ऑनलाइन मंगवाए खाने से निकले 40 मरे हुए कॉकरोच, रेस्टोरेंट मालिक ने मांगी माफी लेकिन…

ऑनलाइन फूड जहां घर से दूर रहने वालों के लिए वरदान है। वहीं कई लोगों के लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं। आए दिन आपको ऐसी खबरें सुनने या देखने को मिलती होंगी जहां ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने पर लोगों को धोखा मिलता है।

आज हम आपको ऐसा ही एक मामला बताएंगे जहां ऑनलाइन फूड मंगवाने पर एक महिला को सिर्फ धोखा मिला।  चीन की एक महिला ने ऑनलाइन फूड ऑर्डर किया। महिला के ऑर्डर आने के बाद जब उसने अपनी फेवरेट डिश खानी शुरू की तब उसके खाने से कई सारे कॉकरोच निकले।

आपको जानकर हैरानी होगी कि महिला द्वारा ऑनलाइन मंगवाई गई डिश से 40 मरे हुए कॉकरोच निकले।यह तो गनीमत है कि महिला ने खाना शुरू ही किया था जब उसे खाने में पड़े कॉकरोच दिख गए।बता दें कि महिला ने बारी-बारी से पूरे 40 कॉकरोच निकाले।

महिला ने डिश से कॉकरोच को निकालकर उन्हें दो अलग-अलग टिश्यू पेपर पर रख दिया जिनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।महिला के साथ डिश के नाम पर हुए इस धोखे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो में दिख रहा है कि महिला कैसे एक-एक कर डिश में से कॉकरोच निकाल रही है। एक अंग्रेजी मीडिया के मुताबिक, महिला का कहना है कि “शुक्र है कि मेरे खाने से पहले ही मुझे कॉकरोच दिख गए।इस घटना के बाद महिला ने रेस्टोरेंट को न केवल शिकायत की बल्कि डिश के लिए दिए पैसों को भी वापस ले लिया।

रेस्टोरेंट के मालिक ने इस बात की माफी मांगी है, लेकिन फिलहाल के लिए रेस्टोरेंट का 15 दिन के लिए बिजनेस सस्पेंड कर दिया गया है। चीन की स्थानीय फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस साथ मिलकर इस मामले की आगे जांच कर रही है।

यूं ही नहीं 100 साल से अधिक उम्र तक जीते जापान के लोग, ये हैं उनकी लम्बी उम्र के राज़

हाल ही में जापान की केन तनाका ने 116 साल की उम्र में कैंसर को मात देकर दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला बनीं और उन्हें गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया। इससे पहले भी यह रिकॉर्ड जापान की ही चियो मियाको के नाम पर था, लेकिन 117 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया।

जापान एक ऐसा देश है जहां लोग काफी लंबे समय तक जीते हैं और इनका हेल्थ भी काफी अच्छा होता है। जहां दूसरे देशों में लोग 40 साल तक आते-आते कई बीमारियों से घिर जाते हैं वहीं जापानी बीमार भी बहुत कम पड़ते हैं। अब सवाल यह आता है कि आखिर इस लंबी उम्र का राज क्या है? किस तरह से ये अपनी जिंदगी को जीते हैं? क्या खाते हैं? आइए जानते हैं।

1. जापानी चाय का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं। हालांकि यह चाय दूध या चीनी से नहीं बनती है बल्कि यह एक हर्बल टी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अधिक होने के चलते ये शरीर में रोग प्रतिरोधक की क्षमता को बढ़ाते हैं। एक विशेष तरह की पत्तियों को पीसकर इस हर्बल टी को बनाया जाता है जिसे ‘माका’ कहते हैं।

2. जापान में लोगों का सोशल लाइफ काफी अच्छा होता है। एक साथ मिलकर सभी खूब गप्पे लड़ाते हैं, हंसी-मजाक करते हैं और इस तरह से तनाव को दूर रखने में ही ये अपनी भलाई समझते हैं।

3. जापानियों को गंदगी बिल्कुल पसंद नहीं। गर्मियों के मौसम में यहां के लोग दिन में दो बार नहाते हैं।

4. जापान के लोग फिटनेस पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि इनका अधिकतर समय जिम में ही गुजरता है।

5. यहां के लोग बैठकर काम करने की अपेक्षा खड़े रहकर काम करना ज्यादा पसंद करते हैं। इनकी बॉडी हमेशा मूव करती रहती है। घर से स्टेशन या बस स्टॉप तक ये पैदल ही जाते हैं। ट्रेन में भी सीट के लिए मारामारी करने के बजाय ये आराम से खड़े रहकर अपनी यात्रा करते हैं।

6. रेडियो टेसो जापान की मॉर्निंग एक्सरसाइज है। जापान में सुबह के वक्त रेडियो पर इसकी धुन को टेलीकास्ट किया जाता है और वॉयस ओवर के अनुसार लोग वर्कआउट करते हैं।

7. जापानियों का खाना भी बिल्कुल अलग होता है जिसे यहां के लोग बोरिंग समझ सकते हैं। जबकि यही खाना उनके स्वस्थ रहने का राज है।

8. जापानी ज्यादातर उबला और भाप में पकाया हुआ खाना ही खाते हैं। डीप फ्राइड फूड इन्हें उतना पसंद नहीं है।

9. तेल और मसालों से ये कोसों दूर रहते हैं और ताजी हरी पत्तेदार और लोकल फूड को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। ये लोग खाना भी छोटी प्लेट य बाउल में खाते हैं और चम्मच की जगह ये चॉपस्टिक का इस्तेमाल करते हैं।

10. छोटी मछलियों को यहां लोग काफी अधिक मात्रा में खाते हैं। इन्हें ताजा खाना ही पसंद हैं और बासी भोजन को ये छूकर देखते तक नहीं हैं।

पदार्थो की शुद्धता जांचने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके, मिलावट मिले तो इस नंबर पर करें वॉट्सऐप

आप और हम रोजमर्रा में जिन खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, उनकी शुद्धता की जांच अपने ही घर पर खुद कर सकते हैं। इसके लिए किसी लैब टेस्ट की जरूरत नहीं है।

फूड सेफ्टी स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने डिटेक्ट एडल्ट्रेशन विथ रैपिड टेस्ट बुकलेट में 41 पदार्थों के टेस्ट बताए हैं। मिलावटी पाए जाने पर उपभोक्ता एफएसएसएआई को मोबाइल नंबर 09868686868 पर वॉट्सएप कर सकते हैं।

आपका किचन ही आपकी फूड लैब

दूध में डिटर्जेंट…

  • 10 मिली सैंपल लेकर इसे इतनी ही मात्रा में लिए गए पानी में
    मिलाएं।
  • इसे अच्छी तरह मिलाएं।
  • यदि दूध में डिटर्जेंट मिला होगा तो मिश्रण से गाढ़ा झाग उठेगा।
  • शुद्ध दूध में हल्का झाग बनता है।

शक्कर में चॉक पाउडर…

  • कांच के ग्लास में पानी लें
  • इसमें सैंपल के रूप में 10 ग्राम शक्कर को अच्छी तरह घोल लें।
  • अच्छी तरह घोलने के बाद भी ग्लास की सतह पर कुछ जमा हुआ दिखे तो यह चॉक पाउडर ही है।

हींग में सोप स्टोन…

  • कांच के ग्लास में पानी भरकर हींग मिलाएं।
  • इसे अच्छी तरह मिलाकर छोड़ दें। ताकि पानी स्थिर हो जाएं।
  • यदि हींग में सोप स्टोन या मिट्टी की मिलावट होगी वह सतह पर नजर आ जाएगी

घी व बटर में मैश किए हुए आलू …

  • पारदर्शी बाउल में आधा चम्मच घी या बटर लें।
  • इसमें दो से तीन बूंद आयोडीन का टिंचर डालें।
  • कुछ ही देर में यदि घी या बटर का रंग नीला हो जाए तो समझिए इसमें मैश्ड आलू या स्वीट आलू मिले हैं।

अनाज में रंगों की मिलावट…

  • कांच के ग्लास में पानी भरें।
  • दो बड़े चम्मच अनाज इसमें डालकर अच्छी तरह से मिलाएं।
  • शुद्ध अनाज कलर नहीं छोड़ेगा।
  • यदि इसमें एडेड कलर होंगे तो तुरंत पानी का रंग बदल जाएगा।

हल्दी पाउडर में क्रत्रिम कलर…

  • कांच के ग्लास में बड़ा चम्मच हल्दी पाउडर डालें।अच्छी तरह मिलाएं।
  • शुद्ध प्राकृतिक हल्दी पाउडर होगा तो हल्का पीला रंग दिखेगा। मिलावटी होने पर पानी का रंग गहरा पीला हो जाएगा।

कॉफी पाउडर में चिकनी मिट्टी…

  • कांच के ग्लास में पानी लेकर आधी बड़ी चम्मच कॉफी पाउडर लें।
  • एक मिनट के लिए इसे घोलें और 5 मिनट के लिए स्थिर छोड़ दें।
  • मिलावटी होने पर चिकनी मिट्टी के कण तह में जमा हो जाएंगे।

दूध में पानी…

  • दूध की बूंद हल्की ढलान वाली सतह पर डालें।
  • शुद्ध दूध या तो स्थिर रहेगा या फिर पीछे हल्की सफेद पूंछ छोड़ते हुए धीरे से बहेगा।
  • मिलावटी होने पर यह बिना कोई निशान छोड़ते हुए तेजी से बहेगा।

शहद में चाशनी…

  • कांच के पारदर्शी ग्लास में पानी लें।
  • पानी के इस ग्लास में एक बूंद शहद डालें।
  • शुद्ध शहद पानी में बिल्कुल फैलता नहीं है।
  • शक्कर या चाशनी मिली होने पर यह तुरंत पानी में फैल जाता है।

सेब पर मोम की पॉलिश…

  • सेब लें और उसकी सतह हो चाकू से खुरचें।
  • यदि इस सेब फल पर मोम की पॉलिश होगी तो खुरचने पर यह सतह पर उभर आएगी।
  • इस तरह आप पॉलिश किए हुए सेब की पहचान कर सकते हैं।

सिर्फ 1 लाख में ऐसे शुरू कर सकते हैं सोया मिल्‍क बिजनेस, सरकार दे रही है 90% लोन और ट्रेनिंग

केंद्र सरकार लोगों को स्‍वरोजगार के प्रति आकर्षित करने के लिए न केवल लोन दे रही है, बल्कि बिजनेस की ट्रेनिंग भी दे रही है। ऐसा ही एक बिजनेस है, सोया मिल्‍क मेेकिंग यूनिट। सरकारी एजेंसी नेशनल स्‍मॉल इंडस्‍ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) ने साल 2018-19 के इन्‍क्‍यूबेशन प्रोग्राम में सोया मिल्‍क मेेकिंग को भी शामिल किया है।

इस प्रोग्राम के तहत युवाओं को सोया मिल्‍क मैकिंग के साथ-साथ इसका बिजनेस शुरू करने और मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। इतना ही नहीं, सरकार की प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम (PMEGP) के तहत 90 फीसदी तक लोन भी ले सकते हैं। ऐसे में, अगर आपके पास मात्र 1 लाख रुपए हैं तो 90 फीसदी तक लोन लेकर आप सोया मिल्‍क मैकिंग यूनिट शुरू कर सकते हैं। NSIC की एक प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट में सोया मिल्‍क मेेकिंग यूनिट की कुल कॉस्‍ट 11 लाख रुपए है।

कहां से लें ट्रेनिंग

नेशनल स्‍मॉल इंडस्‍ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) द्वारा देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में टेेक्‍निकल सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटर से आप कई तरह के बिजनेस के साथ-साथ जॉब ओरिएंटेड कोर्स की ट्रेनिंग ले सकते हैं।

इसमें सोया मिल्‍क मेेकिंग की पूरी ट्रेनिंग दी जाती है। साथ ही, एंटरप्रेन्‍योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (EDP) के तहत बिजनेस शुरू करने से लेकर बिजनेस मैनेजमेंट, मार्केटिंग आदि की भी ट्रेनिंग भी दी जाती है। इस बारे में पूरी जानकारी आप इस लिंक http://www.nsic.co.in/NTSC/Main.aspx से ले सकते हैं।

कैसे शुरू होगा बिजनेस

नेशनल स्‍मॉल इंडस्‍ट्रीज कॉरपोरेशन (एनएसआईसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, आपको सबसे पहले सोयाबीन सीड का इंतजाम करना होगा। सोयाबीन से तीन गुणा अधिक नॉर्मल पानी में सोयाबीन सीड को 4 से 6 घंटे तक एक गर्म तापमान में एक डिब्‍बे में भिगोना होगा।

उसके बाद 8 से 12 घंटे तक ठंडे तापमान में रखना होगा। इसके बाद भीगे हुए सोयाबीन को एक ग्राइंडर और कुकिंग मशीन में रखिए, फिर उसे 120 डिग्री तापमान में 10 मिनट तक रखिए। इसके बाद आप आउटलेट वाल्‍व को खोल कर दूध को अपने हिसाब से पेक कर सकते हैं।

किस मशीनरी की होगी जरूरत

रिपोर्ट के मुताबिक, आपको मशीनरी व इक्विपमेंट के तौर पर एक ग्राइंडर या कूकर, बॉयलर, मैकेनिकल फिल्‍टर प्रेस, टोफू बॉक्‍स, सोकिंग टैंक की जरूरत होगी।

कितनी जगह की होगी जरूरत

इस रिपोर्ट के मुताबिक, आपको एक छोटी यूनिट लगाने के लिए केवल 100 वर्ग मीटर जगह की जरूरत पड़ेगी, जिसे आप किराये पर भी ले सकते हैं। इसमें से कवर्ड एरिया केवल 75 वर्ग मीटर होना चाहिए।

कितना प्रोडक्‍शन कर सकेंगे आप

एनएसआईसी की इस रिपोर्ट में सालाना 175000 लीटर सोया मिल्‍क का प्रोडक्‍शन का अनुमान लगाया गया है। इस हिसाब से तीन माह की वर्किंग कैपिटल, मशीनरी एवं इक्विपमेंट, रॉ मैटिरियल, सेलरी, यूटिलिटी पर कुल खर्च लगभग 11.60 लाख रुपए के इन्‍वेस्‍टमेंट का अनुमान है।

कैसे लें लोन

इस प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के आधार पर प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम या मुद्रा स्‍कीम के तहत लोन ले सकते हैं। PMEGP के तहत आपको 90 फीसदी और मुद्रा स्‍कीम के तहत आपको 80 फीसदी लोन मिल जाएगा। PMEGP के लिए ऑनलाइन सप्‍लाई करना होगा। जिसका लिंक है – https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal/jsp/pmegponline.jsp

अगर खरीदना है AC, TV, फ्रिज तो जल्द ही खरीद लें क्योकि सरकार जल्द ही ले सकती है ये फैसला

अगर आप एसी, फ्रिज, टीवी या कोई अन्य घरेलू उत्पाद खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो जल्दी खरीद लीजिए। आने वाले कुछ ही दिनों में ये उत्पाद महंगे हो सकते हैं। केंद्र सरकार एयर कंडीशनर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और माइक्रोवेव अवन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने जा रही है। बता दें कि 2017 से अब तक इन उत्पादों के दाम 8-12 फीसदी तक बढ़ गए हैं।

पिछले साल भी बढ़े थे दाम

वाणिज्य मंत्रालय एसी और फ्रिज के कंप्रेसर और कंडेन्सर पर लगने वाली स्टील शीट और कॉपर ट्यूब पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। सरकार ने पिछले साल कंप्रेसर पर इंपोर्ट ड्यूटी को 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी किया था। फुली फिनिश्ड एसी, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन पर ड्यूटी को दोगुना करके 20 फीसदी कर दिया गया था।

मैन्युफैक्चरर्स पर बढ़ेगा बोझ

Business Standardके मुताबिक सरकार के इस प्रस्तावित कदम से मैन्युफैक्चरर्स की परेशानी बढ़ सकती है। पिछली बार इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने पर मैन्युफैक्चरर्स को इन उत्पादों के दामों में 3-5 फीसदी इजाफा करना पड़ा था।

अब और इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से लोकल मैन्युफैक्सरर्स को नुकसान उठाना पड़ सकता है। ज्यादातर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां TV और होम अप्लायंसेज के कंपोनेंट्स पर लगने वाली कस्टम ड्यू्टी को पूरी तरह बैन खत्म करने की मांग कर रही हैं।

कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाए जाने के पक्ष में नहीं व्यापारी

LG के वाइस प्रेसीडेंट के मुताबिक उनकी कंपनी ने केंद्र सरकार के सामने इस मुद्दे को रखा है। LG के अलावा Lloyd, Panasonic, Samsung ने भी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन (CEAMA) के जरिए सरकार के सामने अपनी राय रखी है।

CEAMA के प्रेसीडेंट ने कहा कि कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी नहीं बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि देश में इनकी मैन्युफैक्चरिंग के लिए कोई इकोसिस्टम नहीं है। सरकार फुली फिनिश्ड गुड्स पर भले ही कस्टम ड्यूटी बढ़ा दे, लेकिन कंपोनेंट्स पर लगी कस्टम ड्यूटी को कम हो जाना चाहिए।

जानिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को कितनी मिलती है सैलरी, जान के रह जायेंगे हैरान

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जो उनकी सैलरी से जुड़ा हुआ है। दरअसल सोशल मीडिया पर इमरान खान की सैलरी स्लिप वायरल हो रही है जिसे देखने के बाद हर कोई दंग है क्योंकि ये सैलरी उत्तर प्रदेश के विधायक की सैलरी से भी कम है।

आपको बता दें कि इमरान खान पाकिस्तान के आम चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनाए गए हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर इमरान खान की जो सैलरी स्लिप वायरल हो रही है वो एक पाकिस्तानी चैनल पर दिखाई गयी थी और इसे लेकर दावा किया गया था कि ये इमरान खान की ही सैलरी स्लिप है।

इस सैलरी स्लिप में इमरान खान की जो सैलरी लिखी हुई है उसे देखने के बाद किसी को भी अचंभा होगा। पाकिस्तानी न्यूज चैनल का दावा है कि इमरान खान की ये सैलरी स्लिप फरवरी 2019 की है। इस सैलरी स्लिप के मुताबिक़ इमरान खान को हर महीने 2.01 लाख रुपये मिलते हैं।

इस सैलरी में से भी जब वो सारे टैक्स भर देते हैं तो उनके खाते में महज 196, 979 रुपए आते हैं। अगर इमरान खान को मिलने वाले सभी भत्तों को भी इस सैलरी में जोड़ दिया जाए तो ये तकरीबन 201,574 रुपये होती है। इस सैलरी में उन्हें 4,595 रुपये टैक्स देना पड़ता है।

चौंकाने वाली वाली बात तो ये है कि भारतीय करेंसी के हिसाब से इमरान खान की ये सैलरी तकरीबन 1 लाख रुपये महीना होती जो कि किसी भी देश के पीएम को मिलने वाली सैलरी से बहुत कम है। आपको बता दें कि यूपी के विधायक की सैलरी 1,78000 रुपये प्रति महीने होती है। वहीं पंजाब के विधानसभा सदस्य को वेतन के रूप में हर महीने 3 लाख रुपये दिए जाते हैं।

ऐसे बहुत ही कम ख़र्च पर शुरू करे अपनी आइस फैकट्री

आइस फैक्ट्री स्थापित करने से पहले समबन्धित क्षेत्र में इसकी डिमांड का जायजा लेना अति आवश्यक है | क्योकि आइस को काफी लम्बे समय तक सामान्य तापमान में रख पाना संभव नहीं होता है | इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह उस क्षेत्र विशेष में स्थित होटल ढाबों,

आइस क्रीम पार्लर एवं जूस की दुकानों का मुआयना कर ले, क्योकि बर्फ का उपयोग कुल्फी बेचने वाले दुकानदारों, जूस बेचने वाले उद्यमियों एवं होटल ढाबों में अधिकतर तौर पर किया जाता है इसके अलावा शराब पीने के स्थानों जैसे Bar इत्यादि में भी गर्मियों में Ice यानिकी बर्फ की अच्छी खपत होती है |

बर्फ का उपयोग बहुत जल्दी से खराब होने वाली खाद्य पदार्थों जैसे समुद्री खाद्य पदार्थो, ताजे मांस, पोल्ट्री प्रोडक्ट्स, डेरी उत्पादों एवं फलों और सब्जियों के भंडारण हेतु भी किया जाता है | इन सभी उत्पादों को Ice के साथ लगभग दो तीन दिनों तक रखा जा सकता है | इस प्रकार का यह कारक इन उत्पादों को अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने में मदद करता है | फार्मास्यूटिकल, डिब्बा बंदी एवं फ्रीजिंग, केमिकल इत्यादि उद्योगों द्वारा भी ice अर्थात बर्फ का उपयोग किया जाता है |

आइस फैक्ट्री बिज़नेस-फाइनल

सामान्य भाषा में Ice Factory का अर्थ ऐसे स्थान से लगाया जाता है जहाँ बर्फ बनायीं जाती है | लेकिन यदि हम इसे थोड़े अच्छे ढंग से समझने की कोशिश करेंगे तो हम पाएंगे की एक ऐसा स्थान जहाँ Ice Manufacturing के लिए पूर्ण रूप से मशीनरी को Installed किया गया हो इसमें आइस मेकर से लेकर Refrigerated मशीनरी वो सभी प्रकार के उपकरण जो पानी को बर्फ के रूप में परिवर्तित करने में सहायक होते हैं लगे होते हैं |

यद्यपि आइस फैक्ट्री को उसके द्वारा उत्पादित उत्पाद के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है जैसे ब्लॉक आइस प्लांट, फ्लैक आइस प्लांट, tube, Slice इत्यादि | लेकिन सच्चाई यह है की इन सबको सामान्य बोल चाल की भाषा में बोला Ice Factory ही जाता है | एक ऐसा स्थान जहाँ विभिन्न मशीनरी एवं उपकरणों द्वारा पानी को बर्फ में परिवर्तित किया जाता है Ice Factory कहलाती है |

जहाँ तक Ice का घरेलू तौर पर उपयोग में लाये जाने की बात है इसमें हम ऐसे परिवारों जिनके पास घरों में अपना रेफ्रीजिरेटर होता है को अलग रख सकते हैं | लेकिन जिन घरों में अपना रेफ्रीजिरेटर नहीं होता वे गर्मियों में अधिकतर तौर पर बर्फ अर्थात Ice का उपयोग मार्किट से खरीदकर करते हैं | घरेलु उपयोग होने के अलावा Ice के औद्योगिक उपयोग भी होते हैं |

व्यवसायिक संस्थानों जैसे होटल ढाबों, चाय की दुकानों, क्लब, जूस की दुकानों इत्यादि में भी आइस यानिकी बर्फ का उपयोग वस्तुओं को भंडारित करने में किया जाता है | संक्षेप में हम कह सकते हैं की बर्फ यानिकी आइस का उपयोग गर्मियों में हर तरह के भौगौलिक, आर्थिक, सामाजिक परिवेश शहरों, नगरों एवं ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर किया जाता है | इसलिए कहा जा सकता है की एक ऐसे नगर जिसकी कम से कम जनसँख्या 20 हज़ार तक हो में एक आइस फैक्ट्री की स्थापना करना बिज़नेस की दृष्टि से फायदेमंद हो सकता है |

आइस फैक्ट्री में काम आने वाली कुछ प्रमुख मशीनरी की लिस्ट निम्नवत है 

  • हैवी ड्यूटी, डबल सिलेंडर अमोनिया रेसिप्रोकेटिंग कंप्रेसर |
  • Slipping induction meter, complete with starter and capacitor
    Ammonia oil separator with flanges, oil drain value
    Atmosphere type ammonia condensers having pipes
  • अमोनिया रिसीवर |
  • फ्रीजिंग टैंक |
  • रेफिरीजरेशन coil |
  • Brine agitator with induction meter
  • Low pressure rotary air blower
  • Condenser water circulating pump
  • Seam welded ice cans
  • Air fittings consisting of tubes brackets, elbows, hoses And supply headers
  • Thermos foam insulation false ceiling
  • Hand Hoist with crane ends; beam rail and can dump for Single can
  • First charge of refrigerant & salt
  • हाइड्रोमीटर, थर्मामीटर, टूल किट इत्यादि |
  • Ice Factory में मुख्य रूप से काम आने वाला Raw Materials पानी अर्थात water है इसके
    अलावा अमोनिया गैस एवं नमक को भी कच्चे माल के रूप में उपयोग में लाया जाता है |

Ice manufacturing process में Cooling Coil से धीमे तापमान में अमोनिया गैस निकलती है, और दबाव के चलते इसका तरल में संकुचन हो जाता है | इसके बाद इसे फ्रीजिंग टैंक में लगे Cooling Coil के माध्यम से पास कराया जाता है | अमोनिया में कम उबलते बिंदु के कारण वह इसका आकार तरल से वाष्प में परिवर्तित कर देता है और कंडेस्नर की साइड में इसे गाढ़ा करते जाता है टैंक में 30% तक नमक का खारापन रहता है |

टैंक में समान रूप से तापमान बनाये रखने के लिए ठन्डे खारे को Agitation के माध्यम से टैंक में फैलाया जाता है | आर्द्रता का तापमान को कम से कम 15 F तक लाना होता है यह प्रक्रिया पूर्ण होने में 24 घंटे तक का समय ले सकती है | जब आर्द्रता कार्यशील तापमान पर पहुँच जाती है तो Ice Cans में पानी भर लिया जाता है और इन Ice Cans को Brine Tank के अन्दर इस तरह से रख दिया जाता है ताकि आर्द्रता का स्तर Ice Cans के स्तर से नीचे रहे |

पानी की उच्च हिमांक क्षमता होने के कारण यह 30 F तापमान में ही जाम जाता है, पानी को सपष्ट रूप से ज़माने के लिए Ice Cans में थोड़ी बहुत हवा पास करायी जाती है | यह प्रक्रिया पूर्ण होने में लगभग 18 घंटे तक का समय ले सकती है हालांकि इसमें लगने वाला समय बर्फ (Ice) की मात्रा के अनुसार अंतरित हो सकता है |

होली में इतने दिनों तक बंद रहेगा बैंक,पहले ही निपटा लें अपने काम

अगर आपको बैंक से संबंधित कोई भी जरूरी काम है तो आप और कल तक में निपटा लें नहीं तो 24 मार्च का इंतजार करना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि 20 से 24 मार्च के बीच चार दिन बैंक बंद रहेंगे।

आपको बता दें कि बैंक हॉलिडे अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होते हैं। पूरे देश में बैंक सिर्फ राष्ट्रीय छुट्टियों के दिन ही बंद रहते हैं। आइए जानते हैं होली पर किस दिन किस राज्य में बैंक हॉलिडे रहने वाला है।

इस तारीख को रहेगी होली की छुट्टी

20 मार्च (बुधवार) को होली के कारण देहरादून, कानपुर, लखनऊ और रांची में छुट्टी रहेगी. 21 मार्च गुरुवार के दिन अधिकतर राज्यों में बैंकों की छुट्टी रहेगी।  पूरे देश में इस दिन छुट्टी रहती है और बैंक भी बंद रहते हैं।

इस तरह 20 और 21 मार्च को उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, असम, उत्तराखंड में छुट्टी रहेगी। 23 मार्च को चौथे शनिवार और 24 मार्च के रविवार की छुट्टी मिलेगी। इस तरह कुल 5 दिन की छुट्टियां प्लान की जा सकती हैं।

22 मार्च शुक्रवार को बिहार डे है, इस कारण बिहार में इस दिन बैंकों की छुट्टी रहेगी। मध्यप्रदेश में कहीं-कहीं रंगपंचमी की छुट्टी होती है। यानी यहां 25 मार्च, सोमवार की छुट्टी भी मिलेगी। 23 मार्च शनिवार को शहीद भगत सिंह शहादत दिवस मनाया जाता है। इस दिन पंजाब और हरियाणा में बैंकों में छुट्टी रहती है।

ब्याने से पहले पशुओं की देखभाल और खुराक के संबंधी जानकारी जरूरी पढ़े

यह जानकारिया पशु के ब्याने से पहले पता होनी चाहिए

ब्याने से पहले दुधारू पशुओं की देखभाल और खुराक के संबंधी जानकारी होनी बहुत जरूरी है। पशुओं को अपने शरीर को सेहतमंद रखने के अलावा, दूध देने के लिए और अपने पेट में पल रहे कटड़े/ बछड़े की वृद्धि के लिए खुराक की जरूरत होती है।

यदि गाभिन पशु को आवश्यकतानुसार खुराक ना मिले, तो इनकी अगले ब्याने में दूध देने की क्षमता कम हो जाती है और कमज़ोर कटड़े/बछड़े पैदा होते हैं जो कि इन बीमारियों का अधिक शिकार होते हैं।

  • ब्याने से कुछ दिन पहले यदि आप पशु को सरसों का तेल देते हो तो प्रतिदिन 100 ग्राम से अधिक नहीं देना चाहिए।
  •  ब्याने से 4-5 दिन पहले पशुओं को कब्ज नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा हो तो अलसी का दलिया देना चाहिए।

  • यदि पशु खुले स्थान में हों, तो उन्हें ब्याने से 15 दिन पहले बाकी पशुओं से अलग कर दें और साफ सुथरे कीटाणु रहित कमरे में रखें।
  • पशु से अच्छा व्यवहार करना चाहिए और दौड़ाना नहीं चाहिए और ना ही ऊंची नीची जगहों पर जाने देना चाहिए।
  • गर्भावस्था के आखिरी महीने में दुधारू पशुओं के हवानों को हर रोज़ कुछ मिनटों के लिए अपने हाथ से सिरहाना चाहिए ताकि उन्हें इसकी आदत पड़ जाए।

  • इस तरह करने से इनके ब्याने के उपरांत दूध निकालना आसान हो जाता है।
    ब्याने वाले पशु को हर रोज़ दिन में 5-7 बार ध्यान से देखना चाहिए।
  • पशुओं को हर रोज़ धातुओं का चूरा 50-60 ग्राम और 20-30 ग्राम नमक आदि भी देना चाहिए।

पशु खरीदने जा रहे हैं तो रखें इन बातों का ध्यान ,नहीं तो हो सकते है ठगी का शिकार

ज्यादातर पशुपालक दूसरे राज्यों से महंगी कीमत पर दुधारू पशु तो खरीद लेते हैं। लेकिन बाद में पता चलता है कि दूध का उत्पादन उतना नहीं हो रहा जितना बिचौलिए या व्यापारी ने बताया था और कई बार पशु को कोई गंभीर बीमारी होती है जो कभी ठीक नहीं हो सकती ऐसे में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी होता है।

ऐसे में आप निचे दी हुई बातों का ध्यान रख कर ठगी से बच सकते है और आपको सही नस्ल का पशु चुनने में भी आसानी होगी

शारीरिक बनावट : अच्छे दुधारू पशु का शरीर आगे से पतला और पीछे से चौड़ा होता है। उस के नथुने खुले हुए और जबड़े मजबूत होते हैं। उस की आंखें उभरी हुई, पूंछ लंबी और त्वचा चिकनी व पतली होती है। छाती का हिस्सा विकसित और पीठ चौड़ी होती है। दुधारू पशु की जांघ पतली और चौरस होती है और गर्दन पतली होती है। उस के चारों थन एकसमान लंबे, मोटे और बराबर दूरी पर होते हैं।

दूध उत्पादन कूवत : बाजार में दुधारू पशु की कीमत उस के दूध देने की कूवत के हिसाब से ही तय होती है, इसलिए उसे खरीदने से पहले 2-3 दिनों तक उसे खुद दुह कर देख लेना चाहिए. दुहते समय दूध की धार सीधी गिरनी चाहिए और दुहने के बाद थनों को सिकुड़ जाना चाहिए।

आयु : आमतौर पर पशुओं की बच्चा पैदा करने की क्षमता 10-12 साल की आयु के बाद खत्म हो जाती है। तीसरा चौथा बच्चा होने तक पशुओं के दूध देने की कूवत चरम पर होती है, जो धीरे धीरे घटती जाती है। दूध का कारोबार करने के लिए 2-3 दांत वाले कम आयु के पशु खरीदना काफी फायदेमंद होता है। पशुओं की उम्र का पता उन के दांतों की बनावट और संख्या को देख कर चल जाता है।

2 साल की उम्र के पशु में ऊपर नीचे मिला कर सामने के 8 स्थायी और 8 अस्थायी दांत होते हैं। 5 साल की उम्र में ऊपर और नीचे मिला कर 16 स्थायी और 16 अस्थायी दांत होते हैं। 6 साल से ऊपर की आयु वाले पशु में 32 स्थायी और 20 अस्थायी दांत होते हैं।

वंशावली : पशुओं की वंशावली का पता लगने से उन की नस्ल और दूध उत्पादन कूवत की सही परख हो सकती है। हमारे देश में पशुओं की वंशावली का रिकार्ड रखने का चलन नहीं है, पर बढि़या डेरी फार्म से पशु खरीदने पर उस की वंशावली का पता चल सकता है।

प्रजनन : सही दुधारू गाय या भैंस वही होती है, जो हर साल 1 बच्चा देती है। इसलिए पशु खरीदते समय उस का प्रजनन रिकार्ड जान लेना जरूरी है। प्रजनन रिकार्ड ठीक नहीं होने, बीमार और कमजोर होने से पाल नहीं खाने, गर्भपात होने, स्वस्थ बच्चा नहीं जनने, प्रसव में दिक्कतें होने जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।