ये है दूध पैकिंग वाली मशीन ,एक मिनट मे त्यार करती है 52 पैक्ट

मिल्क पैकिंग मशीन बहुत ही उपयोगी मशीन है| आप मिल्क पैकिंग मशीन के द्वारा आसानी से शुद्ध दूध की पैकिंग कर सकते है | इसे आसपास के बाजार में आसानी से बेच सकते हैं | दूध की इलवा इस मशीन के साथ कोई भी द्रव जैसे पानी ,सॉफ्ट ड्रिंक, तेल आदि की पैकिंग कर सकते है |

यह मशीन किसान के लिए बहुत ही लाभदायक है | इस मशीन से वह आसानी से दूध की पैकिंग कर सकते है | खुले दूध को हम ज्यादा समय तक नहीं रख सकते | लेकिन दूध की पैकिंग कर आप इसे काफी समय तक रख सकते है|  साथ में किसान को खुले दूध की कीमत कम मिलती है | वह दूध की पैकिंग करके इसे एक ब्रांड के नाम से बेच सकते है|  पैकिंग किये हुए दूध की कीमत भी अच्छी मिलेगी|

कहाँ से खरीदें यह मशीन

अगर आप इस मशीन को खरीदना चाहते है तो आप गूगल पर “LIQUID FILLING PACKAGING MACHINES” लिख कर सर्च कर सकते है | बहुत सारी कंपनी यह मशीन त्यार करती है | इसके इलावा भी हम एक कंपनी की डिटेल निचे दे रहे है यहाँ से से आप ये मशीन खरीद सकते है |  जिसकी सारी विशेषताएं और जानकारी निचे दी गई है |

मशीन की कीमत 1 .25 लाख है| यह मशीन एक मिन्ट में 50 से 52 पैक्ट बना देती है|  मशीन को Single Phase, 230 V, AC 50 Hz. पावर की जरूरत होती है|  मशीन का वज़न 250 kg (approx). होता है |

Address: Creativeflex Engineering
Hyderabad-500037, Telangana, India
PH NO- 08048019661

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें;

ये शख्स साल में कमा रहा 80-90 लाख रुपए, 5 साल पहले शुरू किया ये बिजनेस

यहां के यतीन्द्र कश्यप हेचरी और मछली पालन से साल में 80 से 90 लाख रुपए की इनकम कर एरिया किसानों और बेरोजगारों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने हुए हैं। इससे वे अच्छी आय कर रहे हैं। कश्यप मछली पालन को एक बिजनेस मान रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मछली पालन उनका पुस्तैनी पेशा है। कई पीढ़ियों से उनके यहां ये बिजनेस होता आया है। लेकिन वे इस पेशे में वर्ष 2012 में आए और मछली पालन के साथ हेचरी को टैग किया। हालांकि, शुरू में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन दो साल की मशक्कत के बाद आज उनकी इनकम अच्छी हो रही है।

सरकारी तौर सुविधा उपलब्ध

सरकार के द्वारा हेचरी और तालाब पर 50 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था की गई है। एक हेचरी लगाने में 12 से 15 लाख का खर्च आता है। लेकिन व्यवसाय चल जाने पर आमदनी इतनी अधिक होती है कि लोग खुद यह जोखिम उठा लेते हैं। शुरू के दो साल काफी सावधानी से निकालने पड़ते हैं।

पांच साल पहले शुरू किया था बिजनेस

यतींद्र ने बताया कि उन्होंने पांच साल पहले हेचरी का बिजनेस शुरू किया था। जिसमे दो साल तक जानकारी के अभाव में उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। कई स्पेशलिस्ट से मिलकर इस बिजनेस के बारीकियों को जानने के बाद आज उनकी इनकम अच्छी है। उनकी हेचरी से एक हैच में जितना मछली का बच्चा पैदा होता है उसका बाजार मूल्य तीन से पांच लाख रुपया होता है।

जबकि महीने में वैसे पांच हैच कराए जाते हैं जो आमदनी के रूप में लगभग 20 लाख रुपया देता है। पूरे साल में इसकी डिमांड बाजार में छह महीने तक रहती है। वे 25 एकड़ में फैले तालाबों से 50 टन मछली पालन करते हैं। जो बाजार के हिसाब से लगभग 75 लाख रुपए इनकम कराता है।

इनसे प्रेरित होकर इन्होंने शुरू किया मछली पालन

हेचरी और मछली पालन से होने वाले वाले लाभ को देखकर क्षेत्र के कई किसानों ने अपनी जमीन पर तालाब खुदवाकर मछली पालन शुरू किया और आज वे काफी खुशहाल हैं। इस बिजनेस को करने वालों की मानें तो यहां दस हजार एकड़ से भी अधिक भूमि मछली पालन के लिए उपयुक्त है।

यदि सरकार यहां किसानों को सहूलियत और बढ़ावा दे तो पूरे बिहार में सबसे ज्यादा मछली का उत्पादन यहां हो सकता है। लेकिन सरकारी कर्मियों की लापरवाही और विभागीय उदासीनता के कारण लोग इस बिजनेस में आने में दिलचस्पी कम ले रहे हैं।

किसान बेटे ने की खुदकुशी, अब पोते को पढाने के लिए दो रही है गंदी बोतलें

एक 62 साल की बूढ़ी महिला जिसका नाम बलबीर कौर है, उसके हंसते-खेलते परिवार को बेटे के एक्सीडेंट ने तोड़कर रख दिया। पांच एकड़ जमीन, एक ट्रैक्टर आैर कार की मालकिन के पास आज कुछ भी नहीं है। बेटे के इलाज के लिए कर्ज लिया था, फिर भी वो ठीक नहीं हुआ।

ठीक नहीं होने से तंग आकर 2016 में घर में ही फंदा लगाकर उसने मौत को गले लगा लिया। इतना सब होते हुए भी उसने हौसला रखा आैर सोचा कि कर्ज देने वाले तंग न करें इसलिए जमीन, ट्रैक्टर, कार सब बेच दिया आैर लोगों का कर्ज चुका दिया।

    • घर की खराब आर्थिक हालत को देखते हुए बहू भी 3 जुलाई 2016 को 10 साल के बेटे को छोड़कर चली गई। अब बुजुर्ग बलबीर गंदी बोतलें धोकर जो पैसे मिलते हैं उससे पोते को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं।
    • उसे उम्मीद है कि पोता पढ़-लिखकर फिर से अच्छे दिन लाएगा, भले ही वो दिन देखने के लिए वह जिंदा रहे या नहीं। पोता भी उम्मीदों पर खरा उतर रहा है। हाल ही में पांचवीं क्लास उसने 97% नंबरों के साथ पास की है आैर दादी के साथ खाली समय में बोतलें भी साफ करवाता है।

    गेहूं, धान से भरे रहने वाले बरामदे में आज गंदी बोतलों के क्रेट

    • बुजुर्ग बलबीर कौर ने पुराने दिन याद करते हुए बताया कि उसका हंसता-खेलता परिवार था। बेटा केसर सिंह पिता के साथ अपनी पांच एकड़ जमीन पर आम किसानों तरह खेती करता और खुशहाल जिंदगी व्यतीत कर रहा था। खेती के लिए ट्रैक्टर समेत हर सामान अपना था। घर में कार भी थी। 2011 में परिवार पर मुसीबतों का कहर टूट पड़ा।
    • बेटे केसर का एक्सीडेंट हुआ और कई साल चले इलाज में आमदनी बंद हो गई। उल्टा सिर पर काफी कर्ज चढ़ गया। बेबस होकर बेटे सुसाइड कर लिया। बहू 10 साल का पोता हमारी झोली में डालकर चली गई। कभी घर के इस बरामदे में जहां गेहूं, धान के बोरे और ट्रैक्टर होता था, वहां गंदी बोतलों के ढेर लगे हैं। इतना कहते ही बलबीर कौर की आंखें आंसुओं से भर जाती हैं।

    कमाई का नहीं है कोई साधन

    • वे बताती हैं कि कमाई का कोई साधन नहीं है। गंदी बोतलें साफ करने बदले प्रति क्रेट पांच रुपए मिलते हैं। अब काम भी नहीं होता। बहुत कोशिश करने पर कभी 60 तो कभी पोते के हाथ बंटाने से 75 रुपए दिहाड़ी बन जाती है। इसी से परिवार का गुजारा चला रही हूं।
    • मन में दुख है कि किसी सरकार ने परिवार की सुध नहीं ली और न ही किसी योजना के तहत मदद की। आैर कुछ नहीं तो पोते की आगे की पढ़ाई का ही कुछ इंतजाम हो जाए तो सुकून मिल सके। बलबीर कौर के पति अजैब सिंह भी बीमार रहते हैं।

एक्सीडेंट के समय कार में ऐसे काम करते हैं एयरबैग्स, साथ ही जानिये ABS के फायदे

आज कल गाड़ियों में एयरबैग्स अनिवार्य हो चुके हैं, दुर्घटना होने पर एयरबैग्स काफी मददगार साबित होते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि कार में एयरबैग्स कैसे काम करते हैं और कैसे ड्राईवर और पैसेंजर की जान बचती है।

ऐसे काम करते हैं एयरबैग्स

भारत सरकार ने एयरबैग जैसे अहम सेफ्टी फीचर को स्टैंडर्ड फीचर में शामिल किया है। सुरक्षा के लिहाज से एयरबैग्स काफी उपयोगी माने गये हैं। अक्सर देखने में आया है कि एक्सीडेंट होने पर ड्राइवर और बगल में बैठे व्यक्ति की मौत हो जाती है।

लेकिन अगर कार में ड्राईवर और पैसेंजर साइड एयरबैग्स की सुविधा हो तो इन हादसों के काफी हद तक बचा जा सकता है। कार में टक्कर लगने से ठीक पहले एयरबैग अपने आप खुल जाता है। एयर बैग्स खुलने में एक सेकंड से भी कम समय लगाता है।

एक्सीडेंट की स्थिति में सेंसर एक्टिव होते हैं जिससे है एयरबैग्स को खुलने की कमांड देते हैं, कमांड मिलते ही स्टेरिंग के नीचे मौजूद इन्फ्लेटर एक्टिव हो जाता है। इन्फ्लेटर सोडियम अज़ाइड के साथ मिलकर नाइट्रोजन गैस पैदा करता है। ये गैस एयरबैग्स में भर जाती है जिससे वह फूल जाता है। टक्कर लगने या गाड़ी के पलटने की स्थिति में आपकी बॉडी झटका खाकर एयरबैग से टकराती है जिससे आप बच जातें हैं।

ऑटो एक्सपर्ट की राय

ऑटो एक्सपर्ट टूटू धवन बनाते हैं कि अगर आपका बजट है तो आपको एयरबैग्स वाली कार ही खरीदनी चाइये क्योकिं एक्सीडेंट होने की सूरत में आपकी जान बाच सकती है, क्योकिं नॉर्मली सभी लोग हाईवे पर यात्रा करते हैं ऐसे में एयरबैग्स वाली कार बेहद जरूरी होती है, इसके अलावा कई बार हाईस्पीड में ब्रेकिंग लगाने की नौबत आती है तो ऐसे में ABS बहुत मददगार साबित होते हैं।

यह भी जानें

जैसे हर चीज एक समय सीमा के बाद खराब या इस्तेमाल करने लायक नहीं रह जाती ठीक उसी प्रकार एयरबैग्स भी रिप्लेसमेंट मांगते हैं। हालांकि एयरबैग के फंक्शन के लिए जिन पार्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है वे काफी मजबूत होते हैं, लेकिन काफी हद तक एयरबैग इग्नाइटर पर भी निर्भर करता है।

एयरबैग खुलने से भी जाती है जान

टक्कर के बाद एयरबैग के खुलने की रफ्तार करीब 322 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। कई बार देखने में आया है की इतनी रफ़्तार से एयर बैग के खुलने से लोगों की जान भी गयी है। भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बघौला गांव के समीप आगे चल रहे एक कैंटर ने अचानक ब्रेक लगा दी, जिससे पीछे आ रही गाड़ी कैंटर से टकरा गई। दुर्घटना में कार चालक को गंभीर चोटें आईं। दुर्घटना के दौरान गाड़ी में लगा एयर बैग खुलने से उसके तेज प्रेशर से ड्राईवर का लीवर फट गया जिससे उसकी मृत्यु हो गयी।

जानिये कार में ABS कैसे काम करता है

कार में एयरबैग्स कैसे काम करता है इस बारे में हमने विस्तार से जान लिए अब बात करते हैं कि आखिर कार में ABS (एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम)किस तरह से अपना काम करता है। अचानक से ब्रेक लगाने पर ABS फीचर पहियों को लॉक नहीं होने देता इस वजह से ड्राइवर कार पर कंट्रोल नहीं खोता और बिना फिसले और असंतुलित हुए गाड़ी दिशा बदल लेती है और रुक जाती है। जबकि बिना ABS वाली कार में अचानक ब्रेक लगाने से गाड़ी अनियंत्रित होकर अपना संतुलन खो देती है, जिससे दुर्घटना हो जाती है ।

ABS का इतिहास

एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम साल 1929 मे Aircraft के लिए डिजाईन किया गया था लेकिन कारों में इसका इस्तेमाल सबसे पहले 1966 मे किया गया था ।धीरे-धीरे 1980 के बाद से ABS को कार मे लगाया जाने लगा और आज की तारीख मे ABS System इतना Popular है की हर नयी कारो मे आपको ABS System मिल जाएगा।

सिर्फ 20 रुपए खर्च करके घर पर ही बना सकते हैं वॉटर टैंक अलार्म

पानी की टंकी में कई बार पानी फुल हो जाने पर समझ नहीं आता है। ऐसे में पानी टंकी से गिरता रहता है। इस प्रॉब्लम को दूर करने के लिए इस वीडियो में आज आप देखेंगे वॉटर टैंक अलार्म बनाने का तरीका। इस अलार्म को सिर्फ 20 रुपए खर्च करके बनाया जा सकता है।

वॉटर टैंक अलार्म बनाने के लिए एक पुराना मोबाइल चार्जर, एक बाइक इंडीकेटर बजर और वायर की जरूतर पड़ेगी। सबसे पहले ग्लू की मदद से मोबाइल चार्जर के ऊपर बाइक इंडीकेट बजर को चिपका दें। चार्जर और बजर के रेड वायर्स को आपस में जोड़ लें और काले वायर्स को खुला छोड़ दें।

वीडियो देखे

अब खुले वायर्स में एक्स्ट्रा वायर जोड़ लें। इसके बाद चार्जर को घर के अंदर स्विच में लगा लें। और लंबे वायर को पानी की टंकी में सबसे ऊपर लगा दें। जैसे ही टंकी का पानी फुल होकर इस वायर के मुंह तक पहुंचेगा वैसे ही घर में लगा बजर बजने लगेगा।

ऐसे करें ड्राईफ्रूट का बिजनेस, होगी 40 हजार रुपए महीना तक इनकम

ड्राई फ्रूट हर घर की बेसिक जरूरत है। खासकर फेस्टिवल टाइम में ड्राईफ्रूट सबसे ज्यादा गिफ्ट के तौर पर एक्सचेंज किया जाता है। इंडियन फैमिली की इसी बेसिक जरूरत पर अपना बिजनेस खड़ा कर सकते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप ड्राई फ्रूट का बिनजेस शुरू 40 से 50 हजार रुपए महीना कमा सकते हैं।

शुरू कर सकते हैं ड्राईफ्रूट का बिजनेस

ड्राईफ्रूट का बिजनेस शुरू करने के लिए दुकान चाहिए होगी। अगर आपके पास अपनी दुकान है तो आप किराए से बच जाएंगे। वहीं, आप कि‍राए पर दुकान लेकर पर भी काम शुरू कर सकते हैं।

आप अपने एरिया के आसपास दुकान ले सकते हैं। दुकान लेने से पहले यह जरूर देख लें कि आपकी दुकान के आसपास कितनी दुकानें ड्राईफ्रूट की है। ताकि, आपके लिए सेल करना आसान हो।

चाहिए होंगे ये लाइसेंस

  • दुकान चलाने और बिजनेस करने के लिए आपको जीएसटी नंबर चाहिए होगा। जीएसटी नंबर जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद मिल जाएगा।
  • अगर किराए की दुकान पर कारोबार कर रहे हैं तो रेन्ट एग्रीमेंट चाहिए होगा। एमसीडी से दुकान चलाने का लाइसेंस भी लेना होगा।
  • फूड लाइसेंस सरकारी फूड अथॉरिटी एफएसएसएआईएस से लेना होगा।

होलसेल बाजार से खरीद सकते हैं दाल

अपने एरिया के ड्राईफ्रूट के होलसेल बाजर से दाल मंगा सकते हैं। ड्राईफ्रूट इंपोर्टर से भी खरीद सकते हैं। इनकी जानकारी ऑनलाइन मिल जाएगी।

इन्वेस्टमेंट और कमाई

खारी बावली में ड्राईफ्रूट और अनाज के होलसेलर सतिंदर जैन ने बताया कि ड्राईफ्रूट का बिजनेस 5 लाख रुपए के इन्वेस्टमेंट से शुरु किया जा सकता है। 5 लाख रुपए के इन्वेस्टमेंट में हर महीने 40 से 50 हजार रुपए आसानी से कमाए जा सकते हैं। जैन ने कहा कि ड्राईफ्रूट बेचकर रोजाना आसानी से 1,500 से 2,000 रुपए की सेल हो जाती है।

इतना मिलता है मार्जिन

होलसेल बाजार से लेकर रिटेल में 100 रुपए की सेल में 10 से 25 रुपए का मार्जिन मिलता है।

खड़ा कर सकते हैं अपना ड्राईफ्रूट ब्रांड

अपनी पैकेजिंग मशीन खरीदकर ब्रांड नाम के साथ भी ड्राईफ्रूट बेच सकते हैं। ड्राईफ्रूट की क्‍वॉलिटी अच्छी होने पर लंबे समय में इसका फायदा मिलता है।

ऑनलाइन भी बेच सकते हैं ड्राईफ्रूट

अपना ब्रांड बनाने पर ऑनलाइन मार्केट जैसे बिग बास्केट, अमेजन पैन्ट्री जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी ड्राईफ्रूट बेच सकते हैं।

ऑनलाइन कैसे बेचें प्रोडक्ट

कैसे जुड़ सकते हैं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कारोबारी को रजिस्टर कराना होगा
  • कारोबारी को पैन, जीएसटी और बैंक अकाउंट की डिटेल देनी होगी
  • कंपनी सेलर के साथ एमओयू या करार भी करती है
  • करार के बाद आप वेबसाइट पर अपने प्रोडक्ट और साड़ी की फोटोग्राफ अपलोड कर सकते हैं।
  • वैरिफिकेशन के बाद प्रोडक्ट वेबसाइट पर दिखने लगते हैं।
  • ज्यादातर कंपनियां सेलर से प्रोडक्ट ऑनलाइन बिकने के बाद कारोबारी से 1 से 9 फीसदी कमीशन लेती हैं।
  • ऑनलाइन पेमेंट में प्रोडक्ट कस्टमर के पास पहुंचने के बाद सेलर यानी कारोबारी के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

सिर्फ 2 लाख में शुरू करें टोमेटो सॉस बनाने का यूनिट ,4 लाख की होगी कमाई

वैसे तो अपना बिजनेस शुरू करना कौन नहीं चाहता। नौकरी करने वाले लोग भी अपना बिजनेस कर कमाना चाहते हैं, लेकिन पैसा और तकनीकी समझ न होने के कारण बिजनेस शुरू करने से लोग हिचकते हैं, लेकिन हम आपको एक ऐसे बिजनेस के बारे में बताने जा रहे हैं,

जिसे शुरू करने के लिए ज्‍यादा पैसे की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि मार्केट में डिमांड होने की वजह से बिजनेस के चलने के भी पूरे चांस हैं। इतना ही नहीं, इस बिजनेस को सरकार भी पूरा सपोर्ट करती है और आपको लोन दिलाने में मदद करती है।

शुरू करें टोमेटो सोस मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट

आप जब पिज्‍जा, बर्गर या समोसे लेते हैं तो उसके साथ सोस या कैचअप की भी जरूरत महसूस करते हैं। सोचिए, अगर आप टोमेटो (टमाटर) सोस मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट लगा लें तो आपका बिजनेस कैसा होगा। डिमांड को देखते हुए इस बिजनेस के चलने के पूरे चांस हैं।

क्‍या आएगी प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट

जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल ही प्रधानमंत्री मुद्रा स्‍कीम लॉन्‍च की है। इस स्‍कीम के तहत बेरोजगारों को बिजनेस शुरू करने के लिए लोन दिया जाता है। लोन किस तरह के प्रोजेक्‍ट को मिल सकता है। उससे संबंधित कुछ प्रोजेक्‍ट प्रोफाइल भी वेबसाइट पर अपलोड किए गए हैं।

इसके मुताबिक यदि आप टोमेटो सोस मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट लगाने चाहते हैं तो आपके पास लगभग 1 लाख 95 हजार रुपए रुपए होने चाहिए। जबकि आप 1.50 लाख टर्न लोन और लगभग 4.36 लाख रुपए वर्किंग कैपिटल लोन ले सकते हैं। यानी कि प्रोजेक्‍ट की कॉस्‍ट लगभग 7.82 लाख रुपए होगी।

कितनी हो सकती है इनकम

मुद्रा की प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट बताती है कि इस प्रोजेक्‍ट से आप साल भर में लगभग 30 हजार किलोग्राम टोमेटो सोस तैयार कर सकते हैं और इस पर सालाना प्रोडक्‍शन कॉस्‍ट के तौर पर आपका लगभग 24 लाख 37 हजार रुपए लगेगा,

जबकि यदि यह 30 हजार किलोग्राम सोस आप 95 रुपए प्रति किलोग्राम के रेट से बाजार में सप्‍लाई करते हैं तो आपका सालाना टर्नओवर 28 लाख 50 हजार रुपए होगी। यानी कि आपको लगभग 4 लाख 12 हजार रुपए की इनकम होगी। जो अगले साल से बढ़ती जाएगी।

इन 5 चीजों में होता है चिकन से ज्यादा प्रोटीन

डायटीशियन अमिता सिंह कहती हैं कि 100 ग्राम चिकन में 20 ग्राम प्रोटीन होता है। यहां बताई जा रही चीजों में उससे ज्यादा प्रोटीन होता है।

इन चीजों को आप किसी भी फॉर्म खाएं आपको उतना ही प्रोटीन मिलेगा। आप इन्हें अपनी डाइट में शामिल करके प्रोटीन की कमी को पूरा कर सकते हैं। इनमें मूंगफली से लेकर राजमा तक शामिल है।

100 ग्राम मूंगफली- 24 ग्राम प्रोटीन

100 ग्राम पनीर- 35 ग्राम प्रोटीन

100 ग्राम बादाम- 22-25 ग्राम प्रोटीन

100 ग्राम चने – 22-25 ग्राम प्रोटीन

100 ग्राम राजमा- 22-25 ग्राम प्रोटीन

विदेश जाने से पहले जान लीजिए पासपोर्ट से जुड़ी खास बातें, जानें कितने तरह के होते हैं पासपोर्ट

सफर में जाने से पहले उससे जुड़ी हुई बातों के बारे में जान लेना चाहिए। जैसे, विदेश जाने से पहले आपको उस देश की थोड़ी जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए।

इससे आपको वहां घूमने-फिरने में बड़ा मजा आएगा। उसी तरह विदेश जाने के लिए आपको वीजा और पासपोर्ट की जरूरत होती है। आज हम आपको पासपोर्ट से जुड़ी बातों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। एक पर्यटक और एक नागरिक होने के नाते आपको ये जरूरी जानकारी होनी ही चाहिए।

क्या है पासपोर्ट

पासपोर्ट एक ऐसा दस्तावेज है जो विदेश यात्रा के लिए अनिवार्य है। इसे सरकार जारी करती है। इस दस्तावेज से पता चलता है कि आप किस देश के नागरिक है। साथ ही आपसे जुड़ी कई जानकारियां इसमें लिखी होती है।

पासपोर्ट में दो कैटेगरी इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड (ECR) और इमिग्रेशन चेक नॉट रिक्वायर्ड (ECNR) होती हैं। हर पासपोर्ट बनवाने वाले व्यक्ति को इनके बारे में जानकारी होना चाहिए। आज हम इस बारे में जानकारी दे रहे हैं।

दो तरह की कैटेगरी

happy tourist young woman holding passport holiday flight ticket standing

क्या होता है ECR पासपोर्ट

यदि आप 10वीं पास नहीं हैं तो आपका पासपोर्ट ECR कैटेगरी में आएगा। इस कैटेगरी में आपका पासपोर्ट आता है तो आपको इंडिया से बाहर जाने पर इमिग्रेशन ऑफिसर से क्लियरेंस लेना होगा। ECR कैटेगरी में पासपोर्ट पेज पर स्टाम्प लगा होता है। इसमें क्लियरली लिखा होता है कि इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड।

किन कंट्रीज के लिए लेना होगा क्लियरेंस

सउदी अरब, कुवैत, ओमान, लीबिया, सीरिया, यमन, मलेशिया, इराक, जोर्डन, ब्रुनेई, इंडोनेशिया जैसे कंट्रीज में जाने के लिए आपको इमिग्रेशन ऑफिसर से क्लियरेंस लेना होगा। हालांकि यदि आप जॉब के पर्पस से इन कंट्रीज में नहीं जा रहे तो फिर आपको इमिग्रेशन क्लियरेंस लेने की जरूरत नहीं है।

क्या होता है ECNR पासपोर्ट

यदि आप 10वीं पास हैं तो आप ECNR कैटेगरी में आएंगे। इस कैटेगरी में आने वाले लोगों को इंडिया से बाहर जाते वक्त इमिग्रेशन क्लियरेंस लेने की जरूरत नहीं होती।

कैसे चेक करें, आपका पासपोर्ट किस कैटेगरी का है?

यदि आप 10वीं पास हैं तो आपका पासपोर्ट आटोमेटिक ECNR कैटेगरी में ही बनेगा, लेकिन यदि आप पासपोर्ट बनवाते समय यह डिकलेयर करते हैं कि आप 10वीं पास नहीं हैं तो आपका पासपोर्ट ECR कैटेगरी में आएगा। इस कैटेगरी में आने पर आपको पासपोर्ट में स्टाम्प लगा मिलेगा। इसमें इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड लिखा होगा।

नीला पासपोर्ट

नीले रंग का पासपोर्ट इंडिया के आम नागरिकों के लिए बनाया जाता है। नीला रंग भारतीयों को रिप्रजेंट करता है और इसे ऑफिशियल और डिप्लोमैट्स से अलग रखने के लिए सरकार ने यह अंतर पैदा किया है। इससे कस्टम अधिकारियों या विदेश में पासपोर्ट चेक करने वालों को भी आइडेंटिफिकेशन में आसानी होती है।

सफेद पासपोर्ट

सफेद रंग का पासपोर्ट गवर्नमेंट ऑफिशियल को रिप्रजेंट करता है। वह शख्स जो सरकारी कामकाज से विदेश यात्रा जाता है उस यह पासपोर्ट जारी किया जाता है।यह ऑफिशियल की आइडेंटिटी के लिए होता है। कस्टम चेकिंग के वक्त उन्हें वैसे ही डील किया जाता है।

मरून पासपोर्ट

इंडियन डिप्लोमैट्स और सीनियर गवर्नमेंट ऑफिशियल्स(आईपीएस, आईएएस रैंक के लोग) को मरून रंग का पासपोर्ट जारी किया जाता है। हाई क्वालिटी पासपोर्ट के लिए अलग से एप्लिकेशन दी जाती है। इसमें उन्हें विदेशों में एम्बेसी से लेकर यात्रा के दौरान तक कई सुविधाएं दी जाती हैं। साथ ही, देशों में जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा इमिग्रेशन भी सामान्य लोगों की तुलना में काफी जल्दी और आसानी से हो जाता है।

ऑयल कंपनियां जल्द ही खोलेंगी 25 हजार नए पेट्रोल पंप,आपके पास है मौका

सरकारी ऑयल कंपनियां जल्द ही 25 हजार नए पेट्रोल पंप खोल सकती हैं। ऑयल मिनिस्ट्री से हरी झंडी मिलने के बाद इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने नए पंप खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने कंपनियों को फिलिंग स्टेशंस शुरू करने के लिए खुद के नियम तैयार करने की छूट दी है।

मिनिस्ट्री से छूट मिलने के बाद कंपनियां अपने हिसाब से नए पेट्रोल पंप डीलर्स नियुक्त कर सकेंगी। बता दें कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले ही सरकारी नियंत्रण से बाहर हो चुकी हैं, ऐसे में डीलर अपॉइंट करने के मामले में सरकारी नियमों का बहुत ज्यादा महत्व नहीं रह गया है। कंपनियां अपनी गाइडलाइन फाइनल भी कर चुकी हैं।

25 हजार लोकेशन पर शुरू होंगे

कंपनियां जल्द ही 25 हजार लोकेशन के लिए डीलर्स अपॉइंट करने का विज्ञापन जारी कर सकती हैं। इनमें से अधिकतर पंप रूरल एरिया में शुरू होंगे। अभी सरकारी कंपनियां के देशभर में 57 हजार आउटलेट हैं। वहीं प्राइवेट फर्म्स के 6 हजार आउटलेट हैं।

हजारों जॉब के मौके आएंगे

सरकार के इस कदम से हजारों लोगों को जॉब मिलेगी। इसके साथ ही सरकारी कंपनियों का नेटवर्क भी बड़ा हो जाएगा। अभी भी 90 परसेंट मार्केट पर इन कंपनियों का कब्जा है। इक्विपमेंट सप्लायर्स, ट्रासंपोर्टर्स और रिटेल नेटवर्क में बड़ी संख्या में लोगों को काम मिलेगा। इन दिनों रिलायंस सहित दूसरे प्राइवेट प्लयेर भी मार्केट में अपने प्रेजेंस बढ़ा रहे हैं।

बिना जमीन के भी करार हो सकेगा

  • नई पॉलिसी के तहत अगर किसी एप्लीकेंट के पास जमीन नहीं है तो भी वह डीलरशिप के लिए अप्लाई कर सकेगा। हालांकि जमीन के मालिक के साथ उसका कॉन्ट्रैक्ट होना चाहिए।
  • एप्लीकेंट्स के अप्लाई करने के बाद ड्रॉ निकाला जाएगा। ड्रॉ में जीतने वाले ओवदक की एलिजिबिलिटी चेक की जाएगी। इसके बाद ही डीलरशिप दी जाएगी।
  • सिक्योरिटी डिपॉजिटी को लेकर भी नियमों में बदलाव कर दिए गए हैं।