इजरायल की पावरफुल मशीनें, इनकी टेक्नोलॉजी का लोहा मानती है दुनिया

इस समय दुनिया के कई देश सूखे का सामना कर रहे हैं। वहीं, इजरायल ने आधुनिक टेक्नोलॉजी से न सिर्फ खेती से जुड़ी कई समस्याएं खत्म कीं, बल्कि दुनिया के सामने खेती को फायदे का सौदा बनाने के उदाहरण रखे हैं।

इजरायल ने न केवल अपने मरुस्थलों को हराभरा किया, बल्कि अपनी तकनीक को दूसरे देशों तक भी पहुंचाया। खेती-किसानी के लिए इजरायल ने बाग-बगीचों और पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने जैसी कई ऐसी मशीनें बनाईं, जिनकी आज दुनिया भर में तूती बोल रही है।

कुछ ही घंटों में ही जोत ली जाती हैं सैकड़ों एकड़ जमीन

इजरायल में बहुत कम बारिश होती है। इसके चलते यहां बारिश का फायदा जल्द से जल्द उठाना होता है। आमतौर पर खेत जोतने में ही काफी समय लग जाता है। इसके लिए इजरायल ने इटली से खेत जोतने वाली ये विशालकाय मशीनें खरीदी थीं।

इसके बाद इजरायली कंपनी ‘एग्रोमॉन्ड लि.’ ने इससे भी आधुनिक मशीनों का प्रोडक्शन शुरू किया। इस तरह अब इजरायल में ये मशीनें अधिकतर किसानों के पास है। इसके अलावा किसान इन्हें किराए पर भी ले सकते हैं। इन मशीनों से कुछ ही घंटों में सैकड़ों एकड़ जमीन जोत ली जाती है।

कारपेट की तरह शिफ्ट कर देती हैं बगीचे

फोटो में दिखाई दे रही यह मशीन इजरायल के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग द्वारा डवलप की गई है। इसका उपयोग बाग-बगीचों और पौधों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए किया जाता है। इससे घास-फूंस और पौधों की जड़ों तक को नुकसान नहीं पहुंचता। अब ऐसी मशीनों का उपयोग कई देशों में होने लगा है।

पानी की बचत के लिए अनोखी मशीन

इजरायल में पानी की कमी होने के चलते यहां नहरों की व्यवस्था नहीं है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इजरायल के रमत नेगेव डिजर्ट एग्रो रिसर्च सेंटर ने खेतों की सिंचाई के लिए इन स्पेशल मशीनों को डिजाइन किया। इससे न सिर्फ खेतों की सिंचाई होती है, बल्कि पानी की भी काफी बचत हो जाती है। मशीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है।

मूंगफली जमीन से निकालकर साफ भी कर देती है

इजरायल के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग द्वारा डवलप की गई यह मशीन मूंगफली और जमीन के अंदर होने वाली सब्जियों व अनाज को निकालने का काम करती है। मशीन की खासियत यह है कि यह सिर्फ मूंगफली को जमीन से निकालने के बाद उसे साफ भी करती जाती है।

इसके बाद मशीन में ही बने ड्रमों में भरती चली जाती है। इससे न सिर्फ किसानों की मेहनत ही बचती है, बल्कि कम समय में ढेर सारा काम हो जाता है। बता दें कि इजरायल में मूंगफली की काफी खेती होती है।

पेड़ों को जड़ सहित उखाड़कर दूसरी जगह कर कर देती है शिफ्ट

सूखा होने के बाद भी इजरायल हरा-भरा देश है। दरअसल, इजरायल ने अन्य देशों की तरह विकास के नाम पर पेड़-पौधों को नाश नहीं होने दिया। इसके लिए यहां पेड़ काटने के बजाय उन्हें शिफ्ट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

इसके लिए इजरायली कंपनी ‘एग्रोमॉन्ड लि.’ ने ऐसी मशीनों का निर्माण किया, जो बड़े से बड़े पेड़ को जड़ सहित उखाड़कर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट कर देती है। इससे पेड़ों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता।

सिर्फ 30 सेकेंड में मिलेंगे 10 हजार रुपए, बस देने होंगे 5 सवालों के जवाब

अगर आपकी जनरल नॉलेज ठीक-ठाक है और करंट अफेयर्स पर नजर रखते हैं तो केवल 30 सेकेंड में आप 10 हजार रुपए जीत सकते हैं। आपको इस तीस सेकेंड में केवल 5 सवालों के जवाब देने होंगे। इस प्रतियोगिता का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टैक्नोलॉजी मिनिस्ट्री के पोर्टल पर mygov.in पर किया गया है।

क्या है प्रतियोगिता

quiz.mygov.in द्वारा समय-समय पर क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। आजकल वीकली क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इस बार की प्रतियोगिता 5 दिसंबर से शुरू हुई है और 10 दिसंबर तक रात 12 बजे तक चलेगी।

क्या है इनाम

इस प्रतियोगिता में पहले स्थान पर रहने वाले को 10 हजार रुपए, दूसरे स्थान पर रहने वाले को 5000 रुपए और इनाम 2000 रुपए होगा।

क्या करना होगा

इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पहले आपको mygov.in पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद आप लॉगिन करके प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं। अगर कम से कम समय में आप 5 सवालों का जवाब देने में सफल रहते हैं तो आप प्रतियोगिता जीत सकते हैं।

एक सप्ताह में मिलेगा परिणाम

हालांकि जैसे ही 30 सेकेंड खत्म होंगे तो आपको रिजल्ट के बारे में पता चल जाएगा, लेकिन आप विजयी हुए हैं या नहीं। इस बारे में एक सप्ताह में पता चलेगा, जब सभी प्रतियोगिता बंद हो चुकी होगी। दरअसल, इनाम उसे दिया जाएगा, जिसने कम से कम समय में जवाब दिए।

बैंक में पहुंचेगी रकम

प्रतियोगिता के बाद संभावित विजेताओं से उनके बैंक डिटेल मांगी जाएगी। अगर आप जीत जाते हैं तो आपके बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हो जाएगा।

अब पुरुषों को कंडोम की नहीं होगी जरूरत,आया ये नया विकल्प

यूं तो महिलाओं के लिए बाजार में कई प्रकार की गर्भनिरोधक गोलियां मौजूद हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने अब पुरुषों के लिए बर्थ कंट्रोल जेल विकसित किया है. ये पुरुषों के लिए बनाया गया पहला कॉन्ट्रासेप्शन जेल होगा.

पॉपुलेशन काउंसिल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ और ह्यूमन डेवलपमेंट के शोधकर्ताओं ने मिलकर ये जेल विकसित किया है, जो पुरुषों में स्पर्म के प्रोडक्शन को कम करने में मदद करेगा.

स्टडी की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस जेल में फीमेल सेक्स हार्मोन प्रोजेस्टेरोन का सिंथेटिक वर्जन और पुरुषों में पाया जाने वाला टेस्टोस्टेरोन हार्मोन शामिल है. इस जेल को पुरुषों को अपने कंधे और कमर पर लगाना होगा, जिसके बाद स्किन इस जेल में मौजूद हार्मोन्स को एब्सोर्ब कर पुरुषों में स्पर्म के प्रोडक्शन को कम कर देगी.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, इस जेल को लगाने से पुरुषों में स्पर्म की मात्रा तो कम हो जाएगी, लेकिन इसका असर ज्यादा लंबे समय तक नहीं रहेगा. इसके अलावा जेल में मौजूद टेस्टोस्टेरोन पुरुषों में पाए जाने वाले नेचुरल टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के कम होने पर होने वाले कई प्रकार के साइड इफेक्ट्स से भी सुरक्षित रखेगा. जैसे- इरेक्टाइल डिसफंक्शन, शरीर के बालों का कम होना, आवाज में बदलाव आदि.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की कॉन्ट्रासेप्टिव डेवलपमेंट प्रोग्राम की मुख्य लेखक Diana Blithe ने बताया, कई महिलाएं हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्शन इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं. वहीं, पुरुषों के लिए बाजार में बहुत लिमिटेड कॉन्ट्रासेप्टिव हैं.

‘एक सुरक्षित, असरदार और रिवर्सिबल मेल कॉन्ट्रासेप्टिव लोगों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है.’  बता दें, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा U.S में जल्द ही इस जेल का क्लीनिकल ट्रायल किया जाएगा. इसमें करीब 400 कपल्स पर इस जेल का टेस्ट किया जाएगा. इस ट्रायल से पता लगाया जा सकेगा कि ये जेल कितना सुरक्षित और असरदार है और एक समय में कितना जेल इस्तेमाल करना फायदेमंद रहेगा.

यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. विलियम ब्रेमनर ने कहा कि इस नए जेल में बहुत क्षमता है, ये बहुत असरदार साबित हो सकता है. बर्थ कंट्रोल के लिए पुरुषों के पास अभी तक केवल कंडोम का ही ऑप्शन था. कॉन्ट्रासेप्शन के सभी ऑप्शन महिलाओं के लिए ही थे. लेकिन इस जेल की मदद से अब पुरुष भी बिना कंडोम इस्तेमाल किए बर्थ कंट्रोल कर सकेंगे.

बता दें, वैज्ञानिक पुरुषों के लिए भी कॉन्ट्रासेप्टिव दवाइयां बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल इसमें अभी लगभग 5 साल का समय लगेगा. हालांकि, वैज्ञानिकों ने बताया कि अभी ये कहना मुश्किल होगा कि पुरुषों के लिए आने वाली कॉन्ट्रासेप्टिव गोलियों की फॉर्म में होंगी या फिर स्प्रे और सब-स्किन इंप्लांट की फॉर्म में.

साल 2016 में Wolverhampton University के शोधकर्ताओं ने बताया था कि उन्होंने स्पर्म स्विमिंग को रोकने का तरीका विकसित किया है. इसके जरिए छोटे-छोटे कंपाउंड स्पर्म में मिलकर इसकी क्षमता को कम कर महिला को प्रेग्नेंट नहीं कर सकेंगे.

यहां पे सिर्फ 8549 रुपए में मिल रही है फुली ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीन, जाने पूरी ऑफर

फ्लिपकार्ट की बिग शॉपिंग डेज सेल रात 12 बजे से शुरू हो चुकी है। 3 दिन तक चलने वाली ये सेल 8 दिसंबर को रात 11:59 पर खत्म होगी। सेल में इलेक्ट्रॉनिक, गैजेट्स, होम अप्लायंस, एक्सेसरीज के साथ दूसरे आइटम पर भी जबरदस्त डिस्काउंट मिल रहा है।

HDFC बैंक के डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 10% का इंस्टेंट डिस्काउंट दिया जाएगा। सेल में Midea ब्रांड की फुली ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीन को 10 हजार रुपए से भी कम कीमत पर खरीदा जा सकता है।

ये है पूरा ऑफर

  • इसे 1056 रुपए की नो कोस्ट EMI पर खरीद सकते हैं।
  • स्पेशल प्राइस गेट में एक्स्ट्रा 1000 रुपए का डिस्काउंट दिया जाएगा।
  • HDFC बैंक के क्रेडिट और डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर 10% का ऑफ मिलेगा।
  • एक्सिस बैंक बज क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 5% का ऑफ मिलेगा।

इतने रुपए में मिल जाएगी मशीन

फ्लिपकार्ट ने इस फुली ऑटोमैटिक मशीन को 11,880 की MRP के साथ लिस्टेड किया है। ऑफर में ये 9,499 रुपए की मिल जाएगी। यानी इस मशीन पर सेल के दौरान 2381 रुपए की सीधी बचत होगी। वहीं, अगर आप HDFC बैंक के क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट करते हैं तब 950 रुपए का एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिलेगा। ऐसे में इसकी कीमत 8549 रुपए रह जाएगी।

Midea 6.5 kg Fully Automatic के फीचर्स

  • ये फुली ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीन टॉप लोड के साथ आती है। कंपनी का दावा है कि इससे बेस्ट वॉश क्वालिटी मिलती है।
  • मशीन ही हायर स्पिन स्पीड 700 rpm है। ये कपड़े को धोने के साथ सुखाने का भी काम करती है।
  • इसमें अच्छी वॉशिंग के लिए 8 वॉश प्रोग्राम दिए हैं।
  • इसके अंदर का मटेरियल स्टेनलैस स्टील का है। जो इसे लॉन्ग लाइफ देता है।
  • इसमें एक बार में 6.5 kg कपड़े वॉश किए जा सकते हैं।
  • इसकी ट्रे जरा सा पुश करने पर खुद ही बंद हो जाती है।

पुरानी कार बेचकर खड़ा किया बड़ा कारोबार, अब मिला 700 करोड़ रुपए का इनवेस्टमेंट

पुरानी कार खरीदने वाली दिग्गज ऑनलाइन कंपनी कार देखो डॉट कॉम ने हाल ही में बाजार से करीब 700 करोड़ रुपए का निवेश जुटाया है। गार्नरसॉफ्ट के स्वामित्व वाली कंपनी कार देखो डॉट कॉम ने इस निवेश के साथ अपना कारोबार बढ़ाने के लिए नई योजना बनाई है।

इस योजना के तहत कंपनी अब पुरानी कारों के फाइनेंस और बीमा पर विशेष फोकस करेगा। इसका कारण यह है कि पुरानी कारों पर फॉइनेंस और बीमा की सुविधा शुरू करने के बाद कंपनी के कारोबार में भारी उछाल आया है।

यहां से जुटाया फंड

इस निवेश से जुड़ी जानकारी रखने वाले कंपनी के सूत्रों के अनुसार, Sequoia कैपिटल ग्लोबल ग्रोथ फंड ने कार देखो डॉट कॉम में यह निवेश किया है। इस निवेश के साथ गुरुग्राम स्थित कंपनी में निवेश की सीमा 400-500 मिलियन डॉलर हो गई है। साथ ही कंपनी की वैल्यू 2016 के बाद पहली बार 400 मिलियन डॉलर के पार गई है। 2016 में कंपनी की वैल्यू 360 मिलियन डॉलर के करीब थी।

फाइनेंस और बीमा क्षेत्र ने बदली कंपनी की तकदीर

पुरानी कारों के बेचने वाली दिग्गज कंपनी कार देखो डॉट कॉम ने हाल ही में कारों का बीमा और फाइनेस के क्षेत्र में कदम रखा है। इससे कंपनी की कमाई में बढ़ोतरी हुई है। इन दोनों क्षेत्रों में कदम रखने के बाद कंपनी की कमाई में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले वित्त वर्ष 2018 में बढ़कर 160 करोड़ रुपए हो गई है।

तेजी से बढ़ रहा है पुरानी कारों का बाजार

बाजार के जानकारों के अनुसार, इस समय पुरानी कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि अब इस कारोबार में कई नामी गिरामी कंपनियां आ गई हैं। साथ ही कंपनियों की ओर से फाइनेंस और बीमा की सुविधा उपलब्ध कराए जाने से लोग इनका रूख कर रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गूगल कैपिटल की कुल कमाई का 20 फीसदी हिस्सा पुरानी कारों से कारोबार से ही आता है।

कार्स-24 में निवेश कर रही है Sequoia कैपिटल

यहां सबसे रोमांचक बात यह है कि कार देखो डॉट कॉम की प्रमुख प्रतिद्वंदी कंपनी कार्स-24 में भी Sequoia कैपिटल ने निवेश किया है। जहां कार देखो अपने कारोबार के लिए केवल बाजार पर निर्भर है, वहीं कार्स-24 कस्टमर टू बिजनेस मॉडल अपनाती है। इस मॉडल के तहत कार्स-24 व्यक्तिगत ग्राहकों और डीलर्स से कार खरीदकर उन्हें अन्य डीलर्स को बेचती है।

100 रुपए में ऑनलाइन बनवाएं मैरिज सर्टिफिकेट, रजिस्ट्रेशन का यह है प्रोसेस

शादी का सीजन चल रहा है लेकिन शादी की तैयारियों के बीच अपनी शादी से जुड़े कानूनी दस्तावेजों पर भी काम जरूर कर लें।  सुप्रीम कोर्ट ने मैरिज सर्टिफिकेट बनाना अनिवार्य कर रखा है।

अब जब देश के कई राज्यों में मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ऑनलाइन बन रहा है। शादीशुदा जोड़े को मैरिज सर्टिफिकेट की जरूरत पासपोर्ट में वैवाहिक स्टेटस को अपडेट कराने, ज्वाइंट होम लोन लेने, ज्वाइंट बैंक अकाउंट खुलवाने और कपल वीजा लेने के लिए पड़ती है।

जानिए ऑनलाइन मैरिज सर्टिफिकेट बनाने का क्या है तरीका..

क्या है मैरिज सर्टिफिकेट

मैरिज सर्टिफिकेट आधिकारिक स्टेटमेंट हैं, जिसके तहत दो लोग शादीशुदा माने जाते हैं। देश में शादी को हिंदू मैरिज एक्ट 1955 और स्पेशलमैरिज एक्ट 1954 के तहत रजिस्टर किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मैरिज सर्टिफिकेट किया अनिवार्य

साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने शादी को रजिस्टर करना अनिवार्य बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए हिंदू एक्ट में मैरिज रजिस्ट्रेशन जरूरी कर दिया है।

कहां बनता है मैरिज ऑनलाइन सर्टिफिकेट

मैरिज सर्टिफिकेट कोर्ट और राज्य सरकार की वेबसाइट पर जाकर बनवा सकते हैं। दिल्ली, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में राज्य सरकार की वेबसाइट पर मैरिज सर्टिफि‍केट का फॉर्म भर सकते हैं। सभी राज्यों में मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने का प्रोसेस लगभग एक जैसा है।

ऑनलाइन बनाने का यह है प्रॉसेस

दिल्ली सरकार का रेवेन्यू डिपार्टमेंट ई-डिस्ट्रिक्ट नाम से वेबसाइट चलाता है। इसके जरिए सरकार लोगों को ऑनलाइन सर्विस देती है।

  • पहले आप http://edistrict.delhigovt.nic.in/in/en/Account/Register.html इस लिंक पर क्लिक करें।
  • ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर नए यूजर को पहले रजिस्टर करना होता। उसके बाद स्क्रीन पर दिए इंस्ट्रक्शन को फॉलो करें।
  • आप अपने हसबैंड की डिटेल भरे और ‘र‍जिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज सर्टिफिकेट’ पर क्लिक करें। फॉर्म डाउनलोड हो जाएगा। आप इस फॉर्म में सारी डिटेल भर दें और अप्वाइंटमेंट की तारीख सेलेक्ट करें। सबमिट बटन पर क्लिक करके अप्लिकेशन फॉर्म सबमिट कर दें।
  • आपको एक टेम्परेरी नंबर मिल जाएगा। ये टेम्परेरी नंबर अक्नोलेजमेंट स्लिप पर भी होगा। आप अपने एप्लिकेश फॉर्म और अक्नोलेजमेंट स्लिप का प्रिंट आउट निकालना न भूलें। एप्लिकेशन फॉर्म का काम हो गया।
  • अप्वाइंटमेंट में सब फाइनल होने के बाद जब आपकी एप्लिकेशन अप्रूव हो जाएगी, तो ई-डिस्ट्रिक्ट के पोर्टल पर एप्लिकेशन नंबर डालकर मैरिजसर्टिफिकेट को डाउनलोड कर सकते हैं।

कितने समय में मिलेगा अप्वाइंटमेंट

  • हिंदू मैरिज एक्ट के तहत आपको अप्वाइंटमेंट का समय 15 दिन में मिल जाएगा।
  • स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत 60 दिन का समय लगता है।

अप्वाइंटमेंट के समय क्या होना है जरूरी

  • आपको एक ऐसा गवाह लेकर आना होगा, जो आपकी शादी में शामिल हुआ है। गवाह के पास पैन कार्ड और एडे्रस प्रूफ होना जरूरी है।
  • साथ ही सभी डॉक्‍यूमेंट अटैस्टेड होने चाहिए।

ऑनलाइन फॉर्म जमा करते समय इन बातों का रखे ध्यान

वेबसाइट पर अपलोड होने वाली फाइल का साइज 100 केबी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यदि आपने डॉक्यूमेंट अटैच नहीं किए तो आपकी एप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकती है।

कौन से चाहिए डॉक्यूमेंट

  • एप्लिकेशन फॉर्म
  • एड्रेस प्रूफ – हसबैंड और वाइफ दोनों का
  • जन्मतिथि – ड्राइविंग लाइसेंस (हसबैंड और वाइफ दोनों का)
  • हसबैंड और वाइफ की 2 पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
  • एक शादी की फोटोग्राफ
  • आधार कार्ड
  • सभी डॉक्यूमेंट की फोटो कॉपी सेल्फ अटे्स्टड होनी चाहिए।
  • ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए शादी का कार्ड भी चाहिए।

इतने समय में बन जाता है मैरिज सर्टिफिकेट

दिल्ली में ‘तत्काल मैरिज सर्टिफिकेट’ बनता है।  ‘तत्काल मैरिज सर्टिफिकेट’ में रजिस्ट्रेशन प्रोसेस एक दिन में हो जाता है। आपको इसके तहत मैरिज सर्टिफिकेट 24 घंटे में मिल जाता है।

फीस

  • हिंदू मैरिज एक्ट के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए 100 रुपए फीस है।
  • स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए 150 रुपए फीस है।
  • ‘तत्काल मैरिज सर्टिफिकेट’ बनवाने के लिए 10,000 रुपए फीस लगेगी।

TV पर इन 100 चैनलों के बदले आप से लिए जा सकते हैं सिर्फ 130 रु. महीना, सरकार ने जारी किये आदेश

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के नए नियमों के अनुसार 100 फ्री चैनल के लिए केबल ऑपरेटर और डीटीएच सर्विस प्रोवाइडर अब 130 रुपए से अधिक नहीं ले सकते। कोई भी ऑपरेटर या डीटीएच सर्विस प्रोवाइडर कंपनी ग्राहकों पर पैकेज नहीं थोप सकेंगे। इन नियमों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

ट्राई ने अनुमान व्यक्त किया है कि मप्र जैसे राज्यों में फ्री चैनल और पे चैनल मिला कर सामान्य उपभोक्ता को हर महीने 243 रुपए का भुगतान करना होगा। इसमें 65 फ्री टू एयर चैनल, दूरदर्शन के 23 चैनल, 3 म्यूजिक चैनल, 3 न्यूज चैनल, 3 मूवी चैनल और 3 जीईसी चैनल सब मिलाकर 100 चैनल शामिल हैं।

ऐसे में यदि कोई भी ऑपरेटर आप से ज्यादा पैसा वसूल कर रहा है तो आप इसकी शिकायत ट्राई में कर सकते हैं। ट्राई ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए 29 दिसंबर की तारीख तय की है। देशभर में ट्राई के 5 रीजनल ऑफिस हैं, जहां शिकायत की जा सकती है।

कहां-कहां हैं रीजनल ऑफिस

हैदराबाद, कोलकाता, बेंगलुरू, भोपाल और जयपुर में ट्राई के रीजनल ऑफिस हैं। इसके अलावा दिल्ली के महानगर दूरदर्शन भवन, जवाहरलाल नेहरु मार्ग में ट्राई का हेड ऑफिस है। आप यहां भी अपनी शिकायत पहुंचा सकते हैं। आप ट्राई के ईमेल आईडी ap(at)trai(dot)gov(dot)in के साथ ही फोन नंबर 91-11-2323 6308 (Reception) पर भी कॉन्टेक्ट कर सकते हैं।

ट्राई के तीन अन्य महत्वपूर्ण एप

माय कॉल एप – इस एप के जरिए आप अपने कॉल की क्वालिटी के संबंध में सूचना दे सकेंगे। इस आधार पर ट्राई आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।
डीएनडी एप– इस एप के जरिए आप कुछ समय के लिए इनकमिंग कॉल रोक सकते हैं।
माय स्पीड – इस एप के जरिए आप नेट की स्पीड चेक कर सकते हैं।

मप्र रीजन के लोग यहां कर सकते हैं शिकायत

कोई केबल ऑपरेटर या डीटीएच कंपनी उपभोक्ताओं को सेवाएं देने में कोताही बरते तो ट्राई के कंज्यूमर एडवोकेसी ग्रुप के पते ई-5/ए, गिरीश कुंज, अरेरा कॉलोनी और फोन नंबर 07552463731 पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा वेबसाइट – www.nchse.org और ई- मेल nchsebpl@gmail.com पर भी शिकायत कर सकते हैं।

किराये के मकान के लिए रेंट एग्रीमेंट 11 महीने का ही क्यों बनता है ?

मेट्रो शहरों में किराये पर घर देना एक व्यवसाय की तरह बन गया है. मेट्रो शहरों में या फिर किसी भी अन्य जगह पर किराये का मकान लेते समय मकान की जगह, कमरों की हालत, किराया, बिजली पानी के साथ एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है जिसे रेंट एग्रीमेंट कहते हैं.

रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किरायेदार के बीच में लिखित दस्तावेज होते हैं जो कि किसी भी विवाद की स्थिति में बहुत काम आते हैं. रेंट एग्रीमेंट के बारे में जानिय़े कुछ खास और जरूरी बातें

रेंट एग्रीमेंट

रेंट एग्रीमेंट किसी भी प्रॉपर्टी को किराये पर देने से पहले किरायेदार और मकानमालिक के बीच में एक लिखित समझौते के तौर पर प्रयोग किया जाता है. इसमें मकान का पता, जगह का टाइप, साइद के साथ मासिक किराया, सिक्योरिटी आदि के साथ कम से कम कितने समय के लिए रहना है और मकान छोड़ने से पहले नोटिस आदि देने की सभी जरूरी शर्तें पूरी तरह से लिखी होती हैं.

रेंट एग्रीमेंट एक्ट

रेंट एग्रीमेंट को सामान्तया लोग 11 महीनों की अवधि के लिए ही बनवाते हैं. 11 महीनों के लिए रेंट एग्रीमेंट का प्रयोग उस पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी के कर से बचने के लिए किया जाता है.

रजिस्ट्रेशन एक्ट ,1908 के अनुसार किसी एग्रीमेंट की अवधि अगर 12 महीनों से अधिक है तो फिर उस लीज या रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होता है. रजिस्ट्रेशन करवाने पर रजिस्ट्रेशन फीस और फिर स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करना भी जरूरी हो जाता है. इसी से बचने के लिए लोग रेंट एग्रीमेंट को अधिकतर 11 महीनों के लिए ही बनवाते हैं.

रेंट एग्रीमेंट के बारें में कुछ तथ्य

  • रेंट एग्रीमेंट करने से पहले मकानमालिक को किरायेदार से जु़ड़ी सभी जरूरी बातें सही से जान लेनी चाहिये. किरायेदार क्या करता है, कहां से आया है, कहां नौकरी कर रहा है आदि आदि.
  • मकान कितने समय के लिए दिया जा रहा है. बिजली , पानी और हाउस टैक्स का बिल कौन देगा आदि-आदि.
  • रेंट कंट्रोल एक्ट के बारे में जानकारी कर लेनी जरूरी होती है.
  • जगह का किराया कम से कम कितने समय में बढ़ाया जाएगा और कितना बढ़ाया जाएगा.

बेटी की जगह मां को पहनना पड़ा दुल्हन का लिबास, जानिए ऐसा क्या हुआ

बाल विवाह जैसे सामाजिक प्रथा के खिलाफ भले ही बुलंद आवाज उठाई जा रही हो लेकिन अभी भी ये प्रथा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लड़के और लड़की की शादी की उम्र भले ही कानूनी रूप से तय हो लेकिन फिर भी इस तरह के मामले सामने आ जाते हैं जहां नियम-कानून को तोड़ा जा रहा हो। कुछ ऐसा ही राजस्थान के बांसवाड़ा में हुआ।

बांसवाड़ा के रहने वाले एक प्रेमी जोड़े का प्यार शादी तक नहीं पहुंच पाया क्योंकि उनकी उम्र शादी के लायक नहीं थी लेकिन इस शादी को पूरा करने की और गिरफ्तारी से बचने की भरसक कोशिश हुई। इस प्रेमी जोड़े ने अपने परिवारवालों को शादी के लिए राजी तो कर लिया

लेकिन शादी के ही दिन जैसे ही चाइल्ड लाइन के पास यह खबर पहुंची को अधिकारी शादी रूकवाने पहुंच गए। दूल्हा तो खेत में भाग गया, वहीं इसे घटना को दबाने और अधिकारियों को धोखा देने के लिए दुल्हन की मां ने शादी का जोड़ा पहना और ऐसे जताया कि जैसे वही दुल्हन है। हालांकि सच सामने आ गया और शादी रोक ली गई।

यह घटना चित्र डुंगरी में हुई जहां 16 साल की लड़की की शादी घलकीया गांव के 20 साल के लड़के से की जा रही थी। रस्में चल रही थी तभी एकीकृत बाल विकास योजना की टीम पहुंची। गिरफ्तारी से बचने के लिए दूल्हे ने अपने साफा फेंका और खेतों की तरफ भाग गया। लड़की की मां ने दुल्हन की तरह खुद को पेश किया लेकिन सच छुप न सका।

इतनी छोटी क्यों होती हैं लड़कियों की जींस की पॉकेट? जानिए यह खास वजह

आप अपनी जींस की पॉकेट में क्या-क्या सामान रख लेती हैं. एक मोबाइल और ज़्यादा से ज़्यादा एक पेन. क्या मोबाइल भी पूरी तरह पॉकेट में आ पाता है? ग़ौर करेंगी तो मोबाइल आपकी पॉकेट से झांकता हुआ दिखाई देता है और दो मोबाइल रखने के बारे में तो आप सोच भी नहीं सकतीं.

वहीं अगर हम लड़कों की जींस की पॉकेट देखें तो उसका साइज़ इतना बड़ा होता है कि दो मोबाइल तक एक साथ आ जाते हैं. पीछे की पॉकेट में वो बड़ा सा पर्स भी रख लेते हैं. जबकि लड़कियों की जींस की पीछे की पॉकेट में कुछ पैसे रखने पर भी वो चलते-चलते खिसककर बाहर आने लगते हैं.

लड़कियां करें भी तो क्या

अगर लड़कियों को छोटी पॉकेट नहीं चाहिए तो वो क्या कर सकती हैं. उनके पास कितने विकल्प मौजूद हैं.  लीवाइस, पेपे, फ्लाइंग मशीन और ली जैसे ब्रांड में लड़कियों के लिए जींस की अलग-अलग कैटेगरी होती है. किसी कैटेगरी में छोटी पॉकेट, किसी में पॉकेट दिखती है पर होती नहीं तो किसी में पॉकेट ही नहीं होती.

क्या हैं कारण

फै़शन डिज़ाइनर लड़कियों और लड़कों की जींस में पॉकेट के इस अंतर से सहमति जताती हैं. वह लड़कियों को लेकर बाज़ार की धारणा को इसकी वजह बताती हैं.

वह कहती हैं, “आमतौर पर देखा जाए तो बहुत कम ब्रांड्स और डिज़ाइनर लड़कियों के कपड़ों में पॉकेट देते हैं. क्योंकि उन्हें ये लगता है कि महिलाएं फ़िगर को लेकर ज़्यादा चिंता करती हैं. अगर वो ट्राउज़र्स में ज़्यादा पॉकेट देंगे तो उनका कमर के आसपास का हिस्सा ज़्यादा बड़ा लगेगा और महिलाएं इसे पसंद नहीं करेंगी.”

“फै़शन अपनी जगह है लेकिन पॉकेट की ज़रूरत हमेशा रहती है. आप समझौता कर लेते हैं वो एक अलग बात है. मोबाइल या पर्स रखने के लिए पॉकेट चाहिए होती है. इससे आप ज़्यादा एक्टिव और फ्री भी महसूस करते हैं.”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा मसला

ये मामला सिर्फ़ भारत का ही नहीं है बल्कि कई देशों में महिलाएं इस भेदभाव को महसूस कर रही हैं. महिलाओं की जींस के पॉकेट साइज़ को लेकर विदेशों में भी रिसर्च की गई है. पुडिंग डॉट कॉम वेबसाइट ने जींस के 20 अमरीकी ब्रांड्स पर शोध किया और उसने नतीजों में महिला और पुरुष की जींस की पॉकेट में अंतर पाया.

पीछे की पॉकेट्स की बात करें तो वो भी छोटी होती हैं लेकिन उनमें अंतर कम होता है. जब लड़कियों से इस बारे में बात की गई तो अधिकतर ने बताया कि वो इस अंतर को महसूस तो करती हैं लेकिन चलन में होने के कारण स्वीकार भी कर लेती हैं.