अब दूसरे राज्य से कार खरीदना होगा सस्ता, ये है बड़ा कारण

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वाहनों की खरीद फरोख्त की प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इसके तहत वाहनों को एक राज्य से खरीदक दूसरे राज्य ले जाने पर दोबारा से रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा और व्हीकल नंबर प्लेट भी नहीं बदलनी होगी। इसके अलावा देशभर में एक समान रजिस्ट्रेशन टैक्स लगाने पर विचार चल रहा है।

ये हो सकती हैं टैक्स की दर

मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक देशभर में एक समान टैक्स लागू करने का विचार हो रहा है। इसके अंतर्गत 10 लाख से कम कीमत के व्हीकल पर 8 प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। वहीं, 10 से 20 लाख की कीमत वाले व्हीकल पर 10 प्रतिशत टैक्स, 20 लाख से ज्यादा महंगे व्हीकल पर 12 प्रतिशत टैक्स लगाया जा सकात है। प्रस्ताव अभी अपने शुरुआती दौर में है, जिसे लेकर मंत्रालयों के बीच बातचीत का दौर जारी है।

कम टैक्स वाले राज्यों में ज्यादा कार की बिक्री

सड़क परिवहन मंत्रालय ने मामले में राज्य सरकारों को पत्र लिखकर राज्यों के बीच एक समान रजिस्ट्रेशन टैक्स लगाने पर सुझाव मांगा हैं। मौजूदा दौर के ट्रेंड देखें, तो उन राज्यों में ज्यादा कार बिक्री होती है, जहां टैक्स कम रहता है। इससे कार और अन्य व्हीकल ग्राहक को सस्ते पड़ते हैं।

आरटीओ से लेनी होती है एनओसी

मौजूदा वक्त में अगर वाहन को एक शहर से दूसरे शहर शिफ्ट किया जाता है, तो ओनर को वाहन री-रजिस्टर्ड कराना होता है। साथ ही रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) से एनओसी लेनी होती है, जहां वाहन का रजिस्ट्रेशन होता है। साथ ही दोबारा टैक्स देना होता है। साथ ही नया नंबर दिया जाता है। हर एक राज्य और क्षेत्र का अपना व्हीकल नंबर होता है। उदाहरण के लिए दिल्ली का नंबर DL से शुरू होता है, जबकि उत्तर प्रदेश का नंबर UP से शुरू होता है।

बिना रजिस्ट्रेशन दूसरे राज्य में वाहन चलाने पर लग सकता है जुर्माना

देश में कई सारे व्हीलक ओनर ऐसे है, जो बिना बिना रजिस्ट्रेशन के दूसरे राज्यों में अपने वाहन को चलाते हैं। ऐसे में ओनर पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से जुर्माना लगाए जाने का रिस्क रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर एक स्टेट का व्हीकल रजिस्ट्रेशन अलग होता है।

मेरी शादी की पहली रात थी, सिर झुकाए, हाथ में दूध का गिलास लिए मैं बेडरूम में घुसी

मेरी शादी की पहली रात थी। मैं पहली बार किसी आदमी के साथ अंतरंग होने वाली थी। करीबी मित्रों से हुई बातचीत और देखे गए कई पोर्न वीडियो से मेरे दिमाग में सपनों और इच्छाओं की कई तस्वीरें उभर रही थीं। सिर झुकाए, हाथ में दूध का गिलास लिए मैं बेडरूम में घुसी। अब तक सब कुछ वैसे ही था जैसा मैंने सोचा था, लेकिन मुझे बिल्कुल भी आभास नहीं था कि एक मुझे कुछ ही देर में जोरदार झटका लगने वाला है।

सपनों के मुताबिक जब मैं कमरे में आती हूं तो मेरा पति मुझे कसकर गले लगाता है, चुंबनों की बौछार कर देता है और सारी रात मुझे प्यार करता रहता है। लेकिन वास्तविकता में, जब मैं कमरे में घुसी उससे पहले ही वो सो चुका था। तब 35 की उम्र में मैं वर्जिन थी। मेरे लिए ये बेहद तकलीफ भरा था, ऐसा लगा कि मेरे पूरे अस्तित्व को मेरे पति ने नकार दिया हो।

मैंने उन्हें अपनी भावनाओं के विषय में बताया। लेकिन उन्होंने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया और ना ही इसका कोई जवाब दिया। वो थोड़े परेशान दिखे। वो नीचे की ओर देखते हुए चुपचाप बैठ गए और केवल अपना सिर हिलाते रहे।

मैंने सोचा कि आजकल महिलाओं से ज़्यादा पुरुष शर्मीले होते हैं और मेरे होने वाले पति भी कोई अपवाद नहीं हैं, शायद इसलिए उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन शादी की रात हुई उस चीज ने मुझे उलझन में डाल दिया। मुझे नहीं पता कि उसने ऐसा क्यों किया। जब अगली सुबह मैंने उनसे पूछा, तो उन्होंने कहा कि वो ठीक नहीं थे।

लेकिन आगे भी कुछ नहीं बदला। हमारी दूसरी, तीसरी और कई रातें ऐसे ही बीतीं। मैंने जब अपनी सास को यह बताया तो उन्होंने भी मेरे पति का बचाव किया। उन्होंने कहा, “वह शर्मीला है, उसे बचपन से ही लड़कियों से बात करने में झिझक रही है, उसने लड़कों के स्कूल में पढ़ाई की है। उसकी ना तो कोई बहन है और ना ही को महिला मित्र।”

हालांकि इस बात से मुझे अस्थायी राहत तो मिली लेकिन मैं इस विषय में सोचना बंद नहीं कर सकी। मेरी सारी उम्मीदें, सपने और इच्छाएं दिन ब दिन टूट रही थीं। मेरी बेचैनी का एकमात्र कारण सेक्स नहीं था। वो शायद ही मुझसे बात करते थे। मुझे लगता कि हमेशा मेरी उपेक्षा हो रही है। वो मुझसे दूर भागते, छुना पकड़ना तो दूर की बात थी। मुझे नहीं मालूम था कि ये सब बातें किससे शेयर करूं। मैं अपने परिवार से बात नहीं कर सकती थी क्योंकि सब यही सोचते कि मैं बहुत खुश हूं, लेकिन मेरे सब्र का बांध टूट रहा था। मुझे इसका हल ढूंढने की जरूरत थी।

आम तौर पर छुट्टियों वाले दिन भी वो घर पर नहीं रहते थे, वो या तो अपने किसी मित्र के घर जाते या अपने माता-पिता को बाहर ले जाते थे। संयोग से उस दिन वो घर पर ही रहे। मैं कमरे में घुसी और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। वो बुहत तेज़ी से अपने बिस्तर से उठे मानो कूद गये हों। मैं उनके पास गयी और प्यार से पूछा, “क्या आप मुझे पसंद नहीं करते? हम अब तक एक बार भी अंतरंग नहीं हुए हैं, ना ही आपने अब तक कभी अपनी भावनाओं के विषय में ही बताया, आख़िर आपकी समस्या क्या है?

उन्होंने झटके से जवाब दिया, “मुझे कोई समस्या नहीं है।” जब उन्होंने यह कहा तो मैंने सोचा कि यह मौका है उनके करीब जाने और अपनी तरफ उन्हें आकर्षित करने का। मैंने उनसे शारीरिक छेड़छाड़ शुरू की। मैंने सोचा कि इससे उनपर कोई असर होगा, लेकिन उन पर कोई असर हो नहीं रहा था। उनमें उत्तेजना का कोई भाव भी नहीं दिख रहा था। फिर मुझे एक दिन ये पता चला कि वो नपुंसक थे और डॉक्टरों ने हमारी शादी से पहले ही इसकी पुष्टि कर दी थी।

वो और उसके माता-पिता सब कुछ जानते थे, लेकिन मुझे अंधेरे में रखकर मुझसे धोखा किया गया। मुझे सच्चाई का पता चल गया तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई, फिर भी उन्होंने अपनी गलती कभी स्वीकार नहीं की। समाज हमेशा महिलाओं की छोटी से छोटी गलती को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करता है, लेकिन अगर किसी मर्द की कोई गलती हो तो भी उंगलियां महिलाओं की ओर ही उठती हैं।

मेरे रिश्तेदार ने मुझे सलाह दी, “सेक्स ही जीवन में सबकुछ नहीं है, तुम बच्चा गोद लेने का विचार क्यों नहीं करते?” मेरे ससुराल वालों ने मुझसे विनती की, “अगर लोगों को सच्चाई पता चल जाएगी तो ये हम सभी की लिए बहुत शर्मिंदगी की बात होगी।” मेरे परिवार ने मुझसे कहा, “यह तुम्हारा भाग्य है!” लेकिन इस दौरान मेरे पति ने जो कहा उससे मुझे बेहद ठेस पहुंची। उन्होंने कहा, “तुम्हें जो अच्छा लगता है वो करो, किसी और के साथ सो सकती हो, मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगा और ना ही किसी को इसके बारे में बताउंगा। अगर उससे तुम्हे बच्चा हो जाए तो मैं उसे अपना नाम देने के लिए तैयार हूं।”

किसी भी औरत को अपने पति के ऐसे विचारों को नहीं सुनना चाहिए। वो बेईमान था और वह खुद के और अपने परिवार के सम्मान को बचाने के लिए ऐसा कह रहा था। वो मेरे पैरों पर गिर कर रोने लगा और कहा, “प्लीज़, इसे किसी को मत बताना और न ही मुझे तलाक़ देना।” उसने जो सुझाया वो मैं सोच भी नहीं सकती थी। अब मेरे पास केवल एक ही विकल्प था या तो मैं उसे छोड़ दूं या उसे अपना जीवनसाथी मानकर अपनी इच्छाओं का त्याग कर दूं। अंत में मेरी भावनाओं की जीत हुई।

मैंने अपने उस तथाकथित पति का घर छोड़ दिया। मेरे माता-पिता ने मुझे स्वीकार नहीं किया। अपने दोस्तों की मदद से मैं एक लेडिज़ होस्टल में चली गयी. जल्दी ही मुझे एक नौकरी मिल गयी। धीरे धीरे ही सही, मेरा जीवन पटरी पर आने लगा और मैंने कोर्ट में तलाक की अर्जी डाल दी। मेरा पति और उसके परिवारवालों ने बेशर्मी दिखाई, उन्होंने सच्चाई को छुपाते हुए शादी टूटने की आड़ में मुझ पर ही विवाहेतर संबंधों का आरोप मढ़ दिया।

मैं लड़ी और अपनी मेडिकल जांच करवाई। तीन साल लग गये लेकिन आखिरकार मुझे तलाक मिल ही गया। मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरा पुनर्जन्म हुआ है। आज मैं 40 की हो गयी हूं और अब भी वर्जिन हूं। इस दौरान मुझसे कई मर्दों ने संपर्क किया। वो सोचते थे कि मैंने अपने पति को इसलिए छोड़ा क्योंकि उनसे मुझे यौन संबंध में संतुष्टि नहीं मिलती थी और वे मुझसे वो सब करना चाहते थे।

घर की छत पर लगाएं सोलर पैनल, 46,000 रुपए तक सलाना बचेगा बिजली का बिल, जाने पूरी स्कीम

अब जल्द ही दिल्ली में रहने वाले लोगों को साैर उर्जा से पैदा होने वाली बिजली सप्लाई होगी। Delhi Electricity Regulatory Commission ने हाल ही में ग्रुप नेट मीटरिंग और वर्चुअल नेट मीटरिंग  फ्रेमवर्क को इस बारे में नोटिफाई कर दिया है।

DERC के इस कदम से हजारों RWA, घरों और कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसायटीज को सस्ते दामों पर बिजली मिलेगी। अगर आप चाहें तो बहुत आसानी से अपने घर की छतों पर भी सोलर पैनल लगवा सकते हैं। इससे न सिर्फ आपका बिजली का बिल कम होगा बल्कि कुछ सालों में सोलर पैनल की लागत निकल आएगी, जिससे आपकी बिजली खपत मुफ्त हो जाएगी।

ऐसे करेगा काम

इस योजना के तहत एक ही लोकेशन पर सोलर प्लांट लगाया जाएगा और सरप्लस एनर्जी को वापस ग्रिड में भेज दिया जाएगा। इस ग्रिड से जुड़े सभी मीटरों के बिल में इस एनर्जी को एडजस्ट कर दिया जाएगा। इससे लोगों के बिजली बिल कम हो जाएंगे।

आप भी अपने घर में इस तरह लगवा सकते हैं सोलर पैनल

  • छत पर सोलर पैनल लगाने वाली किसी कंपनी या पॉवर डिस्कॉम से संपर्क करें, जो आपको किसी वेंडर से जोड़ेंगे।
  • अपने डिस्कॉम या वेंडर को अपने बिजली बिल की लेटेस्ट कॉपी दें, ताकि वह आकलन कर सके कि कितनी क्षमता का सोलर पैनल लगाना है।
  • 1,000 रुपए की नॉन-रिफंडेबल फीस भरें।
  • इसके बाद साइट इंस्पेक्शन और टेस्ट रन किए जाएंगे।

इतना आएगा खर्च

  • अगर आप 1 किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाएंगे तो आपको इसके लिए 70,000 रुपए चुकाने होंगे।
  • 5 किलो वॉट के पैनल के लिए 3.5 लाख रुपए
  • 100 किलो वॉट के पैनल के लिए 60 लाख रुपए खर्च करने होंगे।
  • खास बात यह है कि अपने घर में सोलन पैनल लगवाने पर कुल खर्च में सरकार की तरफ से 30 फीसदी कह सब्सिडी दी जाती है।

5 साल में निकल आएगी लागत

आमतौर पर सोलर पैनल की लागत 5-6 वर्ष में निकल आती है। हालांकि यह स्कीम 5 किलोवॉट से कम और 5,000 किलो वॉट से ज्यादा क्षमता वाले पैनल के लिए मान्य नहीं है। अगर एक घर में 5 किलोवॉट का सोलर पैनल लगता है तो साल भर में उस की बिजली बिल पर 46,300 रुपए बचत होगी।

भारत के प्रधानमंत्री को 1 नहीं बल्कि मिलते हैं 5 बंगले, जानें कौन से बंगले का है क्या महत्व

पीएम नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने है । ऐसे में 7 लोक कल्याण मार्ग यानि प्रधानमंत्री आवास में रहेगा । ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस आवास में एक नहीं बल्कि 5 बंगले हैं। आपने अब तक यहां सिर्फ एक बंगले के बारे में ही सुना होगा, लेकिन यहां 5 बंगले हैं। चलिए आपको बताते हैं इनके बारे में।

प्रधानमंत्री आवास सेंट्रल दिल्ली ( Delhi ) में बना हुआ है जो कि 12 एकड़ जमीन पर बना है। सबसे खास बात कि यहां एक नहीं, बल्कि 5 बंगलें हैं और इन्हीं पांचों बंगलों को एक साथ 7 लोक कल्याण मार्ग कहा जाता है। यहां जो पांच बंगले हैं उनकी संख्या 1, 3, 5, 7 और 9 है। मौजूदा समय में पीएम नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi ) 7 नंबर के बंगले में रहते हैं।

वहीं बात बाकी बंगलों की करें तो बंगले नंबर 9 में एसपीजी रहती है जो कि पीएम मोदी की सुरक्षा संभालती है। बंगला नंबर 3 में पीएम केअतिथियों के लिए गेस्ट हाउस है। वहीं बंगला नंबर 1 में प्रधानमंत्री के लिए हेलिपैड बनाया गया है। यहां एक 2 किलोमीटर लंबी सुरंग भी है जो प्रधानमंत्री आवास से निकलकर सफदरजंग हवाई अड्डे तक जाती है।

प्रधानमंत्री आवास का नक्शा रॉबर्ट टॉर रसेल ने बनाया था। रसेल 1920 और 1930 के दशक के दौरान नई दिल्ली का नक्शा तैयार कर हे ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लूटियन की टीम का हिस्सा थे। इस बंगले में साल 1984 में रहने वाले पहले बतौर पीएम राजीव गांधी ( Rajiv Gandhi ) थे। वहीं वीपी सिंह जब प्रधानमंत्री रहे, तब उनके कार्यकाल के दौरान इसे सराकरी निवास बनाया गया था।

जबकि इससे पहले तक पीएम बतौर सांसद के रूप में मिले बंगले में रहा करते थे। 7 लोक कल्याण मार्ग एकमात्र ऐसा आवास है, जिसकी सुरक्षा एसपीजी करती है। वहीं अगर कोई शख्स प्रधानमंत्री आवास में जाता है तो सबसे पहले उसे 9 लोक कल्याण मार्ग से एंट्री दी जाती है और इसके बाद पार्किंग और फिर वेलकम रूम में उसे ले जाया जाता है। यहां सिक्योरिटी के इंतजाम बड़े ही सख्त हैं।

आखिरकार सामने आई अंपायर्स की सबसे बड़ी चूक, अगर ना होती ये गलती तो बदल जाता नतीजा

वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को हराकर पहली बार खिताब अपने नाम किया है. इंग्लैंड की जीत में आखिरी ओवर की चौथी गेंद पर ओवरथ्रो समेत मिले 6 रन ने निर्णायक भूमिका निभाई. हालांकि अब पूर्व अंपायर साइमन टॉफेल ने 6 रन देने के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं.

आईसीसी पैनल के सबसे बेस्ट अंपायर्स में से एक रहे साइमन टॉफेल का मानना है कि वहां 6 की बजाए 5 रन दिए जाने चाहिए थे. टॉफेल ने कहा, ”जब गुप्टिल ने थ्रो किया उस वक्त राशिद पहला रन पूरा करके अपनी क्रीज में पहुंचे थे, ऐसे में अंपायर को उसका ध्यान रखते हुए 5 रन ही देने चाहिए थे.”

टॉफेल ने कहा, ”साफ तौर पर अंपायर से गलती हुई और इसका फायदा इंग्लैंड को मिला, क्योंकि ना सिर्फ एक रन एक्स्ट्रा इंग्लैंड के खाते में जुड़ा बल्कि स्टोक्स भी स्ट्राइक पर वापस आ गए.” अगर उस वक्त इंग्लैंड को 6 की बजाए 5 रन ही दिए जाते तो उसे आखिरी दो गेंद में चार रन की जरूरत होती.

वहीं फाइनल मुकाबले में ना सिर्फ मैच टाई हुआ बल्कि सुपर ओवर में भी दोनों टीमों का स्कोर बराबर रहा. इसके बाद मैच में ज्यादा बाउंड्री स्कोर करने के आधार पर इंग्लैंड वर्ल्ड कप विजेता बनने में कामयाब हुआ. मैच के बाद इंग्लैंड के कप्तान इयान मोर्गन ने भी माना कि खिताब जीतने के मामले में किस्मत उनके साथ रही.

आ गया बर्षा पंप, अब सिंचाई के लिए न बिजली की जरूरत और न ही ईंधन की

खेती के लिए सबसे ज्यादा जरूरी क्या है ? आप कुछ देर के लिए सोचेंगे और कहेंगे सिंचाई की सुविधा, क्योंकि इसके बिना सारी तैयारियां अधूरी रह जाती है। और अगर हम आपको कहें कि सिंचाई के लिए हमारे पास एक ऐसा वाटर पंप है जो बिना बिजली और किसी ईंधन के ही चलती है तो क्या कहेंगे?

आज हम इसी खास तकनीक के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका विकास नीदरलैंड में हुआ है और जो हमारे पड़ोसी देश नेपाल में सफलतापूर्वक काम कर रहा है। इस तरह की तकनीक भारत के लिए भी वरदान साबित हो सकती है जहां आज भी चौबीस घंटे बिजली की बात तो छोड़ दीजिए कई जगहों पर तो बिजली पहुंचती भी नहीं है।

ऐसे इलाकों के लिए यह तकनीक कृषि के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। यह वाटर पंप जिस तकनीक पर काम करता है उसके लिए भारत की परिस्थिति बिल्कुल सही जगह है। तो चलिए अब विस्तार से इस खास तकनीक से लैस पंप के लिए बात करते हैं।

बर्षा पंप से किसानों के खेतों में होगी वर्षा

हाल में नीदरलैंड के शोधकर्ताओं ने खेतों में सिंचाई को बेहद आसान बनाने के लिए एक नया सिंचाई पंप विकसित किया है। यह एक ऐसा बर्षा पंप है, जिसके लिए किसानों को बिजली या ईंधन का खर्च भी नहीं उठाना पड़ेगा।

बस किसानों को इस पंप को नहर या नदी में रखना होगा और इसके सहारे किसान आसानी से अपने आस-पास के खेतों में सिंचाई कर सकेंगे। किसानों के लिए यह एक तरह का बिल्कुल नया उपकरण है, जिसके इस्तेमाल से किसानों को सिंचाई संबंधी एक बड़ी समस्या दूर हो सकेगी।

किसानों के लिए सिंचाई बड़ी समस्या

अपने खेतों में सिंचाई के लिए किसानों को बड़ी मुश्किल उठानी पड़ती है। एक तरफ जहां कुछ किसान आस-पास की नदियों, नालों या नहर में सिंचाई पाइप लगाकर डीजल पंप के जरिये अपने खेतों की सिंचाई करते देखे जा सकते हैं, वहीं दूसरी ओर किसान अन्य जटिल तरीकों से खेतों से सिंचाई की व्यवस्था करते हैं, ताकि अपने खेतों में सही स्थिति और समय पर रोपाई कर सकें।

असल में बर्षा पंप का निर्माण नीदरलैंड की कंपनी क्यूस्टा ने किया है। इस बर्षा पंप के लिए यूरोपीय संस्था क्लाईमेट केवाईसी की ओर से यूरोप की इस साल की सबसे बड़ी तकनीकि खोज का अवॉर्ड दिया गया है।

शोधकर्ताओं की मानें तो यह एक तरह का बिल्कुल नया उपकरण है और विकासशील देशों में यह तकनीक बहुत कारगार साबित होगी। चूंकि पहला बर्षा पंप इस साल नेपाल में लगाया गया है और नेपाल में बारिश को बर्षा कहा जाता है। इसलिए इस पंप का नाम बर्षा रखा गया है।

ऐसे चलता है बर्षा पंप

असल में यह पंप पानी की लहरों से चलता है। लहरों से टकराकर बर्षा पंप का एक बड़ा सा पहिया घूमता है और इससे वायु का दबाव बनता है। इस वायु के दबाव की वजह से ही पानी को एक नली के जरिये किसानों के खेतों तक पहुंचा देता है।

ऐसे में नदी, नहर या नालों में पानी की लहर की गति ही इस पंप के लिए कारगार होती है और जितनी तेज पानी की रफ्तार होगी, उतनी दूर तक किसानों के खेत तक पानी पहुंच सकेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदूषण न फैलाने की वजह से यह बर्षा पंप पर्यावरण के भी अनुकूल है। अब एशिया में ही नहीं, बल्कि लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में इस बर्षा पंप के निर्माण की तैयारी शुरू की जा रही है।

शोधकर्ताओं की मानें तो इस बर्षा पंप के जरिए फसल का उत्पादन 5 गुना तक बढ़ाया जा सकता है। यह पंप एक लीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से पानी छोड़ता है। पानी की रफ्तार अच्छी होने पर इस पंप के जरिये 82 फीट की ऊंचाई तक भी पानी को पहुंचाया जा सकेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि एक साल में ही इस पंप की पूरी लागत वसूल हो जाएगी।

बर्षा पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो भी देखें

अनपढ़ किसान का देसी जुगाड़, खेतों की जुताई के लिए कबाड़ से बना लिया Power Tiller

आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है, इस कहावत को सच कर दिखाया है विष्णुगढ़ के उच्चघाना निवासी रमेश करमाली ने। उसके छोटे भाई ने दो भैंस बेच दी तो रमेश को खेती के लिए परेशानी होने लगी। खेती के लिए दूसरों से बैल मांगना पड़ता था। अनपढ़ रमेश ने महज आठ हजार रुपये जुगाड़ कर खेती ही नहीं शुरू की बल्कि पावर टीलर बनाकर खेती के लिए बैल और भैंसों का झंझट भी दूर कर दिया।

यह चमत्कार कबाड़ में फेंके उस स्कूटर के इंजन से हुआ जिसे किसी ने उसे तीन हजार रुपये में कबाड़ के रूप में बेच दिया था। पेशे से मोटर मैकेनिक रमेश ने इसमें थोड़ा बदलाव किया और फिर घर में टीलर तैयार कर खेतों की जुताई शुरू कर दी।

रमेश का पावर टीलर दस गुणा कम दर पर खेतों की जुताई कर रहा है। ढाई लीटर पेट्रेल में दस कट्ठा जमीन अर्थात पांच घंटे की भरपूर जुताई इस मशीन से की जा सकती है। रमेश की यह मशीन पूरे गांव के लिए प्रेरणादायी बन गई है।

कंपनी में नहीं मिली मैकेनिक की नौकरी

रमेश करमाली तीन भाई बहनों में सबसे बड़ा है। तीन साल की उम्र में वह पिता के साथ पुणे चला गया। पिता मजदूरी करते थे, वह भी 90 -साल की उम्र में 1995 में बजाज शोरूम में काम पर लगा दिया गया। 2005-6 में उसे पुणे में ही बजाज कंपनी में प्रशिक्षण पाने का मौका मिला।

वहां बजाज के दोपहिया वाहन की सेल्फ की गड़बड़ी ठीक करने पर उसको पुरस्कृत किया गया। नौकरी का भी ऑफर हुआ लेकिन पढ़ा-लिखा नहीं होने के कारण उसे नौकरी नहीं मिली। वह वापस अपना गांव आ गया और ऑन काल मोटरसाइकिल रिपेयिरंग का काम करता है।

पैसे के अभाव ने सुझाया उपाय

छोटे भाई द्वारा खेती के लिए दो भैंस बेच देने पर रमेश परेशान था। इसी उधेड़बुन में उसे पोर्टेबल पावर टीलर बनाने की एक तरकीब आई। इसके लिए सबसे पहले 20 इंच बाय 41 इंच का चेचिस बनाया। अब इंजन और हैंडल की जरूरत पूरी करने के लिए कबाड़ में तीन हजार रुपये में मिले स्कूटर का इंजन लगा दिया। गेयर बॉक्स, हैंडल और दोनों चक्कों को निकाल कर बनाए उस चेचिस में फिट कर दिया। बाद में उसे स्टार्ट कर चला कर देखने पर उसके मुताबिक पावर टीलर सही निकला।

इंग्लैंड ने जीता फाइनल, लेकिन फिर भी नहीं मिल सका वर्ल्ड कप, जानें वजह

लॉर्ड्स के मैदान पर रविवार को वर्ल्ड कप 2019 का फाइनल मैच मेजबान इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया। जहां इंग्लैंड ने जीत दर्ज कर विश्व विजेता का खिताब अपने नाम किया।

ऐसे में 23 साल बाद क्रिकेट जगत को पहला नया वर्ल्ड चैंपियन मिला। इस जीत के साथ इंग्लैं  पर पैसों की बारिश होना तो शुरु हो गई, लेकिन उन्हें असली वर्ल्ड कप की ट्रॉफी नहीं मिली। चलिए आपको बताते हैं ऐसा क्यों हुआ।

इसलिए नहीं मिली असली ट्रॉफी

इस बार आईसीसी ने वर्ल्ड कप के लिए एक करोड़ डॉलर यानि लगभग 70.12 करोड़ रुपये की इनाम राशि रखी थी। ऐसे में इंग्लैंड को विश्व विजेता बनने पर 40 लाख डॉलर यानि लगभग 28 करोड़ रुपए की इनामी राशि दी गई।

वहीं इंग्लैंड को असली वर्ल्ड कप की ट्रॉफी नहीं दी गई। दरअसल, वर्ल्ड कप की असली ट्रॉफी आईसीसी के पास ही रहती है। जो टीम वर्ल्ड कप का फाइनल जीतती है उसे इसकी रेप्लिका ही दी जाती है। आईसीसी विजेता टीम को जश्न मनाने के लिए असली वर्ल्ड कप की ट्रॉफी नहीं देता है।

इतना वजन होता है ट्रॉफी का

न्यूजीलैंड टीम भले ही विजेता नहीं बन सकी, लेकिन उन्हें 2 मिलियन डॉलर यानि लगभग 14 करोड़ रुपये दिए गए। वहीं सेमीफाइनल में हारने वाली टीम इंडिया और ऑस्ट्रेलिया  को साढ़े 5-5 करोड़ रुपये दिए गए।

वहीं बात अगर वर्ल्ड कप की ट्रॉफी की करें तो इसका वजन 11 किलो है जो कि सोने और चांदी से मिलकर बनी है। इसकी ऊंचाई 60 सेंटीमीटर है, जिसे पहली बार साल 1999 में बनाया गया था। इसमें बीच में एक ग्लोब है जो कि सोने का बना हुआ है। साथ ही 3 सटंप्स के प्रतीक रूप में स्तंभ बने होते हैं।

ऑटोमेटिक कार खरीदने से पहले जरूर पढ़ ले ये खबर, नहीं तो पछताना पड़ेगा

कुछ सालों पहले तक AMT कारों के बारें में किसी ने सुना नहीं था और कोई जनता भी नहीं था। लेकिन जब भारत में AMT कारों की एंट्री हुई तो लोगों को ये इतनी पसंद आई कि आज हर किसी AMT कारें ही खरीदना पसंद करता है।

इसकी सबसे बड़ी वजह बेहतर माइलेज और कीमत का कम होना। आज हर बड़ी कार कंपनी चाहे वो मारुति सुजकी हो, हुंडई हो, टाटा मोटर्स हो या फिर रेनो हो, हर कोई मॉस सेगमेंट में AMT कारें ऑफर कर रहा है। लेकिन आपको बता दें कि ये ट्रेडिशनल ऑटोमैटिक कारें नहीं होती,

CVT और DCT के मुकाबले ये काफी अलग होती हैं। AMT बेसिकली मैन्युअल ट्रांसमिशन ही होते हैं लेकीन एक AMT किट की मदद से इन्हें ऑटोमैटिक बना दिया जाता है ताकि वो एक्सपीरियंस आपको मिल सके।

AMT कार की पहली बड़ी दिक्कत

जब भी आप चढ़ाई पर या पहाड़ी इलाकों पर इसे लेकर जायेंगे और अगर किसी समय आपको गाड़ी रोकनी पड़े और फिर वापस चढ़ाई करनी पड़े तो गाड़ी रोलबैक मारती है, यानी पीछे की तरफ जाती है, D मोड पर भी गाड़ी आगे जाने की जगह पीछे की तरह जाती है जोकि खतरनाक साबित हो सकता है।

वही मैन्युअल मोड में भी यह असरदार साबित नहीं होती। इतना ही नहीं नीचे की तरह यानी ढलान पर अगर गाड़ी रोकते हैं और रिवर्स गियर में डालकर पीछे की तरफ जाते हैं तो भी गाड़ी आगे की तरफ जाती है जोकि नहीं होना चाइये।

AMT कार की दूसरी बड़ी दिक्कत

किसी भी AMT कार में गियर अप-शिफ्ट जल्दी होते हैं जबकि डाउन शिफ्ट लेट होते हैं, ऐसे में अगर आपको ज्यादा पावर या ज्यादा टॉर्क की जरूरत होती है तो यहां AMT कारें धोखा दे जाती हैं। मैन्युअल कार से हाइवे पर ओवर टेक करने में दिक्कत नहीं होती लेकिन AMT कारों से यह मुश्किल हो जाता है।

AMT कार की तीसरी बड़ी दिक्कत

AMT कारों में गियर शिफ्टिंग स्मूथ नहीं होती, जरकी गियर शिफ्ट की वजह से कभी-कभी ड्राइविंग के दौरान झटके महसूस होते हैं जिसकी वजह से गाड़ी चलाने का मज़ा खराब हो जाता है, और यह कई बार आपके एक्सलेरेशन को दबाने पर भी निर्मर करता है। CVT और DCT के मुकाबले AMT बिलकुल भी स्मूथ नहीं होते, मैन्युअल के मुकाबले AMT कारों की कीमत करीब 50 हजार रुपये तक ज्यादा होती है ।

ये है भारत की सबसे सस्ती बाइक मार्केट, सिर्फ 15000 रुपए में मिल जाती है Bullet से लेकर Pulsar जैसी बाइक

हर लड़के को बाइक चलाना पसंद होता है लेकिन आजकल बाइक्स इतनी महंगी होती हैं कि उन्हें खरीदने से पहले 4 बार सोचना पड़ता है क्योंकि बाइक खरीदने के बाद उन्हें चलाना भी काफी खर्चीला होता है।

तो आज हम आपको एक ऐसे बाजार के बारे में बताएंगे जहां आपको आपकी मनचाही बाइक मात्र 15,000 रूपए में मिल जाएगी, लेकिन इसके लिए आपको सिर्फ एक शर्त माननी होगी। यहां बाइक खरीदने के लिए आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है।

हम बात कर रहे हैं दिल्ली के करोल बाग के बाइक मार्केट की। करोल बाग का ये बाजार सबसे बड़ा सेकेंड हैंड मोटर व्हीकल बाजार है। यहां आपको अच्छी कंडीशन वाली सेकेंड हैंड बाइक्स मिल जाती है कई बार तो लोगों को ऐसी बाइक मिल जाती है जो सिर्फ 150-200 किमी चली होती है।

इन बाइक्स के डीलर्स का कहना है कि कई बार तो लोग यहां अपनी नई बाइक्स बेच जाते हैं। यहां पर Royal Enfield से लेकर Pulsar जैसी बाइक्स आपको बेहद मामूली कीमत पर मिल जाती हैं।लेकिन अगर आप आप अभी भी दुविधा में हैं तो आपको बता दें कि आपको यहां बाइक के साथ उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और डीलर्स की तरफ से वारंटी भी दी जाती है।

आपको मालूम हो कि वैसे Royal Enfield जैसी बाइक्स की शोरूम कीमत ही 1 लाख रूपए तक होती है और इसी तरह पल्सर की कीमत 74000रूपए से शुरूआत होती है। तो अगर आप अभी तक पैसे की वजह से बुलेट और पल्सर जैसी बाइक चलाने की ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाए तो इस बाजार में एक बार जरूर आएं।