एक कोर्स ने बदली जिंदगी, हर महीने कर रहा 1.25 लाख रु की कमाई

अब एग्रीकल्चर में करियर सिर्फ खेती-बाड़ी तक ही सीमित नहीं रह गया है। एग्रीकल्चर सेक्टर के बदले माहौल का परिणाम है कि अन्य सेक्टरों की ही तरह एग्रीकल्चर सेक्टर भी युवाओं को काफी आकर्षित कर रहा है। किसानों की आमदनी बढ़ाने और एग्रीकल्चर को एक करियर के रूप में बनाने के लिए सरकार कुछ कोर्स भी कराती है। बिहार के रहने वाले इस शख्स ने वेटरनेरी की डिग्री हासिल करने के बाद एक कोर्स किया और आज वो सालाना 15 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।

2 महीने के कोर्स ने बदली जिंदगी

बिहार के नालंदा जिले के निवासी डॉ चंद्रकांत कुमार निराला ने मनीभास्कर को बताया कि पेशे से वो एक वेटरनेरी डॉक्टर हैं। उन्होंने रांची से वेटरनेरी की डिग्री हासिल की है। डॉक्टर बनने के बाद उनको सरकार द्वारा चलाए जा रहे एग्री क्लिनिक एग्री बिजनेस सेंटर के बारे में पता चला। उन्होंने दो महीने का कोर्स किया और उनकी जिंदगी बदल गई। आज गांव-गांव जाकर लोगों को खेती के अलावा कमाई के अन्य विकल्पों जैसे बकरी पालन, मछली पालन और डक फार्मिंग के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

 

निराला बताते हैं कि उन्होंने पटना में इंदिरा लाइव्लीहुड डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना की है। जहां किसानों को बकरी पालन और मछली पालन की ट्रेनिंग देते हैं। उनको बताते हैं कि मछली की कौन सी प्रजाति पालें जिससे उनको ज्यादा फायदा मिले। इसके साथ ही उसे कहां बेचें और किस बीमारी का इलाज कराएं आदि की जानकारी देते हैं। उनके साथ 250 से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं।

बकरी पालन में है ज्यादा फायदा निराला का कहना है कि बकरी पालन एक प्रॉफिटेबल बिजनेस है। बकरी का एक बच्च 20 दिन में तैयार होकर 7 किलोग्राम का हो जाता है। इसके पालन में ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती। त्योहारी सीजन में बकरी की डिमांड भी रहती है। इसलिए वो किसानों को बकरी पालन के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उनको कब और कहां बेचनी चाहिए आदि की जानकारी देते हैं।

निराला कहते हैं कि उन्होंने नालंदा जिला के हिल्सा अनुमंडल में एक डक फार्मिंग शुरू की है। डक का स्थानीय स्तर पर बिजनेस है। एक डक के अंडे की कीमत बाजार में 15 रुपए है। इसके अलावा वो केले की खेती भी करते हैं। केले की खेती से 50 हजार रुपए की कमाई हो जाती है। उनका कहना है कि किसान पारंपरिक खेती के अलावा अन्य तरीके से भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। बस उनको आगे बढ़ने की जरूरत है।

15 लाख रुपए है सालाना टर्न ओवर

इंदिरा लाइव्लीहुड डेवलपमेंट सेंटर का सालना टर्नओवर 15 लाख रुपए है। उन्होंने नाबार्ड के एक इंडो-जर्मन प्रोजेक्ट के साथ कोसी नदी आदि पर भी काम किया है। पेशे से वो पशु चिकित्सक भी हैं और जानवरों का इलाज कर कमाई कर करते हैं।