टाटा स्काई के नए कनेक्शन पर मिल रहा 42% का बड़ा डिस्काउंट, अभी लेने पर 1245 रुपए की होगी बचत और मिलेंगे ये फायदे

टाटा स्काई गाहको के लिए धमाकेदार डिस्काउंट ऑफर लेकर आई है। टाटा स्काई (Tata Sky) नए DTH  HD कनेक्शन पर कंपनी 42% का डिस्काउंट दे रही है। इस कनेक्शन में HD और SD दोनों तरह के चैनल शामिल हैं। इसके साथ, 2 स्मार्टफोन पर Tata Sky की मोबाइल ऐप सब्सक्रप्शन भी दिया जा रहा है। कंपनी ने इस ऑफर के बार में बताया कि इसे कभी भी खत्म किया जा सकता है।

ये है पूरा ऑफर

  • इस ऑफर का बेनीफिट लेने के लिए आपको टाटा स्काई की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा।
  • या फिर आप टाटा स्काई के निकटतम डीलर्स के पास भी जा सकते हैं।
  •  यहां से आपको HD Monthly Ultra Pack का नया कनेक्शन लेना है।
  •  इस नए कनेक्शन की MRP 2935 रुपए हैं, लेकिन इसे अभी 1690 रुपए में दिया जा रहा है।
  •  यानी कस्टमर की सीधे 1245 रुपए (42% ऑफ) की बचत होगी।
  •  ऑनलाइन इस कनेक्शन को सिलेक्ट करने पर कैश ऑन डिलिवरी का बेनिफिट भी मिलेगा।

ऐसे करें अप्लाई

  • सबसे पहले www.tatasky.com पर जाएं।
  • अब HD Monthly Ultra Pack कनेक्शन वाला कनेक्शन सिलेक्ट करें।
  •  यहां Book Now पर क्लिक करें।
  •  जो नया पेज ओपन होगा उसमें नाम, पता, मोबाइल और ईमेल आईडी की डिटेल दें।
  •  अब पेमेंट का ऑप्शन पर जाकर कनेक्शन बुक कर लें।

ये है फायदे 

  •  इस कनेक्शन में 241 SD और 55 HD चैनल्स दिए जाएंगे।
  •  2 रीजनल पैक भी फ्री दिए जाएंगे।
  •  2 स्मार्टफोन पर Tata Sky की मोबाइल ऐप कनेक्शन भी मिलेगा।

लागू होने जा रहे हैं नए नियम 

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के नए नियम 31 जनवरी से लागू होने जा रहे हैं। नए नियम के चलते अब काई भी ऑपरेटर जबरन कोई चैनल थोप नहीं पाएगा। आप कस्टमर को सिर्फ उसी चैनल का पैसा देना होगा जिसे वो सिलेक्ट करता है। हालांकि, कस्टमर को मिनिमम 130 रुपए मंथली खर्च करने ही होंगे।

अब हेलमेट की कीमत एक महीने के पेट्रोल से भी होगी ज्यादा, देखें क्या है मामला

अब हेलमेट की कीमत एक महीने के पेट्रोल से भी ज्यादा होगी, हेलमेट दोपहियां वाहन चालक के लिए एक अहम भूमिका निभाता है, इस बात से सभी अवगत हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं एक सस्ता हेलमेट आपकी जिंदगी तबाह करने के लिए काफी है। अक्सर वाहन चालक पैसे बचाने के चक्कर में 500 से 1000 रुपए तक का हेलमेट खरीद लेते हैं।

लेकिन बता दें, अब हेलमेट की कीमत आपके पेट्रोल खर्च से भी ज्यादा हो सकती है। एक सर्वे के मुताबिक हेलमेट खरीदारो की संख्या 9 करोड़ प्रतिवर्ष है। सरकार ने भारतीय मानक ब्यूरो (आईएसआई) नियमों में बदलाव करके नए 2015 यूरोपियन मानक को लागू कर दिया है।

जिससे हेलमेट की मैन्युफैक्चरिंग महंगी हो जाएगी।और इसका सीधा असर हेलमेट की कीमतों पर पड़ेगा। हेलमेट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री सुभाष चंद्रा के मुताबिक इस समय हेलमेट की फैक्ट्री के साथ ही एक टेस्टिंग लैब बनायी जाती है, जहां इनका परीक्षण किया जाता था।

जहां इन लैब पर इस समय 6 से 7 लाख रुपए का खर्च आता था। वहीं अब नए नियमों के अंतर्गत इस पर 1 से 2 करोड़ का खर्च आएगा। ऐसे में एक स्मॉल स्केल उद्योग चलाने वालो के लिए नई लैब लगाना आसान काम नहीं होगा और इस तरह हेलमेट की मैन्युफैक्चरिंग का काम कुछ कंपनियों तक ही सीमित रह जाएगा।

जिससे कंपनियां मनमाफिक दाम पर हेलमेट की बिक्री करेंगी। मानक लागू होने के बाद स्मॉल स्केल हेलमेट उद्योग बंद हो सकते हैं जिससे लाखों लोगों की नौकरी भी जाएगी। इसके अलावा दोपहिया वाहन चालक इतना महंगा हेलमेट नहीं खरीद पाएंगे। इस समय हेलमेट को बनाने में मात्र 200 रुपए तक का खर्च आता है।

जिसमें प्लास्टिक शेल, थर्मोकोल, कपड़ा, फोम और टेप कई चीजें प्रयोग की जाती हैं। वहीं एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री चंद्रा के मुताबिक अगर सरकार हेलमेट की क्वॉलिटी बढ़ाने पर जोर देती, तो शायद यह एक अच्छा कदम हो सकता था। लेकिन सरकार का इस समय ध्यान केवल टेस्टिंग पर है।

चौथी क्लास में तीन बार फेल होने वाला आज दे रहा है दे रहे 700 को रोजगार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग के सिरसा के किसान अशोक चंद्राकर चौथी क्लास में तीन बार फेल हो गए, तो 12 साल की उम्र में सब्जी बेचनी शुरू की। वे गली-गली घूमकर सब्जी बेचा करते थे। आज उनके पास 100 एकड़ जमीन है और रेंट के खेतों को मिलाकर कुल 900 एकड़ में खेती करते हैं। उन्होंने करीब 700 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दिया है।

अलग-अलग देशों में सब्जियां कर रहे सप्लाई…

आज अशोक सालाना 10 करोड़ की सब्जियां देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई करते हैं। 1973 में जन्मे अशोक का पढ़ाई में मन लगा नहीं, इसलिए उन्होंने काम में मन लगाया। उनके माता-पिता गांव के ही एक घर में काम किया करते थे। अशोक ने 14 साल की उम्र में नानी से एक खेत बटाई पर लेकर सब्जी उगानी शुरू की। इसे वे खुद घूम-घूमकर चरोदा, सुपेला भिलाई, चंदखुरी की गलियों में बेचते। इसी पैसे से पहले तीन, फिर चार, पांच आगे चलकर दस एकड़ खेत रेघा में ले लिया। उनका कारोबार बढ़ने लगा।

अशोक के पास आज सौ एकड़ की मालिकाना जमीन सिरसा, तर्रा सहित कई जगहों पर है। इसके अलावा नगपुरा, सुरगी, मतवारी, देवादा, जंजगीरी, सिरसा जैसे गांवों में बटाई की जमीन है, जिस पर सब्जियां उगाई जा रही हैं। इसमें नगपुरा में सबसे अधिक दो सौ एकड़ पर टमाटर लगा है। आज उनके पास 25 से ज्यादा ट्रैक्टर व दूसरी गाड़ियां हैं। आधुनिक मशीनें हैं, जो दवा छिड़काव से लेकर सब्जियों को काटने का काम करती हैं।

अशोक के मुताबिक, आजकल लोग शॉर्टकट के चक्कर में रहते हैं, अगर आप किसी प्लान पर लगातार चलते हैं और इंतजार करते हैं, तो आपको रिजल्ट जरूर मिलेंगे। मेहनत का कोई ऑप्शन हो ही नहीं सकता। कल तक मैं दो-दो हजार के लिए तरसता था और आज 15-15 हजार रुपए वेतन दे रहा हूं।

यह है McDonald’s के साथ अपना बिजनेस शुरू करने का प्रोसैस, करोड़ों कमा सकते हैं आप

McDonald’s साल 1955 से फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम कर रहा है. रेस्टोरेंट का बिजनेस करने का मन बना रहे हैं तो आपके पास एक बेहतरीन मौका है. दुनिया की सबसे बड़ी फास्ट फूड रेस्टोरेंट चेन मैक्डोनल्ड्स (McDonald’s) की फ्रेंचाइजी ले सकते हैं.

अगर आपको भारत में इस रेस्टोरेंट की फ्रेंचाइजी लेनी है तो इसके लिए डेवलपमेंट लाइसेंस लेना होगा. भारत में कंपनी डायरेक्ट फ्रेंचाइजी नहीं देती है. इसके लिए कंपनी ने पूरे भारत में फ्रेंचाइजी देने के लिए दो कंपनियों को नियुक्त किया हुआ है.

अगर आपको पश्चिमी भारत और साउथ इंडिया में रेस्टोरेंट खोलना है तो आपको हार्डकैस्टल रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड से संपर्क करना पड़ेगा. वहीं, अगर आपको उत्तर भारत या पूर्वी भारत में रेस्टोरेंट का फ्रेंचाइजी लेना है तो कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड से संपर्क कर सकते हैं. McDonald’s रेस्टोरेंट की फ्रेंचाइजी 20 साल के लिए मिलती है.

नियम और शर्तें

McDonald’s की फ्रेंचाइजी लेने से पहले आप फ्रेंचाइजी डिस्क्लोजर डॉक्युमेंट यानी FDD को अच्छे से पढ़ें. इस डॉक्युमेंट में सारे नियम और तरीके समझाए गए हैं. फ्रेंचाइजी लेने के लिए आपके पास कितनी जगह होनी चाहिए, आपको इस तरह की ट्रेनिंग मिलेगी ये सारी जानकारी इस डॉक्युमेंट में होती है. FDD को आप गूगल से डाउनलोड भी कर सकते हैं.

कितना आएगा खर्च

अगर आप मौजूदा रेस्टोरेंट प्लेयर हैं तो कंपनी आपका रेस्टोरेंट भी McDonald’s में कन्वर्ट कर सकती है. अगर अलग से फ्रेंचाइज बनाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको नया इन्वेस्टमेंट ही करना होगा. McDonald’s की फ्रेंचाइजी में 6 से 14 करोड़ का भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट लगेगा.

इसके अलावा, आपके पास 5 करोड़ की लिक्विड कैपिटल होनी चाहिए. कैपिटल के अलावा आपको 30 लाख की फ्रेंचाइजी फीस भी देनी होगी. रेस्टोरेंट की कुल बिक्री का 4 फीसदी सर्विस फीस के रूप में देना होगा.

कैसे मिलेगी जमीन

रेस्टोरेंट की फ्रेंचाइजी लेने के लिए जमीन होना जरूरी है. इसके लिए दो विकल्प हैं. पहला आपके पास अपनी जमीन हो. अगर अपनी जमीन नहीं है तो ऑपरेटर लीज के तहत McDonald’s 11 महीने की लीज पर जगह मुहैया कराती है.

4 तरह से मिलती है फ्रेंचाइजी

ट्रेडिशनल रेस्टोरेंट– ट्रेडिशनल रेस्टोरेंट के लिए आप फूड कोर्ट, स्टोर फ्रंट जैसे लोकेशन शामिल होते हैं. ट्रेडिशनल रेस्टोरेंट के लिए 20 साल का फ्रेंचाइजी मिलती है.
सेटेलाइट लोकेशन– सेटेलाइट लोकेशन में रिटेल स्टोर, एयरपोर्ट, कॉलेज, हॉस्पिटल जैसे लोकेशन शामिल है. मतलब आपके पास इन लोकेशन के आसपास जमीन होनी चाहिए.

STO एंड STAR लोकेशन– इसमें छोटे शहरों के रिटेल स्टोर्स, पेट्रोल पंप के कंपाउड्स और उसके आस पास की जगह शामिल है. एसटीओ एंड एसटीएआर लोकेशन के लिए भी 20 साल का फ्रेंचाइजी मिलता है.
BLF फ्रेंचाइजी– कॉरपोरेट ऑफिस के कंपाउड में आपके पास जगह हो, इस फ्रेंचाइजी में एक ऑप्शन यह भी है कि अगर आपके पास पहले से कोई रेस्टोरेंट हैं तो आप उसे McDonald’s में कनवर्ट कर सकते हैं.

कभी सोचा है कि Mi Phones के साथ क्यों नहीं मिलता ईयरफोन, यह है वजह

क्या आपके पास भी Mi का फ़ोन है? और आपने कभी सोचा है की Xiaomi अपने किसी भी फोन के साथ ईयरफोन क्यों नहीं देता? तो आइये जानते हैं क्या है इसके पीछे की सचाई..आज के समय में हर किसी के पास स्मार्टफोन होता है. साथ में लोग कम कीमत में अच्छा स्मार्टफोन खरीदना पसंद करते हैं.

हालांकि बाजार में कई ऐसे बड़े ब्रांड हैं जो कम कीमत पर मोबाइल बेचते हैं. लेकिन जब बात ग्राहकों के भरोसे की आती है तो उन्हें Mi Phone सबसे बेस्ट ऑप्शन में से एक लगता है. अपने बेहतरीन फीचर्स की वजह से ये स्मार्टफोन सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.

लेकिन इस फोन के साथ कभी भी ईयरफोन क्यों नहीं मिलता? आज हम आपको इससे जानकारी देंगे. दरअसल जब भी हम Mi का स्मार्टफोन खरीदते हैं, तो हमें उसके साथ कभी भी ईयरफोन नहीं मिलता. हालांकि हम कभी इस बात पर ज्यादा ध्यान भी नहीं देते.

लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Mi कभी भी चार्जर और हैंडसेट के अलावा कुछ भी नहीं देती है. Mi अपने स्मार्टफोन अपने बॉक्स में से ईयरफोन ना रखकर अलग से बेचता है. जिस वजह से हैंडसेट की कीमत औरों के मुकाबले थोड़ी कम हो जाती है.

Mi कंपनी अच्छे से जानती है कि ग्राहक ईयरफोन कहीं से भी कीमत में खरीद सकते हैं. जिसका बखूबी फायदा उठाकर Mi कंपनी अपने ईयरफोन 700 से 2000 रुपए की कीमत में अलग से बेचती है. इस तरह हम ये कह सकते हैं कि Mi कंपनी जो कीमत अपने स्मार्टफोन में कम कर देती है. वही पैसे वो अपने ईयरफोन को बेचकर आसानी से कमा भी लेती है.

कोटा के किसान ने विकसित की आम की नई प्रजाति

फलों के राजा कहे जाने वाले आम का नाता हमारी सभ्यता से शुरू से ही रहा है। अमूमन गर्मी के सीजन में ही आम का उत्पादन होता है। लेकिन अब दिन-प्रतिदिन विज्ञान के बढ़ते कदम की वजह से आम का उत्पादन अन्य सीजनों में भी होने लगा है।

भारत में इस समय 1500 से अधिक आम की किस्में पाई जाती हैं। सभी किस्म अपने आप में अच्छा खासा महत्व रखती है। ऐसी ही एक किस्म खोज निकाली है कोटा के एक किसान ने। इन्होंने ऐसी प्रजाति विकसित की है जिसका साल के तीनों सीजन में उत्पादन होता है। यानी पूरे साल भर ये प्रजाति फल देती है, इसीलिए इसका नाम रखा गया है ‘सदाबहार।’

कोटा में बागवानी करने वाले गिरधरपुरा गांव के किसान किशन सुमन की बाग से उत्पादित होने वाला सदाबहार आम की कुछ खूबी अल्फांसो आम की तरह हैं। अल्फांसो भारत का सब से खास किस्म का आम है। इसे आम का सरताज कहा जाता है। बस इसी सरताज से मिलती जुलती चीजों जैसा सदाबहार आम है। आम की ये प्रजाति अपने आप में अलग तरीके की है।

किशन सुमन ने 1995 में गुलाब, मोगरा और मयूरपंखी (थूजा) की खेती शुरू की और तीन वर्षों तक फूलों की खेती करते रहे। इसी दौरान उन्होंने गुलाब के ऐसी किस्म को विकसित किया जिसमें एक ही पौधे मं सात रंग के फूल लगते हैं। उनके द्वारा उत्पादित इस किस्म का उन्हें अच्छा रिटर्न मिला। इसके बाद उन्होंने अन्य फसलों पर भी काम करना शुरू किया।

सुमन बताते हैं कि “मैंने सोचा है कि अगर मैं गुलाब की किस्म में परिवर्तन कर सकता हूं तो फिर आमों के साथ क्यों नहीं। मैंने विभिन्न किस्मों के आमों को इकठ‍्ठा किया और उन्हें पोषित किया। जब पौधे पर्याप्त बड़े हो गए, तो मैंने उन्हें रूटस्टॉक पर तैयार किया। इसके बाद फिर काफी हद तक परिवर्तन आया।

गुलाब किशन को कामयाबी 2000 में मिलती दिखी। उन्होंने अपने बगीचे में एक आम के पेड़ की पहचान की, जो तीन मौसमों में खिल गया था। जनवरी-फरवरी, जून-जुलाई और सितंबर-अक्टूबर। उन्होंने पांच पेड़ों को एक प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया।

इस पेड़ की अच्छी विकास आदत थी और इसमें गहरे हरे पत्ते थे। इन पेड़ों की एक खास बात यह भी थी कि इन पौधों में किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं थी। धीरे-धीरे वे अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध होते गए। हनी बी नेटवर्क के एक स्वयंसेवक सुंदरम वर्मा ने सुमन के नवाचार के बारे में जमीनी तकनीकी नवाचारियों और उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान के लिए संस्थागत अंतरिक्ष, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) को सूचित किया।

इसके बाद एनआईएफ ने सदाबहार पौधे बेचने या उपहार देने के लिए कहा, मैंने उन्हें पौधे दिए। एनआईएफ ने मुझे ये सलाह दी कि अपनी किस्म को सत्यापित कराएं। वे कहते हैं कि उनकी सलाह मानते हुए अपनी किस्म को प्रमाणित करने के लिए मैंने 11 वर्षों तक देश के विभिन्न स्थानों पर जाकर अपनी किस्म के पौधे लगाए। वह कहते है कि एनआईएफ को “मैंने 2012 में 20 पौधों का उपहार दिया था। अब पेड़ फल दे रहा है और जब फल पकता है, त्वचा नारंगी रंग प्राप्त करती है, जबकि अंदरूनी फल गेरुआ रंग का होता है।

खास प्रकार की किस्म को विकसित करने वाले किशन सुमन को अब तक कई अवार्ड भी दिए जा चुके हैं। मार्च 2017 में सुमन को 9वीं द्विवार्षिक ग्रासरूट इनोवेशन और राष्ट्रपति भवन में आयोजित उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान के दौरान फार्म इनोवेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

इनके फलों की तारीफ करते हुए हरदेव चौधरी कहते हैं कि सदाबाहर पूरे वर्ष खिलते हैं। फल का स्वाद मीठा होता है और एक बौने विविधता के रूप में विकसित होते हैं। वे कहते हैं कि आम की इस नस्ल को किचन ग्रार्डन में बर्तन में रखकर कुछ समय बाद उत्पादित किया जा सकता है।

वे कहते हैं कि मौजूदा किस्मों की स्थिति को देखते हुए इसकी क्षमता बड़ी है। ऑक्सीजन की अत्याधिक उपलब्धता होने के कारण ये उत्पादकों के लिए भी बेहद फायदेमंद हो सकता है। वे कहते हैं कि ये किस्म देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का एकमात्र हाईब्रिड आम है जो कि साल में तीन बार फल देता है।

राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन की शान बने है सदाबहार

किशन सुमन द्वारा उत्पादित की जा रही आम की ये किस्म अब राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन की शान बन चुके हैं। सदाबार आम किस्म के यहां पर चार पौधे लगाए गए है। किशन के अनुसार उनके चार बीघा खेत में आम के 22 मदर प्लांट्स और 300 ग्राफ्टेड प्लांट्स लगे हुए हैं।

सदाबहार नाम की आम की यह किस्म रोग प्रतिरोधी है। बौनी किस्म होने से इसे गमले में भी लगाया जा सकता है। इसमें वर्ष भर नियमित रूप से फल आते हैं और ये सघन रोपण के लिए भी उपयुक्त है। जब से राष्ट्रपति भवन में सुमन के आमों को लगाया गया था, तब से उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई है।

सुमन ने दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में नर्सरी और व्यक्तियों को 800 रुपये से अधिक, 800 रुपये के लिए उपलब्ध कराया है। सुमन ने कहा, “मुझे नाइजीरिया, पाकिस्तान, कुवैत, इराक, यूके और संयुक्त राज्य अमेरिका से भी लोग कॉल करके सदाबहार के बारे में पूछ रहे हैं।

सुमन के अनुसार एक पौधा लगभग 5 साल बाद फल देता है। मेरे लिए एक अच्छी बात यह है कि उत्पादक लंबे समय तक का इंतजार करते हैं लेकिन वे शिकायत नहीं करते हैं। ये सदाबार अन्य किस्मों से बहुत अलग है।

सेब की खेती से किसान ऐसे कमाते है सलाना 75 लाख रुपए

सेब की खेती भारत के कई प्रांतों में होती है। कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सेब की कई नस्लें पैदा की जाती हैं। इन प्रदेशों में उन्नत किस्म के सेब की खेती होती है। पर अगर अनुकूल वातावरण मिले तो यह सेब कहीं भी पैदा हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश में भी कई स्थानों पर किसान सेब पैदा करते हैं। तस्वीरों में देखें कश्मीर में सेब की खेती।

पूरी दुनिया मे साल 2013 में आठ करोड़ टन सेब पैदा हुआ था। इसमें से भी आधा तो केवल चीन में पैदा किया गया। अकेले अमरीका मे सेब का कारोबार क़रीब चार अरब डॉलर का माना जाता है।

सेब की विश्व में 7500 से अधिक नस्लें पाई जाती हैं। मतलब साफ है अगर एक दिन में एक सेब का स्वाद आप चखेंगे तो तकरीबन 25 साल खर्च हो जाएंगे। सेब में औसतन 10 बीज पाए जाते हैं।

आपको एक और जानकारी बताता हूं कि सेब का एक पेड़ चार-पांच साल की उम्र में फल देना शुरू कर देता है और लगभग सौ साल तक फल देता रहता है।

हिमाचल प्रदेश सेब की खेती के लिए पूरे विश्व में मशहूर है। यहां एक ऐसा गांव है जहां के एक-एक किसान सेब खेती से करीब 75 लाख रुपए सालाना कमाते हैं। सेब की खेती ने इस गांव को इतना विकसित कर दिया है कि यह कहा तो गांव जाता है पर यहां पर आलीशान मकानों की कमी नहीं है। यहां हर साल करीब 150 करोड़ रुपए का सेब पैदा होता है। अब आप को हम इसका नाम बताते हैं इसका नाम है मड़ावग गांव।

यह हैं जर्मनी से जुड़े 10 अजीबो गरीब रोचक तथ्य, जो आप नहीं जानते होंगे

जर्मनी विश्व के ताकतवर देशों में से एक है। जिसने विश्वयुद्ध के बाद कंगाल होने पर भी हार नहीं मानी और आज वह सफलता प्राप्त कर ली है जिस पर विश्वास करना भी मुमकिन नहीं है। आइए जानते हैं जर्मनी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य…

जर्मनी की जनसँख्या

जर्मनी की जनसंख्या लगभग भारत के देश आंध्र प्रदेश के बराबर ही है। जर्मनी की जनसंख्या मात्र 8 करोड़ है।

इस देश की ताकत के पीछे ताकत के देश के नागरिकों की देशभक्ति और मेहनत है जो मुश्किलों में भी मुस्कुराना जानते हैं.

कईं राज्यों से मिलकर बना है यह देश

यहां की राजधानी एक राज्य नहीं बल्कि कई राज्य रह चुके हैं जिनमें Aachen , Regensburg , Frankfun-am-main , Bonn and berlin शामिल है।

जेल से फरार होने पर नही मिलती सज़ा

जर्मनी में माना जाता है कि लोगों को अपनी आजादी से जीने का हक है इसलिए जेल से भागने पर भी उन्हें सजा नहीं दी जाती।

अटपटे देश के चटपटे लोग

जर्मनी के लोगों का अंदाज बड़ा अटपटा है वहां के लोग फोन पर बात शुरू करने पर ‘हेलो’ नहीं बल्कि अपना नाम लेकर बातचीत शुरू करते हैं।

नही है स्पीड लिमिट

जर्मनी के 70 परसेंट हाईवे पर वाहन की कोई स्पीड लिमिट नहीं है लेकिन वहां के वाहनों का रोड पर ही इंधन खत्म हो जाना गैरकानूनी माना जाता है।

किताबें छपने में है अव्वल

जर्मनी की पहली पत्रिका सन 1963 में शुरू की गई थी जहां पर अब तक दुनिया की सबसे अधिक किताबें छापी जा चुकी हैं।साल 1989 से साल 2009 के बीच Germany में 2 हज़ार से ज्यादा स्कूल बंद करने पड़े थे क्योंकि उनमें बच्चों की कमी थी।

लगातार कम हो रही है जनसंख्या

जर्मनी और जापान की जन्म दर संख्या सबसे कम है जर्मनी में पिछले 10 साल में दो लाख जनसंख्या कम हो चुकी है।

जर्मनी का बजट

जर्मनी का रक्षा बजट मात्र इतना है कि अमेरिका में एक कुत्ते को खाना खिलाया जा सके। यानी यह देश पालतू जानवरों पर इंसानों से अधिक खर्व्ह करता है.

कर्ज़ से उबरा देश

पहले विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी बिल्कुल कंगाल हो चुका था उन पर लगभग कितना कर्जा था कि उसकी तुलना 96000 टन सोने की कीमत के बराबर की गई थी।

जन्मदिवस को मानते हैं बुरा

जर्मनी में कभी एडवांस हैप्पी बर्थडे नहीं कहा जाता क्योंकि वह उसे अपना बैड लक मानते हैं।

दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले कारे जर्मनी में बनाई जाती है। जिनमें BMW और AUDi शामिल है।

Flipkart पर 1 रुपये में बहुत कुछ खरीदने का मौका, जानें कैसे उठाएं ऑफर का लाभ

Flipkart पर 1 रुपये में बहुत कुछ खरीदने का मौका..कुछ समय पहले ही WallMart के साथ समझौता के बाद से Flipkart ने कई शानदार और आकर्षक डील्स उपलब्ध कराई हैं। इस बार Flipkart ने घरेलू सामान को 1 रुपये में देने की पहल की है।

जी हां, ग्राहक अपने घर का सामान 1 रुपये में खरीद सकते हैं। यहां जानें कैसेFlipkart पर 1 रुपये में सेल के तहत ग्राहक घर का सामान खरीद सकते हैं। इस दौरान ग्राहक आटा, शैंपू, दाल-तेल आदि चीजें को बेहद कम कीमत में खरीद पाएंगे।

Flipkart पर ग्रॉसरी स्टोर SuperMart के नाम से दर्ज है। Flipkart पर आपको Today’s Steal Deals नजर आएगा। इसके तहत रोजाना ग्राहकों को तीन घर के सामान को एक रुपये में खरीद पाएंगे। हालांकि, इसके लिए एक शर्त है।

क्या है शर्त?

इस ऑफर का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को एक शर्त पूरी करनी होगी। इसके तहत ग्राहकों को 1 रुपये में तीन चीजें खरीदने के लिए कम से कम 599 रुपये की खरीदारी करनी होगी। ऐसा करने के बाद ग्राहक 1 रुपये में एक किलो दाल, 1 किलो चीनी और 1 लीटर सरसों तेल खरीद पाएंगे। इस सेल के दौरान अगर ग्राहक एक्सिस बैंक का कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें कैशबैक ऑफर भी दिया जाएगा।

जानें क्या है कैशबैक ऑफर?

Flipkart की साईट या ऐप से एक्सिस बैंक के क्रेडिट या डेबिट कार्ड के जरिए खरीदारी करने पर ग्राहकों को 15 फीसद की छूट दी जाएगी। इस कैशबैक ऑफर का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को न्यूनतम 1,500 रुपये की खरीदारी करनी होगी।

2019 में बंद हो सकती हैं ये 6 पॉपुलर कारें, जानें कारण

आज हम आपके लिए अपनी खबर में ऐसी गाड़ियां लेकर आए हैं, जो 2019 के दौरान बंद की जा सकती हैं। हमने इन कारों को आगामी बीएस-6 उत्सर्जन मानक, क्रैश टेस्ट मानदंडों और कम बिक्री के चलते चुना है।

Maruti Suzuki Gipsy

  • कीमत – 5.70 लाख रुपये से 6.40 लाख रुपये (एक्स शोरूम दिल्ली)
  • औसत मासिक बिक्री – 500 से कम यूनिट

मारुति सुजुकी जिप्सी ने 1980 के दशक में भारतीय कार बाजार में कदम रखा था और अब माना जा रहा है कि 2019 में कंपनी इसे बंद कर देगी। इसे बंद करने की मुख्य वजह इस साल से लागू होने वाले भारत न्यू व्हीकल सेफ्टी एसेस्मेंट प्रोग्राम (BNVSAP) माना जा रहा है।

Maruti Suzuki Omni

  • कीमत – 2.76 लाख रुपये
  • औसतन मासिक बिक्री – 6000 से 8000 यूनिट्स

मारुति ओम्नी भी जिप्सी की तरह देश में लंबे समय से बिकने वाली मारुति कारों में से एक है। मौजूदा ओमनी ना तो क्रैश टेस्ट को पूरा कर सकेगी और ना ही इसका पुराना 796cc कार्बोरेटेड इंजन कड़े BS-6 उत्सर्जन मानदंड़ों को पूरा करने में सक्षम है, ऐसे में कंपनी ओमनी को बंद कर सकती है।

Mahindra Xylo

  • कीमत – 9.17 लाख रुपये से 12 लाख रुपये (एक्स शोरूम दिल्ली)
  • औसतन मासिक बिक्री – 500 यूनिट्स

साल 2009 में लॉन्च हुई महिंद्रा जायलो को भी कंपनी इस साल बंद कर सकती है। बता दें, 2009 के बाद कंपनी ने इसका अभी तक नया जनरेशन मॉडल लॉन्च नहीं किया है। महिंद्रा जायलो को पहली जनरेशन स्कॉर्पियो के प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है, जो आगामी क्रैश टेस्ट को पास करने में असमर्थ है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कंपनी जायलो को भारत में बंद कर देगी

Tata Nano

  • कीमत – 2.36 लाख रुपए से 3.34 लाख रुपये
  • औसतन मासिक बिक्री – 50 यूनिट्स

टाटा नैनो 2008 में लॉन्च होने के बाद सबसे सस्ती कार के रूप में सामने आई। हालांकि, कम कीमत होने के बावजूद भी यह कार कंपनी की उम्मीदों पर खड़ी नहीं उतरी और आगामी मानदंड़ो के चलते इसे बंद किया जा सकता है।

Fiat Punto, Linea

  • पुंटो कीमत – 5.35 लाख रुपये से 7.47 लाख रुपये (एक्स शोरूम दिल्ली)
  • लीनिया कीमत – 7.15 लाख रुपये से 9.97 लाख रुपये (एक्स शोरूम दिल्ली)
  • औसतन मासिक बिक्री – 100 यूनिट्स से भी कम

इन दोनों कारों की बिक्री अन्य कारों की तुलना में काफी लंबे समय से खराब चल रही है। इतना ही नहीं ये दोनों कारें अपने सेगमेंट में सबसे पुरानी कारें भी हैं। लीनिया की सालाना औसतन बिक्री 100 यूनिट्स से भी कम है। वहीं, पुंटो रेंज की मासिक बिक्री लगभग 50 यूनिट्स तक ही है । कंपनी इन दोनों कारों को खराब सेल्स के चलते बंद कर सकती है।