सिर्फ पैसों के लिए मृतक का इलाज करते रहे डॉक्टर,बेटा ने इस तरह पता लगाया असल सच

नर्मदा हॉस्पिटल में शुक्रवार को एक मरीज की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज की मौत के बाद भी डॉक्टर उन्हें वेंटिलेटर पर रखकर इलाज का नाटक करते रहे। आरोप है कि शुक्रवार को मरीज को वेंटीलेटर से हटाने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने मरीज का शव परिजनाें को नहीं दिया।

प्रबंधन का कहना था 50 हजार रुपए का भुगतान करने के बाद ही शव दिया जाएगा। नाराज परिजनों ने इस दौरान अस्पताल में जमकर हंगामा किया। हबीबगंज थाने जाकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत भी की।

अस्पताल में चल रहा था इलाज

सीहोर में रहने वाले 45 वर्षीय लखन मेवाड़ा 9 अप्रेल को सीहोर के पास हुए एक एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए परिजन उन्हें नर्मदा हॉस्पिटल लेकर आए थे। यहां उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया । शुक्रवार दोपहर में अस्पताल प्रबंधन द्वारा पुलिस और परिजनों को उनकी मौत की सूचना दी गई।

 50 हजार रुपए का भुगतान करने के बाद ही मिलेगा शव

”गुरुवार को जब मैंने डॉक्टरों से बहुत बहस की तो वे बड़ी मुश्किल से केवल मुझे आईसीयू में अंदर आने देने के लिए राजी हुए। जब मैं वहां पहुंचा तो मुझे अहसास हो गया कि मेरे बड़े पापा अब जीवित नहीं हैं। उनका पूरा शरीर पीला पड़ गया था।

मैंने डॉक्टरों से कहा कि आप वेंटीलेटर हटाओ, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। उनका कहना था कि वे जिंदा हैं। दस अप्रेल की रात से 12 अप्रैल की दोपहर 11 बजे तक डॉक्टर हमसे से 42 हजार की दवाइयां मंगा चुके थे। दूसरी तरफ अस्पताल का बिल भी 45 हजार हो गया था।

शुक्रवार को हमारे बार-बार कहने के बाद डॉक्टरों ने 12 बजे बड़े पापा को वेंटीलेटर से हटा दिया, लेकिन हमें शव देने से इनकार कर दिया। उन्हाेंने शव को फ्रीजर में रख दिया और हमें अस्पताल का 50 हजार का बिल भरने को कहा। हमने पुलिस को फाेन किया लेकिन पुलिस ने भी हमारी मदद नहीं की। दोपहर ढाई बजे मीडिया के आने के बाद ही हमें शव साैंपा गया।”