19 साल की इस लड़की ने बनाई ‘रेप प्रूफ पैंटी’

19 साल की सीनू कुमारी ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो रेप और जबरदस्ती जैसी घटनाओं से महिलाओं और बच्चियों को बचा सकती हैं. सात साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसके बाद उसकी हत्या के बाद बीएससी स्टूडेंट सीनू को झकझोर कर रख दिया था. जिसके बाद उन्होंने ठान लिया की वह महिलाओं और बच्चियों के लिए कुछ ऐसा करेंगी जिसके बाद भविष्य में रेप और जबरदस्ती की घटना ना हो. इसी जज्बे के साथ सीनू ने रेप प्रूफ पैंटी तैयार की.

मेनका गांधी ने की तारीफ

आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक जब केंद्रीय बाल एवं महिला विकास मंत्री मेनका गांधी तक बात पहुंची, तो उन्होंने सीनू के इस मॉडल को सराहा और उन्हें भविष्य में ऐसे अविष्कारों के लिए शुभकामनाएं दीं.

जाने कैसे करती है काम

आपको पढ़कर और सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लग रहा होगा कि भला ये रेप प्रूफ पैंटी कैसे रेप जैसी घटनाएं रोक सकती हैं. बता दें, ये कोई आम पैंटी नहीं है. बल्कि नई इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से लैस पैंटी है, जिसमें स्मार्टलॉक लगा है, जो पासवर्ड से ही खुल सकता है. लोकेशन की सही जानकारी बताने के लिए इसमें जीपीआरएस सिस्टम है और घटनास्थल की बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए रिकॉर्डर भी लगा है.

इस तरह आया रेप प्रूफ पैंटी बनाने का ख्याल

सीनू बीएससी थर्ड ईयर की स्टूडेंट हैं और इस तरह के कई मॉडल बनाती रहती हैं. वह रोजाना हो रही रेप की घटनाओं से दुखी थी, एक दिन सात साल की बच्ची से रेप और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या की खबर पढ़कर मैं अंदर तक हिल गई थी. जिसके बाद उन्होंने रेप से बचाने वाला मॉडल तैयार किया.

ब्लेडप्रूफ कपड़े और रिकॉर्डर के साथ तैयार हुई पैंटी

इस पैंटी को तैयार करने के लिए खास मेहनत की गई है. पैंटी में एक स्मार्टलॉक लगा है, जो पासवर्ड के बिना नहीं खुल सकता. यह पैंटी ब्लेडप्रूफ कपड़े की बनी है, जिसे चाकू या किसी भी धारदार हथियार से काटा नहीं जा सकता और न ही जलाया जा सकता है. इसमें एक बटन लगा है, जिसे दबाने पर 100 या 1090 नंबर पर ऑटोमैटिकली कॉल चला जाएगा और जीपीआरएस सिस्टम की मदद से पुलिस घटनास्थल पर पहुंच जाएगी. पैंटी में रिकॉर्डर भी लगा है, जिसमें घटनास्थल की सारी बातें रिकॉर्ड हो जाएंगी.

मॉडल और हो सकता है बेहतर

इस मॉडल को बनाने के लिए सीनू की कोशिश सराहनीय हैं. लेकिन अभी इस मॉडल को बेहतर करने के लिए पैंटी का पेटेंट कराने के लिए आवेदन इलाहाबाद स्थित नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) के पास भेजा गया है. सीनू ने बताया कि इस पैंटी मॉडल को तैयार करने में 5,000 रुपये तक का खर्च आया. वहीं सीनू रेल दुर्घटना से बचने में सहायक एक उपकरण पर भी काम कर रही हैं, जो बढ़ रही रेल दुर्घटनाओं को रोकने में कारगर साबित हो सकता है.

चलती ट्रेन में खाने का मन करे किसी बड़े होटल का लजीज खाना, तो ये है तरीका

साल 2018 की शुरुआत हो चुकी है ।भारतीय रेलवे नए साल के मौके पर यात्रा को और भी सुगम बनाने के लिए एक विशेष सुविधा की शुरुआत की है। यूं कहें कि भारतीय रेलवे सुविधा बढ़ाकर यात्रियों को नए साल पर तोहफा दी है। यह सुविधा खासकर खान-पान से जुड़ी हैं, जिसकी शायद हर लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। आइए जानें नए साल के मौके पर रेलवे ने खान-पान से जुड़ी कौन सी सुविधाएं शुरू की हैं।

  • अगर आप ट्रेन में किसी बड़े होटल के खाने का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो रेलवे ने आपके लिए सुविधा शुरू की है। अब यात्रा के दौरान आप 500 से ज्यादा होटलों से खाने का ऑर्डर दे सकते हैं। इसके लिए पहले से या टिकट बुकिंग के दौरान कुछ भी करने की जरूरत नहीं है।
  • यह ऑर्डर आप अपनी सीट से ही कर सकते हैं और आपका ऑर्डर आपकी सीट पर ही सर्व किया जाएगा।
  • आप होटल के खाने के हर ऑर्डर पर 5 फीसदी तक छूट भी ले सकते हैं।
  • अगर आप IRCTC ई-कैटरिंग से ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते हैं, तो आपको हर ऑर्डर पर 5 फीसदी की छूट मिलेगी।

  • IRCTC ई-कैटरिंग सर्विस का लाभ आप मोबाइल ऐप, फोन या फिर ऑनलाइन उठा सकते हैं। ऐप से खाना ऑर्डर करने के लिए आईआरसीटीसी कैटरिंग-फूड ऑन ट्रैक’ ऐप को डाउनलोड करना होगा। रेलवे का यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद है।
  • फोन से कॉल करके खाना बुक करने के लिए रेलवे के टोल फ्री नंबर 1323 पर कॉल करना होगा।
  • SMS के जरिए IRCTC ई-कैटरिंग सर्विस का लाभ उठाने के लिए आपको सिर्फ 139 पर SMS करना है। आपको SMS कुछ इस तरह करना होगा। SMS में आपको MEAL टाइप करके अपना PNR नंबर लिखना होगा।
  • रेलवे ने ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने की सुविधा भी दी है। इसके लिए आपको http://www.ecatering.irctc.co.in पर जाना होगा। यहां आपको 500 से ज्यादा रेस्त्रां में से किसी एक को चुनना होगा। रेस्त्रां के मेन्यू से अपनी पसंद का खाना ऑर्डर कर सकेंगे। ऑर्डर करने के कुछ समय बाद ही आपकी सीट पर ही खाना पहुंच जाएगा।

10 दिन तक बाल्टी के अंदर रखे थे टमाटर के टुकड़े, फिर हुआ ऐसा चमत्कार

 

लम्बे समय से लोग घरों में फल और सब्जियां उगाते आए हैं। घर में आसानी से उगने वाली सब्जियां जैसे आलू और प्याज जैसी उगाए जाते हैं। लेकिन अगर किसी ने घर में टमाटर उगाए होंगे, तो उसे पता होगा कि इन्हें उगने में 1 से 1.5 महीने लगते हैं। लेकिन एक व्यक्ति ने सिर्फ 10 दिन में टमाटर के पौधे उगा दिए।

कैसे हुआ ये चमत्कार…

सोशल साइट्स पर एक व्यक्ति ने मात्र 10 दिन में टमाटर के पौधों को उगाने की स्टोरी शेयर की है। और ये तरीका काफी आसान है। उसने सबसे पहले एक बाल्टी को आधा फ्रेश मिट्टी से भर दिया। फिर बाल्टी में टमाटर के पतले-पतले टुकड़े रख दिए।

यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि टमाटर के टुकड़े बीज वाले होने चाहिए।इन टुकड़ों में जितनी ज्यादा बीज होगी, उतने ही ज्यादा पौधे निकलेंगे। टमाटर के टुकड़े रखने के बाद, मिट्टी उन टुकड़ो पर डाल दी। सारी मिट्टी को एक ही लेवल पर रखा।

उसने 10 दिन तक इसे गार्डन में रखे रहने दिया। 10 दिन बाद उसमें से छोटे-छोटे टमाटर के पौधे निकल गए। उन्होंने अपनी इस नयी तकनीक को लोगों के साथ सोशल साइट्स पर शेयर किया है, जहां लोगों ने इसकी काफी तारीफ भी की है।

आप भी तो नहीं चला रहे एक्सपायरी डेट वाला गैस सिलिंडर, 1 मिनट में ऐसे करें चेक

क्या आप जानते हैं कि जिस एलपीजी गैस सिलिंडर को आप यूज कर रहे हैं वो इस्तेमाल लायक है या नहीं? यदि आप नहीं जानते तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसे जानने की प्रॉसेस।

एलपीजी गैस सिलिंडर तो हर घर में इस्तेमाल होता है लेकिन इससे जुड़ी सावधानियों की जानकारी सभी को नहीं होती। हर एलपीजी गैस सिलिंडर के इस्तेमाल की एक अवधि होती है। इस अवधि के बाद सिलिंडर की टेस्टिंग करवानी होती है। यदि टेस्टिंग में यह इस्तेमाल के योग्य नहीं रहता है तो इसे मार्केट से हटा दिया जाता है।

कितनी साल में टेस्टिंग करवाना जरूरी?

किसी भी नए एलपीजी गैस सिलिंडर की 10 से 15 साल में टेस्टिंग करवानी होती है। वहीं पुराने सिलिंडर की हर 5 साल में टेस्टिंग करवानी जरूरी है।

कहां होता है टेस्ट?

गैस सिलिंडर प्लांट में सिलिंडर की टेक्निकल जांच की जाती है। कई बार लोग सालों तक सिलिंडर का यूज नहीं करते। ऐसे में इस तरह के सिलिंडर की टेक्निकल जांच बहुत जरूरी हो जाती है। जांच न करवाने पर बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

खाली वक्त में करें ये 5 साइड बिजनेस, कमाई में माने गए हैं बेहतर

खाली समय का सही इस्तेमाल सभी करना चाहते। वहीं लोग ये भी चाहते हैं कि समय का इस्तेमाल इस तरह किया जाए कि इनकम में भी फायदा हो। आज हम आपको बता रहे हैं 5 साइड बिजनेस जो आपकी ये दोनो इच्छाएं पूरी करेंगे। इन 5 साइड बिजनेस को कमाई के हिसाब से कई औसत फुल टाइम नौकरियों से बेहतर मान गया है।

पार्ट-टाइम जॉब ऑफर करने वाली कंपनी फ्लैक्सीजॉब ने इन जॉब को अपनी टॉप जॉब लिस्ट में शामिल किया है।अमेरिकी कंपनी फ्लैक्सीजॉब भारत के लिए भी जॉब ऑफर करती है। अगस्त के महीने में कंपनी ने भारतीयों के लिए 10 कैटेगरी में पार्ट-टाईम जॉब ऑफर किए हैं।

फ्लैक्सी जॉब के मुताबिक लिस्ट में सिर्फ उन साइड बिजनेस को शामिल किया गया है, जिसमें होने वाली हर घंटे की औसत कमाई अमेरिकी सरकार द्वारा तय न्यूनतम प्रति घंटे आय (7 डॉलर) का कम से कम दोगुना हो।

ग्रुप फिटनेस इंस्ट्रक्टर

फ्लैक्सी जॉब की लिस्ट में सबसे ऊपर ग्रुप फिटनेस इंस्ट्रक्टर हैं। वेबसाइट्स के मुताबिक योग, फिटनेस, साइकलिंग, इस सेग्मेंट में आते हैं। वेबसाइट के मुताबिक इस जॉब की सबसे खास बात ये है लोग पहले खुद अपने खाली समय में इन एक्टिविटी को सीखते हैं, बाद में वो खुद इस सर्विस को ऑफर करने लगते हैं। यानि अपने खाली समय के इस्तेमाल में ये सबसे अच्छा ऑप्शन है।

अमेरिकी में इस जॉब के लिए कम से कम 40 डॉलर प्रति घंटे तक मिल जाते हैं। वहीं दिल्ली में एक से दो घंटे हर दिन के योग सेशन के लिए औसत फीस 2000 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति माह है। अगर टीचर फेमस है या सिखाई जा रही एक्टिविटी खास है तो कमाई कई गुना ज्यादा हो सकती है।

स्पेशल एजुकेशन ट्यूटर

बुजुर्ग हो या किसी परेशानी से जूझ रहा बच्चा- स्पेशल एजेकुशन ट्यूटर की जरूरत हर जगह बढ़ रही है। स्पेशल ट्यूटर उन लोगों को कहते हैं जो किसी खास जरूरत के हिसाब से सिखाने में मदद करते हैं। इन जॉब में साइन लैंग्वेज सिखाने वालों से लेकर, किसी अक्षमता के शिकार लोगों के ट्यूटर शामिल हैं।

फ्लैक्सी जॉब के मुताबिक अक्सर अवेयरनेस बढ़ाने के लिए सरकारें, इंस्टीट्यूशन, कंपनियां या स्कूल इस तरह के प्रोग्राम चलाती हैं जहां वो ट्यूटर को पार्ट टाइम जॉब ऑफर करते हैं। अमेरिका में एक साइन लैंग्वेज सिखाने वाले को हर घंटे 35 डॉलर तक मिल सकते हैं।

दो या दो से ज्यादा भाषाओं के जानकार

अगर आप एक से ज्यादा भाषाएं जानते हैं तो आपके पास अवसरों की कमी नहीं, खास तौर पर भारत जैसे देश में जहां कई तरह की भाषाएं हैं। फ्लैक्सी जॉब के मुताबिक कंटेट का ट्रांसलेशन हो या किसी कंपनी के अधिकारी का दुभाषिया बनना, या फिर एक से ज्यादा भाषाओं में माहिर होना काफी फायदे मंद जॉब है। सबसे खास बात ये है कि अगर आप कोई दूसरी भाषा नहीं जानते तो आप अपने खाली समय का इस्तेमाल कर इसे सीख सकते हैं और बाद में इसका इस्तेमाल दूसरों को सिखाने में कर सकते हैं।

इवेंट/ प्रोडक्ट फोटोग्राफर

खाली समय में फोटोग्राफी करना कई लोगों का शौक होता है, वहीं दूसरी तरफ कई कंपनियां ऐसे लोगो की तलाश करती हैं जो उनके लिए किसी खास इवेंट में जाकर पूरे इवेंट या फिर किसी प्रोडक्ट की फोटोग्राफी कर सकें। मीडिया हाउस भी बेहतर फोटोग्राफ्स की तलाश करते रहते हैं। इस जॉब में फोटोग्राफी के साथ एडिटिंग की जानकारी होना जरूरी माना जाता है।

कई लोग फोटोग्राफी की मदद से फोटो फीचर भी पोस्ट करते हैं, जो किसी इवेंट, प्रोडक्ट या किसी टूर का हिस्सा हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक राइटिंग के मुकाबले फोटो फीचर ज्यादा देखे जाते हैं ऐसे में इन पोस्ट्स के हिट होने की संभावना भी ज्यादा होती है। फ्लैक्सी जॉब के मुताबिक प्रोडक्ट फोटोग्राफर हर घंटे कम से कम 20 डॉलर कमा लेते हैं।

रिज्यूम राइटर

फ्लैक्सीजॉब के मुताबिक आपको जॉब ऑफर होने में सबसे अहम रोल दिलाता है आपका बायोडाटा या रिज्यूम या सीवी, लेकिन खास बात ये है अधिकांश लोग नहीं जानते है कि बायोडाटा, या रिज्यूम कैसे तैयार किया जाए। यहीं पर रिज्यूम राइटर की मदद ली जाती है। रिज्यूम राइटर बनने के लिए आपको सिर्फ भाषा पर पकड़ और प्रजेंटेशन स्किल चाहिए। फ्लैक्सीजॉब के मुताबिक इस जॉब में कमाई इस बात पर निर्भर होती है कि आप कितने एक्सपीरियंस वाले प्रोफेश्नल के लिए के लिए रिज्यूम बना रहे हैं।

अक्सर मिडिल मैनेजमेंट से टॉप जॉब के लिए एप्लाई करने वाले एग्जीक्यूटिव फ्रीलांसर एक्सपर्ट्स के साथ काम करते हैं। दरअसल ऊपरी लेवल के जॉब एप्लीकेशन में औपचारिकताएं और प्रजेंटेशन काफी अहम होता है। भारत में फ्रीलांसर रिज्यूम राइटर 500 से 3000 रुपए प्रति रिज्यूम फीस चार्ज करते हैं।

साइड बिजनेस पाने के दो तरीके हैं इसमें फ्लैक्सिबल जॉब ऑफर करने वेबसाइट्स हैं। वहीं डायरेक्ट अप्रोच से भी काम किया जाता है।फ्रीलांसर डॉट कॉम और फ्लैक्सी जॉब भारतीयों के लिए भी साइड बिजनेस ऑफर करती हैं। आपको जॉब ऑफर करने के बदले ये आपसे फीस लेती हैं।इसके अलावा कई कंपनियां सीधे शॉर्ट टर्म प्रोजेक्ट्स निकालती हैं। लोग सोशल मीडिया के जरिए भी बिजनेस पाने की कोशिश करते हैं।

खास बात ध्यान रखें कि साइड बिजनेस कमाई का बड़ा जरिया है और लोग लगातार अवसरों की तलाश में लगे रहते हैं। इससे इन जॉब्स में जालसाजी का खतरा भी उतना ज्यादा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सभी जेनुइन कंपनियां जॉब मिलने से पहले आपसे फीस नहीं मांगती। वहीं स्थापित हो चुकी कंपनियां अगर फीस लेती हैं तो वो भी काफी मामूली।

80 नहीं 30 हजार रुपए किलो मिलती है मोदी वाली मशरूम, ये हैं खूबिया

गुजरात के युवा ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर ने पीएम नरेंद्र मोदी पर विदेश से मंगा कर मशरूम खाने का आरोप लगाया है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए अल्पेश ने कहा है कि पीएम मोदी ताइवान से मशरूम मंगवा कर खाते हैं।

पीएम जो मशरूम खाते हैं उस एक मशरूम की कीमत 80 हजार रुपए है। इसपर कई दिनों से बहस चल रही है, ऐसे में चलिए जानेत हैं आखिर क्या है मशरूम की सच्चाई।

मोदी ने बताया था वो खाते हैं ‘गुच्‍छी

नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्‍यमंत्री थे, तब उन्‍होंने एक बार कुछ पत्रकारों को ऑन रिकॉर्ड यह बताया था कि उनकी सेहत का राज हिमाचल प्रदेश का मशरूम है। पीएम मोदी मशरूम की जिस प्रजाति को सबसे ज्‍यादा पसंद करते हैं, उसे ‘गुच्‍छी’ कहते हैं और यह हिमालय के पहाड़ों पर पाया जाता है।

उत्‍तराखंड, हिमाचल प्रदेश के जंगलो में पाया जाता है

इसका उत्‍पादन नहीं किया जा सकता और इसे प्राकृतिक रूप से ही हासिल किया जाता है। यह उत्‍तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्‍मू-कश्‍मीर के ऊंचे पहाड़ों पर जंगलों में पाया जाता है और बर्फ के बढ़ने और पिघलने के बीच के दौर में ही उगता है।

जानें क्यों होता है इतना महंगा

अब चूंकि यह बहुत कम पाया जाता है, इसलिए इसकी कीमत कभी-कभी 30,000 रुपये किलो तक पहुंच जाती है। हालांकि एक किलो में काफी मशरूम आ जाता है, क्‍योंकि यह सूखने पर बिकता है। औसतन देखें तो गुच्‍छी मशरूम 10,000 रुपये किलो मिल जाता है

इस मशरूम में बी कॉम्प्लैक्ट विटामिन, विटामिन डी और कुछ जरूरी एमीने एसिड पाए जाते हैं. इसे लगातार खाने से दिल का दौरा पड़ने की संभावनाएं बहुत ही कम हो जाती हैं. इसकी मांग सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि यूरोप, अमेरिका, फ्रांस, इटली और स्विटरलैंड जैसे देशों में भी है।

कहां-कहां हुआ आपके आधार का यूज, ऐसे करें पता

मौजूदा समय में आधार कार्ड सबसे अहम दस्तावेज बनकर उभरा है. मोबाइल नंबर लेने से लेकर अन्य कामों के लिए पहचान पत्र के तौर पर आधार कार्ड की ही ज्यादातर मांग की जा रही है.

आधार कार्ड की बढ़ती मांग को देखते हुए इसका गलत इस्तेमाल होने की आशंका भी पैदा हो गई है. ऐसे में आधार अथॉरिटी यूआईडीएआई ने एक नई सुविधा शुरू की है, जिसके जरिये आप घर बैठे पता कर सकते हैं कि आपका आधार कार्ड कहां-कहां यूज हुआ है.

इस सुविधा का इस्तेमाल कर आप न सिर्फ जान सकेंगे कि आपका आधार कार्ड कहां-कहां यूज हुआ है, बल्क‍ि इसकी बदौलत आपको कुछ गड़बड़ी नजर आती है, तो आप आसानी से इसकी श‍िकायत भी कर सकते हैं. आगे जानिए कैसे यूज करें इस सुविधा को.

इसके लिए आपको uidai की वेबसाइट पर जाना होगा. यहां आपको ‘Aadhaar Authentication History’ का विकल्प दिखेगा.

जैसे ही आप इस पर क्ल‍िक करेंगे, वैसे ही आपके सामने नई विंडो खुलेगी. यहां आपको आधार नंबर एंटर करना है. इसके साथ ही नीचे दिया गया कैप्चा भी दर्ज करना होगा.

इसके बाद आपको ये बताना होगा कि आपको कब से कब तक की जानकारी चाहिए. ओटीपी जनरेट करने के ऑप्शन पर क्ल‍िक करना है. आधार के साथ रजिस्टर आपके मोबाइल नंबर पर यह ओटीपी आएगा.

ओटीपी एंटर करते ही आपको उस समय सीमा अवध‍ि के दौरान की सारी जानकारी मिल जाएगी, जो आप ने ओटीपी जनरेट करने से पहले दर्ज की थी. अगर आपको हिस्ट्री देखकर कुछ भी गड़बड़ी नजर आई, तो इसकी श‍िकायत यूआईडीएआई से 1947 पर कॉल कर के कर सकते हैं.

दरअसल जब भी आपके आधार को यूज किया जाता है, तो इसे यूज करने के लिए हर संबंध‍ित व्यक्‍त‍ि को यूआईडीएआई को रिक्वेस्ट भेजनी होती है. इसके आधार पर ही यूआईडीएआई आपका डाटा यहां पेश करता है.

अब नहीं डिश एंटीना की जरूरत

फतेहगढ़ साहिब, [प्रदीप शाही]। विज्ञान में नित होते आविष्कार इंसान के जीवन को सुखद बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक जमाना था जब छतों पर लगे टीवी एंटीना के घूम जाने मात्र से ही सिग्नल समाप्त हो जाता था। इसके बाद छतों पर से पाइप वाले एंटीना गायब हो गए।

इनके स्थान पर तश्तरीनुमा डीटीएच छतरी आ गई। अब जल्द ही ये तश्तरीनुमा डीटीएच छतरी भी छतों पर से उड़नछू हो जाएंगी। जो नया एंटीना आने वाला है, उसे छत की दरकार नहीं। न छत चाहिए, न लंबा तार।

सीधे सेट टॉप बॉक्स में कनेक्ट कर दीजिए और टेलीविजन का मजा लीजिए। दुनिया माइक्रो स्ट्रिप एंटीना की ओर बढ़ रही है। भारत में भी स्वदेशी माइक्रो स्ट्रिप एंटीना तैयार कर लिया गया है।

भारतीय वैज्ञानिक ने बनाया सस्ता-टिकाऊ स्वदेशी माइक्रो एंटीना

यह माइक्रो स्ट्रिप एंटीना पंजाब फतेहगढ़ साहिब स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर जसपाल सिंह ने तैयार किया है।

सेट अप बॉक्स से होगा कनेक्ट

दो से तीन सेंटीमीटर आकार के चिपनुमा माइक्रो स्ट्रिप एंटीना को कमरे के अंदर रखे सर्विस बॉक्स में लगाया जा सकेगा। यह बॉक्स फिलहाल घर के बाहर या छत पर लगे डिश एंटीना से तार के जरिये कनेक्ट होता है, जबकि दूसरी ओर टीवी सेट से। अब डिश एंटीना केस्थान पर इसमें माइक्रो स्ट्रिप एंटीना को कनेक्ट कर सब्सक्राइब्ड चैनलों को देखा जा सकेगा।

पंजाब फतेहगढ़ साहिब स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर जसपाल सिंह ने स्वदेशी माइक्रो स्ट्रिप एंटीना बनाने में सफलता हासिल की है। प्रोफेसर जसपाल सिंह ने बताया कि शोध कार्य को पूरा करने में पांच साल लग गए। इसे पेटेंट के लिए इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया ने स्वीकार कर लिया है।

लागत मात्र 50 रुपये

माइक्रो स्ट्रिप एंटीना से उपभोक्ता ही नहीं कंपनियों को भी लाभ होगा। इसके निर्माण में समय व कीमत दोनों में बचत होगी। इस एंटीना को बनाने में अधिकतम 50 रुपये तक का खर्च आएगा।

इसके लिए किसी लेबोरेट्री की आवश्यकता नहीं होगी। चिप को प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) पर ही बनाया जा सकेगा। इसका आकार दो सेंटीमीटर से लेकर तीन सेंटीमीटर तक रहेगा। साथ ही इससे सिग्नल भी बेहतर हो जाएगा।

अब कपडे धोने से मिलेगा छुटकारा ,धुप में अपने आप साफ होंगे कपडे

कामकाजी लोगों और घरेलू महिलाओं के लिए कपड़ा धोना किसी चुनौतीपूर्ण काम से कम नहीं है लेकिन जल्द ही इस झंझट से निजात मिल सकती है क्योंकि एक ऐसी तकनीक का विकास किया गया है जिसके जरिये प्रकाश पड़ते ही मिनटों में आपके कपड़े खुद ही साफ हो जायेंगे.

 

ऑस्ट्रेलिया के आरएमआईटी विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने ऐसे ‘नैनो-एनहांस्ड’ कपड़े का विकास किया है जो अपने आप दाग और जमी हुई मैल निकालने में सक्षम हैं. इसके लिए कपड़े को केवल बल्ब की रोशनी में रखना होगा. धूप में पहनकर निकलने पर भी यह साफ हो जायेगा. अनुसंधानकर्ताओं में भारतीय मूल का एक वैज्ञानिक भी शामिल है.

खोज करने वाले टीम में एक भारतीय मूल का वैज्ञानिक भी है जिनका नाम राजेश रामनाथ है। उनका कहना है कि इसका फायदा यह है कि यह पहले से ही 3डी के आधार में बनाया जा रहा है। जिस कारण से कपड़ा अच्छी तरह से अवशोषित कर लेता है और कार्बनिक पदार्थ आराम से निकल जाता है।

अभी इसमें और ज्यादा रिसर्च की जाएगी जिससे वो यह पता लगाएंगे की चाय और टमाटर जैसे घातक दाग कैसे निकाल सकते है। अभी तक यह कपड़ा किसी के पास नही आया है।

जाने इस 26 लाख वाली साइकिल में ऐसा क्या है खास

क्या एक साइकिल की कीमत एक गाड़ी के बराबर हो सकती है वो भी फार्चूनर जैसी बड़ी गाड़ी के बराबर सुनने में विश्वास करना मुश्किल लग रहा है लेकिन यह बात बिलकुल सच है आप हैरानी में पड़ कि दो पहियों की साइकिल की कीमत लाखों रुपए कैसे हो सकती है?

आप खुद को भरोसा दिलाने के लिए कल्पना करेंगे कि यह साइकिल ऑटोमैटिक होगी, इंजिन या बैट्री से चलती होगी वह भी बहुत तेज। लेकिन जब आपसे कोई कहे कि साधारण सी दिखने वाली साइकिल की कीमत 26 लाख रुपए है तो आपको यकीन नहीं होगा। खासकर तब जब आपसे कहा जाए कि यह इसे पैरों से ही चलाना होगा।

लक्जरी कार बनाने वाली कंपनी बुगाती ने 40000 डॉलर (25लाख 92 हजार 200 रुपए) कीमत की साइकिल तैयार की है। सबसे तेज दौड़ने वाली कार बनाने वाली कंपनी बुगाती ने एक बाइक कंपनी के साथ मिलकर ये साइकिल तैयार की है। इस साइकिल की कीमत के हिसाब से जो खूबी बताई गई हैं वह भी जानने लायक हैं।

साइकिल की खूबियां

कंपनी ने करीब 26 लाख रुपए कीमत वाली इस साइकिल की सबसे बड़ी खूबी इसका हल्का होना बताया है। कंपनी ने कहा है कि यह साकिल मात्र 11 पाउंड यानी पांच किलो की होगी।

साइकिल का फ्रेम और बॉडी 95 फीसदी रेनफोर्स कार्बन से बना है। रेनफोर्स कार्बन एक ऐसा पदार्थ है जिसका इस्तेमाल हवाई जहाज की बॉडी बनाने के लिए किया जाता है। ताकि विमान कम से कम वजन के हों।

इस साइकिल का हर पुर्जा हवाई जहाज बनाने वाले मैटेरियल से तैयार किया गया है। इस साइकिल में चेन की जगह बेल्ट लगाया गया जिसे पैडल के सहारे खींचा जाएगा। इस साइकिल को आम साइकिलों की तरह ही आम रास्तों पर दौड़ाया जा सकता है।

साइकिल का नाम

कंपनी बुगाती ने इस बाइक का नाम सुपर बाइक दिया है जो एक अल्टीमेट स्पोर्ट साइकिल है। कंपनी इसे कई रंगों और मॉडल में लॉन्च करने का ऐलान किया है।