दूध की जगह इस मशीन के साथ डेयरी प्रोडक्ट बना कर बेचने से कई गुना बढ़ सकती है कमाई

देश में डेयरी उद्योग निरंतर प्रगति कर रहा है। जैसे-जैसे लोगों की आय में बढ़ोतरी हो रही है और जीवन स्तर सुधर रहा है डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर, घी, छाछ, क्रीम आदि की खपत बढ़ती जा रही है। यानी अब पहले की तरह डेयरी से जुड़े लोग सिर्फ दूध के व्यापार तक सीमित नहीं हैं। बल्कि अब डेयरी उद्योग में लगे किसानों और व्यापारियों के लिए दही, पनीर, देसी घी, खोया बनाकर बेचेने में भी अपार संभावनाएं हैं।

दूध की नहीं मिलती वाजिब कीमत

अक्सर देखा जाता है कि दूध गांवों और छोटे शहरों में पशुपालन करने वाले किसान अपना ध्यान सिर्फ दूध बेचने पर ही केंद्रित रखते हैं। जो किसान या डेयरी फार्म संचालक दूध सीधे बाजार में बेच देते हैं यानी सीधे ग्राहकों तक पहुुंचाते हैं उन्हें तो काफी फायदा हो जाता है लेकिन जो लोग ऐसा नहीं कर पाते उन्हें मजबूरन दूध को तमाम निजी डेयरी कंपनियों के केंद्रों पर ओने-पौने दाम पर बेचना पड़ता है।

पनीर, खोया, देसी घी बनाने में है फायदा

इन डेयरी किसानों को लगता है कि वो आखिर करें भी तो क्या?, आखिर उन्हें दूध की कीमत कैसे मिले। ऐसे में हम आपको कुछ तरीके बताते हैं जिनसे आप इसी दूध से ज्यादा पैसा कमा सकते हैं। जिन किसानों या डेयरी संचालकों के पास रोजना 100 लीटर से ज्यादा का दुग्ध उत्पादन होता है वे लोग खुद का पनीर, दही, छाछ, खोया और देसी घी बनाकर बेचे तो उन्हें काफी फायदा हो सकता है।

बाजार में गाय का दूध चालीस से पैंतालीस रुपये और भैंस का दूध 50 से 55 रुपये प्रति लीटर आसानी से बिकता है लेकिन किसान इसे सीधे ग्राहकों को नहीं बेच पाते हैं और उन्हें डेयरी कंपनियों की तरफ से गाय के दूध का 25 से 30 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 35 से 40 रुपये प्रति लीटर दाम मिलता है। लेकिन यही किसान यदि दूध के कुछ हिस्से का देसी घी, खोया, पनीर और दही बनाकर बाजार में बेचें तो उन्हें अच्छे दाम मिल सकते हैं।

एक मशीन से बनते हैं सभी डेयरी उत्पाद

इसके लिए आपको एक खोया, पनीर और देसी घी बनाने वाली मशीन खरीदनी होगी। एलपीजी गैस और बिजली से चलने वाली इस मशीन के जरिए मिनटों में दूध को गर्म किया जा सकता है और जरूरत के हिसाब से खोया, पनीर, दही और देसी घी बनाया जा सकता है। बाजार में 100 लीटर दूध की क्षमता वाली मशीन की कीमत करीब 80 हजार के आस-पास है।

ये मशीन 150 लीटर, 200 लीटर, 300 लीटर की क्षमता में भी मिलती है और इसका इस्तेमाल करना काफी आसान है। इन प्रोडक्ट को बनाने का फायदा ये भी है कि दूध को दो से चार घंटे तक ही रखा जा सकता है लेकिन यदि इससे खोया, देसी घी और पनीर जैसी चीजें बना दी जाएं तो एक से दो दिनों तक रखा जा सकता है और अच्छी कीमत पर बाजार में बेचा जा सकता है।

अपना ब्रांड भी बनाकर बेच सकते हैं

जिन डेयरी संचालकों के पास दूध की अधिकता है और मार्केट भी है तो वो अपना ब्रांड बनाकर भी इन उत्पादों को बेच सकते हैं। बाजार में शुद्ध और मिलावट रहित दूध, पनीर और देसी घी की खासी मांग है और ये अच्छे दामों पर आसानी से बिक जाते हैं।

खोवा बनाने वाली मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें