सिर्फ 5-10 हजार लगाकर शुरू कर सकते हैं ये 10 बिजनेस, होगी अच्छी कमाई

अगर आप भी अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन आपके पास लाखों रुपए नहीं हैं, तो परेशान होने वाली बात नहीं है। हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे बिजनेस के बारे में जो आप महज पांच से दस हजार रुपए की पूंजी लगाकर शुरू कर सकते हैं। इन व्यापारों की मार्केट में हमेशा डिमांड रहती है और इनमें आप अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं।

मोबाइल रिचार्ज और सिम कार्ड शॉप

इस बिजनेस में आपको सिर्फ 3 से 5 हजार का शुरुआती निवेश करना होगा। यह बिजनेस हमेशा मांग में रहता है। आप अपने घर में या किसी छोटी दुकान में यह बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

प्रिंटर अौर फोटो कॉपी बिजनेस

यह बिजनेस भी 4 से 5 हजार रुपए में शुरू हो सकता है। इसके लिए आपको बस एक चीज ध्यान में रखनी होगी कि जहां आप काम सेटअप करें, वहां कॉलेज हो, सरकारी दफ्तर हो या फिर कोर्ट-कचहरी हो।

शू वॉश लॉन्ड्री

अब तक सिर्फ कपड़ों की ही लॉन्ड्री शॉप हुआ करती थी, लेकिन अब ऐसी मशीनें आ गई हैं जिनसे जूतों की भी धुलाई और सफाई होती है। इस काम को शुरू करने में आपको सिर्फ 4 से 5 हजार रुपए लगाने होंगे।

ब्रेकफास्ट शॉप

चाहे कितनी भी मंदी हो या महंगाई हो जाए, लोग खाना खाना नहीं छोड़ते। ऐसे में यह बिजनेस सदाबहार है। अक्सर लोग सुबह दफ्तर के लिए जल्दी निकलने के चक्कर में नाश्ता नहीं कर पाते हैं। खासतौर से वे लोग जो अकेले रहते हैँ। ऐसे में आप ब्रेकफास्ट शॉप शुरू करके अच्छी कमाई कर सकते हैं।

मिनरल वॉटर सप्लायर

लोगों के बीच मिनरल वॉटर की डिमांड बढ़ रही है। गर्मियों में तो पानी की डिमांड और भी ज्यादा रहती है। ऐसे में आपके लिए यह बिजनेस का अच्छा ऑप्शन हो सकता है। इसे शुरू करने में आपको महज 10 हजार रुपए की पूंजी लगानी होगी।

गार्मेंट टेलर

अगर आपको सिलाई-कढ़ाई आती है तो आप अपने हुनर को कमाई का जरिया बना सकते हैं। महजह 10 हजार रुपए में आप यह व्यापार शुरू कर सकते हैं। इसमें आपको बस अपना हुनर बढ़ाना है और कमाई अपने आप बढ़ने लगेगी।

कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स की बिक्री

लोगों के बीच फास्ट फूड काफी लोकप्रिय है। ऐसे में आप 8 से 10 हजार रुपए में यह बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

प्लांट नर्सरी

अपने घरों की बालकनी में पौधे लगाना लोगों को पसंद होता है। अब तो इनडोर प्लांट्स का चलन भी काफी बढ़ गया है। ऐसे में प्लांट नर्सरी एक अच्छा बिजनेस हो सकता है। इस बिजनेस को 10 हजार रुपए में आराम से शुरू कर सकते हैं।

इस बिजनेस से 1.5 लाख रुपए महीना कमा सकते हैं आप, जानें पूरा प्रोसेस

अगर आप घर बैठे कम पैसे में ज्‍यादा प्रॉफिट के बारे में सोच रहे हैं तो चप्‍पल बनाने का कारोबार आपके लिए बेहतरीन मौके दे सकता है। इस बिजनेस की खास बात यह है कि चाहे गांव हो या शहर हर जगह चप्‍पलों की डिमांड होती है।

आप इसे किसी छोटी जगह पर भी शुरू कर सकते हैं और डिमांड बढने के साथ साथ इसे आसानी के साथ बढ़ा सकते हैं। आम तौर पर इस बिजनेस में लगभग 2 लाख रुपए की लागत आती है। काम चल गया तो आप डेढ़ लाख रुपए महीने तक भी कमा सकते हैं।

आइए जानते हैं इस बिजनेस से जुड़ी बातों के बारे में…

बिजनेस शुरू करने के लिए जरूरी चीजें

  •  सोल कटिंग मशीन: 70 हजार से शुरू
  •  सोल प्रिंटिंग मशीन: 20 हजार से शुरू
  • ग्राइंडिंग मशीन: 8 हजार से शुरू

रॉ मैटेरियल

  • शीट: 300 से 750 रुपए प्रति
  • स्ट्रिप (फीता): 5 रुपए प्रति पेयर

ऐसे तैयार होती है चप्‍पल

आप चप्‍पल बनाने का काम घर पर या किसी छोटे कॉमर्शियल स्‍पेस में शुरू कर सकते हैं । इसके लिए आपको एक दो तीन छोटी मीशीनों की ही जरूरत होती है। सबसे पहले आपको रबर शीट को किसी खास नंबर के सांच में डाल कर सोल कटिंग मशीन में काटना होता है।

सामान्‍य मशीन में कटिंग के साथ चप्‍पल की स्ट्रिप के लिए सुराख भी हो जाता है। आप ग्राइंडिंग मशीन से चप्‍पल के खुरदुरे हिस्‍सों को चिकना कर सकते हैं। इसके बाद नंबर के हिसाब से स्ट्रिप डाल दें। बस आपकी चप्‍पल तैयार हो गई।

कितनी कमाई ?

आमतौर पर एक जोड़ी चप्‍पल की लागत 20 से 30 रुपए के बीच आती है। वहीं इन्‍हें आप थोक में आसानी से 40 से 50 रुपए में आसानी से बेच सकते हैं। बिजली समेत अन्‍य खर्चों को निकाल दिया जाए तो एक चप्‍पल पर मैन्‍युफक्‍चरर को 10 रुपए का मुनाफा होता है।

मशीन एक घंटे में करीब 80 चप्‍पलें तैयार कर देती है। दिन के आठ घंटों में करीब 640 जोड़ी चप्‍पलों का प्रोडक्‍शन हो सकता है। इसमें आपको करीब 6400 रुपए की इनकम होती है। हफ्ते में दिन प्रोडक्‍शन के हिसाब से यह इनकम 38,400 रुपए और महीने में करीब 1.5 लाख ठहरती है।

कैसे कराएं रजिस्‍ट्रेशन ?

अगर आप छोटे लेवल पर चप्‍पलें बनाकर खुद ही मार्केट में बेचना चाहते हैं तो आप घर पर छोटी मशीन लगाकर शुरू कर सकते हैं। हालांकि अगर आपको बड़े लेवल पर कारोबार शुरू करना है तो आपको अपने बिजनेस को एमएसएमई के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन या उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

इसके अलावा आपको अपने ब्रांड का पंजीकरण दाखिल कराना होगा। साथ ही ट्रेड लाइसेंस, फर्म का चालू खाता, पैन कार्ड आदि की भी जरूरत पड़ेगी। उद्योग आधार रजिस्टेशन होने पर आप स्लीपर मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के लिए मुद्रा लोन भी हासिल कर सकते हैं।

कहां से लें ट्रेनिंग ?

ट्रेनिंग के लिए आप खादी ग्रामो उद्योग से संपर्क कर सकते है। आप kvic.org.in पर विजिट करके ट्रेनिंग से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा आप अपने क्षेत्र के जिला उद्योग केंद्र से भी संपर्क कर सकते हैं। यहां आपको ट्रेनिंग और बिजनेस से जुड़ी सारी जानकारी मिल जाएगा।

कहां से खरीदें रॉ मैटेरियल ? ​

आप अपने आस-पास के बड़े इंडस्ट्रियल क्षेत्रों जैसे यूपी में कानपुर, गाजियाबाद, पंजाब में लुधिआना, दिल्‍ली, मुंबई, इंदौर जैसे शहरों मशीनों और रॉ मैटेरियल की खरीददारी कर सकते हैं।

अगर ज्‍यादा जानकारी नहीं है तो आप अलीबाबा होल सेल और इंडिया मार्ट जैसी वेबसाइट पर भी आसानी के साथ मशीन और रॉ मैटेरियल सेलर्स से कॉन्‍ट्रैक्‍ट कर सकते हैं।

पराली एवं जंगली बीजों से बनेगी बायो सीएनजी गैस, आपको भी मिल सकता है इस बिजनेस का मौका

सरकार ने पराली एवं जंगली बीजों से बायो सीएनजी तैयार करने का फार्मूला तैयार कर लिया है। इसका सफल परीक्षण भी हो चुका है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक छोटे शहर एवं कस्बे तक में बायो सीजन प्लांट लगाने की योजना है ताकि पराली एवं बीज जैसे कच्चे माल की आपूर्ति आसानी से हो सके।

जल्द ही इस मामले में स्कीम की घोषणा की जा सकती है। मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक छोटे शहर स्तर पर प्लांट लगने से प्लांट में रोजगार निकलने के साथ पराली व बीज सप्लाई जैसे रोजगार के कई मौके निकलेंगे। इस प्रकार के प्लांट लगाने के काम में निजी कंपनियों के भी सहयोग लिए जा सकते हैं।

1 किलो बायो सीएनजी बनाने के लिए 7 किलो पराली

मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक एक किलोग्राम बायो सीएनजी बनाने में सात किलो पराली की जरूरत होगी और कुल लागत 25 रुपए आएगी। नागपुर में किसानों की एक सोसायटी यह प्रयोग कर रही है।

परिवहन मंत्रालय के मुताबिक पराली एवं जंगली बीजों से बनने वाली सीएनजी की खपत छोटे शहर व गांव स्तर पर करने के लिए ट्रैक्टर एवं अन्य गाड़ियों के लिए सीएनजी किट का निर्माण करवाने का फैसला किया गया है। देश के सभी ट्रैक्टर में बायो सीएनजी किट लगाने की योजना है। इस किट की कीमत 30,000 रुपए होगी।

जंगली बीज की खेती से कमा सकेंगे लाखों

नितिन गडकरी के मुताबिक जंगली बीज की खेती करके लाखों रुपये कमा सकते हैं। सरकार इन बीजों से बायो-फ्यूल तैयार करेगी जिससे हवाई जहाज तक उड़ेंगे। अभी हवाई जहाज उड़ाने के लिए भारत सालाना लगभग 30,000 करोड़ रुपये के फ्यूल का आयात करता है।

सरकार आने वाले चार-पांच सालों में इस आयात की राशि को कम से कम 10,000 करोड़ कम करना चाहती है। इसकी भरपाई के लिए देश में बायो जेट फ्यूल बनाए जाएंगे।

कैसे होगी जंगली बीज से लाखों की कमाई

गडकरी के मुताबिक गैर खाद्य तेल वाले जंगली बीज से बायो जेट फ्यूल का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है। देश के वैज्ञानिकों ने इसे तकनीकी रूप से साबित कर दिया है।

इन बीजों में मुख्य रूप से रतनजोत, मोह, साह, टोली नामक जंगली बीज है जो उड़ीसा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र व झारखंड जैसे इलाकों में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि जट्रोफा का उत्पादन देश में कम है, इसलिए फिलहाल उससे इस्तेमाल के लायक बायो जेट फ्यूल बनाना मुमकिन नहीं है।

क्या होगी कीमत

गडकरी के मुताबिक इन जंगली बीज को 10-12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से सरकार खरीदेगी। 3 किलोग्राम से एक लीटर फ्यूल का उत्पादन किया जा सकेगा। अभी एयलाइंस कंपनियां लगभग 70 रुपये प्रति लीटर की दर से फ्यूल की खरीदारी करती है। अगर हम इन कंपनियों को 52 रुपये प्रति लीटर देंगे तो कंपनियों को भी फायदा होगा और किसानों को भी।

सरकार आने वाले वर्षों में अपने आयात बिल को कम करना चाहती है। इसलिए सरकार चाहती है कि हवाई जहाज के फ्यूल के आयात बिल में 10,000 करोड़ तक कमी लाए जाए।

Mi गाँव और शहरों में खोल रही है स्टोर, 10 लाख से कम लागत मे इस तरह करे शुरुआत

अगर आप भी कम बजट में कोई बिजनेस शुरू करने का मन बना रहे हैं तो बेहतरीन मौका है. भारत में अपने कारोबार को मजबूत बनाने के लिए चाइनीज स्मार्टफोन निर्माता कंपनी शाओमी लगातार निवेश कर रही है. कारोबार का और अधिक विस्तार करने के लिए शाओमी ने साल 2019 के अंत तक 5 हजार मी स्टोर्स (Mi Store) खोलने की प्लानिंग की है. इन स्टोर के खोले जाने से करीब 15 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा.

एक गांव में हो सकते हैं दो मी स्टोर

इस बारे में शाओमी ग्लोबल के वाइस प्रेसीडेंट और शाओमी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मनु कुमार जैन ने बताया कि ‘मी स्टोर का एवरेज साइज 300 वर्ग फीट का है, जिसमें मी होम स्टोर का औसत आकार 1,200 वर्गफीट का है. एक गांव में अधिकतम दो मी स्टोर्स हो सकते हैं.’ अगर आप भी स्टोर खोलने के इच्छुक हैं तो कंपनी की वेबसाइट पर जाकर मी स्टोर्स फ्रेंचाइजी एप्लीकेशन फार्म भरना होगा.

एप्लीकेशन फार्म भरने के लिए क्लिक करें

आप भी फ्रेंचाइजी एप्लीकेशन फार्म को भरना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें. फॉर्म में आपको स्टोर का नाम, पार्टनर का नाम के अलावा स्टोर की हाइट (फीट में), फ्रंट साइज, स्टोर के कार्पेट एरिया और स्टोर टाइप के बारे में भी जानकारी देनी होगी. फॉर्म को भरने पर आपसे कंपनी की तरफ से संपर्क किया जाएगा. इसके बाद यदि आप शार्टलिस्ट हो जाते हैं तो आगे का प्रोसेस होगा.

10 लाख से कम के निवेश की जरूरत

जैन ने बताया कि मी स्टोर की फ्रेंचाइजी लेने के लिए 10 लाख रुपये से कम का निवेश करना होगा. उन्होंने बताया, ‘भागीदार बनने के लिए किसी को रिटेल या व्यापार के अनुभव की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे मी ब्रांड से लगाव होना चाहिए.’ आपको बता दें स्टोर की ब्रांडिंग की पूरी लागत शाओमी की तरफ से दी जाएगी. जबकि अन्य खर्च जैसे इंटीरियर्स या किराया भागीदार को वहन करना होगा.

विंटर सीजन में शुरू करें गीजर बिजनेस, 2.50 लाख तक हो सकती है कमाई

विंटर सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे बिजनेस शुरू करने का सही समय, जिसकी मार्केट में डिमांड बढ़ रही हो। इन दिनों गीजर, हीटर की डिमांड बढ़ रही है। लेकिन बढ़ते बिजली बिलों के कारण लोग सोलर प्रोडक्‍ट्स के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। इसलिए यह सही मौका है, जब आप सोलर गीजर की मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट लगा सकते हैं।

सरकारी सर्वे बताते हैं कि भारत में सोलर गीजर का मार्केट साइज बढ़ता जा रहा है। ऐसे में, यदि आप आज यह यूनिट लगा लेते हैं तो आने वाले सालों में इस बिजनेस में ग्रोथ की संभावनाएं बनी रहेंगी। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार सहित सभी राज्‍य सरकारें सोलर प्रोडक्‍ट्स को प्रमोट कर रही हैं, इसका फायदा आप उठा सकते हैं और सरकारी स्‍कीम्‍स का हिस्‍सा बन कर अपने बिजनेस को आगे बढ़ा सकते हैं।

आज हम आपको बताते हैं कि अगर एक छोटी यूनिट लगाने चाहते हैं तो आपको कितना इन्‍वेस्‍टमेंट करना होगा और इससे आप कितना तक कमा सकते हैं।

कितने में शुरू करें यूनिट

दरअसल, खादी एवं विलेज कमीशन (केवीआईसी) द्वारा छोटे कारोबारियों की सुविधा के लिए प्रोजेक्‍ट प्रोफाइल तैयार किया है। इसके मुताबिक अगर आप एक छोटी यूनिट लगाना चाहते हैं, जिसमें आप 85 सोलर गीजर बना सकते हैं तो आपको कम से कम 100 से 125 वर्ग गज का स्‍पेस किराया पर लेना होगा।

इसके अलावा आपको मशीनरी व इक्विपमेंट लेने होंगे, जिनकी कीमत लगभग 4.25 लाख रुपए होगी और वर्किंग कैपिटल के तौर पर 2.50 लाख रुपए होगी। यानी प्रोजेक्‍ट शुरू करने के लिए लगभग 6.5 से 7 लाख रुपए चाहिए। इस प्रोजेक्‍ट प्रोफाइल के आधार पर केवीआईसी से लोन के लिए अप्‍लाई कर सकते हैं। केवीआईसी से आपको 80 फीसदी लोन मिल सकता है। यानी आपके पास लगभग 1.5 लाख रुपया है तो आप यह यूनिट लगा सकते हैं।

ये लेने होंगे इक्‍विपमेंट

प्रोजेक्‍ट शुरू करने के लिए आपको इक्‍विपमेंट खरीदने होंगे, इनमें ब्रेजिंग मशीन, फर्नेश, ग्राइंडर, हाइड्रो टेस्टिंग मशीन, रोलिंग मशीन, ड्रिलिंग मशीन, कंप्रेशर, वेल्डिंग मशीन, बफिंग मशीन, इंजीनिय‍रिंग टूल्‍स, बेंच ग्राइंडर, लेथ मशीन शामिल हैं।

इस रॉ मैटेेरियल का करें इंतजाम

प्रोजेक्‍ट शुरू होते ही आपको रॉ-मैटेेरियल का इंतजाम करना होगा। इसमें कॉप एल्‍युमिनियम एमएस शीट, पाइप, ग्‍लास फाइबर, जीआई शीट, थर्मोस्‍टेट, इंसुलेशन मैटेेरियल की जरूरत पड़ेगी। इसके बाद सोलर पैनल और स्‍टोरेज टैंक का फेब्रिकेशन करना होगा। इसके साथ टैंक, पैनल कोएल और कंपोनेंट की असेम्‍बलिंग करनी होगी। आखिर में इस टैंक और पैनल को लोकेशन पर कमीशन करना होगा।

कितनी होगी कमाई

यूनिट शुरू होने के बाद आप प्रोडक्‍शन शुरू करते हैं और अगले 6 माह में 85 गीजर बनाते हैं तो आपकी कुल प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट लगभग 14 लाख रुपए आएगी। वैसे तो बाजार में 20 से 25 हजार रुपए में एक सोलर गीजर बिक रहा है, लेकिन यदि आप औसतन एक गीजर को लगभग 20 हजार रुपए में बेचते हैं तो आप इन छह महीने में 16.5 लाख रुपए कमा सकते हैं। यानी आपका कुल प्रॉफिट लगभग 2.50 लाख रुपए हो सकता है।

11वीं फेल किसान ने बनाया अपना मिल्क एटीएम

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के एक किसान हैं, नीलेश गुस्सर। 11वीं फेल नीलेश ने पिछले साल ऑटोमेटिक एटीएम मिल्क मशीन बनाई थीं। इस साल उन्होंने इसे और भी ज्यादा हाइटेक बना दिया है।

उन्होंने इस मशीन में बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंटिंग, आईडी और पासवर्ड, प्रीपेड कार्ड जैसे फीचर जोड़ दिए हैं। अब इस मशीन से कैशलेस तरीके से दूध निकाला जा सकेगा। 28 साल के नीलेश ने पिछले साल 30 एटीम मिल्क मशीन किसानों को बेची थीं। इस मशीन में 20, 50 और 100 रुपये के नोटों से दूध निकाला जा सकता है।

इस मशीन से किसानों को काफी फायदा हो रहा है। वे किसान जो कॉओपरेटिव या दूध डेयरी को अपना दूध नहीं बेचना चाहते वे अपने मन मुताबिक दाम पर मिल्क एटीएम लगाकर दूध बेच रहे हैं। कॉओपरेटिव या डेयरी को दूध बेचने पर उन्हें बिचौलियों को कमीशन देना पड़ता है जिससे उन्हें नुकसान होता है।

गिर जिले के तलाला इलाके से 7 किलोमीटर स्थित गांव खिरधर के रहने वाले नीलेश ने पिछले साल मिल्क एटीएम मशीन बनाई थी। वे अब तक गुजरात के जामनगर, द्वारका, पोरबंदर जैसे इलाकों के साथ ही महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के किसानों को लगभग 30 मशीनें बेच चुके हैं।

नीलेश ने बताया कि पहले उनके पास 6 गायें थीं। जिनका दूध निकालकर वे सहकारी मंडी में बेचने के लिए ले जाते थे, लेकिन उन्हें अच्छा दाम नहीं मिलता था। वे देखते थे कि उनसे तो सिर्फ 25 रुपये प्रति लीटर में दूध बेचा जा रहा है जबकि शहर में दूध 50 रुपये में मिलता है।

उन्होंने इसके बाद एटीएम मिल्क मशीन बनाने का फैसला कर लिया। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर थोड़ा सा रिसर्च भी किया और मुंबई, राजकोट, अहमदाबाद से मशीन बनाने के पुर्जे मंगवाए। उन्होंने नोट के सेंसर और फिंगरप्रिंट की मशीन ताइवान से मंगवाई।

नीलेश ने हमसे बात करते हुए बताया, ‘मैं बिचौलियों का काम खत्म करना चाहता था। वे किसान और कस्टमर के बीच में आकर कमीशन खाते थे। जब मैं नजदीक की कॉओपरेटिव डेयरी में दूध बेचता था तो वहां भी मुझे दूध का सही दाम नहीं मिलता था।

इसलिए मैंने ये मशीन बनाई।’ आपको जानकर हैरानी होगी कि नीलेश 11वीं फेल हैं। उन्होंने कोई इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग नहीं ली है। वे बताते हैं कि उन्हें मशीनों को बनाने का शौक रहा है। नीलेश बताते हैं कि इस मशीन की बदौलत किसान को दूध की डेढ़ गुना ज्यादा कीमत मिलती है। किसान सिर्फ एक साल में ही इस मशीन का दाम रिकवर कर सकते हैं।

बनकर तैयार है मिल्क एटीएम

जिन किसानों के पास तीन से ज्यादा गाय या भैंसे होती हैं उनके लिए ये मशीन काफी फायदेमंद है। नीलेश ने बताया, ‘इस बार मैंने मशीन को पूरी तरह से कैशलेस बना दिया है। अब मशीन में पैसे नहीं डालने पड़ेंगे। जिस भी ग्राहक को दूध लेना होगा उसे अपना फिंगरप्रिंट इस मशीन में रजिस्टर करवाना होगा उसके बाद वह एक निश्चित मात्रा में दूध निकाल सकेगा।’

इसके साथ ही यूजरनेम और पासवर्ड के जरिए भी प्रीपेड कार्ड द्वारा दूध निकाल सकेंगे। नीलेश ने इस तरह की अभी पांच कैशलेस मशीनें बनाई हैं। जिन्हें वे तमिलनाडु, उड़ीसा और राजस्थान के किसानों को बेच चुके हैं।

मशीन की कीमत 75 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक है। इसमें 50 से लेकर 250 लीटर तक दूध स्टोर किया जा सकता है। इसमें फ्रिज के साथ ही पावर बैकअप की सुविधा भी है। जिससे लाइट चली जाने की स्थिति में दूध को खराब होने से बचाया जा सकेगा।

नीलेश ने सबसे पहले कच्छ के एक किसान वेलाजी भुइदिया को यह मशीन बेची थी। उन्होंने अपनी गायों का दूध बेचने के लिए मशीन खरीदी थी। इस मशीन को कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है। अब वेलाजी दूसरी मशीन खरीदने की योजना बना रहे हैं।

माइक्रो एटीएम लगा करें कमाई, 35 हजार बैंक मित्र बना रही है यह कंपनी, ऐसे करे अप्लाई

फिनटेक फर्म महाग्राम ने कोटक महिंद्रा बैंक से समझौता किया है, जिसके मुताबिक कंपनी में देश में लगभग 35 हजार बैंक मित्र बनाएगी, जो अपने यहां माइक्रो एटीएम लगाएंगे।

साथ ही, वे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी बेच सकेंगे। महाग्राम के फाउंडर व सीईओ राम श्रीराम ने कहा कि बैंक मित्र के लिए कोई भी ऑनलाइन अप्लाई कर सकता है।

कौन बन सकता है बैंक मित्र

  • अगर आप 10वीं पास भी हैं, तो बैंक मित्र बन सकते हैं।
  • आपको कम्प्यूटर और इंटरनेट की बेसिक नॉलेज होनी चाहिए।
  • आपकी उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए।
  • आपके पास एक ऑफिस स्पेस होना चाहिए, या आप किराये पर भी ले सकते हैं।
  •  अगर आप पोस्टल या बैंक से रिटायर हैं तो आपको वरीयता मिलेगी।

कौन-कौन से काम करने होंगे

  • माइक्रो एटीएम होने के कारण कैश विदड्रॉल और कैश डिपोजिट की सुविधा होगी।
  •  बैंक खाता खोल सकेंगे
  • लोन देने की सुविधा मिलेगी
  • पैन कार्ड भी बना सकते हैं
  • इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेच सकते हैं
  • आप कॉमन सर्विस सेंटर की तरह कई तरह की सरकारी कामकाज के लिए ऑनलाइन सर्विसेज भी दे सकते हैं
  • सेविंग्स स्कीम्स, एफडी आदि भी बेच सकते हैं

कैसे करें अप्लाई

अगर आप बैंक मित्र बनना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। महाग्राम की वेबसाइट पर सारी जानकारी उपलब्ध है। ऑनलाइन अप्लाई के लिए आप https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLScytPPDjpNiYaKsR3OP1iPtmgRrHlb9Zq5veMqn7K2f2FY9Ow/viewform?c=0&w=1पर क्लिक करके अप्लाई कर सकते हैं।

 

कैसे आएगा कैश

आप यदि महाग्राम के बैंक मित्र बन जाते हैं और आपको माइक्रो एटीएम मिल जाता है तो लोग आपके पास रखी पीओएस मशीन (माइक्रो एटीएम) में कार्ड से स्वैप करके पैसा निकाल सकते हैं। इसके लिए आपके पास कैश का होना जरूरी है। आपको कंपनी की ओर से कैश नहीं दिया जाएगा, बल्कि आप अपने पास रखे कैश से ही लेनदेन करेंगे।

ऐसी स्थिति में आप यदि अपना पैसा इस्तेमाल करते हैं तो कंपनी साथ के साथ आपके अकाउंट में पैसा जमा कराएगी। इतना ही नहीं, यदि आप कोई फाइनेंशियल प्रोडक्ट बेचते हैं तो आप उस पैसे का  इस्तेमाल भी कर सकते हैं। या कोई आपके पास कैश जमा कराता है तो विदड्रॉल के वक्त आप यह पैसा दे सकते हैं।

कितनी होगी कमाई

श्रीराम ने कहा कि आपको कितनी कमाई होगी, यह आपकी लोकेशन और ट्रांजैक्शन पर निर्भर करता है। वैसे शुरुआती कमाई 7 से 8000 रुपए तक हो सकती है। इतना पैसा पार्टटाईम से कमा सकते हैं। यदि आप फुलटाइम काम करते हैं तो आप दो से तीन गुणा अधिक कमा सकते हैं।

सिर्फ 1 लाख में शुरू करे बिस्कुट-केक बनाने का बिजनेस, ऐसे करें अप्लाई

जब भी कोई बिजनेस शुरू करने की सोचते हैं तो आपके सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि बिजनेस शुरू करने के लिए पैसा कहां से आएगा? ऐेसे समय में, यदि आपको यह पता चल जाए कि आपके पास यदि केवल 1 लाख रुपए हों तो आप ऐसा बिजनेस शुरू कर सकते हैं,

जिसका डिमांड तेजी से बढ़ रहा है तो आपकी परेशानी कब हद तक दूर हो जाएगी। जी हां, आज हम आपको ऐसे ही एक बिजनेस के बारे में बता रहे हैं। इस बिजनेस की संभावनाओं को देखते हुए बैंक भी आपको आसानी से लोन दे देते हैं।

शुरू करें ये कारोबार

हम यहां आपको बिस्कुट, केक, चिप्स और ब्रेड बनाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने के बारे में बता रहे हैं। यह बिजनेस शुरू करने के लिए सरकार की खास मुद्रा स्कीम के तहत आपको लोन भी आसानी से मिल जाएगा। बेकरी प्रोडक्ट की डिमांड पूरे साल रहती है।

जरूरी रॉ मैटेरियल

आटा, मैदा, आलू, दूध, घी, शुगर, यीस्ट, नमक, फ्लेवर पाउडर और एडिबल कलर। ये सभी प्रोडक्‍ट कहीं भी उपलब्ध हो जाएंगे।

कितना आएगा खर्च

  • वर्किंग कैपिटल: 1.86 लाख रुपए (इसमें रॉ-मटेरियल, इन्ग्रेडिएंट, काम करने वालों की सैलरी,पैंकिंग, टेलिफोन, रेंट आदि का खर्च शामिल है।)
  • फिक्स्‍ड कैपिटल: 3.5 लाख रुपए (इसमें हर तरह की मशीनरी और इक्यूपमेंट का खर्च शामिल है।)
  • टोटल खर्च: 5.36 लाख रुपए

सरकार से कैसे मिलेगी मदद

  • इसमें आपको 90 हजार रुपए अपने पास से लगाना होगा।
  • बैंक से टर्म लोन 2.97 लाख रुपए होगा।
  • वर्किंग कैपिटल लोन 1.49 लाख रुपए होगा।

कैसे होगा मुनाफा

अगर मंथली 1.86 लाख रुपए वर्किंग कैपिटल के साथ मैन्युफैक्चरिगं शुरू करें तो साल भर में कुल 20.38 लाख रुपए की सेल होगी। वहीं, इतना प्रोडक्ट तैयार करने में प्रोडक्शन कास्ट 14.26 लाख रुपए सालाना आएगा। इसे ऐसे समझें….

  • प्रोडक्शन कास्ट : 14.26 लाख रुपए सालाना
  • टर्नओवर : 20.38 लाख रुपए सालाना
  • ग्रॉस प्रॉफिट : 6.12 लाख रुपए सालाना
  • टर्म लोन व वर्किंग कैपिटल लोन का सालाना ब्याज: करीब 50 हजार रुपए
  • इनकम टैक्स: 13 हजार रुपए
  • अन्य खर्च: 70 हजार रुपए
  • नेट प्रॉफिट: 4.6 लाख रुपए सालाना
  • मंथली: 35 हजार रुपए से ज्यादा

कितने साल में मिल जाएगा पूरा इनवेस्टमेंट

  • सालाना रिटर्न: 78 फीसदी
  • 4.20 लाख X 100/ 5.36 लाख= 78%
  • यानी 1.5 साल में पूरा इन्वेस्टमेंट निकल आएगा।

कैसे करें अप्लाई

  • इसके लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत आप किसी भी बैंक में अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक फॉर्म भरना होगा, जिसमें ये डिटेल देनी होगी…
  • नाम, पता, बिजनेस एड्रेस, एजुकेशन, मौजूदा इनकम और कि‍तना लोन चाहिए।
  • इसमें किसी तरह की प्रोसेसिंग फीस या गारंटी फीस भी नहीं देनी होती। लोन का अमाउंट 5साल में लोटा सकते हैं।

क्या होना चाहिए जरूरी

  • इसके लिए आपके पास एक जगह होनी चाहिए। अगर आपके पास जगह नहीं है तो इसे रेंट पर लिया जा सकता है। यह खर्च वर्किंग कैपिटल में ऐड है।
  • इसके लिए मैन पावर में एक मैनेजर, सेल्स मैन, स्किल्ड वर्कर और सेमी स्किल्ड वर्कर होने जरूरी है। इन सबकी सैलरी पर 50 से 60 हजार रुपए खर्च होगा, जो वर्किंग कैपिटल में ऐड किया गया है।

सोया मिल्क प्लांट लगाने के लिए सरकार दे रही 10 लाख का लोन, ऐसे करे अप्लाई

केंद्र सरकार लोगों को स्‍वरोजगार के प्रति आकर्षित करने के लिए न केवल लोन दे रही है, बल्कि बिजनेस की ट्रेनिंग भी दे रही है। ऐसा ही एक बिजनेस है, सोया मिल्‍क मेकिंग यूनिट।

80-90 फीसदी लें लोन

इतना ही नहीं, सरकार के प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम (PMEGP) के तहत 90 फीसदी तक लोन भी ले सकते हैं। ऐसे में, अगर आपके पास मात्र 1 लाख रुपए हैं तो 90 फीसदी तक लोन लेकर आप सोया मिल्‍क मेकिंग यूनिट शुरू कर सकते हैं।

सोया मिल्‍क मेकिंग यूनिट की कुल कॉस्‍ट 11 लाख रुपए है। इसी प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर बैंक से मुद्रा लोन ले सकते हैं। बैंक आपको 80 फीसदी लोन दे सकते हैं और आपको लगभग 1.50 लाख रुपए का इंतजाम करना होगा।

कहां से लें ट्रेनिंग

नेशनल स्‍मॉल इंडस्‍ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) द्वारा देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में टेेक्‍निकल सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटर से आप कई तरह के बिजनेस के साथ-साथ जॉब ओरिएंटेड कोर्स की ट्रेनिंग ले सकते हैं। इसमें सोया मिल्‍क मेेकिंग की पूरी ट्रेनिंग दी जाती है।

साथ ही, एंटरप्रेन्‍योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (EDP) के तहत बिजनेस शुरू करने से लेकर बिजनेस मैनेजमेंट, मार्केटिंग आदि की भी ट्रेनिंग भी दी जाती है।

कैसे शुरू होगा बिजनेस

आपको सबसे पहले सोयाबीन सीड का इंतजाम करना होगा। सोयाबीन से तीन गुना अधिक नॉर्मल पानी में सोयाबीन सीड को 4 से 6 घंटे तक एक गर्म तापमान में एक डिब्‍बे में भिगोना होगा।

उसके बाद 8 से 12 घंटे तक ठंडे तापमान में रखना होगा। इसके बाद भीगे हुए सोयाबीन को एक ग्राइंडर और कुकिंग मशीन में रखिए, फिर उसे 120 डिग्री तापमान में 10 मिनट तक रखिए। इसके बाद आप आउटलेट वाल्‍व को खोल कर दूध को अपने हिसाब से पेक कर सकते हैं।

किस मशीनरी की होगी जरूरत

रिपोर्ट के मुताबिक, आपको मशीनरी व इक्विपमेंट के तौर पर एक ग्राइंडर या कूकर, बॉयलर, मैकेनिकल फिल्‍टर प्रेस, टोफू बॉक्‍स, सोकिंग टैंक की जरूरत होगी।

कितनी जगह की होगी जरूरत 

इस रिपोर्ट के मुताबिक, आपको एक छोटी यूनिट लगाने के लिए केवल 100 वर्ग मीटर जगह की जरूरत पड़ेगी, जिसे आप किराये पर भी ले सकते हैं। इसमें से कवर्ड एरिया केवल 75 वर्ग मीटर होना चाहिए।

कितना प्रोडक्‍शन कर सकेंगे आप 

एनएसआईसी की इस रिपोर्ट में सालाना 175000 लीटर सोया मिल्‍क का प्रोडक्‍शन का अनुमान लगाया गया है। यानी कि आप रोजाना लगभग 480 लीटर सोया मिल्क बना सकते हैं। इस हिसाब से तीन माह की वर्किंग कैपिटल, मशीनरी एवं इक्विपमेंट, रॉ मैटिरियल, सेलरी, यूटिलिटी पर कुल खर्च लगभग 11.60 लाख रुपए के इन्‍वेस्‍टमेंट का अनुमान है।

कैसे लें लोन 

PMEGP के तहत आपको 90 फीसदी और मुद्रा स्‍कीम के तहत आपको 80 फीसदी लोन मिल जाएगा। PMEGP के लिए ऑनलाइन सप्‍लाई करना होगा। जिसका लिंक है – https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal/jsp/pmegponline.jsp

 

अंडे के छिलके से ऐसे मोटी कमाई कर रही हैं ये महिलाएं… अपनाया ये तरीका

अंडा खाने के बाद अक्सर हम छिलके फेंक देते हैं क्योंकि इसे किसी काम का नहीं माना जाता है. वहीं छत्तीसगढ़ की महिलाएं बेकार समझकर फेंक दिए जाने वाले अंडे के छिलके से हर साल लाखों कमा रहीं हैं…

आइए जानते हैं कैसे..

ये बात जानकर आप जरूर हैरान रहे गए होंगे कि आखिर कैसे ये महिलाएं अंडे के छिलके से अपनी मोटी कमाई कर रही है. बता दें, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की ये महिलाएं इन अंडे के छिलकों को खाद के रूप में बदलकर मोटा पैसा कमा रही हैं. आय के लिए उनका निकाला हुआ ये तरीका बेमिसाल है.

सरगुजा जिले की कलेक्टर रितु सेन ने यहां कि महिलाओं को बताया कि आत्मनिर्भर बनना कितना जरूरी है. उन्होंने महिलाओं को रोजगार के साधन खोजने में भी मदद की. रितु की मेहनत की रंग लाई और छत्तीसगढ़ की महिलाओं से ठान लिया कि वह आत्मनिर्भर बनेंगी.

महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह (Self-Help Groups) के जरिए रोजगार के नए रास्ते तलाश किए. महिलाओं को कैंटीन प्रशासकों, पार्किंग और यहां तक ​​कि शहर में भी ठोस कचरे के रूप में रोजगार के अवसर खोज निकाले.

ऐसे करती हैं अंडे का छिलके का प्रयोग

जब महिलाओं ने देखा कि अंडे के छिलकों को लोग फेंक देते हैं तो उन्होंने इनका रिसाइकल करने के बारे में सोचा. आज ये महिलाएं अंडे के छिलकों से ‘कैल्शियम पाउडर’ और ‘खाद’ बना रही है. इसकी ट्रेनिंग उन्हें पर्यावरणविद सी. श्रीनिवासन दे रहे हैं. आपको बता दें, श्रीनिवासन एक ऐसे पर्यावरणविद हैं जो पिछले कई सालों से अपशिष्ट पदार्थों को रिसाइकल कर उन्हें काम का बनाने का काम कर रहे हैं.

कैसा होता है अंडे के छिलके से बना पाउडर

जो पाउडर अंडे के छिलकों से तैयार किया जाता है वह मुर्गियों के खाने में मिला दिया है. जिससे उनके भोजन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है साथ मुर्गियां तंदरुस्त रहती हैं. वहीं पोल्ट्री सेंटर के मैनेजर का कहना है कि महिलाओं के इस काम से पशुपालन में काफी मदद मिल रही है. जहां महिलाएं ऐसा करके पैसे कमा रही है वहीं बेकार पड़ी चीजों का सही निपटान हो रहा है.

वहीं एक ओर अंडे के छिलके से खाद बनाई जा रही है. श्रीनिवासन ने बताया- बेकार पड़ी सब्जियों और हरे कचरे से खाद बनाना आसान होता है, लेकिन अंडे के छिलकों से खाद बनने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है. वहीं उन्होंने बताया कि अंडे के छिलके 95 प्रतिशत कैल्शियम कार्बोनेट के बने होते हैं. इनसे बनी खाद पेड़- पौधों को काफी लाभ पहुंचाते हैं. बता दें,

अगर ये महिलाएं 50-60 किलो अंडे के छिलके को रिसाइकल करती हैं. और वहीं मुर्गियों के खाने की कीमत 500 से 600 रुपये प्रति किलो के आस-पास होती है तो ‘स्वयं सहायता समूह’ में काम कर रही ये महिलाएं ये हर महीने 15,000 से 30,000 रुपये तक कमाई करती होंगी.