गोशाला ने बनाया अनोखा गमला, पौधे को खाद देने की जरूरत नहीं, जाने कैसे करता है काम

हमारी संस्कृति में गाय को माता कहा जाता है। गाय एक ऐसी पालतु पशु है जिससे मिलने वाला हर एक उत्पाद हमारे लिए उपयोगी होता है। गाय के गोबर से लोग कंडे और खाद बनाते हैं, लेकिन यहां इसका ऐसा उपयोग हो रहा है जिसे देखकर लोग दंग हैं।

इस गौशाला में गायों के गोबर से अनूठी कलाकृतियां तैयार हो रही हैं। घरेलू उत्पाद बन रहे हैं और गोबर गैस सहित खाद भी बनाई जा रही है। इस गौशाला का बहुउपयोगी मॉडल पूरे देश के लिए आदर्श बन सकता है।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर भलेसर स्थित श्री वेदमाता गायत्री गौशाला में नए-नए प्रयोग कर गोबर से कई अनूठे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जो नरवा-गरवा-घुरवा-बारी मॉडल दिया है उस पर यह गौशाला वर्षों से काम कर रही है।

गौमूत्र से अर्क, फिनाईल, मच्छर भगाने के केमिकल बनाने, मोबाइल रेडियेशन कम करने के स्टिकर से लेकर कई तरह की औषधियां बनाने का काम यहां होता है। यही नहीं गोबर से गोबर गैस, कण्डे, गमले, माला, चूड़ी, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गौर गणेश, कान की बालियां सहित 19 तरह के उत्पादों का निर्माण यहां हो रहा है। कुशल कारीगर बखूबी अपने हुनर से लोगों को आश्चर्यचकित कर रहे हैं।

गमला ऐसा कि पौधे में खाद डालने की जरूरत नहीं

गौशाला की कर्मचारी दुर्गा औसर बतातीं है कि गोबर से निर्मित ऐसा गमला है जिसमें पौधे को अलग से खाद देने की जरूरत नहीं है। पौधे के साथ थोड़ी मिट्टी डालें और हर दिन थोड़ा पानी। गमले से ही पौधे की खाद की जरूरत पूरी होगी।

खुद से तैयार की गमले बनाने की मशीन

गौशाला कर्मचारी ईश्वरी जोशी कहती हैं कि बाजार में गोबर का गमला बनाने के लिए मशीन नहीं मिली तब यहां के कर्मचारियों ने खुद से मशीन बनाई। यह मशीन और यहां के बने उत्पाद देखने बड़ी संख्या में किसान और कृषि के विद्यार्थी पहुंचते हैं।