2 लाख लगाकर मंथली कमा सकेंगे 1 लाख, ये कंपनी बनाएगी 350 डीलर

अगर आप किसी इंटरनेशनल कंपनी की डीलरशिप लेकर बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो यह अच्‍छा मौका है। हियरिंग ऐड बनाने वाली इंटरनेशनल कंपनी स्‍टारकी द्वारा इंडिया में डीलरशिप दी जा रही है।

इसके लिए आपको काफी अधिक पैसे की भी जरूरत नहीं है। कंपनी दस लाख रुपए तक में यह डीलरशिप दे रही है। इसमें से भी 8 लाख रुपए आपको लोन मिल जाएगा। इस तरह आप केवल 2 लाख रुपए का इंतजाम कर इस कंपनी की डीलरशिप ले सकते हैं।

इतना ही नहीं, केंद्र सरकार द्वारा हियरिंग ऐड जैसे मेडिकल डिवाइस पर छूट या सब्सिडी भी दी जाती है। आप इस सब्सिडी का भी फायदा उठा सकते हैं। इस तरह आप काफी कम इन्‍वेस्‍टमेंट के साथ यह बिजनेस शुरू कर सकते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि कंपनी का इतिहास क्‍या है और आप कैसे इस कंपनी की डीलरशिप लेकर अच्‍छी खासी कमाई कर सकते हैं।

अमेरिका की है कंपनी

स्‍टारकी अमेरिका की कंपनी है। जो 1967 में शुरू हुई थी। भारत में यह कंपनी 2007 में शुरू हुई थी। अब तक भारत में लगभग 250 डीलर बना चुकी है। फाइनेंशियल ईयर 2018-19 में कंपनी भारत में 350 डीलर और बनानी चाहती है। इसके लिए डीलर्स की तलाश की जा रही है।

हियरिंग ऐड का बढ़ रहा है बाजार

स्‍टारकी इंडिया के एमडी रोहित मिश्रा ने बताया कि वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन (डब्‍ल्‍यूएचओ) की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 9 से 10 फीसदी लोगों को सुनने में दिक्‍कत होती है। ऐसे में, हियरिंग ऐड उनको साफ सुनने में काफी मदद कर सकते हैं।

पहले पहल भारत में लोग हियरिंग ऐड को लेकर जागरूक नहीं थे, लेकिन अब धीरे-धीरे इसकी डिमांड बढ़ती ता रही है। मिश्रा के मुताबिक, कंपनी के पास 10 हजार रुपए से लेकर 3.5 लाख रुपए तक की कीमत के हियरिंग ऐड उपलब्‍ध हैं।

ले सकते हैं डीलरशिप

मिश्रा ने कहा कि यदि कोई व्‍यक्त्‍िा अपने शहर में कंपनी के प्रोडक्‍ट्स की डीलरशिप लेना चाहते हैं तो उनका खर्च लगभग 10 लाख रुपए आएगा। इसमें से 8 लाख रुपए तक बैंक या किसी भी संस्‍थान से लोन लिया जा सकता है। सरकार भी आपको सपोर्ट कर सकती है। सरकार की कई योजनाओं का आप लाभ ले सकते हैं। इसके लिए आपको कंपनी के नोएडा स्थित ऑफिस से संपर्क करना होगा।

कितनी होगी कमाई

मिश्रा ने कहा कि यदि आप महीने में दो लाख रुपए की सेल्‍स करते हैं तो आपको लगभग 1 लाख रुपए की इनकम होगी। उन्‍होंने कहा कि किसी डीलर के लिए दो लाख रुपए के प्रोडक्‍ट्स बेचना मुश्किल नहीं है।

सस्‍ती जमीन के चक्‍कर में न करें यह गलती

चलते फिरते आपने जगह-जगह विज्ञापन देखे होंगे, जिसमें 4 से 5000 रुपए प्रति वर्ग गज के रेट से सस्‍ते प्‍लॉट ऑफर किए जाते हैं। ऐसे समय में जब 5 से 10000 वर्ग फुट के हिसाब से फ्लैट मिल रहे हों तो आपकी नजर इन ऑफर पर टिक जाती है और आप गफलत में पड़ जाते हैं कि इतने सस्‍ते प्‍लॉट का ऑफर सही है या नहीं।

आप एक बार तो इस कीमत पर जमीन खरीदने के बारे में सोचने भी लगते हैं और विज्ञापन में दिए गए नंबर पर कॉल भी करते हैं। कुछ लोग तो इस चक्‍कर में फंसकर अपनी जिंदगी भर की कमाई फंसा भी देते हैं, लेकिन ऐसे समय में यदि आपको पता हो कि विज्ञापन में दिए गए नंबर पर क्‍या-क्‍या सवाल करने हैं या प्‍लॉट खरीदने से पहले क्‍या इन्‍कवायरी कर लेनी चाहिए तो आप इस चक्‍कर में फंसने से बच सकते हैं।

आज हम आपको यही बताएंगे कि सस्‍ती जमीन या फ्लैट खरीदने से पहले आपको क्‍या-क्‍या सवाल करने चाहिए या किस तरह की पड़ताल करके आप बच सकते हैं।

कहां है जमीन ?

सबसे पहले आपको यह पता करना चाहिए कि जमीन किस इलाके में है। यानी कि आपको यह पता करना चाहिए कि जो जमीन बिक रही है, उसका लैंड यूज क्‍या है। दरअसल, सरकार द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि किस इलाके की जमीन को किस परपज के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

जैसे कि सरकार किसी शहर या जिले को रूरल और अर्बन एरिया में डिवाइड कर देती है। अर्बन एरिया में भी कॉमर्शियल, रेसिडेंशियल या इंडस्ट्रियल एरिया को नोटिफाई किया जाता है। इसके अलावा ओपन स्‍पेस, पार्क, पब्लिक स्‍पेस के लिए भी जमीन को नोटिफाई किया जाता है।

इसी तरह रूरल एरिया में भी गांव की आबादी के लिए छोड़ी गई जमीन को लालडोरा एरिया कहा जाता है। इसके अलावा नॉन एग्रीकल्‍चरल लैंड और एग्रीकल्‍चरल लैंड में रूरल एरिया में बांटा जाता है। इन दोनों तरह की जमीन पर घर बनाने की इजाजत नहीं है।

सबसे पहले करें यह सवाल

जब आप सस्‍ती जमीन या घर खरीदना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले यह पूछना चाहिए कि जमीन रूरल एरिया में है या अर्बन एरिया में। अगर अर्बन एरिया में भी है तो सवाल करें कि जमीन आर-जोन में आती है। आर जोन का मतलब रेजीडेंशियल एरिया। यानी वहां घर बनाने की इजाजत है या नहीं।

अगर आप दुकान के लिए जमीन लेना चाहते हैं तो पता कर लें कि कॉमर्शियल लैंड यूज है या नहीं। कई शहरों में मिक्‍स लैंड यूज के तहत रेजीडेंशियल एरिया में कॉ‍मर्शियल एक्टिविटी की जा सकती है। यदि यह दोनों नहीं हैं तो इसका मतलब वह अनॉथराइज्‍ड एरिया है। हो सकता है कि वह खेती की जमीन हो और प्रॉपर्टी डीलर वहां कालोनी बसा रहे हैं।

यदि आप ऐसी जगह जमीन खरीदते हैं तो आपको आगे नुकसान हो सकता है, क्‍योंकि सरकार वहां आप घर नहीं बनाने देगी। यदि आप अवैध तरीके से घर बना भी देते हैं तो आपको जनसुविधाएं जैसे बिजली-पानी जैसी सुविधा नहीं मिलेगी।

रूरल एरिया में प्‍लॉट खरीद रहे हैं तो

अगर आप रूरल एरिया में जमीन खरीद रहे हैं तो भी आपको सतर्क रहना चाहिए। अगर जमीन लालडोरा एरिया में नहीं है तो जमीन न खरीदें। खासकर रहने या दुकान बनाने के लिए तो कतई नहीं। हां, खेती करना चाहते हैं तो जमीन खरीदने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि उसके लिए भी जमीन का मालिकाना हक सहित एग्रीकल्‍चर लैंड यूज जैसी सतर्कता तो बरतनी ही होगी। लालडोरा के अंदर जगह है तो जमीन खरीदने के बारे में सोच सकते हैं।

कैसे करें जांच

ज्‍यादातर प्रॉपर्टी डीलर सस्‍ती जमीन या फ्लैट के बारे में मौखिक पूछताछ में सच्‍चाई नहीं बताते, इसलिए जरूरी है कागजात की जांच करना। आपको जमीन का खसरा नंबर पता करना चाहिए और उसे खसरे नंबर के आधार पर राजस्‍व विभाग से पूछताछ करनी चाहिए, ताकि आप गलत जमीन न खरीदें।

इन 6 कामों के लिए कभी न करें CREDIT CARD का इस्तेमाल, दोगुना हो जाएगा आपका बिल

वैसे तो क्रेडिट कार्ड लोग का इस्तेमाल लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है, लेकिन कुछ जगह ऐसी हैं जहां अगर आप डेबिट कार्ड की जगह क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो आप पर बिल का बोझ बढ़ने के अलावा कुछ नहीं होगा।

बैंक अधिकारी का कहना है कि, पेट्रोल भरवाने के बाद आप क्रेडिट कार्ड से भुगतान न करें। अगर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो उसपर जीएसटी लगेगा। इससे आपको बिल पर सबकुछ जोड़कर लगभग18% तक टैक्स देना होगा।

हर छोटी जगह पर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल आपको जरूरत से ज्यादा खर्च करने के लिए मजबूर करता है। अगर क्रेडिट कार्ड को तय लिमिट से कम में स्वाइप करेंगे तो प्रोसेसिंग फीस 2% से ज्यादा देनी पड़ सकती है। यानि आपको टैक्स बिल पर तो लगेगा ही साथ ही स्वाइप करने के वक्त भी ज्यादा चुकाना पड़ेगा।

लोन या कर्ज लेते समय इसका प्रयोग न करें तो सही होगा। इससे आप अपने कर्ज पर तो टैक्स देते हैं साथ ही क्रेडिट कार्ड के बिल पर भी टैक्स देते हैं। वहीं अगर आप एक बार में क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं चुका पाए तो फिर दोबारा टैक्स देना पड़ेगा।

क्रेडिट कार्ड से एडवांस भूलकर भी लें और न ही आप इससे डेबिट कार्ड अकाउंट में पैसे डालें। इससे आप जो ब्याज दे रहे होते हैं वह दोगुना होगा। उस पर टैक्स के साथ ही ब्याज की रकम भी जुड़ जाएगी।

अगर आपके मेडिकल का बिल कम है तो आप डेबिट कार्ड से ही पेमेंट करें। इससे एक तो टैक्स ज्यादा भरना होगा साथ ही मेडिकल बिल क्रेडिट कार्ड की ईएमआई पर रखेंगे तो आपका इंट्रेस्ट जरूरत से ज्यादा बढ़ जाएगा।

कुछ भी खरीदें तो उसकी डाउन पेमेंट क्रेडिट कार्ड से न करें। इसके बदले ईएमआई लेंगे तो ज्यादा बेहतर होगा। शॉपिंग आदि में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल अधिक उपयोगी है।

कार, बाइक और स्कूटर के टायर में डाल दें ये लिक्विड, कभी नहीं होगी पंचर

टू व्हीलर हो या फोर व्हीलर, कभी न कभी ये पंचर जरूर होती है। ऐसे में यदि आप कहीं घूमने जा रहे हैं तब गाड़ी के पंचर होने से मजा खराब हो जाता है। खासकर, गर्मी के मौसम में पंचर होने ज्यादा नुकसान दायक होता है।

इस स्थिति में यदि पंचर सुधारने वाला आसपास नहीं हुआ, तब मुसीबत दोगुनी हो जाती है। हालांकि, मार्केट में एक लिक्विड ऐसा भी आता है जिसका यूज करने के बाद आपकी गाड़ी कभी पंचर ही नहीं होगी।

एंटी पंचर लिक्विड

मार्केट में अब कई कंपनियों के ऐसे लिक्विड मौजूद हैं, जिन्हें एंटी पंचर लिक्विड के नाम से जाना जाता है। इन लिक्विड को ऑनलाइन और ऑफलाइन खरीदा जा सकता है। इस तरह के लिक्विड की कीमत 500 रुपए से शुरू होकर 800 और 1000 रुपए तक है। कीमत के साथ इनकी क्वांटिटी भी बढ़ जाती है।

ऐसे करता है काम

इस लिक्विड को कार, बाइक या स्कूटर के टायर में फिल किया जाता है। फिल करने की 2 प्रॉसेस हैं। पहली इस लिक्विड को किसी इंजेक्शन की मदद से टायर में इंटर किया जाता है। और दूसरा टायर की नॉब से इसे अंदर इंटर किया जाता है।

टायर में पहुंचने के बाद ये अंदर का पूरा एरिया कवर कर लेता है। अब यदि टायर पंचर होता है तब पंचर वाली जगह से ये लिक्विड बाहर आता है और सूख जाता है। यानी हवा बाहर नहीं निकल पाती। इस लिक्विड को सेल करने वाली कई कंपनियां 10 हजार किलोमीटर तक इसके काम करने की गारंटी भी दे रही हैं।

टायर को रखता है कूल

ये लिक्विड टायर को पंचर से बचाने के साथ उसे कूल रखने का काम भी करता है। इन लिक्विड में नाइट्रोजन का यूज किया जाता है, जो टायर को कूल करने का काम भी करता है। गर्मी के मौसम में ये काफी असरदार भी होता है। खासकर बाइक और स्कूटर में इसका यूज फायदेमंद साबित होता है।

इस ट्रिक से सिंगल सिम स्मार्टफोन में भी चलेंगे डुअल सिम

इन दिनों मार्केट में कई फोन ऐसे आ रहे हैं, जिनमें डुअल सिम का ऑप्शन दिया होता है. वहीं कुछ फोन ऐसे भी आ रहे हैं, जिनमें हाइब्रिड सिम स्लॉट दिया होता है.

इस स्लॉट में या तो आप दो सिम एक साथ लगा सकते हैं या फिर एक सिम के साथ एक मेमोरी कार्ड इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन आज के समय में लोग एक से ज्यादा नंबर इस्तेमाल करते हैं और ऐसे में लोगों को दूसरा नंबर इस्तेमाल करने के लिए एक फोन अलग से रखना पड़ता है.

हालांकि अभी भी कुछ कंपनियां जैसे Apple सिंगल सिम के ही फोन बाजार में पेश कर रही हैं. ऐसे में लोगों के लिए कई नंबर चलना परेशानी का सबब बन जाता है. लेकिन अगर आप दो नंबर चलाने के लिए दो फोन इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं तो हम आपको यहां एक आसान सा तरीका बता रहे हैं कि आप ऐसा कैसे कर सकते हैं. इसके लिए आपको एक डुअल सिम कार्ड एडाप्टर लेना होगा.

डुअल सिम कार्ड एडाप्टर

डुअल सिम कार्ड एडाप्टर की मदद से आप सिंगल सिम फोन में भी डुअल सिम का इस्तेमाल कर सकते हैं. इन डुअल सिम कार्ड एडाप्टर को MagicSIM और Simore जैसी कुछ कंपनियां बनाती हैं. बता दें कि ये सिम कार्ड एडाप्टर एक पतली केबल के साथ आता है, जो आपके सिंगल सिम कार्ड से कनेक्ट हो जाती है और इसमें आप दो सिम कार्ड कनेक्ट कर सकते हैं.

खास बात ये है कि ये केबल आसानी से मुड़ जाती है और माइक्रोसिम के साथ ही एक नैनो सिम भी कनेक्ट कर सकती है. अपने फोन के सिम स्लॉट में सेट करने के बाद इसे आप बैक पैनल में चिपका सकते हैं. इसे छुपाने के लिए आप फोन के लिए बैक कवर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

बता दें कि इस एडाप्टर का इस्तेमाल करके आप अपने सिंगल सिम फोन में दो ही नहीं बल्कि तीन सिम का इस्तेमाल कर सकते हैं. आपको बता दें कि सिंगल सिम फोन एक साथ कई नेटवर्क के साथ माम नहीं कर पाते हैं, ऐसे में आपको सिम एक्टिव नेटवर्क में मैनुअली स्विच करना पड़ेगा.

वायरलैस सिम एडाप्टर

अगर आप अपने फोन के बैक को इस एडाप्टर को चिपका कर गंदा नहीं करना चाहते हैं तो आपके लिए वायरलेस एडाप्टर एक बेहतर ऑप्शन रहेगा. इस वायरलैस एडेप्टर के जरिए भी आप सिंगल सिम फोन में दो सिम इस्तेमाल कर सकते हैं. आप दोनो तरह के डुअल सिम कार्ड एडाप्टर को ऑनलाइन खरीद सकते हैं. अमेजन पर ये 129 रुपए और ईबे पर 135 रुपए में उपलब्ध है.

आसमान से बरसा करोड़ो का सोना

क्या आपने कभी सुना है कि आसमान से हीरों, सोने और चांदी की बरसात हुई हो । नहीं न ? पर यह बात सच है रूस में ऐसा हुआ है । मामला कुछ यूं है कि एक हवाई जहाज उड़ान पर था । अचानक उससे हीरे, सोने और चांदी जमीन पर गिरने लगे । यह खजाना हवाई अड्डे के रनवे पर कई घंटे तक बिखरा रहा । जिसे बाद में प्रशासन ने इसे अपने कब्जे में लिया ।

यह घटना गुरुवार की है । रूस के यकूतिया हवाई अड्डे से निम्बस एयरलाइंस का एक कार्गो (मालवाहक) जहाज उड़ान भरता है । जैसे ही यह जहाज कुछ ऊंचाई पर पहुंचता है । अचानक उससे कई थैले रनवे की जमीन पर गिरने लगते हैं । रनवे पर गिरकर यह थैले फट जाते हैं और इनमें रखे हीरे, सोना और चांदी बिखर जाते हैं ।

यह देखकर एयरपोर्ट अथॉरिटीज और वहां मौजूद लोग हैरान रह जाते हैं । दरअसल कार्गो प्लेन में ये खजाना लोड तो कर दिया गया । लेकिन, अथॉरिटीज प्लेन का दरवाजा लॉक करना भूल गईं । ऐसे में जैसे ही प्लेन ने टेक ऑफ किया । उसका गेट खुल गया और खजाना जमीन पर गिरने लगा ।

240 करोड़ से अधिक का था खजाना

इस पूरे घटनाक्रम में प्लेन के कार्गो में रखा सोना, डायमंड और प्लेटिनम जैसी बेशकीमती धातुओं का नौ टन का जखीरा रनवे पर बिखर गया । घटना रूस के यकूतिया में एक कार मार्केट के करीब हुई । जैसे ही प्लेन के क्रू को इसका पता चला, क्रासनोयार्स्क को जाने वाले इस प्लेन ने मगन में इमरजेंसी लैंडिंग की ।

ब्रिटिश वेबसाइट मिरर के अनुसार पूरे खजाने की कीमत लगभग 265 मिलियन पाउंड थी, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत 240 करोड़ से अधिक होती है । साइबेरियन टाइम्स ने ट्वीट में इसकी जानकारी दी । कहा, धूप खिली हुई थी और आसमान से सोने, चांदी और हीरों की बारिश हुई । सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं ।

टेक्निकल इंजीनियर हुए गिरफ्तार

यकूती मीडिया के अनुसार प्लेन से गिरी कुछ सोने की ईंटों को एयरपोर्ट से 15 मील दूर भी पाया गया है । पुलिस ने रनवे को सील कर दिया और बड़े पैमाने पर सर्च अभियान चलाया जा रहा है । इस काम में सिर्फ सीक्रेट सर्विस के लोगों को ही लगाया गया है ।

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये घटना दुर्घटनावश हुई है अथवा किसी साजिश का हिस्सा थी । प्लेन को उड़ान भरने के लिए तैयार करने वाले टेक्निकल इंजीनियरों को गिरफ्तार कर लिया गया है । इस मामले में पूछताछ चल रही है ।

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ATM खोलने के साथ इन 5 सर्विसेज की फ्रैंचाइजी लेने का मौका

अगर आप ATM के साथ बैंकिंग, इंश्‍योरेंस, ई-गवर्नेंस, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्‍स की फ्रेंचाइजी खोलना चाहते हैं तो आपके लिए यह अच्‍छा मौका है। दुनिया का सबसे बड़ा ई-मॉल वक्रांगी फ्रेंचाइजी खोलने का अवसर दे रहा है। यह ऑफर एक तय वक्‍त के लिए है और केवल 15,000 एप्‍लीकेंट्स के लिए ही वैलिड है। ATM के लिए कस्‍टोडियन बेसिस पर कोई किराया नहीं है और न ही फ्रेंचाइजी के लिए कोई फीस है।

क्‍या है वक्रांगी

वक्रांगी एक टेक्‍नोलॉजी बेस्‍ड कंपनी है। इसका उद्देश्‍य भारत के सबसे बड़े लास्‍ट माइल रिटेल आउटलेट्स विकसित करना है। वक्रांगी लोगों को एक ही जगह पर कई सर्विसेज जैसे बैंकिंग, इंश्‍योरेंस, ATM, ई-गवर्नेंस, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्‍स आदि की सुविधा उपलब्‍ध कराना चाहती है।

वक्रांगी केन्‍द्रों को दुनिया का सबसे बड़ा ई-मॉल भी कहा जाता है। 31 दिसंबर 2017 तक भारत में कुल 44, 286 वक्रांगी केन्‍द्र थे। इनमें से 32,478 गांवों में और 11,808 शहरों में थे।

पूरे भारत में 20,000 से ज्‍यादा इंडियन ऑयल रिटेल आउटलेट्स (फिलिंग/गैस स्‍टेशन ) पर भी वक्रांगी केन्‍द्र खोलने की योजना है। इनमें से 500 आउटलेट्स पर 31 मार्च तक केन्‍द्र खोले जाने का लक्ष्‍य है। 31 दिसंबर तक 260 आउटलेट्स पर वक्रांगी केन्‍द्र खोले जा चुके हैं। देश में इंडियन ऑयल के 25,000 से ज्‍यादा रिटेल आउटलेट हैं।

कितनी तरह के केन्‍द्र

अगर आप वक्रांगी की फ्रेंचाइजी लेकर बिजनेस करना चाहते हैं तो इसके तहत दो तरह के केन्‍द्र खोले जाते हैं- सिल्‍वर और गोल्‍ड केन्‍द्र। सिल्‍वर केन्‍द्र मिनिमम 200 वर्ग फुट एरिया, जिसमें दो काउंटर औ एटीएम होता है। गोल्‍ड केन्‍द्र 300 वर्ग फुट का, 4 काउंटर, ओनर डेस्‍क और एटीएम वाला होता है। आप अपनी लोकेशन और इन्‍वेस्‍टमेंट कैपेसिटी के आधार पर इन्‍हें चुन सकते हैं।

कितनी होगी कमाई

सिल्‍वर वक्रांगी केन्‍द्र से आपको प्रतिमाह लगभग 60,000 रुपए की आय होगी। इसकी ऑपरेशनल लागत प्रतिमाह 32,000 रुपए पड़ेगी। यानी आपको हर महीने 28,000 रुपए का मुनाफा होगा।

गोल्‍ड केन्‍द्र की बात करें तो इससे प्रतिमाह इनकम 1.52 लाख रुपए और ऑपरेशनल लागत 92,000 रुपए पड़ेगी। यानी इस केन्‍द्र से आपको महीने में 60,000 रुपए का मुनाफा होगा। दोनों केन्‍द्रों से मुनाफे का आंकड़ा लोकशन, डेमोग्राफी और फ्रेंचाइजी की कैपेबिलिटी के आधार पर अलग भी हो सकता है।

कैसे कर सकते हैं अप्‍लाई

आप https://vkms.vakrangee.in/NextgenFranchiseeEnquiry.jsp पर जाकर फ्रेंचाइजी के लिए खुद को रजिस्‍टर कर सकते हैं। आपको सिलेक्‍ट कर लिए जाने पर वक्रांगी की तरफ से आपको कॉन्‍टैक्‍ट किया जाएगा। उसके बाद प्रोसेस आगे बढ़ेगी।

कौन ले सकता है फ्रेंचाइजी

फ्रेंचाइजी लेने वाले का कम से कम 12वीं कक्षा तक शिक्षित होना जरूरी है। इसके अलावा ग्रेजुएट, प्रोफेशनल डिग्री होल्‍डर, बैंक मैनेजर, सेल्‍स या बिजनेस बैकग्राउंड वाले, इंश्‍योरेंस एजेंट, स्‍टोर मैनेजर, एक्‍स आर्मी ऑफिसर, एडमिनिस्‍ट्रेशन बैकग्रांउड वाले, महिला उद्यमियों और स्‍पेशली एबल्‍ड लोगों को फ्रेंचाइजी क्राइटेरिया के तहत वरीयता दी जाती है। इसके अलावा फ्रेंचाइजी लेने वाले को कुछ सर्विस के लिए ट्रेनिंग भी लेनी होती है, जिसके लिए एक तय फीस है।

कितनी आएगी लागत

अगर आप सिल्‍वर वक्रांगी केन्‍द्र खोलना चाहते हैं तो इसके लिए लागत कुल मिलाकर न्‍यूनतम 7 लाख रुपए प्‍लस जीएसटी आएगी। वहीं गोल्‍ड केन्‍द्र के लिए यह 14.75 लाख रुपए प्‍लस जीएसटी होगी।

अगर आपके पास इतना फंड नहीं है तो आप फ्रेंचाइजी लेने के लिए लोन भी ले सकते हैं। इसके लिए डीएमआई फाइनेंस आपको लोन उपलब्‍ध करा रही है। इसके अलावा वक्रांगी फ्रेंचाइजी के लिए भी मुद्रा लोन उपलब्‍ध है।

फ्रेंचाइजी लेने के लिए पूरी जानकारी

http://www.vakrangee.in/data/advertisement/Nextgen%20Vakrangee%20Kendra%20Franchisee%20Presentation.pdf पर जाकर देखी जा सकती है।

ये चीजें है जरूरी

डॉक्‍युमेंट्स

क्रेडिट स्‍कोर-सिबिल वेरिफिकेशन (अगर एप्‍लीकेबल हो), बेसिक रेफरल चेक, पैन व आधार कार्ड, बेसिक केवाईसी एंड एप्‍टीट्यूड चेक, पुलिस वेरिफिकेशन, जीएसटी रजिस्‍ट्रेशन

केन्‍द्र के लिए

  • गोल्‍ड या सिल्‍वर केन्‍द्र के लिए जरूरी एरिया होना चाहिए।
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी, पर्याप्‍त पावर बैकअप के साथ रेगुलर पावर कनेक्‍शन वक्रांगी केन्‍द्र पर कौन-कौन सी सुविधाएं

एक ही जगह पर कितनी सुविधाएं

वक्रांगी केन्‍द्रों पर लोगों को एटीएम, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्‍स, बैंकिंग व फाइनेंशियल सर्विस, इंश्‍योरेंस और ई-गवर्नेंस जैसी 6 सुविधाएं मिलती हैं। इनके तहत ये काम आते हैं

ई-गवर्नेंस

रेल टिकट बुकिंग, बीबीपीएस से हर तरह क बिल का पेमेंट, जीएसटी व अन्‍य ई-गवर्नेंस सर्विस। जल्‍द ही इन पर पैन कार्ड सर्विस भी शुरू होने वाली है।

बैंकिंग

लोन अप्‍लाई, क्रेडिट कार्ड अप्‍लाई, अटल पेंशन योजना, पीएम जीवन ज्‍योति योजना जैसी सोशल सिक्‍योरिटी स्‍कीम का लाभ ले सकते हैं, बैंक अकाउंट ओपनिंग, कैश विदड्रॉल व डिपॉजिट, फंड ट्रान्‍सफर, आईएमपीएस

ई-कॉमर्स

मोबाइल या डीटीएच रिचार्ज, जियो कनेक्‍शन, महिन्‍द्रा से ऑटोमोबाइल या ऑटो पार्ट्स की बुकिंग, अमेजन पर प्रॉडक्‍ट बुकिंग, गोल्‍ड ज्‍वेलरी व गोल्‍ड कॉइन, मोबाइल हैंडसेट्स, फार्मेसी प्रॉडक्‍ट्स की खरीद, बी2बी के तहत रिटेलर्स को होलसेल में प्रॉडक्‍ट की बिक्री

इंश्‍योरेंस

लाइफ इंश्‍योरेंस, जनरल इंश्‍योरेंस (मोटर /व्‍हीकल/ट्रैवल आदि), हेल्‍थ इंश्‍योरेंस

एटीएम

कैश ट्रान्‍जेक्‍शन, बैलेंस इन्‍क्‍वायरी, पिन चेंज, मिनी स्‍टेटमेंट, फंड ट्रान्‍सफर, आधार सीडिंग, कार्ड टू कार्ड ट्रान्‍सफर, चेक बुक रिक्‍वेस्‍ट, मोबाइल बैंकिंग रजिस्‍ट्रेशन, स्‍टेटमेंट रिक्‍वेस्‍ट

लॉजिस्टिक्‍स

कुरियर बुकिंग सर्विसेज, डिलीवरी सर्विसेज, रिवर्स लॉजिस्टिक्‍स सर्विेसेज, स्‍टोर पिकअप सर्विसेज

पेट्रोल पंप को पेट्रोल पंप ही क्यों कहा जाता है, जबकि यहां तो डीजल भी मिलता है

क्या आपके कभी सोचा है कि पेट्रोल पंप को पेट्रोल पंप ही क्यों कहा जाता है, डीजल पंप क्यों नहीं? जबकी वहां तो डीजल भी मिलता है। इसके अलावा सीएनजी यानी कुछ लोग गैस पंप भी कहते हैं। कई बार हम ऐसी बातों को इग्नोर कर देते हैं, लेकिन इनके पीछे कुछ न कुछ कारण होता है। जानिए पेट्रोल पंप कहने के पीछे क्या कारण है।

जानिए क्यों कहते हैं पेट्रोल पंप-

दरअसल पेट्रोलियम यानि कच्चे तेल से ही पेट्रोल, डीजल या गैस जैसे अन्य सभी तरह के ईंधन बनते हैं। यही कारण हो सकता है कि पेट्रोल पंप को पेट्रोलियम पंप कहने की जगह सिर्फ पेट्रोल पंप ही कह दिया जाता है।

ईंधन पंप (फ्यूल पंप), डीजल ईंधन पंप, गैस पंप, गैसोलीन पंप, पेट्रोल पंप ये सभी नाम विभिन्न देशों के लोगों द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं।

वैसे इसका वास्तविक नाम ईंधन मशीन होना चाहिए जो किसी भी व्हीकल में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, केरोसीन जैसे ईंधन को भरता है।

क्या होता है डीजल पंप –

दरअसल डीजल पंप का मतलब इंजेक्शन पंप होता है जो सिलेंडर में डीजल भरता है। फ्यूल पंप यानी ईंधन पंप एक खास तरह की डिवाइस है जो आमतौर पर आईसी इंजन के साथ जुड़ा होता है

अन्य देशों में क्या बोलते हैं पेट्रोल पंप को –

  • ऑस्ट्रेलिया में – गैस पंप
  • अमेरिका में – गैस पंप या फ्यूल डिस्पेंसर
  • फिनलैंड, जर्मनी और फ्रांस – फ्यूल पंप और डीजल फ्यूल पंप
  • एशिया और अन्य यूरोपियन देशों में – पेट्रोल पंप या गैसोलिन पंप

पेट्रोल पंप को पेट्रोल पंप ही क्यों कहते हैं इसका जवाब हमें क्वोरा में एक रिडर से मिला। अगर हमारे पाठकों में कोई पेट्रोलियम इंडस्ट्री से जुड़े हैं वो कमेंट बॉक्स में अपनी राय देकर दूसरे पाठकों की जानकारी बढ़ाएं।

होटल के हर बेड पर बिछी होती है सफेद बेडशीट, जानें क्यों

जब भी हम लोग कहीं घूमने बाहर जाते हैं तो किसी होटल, लॉन्ज या 5 सितारा होटल में अपना स्टे का इतंजाम कर लेते हैं. साथ ही सबसे ज्यादा ध्यान हम सभी होटल के कमरों पर करते हैं कि कमरा कितना बड़ा है, क्या क्या सुविधाएं है.

वहां से बाहर का नजारा कैसा है इत्यादि. लेकिन कभी आपने एक बात पर गौर नहीं किया होगा…होटल के कमरे में बिछे बेडशीट पर. आपको सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा. जी हां, कभी आपने ध्यान दिया कि किसी भी होटल के कमरों में सफेद बेडशीट ही क्यों होती है

अगर अभी तक इस बात पर ध्‍यान दिया होगा तो आपके मन में भी ये सवाल जरूर आता होगा. तो आज हम आपके इन सवालों का जवाब देते हैं. जानते हैं कि होटलों में सफेद चादर बिछाने के पिछे आखिर क्‍या होती है वजहें

इसका सबसे पहला कारण, तो ये है कि सफ़ेद रंग देखने में काफ़ी साफ़ लगता है और इस रंग की चीज़ें देख कर मन को काफ़ी सुकून मिलता है. साथ ही अगर सफ़ेद रंग के कपड़ों पर हल्का सा भी दाग़ लग जाये, तो होटल कर्मचारी उसे आसानी से देख कर साफ़ कर सकते हैं.

मनोवैज्ञानिकों का भी यही मानना है कि होटल का कमरा और बिस्तर जितने ज़्यादा साफ़-सुथरे होंगे, ग्राहक को उतना ही अच्छा महसूस होगा.

दूसरी बड़ी वजह ये है कि सफ़ेद रंग की शीट और तौलिए को धोना काफ़ी आसान होता है. हालांकि, घर पर ऐसा करना काफ़ी मुश्किल होता है, क्योंकि सफ़ेद रंग के कपड़े आप बाकी रंगीन कपड़ों के साथ नहीं धुल सकते.

अगर आप रंगीन कपड़ों के साथ सफ़ेद कपड़े भिगो भी देते हैं, तो वो सभी रंगों के साथ मिलकर रंगीन हो जाते हैं, या फिर उनका कलर फ़ेड हो जाता है. वहीं अगर सभी कपड़े सफ़ेद होते हैं, तो ऐसी कोई दिक्कत नहीं होती.

तीसरी बात ये है कि सफ़ेद रंग को बाकी रंगों में शांति का प्रतीक माना जाता है. वहीं जब हम हॉलीडे पर बाहर जाते हैं, तो उस जगह पर शांति और सुकून तलाशते हैं और सफ़ेद रंग देख मन को काफ़ी राहत सी महसूस होती है. इसी बात को ध्यान में रखकर होटल्स में सफेद बेडशीट और तौलियों का इस्तेमाल किया जाता है.

इसकी चौथी वजह ये है कि जब आप होटल के कमरे में प्रवेश करते हैं, तो चमकदार सफेद बेडशीट देखकर दिल को एक राहत सी महसूस होती है. इसके अलावा होटल की गुणवत्ता देख कर मन को संतुष्टी मिलने के साथ-साथ आप इस पर गर्व महसूस करते हैं.

इसकी आखिरी वजह ये है कि बेड शीट से लेकर बॉथ टॉवल तक एक रंग की चीज़ें खरीदनी होती हैं. इसके साथ ही इसके रख-रखाव में भी कोई दिक्कत नहीं होती और ये रूम सर्विस के लिए काफ़ी आसान होता है.

अगर आपने ध्यान दिया हो तो रेल में सफर करते समय आपको एसी वाले डिब्बों में भी सफेद तौलिया और ओढ़ने के लिये सफेद बेडशीट ही उपलब्ध होती है, इसकी वजह भी यही है कि सफेद रंग आपको सुकून देता है.

आखिर क्यों होती हैं दवाई के पत्ते पर यह खाली जगह, जानिए इसका कारण

जी हां हम सभी लोग जानते हैं कि हम लोग जब भी कहीं दवाई लेने जाते हैं तो हम लोगों ने देखा होगा कि दवाइयों के बीच में कुछ खाली जगह भी होती है।लेकिन हम लोग सोचते हैं कि ऐसे ही है लेकिन इसका एक साइंटिफिक रीजन है जो कि कभी किसी को पता नहीं लगा।

तो उसी के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस के पीछे का क्या कारण है इसके पीछे कारण यह है कि दवाई के पत्तों में कुछ इफेक्ट देने के लिए इस प्रकार के पत्ते बनाए जाते हैं। ताकि इस पत्ते का जो भार है वह सब जगह बराबर पड़े और इसके ऊपर ज्यादा दबाव ना पड़े।

अगर इसपर ज्यादा दबाव पड़ेगा जिसके कारण हमारी गोलियां टूट जाएँगी तथा खराब हो जाएंगी। इन्हीं वजह से इनको अंदर जगह रखी जाती है दूसरा कारण यह है कि गोली को पैकेट काटने में कोई असुविधा नहीं होती है। इस कारण गोलियों के बीच में हमेशा थोड़ी बहुत जगह रखते हैं ताकि दवाइयों को किसी प्रकार से नुकसान ना हो पाए।