जाने यूरिया के ईस्तमाल से पराली को प्रोटीन पशु खुराक बनाने का तरीका

पशुओं के लिए तूड़ी/पराली को यूरिया से उपचार करने का तरीका भैंसों/गायों के रोयों में स्थित सूक्ष्म जीव यूरिया को तोड़कर अपनी जीव प्रोटीन बनाने के लिए प्रयोग कर लेते हैं जो पशु की ज़रूरतों को पूरा करती है।

इसलिए पशुओं के वितरण में 1 प्रतिशत यूरिये का प्रयोग करने से वितरण में यूरिया अच्छी तरह मिक्स होना चाहिए और यूरिया की डलियां नहीं होनी चाहिए। पशुओं के चारे के लिए यदि तूड़ी/पराली को यूरिये से उपचार करके प्रयोग करते हैं तो तूड़ी/ पराली के खुराकी गुणों में वृद्धि की जा सकती है और उपचारित पराली को सूखे तौर पर प्रयोग करके पशुओं की खुराक में प्रोटीन की कमी को दूर भी किया जा सकता है।

यूरिये से कैसे उपचारित की जाये तूड़ी?

तूड़ी/पराली को यूरिये से उपचार करने के लिए 4 क्विंटल तूड़ी या कुतरी हुई पराली लें और इसे ज़मीन पर बिछा लें। फिर 14 किलो यूरिये को 200 लीटर पानी में घोल लें और तूड़ी/पराली पर छिड़क लें ताकि सारी तूड़ी/पराली गीली हो जाये।

अच्छी तरह मिलाने के बाद इसे दबाकर 9 दिनों के लिए रखें। 9 दिनों के बाद उपचारित की हुई तूड़ी तैयार हो जाती है। यह गुणकारी और नर्म हो जाती है।

किस तरह खिलानी है?

खिलाते समय तूड़ी को एक तरफ से ही खोलें और कुछ देर हवा लगने दें। यदि हवा नहीं लगवाते तो अमोनिया गैस जो बनी होती है वह पशु की आंखों में चुभने लगती है। फिर पशु को थोड़ा थोड़ा रिझाओ। उपचारित तूड़ी को प्रति 4 किलो के हिसाब से हरे चारे में मिलाकर बड़े पशुओं को खिलई जा सकती है।

नोट – इसका प्रयोग, घोड़े, सुअरों और 6 महीने से कम उम्र के पशुओं के लिए ना किया जाये

स्त्रोत – गुरू अंगद देव वैटनरी यूनिवर्सिटी, लुधियाना

नौकरी के साथ बतख पालन से भी कमा रहा है लाखों,

ज्यादातर लोग नौकरी करके ही अपना घर चलाते हैं। बढ़ती महंगाई, महंगी होती शिक्षा को देखते हुए अब कमाई बढ़ाने के लिए लोग नौकरी के साथ-साथ पार्ट टाइम बिजनेस पर जोर दे रहे हैं। हरियाणा के निवासी विकास कुमार ऐसे ही एक उदाहरण हैं जिन्होंने नौकरी के साथ बतख पालन शुरू किया और अब वह इससे मंथली लाखों में कमाई कर रहे हैं। आइए जानते हैं विकास के सफर के बारे में…

करनाल के रहने वाले विकास कुमार ने बातचीत में बताया कि वो एक प्राइवेट बैंक में लोन डिपार्टमेंट में नौकरी करते हैं। नौकरी के साथ उन्होंने बतख पालन का काम शुरू किया, जिससे उनकों लाखों में इनकम हो रही है। उन्होंने बतख पालन शौकिए के तौर पर शुरू किया था। लेकिन सरकार की मदद से यह अब बड़े बिजनेस में तब्दील हो गया है।

कैसे की शुरुआत

सरकार का मिला साथ पढ़ाई पूरी करने के बाद विकास खेती-बाड़ी में जुट गए। खेती-बाड़ी में काम करते हुए वो बिजनेस अपॉर्चुनिटी की तलाश में थे। इस दौरान उन्हें सरकार का एक विज्ञापन दिखा और उसके बाद उनकी लाइफ निकल पड़ी।

एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस स्कीम को कैंडिडेट्स की जरूरत थी। उन्होंने इसके लिए अप्लाई किया और फिर इंटरव्यू और स्क्रीनिंग के बाद ट्रेडिंग प्रोग्राम के लिए उनका सेलेक्शन हुआ। यहां उन्हें बतख पालन के बारे में जानकारी मिली। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने विकास डक फार्म की नींव रखी।

पार्ट टाइम है बतख पालन का काम विकास ने कहा कि वो एक प्राइवेट बैंक के लोन डिपार्टमेंट में नौकरी करते हैं। जहां उनकी मंथली सैलरी 17 हजार रुपए है। नौकरी के साथ वो बतख पालन का भी काम करते हैं। करीब 4 हजार रुपए में उन्होंने 50-60 बतख से इसकी शुरुआत की थी। अब उनके फार्म में बतख की संख्या बढ़कर 4 हजार तक हो गई है। इसके अलावा वो खेती भी करते हैं।

ऐसे होती है कमाई

विकास ने बताया कि बतख पालन से वो सालाना 10 लाख रुपए तक आमदनी कर लेते हैं। वो कहते हैं कि सर्दियों में बतख के अंडे की डिमांड ज्यादा होती है। एक अंडे की कीमत 10 से 11 रुपए होती है। इसके अलावा बतख के बच्चे निकालते हैं।

जिसको वो बाजार में बेचते हैं। बतख की मांस बाजार में 350 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकती है। वो गोरखपुर औऱ हिमाचल प्रदेश में बतख की सप्लाई करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बतख पालन पर तीन दिवसीय ट्रेनिंग मॉड्यूल पैकेज बनाया है और वो गांव के 6 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।

दो महीने की पढ़ाई के बाद शुरू करें एग्रो बिज़नेस ,सरकार देगी लोन और सब्सिडी भी

दो महीने की पढ़ाई के बाद अपना बिजनस शुरू करने के लिए 20 लाख रुपये तक का लोन। सोने पर सुहागा यह कि सरकार इस लोन पर सब्सिडी देगी और बिजनस के लिए तकनीकी सहयोग भी मिलेगा। खेती से जुड़े व्यासाय करने के इच्छुक लोगों के लिए ऐसे ही कोर्स के लिए केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सिश), रहमानखेड़ा में केंद्र सरकार ने ऐग्रीक्लीनिक ऐंड ऐग्रीबिजनस (एसीएबी) सेंटर शुरू करने की मंजूरी दे दी है।

उत्तर भारत में पहला सेंटर

सिश में खेती और ऐग्री बिनजनेस से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं तो पहले से चलते रहते हैं। पहली बार डिप्लोमा कोर्स के लिए नया सेंटर स्थापित करने के लिए केंद्र ने मंजूरी दी है। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार बताते हैं कि उत्तर भारत में यह पहला इस तरह का सेंटर खुलेगा। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ प्रांतों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। अब हमारे संस्थान ने भी केंद्र से इस तरह के सेंटर की मांग की थी जो मंजूर हो चुका है।

इंटरव्यू से होगा 35 सीटों पर चयन

डॉ. अशोक ने बताया कि यह दो महीने का कोर्स होगा। इसमें खेती और औद्यानिक फसलों के रख-रखाव के साथ ही उससे जुड़े बिजनस का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें अभी 35 सीट की मंजूरी दी गई है। जो भी आवेदन आएंगे, उनमें से इंटरव्यू के आधार पर 35 लोगों का चयन किया जाएगा। इंटरव्यू बोर्ड में हमारे संस्थान के वैज्ञानिकों के अलावा राज्य सरकार के अधिकारी और अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। दो महीने के इस कोर्स में रोजाना सुबह 9:30 बजे से 5:30 बजे तक क्लास चलेंगी।

बिजनस के दौरान भी तकनीकी सहयोग

कोर्स पूरा होने के बाद सभी प्रशिक्षितों से उनके बिजनस प्लान के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) मांगी जाएगी। उसके आधार बैंक लोन दिलाने में मदद की जाएगी। साथ ही अन्य तकनीकी सहयोग का अनुबंध भी होगा। इस तरह बिजनस शुरू करने पर उसे तकनीकी और वित्तीय सहयोग  मिलता रहेगा। इस लोन पर सामान्य, ओबीसी और एससी- एसटी कैटिगरी में 30 से 44 फीसदी तक सब्सिडी भी मिलेगी। अगर पांच लोग समूह बनाकर कोई बिजनस करना चाहते हैं तो 1 करोड़ तक का लोन मिल सकेगा।

मैनेज ने भी ट्रेनिंग के लिए अधिकृत किया

राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान (मैनेज) हैदराबाद ने सर्टिफाइड फार्मर्स अडवाइजर की ट्रेनिंग के लिए भी सिश को अधिकृत किया है। मैनेज से कोर्स करने के बाद खासतौर से बागवानी और फलों से जुड़े व्यवसाय की ट्रेनिंग के लिए 15 दिन के लिए अभ्यर्थी यहां आएंगे। उसके बाद इन्हें बतौर कृषि शिक्षक विभिन्न संस्थानों में रखा जा सकेगा।

अब नहीं रही नया ट्रेक्टर खरीदने की जरूरत , इस ऐप से फ़ोन पर ही होगा बुक

किसानों को खेती का काम करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के ट्रैक्टर का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खेती के लिए ट्रैक्टर के साथ ही दूसरे उपकरण भी किराए पर बुक किया जा सकेंगे। इसके लिए टेक कंपनी एरिस ने हैलो ट्रैक्टर एप लॉन्च किया है।इस खबर में हम आपको बता रहे हैं कि टैक्टर मोबाइल ऐप क्या है और किसान इसका किस तरह फायदा उठा सकते हैं।

कहां के किसानों को मिलेगा लाभ ?

इस सेवा का लाभ उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों के किसानों को मिल सकेगा। अभी हरियाणा और पंजाब में कंपनी सेवाएं नहीं दे रही है क्योंकि वहां पहले ही यह सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनियां हैं और किसानों के पास संसाधन समुचित हैं।

विदेश में सेवा दे रही है कंपनी

उद्योग संगठन फिक्की द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कंपनी ने मंगलवार को हैलो ट्रैक्टर एप की शुरुआत की। कंपनी ने दावा किया है कि वह किसानों को किराए की सस्ती दर पर ट्रैक्टर समेत अन्य उपकरण मुहैया कराएगी।

फिक्की के मुताबिक यह कंपनी नाइजीरिया में पहले से ऐसी सेवाएं दे रही है। जहां सफलता मिलने के बाद सरकार से मंजूरी मिलने पर उसने देश में यह शुरुआत की है। कंपनी के अध्यक्ष ऋषि मोहन भटनागर के मुताबिक देश में 63 फीसदी किसानों के पास ढाई एकड़ से कम की जमीन है। जबकि 90 फीसदी किसानों के पास 5 एकड़ से कम जमीन है। ऐसे में ट्रैक्टर खरीदना उनकी क्षमता से बाहर है।

क्या होगा फायदा

फिक्की की आईसीटी समिति के अध्यक्ष अंबरीश का कहना है कि इस सेवा से किसान समय पर अपने खेत की जुताई-बुवाई करवा सकेंगे। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। देश की सरकार लगातार निजी क्षेत्र की सहायता से किसानों को राहत मुहैया कराने का प्रयास कर रही है। अब वैश्विक कंपनियां भी ये सेवाएं किसानों को मुहैया कराने के लिए भारत का रुख कर रही हैं।

अन्य कृषि उपकरणों की सेवा भी देंगे

कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि वह ट्रैक्टरों से अपनी सेवाएं शुरू करने जा रही हैं। जल्द ही बाकी कृषि उपकरण जैसे सीडर, कंबाइनर, थ्रेशर, चॉपर जैसी सेवाओं को भी इसके दायरे में लेकर आएगी। गौरतलब है कि नीति आयोग ने किराये पर खेती के उपकरण मुहैया कराने की योजना को बढ़ावा देने की योजना तैयार की थी। लगातार सरकार की अनुमति पर निजी क्षेत्र की कंपनियां इस मुहिम में शामिल हो रही हैं।

गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर लें ऐप

हैलो ट्रैक्टर ऐप को गूलग प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। किसान ओला और उबर कैब की तरह ही ट्रैक्टर को बुक कर सकते हैं। निश्चित समय में ट्रैक्टर किसान के पास पहुंच जाएगा और किसान उससे खेती का काम कर सकेंगे। इससे किसानों का समय पर काम होगा और ट्रैक्टर के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

यह है चौरस गड्डा खोदने वाली मशीन ,ज्यादा जानकारी के लिए वीडियो पर क्लिक करें

गड्ढा खुदाई यंत्र (post hole digger) :- यह एक औगर (auger) युकत यंत्र है, जिसका प्रयोग पौधा लगाने हेतु गड्ढा खोदने में किया जाता है | यह ट्रैक्टर के पी.टी.ओ. द्वारा संचालित एवं उसके थ्री प्वाईंट लिंकेज द्वारा जुड़ा एक अटैचमेन्ट है |

औगर एसेम्बली को बदलकर गड्ढे के ब्यास एवं उसकी गहराई को परिवर्तित किया जा सकता है | मशीन का वजन 150 – 240 कि.ग्रा. होता है एवं इसे 35 एच.पी. ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है | मशीन के गड्ढा बनाने की क्षमता 90 गडढे प्रति घंटा होती है |

ज्यादातर होल डिगर गोल गड्डा खोदते है लेकिन अब एक ऐसा होल डिगर (गड्डा खोदने वाला) आ गया है जिस से आप चौरस आकार का गड्डा खोद सकते है |

इसका फ़ायदा ये होता है जब हम कोई दीवार के लिए पिलर त्यार करना होता है जा फिर ऐसे ही पिलर बनाना होता है तो उसका आकार चौरस ही होता है ऐसे में इस मशीन की सहयता से हम बड़ी आसानी से गड्डा खोद सकते है

वीडियो देखे :

इस राज्य के किसानों को मिलेगा धान की फसल पर 300 रूपये का बोनस

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किसानों को लुभाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने धान की खरीद पर 300 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रमन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में धान की फसल पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ ही बोनस देने का फैसला किया।

पहली नवंबर से शुरू होगी धान की खरीद

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने एक नवंबर 2018 से शुरू हो रही धान खरीद के दौरान किसानों को धान के एमएसपी के साथ-साथ 300 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि इस बार किसानों को धान पर लगभग 2,400 करोड़ रुपये का बोनस मिलेगा। खरीफ विपणन सीजन 2018-19 के लिए केंद्र सरकार ने ए-ग्रेड धान का एमएसपी 1,770 रुपये और कॉमन ग्रेड धान का एमएसपी 1,750 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

किसानों को आॅनलाइन होगा भुगतान

राज्य सरकार की और से 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने पर किसानों से धान की खरीद क्रमशः 2,070 रुपये और 2,050 रुपये की दर से की जायेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राथमिक सहकारी समितियों के उपार्जन केंद्रों में धान बेचने वाले किसानों को एमएसपी सहित बोनस की राशि ऑनलाइन दी जाएगी, जो सीधे उनके खाते में जमा हो जाएगी।

2,400 करोड़ का आयेगा खर्च

मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके लिए 2,400 करोड़ रुपये की राशि की जरूरत पड़ेगी और इसके लिए अनुपूरक बजट लाना होगा।

ये है सब्जियों और फलों के ऊपर स्प्रे करने का सबसे बढ़िया यंत्र

जैसे नाम से ही पता चलता है कि मैन्गो मास्टर एक ब्लास्ट स्प्रेयर है जो सब्जियों और फलों के ऊपर स्प्रे करने के लिए इस्तेमाल होता है । इस स्प्रेयर से आप आम, संतरा ,किन्नू और दूसरे जो ऊंचे फलों वाले पेड हैं उनके ऊपर स्प्रे कर सकते हैं ।

मैन्गो मास्टर की खासियत ये है कि ये एक साथ सभी जगह पर एक जैसी स्प्रे करता है । मैन्गो मास्टर को चलने के लिए आप 35 HP से लेकर 55 HP ट्रैक्टर का इस्तेमाल कर सकते हैं । इसकी टंकी की क्षमता 1500 लीटर होती है और यह 60 से 70 फ़ीट ऊँचे पेड़ पर भी स्प्रे कर सकता है ।

मैन्गो मास्टर बड़े बगीचे के लिए ज्यादा कामयाब है , यदि बाग़ बहुत छोटा हो, , तो यह वहां पर इतना कामयाब नहीं है । यह मशीन सभी तरह की बग समस्या निवारण में सक्षम है । इसके प्रयोग से Mites, Wasps जैसे सभी तरह की बग समस्या से निजात पाया जा सकता है ।

इसके Foging से,पौधे के आस पास कोहरे का कवर तैयार हो जाता है. जिससे कीड़ा का खात्मा हो जाता है । इसे सब्जी के बगीचा में पौधे को पोषक तत्व के छिड़काव एवं लॉन में उर्वरक की फाेगींग के लिए कर सकते हैं ।

और जानकारी के लिए वीडियो भी देखें

अगर आप इसे खरीदना चाहते है जा और जानकारी के लिए निचे दिए हुए पते पर संपर्क करें

CALL AT +91 22 6700 0557
EMAIL AT INFO@MITRAWEB.IN

Nashik Address

11, Bhandari Plaza,Mumbai-Agra Highway
Pimpalgaon Baswant ,Tal. Niphad, Dist. Nashik
Maharashtra – 422209

Baramati Address

Indapur Baramati road,Near Mahalaxmi macchi khanawal,
Motibag- Baramati.Tal – Baramati, Dist- Pune
Maharashtra – 413102

लौकी की हर एक बेल देगी 400 लौकी ,बस करना होगा यह छोटा सा काम

लौकी के एक ही पौधे से सामान्या से ज्यादा उत्पादन भी लिया जा सकता है। अमूमन एक बेल 50-100 या 150 तक फल देती है। अगर एग्रो टेक्नीक की मदद ली जाए तो एक ही बेल से सैकड़ों लौकियां ली जा सकती हैं।पंजाब से बाहर के प्रदेशों में लौकी की खेती करने वाले किसान इस तकनीक से ज्यादा फसल उगा रहे हैं। मनुष्य की तरह ही सब्जियों में भी नर और मादा होते हैं, लेकिन लौकी इसका अपवाद है। इसकी बेल में नर फूल ही होते हैं। लौकी में तकनीक का इस्तेमाल करने पर ही उसमें मादा फूल आते हैं। इस तकनीकि का नाम है 3 जी।

बागबानी के वैज्ञानिक राजीव ने बताया कि लौकी की बेल में नर फूल रोकने के लिए एक नर फूल छोड़कर बाकी सार तोड़ दें। अब उस शाखा को किसी लकड़ी से बांध दीजिए ताकि वो चलती रहे। ध्यान रखें तीन से ज्यादा शाखाएं न होने दें। अब कुछ दिन के बाद बेल से तीसरी शाखा निकलने लगेगी। अब इस शाखा के हर पत्ते में मादा फूल आएगा। यही मादा फूल फल में बदल जाएगा। मादा फूल की पहचान के लिए बता दें कि यह कैप्सूल की लंबाई में होगा। इस तरीके को अपना कर लगभग 300 से 400 तक लौकी एक बेल में आएंगी।

इसका रखें ध्यान…

हर 21वें पौधे में नर फूल को ना तोड़ें

ध्यान रहे कि 20 लौकी के पौधे में यह प्रक्रिया अपनाने के बाद 21वें में न अपनाएं। इसके बाद 22वें फिर से दोहराते जाइए। मान लीजिए कि एक हेक्टेयर में 500 लौकी के पौधे लगाए हैं तो 20 पौधों के बाद 21वें पौधे पर यह प्रक्रिया न अपनाएं। ऐसा इसलिए ताकि मादा को पनपने के लिए नर फूल जरूर रहें।लौकी के एक ही पौधे से सामान्या से ज्यादा उत्पादन भी लिया जा सकता है।

अमूमन एक बेल 50-100 या 150 तक फल देती है। अगर एग्रो टेक्नीक की मदद ली जाए तो एक ही बेल से सैकड़ों लौकियां ली जा सकती हैं।पंजाब से बाहर के प्रदेशों में लौकी की खेती करने वाले किसान इस तकनीक से ज्यादा फसल उगा रहे हैं। मनुष्य की तरह ही सब्जियों में भी नर और मादा होते हैं, लेकिन लौकी इसका अपवाद है। इसकी बेल में नर फूल ही होते हैं। लौकी में तकनीक का इस्तेमाल करने पर ही उसमें मादा फूल आते हैं। इस तकनीकि का नाम है 3 जी। बागबानी के वैज्ञानिक राजीव ने बताया कि लौकी की बेल में नर फूल रोकने के लिए एक नर फूल छोड़कर बाकी सार तोड़ दें।

अब उस शाखा को किसी लकड़ी से बांध दीजिए ताकि वो चलती रहे। ध्यान रखें तीन से ज्यादा शाखाएं न होने दें। अब कुछ दिन के बाद बेल से तीसरी शाखा निकलने लगेगी। अब इस शाखा के हर पत्ते में मादा फूल आएगा। यही मादा फूल फल में बदल जाएगा। मादा फूल की पहचान के लिए बता दें कि यह कैप्सूल की लंबाई में होगा। इस तरीके को अपना कर लगभग 300 से 400 तक लौकी एक बेल में आएंगी।

यह है ट्रेक्टर से चलने वाली मिनी कंबाइन ,पूरी जानकारी के लिए वीडियो पर क्लिक करें

भारत में फसल कटाई का काम कंबाइन से किया जाता है । कंबाइन चलाना बहुत ही मुश्किल काम होता है लेकिन अब ये काम बहुत आसान होने वाला है ।भारत में अब ऐसी कंबाइन आ चुकी है जिसे चलाना बहुत ही आसान है। कोई भी किसान इस कंबाइन को खुद चला सकता है । यह कंबाइन Gahir Agro Industries Limited द्वारा त्यार की गई है ।

इस कंबाइन का नाम Nippy 45 है । यह ट्रेक्टर से चलने वाली छोटी कंबाइन है ।इस कंबाइन की क्वालिटी बहुत ही बढ़िया है और इसके रख-रखाव का खर्च भी बहुत कम है । इसको चलाने के लिए कम से कम 45 डबल क्लच ट्रेक्टर जा उस से ऊपर की जरूरत पड़ती है । इस मशीन के कटर का साइज़ 7.5 फ़ीट है ।

वीडियो देखे

New Mini Combine Harvester on the Name of “NIPPY-45” Launched by Gahir Agro Industries.

Posted by Gahir Agro Industries Limited on Sunday, August 5, 2018

इसके अनाज निकलने वाले पाइप से किसी भी तरफ से अनाज निकला जा सकता है ।यह मिनी कंबाइन चलने मैं बहुत लाजवाब है और बहुत कम कीमत पर फसल काटती है । अगर आप इस मशीन की कीमत जा किसी प्रकार की और जानकारी चाहते है तो इस नंबर 097799 11580 पर संपर्क कर सकते है ।

बहुत ही कम ख़र्चे में फसल काटती है यह मिनी कंबाइन ,जाने पूरी जानकारी

भारत में अब भी गेहूं जा दूसरी फसलें काटने का काम हाथ से ही होता है क्योंकि भारत में किसानो के पास जमीन बहुत ही कम है और वो बड़ी कंबाइन से फसल कटवाने का खर्च नहीं उठा सकते इस लिए अब एक ऐसी कंबाइन आ गई है जो बहुत कम खर्च में फसल काटती है ।

साथ ही अब बारिश से ख़राब हुई फसल वाले किसानो को घबरने की जरूरत नहीं क्योंकि अब आ गई है मिनी कंबाइन Multi Crop हार्वेस्टर यह कंबाइन छोटे किसानो के लिए बहुत फयदेमंद है इस मशीन से कटाई करने से बहुत कम खर्च आता है और फसल के नुकसान भी नहीं होता।

बड़ी कंबाइन से फसल का बहुत ही नुकसान होता है । लेकिन इस मशीन के इस्तेमाल करने के बहुत से फायदे है जैसे यह बहुत कम जगह लेता है ।साथ में इस कंबाइन से आप गिरी हुई फसल भी फसल को नुकसान पहुंचाए बिना अच्छे तरीके से काट सकते है ।

अगर जमीन गीली भी है तो भी हल्का होने के कारण यह कंबाइन गीली जमीन पर आसानी से चलती है ज़मीन में धस्ती नहीं । छोटा होने के कारण हर जगह पर पहुँच जाता है । यह मशीन 1 घंटे मे 2 एकड़ फसल की कटाई करती है ,यह मशीन एक दिन मे 14 एकड़ तक फसल की कटाई करती हैऔर इसमें अनाज का नुकसान भी बहुत कम होता है।इस से आप बाकी की अनाज फसलें जैसे गेहूं ,धान,मक्का अदि भी काट सकते है ।

यह कंबाइन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

अगर आप इस कंबाइन को खरीदना चाहते है तो नीचे दिए हुए पते और नंबर पर संपर्क करें

Address–  Karnal -132001 (Haryana), India
phone -+91 184 2221571 / 72 / 73
+91 11 48042089
Email-exports@fieldking.com