इस वैज्ञानिक ने पढ़ी थी अख़बार में अपनी मौत की खबर, उसके बाद इस तरह की नोबल पुरस्कार की शुरुआत

तक़रीबन 100 साल पहले, एक आदमी सुबह का अखबार देख रहा था और अचानक वह अपना नाम मृतकों की नामावली वाले पेज पर देखकर अचंभित और भयभीत हो गया। बाद में अखबार ने विवरण में बताया की गलती से किसी गलत इंसान की मृतक घोषित किया गया।

लेकिन अखबार देखने के बाद उस आदमी की पहली प्रतिक्रिया देखने योग्य थी।वह यही सोच रहा था की वह यहाँ है या वहा है? और जब विवरण को देखते हुए उसने ओने धैर्य को वापिस प्राप्त किया तब उसके दिमाग में दुसरा विचार यह आया की लोग उसके बारे में क्या सोच रहे होंगे।

जब लोग मृतकों वाली नामावली वाले पेज पर पढेंगे, “डायनामाइट का राजा मारा गया।” और यह भी की, “वह मृत्यु का सौदागर था।” उस आदमी ने डायनामाइट की खोज की थी और जब उसने ‘मौत का व्यापारी’ ये शब्द पढ़े, तो उसने अपनेआप को ही एक प्रश्न पुछा,

“क्या इसी नाम से मुझे याद किया जायेंगा?” उसने उस समय अपनी भावनाओ को महसूस किया और निश्चय किया की वह इस तरह याद रहने वाला नही बनना चाहता।उसी दिन से, उसने शांति के लिए काम करना शुरू किया। उस आदमी का नाम अल्फ्रेड नोबेल था और आज वह महान नोबेल पुरस्कार के लिए याद किये जाते है।

Alfred Nobel – अल्फ्रेड नोबेल

1901 से, भौतिक विज्ञानं, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और शांति के क्षेत्र में महान उपलब्धिया प्राप्त करने वाले पुरुष और महिलाओ को नोबेल पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है। उस संस्था 1895 में स्थापित की गयी जब अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में लिखा था की,

वह अपनी सारी जायदाद नोबेल पुरस्कार देने के लिए छोड़कर जा रहे है। जैसे अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी भावनाओ को महसूस किया था और पुनः अपने गुणों को स्थापित करने की ठानी थी उसी तरह हमें भी एक कदम पीछे जाकर आगे बढ़ने की सोचनी चाहिये।