इस कूलर में नहीं डालना पड़ता पानी,फिर भी देता है दूसरे कूलर जैसी ठंडी हवा,यहां पर इस की कीमत सिर्फ 300 रुपए

इंडियन मार्केट में एक ऐसा कूलर मौजूद है, जो बिना पानी के चलता है। इतनी ही नहीं, ये ठंडी हवा भी देते हैं। ऐसे में जिन घरों में पानी की कमी है, या पानी अरेंज करने में मुश्किल आती है, तब ये कूलर उनके लिए बेस्ट ऑप्शन बन सकता है।

इन्हें टावर कूलर विदाउट वाटर कहते हैं। इनकी ऑनलाइन प्राइस 1500 रुपए से शुरू हो जाती है। हालांकि, इंडियामार्ट पर इसकी कीमत 300 रुपए है, लेकिन मिनिमम 5 पीस खरीदने होंगे।

बिना पानी ठंडी हवा

आखिरी इन कूलर में ऐसा क्या होता है कि बिना पानी ये ठंडी हवा देते हैं, इसके लिए हमने एक्सपर्ट गोपाल मिश्रा से बात की। उन्होंने बताया कि इस तरह कूलर घर के सीलिंग फैन से ज्यादा बेहतर होते हैं। पानी से चलने वाले कूलर में ब्लेड होते हैं,

जबकि इस कूलर में ब्लोअर लगाया गया है। ब्लोअर में 70 वाट की हाई स्पीड मोटर होती है, जिसकी स्पीड नॉर्मल फैन से ज्यादा होती है। इनके साइज पोर्टबेल हैं जिसके चलते ये ठंडी हवा देते हैं।

इन कूलर को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि ये बिना पानी ही ठंडी हवा देते हैं। यानी इनमें पानी डालने की कोई जगह नहीं दी गई है। हालांकि, तापमान बढ़ेगा तब इसकी हवा में आने वाली ठंडक में कमी हो सकती है। पोर्टेबल होने के चलते इन्हें घर में छोटी सी जगह पर रखा जा सकता है। ये 20 फीट तक हवा फेंक सकते हैं।

इन कूलर में जो मोटर होती है उसकी स्पीड 1600 RPM होती है वहीं पावर कंजप्शन 70 वॉट है। इसमें फैन की स्पीड कंट्रोल करने के लिए 3 मोड्स हैं, जिसमें हाई, मीडियम और लो है। वहीं, विंग्स को स्विंग करने का भी ऑप्शन दिया है।

इन 5 सोलर बिजनेस आपको हो सकती है 50 हजार से 1 लाख रुपए महीना तक की कमाई, जानें पूरी जानकारी

देश में सोलर सेक्‍टर में बिजनेस के मौके भी बढ़ रहे हैं। केंद्र व राज्‍य सरकारें सोलर बिजनेस को लगातार सपोर्ट भी कर रही है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ अलग सोलर बिजनेस के बारे में बता रहे हैं, जिन्‍हें शुरू करके आप अच्‍छी खासी कमाई कर सकते हैं।

इन प्रोडक्‍टस को बेचकर कमाएं 1 लाख रुपए तक

आप सोलर पीवी, सोलर थर्मल सिस्‍टम, सोलर एटिक फेन, सोलर कूलिंग सिस्‍टम का बिजनेस शुरू कर सकते हैं। आप 4 से 5 लाख रुपए में यह बिजनेस शुरू कर सकते हैं। अच्‍छे स्‍कोप को देखते हुए आपको स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित कई बैंकों की एसएमई शाखा से लोन भी मिल सकता है। अनुमान है कि इस बिजनेस से 30 हजार रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक कमाई की जा सकती है।

इन प्रोडक्‍ट्स का भी कर सकते हैं बिजनेस

सोलर पैनल के अलावा बाजार में कई ऐसे प्रोडक्‍ट्स भी आ रहे हैं, जो सोलर से चलते हैं। ऐसे प्रोडक्ट्स काफी पापुलर भी हो रहे हैं। कई देशी व विदेशी कंपनियां सोलर मोबाइल चार्जर, सोलर वाटर हीटर, सोलर पम्‍प, सोलर लाइट्स बना रही हैं।

इनमें से कुछ प्रोडक्‍टस जैसे वाटर हीटर, पम्‍प को केंद्र व राज्‍य सरकारें सब्सिडी भी दे रही हैं। ऐसे में आप इन प्रोडक्‍ट्स का बिजनेस शुरू कर सकते हैं। इन प्रोडक्‍ट्स का बिजनेस शुरू करने में 1 से 2 लाख रुपए का खर्च आएगा। बैंकों से लोन भी मिल जाएगा और एक बार बिजनेस चलने के बाद आप 20 से 40 हजार रुपए महीना कमाई कर सकते हैं।

मेंटेनेंस और क्‍लीनिंग सेंटर खोलिए

आप क्‍लीनिंग सेंटर खोलकर सोलर पैनल मालिकों को रेग्‍युलर सर्विसेज दे सकते हैं। इसके अलावा आप मेंटेनेंस भी शुरू कर सकते हैं। पैनल की मेंटेनेंस के साथ-साथ सोलर प्रोडक्‍ट्स और इन्‍वर्टर्स की रिपेयरिंग एंड मेंटेनेंस का काम किया जा सकता है। इसमें खर्च भी कम आएगा। आप 50 हजार रुपए से भी काम शुरू कर सकते हैं और कमाई के तौर पर 15 से 20 हजार रुपए कमा सकते हैं। बिजनेस बढ़ने पर आप स्‍टाफ भी रख सकते हैं।

सोलर कंसल्टैंट बन कर शुरू करें बिजनेस

आप सोलर कंसल्टैंट के तौर पर भी अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं। हालांकि कंसल्टैंट बनने के लिए आपको पहले किसी कंसल्टैंट के साथ अनुभव लेना होगा और सोलर बिजनेस की टेक्‍निकल नॉलेज लेनी पड़ेगी। ब‍हुत से लोग सोलर प्‍लांट लगाने से पहले उसकी वायबिलिटी, फायदे-नुकसान का पता करना चाहते हैं।

ऐसे में आप इंडिपेंडेंट कंसल्टैंट की भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए आपको साइट पर जाकर स्‍टडी भी करनी पड़ेगी। यह बिजनेस शुरू करने के लिए आपके पास एक ऑफिस, वेबसाइट जैसी बेसिक चीजें चाहिए, आप ऑफिस किराए पर भी ले सकते हैं। ऐसे में आपको एक से दो लाख रुपए का खर्च आएगा, लेकिन कंसल्टैंट के तौर पर आप 50 हजार रुपए तक की कमाई कर सकते हैं।

फाइनेंसिंग कंसल्टेंट बनकर शुरू करें बिजनेस

आप सोलर प्रोजेक्‍ट्स लगाने वाले लोगों को फाइनेंसिंग कंसल्टैंट के तौर पर सर्विसेस दे सकते हैं। इतना ही नहीं, आप प्राइवेट फाइनेंशियल इंस्‍टीट्यूशंस से भी संपर्क करके प्रोड्यूसर के बीच कड़ी का काम कर सकते हैं। इसके लिए आप आसानी से 30 से 50 हजार रुपए तक कमा सकते हैं।

इस महिला ने सिर्फ 9 मिनट के अंदर इतने बच्चों को दिया जन्म, संख्या देख डॉक्टर्स भी रह गए हैरान

अमेरिका के टेक्सास में एक महिला ने एकसाथ 6 बच्चों को जन्म दिया, जिसे देख डॉक्टर्स भी शॉक्ड रह गए। उसने महज 9 मिनट के अंदर इन सभी बच्चों को जन्म दिया, जिनमें दो बेटियां और 4 बेटे हैं। इनका जन्म द वुमन हॉस्पिटल ऑफ टेक्सास में हुआ। हॉस्पिटल के मुताबिक, दुनियाभर में 4.7 अरब में से कोई एक ऐसा मामला सामने आता है।

नहीं तय कर पा रहीं लड़कों के नाम

मामला ह्यूस्टन शहर का है। हॉस्पिटल के स्टेटमेंट के मुताबिक, थेलमा चैका ने शुक्रवार को लोकल समय के मुताबिक, सुबह 4 बजकर 50 मिनट से सुबह 4 बजकर 59 मिनट के बीच चार लड़कों और दो लड़कियों को जन्म दिया।

हॉस्पिटल ने बताया कि थेलमा स्वस्थ हैं। वहीं, बच्चों का वजन एक पॉन्ड 12 ऑन्स (करीब 800 ग्राम) से दो पॉन्ड 14 ऑन्स (1.3 किलो) के बीच है। बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है। हालांकि, उन्हें नियोनैटल इन्टेंसिव केयर यूनिट में देखभाल के लिए रखा गया है।

थेलमा ने अपनी बेटियों का नाम जीना और जुरियल रखा है। हालांकि, वो अभी चारों बेटों के नाम तय नहीं कर पाई है और इनके लिए नामों की तलाश जारी है।

महिला ने 7 बच्चों को दिया जन्म

पिछले ही महीने इराक के एक हॉस्पिटल में 25 साल की महिला ने एक साथ 7 बच्चों को पैदा करके नया रिकॉर्ड बनाया था। महिला ने सातों बच्चों को नेचुरल तरीके से जन्म दिया था। ये इराक में एक बार में एक साथ पैदा हुए सबसे ज्यादा बच्चे हैं।

50 हजार रुपए हैं आपके पास तो लगाएं बैटरी वाटर प्‍लांट

पिछले कुछ सालों में बैटरी वाटर की डिमांड लगातार बढ़ रही है। वाहनों और इन्‍वर्टर में लगी बैटरियों में कुछ महीनों के अंतराल में पानी डालने की जरूरत होती है। यह पानी अलग तरह का होता है। यह बैटरी वाटर ऑटोमोबाइल मार्केट के अलावा लगभग हर रेसिडेंशियल मार्केट में बिकता है।

ऐसे में, शहरों में बैटरी वाटर मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्‍लांट भी लग रहे हैं। अगर आप भी कोई ऐसा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, जिसे लगाने में ज्‍यादा पैसा खर्च नहीं होता तो आप बैटरी वाटर मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्‍लांट लगा सकते हैं।

बिजनेस में संभावना को देखते हुए सरकार प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम के तहत इस प्रोजेक्‍ट़़ को लोन भी देती है। आज हम आपको इस पूरे प्रोजेक्‍ट के बारे में बताएंगे, ताकि आप इस प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के आधार पर लोन लेकर अपना बिजनेस शुरू कर सको।

कितना आएगा खर्च

सरकार के मॉडल प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आपके पास लगभग 50 हजार रुपए हैं तो आप बैटरी वाटर प्‍लांट लगा सकते हैं, क्‍योंकि इस पूरे प्रोजेक्‍ट की कॉस्‍ट 4 लाख 70 हजार रुपए है और प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जतरेशन प्रोग्राम के तहत आप लोन भी ले सकते हैं। इस प्रोग्राम के तहत 90 फीसदी लोन केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है।

यह है प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट

इक्‍वीपमेंट ( हॉट एयर ब्‍लॉवर, प्‍लास्टिक ड्रम, वाटर लिफ्टिंग पंप, हार्डनेस टेस्टिंग किट, पीएच मीटर, सेमीऑटोमैटिक फिलिंग मशीन, 1 एचपी मोटर, क्‍वालिटी कंट्रोल इक्‍वीपमेंट) पर लगभग 2 लाख 25 हजार रुपए का खर्च आएगा। जबकि आपको लगभग 2 लाख 45 हजार रुपए की वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ेगी। जिससे आपके प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट 4 लाख 70 हजार रुपए हो जाएगी।

कितनी होगी इनकम

प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्‍ट शुरू होने के बाद एक साल के दौरान आपको लगभग 9 लाख रुपए के रॉ-मैटेरियल की जरूरत पड़ेगी। इस तरह आपकी कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्‍शन 14 लाख 70 हजार रुपए आएगी।

एक साल में आप 250 किलोलीटर बैटरी वाटर का प्रोडक्‍शन करेगा और इसे बेचकर आपको 16 लाख रुपए मिलेंगे। इस आपको लगभग 1 लाख 29 हजार रुपए की इनकम होगी।

मिलेगी 25 फीसदी तक सब्सिडी

अगर आप इस प्रोग्राम के तहत लोन लेते हैं तो आपको 25 फीसदी तक सब्सिडी भी मिलती है। शहरी क्षेत्रों में 15 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में 25 फीसदी सब्सिडी दी जाती है, जबकि स्‍पेश्‍ल कैटेगिरी के लोगों को 25 व 35 फीसदी सब्सिडी दी जाती है।

जानिए Yamaha RX 100 को आखिर क्यों करना पड़ा बंद और इस बाइक से जुड़ी कुछ और रोचक बातें

जापानी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी यामहा ने आज भारतीय बाजार में अपनी नई बाइक Yamaha MT-15 को लांच किया है। इस बाइक में कंपनी ने कई शानदार तकनीकी फीचर्स का प्रयोग किया है। जो कि इस बाइक को अपने सेग्मेंट में सबसे बेहतर बनाते हैं।

बहरहाल, यमहा शुरू से ही परफार्मेंश बाइक बनाने के लिए मशहूर रहा है। 80 के दशक में यामहा ने भारतीय बाजार में अपनी Yamaha RX 100 को लांच किया था। उस दौर में इस बाइक ने अपने परफॉर्मेंश के बूते बाइकर्स को अपना दीवाना बना दिया था।

महज 100 सीसी की क्षमता वाली इस बाइक ने अपने शानदार पिक अप और रफ्तार के चलते खूब सुर्खियां बटोरी। भले ही आज देश की सड़कों पर बजाज, टीवीएसम, केटीएम की कई शानदार स्पोर्ट बाइकें मौजूद हों लेकिन यामहा आरएक्स 100 के चाहने वालों में कोई कमी नहीं आई है।

आज भी बहुत से ऐसे लोग हैं जो कि Yamaha RX 100 खरीदना चाहते हैं।इस बाइक में कंपनी ने 98 सीसी की क्षमता का 2-स्ट्रोक, एयर कूल्ड इंजन का प्रयोग किया था। जो कि 11 BHP की पावर और 10.39 NM का टॉर्क जेनरेट करती थी।

अपने सेग्मेंट में इतना पावर देने वाली ये इकलौती बाइक थी। कंपनी ने इस बाइक का प्रोडक्शन सरकार के मानकों के चलते सन 1996 में बंद कर दिया। तो आइये जानते हैं इस बाइक से जुड़ी हुई कुछ ऐसी ही रोचक बातें जो आज भी इस बाइक को लोगों के जेहन में जिंदा रखती हैं।

  • यामहा आरएक्स 100 को पहली बार नवंबर 1985 में लांच किया गया था और कंपनी ने मार्च 1996 में इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया।
  • 100 CC की क्षमता में देश की सबसे बेहतरीन बाइक थी आरएक्स 100, इमिशन नॉम्र्स के चलते कंपनी ने इसका उत्पादन बंद किया।
  • सेकेंड हैंड बाइक के तौर पर आज भी इसे सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।
  • अपने सेग्मेंट की ये पहली बाइक है जिसके सेकेंड हैंड मॉडल को 1 लाख रुपये तक में बेचा गया है।
  • जब इस बाइक को भारतीय बाजार में लांच किया गया था उस वक्त इसकी आॅन रोड कीमत तकरीबन 19,764 हजार रुपये थी।

  • कई अर्थाटियों इस बाइक के इंजन को खोलकर चेक किया है कि, क्या वाकई में इसमें 100 सीसी के इंजन का इस्तेमाल हुआ है।
  • यामहा आरएक्स 100 महज 7 सेकेंड में ही 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पकड़ने में सक्षम थी।
  • ऐसी भी बातें कही जाती हैं कि अपराधी इस बाइक को खासा पसंद करते थें, ताकि वो आसानी से वारदात को अंजाम देकर भाग सकें।
  • इस बाइक का विज्ञापनों में उस दौर के मशहूर क्रिकेटर और कप्तान सुनिल गावस्कर किया करते थें।
    यामहा आरएक्स 100 की टॉप स्पीड 100 किलोमीटर प्रतिघंटा थी।

आप भी RO वाटर प्यूरीफायर करते हैं इस्तेमाल, तो पानी फिल्टर करने वाले इस पार्ट पर हमेशा रखें नजर

आपके घर में RO वाटर फिल्टर यूज होता है तब उसके फिल्टर का साफ रहने बहुत जरूरी है। फिल्टर कार्ट्रिज 6 महीने में खराब हो जाती है। यदि इसे समय रहते चेंज नहीं किया गया तब मशीन के दूसरे पार्ट्स जैसे मेम्ब्रेन और फिल्टर खराब हो जाते हैं।

फिल्टर कार्ट्रिज को घर पर ही आसानी से चेंज किया जा सकता है। ऐसे में आपके सर्विस के पैसे भी बच जाएंगे। इसके लिए कार्ट्रिज बॉक्स को खोलकर पुरानी कार्ट्रिज निकाल लें।

यदि कार्ट्रिज पीली पड़ चुकी है तब उसे तुरंत चेंज कर देना चाहिए। साथ ही, नई कार्ट्रिज डालने से पहले बॉक्स का गंदा पानी भी हटा लें। इसको चेंज करने के लिए वीडियो देखें।

ऐसे चेक करें पानी फिल्टर है या नहीं

आपके घर में यूज होने वाला वाटर प्यूरिफायर का पानी फिल्टर है या नहीं, इस बात का पता पानी के TDS (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड) लेवल से पता लगा सकते हैं। दरअसल, पानी फिल्टर होने के बाद उसका TDS 100 से 50 के बीच में रखा जाता है।

कई लोग इसे 10 से 15 तक भी करा लेते हैं। ऐसे में यदि पानी का TDS कम नहीं हो रहा है तब वो फिल्टर नहीं है। TDS चेक करने वाला मीटर 200 रुपए से भी कम में आ जाता है।

बीमार होने का भी खतरा

अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर नीरज जैन ने बताया कि यदि प्यूरीफायर का पानी फिल्टर नहीं है, तब उससे कई सारी बीमारियां भी हो सकती हैं।

  •  पानी में कैल्शियम ज्यादा जा रहा है, तब लिवर या किडनी में स्टोन बन सकता है।
  • हार्ड पानी पीने से डाइजेशन खराब होना, पेट में दर्द, कब्ज होने की प्रॉब्लम भी शुरू हो जाएगी।
  •  बाल झड़ने की प्रॉब्लम भी शुरू हो जाएगी।
  •  प्यूरीफायर में UV (अल्ट्रावाइलेट प्यूरिफिकेशन) का इस्तेमाल बैक्टीरिया मारने के लिए किया जाता है, ऐसे में बैक्टीरिया ही नहीं मर रहे तब ज्वाइंडिस जैसी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है।

एक बिहारी पड़ा थाइलैंड और जापान पर भारी

एक बिहारी सब पर भारी वाली कहावत तो आप ने सुनी होगी वहीं एक बिहारी किसान ने गन्ने के उत्पादन का रिकॉर्ड तोड़ा जिसका लोहा आज थाइलैंड और जापान भी मान रहे हैं। वैसे ये यकीन करना थोड़ा मुश्किल है क्यूंकि जहां गन्ने का प्रति एकड़ औसत उत्पादन 250 से 500 क्विंटल तक हो, वहां कोई 1018 क्विंटल गन्ने का उत्पादन कर सकता है। पर ऐसा एक बिहारी किसान ने कर दिखाया

दो दशक पूर्व मैट्रिक पास करने के बाद जिसे रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा था आज उसके खेतों की फल-सब्जियां बिक्री के लिए सीधे मॉल जा रही हैं। अपनी दो दशकों की मेहनत से उन्होंने न केवल अपनी बल्कि गांव के लोगों की जीवन दशा में बदलाव की पटकथा भी लिखी है।

इस बिहारी किसान की थाईलैंड-जापान यात्रा वाया हरियाणा शुरू हुई। मुजफ्फरपुर के छोटे से कस्बे सकरा के रहने वाले दिनेश प्रसाद ने मैट्रिक तक चंदनपट्टी हाईस्कूल में पढ़ाई की। बात 1996 की है। बिहारी मजदूरों का पलायन हो रहा था।

दिनेश भी गांव के लोगों के साथ रोजगार की तलाश में हरियाणा पहुंच गए। वहां के खेतों में बिहारी मजदूरों की तरह काम करने की बजाय उन्होंने बटाई पर खेती शुरू की। जैविक उर्वरक, जीरो टिलेज और सीड ट्रांसप्लांट तकनीक के इस्तेमाल से आधुनिक खेती की।

आरंभ में पांच एकड़ खेती के मुनाफे ने मनोबल बढ़ाया। आज हरियाणा में करीब 125 एकड़ और अपने गांव में 138 एकड़ भूमि पर खेती कर रहे हैं। गांव में तो उनकी मात्र आठ एकड़ भूमि है लेकिन 130 एकड़ जमीन लीज पर लेकर फलों और सब्जियों की आधुनिक और जैविक खेती से पैदावार का रिकॉर्ड बनाया। छह वर्षों के दौरान दिनेश प्रसाद ने हरियाणा में उन्नत खेती का ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया कि वे राज्य सरकार की नजर में आ गए।

दरअसल 2001 में हरियाणा सरकार ने चीनी मिलों से किसानों की सूची मंगाई थी। उस सूची में दिनेश प्रसाद एकलौते किसान थे जिन्होंने एक एकड़ में 1018 क्विंटल गन्ना उपजाकर चीनी मिल को बेचा था।

हरियाणा सरकार के नुमाइंदे दिनेश के खेत पहुंचे। उन्हें मंच पर आमंत्रित कर वहां के मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। इसके बाद फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने गांव सकरा में हरियाणा पैटर्न पर पहले अपनी जमीन पर ही खेती शुरू की।

पड़ोसी किसानों से बातचीत कर उन्हें भी आधुनिक कृषि के लिए प्रेरित किया। अब गांव में अपनी आठ एकड़ भूमि के अलावा करीब 130 एकड़ लीज जमीन पर फल- सब्जी उपजा रहे हैं। आधुनिक और जैविक खेती की शोहरत फैली तो रिलायंस फ्रेश सहित अन्य कृषि उत्पाद का कारोबार करने वाली कंपनियों ने दिनेश प्रसाद से उनकी उपज खरीदने का करार कर लिया। अब इनके खेत की सब्जी और फल सीधे एग्री-मार्केट और मॉल में पहुंच रहे हैं।

तीन महीने जापान में रहे : हरियाणा सरकार से सम्मान मिलने के बाद दिनेश प्रसाद पर केंद्र सरकार की नजर भी गई। 2003 में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने उन्हें कृषि के क्षेत्र में अपने अनुभव व शोध साझा करने के लिए जापान भेजा।

करीब तीन माह तक दोभाषिये (ट्रांसलेटर) के साथ जापान में कृषि विकास का अध्ययन किया। 2006 में थाइलैंड जाकर उन्होंने वहां खेती के आधुनिक तौर तरीकों का अध्ययन किया। अमरूद, केला, पपीता, कंद, पुदीना, धनिया, गेहूं, गन्ना, बाजरा से लेकर वे ऐसी सब्जियों की खेती कर रहे हैं।

कमाल की है यह दूध दुहने वाली मशीन, एक मिंट में निकलती है 2 लीटर दूध

देश के तमाम ग्रामीण इलाकों में गाय या भैंस का दुध दुहने में हाथों का इस्तेमाल किया जाता है और सदियों से यही पारंपरिक तरीका अपनाया जा रहा है। लेकिन जब से डेयरी फार्मिंग की नई-नई तकनीकें सामने आई हैं पारंपरिक तरीके पीछे छूटते जा रहे हैं। मिल्किंग मशीन यानी दूध दुहने की मशीन ने डेयरी फार्मिंग और पशुपालन की दुनिया में क्रांति ला दी है।

मशीन से दुध निकालना काफी सरल है और इससे दूध का उत्पादन भी 15 फीसदी तक बढ़ जाता है। मशीन से दूध निकालने की शुरुआत डेनमार्क और नीदरलैंड से हुई और आज यह तकनीक दुनिया भर में इस्तेमाल की जा रही है। आजकल डेरी उद्योग से जुड़े अनेक लोग पशुओं से दूध निकालने के लिए मशीन का सहारा ले रहे हैं।

पशुओं का दूध दुहने वाली मशीन को मिल्किंग मशीन के नाम से जानते हैं। इस मशीन से दुधारू पशुओं का दूध बड़ी ही आसानी से निकाला जा सकता है। इससे पशुओं के थनों को कोई नुकसान नहीं होता है। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहती है और उस के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। यह मशीन थनों की मालिश भी करती और दूध निकालती है।

इस मशीन से गाय को वैसा ही महसूस होता है, जैसे वह अपने बच्चे को दूध पिला रही हो। शुरुआत में गाय मशीन को लेकर दिक्कत कर सकती है लेकिन धीरे-धीरे इसे आदत हो जाती है और फिर मशीन से दूध दुहने में कोई दिक्कत नहीं होती।

मशीन से मिलता है स्वच्छ दूध

मिल्किंग मशीन से दूध निकालने से लागत के साथ-साथ समय की भी बचत होती है और दूध में किसी प्रकार की गंदगी नहीं आती। इस से तिनके, बाल, गोबर और पेशाब के छींटों से बचाव होता है। पशुपालक के दूध निकालते समय उन के खांसने व छींकने से भी दूध का बचाव होता है। दूध मशीन के जरीए दूध सीधा थनों से बंद डब्बों में ही इकट्ठा होता है.

मिल्किंग मशीन के बारे में जानकारी

मिल्किंग मशीन कई तरह की होती है। जो डेयरी किसान अपनी डेयरी में पांच लेकर पचास गाय या भैंस पालते हैं उनके लिए ट्रॉली बकेट मिल्किंग मशीन पर्यापप्त है। ये मशीन दो तरह की होती सिंगल बकेट और डबल बकेट। सिंगल बकेट मिल्किंग मशीन से 10 से 15 पशुओं का दूध आसानी से दुहा जा सकता है वहीं डबल बकेट मिल्किंग मशीन से 15 से चालीस पशुओं के लिए पर्याप्त है।

ट्रॉली लगी होने के कारण इस मशीन को फार्म में एक जगह से दूसरी जगह ले जाना सुविधाजनक होता है। दिल्ली-एनसीआर में डेयरी फार्म के उपकरण बनाने वाली कंपनी के सेल्स हेड और आधुनिक डेयरी फार्मिंग के जानकार रोविन कुमार ने बताया कि मशीन से दूध दुहने से पशु और पशुपालक दोनों को ही आराम होता है।

उन्होंने बताया कि मशीन के अंदर लगे सेंसर गाय के थनों में कोई दिक्कत नहीं होने देते और निर्वाध रूप से दूध निकलने देते हैं। उन्होंने बताया कि मशीन से दूध दुहने में 4 से 5 मिनट का वक्त लगता है, जिसमें कुल दूध का साठ फीसदी दूध शुरुआत के दो मिनट में निकल आता है और बाकी का बाद में।

आपको बता मिल्किंग मशीन  की कीमत 26000 रुपए  है । दिल्ली-एनसीआर में इन मशीनों को बनाने वाली कई कंपनियां हैं और पशुपालकों को ये मशीन आसानी से उपलब्ध है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं बगैर ट्राली के भी ये मशीने उपलब्ध हैं और रेट भी काफी कम हैं।

फिक्स टाइप मिल्किंग मशीन

फिक्स टाइप मिल्किंग मशीन को फार्म के एक हिस्से में स्थापित किया जाता है। इसमें जरूरत के हिसाब से एक से लेकर तीन बकेट तक बढ़ाया जा सकता है। इस मशीन के रखरखाव में खर्चा कम आता है और एक-एक कर पशुओं को मशीन के पास दुहने के लिये लाया जाता है। ये मशीन 15 से 40 पशुओँ वाले डेयरी फार्म के लिए पर्याप्त है।

मशीन से भैंस का दूध दुहना भी आसान

रोविन कुमार ने बताया की गाय और भैंस दोनों के थनों में थोड़ा अंतर होता है, मशीन में थोड़ा सा बदलाव कर इससे भैंस का दूध भी आसानी से दुहा जा सकता है। भैंस का दूध निकालने के लिए मशीन के क्लस्टर बदलने होते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, बिहार में मिल्किंग मशीन का प्रचल तेजी से बढ़ता जा रहा है। और लोग पारंकपरिक तरीके के बजाए मशीन के जरिए दूध दुहने को तवज्जो दे रहे हैं।

उत्पादन ज्यादा और लागत कम

एक और अहम बात है मशीन द्वारा दूध दुहने से दूध की मात्रा में 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी हो जाती है। मशीन मिल्किंग द्वारा दूध की उत्पादन लागत में काफी कमी तो आती ही है, साथ-साथ समय की भी बचत होती है। यानी परेशानी भी कम और दूध भी ज्यादा। इसकी सहायता से पूर्ण दुग्ध-दोहन संभव है जबकि परम्परागत दोहन पद्धति में दूध की कुछ मात्रा अधिशेष रह जाती है।

मशीन द्वारा लगभग 1.5 से 2.0 लीटर तक दूध प्रति मिनट दुहा जा सकता है. इसमें न केवल ऊर्जा की बचत होती है बल्कि स्वच्छ दुग्ध दोहन द्वारा उच्च गुणवत्ता का दूध मिलता है। इन मशीनों का रखरखाव भी बेहद सरल है, सालभर के मेंटिनेंस का खर्चा मात्र 300 रुपये आता है।

मिल्किंग मशीनों पर मिलती है सब्सिडी

कई राज्य सरकार मिल्किंग मशीनों की खरीद पर सब्सिडी भी दे रही है और बैंकों से इन्हें खरीदने के लिए लोन भी मिल रहा है। पशुपालकों को इसके लिए अपने जिले के पशुपालन अधिकारी और बैंकों के कृषि और पशुपालन विभाग के अफसरों से संपर्क करना चाहिए।

मशीन से दूध दुहने के दौरान बरतें सावधानी

अगर पशु के पहले ब्यांत से ही मशीन से दूध निकालेंगे तो पशु को मशीन से दूध निकलवाने की आदत हो जाएगी। शुरुआत में मशीन द्वारा दूध दुहते समय पशु को पुचकारते हुए उस के शरीर पर हाथ घुमाते रहना चाहिए, ताकि वह अपनापन महसूस करे। दूध दुहने वाली मशीन को पशुओं के आसपास ही रखना चाहिए ताकि वे उसे देख कर उस के आदी हो जाएं, वरना वे अचानक मशीन देख कर घबरा सकते हैं या उसकी आवाज से बिदक सकते हैं।

ज्यादा जानकारी के लिए आप निचे दिए पते पर संपर्क करें

Address: No.57, 3rd A Cross,
1st Main, Havanoor Extension,
Nagasandra Post, Hesaraghatta Main Road,
Bengaluru, Karnataka 560073

Phone: 094818 65059

अंडा,पत्ता गोभी समेत ये चीजें भी चाइना में बनती है नकली पूरी लिस्ट पढ़ कर हो जाओगे हैरान

मसूद अज़हर पर वीटो लाने के बाद चीन भारतीयों की नज़र में खलनायक बन बैठा है। देश में चाइनीज सामान के बायकॉट की लहर है। हालांकि, हम बायकॉट करने पर ज़ोर नहीं दे रहे लेकिन आपको जानना ज़रूरी है कि आपके घर में कौन से सामन ऐसे हैं जो चाइनीज हैं।

शायद आपको पता न हो लेकिन चीन से आए जिन खिलौनों से आपके बच्चे खेलते हैं वह खराब प्लास्टिक से बने होते हैं। चीन हर वह चीज इस्तेमाल करता है जो खराब हो चुकी होती है।

आज हम चीन के उन दस सामानों की बात करेंगे जो भारत में बिकते हैं

  •  चीन ऐसा देश है जहां इंसान के अलावा हर चीज डुप्लीकेट बन जाती है। आईफोन जैसे कई फोन ऐसे हैं जिनका डुप्लीकेट बनाकर चीन दुनियाभर में बेच देता है।
  • चीन में हर साल करीब 10 मिलियन टन चावल बेचा जाता है, जिसमें से 9 मिलियन टन चावल नकली होता है।
  • चीन में नकली सामान का मार्केट बहुत बड़ा है। यहां नकली शहद भी बनाया जाता है।

  • हाल ही में एक बात सामने आई थी कि चीन बच्चों के खिलौनों को बनाने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करता है।
  • चीन नकली अण्डों का भी कारोबार करता है। यह नकली अंडे देखने में एकदम असली लगते हैं। इन्हें बनाने में जो केमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं उनसे मेमोरी लॉस का खतरा रहता है।
  • चीन में साल 2004 में नकली बेबी फार्मूला जैसे सेरेलैक बनाने के अपराध में 47 लोगों को सजा हुई थी। इस फॉर्मूले के कारण कई बच्चे मर गए थे।
  • इंडस्ट्रियल सॉल्ट जो बेहद सस्ता होता है चीन उसे भी टेबल सॉल्ट बताकर बेच देता है। इंडस्ट्रियल सॉल्ट को खाने से थाइरोइड जैसे बीमारी होती है।

  • हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था। इस वीडियो में नकली पत्ता गोभी बनाए की विधि बताई जा रही थी।
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि चीन काली मिर्च, दाल, नूडल्स, खाने के मसाले भी नकली बना रहा है।
  • आपको बता दें कि चीन में फेस्टिवल्स के नाम पर कुछ ही त्यौहार मनाए जाते हैं। न ही यहां दिवाली मनाई जाती है न ही क्रिसमस की कोई धूम रहती है। फिर भी 85 प्रतिशत क्रिसमस ट्री और 70 प्रतिशत दिवाली लाइट्स यहीं बनाई जाती हैं।

ये 12 तस्वीरें नहीं, बल्कि होटल्स की वो सच्चाई है, जो होटल वाले हमें कभी नहीं बताते

कहीं घूमने जाने से पहले आप उस जगह पर रहने के लिए होटल्स ढूंढते हैं और जिसका रिव्यू सबसे अच्छा होता आप उसे बुक कर लेते हैं. इस दौरान आपको कई अच्छे-अच्छे ऑफ़र्स भी बताए जाते हैं ताकि आप उस होटल को बुक कराने के लिए मजबूर हो जाएं.

मगर उस होटल में पहुचंने के बाद आपको सब कुछ वैसा मिला जैसा उन्होंने बोला था. अगर ऐसा है, तो आप बहुत किस्मत वाले हैं. क्योंकि, आज हम जिन लोगों के अनुभव आपसे शेयर करने वाले हैं उनके साथ बिल्कुल भी वैसा नहीं हुआ जैसा उन्हें बताया गया था.

ये गार्डन नहीं, बल्कि एक मॉटेल का स्वीमिंग पुल है.

इस होटल रूम के बाथरुम की दीवार शीशे और पर्दे से बनी है.

ये कैसा शीशा है?

जब इन्हें अलमारी बनानी थी, तो ये सोफ़ा कम बेड इतना बड़ा क्यों बनाया?

भाई क्या गोलमाल है, बनाना ही होता तो यहां क्यों आते?

इस होटल रूम के कमरे में ही ओपन बाथरूम है.

भाई एडजस्ट करने से ही दुनिया चल रही है!

ये होटल का मूवी रूम है. इससे बड़े टीवी तो घर के हॉल में होते हैं.

कितनी मेहनत कराओगे?

डिस्प्ले में कुछ होता है और जब वहां जाओ, तो कुछ और ही होता है.

शावर है, लेकिन इस्तेमाल कर पाओ, तो कर लो.