अब धान की भूसी से बनेगी इमारत, कम आएगी लागत

बिलासपुर (विकास पांडेय)। रेत और सीमेंट की जगह अब धान की भूसी का इस्तेमाल किया जा सकेगा। जी हां, धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग के छात्रों ने यह कारनामा कर दिखाया है। इससे कंक्रीट में पड़ने वाली रेत और सीमेंट की मात्र घटाई जा सकेगी। निर्माण में मजबूती उतनी ही दमदार रहेगी और लागत 20 फीसद तक घट जाएगी।

आइटी कॉलेज कोरबा में सिविल इंजीनियरिंग के इन छात्र-छात्राओं ने दरअसल धान की भूसी और संयंत्रों की भट्ठी से निकलने वाली राख को गारे के रूप में इस्तेमाल कर कंक्रीट का नया फॉर्मूला ईजाद किया है। धान की भूसी से अब तक बिजली, तेल, लकड़ी, बोर्ड, ईंट और सिलिका आदि बनाए जा रहे हैं। यह शोध एक नया विकल्प जोड़ रहा है।

निर्माण में कारगर है थ्योरी

कॉलेज के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर विजय कुमार केडिया ने बताया कि छात्रों द्वारा तैयार की गई कंक्रीट पारंपरिक कंक्रीट की तुलना में उतनी ही मजबूत है। इस विधि में रेत और सीमेंट की मात्र कम करके इनकी जगह धान की भूसी और संयंत्रों से निकलने वाली राख का इस्तेमाल किया गया। गारे में भूसी और राख को बराबर मात्र में मिलाया गया।

दोनों का हिस्सा 10-10 फीसद रखा गया। साथ ही ईंट के टुकड़े मिलाए गए। इससे गारे में पड़ने वाली रेत और सीमेंट की मात्र 10-10 फीसद कम हो गई। प्रो. केडिया का दावा है कि इस विधि के इस्तेमाल से निर्माण की लागत परंपरागत विधि के मुकाबले करीब 20 फीसद तक कम हो गई। छात्रों ने फिलहाल इस क्रांकीट का इस्तेमाल कर ऐसे ढांचे बनाए हैं, जिन्हें जोड़कर दीवार, पार्टीशन आदि बनाए जा सकते हैं।

काम की भूसी

बिजली: धान की भूसी से भाप संयत्र चलाये जाते हैं। जिनसे टरबाईन को चला कर बिजली प्राप्त की जाती है। छोटे राइस मिल धान की भूसी से 100 हार्स पावर बिजली तैयार कर सकते हैं।

सिलिका: धान की भूसी से बिजली बनाने पर इस प्रक्रिया में निकलने वाली राख से सिलिका भी तैयार की जा रही है। जिसका इस्तेमाल टायर बनाने में किया जाता है।

लकड़ी: धान की भूसी और देवदार के काँटों से लकड़ी बनाने की तकनीक विकसित की गई है। भूसी को लकड़ी में बदलने के लिए पहले से बने खाँचे में उच्च दाब की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक से बनी लकड़ी का इस्तेमाल आम लकड़ी की तरह किया जा सकता है।

ईंट: धान की भूसी का उपयोग ईंट बनाने में बहुतायत होता है।1बोर्ड : भूसी से वाटरप्रूफ तख्ता (बोर्ड) बनाया जाता है।

तेल: धान की भूसी-कनकी से तेल भी बनाया जाता है।

 

आपके पास है गैस एजेंसी खोलने का मौका, ऐसे करें आवेदन

भारतीय सरकारी तेल कंपनियां देश में एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती मांग को देखते हुए देश के कई जिलों में पांच हजार गैस एजेंसी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में खोलने का निर्णय लिया है। आप को जानकारी के लिए बता दें कि पिछले तीन सालों में रसोई गैस उपभोक्ताओं में तेजी से वृद्धि से हुई है। लेकिन इसकी तुलना में एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूशन नेटवर्क में कोई इजाफा नहीं दिखा।

घरेलू गैस उपभोक्ताओं की संख्या में बढ़ोतरी

1 अप्रैल, 2015 और 30 सितंबर 2017 के बीच घरेलू गैस उपभोक्ताओं की संख्या में 44% की फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जबकि जबकि एलपीजी वितरकों की संख्या सिर्फ फीसदी बढ़कर 19,200 ही हुई है। तेल मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, सरकार ने तेल कंपनियों को आदेश दिया है कि एलपीजी वितरकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी की जाए।

मार्च, 2019 तक होंगे 5000 नए एलपीजी वितरक

इस अधिकारी ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार मार्च 2019 तक 5000 से अधिक नए एलपीजी वितरक होंगे।

इन राज्यों से होंगे ज्यादा नए एलपीजी वितरक

एलपीजी के नए वितरक मुख्यरूप से उन क्षेत्रों से आ रहे हैं, जहां रसाई गैस के नए उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। नए एलपीजी वितरकों की संख्या विशेषरूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से बनाई जानी तय है, क्योंकि इन्हीं राज्यों में रसाई गैस इस्तेमाल करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा देखा गया है।

तेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस बार हमनें एलपीजी वितरकों को जोड़ने का एक खाका तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा कि केवल जरूरतमंदों जगहों से एलपीजी वितरक जोड़ें जाएंगे, हम उन स्थानों से एक एलपीजी वितरक नहीं जोड़ेंगे जहां एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स पहले से मौजूद हैं।

पिछड़े ग्रामीण इलाकों के लिए आसानी

नए एलपीजी उपभोक्ता ज्यादातर ग्रामीण इलाकों तथा पिछड़ी पृष्ठभूमि से संबद्ध हैं, ऐसे में यह उपभोक्ता गैस खत्म होने के बाद होम डिलिवरी तो दूर की बात है, दूर दराज इलाकों में मौजूद एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स तक जल्दी पहुंच नहीं पाते हैं। ताकि खाना बनाने के लिए सिलेंडरों में गैस भरवा सकें।

ऐसे करें गैस एजेंसी लेने की तैयारी

एलपीजी डीलरशिप हासिल करने के कड़े नियम और शर्तें हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस साल जब गैस कंपनियां डीलरशिप के लिए आवेदन आमंत्रित करें तो आपके पास तैयारी पूरी होनी चाहिए। हम आपको बताने जा रहे हैं डीलरशिप हासिल करने के नियम, शर्तों और प्रक्रिया के बारे में। यह जानकारी पिछली आवेदन प्रक्रिया पर आधारित है, नए एप्‍लीकेशन में इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं।

गैस डीलर बनाने की प्रक्रिया

देश की तीनों सरकारी कंपनियां इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस समय-समय पर नए डीलर बनाने के लिए आवेदन आमंत्रित करती हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में गैस वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार की राजीव गांधी ग्रामीण एलपीजी वितरक योजना(आरजीजीएलवी) के तहत भी आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। इसमें गैस कंपनियां एजेंसी और गोदाम की जमीन के लिए कंपनियां वार्ड, मुहल्‍ला या निश्चित स्‍थान विज्ञापन या नोटिफिकेशन में बताती हैं। एप्‍लीकेशन भेजने के बाद एक निर्धारित तिथि पर आवेदक का इंटरव्‍यू किया जाता है। इसमें विभिन्‍न आधार पर नंबर दिए जाते हैं। इन्‍हीं नंबरों के आधार पर आवेदक का चयन किया जाता है।

फील्‍ड वैरिफिकेशन

हाईस्कूल में अंकों के प्रदर्शित होने के बाद गैस कंपनी का एक पैनल सभी कैंडिडेट की दी गई डिटेल के संबंध में फील्‍ड वैरिफिकेशन करता है। इसमें जमीन से लेकर सभी अन्‍य बातों की गहन पड़ताल की जाती है। इसके बाद ही गैस एजेंसी अलॉट की जाती है। इसके लिए कैंडिडेट को एक तय समय सीमा दी जाती है। इसके भीतर ही उसे गैस एजेंसी शुरू करनी होती है।

एजेंसी हासिल करने के लिए जरूरी शर्तें

गैस एजेंसी या डीलरशिप लेने के लिए सबसे जरूरी शर्त पर्मानेंट एड्रेस और जमीन की होती है। कैंडिडेट के पास पर्मानेंट रेजिडेंस एड्रेस होना चाहिए। इसके अलावा उसके पास गैस एजेंसी ऑफिस और गोदाम के लिए पर्याप्‍त जमीन या स्‍थान भी होना चाहिए। जमीन किस मुहल्‍ले, वार्ड या स्‍थान पर होनी चाहिए, इसकी जानकारी विज्ञापन में दी जाती है। इसके अलावा कैंडिडेट 10वी पास अवश्‍य होना चाहिए। साथ उसकी उम्र 21 साल होनी चाहिए। इसके साथ ही आपके पास बैंक बैलेंस और डिपॉजिट राशि भी होनी चाहिए।

सरकार द्वारा तय मानकों पर मिलता है रिजर्वेशन

गैस एजेंसी के लिए सरकार द्वारा तय मानकों के आधार पर रिजर्वेशन दिया जाता है। 50 फीसदी रिजर्वेशन सामान्‍य श्रेणी के लिए होता है। वहीं अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के साथ ही सामाजिक रूप से अक्षम लोगों, भूतपूर्व सैनिक, स्‍वतंत्रता सेनानी, खिलाड़ी, सशस्‍त्र बल, पुलिस या सरकारी कर्मचारियों को भी आरक्षण दिया जाता है।

जमीन और डिस्ट्रिब्‍यूशन चैनल जरूरी

गैस एजेंसी हासिल करने के लिए सबसे जरूरी यह है कि आपके पास पर्याप्‍त जमीन और सिलेंडर डिलिवरी के लिए पर्याप्‍त स्‍टाफ होना चाहिए। गोदाम के लिए गैस कंपनी निर्धारित मानक तय करती है। सभी गोदाम का आकार, उसमें सुरक्षा के इंतजाम आदि इसी पर आधारित होते हैं।

ऑनलाइन जितना चाहें खरीदें किराने का सामान, महीने के अंत में दीजिए पैसे

जितना चाहिए उतना किराने का सामान खरीदिए और महीने के अंत में पैसे चुकाइए. ऑनलाइन ग्रोसरी शॉपिंग पोर्टल ग्रोफर्स ने नई पोस्टपेड सेवा शुरू की है. इसके तहत आप महीने में जितना चाहें, उतनी राशन खरीद सकते हैं और महीने के अंत में इसके बिल का एक साथ भुगतान कर सकते हैं. ग्रोफर्स ने ग्राहकों को इस सेवा का लाभ देने के लिए ऑनलाइन लेंडिंग प्लैटफॉर्म सिंपल के साथ साझेदारी की है.

एकमुश्त भुगतान की सुविधा मिलेगी

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक कोई भी ग्राहक सिंपल के जरिये महीने में किसी भी समय किराने का सामान समेत अन्य चीजें खरीद सकता है. महीने भर खरीदारी करने के बाद अंत में इसका एकमुश्त बिल देना होगा.

आम लोगों को होगा फायदा

ग्रोफर्स के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अलबिंदर ढींढसा ने कहा कि इस नई सेवा से ग्राहकों को काफी फायदा मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह एक अनूठी सेवा है. सिंपल के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अध‍िकारी नित्या शर्मा ने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य किराने की खरीदारी केा आम लोगों के लिए सुगम बनाना है.

नहीं करनी होगी हर दिन बिल भरने की चिंता

उन्होंने कहा कि ग्रोफर्स के ग्राहक अब महीने में जितना चाहें, उतना किराने का सामान खरीद सकते हैं और फिर एक ही साथ पूरे बिल का भुगतान कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह कुछ उसी तरह ही है जैसे आप अपने मोहल्ले की किराना की दुकान से महीने भर सामान लेते हैं और महीने की आख‍िर में उसका हिसाब करते हैं.

फिलहाल इनके लिए है यह सुविधा

ग्रोफर्स के मुताबिक शुरुआत में यह सुविधा ग्रोफर्स के नियमित ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगी. बाद में इसे ऑनलाइन ग्रोसरी शॉपिंग दूसरे ग्राहकों के लिए भी शुरू करेगा.

11 दिसंबर को शुरू हो रही है मोबाइल, AC, एलईडी की सरकारी ट्रेनिंग , जाने पूरी जानकारी

भारत में इलेक्‍ट्रॉनिक आयटम्‍स का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। बात स्‍मार्ट फोन की हो, या एसी, एलईडी, एलसीडी, टैब आदि की। इन सभी आयटम्‍स का इस्‍तेमाल बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि दुनिया की शायद ही कोई ऐसी इलेक्‍ट्रॉनिक कंपनी होगी, जो भारत में अपना एक्‍सपेंशन नहीं कर रही है।

लेकिन इन कंपनियों की दिक्‍कत यह है कि उन्‍हें अनुभवी लोग नहीं मिलते। सरकार भी इस बात को मानती है और यही वजह है कि सरकार देश में बेरोजगारी की समस्‍या को कम करने के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक आयटम्‍स ट्रेनिंग दे रही है। यह ट्रेनिंग दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनी सैमसंग के साथ मिलकर दी जा रही है।

11 दिसंबर से होगा शुरू

यह ट्रेनिंग 11 दिसंबर से शुरू होगी। इसलिए यदि आप इस ट्रेनिंग का हिस्‍सा बनना चाहते हैं तो 11 दिसंबर से पहले आपको आवेदन करना होगा। आवेदन फार्म कनॉट प्‍लेस, नई दिल्‍ली स्थित एमएसएमई एक्‍सटेंशन सेंटर पर मिलेंगे। इस बारे में विस्‍तृत जानकारी के लिए आप 9999948317, 9773830870, 011-23412611 पर संपर्क कर सकते हैं।

सैमसंग के एक्‍सपर्ट्स देंगे ट्रेनिंग

आज हम आपको इस ट्रेनिंग के बारे में विस्‍तार से बताएंगे। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम मिनिस्‍ट्री ऑफ माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के इलेक्‍ट्रॉनिकी सर्विस एंड ट्रेनिंग सेंटर द्वारा चलाया जा रहा है। इस प्रोग्राम में सैमसंग के एक्‍सपर्ट्स द्वारा ट्रेनिंग दी जाती है। आइए जानते हैं, क्‍या इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की खासियत

ये ट्रेनिंग ले सकते हैं आप

सेंटर द्वारा 7 तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है। पहली में एलईडी, एलसीडी, प्‍लाजमा टीवी, होम थियेटर (ऑडियो-वीडियो) और दूसरी में टैबलेट, मोबाइल फोन, स्‍मार्ट फोन, हैंडहेल्‍ड प्रोडक्‍ट्स-एचएचपी) की ट्रेनिंग दी जाएगी। ये दोनों ट्रेनिंग तीन माह की है। आप अगर बारहवीं पास, आईटीआई, ग्रेज्‍युएट, इंजीनियरिंग में डिप्‍लोमा या डिग्री धारक हैं तो आप यह ट्रेनिंग ले सकते हैं। इसकी फीस 15 हजार रुपए है।

एसी, वाशिंग मशीन की ट्रेनिंग

आप अगर रूम एयरकंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, माइक्रोवेव, ओवन, आरएसी एंड होम एप्‍लाइन्‍सेस की ट्रेनिंग़ लेना चाहते हैं तो आप को भी 11 दिसंबर से पहले अप्‍लाई करना होगा। यह चार माह का कोर्स है। इसकी फीस 20 हजार रुपए है। यदि आप अप्‍लाई करना चाहते हैं तो आपका बारहवीं पास, आईटीआई, ग्रेज्‍युएट, इंजीनियरिंग में डिप्‍लोमा या डिग्री धारक में से कोई एक होना जरूरी है।

5000 रुपए में करें ये कोर्स

अगर आप कम पैसे में कोई ऐसा कोर्स करना चाहते हैं, जिसकी मार्केट में डिमांड भी हो तो आप केवल 5000 रुपए में आटो कैड या पीएलसी प्रोग्रामिंग का कोर्स भी कर सकते हैं। यह कोर्स 4 सप्‍ताह का है। इसके लिए आपके पास डिग्री, डिप्‍लोमा या आईटीआई सर्टिफिकेट होना जरूरी है।

कम्‍प्‍यूटर कोर्स भी कर सकते हैं आप

आप इस सेंटर में निलिट ओ लेवल कम्‍प्‍यूटर कोर्स भी कर सकते हैं। यह कोर्स एआईसीटीआई द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त है। यह एक साल का कोर्स है, जिसकी फीस 20 हजार रुपए है। आपका कम से कम 12वीं पास होना जरूरी है। अगर आपने दसवीं के बाद आईटीआई किया है तो आप यह कोर्स कर सकते हैं।

गोबर से बनाई गैस, अब भरकर बेचेंगे सिलेंडर

औरैया (हरेंद्र प्रताप सिंह)। नौकरी के लिए दर-दर भटकने के बाद स्वरोजगार की ओर रुख किया और सफलता हासिल की। अब दूसरे के लिए प्रेरणा भी बने हैं। पहले पशुपालन कर दूध का कारोबार किया। गोबर गैस प्लांट लगा कर घरेलू उपयोग के लिए ईंधन की व्यवस्था की। अब उसे छोटे सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी है।

यह कहानी है उप्र के औरैया जिर्लािस्थत कटिघरा ब्रह्मनान गांव के किसान कविंद्र सिंह की। कविंद्र को जब नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने परिवार के भरण पोषण के लिए शहर के लिए पलायन नहीं किया। पशुपालन कर पहले दुग्ध उत्पादन से आय बढ़ाई। अब पशुओं के गोबर से गैस बनाकर उसे सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी में जुटे हैं। इससे उनकी आय और बढ़ेगी। अभी वह जरूरतमंद लोगों को छोटे सिलेंडर में गैस भरकर मुफ्त में दे रहे हैं।

कविंद्र ने तीन वर्ष पूर्व नौ नवंबर 2014 को खेती में पैदा हुए अनाज को बेचकर जुटाए एक लाख रुपये से तीन पशु खरीदे। दूध बेचकर उन्होंने पशुओं की संख्या बढ़ा ली है। अब उनके पास आठ भैंसें व 10 गाय हैं। इनका दूध बेचकर वह प्रतिमाह 30 हजार की बचत करते हैं। गोबर का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने तीन टन का गोबर गैस प्लांट बनाया। इससे रोजाना करीब 30 किलोग्राम गोबर गैस मिलती है। इसका इस्तेमाल वह घर में खाना बनाने के लिए करते हैं।

जरूरतमंद लोगों को छोटे सिलेंडर में कंप्रेशर से गैस भरकर मुफ्त में देते हैं, लेकिन अब वह मुफ्त में गैस को नहीं बांटेंगे। उन्होंने गैस को सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी कर ली है। इसके लिए 10 टन का गोबर गैस प्लांट बनवाने की भी तैयारी है। इससे रोजाना करीब 200 किलोग्राम गैस का उत्पादन होगा। जिससे 14 बड़े एलपीजी सिलेंडर भरे जा सकेंगे। वह एक सिलेंडर सिर्फ 400 रुपये में भरेंगे। इसके लिए उन्होंने कंप्रेशर मशीन खरीद ली है।

25 किलोग्राम गैस से चार घंटे चलता है नलकूप

कविंद्र गोबर गैस से ही पंपसेट भी चलाते हैं। 25 किलोग्राम गैस से उनका दस हार्सपावर का इंजन चार घंटे चलता है। इससे वह अपने खेतों की सिंचाई कर लेते हैं। इंजन को चालू करते समय उन्हें थोड़ा डीजल खर्च करना पड़ता है।

कैसे भरते हैं सिलेंडर में गैस

गोबर गैस प्लांट से निकलने वाली गैस के पाइप को वह कंप्रेशन मशीन से जोड़ देते हैं। कंप्रेशर मशीन के दूसरे हिस्से से निकलने वाले पाइप को सिलेंडर से जोड़ देते हैं। इसके बाद मशीन को बिजली या बैटरी से चालू कर देते हैं। कुछ ही देर में छोटा गैस सिलेंडर भर जाता है।

अब नहीं डिश एंटीना की जरूरत

फतेहगढ़ साहिब, [प्रदीप शाही]। विज्ञान में नित होते आविष्कार इंसान के जीवन को सुखद बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक जमाना था जब छतों पर लगे टीवी एंटीना के घूम जाने मात्र से ही सिग्नल समाप्त हो जाता था। इसके बाद छतों पर से पाइप वाले एंटीना गायब हो गए।

इनके स्थान पर तश्तरीनुमा डीटीएच छतरी आ गई। अब जल्द ही ये तश्तरीनुमा डीटीएच छतरी भी छतों पर से उड़नछू हो जाएंगी। जो नया एंटीना आने वाला है, उसे छत की दरकार नहीं। न छत चाहिए, न लंबा तार।

सीधे सेट टॉप बॉक्स में कनेक्ट कर दीजिए और टेलीविजन का मजा लीजिए। दुनिया माइक्रो स्ट्रिप एंटीना की ओर बढ़ रही है। भारत में भी स्वदेशी माइक्रो स्ट्रिप एंटीना तैयार कर लिया गया है।

भारतीय वैज्ञानिक ने बनाया सस्ता-टिकाऊ स्वदेशी माइक्रो एंटीना

यह माइक्रो स्ट्रिप एंटीना पंजाब फतेहगढ़ साहिब स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर जसपाल सिंह ने तैयार किया है।

सेट अप बॉक्स से होगा कनेक्ट

दो से तीन सेंटीमीटर आकार के चिपनुमा माइक्रो स्ट्रिप एंटीना को कमरे के अंदर रखे सर्विस बॉक्स में लगाया जा सकेगा। यह बॉक्स फिलहाल घर के बाहर या छत पर लगे डिश एंटीना से तार के जरिये कनेक्ट होता है, जबकि दूसरी ओर टीवी सेट से। अब डिश एंटीना केस्थान पर इसमें माइक्रो स्ट्रिप एंटीना को कनेक्ट कर सब्सक्राइब्ड चैनलों को देखा जा सकेगा।

पंजाब फतेहगढ़ साहिब स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर जसपाल सिंह ने स्वदेशी माइक्रो स्ट्रिप एंटीना बनाने में सफलता हासिल की है। प्रोफेसर जसपाल सिंह ने बताया कि शोध कार्य को पूरा करने में पांच साल लग गए। इसे पेटेंट के लिए इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया ने स्वीकार कर लिया है।

लागत मात्र 50 रुपये

माइक्रो स्ट्रिप एंटीना से उपभोक्ता ही नहीं कंपनियों को भी लाभ होगा। इसके निर्माण में समय व कीमत दोनों में बचत होगी। इस एंटीना को बनाने में अधिकतम 50 रुपये तक का खर्च आएगा।

इसके लिए किसी लेबोरेट्री की आवश्यकता नहीं होगी। चिप को प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) पर ही बनाया जा सकेगा। इसका आकार दो सेंटीमीटर से लेकर तीन सेंटीमीटर तक रहेगा। साथ ही इससे सिग्नल भी बेहतर हो जाएगा।

अगर गैस सिलेंडर एजेंसी से लेकर आएंगे तो आपको होगा इतना बड़ा फायदा

हर घर में गैस सिलेंडर का यूज होता है, लेकिन अधिकतर लोगों को इसके नियम कायदों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। शायद आप नहीं जानते होंगे कि अगर गैस सिलेंडर की होम डिलेवरी नहीं होती है और आपको गैस एजेंसी के गोडाउन जाकर सिलेंडर लाना होता है, तो आप वहां कंपनी से एक तय राशि ले सकते हैं।

महीनेभर पहले ही इस राशि को बढ़ा दिया गया है। किसी भी एजेंसी के गोडाउन से आप सिलिंडर लाते हैं तो आप एजेंसी से 19 रुपए 50 पैसा वापस ले सकते हैं। कोई भी एजेंसी यह राशि देने के लिए किसी भी ग्राहक को मना नहीं कर सकती। सभी कंपनियों के सिलिंडर के लिए यह राशि तय है। पहले यह 15 रुपए थी, बाद में इसे बढ़ाकर 19 रुपए 50 पैसा किया गया है।

कोई भी एजेंसी संचालक आपको यह राशि देने से मना करता है आप टोल फ्री नंबर 18002333555 पर उसकी शिकायत कर सकते हैं। अभी ग्राहकों को सब्सिडी वाले 12 सिलिंडर दिए जाते हैं। यह कोटा पूरा होने के बाद मार्केट रेट पर सिलेंडर खरीदना होता है।

इतना ही नहीं रेगुलेटर लीकेज है तो आप फ्री में एजेंसी से चेंज करवा सकते हैं। इसके लिए आपके पास एजेंसी का सब्सक्रिप्शन वाउचर होना चाहिए। आपको लीकेज हो रहे रेगुलेटर को भी साथ लेकर जाना होगा। सब्सक्रिप्शन वाउचर व रेगुलेटर के नंबर को मिलाया जाएगा। दोनों एक होंगे, तभी रेगुलेटर चेंज हो पाएगा।

मारुति‍ सुजुकी को बना दि‍या मर्सडीज, ऐसे कि‍या कार को मोडि‍फाई

आपके सड़कों पर चलती हुई कई मोडि‍फाइड कारों को देखा होगा जि‍नका लुक पूरी तरह से चेंज कर दि‍या जाता है। लेकि‍न क्‍या कभी आपने सोचा है कि‍ मारुति‍ सुजुकी को मर्सडीज बना दि‍या हो। ऐसा हुआ है। केरल में एक शख्‍स ने मारुति‍ सुजुकी बलेनो को मर्सडीज ए स्‍टार में बदल दि‍या।

इस कार का न केवल केवल डि‍जाइन चेंज कि‍या गया बल्‍कि‍ इसमें मर्सडीज के असकी लोगो का भी यूज कि‍या गया। मोडि‍फाई की गई मारुति‍ सुजुकी बलेनो के स्‍टॉक बंपर्स को मर्सडीज ए-क्‍लास के बंपर से बदल दि‍या गया। इतना ही नहीं, इसमें आफटर मार्केट से ज्‍यादा बड़े और चौड़े व्‍हील्‍स को भी लगाया गया।

माना जा रहा है कि‍ मोडि‍फाइ करने का काम कि‍सी चोर का है क्‍योंकि‍ इसमें केवल ए-क्‍लास बंपर को मर्सडीज डायमंड ग्रि‍ल के साथ लगाया है। इतना ही नहीं, बंपर में ‘8’ शेप एयर वेंट भी है जोकि‍ मौजूदा जेनरेशन वाले मॉडल्‍स में दि‍खाई देता है।

कार के रीयर बंपर को भी बदला गया है। रीयर बंपर भी मर्सडीज ए-क्‍लास का है जि‍समें क्‍वाड एक्‍गजॉस्‍ट टि‍प्‍स और रीयर डि‍फ्यूजर का यूज है। इसके अलावा, इसमें 16 इंच, 5 स्‍पॉक अलॉय व्‍हील्‍स के साथ लो प्रोफाइल टायर्स हैं। इसके इंटीरि‍यर में भी मोडि‍फि‍केशन की गई है।

टीमबीएचपी की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, ट्रांसपोर्ट कमि‍शन ऑफ केरल को इस चोरी के काम के संबंध में शि‍कायत मि‍ली है। आरटीओ अथॉरि‍टी ने व्‍हीकल के ओनर के खि‍लाफ केस फाइल कर दि‍या है। पुलि‍स की मदद से आरटीओ ने मोडि‍फाइड मारुति‍ बलेनो को जब्‍त कर लि‍या है और ओनर को कार को डीरजि‍स्‍टर करते हुए कारण बताओ नोटि‍स जारी कि‍या है। जवाब के लि‍ए 15 दि‍न का समय दि‍या गया है।

News Source-Money Bhasker news

ये हैं नैनो से भी फ्लॉप कारें, फिर भी बंद करने को राजी नहीं कंपनियां

ऑटो बॉडी सियाम के मुताबिक, टाटा नैनो की बिक्री अपने रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंच गई है। देश भर में कारों की अक्‍टूबर की टोटल बिक्री पर नजर डालें तो टाटा की फ्लैगशिप कार को देशभर में खरीददार नहीं मिल रहे हैं। श्रीलंका और बांग्‍लादेश जैसे पड़ोसी देशों में कभी धूम मचाने वाली इस कार का एक्‍सपोर्ट भी अब जीरे के लेवल पर पहुंच गई है। हालांकि इसके बाद भी कंपनी नैनो का प्रोडक्‍शन बंद नहीं कर रही है।

लिस्‍ट में अकेली नहीं है नैनो

हालांकि सियाम के डाटा पर नजर डालें तो नैनो देश की अकेली ऐसी कार नहीं है, जिसके बुरी तरह फ्लाप होने के बाद भी कंपनी उसे बंद करने को राजी नहीं है। महिंद्रा और फोर्ड जैसी कंप‍नियों के कई मॉडल्‍स को भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। इन कारों की बिक्री भी 100 यूनिट प्रतिमाह से नीचे पहुंच गई है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही कंपनियों के बारे में, सुपर फ्लाप होने के बाद भी जिनका प्रोडक्‍शन ऑटो कंपनियां बंद करने को राजी नहीं हैं।

  • मॉडल- नैनो
  • कंपनी- टाटा मोटर्स
  • अक्‍टूबर की सेल्‍स- 57 यू‍निट
  • एक्‍सपोर्ट- 0

  • मॉडल:  वाइब
  • कंपनी: महिंद्रा एंड महिंद्रा
  • सेल्‍स- 0   यू‍निट
  • एक्‍सपोर्ट: 0

  • मॉडल:पल्‍स
  • ब्रांड: रेनो
  • सेल्‍स: 0 यूनिट
  • एक्‍स्‍पोर्ट: 0

  • मॉडल:वेरिटो
  • कंपनी:महिंद्रा एंड महिंद्रा
  • सेल्‍स: 33 यूनिट
  • एक्‍स्‍पोर्ट: 0

Free मिलेगा पेट्रोल-डीजल, बस ऐसे करना होगा भुगतान

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. इसकी वजह से आम आदमी की जेब पर काफी ज्यादा असर पड़ रहा है.गुरुवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल के लिए आपको 69.43 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं. वहीं, एक लीटर डीजल के लिए आपको 58.30 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है.

लेक‍िन पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच एक खास ऑफर आपके लिए आया है. इसके तहत आप फ्री पेट्रोल और डीजल भरवा सकते हैं. इस ऑफर का फायदा पाने के लिए आपको सिर्फ अपने भुगतान का तरीका बदलना होगा.

दरअसल मोबाइल वॉलेट मोबिक्व‍िक ने यह ऑफर लाया है. एक तय समय के भीतर पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए अगर आप इस मोबाइल वॉलेट से भुगतान करते हैं, तो आपको 100 फीसदी कैशबैक दिया जा रहा है.

हालांकि अब इस ऑफर का फायदा उठाने के लिए आपके पास सिर्फ आज और कल का दिन बचा हुआ है. यह ऑफर सीमित समय के लिए लाया गया है. इस ऑफर की शुरुआत 20 नवंबर से हुई और यह 24 नवंबर को खत्म होगा.

इस ऑफर का लाभ उठाने के लिए आपको शाम के 6 बजे से 9 बजे के बीच ही पेट्रोल-डीजल भरवाना होगा. इस दौरान आपको मोबिक्विक मोबाइल वॉलेट से भुगतान करना होगा.

इस ऑफर का लाभ उठाने के लिए आपको कम से कम 10 रुपये का ईंधन भरवाना होगा. दूसरी बात यह है कि इस ऑफर में भले ही 100 फीसदी कैशबैक मिल रहा है, लेक‍िन आप अध‍िकत 100 रुपये का कैशबैक हासिल कर सकते हैं.

पेट्रोल पंप पर जैसे ही आप ईंधन भरवाएं. आपको QR कोड स्कैन कर के इस वॉलेट के जरिये भुगतान करना है. इसके बाद आपके वॉलेट में 24 घंटों के भीतर कैशबैक आ जाएगा.

इस कैशबैक को भी आप बाद में पेट्रोल और डीजल भरने के लिए यूज कर सकते हैं. आप इस ऑफर का लाभ किन-किन पेट्रोल पंप पर उठा सकते हैं. इसकी पूरी लिस्ट मोबिक्विक ने दी है. इस लिस्ट को देखने के लिए आप यहां क्ल‍िक कर सकते हैं.