ऐसे शुरू करें टी बैग बनाने का बिजनेस

ग्रामीण इलाकों में निवासित व्यक्ति शायद Tea Bag नामक इस शब्द से कम ही परिचित होंगे क्योंकि आज भी ग्रामीण इलाकों में ही नहीं अपितु शहरों में भी अधिकतर घरों में चाय बनाने के लिए पारम्परिक विधि अर्थात जिसमे बर्तन में पानी रखकर चूल्हे पर रख दिया जाता है |

और उसके बाद उस खौलते पानी में चाय की पत्तियों को डाला जाता है का उपयोग ही सर्वाधिक तौर पर किया जाता है | लेकिन बढ़ते शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण ने चाय बनाने की एक नई प्रणाली को जन्म दिया है जिसमे Tea Bag का इस्तेमाल चाय बनाने के लिए किया जाता है |

अक्सर बड़े बड़े कार्यालयों में चाय बनाने के लिए Tea Vending Machine का उपयोग किया जाता है जिनमे लगभग हर प्रकार की चाय बनाने के लिए Tea Bag का इस्तेमाल होता है | इसलिए कहा जा सकता है की इस प्रकार के उत्पाद की मांग ज्यादातर तौर पर भारत के शहरी भागों में एवं अंतराष्ट्रीय बाजार में हमेशा विद्यमान रहती है |

इसलिए इस व्यापार को कोई भी व्यक्ति बेहद कम निवेश के साथ शुरू कर सकता है क्योंकि Tea bag Making Business को शुरू करने के लिए चाय उद्योग से जुड़ी कोई बहुत अधिक जानकारी की आवश्यकता नहीं होती है | हालांकि उद्यमी को इस तरह के बिज़नेस को शुरू करने के लिए बेहद कम निवेश की आवश्यकता होती है और उद्यमी चाहे तो शुरूआती दौर में इसे घर से भी शुरू कर सकता है |

इसलिए कोई भी उत्साही एवं इच्छुक व्यक्ति इस व्यापार को आसानी से इसलिए शुरू कर सकता है क्योंकि Tea Bag making Process को समझना बेहद आसान प्रक्रिया है |

Tea bag की बिकने की संभावनाएं:

यदि कोई व्यक्ति अपने Tea bag Manufacturing Business को अच्छी योजना एवं तैयारी के साथ शुरू करे तो वह इस व्यापार से बड़ा प्रॉफिट कमा सकता है | क्योंकि बड़े होटल, रेस्टोरेंट, कॉफ़ी की दुकानें, भारतीय रेलवे, सभी प्रकार के कार्यालय Tea bag के बड़े उपभोक्ता हैं | इसके अलावा कुछ घरों में भी लोग टी बैग का इस्तेमाल करने लगे हैं |

हालांकि स्थानीय मार्केट में इस उत्पाद की बिकने की संभावनाओं को तलाशने के लिए उद्यमी को उस क्षेत्र में स्थित व्यवसायिक गतिविधियों का आकलन करना होगा और यह भी पता करना होगा की उस क्षेत्र विशेष में Tea Vending machine का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या कितनी है |

टी बैग बनाने का बिज़नेस कैसे करें?

मार्केट रिसर्च है जरुरी :

यह व्यापार शुरू करने से पहले व्यक्ति को चाहिए की वह मार्केट रिसर्च करे क्योंकि यह उत्पाद एक ऐसा उत्पाद है जो लोगों की दैनिक आवश्यकता से जुड़ा हुआ नहीं है | बल्कि कुछ घरों एवं कार्यालयों में ही अभी तक इसका इस्तेमाल देखा गया है |

इसलिए उद्यमी को यह पता करना होता है की कौन कौन सी ऐसी कम्पनियाँ हैं जो उसके उत्पाद को खरीद सकती हैं | इस रिसर्च में कंपनीयों सम्बन्धी सभी डिटेल्स शामिल होनी चाहिए और यह भी शामिल होना चाहिए की उद्यमी इन कंपनियों को अपना उत्पाद खरीदने के लिए कैसे राजी करेगा |

Tea Bag Making Business हेतु आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन:

जहाँ तक Tea bag Making Business शुरू करने के लिए स्थानीय नियमों की बात है यह राज्य एवं शहर के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं | लेकिन शुरूआती तौर पर उद्यमी चाहे तो अपने बिज़नेस को One Person Company के तहत रजिस्टर कर सकता है |

जानिए भारत में अपनी कंपनी कैसे खोलें? अपने बिज़नेस को रजिस्ट्रेशन करा लेने के बाद उद्यमी को अपने व्यापार को वर्तमान कर प्रणाली के अंतर्गत भी पंजीकृत कराना पड़ सकता है |

जानिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई कैसे कर सकते हैं | हालांकि यह सब करने से पहले उद्यमी को अपने व्यापार के नाम से पैन कार्ड एवं चालू खाता खोलना पड़ सकता है | जानिए किसी भी बिज़नेस के लिए चालू खाता कैसे खोलें? इन सबके अलावा उद्यमी चाहे तो अपने Tea bag making Business को उद्योग आधार के तहत भी पंजीकृत करा सकता है |

टी बैग बनाने के लिए आवश्यक मशीनरी उपकरण एवं कच्चा माल:

Tea Bag making Business में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की बात करें तो इसके मुख्य रूप से दो अवयव होते हैं इनमे एक तो खुली चाय पत्तियां होती हैं दूसरा कच्चा माल खाद्य वर्ग से सम्बंधित प्लास्टिक, पेपर फ़िल्टर बैग होते हैं |

उद्यमी को चाहिए की वह Tea bag का निर्माण करने के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त चाय की खरीदारी करे इसके लिए उद्यमी चाहे तो सीधे चाय की नीलामी में जाकर चाय खरीद सकता है या फिर किसी ऐसे चाय प्रसंस्कृत इकाई से चाय खरीद सकता है जो किफायती दरों पर उसे चाय बेच दे |यह चाय अनेकों प्रकार जैसे दार्जीलिंग टी, ग्रीन टी, हर्बल टी में आती है | इसलिए उद्यमी को स्थानीय मांगों को आधार मानकर चाय का चुनाव करना चाहिए |

Tea Bag बनाने वाली मशीन जिन्हें Tea bag making machine के नाम से जाना जाता है ये मार्केट में मैन्युअल से लेकर आटोमेटिक कार्यशैली के साथ उपलब्ध है शुरूआती दौर में उद्यमी चाहे तो किसी सस्ती सी Tea Bag making Business का चुनाव अपने व्यापार के लिए कर सकता है | हालांकि कच्चे माल के तौर पर उद्यमी को पैकेजिंग मटेरियल की भी आवश्यकता होगी |

1.50 लाख लागत पर 25,000 प्रति‍माह कमाएं, सॉफ्ट ड्रिंक बि‍जनेस का सारा गणि‍त समझें

अगर आप इस गर्मी के मौसम में ठीक ठाक कमाई करना चाहते हैं तो इस बि‍जनेस के बारे में जरूर सोचें। कम लागत, कम वक्त और कम जगह, कम झंझट और बेहद कम भागदौड़ में शुरू होने वाला यह बि‍जनेस मौसम के गर्म रहने तक अच्‍छा चलता है। मौसम के तेवर तो देखकर लग रहा है कि‍ पि‍छले साल के मुकाबले तेज गर्मी बहुत जल्‍दी शुरू हो जाएगी।

इस बि‍जनेस में करीब 50 % का मार्जि‍न है, यानी अगर आपने दि‍न में 1000 रुपए का भी काम कि‍या तो 500 रुपए आपका मुनाफा हुआ। इसकी दूसरी खासि‍यत ये है कि‍ आपको इसमें बेहद कम भागदौड़ करनी है। एक जगह बैठकर काम करना है और चाहें तो आप कि‍सी को भी इसे संभालने के लि‍ए दे सकते हैं। ऐसा नहीं है कि‍ आप नहीं होंगे तो घाटा होने लगेगा।

तेजी से बढ़ रहा है

हम बात कर रहे हैं सोडा मशीन के बारे में। आपने ध्‍यान दि‍या होगा कि‍ इसका काम तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह है इसमें होने वाला मुनाफा। कई लोग इसके बारे में सोचते हैं तो मगर जानकारी के आभाव में यह फैसला नहीं ले पाते कि‍ उन्‍हें यह काम शुरू करना चाहि‍ए या नहीं।

हम आपको इस बि‍जनेस की मोटी मोटी जानकारी दे रहे हैं, जि‍सकी बदौलत आप यह फैसला कर पाएंगे कि‍ यह बि‍जनेस आप कैसे शुरू कर सकते हैं। सबसे पहले तो हम मशीन के बारे में बताते हैं। इसमें कई तरह की मशीनें आती हैं। जैसे 6 + 2 , 8+2, 10+2

क्‍या है इसका मतलब

6 + 2 का मतलब हुआ, 6 सोडा फ्लेवर नि‍कलेंगे और 2 जूस फ्लेवर। इसी तरह से 8+2 में 8 तरह के सोड़ा फ्लेवर जैसे लैमन, कोला वगैरा और 2 तरह के जूस फ्लेवर जैसे मैंगो वगैरा मि‍लेंगे। आप अपनी जगह और बजट के हि‍साब से मशीन का चुनाव कर सकते हैं।

क्‍या है मशीन की कीमत

इंडि‍या मार्ट पर मौजूद डीलर्स ने मशीनों की कीमत 50,000 से 2 लाख रुपए के बीच रखी है। हालांकि‍ इसमें भी मोलभाव करने की गुंजाइश रहती है। कुछ डीलर्स आपको शुरुआत में मशीन के साथ फ्लेवर वगैरा भी देते हैं। मशीन खरीदते वक्‍त दो तीन बातों का ध्‍यान रखें।

उसकी वारंटी या गारंटी कि‍तनी है। क्‍या वह उसे सेट करने में मदद दे रहे हैं। शुरुआत में क्‍या वो रॉ मटीरि‍यल की कि‍ट भी दे रहे हैं। कई डीलर ये सभी चीजें मुफ्त में दे देते हैं। इसलि‍ए मोलभाव करने में बि‍ल्‍कुल हि‍चकि‍चाएं नहीं।

कि‍तनी चीजों की जरूरत पड़ती है

मशीन, पानी की टंकी, पानी, सोडा गैस सि‍लेंडर, फ्लेवर, शुगर, पेपर कप। प्रोडक्ट तैयार करने के लि‍ए आपको इतनी चीजों की जरूरत पड़ती है। जगह कि‍तनी बड़ी चाहि‍ए होगी ये इस बात पर डि‍पेंड करता है कि‍ आप कि‍स साइज की मशीन ले रहे हैं। वैसे 10 बाई 10 की दुकान में बड़ी मशीन भी आसानी से सेट हो सकती है।

या है प्रॉफि‍ट की कैलकुलेशन

  • कच्‍चा माल 200 एमएल के कप की कॉस्‍ट रुपए
  • कप 0.30
  • फ्लेवर 0.25
  • गैस 0.5
  • शुगर 0.95
  • पानी 0.15
  • बि‍जली 0.18
  • मशीन की घि‍साई 0.03
  • जगह का कि‍राया 0.20
  • कुल लागत 2.46

मोटे तौर पर देखें तो 5 रुपए के गि‍लास की लागत ढाई रुपए होगी, यानी इसमें आपको 50 % का प्रॉफि‍ट है। अगर आप हर रोज 500 गि‍लास बेचते हैं तो आप हर दि‍न 2500 रुपए पाएंगे। इसमें से 1250 रुपए की कॉस्‍ट नि‍काल दें तो हर रोज 1250 रुपए की कमाई हो गई।

इस हि‍साब से महीने में आप करीब 37,500 रुपए कमा सकते हैं। अगर आप 300 गिलास भी रोज बेचते हैं तो हर महीने करीब 20,000 से 25000 रुपए कमा सकते हैं। सेल बढ़ेगी तो कमाई भी बढ़ेगी। कमाई की यह कैलकुलेशन इंडस्‍ट्री द्वारा की गई है। इसमें उतार- चढ़ाव हो सकता है।

गोबर से बनाई गैस, अब भरकर बेचेंगे सिलेंडर

औरैया (हरेंद्र प्रताप सिंह)। नौकरी के लिए दर-दर भटकने के बाद स्वरोजगार की ओर रुख किया और सफलता हासिल की। अब दूसरे के लिए प्रेरणा भी बने हैं। पहले पशुपालन कर दूध का कारोबार किया। गोबर गैस प्लांट लगा कर घरेलू उपयोग के लिए ईंधन की व्यवस्था की। अब उसे छोटे सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी है।

यह कहानी है उप्र के औरैया जिर्लािस्थत कटिघरा ब्रह्मनान गांव के किसान कविंद्र सिंह की। कविंद्र को जब नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने परिवार के भरण पोषण के लिए शहर के लिए पलायन नहीं किया। पशुपालन कर पहले दुग्ध उत्पादन से आय बढ़ाई।

अब पशुओं के गोबर से गैस बनाकर उसे सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी में जुटे हैं। इससे उनकी आय और बढ़ेगी। अभी वह जरूरतमंद लोगों को छोटे सिलेंडर में गैस भरकर मुफ्त में दे रहे हैं।

कविंद्र ने तीन वर्ष पूर्व नौ नवंबर 2014 को खेती में पैदा हुए अनाज को बेचकर जुटाए एक लाख रुपये से तीन पशु खरीदे। दूध बेचकर उन्होंने पशुओं की संख्या बढ़ा ली है। अब उनके पास आठ भैंसें व 10 गाय हैं। इनका दूध बेचकर वह प्रतिमाह 30 हजार की बचत करते हैं।

गोबर का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने तीन टन का गोबर गैस प्लांट बनाया। इससे रोजाना करीब 30 किलोग्राम गोबर गैस मिलती है। इसका इस्तेमाल वह घर में खाना बनाने के लिए करते हैं।

जरूरतमंद लोगों को छोटे सिलेंडर में कंप्रेशर से गैस भरकर मुफ्त में देते हैं, लेकिन अब वह मुफ्त में गैस को नहीं बांटेंगे। उन्होंने गैस को सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी कर ली है। इसके लिए 10 टन का गोबर गैस प्लांट बनवाने की भी तैयारी है।

इससे रोजाना करीब 200 किलोग्राम गैस का उत्पादन होगा। जिससे 14 बड़े एलपीजी सिलेंडर भरे जा सकेंगे। वह एक सिलेंडर सिर्फ 400 रुपये में भरेंगे। इसके लिए उन्होंने कंप्रेशर मशीन खरीद ली है।

25 किलोग्राम गैस से चार घंटे चलता है नलकूप

कविंद्र गोबर गैस से ही पंपसेट भी चलाते हैं। 25 किलोग्राम गैस से उनका दस हार्सपावर का इंजन चार घंटे चलता है। इससे वह अपने खेतों की सिंचाई कर लेते हैं। इंजन को चालू करते समय उन्हें थोड़ा डीजल खर्च करना पड़ता है।

कैसे भरते हैं सिलेंडर में गैस

गोबर गैस प्लांट से निकलने वाली गैस के पाइप को वह कंप्रेशन मशीन से जोड़ देते हैं। कंप्रेशर मशीन के दूसरे हिस्से से निकलने वाले पाइप को सिलेंडर से जोड़ देते हैं। इसके बाद मशीन को बिजली या बैटरी से चालू कर देते हैं। कुछ ही देर में छोटा गैस सिलेंडर भर जाता है।

CNG पंप खोल कर सकते हैं लाखों रुपए की कमाई, सरकार दे रही है सब्सिडी, यहां करें अप्लाई

यदि आप अपना कारोबार करने का बारे में सोच रहे हैं तो यह खबर आपके खास काम की है। Nexgen Energia Limited सहज भारत योजना लेकर आई है। इस योजना के तहत आप कंपनी के साथ कारोबार करके हर महीने लाखों रुपए की कमाई कर सकते हैं। यह कंपनी CNG पंप के अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, सीएनजी गैस उत्पादन का उद्योग आदि में कारोबार का मौका दे रही है।

कौन खोल सकता है CNG पंप

कंपनी के अनुसार, देशभर में किसी भी जिले का कोई भी व्यक्ति अपने शहर में सीएनजी पंप, सीएनजी गैस उत्पादन का उद्योग, इंडस्ट्रियल हाई स्पीड डीजल प्लांट, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, जैविक खाद और मलवे से ईंट निर्माण का कारोबार कर सकता है।

कंपनी का कहना है कि नया कारोबार करने के इच्छुक या पहले से ही कारोबार करने वाले लोग भी सीएनजी पंप समेत दूसरे कारोबार करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। कारोबार करने वालों को पांच साल तक आयकर मुक्त, सरकार से सब्सिडी और सभी निजी और राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

इतना करना होगा होगा निवेश

  •  सीएनजी पंप खोलने के लिए आवेदकों को करीब 75 लाख रुपए का निवेश करना होगा। इसमें लाइसेंस फीस और पंप की लागत दोनों शामिल हैं।
  • सीएनजी (सीबीजी) गैस उत्पादन का उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को करीब 2.99 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। इसमें लाइसेंस फीस शामिल नहीं है।
  •  इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन लागने के इच्छुक आवेदकों को करीब 25 लाख का निवेश करना होगा। इसमें लाइसेंस शुल्क और मशीन का लागत दोनों शामिल हैं।
  •  निर्माण मलवे से ईंट उद्योग लगाने वालों को करीब 35 लाख का निवेश करना होगा। इसमें मशीन और लाइसेंस शुल्क दोनों शामिल हैं।
  •  इंडस्ट्रियल हाईस्पीड डीजल उद्योग शुरू करने के लिए करीब 5 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। इसमें लाइसेंस फीस शामिल नहीं हैं।
  • जैविक खाद क्रय-विक्रय का कारोबार करने वालों को करीब 15 लाख रुपए का निवेश करना होगा।

ऐसे कर सकते हैं अप्लाई 

  • आप कंपनी की वेबसाइट www.nexgenenergia.com पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
  • आप NEXGEN ENERGIA के मोबाइल एप द्वारा भी आवेदन कर सकते हैं।
  •  अपना अपना प्रोफाइल या बायोडाटा बनाकर business@nexgenenergia.com या businessnge@gmail पर ईमेल कर आवेदन कर सकते हैं।
  • आप 7419502123 पर मिस कॉल कर जानकारी ले सकते हैं।
  • आपके आवेदन करने के बाद कंपनी एक सप्ताह के अंदर आपको जवाब देगी।

50 हजार रुपए हैं आपके पास तो लगाएं बैटरी वाटर प्‍लांट

पिछले कुछ सालों में बैटरी वाटर की डिमांड लगातार बढ़ रही है। वाहनों और इन्‍वर्टर में लगी बैटरियों में कुछ महीनों के अंतराल में पानी डालने की जरूरत होती है। यह पानी अलग तरह का होता है। यह बैटरी वाटर ऑटोमोबाइल मार्केट के अलावा लगभग हर रेसिडेंशियल मार्केट में बिकता है।

ऐसे में, शहरों में बैटरी वाटर मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्‍लांट भी लग रहे हैं। अगर आप भी कोई ऐसा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, जिसे लगाने में ज्‍यादा पैसा खर्च नहीं होता तो आप बैटरी वाटर मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्‍लांट लगा सकते हैं।

बिजनेस में संभावना को देखते हुए सरकार प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम के तहत इस प्रोजेक्‍ट़़ को लोन भी देती है। आज हम आपको इस पूरे प्रोजेक्‍ट के बारे में बताएंगे, ताकि आप इस प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के आधार पर लोन लेकर अपना बिजनेस शुरू कर सको।

कितना आएगा खर्च

सरकार के मॉडल प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आपके पास लगभग 50 हजार रुपए हैं तो आप बैटरी वाटर प्‍लांट लगा सकते हैं, क्‍योंकि इस पूरे प्रोजेक्‍ट की कॉस्‍ट 4 लाख 70 हजार रुपए है और प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जतरेशन प्रोग्राम के तहत आप लोन भी ले सकते हैं। इस प्रोग्राम के तहत 90 फीसदी लोन केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है।

यह है प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट

इक्‍वीपमेंट ( हॉट एयर ब्‍लॉवर, प्‍लास्टिक ड्रम, वाटर लिफ्टिंग पंप, हार्डनेस टेस्टिंग किट, पीएच मीटर, सेमीऑटोमैटिक फिलिंग मशीन, 1 एचपी मोटर, क्‍वालिटी कंट्रोल इक्‍वीपमेंट) पर लगभग 2 लाख 25 हजार रुपए का खर्च आएगा। जबकि आपको लगभग 2 लाख 45 हजार रुपए की वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ेगी। जिससे आपके प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट 4 लाख 70 हजार रुपए हो जाएगी।

कितनी होगी इनकम

प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्‍ट शुरू होने के बाद एक साल के दौरान आपको लगभग 9 लाख रुपए के रॉ-मैटेरियल की जरूरत पड़ेगी। इस तरह आपकी कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्‍शन 14 लाख 70 हजार रुपए आएगी।

एक साल में आप 250 किलोलीटर बैटरी वाटर का प्रोडक्‍शन करेगा और इसे बेचकर आपको 16 लाख रुपए मिलेंगे। इस आपको लगभग 1 लाख 29 हजार रुपए की इनकम होगी।

मिलेगी 25 फीसदी तक सब्सिडी

अगर आप इस प्रोग्राम के तहत लोन लेते हैं तो आपको 25 फीसदी तक सब्सिडी भी मिलती है। शहरी क्षेत्रों में 15 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में 25 फीसदी सब्सिडी दी जाती है, जबकि स्‍पेश्‍ल कैटेगिरी के लोगों को 25 व 35 फीसदी सब्सिडी दी जाती है।

ऐसे करें ड्राईफ्रूट का बिजनेस, होगी 40 हजार रुपए महीना तक इनकम

ड्राई फ्रूट हर घर की बेसिक जरूरत है। खासकर फेस्टिवल टाइम में ड्राईफ्रूट सबसे ज्यादा गिफ्ट के तौर पर एक्सचेंज किया जाता है। इंडियन फैमिली की इसी बेसिक जरूरत पर अपना बिजनेस खड़ा कर सकते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप ड्राई फ्रूट का बिनजेस शुरू 40 से 50 हजार रुपए महीना कमा सकते हैं।

शुरू कर सकते हैं ड्राईफ्रूट का बिजनेस

ड्राईफ्रूट का बिजनेस शुरू करने के लिए दुकान चाहिए होगी। अगर आपके पास अपनी दुकान है तो आप किराए से बच जाएंगे। वहीं, आप कि‍राए पर दुकान लेकर पर भी काम शुरू कर सकते हैं।

आप अपने एरिया के आसपास दुकान ले सकते हैं। दुकान लेने से पहले यह जरूर देख लें कि आपकी दुकान के आसपास कितनी दुकानें ड्राईफ्रूट की है। ताकि, आपके लिए सेल करना आसान हो।

चाहिए होंगे ये लाइसेंस

  • दुकान चलाने और बिजनेस करने के लिए आपको जीएसटी नंबर चाहिए होगा। जीएसटी नंबर जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद मिल जाएगा।
  • अगर किराए की दुकान पर कारोबार कर रहे हैं तो रेन्ट एग्रीमेंट चाहिए होगा। एमसीडी से दुकान चलाने का लाइसेंस भी लेना होगा।
  • फूड लाइसेंस सरकारी फूड अथॉरिटी एफएसएसएआईएस से लेना होगा।

होलसेल बाजार से खरीद सकते हैं दाल

अपने एरिया के ड्राईफ्रूट के होलसेल बाजर से दाल मंगा सकते हैं। ड्राईफ्रूट इंपोर्टर से भी खरीद सकते हैं। इनकी जानकारी ऑनलाइन मिल जाएगी।

इन्वेस्टमेंट और कमाई

खारी बावली में ड्राईफ्रूट और अनाज के होलसेलर सतिंदर जैन ने बताया कि ड्राईफ्रूट का बिजनेस 5 लाख रुपए के इन्वेस्टमेंट से शुरु किया जा सकता है। 5 लाख रुपए के इन्वेस्टमेंट में हर महीने 40 से 50 हजार रुपए आसानी से कमाए जा सकते हैं। जैन ने कहा कि ड्राईफ्रूट बेचकर रोजाना आसानी से 1,500 से 2,000 रुपए की सेल हो जाती है।

इतना मिलता है मार्जिन

होलसेल बाजार से लेकर रिटेल में 100 रुपए की सेल में 10 से 25 रुपए का मार्जिन मिलता है।

खड़ा कर सकते हैं अपना ड्राईफ्रूट ब्रांड

अपनी पैकेजिंग मशीन खरीदकर ब्रांड नाम के साथ भी ड्राईफ्रूट बेच सकते हैं। ड्राईफ्रूट की क्‍वॉलिटी अच्छी होने पर लंबे समय में इसका फायदा मिलता है।

ऑनलाइन भी बेच सकते हैं ड्राईफ्रूट

अपना ब्रांड बनाने पर ऑनलाइन मार्केट जैसे बिग बास्केट, अमेजन पैन्ट्री जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी ड्राईफ्रूट बेच सकते हैं।

ऑनलाइन कैसे बेचें प्रोडक्ट

कैसे जुड़ सकते हैं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कारोबारी को रजिस्टर कराना होगा
  • कारोबारी को पैन, जीएसटी और बैंक अकाउंट की डिटेल देनी होगी
  • कंपनी सेलर के साथ एमओयू या करार भी करती है
  • करार के बाद आप वेबसाइट पर अपने प्रोडक्ट और साड़ी की फोटोग्राफ अपलोड कर सकते हैं।
  • वैरिफिकेशन के बाद प्रोडक्ट वेबसाइट पर दिखने लगते हैं।
  • ज्यादातर कंपनियां सेलर से प्रोडक्ट ऑनलाइन बिकने के बाद कारोबारी से 1 से 9 फीसदी कमीशन लेती हैं।
  • ऑनलाइन पेमेंट में प्रोडक्ट कस्टमर के पास पहुंचने के बाद सेलर यानी कारोबारी के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

सिर्फ 2 से 6 लाख में खोल सकते हैं Amul parlour, ऐसे करें अप्लाई

आप 2 से 6 लाख में अमूल डेयरी प्रोडक्ट्स की फ्रेंजाइजी ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको संभल कर अप्लाई करना होगा। दरअसल अमूल की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर फ्रॉड हो रहे हैं।

यही वजह है कि अमूल ब्रांड की संरक्षक कंपनी गुजरात को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) लिमिटेड ने अपील की है कि फ्रेंचाइजी, या डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेते वक्त ध्यान रखें। अमूल ने अप्लाई की पूरी प्रक्रिया के बारे में भी बताया है। आइए, जानते हैं GCMMF ने क्या कहा है ? पहले जानते हैं कि कैसे आप अमूल की फ्रेंचाइजी ले सकते हैं

अमूल देता है दो तरह की फ्रेंचाइजी 

अमूल की वेबसाइट के मुताबिक अमूल दो तरह की फ्रेंचाइजी देता है। अगर आप अमूल प्रिफेयरड आउटलेट या अमूल रेलवे पार्लर या अमूल क्‍योस्‍क के लिए फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं तो आपको लगभग 2 लाख रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट करना होगा। इसमें नॉन रिफंडेबल ब्रांड सिक्‍योरिटी के तौर पर 25 हजार रुपए, रिनोवेशन पर 1 लाख रुपए, इक्‍वीपमेंट पर 75 हजार रुपए का खर्च आएगा।

 आपका 6 लाख रुपए आएगा खर्च

अगर आप अमूल आइसक्रीम स्‍कूपिंग पार्लर लेना चाहते हैं तो आपका कुल खर्च लगभग 6 लाख रुपए आएगा। इसमें ब्रांड सिक्‍योरिटी 50 हजार रुपए, रिनोवेशन 4 लाख रुपए, इक्‍वीपमेंट 1.50 लाख रुपए शामिल हैं।

हर महीने कितनी होगी कमाई

  • अगर आप अमूल आउटलेट लेते हैं तो आपको अमूल प्रोडक्‍ट्स के एमआरपी पर कमीशन मिलेगा। जैसे कि आपको एक मिल्‍क पाउच पर 2.5 फीसदी, मिल्‍क प्रोडक्‍ट्स पर 10 फीसदी और आइसक्रीम पर 20 फीसदी कमीशन मिलेगा।
  • अगर आप अमूल आइसक्रीम स्‍कूपिंग पार्लर की फ्रेंचाइजी लेते हैं तो आपको रेसिपी बेस्‍ड आइसक्रीम, शेक, पिज्‍जा, सेंडविच, हॉट चॉकेलेट ड्रिंक पर 50 फीसदी कमीशन मिलेगा। जबकि प्री-पैक्‍ड आइसक्रीम पर 20 फीसदी और अमूल प्रोडक्‍ट्स पर 10 फीसदी कमीशन मिलेगा।
  • अमूल का दावा है कि आप हर महीने लगभग 5 से 10 लाख रुपए की सेल्‍स कर सकते हैं। हालांकि यह लोकेशन पर डिपेंड करता है।

कितने स्‍पेस की पड़ेगी जरूरत

अगर आप अमूल आउटलेट लेते हैं तो आपके पास केवल 150 वर्ग फुट स्‍पेस की जरूरत पड़ेगी। इतने स्‍पेस पर अमूल आपको फ्रेंचाइजी दे देगी।
अगर आप अमूल आइसक्रीम पार्लर के लिए फ्रेंचाइजी चाहते हैं तो आप के पास कम से कम 300 वर्ग फुट का स्‍पेस होना चाहिए।

ऐसे करें अप्लाई

अमूल ब्रांड की संरक्षक कंपनी GCMMF ने स्पष्ट किया है कि अमूल पार्लर्स, अमूल स्कूपिंग पार्लर्स, डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए केवल कंपनी की वेबसाइट www.amul.com या retail@amul.coop या distribution@amul.coop पर मेल करें या 02692221258 पर कॉल करें। इसके अलावा किसी भी अन्य वेबसाइट, पोर्टल या टोल फ्री नंबर पर संपर्क न करें।

इस मशीन के साथ शुरू करें बॉलपेन बनाने का बिज़नेस

पेन हर समय काम आने वाली चीज़ों में से एक है. घर से स्कूल और स्कूल से दफ्तर हर जगह इसकी आवश्यकता होती है. इसका व्यापार बहुत कम पैसे में शुरू किया जा सकता हैं. ख़ास कर बॉल पेन का इस्तेमाल हर क्षेत्र के लोगों में बहुत पसंद किया जाता है. बॉल पेन की सबसे ख़ास बात ये होती है कि इसकी स्याही जल्द से जल्द सूख जाती है. इन दिनों ‘यूज़ एंड थ्रो’ पेन का भी खूब इस्तेमाल किया जा रहा है. यूज एंड थ्रो पेन या बॉल पेन का उद्योग बहुत आसानी से अपने घर में शुरू किया जा सकता है.

बॉल पेन बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होती है.

  • बैरल – बैरल पेन का वह हिस्सा होता है, जिसमे स्याही भरी जाती है. यह आपको 140 रूपये प्रति 250 पीस में मिल सकता है.
  • एडाप्टर – एडाप्टर बैरल और टिप के बीच का हिस्सा होता है. जोकि 4.5 रूपये प्रति 144 पीस मिल सकता है.
  • टिप – टिप पेन का वह हिस्सा होता है, जहाँ से लिखते समय स्याही नियमित रूप से बाहर आती है. यह आपको 28 से 35 रूपये प्रति 144 पीस में मिल सकता है.
  • ढक्कन – यह पेन को ढ़कने के लिए उपयोग किया जाता है. इसके ढक्कन की कीमत 25 रूपये प्रति 100 पीस है.
  • स्याही – यह पेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है जोकि 120 से 400 रूपये प्रति लीटर में मिल सकती है.

पेन बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियाँ कहाँ से ख़रीदें

पेन बनाने की चीज़े किसी बड़े होल सेल मार्किट में मिल सकती हैं. या इन्हें ऑनलाइन भी पाया जा सकता है, जो ये सारी चीज़े आप के घर तक पहुंचा देंगे. इसे ऑनलाइन मंगाने के लिए नीचे दिए गये वेबसाइट पर जायें.

पेन बनाने के लिए मशीनें

यह उद्योग शुरू करने के लिए कम से कम 200 वर्ग फिट जगह की आवश्यकता होती है. इस जगह में लगभग पांच मशीनें बैठाई जाती हैं. नीचे पांचों मशीनों के विषय में दिया जा रहा है.

  • पंचिंग मशीन : पंचिंग मशीन वह मशीन होती है जिससे बैरल में एडाप्टर सेट किया जाता है.
  • इंक फिलिंग मशीन : इंक फिलिंग मशीन की सहायता से बैरल में स्याही भरी जाती है.
  • टिप फिक्सिंग मशीन : टिप फिक्सिंग मशीन की सहायता से पेन के एडाप्टर में टिप लगाया जाता है, जो लिखने में सहायक है.
  • सेण्ट्रीफ्यूगिंग मशीन : इसकी सहायत से पेन के अन्दर स्याही भरते हुए रह गये अतिरिक्त हवा को पेन से निकाला जाता है

पेन बनाने के व्यापार के लिए कुल लागत

आम तौर पर सस्ते मशीन की कीमत 25,000 रूपए हैं, ये मशीनें छोटा व्यापार शुरू करने के लिए ठीक है. इसे कई बड़ी हार्डवेयर दूकानें बेचती हैं. इसे ऑनलाइन मंगाने के लिए निम्न वेबसाइट देख सकते हैं :

https://dir.indiamart.com/impcat/ball-pen-making-machine.html

उपरोक्त सभी चीज़ों को लेकर पहली बार पेन बनाने के व्यापार को स्थापित करने के लिए 30 से 40 हज़ार रूपए तक लग सकते हैं. इन 40 हज़ार रुपये में 25 हज़ार सिर्फ मशीन के हैं. अतः ये अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि एक बार मशीन बैठा लिया जाए तो, कम से कम पैसे लगा कर यह व्यापार चलाया जा सकता है. इसके अलावा यदि आप बड़ा व्यापार शुरू करना चाहते हैं तो इसके लिए ऑटोमेटिक मशीन की आवश्यकता होती है जोकि आपको 4 लाख रूपये तक मिल सकती है. इसके लिए कुल लागत इससे ज्यादा भी हो सकती है.

पेन बनाने की प्रक्रिया

  • पेन बनाने की प्रक्रिया आसान और अल्प सामायिक है. यहाँ इस प्रक्रिया का पूर्ण विवरण दिया जा रहा है.
  • सबसे पहले बैरल को पंचिंग मशीन में लगाना होता है. इस मशीन में पहले से एडाप्टर लगे हुए होते हैं. बैरल एडाप्टर को देखते हुए सही जगह लगाकर पंच करते ही बैरल में एडाप्टर सेट हो जाता है.
  • एडाप्टर सेट हो जाने के बाद बैरल में स्याही भरने की प्रक्रिया आती है. स्याही भरने के लिए इंक फिलिंग मशीन का इस्तेमाल होता है. इंक फिलिंग मशीन में पहले से स्याही भरी हुई होती है. स्याही भरते समय इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि स्याही बैरल की साइज़ के अनुसार भरी जाए. अधिक स्याही भरने से वह बाहर भी आ सकती है जिससे पेन की क्वालिटी पर भी असर पड़ सकता है.
  • इसके बाद बैरल की ऊपरी छेद पर हाथ लगाकर रखें, फिर उसे टिप फिक्सिंग मशीन में लगाया जाता है. इस मशीन की सहायता से स्याही भरे बैरल में टिप लगाया जाता है. इसके बाद ये बैरल पेन में बदल जाता है.
  • इसके बाद इस पैन को सेंट्रीफ्यूगिंग मशीन में डाला जाता है जिससे इसके अंदर की अतिरिक्त हवा बाहर निकल जाए.
  • अब इस पेन का इस्तेमाल लिखने के लिए आराम से किया जा सकता है. इसी तरह आप मशीनों की मदद से अधिक संख्या में पेन बना सकते हैं और अपने ब्रांड का पेन बाज़ार में उतार सकते हैं.

Address: PERFECT SYSTEM 106, Geeta Industrial Estate,
I. B. Patel Road, Goregaon (East),
Mumbai – 400 063. INDIA
Phone: +91 22 26853846

इस एक मशीन से आप बना सकते है कप ,प्लेट ,थाली समेत थर्मोकोल के सभी प्रोडक्ट

इस एक मशीन से आप बना सकते है कप ,प्लेट ,थाली समेत थर्मोकोल के सभी प्रोडक्ट थर्मोकोल के प्रोडक्ट बहुत वक़्त से इस्तमाल किए जाते है । इन प्रोडक्ट में मुख्या तौर पर कप, प्लेट ,थाली ,दोना आदि चीजें होती है ।

लेकिन क्या आप जानते है के इन सभी चीजों को हम सिर्फ एक मशीन से त्यार कर सकते है जिसकी कीमत 2 लाख से शुरू हो जाती है । और इसमें कच्चे माल के तौर पर भी सिर्फ थर्मोकोल मशीन ही इस्तमाल होती है । तो इस तरह से अगर आप इसका कारोबार करना चाहते है तो सिर्फ 3 लाख में शुरू कर सकते है ।

यह मशीन एक मिन्ट मे 80 – 100 थाली त्यार कर देती है । थाली का साईज़ 4 -14 इंच तक होता है । थाली बनाने के लिए 4mm थर्मोकोल शीट इस्तेमाल होती है । मशीन की कीमत 2.7 लाख है ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

पूरी जानकारी के लिए निचे दिये हुए लिंक पर क्लिक करे

https://dir.indiamart.com/impcat/thermocol-plate-making-machine.html

यह है हाथ से चलने वाली ईंटें बनाने वाली मशीन,जाने पूरी जानकारी

ईटें बनाने का काम काफी मुश्किल भरा है क्योंकि आज तक कोई भी ऐसी मशीन नहीं आयी है जो इस काम को अच्छे तरिके से कर सके।

लेकिन अब एक ऐसी मशीन आयी है जिस से आप ईंटें बनाने का काम बड़ी ही तेज़ी से कर सकते है ।

यह मशीन की सबसे अच्छी बात यह है के इस मशीन पर काम करने के लिए आप को डीज़ल जा बिजली की जरूरत नहीं पड़ती।यह मशीन एक दिन में 400 -500 ईटें बना देती है ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसकी वीडियो देखें

इस मशीन की पूरी जानकारी और खरीदने के लिए निचे दिए हुए अड्रेस पर संपर्क कर सकते है । इस कंपनी के इलावा भी आप इस मशीन को कहीं से भी खरीद सकते है ।

Address: Rajkumar Agro Engineers Pvt Ltd
Naresh Gambhir(Director)
Near Union Bank Of India, Ghat Road, Nagpur – 440018, Maharashtra, India
Call Us: 08048719491