ये 4 फिल्में इतनी अश्लील थी कि सरकार ने लगा दिया बैन, YouTube पर आज भी धड़ल्ले से देखी जा रही हैं ये फिल्में

देश में कोई भी फिल्म रिलीज़ होने से पहले सरकार के सेंसर बोर्ड को दिखाई जाती है। सेंसर बोर्ड एक फिल्म को कई पैमानों पर जांचता है, ताकि उसमें कोई ऐसा कंटेंट न हो..जिससे समाज पर बुरा प्रभाव पड़े। फिल्म को धार्मिक, सामाजिक दृष्टि से परफेक्ट होने के साथ-साथ चरित्रवान भी होना बहुत ज़रूरी है।

जी हां, चरित्रवान से हमारा सीधा तात्पर्य फिल्म के चरित्र से है..कहने का मतलब ये कि फिल्म में अश्लील कंटेंट नहीं होना चाहिए। सेंसर बोर्ड आज के समय की सभी फिल्मों को उसके चरित्र के आधार पर बारीकी से जांच करता है।

आज हम आपको उन चार फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे सरकार के सेंसर बोर्ड ने तो बड़े पर्दे पर रिलीज़ नहीं होने दिया। लेकिन ये फिल्में YouTube पर आसानी से मिल जाती हैं, इतना ही नहीं लोग आज भी इन फिल्मों को बार-बार देख रहे हैं।

चार फिल्मों की लिस्ट में सबसे ऊपर है- Unfreedom. यह फिल्म साल 2015 में बनी थी, लेकिन सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को बैन कर दिया था। समलैंगिक रिश्तों पर आधारित इस फिल्म में अश्लील कंटेंट का भंडार था, जिसके चलते इसे बैन कर दिया गया।

इस लिस्ट में दूसरा नाम साल 2005 में बनी फिल्म Sins का है। यशराज बैनर की ये फिल्म एक पादरी के महिला के साथ संबंधों पर बनाई गई थी। अश्लीलता की वजह से बैन हुई यह फिल्म बिना रिलीज़ हुए ही हिट हो गई थी। उसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि विवादों में रहने के दौरान इस फिल्म के बारे में कई लोग जान चुके थे।

साल 2003 में आई फिल्म Paanch भी उन विवादित फिल्मों में से एक है, जिसमें सेंसर कट लगा-लगाकर इतना थक गया कि उसने इसे बैन ही कर दिया। हालांकि ये फिल्म अपनी अश्लीलता पर नहीं बल्कि अत्यधिक हिंसा और नशाखोरी की वजह से बैन हुई थी। फिल्म को अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया था।

2015 में एक फिल्म आई, जिसका नाम था The painted house. रिपोर्ट्स कहते हैं कि इस फिल्म को देखते ही सेंसर बोर्ड ने इसे तुरंत बैन कर दिया था। ये फिल्म एक बुज़ुर्ग शख्स और एक जवान लड़की के बीच संबंधों को लेकर बनाई गई थी।

 

जूते के डिब्बे और पानी की बोतल में अकसर क्यों दी जाती है ये छोटी सी पुड़िया, जाने पूरी सचाई

अकसर हम छोटी-मोटी चीजों को अनावश्यक समझकर अनदेखा कर देते हैं या फेंक देते हैं, लेकिन कभी-कभार ये चीजें इतनी काम की साबित होती है जिसके बारे में हम सोच तक नहीं सकते हैं। जूते के बॉक्स में या इस तरह की कई चीजों में जैसे कि किसी-किसी दवाईयों के डिब्बे में भी एक छोटा सा कागज का पाउच दिखाई देता है।

इन्हें छूने पर ऐसा लगता कि इसके अंदर नमक सरीखा कोई चीज भरी हों। हम जब भी जूता, बोतल या दवाईयों को खरीदते हैं तो डिब्बे में से कागज की इन दो पुड़िया को बाहर निकालकर फेंक देते हैं और नई खरीदी सामान को देखने या उसे यूज करने में बिजी हो जाते हैं।

हम इस बात को भूल जाते हैं कि इसे देने के पीछे जरूर कोई न कोई वजह तो अवश्य ही होगी। बता दें, इसे सिलिका जेल कहते हैं। यह नमीं को सोखने का काम करता है। अकसर हम इन्हें फेंक देते हैं, लेकिन अगली बार से इसे आप इकट्ठा कर लें और इसका उपयोग कुछ इस तरह से करें।

कई बार हमारा मोबाइल फोन पानी में गिर जाता है या बारिश में भींग जाता है। ऐसे में सबसे पहले मोबाइल की बैटरी को निकालकर उसे किसी सूखे कपड़े से पोंछ लें और इसके बाद एक पॉलीथिन में उस मोबाइल को रखकर उसमें सिलिका जेल के दो-चार पाउच डाल दें और प्लास्टिक को बंद कर एक या दो दिन के लिए वैसा ही छोड़ दें।

यह सिलिका मोबाइल के अंदर की सारी नमीं और गीलेपन को सोखकर इसे फिर से पहले जैसा कर देता है।  इसके साथ ही आप किचन में भी इसे यूज कर सकते हैं। ड्राई फ्रूट्स,मसालों या दाल, चना, बादाम जैसी चीजों को सूखा रखने के लिए और ज्यादा दिनों तक फ्रेश रखने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

यानि कि घर में पड़ी किसी भी चीज को नमीं से बचाने के लिए और उसे ज्यादा दिन तक ठीक रखने के लिए सिलिका जेल का कोई जवाब नहीं। अगर इन सारी बातों को जानने के बाद आपको इसे फेंकने पर पछतावा हो रहा है तो हम बता दें कि इसे आप चाहें तो आॅनलाइन आॅर्डर कर सकते हैं और अपनी डेली लाइफ का हिस्सा बना सकते हैं।

तो यह है निरमा वॉशिंग पाउडर के पैकेट पर बनी लड़की की तस्वीर की सच्चाई

वॉशिंग पाउडर निरमा का वो गाना लोग तब भी गुनगुनाते थे और आज भी यह सभी को याद है। आपने जरूर गौर फरमाया होगा कि निरमा वॉशिंग पाउडर के पैकेट पर एक लड़की सफेद फ्रॉक पहने नजर आती है, लेकिन क्या आपने कभी इस बात को जानने की कोशिश की है कि आखिर कौन है यह लड़की? क्या है इसके पीछे की सच्चाई? आइए जानते हैं।

बता दें, साल 1969 में गुजरात के करसन भाई ने निरमा वॉशिंग पाउडर की शुरुआत की थी। करसन भाई की एक बेटी थी जिससे वे बेहद प्यार करते थे। वैसे तो उनकी बेटी का नाम निरूपमा था, लेकिन प्यार से वे अपनी बिटिया को निरमा कहकर बुलाते थे। हर एक पिता की तरह करसन भाई भी अपनी बेटी को आंखों से ओझल नहीं होने देते थे, लेकिन किस्मत पर किसका वश चलता है।

एक दिन कहीं जाने के दौरान निरुपमा का एक्सीडेंट हो गया और उसकी मौत हो गई। इस घटना से करसन भाई इस कदर टूट गए कि उन्हें संभालना मुश्किल हो गया था। वे हमेशा से ही इस बात की ख्वाहिश रखते थे कि उनकी निरमा बड़ी होकर खूब नाम कमाए, लेकिन असमय निधन हो जाने से उनका यह ख्वाब पूरा नहीं हो सका, लेकिन वो इस बात को ठान चुके थे कि निरमा को वो अमर कर देंगे। उन्होंने निरमा वॉशिंग पाउडर की शुरुआत की और पैकेट पर निरमा की तस्वीर लगानी शुरू कर दी।

करसनभाई सरकारी नौकरी करते थे। हर रोज साइकिल से दफ्तर जाने के दौरान रास्ते में लोगों के घरों में निरमा वॉशिंग पाउडर बेचते रहते थे। अहमदाबाद में लोग एक बड़े स्तर पर अब निरमा को जानने लगे थे। तीन साल तक कड़ी मेहनत करने के बाद उन्होंने इस वॉशिंग पाउडर के फॉर्मूले को तैयार किया।

उन्होंने निरमा के लिए एक टीम का निर्माण भी किया जो आसपास के दुकानों में जाकर इस पाउडर को बेचते थे। अब समस्या आने लगी और वो ये कि ऐसे कई लोग थे जिन्हें करसनभाई उधारी पर माल दिया करते थे, लेकिन जब पैसे लौटाने की बारी आती तो दुकानदार एक लंबा चौड़ा बहाना बता देता था। इससे करसनभाई को घाटा होने लगा था।

एक दिन उन्होंने एक टीम मीटिंग बुलाकर इस बात की घोषणा कर दी कि,बाजार में जितने भी निरमा के पैकेट हैं उन सभी को वापस ले आओ। टीम को लगा कि करसनभाई अब हार मान चुके हैं, निरमा अब जल्द ही बंद होने वाला है, लेकिन करसनभाई के दिमाग में कुछ और ही दौड़ रहा था। वो अब विज्ञापनों में निवेश करने का फैसला ले चुके थे।

निरमा का विज्ञापन एक बहुत ही शानदार जिंगल के साथ टीवी पर आने लगा। देश भर में रातोंरात निरमा ने लोगों का ध्यान आकर्षित कर लिया। ‘वॉशिंग पाउडर निरमा’ यह गाना लोगों की जुबां पर चढ़ गया। निरमा अब केवल गुजरात के अहमदाबाद में ही नहीं बल्कि देश में अपनी पहचान बना चुका था।वाकई में निरमा को अमर बनाने का उनका सपना पूरा हो गया।

जानें क्या होगा अगर खुल जाएं उड़ते हुए जहाज का दरवाजा ?

क्या आपने कभी इस बात की कल्पना की है कि अगर उड़ते हुए जहाज का दरवाजा खुल जाए तो क्या होगा? हम यह बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कुछ दिनों पहले एक हवाई यात्रा के दौरान रांची के एक पैसेंजर ने ऐसा करने की कोशिश की थी.

हालांकि बाद में फ्लाइट के Crew Members ने उसे ऐसा करने से रोक दिया और उसे पुलिस के हवाले भी कर दिया. आइये जानते हैं कि क्या कभी उड़ते हुए हवाई जहाज का दरवाजा खुल सकता है? अगर खुल भी जाए तो क्या इससे हमे घबराने की वाकई में जरूरत है?

क्या सच में खुल सकते हैं Plane के दरवाजे-

सरे यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड बर्च की माने तो कम उंचाई पर ही जहाज के दरवाजे खुल सकते हैं. उनका कहना है कि जैसे ही दरवाजे का लीवर 90 डिग्री की स्थिति में आता है वैसे ही पायलट को यह पता चल जाता है कि प्लेन का दरवाजा खुल गया है.

बर्च आगे कहते हैं कि जहाज के दरवाजे बहुत ही high Pressure के साथ बंद करने के लिए डिज़ाइन किये जाते हैं और जहाज के अन्दर केबिन का दबाव आमतौर पर समुद्र की सतह पर हवा के दबाव की तुलना में बहुत कम होता है. इस वजह से यह प्रेशर लॉक अधिक ऊंचाई पर ही काम करना शुरू करते हैं. इसलिए कम ऊंचाई पर प्लेन के दरवाजों को खोला जा सकता है, ज्यादा उंचाई पर नहीं.

क्या सच में हैं घबराने की जरूरत-

जहाज का दरवाजा सिर्फ कम ऊंचाई पर ही खुल सकता है. इस स्थिति में इतना घबराने की जरुरत नहीं होती क्योंकि कम उंचाई पर केबिन के अन्दर ऑक्सीजन की कमी नहीं होती और यात्रियों को ऑक्सीजन मास्क की भी जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन इस स्थिति में जहाज के अन्दर तेज हवाएं जरूर चलती हैं और बहुत अधिक शोर भी होता है.

इस वजह से प्लेन के अन्दर का तापमान धीरे-धीरे कम होने लगता है. हालांकि बर्च आगे कहते हैं कि तापमान शून्य या उसके नीचे नहीं पहुंच सकता. ऐसी स्थिति में पायलट Emergency की घोषणा करता है और फ़ौरन ही Cabin के भीतर हवा के दबाव को कम करने का प्रयास करने लगता है.

इस शख्स का नहीं था ये अंग, फिर भी 100 से ज्यादा लड़कियों से बना डाले संबंध

कई लोगों को जन्म से कुछ ऐसी बीमारियां होती हैं, जिससे उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाती है। क्या आप सोच सकते हैं कि कोई बिना पेनिस (लिंग) के पैदा हुआ हो? और वह सेक्स का मजा भी ले रहा हो। कई मामलों में ऐसा होता है, हालांकि इस तरह के मामले बहुत कम होते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही मामले के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

दरअसल, ये मामला इंग्लैंड के ग्रेटर मैनचेस्टर शहर के रहने वाले एंड्रयू वार्डल का है। दुर्भाग्य से एंड्रयू का जन्म से ही पेनिस (लिंग) नहीं था। जिस वजह से वह सेक्स करने में सक्षम नहीं थे, लेकिन डॉक्टर्स ने एक सक्सेसफुल सर्जरी के बाद एंड्रयू को नया प्राइवेट पार्ट  लगा दिया।

डॉक्टरों ने बताया कि एंड्रयू को जन्म से ही ‘ब्लेडर एक्स्ट्रोफी’ की एक दुर्लभ बीमारी थी। ये ऐसी बीमारी है जो कई करोड़ लोगों में किसी एक को होती है। इस बीमारी को ‘एक्टोपिया वसाइक’ के नाम से भी जाना जाता है। इस बीमारी के कारण शरीर में प्राइवेट पार्ट डेवलप नहीं हो पाता है।

लंदन के एक हॉस्पिटल में एंड्रयू की एक खास सर्जरी हुई, जिससे एंड्रयू के शरीर में आर्टिफिशियल या बायोनिक पेनिस लगाया गया। एंड्रयू के शरीर में अंडकोष तो थे, लेकिन प्राइवेट पार्ट नहीं था। जिसके बाद एक के बाद एक हुई कई सर्जरियों के बाद उसे ये प्राइवेट पार्ट (बायोनिक लिंग) लगाया गया। सर्जरी के बाद अंग ठीक से काम कर रहा है या नहीं इसके लिए उसे 10 दिन तक हॉस्पिटल में भी रहना पड़ा। साथ ही उसे सेक्स करने के लिए 6 हफ्तों का इंतजार करने को कहा गया।

खास बात ये है कि डॉक्टर्स ने उसके इस नए अंग को उसी के शरीर की स्किन का इस्तेमाल करते हुए ही बनाया। करीब 10 घंटे तक चली इस सर्जरी के लिए शख्स को 50 हजार पाउंड (करीब 47 लाख रुपए) खर्च करने पड़े। प्राइवेट पार्ट (बायोनिक पेनिस) लगने के बाद एंड्रयू ने हंगरी की रहने वाली 28 साल की अपनी गर्लफ्रेंड फेडरा फेबियन के साथ पहली बार फिजिकल रिलेशन भी बनाया। आखिरकार एंड्रयू ने भी 45 साल की उम्र में पहली बार अपनी गर्लफ्रेंड फेडरा फेबियन के साथ सेक्स करके वर्जिनिटी खोई। एंड्रयू का फर्स्ट सेक्स सेशन 30 मिनट तक चला।

हालांकि इस बारे में एंड्रयू की गर्लफ्रेंड फेडरा फेबियन ने बताया कि बॉयोनिक पेनिस से सेक्स अद्भुत था। एंड्रयू का पेनिस को उत्तेजित करने के लिए नमकीन तरल पदार्थ के साथ फुलाए जाने के बावजूद नॉर्मल दिखता है।

हालांकि फिजिकल रिलेशन बनाने से पहले एंड्रयू को इरेक्शन के लिए एक बटन दबाना पड़ता है, जो उसके पेट और जांघ के बीच में लगा हुआ है। इसके बाद उसके अंडकोष से एक वॉल्व के जरिए सलाइन फ्लूड उसके प्राइवेट पार्ट में जाता है और करीब 20 मिनट के लिए वहां इरेक्शन हो जाता है। इस अंग के लगने के बाद एंड्रयू का कहना है कि नया अंग मेरे अंडकोष से जुड़ा हुआ है, इसका मतलब ये है कि मैं एक दिन पिता भी बन सकता हूं।

हैरानी की बात ये थी कि एंड्रयू को 10 दिन तक लगातार इरेक्शन के साथ छोड़ दिया गया। हालांकि इरेक्शन के दौरान 10 दिन तक एंड्रयू को कोई दर्द नहीं हुआ। साथ ही एंड्रयू को सलाह दी गई कि वे ऑपरेशन के बाद 6 सप्ताह तक सेक्स ना करें। अब 45 साल के एंड्रयू सेक्स करने में सक्षम हो गए हैं, यानी उसके शरीर से बॉयोनिक पेनिस जोड़ दिया गया है। एंड्रयू ने एक टीवी शो के दौरान माना कि उनका सौ से भी ज्यादा महिलाओं के साथ संबंध रहे हैं, लेकिन महिलाएं उनके इस रहस्य को कभी जान नहीं पाती थीं।

पैदल चलने वालों को अधिक ब्याज देता है यह बैंक, कम से कम 10000 कदम रोज

सिर्फ पैदल चलकर भी कमाई हो सकती है, सुनने में अटपटा लगता है। लेकिन ऐसा हो रहा है। पैदल चलने वालों को एक बैंक जमा पैसे पर अधिक ब्याज देता है। लेकिन इस कमाई के लिए रोजाना कम से कम 10,000 कदम चलने होंगे। इससे कम चलने पर अधिक ब्याज नहीं दिए जाएंगे।

बैंक अपने ऐप से इसको चेक कर लेता है, लेकिन बेईमानी करने वालों को सजा भी दी जाती है। उनकी ब्याज दर को कम कर दिया जाता है। इस बैंक का नाम मोनो बैंक है जो यूक्रेन स्थित है। इस बैंक की स्थापना तीन साल पहले हुई थी। अभी इसके ग्राहकों की संख्या 5 लाख से अधिक है।

ऐसे किया जाता है काम

इस पहल के तहत ग्राहकों को स्मार्टफोन में एक हेल्थ ऐप डाउनलोड करना पड़ता है। यह उनकी शारीरिक गतिविधियों की मॅानिटरिंग करता है। ऐप का डाटा बैंक के पास रहता है। इस तरह बैंक देख सकता है कि उसके ग्राहक कितना पैदल चलते हैं।

बेइमानी करने पर ब्याजदर घटा दी जाएगी

बैंक को अगर लगता है कि ग्राहक इसमें किसी प्रकार की बेइमानी कर रहा है तो दंड के तौर पर उनके जमा खाते पर ब्याज दर कम कर देता है। मोनोबैंक के अनुसार, रोजाना 10 हजार कदम चलने पर ग्राहकों के बैंक बचत खाते पर 21 फीसदी ब्याज देता है।

इस दौरान अगर कोई लगातार तीन दिन 10,000 से कम चलता है तो उसे सिर्फ 11 फीसदी ब्याज दर मिलती है। इस बैंक के करीब 50 फीसदी ग्राहक 21 फीसदी की दर से ब्याज ले रहे हैं।

दिल की बीमारी से मरने वालों की दर में यूक्रेन दूसरे नंबर पर है

बैंक की पहल के पीछे बड़ी वजह यह है कि बैंक पैदल चलने को प्रोत्साहित करना चाहता है। ब्रिटेन की तरह यूक्रेन में मोटापे की बीमारी बढ़ रही है। दिल की बीमारी से मरने वालों की दर में यूक्रेन दूसरे नंबर पर है। यहां हर एक लाख लोगों में 400 की मौत दिल की बीमारी से हाेती है। यही वजह है कि मोनो बैंक ने इस नेक पहल को शुरू किया है।

मौत के बाद व्यक्ति को ऐसे पता चलता है कि वो मर चुका है, आसपास की सारी चीजों का होता है अहसास

दुनिया का अंतिम सत्य यानी मौत और इससे के बाद क्या होता है ये एक अनसुलझी पहेली है। लेकिन साइंटिस्ट्स लगातार मौत के बाद होने वाली चीजों के बारे में जानकारी जुटाने में लगे हुए। एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जब एक व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो मौत के बाद उसे अपनी मृत्यु का पता चलता है। इसके पीछे साइंटिस्ट्स ने दिमाग की कार्यप्रणाली का हवाला दिया है। मृत शरीर में रहती है चेतना…

लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक जब किसी की मौत होती है, उसके बाद भी कुछ समय तक उसका दिमाग चलता रहता है। यानी शरीर से प्राण निकल जाने के बाद भी शरीर को अहसास होता रहता है। इसी वजह से व्यक्ति समझ जाता है कि उसकी मृत्यु हो गई है। अगर वो हॉस्पिटल में है तो वो डॉक्टर द्वारा उसे मृत घोषित करते हुए भी सुन सकता है। दिमाग चलने का मतलब उसका पूरी तरह फंक्शन करना नहीं बल्कि चेतना का होना है।

दिल की धड़कन रुकने पर भी रहती है चेतना

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जब दिल की धड़कन ठहर जाती है, तब शरीर के सारे अंग काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन दिमाग में चेतना रहती है। इसका मतलब ये कि मृत व्यक्ति कुछ समय के लिए अपने दिमाग में कैद हो जाता है। ये बहुत कम समय के लिए होता है।

हार्ट अटैक के पेशेंट हैं इस बात का सबूत

रिपोर्ट में कहा गया है कि बात का सबूत वो लोग हैं जो मृत होकर वापस जिंदा हो गए। इसमें हार्ट अटैक के पेशेंट ज्यादा हैं। डॉक्टर्स ने बतया कि पहले ऐसे पेशेंट्स को मृत मान लिया गया था। उनका हार्ट रुक गया था, डॉक्टर्स ने जैसे-तैसे उन्हें बचा लिया, तो कुछ अपने आप जिंदा हो गए। जिंदा होने के बाद पेशेंट्स को वो सारी बातें याद थीं, जो उनके आसपास डॉक्टर्स कर रहे थे। यानी उनमें चेतना थी।

क्या ग्रीन टी पीना वाक़ई ख़तरनाक हो सकता है ?

जो लोग कुछ समय पहले तक कुल्हड़ में मलाई मारकर चाय पीते थे उन्होंने सेहत के नाम पर अपना स्वाद बदल लिया. चुस्कियों की जगह ‘सिप’ ने ली और ये सब हुआ, सिर्फ़ और सिर्फ़ सेहत के नाम पर.

ग्रीन टी के इतने फ़ायदे गिनाए गए कि लोगों ने इसे सेहतमंद रहने के लिए ज़रूरी समझ लिया और घरों में चीनी-दूध का आना कम हो गया. लेकिन अब सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता देवेकर के एक वीडियो ने सेहत के फ़िक्रमंद लोगों को असमंजस में डाल दिया है.

करीना कपूर और आलिया भट्ट जैसी फिटनेस आइकन को सेहतमंद रखने वाली रुजुता का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है.इस वीडियो में रुजुता कह रही हैं “ग्रीन टी उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो ग्रीन टी के बिज़नेस में हैं. बाकी आप लोगों के लिए, आप की सेहत के लिए, एंटी-ऑक्सीडेंट के लिए और आपकी ख़ूबसूरती के लिए कड़क-अदरक वाली चाय ही अच्छी है.”

रुजुता के इस वीडियो ने लोगों को कन्फ़्यूज़ ज़रूर कर दिया है. अब कोई फ़िटनेस ट्रेनर ऐसा बोले तो डरना बनता है.वो भी कोई ऐसी-वैसी नहीं बल्कि सेलीब्रिटीज़ को फ़िट रखने वाली न्यूट्रीशनिस्ट. जिस चाय को दुनिया ‘दवा’ मानकर पीती है, वो ‘नुकसान देह’ कैसे हो सकती है?

अगर ग्रीन टी के इतिहास पर नज़र डालें तो ग्रीन टी का इतिहास पांच हज़ार साल पुराना है.चीन में इसका इस्तेमाल सबसे पुराना है.

चाय चाहे कोई भी हो, वो ब्लैक टी हो, ग्रीन टी हो या कोई सी भी और वो कैमेलिया साइनेसिस पौधे से मिलती है. यह पौधा किस तरह के वातावरण में उगा है, पत्तियां किस तरह से चुनी गई हैं और फिर उन्होंने किस तरह से प्रोसेस किया गया है, इस पर ही चाय की किस्म निर्धारित होती है.

कैसे तैयार होती है ग्रीन टी?

अगर ग्रीन टी तैयार की जानी है तो इसे छाया में उगाना होगा. इसके ऊपर जाली लगानी होगी. ताकि सूरज की रोशनी कम होने पर इसकी पत्तियाँ ज़्यादा क्लोरोफिल पैदा करेंगी. सूरज की रौशनी कम होने पर चाय के पौधे में पॉलीफिनॉल नाम का केमिकल भी कम निकलता है, जिससे चाय में हल्का कसैला स्वाद आता है. वैसे कुछ लोगों को ये स्वाद ही पसंद आता है.

चाय की पत्तियां और कलियाँ तोड़कर पहले इन्हें सुखाया जाता है. इन्हें कितना सुखाया जाएगा, ये इस बात पर तय होता है कि किस तरह की चाय आपको चाहिए. ग्रीन टी बनानी है तो पत्तियों को सिर्फ़ एक दिन सुखाकर उन्हें भाप में पकाया जाता है.

अगर चाय की पत्ती को कुछ दिन सुखाकर उसे हल्का सा तोड़कर भाप में उबालकर ब्लैक टी तैयार होती है. यही चाय दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाती है. कुल चाय की खपत का 78 फ़ीसद ब्लैक टी होती है. इस चाय को काफ़ी दिनों तक सुखाया जाता है. फिर इसकी पत्तियाँ हल्की सी तोड़कर भाप में पकाई जाती हैं.

ग्रीन टी के घटकों की बात करें तो इसमें 15 फ़ीसदी प्रोटीन, 4 फ़ीसदी अमीनो एसिड, 26 फ़ीसदी फ़ाइबर, 7 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 7 प्रतिशत लिपिड, 2 फीसदी पिग्मेंट्स, 5 प्रतिशत मिनरल्स, 30 फ़ीसदी फ़ेनोलिक कंपाउंड्स होते हैं. ये प्रतिशत ड्राई ग्रीन टी के हैं.

इन आंकड़ों को देखकर तो ये कह पाना मुश्किल है कि ग्रीन टी पीने के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं लेकिन कुछ अध्ययन ऐसे भी हैं जिनमें ग्रीन टी से जुड़े होने वाले नुकसान भी बताए गए हैं. लेकिन ये नुकसान ग्रीन टी की मात्रा पर निर्भर करता है.

वेबमेड वेबसाइट के मुताबिक, ग्रीन टी का इस्तेमाल मुख्यतौर पर तो सुरक्षित ही होता है लेकिन कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें ग्रीन टी पीने से लोगों को पेट से जुड़ी परेशानी हो गई. कुछ लोगों ने इसकी वजह से लीवर और किडनी से जुड़ी परेशानी की बात कही है.

ग्रीन टी का इस्तेमाल तभी नुकसानदेह होता है जब ये बहुत अधिक मात्रा में लिया जाता है और ये नुकसान इसमें मौजूद कैफ़ीन की वजह से होता है. इसकी वजह से सिरदर्द, नर्वसनेस, सोने में दिक़्क़त, उल्टी, डायरिया की शिकायत हो सकती है.

जिन लोगों को एनीमिया की शिकायत है, उन्हें ग्रीन टी पीते समय ख़ास ख़्याल रखना चाहिए. इसके अलावा जिन लोगों को एंक्ज़ाइटी डिस्ऑर्डर हो, ब्लीडिंग डिस्ऑर्डर हो, दिल से जुड़ी परेशानी हो, डायबिटीज़ हो उन्हें ग्रीन टी बेहद संतुलित मात्रा में लेना चाहिए.

अब भिड़ेंगे दुनिया के दो सबसे ताकतवर इंसान, जानिए इनकी कद-काठी एवं और जानकारी

जल्द ही दुनिया के दो सबसे खतरनाक इंसान माने जाने वाले लोगों के बीच एक फाइट होने जा रही है। एक ओर इरान में रहने वाला रियल लाइफ हल्क साजाद गारीबी हैं, तो वहीं दूसरी ओर दुनिया में सबसे खौफनाक इंसान के नाम से मशहूर बॉडीबिल्डर मार्टिन फोर्ड।

दोनों की ये फाइट एमएमए के एक मैच में होने जा रही है। हम आपको बता रहे हैं दुनिया के इन दो सबसे ताकतवर कहे जाने वाले बॉडीबिल्डर्स के बारे में।

इससे बड़ा शरीर देखा नहीं होगा…

आपने हाइट के मामले में दुनिया में एक से एक लोग देखे होंगे पर साजाद गारीब की हाइट के साथ-साथ शरीर की इतनी चौड़ाई है कि एक कार उनके सामने छोटी लगती है। 26 साल के इस बॉडी बिल्डर का शरीर इतना भीमकाय है कि लोग उसे कॉमिक्स केरेक्टर और द हल्क मूवी के किरदार से जोड़कर देखते हैं।

खुद के लिए बनवाना पड़ा ट्रक

ये बॉडीबिल्डर अब सोशल मीडिया सिलेब्रिटी बन चुका है। इन्हें इरानियन हल्क भी कहा जाता है। साजाद बचपन से ही हट्टे-कट्टे थे, उन्होंने अपनी इसी बात का फायदा उठाते हुए वेट लिफ्टिंग शुरू की। देखत-देखते उनका शरीर हल्क की तरह भीमकाय हो गया।

हालांकि अपनी ऐसी बॉडी की वजह से साजाद पर्सनल लाइफ में कई शौक पूरा नहीं कर पाते। उन्हें कार में बैठने में काफी परेशानी होती है। किसी तरह बैठ भी गए तो निकलने में दिक्कत होती है। इसलिए उन्होंने घूमने के लिए एक ट्रक बनवाया, जिसमें वे आसानी से बेठ जाएं।

मार्टिन फोर्ड, जिससे खौफ खाते हैं लोग

इरानियन हल्क के बाद दुनिया में जिसे सबसे खतरनाक आदमी कहा जाता है, वो है मार्टिन फोर्ड। मार्टिन की हाइट 7 फीट और वजन 145kg है। अच्छे-अच्छे पहलवान भी इन्हें देखकर कांप जाते हैं। इसलिए उन्हें मसल माउंटेन, नाइटमेयर और मॉन्स्टर भी कहा जाता है।

इंस्टाग्राम पर इनके लाखों फॉलोअर हैं। लेकिन मार्टिन फोर्ड की पॉपुलैरिटी की वजह सिर्फ उनकी बॉडी नहीं है। लोग उनके ट्रांसफॉर्मेशन के कारण उन्हें चाहते हैं और उनसे इंस्पायर होते हैं। मार्टिन अभी 35 साल के हैं। लेकिन 20 साल की उम्र तक वे एकदम दुबले-पतले फाइटर थे।

किसकी होगी जीत?

इन दोनों सुपरबॉडी बिल्डर्स के बीच अब होने वाली फाइट को लेकर सोशल मीडिया में डिबेट छिड़ी हुई। दोनों बेहद ताकवर हैं और जीत किसकी होगी कहा नहीं जा सकता। एमएमए जल्द ही इस फाइट की तारीख घोषित करने वाली है।

दिन में इस समय होती हैं सबसे ज्यादा मौतें, यह है इसके पीछे का कारण

साइंटिस्ट्स ने एक रिसर्च में दावा किया है कि दिन में एक घंटा ऐसा होता है, जिसमें दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। ये रिसर्च कई साइंटिफिक और पैरानॉर्मल एक्टिविटीज पर आधारित है। वहीं कुछ लोग इसे धर्म और अंधविश्वास से जोड़कर भी देखते हैं।

दुनियाभर के साइंटिस्ट्स मौत के बारे में रिसर्च करने में लगे हुए। एक ऐसी ही रिसर्च है Witching Hour। इसके मुताबिक सबसे ज्यादा मौतें रात के 3 से 4 बजे होती है। इसके पीछे कई खौफनाक तर्क दिए गए हैं।

इस वक्त हावी होती हैं बुरी शक्तियां…

वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया है कि दिन के समय की अपेक्षा रात में तड़के सुबह तीन से चार के बीच ज्यादातर मौतों के मामले सामने आते रहे हैं। साइंटिफिक रिसर्च कहती है कि इस दौरान इंसानी शरीर सबसे ज्यादा कमजोर होता है।वहीं पैरानॉर्मल एक्सपर्ट्स के मुताबिक दिन के इस घंटे में नेगेटिव एनर्जी सबसे ज्यादा ताकवर होती हैं।

धार्मिक मान्यताएं के अनुसार भी ये वक्त खतरनाक

दुनिया की कई संस्कृतियों और धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से रात का तीसरा पहर बहुत खतरनाक माना जाता है। तीसरा पहर यानि रात तीन से सवेरे छह बजे के बीच का वक्त। क्रिस्चन थ्योरिस्ट्स इसे Devil Hour यानी दैत्य का वक्त मानते हैं।

कहा जाता है कि इस वक्त भूत-प्रेत और बुरी शक्तियां सबसे ज्यादा ताकतवर होती हैं और लोंगों की मौत का कारण बनती हैं। सनातन धर्म में भी कहा जाता है कि सूर्य उदय के पहले मध्य रात्रि तक बुरी शक्तियां ताकवर होती हैं।

क्या कहता है मेडिकल साइंस

मेडिकल साइंस की कुछ बातें इस दावे को सपोर्ट करती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक रात के कई पहर के दौरान इंसानी शरीर में कुछ ऐसी गतिविधियां होती हैं, जो उसे कमजोर करके रिस्क में डाल देती हैं।

जैसे दिन की अपेक्षा रात में अस्थमा अटैक का खतरा ज्यादा होता है। इसका कारण बताया जाता है कि इस वक्त एड्रेनेलिन और एंटी-इंफ्लेमेटरी हार्मोंस बहुत घट जाते हैं जिससे हमारे सांस लेने की प्रक्रिया में बाधा आ जाती है।

इसके अलावा रात के नौ बजे हमारे शरीर का ब्लड प्रेशर सबसे ज्यादा होता है और ठीक छह घंटे बाद यानी तीन बजे सबसे कम। ऐसी स्थिति में भी अटैक से मौत होने की संभावना दिन की अपेक्षा कई गुना ज्यादा होती है।