विंटर सीजन में शुरू करें गीजर बिजनेस, 2.50 लाख तक हो सकती है कमाई

विंटर सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे बिजनेस शुरू करने का सही समय, जिसकी मार्केट में डिमांड बढ़ रही हो। इन दिनों गीजर, हीटर की डिमांड बढ़ रही है। लेकिन बढ़ते बिजली बिलों के कारण लोग सोलर प्रोडक्‍ट्स के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। इसलिए यह सही मौका है, जब आप सोलर गीजर की मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट लगा सकते हैं।

सरकारी सर्वे बताते हैं कि भारत में सोलर गीजर का मार्केट साइज बढ़ता जा रहा है। ऐसे में, यदि आप आज यह यूनिट लगा लेते हैं तो आने वाले सालों में इस बिजनेस में ग्रोथ की संभावनाएं बनी रहेंगी। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार सहित सभी राज्‍य सरकारें सोलर प्रोडक्‍ट्स को प्रमोट कर रही हैं, इसका फायदा आप उठा सकते हैं और सरकारी स्‍कीम्‍स का हिस्‍सा बन कर अपने बिजनेस को आगे बढ़ा सकते हैं।

आज हम आपको बताते हैं कि अगर एक छोटी यूनिट लगाने चाहते हैं तो आपको कितना इन्‍वेस्‍टमेंट करना होगा और इससे आप कितना तक कमा सकते हैं।

कितने में शुरू करें यूनिट

दरअसल, खादी एवं विलेज कमीशन (केवीआईसी) द्वारा छोटे कारोबारियों की सुविधा के लिए प्रोजेक्‍ट प्रोफाइल तैयार किया है। इसके मुताबिक अगर आप एक छोटी यूनिट लगाना चाहते हैं, जिसमें आप 85 सोलर गीजर बना सकते हैं तो आपको कम से कम 100 से 125 वर्ग गज का स्‍पेस किराया पर लेना होगा।

इसके अलावा आपको मशीनरी व इक्विपमेंट लेने होंगे, जिनकी कीमत लगभग 4.25 लाख रुपए होगी और वर्किंग कैपिटल के तौर पर 2.50 लाख रुपए होगी। यानी प्रोजेक्‍ट शुरू करने के लिए लगभग 6.5 से 7 लाख रुपए चाहिए। इस प्रोजेक्‍ट प्रोफाइल के आधार पर केवीआईसी से लोन के लिए अप्‍लाई कर सकते हैं। केवीआईसी से आपको 80 फीसदी लोन मिल सकता है। यानी आपके पास लगभग 1.5 लाख रुपया है तो आप यह यूनिट लगा सकते हैं।

ये लेने होंगे इक्‍विपमेंट

प्रोजेक्‍ट शुरू करने के लिए आपको इक्‍विपमेंट खरीदने होंगे, इनमें ब्रेजिंग मशीन, फर्नेश, ग्राइंडर, हाइड्रो टेस्टिंग मशीन, रोलिंग मशीन, ड्रिलिंग मशीन, कंप्रेशर, वेल्डिंग मशीन, बफिंग मशीन, इंजीनिय‍रिंग टूल्‍स, बेंच ग्राइंडर, लेथ मशीन शामिल हैं।

इस रॉ मैटेेरियल का करें इंतजाम

प्रोजेक्‍ट शुरू होते ही आपको रॉ-मैटेेरियल का इंतजाम करना होगा। इसमें कॉप एल्‍युमिनियम एमएस शीट, पाइप, ग्‍लास फाइबर, जीआई शीट, थर्मोस्‍टेट, इंसुलेशन मैटेेरियल की जरूरत पड़ेगी। इसके बाद सोलर पैनल और स्‍टोरेज टैंक का फेब्रिकेशन करना होगा। इसके साथ टैंक, पैनल कोएल और कंपोनेंट की असेम्‍बलिंग करनी होगी। आखिर में इस टैंक और पैनल को लोकेशन पर कमीशन करना होगा।

कितनी होगी कमाई

यूनिट शुरू होने के बाद आप प्रोडक्‍शन शुरू करते हैं और अगले 6 माह में 85 गीजर बनाते हैं तो आपकी कुल प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट लगभग 14 लाख रुपए आएगी। वैसे तो बाजार में 20 से 25 हजार रुपए में एक सोलर गीजर बिक रहा है, लेकिन यदि आप औसतन एक गीजर को लगभग 20 हजार रुपए में बेचते हैं तो आप इन छह महीने में 16.5 लाख रुपए कमा सकते हैं। यानी आपका कुल प्रॉफिट लगभग 2.50 लाख रुपए हो सकता है।

11वीं फेल किसान ने बनाया अपना मिल्क एटीएम

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के एक किसान हैं, नीलेश गुस्सर। 11वीं फेल नीलेश ने पिछले साल ऑटोमेटिक एटीएम मिल्क मशीन बनाई थीं। इस साल उन्होंने इसे और भी ज्यादा हाइटेक बना दिया है।

उन्होंने इस मशीन में बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंटिंग, आईडी और पासवर्ड, प्रीपेड कार्ड जैसे फीचर जोड़ दिए हैं। अब इस मशीन से कैशलेस तरीके से दूध निकाला जा सकेगा। 28 साल के नीलेश ने पिछले साल 30 एटीम मिल्क मशीन किसानों को बेची थीं। इस मशीन में 20, 50 और 100 रुपये के नोटों से दूध निकाला जा सकता है।

इस मशीन से किसानों को काफी फायदा हो रहा है। वे किसान जो कॉओपरेटिव या दूध डेयरी को अपना दूध नहीं बेचना चाहते वे अपने मन मुताबिक दाम पर मिल्क एटीएम लगाकर दूध बेच रहे हैं। कॉओपरेटिव या डेयरी को दूध बेचने पर उन्हें बिचौलियों को कमीशन देना पड़ता है जिससे उन्हें नुकसान होता है।

गिर जिले के तलाला इलाके से 7 किलोमीटर स्थित गांव खिरधर के रहने वाले नीलेश ने पिछले साल मिल्क एटीएम मशीन बनाई थी। वे अब तक गुजरात के जामनगर, द्वारका, पोरबंदर जैसे इलाकों के साथ ही महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के किसानों को लगभग 30 मशीनें बेच चुके हैं।

नीलेश ने बताया कि पहले उनके पास 6 गायें थीं। जिनका दूध निकालकर वे सहकारी मंडी में बेचने के लिए ले जाते थे, लेकिन उन्हें अच्छा दाम नहीं मिलता था। वे देखते थे कि उनसे तो सिर्फ 25 रुपये प्रति लीटर में दूध बेचा जा रहा है जबकि शहर में दूध 50 रुपये में मिलता है।

उन्होंने इसके बाद एटीएम मिल्क मशीन बनाने का फैसला कर लिया। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर थोड़ा सा रिसर्च भी किया और मुंबई, राजकोट, अहमदाबाद से मशीन बनाने के पुर्जे मंगवाए। उन्होंने नोट के सेंसर और फिंगरप्रिंट की मशीन ताइवान से मंगवाई।

नीलेश ने हमसे बात करते हुए बताया, ‘मैं बिचौलियों का काम खत्म करना चाहता था। वे किसान और कस्टमर के बीच में आकर कमीशन खाते थे। जब मैं नजदीक की कॉओपरेटिव डेयरी में दूध बेचता था तो वहां भी मुझे दूध का सही दाम नहीं मिलता था।

इसलिए मैंने ये मशीन बनाई।’ आपको जानकर हैरानी होगी कि नीलेश 11वीं फेल हैं। उन्होंने कोई इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग नहीं ली है। वे बताते हैं कि उन्हें मशीनों को बनाने का शौक रहा है। नीलेश बताते हैं कि इस मशीन की बदौलत किसान को दूध की डेढ़ गुना ज्यादा कीमत मिलती है। किसान सिर्फ एक साल में ही इस मशीन का दाम रिकवर कर सकते हैं।

बनकर तैयार है मिल्क एटीएम

जिन किसानों के पास तीन से ज्यादा गाय या भैंसे होती हैं उनके लिए ये मशीन काफी फायदेमंद है। नीलेश ने बताया, ‘इस बार मैंने मशीन को पूरी तरह से कैशलेस बना दिया है। अब मशीन में पैसे नहीं डालने पड़ेंगे। जिस भी ग्राहक को दूध लेना होगा उसे अपना फिंगरप्रिंट इस मशीन में रजिस्टर करवाना होगा उसके बाद वह एक निश्चित मात्रा में दूध निकाल सकेगा।’

इसके साथ ही यूजरनेम और पासवर्ड के जरिए भी प्रीपेड कार्ड द्वारा दूध निकाल सकेंगे। नीलेश ने इस तरह की अभी पांच कैशलेस मशीनें बनाई हैं। जिन्हें वे तमिलनाडु, उड़ीसा और राजस्थान के किसानों को बेच चुके हैं।

मशीन की कीमत 75 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक है। इसमें 50 से लेकर 250 लीटर तक दूध स्टोर किया जा सकता है। इसमें फ्रिज के साथ ही पावर बैकअप की सुविधा भी है। जिससे लाइट चली जाने की स्थिति में दूध को खराब होने से बचाया जा सकेगा।

नीलेश ने सबसे पहले कच्छ के एक किसान वेलाजी भुइदिया को यह मशीन बेची थी। उन्होंने अपनी गायों का दूध बेचने के लिए मशीन खरीदी थी। इस मशीन को कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है। अब वेलाजी दूसरी मशीन खरीदने की योजना बना रहे हैं।

माइक्रो एटीएम लगा करें कमाई, 35 हजार बैंक मित्र बना रही है यह कंपनी, ऐसे करे अप्लाई

फिनटेक फर्म महाग्राम ने कोटक महिंद्रा बैंक से समझौता किया है, जिसके मुताबिक कंपनी में देश में लगभग 35 हजार बैंक मित्र बनाएगी, जो अपने यहां माइक्रो एटीएम लगाएंगे।

साथ ही, वे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी बेच सकेंगे। महाग्राम के फाउंडर व सीईओ राम श्रीराम ने कहा कि बैंक मित्र के लिए कोई भी ऑनलाइन अप्लाई कर सकता है।

कौन बन सकता है बैंक मित्र

  • अगर आप 10वीं पास भी हैं, तो बैंक मित्र बन सकते हैं।
  • आपको कम्प्यूटर और इंटरनेट की बेसिक नॉलेज होनी चाहिए।
  • आपकी उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए।
  • आपके पास एक ऑफिस स्पेस होना चाहिए, या आप किराये पर भी ले सकते हैं।
  •  अगर आप पोस्टल या बैंक से रिटायर हैं तो आपको वरीयता मिलेगी।

कौन-कौन से काम करने होंगे

  • माइक्रो एटीएम होने के कारण कैश विदड्रॉल और कैश डिपोजिट की सुविधा होगी।
  •  बैंक खाता खोल सकेंगे
  • लोन देने की सुविधा मिलेगी
  • पैन कार्ड भी बना सकते हैं
  • इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेच सकते हैं
  • आप कॉमन सर्विस सेंटर की तरह कई तरह की सरकारी कामकाज के लिए ऑनलाइन सर्विसेज भी दे सकते हैं
  • सेविंग्स स्कीम्स, एफडी आदि भी बेच सकते हैं

कैसे करें अप्लाई

अगर आप बैंक मित्र बनना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। महाग्राम की वेबसाइट पर सारी जानकारी उपलब्ध है। ऑनलाइन अप्लाई के लिए आप https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLScytPPDjpNiYaKsR3OP1iPtmgRrHlb9Zq5veMqn7K2f2FY9Ow/viewform?c=0&w=1पर क्लिक करके अप्लाई कर सकते हैं।

 

कैसे आएगा कैश

आप यदि महाग्राम के बैंक मित्र बन जाते हैं और आपको माइक्रो एटीएम मिल जाता है तो लोग आपके पास रखी पीओएस मशीन (माइक्रो एटीएम) में कार्ड से स्वैप करके पैसा निकाल सकते हैं। इसके लिए आपके पास कैश का होना जरूरी है। आपको कंपनी की ओर से कैश नहीं दिया जाएगा, बल्कि आप अपने पास रखे कैश से ही लेनदेन करेंगे।

ऐसी स्थिति में आप यदि अपना पैसा इस्तेमाल करते हैं तो कंपनी साथ के साथ आपके अकाउंट में पैसा जमा कराएगी। इतना ही नहीं, यदि आप कोई फाइनेंशियल प्रोडक्ट बेचते हैं तो आप उस पैसे का  इस्तेमाल भी कर सकते हैं। या कोई आपके पास कैश जमा कराता है तो विदड्रॉल के वक्त आप यह पैसा दे सकते हैं।

कितनी होगी कमाई

श्रीराम ने कहा कि आपको कितनी कमाई होगी, यह आपकी लोकेशन और ट्रांजैक्शन पर निर्भर करता है। वैसे शुरुआती कमाई 7 से 8000 रुपए तक हो सकती है। इतना पैसा पार्टटाईम से कमा सकते हैं। यदि आप फुलटाइम काम करते हैं तो आप दो से तीन गुणा अधिक कमा सकते हैं।

सिर्फ 1 लाख में शुरू करे बिस्कुट-केक बनाने का बिजनेस, ऐसे करें अप्लाई

जब भी कोई बिजनेस शुरू करने की सोचते हैं तो आपके सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि बिजनेस शुरू करने के लिए पैसा कहां से आएगा? ऐेसे समय में, यदि आपको यह पता चल जाए कि आपके पास यदि केवल 1 लाख रुपए हों तो आप ऐसा बिजनेस शुरू कर सकते हैं,

जिसका डिमांड तेजी से बढ़ रहा है तो आपकी परेशानी कब हद तक दूर हो जाएगी। जी हां, आज हम आपको ऐसे ही एक बिजनेस के बारे में बता रहे हैं। इस बिजनेस की संभावनाओं को देखते हुए बैंक भी आपको आसानी से लोन दे देते हैं।

शुरू करें ये कारोबार

हम यहां आपको बिस्कुट, केक, चिप्स और ब्रेड बनाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने के बारे में बता रहे हैं। यह बिजनेस शुरू करने के लिए सरकार की खास मुद्रा स्कीम के तहत आपको लोन भी आसानी से मिल जाएगा। बेकरी प्रोडक्ट की डिमांड पूरे साल रहती है।

जरूरी रॉ मैटेरियल

आटा, मैदा, आलू, दूध, घी, शुगर, यीस्ट, नमक, फ्लेवर पाउडर और एडिबल कलर। ये सभी प्रोडक्‍ट कहीं भी उपलब्ध हो जाएंगे।

कितना आएगा खर्च

  • वर्किंग कैपिटल: 1.86 लाख रुपए (इसमें रॉ-मटेरियल, इन्ग्रेडिएंट, काम करने वालों की सैलरी,पैंकिंग, टेलिफोन, रेंट आदि का खर्च शामिल है।)
  • फिक्स्‍ड कैपिटल: 3.5 लाख रुपए (इसमें हर तरह की मशीनरी और इक्यूपमेंट का खर्च शामिल है।)
  • टोटल खर्च: 5.36 लाख रुपए

सरकार से कैसे मिलेगी मदद

  • इसमें आपको 90 हजार रुपए अपने पास से लगाना होगा।
  • बैंक से टर्म लोन 2.97 लाख रुपए होगा।
  • वर्किंग कैपिटल लोन 1.49 लाख रुपए होगा।

कैसे होगा मुनाफा

अगर मंथली 1.86 लाख रुपए वर्किंग कैपिटल के साथ मैन्युफैक्चरिगं शुरू करें तो साल भर में कुल 20.38 लाख रुपए की सेल होगी। वहीं, इतना प्रोडक्ट तैयार करने में प्रोडक्शन कास्ट 14.26 लाख रुपए सालाना आएगा। इसे ऐसे समझें….

  • प्रोडक्शन कास्ट : 14.26 लाख रुपए सालाना
  • टर्नओवर : 20.38 लाख रुपए सालाना
  • ग्रॉस प्रॉफिट : 6.12 लाख रुपए सालाना
  • टर्म लोन व वर्किंग कैपिटल लोन का सालाना ब्याज: करीब 50 हजार रुपए
  • इनकम टैक्स: 13 हजार रुपए
  • अन्य खर्च: 70 हजार रुपए
  • नेट प्रॉफिट: 4.6 लाख रुपए सालाना
  • मंथली: 35 हजार रुपए से ज्यादा

कितने साल में मिल जाएगा पूरा इनवेस्टमेंट

  • सालाना रिटर्न: 78 फीसदी
  • 4.20 लाख X 100/ 5.36 लाख= 78%
  • यानी 1.5 साल में पूरा इन्वेस्टमेंट निकल आएगा।

कैसे करें अप्लाई

  • इसके लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत आप किसी भी बैंक में अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक फॉर्म भरना होगा, जिसमें ये डिटेल देनी होगी…
  • नाम, पता, बिजनेस एड्रेस, एजुकेशन, मौजूदा इनकम और कि‍तना लोन चाहिए।
  • इसमें किसी तरह की प्रोसेसिंग फीस या गारंटी फीस भी नहीं देनी होती। लोन का अमाउंट 5साल में लोटा सकते हैं।

क्या होना चाहिए जरूरी

  • इसके लिए आपके पास एक जगह होनी चाहिए। अगर आपके पास जगह नहीं है तो इसे रेंट पर लिया जा सकता है। यह खर्च वर्किंग कैपिटल में ऐड है।
  • इसके लिए मैन पावर में एक मैनेजर, सेल्स मैन, स्किल्ड वर्कर और सेमी स्किल्ड वर्कर होने जरूरी है। इन सबकी सैलरी पर 50 से 60 हजार रुपए खर्च होगा, जो वर्किंग कैपिटल में ऐड किया गया है।

सोया मिल्क प्लांट लगाने के लिए सरकार दे रही 10 लाख का लोन, ऐसे करे अप्लाई

केंद्र सरकार लोगों को स्‍वरोजगार के प्रति आकर्षित करने के लिए न केवल लोन दे रही है, बल्कि बिजनेस की ट्रेनिंग भी दे रही है। ऐसा ही एक बिजनेस है, सोया मिल्‍क मेकिंग यूनिट।

80-90 फीसदी लें लोन

इतना ही नहीं, सरकार के प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम (PMEGP) के तहत 90 फीसदी तक लोन भी ले सकते हैं। ऐसे में, अगर आपके पास मात्र 1 लाख रुपए हैं तो 90 फीसदी तक लोन लेकर आप सोया मिल्‍क मेकिंग यूनिट शुरू कर सकते हैं।

सोया मिल्‍क मेकिंग यूनिट की कुल कॉस्‍ट 11 लाख रुपए है। इसी प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर बैंक से मुद्रा लोन ले सकते हैं। बैंक आपको 80 फीसदी लोन दे सकते हैं और आपको लगभग 1.50 लाख रुपए का इंतजाम करना होगा।

कहां से लें ट्रेनिंग

नेशनल स्‍मॉल इंडस्‍ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) द्वारा देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में टेेक्‍निकल सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटर से आप कई तरह के बिजनेस के साथ-साथ जॉब ओरिएंटेड कोर्स की ट्रेनिंग ले सकते हैं। इसमें सोया मिल्‍क मेेकिंग की पूरी ट्रेनिंग दी जाती है।

साथ ही, एंटरप्रेन्‍योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (EDP) के तहत बिजनेस शुरू करने से लेकर बिजनेस मैनेजमेंट, मार्केटिंग आदि की भी ट्रेनिंग भी दी जाती है।

कैसे शुरू होगा बिजनेस

आपको सबसे पहले सोयाबीन सीड का इंतजाम करना होगा। सोयाबीन से तीन गुना अधिक नॉर्मल पानी में सोयाबीन सीड को 4 से 6 घंटे तक एक गर्म तापमान में एक डिब्‍बे में भिगोना होगा।

उसके बाद 8 से 12 घंटे तक ठंडे तापमान में रखना होगा। इसके बाद भीगे हुए सोयाबीन को एक ग्राइंडर और कुकिंग मशीन में रखिए, फिर उसे 120 डिग्री तापमान में 10 मिनट तक रखिए। इसके बाद आप आउटलेट वाल्‍व को खोल कर दूध को अपने हिसाब से पेक कर सकते हैं।

किस मशीनरी की होगी जरूरत

रिपोर्ट के मुताबिक, आपको मशीनरी व इक्विपमेंट के तौर पर एक ग्राइंडर या कूकर, बॉयलर, मैकेनिकल फिल्‍टर प्रेस, टोफू बॉक्‍स, सोकिंग टैंक की जरूरत होगी।

कितनी जगह की होगी जरूरत 

इस रिपोर्ट के मुताबिक, आपको एक छोटी यूनिट लगाने के लिए केवल 100 वर्ग मीटर जगह की जरूरत पड़ेगी, जिसे आप किराये पर भी ले सकते हैं। इसमें से कवर्ड एरिया केवल 75 वर्ग मीटर होना चाहिए।

कितना प्रोडक्‍शन कर सकेंगे आप 

एनएसआईसी की इस रिपोर्ट में सालाना 175000 लीटर सोया मिल्‍क का प्रोडक्‍शन का अनुमान लगाया गया है। यानी कि आप रोजाना लगभग 480 लीटर सोया मिल्क बना सकते हैं। इस हिसाब से तीन माह की वर्किंग कैपिटल, मशीनरी एवं इक्विपमेंट, रॉ मैटिरियल, सेलरी, यूटिलिटी पर कुल खर्च लगभग 11.60 लाख रुपए के इन्‍वेस्‍टमेंट का अनुमान है।

कैसे लें लोन 

PMEGP के तहत आपको 90 फीसदी और मुद्रा स्‍कीम के तहत आपको 80 फीसदी लोन मिल जाएगा। PMEGP के लिए ऑनलाइन सप्‍लाई करना होगा। जिसका लिंक है – https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal/jsp/pmegponline.jsp

 

अंडे के छिलके से ऐसे मोटी कमाई कर रही हैं ये महिलाएं… अपनाया ये तरीका

अंडा खाने के बाद अक्सर हम छिलके फेंक देते हैं क्योंकि इसे किसी काम का नहीं माना जाता है. वहीं छत्तीसगढ़ की महिलाएं बेकार समझकर फेंक दिए जाने वाले अंडे के छिलके से हर साल लाखों कमा रहीं हैं…

आइए जानते हैं कैसे..

ये बात जानकर आप जरूर हैरान रहे गए होंगे कि आखिर कैसे ये महिलाएं अंडे के छिलके से अपनी मोटी कमाई कर रही है. बता दें, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की ये महिलाएं इन अंडे के छिलकों को खाद के रूप में बदलकर मोटा पैसा कमा रही हैं. आय के लिए उनका निकाला हुआ ये तरीका बेमिसाल है.

सरगुजा जिले की कलेक्टर रितु सेन ने यहां कि महिलाओं को बताया कि आत्मनिर्भर बनना कितना जरूरी है. उन्होंने महिलाओं को रोजगार के साधन खोजने में भी मदद की. रितु की मेहनत की रंग लाई और छत्तीसगढ़ की महिलाओं से ठान लिया कि वह आत्मनिर्भर बनेंगी.

महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह (Self-Help Groups) के जरिए रोजगार के नए रास्ते तलाश किए. महिलाओं को कैंटीन प्रशासकों, पार्किंग और यहां तक ​​कि शहर में भी ठोस कचरे के रूप में रोजगार के अवसर खोज निकाले.

ऐसे करती हैं अंडे का छिलके का प्रयोग

जब महिलाओं ने देखा कि अंडे के छिलकों को लोग फेंक देते हैं तो उन्होंने इनका रिसाइकल करने के बारे में सोचा. आज ये महिलाएं अंडे के छिलकों से ‘कैल्शियम पाउडर’ और ‘खाद’ बना रही है. इसकी ट्रेनिंग उन्हें पर्यावरणविद सी. श्रीनिवासन दे रहे हैं. आपको बता दें, श्रीनिवासन एक ऐसे पर्यावरणविद हैं जो पिछले कई सालों से अपशिष्ट पदार्थों को रिसाइकल कर उन्हें काम का बनाने का काम कर रहे हैं.

कैसा होता है अंडे के छिलके से बना पाउडर

जो पाउडर अंडे के छिलकों से तैयार किया जाता है वह मुर्गियों के खाने में मिला दिया है. जिससे उनके भोजन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है साथ मुर्गियां तंदरुस्त रहती हैं. वहीं पोल्ट्री सेंटर के मैनेजर का कहना है कि महिलाओं के इस काम से पशुपालन में काफी मदद मिल रही है. जहां महिलाएं ऐसा करके पैसे कमा रही है वहीं बेकार पड़ी चीजों का सही निपटान हो रहा है.

वहीं एक ओर अंडे के छिलके से खाद बनाई जा रही है. श्रीनिवासन ने बताया- बेकार पड़ी सब्जियों और हरे कचरे से खाद बनाना आसान होता है, लेकिन अंडे के छिलकों से खाद बनने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है. वहीं उन्होंने बताया कि अंडे के छिलके 95 प्रतिशत कैल्शियम कार्बोनेट के बने होते हैं. इनसे बनी खाद पेड़- पौधों को काफी लाभ पहुंचाते हैं. बता दें,

अगर ये महिलाएं 50-60 किलो अंडे के छिलके को रिसाइकल करती हैं. और वहीं मुर्गियों के खाने की कीमत 500 से 600 रुपये प्रति किलो के आस-पास होती है तो ‘स्वयं सहायता समूह’ में काम कर रही ये महिलाएं ये हर महीने 15,000 से 30,000 रुपये तक कमाई करती होंगी.

अब सरकार खरीदेगी पांच रूपये किलो गोबर, देश भर में लगेंगे गोबर से कागज़ बनाने के प्लांट

गोबर शब्द का प्रयोग अक्सर बर्बादी के लिए किया जाता है। लेकिन अब गाय के गोबर अच्छी-खासी कमाई का जरिया बनने जा रहे है। सरकार ने गोबर से कागज (paper) बनाने का सफल प्रयोग कर लिया है।

एमएसएमई मंत्रालय के तहत काम करने वाले खादी ग्रामोद्योग (केवीआईसी) की यूनिट केएनएचपीआई ने तो गाय के गोबर (cowdung) से कागज का उत्पादन भी शुरू कर दिया है।

अब देश भर में इस प्रकार के प्लांट लगाने की योजना तैयार की जा रही है। कागज बनाने के लिए गोबर के साथ कागज के चिथड़े का इस्तेमाल किया जाता है।

गोबर से वेजिटेबल डाई बनाने का भी काम

केवीआईसी के चेयरमैन वी.के. सक्सेना ने  बताया कि गोबर से कागज बनाने के साथ वेजिटेबल डाई बनाने का भी काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि गोबर में से कागज बनाने लायक सिर्फ 7 फीसदी मैटेरियल निकलते हैं। बाकी के 93 फीसदी का इस्तेमाल वेजिटेबल डाई बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। ये वेजिटेबल डाई पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। इसका निर्यात भी किया जा सकता है।

5 रुपये किलो बिकेंगे गोबर

सक्सेना ने बताया कि यह स्कीम किसानों की आय को दोगुना करने के लिए लाई जा रही है। उन्होंने बताया कि कागज एवं विजिटेबल डाई बनाने के लिए सरकार 5 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किसानों से गोबर खरीदेगी। एक जानवर एक दिन में 8-10 किलोग्राम गोबर करता है। ऐसे में, किसानों को अपनी मवेशियों से रोजाना कम से कम 50 रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

कहां-कहां लगेंगे प्लांट

सक्सेना ने बताया कि इस प्रकार के प्लांट देश भर में लगाने की योजना है। निजी लोगों को इस प्रकार के प्लांट लगाने के लिए सरकार की तरफ से कर्ज मुहैया कराए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि केवीआईसी ने इस टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण कर लिया है और केवीआईसी लोगों को टेक्नोलॉजी देने का काम करेगा। उन्होंने बताया कि केवीआईसी के जयपुर स्थित केएनएचपीआई प्लांट में अगले 15-20 दिनों में गोबर से कागज बनाने का काम आरंभ हो जाएगा।

15 लाख में लग जाएंगे ये प्लांट

गोबर से कागज बनाने वाले प्लांट लगाने में 15 लाख रुपये खर्च होंगे। एक प्लांट से एक माह में 1 लाख कागज के बैग बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा वेजिटेबल डाई अलग।

आप भी शुरू कर सकते हैं अपना डेयरी बिजनेस, मोदी सरकार देगी 1.75 लाख की सब्सिडी

डेयरी सेक्टर में रोजगार की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए मोदी सरकार ने डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) शुरू की है। अगर आप भी मिल्क डेयरी खोलकर पैसा कमाना चाहते हैं तो यह स्कीम आप जैसे लोगों के लिए ही है। इस स्कीम के लिए केंद्र सरकार ने साल 2018-19 में 323 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। इससे आपको डेयरी खोलने पर 25 से 33 फीसदी तक की सब्सिडी दी जाएगी।

1.75 लाख रु की सब्सिडी मिलेगी

अगर आप भी डेयरी बिजनेस की शुरुआत करना चाहते हैं तो सरकार की इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। अगर आप 10 दुधारू पशुओं की डेयरी खोलते हैं तो आपके प्रोजेक्‍ट की लागत करीब 7 लाख रुपए तक आती है। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही इस योजना में आपको लगभग 1.75 लाख रुपए की सब्सिडी मिलेगी।

दो पशु से भी शुरू कर सकते हैं डेयरी

डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत दो दुधारू पशु से भी डेयरी यूनिट शुरू की जा सकती है। अगर आप कम पूंजी से डेयरी कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो यह विकल्प भी मौजूद है। अगर आप 2 दुधारू पशु वाली डेयरी यूनिट शुरू करते हैं तो आपके प्रोजेक्ट की कॉस्ट लगभग 1.40 लाख रुपए होगी, जबकि आपको 35 हजार रुपए तक की सब्सिडी मिल सकती है। अगर आप एससी/एसटी कैटेगरी में आते हैं तो आपको दो पशु वाली डेयरी पर 46,600 रुपए की सब्सिडी मिल सकती है।

क्रॉसब्रीड की होंगी गाय

केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा यह सब्सिडी राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के माध्‍यम से दी जाती है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, अगर आप एक छोटी डेयरी खोलना चाहते हैं तो उसमें आपको क्रॉसब्रीड गाय (औसत से अधिक दूध देने वाली) जैसे साहीवाल, रेड सिंधी, गिर, राठी या भैंस रखनी होंगी। आप इस डेयरी में 10 दुधारू पशु रख सकते हैं।

कितनी सब्सिडी मिलेगी?

डेयरी उद्यमिता विकास योजना के मुताबिक आपको डेयरी लगाने में आने वाले खर्च का 25 फीसदी कैपिटल सब्सिडी मिलेगी। अगर आप अनुसूचित जाति/जनजाति की कैटेगरी में आते हैं तो आपको 33 फीसदी सब्सिडी मिल सकती है। यह सब्सिडी आपको अधिकतम 10 दुधारू पशुओं के लिए ही दी जाएगी। ए

क पशु के लिए केंद्र सरकार 17,750 रुपए की सब्सिडी देती है। अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों के लिए यह सब्सिडी 23,300 रुपए प्रति पशु हो जाती है। इसका मतलब यह है कि एक सामान्य जाति के व्यक्ति को 10 दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने पर 1.77 लाख रुपए की सब्सिडी मिल सकती है।

उपकरण पर भी सब्सिडी

डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत दुग्ध उत्पाद (मिल्‍क प्रोडक्‍ट) बनाने की यूनिट शुरू करने के लिए भी सब्सिडी दी जाती है. योजना के तहत आप दुग्ध उत्पाद की प्रोसेसिंग के लिए उपकरण खरीद सकते हैं।

अगर आप इस तरह की मशीन खरीदते हैं और उसकी कीमत 13.20 लाख रुपए आती है तो आपको इस पर 25 फीसदी (3.30 लाख रुपए) की कैपिटल सब्सिडी मिल सकती है। अगर आप एससी/एसटी कैटेगरी से आते हैं तो आपको इसके लिए 4.40 लाख रुपए की सब्सिडी मिल सकती है।

बना सकते हैं मिल्क कोल्ड स्टोरेज

मिल्‍क कोल्‍ड स्‍टोरेज भी बना सकते हैं आप डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत दूध और दूधे से बने उत्पाद के संरक्षण के लिए कोल्‍ड स्‍टोरेज यूनिट शुरू कर सकते हैं। इस तरह का कोल्ड स्टोरेज बनाने में अगर आपकी लागत 33 लाख रुपये आती है तो इसके लिए सरकार सामान्‍य वर्ग के आवेदक को 8.25 लाख रुपये और एससी/एसटी वर्ग के लोगों को 11 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।

और क्या होंगे फायदें ?

नाबार्ड की तरफ से डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत पशु खरीदने, बछड़ा पालन, वर्मी कंपोस्ट, डेयरी पार्लर, दुग्ध शीतलन व अन्य कार्यों के लिए लघु व सीमांत किसानों सहित समूहों को प्राथमिकता दी जाती है।

इस योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं:

https://www.nabard.org/auth/writereaddata/File/Circular-DEDS%202018-19.pdf

लाल पैथ लैब के साथ बिजनेस कर लाखों कमाने का मौका, ऐसे लें फ्रेंचाइजी

आप अगर नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं तो आप डॉ. लाल पैथ लैब की फ्रेंचाइजी लेकर अच्छी शुरुआत कर सकते हैं। इसके लिए आपको ज्यादा पैसे की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। आप 3 से 5 लाख रुपए के खर्च में डॉ. लाल पैथ लैब का कलेक्शन सेंटर शुरू कर सकते हैं। 1960 से पैथोलॉजी सर्विस प्रोवाइड कराने वाली यह कंपनी आपको पूरा बिजनेस सपोर्ट भी देगी। आइए, जानते हैं कि आप कैसे डॉ. लाल पैथ लैब से जुड़ सकते हैं।

क्या है बेसिक जरूरत

अगर आप लैब का कलेक्शन सेंटर खोलना चाहते हैं तो आपके पूरे प्रोजेक्ट की कॉस्ट 3 से 5 लाख रुपए होगी। आपको सेंट्रल लोकेशन पर 150 से 300 वर्ग फुट साइज की दुकान किराए पर लेनी होगी। दुकान आपकी हो तो उससे आपकी आमदनी और बढ़ जाएगी। दुकान ग्राउंड फ्लोर पर होनी चाहिए।

इन राज्यों में है मौका

कंपनी द्वारा दिल्ली एनसीआर के अलावा आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, असम, ओडिशा, पश्चिम बंगाल में कलेक्शन सेंटर की फ्रेंचाइजी ऑफर की गई है।

सपोर्ट करती है कंपनी

लैब की ओर से फ्रेंचाइजी ट्रेंनिंग दी जाती है। फील्‍ड असिस्‍टेंस के अलावा मार्केटिंग एवं एडवरटाइजिंग असिस्‍टेंस भी दी जाती है।

डायग्नोस्टिक सेंटर भी ऑफर कर रही है कंपनी

लैब द्वारा डायग्नोस्टिक सेंटर भी ऑफर किया जा रहा है। इसकी प्रोजेक्ट कॉस्ट 1.25 करोड़ रुपए है। इसके लिए आपके पास 3500 वर्ग फुट स्पेस होना चाहिए। यहां से आप पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, कार्डियोलॉजी और प्रिवेंटिव हेल्थ सर्विसेज ऑफर कर सकते हैं।

कैसे करें अप्लाई

अगर आप फ्रेंचाइजी के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो आप लाल पैथ लैब की वेबसाइट https://www.lalpathlabs.com/partnerwithus पर क्लिक करके पूरी जानकारी ले सकते हैं।

कैसे होती है कमाई

कंपनी द्वारा फ्रेंचाइजी को कमीशन दिया जाता है। यह आपकी सेल्स पर निर्भर करता है कि आप कितनी सेल्स करके अच्छा खासा कमा सकते हैं, लेकिन अगर आपकी लोकेशन अच्छी है तो उसका बेनिफिट आपको जरूर मिलेगा।

जानिए CNG पंप खोलने का प्रोसेस, 12 साल में खुलेंगे 10 हजार नए स्टेशन

CNG पंप बहुत ही फायदेमंद व्यवसाय माना जाता है। अगर आप एक सही जगह पर CNG स्टेशन खोलते हैं तो काफी ज्‍यादा मुनाफा कमा सकते हैं। पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत में साल 2030 तक 10,000 CNG स्टेशन खोले जाएंगे। SIAM के वार्षिक समारोह में पेट्रोलियम मिनिस्टर ने इस बात की जानकारी दी। देश में कई लोग ऐसे हैं, जो CNG पंप की डीलरशिप लेना चाहते हैं लेकिन उन्‍हें इसको अप्‍लाई करने के प्रोसेस के बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं होती है। आज हम आपको CNG पंप डीलरशिप लेने के पूरे प्रोसेस के बारे में बताने जा रहे हैं।

एक CNG यूनिट से सालाना 750 लीटर पेट्रोल की बचत

पेट्रोलियम मिनिस्टर ने कहा कि प्रत्येक CNG यूनिट करीब हर साल 750 लीटर पेट्रोल की बचत करती है। इसके अलावा CNG वाहन कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं। प्रधान के मुताबिक CNG कारें 20-30 फीसदी कम CO2 उत्सर्जित करती हैं।

कौन खोल सकता है CNG पंप

CNG पंप मालिक बनने के लिए आपका भारतीय नागरिक होना जरूरी है। साथ ही आपकी उम्र 21 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए और कम से कम 10वीं तक की एजुकेशन पूरी होनी चाहिए।

होनी चाहिए जमीन

  • CNG पंप खोलने के लिए आपके पास जमीन होना जरूरी है। अगर जमीन आपकी खुद की नहीं है तो आपको जमीन के मालिक से NOC यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होगा।
  • आप अपने परिवार के किसी सदस्‍य की जमीन को लेकर भी CNG पंप के लिए अप्‍लाई कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए भी आपको एक NOC और affidavit बनवाना होगा।
  • लीज पर ली गई जमीन के लिए lease agreement होना अनिवार्य है। साथ ही Registered sales deed या lease deed भी होनी चाहिए।
  • जमीन green belt में नहीं होनी चाहिए।
  •  जमीन अगर कृषि भूमि में आती है तो आपको उसका कनवर्जन कराना होगा और उसे गैर कृषि भूमि में लाना होगा।
  • आपके पास जमीन के पूरे डॉक्‍युमेंट्स और नक्‍शा होना चाहिए।

CNG पंप खोलने में खर्च

CNG पंप खोलने में जो खर्च है वो जगह को कंपनियों पर निर्भर करता है। सीएनजी स्टेशन खोलने पर करीब 30 से 50 लाख रुपए का खर्च आएगा। इसके लिए आवेदक के पास कम से कम 16000 से 1500 वर्ग फुट स्पेस चाहिए होगा।

ऐसे करें अप्लाई

कंपनियां अखबार और वेबसाइट पर विज्ञापन देतीं हैं कि उन्हें इस जगह पर CNG पंप खोलना है। अगर आपकी जमीन भी उसी जगह पर या उसके आसपास है तो आप अप्लाई कर सकते हैं। अप्‍लाई करने के लिए कंपनियों की वेबसाइट पर ऑप्‍शन मौजूद रहता है।