ये भारत की ट्रेन जिसमें बैठने के लिए हमें लोन ही लेना पड़ेगा !

कभी आपने फाइव स्टार जैसी ट्रेन में सफर किया है ? वैसे तो आपने ट्रेनों में फर्स्ट क्लास से लेकर थर्ड क्लास एसी तक में सफर किया होगा और वहां की सुविधाएं देखी होंगी, लेकिन अगर आपने भारत की सबसे लग्जरी ट्रेनों में सफर नहीं किया है तो उनके बारे में एक बार जान लीजिए.

ये ट्रेन किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं हैं. रॉयल ट्रेन में पैलेस ऑन व्हील्स, महाराज एक्सप्रेस, डेक्कन ओडिसी, रॉयल राजस्थान, गोल्डन चैरियॅट शामिल हैं. इसमें एक और ट्रेन जुड़ने जा रही है और वो है तेजस एक्सप्रेस… जून में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ये ट्रेन सेवा शुरू की जाएगी.

तेजस ट्रेन

मॉडर्न फैसिलिटी वाली पहली तेजस एक्सप्रेस ट्रेन जून से मुंबई और गोवा के बीच दौड़ेगी. इसके पैसेंजर्स को सेलिब्रिटी शेफ द्वारा तैयार व्यंजन खाने को मिलेंगे. ट्रेन में टी और कॉफी वेंडिंग मशीनें होंगी. हर सीट पर LCD स्क्रीन के अलावा वाई-फाई सुविधा भी होगी.

ट्रेन के 20 कोच इन फैसिलिटी से लैस होंगे. खास बात यह है कि ये देश की पहली ट्रेन होगी जिसके सभी कोच में ऑटोमेटिक डोर क्लोजिंग के साथ ही सुरक्षित गैंगवेज (डिब्बों के बीच के कॉरिडोर्स) होंगे. एग्जीक्यूटिव क्लास और चेयर कार वाली तेजस एक्सप्रेस में कैटरिंग सर्विस राजधानी और शताब्दी ट्रेनों की तरह होगी.

इसके कोच में 22 नए फीचर्स हैं, इनमें आग और धुएं का पता लगाने वाला और उन्हें रोकने वाला सिस्टम भी शामिल है. इस ट्रेन के किराए का अभी तक कोई ऐलान नहीं हुआ है.

आइए अब जानते हैं इंडिया की सबसे लग्जरी ट्रेनों के बारे में….

पैलेस ऑन व्हील्स

भारत में सबसे पहले 26 जनवरी 1982 को पहली लग्जरी ट्रेन दिल्ली से शुरू की गई थी वो थी ‘पैलेस ऑन व्हील्स’. उस समय लग्जरी ट्रेनों में एकमात्र यही ट्रेन थी जो विदेशी सैलानियों को भी बहुत लुभाती थी. 23 कोच की इस शाही रेलगाड़ी में 14 सैलून, एक स्पा कोच, दो महाराजा-महारानी रेस्टोरेंट औप एक रिसेप्शन कम बार कोच हैं. इसमें 104 पर्यटक राजसी अंदाज में यात्रा कर सकते हैं.

यह ट्रेन सात दिनों में सैलानियों को राजस्थान के प्रमुख पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थलों के साथ ही विश्व प्रसिद्ध आगरा के ताजमहल की भी सैर करवाती है. यह गाड़ी अपना सफर दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से प्रत्येक बुधवार को शुरू कर जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर और आगरा होते हुए अगले बुधवार को दिल्ली पहुंचती है. इस ट्रेन का किराया अक्टूबर से मार्च में सीजन होने के कारण 3 लाख 63 हजार है. वहीं अप्रैल से सितंबर में इस ट्रेन का किराया 2 लाख 73 हजार होता है.

महाराजा एक्सप्रेस

दुनिया में कई लक्जरी ट्रेनें चलती हैं, उनमे से एक महाराजा एक्सप्रेस है. यात्रियों के लिए महाराजा एक्सप्रेस में 14 केबिन हैं. इसमें 5 डीलक्स केबिन, 6 जूनियर सूएट, 2 सुईट और एक मैजेस्टिक प्रेसिडेंशियल सुईट हैं. 23 बोगी वाली इस ट्रेन में 88 यात्री सफर कर सकते हैं. महाराजा एक्सप्रेस मे मयूर महल और रंग महल नाम के दो रेस्टोरेंट और बार की भी सुविधा है. इसके अलावा हर केबिन व सुईट में फोन से लेकर इंटरनेट व अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं.

महाराजा एक्सप्रेस में यात्रा के लिए कई पैकेज उपलब्ध हैं. यह ट्रेन दिल्ली से चलकर आगरा, फतेहपुर सीकरी, ग्वालियर, रणथंभौर, वाराणसी, लखनऊ, जयपुर, बीकानेर, खजुराहो व उदयपुर स्टेशन पर रुकती है. यात्री इन ऐतिहासिक स्थानों को देखकर रात का सफर ट्रेन में करते हैं. इस ट्रेन का किराया 1 लाख 93 हजार से लेकर 15 लाख 75 हजार तक है.

डेक्कन ओडिसी

कई सालों के प्रयास के बाद इस ट्रेन की शुरुआत 16 जनवरी, 2004 को हुई थी. ये ट्रेन महाराष्ट्र के खास स्थानों पर जाती है- मुंबई, सिंधुदुर्ग, गोवा, कोल्हापुर, दौलताबाद, चंद्रपुर, अजंता गुफाएं और नासिक. हर स्टेशन या स्टॉपेज एक खास तरह का पर्यटन स्थल है.

इस ट्रेन में कुल 21 डिब्बे हैं. 21 में से 11 डिब्बे यात्रियों के रहने के लिहाज से बनाए गए हैं और बाकी के डिब्बों में डाइनिंग, लॉन्ज, कॉन्फ्रेंस और स्पा की व्यवस्था की गई है. सभी डिब्बों में महाराष्ट्र की सदियों पुरानी अलग-अलग समय की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है.

यात्रियों की सुविधा के लिए इस ट्रेन में राजशाही साजो-सज्जा को बिना क्षति पहुंचाए हुए आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं. इस ट्रेन का इंटीरियर काफी महंगा और दुर्लभ है. हर एक डिब्बे में इंटरनेट और एयर कंडीशनिंग जैसी सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं. इस ट्रेन का किराया 3 लाख 71 हजार से लेकर 8 लाख 5 हजार तक है.

रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स

ट्रेन में इंडियन और इंटरनेशनल ब्रांडों के स्प्राइट्स और वाइन की सुविधा है जो इसे लग्जरी बनाते हैं. इसमें यात्रियों को भारतीय फूड्स के साथ यूरोपीय, चाइनीज और कॉण्टिनेण्टल खाना सर्व किया जाता है. रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स को सन् 2009 में लॉन्च किया गया था.

इसे पैलेस ऑन व्हील्स 2 भी कहते हैं. ये पैलेस ऑन व्हील्स का अपग्रेड वर्जन है. इस ट्रेन में पैलेस ऑन व्हील्स के मुकाबले ज्यादा जगह है. इस ट्रेन का किराया 3 लाख 78 से लेकर 7 लाख 56 हजार तक है.

गोल्डन चैरियट

ये साउथ इंडिया की लग्जरी ट्रेन है. जो बेंगलुरू से होते हुए लैसूर के रास्ते गोवा तक का सफर तय करती है. 7 दिन के अंदर ये यात्रा पूरी होती है. इस ट्रेन का हर कोच किसी ना किसी रियासत के नाम पर रखा गया है. इसके साथ ट्रेन में दो रेस्त्रा और एक बार भी है. साथ ही इस ट्रेन में जिम और कॉन्फ्रेंस हॉल की भी फैसिलिटी है.

गोल्डन चैरियॅट का किराया- 1,62,000 भारतीयों के लिए, 2,85,000 विदेशियों के लिए (भारतीयों की तुलना में 40% ज्यादा)

ये हैं भारत के 25 बेस्ट जुगाड़,ध्यान से देखें आपके भी काम आ सकते हैं

जुगाड़ ये शब्द सुनते ही हर किसी के मन में पहला सवाल यही आता है कि यार बस जुगाड़ लग जाये, तो काम बन जायेगा. जहां टेक्नोलॉजी नहीं है, वहां हर काम जुगाड़ से ही होते हैं. वैसे अपनी पहुंच से बाहर वाले किसी काम को जुगाड़ से चुटकी में कर लेना ये हम भारतीयों के बाएं हाथ का काम है.

हमारे आधे से ज़्यादा काम तो जुगाड़ से ही चलते हैं. भले ही आज दुनिया ने तरक़्क़ी कर ली हो, लेकिन आज भी हम किसी काम को समय से पहले ख़त्म करने के लिए कोई न कोई जुगाड़ बना ही लेते हैं. दुनिया में अगर कभी जुगाड़ के मामले में कोई प्रतियोगिता होती है, तो सारे अवॉर्ड्स हिंदुस्तान के नाम ही होते.

आईये आज हम भी आपके लिए कुछ ऐसे ही जुगाड़ लाये हैं, जिन्हें अपनाकर आप भी अपने किसी काम को आसान बना सकते हैं.

  • अपने मॉडम पर एल्युमीनियम फ़ॉइल लपेट देने से इंटरनेट स्पीड पहले से कहीं बेहतर हो जाती है.

  •  ट्रैफ़िक सिग्नल पर सबसे जल्दबाज़ी में होते हैं बाइक वाले. लेकिन गर्मी से बचने के इस जुगाड़ के आगे हार मान गए.

  • कॉफ़ी बनाने के इस जुगाड़ टेक्नोलॉजी के सामने, तो सिलिकॉन वैली के इंजीनियर्स भी पानी भरते हैं.

  • कम हाइट वालों के लिए ये ‘मेक इन इंडिया जुगाड़’ ज़बरदस्त है.

  • जुगाड़ तो सही है, लेकिन साइकिल वाले भाईसाहब को ये नहीं पता कि चोर दोनों उठा कर ले जायेगा.

  • कूलर में कोई नहीं घुसा है. एक कूलर से दो कमरों में ठंडी हवा पहुंचाने का ये नायाब तरीका आपने पहले कभी नहीं देखा होगा.

  • लैपटॉप का इससे अच्छा इस्तेमाल और क्या हो सकता है.

  •  यात्रीगण कृपया ध्यान दें. ये भारतीय रेल है इसे अपनी ही सम्पति समझें.

  • कौन कहता है कि जनरल बोगी में AC नहीं चलता.

  • अब आप ही बताइये चोरी करने वाला ताला तोड़ेगा या शीशा?

  • वाह! रमेश बाबू , बस का मज़ा साइकिल में, सही है.

  • गर्मी के मौसम में ये कूलर आपको ठंडक देगा.

  • कंपनी वालों से बोला था कि बच्चे के लिए आगे एक सीट लगाने को, नहीं लगाओगे तो यही करना पड़ेगा.

  • अब मच्छरों की ख़ैर नहीं, सब टल्ली रहेंगे पूरे दिन और हम चैन से सो पाएंगे.

  • भैया धूप बहुत तेज़ है, कहीं काला हो गया तो?

  • आधा स्कूटर और आधा रिक्शा… ऐसे जुगाड़ सिर्फ़ इंडिया में ही हो सकते हैं.

  • अगर आपके पास कोई पुराना फ़ोन है, तो आप भी बना सकते हैं उसे कैमरा.

  • सच्चे दोस्त आपको कभी चेयर की कमी नहीं महसूस होने देंगे.

  • शुद्ध देशी अंदाज़ वाला डीआरएस, अंपायर की ज़रूरत ही नहीं है बाबा!

  • गर्मी बहुत है इस साल, सोचा थोड़ा ठंड का मज़ा ही ले लूं.

  • कोल्ड्रिंक तो ठंडी ही पीने का मन करता है.

  • ये है इंडियन-इंग्लिश पॉट.

  • बाइक कंपनी ने भी नहीं सोचा होगा कि बाइक क्या-क्या काम कर सकती है.

  • बैचलर्स लाइफ़ का ये जुगाड़ सही था बॉस.

  • एक AC से मां और बीबी दोनों ख़ुश.

11 तरीके से बजाया जाता हैं ट्रेन का हॉर्न,

फिल्म ‘दोस्त’ में किशोर कुमार का गाया हुआ गाना ‘गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है’ तो आपको याद ही होगा। जी हां आपने रेलगाड़ी में सफर तो जरुर किया ही होगा, तो आपने ट्रेन के सीटियों की आवाज भी जरुर सुनी होगी,

लेकिन क्या कभी आपने ट्रेनों के इस सीटियों पर गौर किया है। नहीं ना, तो चलिए हम आपको बताते हैं रेल गाड़ियों के हॉर्न का मतलब। जिस तरह ट्रेनों के रंगों का मतलब होता है। ट्रेनों पर लिखे नंबर या चिन्हों का मतलब होता है, ठीक वैसे ही ट्रेनों के हॉर्न का भी मतलब होता है।

1.एक शॉर्ट हॉर्न

शॉर्ट हॉर्न कुछ सेकेंड के लिए ही होता है। अगर ऐसा हॉर्न आपको सुनाई दे तो समझिए वह गाड़ी यार्ड में जा रही है। वहां अगले सफर के लिए इसकी साफ-सफाई की जाती है।

2. दो शॉर्ट हॉर्न

रेलवे में दो शॉर्ट हॉर्न तो आपने जरूर सुना होगा। इसका मतलब ट्रेन चलने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह हॉर्न यात्रियों के लिए वार्निंग भी होती है क्योंकि अगर कोई शख्स ट्रेन के बाहर या इधर-उधर है, तो इस हॉर्न से उसे ट्रेन के चलने का पता चल जाता है।

3. तीन शॉर्ट हॉर्न

इसे हम इमरजेंसी हॉर्न भी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल रेलवे में बहुत कम ही किया जाता है। तीन शॉर्ट हॉर्न केवल मोटर मैन ही बजाता है। इसका मतलब होता है कि लोको पायलट इंजन से अपना कंट्रोल खो चुका है। लोकोपायलट इस हॉर्न से गार्ड को संकेत देता है वह वैक्यूम ब्रेक से ट्रेन को रोके।

4. चार शॉर्ट हॉर्न

ट्रेन चलते हुए अगर रुक जाती है और चार बार शॉर्ट हॉर्न बजता है तो इसका मतलब इंजन में खराबी आने के कारण गाड़ी आगे नहीं जा सकती या फिर आगे कोई दुर्घटना हो गई है।

5. एक लंबा और एक शॉर्ट हॉर्न

एक लंबे और एक शॉर्ट हॉर्न का मतलब होता है कि मोटरमैन, गार्ड को संकेत दे रहा है कि इंजन स्टार्ट होने से पहले वह ब्रेक पाइप सिस्टम को चेक कर ले।

6. दो लंबे और दो शॉर्ट हॉर्न

अगर मोटरमैन दो लंबे और दो शॉर्ट हॉर्न बजाता है तो लोको पायलट गार्ड को इंजन पर बुलाने का संकेत दे रहा है

7. लगातार लंबा हॉर्न

अगर ट्रेन का ड्राइवर लगातार लंबा हॉर्न बजाता है तो इसका सीधा मतलब होता है कि वह ट्रेन प्लेटफॉर्म पर नहीं रुकेगी यानी ट्रेन गंतव्य के लिए सीधा जाएगी।

8. रुक-रुक कर दो बार हॉर्न

दो बार रुक- रुक हॉर्न बजाने का मतलब आने-जाने वालों या गुजरने वालों को संकेत दिया जाता है कि ट्रेन रेलवे क्रॉसिंग से गुजरेगी। अब कभी अगली बार किसी क्रॉसिंग के पास खड़े होने का मौका आए तो गौर जरुर करिएगा।

9. दो लंबे और एक शॉर्ट हॉर्न

इस तरह का हॉर्न रेलवे की इंटरनल कार्यप्रणाली के दौरान बजाया जाता है। अगर आपके ट्रेन में सफर करने के दौरान दो लंबा और एक छोटा हॉर्न बजे तो समझिए कि ट्रेन ट्रैक चेंज करने वाली है।

10. दो शॉर्ट और एक लंबा हॉर्न

अगर ड्राइवर की ओर से दो शॉर्ट और एक लंबा हॉर्न दिया जा रहा है तो इसका मतलब है किसी ने ट्रेन की इमरजेंसी चैन खीचीं है या फिर गार्ड ने वैक्युम ब्रेक लगाया है।

11. छह बार शॉर्ट हॉर्न

इंजन के लोकोपायलट की तरफ से इस तरह का हॉर्न कम ही बजाया जाता है। ऐसा हॉर्न ड्राइवर तब बजाता है जब उसे किसी खतरे का आभास होता है।

जिस चीज के लिए भिड़े अमेरिका और चीन, भारत में मिलती है 40 रु किलो

ट्रेड को लेकर अमेरिका और चीन के बीच छिड़ी जंग तेज होती जा रही है। इस बार चीन ने अमेरिका के एक्शन का 24 घंटे के भीतर जवाब दिया और अमेरिका से आने वाले 106 प्रोडक्ट्स पर अतिरिक्त 25 फीसदी ड्यूटी वसूलने का ऐलान किया। चीन के इस पलटवार के बाद अमेरिका एक अपने प्रोडक्ट को लेकर खासा बौखला गया है। हैरत की बात यह है कि भारत में यह प्रोडक्ट महज 40 रुपए किलो की कीमत पर मिलता है।

भारत में महज 40 रु किलो मिलता यह प्रोडक्ट

हम यहां सोयाबीन की बात कर रहे हैं, जिसकी कीमत भारत में वायदा बाजार में लगभग 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल यानी 40 रुपए किलो है। इस पर चीन ने 25 फीसदी अतिरिक्त ड्यूटी वसूलने का ऐलान किया है। इस खबर से अमेरिका के किसानों और सोया फार्मिंग से जुड़े तबके में हड़कंप मच गया। इसका असर अमेरिका में सोयाबीन के रेट पर भी दिखा और इसकी कीमतों में लगभग 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

इस मसले पर यूएस सोयाबीन एक्सपोर्ट काउंसिल के चाइना डायरेक्टर ने कहा कि चीन की यह कार्रवाई दुखद है और इससे ट्रेड इम्बैलेंस की समस्या दूर नहीं होगी।

24 घंटे के अंदर उठाया कदम

बता दें कि यूएस ने चीन से इंपोर्ट होने वाले उन प्रोडक्ट्स की लिस्ट जारी की है, जिन पर 25 फीसदी की दर से अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव किया गया था। जिसके 24 घंटे के भीतर ही चीन ने अपनी लिस्ट जारी की दी।

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि ने कहा कि प्रोडक्ट्स की यह लिस्ट अलग-अलग एजेंसियों के बीच आर्थिक विश्‍लेषण के बाद तैयार की गई है। इसमें चीन के उन प्रोडक्ट्स को शामिल किया गया है, जिन्हें चीन की औद्योगिक योजना से फायदा मिल रहा है। इनका अमेरिका की इकोनॉमी पर कम से कम असर होगा।

US ने इन चीनी प्रोडक्ट की लिस्ट जारी की

अमेरिका ने जिन प्रोडक्ट्स की लिस्ट जारी की है, उनमें एविएशन, टेलिकम्युनिकेशंस, रोबोटिक्स और मशीनरी जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। इनमें 13000 के करीब प्रोडक्ट शामिल हैं। इनकी लिस्ट सार्वजनिक तौर पर जारी कर उस पर लोगों से कमेंट मांगे जाएंगे। जरूरत पर सुनवाई भी होगी। प्रॉसेस पूरा हो जाने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का कार्यालय ऐसे प्रोडक्ट्स की अंतिम लिस्ट जारी कर देगा, जिन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।

ऐसा कोई कोना नहीं, जिसे हमने छोड़ा नहीं

एक बात तो सच है कि दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ, वहां आपको भारतीय ज़रूर मिल जायेंगे. अब हाल ही में अंतरराष्ट्रीय प्रवासी रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें भारत को पहला स्थान प्राप्त हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों में रहने वाले प्रवासियों में सबसे अधिक संख्या भारतीयों की है.

जारी किये गए आकंड़ों के मुताबिक, कुल 1.659 करोड़ भारतीयों में से आधे से ज़्यादा हिंदुस्तानी ऐसे हैं, जो खाड़ी देशों का हिस्सा हैं. इसका मतलब ये वो लोग हैं, जो भारत से बाहर निकल कर विदेशों में अपनी ज़िंदगी गुजर-बसर कर रहे हैं.

आइए जानते हैं कि किन देशों में कितने भारतीय निवास करते हैं:

2017 के मुकाबले भारतीय प्रवासियों की संख्या में वृद्धि हुई है. अगर आपको भारतीय प्रवासियों से जुड़ी ये जानकारी पसंद आई, तो हमें कमेंट में बता सकते हैं.

यहाँ एक शर्त पूरा करते ही किराए पर मिलेगी गर्लफ्रेंड

दरअसल दक्षिणी चीन के शहर हुआन में एक शॉपिंग सेंटर ने 15 लड़कियों को किराए पर उपलब्ध कराया है। वाइटैलिटी सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मुख्य द्वार पर आपको कई लड़कियां खड़ी मिल जाएंगी।

इनमें से आप जिसे चाहे चुन सकते हैं और बदले में उसके लिए सिर्फ 13.75 रुपये चुकाने होंगे।
महज 13.75 रुपये चुकाकर आप अपनी मनपसंद लड़की के साथ 20 मिनट तक बिता सकते हैं।

इस दौरान आप उसके साथ शॉपिंग, लंच या डिनर कर सकते हैं। इस शॉपिंग सेंटर का कहना है कि यह अगला सबसे बड़ा शॉपिंग ट्रेंड बनेगा।किराए की गर्लफ्रेंड के प्रति युवाओं में खासा क्रेज देखने को मिल रहा है।

शॉपिंग सेंटर की यह स्कीम कुछ उसी तरह की है जैसे कि हाइकु के फ्रेंडशिप कामर्शियल प्लाजा ने मात्र 13.75 रुपयों में एक घंटे के लिए छह बॉयफ्रेंड किराए पर उपलब्ध कराए थे।

जाने कैसे Viagra तालिबान के खिलाफ लड़ाई में बनी सबसे बड़ा हथियार

कुछ ही दिन पहले वियाग्रा 20 साल की हो गई. 27 मार्च 1998 के दिन वियाग्रा को अप्रूवल मिला था. फाइज़र कंपनी की इस दवा को टेंशन दूर करने के लिए बनाया गया था. लेकिन इसके ऐसे रोचक फायदे होने लगे कि ये दुनिया की सबसे चर्चित दवा बन गई. आज हम आपको बताते हैं इस हल्की बैंगनी रंग की गोली से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.

अमेरिका का दावा है कि आतंकी संगठन तालिबान को ख़त्म करने के लिए वियाग्रा की छोटी सी गोली बहुत कारगर साबित हुई. दरअसल तालिबान के खिलाफ जासूसी और मुखबिरी करवाने के लिए सीआईए ने कई अफगानों को वियाग्रा की रिश्वत दी जिससे खुश होकर उन्होंने मदद की.

वियाग्रा आधिकारिक तौर पर दुनिया की सबसे ज्यादा नकल की जाने वाली गोली है. असली दवा में एक पत्ते में 4 ही गोलियां ही होती हैं और इसका आकार हीरे की तरह होता है.वियाग्रा की एक खासियत है कि इसकी थोड़ी सी मात्रा का घोल बनाकर अगर पौधों में या फूलदान में रखे फूलों में दे दिया जाए तो फूल खिले रहते हैं और उनकी डंडियां भी तनी रहती हैं.

वियाग्रा सिफ शरीर पर असर करती है. लोगों के दिमाग और हार्मोन्स की कमी पर इसका कोई असर नहीं होता.वियाग्रा 80 फीसदी आदमियों पर असर करती है. डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों में इसका सकारात्मक असर देखा गया है. कुछ शुरुआती रिसर्च बताती हैं कि ये गोली कैंसर के इलाज में भी काम में आ सकती है.

ब्लेड के बीच बने ख़ास डिजाईन के पीछे है ये दिलचस्प कहानी

देखने में भले ही ब्लेड छोटी सी चीज़ हो पर होती बड़े काम की है। ये हमारे रोज के कामों में काफी अहम् भी है खासकर पुरुषों के लिए तो बेहद जरूरी है। शेविंग करने से लेकर बाल कटवाने तक के लिए ब्लेड का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ब्लेड के आविष्कार और उसके उत्पादन के पीछे बड़ी ही दिलचस्प कहानी है।

साल 1901 में जिलेट कंपनी के संस्थापक किंग कैंप जिलेट ने अपने के सहयोगी विल्लियम निकर्सन के साथ मिल कर ब्लेड को डिज़ाइन किया था। इसी साल इन्होने अपने नए ब्लेड के डिज़ाइन को पेटेंट कराया और साल 1904 में एक औद्योगिक रूप में ब्लेड का उत्पादन किया जाने लगा।

दुनिया में हर रोज लगभग 1 मिलियन के आस पास ब्लेड बनते है और हम लोग भी बचपन से ब्लेड को देखते आ रहे है। पर कभी किसी ने इस बात को ध्यान से नही सोचा की ब्लेड के बीच में खाली स्थान क्यों छोड़ा जाता है। परन्तु ये बात आज हम आपको बताने वाले है की ब्लेड के बीच में खाली स्थान क्यों छोड़ा जाता है।

1904 के समय जिलेट ने पहली बार 165 ब्लेड बनाये थे। उस समय ब्लेड कुछ इस तरह के थे की उनको शेविंग करने वाले जिलेट में बोल्ट के साथ फिट किया जा सकता था।

उस समय कोई भी कम्पनी ब्लेड बनाने के मैदान में नही थी। पूरी दुनिया में उस समय केवल जिलेट ही ब्लेड बनाया करती थी। कुछ समय बाद कम्पनी का यह बोल्ट वाला ब्लेड बनाने का तरीका फ़ैल हो गया। और अन्य कंपनी भी जिलेट की तरह ही ब्लेड बनाने लगी।

परन्तु उस समय शेविंग करने के रेज़र केवल जिलेट कंपनी के ही आते थे। और रेजर के अंदर इस तरह का भाग होता है जैसा ब्लेड के अंदर अब खाली रहता है इसीलिए ब्लेड की सभी कंपनी ने इस ही तरह के ब्लेड बनाने शुरू कर दिए। .

क्या आप जानते हैं कि शर्ट की कॉलर में 2 बटन और पीछे लूप क्यों होता है?

कोई जॉब हो या किसी इंटरव्यू के लिए जा रहे हों, शर्ट आपको एक बेहतर और प्रोफेशनल लुक देती है. हममें से बहुत से लोग होंगे जो रोजाना शर्ट पहनते होंगे. अगर आप भी शर्ट पहनते हैंं तो शायद आपने ध्यान दिया हो कि शर्ट के कॉलर में 2 छोटी-छोटी बटनें होती हैं.

इसी के साथ ही बहुत सी शर्ट्स में पीछे एक लूप भी होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ये दोनों चीजें क्यों होती हैं?

शर्ट में लूप में लूप की ये है वजह

पुराने समय की बात करें तो उस समय में लोगों के पास कपड़ें टांगने के लिए हेंगर या वॉर्डरोब नहीं हुआ करते थे. ऐसे में उनको अपने कपड़े हुक में टांगने होते थे. इसीलिए शर्ट में ये लूप बनाए जाते थे, ताकि शर्ट में हुक में आसानी से टांग दिया जाए और उस पर कोई रिंकल्स भी न आएं.

शर्ट में लूप लगाने की शुरुआत नाविकों ने की थी. ऐसा इस लिए कि जब वो कपड़े बदलते थे तो आसानी से कपड़ों को टांग देते थे. लेकिन धीरे-धीरे ये फैशन बन गया और लोगों के बीच काफी पॉपुलर हो गया. इस लूप का पहली बार इस्तेमाल अमेरिका में बने ऑक्सफोर्ड बटन डाउन शर्ट में साल 1960 में किया गया था. इसी के बाद से ही दूसरे अन्य ब्रांड्स ने इसे फॉलो करना शुरू कर दिया.

ये फैशन काफी समय तक पॉपूलर रहा, लेकिन वॉर्डरोब और हेंगर के आने के बाद ये सिर्फ ये डिजाइन बन कर ही रह गए.

कॉलर में 2 बटन की शुरुआत कहां से हुई?

कॉलर में लगी दो बटन्स को बटन डाउन कॉलर कहा जाता है. शर्ट में इस डिजाइन की शुरुआत Ivy League के पोलो खेल से हुई थी, ये एक खेल हैं जो घोड़ों पर बैठकर खेला जाता है.

पहले खेल के दौरान शर्ट का कॉलर खिलाड़ियों के चेहरे पर आ जाता था, जब खिलाड़ियों को इससे समस्या होती थी तो इसी के बाद बटन डाउन कॉलर शर्ट की शुरुआत हुई.

इस तकनी की मदद से कॉलर को खिलाड़ियों के चेहरे पर आने से रोका जा सकता था. तभी से ये बटन डाउन कॉलर काफी चलन में है. आज के समय में अगर आप टाई पहनते हैं तो ये आपके बड़ा काम आ सकता है, ये आपकी टाई को ठीक जगह पर रखता है.

ये है दुनिया की सबसे लंबी कार, 26 पहियों वाली इस कार का आकार कर देगा हैरान

इस दुनिया में शौकीन लोगों की कमी नही है, अपने शौक को पूरा करने के लिए कुछ लोग बहुत मेहनत भी करते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही शौकीन व्यक्ति के बारे में बता रहे हैं जिसने अपने शौक को पूरा करने के लिए दुनिया की सबसे लंबी लिमोजिन कार बनाई है।

दुनिया की सबसे लंबी कार

कैलीफोर्निया के कस्टम कार गुरु जे आर्हबर्ग ने दुनिया की सबसे लंबी कार बनाई है। जिसकी लंबाई 110 फीट है।

जी हां, कैलीफोर्निया के कस्टम कार गुरु जे आर्हबर्ग ने दुनिया की सबसे लंबी कार बनाई है। जिसकी लंबाई 110 फीट है। इस कार का नाम द अमेरिकन ड्रीम रखा गया है। 26 पहियों वाली इस कार का नाम द गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड्स में भी शामिल किया गया है।

इस कार की कीमत 27.1 करोड़ रुपए है। लंबाई के अलावा यह कार लग्जरी, स्टाइल और सेफ्टी के मामले में भी शानदार है। आपको बता दें कि इस कार के अंदर ही जकूजी, डाइविंग बोर्ड, किंग साइज वाटर बेड, लिविंग रूम और दो ड्राइवर रूम भी मौजूद है।

इस कार की खासियत है कि इसे सीधा या फिर बीच से मोड़ कर भी चलाया जा सकता है। इसे आगे या पीछे से भी ड्राइव किया जा सकता है। इस कार को कई फिल्मों में देखा गया है। यह कार दो हिस्सों में बंट जाती है और इन दो टुकड़ों में ट्रकों पर लादकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है। अपनी खास लंबाई और बनावट के कारण ये कार लोगों को आकर्षित करती है।