इस मशीन के साथ शुरू करें बॉलपेन बनाने का बिज़नेस

पेन हर समय काम आने वाली चीज़ों में से एक है. घर से स्कूल और स्कूल से दफ्तर हर जगह इसकी आवश्यकता होती है. इसका व्यापार बहुत कम पैसे में शुरू किया जा सकता हैं. ख़ास कर बॉल पेन का इस्तेमाल हर क्षेत्र के लोगों में बहुत पसंद किया जाता है. बॉल पेन की सबसे ख़ास बात ये होती है कि इसकी स्याही जल्द से जल्द सूख जाती है. इन दिनों ‘यूज़ एंड थ्रो’ पेन का भी खूब इस्तेमाल किया जा रहा है. यूज एंड थ्रो पेन या बॉल पेन का उद्योग बहुत आसानी से अपने घर में शुरू किया जा सकता है.

पेन बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियाँ 

बॉल पेन बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होती है.

  • बैरल – बैरल पेन का वह हिस्सा होता है, जिसमे स्याही भरी जाती है. यह आपको 140 रूपये प्रति 250 पीस में मिल सकता है.
  • एडाप्टर – एडाप्टर बैरल और टिप के बीच का हिस्सा होता है. जोकि 4.5 रूपये प्रति 144 पीस मिल सकता है.
  • टिप – टिप पेन का वह हिस्सा होता है, जहाँ से लिखते समय स्याही नियमित रूप से बाहर आती है. यह आपको 28 से 35 रूपये प्रति 144 पीस में मिल सकता है.
  • ढक्कन – यह पेन को ढ़कने के लिए उपयोग किया जाता है. इसके ढक्कन की कीमत 25 रूपये प्रति 100 पीस है.
  • स्याही – यह पेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है जोकि 120 से 400 रूपये प्रति लीटर में मिल सकती है.

पेन बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियाँ कहाँ से ख़रीदें 

पेन बनाने की चीज़े किसी बड़े होल सेल मार्किट में मिल सकती हैं. या इन्हें ऑनलाइन भी पाया जा सकता है, जो ये सारी चीज़े आप के घर तक पहुंचा देंगे. इसे ऑनलाइन मंगाने के लिए नीचे दिए गये वेबसाइट पर जायें.

पेन बनाने के लिए मशीनें

यह उद्योग शुरू करने के लिए कम से कम 200 वर्ग फिट जगह की आवश्यकता होती है. इस जगह में लगभग पांच मशीनें बैठाई जाती हैं. नीचे पांचों मशीनों के विषय में दिया जा रहा है.

  • पंचिंग मशीन : पंचिंग मशीन वह मशीन होती है जिससे बैरल में एडाप्टर सेट किया जाता है.
  • इंक फिलिंग मशीन : इंक फिलिंग मशीन की सहायता से बैरल में स्याही भरी जाती है.
  • टिप फिक्सिंग मशीन : टिप फिक्सिंग मशीन की सहायता से पेन के एडाप्टर में टिप लगाया जाता है, जो लिखने में सहायक है.
  • सेण्ट्रीफ्यूगिंग मशीन : इसकी सहायत से पेन के अन्दर स्याही भरते हुए रह गये अतिरिक्त हवा को पेन से निकाला जाता है

पेन बनाने के व्यापार के लिए कुल लागत 

आम तौर पर सस्ते मशीन की कीमत 25,000 रूपए हैं, ये मशीनें छोटा व्यापार शुरू करने के लिए ठीक है. इसे कई बड़ी हार्डवेयर दूकानें बेचती हैं. इसे ऑनलाइन मंगाने के लिए निम्न वेबसाइट देख सकते हैं :

https://dir.indiamart.com/impcat/ball-pen-making-machine.html

उपरोक्त सभी चीज़ों को लेकर पहली बार पेन बनाने के व्यापार को स्थापित करने के लिए 30 से 40 हज़ार रूपए तक लग सकते हैं. इन 40 हज़ार रुपये में 25 हज़ार सिर्फ मशीन के हैं. अतः ये अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि एक बार मशीन बैठा लिया जाए तो, कम से कम पैसे लगा कर यह व्यापार चलाया जा सकता है. इसके अलावा यदि आप बड़ा व्यापार शुरू करना चाहते हैं तो इसके लिए ऑटोमेटिक मशीन की आवश्यकता होती है जोकि आपको 4 लाख रूपये तक मिल सकती है. इसके लिए कुल लागत इससे ज्यादा भी हो सकती है.

पेन बनाने की प्रक्रिया 

पेन बनाने की प्रक्रिया आसान और अल्प सामायिक है. यहाँ इस प्रक्रिया का पूर्ण विवरण दिया जा रहा है.

  • सबसे पहले बैरल को पंचिंग मशीन में लगाना होता है. इस मशीन में पहले से एडाप्टर लगे हुए होते हैं. बैरल एडाप्टर को देखते हुए सही जगह लगाकर पंच करते ही बैरल में एडाप्टर सेट हो जाता है.
  • एडाप्टर सेट हो जाने के बाद बैरल में स्याही भरने की प्रक्रिया आती है. स्याही भरने के लिए इंक फिलिंग मशीन का इस्तेमाल होता है. इंक फिलिंग मशीन में पहले से स्याही भरी हुई होती है. स्याही भरते समय इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि स्याही बैरल की साइज़ के अनुसार भरी जाए. अधिक स्याही भरने से वह बाहर भी आ सकती है जिससे पेन की क्वालिटी पर भी असर पड़ सकता है.
  • इसके बाद बैरल की ऊपरी छेद पर हाथ लगाकर रखें, फिर उसे टिप फिक्सिंग मशीन में लगाया जाता है. इस मशीन की सहायता से स्याही भरे बैरल में टिप लगाया जाता है. इसके बाद ये बैरल पेन में बदल जाता है.
  • इसके बाद इस पैन को सेंट्रीफ्यूगिंग मशीन में डाला जाता है जिससे इसके अंदर की अतिरिक्त हवा बाहर निकल जाए.
  • अब इस पेन का इस्तेमाल लिखने के लिए आराम से किया जा सकता है. इसी तरह आप मशीनों की मदद से अधिक संख्या में पेन बना सकते हैं और अपने ब्रांड का पेन बाज़ार में उतार सकते हैं.

Address:  PERFECT SYSTEM 106, Geeta Industrial Estate,
I. B. Patel Road, Goregaon (East),
Mumbai – 400 063. INDIA
Phone: +91 22 26853846

सिर्फ 35 हज़ार में इस मशीन के साथ शुरू करें मसाला बनाने का उद्योग

भारतीय खाने में मसालों का स्थान हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहा हैं. विश्व में भारतीय खाने की पहचान इसमें डालें गये मसालें ही हैं इसलिए मसालों की मांग हमेशा मार्किट में बनी रहती हैं. अगर आप अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो आप आसानी से मसाले बनाने की यूनिट लगा सकते हैं. इस बिज़नस में लागत कम आती हैं और प्रॉफिट आपको ज्यादा मिल सकता हैं.

आप अपनी कैपिटल अमाउंट के अनुसार मसाले मैन्युफैक्चरिंग के बिज़नस को शुरू कर सकते हैं. आप इस बिज़नस को लघु स्तर पर, मध्यम स्तर पर और बड़े पैमाने पर शुरू कर सकते हैं. अत्यंत लघु स्तर पर मसाले मैन्युफैक्चरिंग इकाई आप अपने घर पर शुरू कर सकते हैं. हमारे यहाँ मसालों की मांग इतनी हैं कि लघुतम इकाई भी आपको लाभ ही पहुंचाएगी.

आज के आर्टिकल में हम आपको मसालों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट छोटे स्तर पर लगाने के विषय में जानकारी देंगे. भारत में सभी प्रकार के मसालों को उगाया जाता हैं. पहलें घरों में ही मसालों को कुटा जाता था लेकिन अब लोगों के पास इतना समय ही नहीं हैं. ऐसे में अगर आप ठीक रेट पर अच्छी क्वालिटी का मसाला उपभोक्ताओं को उपलब्ध करायेंगे तो आपके बिज़नस में आपको फायदा ही होगा.

ऐसे करें अपने बिज़नस का रजिस्ट्रेशन

आप अपनी मसाला मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को छोटे स्तर पर लगायें या बड़े स्तर पर आपको रजिस्ट्रेशन की सारी प्रक्रिया को फॉलो करनी पड़ेगी. इस बिज़नस के रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस कुछ इस तरह से हैं.

सबसे पहले आपको ROC का रजिस्ट्रेशन कराना होगा. छोटे स्केल पर या घर से ही मसाला मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने पर आप one person company रजिस्ट्रेशन भी करा सकते हैं.
आपको लोकल म्युनिसिपल अथॉरिटी से ट्रेड लाइसेंस भी लेना होगा.
फ़ूड ऑपरेटर लाइसेंस भी लेना आवश्यक हैं..

आपको BIS सर्टिफिकेट भी लेना होगा. मसालों के लिए आपको ये ISI के विभिन्न दिशा निर्देश उपलब्ध है .

  • Black whole and ground (काली मिर्च) ISI-1798-1961
  • Chilli powder (मिर्च पाउडर) ISI-2445-1963
  • Coriander powder (धनिया पाउडर) ISI-2444-1963
  • Curry powder (करी पाउडर) ISI-1909-1961
  • Turmeric powder (हल्दी पाउडर ) ISI-2446-1963
  • Methods of sampling and test of Spices and condiment ISI-1997-196

CFTRI, Mysore,ने एक तकनीकी दिशा निर्देश की जानकारी विकसित की है ,जो AGMARK की सर्टिफिकेशन के लिए आवश्यक मानीं जाती है .

मशीनरी व Raw मटेरियल

मसालों के प्रोडक्शन एरिया के लिए लगभग 75 स्क्वायर फीट की जगह की आवश्यकता होती हैं. पैकिंग एरिया और गोडाउन के लिए 150 स्क्वायर फीट की जगह चाहिए होगी. मसाले ग्राइंड करने के लिए और उन्हें प्रोसेस करने के लिए सिंपल मशीनरी और उपकरणों की आवश्यता होती हैं.

मसालों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए आपको dis integrator इंस्टाल कराना होगा. इसके साथ ही स्पाइस ग्राइंडर और पाउच सीलिंग मशीन की भी आवश्यता होगी. मसालों का भार तौलने के लिए वेट मशीन का होना भी आवश्यक हैं. इसके लिए आप पूरी तरह से आटोमेटिक मशीन भी ले सकते हैं. जिसमें ग्राइंडिंग, वेट मापना ओर पैकिंग सब एक प्रोसेस में अपने आप होता रहेगा.

कच्चे माल में आपको साबुत हलदी, साबुत काली मिर्च,मिर्ची,साबुत धनिये आदि की जरूरत होगी. जितना अच्छा आपका कच्चा माल होगा उतनी ही अच्छी क्वालिटी आपके प्रोडक्ट की भी होगी.

मसाले बनाने का प्रोसेस

मसाले बनाने के प्रोसेस में साबुत मसालों को साफ़ करना फिर उन्हें सुखाना, साफ़ व सूखे हुए मसालों में मसालों से कंकर या मिटी निकली जाती हैं. फिर मसालों को धुप में सुखाया जाता हैं. उसके बाद मसालों को ग्राइंड किया जाता हैं. मसाले ग्राइंड करने की मशीन 35000 रूपये से 85000 में मिल सकती हैं.जो एक दिन में 35 किलो से लेकर 70 किलो तक मसाला त्यार करती है . मसाला बनाने की क्षमता मशीन के आकार के साथ-साथ मसाले के ऊपर भी निर्भर करती है

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

और ज्यादा जानकारी के लिए आप निचे दिए पते पर संपर्क करें

M/s. Jas Enterprises ,Ahmedabad 380023 Gujarat India
Phone:– +91-79-22743454, 55
E mail:– info@jasenterprise.com
website :http://www.jasenterprise.com/

नोट:इस कंपनी के इलावा भी बहुत सारी कंपनी यह मशीन त्यार करती है आप कहीं से भी खरीद सकते है .

यह मशीन एक मिंट में बनाती है कपूर की 200 गोलियां,जाने पूरी जानकारी

आज हम जानकारी दे रहे हैं पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाले कपूर बट्टी यानी कपूर टेबलेट निर्माण उद्योग के बारे में. इस उद्योग को करना बडा ही आसान है. साथ ही इसे तैयार करने और इसकी मार्केटिंक में अधिक परिश्रम की आवश्कता नहीं होती.

भारतीय संस्कृति में कपूर का काफी महत्व है. पूजा पाठ के दौरान कपूर का इस्तेमाल किया जाता है. अनेक आयुर्वेदिक दवाओं में भी इसका इस्तेमाल होता है. भारत में ही नहीं विदेशांे में भी इसका इस्तेमाल मिठाई में फ्लेवर के रूप में किया जाता है.

कपूर एक क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है. जिसमें एक विशेष प्रकार गंध आती है. यह कैम्फर लौरेल नामक पेड़ से पाया जाता है. कैम्फर का पेड़ एशिया महाद्वीप में मुख्यत चीन, भारत, मंगोलिया, जापान ताईवान आदि देशों में पाया जाता है.

कपूर मैकिंग के लिए कच्चे माल के तौर पर कैम्फोर पाउडर जिसे आम बोलचाल की भाषा में कपूर पाउडर कहा जाता है कि आवश्यकता होती है. कैम्फोर पाउडर को कपूर मेकिंग मशीन की सहायता से छोटे-छोटे टेबलेट के रूप् में तैयार कर इसे मार्केट में बेचा जाता हैं.

कपूर मेकिंग मशीन आपको बड़े शहर के होलसेल मार्केट में मिल जाएगी. आजकल इन्हें आप आॅनलाइन भी खरीद सकते हैं. इण्डिया मार्ट, इण्डिया ट्रेड, अलीबाबा आदि ईकाॅमर्स वेबसाइट पर इसे सर्च कर सकते हैं. इसका लिंक नीचे दिया गया है.

https://www.indiamart.com/bluestarautomobiles/kapoor-machine.html

इस मशीन की कीमत 55000 से शुरू हो जाती है .इस मशीन की खास बात यह है के आप इस मशीन से सभी प्रकार के गोलियां जैसे नेफ्थालीन की गोलियां ,एयर फ्रेशनर ,खुशबु वाली गोलियां अदि बना सकते है .यह मशीन एक मिंट में 200 गोलियां और एक घंटे में 3 किलो गोलियां त्यार कर देती है .

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

कच्चा माल किसी भी शहर के होलसेल मार्केट में मिल जाएगा. आजकल आप इसे भी आॅनलाइन मंगवा सकते हैं.

https://dir.indiamart.com/impcat/camphor-powder.html

कपूर बनाने के लिए इलैक्ट्रिक से चलने वाली मशीन स्वचालित होती है. इस मशीन की सबसे खास बात यह है कि इसमें डाई की मदद से छोटे-बड़े कई साइज के टेबलेट तैयार किए जा सकते हैं. कपूर के टेबलेट बनाना बड़ा आसान है.

कैम्फर टेबलेट बनाने वाली मशीन में धीरे-धीरे काम्फोर पाउडर डाला जाता है और मशीन में लगे डाई की मदद से कपूर के टेबलेट तैयार होते हैं. अब इन टेबलेट को बहुत ही सावधानी से छोटे-छोटे पैकेटों में पैक किया जाता है.

इस तरह से तैयार कपूर के टेबलेट मार्केट में बिकने के लिए तैयार है. कपूर की पैकेजिंग पर घ्यान देने की आवश्यकता होती है. क्योंकि यह शीध्र वाष्पीशील पदार्थ है. हवा के संपर्क में आकर यह घुल जाता है.

ये है चपाती बनाने वाली मशीन, एक घंटे में त्यार करती है 400 रोटी

दूनिया भर में करोड़ों लोग पारंपरिक तरीके से रोटी बनाते हैं. रोटी बनाना एक कला है लेकिन इसमें विज्ञान भी कम नहीं. सही आकार और स्‍वाद की रोटी बनाने के लिए आटा, पानी और तेल का सही मिश्रण होना जरूरी होता है.

इसके अलावा सही आंच भी जरूरी है अन्‍यथा रोटी कच्‍ची रह जाने या जल जाने का खतरा भी होता है. इस तरह की अच्‍छी रोटी के लिए सही अनुभव होना जरूरी है. अगर आपको रोटी बनानी नहीं आती है या रोटी बनाने में आलस आता है तो आपके पास ये मशीन होनी चाहिए.

खासतौर पर तब जब आपका परिवार काफी बढ़ा हो जा आपका कोई होटल जा रेस्टोरेंट हो .ऐसे में एक ऐसी मशीने आ गई है जो आपके पुरे परिवार के लिए चपाती त्यार करेगी. यह मशीन आपके लिए फायदे का सौदा है. इस मशीन की खास बात यह है की यह मशीन बाकि चपाती बनाने वाली मशीने से काफी छोटी है . और इस मशीने से बेहद कम खर्चे से चपाती त्यार करती है .

यह मशीने कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

क्वालिमार्क मशीन्स चपाती बनाने की 3 प्रकार की मशीने त्यार करती है . सभी मशीने की रोटी का वजन 25 से 45 ग्राम होता हो .सबसे छोटी मशीने एक घंटे में 400 रोटी त्यार कर देती है .और सबसे बड़ी मशीने एक घंटे में 1700 चपाती त्यार कर देती है . छोटी मशीने सिर्फ 750 ग्राम गैस से 400 रोटी त्यार कर देती है .यानि के 400 रोटी बनाने में 35 रुपये से भी कम का खर्च आता है.

इस मशीने को खरीदने जा दूसरी जानकारी के लिए निचे दी हुए नंबर पर संपर्क करें

Contact : +91 94282 96969, +91 94087 05087
Web : www.qualimark.in, www.qualimarkmachines.com
Email : sales@qualimark.in

ऐसे शुरू करें कभी भी फेल नहीं होने वाला कील बनाने का बिज़नेस

कील निर्माण का उद्योग एक लम्बे समय तक चलने वाला उद्योग है. इस उद्योग के लिए कुछ बड़े आयोजन की आवश्यकता होती है. इसके लिए विशेष तरह के मशीन की आवश्यकता होती है. यहाँ पर इसके कच्चे पदार्थ और मशीनरी की पूरी जानकारी दी जा रही है. इसके अलावा इस उद्योग को शुरू कैसे करें इसके बारे में भी यहाँ दिया जा रहा है.

कील बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 

इसके लिए काम आने वाली आवश्यक सामग्रियों में नेल वायर है. इसका प्रयोग करके विभिन्न तरह के कील बनाए जाते हैं. ये वायर अलग अलग क्रॉस सेक्शन में पाया जाता है. अतः अपने द्वारा बनाये जाने वाले कील के अनुसार वायर ख़रीद लें.

कील बनाने के लिए आवश्यक सामग्री कहाँ से ख़रीदें

मुख्य तौर पर इस वायर की फैक्ट्री पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर तथा छतीसगढ़ के रायपुर में है. यहाँ से स्टॉक में ये वायर अपने पते पर मंगाया जा सकता है. इसे ऑनलाइन मंगाने के लिए निम्नलिखित लिंक पर जा सकते हैं.

https://www.alibaba.com/showroom/raw-material-of-wire-nail.html

कील बनाने के लिए मशीनरी 

नेल मेकिंग मशीन थोड़ी महंगी आती है, किन्तु एक बार यदि ये मशीन बैठा ली जाए, तो एक लम्बे समय तक कील बनाई जा सकती है. यह मशीन पूरी तरह से स्वचालित होती है, जिसे आसानी से नियंत्रित और नियमित किया जा सकता है. कील का निर्माण मुख्यतः दो तरह की मशीन से होता हैं. एक में कील बनती है और दूसरे मशीन में ये पोलिश किया जाता है. ये दोनों मशीन एक सेट में आते हैं.

कील बनाने का पूरा प्रोसेस जानने के लिए वीडियो देखें

कील बनाने के लिए मशीन कहाँ से ख़रीदें 

कील बनाने वाली मशीन के कई शोरूम होते हैं. जहाँ से इसे खरीदा जा सकता है. यदि आप ऑनलाइन ये मशीन पाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गये लिंक पर विजिट करें.

https://dir.indiamart.com/impcat/wire-nail-making-machine.html?price

कील बनाने की प्रक्रिया 

मशीन स्वचालित होने की वजह से कील बनने की प्रक्रिया बहुत आसान हो जाती है. मशीन के सामने वायर का डायल इस तरह से सेट किया जाता है, कि वह घूम सके. वायर का एक हिस्सा नेल मेकिंग मशीन में लगा दिया जाता है. मशीन के चलने पर उस वायर से कीलें खुद ब खुद बननी शुरू हो जाती हैं. एक मिनट में कम से कम 250 से 300 पीस कीलें बनती जाती हैं.

कील की पोलिशिंग 

इसके बाद बनी हुई कीलों को पोलिशिंग मशीन में डालना पड़ता है. पोलिशिंग से कीलें नयी दिखने लगती हैं. इसमें लकड़ी की भूसी का प्रयोग होता है. इसके बाद किसी तरह के लुब्रिकेंट का भी प्रयोग कर सकते है.

कील बनाने का व्यापार शुरू करने की कुल लागत 

इसमें उपयोग होने वाले नेल वायर की कीमत रू 30,000 से रू 40,000 प्रति टन है, और मशीन सेट की कीमत कम से कम 4 से 5 लाख तक की होती है. इस तरह ये व्यापार शुरू करने के लिए कम से कम 10 लाख रुपये की ज़रुरत होती है, जिसमे इलेक्ट्रिसिटी सेट अप मशीनरी आदि सभी कुछ शामिल होता हैं. एक किलो कील बनाने के लिए कच्ची सामग्री छोड़ के कम से कम 2 रू लागत पड़ती है. इस व्यापार को शुरू करने के लिए आपको 1000 स्क्वायर फिट की आवश्यकता पड़ सकती है.

कील बनाने के व्यापार के लिए लाइसेंस 

इसके लिए आवश्यक लाइसेंस लेना बहुत आवश्यक है, क्यों कि इस उद्योग में पूरा मशीनरी सेट अप चाहिए होता है. लाइसेंस के लिए अपने लोकल ऑथोरिटी को आवेदन पत्र दिया जा सकता है. यहाँ से बहुत जल्द आपको लाइसेंस प्राप्त हो जाएगा.

ये है दूध पैकिंग वाली मशीन ,एक मिनट मे त्यार करती है 52 पैक्ट

मिल्क पैकिंग मशीन बहुत ही उपयोगी मशीन है| आप मिल्क पैकिंग मशीन के द्वारा आसानी से शुद्ध दूध की पैकिंग कर सकते है | इसे आसपास के बाजार में आसानी से बेच सकते हैं | दूध की इलवा इस मशीन के साथ कोई भी द्रव जैसे पानी ,सॉफ्ट ड्रिंक, तेल आदि की पैकिंग कर सकते है |

यह मशीन किसान के लिए बहुत ही लाभदायक है | इस मशीन से वह आसानी से दूध की पैकिंग कर सकते है | खुले दूध को हम ज्यादा समय तक नहीं रख सकते | लेकिन दूध की पैकिंग कर आप इसे काफी समय तक रख सकते है|  साथ में किसान को खुले दूध की कीमत कम मिलती है | वह दूध की पैकिंग करके इसे एक ब्रांड के नाम से बेच सकते है|  पैकिंग किये हुए दूध की कीमत भी अच्छी मिलेगी|

कहाँ से खरीदें यह मशीन

अगर आप इस मशीन को खरीदना चाहते है तो आप गूगल पर “LIQUID FILLING PACKAGING MACHINES” लिख कर सर्च कर सकते है | बहुत सारी कंपनी यह मशीन त्यार करती है | इसके इलावा भी हम एक कंपनी की डिटेल निचे दे रहे है यहाँ से से आप ये मशीन खरीद सकते है |  जिसकी सारी विशेषताएं और जानकारी निचे दी गई है |

मशीन की कीमत 1 .25 लाख है| यह मशीन एक मिन्ट में 50 से 52 पैक्ट बना देती है|  मशीन को Single Phase, 230 V, AC 50 Hz. पावर की जरूरत होती है|  मशीन का वज़न 250 kg (approx). होता है |

Address: Creativeflex Engineering
Hyderabad-500037, Telangana, India
PH NO- 08048019661

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें;

सिर्फ 60 हज़ार की है यह जाली वाली बाड़ बनाने वाली मशीन

चेन लिंक बाड़ जा जाली वाली बाड़(Chain Link Fence) का इस्तेमाल बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है चाहे वो खेत हो ,बाग़ हो जा फिर फार्म हाउस हो जाली वाली बाड़ के इस्तेमाल से जानवर अंदर नहीं आ  सकते । आवारा पशुओं की बढ़ रही गिनती के कारण इस तरह की जाली वाली बाड़ की मांग तेज़ी से बढ़ रही । इस लिए आप चेन लिंक बाड़ बना कर अच्छा खासा मुनफा कमा सकते है ।

कच्चे माल के लिए आप को सिर्फ वायर चाहिए होती है ।इस मशीन से आप 2-4 mm की वायर का इस्तेमाल कर सकते है और आप को सिर्फ 4 बन्दों की लेबर की जरूरत पड़ती है । एक छोटे से शेड में आप यह काम शुरू कर सकते है ।

इसको बनाने के लिए सिर्फ एक मशीन की जरूरत पड़ेगी जिसकी कीमत सिर्फ 60 हज़ार है ।यह मशीन वायर मोड़ने का काम करती है बाकि सारा काम हाथ से करना पड़ता है । अगर आपको आटोमेटिक मशीन चाहिए तो उसकी कीमत 11 लाख के करीब होती है ।जो सारा काम अपने आप करती है ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

लेकिन आप छोटे स्तर पर इस 60 हज़ार वाली मशीन से शुरुआत कर सकते है और मांग बढ़ने पर आटोमेटिक मशीन खरीद सकते है ।इस छोटी मशीन की उत्पादन क्षमता 8.0 से 8.5 मी / मिनट है ।
इसको चलने के लिए 3 HP बिजली की मोटर की जरूरत पड़ती है ।

अगर आप इस मशीन को खरीदना चाहते है तो निचे दिए हुए पते पर संपर्क कर खरीद सकते है। इसके इलावा भी बहुत सारी कंपनी है जो यह मशीन बनाती है और ज्यादा जानकारी के लिए Google पर “Chain Link Fence Machine” लिख कर सर्च कर सकते है ।

Address:Power Machine Tools
Batala – 143505, Punjab, India
Call :08079446214

इस मशीन से शुरू करें मिठाई का डिब्बा बनाने का काम ,वीडियो देखें

मिठाई का डिब्बा हर शादी में जरूरी होता है इसकी डिमांड कभी भी कम नहीं हो सकती । ऐसे में अगर आप मिठाई के डिब्बे का काम शुरू करें तो आप को काफी मुनाफा हो सकता है । इसके लिए बहुत सारी मशीन और कच्चा माल चाहिए । लेकिन अगर आप बड़े लेवल पर मिठाई के डिब्बे बनाने का काम कर रहे है तो एक मशीन जरूर चाहिए और वो है मिठाई के डिब्बे बनाने वाली मशीन ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

मिठाई के डिब्बे बनाने वाली मशीन से आप उच्च क्वालिटी के मिठाई के डिब्बे ,गिफ्ट वाले डिब्बे , जेवर रखने वाले डिब्बे ,जूते रखने वाले डिब्बे अदि बना सकते है । इस मशीन से बहुत कम खर्चे से डिब्बे त्यार किए जा सकते है और एक साथ कई काम हो सकते है । इस महीने के साथ डिब्बे के कवर पेपर पर कोई सिलवट जा हवा का गुब्बारा नहीं दिखेगा ।

यह मशीन स्टैण्डर्ड मैकेनिकल वर्क्स द्वारा त्यार की गई है । यह कंपनी डिब्बे बनाने वाली हर तरह की मशीन त्यार करती है ।जिस से आप डिब्बा बनाने वाली फैक्ट्री खोल सकते है और ज्यादा जानकारी के लिए निचे दिए हुए नंबर पर संपर्क करें ।

For further queries or information contact

Mr- Charan Sabharwal
Mob- +91-9999-899336 / +91-9999500967 /+91-9999-500968
email – standard1982@gmail.com / charan.sabharwal@gmail.com
web – http://www.standardmechanicalworks.com

एक लाख में ऐसे शुरू करें मोमबत्ती बनाने का बिज़नेस

मोमबत्ती बनाने का बिज़नस (Candle Making Business) शुरू करने के लिए आपको कम कैपिटल अमाउंट की आवश्यकता होगी साथ ही इस उपक्रम के लिए आपको लेबर की भी ख़ास जरूरत नहीं होती. साथ ही आप चाहें तो कस्टमर्स को अपने घर बुला कर कैंडल बेच सकते हैं या फिर खुद उनके यहाँ जाकर. ओर फिर ऑनलाइन बिज़नस का आप्शन तो खुला है ही. मतलब ये हैं कि किसी भी तरह से आपको नुकसान नहीं होने वाला.

अगर आप घर से बिज़नस शुरू करने का मन बना चुके हैं तो ये भी सोच लें कि आपको किस प्रकार की मोमबत्तियां बनानी हैं. सजावट के लिए या खुशबूदार या फिर एरोमा थेरेपी के लिए. साथ ही इस विषय पर एक प्लान भी रेडी कर लें.

मोमबत्ती बनाने के लिए कैसे लाइसेंस प्राप्त करें

अपने बिज़नस (Candle Making Business) को व्यवसाय के रूप में शुरू करने के लिए सबसे पहले उसके लिए पैन कार्ड बनवा लें. बैंक में बिज़नस फर्म के नाम से करंट अकाउंट भी खुलवाना जरूरी हैं. आप अपने बिज़नस को SSI यूनिट के रूप में भी रजिस्टर्ड करवा सकते हैं. लोकल अथॉरिटी से ट्रेड लाइसेंस होना भी जरूरी हैं. क्यूंकि आपका बिज़नस सामान खरीदने व बेचने का हैं इसलिए सेल्स टैक्स रजिस्ट्रेशन भी आवश्यक हैं. आप अपने ब्रांड नाम को चमकाने के लिए ट्रेड मार्क का यूज़ भी कर सकते हैं.

कितना करें निवेश

आपके निवेश की धनराशि इस बात पर निर्भर करेगी कि आपको कितने बड़े स्केल पर अपना मोमबत्ती बनाने का प्रोजेक्ट शुरू करना हैं. घरेलू स्तर पर मोमबत्ती बनाने का उपक्रम अधिक महंगा नहीं होता. लेकिन अगर व्यवसायिक रूप से इस काम को आगे बढ़ाना हैं तो मोमबत्ती बनाने की मशीन 50,000 रुपए से लेकर 1,00,000 तक की पड़ सकती हैं.

मशीन की कीमत उसकी क्षमता पर निर्भर होती हैं. जितनी महंगी मशीन उतना ही अधिक उत्पादन. बैंक से लोन के लिए अप्लाई करते समय आपको अपने दिमाग में कच्चे माल की कीमत भी रखनी होगी. शुरुआत में कम से कम 40,000 से 50,000 तक के मुले का कच्चा माल आपको लेना होगा. इसी के हिसाब से आप बैंक से लोन या अपने बिज़नस में निवेश की प्लानिंग कर सकते हैं.

कच्चा माल व मशीनरी

आपको मोमबत्ती बनाने के लिए मोम व धागे के अतिरक्त अलग अलग रंग, विभिन्न प्रकार के साँचे, और खुशुबू की आवश्यता होगी. महक वाली मोमबत्तियां महंगी होती है. इनकी पैकिंग व डेकोरेशन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती हैं. साथ ही मेल्टिंग पॉट, पॉर पॉट, तापमान नापने के लिए रूम थर्मामीटर, हथोडा व मोम गरम करने के लिए ओवन की आवश्कता भी होती हैं.

सही उत्पाद बनाने के लिए सही मशीनरी काचुनाव करना भी आवश्यक हैं. मोमबत्ती बनाने के लिए आप अपनी जरूरत के हिसाब से तीन तरह की मशीनरी के विषय में प्लान कर सकते हैं.

मोमबत्ती बनाने की मशीन खरीदने के लिए आप निचे दिए हुए लिंक पर क्लिक कर सकते है https://dir.indiamart.com/impcat/candle-making-machine.html

फुल्ली आटोमेटिक कैंडल मेकिंग मशीन: यह मशीन फाइन स्टील व ब्रास पाइप से बनी होती है. इस मशीन से अधिक संख्या में मोमबत्ती निर्माण हो सकता हैं. मोमबत्ती बनाने की पूरी प्रक्रिया बिना किसी झंझट के निपट जाती हैं.

सेमी आटोमेटिक : जैसा कि नाम से पता चलता हैं; इस प्रकार की मशीनरी में मंनुअल ओपेरतिओन्ग भी करनी होती हैं. ये मशीन आसानी से ओपरेट की जा सकती हैं. जल्दी ही ठंडी हो जाने वाली ये मशीन यूजर फ्रेंडली कहलाई जाती हैं.

मैन्युअल ऑपरेटिंग मशीन: इस प्रकार की मशीन में सबसे कम लगत लगती हैं. पूरी तरह से मैन्युअली ऑपरेट होने वाली ये मशीन 300 से लेकर 1800 मोमबत्ती के पीस हर घंटे produce कर सकती हैं. ये सभी मोमबत्ती के पीस हाथ से ही कलेक्ट करने होते हैं.

क्या हैं मोमबत्ती बनाने का प्रोसेस

मोमबत्ती बनाने का प्रोसेस उस मशीन पर निर्भर करता है जोकि आपने अपने बिज़नस उपक्रम के लिए चुनी हैं. इस प्रोसेस में अमूमन आपको मोमबत्ती बनाने के सांचों (module) में धागा डालना होता हैं. फिर इनमें पिघला हुआ मोम डालते हैं. कुछ ही समय में मोम जम जाता हैं. अन्तिम स्टेप के रूप मोमबत्तियों को पैक करना होता हैं. अगर आपको मोमबत्ती में रंग या खुशबु डालनी हैं तो पिघले हुए माँ में ही इन दोद्नी को या एक चीज को डालना होगा.

मोमबत्ती बनाने का उपक्रम पहले घरों में बहुत प्रचलित था लेकिन इससे होने वाले मुनाफे ने इसे व्यवसाय के रूप में स्थापित किया हैं.

ऐसे शुरू करें टी बैग बनाने का बिजनेस

ग्रामीण इलाकों में निवासित व्यक्ति शायद Tea Bag नामक इस शब्द से कम ही परिचित होंगे क्योंकि आज भी ग्रामीण इलाकों में ही नहीं अपितु शहरों में भी अधिकतर घरों में चाय बनाने के लिए पारम्परिक विधि अर्थात जिसमे बर्तन में पानी रखकर चूल्हे पर रख दिया जाता है | और उसके बाद उस खौलते पानी में चाय की पत्तियों को डाला जाता है का उपयोग ही सर्वाधिक तौर पर किया जाता है | लेकिन बढ़ते शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण ने चाय बनाने की एक नई प्रणाली को जन्म दिया है जिसमे Tea Bag का इस्तेमाल चाय बनाने के लिए किया जाता है |

अक्सर बड़े बड़े कार्यालयों में चाय बनाने के लिए Tea Vending Machine का उपयोग किया जाता है जिनमे लगभग हर प्रकार की चाय बनाने के लिए Tea Bag का इस्तेमाल होता है | इसलिए कहा जा सकता है की इस प्रकार के उत्पाद की मांग ज्यादातर तौर पर भारत के शहरी भागों में एवं अंतराष्ट्रीय बाजार में हमेशा विद्यमान रहती है |

इसलिए इस व्यापार को कोई भी व्यक्ति बेहद कम निवेश के साथ शुरू कर सकता है क्योंकि Tea bag Making Business को शुरू करने के लिए चाय उद्योग से जुड़ी कोई बहुत अधिक जानकारी की आवश्यकता नहीं होती है | हालांकि उद्यमी को इस तरह के बिज़नेस को शुरू करने के लिए बेहद कम निवेश की आवश्यकता होती है और उद्यमी चाहे तो शुरूआती दौर में इसे घर से भी शुरू कर सकता है | इसलिए कोई भी उत्साही एवं इच्छुक व्यक्ति इस व्यापार को आसानी से इसलिए शुरू कर सकता है क्योंकि Tea Bag making Process को समझना बेहद आसान प्रक्रिया है |

 

Tea Bag की उपयोगिता:

यह सर्वविदित है की भारत में चाय सबसे ज्यादा प्रचलित पेय पदार्थ है जबकि पूरे विश्व में चाय कॉफ़ी के बाद दूसरा सबसे प्रचलित पेय पदार्थ है इसलिए घरेलू बाजार में तो इसके बिकने की संभावनाएं हैं ही अंतराष्ट्रीय बाजार में भी इसके बिकने की संभावनाएं पर्याप्त रूप से व्याप्त हैं | हालांकि जैसा की हमने बताया की चाय को साधारणतया उबलते हुए पानी में चाय की पत्तियां डालकर बनाया जाता है | लेकिन Tea Bag चाय बनाने की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाने का कार्य करते हैं | टी बैग के माध्यम से चाय उबले हुए पानी में टी बैग डालकर बनायीं जाती है |

कहने का आशय यह है की चाय बनाते समय उबले हुए पानी में Tea Bag को डुबाया जाता है और कुछ मिनटों के बाद ही इसे इस पर लगे धागे की मदद से चाय से निकाल दिया जाता है | Tea Bag को अनेकों फ्लेवर जैसे Cardamom Tea, Lemon Tea इत्यादि में तैयार किया जाता है | टी बैग को मूल रूप से फ़िल्टर पेपर से तैयार किया जाता है जिसे आंशिक रूप से सब्जी फाइबर एवं लकड़ी से तैयार किया जाता है | कभी कभी इनको रेशम से भी बनाया जाता है |

Tea bag की बिकने की संभावनाएं:

यदि कोई व्यक्ति अपने Tea bag Manufacturing Business को अच्छी योजना एवं तैयारी के साथ शुरू करे तो वह इस व्यापार से बड़ा प्रॉफिट कमा सकता है | क्योंकि बड़े होटल, रेस्टोरेंट, कॉफ़ी की दुकानें, भारतीय रेलवे, सभी प्रकार के कार्यालय Tea bag के बड़े उपभोक्ता हैं | इसके अलावा कुछ घरों में भी लोग टी बैग का इस्तेमाल करने लगे हैं |

हालांकि स्थानीय मार्केट में इस उत्पाद की बिकने की संभावनाओं को तलाशने के लिए उद्यमी को उस क्षेत्र में स्थित व्यवसायिक गतिविधियों का आकलन करना होगा और यह भी पता करना होगा की उस क्षेत्र विशेष में Tea Vending machine का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या कितनी है |

टी बैग बनाने का बिज़नेस कैसे करें?

मार्केट रिसर्च है जरुरी :

यह व्यापार शुरू करने से पहले व्यक्ति को चाहिए की वह मार्केट रिसर्च करे क्योंकि यह उत्पाद एक ऐसा उत्पाद है जो लोगों की दैनिक आवश्यकता से जुड़ा हुआ नहीं है | बल्कि कुछ घरों एवं कार्यालयों में ही अभी तक इसका इस्तेमाल देखा गया है | इसलिए उद्यमी को यह पता करना होता है की कौन कौन सी ऐसी कम्पनियाँ हैं जो उसके उत्पाद को खरीद सकती हैं | इस रिसर्च में कंपनीयों सम्बन्धी सभी डिटेल्स शामिल होनी चाहिए और यह भी शामिल होना चाहिए की उद्यमी इन कंपनियों को अपना उत्पाद खरीदने के लिए कैसे राजी करेगा |

Tea Bag Making Business हेतु आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन:

जहाँ तक Tea bag Making Business शुरू करने के लिए स्थानीय नियमों की बात है यह राज्य एवं शहर के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं | लेकिन शुरूआती तौर पर उद्यमी चाहे तो अपने बिज़नेस को One Person Company के तहत रजिस्टर कर सकता है | जानिए भारत में अपनी कंपनी कैसे खोलें? अपने बिज़नेस को रजिस्ट्रेशन करा लेने के बाद उद्यमी को अपने व्यापार को वर्तमान कर प्रणाली के अंतर्गत भी पंजीकृत कराना पड़ सकता है |

जानिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई कैसे कर सकते हैं | हालांकि यह सब करने से पहले उद्यमी को अपने व्यापार के नाम से पैन कार्ड एवं चालू खाता खोलना पड़ सकता है | जानिए किसी भी बिज़नेस के लिए चालू खाता कैसे खोलें? इन सबके अलावा उद्यमी चाहे तो अपने Tea bag making Business को उद्योग आधार के तहत भी पंजीकृत करा सकता है |

टी बैग बनाने के लिए आवश्यक मशीनरी उपकरण एवं कच्चा माल:

Tea Bag making Business में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की बात करें तो इसके मुख्य रूप से दो अवयव होते हैं इनमे एक तो खुली चाय पत्तियां होती हैं दूसरा कच्चा माल खाद्य वर्ग से सम्बंधित प्लास्टिक, पेपर फ़िल्टर बैग होते हैं | उद्यमी को चाहिए की वह Tea bag का निर्माण करने के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त चाय की खरीदारी करे इसके लिए उद्यमी चाहे तो सीधे चाय की नीलामी में जाकर चाय खरीद सकता है या फिर किसी ऐसे चाय प्रसंस्कृत इकाई से चाय खरीद सकता है जो किफायती दरों पर उसे चाय बेच दे |

यह चाय अनेकों प्रकार जैसे दार्जीलिंग टी, ग्रीन टी, हर्बल टी में आती है | इसलिए उद्यमी को स्थानीय मांगों को आधार मानकर चाय का चुनाव करना चाहिए | Tea Bag बनाने वाली मशीन जिन्हें Tea bag making machine के नाम से जाना जाता है ये मार्केट में मैन्युअल से लेकर आटोमेटिक कार्यशैली के साथ उपलब्ध है शुरूआती दौर में उद्यमी चाहे तो किसी सस्ती सी Tea Bag making Business का चुनाव अपने व्यापार के लिए कर सकता है | हालांकि कच्चे माल के तौर पर उद्यमी को पैकेजिंग मटेरियल की भी आवश्यकता होगी |