इस किसान ने बिना खर्च किये खोजा अनोखा फार्मूला

15 साल पहले जिस जमीन को बंजर समझा गया, उस जमीन पर एक किसान ने जैविक खेती करके ढाई किलो वजन वाली मौसम्बी पैदा की। यही नहीं किसान ने मेहनत करके जमीन को इस लायक कर दिया, जहां पर अब 20 किलो को कटहल और सवा किलो वजन वाला आम हो रहा है।

उनका प्रयोग रुका नहीं है, बल्कि वे एक ही पेड़ में नींबू, संतरा और मौसम्बी लगाने की कोशिश कर रहे हैं। अब उन्हें एग्रीकल्चर कॉलेज में हॉर्टीकल्चर पर लेक्चर देने के लिए बुलाते हैं।

  • ये किसान हैं प्राण सिंह। ग्वालियर से 25 किमी दूर जहानपुर गांव। आसपास खेत हैं, लेकिन ज्यादातर खेत बंजर पड़े हैं। केवल प्राण सिंह अपने खेत और बगीचे में काम करते नजर आते हैं।
  • वे बताते हैं कि 15 साल पहले जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो गई, क्योंकि किसानों ने जमकर यूरिया और केमिकल का इस्तेमाल किया। उसके बाद यहां के ज्यादातर किसान ने फसल लगाना बंद कर दी।
  • प्राण सिंह पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उन्होंने खुद ही खेत में मेहनत करना शुरू की। यूरिया और केमिकल का उपयोग बंद किया। खेत के आसपास 3 तालाब बनाए, जिसमें बारिश का पानी एकत्र किया।

जमीन को बनाया उपजाऊ

  • इससे जमीन का वाटर लेबल सही हुआ। फिर उन्होंने गोबर, घास-फूस की खाद का इस्तेमाल किया। वर्मी कंपोस्ट की ट्रेनिंग ली। इसके बाद खेत की उर्वरा शक्ति वापस लौट आई।
  • उन्होंने खेत में नींबू, संतरा और मौसम्बी के पौधे लगाए। इस साइट्रस वैरायटी के पौधों के साथ कई प्रयोग प्राण सिंह ने किए। इसका नतीजा यह निकला कि उनके पेड़ में मौसम्बी का वजन ढाई किलो तक पहुंच गया।

प्राण सिंह ने विकसित की कई नयी वैरायटी

  • यही नहीं उन्होंने कटहल, अमरूद सहित कई पौधों की ग्राफटिंग की, जिससे नयी वैरायटी विकसित हुई। प्राण सिंह बताते हैं कि यह सब प्राकृतिक तरीके से खेती करने का नतीजा है।
  • केमिकल और दूसरी रसायनिक खादों से जमीन और फसल को नुकसान होता है। प्राण सिंह अब कोशिश कर रहे हैं कि एक ही पेड़ में नींबू, संतरा और मौसम्बी की फल लगें। उनके मुताबिक यह संभव है, क्योंकि ये तीनों एक प्रजाति के फल हैं।
  • प्राण सिंह की मेहनत देखकर आसपास बंजर खेतों वाले किसान भी अपनी जमीन में वापस खेती करने के लिए लौट रहे हैं। अब तो एग्रीकल्चर कॉलेज के साथ कृषि विभाग के अफसर प्राण सिंह को जैविक खेती की टिप्स देने के लिए बुलाते हैं।