फेसबुक पर सीखी अंजीर की खेती,एक फल की कीमत है 600 रुपये

जिले के एक किसान ने फेसबुक पर थाईलैंड के किसानों से दोस्ती की और फिर अंजीर की खेती के गुर सीख लिए। किसान अब अंजीर के साथ बिना मिट्टी के स्ट्रॉबेरी और अन्य उत्पादन भी कर रहे हैं। इससे जिले में उद्यानिकी को और बढ़ावा मिला है।

जावरा से 22 किलोमीटर दूर गांव रियावन में रहने वाले किसान अरविंद धाकड़ पिछले 10 वर्ष से खेती कर रहे हैं। बीते वर्ष वे फेसबुक के माध्यम से थाईलैंड के कुछ किसानों से जुड़े। बात करते-करते अंजीर की खेती के बारे में पता चला। फिर उनसे खेती की पूरी प्रक्रिया समझी।

थाईलैंड के किसानों द्वारा लातूर के किसान के बारे में बताया। उनसे संपर्क करने के बाद वहां से करीब 50 से 60 पौधे अंजीर के मंगाए। इसके बाद फेसबुक के जरिए प्रतिदिन खेती की हर एक जानकारी लेकर अपने खेत में बनाए गए पॉली हाउस के किनारे बचे स्थान पर यह पौधे लगाकर खेती शुरू कर दी।

8 माह पहले लगाए पौधे

करीब आठ माह पहले अंजीर के पौधे लगाए गए। वर्तमान में पौधे की लंबाई 4 से 5 फीट हो गई है। अंजीर के फल भी आने लगे हैं। पौधों की दूरी भी एक-दूसरे से तीन से चार फीट है। किसान धाकड़ द्वारा वर्तमान में फेसबुक व मैसेंजर के जरिए प्रतिदिन थाईलैंड से सुझाव लिए जाते हैं। किसान का दावा है कि इस तकनीक के अलावा सामान्य रूप से भी अंजीर की खेती प्रदेश में कहीं नहीं होती।

अंजीर के पौधे की खासियत

  • 45 डिग्री के तापमान पर भी पौधे खराब नहीं होते।
  • प्रतिदिन पौधों को पानी देने की जरूरत नहीं।
  • गर्मी में 3 से 4 दिन में एक बार तो ठंड के दिनों में 15 दिन में एक बार पानी देना पड़ता है।
  • इस तकनीक से अंजीर की खेती भारत में केवल 3 से 4 स्थान पर होती है।
  • अंजीर का फल 200 रुपए प्रति किलो बिकता है। सुखाने पर 500 से 600 रुपए किलो बिकता है।
  • 40 से 50 साल तक चलेगा पौधा।

बिना मिट्टी के उगाई सब्जियां

अरविंद द्वारा अंजीर के साथ ही बिना मिट्टी की स्ट्रॉबेरी की भी खेती कर रहे हैं। उनका खुद का स्ट्रॉबेरी का पॉली हाउस है। इस पॉली हाउस में बिना मिट्टी के स्ट्रॉबेरी के साथ फल और सब्जियों की पैदावर भी हो रही है। वर्ष 2015 में किसानों के एक दल के साथ वह इजराइल गए थे। वहां पर मिट्टी के बिना खेती की तकनीक को देखा और समझा।

इसके बाद यहां पर इजराइल की तकनीक का उपयोग कर स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान में बैंगन, टमाटर व फूलगोभी भी बिना मिट्टी के उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने इजराइल की तकनीक के साथ कैलिफॉर्निया में पैदावार होने वाली स्ट्रॉबेरी की भी खेती कर रहे हैं। यह खेती 1 बीघा में 10 बीघा के बराबर रहती है। इसका भी उन्होंने अलग से ग्रीन हाउस बना रखा है। इस तकनीक को टेबल-टॉप कहा जाता है।