शादी से 3 महीने पहले डूब गया था बिजनेस, लेकिन चाय ने बदल दी किस्मत और खड़ा कर दिया स्टार्टअप

आप क्या करेंगे अगर आपको अपनी शादी से तीन महीने पहले पता चले कि आपका बिजनेस या स्टार्टअप डूब रहा है? शादी होने से जल्द ही आपकी जिम्मेदारी बढ़ने वाली है। ऐसे हाल में हर कोई आपको यही सलाह देगा कि नौकरी करो और खर्च कम करो तो चीजें बेहतर होंगी।

‘चायठेला’ ब्रांड को को-ओनर पंकज जज के साथ ऐसा ही हुआ। पंकज की शादी से एक महीने पहले उनके को-फाउंडर ने हाथ खड़े कर दिए और पुराने वेंचर से हट गए। उनका स्टार्टअप लगभग बंद होने की कगार पर था। पंकज के लिए नौकरी करना ऑप्शन नहीं था।

उन्होंने यह सभी अपनी होने वाली वाइफ को बताया। उनकी वाइफ को पता था कि सब खत्म होने वाला है लेकिन इसके बावजूद वो उनके साथ खड़ी रही। लेकिन फिर उन्होंने अपने लिए नए रास्ते निकाले..

चाय बेचने का आया आइडिया

पंकज ने फिर से बिजनेस शुरू करने के बारे में सोचा और वह अपने को-फाउंडर नितिन चौधरी से फिर से मिले। उन दोनों ने चाय के बिजनेस शुरू करने के बारे में प्लान किया। पंकज ने अपने पार्टनर को कहा कि शादी के बाद यही बिजनेस शुरू करेंगे। अपने पिछले स्टार्टअप के बाद उन्होंने प्लान बी पर काम किया। करीब 2 महीने बाद वह चाय का बिजनेस शुरू कर पाए।

ऐसे शुरूआत हुई चाय ठेले की..

इंडिया में चाय को नेशनल ड्रिंक की तरह माना जाता है। इंडिया में कॉफी से ज्यादा लोग चाय पीते हैं। कॉफी के बिजनेस में कैफे कॉफी डे, बरिस्ता और स्टारबक्स जैसे बड़े प्लेयर पहले ही थे, तो उन्होंने चाय का ही बिजनेस शुरू करने का प्लान किया। चाय ठेला की आउटलेट चेन है जो नोएडा के आसपास चाय का ठेला लगाते हैं। वह फ्रेश बनी हुई चाय सर्व करते हैं। वह डिमांड पर चाय बनाते हैं और उसे स्टोर नहीं करते।

बनाया कियॉस्क बेस्ट मॉडल

चाय ठेला कियॉस्क बेस्ड बिजनेस मॉडल है। वह अपने कियॉस्क आईटी पार्क, प्राइम मार्केट और कॉलेज के आसपास ज्यादा लगाते हैं। उन्होंने यह बिजनेस 2014 में शुरू किया था। अब उनके 6 से अधिक आउटलेट और 32 से अधिक कर्मचारी है। वह रोजाना 500 से 600 कप चाय बनाते हैं। वह अपने आउटलेट की संख्या 500 तक पहुंचाना चाहते हैं।

कैपिटल थी शुरुआती समस्या

पंकज ने कहा कि किसी भी कारोबार को शुरू करने में सबसे ज्यादा दिक्कत कैपिटल की होती है। नितिन उनके को-फाउंडर ने पैसा अपने भाई से लिया और पंकज ने अपने दोस्त से स्टार्टअप के लिए पैसा लिया। उन्होंने 10 करोड़ रुपए की फंडिंग शुरूआत में सामा कैपिटल से कराई थी। अब उनके चाय के बिजनेस में चाय प्वाइंट, चायोस उनके बड़े कंपिटिटर हैं।

33,000 करोड़ का है चाय मार्केट

अभी इंडिया में चाय की मार्केट करीब 33,000 करोड़ रुपए की है। यह सालाना 15 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इंडिया में 90 फीसदी से अधिक रिटेल चाय आउटलेट असंगठित है। बीते सालों में बिजी वर्किंग एरिया में चाय आउटलेट खुलने लगे हैं।

शादी के बाद आईं थोड़ी दिक्कतें

पंकज के इस नए बिजनेस का असर शादी पर भी पड़ा क्योंकि वह कारोबार के शुरूआती समय में अपनी वाइफ को समय नहीं दे पाए जबकि उनकी नई-नई शादी हुई थी।

रूसी विज्ञानिकों ने 4000 फीट की गहराई तक खोदा और फिर उन्हें मिल गया नर्क का द्वार

रूस में एक ऐसी जगह है जहां दुनिया का सबसे गहरा गड्ढा (बोरहोल) है। कोला सुपरडीप बोरहोल नाम के इस होल को 1970 में रूस के वैज्ञानिकों ने खोदना शुरू किया था। अमेरिकी वैज्ञानिकों को चुनौती देने के लिए वे ज्यादा से ज्यादा गहरा खोदना चाहते थे।

लगातार 19 साल की खुदाई के बाद साइंटिस्ट 12.24 किमी गहराई (40,230 फीट) तक पहुंच चुके थे। ये इतनी गहराई है, जिसमें 240 फीट के 167 कुतुब मीनार समा जाएं। इस गहराई पर जाकर साइंटिस्ट्स को खुदाई रोकनी पड़ी थी।

इस वजह से रोक दी थी खुदाई

इस खुदाई के लिए Uralmash नामक भीमकाय ड्रिलिंग मशीन बनाई गई थी, जो किसी भी परिस्थित में ड्रिल करने में सक्षम थी। मल्टी लेयर ड्रिलिंग सिस्टम वाली इस मशीन की टारगेट डेप्थ 15000 मीटर (49000 फीट) थी।

सालों की कड़ी मेहनत के बाद जब रूसी वैज्ञानिक 262 मीटर (40,230 फीट) की गहराई पर पहुंचे, तब मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। उस वक्त जमीन का तापमान 180 डिग्री सेलसियस से भी ज्यादा मापा गया।

इतना ही नहीं तापमान तेजी से बढ़ने भी लगा था। इसे देख तत्काल काम रोक दिया गया। तब साइंटिस्ट्स ने इस होल का नाम Door to Hell (नर्क का दरवाजा) रख दिया। इसके बाद सोवियत संघ के विघटन के बाद इसकी खुदाई दोबारा शुरू नहीं की गई।

सतह से 0.2% ही हुई खुदाई

जमीन में 12 किलोमीटर की खुदाई करना अपने आप में के किसी अजूबे से कम नहीं है पर आपको जानकर हैरानी होगी कि सतह से लेकर धरती के कोर तक जितनी गहराई है ये उसका 0.2 पर्सेंट भी नहीं है। साइंटिसट के मुताबिक धरती का तल 6371 किलोमीटर नीचे है, जहां पहुंचने का सोचा भी नहीं जा सकता।

गली-गली घूम साड़ी बेचने वाला बन गया 50 करोड़ की कंपनी का मालिक, कभी 2.50 रु दिहाड़ी पर करता था काम

कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो गरीबी या किसी तरह की मजबूरी भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती है। यह कहावत कोलकाता के रहने वाले बिरेन कुमार बसाक पर बिल्‍कुल सटीक बैठती है।

चार दशक पहले बिसाक अपने कंधे पर साड़ियों का बंडल लादकर गली-गली घूम हरेक घर का दरवाजा खटखटाकर साड़ी बेचा करते थे, तो कभी एक बुनकर के यहां 2.50 रुपए दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम किया करते थे। लेकिन आज वो अपनी मेहनत के दम पर बिरेन बसाक एंड कंपनी के मालिक बन गए हैं, जिसका सालाना टर्नओवर 50 करोड़ रुपए है।

गरीबी में गुजरा बचपन

बिरेन कुमार बसाक ने मनीभास्कर को अपनी संघर्ष की कहानी बताई। उन्होंने बताया कि उनका बचपन काफी गरीबी में गुजारा। बुनकर के परिवार में जन्मे बसाक के पिता के पास उतने पैसे नहीं थे कि परिवार का भरण-पोषण हो सके। उनके परिवार के पास एक एकड़ जमीन थी जिस पर अनाज उपजाकर कुछ खाने को मिल जाता था। पैसे की वजह से वो ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए।

2.50 रुपए दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का किया काम

उन्होंने बताया, कोलकाता के नादिया जिले के फुलिया में उन्हें एक बुनकर के यहां 2.50 रुपए दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम मिला। इस कंपनी में उन्होंने करीब 8 साल काम किए। इसके बाद उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने की ठानी और इसके लिए अपना घर गिरवी रखकर 10 हजार रुपए का लोन उठाया।

अपने बड़े भाई के साथ मिलकर वो बुनकर के यहां से साड़ी खरीद बेचने के लिए कोलकाता जाते थे। कुछ सालों तक यही सिलसिला चलता रहा। इस बिजनेस में कमाई होने लगी और दोनों भाई मिलकर करीब 50 हजार रुपए हरेक महीने कमाने लगे थे।

उन्होंने 1987 में साड़ी की अपनी पहली दुकान खोली। उस वक्त उनके पास सिर्फ 8 लोग काम करते थे। धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ता गया। आज वो हर महीने हाथ से बनी 16 हजार से ज्यादा साड़ियां देश भर में बेच रहे हैं। यहीं नहीं, अब उनके यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 24 हो गई और वो करीब 5 हजार बुनकरों के साथ काम कर रहे हैं।

भाई से अलग होकर शुरू किया बिजनेस

कमाई बढ़ने के साथ बसाक और उनके भाई ने कोलकाता में एक दुकान खरीदी और साड़ियां बेचने का काम शुरू किया। अगले एक साल में उनकी दुकान का टर्नओवर 1 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। लेकिन जल्दी ही वो अपने भाई से अलग होकर गांव लौट गए और यहीं पर साड़ी बेचने का बिजनेस शुरू किया।

फिर उन्होंने बिरेन बसाक एंड कंपनी की नींव रखी। बुनकरों से साड़ियां खरीद होलसेल रेट में साड़ी डीलर को बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ता गया और अब उनकी कंपनी का टर्नओवर 50 करोड़ रुपए हो गया है।

अगले 72 घंटे तबाही मचाएगी बारिश, IMD का 5 राज्यों के लिए रेड अलर्ट

अगले 4 दिन बारिश तबाही मचा सकती है. कुछ राज्यों के लिए अगले 72 घंटे काफी अहम बताए जा रहे हैं. तूफान, आंधी, भारी बारिश और ओलों से मुसीबत बढ़ सकती है. पिछले एक हफ्ते में कमजोर पड़े मॉनसून ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है.

मुंबई में पिछले 36 घंटों से बारिश हो रही है. केरल, कर्नाटक, ओडिशा, असम और पश्चिम बंगाल में भी बारिश से हाल बेहाल है. मौसम विभाग ने अगले 4 दिनों के लिए अलर्ट जारी किया है. इसमें 5 राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है. वहीं, 13 राज्यों के लिए ऑरेंज चेतावनी जारी की गई है. राजधानी दिल्ली में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है.

अगले 4 दिन भारी मचाएगी तबाही

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मध्य प्रदेश सहित 5 राज्यों में रेड अलर्ट जारी किया गया है. इन राज्यों में 9 से 12 जुलाई के बीच भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी है. वहीं, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और राजस्थान में भारी बारिश चेतावनी है.

इसके अलावा कुछ राज्यों में भारी बारिश से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है. मध्य प्रदेश के लिए अगले 4 दिन खतरनाक हैं. यहां कुछ इलाकों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी है. यहां ओलों के साथ तूफान आने की भी संभावना है. वहीं, मुंबई में भारी बारिश जारी रह सकती है.

कहां के लिए है रेड अलर्ट

अगले 24 घंटों में मध्‍य प्रदेश के दक्षिणी हिस्से, छत्तीसगढ़, महाराष्‍ट्र और गोवा के बड़े हिस्से में भारी से भारी बारिश की चेतावनी है. यहां के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है. वहीं, पूर्वी महाराष्‍ट्र, गुजरात और केरल में मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.

कहां कैसे रहेंगे हालात

9 जुलाई: मौसम विभाग के अनुसार 9 जुलाई को कोंकण, गोवा में भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है. वहीं, विदर्भ, मध्‍य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, मराठवाड़ा, सिक्किम, पूर्वी उत्तर प्रदेश, असम और मेघालय में भारी से भारी बारिश से लेकर भारी बारिश होने के आसार हैं.

10 जुलाई: 10 जुलाई को पश्चिमी मध्‍य प्रदेश, गोवा और कोंकण इलाके में भरी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. वहीं, पूर्वी मध्‍य प्रदेश, गुजरात, मध्‍य महाराष्‍ट्र, तेलंगाना, कोस्टल और इंटीरियल कर्नाटक में भारी से भारी या भारी बारिश हो सकता है. 10 जुलाई को पश्चिमी मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र के पश्चिमी इलाके के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है.

11 जुलाई: 11 जुलाई को मध्‍य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश होने के आसार हैं. वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, उत्तरांचल, नॉर्थ छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्‍ट्र, कर्नाटक के कोस्टल इलाकों और केरल में भारी से भारी बारिश हो सकती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ओडिशा, गुजरात और अंडमान-निकोबार में भारी बारिश हो सकती है. 11 जुलाई को पूरे मध्‍य प्रदेश के लिए रेड अर्ल्‍ट जारी किया गया है.

12 जुलाई: 12 जुलाई को पश्चिमी मध्‍य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश होने के आसार हैं. वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, गोवा, कोंकण, केरल, जम्मू एंड कश्‍मीर, पूर्वी मध्‍य प्रदेश, नॉर्थ छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात और कोस्टल कर्नाटक में भारी से भारी बारिश हो सकती है. 12 जुलाई को पश्चिमी मध्‍य प्रदेश के लिए रेड अलर्ट है.

देश में बारिश का हाल

क्षेत्र                                कितनी हुई बारिश        सामान्य       कम या ज्यादा (%)

पूरे देश में                          184.7 mm                 197.8 mm         -07%
उत्तर-पश्चिम भारत            102.5 mm                89 mm               +15%
मध्‍य भारत                         183.5 mm                202.5 mm         -09%
दक्षिण भारत                     201.9 mm                 186.9 mm         +8%
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत     324.7 mm                 411 mm            -21%

क्यों हैं भारी बारिश के आसार

दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने और बंगाल की खाड़ी में उत्तर-पश्चिमी हवा के दबाव से कई इलाकों में भारी से भारी बारिश की चेतावनी है. मध्य भारत से दक्षिण भारत तक देश के कई राज्यों में अच्छी बारिश हो रही है.

वहीं, पिछले कुछ घंटों में कई राज्यों के हालात बिगड़ चुके हैं. जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल में ज्यादा बुरा हाल है. वहीं, उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश से लोग फंस गए हैं.

यह है चौरस गड्डा खोदने वाली मशीन ,ज्यादा जानकारी के लिए वीडियो पर क्लिक करें

गड्ढा खुदाई यंत्र (post hole digger) :- यह एक औगर (auger) युकत यंत्र है, जिसका प्रयोग पौधा लगाने हेतु गड्ढा खोदने में किया जाता है | यह ट्रैक्टर के पी.टी.ओ. द्वारा संचालित एवं उसके थ्री प्वाईंट लिंकेज द्वारा जुड़ा एक अटैचमेन्ट है |

औगर एसेम्बली को बदलकर गड्ढे के ब्यास एवं उसकी गहराई को परिवर्तित किया जा सकता है | मशीन का वजन 150 – 240 कि.ग्रा. होता है एवं इसे 35 एच.पी. ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है | मशीन के गड्ढा बनाने की क्षमता 90 गडढे प्रति घंटा होती है |

ज्यादातर होल डिगर गोल गड्डा खोदते है लेकिन अब एक ऐसा होल डिगर (गड्डा खोदने वाला) आ गया है जिस से आप चौरस आकार का गड्डा खोद सकते है |

इसका फ़ायदा ये होता है जब हम कोई दीवार के लिए पिलर त्यार करना होता है जा फिर ऐसे ही पिलर बनाना होता है तो उसका आकार चौरस ही होता है ऐसे में इस मशीन की सहयता से हम बड़ी आसानी से गड्डा खोद सकते है

वीडियो देखे :

हर महीने 1 लाख तक हो सकती है इनकम, FOI नूडल्स दे रही है बिजनेस का मौका, 11 लाख का है निवेश

देश में फास्ट फूड का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। मेट्रो सिटी से लेकर छोटे शहरों तक फास्ट फूड की लोकप्रियता बढ़ी है। इसलिए फास्ट फूड से जुड़ा बिजनेस शुरू करना फायदेमंद साबित हो सकता है।

कई फास्ट फूड कंपनियां अपने बिजनेस विस्तार के लिए फ्रेंचाइजी ऑफर रही हैं। FOI नूडल्स भी ऐसी ही एक फास्ट फूड कंपनी है, जो फ्रेंचाइजी बढ़ाकर अपना बिजनेस बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अगर आप भी फास्ट फूड बिजनेस में उतरना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छा मौका है।

कंपनी के साथ जुड़कर आप मंथली 1 लाख रुपए तक इनकम कर सकते हैं। कंपनी की फ्रेंचाइजी के लिए आपको 11 लाख रुपए निवेश करने होंगे। कंपनी के मुताबिक, फ्रेंचाइजी ओनर को उसका पूरा निवेश 6 से 8 महीने में निकल जाएगा।

4.5 लाख रु. है फ्रेंचाइजी फीस

FOI नूडल्स के मार्केटिंग एंड फ्रेंचाइजी हेड विनीत सिंह ने बताया कि कंपनी देश भर में अपना विस्तार कर रही है। इसलिए कंपनी फ्रेंचाइजी ऑफर कर रही है। इसकी फ्रेंचाइजी फीस 4.50 लाख रुपए है। देश में कंपनी के 68 आउटलेट काम रहे हैं। हालांकि पूरे आउटलेट पर फ्रेंचाइजी ओनर को करीब 11 लाख रुपए निवेश करने होंगे।

आउटलेट पर 5.60 लाख करना होगा निवेश

फ्रेंचाइजी फीस के अलावा सेंटर फर्निशिंग पर आपको 3.60 लाख रुपए खर्च करने होंगे, जिसमें फ्लोरिंग, पेंटिंग, फर्नीचर आदि शामिल है। इसके अलावा इक्विपमेंट्स जैसे कम्प्यूटर, एसी, सर्विंग क्रॉकरी, डीप फ्रीज (500 लीटर), CCTV और अन्य आइटम्स पर 1.90 लाख रुपए का खर्च आएगा। कंज्मयुएबल्स पर 5,000 रुपए और लाइसेंस कॉस्ट पर 5 हजार रुपए का खर्च होगा। कुल मिलाकर आउटलेट के इंटीरियर औऱ इक्विपमेंट पर 5.60 लाख रुपए का निवेश होगा।

300 से 500 वर्ग फुट चाहिए स्पेस

FOI नूडल्स की फ्रेंचाइजी खोलने के लिए आपके पास 300 से 500 वर्ग फुट की जगह होनी चाहिए। वहीं आउटलेट ऐसी जगह होना चाहिए जो कस्टमर्स को आसानी से नजर आए।

कंपनी ये देगी सुविधा

कंपनी आपको स्टाफ की यूनिफॉर्म और ऑनलाइन मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर प्रोवाइड कराएगी। वहीं मेन्यू में नूडल्स के अलावा चीजी स्नैक्स, शेक्स और जूस, पास्ता शामिल हैं। इसके अलावा नेचुरल फ्लेवर आइसक्रीम भी सर्व की जाती है।

ऐसे होगी कमाई

विनीत के मुताबिक, फ्रेंचाइजी ओनर को उसका पूरा निवेश 6 से 8 महीने में निकल जाएगा। एवरेज रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट 100 फीसदी है, जिसके हिसाब से 11 लाख रुपए सालाना बैठता है। यानी आपको मंथली करीब 1 लाख रुपए तक इनकम हो सकती है।

पेन बनाने का व्यापार शुरू कैसे करें

पेन हर समय काम आने वाली चीज़ों में से एक है. घर से स्कूल और स्कूल से दफ्तर हर जगह इसकी आवश्यकता होती है. इसका व्यापार बहुत कम पैसे में शुरू किया जा सकता हैं. ख़ास कर बॉल पेन का इस्तेमाल हर क्षेत्र के लोगों में बहुत पसंद किया जाता है.

बॉल पेन की सबसे ख़ास बात ये होती है कि इसकी स्याही जल्द से जल्द सूख जाती है. इन दिनों ‘यूज़ एंड थ्रो’ पेन का भी खूब इस्तेमाल किया जा रहा है. यूज एंड थ्रो पेन या बॉल पेन का उद्योग बहुत आसानी से अपने घर में शुरू किया जा सकता है.

पेन बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियाँ

  • बैरल – बैरल पेन का वह हिस्सा होता है, जिसमे स्याही भरी जाती है. यह आपको 140 रूपये प्रति 250 पीस में मिल सकता है.
  • एडाप्टर – एडाप्टर बैरल और टिप के बीच का हिस्सा होता है. जोकि 4.5 रूपये प्रति 144 पीस मिल सकता है.
  • टिप – टिप पेन का वह हिस्सा होता है, जहाँ से लिखते समय स्याही नियमित रूप से बाहर आती है. यह आपको 28 से 35 रूपये प्रति 144 पीस में मिल सकता है.
  • ढक्कन – यह पेन को ढ़कने के लिए उपयोग किया जाता है. इसके ढक्कन की कीमत 25 रूपये प्रति 100 पीस है.
  • स्याही – यह पेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है जोकि 120 से 400 रूपये प्रति लीटर में मिल सकती है.

पेन बनाने के लिए मशीनें

यह उद्योग शुरू करने के लिए कम से कम 200 वर्ग फिट जगह की आवश्यकता होती है. इस जगह में लगभग पांच मशीनें बैठाई जाती हैं. नीचे पांचों मशीनों के विषय में दिया जा रहा है.

  • पंचिंग मशीन : पंचिंग मशीन वह मशीन होती है जिससे बैरल में एडाप्टर सेट किया जाता है.
  • इंक फिलिंग मशीन : इंक फिलिंग मशीन की सहायता से बैरल में स्याही भरी जाती है.
  • टिप फिक्सिंग मशीन : टिप फिक्सिंग मशीन की सहायता से पेन के एडाप्टर में टिप लगाया जाता है, जो लिखने में सहायक है.
  • सेण्ट्रीफ्यूगिंग मशीन : इसकी सहायत से पेन के अन्दर स्याही भरते हुए रह गये अतिरिक्त हवा को पेन से निकाला जाता है.

पेन बनाने के व्यापार के लिए कुल लागत (Ball Pen making business cost)

आम तौर पर सस्ते मशीन की कीमत 25,000 रूपए हैं, ये मशीनें छोटा व्यापार शुरू करने के लिए ठीक है. इसे कई बड़ी हार्डवेयर दूकानें बेचती हैं. इसे ऑनलाइन मंगाने के लिए निम्न वेबसाइट देख सकते हैं :

https://dir.indiamart.com/impcat/ball-pen-making-machine.html

उपरोक्त सभी चीज़ों को लेकर पहली बार पेन बनाने के व्यापार को स्थापित करने के लिए 30 से 40 हज़ार रूपए तक लग सकते हैं. इन 40 हज़ार रुपये में 25 हज़ार सिर्फ मशीन के हैं. अतः ये अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि एक बार मशीन बैठा लिया जाए तो, कम से कम पैसे लगा कर यह व्यापार चलाया जा सकता है. इसके अलावा यदि आप बड़ा व्यापार शुरू करना चाहते हैं तो इसके लिए ऑटोमेटिक मशीन की आवश्यकता होती है जोकि आपको 4 लाख रूपये तक मिल सकती है. इसके लिए कुल लागत इससे ज्यादा भी हो सकती है.

पेन बनाने की प्रक्रिया (Ball Pen making process)

पेन बनाने की प्रक्रिया आसान और अल्प सामायिक है. यहाँ इस प्रक्रिया का पूर्ण विवरण दिया जा रहा है.

  • सबसे पहले बैरल को पंचिंग मशीन में लगाना होता है. इस मशीन में पहले से एडाप्टर लगे हुए होते हैं. बैरल एडाप्टर को देखते हुए सही जगह लगाकर पंच करते ही बैरल में एडाप्टर सेट हो जाता है.
    एडाप्टर सेट हो जाने के बाद बैरल में स्याही भरने की प्रक्रिया आती है. स्याही भरने के लिए इंक फिलिंग मशीन का इस्तेमाल होता है.इंक फिलिंग मशीन में पहले से स्याही भरी हुई होती है. स्याही भरते समय इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि स्याही बैरल की साइज़ के अनुसार भरी जाए. अधिक स्याही भरने से वह बाहर भी आ सकती है जिससे पेन की क्वालिटी पर भी असर पड़ सकता है.
  • इसके बाद बैरल की ऊपरी छेद पर हाथ लगाकर रखें, फिर उसे टिप फिक्सिंग मशीन में लगाया जाता है. इस मशीन की सहायता से स्याही भरे बैरल में टिप लगाया जाता है. इसके बाद ये बैरल पेन में बदल जाता है.
  • इसके बाद इस पैन को सेंट्रीफ्यूगिंग मशीन में डाला जाता है जिससे इसके अंदर की अतिरिक्त हवा बाहर निकल जाए.
  • अब इस पेन का इस्तेमाल लिखने के लिए आराम से किया जा सकता है. इसी तरह आप मशीनों की मदद से अधिक संख्या में पेन बना सकते हैं और अपने ब्रांड का पेन बाज़ार में उतार सकते हैं.

पेन बनाने के व्यापार की मार्केटिंग (Ball Pen making business marketing)

बाज़ार में कई छोटी बड़ी कंपनियां पेन का व्यापार कर रही हैं, ऐसे में अपने व्यापार को बढाने के लिए कुछ विशेष क़दम उठाने की ज़रुरत होती है. पेन की क्वालिटी बेहतर रखना मार्केटिंग की पहली शर्त है. क्वालिटी बनाये रखने के लिए सर्वप्रथम पेन की स्याही को बेहतर क्वालिटी का रखना होगा.

इसके साथ ही एक और बड़ी आवश्यकता टिप की क्वालिटी भी अच्छी होनी चाहिए ताकि लिखावट अच्छी हो सके. अपने ब्रांड को प्रमोट करने के लिए छोटे बड़े पोस्टर्स और होर्डिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं. शहर के उन्नत जगहों पर अपने ब्रांड की होल्डिंग लगवाएं ताकि अधिक से अधिक लोगों की नज़र आपके ब्रांड पर पड़ सके.

पेन की पैकेजिंग कैसे करें (Ball Pen packaging)

पैकिंग करते हुए ऐसे पैकेट्स तैयार करें, जो आकर्षक दिखाई दे. तात्पर्य यह है कि, पांच पेन की कीमत पर एक अधिक पेन ऑफर के तौर पर पैकेट में डाल दें. इससे ग्राहक आपके ब्रांड की तरफ आकर्षित होंगे. आम तौर पर पेन बेचने के लिए 5 या 10 पीस के पैकेट्स बनाए जा सकते हैं. इसे आप खुल्ला भी बेच सकते हैं.

पेन बनाने के व्यापार का पंजीकरण (Ball Pen making business registration)

सबसे पहले व्यापार शुरू करें और व्यापार जब तेज़ गति से चलने लगे तो अपने ब्रांड का पंजीकरण करा लें. आप अपनी कंपनी का पंजीकरण LLP, OPC या PVT. LTD के अंतर्गत करा सकते हैं. आपको अपने लोकल अथॉरिटी से ट्रेड लाइसेंस लेने की आवश्यकता होती है.

कंपनी के नाम का करंट बैंक अकाउंट और पैन कार्ड होना भी ज़रूरी है. इसमें ‘पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड’ के लाइसेंस की ज़रुरत नहीं पड़ती है. यह बड़े व्यापार को शुरू करने के लिए बहुत जरुरी है.

LG से लेकर ESPN जैसी बड़ी कंपनियों के पूरे नाम आपको जरूर जानने चाहिए

रोज की जिंदगी में हम बहुत सारी ऐसी चीजों का नाम लेते हैं जिसका मतलब शायद हम ठीक से जानते भी नहीं. कुछ इसी तरह बहुत से ऐसे प्रोडक्ट हैं जिन्हें हम बोलते तो है लेकिन शायद ही हम उनके पूरे नाम जानते हों.

मगर क्या कभी आपने ऐसा सोचा है कि इन शॉर्ट नेम का फुल नेम क्या हो सकता है ? तो चलिए आज आपको इन बड़ी कंपनियों के पूरे नाम बताते हैं जिन्हें आप दूसरों को भी बताकर इंप्रेशन जमा सकते हैं.

बड़ी कंपनियों के पूरे नाम

LG

कंपनी का असली नाम गोल्डस्टार था. साल 1995 में लकी केमिकल्स में विलय के बाद इसके नाम में ‘लकी’ भी जोड़ दिया गया और इस तरह से इसका नाम LG हो गया.

FIAT

यह नाम फैब्रिका इटैलिएना ऑटो मोबाइली टोरिनो का शॉर्ट नेम है, जिसका अर्थ है “ट्यूरिन में इतालवी ऑटोमोबाइल फैक्ट्री”.

IBM

साल 1911 में बनी IT की बड़ी कंपनी कम्प्यूटिंग-टेब्यूलेटिंग-रिकॉर्डिंग, जहां काम करने के लिए सभी आईटी फील्ड के लोग तरसते हैं. इस कंपनी नाम साल 1924 में इसका नाम बदलकर इंटरनेशनल बिजनेस मशीन यानी IBM कर दिया गया था.

Amul

अमूल के कई प्रोडक्ट हम सभी यूज करते हैं. इसकी शुरूआत गुजरात के आणंद से हुई थी. जिसे आज भारत की दूध राजधानी भी कहा जाता है. अमूल का पूरा नाम आणंद मिल्क यूनियन है.

HTC

यह ताइवान की एक कंपनी है, जिसमें HTC का अर्थ है हाई टेक कंप्यूटर कॉर्पोरेशन.

BMW

महंगी गाड़ियों में BMW का नाम आपने कई बार सुना होगा लेकिन इसका पूरा नाम जानते हैं ? इसका पूरा नाम Bayerische Motoren Werke (बेरिशे मोटोरेन वेर्क) है जिसके पहले तीन अक्षरों को लेकर कंपनी का नाम BMW रखा गया. जिसका हेडक्वाटर जर्मनी में है.

BPL

इस कंपनी के फाउंडर टीपीजी नांबियार ने बड़े पैमाने पर ब्रिटेन में काम शुरु किया था. इसलिए जब उन्होंने अपनी कंपनी बनाई, तो उसका नाम इसी के आधार पर रखने का फैसला किया. इस वजह से BPL जैसी बड़ी कंपनी का पूरा नाम ब्रिटिश फिजिकल लैबोटरीज रखा गया.

ITC

मूल रूप से इस कंपनी की स्थापना इंपीरियल टोबैको कंपनी के रूप में की गई थी, लेकिन साल 1970 में इसका नाम बदल दिया गया. ITC यानी इंडियन तंबाकू कंपनी.

ICICI Bank

इस बैंक की शुरुआत आईसीआईसीआई इंडियन फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के रूप में की गई थी और उसी तर्ज पर इसका नाम ICICI रखा गया है. आईसीआईसीआई बैंक यानी इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया.

HDFC Bank

साल 1994 में लोकप्रिय बैंक एचडीएफसी बैंक लिमिटेड को पंजीकृत किया गया था. जिसे इंडियन हाउसिंग कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन द्वारा प्रमोट किया था जिस वजह से इस कंपनी का पूरा नाम यही पड़ा और इसका शॉर्ट नेम एचडीएफसी रखा गया.

ESPN

खेलों के प्रसारण के लिए ईएसपीएन प्रमुख टीवी चैनल है. इसका पूरा नाम ‘इंटरटेनमेंट एंड स्पोर्ट्स प्रोग्रामिंग नेटवर्क’ है और इसी से ईएसपीएन नाम बना है. ये चैनल साल 1979 को शुरू हुआ था.

20 साल के दो दोस्तों ने टी-शर्ट बेचकर कमा लिए 20 करोड़, अब शुरू करेंगे अपना ऑफलाइन स्टोर

20 साल की उम्र में दो दोस्त 20 करोड़ कमा लें, ये पढ़कर हैरानी भरा लगता है। लेकिन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) के प्रवीण और सिंधुजा ने ऐसा कर दिखाया है। उन दोनों ने ऑनलाइन टी-शर्ट बेचकर ऐसा किया है।

बिजनेस की सफलता को देखते हुए अब दोनों दोस्त ऑफलाइन रिटेल बिजनेस में भी उतरने की तैयारी में है। वह जल्द ही अपना स्टोर खोलने जा रहे हैं। 3 साल पहले दोनों दोस्तों ने यंग ट्रेंड नाम से अपना टी-शर्ट ब्रांड शुरू किया और उसकी कीमत को केवल 250-600 रुपए के बीच रखी, जिसका उन्हें काफी फायदा मिला।

पढ़ाई के दौरान बिजनेस करने का आया आइडिया

यंग ट्रेंड्ज के को फाउंडर प्रवीण के. आर. बिहार और सिंधुजा के. हैदराबाद से हैं। वे दोनों स्टूडेंट थे, जब उन्हें बिजनेस करने का आइडिया है। NIFT की पढ़ाई के दौरान सातवें सेमिस्टर में उन दोनों ने अपना बिजनेस शुरू करने के बारे में सोचा। उन्होंने अपनी वेबसाइट में भी इसकी जानकारी दी है। साल 2015 में ई-कॉमर्स मार्केट काफी बूम कर रहा था और तब उन दोनों ने ऑनलाइन क्लोदिंग ब्रांड यंग ट्रेंड्ज की शुरुआत की।

10 लाख से शुरू किया बिजनेस

उन दोनों ने साल 2015 सितंबर में 10 लाख रुपए की इन्वेस्टमेंट से बिजनेस की शुरुआत की। वह 2 महीने में ऑनलाइन मार्केट फ्लिपकार्ट, अमेजन, वूनिक और पेटीएम पर अपने प्रोडक्ट बेचने शुरू कर दिए। बाद में उन्होंने अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट भी बनाई। उनका यंग ट्रेंड्ज ब्रांड साल 2017 की फेस्टिव सेल के दौरान फ्लिपकार्ट पर 25,000 टी-शर्ट बेच चुका है।

कॉलेज फेस्ट में बेची टी-शर्ट

जब उनका सेमिस्टर खत्म होने लगा था तो वह कॉलेज फेस्ट और इवेंट्स में अपने ब्रांड यंग ट्रेंड्ज की टी-शर्ट बेचने लगे थे। उन्हें शुरुआत में एक दिन में करीब 10 टी-शर्ट के ऑर्डर मिलने लगे। सेमिस्टर खत्म होने तक वह आईआईटी और आईआईएम में मिलाकर डेली 100 से अधिक टीशर्ट बेच रहे थे।

सोर्स- यह स्टोरी कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के आधार पर ली गई है..

20 करोड़ तक पहुंच गया है बिजनेस

अब उनके स्टार्टअप को रोजाना 1,000 टी-शर्ट का ऑर्डर आते हैं। उनका ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू बिना किसी वेंचर कैपिटल के 20 करोड़ रुपए पहुंच गया है। उनके प्रोडक्ट की कीमत 250 रुपए से लेकर 600 रुपए तक होती है। उनके ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर 3,500 से ज्यादा प्रोडक्ट हैं। अब उनका टर्नओवर 20 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ऑनलाइन सफलता को देखते वे अब ऑफलाइन स्टोर खोलने की तैयारी में हैं।

तय किया तिरुपुर तक का सफर

प्रवीण और सिंधुजा की अब पहली प्राथमिकता प्रोडक्ट डेवलपमेंट चैनल बनाने की थी। यह तिरुपुर में ही संभव था, क्योंकि यह निटवेयर और मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र है। उन दोनों को तिरुपुर को लेकर विश्वास था कि वह बेस्ट प्रोडक्ट तिरुपुर से ही खरीद सकते हैं क्योंकि उन्हें वहां की मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी कॉलेज के दिनों से पता थी।

तमिल नहीं आने से हुई शुरुआती समस्या

उनके लिए परेशानी की बात यह थी कि उन दोनों को ही तमिल नहीं आती थी, जिसके कारण उन्हें शुरुआती दौर में समस्या आई। तिरुपुर में गारमेंट इंडस्ट्री के बेस्ट प्रोडक्ट और लोग थे। उन्हें ऑनलाइन वेब ऑपरेशन के लिए आईटी प्रोफेशनल कोयम्बटूर से मिल गए। लॉजिस्टिक उनके लिए कभी दिक्कत भरा नहीं रहा, क्योंकि ई-कॉमर्स कंपनियों के कुरियर पार्टनर प्रोडक्ट लेकर जाते थे।

कॉलेज स्टूडेंट थे टारगेट

उनका टारगेट 18 से 28 साल की यंग जेनरेशन थी, क्योंकि इन्हें ट्रेंडिंग डिजाइन पसंद होते हैं। वह दोनों सोशल मीडिया में ट्रेडिंग टॉपिक को मॉनिटर करते हैं, ताकि वैसे ग्राफिक्स बना सके। उन दोनों का मानना है कि कॉम्पिटीशन बहुत टफ है।

5 राज्यों में है वेयरहाउस

यंग ट्रेंड्ज की 30 लोगों की टीम है। उनका वेयरहाउस तेलंगाना, कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में हैं। वह जल्द ही पश्चिम बंगाल में भी अपना वेयरहाउस खोलने जा रहे हैं। उनका मकसद इन वेयरहाउस के जरिए देश भर के कस्टमर को टारगेट करना है। अब उनके पास तीन डिजाइनर है और वह फोटोशूट और कैंपेन आउटसोर्स करते हैं।

पेट्रोल पंप पर आपके साथ हो रहे हैं यह बड़े धोखे, तेल भरवाने से पहले हमेशा रखें इन बातों का ख्याल

पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से जहां आम आदमी वैसे ही परेशान है, तो दूसरी तरफ पेट्रोल पंपों पर हो रही चोरी से भी लोगों की जेब कट रही है। ऐसे में आप इस चोरी या फिर घटतौली को होने से खुद को रोक सकते हैं।

पेट्रोल, डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी

शनिवार को लगातार तीसरे दिन पेट्रोल की कीमत में जहां 13 पैसे की बढ़ोतरी की गई है, वहीं डीजल का दाम 10 पैसे प्रति लीटर बढ़ गया। इसी के साथ दिल्ली में अब पेट्रोल का दाम 75.98 रुपये प्रति लीटर हो गया है और डीजल 67.76 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इससे एक दिन पहले यहां पेट्रोल 75.85 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल 67.66 रुपये बिक रहा था। दोनों ईंधनों के दाम पिछले एक महीने के दौरान घट रहे थे।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले

पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा पेट्रोल पंपों पर घटतौली के मामले सामने आए हैं। वहीं दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश और तीसरे पर दिल्ली है। हालांकि ज्यादातर मामले इसलिए सामने नहीं आते हैं, क्योंकि इनकी शिकायत दर्ज नहीं होती हैं।

आसानी से चेक करें पेट्रोल की क्वालिटी

अगर आपको पेट्रोल या फिर डीजल की गुणवत्ता पर जरा सा भी शक है तो पेट्रोल पंप पर इसको आसानी से चेक कर सकते हैं। प्रत्येक पेट्रोल पंप पर फिल्टर पेपर का स्टॉक रखने का आदेश दिया गया है। फिल्टर पर पेट्रोल या फिर डीजल की कुछ बूंदे डालते ही इसका चेक हो जाएगा। अगर पेट्रोल बिना कोई निशान छोड़े उड़ जाए, तो समझ ले कि यह शुद्ध है, अन्यथा निशान छोड़ने पर अशुद्ध है।

सबसे ज्यादा ऐसे होती है घटतौली

पेट्रोल पंपों पर सबसे ज्यादा जो घटतौली होती है उसमें पंप पर मौजूद कर्मचारी पेट्रोल या डीजल डालते वक्त पाइप के नॉजेल को हाथ से कम या फिर ज्यादा दबा देते हैं। इस दौरान मशीन पर तो पेट्रोल ज्यादा टैंक में जाता हुआ दिखता है, लेकिन वास्तव में वो कम जाता है। इससे आपको ज्यादा पैसा खर्च करने के बाद भी कम माइलेज मिलता है, जिससे आपको नुकसान होता है।

प्रत्येक 1 लीटर में 100-150 मिलीलीटर की घटतौली

पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, देश के ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर प्रत्येक एक लीटर पेट्रोल-डीजल में 100-150 मिली लीटर तक की घटतौली की जाती है। कहीं मशीन में चिप लगाकर या फिर माप कम देकर के ऐसा किया जा रहा है। कई जगह बांट-नाप विभाग ने शिकायतें मिलने के बाद छापे डाले और इस तरह की चोरी को पकड़ा था, लेकिन अब यह फिर से होने लगा है।