आप भी धूप या अगरबत्ती बनाकर सालाना तीन लाख रुपए तक कर सकते है कमाई, सरकार भी दे रही है मदद

धूप या अगरबत्तियों का उपयोग घरेलू वातावरण को पवित्र और पूजा करने में होता है। यही वजह है कि भारत में इसकी डिमांड इतनी ज्यादा है कि आयात करना पड़ता है। आयात भी थोड़ा बहुत नहीं बल्कि चार हजार करोड़ रुपए का है। यह भी तब जबकि अगरबत्ती को घर बैठे बनाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अगरबत्ती समेत कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने का ऐलान किया है।

आपको बता रहा है कि कैसे धूप अगरबत्ती का बिजनेस कम पैसों में शुरू कर सालाना तीन लाख रुपए कमाए जा सकते हैं।केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के राष्ट्रीय सम्मेलन शुक्रवार को में कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र में कॉरपोरेट एवं निजी कंपनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध हटा दिया गया है।

इससे 700 एमएसएमई क्लस्टर के निर्माण का रास्ता साफ होगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही रोजगार भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए हम 4,000 करोड़ रुपये की अगरबत्तियों का आयात करते हैं जबकि उन्हें यहीं बनाया जा सकता है। इसके लिए निर्यात संवर्धन करने की जरूरत है और यह एमएसएमई क्षेत्र को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। यह भी पढ़ें : शहरों में अनार, अदरक व अमरूद के फ्लेवर में मिलेगा महुआ ड्रिंक

अगरबत्ती बनाने की मशीन की कीमत

भारत में अगरबत्ती बनाने की मशीन की कीमत 35000 रुपए से 175000 रुपए तक है। इस मशीन से आप 1 मिनट में 150 से 200 अगरबत्ती तक बना सकते हैं। अगरबत्ती बनाने में कई तरह की मशीनें काम में लाई जाती हैं। इनमें मिक्सचर मशीन, ड्रायर मशीन और मेन प्रोडक्शन मशीन शामिल है। मिक्सचर मशीन कच्चे माल का पेस्ट बनाने के काम आता है और मेन प्रोडक्शन मशीन पेस्ट को बांस पर लपेटने का काम करता है।

अगरबत्ती बनाने की मशीन सेमी और पूरी ऑटोमेटिक भी होती है। अगरबत्ती बनाने वाली ऑटोमैटिक मशीन से काम स्टार्ट करें क्योंकि ये बहुत तेजी से अगरबत्ती बनाती है। ऑटोमैटिक मशीन की कीमत 90000 से 175000 रुपए तक है। एक ऑटोमैटिक मशीन एक दिन में 100 kg अगरबत्ती बन जाती है। मशीन का चुनाव करने के बाद इंस्टॉलेशन के बजट के हिसाब से मशीनों के सप्लायर से डील करें और इंस्टॉलेशन करवाएं. मशीनों पर काम करने की ट्रेनिंग लेना भी आवश्यक है।

 कच्चे माल की सप्लायर्स से करें संपर्क

मशीन इंस्टॉलेशन के बाद कच्चे माल की सप्लाई के लिए मार्केट के अच्छे सप्लायरों से संपर्क करें। अच्छे सप्लायरों की लिस्ट निकालने के लिए आप किसी अगरबत्ती उद्योग में पहले से बिजनेस करने वाले लोगों से मदद ले सकते हैं। कच्चा माल हमेशा जरूरत से थोड़ा ज्यादा मंगाए क्योंकि इसका कुछ हिस्सा वेस्टेज में भी जाता है। अगरबत्ती बनाने के लिए सामग्री में गम पाउडर, चारकोल पाउडर, बांस, नर्गिस पाउडर, खुशबूदार तेल, पानी, सेंट, फूलों की पंखुडिय़ां, चंदन की लड़की, जिलेटिन पेपर, शॉ डस्ट, पैकिंग मटीरियल आदि शामिल हैं।

पैकेजिंग को आकर्षक बनाएं

आपका उत्पाद आपकी डिजाइनर पैकिंग पर बिकता है। पैकिंग के लिए किसी पैकेजिंग एक्सपर्ट से सलाह लें और अपनी पैकेजिंग को आकर्षक बनाएं। पैकेजिंग के द्वारा लोगों के धार्मिक मनोस्थिति को छूने की कोशिश करें। अगरबत्तियों की मार्केटिंग करने के लिए अखबारों, टीवी में एड दे सकते हैं। इसके अलावा अगर आपका बजट इजाजत देता हो तो कंपनी की ऑनलाइन वेबसाइट बनाएं और अपने विभिन्न उत्पादों की मार्केटिंग करें।

1 मिनट में 200 अगरबत्ती का कर सकते है निर्माण 

अगरबत्ती के निर्माण का समय आपके द्वारा इस्तेमाल की गयी मशीन के अनुसार अलग हो सकता है जैसे की अगर आप ऑटोमेटिक मशीन का इस्तेमाल कर रहे है तो आप 1 मिनट में 150 से 200 अगरबत्ती तक का निर्माण कर सकते है. यदि आप हाथों से इसका निर्माण कर रहे है या करा रहे है तो इसमें लगने वाला समय आपके या कर्मचारी के कार्य करने की क्षमता पर निर्भर करता है।

 कुल लागत

इस बिजनेस को आप 13,000 रुपए की लागत के साथ घरेलू तौर पर भी हाथों से निर्माण कर शुरू कर सकते है, लेकिन अगर आप अगरबत्ती के बिजनेस को मशीन बैठाकर शुरू करने की सोच रहे है तो इसको शुरू करने में लगभग 5 लाख रुपए तक की लागत लग सकती है।

अगरबत्ती को बनाने में लगने वाली कच्ची सामग्रियां उसकी मात्रा और उसके बाजार मूल्य को नीचे संदर्भित किया गया है जिसे जरूरत के अनुसार आप इसकी मात्रा को घटा या बढ़ा कर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकते है।

चारकोल डस्ट 1 किलो ग्राम 13 रुपये, जिगात पाउडर 1 किलो ग्राम 60 रुपए, सफ़ेद चिप्स पाउडर 1 किलो ग्राम 22 रुपए, चन्दन पाउडर 1 किलो ग्राम 35 रुपए, बांस स्टिक 1 किलो ग्राम 116 रुपए, परफ्यूम 1 पीस 400 रुपए, डीईपी 1 लीटर 135 रुपए, पेपर बॉक्स 1 दर्जन 75 रुपए, रैपिंग पेपर 1 पैकेट 35 रुपए और कुप्पम डस्ट 1 किलो ग्राम 85 रुपए है।

खोलिए पीरामल की कंपनी का वाटर एटीएम, 15-20 हजार महीना तक हो सकती है कमाई

गर्मियों का मौसम आ चुका है। ऐसे में देश में पानी की मांग एक बार फिर से बढ़ने जा रही है। इस मौसम में वाटर एटीएम लगाना बिजनेस का अच्‍छा विकल्‍प हो सकता है। मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी की शादी जिस पीरामल परिवार में हुई है, उसकी एक कंपनी के साथ साथ मिलकर भी आप वाटर एटीएम खोल सकते हैं।

खोलिए पीरामल सर्वजन का वाटर एटीएम

अब भारतीय रेलवे, मेट्रो, रोड ट्रांसपोर्ट से लेकर प्राइवेट कंपनियां भी वॉटर एटीएम इन्स्टॉल करा रही हैं। ऐसे में पीरामल सर्वजल के साथ मिलकर आप वाटर एटीएम की फ्रेंचाइजी ले सकते हैं। इसके जरिए आपको आसानी 15-20 हजार महीने कमाई हो सकती है। बता दें कि पीरामल सर्वजल पीरामल फाउंडेशन का हिस्‍सा है।

क्या है वाटर ATM ?

जिस तरह अभी पैसे निकालने के लिए जगह-जगह बैंक एटीएम लगाते हैं। उसी तरह आप वाटर एटीएम लगा सकते हैं। जिसके जरिए यूजर आसानी से शुद्ध पानी ले सकता है। यूजर वाटर एटीएम में क्वॉइन या नोट के जरिए पानी को छोटे गिलास से लेकर 20 लीटर तक के जार में ले सकता है। इस तरह के एटीएम में इनबिल्ट आरओ सिस्टम होता है।

16 राज्‍यों में कंपनी दे रही है मौका

पीरामल सर्वजल कंपनी वाटर एटीएम के लिए फिलहाल 16 राज्‍यों में फ्रेंचाइजी दे रही है। इसके तहत कंपनी ने करीब 330 वॉटर एटीएम इन्स्टॉलेशन किए हैं। मतलब अब भी कंपनी को बड़े पैमाने पर वॉटर एटीएम के लिए लोगों की जरूरत है।

शुरुआत के लिए इन चीजों की जरूरत

कम से कम 200 वर्गफुट का स्पेस होना चाहिए वाटर एटीएम के लिए कॉमर्शियल इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन वाटर एटीएम के लिए पानी की उपलब्धता जिससे उसका ट्रीटमेंट किया जा सके चिलर, डिलिवरी व्हीकल, कूल जग्स आदि होना चाहिए।

कहां मिलेगी जानकारी

अगर आप कंपनी का वाटर एटीएम लगाने के इच्‍छुक हैं तो सबसे पहले इसकी वेबाइट sarvajal.com पर विजिट करें। टॉप पर दाहिनी ओर ज्‍वाइन अस का टैब दिया हुआ है। इस टैब को क्लिक करें।

जहां आपको फ्रैंचाइजी का ऑप्‍शन मिलेगा।

ऑप्शन पर क्लिक करने के बाद नया पेज मिलेगा। यहां सभी जारूरी जानकारी मिलेगी। सबसे नीचे अप्‍लाई करने का ऑप्‍शन मिलेगा। जहां आपको अपना नाम, पता और फोन नंबर देना होगा। आप टोल फ्री नंबर 1800 103 2334 पर संपर्क कर सकते हैं।

कंपनी की ओर से मिलेगा ये सपोर्ट.

कंपनी इसके तहत इन्स्टॉलेशन असिस्टेंस देती हैं। . इसके अलावा पहले साल कंपोनेंट रिप्लेसमेंट गारंटी . हर महीने मेंटनेंस सर्विस . पहले हफ्ते कस्मटर बेस बनाने के लिए सपोर्ट करती है।खोल सकते हैं कपंनी की यूनिट इसके अलावा आप कंपनी की यूनिट भी लगा सकते हैं।

कपंनी की वेबसाइट के मुता‍बिक, अब तक वह देश में करीब 600 से ज्‍यादा यूनिट्स लगा चुकी है।  उसकी 20 लीटर वॉटर की कीमत 1 कप चाय के बराबर पड़ती है।

इन जगहों पर लगा सकते हैं वाटर ATM

बढ़ती डिमांड की वजह से वॉटर एटीएम लगाने के लिए कई ऑप्शन खुल गए हैं। ऐसे में आप इन जगहों पर वॉटर एटीएम लगा सकते हैं.

  • स्कूल
  • मार्केट
  • हाईवे पर पेट्रोल पंप्स
  • रोडसाइड रेस्टोरेंट
  • अस्पताल
  • बस स्टॉप
  • शॉपिंग मॉल
  • ऑफिस
  • टूरिस्ट प्लेस

ऐसे शुरू करें आलू पाउडर बनाने की फैक्ट्ररी, कई गुना बढ़ जाएगा मुनाफा

बाजार में आलू के भाव काफी कम है जिस कारण किसनो को हर साल बहुत नुकसान उठाना पड़ता है .कई बार तो किसानो की लाखों टन फसल सड़ जाती है इस लिए उन्हें इसे कचरे में फेकना पड़ता है .लेकिन अब आपको अपने आलूओं को कचरे में फेंकने की जरूरत नहीं , इसे पाेटैटाे पाउडर प्रोसेसिंग की कोशिश करें. इससे आलू का भाव सोने के माेल के बराबर हो सकता है.

आलू पाउडर मुख्य रूप से भोजन में एक मोटा एजेंट (thickening agent) के रूप में प्रयोग किया जाता है, किसी भी आलू पाउडर प्रसंस्करण कंपनी के लिए उचित आय प्रदान करने वाले घटक के रूप में हालिया समय में इस की लोकप्रियता बढ़ गई है।इसके कई खाद्य अनुप्रयोगों के कारण आलू एक महत्वपूर्ण खाद्य फसल है, आलू को आटा, पेस्ट, पकाया, उबला हुआ या तली में संसाधित किया जा सकता है जिससे इस फसल को बहुत मूल्यवान बनाया जा सकता है।

आलू के अन्य उपयोग मांस के व्यंजन, पिज्जा, आलू के चिप्स और सूप्स जैसे स्नैक्स में हाेता है। आलू की पोषण संबंधी संरचना में वसा, कच्चे फाइबर, राख, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का भार शामिल होता है। विनिर्माण कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि आलू आसानी से खराब हो जाते हैं और इसे उचित भंडारण और हैंडलिंग की आवश्यकता होती है। आलू की अलग-अलग किस्में हैं और ये अलग-अलग आकृति, आकार, स्वाद और सुगंध में आते हैं।

निर्माता को आलू के उत्पादन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों और पारिस्थितिकी के मूल स्रोत की जरूरत है। अपना प्रसंस्करण संयंत्र शुरू करने से पहले आपको व्यवसाय योजना लिखनी होगी।
औद्योगिक रुझानों का अध्ययन करने की कोशिश करें, एक व्यापक सर्वेक्षण करें और विपणन अनुसंधान करें। अन्य बातों में आवश्यक कार्यशील पूंजी की राशि, उपकरण, संयंत्र आकार, लाभ अनुपात, लागत और राजस्व शामिल हैं । इन सभी प्रावधानों का कार्य करना स्टार्टअप एंटरप्राइज़ के लिए एक ठोस व्यवसाय टेम्पलेट प्रदान करेगा।

आलू, पाउडर उत्पादन में प्रयु्त किए जाने वाले प्राथमिक कच्चा माल है। आलू केवल कुछ क्षेत्रों और दुनिया के निश्चित भौगोलिक क्षेत्रों में उगाए जाते हैं। यदि आप इस श्रेणी में आते हैं तो आप आलू पाउडर प्रसंस्करण कंपनी शुरू कर सकते हैं। आपके कारखाने के लिए एक अच्छा स्थान कच्चा माल के स्रोत के करीब हाेना चाहिए।

बड़े आलू बाजार या खेत के करीब उद्यम का पता लगाएं। यह रणनीति परिवहन लागत, हैंडलिंग और ईंधन को घटा देती है। यह प्रचुर मात्रा में कच्चे माल के लिए आसान और त्वरित पहुंच प्रदान करता है। आपके द्वारा चुने जाने वाले स्थान में जल, बिजली और अच्छे जल निकासी प्रणाली जैसी उपयोगिताएं होनी चाहिए।

कच्चा माल

अधिकांश पौधों की तरह ही आलू की फसल नें भी अपनी वृद्धि और फसल उपज एवं कटनी का मौसम हाेता है। इससे संयंत्र की उत्पादन क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है। कुछ कंपनियां आलू को लंबे समय तक शेल्फ लाइफ के लिए निर्जलीकृत करती हैं या आलू की छोटी गिरावट( short fall) की भरपाई के लिए आयात करती है

आलू पाउडर प्रसंस्करण के लिए इस्तेमाल मशीनरी

आलू पाउडर प्रसंस्करण कंपनियां समान उपकरण का उपयोग करती हैं उपकरण मैनुअल, अर्ध स्वचालित या पूरी तरह से स्वचालित मशीनरी हैं।कई मशीनरी स्थानीय रूप से निर्मित मशीनरी और कई शीर्ष श्रेणी के ब्रांडेड उपकरण हैं। वित्तीय क्षमता और पौधे की क्षमता के आधार पर उस प्रकार की मशीनरी खरीदी जाती है।

आलू पाउडर कंपनियां में मुख्यत

आने वाले सामान्य उपकरण जैसे भाप बॉयलर, प्यूवरइज़, ड्रायर और वजनी स्केल पर ही आधारित हाेता हैं। अन्य उपकरण आलू छीलने की मशीन, टुकड़ा करने की मशीन और सीलिंग मशीन हैं। एक मध्यम आकार की मशीनरी स्थापना से कम-से-कम रोजाना 500 किलोग्राम उत्पाद का उत्पादन होना चाहिए।

कैसे आलू पाउडर बनाए

आलू पाउडर बनाने के दो तरीके हैं पहली विधि आलू धाेना, छीलना और फिर छीलने या पीसने के लिए भट्ठी का इस्तेमाल करना है। इस विधि में उबलते पानी के बड़े ड्रम में प्रकाश से वंचित कर के सफ़ेद (Blanch)किया जाता है और डिहाइडेटर को पेश किया जाता है। एक बार डिहाइडेटर के माध्यम से आलू को कुचल दें और फिर पाउडर बनाने के लिए मिश्रण करें। पाउडर तब जाकर वायुरोधी कंटेनर में पैकेज होता है और मुहरबंद होता है।

दूसरी विधि में आलू धोने, छीलने, उबलते और मैश करना शामिल है। वे तब dehydrator के पास जाते हैं और बाद में पाउडर बनाने के लिए कुचल या मिश्रित होते हैं। निर्जलीकरण की प्रक्रिया बहुत लंबी है और इसमें कई घंटों लगते हैं।

आलू पाउडर को बेच कहाँ सकते हैं ?

आलू पाउडर निर्माताओं के लिए विशाल स्थानीय बाजार के बावजूद उत्पाद को निर्यात करना पसंद करते हैं। वे निर्यात आलू पाउडर से विदेशी मुद्रा में भारी लाभ कमाते हैं। आलू पाउडर के लिए प्रमुख आउटलेट हैं होटल, रेस्तरां, फास्ट फूड आउटलेट और खानपान स्कूल निर्माताओं क्षेत्र में सुपरमार्केट, शॉपिंग मॉल और किराने की दुकानों को बेच सकते हैं।आप अपने उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऑनलाइन बेच सकते हैं। एक वेबसाइट बनाएं और कीमतें सहित आपके उत्पाद की छवियां जोड़ें

कंपनी को पंजीकृत करें

कंपनी को पंजीकृत करें और एक व्यवसाय नाम चुनें। मानकीकरण परीक्षण के लिए अपने उत्पाद का विषय और क्लीयरेंस प्रमाणपत्र प्राप्त करें । व्यापार लाइसेंस और निर्यात लाइसेंस के लिए आवेदन करें। आपको हेथ और सुरक्षा आवश्यकताएं और खाद्य प्रहस्तक के प्रमाणन को पास करना होगा।आपके उत्पाद को मूल्य वर्धित कर के अधीन किया जा सकता है और बीमा कवर को मत भूलना हाेगा। अपने देश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए परमिट और कानूनों का पता लगाएं।

1.50 लाख लागत पर 25,000 प्रति‍माह कमाएं, सॉफ्ट ड्रिंक बि‍जनेस का सारा गणि‍त समझें

अगर आप इस गर्मी के मौसम में ठीक ठाक कमाई करना चाहते हैं तो इस बि‍जनेस के बारे में जरूर सोचें। कम लागत, कम वक्त और कम जगह, कम झंझट और बेहद कम भागदौड़ में शुरू होने वाला यह बि‍जनेस मौसम के गर्म रहने तक अच्‍छा चलता है। मौसम के तेवर तो देखकर लग रहा है कि‍ पि‍छले साल के मुकाबले तेज गर्मी बहुत जल्‍दी शुरू हो जाएगी।

इस बि‍जनेस में करीब 50 % का मार्जि‍न है, यानी अगर आपने दि‍न में 1000 रुपए का भी काम कि‍या तो 500 रुपए आपका मुनाफा हुआ। इसकी दूसरी खासि‍यत ये है कि‍ आपको इसमें बेहद कम भागदौड़ करनी है। एक जगह बैठकर काम करना है और चाहें तो आप कि‍सी को भी इसे संभालने के लि‍ए दे सकते हैं। ऐसा नहीं है कि‍ आप नहीं होंगे तो घाटा होने लगेगा।

तेजी से बढ़ रहा है

हम बात कर रहे हैं सोडा मशीन के बारे में। आपने ध्‍यान दि‍या होगा कि‍ इसका काम तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह है इसमें होने वाला मुनाफा। कई लोग इसके बारे में सोचते हैं तो मगर जानकारी के आभाव में यह फैसला नहीं ले पाते कि‍ उन्‍हें यह काम शुरू करना चाहि‍ए या नहीं।

हम आपको इस बि‍जनेस की मोटी मोटी जानकारी दे रहे हैं, जि‍सकी बदौलत आप यह फैसला कर पाएंगे कि‍ यह बि‍जनेस आप कैसे शुरू कर सकते हैं। सबसे पहले तो हम मशीन के बारे में बताते हैं। इसमें कई तरह की मशीनें आती हैं। जैसे 6 + 2 , 8+2, 10+2

क्‍या है इसका मतलब

6 + 2 का मतलब हुआ, 6 सोडा फ्लेवर नि‍कलेंगे और 2 जूस फ्लेवर। इसी तरह से 8+2 में 8 तरह के सोड़ा फ्लेवर जैसे लैमन, कोला वगैरा और 2 तरह के जूस फ्लेवर जैसे मैंगो वगैरा मि‍लेंगे। आप अपनी जगह और बजट के हि‍साब से मशीन का चुनाव कर सकते हैं।

क्‍या है मशीन की कीमत

इंडि‍या मार्ट पर मौजूद डीलर्स ने मशीनों की कीमत 50,000 से 2 लाख रुपए के बीच रखी है। हालांकि‍ इसमें भी मोलभाव करने की गुंजाइश रहती है। कुछ डीलर्स आपको शुरुआत में मशीन के साथ फ्लेवर वगैरा भी देते हैं। मशीन खरीदते वक्‍त दो तीन बातों का ध्‍यान रखें।

उसकी वारंटी या गारंटी कि‍तनी है। क्‍या वह उसे सेट करने में मदद दे रहे हैं। शुरुआत में क्‍या वो रॉ मटीरि‍यल की कि‍ट भी दे रहे हैं। कई डीलर ये सभी चीजें मुफ्त में दे देते हैं। इसलि‍ए मोलभाव करने में बि‍ल्‍कुल हि‍चकि‍चाएं नहीं।

कि‍तनी चीजों की जरूरत पड़ती है

मशीन, पानी की टंकी, पानी, सोडा गैस सि‍लेंडर, फ्लेवर, शुगर, पेपर कप। प्रोडक्ट तैयार करने के लि‍ए आपको इतनी चीजों की जरूरत पड़ती है। जगह कि‍तनी बड़ी चाहि‍ए होगी ये इस बात पर डि‍पेंड करता है कि‍ आप कि‍स साइज की मशीन ले रहे हैं। वैसे 10 बाई 10 की दुकान में बड़ी मशीन भी आसानी से सेट हो सकती है।

या है प्रॉफि‍ट की कैलकुलेशन

  • कच्‍चा माल 200 एमएल के कप की कॉस्‍ट रुपए
  • कप 0.30
  • फ्लेवर 0.25
  • गैस 0.5
  • शुगर 0.95
  • पानी 0.15
  • बि‍जली 0.18
  • मशीन की घि‍साई 0.03
  • जगह का कि‍राया 0.20
  • कुल लागत 2.46

मोटे तौर पर देखें तो 5 रुपए के गि‍लास की लागत ढाई रुपए होगी, यानी इसमें आपको 50 % का प्रॉफि‍ट है। अगर आप हर रोज 500 गि‍लास बेचते हैं तो आप हर दि‍न 2500 रुपए पाएंगे। इसमें से 1250 रुपए की कॉस्‍ट नि‍काल दें तो हर रोज 1250 रुपए की कमाई हो गई।

इस हि‍साब से महीने में आप करीब 37,500 रुपए कमा सकते हैं। अगर आप 300 गिलास भी रोज बेचते हैं तो हर महीने करीब 20,000 से 25000 रुपए कमा सकते हैं। सेल बढ़ेगी तो कमाई भी बढ़ेगी। कमाई की यह कैलकुलेशन इंडस्‍ट्री द्वारा की गई है। इसमें उतार- चढ़ाव हो सकता है।

ऑनलाइन गाय का गोबर भी बिक रहा है 100 रु किल्लो ,आप भी कर सकते है यह बिज़नेस

गोबर से बने उपलों का उपयोग विभिन्न मांगलिक कार्यों में किया जाता है. यही वजह है कि ऑनलाइन बाजार में इसकी खासी मांग बढ़ी है.

गाय के गोबर से लेकर उससे बना उपला, जिसे गोइठा और कंडा भी कहते हैं, ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर अपनी जगह बना चुका है. ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स इन कंडों को भी शानदार पैकिंग में होम डिलीवरी कर रही हैं. ईबे, शॉपक्लूज, वेदिक गिफ्ट शॉप, अमेजन आदि कई साइट्स पर कंडे बिक रहे हैं,

जहां ऑर्डर करने पर कुछ ही दिनों में उसकी डिलीवरी हो जायेगी. यही नहीं, ग्राहकों की सहूलियत के लिए कई साइट्स पर इन उपलों के आकार और वजन का भी ब्यौरा मौजूद है़ इन साइट्स पर एक दर्जन उपलों का मूल्य एक सौ रुपये से लेकर तीन सौ रुपये तक है.

दो दर्जन मंगवाने पर इन पर डिस्काउंट भी दिया जा रहा है. त्यौहारी मौसम में इन उपलों पर कई डिस्काउंट ऑफर भी दिये जाते हैं. यहां आपको उपलों की कीमत भले ही थोड़ी ज्यादा लगे, लेकिन इसके आध्यात्मिक इस्तेमाल को देखते हुए यह कीमत कुछ भी नहीं.

धार्मिक कार्यों में गाय के गोबर से स्थान को पवित्र किया जाता है. गाय के गोबर से बने उपले से हवन कुंड की अग्नि जलायी जाती है. आज भी गांवों में महिलाएं सुबह उठ कर गाय के गोबर से घर के मुख्य द्वार को लीपती हैं.

इंटरनेट पर आपको ऐसी कई वेबसाइट्स मिल जायेंगी, जो सिर्फ गौ-उत्पाद आपके द्वार तक पहुंचाने की सुविधा देती हैं. इन्हीं में से एक है ‘गौक्रांति डॉट ओआरजी’ इस साइट पर आपको गाय का गाेबर और उससे बने उपले, साबुन, भगवान की मूर्तियां, ऑर्गैनिक पेंट, हवन के लिए धूप के अलावा परिष्कृत गौमूत्र भी उपलब्ध है. यह कंपनी अपना कच्चा माल गुजरात से लेकर भोपाल तक की लगभग 15 गौशालाओं से मंगवाती है़

गाय के गोबर के उपलों का व्यापार अब वैश्विक आकार ले चुका है और खुदरा विक्रेताओं के पास इसकी डिलीवरी के लिए बड़े पैमाने पर ऑर्डर आ रहे हैं. तेजी से शहरी होती जा रही देश की आबादी के लिए अब यह सब दुर्लभ होता जा रहा है. यही वजह है कि देश और देश के बाहर खास अवसरों पर इन उपलों की मांग बढ़ रही है.

इस लिए आप भी इसका बिज़नेस शुरू कर सकते है . अगर आप गांव में रहते है तो आप को गोबर भी आसानी से मिल जएगा. गोबर को ऑनलाइन बेचने के लिए आप या तो अपनी खुद की वेबसाइट जैसे “गौक्रांति डॉट ओआरजी” बना सकते है . जा फिर जो पॉपुलर वेबसाइट जैसे ईबे, शॉपक्लूज, वेदिक गिफ्ट शॉप, अमेजन आदि है वहां पर सेलर बन कर बेच सकते है .सेलेर बनने के लिए हर वेबसाइट की अलग अलग डिमांड्स है . जिसे आप आसानी से पूरा कर सकते है .

यह बात अलग है कि ये उपले बाजार में या आपके पड़ोस में ग्वाले से मिलने वाले उपलों से महंगी कीमत पर मिलेंगे. अपनी असली कीमत से करीब पांच गुना ज्यादा दाम पर मिलने वाले ऑनलाइन गोबर के कंडे ग्राहकों से ज्यादा ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट के लिए फायदे का सौदा हैं. इनसे आप को काफी मुनाफा हो सकता है.