10 लाख में बिकी महज दो साल की कटड़ी

हिसार के नारनौंद का सिंघवा गांव। मुर्राह नस्ल की भैंस के लिए देश ही नहीं, विदेश में भी चर्चित। यहां किसान पशुओं को शाही अंदाज में पालते हैं। पशुपालकों की मेहनत से यहां दूध की नदियां बहती हैं तो यहां भैंस की कीमत लग्जरी कार से भी अधिक आंकी जाती है।

सिंघवा में जसवंत की मुर्राह नस्ल की दो वर्षीय कटड़ी लक्ष्मी इस बार दस लाख रुपये में बिकी है, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई दो साल की कटड़ी इतनी महंगी बिकी हो।

सिंघवा निवासी जसवंत पुत्र रणबीर सिंह ने 2012 में महम से 70 हजार रुपये में एक मुर्राह नस्ल की भैंस खरीदी थी और उसका नाम गिन्नी रख दिया था। गिन्नी की देखरेख शाही तरीके से की गई तो गिन्नी ने भी जसवंत को गिन्नियों से मालामाल कर दिया। क्योंकि गिन्नी की कटड़ी लक्ष्मी मात्र दो वर्ष की हुई थी तो लक्ष्मी की सुंदरता को देखकर देश प्रदेश के अनेक व्यापारी उसको खरीदने के इच्छुक थे। आखिरकार लक्ष्मी को पूर्व मुख्यमंत्री के गाव साघी के किसान कृष्ण हुड्डा ने दस लाख रुपये में खरीद लिया। इतनी कीमत में कटड़ी बिकना एक अहम बात है।

व्यावसायिक पहलु : लागत 70 हजार, दो साल में मुनाफा 10 लाख

दुनिया में शायद ही कोई धंधा हो, जिसमें दो साल में 13 गुना मुनाफा होता हो, पर मुर्राह की खेती में ऐसा संभव है। सिंघवा के किसान इसे साबित भी कर रहे हैं। बात गिन्नी की हो या लक्ष्मी, किसानों की मेहनत से यहां भैंस के थन से दूध की धारा के साथ समृद्धि पैदा हो रही है।

लक्ष्मी की मा भी दिखा चुकी है अपना दम

लक्ष्मी की मा गिन्नी ने भी लगातार तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहराया है। उसने सन 2013 में इडियन नेशनल चैम्पियनशिप दूध प्रतियोगिता जोकि पंजाब के मुक्तसर में आयोजित की गई थी उसमें प्रथम स्थान, सन 2015 में राष्ट्रीय डेयरी मेला करनाल में भी दूध प्रतियोगिता में भी प्रथम, चैम्पियन भैंस मेला हिसार में भी दूध प्रतियोगिता में भी प्रथम स्थान प्राप्त कर आज भी अनेक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर लाखों रुपए इनाम के जीत रही है।

भैंसों के दम पर है दर्जनों किसान लखपती

गाव सिंघवा में दर्जनों किसान मुर्राह नस्ल की भैंसों को पाल रहे है और उनको बेचकर लाखों रुपये मुनाफा कमा रहे है। सरकार ने इस गाव को आदर्श मुर्राह नस्ल गाव घोषित किया हुआ है। इस गाव के लोगों ने भैंसों के नाम महिलाओं के नाम पर जैसे लक्ष्मी, धन्नो, लाडो, रानी, पूजा, मोहिनी, गंगा, जूना, लखो इत्यादि रखे हुए है और यह भैंस अपना नाम सुनते ही मालिक के पास पहुच जाती है।