सुरजीत सिंह वर्मी कंपोस्ट बेच कर कमा रहा है लाखों रुपए, 500 रु क्विंटल बिकती है खाद और 1000 रु किलो बिकते है केंचुए,जाने पूरी जानकारी

गांव चगरां के प्रगतिशील किसान सुरजीत सिंह की आविष्कारी सोच ने उसे जुगाड़ी किसान बना दिया है। वह कृषि से जुड़े व्यवसायों में संभावनाओं की तलाश करते रहते हैं और अपने देसी अंदाज में उसे नया रूप दे देते हैं।

यही कारण है कि इस प्रगतिशील किसान को राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। यह सम्मान 24 दिसंबर 2010 को उदयपुर में मिला था। वहीं आईसीआर की ओर से 12-13 दिसंबर 2010 को मैसूर में मनाई गई नेशनल इनोवेटर्स मीट में इन्हें जुगाड़ी किसान का पुरस्कार दिया गया।

सफलता का राज : जहां भी नई तकनीक देखते हैं उसे देसी तरीके से तैयार कर लेते हैं, एक फसल पर नहीं रहते निर्भर 1.5 कनाल में 100 टन बर्मी कंपोस्ट बनाकर पंजाब और हिमाचल में बेच रहे हैं

सुरजीत सिंह बताते हैं कि वे 45 एकड़ में खेती करते है और हर फसल लगाते हैं। 2003 में उन्होंने कृषि विभाग के मार्गदर्शन से वर्मी-कंपोस्ट का काम शुरू किया। अब उनके पास 1.5 कनाल का वर्मी-कंपोस्ट शैड है। 100 टन वर्मी-कंपोस्ट व 1 से 1.5 क्विंटल केंचुए प्राप्त हो रहे हैं। 500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से वर्मी-कंपोस्ट और 1000 रुपए किलो केंचुए हिमाचल,पंजाब में बेच रहे हैं। वर्मी-कंपोस्ट से केंचुए अलग करने की भी मशीन बनाई है। इसके साथ ही गांव के 30 लोगों को भी रोजगार दे रखा है।

बायो गैस से चला रहे जैनरेटर और टोका…

सुरजीत सिंह ने बताया कि उनके पास 15 के करीब गाय, भैंस आैर बछड़े हैं। इनके गोबर आैर मूत्र से बायो गैस आैर वर्मी-कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं। वह 5 एकड़ में आर्गेनिक फार्मिंग करके लहसुन, भिंडी, फ्रांसबिन, खीरा, मक्की, चने, मांह जैसी फसलें पैदा कर रहे हैं। बायो गैस से जैनरेटर चलाकर वह चारा कुतरने वाली मशीन चला रहे हैं।

पंजाब सरकार की बॉडी आत्मा के भी सदस्य

मुख्य कृषि अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि प्रगतिशील किसान सुरजीत सिंह को कृषि में नई तकनीक सीख कर उसे सफलतापूर्वक लागू करने के लिए उन्हें ब्लाक स्तर, जिला स्तर, प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि वह आत्मा की गवर्निंग बॉडी के सदस्य भी हैं।