुपये
  • औसतन मासिक बिक्री – 50 यूनिट्स

टाटा नैनो 2008 में लॉन्च होने के बाद सबसे सस्ती कार के रूप में सामने आई। हालांकि, कम कीमत होने के बावजूद भी यह कार कंपनी की उम्मीदों पर खड़ी नहीं उतरी और आगामी मानदंड़ो के चलते इसे बंद किया जा सकता है।

Fiat Punto, Linea

  • पुंटो कीमत – 5.35 लाख रुपये से 7.47 लाख रुपये (एक्स शोरूम दिल्ली)
  • लीनिया कीमत – 7.15 लाख रुपये से 9.97 लाख रुपये (एक्स शोरूम दिल्ली)
  • औसतन मासिक बिक्री – 100 यूनिट्स से भी कम

इन दोनों कारों की बिक्री अन्य कारों की तुलना में काफी लंबे समय से खराब चल रही है। इतना ही नहीं ये दोनों कारें अपने सेगमेंट में सबसे पुरानी कारें भी हैं। लीनिया की सालाना औसतन बिक्री 100 यूनिट्स से भी कम है। वहीं, पुंटो रेंज की मासिक बिक्री लगभग 50 यूनिट्स तक ही है । कंपनी इन दोनों कारों को खराब सेल्स के चलते बंद कर सकती है।

आप भी पतंजलि स्टोर खोलकर कर सकते है कमाई, बाबा रामदेव खोलने जा रहे है पतंजलि परिधान के 500 शोरूम, ऐसे करें अप्लाई

बाबा रामदेव ने आने वाले दिनों में देश के 50 शहरों में पतंजलि परिधान के 500 स्टोर खोलने की घोषणा की है, ऐसे में आपके पास भी बाबा रामदेव का पतंजलि परिधान स्टोर खोलकर कमाई कर सकते हैं।

एफएमसीजी सेक्टर में धाक जमाने के बाद योग गुरु बाबा रामदेव गारमेंट सेक्टर में भी धूम मचाने की तैयारी में जुट गए हैं। इसके लिए बाबा रामदेव ने पतंजलि परिधान लॉन्च किया है। पतंजलि परिधान ने उत्तराखंड में अपना पहला स्टोर हरिद्वार में शुरू कर दिया है। इस स्टोर का शनिवार को बाबा रामदेव ने उद्घाटन किया।यह पतंजलि का देशभर में छठा परिधान स्टोर है।

आइए बताते हैं कि आप कैसे पतंजलि परिधान स्टोर खोल सकते हैं।

परिधान स्टोर खोलने के लिए पतंजलि की ओर से आवेदन मांगे गए हैं। इसके अनुसार इच्छुक लोगों के पास स्टोर खोलने के लिए 2000 वर्गफुट की कॉमर्शियल प्रॉपर्टी होनी चाहिए। यह प्रॉपर्ट चहल-पहल वाली जगह पर होनी चाहिए। जिन लोगों के पास अपनी प्रॉपर्टी है, उनको प्राथमिकता दी जाएगी।

आप लीज की प्रॉपर्टी पर भी स्टोर खोल सकते हैं। आपको बता दें कि बाबा रामदेव ने आस्था, संस्कार और लिवफिट ब्रांड से परिधान तैयार किए हैं। आस्था के तहत महिलाओं के परिधान, संस्कार में पुरुष और लिवफिट में स्पोर्टस और योगा वियर शामिल हैं।

पतंजलि की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, परिधान स्टोर खोलने के इच्छुक लोग उनसे संपर्क कर सकते हैं। स्टोर खोलने के इच्छुक लोग ई-मेल और फोन दोनों के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।

स्टोर के बारे में जानकारी ईमेल आईडी enquiry@patanjaliparidhan.org पर मेल भेजकर ली जा सकती है। इसके अलावा आप पतंजलि के फोन नंबर्स पर संपर्क करके भी जानकारी ले सकते हैं।
मकर संक्रांति तक मिलेगी 25 फीसदी की छूट

बाबा रामदेव ने पतंजलि परिधानों पर मकर संक्रांति तक 25 फीसदी छूट देने की घोषणा की है। बाबा रामदेव ने कहा है कि पतंजलि के पास परिधान में 1100 से अधिक विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें पुरुष, महिला और बच्चों की पसंद पर विशेष ध्यान दिया गया है।

वहीं पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा है कि पतंजलि परिधानों की गुणवत्ता, रंग और डिजाइन विश्वस्तरीय है और ये परिधान विदेशी ब्रांड से दो से तीन गुना सस्ते हैं।

भारतीय छात्रों ने बनाई दुनिया की पहली ड्राइवरलेस बस, लग्जरी कार से भी कम है कीमत

पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दुनिया की पहली सोलर पावर से चलने वाली ड्राइवरलेस बस तैयार की है। यह बस एक बार चार्ज करने पर 60 से 70 किलोमीटर तक चलेगी और मोबाइल से ऑपरेट होगी। बस की स्पीड 30 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

बस सौर ऊर्जा से चलती है। ये खास बस पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुकी है।इंडियन साइंस कांग्रेस के 106वें एडिशन में इस बस को प्रदर्शित किया गया। ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस बस को साल 2019 के अंत तक कार्मिशिलय यूज में लाया जा सकेगा। इस बस को 10 मीटर के रेडियस में कंट्रोल किया जा सकता है।

इस बस की कीमत की बात करें, तो इसे बनाने में करीब 6 लाख रुपए की लागत आई है। बस को तैयार करने में एलपीयू के सीएसई व मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को एक साल लगे। सेफ्टी फीचर्स के मामले में यह बस अब तक सबसे सुरक्षित मानी जाती है,क्योंकि बस में लगे आधुनिक सेंसर बस को दुर्घटनाग्रस्त नहीं होने देंगे।

वहीं दुर्घटना होने की स्थिति में बस अपना रास्ता खुद बदल लेगी। इसके अलावा यह बस पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होगी। इसे मोबाइल फोन से भी चलाया जा सकेगा। यह बस आइपी एड्रेस की आधुनिक तकनीक के साथ कनेक्ट रहेगी। जीपीएस व ब्लूटूथ के साथ भी बस को कनेक्ट किया जा सकता है।

एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल का कहना है कि बस का निर्माण करके उनके युवा विद्यार्थियों ने देश को कुछ नया देने की कोशिश की है। बस में आगे और फीचर्स दिए जाएंगे, जिससे यह आम लोगों के लिए पूरी तरह से पर्यावरण फ्रेंडली बनकर प्रदूषण मुक्त भारत के निर्माण में सार्थक पहल साबित हो सके। 1500 किलो भार वाली इस बस की ऊंचाई आठ फीट है, जबकि लंबाई 12 फीट है।

इसमें 12 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलपीयू कैंपस में पांच दिवसीय विशाल इंडियन साइंस कांग्रेस-2019 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर भारत और अन्य देशों के टॉप शैक्षणिक संस्थानों, इंडस्ट्री और साइंस समुदाय के क्षेत्रों से 15,000 प्रतिनिधि और अन्य लोगों ने शिरकत की।

वैज्ञानियों ने बनाया एक ऐसा कमाल का हीटर, माइनस 20 डिग्री में भी देगा गर्मी, सिर्फ 2 घंटे में कमरे का तापमान हो जाएगा 30 डिग्री

वैज्ञानियों ने एक ऐसा कमाल का हीटर बनाया है जो बर्फीले हालत और कितनी भी ठंड हो यह हीटर सिर्फ 2 घंटे में कमरे का तापमान 30 डिग्री  हो जाएगा, अगर आप भी सर्द भरी ठंड से राहत पाना चाहते हैं या बर्फिस्तान में घूमने जाने का प्लान कर रहे हैं तो आपके लिए आ गया है बुखारी हीटर। यह हीटर माइनस 20 डिग्री तापमान में भी गर्मी का एहसास कराएगा। ।

इस हीटर की खासियत यह है कि इससे न तो किसी तरह की जहरीली व नुकसानदायक गैस निकलेगी और न ही इसके फटने का खतरा होगा।

कमरा 30 डिग्री तापमान तक गर्म

यह बर्फीले इलाकों में ड्यूटी करने वाले सेना के जवानों के लिए लाभदायक होगा। इसके जरिए 2 घंटे में उनका बंकर या कमरा 30 डिग्री तापमान तक गर्म हो जाएगा। इसे दिल्‍ली के डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड अलाइड साइसेंस के अनुसंधान में तैयार किया गया है।

संस्थान ने केरोसिन से चलने वाला हीटर (बुखारी) तैयार किया है। इस बुखारी में तकनीक को अपग्रेड किया गया है। पहले जहरीली गैसें भी स्ट्रक्चर के जरिए अंदर निकलती थीं और फटने का भी डर रहता था।अब इसमें कनवेक्शन मैथड से रेडिएशन जेनरेट कर जामुनी रंग की फ्लेम के जरिए गर्माहट निकलती है। बुखारी की लौ से निकलने वाली जहरीली गैसों को बाहर निकालने के लिए छत के साथ अलग पाइप लगी है,जिससे कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड व हाईड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसें सीधे बाहर निकल जाएंगी

जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में चल रही 106वीं इंडियन साइंस कांग्रेस में इसे प्रदर्शित किया गया है। नॉर्थ सिक्किम में कामयाब ट्रायल के बाद अब आर्मी से एक लाख बुखारी की डिमांड आ चुकी है। खास बात यह भी है कि छत पर निकली पाइप को इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि चारों दिशाओं से कहीं से भी हवा चले तो वो पाइप के अंदर नहीं आ पाएगी। इसमें एग्जॉस्ट फैन भी दिया गया है।

सर्दियों में हरे चारे के लिए करे इस घास की काश्त, दूध उत्पादन में होगी 30 फीसदी तक बढ़ोतरी

सर्दियों में पशु को अगर संतुलित और सही आहार नहीं मिलता है तो वह बीमार होने लगते हैं जिस वजह से दूध के उत्पादन में भी कमी आनी शुरू हो जाती है क्योंकि पशुपालक भी सर्दियों में पशुओं को हरी बरसीम खिलाते है उससे भी दूध में ज्यादा उत्पादन नहीं हो पाता.

इसलिए पशुपालको को सर्दियों में पशुओं को हरी बरसीम की जगह ‘मक्खन घास’ खिलानी चाहिए. क्योंकि यह पशुओं के लिए काफी पौष्टिक और फायदेमंद है. इसके सेवन से पशुओं के दूध उत्पादन में 25 – 30 फीसदी तक बढ़ोतरी होती है.क्योंकि हरी बरसीम में बहुत जल्दी कीट लगता है, पर मक्खन घास में कीट लगने की समस्या नहीं होती. यह घास सर्दियों में उगाई जाती है.इसकी बुवाई यदि अक्टूबर माह में की जाए तो आप इसकी कटाई 35- 40 दिनों के अंदर कर सकते है.

इसकी दूसरी कटाई भी 20- 25 दिनों के अंदर की जा सकती है. ‘मक्खन घास’ की सालभर में 5-6 बार आसानी से कटाई की जा सकती है. इस घास के बीज एक हेक्टर प्रति किलो की दर से लगते है क्योंकि यह बरसीम की बुवाई के समय बोया जाता है. यह बरसीम की तुलना में काफी अच्छा है. पशुओ के लिए इसका सेवन करना दूध उत्पादन को बढ़ाता है.

इसके अंदर 14-15 फीसदी प्रोटीन होता है. इसके बीज बाजार से खरीदे जा सकते है. इसकी सबसे पहले शुरुआत चार साल पहले पंजाब, हरियाणा में हुई थी. सबसे पहले यह 2 हज़ार किलो से शुरू हुई और आज इसका पूरे पंजाब में 100 मीट्रिक टन से भी ज्यादा बीज लगता है. इसकी बिक्री सबसे ज्यादा पंजाब, हरियाणा में होती है. इसको 150 टन से भी ज्यादा किसानों ने ख़रीदा है. इसका बीज बाजार में 400 रुपये प्रति किलो तक बिकता है.

ऐसे करें बुवाई

इसकी खेती सभी तरह की मिट्टी में की जा सकती है, जिसका पीएच 6.5 से 7 तक हो। मक्खन ग्रास शीतकालीन चारा फसल है, जिसे घर-घर काटा जा सकता है। यह मैदानी एवं पहाड़ी इलाकों में बुवाई के लिए उपयुक्त है। सभी तरह की मिट्टी में इसकी शीतकालीन बुवाई नवंबर से दिसंबर में की जा सकती है।

ग्रीष्मकालीन चारा फसल के लिए इसे मार्च से अप्रैल के बीच बोया जा सकता है। बुवाई के समय खेत में नमी रहनी चाहिए। 10 से 15 दिनों में अंकूरण होना शुरू हो जाता है। मक्खन ग्रास के बीज वजन में हल्के होते है। वहीं बरसीम के साथ मिलाकर भी इसे बोया जा सकता है। बीजों के अंकुरण के बाद दो-तीन सप्ताह में एक सिंचाई की जरूरत होती है। इसके बाद 20 दिनों के बाद जरूरत के अनुसार पानी दिया जाना जरूरी है।