केरल के इस व्यापारी ने बनाया ईको-फ्रेंडली स्टोव, तेजी से हो रहा लोकप्रिय

47 वर्षीय जयप्रकाश सिर्फ 12वीं कक्षा तक पढ़े हैं, लेकिन उन्होंने अपने ईको-फ्रेंडली स्टोव के आविष्कार से सभी को चौंका दिया। वह अभी तक 8 हजार स्टोव्स बेच चुके हैं। जयप्रकाश स्कूल में होने वाले साइंस एग्जिबिशन्स में भी हिस्सा लेते रहते थे। 12वीं के बाद उन्हें आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी।

महिलाओं का संघर्ष देख मिली प्रेरणा

जयप्रकाश ने बताया कि जब वह छोटे थे, तब उनकी मां कोयंबटूर से स्टोव खरीदकर लाती थीं और बेचती थीं। जयप्रकाश इस काम में अपनी मां का हाथ बंटाया करते थे। चूल्हे से निकलने वाला धुंआ, महिलाओं की सेहत के लिए खतरनाक होता है और यह चिंता जयप्रकाश को अक्सर सताया करती थी।

इसलिए उन्होंने एक छोटा सा पाइप स्टोव के पीछे लगाने के बारे में सोचा, जो एक चिमनी की तरह काम करे। जयप्रकाश को आज भी वह समय याद है, जब उन्हें शुरूआती सफलता मिली और उन्होंने अपने आइडिया पर और अधिक काम करना शुरू किया।

 

 

जयप्रकाश के बनाए स्टोव में क्या है खास?

जयप्रकाश ने समझाया कि स्टेनलेस स्टील और कास्ट आयरन से बने उनके स्टोव मॉडल में, जलने की प्रक्रिया दो चरणों में होती है (बर्निंग का टू-टियर सिस्टम), ताकि कम से कम धुंआ पैदा हो और प्रदूषण न फैले।

जयप्रकाश ने बताया कि किस तरह अनगिनत प्रयोगों के बाद वह अपने फाइनल मॉडल तक पहुंचे, जिसमें सेरेमिक पाइप में छेद किए गए ताकि पर्याप्त आक्सीजन उपल्बध हो और दूसरे चरण में कार्बन पार्टिकल्स पूरी तरह से जल सकें। बता दें, कि जलने की प्रक्रिया में ऑक्सीजन गैस सहायक होती है। ऐसा करने से कम धुआं पैदा होता है और स्टोव भी किफायती ढंग से काम करता है।

बहुत ही कम खर्च में करता है काम

जयप्रकाश ने अपनी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बड़े-बड़े कम्युनिटी स्टोव्स भी बनाने शुरू किए। एएनईआरटी के विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि कोझिकोड में एक होटल है, जहां पर जयप्रकाश द्वारा बनाए गए कम्युनिटी स्टोव की मदद से सिर्फ 75 नारियल खोलों (लागत लगभग 75 रुपए) को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करके 40किलो तक चावल पकाया जा रहा है।

जबकि इससे पहले इस काम के लिए 10 किलो एलपीजी खर्च होती थी, जिसकी लागत 4 हजार रुपए तक आती थी।दोनों ही तरह के स्टोव्स का पेटेंट जयप्रकाश के पास है। इसके अलावा वह जेपी टेक नाम से एक क्लीन एनर्जी स्टार्टअप भी चला रहे हैं और ईको-फ्रेंडली स्टोव्स के बड़े ऑर्डर ले रहे हैं।

जयप्रकाश ने अभी तक केरल के घरों में 7,500 ईको-फ्रेंडली स्टोव्स पहुंचाए हैं। इतना ही नहीं, राज्य के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के लिए जयप्रकाश के बनाए 200 कम्युनिटी स्टोव्स इस्तेमाल हो रहे हैं।

इनकी सप्लाई यूनाइटेड नेशन्स डिवेलपमेंट फंड के सहयोग से की गई। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक से जयप्रकाश को लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं और वह अभी तक 1 हजार कम्युनिटी स्टोव्स की बिक्री कर चुके हैं।

किफायती हैं ये स्टोव्स

जयप्रकाश की कोयंबटूर स्थित छोटी सी फैक्ट्री के जरिए 6-7 परिवारों को रोजगार मिल रह है और जयप्रकाश इस बात से बेहद खुश हैं। जयप्रकाश के स्टोव्स कारगर होने के साथ-साथ किफायती भी हैं।

1 किलो वाले स्टोव की कीमत है सिर्फ 4 हजार रुपए, जबकि 10 किलो वाले की कीमत है 15 हजार रुपए। सबसे बड़ा स्टोव है 100 किलो का, जिसकी कीमत है 65 हजार रुपए। जयप्रकाश अपने स्टोव की तकनीक को अभी और बेहतर करने की जुगत में हैं।