CNG पंप खोल कर सकते हैं लाखों रुपए की कमाई, सरकार दे रही है सब्सिडी, यहां करें अप्लाई

यदि आप अपना कारोबार करने का बारे में सोच रहे हैं तो यह खबर आपके खास काम की है। Nexgen Energia Limited सहज भारत योजना लेकर आई है। इस योजना के तहत आप कंपनी के साथ कारोबार करके हर महीने लाखों रुपए की कमाई कर सकते हैं। यह कंपनी CNG पंप के अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, सीएनजी गैस उत्पादन का उद्योग आदि में कारोबार का मौका दे रही है।

कौन खोल सकता है CNG पंप

कंपनी के अनुसार, देशभर में किसी भी जिले का कोई भी व्यक्ति अपने शहर में सीएनजी पंप, सीएनजी गैस उत्पादन का उद्योग, इंडस्ट्रियल हाई स्पीड डीजल प्लांट, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, जैविक खाद और मलवे से ईंट निर्माण का कारोबार कर सकता है।

कंपनी का कहना है कि नया कारोबार करने के इच्छुक या पहले से ही कारोबार करने वाले लोग भी सीएनजी पंप समेत दूसरे कारोबार करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। कारोबार करने वालों को पांच साल तक आयकर मुक्त, सरकार से सब्सिडी और सभी निजी और राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

इतना करना होगा होगा निवेश

  •  सीएनजी पंप खोलने के लिए आवेदकों को करीब 75 लाख रुपए का निवेश करना होगा। इसमें लाइसेंस फीस और पंप की लागत दोनों शामिल हैं।
  • सीएनजी (सीबीजी) गैस उत्पादन का उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को करीब 2.99 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। इसमें लाइसेंस फीस शामिल नहीं है।
  •  इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन लागने के इच्छुक आवेदकों को करीब 25 लाख का निवेश करना होगा। इसमें लाइसेंस शुल्क और मशीन का लागत दोनों शामिल हैं।
  •  निर्माण मलवे से ईंट उद्योग लगाने वालों को करीब 35 लाख का निवेश करना होगा। इसमें मशीन और लाइसेंस शुल्क दोनों शामिल हैं।
  •  इंडस्ट्रियल हाईस्पीड डीजल उद्योग शुरू करने के लिए करीब 5 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। इसमें लाइसेंस फीस शामिल नहीं हैं।
  • जैविक खाद क्रय-विक्रय का कारोबार करने वालों को करीब 15 लाख रुपए का निवेश करना होगा।

ऐसे कर सकते हैं अप्लाई 

  • आप कंपनी की वेबसाइट www.nexgenenergia.com पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
  • आप NEXGEN ENERGIA के मोबाइल एप द्वारा भी आवेदन कर सकते हैं।
  •  अपना अपना प्रोफाइल या बायोडाटा बनाकर business@nexgenenergia.com या businessnge@gmail पर ईमेल कर आवेदन कर सकते हैं।
  • आप 7419502123 पर मिस कॉल कर जानकारी ले सकते हैं।
  • आपके आवेदन करने के बाद कंपनी एक सप्ताह के अंदर आपको जवाब देगी।

50 हजार रुपए हैं आपके पास तो लगाएं बैटरी वाटर प्‍लांट

पिछले कुछ सालों में बैटरी वाटर की डिमांड लगातार बढ़ रही है। वाहनों और इन्‍वर्टर में लगी बैटरियों में कुछ महीनों के अंतराल में पानी डालने की जरूरत होती है। यह पानी अलग तरह का होता है। यह बैटरी वाटर ऑटोमोबाइल मार्केट के अलावा लगभग हर रेसिडेंशियल मार्केट में बिकता है।

ऐसे में, शहरों में बैटरी वाटर मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्‍लांट भी लग रहे हैं। अगर आप भी कोई ऐसा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, जिसे लगाने में ज्‍यादा पैसा खर्च नहीं होता तो आप बैटरी वाटर मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्‍लांट लगा सकते हैं।

बिजनेस में संभावना को देखते हुए सरकार प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम के तहत इस प्रोजेक्‍ट़़ को लोन भी देती है। आज हम आपको इस पूरे प्रोजेक्‍ट के बारे में बताएंगे, ताकि आप इस प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के आधार पर लोन लेकर अपना बिजनेस शुरू कर सको।

कितना आएगा खर्च

सरकार के मॉडल प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आपके पास लगभग 50 हजार रुपए हैं तो आप बैटरी वाटर प्‍लांट लगा सकते हैं, क्‍योंकि इस पूरे प्रोजेक्‍ट की कॉस्‍ट 4 लाख 70 हजार रुपए है और प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जतरेशन प्रोग्राम के तहत आप लोन भी ले सकते हैं। इस प्रोग्राम के तहत 90 फीसदी लोन केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है।

यह है प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट

इक्‍वीपमेंट ( हॉट एयर ब्‍लॉवर, प्‍लास्टिक ड्रम, वाटर लिफ्टिंग पंप, हार्डनेस टेस्टिंग किट, पीएच मीटर, सेमीऑटोमैटिक फिलिंग मशीन, 1 एचपी मोटर, क्‍वालिटी कंट्रोल इक्‍वीपमेंट) पर लगभग 2 लाख 25 हजार रुपए का खर्च आएगा। जबकि आपको लगभग 2 लाख 45 हजार रुपए की वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ेगी। जिससे आपके प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट 4 लाख 70 हजार रुपए हो जाएगी।

कितनी होगी इनकम

प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्‍ट शुरू होने के बाद एक साल के दौरान आपको लगभग 9 लाख रुपए के रॉ-मैटेरियल की जरूरत पड़ेगी। इस तरह आपकी कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्‍शन 14 लाख 70 हजार रुपए आएगी।

एक साल में आप 250 किलोलीटर बैटरी वाटर का प्रोडक्‍शन करेगा और इसे बेचकर आपको 16 लाख रुपए मिलेंगे। इस आपको लगभग 1 लाख 29 हजार रुपए की इनकम होगी।

मिलेगी 25 फीसदी तक सब्सिडी

अगर आप इस प्रोग्राम के तहत लोन लेते हैं तो आपको 25 फीसदी तक सब्सिडी भी मिलती है। शहरी क्षेत्रों में 15 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में 25 फीसदी सब्सिडी दी जाती है, जबकि स्‍पेश्‍ल कैटेगिरी के लोगों को 25 व 35 फीसदी सब्सिडी दी जाती है।

ऐसे करें ड्राईफ्रूट का बिजनेस, होगी 40 हजार रुपए महीना तक इनकम

ड्राई फ्रूट हर घर की बेसिक जरूरत है। खासकर फेस्टिवल टाइम में ड्राईफ्रूट सबसे ज्यादा गिफ्ट के तौर पर एक्सचेंज किया जाता है। इंडियन फैमिली की इसी बेसिक जरूरत पर अपना बिजनेस खड़ा कर सकते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप ड्राई फ्रूट का बिनजेस शुरू 40 से 50 हजार रुपए महीना कमा सकते हैं।

शुरू कर सकते हैं ड्राईफ्रूट का बिजनेस

ड्राईफ्रूट का बिजनेस शुरू करने के लिए दुकान चाहिए होगी। अगर आपके पास अपनी दुकान है तो आप किराए से बच जाएंगे। वहीं, आप कि‍राए पर दुकान लेकर पर भी काम शुरू कर सकते हैं।

आप अपने एरिया के आसपास दुकान ले सकते हैं। दुकान लेने से पहले यह जरूर देख लें कि आपकी दुकान के आसपास कितनी दुकानें ड्राईफ्रूट की है। ताकि, आपके लिए सेल करना आसान हो।

चाहिए होंगे ये लाइसेंस

  • दुकान चलाने और बिजनेस करने के लिए आपको जीएसटी नंबर चाहिए होगा। जीएसटी नंबर जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद मिल जाएगा।
  • अगर किराए की दुकान पर कारोबार कर रहे हैं तो रेन्ट एग्रीमेंट चाहिए होगा। एमसीडी से दुकान चलाने का लाइसेंस भी लेना होगा।
  • फूड लाइसेंस सरकारी फूड अथॉरिटी एफएसएसएआईएस से लेना होगा।

होलसेल बाजार से खरीद सकते हैं दाल

अपने एरिया के ड्राईफ्रूट के होलसेल बाजर से दाल मंगा सकते हैं। ड्राईफ्रूट इंपोर्टर से भी खरीद सकते हैं। इनकी जानकारी ऑनलाइन मिल जाएगी।

इन्वेस्टमेंट और कमाई

खारी बावली में ड्राईफ्रूट और अनाज के होलसेलर सतिंदर जैन ने बताया कि ड्राईफ्रूट का बिजनेस 5 लाख रुपए के इन्वेस्टमेंट से शुरु किया जा सकता है। 5 लाख रुपए के इन्वेस्टमेंट में हर महीने 40 से 50 हजार रुपए आसानी से कमाए जा सकते हैं। जैन ने कहा कि ड्राईफ्रूट बेचकर रोजाना आसानी से 1,500 से 2,000 रुपए की सेल हो जाती है।

इतना मिलता है मार्जिन

होलसेल बाजार से लेकर रिटेल में 100 रुपए की सेल में 10 से 25 रुपए का मार्जिन मिलता है।

खड़ा कर सकते हैं अपना ड्राईफ्रूट ब्रांड

अपनी पैकेजिंग मशीन खरीदकर ब्रांड नाम के साथ भी ड्राईफ्रूट बेच सकते हैं। ड्राईफ्रूट की क्‍वॉलिटी अच्छी होने पर लंबे समय में इसका फायदा मिलता है।

ऑनलाइन भी बेच सकते हैं ड्राईफ्रूट

अपना ब्रांड बनाने पर ऑनलाइन मार्केट जैसे बिग बास्केट, अमेजन पैन्ट्री जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी ड्राईफ्रूट बेच सकते हैं।

ऑनलाइन कैसे बेचें प्रोडक्ट

कैसे जुड़ सकते हैं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कारोबारी को रजिस्टर कराना होगा
  • कारोबारी को पैन, जीएसटी और बैंक अकाउंट की डिटेल देनी होगी
  • कंपनी सेलर के साथ एमओयू या करार भी करती है
  • करार के बाद आप वेबसाइट पर अपने प्रोडक्ट और साड़ी की फोटोग्राफ अपलोड कर सकते हैं।
  • वैरिफिकेशन के बाद प्रोडक्ट वेबसाइट पर दिखने लगते हैं।
  • ज्यादातर कंपनियां सेलर से प्रोडक्ट ऑनलाइन बिकने के बाद कारोबारी से 1 से 9 फीसदी कमीशन लेती हैं।
  • ऑनलाइन पेमेंट में प्रोडक्ट कस्टमर के पास पहुंचने के बाद सेलर यानी कारोबारी के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

सिर्फ 2 से 6 लाख में खोल सकते हैं Amul parlour, ऐसे करें अप्लाई

आप 2 से 6 लाख में अमूल डेयरी प्रोडक्ट्स की फ्रेंजाइजी ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको संभल कर अप्लाई करना होगा। दरअसल अमूल की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर फ्रॉड हो रहे हैं।

यही वजह है कि अमूल ब्रांड की संरक्षक कंपनी गुजरात को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) लिमिटेड ने अपील की है कि फ्रेंचाइजी, या डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेते वक्त ध्यान रखें। अमूल ने अप्लाई की पूरी प्रक्रिया के बारे में भी बताया है। आइए, जानते हैं GCMMF ने क्या कहा है ? पहले जानते हैं कि कैसे आप अमूल की फ्रेंचाइजी ले सकते हैं

अमूल देता है दो तरह की फ्रेंचाइजी 

अमूल की वेबसाइट के मुताबिक अमूल दो तरह की फ्रेंचाइजी देता है। अगर आप अमूल प्रिफेयरड आउटलेट या अमूल रेलवे पार्लर या अमूल क्‍योस्‍क के लिए फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं तो आपको लगभग 2 लाख रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट करना होगा। इसमें नॉन रिफंडेबल ब्रांड सिक्‍योरिटी के तौर पर 25 हजार रुपए, रिनोवेशन पर 1 लाख रुपए, इक्‍वीपमेंट पर 75 हजार रुपए का खर्च आएगा।

 आपका 6 लाख रुपए आएगा खर्च

अगर आप अमूल आइसक्रीम स्‍कूपिंग पार्लर लेना चाहते हैं तो आपका कुल खर्च लगभग 6 लाख रुपए आएगा। इसमें ब्रांड सिक्‍योरिटी 50 हजार रुपए, रिनोवेशन 4 लाख रुपए, इक्‍वीपमेंट 1.50 लाख रुपए शामिल हैं।

हर महीने कितनी होगी कमाई

  • अगर आप अमूल आउटलेट लेते हैं तो आपको अमूल प्रोडक्‍ट्स के एमआरपी पर कमीशन मिलेगा। जैसे कि आपको एक मिल्‍क पाउच पर 2.5 फीसदी, मिल्‍क प्रोडक्‍ट्स पर 10 फीसदी और आइसक्रीम पर 20 फीसदी कमीशन मिलेगा।
  • अगर आप अमूल आइसक्रीम स्‍कूपिंग पार्लर की फ्रेंचाइजी लेते हैं तो आपको रेसिपी बेस्‍ड आइसक्रीम, शेक, पिज्‍जा, सेंडविच, हॉट चॉकेलेट ड्रिंक पर 50 फीसदी कमीशन मिलेगा। जबकि प्री-पैक्‍ड आइसक्रीम पर 20 फीसदी और अमूल प्रोडक्‍ट्स पर 10 फीसदी कमीशन मिलेगा।
  • अमूल का दावा है कि आप हर महीने लगभग 5 से 10 लाख रुपए की सेल्‍स कर सकते हैं। हालांकि यह लोकेशन पर डिपेंड करता है।

कितने स्‍पेस की पड़ेगी जरूरत

अगर आप अमूल आउटलेट लेते हैं तो आपके पास केवल 150 वर्ग फुट स्‍पेस की जरूरत पड़ेगी। इतने स्‍पेस पर अमूल आपको फ्रेंचाइजी दे देगी।
अगर आप अमूल आइसक्रीम पार्लर के लिए फ्रेंचाइजी चाहते हैं तो आप के पास कम से कम 300 वर्ग फुट का स्‍पेस होना चाहिए।

ऐसे करें अप्लाई

अमूल ब्रांड की संरक्षक कंपनी GCMMF ने स्पष्ट किया है कि अमूल पार्लर्स, अमूल स्कूपिंग पार्लर्स, डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए केवल कंपनी की वेबसाइट www.amul.com या retail@amul.coop या distribution@amul.coop पर मेल करें या 02692221258 पर कॉल करें। इसके अलावा किसी भी अन्य वेबसाइट, पोर्टल या टोल फ्री नंबर पर संपर्क न करें।

गोशाला में बन रही गोबर से लकड़ी, रोजाना 5 क्विंटल गोबर से बन रही 1.25 क्विंटल लकड़ी

मथुरा काॅलोनी स्थित बाबा मगनी राम गौशाला में निस्वार्थ पशु सेवा सोसायटी मेंबर्स गाय के गोबर से लकड़ी बना रहे है । यह लकड़ी श्मशानघाट, बॉयलर्स या ईंट-भट्टों में इस्तेमाल की जा सकती है और इससे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा।

सोसायटी मेंबर  ने बताया कि गौशाला में पड़े गोबर से मच्छर-मक्खी व बदबू से किसी को परेशानी न आए इसलिए कमेटी मेंबर्स ने लकड़ी बनाने का फैसला लिया। 20 साल पहले मथुरा काॅलोनी में बाबा मगनी राम गौशाला की स्थापना की गई। तब से यहां बीमार गौधन की सेवा हो रही है।

सराहनीय : पंजाब में बनाई जा रही इन मशीनों पर हरियाणा सरकार दे रही है 90 प्रतिशत सब्सिडी

सोशल मीडिया पर गोबर से लकड़ी बनाने वाली मशीन देखी तो फोकल प्वाइंट में टोका मशीन, जनरेटर बनाने वाले दोस्त बीएस पाल से इस संबंधी बात की। फोकल प्वाइंट में सी-55,56 में सनी इंजीनियरिंग वर्कस के नाम से फैक्ट्री चला रहे भजन पिछले 2 साल से इस मशीन को बना रहे हैं। इसलिए उन्होंने एक मशीन गौशाला के लिए सोसायटी मेंबर्स को दी।

रजनीश ने कहा कि इलाके में स्वच्छता के लिए वह गौशाला में पड़े गोबर से लकड़ी बनाकर इसे खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने अपील की कि कोई वाॅलंटियर गौशाला में आकर यह सेवा करना चाहता है तो उनसे संपर्क कर सकता है। इस लकड़ी को वह श्मशानघाट में देंगे, जिसके लिए बीर जी श्मशानघाट कमेटी व त्रिपड़ी श्मशानघाट कमेटी से बात की गई है। अभी लकड़ी का रेट तय किया जाना है इसलिए बेची नहीं जा रही। गौशाला में 100 गाएं हैं। रोजाना 5 क्विंटल गोबर इक्ट्ठा होता है जिससे 1.25 क्विंटल लकड़ी बन सकती है।

हरियाणा गोशाला आयोग खरीद रहा

बीर जी श्मशानघाट कमेटी मेंबर कुंदन गोगिया ने बताया कि संस्कार में 3 क्विंटल लकड़ी लगती है। इसके लिए वह 2500 रुपए चार्ज करते हैं। सर्दियों में रोजाना 8 से 10 शव संस्कार के लिए आते हैं। रोजाना औसतन 20 क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। अगर गोबर की लकड़ी मिलना शुरू हो जाए तो इससे पॉल्यूशन कम होगा।

ऐसे आया आइडिया

बीएस पाल के बेटे कार्तिक पाल ने इस आइडिया पर काम किया और मशीन बनाई। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ने बताया कि पंजाब में सिर्फ वह ही इस मशीन का निर्माण कर रहे हैं। कम से कम दाम पर मशीन बनाने के लिए उन्होंने इसमें स्क्रियू व मोटर का इस्तेमाल किया। वह गौशाला रोड स्थित सरकारी गौशाला में गए थे, वहां एक व्यक्ति ने उन्हें गोबर से निजात पाने की बात कही। वहीं पर सेवियां बनाने वाली मशीन खड़ी थी।

उन्होंने सोचा कि अगर आटे से सेवियां बन सकती हैं, तो गोबर से लकड़ी क्यों नहीं? इसके बाद उन्होंने मशीन बनाने को लेकर काम शुरू किया। यह मशीन सेवियां बनाने वाली मशीन की तरह ही काम करती है। गोबर से बनी लकड़ी आसानी से जल जाए इसके लिए उन्होंने मशीन में पाइप लगा दी, जिससे लकड़ी में होल हो जाता है।  मशीन बनाने में 45 हजार रुपए खर्च आता है और 18 प्रतिशत जीएसटी लगाकर यह 53 हजार में पड़ती है।

इस मशीन के साथ शुरू करें बॉलपेन बनाने का बिज़नेस

पेन हर समय काम आने वाली चीज़ों में से एक है. घर से स्कूल और स्कूल से दफ्तर हर जगह इसकी आवश्यकता होती है. इसका व्यापार बहुत कम पैसे में शुरू किया जा सकता हैं. ख़ास कर बॉल पेन का इस्तेमाल हर क्षेत्र के लोगों में बहुत पसंद किया जाता है. बॉल पेन की सबसे ख़ास बात ये होती है कि इसकी स्याही जल्द से जल्द सूख जाती है. इन दिनों ‘यूज़ एंड थ्रो’ पेन का भी खूब इस्तेमाल किया जा रहा है. यूज एंड थ्रो पेन या बॉल पेन का उद्योग बहुत आसानी से अपने घर में शुरू किया जा सकता है.

बॉल पेन बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होती है.

  • बैरल – बैरल पेन का वह हिस्सा होता है, जिसमे स्याही भरी जाती है. यह आपको 140 रूपये प्रति 250 पीस में मिल सकता है.
  • एडाप्टर – एडाप्टर बैरल और टिप के बीच का हिस्सा होता है. जोकि 4.5 रूपये प्रति 144 पीस मिल सकता है.
  • टिप – टिप पेन का वह हिस्सा होता है, जहाँ से लिखते समय स्याही नियमित रूप से बाहर आती है. यह आपको 28 से 35 रूपये प्रति 144 पीस में मिल सकता है.
  • ढक्कन – यह पेन को ढ़कने के लिए उपयोग किया जाता है. इसके ढक्कन की कीमत 25 रूपये प्रति 100 पीस है.
  • स्याही – यह पेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है जोकि 120 से 400 रूपये प्रति लीटर में मिल सकती है.

पेन बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियाँ कहाँ से ख़रीदें

पेन बनाने की चीज़े किसी बड़े होल सेल मार्किट में मिल सकती हैं. या इन्हें ऑनलाइन भी पाया जा सकता है, जो ये सारी चीज़े आप के घर तक पहुंचा देंगे. इसे ऑनलाइन मंगाने के लिए नीचे दिए गये वेबसाइट पर जायें.

पेन बनाने के लिए मशीनें

यह उद्योग शुरू करने के लिए कम से कम 200 वर्ग फिट जगह की आवश्यकता होती है. इस जगह में लगभग पांच मशीनें बैठाई जाती हैं. नीचे पांचों मशीनों के विषय में दिया जा रहा है.

  • पंचिंग मशीन : पंचिंग मशीन वह मशीन होती है जिससे बैरल में एडाप्टर सेट किया जाता है.
  • इंक फिलिंग मशीन : इंक फिलिंग मशीन की सहायता से बैरल में स्याही भरी जाती है.
  • टिप फिक्सिंग मशीन : टिप फिक्सिंग मशीन की सहायता से पेन के एडाप्टर में टिप लगाया जाता है, जो लिखने में सहायक है.
  • सेण्ट्रीफ्यूगिंग मशीन : इसकी सहायत से पेन के अन्दर स्याही भरते हुए रह गये अतिरिक्त हवा को पेन से निकाला जाता है

पेन बनाने के व्यापार के लिए कुल लागत

आम तौर पर सस्ते मशीन की कीमत 25,000 रूपए हैं, ये मशीनें छोटा व्यापार शुरू करने के लिए ठीक है. इसे कई बड़ी हार्डवेयर दूकानें बेचती हैं. इसे ऑनलाइन मंगाने के लिए निम्न वेबसाइट देख सकते हैं :

https://dir.indiamart.com/impcat/ball-pen-making-machine.html

उपरोक्त सभी चीज़ों को लेकर पहली बार पेन बनाने के व्यापार को स्थापित करने के लिए 30 से 40 हज़ार रूपए तक लग सकते हैं. इन 40 हज़ार रुपये में 25 हज़ार सिर्फ मशीन के हैं. अतः ये अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि एक बार मशीन बैठा लिया जाए तो, कम से कम पैसे लगा कर यह व्यापार चलाया जा सकता है. इसके अलावा यदि आप बड़ा व्यापार शुरू करना चाहते हैं तो इसके लिए ऑटोमेटिक मशीन की आवश्यकता होती है जोकि आपको 4 लाख रूपये तक मिल सकती है. इसके लिए कुल लागत इससे ज्यादा भी हो सकती है.

पेन बनाने की प्रक्रिया

  • पेन बनाने की प्रक्रिया आसान और अल्प सामायिक है. यहाँ इस प्रक्रिया का पूर्ण विवरण दिया जा रहा है.
  • सबसे पहले बैरल को पंचिंग मशीन में लगाना होता है. इस मशीन में पहले से एडाप्टर लगे हुए होते हैं. बैरल एडाप्टर को देखते हुए सही जगह लगाकर पंच करते ही बैरल में एडाप्टर सेट हो जाता है.
  • एडाप्टर सेट हो जाने के बाद बैरल में स्याही भरने की प्रक्रिया आती है. स्याही भरने के लिए इंक फिलिंग मशीन का इस्तेमाल होता है. इंक फिलिंग मशीन में पहले से स्याही भरी हुई होती है. स्याही भरते समय इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि स्याही बैरल की साइज़ के अनुसार भरी जाए. अधिक स्याही भरने से वह बाहर भी आ सकती है जिससे पेन की क्वालिटी पर भी असर पड़ सकता है.
  • इसके बाद बैरल की ऊपरी छेद पर हाथ लगाकर रखें, फिर उसे टिप फिक्सिंग मशीन में लगाया जाता है. इस मशीन की सहायता से स्याही भरे बैरल में टिप लगाया जाता है. इसके बाद ये बैरल पेन में बदल जाता है.
  • इसके बाद इस पैन को सेंट्रीफ्यूगिंग मशीन में डाला जाता है जिससे इसके अंदर की अतिरिक्त हवा बाहर निकल जाए.
  • अब इस पेन का इस्तेमाल लिखने के लिए आराम से किया जा सकता है. इसी तरह आप मशीनों की मदद से अधिक संख्या में पेन बना सकते हैं और अपने ब्रांड का पेन बाज़ार में उतार सकते हैं.

Address: PERFECT SYSTEM 106, Geeta Industrial Estate,
I. B. Patel Road, Goregaon (East),
Mumbai – 400 063. INDIA
Phone: +91 22 26853846

इस एक मशीन से आप बना सकते है कप ,प्लेट ,थाली समेत थर्मोकोल के सभी प्रोडक्ट

इस एक मशीन से आप बना सकते है कप ,प्लेट ,थाली समेत थर्मोकोल के सभी प्रोडक्ट थर्मोकोल के प्रोडक्ट बहुत वक़्त से इस्तमाल किए जाते है । इन प्रोडक्ट में मुख्या तौर पर कप, प्लेट ,थाली ,दोना आदि चीजें होती है ।

लेकिन क्या आप जानते है के इन सभी चीजों को हम सिर्फ एक मशीन से त्यार कर सकते है जिसकी कीमत 2 लाख से शुरू हो जाती है । और इसमें कच्चे माल के तौर पर भी सिर्फ थर्मोकोल मशीन ही इस्तमाल होती है । तो इस तरह से अगर आप इसका कारोबार करना चाहते है तो सिर्फ 3 लाख में शुरू कर सकते है ।

यह मशीन एक मिन्ट मे 80 – 100 थाली त्यार कर देती है । थाली का साईज़ 4 -14 इंच तक होता है । थाली बनाने के लिए 4mm थर्मोकोल शीट इस्तेमाल होती है । मशीन की कीमत 2.7 लाख है ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

पूरी जानकारी के लिए निचे दिये हुए लिंक पर क्लिक करे

https://dir.indiamart.com/impcat/thermocol-plate-making-machine.html

यह है हाथ से चलने वाली ईंटें बनाने वाली मशीन,जाने पूरी जानकारी

ईटें बनाने का काम काफी मुश्किल भरा है क्योंकि आज तक कोई भी ऐसी मशीन नहीं आयी है जो इस काम को अच्छे तरिके से कर सके।

लेकिन अब एक ऐसी मशीन आयी है जिस से आप ईंटें बनाने का काम बड़ी ही तेज़ी से कर सकते है ।

यह मशीन की सबसे अच्छी बात यह है के इस मशीन पर काम करने के लिए आप को डीज़ल जा बिजली की जरूरत नहीं पड़ती।यह मशीन एक दिन में 400 -500 ईटें बना देती है ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसकी वीडियो देखें

इस मशीन की पूरी जानकारी और खरीदने के लिए निचे दिए हुए अड्रेस पर संपर्क कर सकते है । इस कंपनी के इलावा भी आप इस मशीन को कहीं से भी खरीद सकते है ।

Address: Rajkumar Agro Engineers Pvt Ltd
Naresh Gambhir(Director)
Near Union Bank Of India, Ghat Road, Nagpur – 440018, Maharashtra, India
Call Us: 08048719491

रेमंड दे रही 1200 स्‍टोर खोलने का मौका, हर माह होगी लाखों की कमाई

देश्‍ा की सबसे बड़ी गारमेंट कंपनियों में शुमार रेमंड अब छोटे शहरों में स्‍टोर खोल रही है। इसका इरादा देश के उन 1200 शहरों में स्‍टोर खोलने का है, जहां की आबादी 50 हजार से ज्‍यादा है। कंपनी की ब्रांड वैल्‍यू की वहज से इसके ग्राहकों एक बड़ा तबका इन छोटे शहरों में रहता है,

जो इसके कपड़े खरीदने के लिए बड़े शहरों की तरफ जाता है। कंपनी का इरादा इन्‍हीं ग्राहकों की मांग को पूरा करने के लिए इन जगहों पर स्‍टोर खोलने की है। कंपनी का दावा है कि सालाना दो करोड़ रुपए से भी ज्‍यादा की इनकम ऐसे स्‍टोर्स से हो सकती है।

कारोबार बढ़ाने की रणनीति

कंपनी के रिटेल डायरेक्‍टर मोहित धंजाल के अनुसार इन स्‍टोर के खुलने के बाद कंपनी के कारोबार में करीब 10 फीसदी की बढोत्‍तरी होगी। कंपनी का इरादा टाइप चार, पांच और छह शहराें में मिनी रेमंड शॉप खोलने का है। यह स्‍टोर्स फ्रैंचाइजी मॉडल पर खोले जाएंगे।

40 स्‍टोर खुल भी चुके

उनके अनुसार कंपनी अभी तक 40 मिनी रेमंड शॉप खोल चुकी है। यही नहीं कंपनी का इरादा मार्च तक 60 और ऐसी शॉप खोलने का है। बाकी अगले वित्‍तीय वर्ष में खोले जाएंगे। उनके अनुसार कपंनी का इरादा छोटे स्‍टोर खोल कर ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को जोड़ना है। इन स्‍टोर को खोलने में निवेश भी कम चाहिए होता है।

1 करोड़ रुपए तक की कमाई वाले स्‍टोर

मिनी रेमंड शाॅप खोलकर लोग आराम से एक करोड़ रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। इन स्‍टोर को शुरू करने में 50 लाख रुपए तक की लागत आती है।

2 करोड़ रुपए तक की कमाई वाले स्‍टोर

कंपनी मिनी से थोड़ा स्‍टोर खोलने की भी फ्रैंचाइजी दे रही है। इन स्‍टोर को खोलने के लिए करीब 2500 वर्ग फीट जगह की जरूरत होती है। इन स्‍टोर को शुरू करने में 1.5 से 2 करोड़ तक की लागत आती है। यह लागत एक बार लगानी होती है। इन स्‍टोर से दो करोड़ रुपए से ज्‍यादा की कमाई आराम से की जा सकती है।

कंपनी की वेबसाइट पर मिलेगी जानकारी

कंपनी की वेबसाइट पर इस संबंध में जानकारी ली जा सकती है। रेमंड के अभी देश में 767 स्‍टोर हैं। इनमें से ज्‍यादातर फ्रैंचाइजी मॉडल पर हैं। यह स्‍टोर 416 शहरों में स्थित हैं। इसके अलावा कंपनी के उत्‍पाद 3500 मल्‍टी ब्रांड स्‍टोर पर भी उपलब्‍ध हैं। कंपनी का मानना है कि स्‍टोर और ज्‍यादा शहरों तक पहुुंच से बिक्री में अच्‍छी बढ़ोत्‍तरी होगी।

85 हजार की नौकरी छोड़ शुरू किया डेयरी फार्म, 2 साल में किया 2 करोड़ का बिजनेस

चाह हो तो राह मिल ही जाती है। ये साबित कर दिखाया है झारखंड के संतोष शर्मा ने। कुछ करने की चाहत रखने वाले शर्मा ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से प्रभावित होकर 85 हजार रुपए की अच्छी खासी नौकरी छोड़ नक्सल प्रभावित गांव में डेयरी फार्म शुरू किया और मजह दो वर्षों में उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए के पार हो गया।

नक्सल प्रभावित गांव में शुरू किया कारोबार

झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले शर्मा ने नक्सल प्रभावित दलमा गांव के आदिवासी गांव में जिस डेयरी बिजनेस की शुरुआत की थी, आज वह सिर्फ डेयरी न रहकर ऑर्गेनिक फूड, हेल्दी मिल्क बनाने की फैक्‍ट्री शुरू करने तक पहुंच गया है।

अपने इस बिजनेस के बूते वह न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल रहे हैं, बल्कि इसके जरिए वह आदिवासी लोगों को गांव में रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। अपने काम के लिए सुर्खियां बटोर चुके शर्मा ने एयर इंडिया से सफल बिजनेसमैन बनने की कहानी साझा की।

जन्म लेने के एक साल बाद पापा हुए रिटायर

शर्मा ने बताया कि उनके पिता टाटा मोटर्स में नौकरी करते थे और परिवार चलाने के लिए उनकी आय पर्याप्त नहीं थी। संतोष के पैदा होने के एक साल बाद ही उनके पिता रिटायर हो गए थे। पिता के रिटायरमेंट के बाद मां ने परिवार की जिम्मेदारी संभालने का जिम्मा लिया और पड़ोसी से मिले एक गाय को उन्होंने पालना शुरू किया।

उन्होंने गाय का दूध बेचना शुरू कर दिया। वह भी अपनी माता और भाइयों के साथ लोगों के घरों पर जाकर दूध बेचा करते थे। दूध बेचने का यह कारोबार चल निकला और परिवार की हालत भी सुधरने लगी।धीरे-धीरे गाय की संख्या बढ़कर 25 हो गई।

एयर इंडिया की नौकरी छोड़ी

कॉमर्स से 12वीं करने के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.कॉम में ग्रैजुएशन किया। इसके साथ उन्होंने कॉस्ट अकाउंटिंग का कोर्स भी किया। शर्मा की पहली नौकरी मारुति में लगी। यहां उन्होंने 6 महीने तक 4800 रुपए के स्टाइपंड पर काम किया। 2000 में इर्नेस्ट एंड यंग में 18000 रुपए महीने की सैलरी पर नौकरी लगी।

2003 में नौकरी छोड़ सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते शर्मा ने 2004 में जमशेदपुर स्थित एक मल्टीनैशनल बैंक में बतौर ब्रांच मैनेजर ज्वाइन कर लिया। 6 महीने बाद शर्मा ने दूसरा बैंक ज्वाइन किया। इसके बाद 2007 में वह एयर इंडिया से बतौर असिस्टेंट मैनेजर (कोलकाता) जुड़े।

यहां पर उनकी मंथली सैलरी 85,000 रुपए थी। फिर एक दिन उनकी मुलाकात कलाम साहब से हुई और उनसे प्रेरित होकर उन्होंने एयर इंडिया से तीन साल की छुट्टी लेकर छोड़ डेयरी फार्म की नींव रखी।

डेयरी फर्म की शुरुआत

शर्मा ने बताया कि उन्होंने डेयरी फर्म की शुरुआत के लिए अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी। डेयरी फर्म खोलने में उनके 80 लाख रुपए लग गए और 8 जानवरों के साथ अपने डेयरी फार्म की शुरूआत की थी, जिनकी संख्या अब बढ़कर 100 तक पहुंच गई है।

सिर्फ डेयरी नहीं चलाते शर्मा

शर्मा न सिर्फ अपने डेयरी स्टार्टअप के बिजनेस को बढ़ा रहे हैं, बल्कि वह लेखन और मोटिवेशनल स्पीकिंग का काम भी करते हैं। शर्मा अभी तक दो किताबें नेक्स्ट वॉट इज इन और डिजॉल्व द बॉक्स भी लिख चुके हैं। वह आईआईएम जैसे शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में जाकर स्टूडेंट्स को प्रेरित करते हैं।

डेयरी में 100 से ज्यादा लोग कर रहे हैं काम

2014 में उन्होंने दलमा वाइल्डलाइफ अभ्यारण्य में पार्टनरशिप में 30 हजार रुपए महीने पर जमीन ली। कुछ रिसर्च करने के बाद उन्होंने 2016 में मम्मा डेयरी फर्म की शुरुआत की। इस डेयरी में फिलहाल 100 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकतर कम उम्र के युवा और नक्सल प्रभावित दलमा गांव के आदिवासी हैं। उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए हुआ।

ये प्रोडक्ट्स हैं मार्केट में मौजूद

मम्मा डेयरी जमशेदपुर में ऑर्गेनिक दूध सप्लाई करती है। गायों को चारा भी ऑर्गेनिक दिया जाता है। उन्होंने ऑर्गेनिक मिल्क के अलावा पनीर, बटर और घी भी बेचना शुरू किया है। शर्मा अगले कुछ महीने में वो फ्लेवर्ड मिल्क भी मार्केट में उतारने की तैयारी में हैं।