बोइंग 737 विमानों पर लग रही है पूरी दुनिया में रोक, जानें इसके बारे में जरूरी और खास बातें

पिछले रविवार को इथोपियन एयरलाइंस का एक विमान बोइंग 737 मैक्स 8 दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जहाज में सवार सभी लोगों की हादसे में मौत हो गई। विमान क्रैश होने के कारणों की जांच की जा रही है। लेकिन मैक्स 8 विमान की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

इसके बाद भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए बोइंग 737 मैक्स 8 विमान पर रोक लगा दी है।भारत में स्पाइस जेट और जेट एयरवेज बोइंग के 737 मैक्स मॉडल का इस्तेमाल करती हैं। स्पाइस जेट के पास करीब 12 ऐसे विमान हैं, जबकि जेट एयरवेज के पास ऐसे पांच विमान हैं।

​​क्या है ख़ासियत?

37 मैक्स के पंखों की डिजाइनिंग के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें इंधन कम खर्च होता है। यात्रियों के लिए भी यह सुविधाजनक है। उनको यात्रा के दौरान ज्यादा झटके महसूस नहीं होते हैं। बोइंग का इस विमान में पायलटों के लिए काफी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। बोइंग की नई डिस्पले टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया गया है।

15 ईंच की बड़ी स्क्रीन लगाई गई है जिससे पायलटों को कम मेहनत में ज्यादा सूचना मिल जाती है। इसमें बड़ा और खास इंजन लगाया गया है। यह इंजन पर्यावरण मैत्री हैं यानी कम शोर करने के साथ-साथ यह हानिकारक गैसों का कम उत्सर्जन करता है।

​क्या है इसमें समस्या?

बोइंग में समस्या की बात करें तो इसके इंजन, सॉफ्टवेयर में समस्या है और पायलटों के बीच प्रशिक्षण का अभाव है। इसके इंजन में दिक्कत के कारण कई बार जहाज की रफ्तार खुद से कम हो जाती है और जहाज बंद हो जाता है।

इस समस्या से निपटने के लिए बोइंग ने MCAS नाम का एक सॉफ्टवेयर इसमें लगाया है। लेकिन इस सॉफ्टवेयर में भी दिक्कत है और कई बार गलत निर्देश देता है। दुनिया भर में मुठ्ठी भर पायलटों को ही बी737 मैक्स के सिम्युलेटर पर प्रशिक्षण दिया गया है। पायलटों की बड़ी संख्या ऐसी है जिनको प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।

​बोइंग 737 मैक्स की मांग

इथोपियन एयरलाइंस का जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है वह बोइंग 737 मैक्स 8 है। यह 737 मैक्स सीरीज का सबसे लेटेस्ट विमान है। बोइंग के 737 मैक्स विमान की दुनिया भर में काफी मांग है। 31 जनवरी, 2019 तक कंपनी को 4,661 विमानों का ऑर्डर मिल चुका है।

इससे पहली भी हुआ हादसा

एक बोइंग 737 मैक्स 8 पिछले साल दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। 29 अक्टूबर, 2018 को जकार्ता से उड़ान भरने के कुछ समय के अंदर ही जहाज जावा सागर में गिर गया था। इस दुर्घटना में पायलट समेत 189 यात्रियों की मौत हो गई थी। दोनों दुर्घटना में अब तक कुल 346 यात्रियों और पायलटों की मौत हो गई है।