डीजल या पेट्रोल, अपने लिए चुनें कौन सी कार? एक्सपर्ट से समझिए

पेट्रोल और डीजल की कीमतें डी-रेग्युलेट होने के बाद इनके बीच का अंतर लगातार कम होता जा रहा है। देश के चार बड़े महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में महज 10 रुपये प्रति लीटर का फर्क है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि फिर डीजल गाड़ियां खरीदना कितना फायदे का सौदा रह गया है?

क्योंकि डीजल गाड़ियां एक तो महंगी होती हैं और लंबे समय में इनकी सर्विस का खर्चा भी पेट्रोल गाड़ियों से ज्यादा होता है। अपनी इस खबर में हम आपको एक्सपर्ट की मदद से यह बता रहे हैं कि आप कार खरीदते समय यह कैसे चुने कि पेट्रोल कार लेना आपके लिए फायदे का सौदा है या डीजल।

क्या कहते हैं ऑटो एक्सपर्ट?

ऑटो एक्सपर्ट रंजॉय मुखर्जी का मानना है कि नई कार अगर खरीद रहे हैं और आपका रोज का अप-डाउन 50 किलीमीटर है तो आपके लिए पेट्रोल इंजन वाली कार ही बेहतर होगी। वहीं, अगर आप रोजाना 50 से 100 किलोमीटर का सफर करते हैं तो आपके लिए डीजल विकल्प सही रहेगा।

आसान शब्दों में समझिए नोएडा में रहने वाला कोई खख्स अगर दिल्ली में नौकरी करता है और उसके घर से ऑफिस की दूरी तकरीबन 25 किलोमीटर है तो ऐसे में उसकी कार रोज 50 किलोमीटर ही चलती है। अगर वह शख्स 25 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देने वाली डीजल कार खरीदता है तो उसकी कीमत करीब 6.40 लाख रुपये होगी। दिल्ली में इस वक्त डीजल के दाम 63.82 रुपये प्रति लीटर है, यानी रोजाना शख्स उस कार में दो लीटर डीजल फूंकेगा जिसकी कीमत 127.64 रुपये होगी। इस हिसाब से महीने का खर्च 3829 रुपये आएगा।

अगर यही शख्स डीजल कार ना खरीदते हुए नॉर्मल पेट्रोल कार खरीदता है तो उसकी कीमत 5.40 लाख रुपये होगी जो कि डीजल वेरिएंट से करीब 1 लाख रुपये सस्ती है। इस वक्त दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 72.96 रुपये है और पेट्रोल कार 50 किलोमीटर का सफर तय करने में ढाई लीटर पेट्रोल फूंकेगी, जिसका रोजान खर्च 182 रुपये होगा। यानी महीने में पेट्रोल कार चलाने वाले व्यक्ति को 5472 रुपये खर्च करने होंगे। यह डीजल कार की तुलना में 1643 रुपये ज्यादा हैं।

अगर आप इन 1 लाख रुपये को 5 साल के लिए 10 फीसद सालाना ब्याज दर के हिसाब से फाइनेंस भी कराते हैं तो आपकी मासिक किश्त करीब 2500 रुपये रुपये पड़ेगी, जो कि डीजल कार में हर महीने बच रहे 1643 रुपये से भी ज्यादा है। इतना ही नहीं, कार खरीदने के बाद पेट्रोल कारों के मुकाबले डीजल कारों का मेंटीनेंस भी थोड़ा महंगा साबित होता है। हालांकि ऑटो एक्सपर्ट मानते हैं कि नई टेक्नोलॉजी के चलते यह अब बराबर होता जा रहा है।

पुरानी गाड़ी खरीदने के लिए डीजल या पेट्रोल इंजन में से कौन बेहतर?

रंजॉय मुखर्जी ने बताया कि अगर आप 5 साल पुरानी गाड़ी भी खरीद रहे हैं तो उसमें भी पेट्रोल विकल्प ही चुनें क्योंकि डीजल कार भले ही पेट्रोल वेरिएंट से थोड़ी सस्ती मिल जाए मगर वह गाड़ी काफी ज्यादा चली होती है। इतना ही नहीं पुरानी डीजल गाड़ियों का पेट्रोल के मुकाबले मेंटेनेंस भी ज्यादा होता है और पेट्रोल गाड़ियों में आने वाले समय में CNG किट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

खुशखबरी! अब RC के लिए RTO के चक्कर लगाने का झंझट खत्म, ये रही ऑनलाइन प्रोसेस

अब पुरानी कारों को बेचना आसान हो जाएगा और यह प्रक्रिया पहले से ज्यादा पारदर्शी हो जाएगी. दिल्ली के रोड ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) ने आरसी के ट्रांसफर की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है. इस प्रक्रिया के तहत अब कस्टमर्स अपनी पुरानों कारों को आसानी से बेच सकेंगे. आरसी ट्रांसफर करने के लिए उन्हें आरटीओ को बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

ऐसे ऑनलाइन ट्रांसफर होगी आरसी

आरसी को ऑनलाइन करने की इस प्रक्रिया के तहत अब गाड़ी बेचने वाले को सबसे पहले ऑनलाइन अपने व्हीकल का चैजिंग नंबर भरना होगा. इसके बाद विक्रेता को ऑनलाइन ही फॉर्म 28 ओर 30 भरना होगा. इस प्रक्रिया को पूरा करते ही एक ऑनलाइन फॉर्म जनरेट हो जाएगा जिसका प्रिंट आउट निकालर दोनों पक्षों को उसपर हस्ताक्षर करने होंगे.

डाक के जरिए भेज सकते हैं कागजात, नहीं लगाने पड़ेंगे आरटीओ के चक्कर

इसके बाद फॉर्म के प्रिंट आउट के साथ दूसरे डॉक्यूमेंट जैसे की पॉल्यूशन सर्टिफिकेट,इंश्योरेंस, एड्रेस व पहचान पत्र और ऑरिजन आरसी को अटैच करना होगा. इन डॉक्यूमेंट को प्रिंट आउट फॉर्म के साथ अटैच करने के बाद इसे आरटीओ ऑफिस भेजना होगा.

ये सारे डॉक्यूमेंट पोस्ट के जरिए आरटीओ ऑफिस भेजने होंगे. इस तरह गाड़ी खरीदने वाले ग्राहक और बेचने वाले विक्रेता को आरसी ट्रांसफर करने के लिए बार-बार आईटीओ ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेगे.

अगर इस प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी होती है तभी एप्लीकेंट को आरटीओ ऑफिस जाना पड़ेगा नहीं तो आरसी को स्पीड पोस्ट के जरिए गाड़ी खरीदने वाले के घर पर भेज दिया जाएगा.

बि‍ना पानी के ऐसे साफ करें अपनी कार, ये है आसान तरीका

कई ऑटोमोबाइल कंपनि‍यां अपने सर्वि‍स सेंटर्स में गाड़ी को साफ करने के लि‍ए वारटलेस कार वॉश सि‍स्‍टम को अपना रही हैं। हाल ही में मर्सडीज बेंज ने भारत में वाटरलेस कार वॉश सॉल्‍यूशन को शुरू कि‍या है।

मर्सडीज बेंज ने भारत में ‘क्‍वि‍क एंड क्‍लीन’ प्रोडक्‍ट्स को लॉन्‍च कि‍या है। इससे पहले मारुति‍ सुजुकी इंडि‍या, ह्युंडई और नि‍सान ने अपने सर्वि‍स सेंटर में वाटरलेस कार वॉश सि‍स्‍टम को शुरू कि‍या था।

हालांकि‍, आप खुद भी अपनी कार को बि‍ना पानी के साफ कर सकते हैं। यहां आपको बता रहे हैं कि‍ कैसे आप यह काम कर सकते हैं। इसकी खास बात यह है कि‍ इससे पानी की बचत के साथ-साथ समय की भी काफी बचत होती है।

क्‍या है वाटरलेस कार वॉश

वाटरलेस कार वॉश वह तरीका है जहां आप ‘वाटरलेस वॉश सॉल्‍यूशन’ को अपनी कार पर स्‍प्रे करते हैं और साफ कपड़े से उसे सुखाते हैं। इससे न केवल पानी की बचत होती है बल्‍कि‍ आपके समय की भी काफी बचत होती है। ध्‍यान रहे कि‍ इस प्रोसेस का इस्‍तेमाल केवल हलकी और मीडि‍यम स्‍तर की गंदी कारों पर ही कि‍या जाना चाहि‍ए।

कि‍न चीजों की जरूरत

एक वाटरलेस कार वॉश सॉल्‍यूशन, एक कार डस्‍टर और 2 से 3 माइक्रोफाइबर कपड़ों की जरूरत पड़ती है। मार्केट में कई सारे वारटलेस कार वॉश प्रोडक्‍ट्स मौजूद हैं। एक स्‍प्रे बोतल के तौर पर और दूसरे कॉन्‍सनट्रेट्स के तौर पर।

आमतौर पर कॉन्‍सनट्रेट्स वाले सॉल्‍यूशन को खरीदने पर पैसे की बचत हो जाती है। आपको इसे मैन्‍युफैक्‍चरर्स द्वारा कि‍ए गए नि‍र्देशों के हि‍साब से एक स्‍प्रे बोतल में इसे पानी के साथ मि‍लना होता है।

पहले करें डस्‍टर का यूज

वाटरलेस वॉश सॉल्‍यूशन को यूज करने से पहले अच्‍छी क्‍वालि‍टी के कार डस्‍टर से कार को साफ करें। इससे धुल से पेंट खराब होने या स्‍क्रैच पड़ने का खतरा कम हो जाता है।

एक के बाद एक पैनल को साफ करें

वाटरलेस वॉश लि‍क्‍वि‍ड तेजी से सूखता है। इसलि‍ए आपको कार के एक पैनल साफ करने के बाद दूसरे पैनल पर जाना चाहि‍ए। आप कार की बॉडी पर स्‍प्रे करने के तुरंत बाद साफ कर दें। इसके बाद दूसरी जगह पर समान प्रोसेस करें।

कपड़े को ऐसे न घूमाएं

वाटरलेस वॉश सॉल्‍यूशन को स्‍प्रे करने के बाद सीधी लाइन में हलके प्रेशर के साथ पोछें यानी माइक्रोफाइबर कपड़े से साफ करें। कपड़ा कि‍तना साफ है इसपर ध्‍यान देते रहें। अगर वह गंदा हो गया है तो कपड़े की दूसरी तरह से साफ करना शुरू करें। कपड़े को गोल-गोल घूमाने से धुल वापस लौटकर आ सकती है।

यह प्रोसेस भी अपनाएं

कार के हर पैनल को सूखे हुए माइक्रोफाइबर कपड़े के साथ साफ भी करें। यह प्रोसेस आपको अपनी पूरी कार के साथ करना होगा।

पहि‍यों को साफ करना न भूलें

पहि‍यों के लि‍ए भी यही समान प्रोसेस है। एक बार में केवल एक ही पहि‍ए को साफ करें। क्‍योंकि‍ कार का सबसे गंदा हि‍स्‍सा पहि‍या ही होता है इसलि‍ए इसे हमेशा अलग माइक्राफाइबर कपड़े से साफ करें।

5 लाख की कार सिर्फ 60 हजार में, ये है इंडिया का सस्ता सेकंड हैंड कार मार्केट

यदि आप कार खरीदना चाहते हैं, लेकिन बजट किसी बाइक की कीमत के बराबर भी नहीं है, तब भी इसे खरीद सकते हैं। दरअसल, इंडिया में कई जगहों पर सेकंड हैंड कार के मार्केट हैं।

जहां पर लाखों की कार हजारों में मिल जाती है। ऐसा ही एक मार्केट दिल्ली के करोल बाग पर है। यहां से सेकंड हैंड मारुति वैगनआर को सिर्फ 60 हजार में खरीद सकते हैं। बता दें, कि वैगनआर के टॉप मॉडल की ओनरोड प्राइस 5 लाख 6 हजार रुपए है।

यहां पर हैं ये मार्केट

दिल्ली में सेकंड हैंड बाइक का सबसे बड़ा मार्केट करोल बाग पर हैं। जो जल बोर्ड के पास है। यहां पर मारुति से लेकर महिंद्रा, फोर्ड, हुंडई, वोक्सवैगन समेत कई ब्रांड की कार मौजूद हैं। देखने में इन कार की कंडीशन बेहतर होती है।

यानी इन पर किसी तरह का डेंट नहीं होता और ये चमचमाती नजर आती हैं। कार का मॉडल जितना पुराना होगा, उतनी ज्यादा उसकी प्राइस कम होगी। यानी 2005 मॉडल वाली वैगनआर को 60 हजार में खरीदा जा सकता है।

फाइनेंस की सुविधा भी मौजूद

सेकंड हैंड कार के इस मार्केट में हमने S.S.S Ji Car Bike & Properties डीलर से बात की। तब उन्होंने बताया कि यहां पर सेकंड हैंड कार 60 हजार से मिलना शुरू हो जाती हैं।

वहीं, इस अमाउंट को फाइनेंस भी कराया जा सकता है। कार के साथ उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी दिया जाता है। यानी इन कार में किसी तरह के फ्रॉड होने की संभावना नहीं होती। वैसे, कार की प्राइस पर आप बारगेनिंग भी कर सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

यदि आप इस मार्केट में कार खरीदने जाने वाले हैं तब इस बात का ध्यान रखें की आपको कार के सभी पार्ट्स की नॉलेज हो। खासकर, कार के इंजन में खराबी हो सकती है। साथ ही, कोई पार्ट नकली भी हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप किसी कार एक्सपर्ट या मैकेनिक को साथ लेकर जाएं।

नोट – खबर में दिखाई जा रही कार की कीमत इस मार्केट में कम-ज्यादा भी हो सकती है। इतना ही नहीं, जो कीमत दिखाई जा रही है आप बारगेनिंग करके उससे भी कम कीमत पर खरीद सकते हैं।

आधे दाम पर बि‍क रही हैं बोलेरो से होंडा सि‍वि‍क तक, ये है यूज्‍ड कारों की लि‍स्‍ट

इंडि‍यन ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री में नई कारों से ज्‍यादा यूज्‍ड कारों का वॉल्‍यूम है। ऐसा इसलि‍ए क्‍योंकि‍ लोग अपनी कारों के मॉडल्‍स को आजकल ज्‍यादा जल्‍द और तेजी से बदल रहे हैं। खासतौर से लोग हैचबैक की जगह सेडान या एसयूवी कारों को चलाना ज्‍यादा पसंद कर रहे हैं।

हालांकि‍, एसयूवी का बजट ज्‍यादा होने की वजह से इसे खरीदना मुश्‍कि‍ल हो जाता है लेकि‍न सेकंड हैंड मार्केट इस मुश्‍कि‍ल को काफी हद तक आसान बना देती है। इन कारों को 25 फीसदी से 50 फीसदी कम दाम पर खरीदा जा सकता है।

कहां से खरीद सकते हैं सर्टि‍फाइड यूज्ड कारें

सेकंड हैंड के ऑर्गेनाइज्‍ड प्‍लेयर्स जैसे ड्रूम, कारदेखो के अलावा टोयोटा के टोयोटा ट्रस्‍ट, महिंद्रा के फस्‍ट च्‍वाइस और मारुति‍ सुजुकी इंडि‍या के ट्रूवैल्‍यू आदि‍ पर सर्टि‍फाइड कारों को खरीदा जा सकता है। यहां कारों का पूरा इंस्‍पेक्‍शन करने के बाद कस्‍टमर्स को बेचा जाता है।

साथ ही, इन कारों के लि‍ए फाइनेंस की सुवि‍धा भी उपलब्ध कराई जाती है। यहां हम आपको ऐसी कुछ कारों के ऑप्‍शंस बता रहे हैं जि‍नहें आप इन कंपनि‍यों के जरि‍ए खरीद सकते हैं। आमतौर पर यह कारें 4 से 5 साल पुरानी होती हैं।

बोलेरो

महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) की सबसे पॉपुलर एसयूवी बोलेरो की यूज्‍ड कार मार्केट में काफी डि‍मांड है। बोलेरो के बीएस-4 नॉर्म्‍स वाले मॉडल को कम दाम पर आसानी से खरीदना जा सकता है। इस कार में 2523 सीसी इंजन लगा है जोकि‍ 46.3 केडब्‍ल्‍यू पावर और 195 एनएम टॉर्क जेनरेट करने की क्षमता रखता है। इस कार की एक्‍स शोरूम कीमत की शुरुआत 7.75 लाख रुपए है जि‍से यूज्‍ड मार्केट में 5.50 लाख रुपए में खरीदा जा सकता है।

स्‍कोडा vRS

स्‍कोडा vRS को इसी के परि‍चय की जरूरत नहीं है। इस कार में 2.0 लीटर इंजन है जि‍से ऑडी टीटी के पहले जेनरेशन से लि‍या गया है। यह इंजन 150 बीएचपी पावर जेनरेट करता है और इसमें 5 स्‍पीड गि‍यरबॉक्‍स लगा है। vRS बॉडी कि‍ट के साथ यह कार काफी शानदार दि‍खती है। vRS के ज्‍यादा मॉडल्‍स मार्केट में मौजूद नहीं है। इस कार को यूज्‍ड कार मार्केट में 2.25 लाख रुपए में खरीदा जा सकता है।

पोलो GT TSi

प्रीमि‍यम हैचबैक सेगमेंट की शुरुआत एक तरह से पोलो जीटी ने की थी। Tsi ऐसी कार है जो कारों के शौकीनों के बीच काफी पॉपुलर है। यह 7 स्‍पीड डीएसजी के साथ आती है। जो लोग लुक और डीजाइन के साथ सस्‍ती पेट्रोल कार खरीदना चाहते हैं उनके लि‍ए पोलो जीटी अच्‍छा ऑप्‍शन है। इस कार को अच्‍छी कंडीशन में यूज्‍ड कार मार्केट में 5.50 लाख रुपए में खरीदा जा सकता है।

महिंद्रा स्‍कॉर्पि‍यो

महिंद्रा की दूसरी सबसे पॉपुलर एसयूवी स्‍कॉर्पि‍यो को भी कम दाम पर यूज्‍ड मार्केट में खरीदा जा सकता है। इस कार में 140 बीएचपी पावर और 320 एनएम टॉर्क जेनरेट करने की क्षमता रखता है।साथ ही इसका इंजन 6 स्‍पीड गि‍यरबॉक्‍स के साथ आता है। स्‍कॉर्पि‍यो को करीब 5.50 लाख रुपए में खरीदा जा सकता है।

होंडा सि‍विक

होंडा ने जब VTEC के तौर पर टाइप जेड सि‍टी को पेश कि‍या तो लोगों ने इसे काफी पसंद कि‍या। इसके बाद कंपनी ने सि‍वि‍क को पेश कि‍या। सि‍वि‍क न केवल दि‍खने में अच्‍छी लगती है बल्‍कि‍ इसका परफॉर्मेंस भी अच्‍छा है। इस में 1.8 लीटर इंजन है जो 130 बीएचपी पावर और 172 एनएम टॉर्क जेनरेट करता है। इसका इंजन 5 स्‍पीड मैनुअल और स्‍पीड ऑटो के साथ उपलब्‍ध है। आप इस कार को यूज्‍ड कार मार्केट में 4 लाख रुपए में आसानी से खरीद सकते हैं।

बि‍ना AC के भी अपनी कार को रख सकते हैं कूल, ये हैं सस्‍ते तरीके

गर्मी में आपकी कार का इंटीरि‍यर भी काफी गर्म हो जाता है और गर्मी ज्‍यादा हो तो कार को ड्राइव करना नामुमकि‍न हो जाता है। ऐसा तब ज्‍यादा हो जाता है जब आप अपनी कार को धूप में पार्क करते हैं, चाहे आपने कार को आधे घंटे के लि‍ए ही क्‍यों न खड़ा कि‍या हो।

बाहर के तापमान के आधार पर कार के अंतर का तापमान औसतन 10 से 20 डि‍ग्री ज्‍यादा गर्म हो जाता है। ऐसे में कार में लगा एयर कंडीशनर (एसी) ही काम आता है। हालांकि‍, हर वक्‍त एसी चलाने से आपका खर्च बढ़ जाता है। बाजार में कुछ ऐसी चीजें भी हैं जि‍ससे आपकी कार बि‍ना एयर कंडीशनर के भी ठंडी रह सकती है।

ऑटो कूल सोलर

जब आप धूप में अपनी कार को पार्क करते हैं तो काफी संभावना रहती है कि‍ कार बाहर के साथ-साथ अंदर से भी गर्म हो जाए। ऑटो कूल सोलर पावर फैन की मदद से आपकी कार का इंटीरि‍यर ठंडा रहता है और यह कार को अंदर से गर्म होने से भी रोकता है। ऑटो कूल सोलर को आमतौर पर विंडों पर लगाया जाता है ताकि‍ वह एयर को वेंटि‍लेट कर सके। बाजार में इसकी कीमत करीब 500 रुपए से शुरू हो जाती है।

सीट कूलर्स

शायद आपको लगता होगा कि‍ वेंटि‍लेटेड सीट्स हाई ऐंड कारों में ही आती हैं। लेकि‍न ऐसा नहीं है। मार्केट में कापको सीट कूलर्स सीट्स एक्‍सेसरीज के तौर पर मि‍ल सकती हैं। इससे आप अपनी कार की सभी सीटों को वेंटि‍लेटेड कर सकते हैं। बाजार में इसकी कीमत करीब 6 हजार रुपए से शुरू हो जाती है।

कार विंडों के लि‍ए यूनि‍वर्सल कर्टन

कार को अंतर से कूल रखने में यूनि‍वर्सल कर्टन भी काम आते हैं। इसे कार की विंडों पर लगाया जाता है। यह टेटोरोन मैटि‍रि‍यल में डीआईवाई इंस्‍टॉलेशन और 3 इन 1 डि‍जाइन के साथ आते हैं जोकि‍ यूवी प्रोटेक्‍शन, सनशेड और हीट इंसॉल्‍यूशन फंक्‍शन का काम करते हैं। इसकी कीमत 300 रुपए से शुरू हो जाती है।

कार विंडशि‍ल्‍ड सनशेड

यह कार विंडशि‍ल्‍ड सनशेड कार को गर्मी के दि‍नों में ठंडा रखने का काम करता है। इसके अलावा, यह सनशेड हानि‍कारक यूवी कि‍रणों को भी कार के अंतर आने से रोकते हैं। यह प्रोडक्‍ट वि‍भि‍न्‍न शेड्स, प्रिंट्स और गोल्‍ड और सि‍ल्‍वर साइड्स के साथ रीवर्सि‍बल में उपलब्‍ध हैं। बाजार में इसकी कीमत 400 रुपए से शुरू हो जाती है।

सेकेंड हैंड कार खरीदते वकत रखें इन 5 बातों का ख्याल, नहीं खाएंगे कभी धोखा

जब आप कार डीलर से नई गाड़ी खरीदते हैं तो आपको कंपनी की ओर से क्‍वालि‍टी को लेकर आश्‍वासन और सभी तरह की गारंटी मि‍लती है। लेकि‍न अगर आप सेकंड हैंड कार खरीद रहे हैं तो जरूरी नहीं है कि‍ आप उसी तरह की गारंटी पर भरोसा कर सकें।

ऐसे में आपको कुछ चीजों पर ध्‍यान देना होगा। आमतौर पर सेकंड हैंड कारों में कुछ न कुछ ऐसी चीजें रहती हैं जो आपको नहीं दि‍ख पातीं। ऐसे में आपको यह कैसे पता चलेगा कि‍ जि‍स सेकंड हैंड कार को आप खरीद रहे हैं उसमें कोई प्रॉब्‍लम नहीं है। यहां हम आपको कुछ ऐसी ही टि‍प्‍स के बारे में बता रहे हैं जिससे आप धोखे से बच सकते हैं।

कार के बाहर का लुक

आपको कार के एक्‍सटीरि‍यर लुक को ध्‍यान से देखना होगा। अगर कार पर एक समान पेंट है और पेंट की चमक अच्‍छी है तो आप कह सकते हैं कि‍ कार को सही ढंग से मैनटेन रखा गया है। हमेशा चेक करें कि‍ कार की अलग-अलग बॉडी पैनल के पेंट कलर में कि‍तना फर्क है।

अगर आपको किसी भी जगह पर पेंट के कलर में अंतर दि‍खे तो आप समझ जाएं कि‍ इसे स्‍क्रैच या डेंट से छुपाने के लि‍ए ठीक कि‍या गया है। डोर के नीचे और ऊपर में मौजूद गैप के बीच उंगलि‍यों से चेक करें कि‍ कोई गैप या खुर्दुरी जगह तो नहीं है। अगर ऐसा है तो यह दुर्घाटना या रीपेयर पेंट के काम का संकेत देता है।

टायर्स

टायर को ध्‍यान से देखें और देखें कि‍ क्‍या टायर्स एक समान घि‍से हुए हैं। टायर के बाहरी और अंदर के हि‍स्‍से को चेक करें। टायर्स थ्रेडिंग पर्याप्‍य है या नहीं, इसे चेक करने के लि‍ए एक सि‍क्‍के को उसमें डालें और देखें कि‍ वह कि‍तना अंदर तक जाता है। अगर वह ज्‍यादा अंदर तक नहीं जाता है तो इसका मतलब है कि‍ कार में नए टायर्स को लगाने की जरूरत है।

इंजन

आपको इंजन भी चेक करना होगा। बोनत को खोलें और देखें कि‍ इंजन के आसपास के एरि‍या कि‍तना साफ है। अगर आपको लीक ऑयल दि‍खता है तो इसका मतलब है कि‍ यह अंडर मैनटेनेंस है। चेक करें कि‍ इंजन बेल्‍ट सही ढंग से फि‍ट है और घि‍सी हुई नहीं है। यह भी चेक करें कि‍ फ्यूड्स पर्याप्‍य लेवल पर है या नहीं।

इंजन के ऑयल का कलर चेक करें, अगर वह काला और गंदा है तो इसका मतलब है कि‍ कार सही ढंग से मैनटेन नहीं है। गंदा इंजन फ्यूड भी प्रॉब्‍लम की नि‍शानी है। कार के पुराने सर्वि‍स रि‍कॉर्ड को चेक करें कि‍ कहीं कोई इंजन प्रॉब्‍लम थी या नहीं।

इंटीरि‍यर को चेक करें

आपको इंटीरि‍यर फि‍टिंग और सभी स्‍वि‍च को भी चेक करना होगा। यह सुनि‍श्‍चि‍त करें कि‍ सभी फीचर्स काम कर रहे हैं। इंफोटेनमेंट सि‍स्‍टम के साथ-साथ स्‍पीकर्स को भी चेक करें।

टेस्‍ट ड्राइव

कार को अच्‍छी तरह से देखने के बाद आपका कार की टेस्‍ट ड्राइव करनी चाहि‍ए। चेक करें कि‍ कार आसाम से स्‍टार्ट हो रही है और रूक भी रही है। इंजन की आवाज को ध्‍यान से सुने। चेक करें कि‍ आवाज खराब है या नहीं।

कार को चलाते हुए ब्रेक को भी चेक करें। अगर ब्रेक लगाते वक्‍त कार में वाइब्रेशन आ रहा है तो इसका मतलब है कि‍ ब्रेक पैड्स घि‍सने शुरू हो गए हैं। खराब सड़क पर कार चलाकर चेक करेंकि‍ कैबि‍न से ज्‍यादा आवाज तो नहीं आ रही। अगर आवाज ज्‍यादा आ रही है तो इसका मतलब है कि‍ बॉडी पैनल और डोर फि‍टिंग ढीली हो गई है।

मारुति‍ Swift vs ह्युंडई Grand i10 vs फोर्ड Figo, जानें कौन है आपके लि‍ए बेहतर

मारुति‍ सुजुकी ने ऑटो एक्‍सपो 2018 में अपनी नई स्‍वि‍फ्ट को लॉन्‍च कि‍या। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत 4.99 लाख रुपए (एक्‍स शोरूम, दि‍ल्‍ली) रखी। मारुति‍ सुजुकी स्‍वि‍फ्ट के मार्केट में आने के बाद हैचबैक सेगमेंट में कॉम्‍पीटि‍शन बढ़ गया।

इस सेगमेंट में पहले से मौजूद कारें जैसे ह्युंडई ग्रैंड आई10 और फोर्ड फि‍गो की मुश्‍कि‍लें बढ़ सकती हैं। ह्युंडई ने बीते साल ही अपनी ह्युंडई ग्रैंड आई10 का नया फेसलि‍फ्ट वर्जन लॉन्‍च कि‍या था। हम यहां आपको इन तीनों कारों की टेक्‍नि‍कल स्‍पेसि‍फि‍केशन और कीमत को कम्‍पेयर कर रहे हैं ताकि‍ आप सही तरीके से इन कारों में फर्क कर सकें।

डायमेंशन के बारे में…

अगर पर तीनों कारों की डायमेंशन के बारे में बता करें तो नई स्‍वि‍फ्ट इस सेगमेंट में ऊंची और चौड़ी हैचबैक है। साथ ही, तीनों कारों में नई स्‍वि‍फ्ट का व्‍हीलबेस भी लॉन्‍ग है। स्‍वि‍फ्ट का आकार ज्‍यादा चौड़ा होने की वजह से इसका कैबि‍न स्‍पेस पहले से ज्‍यादा हो गया है। इसके अलावा, इसका बूस्‍ट स्‍पेस भी बढ़ गया है।

इंजन के बारे में…

अगर पेट्रोल इंजन के बारे में बात करें तो फोर्ड फि‍गो इन तीनों कारों में ज्‍यादा पावरफुल कार है। पावर और टार्क के मामले में स्‍वि‍फ्ट और ग्रैंड आई10 समान ही हैं। तीनों कारें ही ऑटोमैटि‍क ट्रांसमि‍शन का ऑप्‍शन देती हैं। वहीं, फि‍गो ऑटोमैटि‍क में ज्‍यादा एडवांस डुअल क्‍लच गि‍यरबॉक्‍स के साथ आता है।

डीजल इंजन की बात करें तो इसमें भी फोर्ड फि‍गो में सबसे बढ़ा इंजन लगा है जोकि‍ ज्‍यादा पावर भी जेनरेट करता है।

कीमत के बारे में…

अगर कीमत की बात करेंगे तो ग्रैंड आई10 तीनों कारों में सबसे सस्‍ती है जोकि‍ करीब 40 हजार रुपए स्‍वि‍फ्ट और फि‍गो दोनों के बेस प्राइस से कम है। लेकि‍न ग्रैंड आई10 में बेसि‍क सेफ्टी फीचर्स जैसे एबीएस और एयरबैग केवल ऊंचे वेरि‍एंट्स में ही मि‍लते हैं।

कीमत                                                               

  •  स्‍वि‍फ्ट पेट्रोल = 4.99 -7.29, स्‍वि‍फ्ट डीजल = 5.99 -8.29
  • आई 10  पेट्रोल = 4.59 -6.89 , आई 10 डीजल = 5.76 -7.41
  • फोर्ड फि‍गो  पेट्रोल  = 5 -8, फोर्ड फि‍गो डीजल 5.96 -7.59

कार की ब्रेक हो गई फेल, तो इन तरीकों से रुक सकती है गाड़ी

क्‍या होगा जब अचानक आपको पता चलेगा कि‍ आपकी कार के ब्रेक में प्रॉब्‍लम आ गई है। आपकी कार और आपकी सेफ्टी के लि‍ए ब्रेक्‍स एक अहम हि‍स्‍सा है। अगर आपकी ब्रेक फेल हो जाती हैं तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है।

ऐसे में कुछ एमर्जेंसी स्‍टॉपिंग स्‍टेप हैं जो आपको फायदा पहुंचा सकते हैं। ऑटोमोबाइल एडवाइजर फोरम और कंटेट प्‍लेटफॉर्म कारटॉक ने कुछ स्‍टेप बताए हैं जो आपको ब्रेक फेल होने पर मदद कर सकते हैं।

स्‍लो स्‍पीड पर ब्रेक हुई फेल तो…

धीमी गति‍ पर कार चलते वक्‍त अगर ब्रेक फेल होती है तो इंजन आरपीएम इतना कम होता है कि‍ वह कार में ब्रेक बूस्‍ट को ऑपरेट करने के लि‍ए पर्याप्‍त जगह नहीं बना पाता।

या फि‍र दूसरे कारणों से भी ब्रेक फेल हो सकती है जैसे ब्रेक कैलि‍पर जाम होना, मास्‍टर सि‍लेंडर का लीक होना, ब्रेक फ्यूल का बाहर नि‍कलना आदि‍। आमतौर पर ब्रेक फ्यूल के बाहर नि‍कलने पर डैश लाइट पर वॉर्निंग लैम्‍प जलने लगता है।

ऐसे में क्‍या करें…

  • ब्रेक को दबाएं : ब्रेक पैडल को बार-बार दबाएं और छोड़ें, आपको कुछ ब्रेकिंग एक्‍शन दि‍खेगा जि‍ससे आप कार को धीमा या रोक सकते हैं।
  • जल्‍दी से गि‍यर को पहले पर लाए: क्‍लच को छोड़ें और एक्‍सेलरेटर को न छुएं।
  • हैंडब्रेक को आराम से ऊपर करें और गाड़ी को रोकें।
  • कार को पहले गि‍यर में रखते हुए इग्‍नि‍शन को स्‍वि‍च ऑफ करें। क्‍लच को न दबाएं, बंद इंजन को ब्रेक लगाने के लि‍ए छोड़ दें।
  • अगर आप ट्रैफि‍क में हैं और ब्रेक फेल हो गई है तो अपनी हैजार्ड लाइट्स, हैडलाइट्स को ऑन करें और दूसरे ड्राइवर्स को चेताने के लि‍ए हॉर्न बजाएं।
  • अगर कहीं साइड में रेत या कीचड़ है तो कार को वहां ले जाएं, इससे कार धीमी और रुक जाएगी।

हाई स्‍पीड पर ब्रेक फेल हो तो…

अगर आप हाई स्‍पीड पर कार ड्राइव कर रहे हैं और ब्रेक्‍स फेल हो जाएं तो चीजें काफी जोखि‍म भरी और तेज हो जाती हैं। आमतौर पर कि‍सी को ब्रेक के काम न करने के बारे में तभी पता चलता है जब वह पैडल को दबाकर कि‍सी वजह से स्‍पीड स्‍लो करता है। उस वक्‍त काफी देर हो चुकी रहती है। हालांकि‍, आपको शांत करना होगा और समझदारी से काम लेना होगा।

क्‍या करें…

  • तुरंत गि‍यर को नीचे लेकर आए। कार की स्‍पीड कम होने पर गि‍यर को पहले पर लेकर आएं।
  • ब्रेक पैडल को बार-बार दबाएं। हो सकता है कि‍ दबाव डालने पर ब्रेक काम करने लगे।
  • गि‍यर नीचे आने पर हैंडब्रेक को ऊपर करें लेकि‍न रीयर व्‍हील्‍स को सावधानी से लॉक करें क्‍योंकि‍ इससे आप कार का नि‍यंत्रण खो सकते हैं।
  • कार को गि‍यर में रखने के साथ इग्‍नि‍शन को बंद करें और क्‍लच को छोड़ने की कोशि‍श करें और इंजन के साथ ब्रेक लगाएं। लेकि‍न ऐसा केवल एक बार ही करें क्‍योंकि‍ इससे आप स्‍टीयरिंग व्‍हील पर अपना कंट्रोल खो सकते हैं।
  • स्‍टीयरिंग व्‍हील पर अपना पूरा कंट्रोल रखें।
  • अगर तब भी कार नहीं रुकती है तो रोड़ के साइड में रेत या कंकड पर ड्राइव करने की कोशि‍श करें ताकि‍ घि‍साव को बढ़ाया जा सके।