जानें क्यों कोका-कोला की सीक्रेट रेसिपी को रखा जाता है तिजोरी में बंद, सिर्फ दो लोगों को है इसकी जानकारी

कोका-कोला की एक पूर्व साइंटिस्ट Xiaorong You पर कंपनी के ट्रेड सीक्रेट चुराने का आरोप लगा है। यह साइंटिस्ट मूल रूप से चीनी है, लेकिन कई वर्षों से अमेरिका में रह रही थी। आरोपों के मुताबिक वह चीन में कोका-कोला जैसी कंपनी खोलना चाहती थी और इसके लिए उसने पिछले साल कोका-कोला से ट्रेड सीक्रेट चुराए।

इन सीक्रेट्स की कीमत करीब 850 करोड़ रुपए (12 करोड़ डॉलर) आंकी जा रही है। यह तो महज कोका-कोला की पैकेजिंग का सीक्रेट है। असल सीक्रेट तो कोका-कोला बनाने की रेसिपी है,

सिर्फ दो लोग जानते हैं असली फॉर्मूला

कंपनी के सिर्फ दो एक्जीक्यूटिव ही इसका राज जानते हैं। हालांकि, चर्चा यह भी है कि दोनों ही एग्जीक्यूटिव को आधा-आधा फॉर्मूला पता है।और यह भी कि दोनों एक्जीक्यूटिव को फॉर्मूला पता होने के कारण कभी एक साथ नहीं रखा जाता।कंपनी की स्ट्रैटजी के तहत यह दोनों ट्रैवल भी अलग-अलग ही करते हैं।

कहां रखा है फॉर्मूला

अटलांटा के सन ट्रस्ट बैंक में इसकी ओरिजनल कॉपी रखी गई है। सन ट्रस्ट फॉर्मूले को कभी शेयर न करे, इसलिए कोका कोला में उसे 48.3 मिलियन शेयर दिए गए हैं। साथ ही सन ट्रस्ट के अधिकारियों को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी शामिल किया गया है।

ब बनाया गया था फॉर्मूला

कोका कोला का गुप्त फॉर्मूला 1886 में अटलांटा में बनाया गया था। इसे बनाने वाले जॉन एस पेंबर्टन उस वक्त दवा की एक दुकान चलाते थे और उन्होंने अपने घर के पिछवाड़े में एक केतली में अलग-अलग बूटियां और सामग्री उबालकर कोका कोला का फॉर्मूला ईजाद किया था। भारत में कोका कोला की शुरुआत 1956 में हुई।

दिमाग शांत करने वाला टॉनिक

विश्व भर में विख्यात इस सॉफ्ट ड्रिंक पर किताब लिखने वाले मार्क पेंडरगास्ट के मुताबिक कोका कोला को पहली बार दिमाग को शांत करने वाले टॉनिक के रूप में लोगों के सामने पेश किया गया।

इसके निर्माताओं का दावा था कि  कोका कोला पीने से सिरदर्द और थकान कम हो जाती है और दिमाग ठंडा हो जाता है। किताब में इस बात का दावा किया था कि शुरुआत में पेंबर्टन ने इसमें कोकीन भी मिलाया था।

विदेशों में बैन ये उत्पाद भारतीए लोगों की बने हुए है पहली पसंद .

भारत के बाहर प्रतिबंधित दवाओं और उत्पादों की सूची लंबी है. प्रतिबंधित की जाने वाली दवाओं में जहां नोवाल्गिन, डी-कोल्ड, एंटरोक्विनेल, फुरोक्सोन और लोमोफ़ेन (एंटी-डायरियल), निमुलिड, एनलजिन (दर्द निवारक), सिज़ा और सिसप्राइड, (एसिडिटी और कब्ज), निमेसुलाइड जैसी दवाएं है वहीं कुछ ऐसे खाद्य उत्पाद भी हैं जिन्हें भारत में बहुत पसंद किया जाता है.

लाइफबॉय

अमेरिका ने इस साबुन पर कुछ साल पहले ही प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि एक परीक्षण में यह पाया गया था कि यह साबुन मानव त्वचा के लिए अच्छा नहीं है. खाद्य और औषधि प्रशासन ने कहा है कि इस साबुन का निर्माता यह साबित करने में विफल रहा कि यह मानव त्वचा के लिए अच्छा है.

डिस्प्रिन (दर्द निवारक)

इस दवा का उपयोग दर्द को कम करने के लिए किया जाता है. लेकिन 2002 में अमेरिकी सरकार की ड्रग सेफ्टी बॉडी द्वारा 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इसे प्रतिबंधित कर दिया गया. डिस्प्रिन के साइड इफेक्ट के कारण एक दुर्लभ स्थिति पैदा हो गई थी,

जो हमारे लीवर और मस्तिष्क की सूजन का कारण बन रही थी. इसलिए कईं बाहरी देशों ने इसके सेवन पर रोक लगा दी थी. लेकिन भारत के लोग बिना किसी डर के अपने दर्द को मिटाने के लिए इस दवा का सेवन कर रहे है.

हल्दीराम के उत्पाद

यूएसए में खाद्य और औषधि प्रशासन ने भारत में स्थित एक प्रमुख मिठाई और स्नैक्स निर्माता हल्दीराम के उत्पादों की बिक्री पर 2016 में प्रतिबंध लगा दिया था.

हल्दीराम के स्नैक्स, बिस्कुट, वेफर्स और अन्य उत्पादों पर किए गए परीक्षण और मिलावट के उच्च स्तर, खपत के लिए अयोग्य होने की वजह से इसपर रोक लगा दी गई थी जो हमारे देश में धड़ल्ले से बिक रहे हैं और लोगों की पहली पसंद बने हुए है.

समोसा

भारतीय लोगों में सबसे सस्ते और पसंदीदा स्ट्रीट फूड में से एक है – समोसा परंतु कईं देशों ने इसपर प्रतिबंध लगा दिया. उनके अनुसार यह शरीर के लिए खतरनाक होने के साथ-साथ रोगों की जड़ भी है.

इस महिला ने 5 सगे भाइयों से रचाई है शादी, वजह जानकार ठनक जाएगा माथा

महाभारत हिंदू धर्म का एक बहुत ही प्रमुख काव्य ग्रंथ है। भारत सहित दुनिया के तमाम हिस्सों में ऐसे लोगों की संख्या की संख्या कम ही होगी जिन्हें महाभारत के बारे में पता न हो। महाभारत में उपस्थित सभी पात्रों की अपनी-अपनी खासियत है लेकिन इसमें द्रौपदी का चरित्र बेहद अहम है।

हम सभी जानते हैं कि द्रौपदी की पांच शादियां हुई थी। हालांकि ऐसा होने के पीछे कई कारण थे जिसके बारे में हम सभी ने पढ़ा या देखा है। लेकिन आज के जमाने में यदि किसी औरत को ऐसा करना पड़े तो ये वाकई में काफी हैरान कर देने वाली बात है। आज हम आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने एक ही परिवार के पांच भाइयों के साथ शादी की।

जी, हां हम यहां रजो नाम की एक लड़की के बारे में बात कर रहे हैं जो कि उत्तराखंड में रहती है। रजो को वहां स्थित एक परिवार के पांच भाइयों के साथ शादी करनी पड़ी।रजो को इन पांच भाइयों के साथ एक ही जैसा बर्ताव करना पड़ता है।

पत्नी होने के नाते रजो का अपने हर पति के साथ शारीरिक संबंध भी है। रजो का एक बेटा भी है लेकिन किसी को भी ये पता कि आखिर पांच भाइयों में उस बच्चे का पिता कौन है। हालांकि इन पांच भाइयों में इस बात को लेकर कभी तनाव की स्थिति नहीं रही। पांचों मिलकर रजो और उसके बच्चे की देखभाल करते हैं।

रजो से इस बारे में पूछने पर उसका कहना है कि उसे कभी इस बात से कोई परेशानी नहीं हुई कि उसके पांच पति है बल्कि वो खुद को खुशकिस्मत मानती है। रजो का ये भी कहना है कि उसके पांचों पति उससे बहुत प्यार करते हैं।

रजो आगे कहती है कि मुझे पता है कि इस तरह की शादी कानूनन अपराध है लेकिन यहां लड़कियों की संख्या में कमी के चलते ऐसा करना पड़ता है।बता दें उत्तराखंड और तिब्बत के कई इलाकों में लड़कियों की संख्या पुरूषों की तुलना में काफी कम है। इस वजह से उन्हें शादी के लिए इस अजीबोगरीब प्रथा का पालन करना पड़ता है।

पत्थर समझकर सालों से मछुआरा कर रहा था अनदेखी

कहते हैं देने वाला जब भी देता है छप्पड़ फाड़ कर देता है। इंसान के किस्मत को बदलने में देर नहीं लगती। वक्त अच्छा हो तो पत्थर भी सोना बन जाता है।अब आप इस शख्स को ही ले लीजिए जिसकी किस्मत रातोंरात ऐसी पल्टी कि देखते ही देखते वो करोड़पति बन गया। ये बात है फिलीपींस के पवाना आइलैंड के मछुआरे की।

अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को चलाने के लिए ये मछुआरा रोज मछली पकड़ने के लिए समंदर में जाता था। एकदिन मछली पकड़ने के दौरान वो समुद्री तूफान में फंस गया। खूद को उस तूफान से बचाने के लिए मछुआरे ने एक पत्थर का सहारा लिया और तूफान के जाने का इंतजार करने लगा।

थोड़ी देर बाद जब तूफान थम गई तो उसकी जान बचाने के लिए वो उस पत्थर को अपना लकी चार्म मानने लगा और उसे अपने साथ अपने घर ले आया। घर आकर उसने इस पत्थर को एक मामूली पत्थ्र समझकर पलंग के नीचे रख दिया।

लेकिन किस्मत को शायद उस पत्थर का पलंग के नीचे बेकार पड़े रहना रास नहीं आया। एक दिन मछुआरे के घर पर आग लगी। उस दौरान एक टूरिस्ट ऑफिसर एलीन सिंथिया मगैय की नजर पलंग के नीचे रखे इस पत्थर पर पड़ी। पत्थर को देखते ही वो समझ गया कि ये कोई साधारण पत्थर नहीं है।

एलीन ने बिना देर किए तुरंत ये बात मछुआरे को बताई। एलिन ने मछुआरे को बताया कि ये कोई साधारण पत्थर नहीं है बल्कि ये एक विशालकाय मोती है जिसकी बाजार में कीमत करीब 6 अरब 53 करोड़ रुपए आंकी गई। बता दें इस मोती का वजन 34 किलोग्राम है। देखते ही देखते गरीब मछुआरे की किस्मत बदल गई और वो सड़क से महल पर आ गया।

शायद इसी वजह से कहा जाता है कि कभी भी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए या किसी के साथ भेदभाव की नीति नहीं अपनानी चाहिए क्योंकि किस्मत बदलते देर नहीं लगती। इंसान का भाग्य उसे राजा से रंक और रंक से राजा बनाने की क्षमता रखता है।

इस ब्राण्ड का पानी पीते हैं कोहली

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली अपनी मेहनत और फिटनेस की वजह से आज इस मुकाम को हासिल कर पाए हैं. खुद को फिट रखने के लिए विराट कोहली काफी मेहनत करते हैं.

अपनी फिटनेस के लिए वो सुबह-शाम जिम तो जाते ही हैं साथ ही अपने खाने-पीने का बहुत ध्यान रखते हैं. विराट खाने-पीने में कोई लापरवाही नहीं करते और हमेशा संतुलित आहार लेते हैं. विराट जंक फूड खाना पसंद नहीं करते. उन्हें घर का हेल्दी खाना बहुत अच्छा लगता है.

विराट अपनी फिटनेस के लिए सिर्फ बाहर के खाने से ही नहीं, बल्कि पानी से भी परहेज करते हैं. वो अच्छी कम्पनी का पानी पीते हैं. ऐसा बताया जाता है कि वो एवियन ब्राण्ड का पानी पीते हैं. यह एक खास तरह का पानी है जो काफी महंगा है और इसे फ्रांस से मंगवाया जाता है.

इस पानी की कीमत 600 रुपए प्रति लीटर है. कोहली दुनिया में जहां भी जाते हैं, मात्र यही पानी पीते हैं. जबकि दुनिया में जहां भी इस पानी के मिलने की संभावना नहीं होती, वहां इस पानी को अपने साथ ले जाते हैं.

हम आपको बता दें कि इस तरह का पानी एक विशेष प्रकार का पानी होता है जो वजन घटाने और तनाव दूर रखने आदि में मददगार साबित होता है.यह अकेले ही नहीं है और भी ऐसे कई सेलिब्रिटी हैं जो कि एक लीटर पानी की बोतल पर लगभग 36 हजार रुपए तक का खर्च कर देते हैं.

कोहली खुद भी हेल्दी फूड खाते हैं और दूसरों को भी खाने के लिए कहते हैं. इसके अलावा दूसरों को जंक फूड से दूर रहने की सलाह देते हैं. विराट फ्राइड चिप्स की जगह वीट क्रैकर्स या इसी तरह की हेल्दी चीजें खाना पसंद करते हैं. उन्हें फ्राइड चिकन बिलकुल पसंद नहीं है. लेकिन उन्हें चॉकलेट ब्राउनी बहुत पसंद है इसे देखकर विराट अपने आपको खाने से रोक नहीं पाते.

इस होटल में एक रात बिताने पर मिलेंगे पूरे 67 लाख, लेकिन यह है शर्त

शादी के बाद आमतौर पर हर कपल हनीमून मनाने के लिए जाता है. ऐसे में नया जोड़ा पैसे से ज्यादा सुविधाओं पर ध्यान देता है. इसके अलावा भी अगर आप छुट्टियों में घूमने का प्लान करते हैं तो ऐसे होटल में समय बिताना पसंद करते हैं जिसमें लग्जरी सुविधाओं के साथ ही समय बिताना यादगार साबित हो.

लेकिन लग्जरी होटल में जाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं. ऐसे में एक होटल शानदार स्कीम लेकर आया है, इस ऑफर को जानने के बाद आप भी उस होटल में जाने से खुद को रोक नहीं पाएंगे.

तमाम होटल देते हैं धांसू ऑफर

लेकिन आप जब भी किसी लग्जरी होटल का प्लान करते हैं तो सबसे पहले हमारे दिमाग में उसके किराये और उसमें ठहरने पर मिलने वाली सुविधाओं को लेकर आती है. अगर आपको किसी होटल में क्वॉलिटी टाइम बिताने पर पैसे मिले तो है न अच्छा ऑफर. शायद ही आप इस ऑफर से इंकार कर पाएं. दुनियाभर के तमाम होटल कपल्स को आकर्षित करने के लिए धांसू ऑफर देते हैं.

पूरी करनी होगी होटल की कंडीशन

इसी तरह का एक ऑफर इजरायल के होटल ने तैयार किया है. इस ऑफर में दी गई कंडीशन को अगर आप पूरा करते हैं तो आपको इनाम में 67 लाख रुपये मिल सकते हैं. इसके लिए होटल की तरफ से एक शर्त रखी गई है. इजरायल की राजधानी जेरुशलेम में स्थित येहूदा नाम के इस होटल में हनीमून या क्वॉलिटी टाइम बिताने के लिए आए कपल्स को स्पेशल ऑफर दिया जा रहा है.

इस तारीख पर होना होगा गर्भवती

इस ऑफर में हनीमून पर आई महिला को होटल की तरफ से बताई गई तारीख पर गर्भवती होना होगा. अगर आप भी ऐसा करने में कामयाब होते हैं तो आपको इनाम में 67 लाख रुपये मिलेंगे. होटल के स्टॉफ में एक डॉक्टर भी है जो यह पुष्टि करता है कि आप पहले से तो गर्भवती नहीं है. साथ ही वह यह भी पुष्टि करता है कि आप होटल की तरफ से तय की गई तिथि पर ही गर्भवती हुई हैं.

होटल ही उठाएगा ट्रिप का खर्चा

होटल के ऑफर के तहत महिला को 29 फरवरी को कंसीव करना होगा. 29 फरवरी को गर्भवती होने वाली महिला को 67 लाख रुपये का इनाम मिलेगा. इतना ही नहीं डॉक्टर की तरफ से अगर यह पुष्टि हो जाती है कि महिला 29 फरवरी को गर्भवती हुई है तो आपकी ट्रिप का खर्चा भी होटल की तरफ से ही उठाया जाता है.

येहूदा होटल की तरफ से यह ऑफर चार साल में एक बार दिया जाता है. यहां फरवरी में मेहमानों का आना शुरू होता है. होटल के मुताबिक ऐसे समय में हमारी बुकिंग 50 फीसदी तक फुल रहती है. भले ही इस डील को जीतने वाले कपल एक या दो ही होते हों, लेकिन अधिकांश रूम बुक होने से होटल को अच्छी कमाई होती है

राष्ट्रपति की कार पर नहीं होती नंबर प्लेट, वजह जानकर चक्कर आने लगेगा, खुल जाएगा राज

भारत में आपको प्रत्येक कार पर नंबर प्लेट नजर आएगी सिवाए कुछ गाड़ियों के। इसके बावजूद भारत सरकार ने इन्हें मान्यता दे रखी है। क्या आप जानते हैं कि ये कार किन लोगों के पास है..? चलिए जानते हैं इस रोचक सवाल का रोचक जवाब…

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि भारत में देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपाल और कई अन्य वीवीआईपी की कारों पर नंबर प्लेट नहीं होती है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिकविदेश मंत्रालय के पास भी ऐसी कारें हैं, जो बिना रजिस्ट्रेशन प्लेट के चलाई जाती हैं। पता हो कार पर नंबर प्लेट रजिस्टर्ड होती है जिससे कार के मालिक की पहचान आसानी से की जा सकती है।

आमतौर पर इन कारों का इस्तेमाल विदेशी महमानों को लाने और ले जाने के लिए होता है और उन्हें इन्हीं कारों में बैठाकर घुमाया भी जाता है। भारत में एक ओर जहां वीवीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए गाड़ियों से लालबत्ती को हटाया गया तो वहीं भारत में अब भी ब्रिटिशों द्वारा बनाया गया यह नियम मान्य हैं।

यही वजह है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपाल और कई वीवीआईपी कारों पर रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट नहीं होती। वैसे माना ये भी जाता रहा है कि सुरक्षा के लिहाज से वीवीआईपी की कारों पर नंबर प्लेट नहीं होती है।

ऐसे ढोईं गईं ट्रकों से भारी-भरकम मशीनें, देखते रह जाएगे आप

आपने अक्सर सड़कों पर को ट्रक से ढोते हुए देखा होगा। लेकिन, कभी-कभी यह नजारा हैरतअंगेज भी हो जाता है, क्योंकि इन ट्रकों का साइज उस पर लदी मशीनों की तुलना में काफी छोटा होता है। ट्रकों द्वारा सबसे ज्यादा वजन ढोने का रिकॉर्ड सबसे पहले लंदन में बना था,

जब सितंबर, 2013 में एक ट्रक से 650 टन वजनी ट्रांसफॉर्मर को सरे सिटी से विक्टोरिया डॉक्स तक लाया गया था। इसके बाद कई रिकॉर्ड बने और टूटते चले गए, लेकिन अब यह रिकॉर्ड सऊदी अरब की लॉजिस्टिक कंपनी के नाम है,

जिसके ट्रकों ने 4,800 टन वजनी वाटर डिसैलिशन मशीन लेकर करीब 20 किमी का सफर तय किया था। आज हम आपको ट्रकों द्वारा ढोईं गईं भारी-भरकम मशीनों की कुछ ऐसी ही फोटोज दिखा रहे हैं, जिसे देखकर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे।

फोटोज में देखें कैसे ट्रकों पर ढोए गए ये भारी भरकम सामान…

स्विटरजरलैंड की पनालपिना लॉजिस्टिक कंपनी ने इस 570 टन वजनी पेट्रोकेमिकल मशीन को लेकर करीब 60 किमी का सफर तय किया था।

160 पहियों का यह ट्रक जब एक रॉकेट शटल को लेकर कैलिफोर्निया से गुजरा तो इसी फोटोज खींचने के लिए हजारों लोगों की लाइन लग गई थी।

अमेरिका की युमा सिटी में विशाल 520 टन वजनी माइनिंग ट्रक को ले जाता हुआ एक ट्रक।

अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर से सैटर्न वी-अपोलो रॉकेट को लॉन्चिंग पैड तक एक ट्रक से ले जाया गया था।

साल 2013 में 640 टन वजनी, 328 फीट लंबे और 16 फीट चौड़े ट्रांसफॉर्मर को एक ट्रक से डिडकोट पावर स्टेशन से एक ट्रक पर लोड किया गया था।

अमेरिका के इदाहो नेशनल लेबोरेटरी से दो हीट ट्रांसफर रिएक्टर एक ट्रक से ले जाया गया था।

बेलारूस की मिंस्क सिटी से करीब 1050 टन वजनी माइनिंग मशीन को ले जाता हुआ ट्रक।

सितंबर, 2012 में सऊदी अरब की लॉजिस्टिक कंपनी के नाम है, जिसके ट्रकों ने 4,800 टन वजनी वाटर डिसैलिशन मशीन लेकर करीब 20 किमी का सफर तय किया था।

यहां सरकार सोने के लिए दे रही है 22 करोड़ रुपए,

जापान दुनिया एक ऐसा देश जहां लोग इतना ज्यादा काम करते हैं कि उन्हें नींद पूरी करने के लिए भी पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है। ये एक बड़ी वजह है कि जापान इस समय भी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बना हुआ है।

बता दें कि जापान की सरकार की ओर से जारी ‘डेथ फॉर ओवरवर्क’ पर जारी किए गए वाइट पेपर के मुताबिक पिछले कुछ सालों में ऐसा होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की हालत खराब हो गई है।

यहां वर्कर्स करते हैं फुल टाइम जॉब

यहां आधे से ज्यादा वर्कर्स फुल टाइम जॉब करते हैं। इन वर्कर्स का कहना है कि उनके पास पर्याप्त नींद लेने का समय भी नहीं है।सरकार की ओर से जारी किए गए वाइट पेपर के मुताबिक यहां बहुत कम रेस्ट पीरियड के लिए कोई कानून नहीं है।

इस समस्या को लेकर सरकार ने एक सर्वे किया। इस सर्वे में करीब 1700 कंपनियों में से सिर्फ 2 फीसदी कंपनियां ही ऐसी मिलीं जो मिनिमम रोजाना रेस्ट पीरियड देती हैं। इनके अलावा बची हुई कंपनियां ऐसा नहीं करतीं।

सरकार ने निकाला इसका तोड़

वहीं अब जापान सरकार ने इसका तोड़ निकाला है। उपाय ये है कि जापान की सरकार ने करीब अगले वित्त वर्ष के लिए 22 करोड़ रुपए पूरी तरह से अलग रख दिए हैं। इस रकम को छोटी और मिडिल क्लास कंपनियों को मिनिमम रेस्ट पीरीयड अपनाने वाले प्रोग्राम को बढ़ावा देने में दिए जाएंगे।

इस प्रोग्राम के तहत सरकार हर कंपनी को 5 लाख येन (करीब 30 लाख रुपए) देगी। सरकार ऐसा इसलिए करेगी ताकि कंपनी कर्मचारी नियमों, ट्रेनिंग और सॉफ्टवेयर को अपडेट कर सके। इससे उनकी कॉस्ट भी कम होगी और कर्मचारियों को भी आराम मिल सकेगा।

ये है दुनिया का सबसे मोटा कपल, प्यार की खुमारी में की ऐसी गलती कि मिनी ट्रक बराबर हो गया वजन

अमेरिका के मिसोरी में एक ऐसा कपल रहता है जिनका वेट मिलाकर एक मिनी कार के बराबर है। जी हां, 42 साल के ली और 39 साल की उनकी पार्टनर रेना का टोटल वेट 1256lbs (करीब 600kg) है। हैरानी की बात ये है की दोनों एक वेट लॉस क्लीनिक में एक दूसरे को दिल दे बैठे थे। लेकिन एक गलती ने इनकी जिंदगी बर्बाद कर दी। 10 साल पहले हुई थी मुलाकात…

 
  • ली औ रेना की मुलाकात लगभग दस साल पहले एक वेट लॉस क्लीनिक में हुई थी। दोनों अपने बढ़ते वजन से परेशान थे और इसे कम करने के लिए डॉक्टर्स के चक्कर काट रहे थे। हालांकि, तभी इनकी लाइफ में एक टर्निंग प्वाइंट आया।
  • क्लीनिक में मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और उन्हें प्यार हो गया। प्यार की खुमारी में दोनों ने वेट लॉस प्रोग्राम बीच में ही छोड़ दिया, जो उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुआ।

  • देखते-देखते दोनों का वजन बिजली की रफ्तार से बढ़ा। ली 324kg के और रेना 246kg की हो गईं। इससे इनका उठना-बैठना भी मुश्किल हो गया।
  • दोनों का मोटापा इस कदर बढ़ गया है कि इनकी जान पर खतरा बन गया है। ली अब बिस्तर पर ही पड़े रहते हैं। वहीं उनकी पार्टनर की हालत भी ठीक नहीं है। दोनों का ख्याल ली की बहन रख रही हैं।

हाल ही में एक टीवी चैनल पर इस कपल की लाइफ को दिखाया गया है। दोनों को इस बात का बेहद अफसोस है कि वे खुद का ख्याल भी नहीं रख सकते। अब अपने हाल पर हमें दया आती है, हमने खुद के साथ ऐसा क्यों कर लिया। अब सर्जरी से ही हमारी जान बच सकती है।