ब्याने से पहले पशुओं की देखभाल और खुराक के संबंधी जानकारी जरूरी पढ़े

यह जानकारिया पशु के ब्याने से पहले पता होनी चाहिए

ब्याने से पहले दुधारू पशुओं की देखभाल और खुराक के संबंधी जानकारी होनी बहुत जरूरी है। पशुओं को अपने शरीर को सेहतमंद रखने के अलावा, दूध देने के लिए और अपने पेट में पल रहे कटड़े/ बछड़े की वृद्धि के लिए खुराक की जरूरत होती है।

यदि गाभिन पशु को आवश्यकतानुसार खुराक ना मिले, तो इनकी अगले ब्याने में दूध देने की क्षमता कम हो जाती है और कमज़ोर कटड़े/बछड़े पैदा होते हैं जो कि इन बीमारियों का अधिक शिकार होते हैं।

  • ब्याने से कुछ दिन पहले यदि आप पशु को सरसों का तेल देते हो तो प्रतिदिन 100 ग्राम से अधिक नहीं देना चाहिए।
  •  ब्याने से 4-5 दिन पहले पशुओं को कब्ज नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा हो तो अलसी का दलिया देना चाहिए।

  • यदि पशु खुले स्थान में हों, तो उन्हें ब्याने से 15 दिन पहले बाकी पशुओं से अलग कर दें और साफ सुथरे कीटाणु रहित कमरे में रखें।
  • पशु से अच्छा व्यवहार करना चाहिए और दौड़ाना नहीं चाहिए और ना ही ऊंची नीची जगहों पर जाने देना चाहिए।
  • गर्भावस्था के आखिरी महीने में दुधारू पशुओं के हवानों को हर रोज़ कुछ मिनटों के लिए अपने हाथ से सिरहाना चाहिए ताकि उन्हें इसकी आदत पड़ जाए।

  • इस तरह करने से इनके ब्याने के उपरांत दूध निकालना आसान हो जाता है।
    ब्याने वाले पशु को हर रोज़ दिन में 5-7 बार ध्यान से देखना चाहिए।
  • पशुओं को हर रोज़ धातुओं का चूरा 50-60 ग्राम और 20-30 ग्राम नमक आदि भी देना चाहिए।

पशु खरीदने जा रहे हैं तो रखें इन बातों का ध्यान ,नहीं तो हो सकते है ठगी का शिकार

ज्यादातर पशुपालक दूसरे राज्यों से महंगी कीमत पर दुधारू पशु तो खरीद लेते हैं। लेकिन बाद में पता चलता है कि दूध का उत्पादन उतना नहीं हो रहा जितना बिचौलिए या व्यापारी ने बताया था और कई बार पशु को कोई गंभीर बीमारी होती है जो कभी ठीक नहीं हो सकती ऐसे में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी होता है।

ऐसे में आप निचे दी हुई बातों का ध्यान रख कर ठगी से बच सकते है और आपको सही नस्ल का पशु चुनने में भी आसानी होगी

शारीरिक बनावट : अच्छे दुधारू पशु का शरीर आगे से पतला और पीछे से चौड़ा होता है। उस के नथुने खुले हुए और जबड़े मजबूत होते हैं। उस की आंखें उभरी हुई, पूंछ लंबी और त्वचा चिकनी व पतली होती है। छाती का हिस्सा विकसित और पीठ चौड़ी होती है। दुधारू पशु की जांघ पतली और चौरस होती है और गर्दन पतली होती है। उस के चारों थन एकसमान लंबे, मोटे और बराबर दूरी पर होते हैं।

दूध उत्पादन कूवत : बाजार में दुधारू पशु की कीमत उस के दूध देने की कूवत के हिसाब से ही तय होती है, इसलिए उसे खरीदने से पहले 2-3 दिनों तक उसे खुद दुह कर देख लेना चाहिए. दुहते समय दूध की धार सीधी गिरनी चाहिए और दुहने के बाद थनों को सिकुड़ जाना चाहिए।

आयु : आमतौर पर पशुओं की बच्चा पैदा करने की क्षमता 10-12 साल की आयु के बाद खत्म हो जाती है। तीसरा चौथा बच्चा होने तक पशुओं के दूध देने की कूवत चरम पर होती है, जो धीरे धीरे घटती जाती है। दूध का कारोबार करने के लिए 2-3 दांत वाले कम आयु के पशु खरीदना काफी फायदेमंद होता है। पशुओं की उम्र का पता उन के दांतों की बनावट और संख्या को देख कर चल जाता है।

2 साल की उम्र के पशु में ऊपर नीचे मिला कर सामने के 8 स्थायी और 8 अस्थायी दांत होते हैं। 5 साल की उम्र में ऊपर और नीचे मिला कर 16 स्थायी और 16 अस्थायी दांत होते हैं। 6 साल से ऊपर की आयु वाले पशु में 32 स्थायी और 20 अस्थायी दांत होते हैं।

वंशावली : पशुओं की वंशावली का पता लगने से उन की नस्ल और दूध उत्पादन कूवत की सही परख हो सकती है। हमारे देश में पशुओं की वंशावली का रिकार्ड रखने का चलन नहीं है, पर बढि़या डेरी फार्म से पशु खरीदने पर उस की वंशावली का पता चल सकता है।

प्रजनन : सही दुधारू गाय या भैंस वही होती है, जो हर साल 1 बच्चा देती है। इसलिए पशु खरीदते समय उस का प्रजनन रिकार्ड जान लेना जरूरी है। प्रजनन रिकार्ड ठीक नहीं होने, बीमार और कमजोर होने से पाल नहीं खाने, गर्भपात होने, स्वस्थ बच्चा नहीं जनने, प्रसव में दिक्कतें होने जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।

बहुत ही कम ख़र्चे में फसल काटती है यह मिनी कंबाइन ,जाने पूरी जानकारी

भारत में अब भी गेहूं जा दूसरी फसलें काटने का काम हाथ से ही होता है क्योंकि भारत में किसानो के पास जमीन बहुत ही कम है और वो बड़ी कंबाइन से फसल कटवाने का खर्च नहीं उठा सकते इस लिए अब एक ऐसी कंबाइन आ गई है जो बहुत कम खर्च में फसल काटती है ।

साथ ही अब बारिश से ख़राब हुई फसल वाले किसानो को घबरने की जरूरत नहीं क्योंकि अब आ गई है मिनी कंबाइन Multi Crop हार्वेस्टर यह कंबाइन छोटे किसानो के लिए बहुत फयदेमंद है इस मशीन से कटाई करने से बहुत कम खर्च आता है और फसल के नुकसान भी नहीं होता।

बड़ी कंबाइन से फसल का बहुत ही नुकसान होता है । लेकिन इस मशीन के इस्तेमाल करने के बहुत से फायदे है जैसे यह बहुत कम जगह लेता है ।साथ में इस कंबाइन से आप गिरी हुई फसल भी फसल को नुकसान पहुंचाए बिना अच्छे तरीके से काट सकते है ।

अगर जमीन गीली भी है तो भी हल्का होने के कारण यह कंबाइन गीली जमीन पर आसानी से चलती है ज़मीन में धस्ती नहीं । छोटा होने के कारण हर जगह पर पहुँच जाता है । यह मशीन 1 घंटे मे 2 एकड़ फसल की कटाई करती है ,यह मशीन एक दिन मे 14 एकड़ तक फसल की कटाई करती हैऔर इसमें अनाज का नुकसान भी बहुत कम होता है।इस से आप बाकी की अनाज फसलें जैसे गेहूं ,धान,मक्का अदि भी काट सकते है ।

यह कंबाइन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

अगर आप इस कंबाइन को खरीदना चाहते है तो नीचे दिए हुए पते और नंबर पर संपर्क करें

Address–  Karnal -132001 (Haryana), India
phone -+91 184 2221571 / 72 / 73
+91 11 48042089
Email-exports@fieldking.com

गोशाला ने बनाया अनोखा गमला, पौधे को खाद देने की जरूरत नहीं, जाने कैसे करता है काम

हमारी संस्कृति में गाय को माता कहा जाता है। गाय एक ऐसी पालतु पशु है जिससे मिलने वाला हर एक उत्पाद हमारे लिए उपयोगी होता है। गाय के गोबर से लोग कंडे और खाद बनाते हैं, लेकिन यहां इसका ऐसा उपयोग हो रहा है जिसे देखकर लोग दंग हैं।

इस गौशाला में गायों के गोबर से अनूठी कलाकृतियां तैयार हो रही हैं। घरेलू उत्पाद बन रहे हैं और गोबर गैस सहित खाद भी बनाई जा रही है। इस गौशाला का बहुउपयोगी मॉडल पूरे देश के लिए आदर्श बन सकता है।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर भलेसर स्थित श्री वेदमाता गायत्री गौशाला में नए-नए प्रयोग कर गोबर से कई अनूठे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जो नरवा-गरवा-घुरवा-बारी मॉडल दिया है उस पर यह गौशाला वर्षों से काम कर रही है।

गौमूत्र से अर्क, फिनाईल, मच्छर भगाने के केमिकल बनाने, मोबाइल रेडियेशन कम करने के स्टिकर से लेकर कई तरह की औषधियां बनाने का काम यहां होता है। यही नहीं गोबर से गोबर गैस, कण्डे, गमले, माला, चूड़ी, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गौर गणेश, कान की बालियां सहित 19 तरह के उत्पादों का निर्माण यहां हो रहा है। कुशल कारीगर बखूबी अपने हुनर से लोगों को आश्चर्यचकित कर रहे हैं।

गमला ऐसा कि पौधे में खाद डालने की जरूरत नहीं

गौशाला की कर्मचारी दुर्गा औसर बतातीं है कि गोबर से निर्मित ऐसा गमला है जिसमें पौधे को अलग से खाद देने की जरूरत नहीं है। पौधे के साथ थोड़ी मिट्टी डालें और हर दिन थोड़ा पानी। गमले से ही पौधे की खाद की जरूरत पूरी होगी।

खुद से तैयार की गमले बनाने की मशीन

गौशाला कर्मचारी ईश्वरी जोशी कहती हैं कि बाजार में गोबर का गमला बनाने के लिए मशीन नहीं मिली तब यहां के कर्मचारियों ने खुद से मशीन बनाई। यह मशीन और यहां के बने उत्पाद देखने बड़ी संख्या में किसान और कृषि के विद्यार्थी पहुंचते हैं।

यह मशीन जो जमीन समतल करने के साथ फालतू मिट्टी भरे सीधा ट्रॉली में

अच्छी खेती के लिए जरूरत होती है उबड़-खाबड़ रहित यानी समतल जमीन की। कुदरती तौर पर समतल जमीन का मिलना लगभग असंभव है, ऐसे में इस तरह की जमीन हासिल करना कृषकों के लिए बेहद कड़ी चुनौती होती है।

इसी चुनौती को आसान बनाने में अहम योगदान दिया है किसान रेशम सिंह और कुलदीप सिंह ने जिन्होंने लैंड लेवलर कम लोडर मशीन यानी जमीन को समतल करने सह लोड करनेवाली मशीन बनाई जो ट्रैक्टर संचालित मशीन है।

लैंड लेवलर कम लोडर मशीन

  • स्क्रैपर ब्लेड की मदद से मिट्टी की कटाई, कनवेयर की मदद से मिट्टी या बालू को जमा कर ट्रैक्टर में रखना
  • कनवेयर की मदद से मिट्टी या बालू को जमा कर ट्रैक्टर में जमा करना
  • यह एक वक्त में 3 ईंच तक गहरी खुदाई कर सकता है
  • यह एक मिनट में 11गुना 6 गुना 2.25 फीट आकार के ट्रेलर को भर सकता है(मिट्टी कम कड़ा होने पर एक मिनट से कम वक्त लगता है)-(मिट्टी कम कड़ा होने पर एक मिनट से कम वक्त लगता है)
  • 50 एचपी या अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर में काम कर सकता ह – इसे भी किसी ट्रैक्टर से जोड़ा जा सकता है
  • एक घंटा में पांच से सात लीटर डीजल की खपत
  • मशीन से 4 फीट की चौड़ाई में खुदाई, साढ़े आठ फीट की ऊंचाई से मिट्टी गिराना
  • नोट- यह दावा किया जाता है कि दोनों मशीन से औसतन एक दिन में एक बीघा (5 एकड़) जमीन को समतल किया जा सकता है।

मशीन की तकनीक-

  • संवाहक पट्टिका (कनवेयर) में एक जोड़ा चेन होता है, यह एक वक्त में चार ईंच गहरी कटाई कर सकता है और 11 गुना, 6 गुना और 2.25 फीट के आकार के ट्रेलर को महज दो मिनट में भर सकता है।
  • इस मशीन का इस्तेमाल करने के दौरान ट्रैक्टर प्रति घंटा पांच से छह लीटर डीजल की खपत करता है।
  • मशीन में 4 ईंच तक की गहराई तक काटने की क्षमता और साढ़े आठ फीट की ऊंचाई से बालू गिराने की क्षमता है।

मशीन से जुड़ी मुख्य बातें-

  • कुछ क्षेत्रों में इस मशीन से बड़ी संभावनाएं हैं जैसे कि कनाल के पानी के लिए मिट्टी की कटाई, साथ ही सड़क और आवास निर्माण।
  • एक अनुमान के मुताबिक यह मशीन एक दिन में एक बीघा (5 से 8 एकड़) जमीन से 150 ट्रेलर बालू हटा कर समतल कर सकता है।
  • इसे किराये पर भी लगाया जा सकता है, इसके लिए दो वर्ग फीट गहरी खुदाई प्रति दो रुपये के हिसाब से दर तय की जा सकती है। जो बालू काट कर निकाला गया है उसे प्रति ट्रेलर 250 से 300 रुपये की दर से बेचा जा सकता है।
  • मशीन की कीमत- 1,50,000 रुपये (एक्स-फैक्ट्री, पैकेजिंग)। कीमत में परिवहन खर्च और कर इत्यादि शामिल नहीं।

यह मशीन कैसे काम करती है इसकी वीडियो देखें

और जानकारी के लिए इन से संपर्क करें

Resham Singh Virdi
Address -Jaideep Agriculture Works, Sangriya Road,
Bus Stand, Satipura, Hanumangarh,Rajsthan
Mobile: 09414535570

Kuldeep Singh
S/o Navrang Singh,Kanluall Chehllan,
Tehsil:Budhlada,Dis:Mansa,Punjab
Mobile: 9417629090, 9501286161

20 लाख वाली नौकरी छोड़ यह शख्स कर रहा है खेती, सिर्फ 2 एकड़ में 30 लाख रु. से ज्यादा कमाई होने की उम्मीद

इंदौर. महाराष्ट्र के महाबलेश्वर और हिल स्टेशन का फल माने जाने वाली स्ट्रॉबेरी अब मालवा के खेतों में भी उग रही है। यह कारनामा कर दिखाया है निजी बैंक की 20 लाख रुपए सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ किसान बने इंदौर के सुरेश शर्मा ने। उनका दावा है कि जिस तरह से फसल आ रही है, उससे वे दो एकड़ में लगाए पौधों से इस साल 30 लाख रुपए से ज्यादा की स्ट्रॉबेरी पैदा करेंगे।

 महाबलेश्वर के किसानों से समझी ये पद्धति

गेहूं, चने और सोयाबीन की रिकॉर्ड खेती वाले इलाके में स्ट्रॉबेरी की खेती का आइडिया शर्मा को अपनी पिछले साल की महाबलेश्वर की यात्रा से मिला। वहां घूमने के दौरान जगह-जगह इसकी बिक्री के साथ उन्होंने कई सौ एकड़ के खेत देखे, जहां इसे उगाया जा रहा था। वहीं मन में विचार आया कि कैसे भी हो, इसकी खेती इंदौर में भी करेंगे। चूंकि यह फसल पूरी तरह मौसम पर निर्भर होती है, शर्मा ने इसका विस्तृत अध्ययन किया और वहां के किसानों से इसकी खेती की पद्धति भी समझी।

इस साल करीब 30 लाख की स्ट्रॉबेरी

इंदौर में सांवेर बायपास के पास जमीन खरीदी और दो एकड़ में महाबलेश्वर से लाए करीब 50 पौधे रोपे। शर्मा बताते हैं, महाबलेश्वर क्षेत्र में किसान एक से डेढ़ किलो प्रति पौधा उत्पादन लेते हैं। यहां 700 ग्राम प्रति पौधा उत्पादन होने का अनुमान है। मौसम में आए उतार-चढ़ाव के चलते स्ट्रॉबेरी में समय से पहले फल आ गए हैं, जिससे वे थोड़ा चिंतित भी हैं। फिर भी अनुमान है कि वे इस साल करीब 30 लाख की स्ट्रॉबेरी उगा लेंगे।

यह आशंका… रतलाम में सफल नहीं

मूलतः उत्तर अमेरिका और यूरोप में होने वाली स्ट्रॉबेरी भारत में अभी तक देहरादून, नैनीताल, दार्जिलिंग, झारखंड, पंजाब, महाराष्ट्र के महाबलेश्वर या कश्मीर क्षेत्र में ही होती थी। कुछ साल पहले रतलाम, मंदसौर में किसानों ने इसके पौधे रोपे थे, लेकिन प्रयोग सफल नहीं हुआ। शर्मा इस लिहाज से खुद को सफल मान रहे हैं।

व्यावसायिक उत्पादन में यह है समस्या

व्यावसायिक उत्पादन में समस्या यह है कि अच्छे आकार के फल तो बाजार में खप सकते हैं, छोटे आकार की स्ट्रॉबेरी के लिए कोई प्रोसेसिंग सेंटर ही नहीं है। शर्मा कहते हैं इंदौर में अच्छा फूड प्रोसेसिंग सेंटर बन जाए तो स्ट्रॉबेरी के कारण मालवा के किसानों की हालत बदल सकती है।

कद्दू के बीज से आप सिर्फ 90 दिनों में इस तरह कमा सकते हैं 1 लाख रुपए

अगर आपके पास खेती करने के लिए अच्छी खासी जमीन है और इससे आप खूब पैसे कमाना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए काफी फायदेमंद है। यूं तो वआप अपनी जमीन पर बहुत सी चीजें उगा सकते हैं.

लेकिन आज हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे यदि आप अपनी जमीन पर बोएंगे तो लाखों रुपए कमा सकते हैं। तो यदि आप भी अपनी जमीन से लाखों रुपए कमाना चाहते हैं तो आप कद्दू की फसल उगा सकते हैं।

एक एकड़ जमीन में लगभग 2.5 क्विंटल तक बीज तैयार हो सकता है

इसके लिए आपको एक एकड़ जमीन में फसल उगाने के लिए 1 किलो बीज की जरूरत होगी। यह बीज किसानों को लगभग 5 हजार रुपए किलो के हिसाब से मिलने का अनुमान है। एक एकड़ जमीन में लगभग 2.5 क्विंटल तक बीज तैयार होगा। लेकिन अगर फसल का ध्यान रखा जाए तो यग क्विंटल तक हो सकती है।

एक एकड़ में 1 लाख रुपए तक की कमाई

अगर आप बाजार में इसके बीज को 400 रुपए किलो के हिसाब से बेचते हैं तो एक एकड़ में 1 लाख रुपए तक की कमाई हो सकती है। अच्छी बात यह है कि इस फसल के लिए आपको ज्यादा इंतेजार नहीं करना पड़ेगा।

फसल मात्र 90 दिनों के अंदर तैयार हो जाएगी। यदि आप कद्दू के बीज का तेल भी निकालकर पैसे कमाना चाहते हैं तो इसमें से 27 प्रतिशत तक तेल निकलता है।

1 मीटर लंबे बैंगन से लेकर 86kg का कद्दू उगा चुका है यह शख्स,72 साल के इस शख्स को लोग बुलाते हैं ‘गोभी मैन’

सीकर (राजस्थान) जिले के अजीतगढ़ निवासी किसान जगदीश प्रसाद पारीक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया। 72 साल के पारीक को खेती में नए प्रयोग करने को लेकर इस अवार्ड से नवाजा गया है।

गौरतलब है कि पारीक सब्जियों की नई किस्म तैयार करने से लेकर किसान भाइयों को ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी प्रदेश का नाम ऊंचा किया है। पारीक को कृषि वैज्ञानिक का दर्जा भी प्राप्त है।

खेती में बना चुके हैं कई रिकॉर्ड

पारीक अपने खेत में 25 किलो ढाई सौ ग्राम वजनी गोभी का फूल, 86 किलो कद्दू, 6 फीट लंबी घीया, 7 फीट लंबी तोरिया, 1 मीटर लंबा 2 इंच बैंगन, 5 किलो गोल बैंगन, ढाई सौ ग्राम मोटा प्याज, साढ़े तीन फीट लंबी गाजर और एक पेड़ से 150 मिर्ची तक उगा चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक किस्में फूलगोभी की हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें ‘गोभी मैन’ कहकर भी बुलाते हैं।

49 साल से कर रहे ऑर्गेनिक खेती

बता दें कि 72 साल के पारीक 1970 से ही ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं।  उन्होंने गोभी से इसकी शुरुआत की और इसकी किस्मों को लेकर कई नए प्रयोग किए। पारीक ने गोभी का आधा व पौने एक किलो का फूल उगा कर सबको चौंका दिया था। दिलचस्प बात यह है कि पारीक ने इन फूलों को उगाने के लिए जैविक खाद का इस्तेमाल किया था।

पैदा कर चुके गोभी का बीज

कृषि वैज्ञानिक पारीक गोभी का बीज भी पैदा कर चुके हैं। वे खुद के द्वारा उगाए गोभी बड़े फूलों को पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, अब्दुल कलाम, प्रणब मुखर्जी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, पूर्व राज्यपाल मार्गेट अल्वा को भेंट कर चुके हैं।

मिल चुका है ये सम्मान

पारीक को पद्मश्री के अलावा 2000 में श्रुति सम्मान और 2001 में फर्स्ट नेशनल ग्रास रूट इनोवेशन अवार्ड मिल चुका है। 2001 में ही 15 किलो वजनी गोभी का फूल उगाने के लिए लिम्का बुक में भी इनका नाम दर्ज हो चुका है।

छह बार राष्ट्रपति भवन के कार्यक्रमों में शिरकत कर चुके हैं। वहीं, सबसे वजनी गोभी का फूल उगाने के मामले में विश्व रिकॉर्ड में दूसरे पायदान पर हैं। केवल साढ़े आठ सौ ग्राम से इनकी गोभी पिछड़ गई।

कपास किसानों के लिए खुशखबरी! सरकार ने बीटी कपास के बीज की कीमत में की कटौती, 80 लाख किसानों को होगा फायदा

केंद्र सरकार ने बीटी कपास के बीजों के अधिकतम बिक्री मूल्य में कटौती कर दी है, इससे देश भर के लगभग 80 लाख कपास किसानों को फायदा मिलने की संभावना है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचिना के अनुसार 450 ग्राम वाले बीटी कपास (बॉलगार्ड-II) के पैकेट के भाव को घटाकर 730 रुपये (इसमें 20 रुपये रॉयल्टी समेत) कर दिया गया है।

फसल सीजन 2018-19 में बीटी कपास बीजों का अधिकतम बिक्री मूल्य 740 रुपये प्रति पैकेज था, जिसमें 39 रुपये रॉयल्टी शुल्क शामिल था। अत: आगामी खरीफ बुवाई सीजन के समय किसानों को 2018 सीजन की तुलना में 10 प्रति पैकेट कम भुगतान करना होगा।

चालू फसल सीजन के लिए रॉयल्टी को 39 रुपये से घटाकर 20 रुपये प्रति पैकेट कर दिया है। अत: घरेलू बीज कपंनियों को भी इससे लाभ मिलेगा, उन्हें डेवलपर को रॉयल्टी शुल्क के रुप में प्रति पैकेट 19 रुपये कम देने होंगे।

बीटी कपास बीज के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को कम करने के लिए स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) सहित कई संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि रॉयल्टी शुल्क को पूरी तरह से हटा दिया जाए ताकि किसानों को कपास बीज के उंची क़ीमतों का ‘अनावश्यक बोझ’ न उठाना पड़े।

फसल सीजन 2016-17 में पहली बार घटाये थे दाम

केंद्र द्वारा दिसंबर 2015 में गठित एक पैनल द्वारा कपास बीज मूल्य नियंत्रण आदेश के तहत बीटी कपास बीजों के दाम पहली बार 2016-17 में घटाए गए थे। पैनल ने 830-1,030 रुपये के पुराने दाम घटाकर प्रति पैकेट 800 रुपये कर दिए थे।

इसी तरह प्रति पैकेट 163 रुपये रॉयल्टी वैल्यू को लगभग 70 फीसदी घटाकर 49 रुपये कर दिया गया था।यह कदम मई 2016 में जारी प्रारूप के दिशा-निर्देशों के बाद उठाया गया था, जिसमें रॉयल्टी वैल्यू को बीज के बिक्री मूल्य के 10 फीसदी पर सीमित कर दिया गया था और इसके बाद समय-समय पर इसे कम किया गया।

पंजाब के किसान ने त्यार की नदीन निकालने वाली हैरो डिस्क,यहाँ से खरीदें

खेती में नदीन फसल को बहुत नुक्सान पहुंचते है । अगर यह बेकाबू हो जाए तो फसल का उत्पादन आधे से कम रह जाता है ।इस लिए इन्हे शुरुआत में ही काबू करना जरूरी है । लेकिन नदीनों पर काबू करने के लिए नदीननाशक के इलावा यंत्र का भी उपयोग किया जा सकता है ।

नदीननाशक का उपयोग इस लिए कम करना चाहिए क्योंकि इसका असर मुख्या फसल पर भी होता है और धीरे धीरे नदीनों की सहनशीलता बढ़ने लग जाती है और सारी नदीननाशक दवाएं बेअसर हो जाती है । इस लिए सबसे बेहतर यही होता है नदीनों का ख़ात्मा किसी यंत्र की मदद से किया जाए ।

डिस्क हैरो के बारे में हम सब जानते है । इसका इस्तेमाल ट्रेक्टर के साथ खेत में फसल अवशेषों को मिट्टी के अंदर गलाने के लिए किया जाता है । लेकिन अब एक ऐसे हैरो डिस्क आ गए है जिनका इस्तमाल हाथ से किया जाता है और इसके इस्तमाल से हम बड़ी आसानी से नदीनों को साफ़ कर सकते है ।

डिस्क हैरो को पंजाब के गुरमीत सिंह गांव बसिया, तहसील रायकोट , जिला लुधिआना द्वारा त्यार किया गया है । हैरो डिस्क के इलावा गुरमीत सिंह खेतीबाडी मे हाथ से इस्तेमाल होने वाले यंत्र बनाते है । हैरो डिस्क की कीमत 2800 रुपए है, गुरमीत सिंह का फ़ोन नंबर 82888 -72484 है , अगर कोई इसको खरीदना चाहता है तो इस नंबर पर सम्पर्क कर सकता है ।