अब पराली से बनेगी घरों की छतें, दीवारें और टाइल्स

पराली को अब तक किसानों और पर्यावरण के लिए समस्या माना जाता है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस समस्या का हल निकाल लिया है। नई तकनीक के साथ पराली का इस्तेमाल घरो की छत, दीवारों फर्श अदि बनाने के लिए किया जाएगे,

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के वैज्ञानिक ने पराली से हाइब्रिड कंपोजिट बनाने की तकनीक खोजी है।

पराली से बनाए गए हाइब्रिड कंपोजिट से घरों की छतें, दीवारें और टाइल्स आदि बनाई जाएंगी। सीएसआईआर की प्रयोगशाला एडवांस्ड मटेरियल्स एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एम्प्री) में यह प्रयोग हुआ है।

एम्प्री के वैज्ञानिक डॉ. अशोकन पप्पू ने पराली समेत कई प्रकार के कूड़े को हाइब्रिड कंपोजिट में बदलने की तकनीक विकसित की। अशोकन ने बताया कि पराली से बनी शीट सागौन की लकड़ी की तुलना में चार गुना मजबूत, हल्की और 30 फीसदी सस्ती है। यह आग, नमी और फंगस से सुरक्षित है।

 

अशोकन ने बताया कि उन्होंने सीमेंट उद्योग से निकलने वाली फ्लाई ऐश में फाइबर मिलाकर दूसरा हाइब्रिड कंपोजिट तैयार किया।

यह सागौन की लकड़ी से 10 गुना मजबूत और 40 फीसदी सस्ता है। छोटे-छोटे संगमरमर के टुकड़ों से तैयार हाइब्रिड कंपोजिट से पेपरवेट बनाए। इनकी कीमत 25 से 30 रु. है। अशोकन 15 साल से इस तकनीक पर काम कर रहे थे।

वह उत्पाद और उत्पादन प्रक्रिया का भारत और अमेरिका में पेटेंट करा चुके हैं। डेढ़ साल पहले छत्तीसगढ़ की कंपनी इको ब्राइट शीट को तकनीक दी थी। कंपनी ने महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में प्लांट लगाए हैं। एक प्लांट पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार ने लगाया है।