ऐसे शुरू करें डिटर्जेंट पाउडर बनाने का बिज़नेस

डिटर्जेंट पाउडर साफ़ सफाई के लिए बहुत ही आवश्यक वस्तु है. इसका प्रयोग साधारण तौर पर कपडे धोने के लिए किया जाता है. बाज़ार में विभिन्न तरह के ब्रांड ऐसे डिटर्जेंट बेच कर बहुत अच्छा लाभ कमा रहे हैं. बाजारों की दुकानों में कई ऐसे डिटर्जेंट हैं,

जिनकी कीमत बहुत अधिक है. बड़ी बड़ी कम्पनियाँ अपने ब्रांड का डिटर्जेंट बहुत आसानी से बेच रही हैं. आप भी अपने ब्रांड का डिटर्जेंट बहुत ही सरलता से बना कर बाज़ार में बेच सकते हैं. इस व्यवसाय में आपको बहुत अच्छा मुनाफा प्राप्त होगा.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए कई तरह के आवश्यक रासायनिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. यहाँ पर इसके लिए काम आने वाले आवश्यक रासायनिक सामग्री के विषय में दिया जा रहा है.

  • ट्राईसोडियम फॉस्फेट: (रू 27 प्रति किलो)
  • ट्राईपोली फॉस्फेट: (रू 78 प्रति किलोग्राम)
  • कार्बोक्सी मिथाइल सेल्यूलोस : (रू 100 प्रति किलोग्राम)
  • फ्राग्रांस (सुगंध) : (रू 600 प्रति किलोग्राम)
  • एसिड स्लरी :(रू 84/ लीटर)
  • सोडा ऐश : (रू 21 प्रति किलोग्राम)
  • ग्लौबेर साल्ट: (रू 15 प्रति किलोग्राम)
  • रंग : (रू 6 प्रति किलोग्राम)
  • CBX :
  • एओएस : (रू 45 प्रति किलोग्राम)
  • डोलोमाइट : (रू 3 प्रति किलोग्राम)
  • डी कोल: (रू 85 प्रति किलोग्राम)

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए मशीनरी

डिटर्जेंट बनाने के लिए तीन तरह के मशीन की आवश्यकता पड़ती है. इन तीन तरह के मशीनों मे मिक्सर मशीन, स्क्रेमिंग मशीन और सीलिंग मशीन है. इन तीनों के कार्य का वर्णन नीचे किया जा रहा है.

  • मिक्सर मशीन: यह ग्लौबर साल्ट, सोडा ऐश, रंग आदि को मिलाने के काम में आता है.
  • स्क्रेमिंग मशीन : इसकी सहयता से बने हुए डिटर्जेंट को और भी बारीक़ बनाया जाता है.
  • सीलिंग मशीन : इसकी सहयता से पैकेट्स को सील किया जाता है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए मशीनरी में कुल खर्च

इसके लिए रू 45,000 से लेकर रू 3,00,000 तक के मशीन उपलब्ध हैं. यदि आप 45000 के रेंज का डिटर्जेंट मेकिंग मशीन लेते हैं, तो उससे आप डिटर्जेंट पाउडर बना तो लेंगे किन्तु, पैकेजिंग के दौरान आपको मशीन की सुविधा नहीं मिल पाएगी. 75000 के मशीन के साथ आपको अलग से एक सीलिंग मशीन दिया जाता है और 3,00,000 रू की मशीन में पूरा सेट मिल जाता है, जिसमे मिक्सर से सीलिंग तक सभी तरह की मशीन उपलब्ध हो जाती है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के व्यापार स्थापित करने के लिए कुल खर्च 

व्यापार स्थापित करने के लिए कुल खर्च कम से कम 5 लाख रूपए का आता है. ये आंकड़ा आपके मशीन की कीमतों पर भी निर्भर करता है. यदि आप मशीन कम क़ीमत की जैसे 75000 रू के आस पास की लेते हैं, तो ये आंकड़ा 2.5 से 3 लाख का हो जाता है,.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने की प्रक्रिया 

  • सबसे पहले एसिड स्लरी लें और इसमें एओएस डालें. इसके बाद इसमें डी कोल डालें.
  • डी कोल डालने की वजह इसके निर्माण में इस्तेमाल किये गये रसायनों का नकारात्मक प्रभाव कम करना है.
  • इसके बाद इसमें cbs x डाला जाता है. इस तीनों को एक साथ कंटेनर में अच्छे से मिलाएं. इसमें cbs- x अच्छे से मिलाना होता है.
  • इसके बाद सारे पाउडर फॉर्म डालने के लिए मिक्सर मशीन का प्रयोग करें. इस मिक्सर मशीन में 35 किलो ग्लौबेर साल्ट, 5 किलो सोडा ऐश, 5 किलो डोलोमाइट, ट्राई सोडियम फॉस्फेट, कलर साल्ट डाल के मिलाएं. इस मिक्सर को डायरेक्ट और रिवर्स दोनों तरह से चलायें ताकि तीनों सही से मिक्स हो सके.
  • इसके बाद इसमें कलर साल्ट, व्हाइटनर और परफ्यूम डालें. कलर साल्ट डालने से डिटर्जेंट का रंग आकर्षक और परफ्यूम से इसमें सुगंध आ जाती है.
  • इसके बाद इसी मशीन में पहले से बनाए गये एसिड स्लरी घोल को डालें. इसी समय इसमें सोडियम ट्राई पोली फॉस्फेट और कार्बोक्ज़ी मिथाइल सेल्युलोस भी मिश्रित करें.
  • एक बार सारे रसायन अच्छे से मिक्स हो जाने के बाद इसे 12 घंटे के लिए सूखने को छोड़ दें. जब ये पूरी तरह सूख जायेंगा तो आप पायेंगे कि ये मोटा यानि ढेले जैसा हो गया है. इसे बारीक करने के लिए आप स्क्रीमिंग मशीन की सहयता लें और उसमे इसे डाल कर बारीक बना लें.
  • इस तरह आपका डिटर्जेंट बन कर तैयार हो जाता है और आप इसे बाज़ार के लिए पैक भी कर सकते हैं.

डिटर्जेंट पाउडर की पैकेजिंग

  • पैकेजिंग के लिए अपने ब्रांड का पैकेट इस्तेमाल करें. यदि आपको किसी कंपनी से पहले से काम मिला हुआ है, तो आपको उसी कम्पनी के ब्रांड का पैकेट इस्तेमाल करना होगा. अन्यतः आप अपना ब्रांड्स इस्तेमाल कर सकते हैं. पैकेजिंग के लिए निम्न बातों पर ध्यान दें.
  • पैकेजिंग करने के पहले इस बात का ख्याल रखें कि एक पैकेट में कितना डिटर्जेंट पाउडर देना है. आप एक किलो का पैकेट बना रहे हैं या आधे किलो का इसका ध्यान रखना ज़रूरी है.
  • अपने ब्रांड को प्रमोट करने के लिए आकर्षक पैकेट बनाएं. पैकेट पर नीम्बू आदि की तस्वीर हो तो और भी बेहतर है.
  • पैकेजिंग करने के लिए ‘सीलिंग मशीन’ का इस्तेमाल करें. इस मशीन से पैकेट बहुत अच्छे से बनता है और देखने में आकर्षक लगता है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के व्यापार के लिए लाइसेंस

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए आपको अपने फर्म को एलएलपी, ओपीसी आदि के अंतर्गत पंजीकृत कराना पड़ता है. आपके फर्म का एक बैंक अकाउंट होना बहुत ज़रूरी है. इसके साथ पोल्यूशन कण्ट्रोल बोर्ड की तरफ से भी ‘कंसेंट टू एस्टब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ दोनों तरह के लाइसेंस प्राप्त करने की आवाश्यक्ता होती है. क्वालिटी कण्ट्रोल के लिए बीआईएस रजिस्ट्रेशन करवाना होता है. आपको अपने ब्रांड अथवा ट्रेडमार्क का भी रजिस्ट्रेशन करवाना होता है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के व्यापार की मार्केटिंग

मार्केटिंग के लिए आप रिटेल और होलसेल दोनों तरह के मार्केट का इस्तेमाल कर सकते हैं. आप अपने मार्केटिंग स्ट्रेटेजी में उन सभी दुकानों को ला सकते हैं, जो रिटेल में सामान बेचते हैं. इस तरह के दुकानों में अपना बनाया सामान बेचने पर लाभ अधिक होता है. इसके अलावा आप होलसेल के तहत बड़े दुकानों को भी डिटर्जेंट बेच देते हैं, जहाँ से रिटेलर अक्सर अपने दूकान के लिए खरीदते हैं. ब्रांड के प्रचार के लिये होर्डिंग वैगेरह का इस्तेमाल कर सकते हैं. यदि आप शुरू में अपने प्रोडक्ट पर किसी तरह का ऑफर दें तो वो भी कारगर होगा.

इस तरह से आप 4 से 5 लाख के अन्दर एक ऐसा व्यापार स्थापित कर सकते हैं, जो लॉन्ग टर्म बिज़नस साबित हो सकता है और आपको लम्बे समय तक भरपूर लाभ दे सकता है.

और ज्यादा जानकारी के लिए Sweta Tech Tips का वीडियो देखें

चिप वाला ATM कार्ड आने के बाद बदल गया है पैसे निकालने का तरीका, अब इस तरह पैसे निकालेंगे तो ख़राब हो जायेगा ATM कार्ड

रिजर्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों को मानते हुए बैंकों ने अपने ग्राहकों को अब ईएमवी चिप वाले डेबिट कार्ड जारी कर दिए हैं।  ग्राहक अब इनका उपयोग भी करने लगे हैं लेकिन इन दिनों उन्हें एक अलग समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, जैसे ही आप ईएमवी चिप वाला कार्ड एटीएम में डालते हैं तो वह निकलता नहीं जैसे कि आप पहले अपना कार्ड मशीन में डालकर निकाल लिया करते थे। अगर आप इस मामले में सावधानी नहीं बरतते तो संभव है आपका कार्ड खराब हो जाए।

दरअसल, इससे पहले जो एटीएम कार्ड थे वो मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले थे और एटीएम मशीनें भी उसी हिसाब से बनी थीं। इन मशीनों में कार्ड डालकर वापस निकालने की अनुमति थी लेकिन अब बैंकों ने अपनी एटीएम मशीनों को अपडेट किया है और इनमें कार्ड स्वैप करने वाली जगह बदल दी गई है।

इसके बाद अब अगर आप पैसे निकालने के लिए एटीएम में डेबिट कार्ड डालते हैं तो यह लॉक हो जाता है। यह तब तक लॉक रहता है जब तक आपका लेनदेन पूरा नहीं हो जाता है। इस दौरान अगर आप जोर लगाकर पहले की तरह कार्ड निकालने की कोशिश करते हैं तो आपका कार्ड डैमेज हो सकता है।

हालांकि, इस अपडेट को लेकर बैंकों ने एटीएम मशीनों की स्क्रीन कैबिन में यह मैसेज दिया हुआ है कि कार्ड मशीन में डालने के बाद तुरंत ना निकालें। अब एटीएम कार्ड मशीन में डालने के बाद अगर आप उसे निकालने की कोशिश करेंगे तो तुरंत ही एटीएम मशीन की स्क्रीन पर डू नॉट रिमूव योर कार्ड का मैसेज फ्लैश होने लगेगा, साथ ही मशीन खुद यह बोलकर आपको बताने लगेगी।

आपको अपने लेन देन की प्रक्रिया को पूरा करना होगा, जिसके बाद आप अपने कार्ड को निकाल सकते हैं। मशीन खुद आपसे ऐसा करने को कहेगी। जानकारी के लिए आपको बता दें कि बैंकों ने पुरानें मैग्नेटिक स्ट्राइप बेस्ड कार्ड को ईएमवी चिप बेस्ड एटीएम-कम डेबिट कार्ड एवं क्रेडिट कार्ड से बदलना शुरू कर दिया है। बैंकों ने ऐसा इसलिए किया है ताकि एटीएम मशीनों से किया जाने वाला लेनदेन सुरक्षित रहे।

Ferrari और Bentley को मात देंगी TATA की यह लग्जरी कारें, कीमत होगी आपके बजट में

Ferrari और Bentley को मात देंगी TATA की यह लग्जरी कारें…देश की जानी-मानी ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स ( Tata Motors ) पूरी दुनिया में अपनी सस्ती कारों के लिए जाना जाता है। दुनिया की सबसे सस्ती कार Nano को टाटा मोटर्स ने ही लॉन्च किया था।

अब टाटा मोटर्स विदेशी लग्जरी कारों को मात देने के लिए अपनी बेहतरीन और सस्ती कारें लेकर आ रही है। साल 2019 में टाटा मोटर्स प्रीमियम हैचबैक से लेकर प्रीमियम एसयूवी तक 4 नई शानदार कारें लॉन्च करेगी। आइए जानते हैं कैसी हैं ये कारेंं…

टाटा हैरियर (tata harrier)

इंजन और पावर की बात की जाए तो इस कार में 2.0 लीटर का 4 सिलेंडर वाला डीजल इंजन दिया जाएगा जो कि 138 बीएचपी की पावर और 350 न्यूटन मीटर का टार्क जनरेट करेगा। इसके साथ ही इसमें पेट्रोल और डीजल इंजन का भी ऑप्शन दिया जा सकता है।

इंजन 6 स्पीड मैनुअल और 6 स्पीड आॅटोमैटिक ट्रांसमिशन के ऑप्शन के साथ आएगा। 23 जनवरी को लॉन्च होने वाली इस एसयूवी की एक्स शोरूम कीमत लगभग 16 से 21 लाख रुपये तक हो सकती है।

टाटा 45 एक्स (tata 45x)

इंजन और पावर की बात की जाए तो टाटा 45एक्स में 1.2 लीटर का पेट्रोल और 1.5 लीटर का डीजल इंजन दिया जा सकता है। दोनों इंजन 110 पीएस की पावर जनरेट कर सकते हैं। ये दोनों इंजन 6 स्पीड मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबक्स के विकल्प के साथ आएंगे।

टाटा एच 7 एक्स (Tata H7X)

इंजन और पावर की बात की जाए तो टा एच7एक्स में 2.0 लीटर का क्रायोटेक डीजल इंजन होगा जो कि 170 एचपी की पावर और 350 न्यूटन मीटर का टार्क जनरेट करेगा। ये टाटा हैरियर का 7 सीटर वेरिएंट होगा। कीमत की बात की जाए तो इस कार की एक्स शोरूम कीमत लगभग 25 लाख रुपये के करीब हो सकती है।

टाटा टिगोर ईवी (Tigor EV)

टाटा टिगोर जल्द ही अपनी शानदार इलेक्ट्रिक कार टिगोर लॉन्च करने वाली है। इलेक्ट्रिक टिगोर का डिजाइन और लुक वर्तमान में बिक रही टिगोर जैसा ही होगा, जिसमें ईवी बैज दिया गया है। कीमत की बात की जाए तो इस कार की एक्स शोरूम कीमत लगभग 10 लाख रुपये है।

सिर्फ एक साल का करें कोर्स, सरकार दे रही है 3.5 लाख सालाना की नौकरी का मौका

दिल्ली सरकार पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी पाने का सुनहरा मौका दे रही है। इसके लिए सरकार के वर्ल्ड क्लास स्किल सेंटर (WCSC) से एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स करना होगा, जिसके एडमिशन शुरू हो गए हैं। ये कोर्स करके आपको 3.5 लाख तक की नौकरी मिल सकती है।

दिल्ली सरकार के इस प्रोग्राम के तहत हर एक स्ट्रीम के 12वीं पास स्टूडेंट्स आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 15 फरवरी 2019 है। दिल्ली सरकार के इस कोर्स का फायदा अभिनव मिश्रा, अंजली मिश्रा और नरोत्तम नाथ वोहरा जैसे स्टूडेंट्स ने उठाया है, वो आज 3.5 लाख के सालाना पैकेज पर नौकरी कर रहे हैं।

WCSC के यह कोर्स दिल्ली के 7 जगह से किया जा सकता है।

  • विवेक विहार
  • द्वारका
  • झंडेवालान
  • DPSRU कैंपस, पुष्प विहार
  • RIT, रजौरी
  • SSC, वजीरपुर
  • IBBS BTC पूसा

कोर्स

  • स्पोर्ट डिजिटाइजेशन एंड परफॉर्मेंस मैनेजमेंट
  • डिजिटल मार्केटिंग एंड वेब डेवल्पमेंट
  • स्पोर्ट फिटनेस एंड योगा एप्लीकेशन
  • ब्यूटी एंड वेलनेस कंसल्टेंट
  • कंप्यूटर सिस्टम ऑपरेटर
  • फूड प्रोडक्शन
  • हॉस्पिटैलिटी ऑपरेशन
  • रिटेल सर्विस
  • फाइनेंस एक्जीक्यूटिव

किसानों द्वारा पैदा की गई सोयाबीन अमेरिका-ईरान की लड़ाई में इस तरह भारत को करा रही है अरबों की कमाई

एक तरफ अमेरिका और ईरान आपस में बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं भारत सरकार के लिए यह लड़ाई बड़ी कमाई या सेविंग का सौदा साबित हो रही है। भारत जहां ईरान से सब्सिडी पर कच्चा तेल खरीद रहा है, वहीं उसकी कीमत के बदले बड़े स्तर पर सोयाबीन का निर्यात कर रहा है।

स्थिति यह हो गई है कि अगर इसी तरह निर्यात जारी रहता है तो भारत से ईरान के लिए सोयाबीन का निर्यात 20 गुना बढ़ सकता है। निश्चित तौर पर इससे सरकार के साथ ही भारत के किसानों को भी फायदा होगा।

ईरान में पैदा नहीं होता सोयाबीन

अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ईरान रुपए के बदले में दुनिया के तीसरे बड़े ऑयल कंज्यूमर भारत को कच्चे तेल का निर्यात करने को राजी हो गया था। तेल के मामले में संपन्न ईरान को इस रुपए को भारतीय गुड्स खरीदने पर खर्च करना होगा।

वहीं ईरान प्रोटीन रिच सोयाबीन का घरेलू स्तर पर उत्पादन नहीं करता है। सोयाबीन के भारी निर्यात से भारत में सोयाबीन की कीमतों को सपोर्ट मिलेगा और किसानों की शिकायतें सीमित होंगी। किसान लगातार सरकार के कम कीमतों के कारण राहत देने की मांग कर रहे हैं। सरकार को भी मई में आम चुनाव के लिए पब्लिक के बीच जाना होगा।

20 गुना हो सकता है निर्यात

एसईए के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बी. वी. मेहता ने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान ईरान के लिए भारत का सोयाबीन एक्सपोर्ट बढ़कर 4.50 लाख टन तक पहुंच सकता है, जबकि बीते वित्त वर्ष में यह महज 22,910 टन ही रहा था। उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर प्रतिबंध जारी रहते हैं तो अगले वित्त वर्ष यानी 2019-20 में यह 5 लाख टन पहुंच सकता है।

ये हैं दुनिया के 10 सबसे महंगे घर, भारत ने भी बनाई टॉप-5 में जगह

अपनी आमदनी के लिहाज से हर कोई अपने सपनों के घर को तमाम सुविधाओं से लैस करने की कोशिश करता रहता है। वहीं महंगे घर बनवाने का शौक भी अक्सर चर्चा में रहता है जिसमें राजनीतिक जगत से लेकर फिल्मी हस्तियां और बड़े बिजनेस मैन से लेकर छोटे-मोटे कारोबारी तक शामिल रहते हैं।

आज हम अपनी इस खबर के माध्यम से आपको दुनिया को उन 10 महंगे घरों की जानकारी दे रहे हैं, जिसे देख आप उसके मालिक की शख्सियत का अंदाजा लगा सकते हैं। इन घरों की खूबसूरती आपका दिल चुरा सकती है। तो जानिए इन घरों के बारे में।

बकिंघम पैलेस (लंदन यूके): दुनिया के सबसे महंगे घरों की अगर बात करें तो उसमें सबसे पहला नाम जाहिर तौर पर बकिंघम पैलेस का ही आएगा, जो कि इंग्लैंड की क्वीन का घर है। इस घर की कीमत करीब 1.55 बिलियन डॉलर की है।

बकिंघम पैलेस क्राउन प्रॉपर्टी है जिसमें करीब 775 कमरे, 188 स्टॉफ रुम, 52 रॉयल और गेस्ट बेडरुम, 92 ऑफिस, 78 बाथरुम और 19 स्टेटरुम हैं। यह सब चीजें इसे दुनिया का सबसे महंगा घर बनाती हैं।

एंटीलिया (मुंबई, इंडिया): भारत ही नहीं एशिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार मुकेश अंबानी का घर एंटीलिया दुनिया का दूसरा सबसे महंगा घर है। इस घर की कीमत अनुमानित रुप से 1 से 2 बिलियन डॉलर के आस पास बताई जाती है। यह घर 27 मंजिला इमारत है।

यह घर मुंबई के अल्टामाउंट रोड पर स्थिति है जो कि मुंबई के महंगे इलाकों में शुमार है। इस घर में करीब 600 लोगों का स्टॉफ काम करता है जो कि घर का 24 घंटे ख्याल रखते हैं। इस घर में हेल्थ स्पा, एक सैलून, एक बॉलरुम, 3 स्वीमिंग पूल, योगा एवं डांस स्टूडियो। इस इमारत की शुरुआती 6 मंजिलें पार्किंग के लिए बनाई गई हैं। इस घर में एक प्राइवेट थियेटर और स्नो रुम भी है

विला लियोपोल्डा (कोट डि एज्योर, फ्रांस): लिली साफरा के मालिकाना हक वाली यह आवासीय संपत्ति करीब 750 मिलियन डॉलर के आस पास की है। विली साफरा एक फिलेन्थ्रॉपिस्ट और लेबनान के बैंकर विलियम साफरा की विधवा हैं।

करीब 50 एकड़ में फैले इस घर में एक बड़ा ग्रीन हाउस, एक स्वीमिंग पूल और पूल हाउस है। इसके साथ ही इस घर में आउटडोर किचन, हेलीपेड और गेस्ट हाउस भी है।

विला लेस कायड्रस (फ्रेंच रिवाइरा): विला लेस कायड्रस की अनुमानित कीमत 400 मिलियन डॉलर की है। यह एक किंग साइज घर है जिसका निर्माण 1830 में बेल्जियम के राजा के लिए किया गया था।

करीब 18,000 वर्गफीट में फैले इस घर में 14 बैडरुम, ओलंपिक आकार का स्वीमिंग पूल, वुड पैनल्ड लाइब्रेरी, एथेना का एक ब्रॉन्ज स्टेचू, एक कैंडिलायर लिट बॉलरूम, 30 घोड़ों का अस्तबल, एक बड़ा सिटिंग रुम और काफी कुछ बना हुआ है।

फोर फेयरफील्ड पॉन्ड (न्यूयॉर्क): न्यूयॉर्क के सागापोनैक में बने इस घर की कीमत 248.5 मिलियन डॉलर के करीब है। इस घर की मालकिन इरा रेनर्ट हैं, जो कि रेंको ग्रुप की ओनर हैं।

करीब 63 एकड़ में फैले इस घर में 29 बॉलरुम है और इस घर के पास खुद का पॉवर प्लांट भी है। साथ ही यहां पर बॉस्केटबॉल कोर्ट, बॉलिंग एले, स्क्वैश कोर्ट, टेनिस कोर्ट, तीन स्वीमिंग पूल और एक 91 फुट लंबा डाइनिंग टेबल भी है।

एलिसन एस्टेट (वुडसाइड, कैलिफोर्निया): कैलिफोर्निया के वुडसाइड में बना यह घर करीब 23 एकड़ में फैला है जिसकी कीमत 200 मिलियन डॉलर है।

इस घर के मालिक ओरेकल के को फाउंडर लैरी एलिसन हैं। इस कंपाउंड में 10 बिल्डिंगें हैं, साथ ही यहां लेक, कोई पॉन्ड, टी हाउस और बाथ हाउस है।

पलाडो डी अमोर (बेवरी हिल्सस कैलिफोर्निया): जेफ ग्रीन, जो कि एक रियल एस्टेट आन्त्रप्रेन्योर है और अमेरिका के जाने माने राजनेता, वो इस घर का मालिकाना हक रखते हैं जिसकी अनुमानित कीमत 195 मिलियन डॉलर है।

करीब 53,000 एकड़ में फैला यह घर एक आकर्षक विला है। इस घर में 12 बैडरुम, 23 बालरूम, टेनिस कोर्ट, स्विमिंग पूल, थियेटर, वॉटरफाल, रिफ्लेक्टिंग पूल और एक बड़ी गैराज है जिसमें 27 कारें खड़ी हो सकती हैं।

सेवन द पिनाकल (बिग स्काई मोंटाना): यह एक बड़े येलोस्टोन क्लब का हिस्सा है, जो कि एक निजी स्काई और अमीरों के लिए गोल्फ कम्युनिटी है। इस घर का मलिकाना हक एड्रा और टिंबर बैरन टिम ब्लिकसेथ रखते हैं। इस घर में हीटेड फ्लोर, काफी सारे पूल्स, एक जिम और एक वाइन सेलर है।

Xanadu 2.0 (मेडिना, वाशिंगटन): यह दुनिया के अमीरों में शुमार गेट्स परिवार का घर है जिसकी कीमत 125.5 मिलियन डॉलर है। यह माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और उनकी पत्नी मिलिंडा गेट्स का घर है।

यह काफी आकर्षक घर है जो कि 66,000 वर्ग फीट में फैला है, इसे बनने में 7 वर्षों का समय लगा। इसमें 60 फीट का एक पूल दिया गया है।

केन्सिंग्टन पैलेस गार्डेन्स (लंदन): लंदन में बने इस घर की कीमत 128 मिलियन डॉलर है। यह जाने माने भारतीय बिजनेस मैन लक्ष्मी मित्तल का निवास है, जो कि आर्सेलर मित्तल के मालिक हैं।

यह आवासीय संपत्ति प्रिंस विलियम और केट मिडलटन के घर के पास है। इस घर में 12 बॉलरुम, एक टुर्किश बाथ, एक इंडोर पूल और 20 कारों की पार्किंग के लिए खास जगह है।

इसे नवंबर में बाेया जाता है और अप्रैल में इसकी कंबाइन से कटाई करते हैं

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के करनाल स्थित रीजनल सेंटर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर के अनुसार हरियाणा चना नंबर 5 (HC-5) किसानों के लिए वरदान बन सकता है। इसे गेहूं की तरह ही नवंबर में बाेया जाता है और अप्रैल के प्रथम सप्ताह में इसकी कंबाइन से कटाई कर सकते हैं। क्योंकि चने की फसल की लंबाई गेहूं की फसल की तरह होती है।

ऐसे में कंबाइन से कटाई में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती। वैज्ञानिक के अनुसार नवंबर में बिजाई के दौरान प्रति एकड़ 20 किलोग्राम बीज की दरकार होती है। उत्पादन 9 से 10 क्विंटल तक होता है। चना 4500 से 5000 रुपए प्रति क्विंटल बाजार में आसानी से बिक जाता है। 100 चनों का वजन 16 ग्राम होता है। लंबाई गेहूं की फसल की तरह 85 सेंटीमीटर तक होती है।

परंपरागतखेती करने के वाले किसानों को कुछ अलग करने की जरुरत है, नहीं तो खेती घाटे का सौदा बनकर रह जाएगी। करनाल जिला के रंबा गांव में किसान ने 15 एकड़ में चने की फसल उगाई है। वे कंबाइन से चने की कटाई कराएंगे। चने की फसल लेते ही वे समर मूंग उगाएंगे। पंजाब के कपूरथला के किसानों का कहना है कि वे चने की बिजाई से खेत में खाद डालने की जरुरत नहीं पड़ती। यही नहीं जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बेहतर बनी रहती है।

उत्पादन भी बेहतर मिलता है और बाजार में मांग के अनुसार ही वे चना उगा रहे हैं। कई ग्राहक तो ऐसे हैं जो खेत से ही चना खरीदकर ले जाते हैं। किसान का कहना है कि परंपरागत खेती करते रहे तो एक दिन खेती छोड़ने को मजबूर होना पड़ सकता है। इसलिए हर किसान को कुछ अलग करने की जरुरत है। यदि यह भी हो तो कम से कम दलहनी खेती कर भी खासा मुनाफा लिया जा सकता है।

रंबा गांव के प्रगतिशील किसान रघबिंद्र सिंह के अनुसार उन्होंने पहली बार 15 एकड़ में चना उगाया है। फसल बहुत अच्छी है। कुछ व्यापारी इसे कच्चा ही खरीदने आए थे, लेकिन उन्होंने नहीं दिया। चने में सबसे खास बात यह है कि इसकी ब्रांच नीचे की ओर नहीं होती। गेहूं की फसल की तरह कंबाइन इसे काट सकती है। कंबाइन सिस्टम में बदलाव की जरुरत नहीं।

DTH और केबल यूजर्स नया प्लान लेने से पहले इन 10 बातों पर दें ध्यान, टीवी बिल हो जाएगा कम

TRAI ने DTH सर्विसेज को लेकर नए नियम बनाए हैं जिसके तहत ग्राहकों को केनलव उन चैनल्स का पैसा देना होगा जिन्हें वो देखना चाहते हैं। नए नियमों के तहत कोई भी DTH प्रोवाइडर जैसे Airtel DTH TV, Tata Sky या Dish TV 100 नॉन-एचडी चैनल्स के लिए 130 रुपये (बिना GST) से ज्यादा चार्ज नहीं कर सकते हैं।

1. इन प्लान्स के अलावा सभी मुख्य ब्रॉडकास्टर्स ने अलग-अलग कुछ अन्य प्लान्स भी पेश किए हैं। वैसे तो कंपनियों ने हर चैनल की MRP बता दी है लेकिन आपको इन MRP पर ब्रॉडकास्टर के जरिए ऑफर भी दिया जा सकता है। वहीं, इनके बेस पैक्स 130 रुपये से कम हैं।

2. Airtel DTH TV की वेबसाइट पर 99 रुपये का बेस पैक है जिसमें SD चैनल्स दिए गए हैं। वहीं, Tata Sky का बेस पैक भी 99 रुपये से शुरू होता है। दोनों में ही SD चैनल दिए गए हैं। TRAI के नए नियमों के तहत, ग्राहक इन SD चैनल्स में से किसी भी अन्य चैनल को बेस पैक में एड कर सकते हैं। अगर ग्राहक किसी पेड चैनल को एड करते हैं तो उन्हें उसका अलग से चार्ज देना होगा।

3. नए नियमों के मुताबिक, अगर ग्राहक इन 100 चैनल्स के अलावा भी कोई चैनल देखना चाहते हैं तो उन्हें अन्य 25 चैनल्स के लिए 20 रुपये चुकाने होंगे। TRAI की मानें तो काफी कम लोग या फिर 10 से 15 फीसद लोग ही ऐसे होते हैं जो 100 चैनल से ज्यादा देखते हैं। BARC द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक, 80 फीसद लोग 40 से ज्यादा चैनल नहीं देखते हैं।

4. TRAI का कहना है कि अगर ग्राहक ध्यानपूर्वक हर चैनल का चुनाव करे तो उन्हें मौजूदा समय के मुताबिक काफी कम पैसे देने होंगे।

5. TRAI द्वारा दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, 40 ब्रॉडकास्टर्स के 330 चैनल्स से ज्यादा HD और SD चैनल हैं। वहीं, निजी FTA चैनल्स की संख्या 535 से भी ज्यादा है।

6. 40 ब्रॉडकास्टर्स में से करीब 17 ने कुछ चैनल्स को बंडल कर डिस्काउंट के साथ उपलब्ध कराया है। उदाहरण के तौर पर: 9 चैनल्स की कीमत 63 रुपये है। लेकिन अगर इन्हें एक साथ लिया जाता है तो इन्हें मात्र 31 रुपये में लिया जा सकता है।

7. FTA चैनल्स को पेड चैनल्स के साथ क्लब नहीं किया जा सकता है। वहीं, HD चैनल्स को भी उसके SD वर्जन के साथ क्लब नहीं किया जा सकता है।

8. ग्राहक सर्विस प्रोवाइडर को छोड़ बाजार से एक सेट टॉप बॉक्स भी खरीद सकता है। हालांकि, आपको यह देखना भी जरुरी है कि यह सेट टॉप बॉक्स आपके टीवी के साथ कंपेटीबल है या नहीं।

9. TRAI ने आदेश दिए हैं कि 31 जनवरी तक ग्राहकों को सर्विस में किसी तरह की कोई रुकावट नहीं दी जाएगी। लेकिन इसके बाद उन्हें बेसिक प्लान पर माइग्रेट कर दिया जाएगा जिसमें कोई भी पेड चैनल नहीं होंगे।

10. हर केबल ऑपरेटर या DTH कंपनी को 999 चैनल नंबर पर एक इंफॉर्मेशन चैनल चलाने के आदेश दिए गए हैं जिससे ग्राहकों को हर चैनल की कीमत का पता लग सके।

बड़ी खबरः मिल गया कैंसर का इलाज, 48 घंटे में खत्म हो जाएगा किसी भी स्टेज का कैंसर

एक तरफ तो कैंसर का हर जगह पर्याप्त इलाज है नहीं और अगर है भी, तो इतना मेहंगी और तकलीफ देने वाला है कि उसे बर्दाश्त कर पाना ही पीड़ित के लिए संभव नहीं होता। आमतौर पर कैंसर के इलाज के लिए दी जाने वाली कीमोथैरेपी भी कई बार पीड़ित को ठीक करने के बजाए दर्दनाक मौत की तरह ले जाती है।

ऐसी स्थिति में अमेरिका में हुए एक शोध में सामने आया कि, प्राकृतिक तौर पर भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। ये कुदरती चीज इतनी कारगर है कि, इसके सेवन के 48 घंटो के भीतर ही नतीजे नज़र आने लगते हैं।

रिसर्च में बड़ा खुलासा

हालही में कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी में कैंसर के मरीजों पर शौध में इस बात का खुलासा हुआ कि, कैंसर के मरीजों को अंगूर के बीज के रस का सेवन कराया जाए 48 घंटों के भीतर ही हमारे सामने नतीजे आने शुरु हो गए थे।

अंगूर में पर्याप्त मात्रा में कैलोरी, फाइबर और विटामिन सी और ई पाया जाता है। इसमे ग्लूकोज, मैग्नीशियम और साइट्रिक एसिड जैसे कई पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं, जो कई गंभीर बीमारियों में राहत देने के लिए कारगर माने जाते हैं।

तेल भी है फायदेमंद

अब तक आप अंगूर के तेल के बारे में जानते थे जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद तत्‍व इससे बनने वाले खाने को भी हैल्‍दी बना देता है। इसमें फैट नहीं होता, विटामिन ई पाया जाता है और ये बेहतरीन एंटी ऑक्‍सीडेंट होता है। आइये जानते हैं उनके बारे में…।

grape seed oil

टीबी-कैंसर का कारगर इलाज

अंगूर में ग्लूकोज, मैग्नीशियम और साइट्रिक एसिड जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। कई बीमारियों में राहत के लिए अंगूर का सेवन करना फायदेमंद होता है। टीबी, कैंसर और ब्लड-इंफेक्शन जैसी बीमारियों में ये मुख्य रूप से फायदेमंद होता है।

शुगर लेवल बनाए रखे

मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी अंगूर बेहद फायदेमंद है। ये ब्लड में शुगर के लेवल को कम करता है। इसके अलावा ये आयरन का भी एक बेहतरीन माध्यम है।

ब्रेस्ट कैंसर में लाभकारी

हाल में हुए एक शोध के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम में अंगूर का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए भी ये विशेष रूप से फायदेमंद है।खून की कमी को दूर करने के लिए एक गिलास अंगूर के जूस में 2 चम्मच शहद मिलकार पीने से खून की कमी दूर हो जाती है।

सोनी हो या स्टार, 15 दिन बाद इन्हें देखने के लिए चुकाने पड़ेंगे इतने रुपये, जानिए पूरी रेट लिस्ट

अगर आप भी टीवी देखने के शौक़ीन हैं तो आपको पता होना चाहिए कि 1 फरवरी से टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का नया नियम लागू होने जा रहे है जिसके तहत आपको हर चैनल के लिए एक फिक्स प्राइज़ देना पड़ेगा जो हर चैनल के लिए अलग-अलग होगा। चैनल के नए रेट उस चैनल की पॉपुलैरिटी और टीआरपी के हिसाब से तय किए गए हैं ऐसे में आपको ये नए रेट 1 फ़रवरी से चुकाने पड़ेंगे।

इस नियम के तहत 130 रुपए (प्लस टैक्स) में 100 स्टेंडर्ड डेफिनेशन (SD) चैनल ऑपरेटर्स को दर्शकों को दिखाना होंगे। ऐसे में आप जो चैनल्स चुनेंगे आपको उनके लिए फिक्स रेट देना पड़ेगा। बता दें कि इस नए नियम के लागू होने से पहले Sony, Zee, Network 18 जैसी कंपनियां अपने चैनल्स के नए रेट का खुलासा कर चुकी हैं तो आप आज ही जान लीजिए कि अब आपको चैनल्स के लिए कितना भुगतान करना पडेगा।

जानिए नए रेट्स : स्टार चैनल

  • Star Utsav: Rs: 1.00
  • Star Gold: Rs 8.00
  • Movies OK: Re 1.00
  • Star Utsav Movies: Re 1.00
  • Star Sports 1 Hindi: Rs 19.00
  • Star Sports 2: Rs 6.00
  • Star Sports 3: Rs 4.00
  • Star Sports First: Rs 1.00
  • National Geographic channel (NGC): Rs 2.00
  • Nat Geo Wild: Re 1.00

जी चैनल

  • Zee TV: Rs 19
  • &TV: Rs 12
  • Zee Cinema: Rs 19
  • Zee Action: Re 1
  • Zee News: 50 paise
  • Zee ETC: Re 1
  • Zee Bollywood: Rs 2
  • Zee Action: Re 1
  • Zee Business: 50 paise
  • Living Foodz: Re 1

नेटवर्क 18 चैनल्स

  • CNBC Awaaz: Re 1.00
  • Colors: Rs 19.00
  • The History Channel: Rs 3.00
  • MTV: Rs 3.00
  • MTV Beats: Rs 0.50
  • News 18 Assam / North East/Bihar Jharkhand/Madhya Pradesh /
  • Chhattisgarh: Rs 0.25
  • Rishtey: Re 1.00
  • Rishtey Cineplex: Rs 3.00
  • VH 1: Re 1.00

टाइम्स नेटवर्क चैनल

  • Times Now: Rs 3.00
  • Mirror Now: Rs 2.00
  • ET NOW: Rs 3.00
  • Zoom: Rs 0.50
  • Movies Now: Rs 10.00
  • MNX: Rs 6.00
  • Romedy Now: Rs 6.00

सोनी चैनल्स

  • Sony Entertainment Channel (SET): Rs 19.00
  • SAB: Rs 19.00
  • SET Max: Rs 15.00
  • MAX 2: Re 1.00
  • Sony YAY!: Rs 2.00
  • Sony PAL: Re 1.00
  • Sony Wah: Re 1.00
  • Sony MIX: Re 1.00