3.50 लाख में शुरू करें राइस मिल, सरकार करेगी 90% सपोर्ट

आप मात्र 3.50 लाख रुपए में राइस मिल लगा सकते हैं। अगर आपके पास इतना पैसा भी नहीं है तो आप 90 फीसदी तक लोन सरकार से ले सकते हैं। यानी कि आपके पास 35 हजार रुपए हैं तो आप राइस मिल लगाने की योजना पर काम कर सकते हैं।

दरअसल, खादी विलेज इंडस्‍ट्रीज कमीशन ऐसे बिजनेस को 90 फीसदी तक फाइनेंशियली सपोर्ट करता है और ऐसे कारोबारियों को बैंकों के माध्‍यम से लोन दिया जाता है। हालांकि बड़े शहरों में राइस मिल की डिमांड कम हो गई हैं और ब्रांडेंड की डिमांड बढ़ रही है, लेकिन मध्‍यम और छोटे दर्जे के शहरों में मिनी राइस मिल शुरू कर सकते हैं।

आइए, जानते हैं कि एक राइस मिल पर कितना इन्‍वेस्‍टमेंट होगा और कैसे आप राइस मिल शुरू कर सकते हैं। साथ ही, यह भी जानेंगे कि आपको कितना लोन मिलेगा और कितनी इनकम होगी।

कितने में शुरू होगी राइस मिल

खादी एवं विलेज इंडस्‍ट्रीज कमीशन की ओर से कई प्रोजेक्‍ट्स का प्रोफाइल तैयार किया है। इन प्रोफाइल के आधार पर आप अपने प्रोजेक्‍ट की रिपोर्ट तैयार कर लोन के लिए अप्‍लाई कर सकते हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर आप राइस मिल जिसे पैडी प्रोसेसिंग यूनिट भी कहा जाता है, शुरू करना चाहते हैं तो आपको लगभग 1000 वर्ग फुट के शेड किराया पर लेना होगा।

इसके बाद आपको पैडी क्‍लीनर विद डस्‍ट बाउलर, पैडा सेपरेटर, पैडी दियूस्‍कर, राइस पॉलिशर, ब्रान प्रोसेसिंग सिस्‍टम, एसप्रिरटर खरीदना होगा। अनुमान है कि इन सब पर लगभग 3 लाख रुपए खर्च होगा। इसके अलावा वर्किंग कैपिटल के तौर पर लगभग 50 हजार रुपए खर्च होंगे। इस तरह आप 3 लाख 50 हजार रुपए में राइस मिल शुरू कर सकते हैं।

कैसे मिलेगा 90 फीसदी सपोर्ट 

अगर आप सरकार से फाइनेंशियल सपोर्ट लेना चाहते हैं तो आप प्रधानमंत्री इम्‍पलॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम के तहत लोन के लिए अप्‍लाई कर सकते हैं। इस स्‍कीम के तहत द्वारा 90 फीसदी तक लोन दिया जाता है। लोन के लिए ऑनलाइन अप्‍लाई किया जा सकता है। इस लिंक पर क्लिक करें – https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal/jsp/pmegponline.jsp

कितना होगी इनकम

इस मॉडल प्रोजेक्‍ट के तहत आप लगभग 370 क्विंटल राइस की प्रोसेसिंग करता है। इसका कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्शन लगभग 4 लाख 45 हजार रुपए आएगा, जबकि यदि आप सारा माल आगे बेच देते हैं तो आपकी सेल्‍स लगभग 5 लाख 54 हजार रुपए होगी। यानी कि आप लगभग 1 लाख 10 हजार रुपए तक कमा सकते हैं।

साभार- मनी भास्कर न्यूज़

जाने कैसे छोटी दुकान से शुरुआत कर “हल्दीराम” ,अब कमा रहा है 3,500 करोड़

हमारे घरों के त्योहार इस हल्दीराम के बिना पूरे नहीं होते। हल्दीराम के बिना मानो ऐसा लगता हो जैसे कुछ अधूरा सा पीछे छूट गया हो।आपको बता दें कि हल्दीराम आज दुनिया के 50 से भी ज्यादा देशों में अपनी पहुंच रखता है।

वो आज के समय में हिंदुस्तान के गली-गली मोहल्ले-मोहल्ले पर राज करता है।3,500 करोड़ से भी अधिक के सालाना टर्नओवर के साथ यह भारतीय ब्रांड आज दुनिया के कई बड़े खाद्य-ब्रांड को अन्तर्रष्ट्रीय बाज़ार में टक्कर दे रही है कंपनी के 30 तरह के नमकीन प्रोडक्ट्स मौजूदा समय में बाजार में हैं। इनमें सबसे मशहूर है आलू भुजिया।

हल्दीराम की शुरुआत वास्तव में ‘हल्दीराम’ के रूप में नहीं बल्कि बीकानेर की एक दुकान ‘भुजियावाले’ के नाम से शुरू हुई थी। साल 1937 की बात है, अभी आजादी को भी 10 साल बाकी थे। बीकानेर के गंगाविषण जी अग्रवाल ने एक छोटे से नाश्ते की दुकान खोली थी।

विषण जी अग्रवाल के पिता इस दुकान के जरिए भुजिया के काम में हाथ आजमाना चाह रहे थे। जैसा चाहा वैसा ही हुआ और देखते ही देखते पूरे शहर में विषण जी अग्रवाल के नाश्ते की दुकान ‘भुजियावाले’ के नाम से मशहूर हो गई।

इसके कई सालों बाद अपना बिजनेस आगे बढ़ाने के लिए हल्दीराम के बैनर तले दिल्ली में 1982 में उन्होंने अपनी एक दुकान खोली। हल्दीराम वास्तव में विषणजी का ही दूसरा नाम था। दिल्ली में एक के बाद दो दुकानें खोली गईं। अब बिजनेस आगे बढ़ने लगा था। धीरे-धीरे उन्होंने भारत के बाहर भी अपने प्रोडक्ट भेजने शुरू कर दिए। देखते ही देखते देश ही नहीं दुनिया के कई देशों में हल्दीराम के उत्पाद बिकने लगे। इसके पीछे की सबसे खास वजह थी उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी।

2015 में अमेरिका ने हल्दीराम के प्रोडक्ट के आयात पर रोक

सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि तभी 2015 में अमेरिका ने हल्दीराम के प्रोडक्ट के आयात पर रोक लगा दी। आरोप लगाया गया था कि इनके प्रोडक्ट में कीटनाशक की मात्रा है। बावजूद इन सब के हल्दीराम के बिजनेस पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा।

हल्दीराम का ऑपरेशन चार जोन में काम करता है। साल 2013-14 के बिजनेस की बात करें तो नॉर्थ इंडिया में हल्दीराम मैन्युफेक्चरिंग का रेवेन्यु 2100 करोड़ रुपए रहा। वेस्ट और साउथ इंडिया में हल्दीराम फूड्स की सालाना सेल 1225 करोड़ के आसपास रही वहीं ईस्ट इंडिया रीजन में हल्दीराम भुजियावाला के नाम से 210 करोड़ का व्यापार होता है।

आज की तारीख में हल्दीराम में सालाना 3.8 अरब लीटर दूध, 80 करोड़ किलो मक्खन, 62 लाख किलो आलू और तकरीबन 60 लाख किलो शुद्ध देशी घी की खपत है। भारतीय कंपनी हल्दीराम के फूड प्रोडक्ट्स दुनिया के 50 से अधिक देशों में सप्लाई होते हैं। कई विदेशी सुपर मार्केट में भी इसके प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं।भारत में हल्दीराम के रेस्टोरेंट्स भी खोले गए हैं

आज परिवार अलग हो गया है लेकिन बिजनेस अपनी जगह बना हुआ है क्योंकि इसने जीता है अपने ग्राहकों का भरोसा, विश्वास और दिखाई थी हिम्मत तिनके से पहाड़ जोड़ने की।

इस सोलर पावरबैंक से 12 सालों तक मिलेगी पुरे घर को बिजली, वो भी मुफत

यह बात सुनने में कितनी अजीब लगती है कि कोई पावरबैंक कैसे इतना पावरफुल हो सकता है कि उससे घर के बिजली पंखे सब कुछ चल सकें। 300 घंटे तक लगातार बिजली सप्‍लाई देने वाला ये अनोखे पावरपैक 12 सालों तक आपको बिजली की सप्‍लाई देता रहेगा। यानि कि 12 सालों तक आपको बिजली के बिल से आजादी मिल जाएगी।

दिल्‍ली के एक इवेंट में हाल ही में एक ऐसा ही पावरबैंक देखने को मिला, जिसका रिजल्‍ट चौंकाने वाला है। भारत में पैदा हुए समाज सेवी और उद्योगति मनोज भार्गव ने दिल्‍ली के इस इवेंट में लोगों को एक डॉक्‍यूमेंटरी फिल्‍म दिखाई। बिलियन्स इन चेंज 2 नाम की इस शॉर्ट फिल्‍म में कुछ ऐसे प्रोडक्‍ट और सॉल्‍यूशन दिखाए गए हैं, जिनके इस्‍तेमाल से आम लोगों की रोजमर्रा की तमाम जरूरतें आसानी से पूरी हो सकती हैं। इसी इवेंट के दौरान पोर्टेबल सोलर डिवाइस हंस 300 पावरपैक और हंस सोलर उपकरण के लॉंच की घोषणा की गई।

 

मनोज भार्गव की कंपनी द्वारा बनाए गए ये प्रोडक्‍ट सच में एक सोलर पावर स्‍टेशन हैं। जो सोलर ऊर्जा से भारी मात्रा में बिजली बनाकर उसे लंबे समय के लिए स्‍टोर कर सकते हैं। जिससे तमाम लोगों को या कहें कि किस के घर में बिजली की सभी जरूरतों को बहुत कम खर्चे में काफी समय तक पूरा किया जा सकता है।

हंस 300 पावरपैक की अद्भुत क्षमता

यह छोटा सा सोलर पावर बैंक इतनी ज्‍यादा बिजली बनाता और स्‍टोर करता है, जिससे घर की लाइटें, पंखे, टीवी वगैरह कई घरेलू उपकरण मजे से चलाए जा सकते हैं। आपको बता दें कि यह शक्‍तिशाली पावरपैक किसी आम सोलर बैटरी सिस्‍टम से बहुत ज्‍यादा पावरफुल है।

 

यह उपकरण 150 घंटे और 300 घंटे के पावर बैकअप वाले दो मॉडल्‍स में पेश किया गया है। जिनकी कीमत क्रमश: 10 हजार और 14 हजार है। यही नहीं इस उपकरण पर पूरे 12 साल की वारंटी है। कहने का मतलब यह है कि एक बार घर पर लगाने के बाद आपको 2 सालों तक बिजली के बिल से आजादी मिल सकती है।

अगले साल मई से खरीद सकेंगे लोग

बिलियन्स इन चेंज 2 कंपनी की अपने दो पावरबैंक ‘हंस पावरपैक और हंस सोलर ब्रिफकेस’ को अगले साल मई में मार्केट लॉन्‍च की योजना है। मनोज भार्गव बताते हैं कि इस हाईटेक 21वीं सदी में भी दुनिया भर के लाखों करोंड़ो लोग गावों में बिना बिजली के ही रहने को मजबूर हैं। उनके ये सोलर उपकरण शहरों से ज्‍यादा गांवों के लिए वरदान हैं

और जानकारी के लिए वीडियो भी देखें

4 लाख में शुरू हो जाएगी मफलर बनाने की यूनिट, विंटर सीजन में करें कमाई

विंटर सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे समय में, यदि आप बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं तो आप मफलर बनाने की यूनिट शुरू कर सकते हैं। अगर आपका बजट अधिक नहीं है तो आप मफलर बनाने का काम शुरू कर सकते हैं।

पिछले कुछ सालों में मफलर की डिमांड बढ़ी है। लड़कों के साथ-साथ लड़कियों में भी मफलर पहनने का फैशन बढ़ा है, जो आपके बिजनेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, इसलिए आप अभी से हौजरी यूनिट लगाने की तैयारी कर सकते हैं। ताकि सीजन शुरू होते ही आपकी सेल्‍स बढ़ जाए और आपको फायदा मिलने लगे।

आज हम आपको हौजरी यूनिट के बारे में विस्‍तार से बताएंगे कि आप किस तरह यह यूनिट लगा सकते हैं और आपको कितने पैसे का इंतजाम करना होगा।

कितने में शुरू होगी यूनिट

अगर आप यह यूनिट लगाना चाहते हैं तो आपको लगभग 90 हजार रुपए की मशीनें खरीदनी होगी, जिसमें नीटिंग मशीन, ओवर लॉक मशीन, सेविंग मशीन, कटिंग टेबल, प्रेसिंग टेबल, इलेक्ट्रिक प्रेस आदि शामिल हैं।

इसके अलावा आपको किराये का शेड और एक महीने की वर्किंग कैपिटल के लगभग 3 लाख 10 हजार रुपए का खर्च आएगा। यानी कि आप 4 लाख रुपए से यह यूनिट शुरू कर सकते हैं। मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई द्वारा यह प्रोजेक्‍ट प्रोफाइल तैयार किया गया है और आपका एनुअल प्रोडक्‍शन 3600 दर्जन मफलर हो सकते हैं।

कितनी होगी इनकम

मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई द्वारा तैयार की गई प्रोजेक्‍ट प्रोफाइल के मुताबिक, यदि आप यह यूनिट शुरू करते हैं और आप साल भर में 3600 दर्जन मफलर तैयार करते हैं तो आप लगभग 420 रुपए प्रति दर्जन मफलर सेल कर सकते हैं,

जिससे आपको लगभग 15 लाख 12 हजार रुपए की कमाई होगी, जबकि आपका साल भर का खर्च 12 लाख रुपए आएगा। यानी कि विंटर सीजन आपको लगभग 3 लाख 12 हजार रुपए का नेट प्रॉफिट हो सकता है।

90 फीसदी तक ले सकते हैं लोन

अगर आपके पास पैसे का इंतजाम नहीं है या आप अपने पैसे का इस्‍तेमाल आगे वर्किंग कैपिटल के रूप में करना चाहते हैं। तो आप 4 लाख रुपए का प्रोजेक्‍ट तैयार कर प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जनेरशन प्रोग्राम के तहत लोन के लिए अप्‍लाई कर सकते हैं।

इस प्रोग्राम के तहत आपको 90 फीसदी तक लोन मिल सकता है। इसके अलावा आप मोदी सरकार की चर्चित स्‍कीम मुद्रा के तहत भी लोन ले सकते हैं।

अब केवल 3000 रु. में जिन्दगी भर बनाये रसोई गैस !

गोबर गैस से कई समस्याओं का निदान किया जा सकता है. लेकिन दुख की बात है कि इस पर सरकार और आम जनता ध्यान नहीं दे रही है. गोबर गैस को ऊर्जा के विकल्प के रूप में देखा जा सकता है. अभी हाल ही में कर्नाटक के राजू मुदिगिरी ने गोबर गैस की मदद से कुकिंग गैस की समस्या को दूर करने की कोशिश की है. महज 3000 रु. ख़र्च कर के रसोई घर में 4-5 घंटे की गैस सप्लाई मिल सकती है. आइए आपको गोबर गैस से जुड़ी बातों को समझाते हैं.
कम लागत में बेहतरीन खोज

पेशे से पशु चिकित्सक राजू मुदिगिरी को बचपन से कुछ अलग करने की ललक थी. इसी ललक में उन्होंने एक अनोखा गोबर गैस प्लांट डिजाइन कर दिया. हालांकि इसकी लागत महज 3000 रु. ही है. इसकी कई और ख़ासियत है.

  • इसे प्लास्टिक की शीट से बनाया गया है
  • इसकी लंबाई 11 फीट और चौड़ाई 250 मि.मी है
  • इसमें दो पाइप्स का इस्तेमाल किया गया है

कैसे करता है काम?

गोबर-पानी के मिश्रण को पाइप के अंदर डाला जाता है. एक घंटे के बाद मीथैन गैस का उत्पादन शुरु हो जाता है, जो 4 घंटों तक चालू रहता है. इस प्रक्रिया में बनने वाली मीथैन गैस का इस्तेमाल कर के घर का खाना पकाया जा सकता है.

श्री कृष्णराजू के मुताबिक, बायो गैस के किसी अन्य प्लांट के निर्माण में केवल 20,000 रु. की आवश्यकता होती है, जिसमें वार्षिक मेंटिनेंस लागत भी शामित होती है, पर यह काफी सस्ती है और इसक संचालन काफी आसान। एक बार संस्थपित करने के बाद इसे 5-6 वर्षों तक चालू रखा जा सकता है।

श्री कृष्णराजू कहते हैं कि उनक मुख्य उद्देश्य वन की रक्षा करना है। यदि घर आरसीसी निर्मित हो तो इस यूनिट को घर के छ्त पर रखा जा सकता है। उन्होंने इसे डाराडहली के डी एन वीरेंद्र गौड़ा की छत पर स्थापित किया है। उन्हें अपने गौशाले के गोबर से प्रतिदिन 5 घंटे का बायोगैस ईधन प्राप्त हो जाता है।

गैस का इस्तेमाल करने के बाद गाद का उपयोग खाद के रूप में कर लिया जाता है। इस बारे में विशेष जानकारी के लिए श्री कृष्णराजू से इस नम्बर पर संपर्क किया जा सकता है-

मोबाइल: 94480-73711.

स्रोत:द टाइम्स ऑफ इंडिया

ऐसे शुरू करे बाइक टेक्सी का बिज़नेस

एक नया बिज़नेस शुरू करने के लिए सबसे जरूरी चीज होती है पैसा कई बार हम सिर्फ पैसे के कारण कोई बिज़नेस शुरू नहीं कर पाते लेकिन अब एक ऐसा बिज़नेस आ गया है जिस से आप अपनी बाइक से ही बिज़नेस शुरू कर सकते है

दुनि‍या की सबसे बड़ी ऐप बेस्‍ड कैब सर्विस देने वाली कंपनी उबर की सर्विस भारत में लोकप्रिय है और इसके प्लेटफॉर्म पर हजारों लोग बिजनेस पार्टनर के रूप में जुड़कर अच्‍छी अर्निंग कर रहे हैं। आमतौर पर उबर के साथ बिजनेस से वही लोग जुड़ पाते हैं जिनके पास अपनी कार होती है लेकिन अब ऐस नहीं है। अगर आपके पास बाइक है तब भी उबर के साथ ‘बाइक टैक्‍सी‘ बिजनेस कर सकते हैं।

जी हां, उबर का यह बिजनेस राजस्‍थान, गुजरात, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, पंजाब,चंडीगढ़ और हरियाणा जैसे राज्‍यों में बेहद सफल हो रहा है। दिलचस्‍प बात यह है कि इस बिजनेस के लिए सिर्फ बाइक की जरूरत है। अगर आपके पास बाइक नहीं भी है तब भी सरकार की मदद से उबर के साथ बिजनेस कर सकते हैं

करना होगा ये काम

इस स्‍कीम का फायदा उठाने के लिए सबसे जरूरी है कि आपके पास बाइक हो। इसके बाद आपको ट्रांसपोर्ट विभाग को आवेदन करना होगा। विभाग प्रशिक्षण देने के बाद बैंक से लोन लेने में मदद करेगा। इसके अलावा परमिट लाइसेंस लेना होगा।

यही नहीं, बाइक के साथ चालक सवारी के लिए भी हेल्मेट का प्रबंध होना चाहिए। फर्स्ट एड किट होनी चाहिए। साथ में बाइक पांच साल से ज्यादा पुरानी ना हो। वहीं अगर आपको नई बाइक लेकर इस स्‍कीम से जुड़ना है तो सरकार लोन देगी। इस लोन को चुकाने के लिए 5 साल का समय भी मिलेगा।

क्‍या होता है किराया

बाइक टैक्‍सी , ओला या उबर की तरह ही किराया वसूलती है। गुरूग्राम में बाइक टैक्‍सी के सवारी को पहले एक किलोमीटर के 10 रुपए और उसके बाद हर किलोमीटर के 7 रुपए प्रति किलोमीटर के रेट से भुगतना करना होगा। जैसे ही सवारी बाइक टैक्‍सी पर राइड शुरू करती है, उस समय ही जीपीएस बेस्‍ड ऐप भी काम करना शुरू कर देता है और किलोमीटर की गणना ऐप के माध्‍यम से की जाती है।

कैसे होगी कमाई

लाइसेंस मिलने के बाद आप कंपनी के साथ मिलकर काम शुरू कर सकते हैं। सवारी से लिए गए पैसे का पूरा ब्‍यौरा कंपनी के पास रहता है, लेकिन आपको केवल एक फिक्‍स रकम ही कंपनी को देनी होती है, जो 10 फीसदी तक हो सकती है। गुरुग्राम के एक बाइक टैक्‍सी ड्राइवर के मुताबिक वह सारे खर्च जैसे कंपनी का कमीशन और पेट्रोल खर्च निकाल कर हर महीने 15 से 20 हजार रुपए कमा लेता है।

OLA कैब के साथ ऐसे शुरू करें बिज़नेस,90 हज़ार महीना कमाए

OLA कैब का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक ही ख्याल आता है वह टैक्सी का, जी हाँ! ओला कैब टैक्सी बुकिंग की दुनिया में एक चर्चित नाम है. ओला कैब की सबसे बढ़ी खासियत यह है कि यह मोबाईल एप्स की मदद से आसानी से बुक हो जाती है, और मिनटों में टैक्सी ग्राहक के पास पहुच जाती है.

ओला कैब को बुक करने की जितनी सरल प्रक्रिया है उतनी ही सरल उस से जुडने की है, यानि की ओला कैब के साथ व्यवसाय करने की है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं की आप ओला से किस तरह जुड़कर अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं.

ओला से जुड़ने के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट (Important Document for OLA Business)

सबसें पहलें तो आपको बता दे कि आज ओला भारत में 102 कंपनियों में मौजूद है. आपका कैब कंपनियों के साथ जुड़कर अपनी कार के साथ वास्तविक व्यापार करना न केवल एक अच्छा विचार है बल्कि बहुत ही लाभदायक और फायदे का व्यवसाय है.

बता दें कि बिजनेस शुरू करने में आप चाहें तो नई कार लगा सकते हैं या आप अपनी वर्तमान इस्तेमाल की वाणिज्यिक कार को भी लगा सकते हैं, बशर्ते कि वह अच्छी स्थिति में हो. आप या तो एक वाणिज्यिक लाइसेंस वाले चालक रख सकते हैं या फिर आप खुद भी कैब चला सकते हैं, बस अब आपको बिजनेस शुरू करने से पहले इन दस्तावेज को पूर्णरूप से तैयार रखना है.-

पहचान पत्र, पुलिस सत्यापन, पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक स्टेटमेंट, ड्राइविंग लाइसेंस क्योंकि कंपनी से जुड़ने के लिए यह दस्तावेज़ महत्वपूर्ण होते है.

अब आपके पास सारे दस्तावेज़ है तो आप आसानी से जुड़ सकते है. इसके लिए बस आपको कैब कंपनियों के साथ पंजीकरण के लिए आपको उनसे संपर्क करना होगा चाहे तो आप अपने शहर के ओला कैब आफिस जा सकते है या फिर हेड ऑफिस संपर्क कर सकते है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि वर्तामान समय में ओला ने उन सभी शहरों में पहले से ही अपने कार्यालय खोल दिए हैं जिनमे इनका कैब का कारोबार वर्तमान में चल रहा है, लेकिन याद रहे इस व्यवसाय में आगे बढ़ने से पहले आपका एक चालू खाता होना जरुरी है.

वही आपको आयकर और सेवा कर संख्या पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा क्योंकि भारत में इन कैब कंपनियों के साथ काम करने के लिए आवश्यक है. पंजीकरण होने के एक सप्ताह बाद कंपनी आपको एक एप्लिकेशन के साथ एक नया स्मार्टफ़ोन देगी साथ ही आपको निरीक्षण के लिए बुलाएगी.

ओला से कितना कमा सकते हैं (How much earn by OLA)

अब सवाल यह आता है कि इस बिजनेस में आपको इनकम कितनी होगी, तो आइए जानते है कितनी इनकम इस बिजनेस आपकी होगी और कैसे होगी. कंपनी का तो दावा है कि आप हर महीने कैब सर्विस से 45 से 90 हजार रुपए प्रतिमाह तक की कमाई कर सकते हैं.

बता दें कि ओला कंपनी बिल की कुल राशि का केवल 10% कमीशन लेती है, जिसकी गणना ओला ऐप द्वारा स्वयं की जाएगी. खास बात तो यह है कि कंपनी अपने बिजनेस पाट्नर को बोनस भी प्रदान करती है.

कंपनी के अनुसार सबसे व्यस्त समय – (रात 12 बजे से दो बजे और दोपहर दो बजे से रात 12 बजे तक अति व्यस्त समय है) इस समय में की गई यात्रा पर कंपनी को आपको भरपूर बोनस देती है.

ओला से कितना बोनस मिलता है (OLA Bonus)

  • जब आपको न्यूनतम 5 अति व्यस्त बुकिंग के साथ 5 बुकिंग मिलती है, तो आपको 1700 रूपए एमबीजी (मिनिमम बिजनेस गारंटी) मिलेगा.
  • जब आपको न्यूनतम 7 अति व्यस्त बुकिंग के साथ 7 बुकिंग मिलती है, तो आपको 2400 रूपए एमबीजी मिलेगा. जब आपको न्यूनतम 0 अति व्यस्त बुकिंग के साथ 10 बुकिंग मिलती है, तो आपको 2900 रूपए एमबीजी मिलेगा.
  • जब आपको न्यूनतम 0 अति व्यस्त बुकिंग के साथ 13 बुकिंग मिलती है, तो आपको 3900 रूपए एमबीजी मिलेगा. जब आपको न्यूनतम 0 अति व्यस्त बुकिंग के साथ 16 बुकिंग मिलती है, तो आपको 4900 रूपए एमबीजी मिलेगा.
  • जब आपको न्यूनतम 0 अति व्यस्त बुकिंग के साथ 18 बुकिंग मिलती है, तो आपको 6400 रूपए एमबीजी मिलेगा.
  • जब आप किसी ग्राहक को हवाईअड्डे तक छोड़ते हैं तो आपको अपने खाते में लगभग 500 रूपए प्रदान किया जाएगा.
  • नोट- यह लेख सिर्फ आपकी जानकारी के लिए लिखा गया है. अधिक जानकरी के लिए आप https://www.olacabs.com/ पर विजिट कर जानकारी प्राप्त कर सकतें है.

ऐसे शुरू करें सजावटी मछलियों का बिज़नेस

हम से कई सारे लोग है जो अपना बिजनेस करना चाहते है लेकिन कई बार हमें समझ नहीं आता कि किस चीज का बिजनेस किया जाए। इसलिए आज हम आपको बता रहे है कुछ एेसे बिजनेस के बारे में जिनमें कम लागत से भी आप हर महीने लाखों  रुपए कमा सकते हैं । एक्वेरियम में अठखेलियां करती रंग-बिरंगी मछलियां सभी को अच्छी लगती हैं।

कुछ खास रंग जैसे गोल्ड और प्रजाति जैसे मोली आदि को सौभाग्य के लिए भी रखा जाता है। इसलिए सजावटी मछलियों के कारोबार  करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है । गोल्ड फिश और कई सजावटी मछलियों की कीमत 2500 रुपए से 28 हजार रुपए तक होती है। ऐसे में आप एक बार में महज 1 से 1.5 लाख रुपए खर्च कर हर महीने 2 लाख रुपए तक कमा सकते हैं।

एेसे शुरु करें गोल्ड फिश का बिजनेस 

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि गोल्ड एरवॉन जैसी सजावटी मछलियों की तो लोग बोली लगाते हैं। बड़े-बड़े शहरों में बोली में इसकी कीमत 50 हजार रुपए से भी उपर चली जाती है। यही नहीं, एक बार आप अच्छी मछलियों का उत्पादन करने लगे तो आपके पास विदेशों से भी आर्डर आने लगेंगे। इसके लिए आपको वेबसाइट या किसी अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म पर अपना प्रचार करना होगा। इन दिनों सजावटी मछलियों का ऑनलाइन बाजार भी बहुत बड़ा है।

इतनी लगेगी शुरुआती लागत 

सजावटी मछलियों की फार्मिंग और इसके बिजनेस के लिए शुरआत में आपको एक से डेढ़ लाख रुपए खर्च करने होते हैं। इसमें लगभग 50 हजार रुपए 100 वर्गफुट के एक्वेरियम पर खर्च करने होंगे और लगभग इतने ही अन्य सामान के लिए। इसके अलावा कुछ मुख्य प्रजातियों के मछली सीड 100 रुपए से 500 प्रति पीस होता है। सीड आप अपनी जरूरत के हिसाब से खरीद सकते हैं। इसके लिए फीमेल और मेल का अनुपात 4:1 रखना होता है।

कितने प्रकार की होती हैं सजावटी मछलियां

दुनियाभर में लगभग 600 प्रकार की सजावटी मछलियां पाई जाती हैं। इनमें से 200 से अधिक भारत में भी मिलती हैं। लेकिन, इसमें से कुछ चुनिंदा प्रजातियां ही हैं जिनके दाम हजारों में होते हैं। इनमें गोल्डन एरवॉन, चाईनीज फ्लॉवर हॉर्न, इंडियन फ्लॉवर हॉर्न, डिस्कन और पेस्ट फिश आदि मुख्य हैं।

इनके लिए सीड चेन्नई, कोलकाता, चीन और हांगकांग से मंगाए जाते हैं। जो भारत में भी विभिन्न डीलरों के माध्यम से उपलब्ध हो जाते हैं। इन मछलियों के दाम ही 2500 रुपए से 28000 रुपए तक होती है। इनमें से महंगी गोल्डन एरवॉन होती है, जो 28 हजार रुपए से भी महंगी होती है।

4 से 6 महीने के बाद शुरू करें कमाई 

राजस्थान की राजधानी जयपुर में ग्लोबल राजस्थान एग्रोटेक मीट में आए मतस्य पालन विशेषज्ञों के अनुसार एक्वेरियम में सीड डालने के बाद 4 से 6 महीने बाद इन्हें बेचा जा सकता है। लेकिन, ध्यान रखना होता है कि एक एक्वेरियम में फार्मिंग के लिए एक ही प्रकार की मछलियां रखी जाएं। मसलन अगर आप गोल्डन एरवॉन प्रजाति की मछलियों की फॉर्मिंग करना चाहते हैं तो इसमें क्षमता के अनुसार हर महीने सीड डालें। ताकि आप हर 5 महीने के बाद हर महीने बेच सकें।

हर महीने 10 मछलियां बेचकर भी कमाएं लाखों

आप अगर अपने फार्मिंग एक्वेरियम में हर महीने 20 गोल्डन फिश भी तैयार करते हैं और इनमें से 10 भी बेच देते हैं तो आप लाखों रुपए कमा सकते हैं। यदि कम कम से कम कीमत भी लगाई जाए तो गोल्डन फिश 15 हजार रुपए में बिक जाती है। ऐसे में आप डेढ़ लाख रुपए और इससे अधिक कमा सकते हैं। लेकिन, इसके लिए जरूरी है कि आप पहले किसी फिश फार्मिंग एक्सपर्ट से सलाह और प्रशिक्षण लें। ताकि, आपकी लागत बेकार न जाएं।

अब मिलेगी पूरे घर को बिजली, सिर्फ एक फोन की कीमत में

भारत के कई भाग अभी भी अंधेरे में रहते हैं. भारतीय आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए बिजली अभी भी सपना बनी हुई है. बिजली के इस संकट को दूर करने के लिए दो भाईयों ने एक कमाल का तरीका इजादा किया है. जिससे बेहद कम कीमत में आप पूरे घर के लिए खुद बिजली पैदा कर सकते हैं.

दो भाई अरुण और अनूप जॉर्ज ने बिजली संकट को दूर करने के लिए छोटे विंड टरबाइन (पवन चक्की) को तैयार किया है. जिसकी कीमत 750 अमरीकी डॉलर (करीब 50,000 रुपये) है जोकि एक आईफोन की कीमत कीमत से भी सस्ता कहा जा सकता है. अरुण का कहना है कि इससे जरा भी पारिस्थितिकी संतुलन पर असर नहीं पड़ेगा.

एवांट ग्रेड इनोवेशन के मुताबिक केरल के रहने वाले भाईयों ने बेहद कम लागत वाली ‌विंड टरबाइन तैयार की है जो पर्याप्त बिजली उत्पन्न कर सकती है. इससे जीवन भर के लिए पूरे घर में बिजली मिल सकती है. एक छत के पंखा के आकार की यह विंड टरबाइन प्रति दिन 3 से 5 किलोवाट/घंटा बिजली पैदा कर सकती है.

अरुण का कहना है कि जब छोटी विंड टरबाइन 1 किलोवाट ऊर्जा पैदा करती है जो इसका खर्च करीब 3-7 लाख रुपये (4,000-10,000 यूएस डॉलर) होता है. वह इस विंड टरबाइन को बाजार में लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं. 750 डॉलर (करीब 50 हजार रुपये) की कीमत कई भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक किफायती विकल्प हो सकता है.

बहरहाल अरुण का छोटा विंड टरबाइन प्रोजक्ट अभी शुरुआती दौर में है. अगर यह हकीकत का रूप लेकर बाजार में आता है तो निश्चित ही बिजली की एक बड़ी समस्या को दूर कर सकता है.
ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल के अनुसार भारत वैश्विक पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के मामले में चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद चौथे स्थान पर है.

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जाने देश के सबसे अमीर आदमी बनने की प्रेरणात्मक कहानी

28 दिसंबर 1933 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ जिले में जन्मे धीरूभाई ने अपनी मेहनत और लगन से साबित किया कि साधारण से साधारण व्यक्ति भी बड़े से बड़ा सपना देख सकता है और उन्हें साकार कर सकता है। एक मामूली व्यक्ति से देश की प्रमुख औद्योगिक कंपनी रिलायंस के सिरमौर बनने का उनका सफर काफी संघर्षशील है।

वो कहते है ना की…आसान नहीं ज़िंदगी को मंजिल तक ले जाना, क्योंकि…कभी राहे साथ नही देती…तो….कभी जिंदगी साथ नही देती…। वैसे तो धीरूभाई अंबानी के बारे में कुछ भी बताना सूरज को दीया दिखाने जैसा होगा, लेकिन फिर भी आइए बताते है, अपनी काबिलियत के बूते पर बुलंदियों पर अपना नाम लिखने वाले इस दिग्गज के बारे में कुछ खास बातें…।

छोटी उम्र में भजिया-पकोड़े बेचा:-

धीरूभाई के पिता एक स्कूल टीचर थे और वे पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर के थे। बचपन से ही उनका ध्यान पढ़ाई के बजाय पैसा कमाने में था। वे स्कूल से बंक मारकर गलियों में घूमते और लोगों को पैसा कमाते हुए देखते। घर की आर्थिक तंगी के कारण धीरूभाई को हाईस्कूल के बाद ही पढ़ाई छोड़ना पड़ गई। धीरूभाई ने बालपन में ही घर की आर्थिक मदद करनी शुरू कर दी थी। ऐसा कहा जाता है कि महज 16 साल की उम्र में उन्‍होंने बिजनेस की दुनिया में बहुत छोटी शुरुआत की थी उन दिनों वे गिरनार की पहाडियों पर तीर्थयात्रियों को पकौड़े बेचा करते थे।

पहली पगार मात्र 300 रुपये

 

सन 1948 में 16 साल की उम्र में धीरूभाई अम्बानी अपने बड़े भाई रमणिकलाल की मदद से यमन के एडेन शहर पहुंच गए. ‘ए. बेस्सी और कंपनी’ में उन्होंने पूरी ईमानदारी और कड़ी मेहनत से अपना कार्य करते थे. धीरूभाई में कुछ बड़ा करने की बहुत लगन थी. उस समय उन्हें वेतन के रूप में 300 रूपये मिलते थे. करीब दो वर्ष के बाद ‘ए. बेस्सी और कंपनी’ जब ‘शेल’ नामक कंपनी के उत्पादों के वितरक बन गए तब धीरुभाई को एडेन बंदरगाह पर कम्पनी के एक फिलिंग स्टेशन में प्रबंधक की नौकरी मिली। वहीँ से धीरुभाई के मन में व्यवसाय की छोटी बड़ी चीजो और जानकारियो का ज्ञान हुआ. धीरूभाई अम्बानी ने वही से लेखा जोखा, वित्तीय विभाग का काम और शिपिंग पेपर्स तैयार करना सीखा.

500 रुपए लेकर पहुंचे मुंबई

धीरूभाई के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। इसलिए 1954 में वे वतन वापस आ गए। सन् 1955 में जेब में 500 रुपए रखकर किस्मत आजमाने मुंबई पहुंच गए। और यहीं से शुरू हुई उनकी व्यावसायिक यात्रा। यमन से लौटने के बाद धीरूभाई ने चचेरे भाई चंपकलाल दिमानी की मदद से रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन कंपनी बनाई। इस कंपनी के जरिए धीरूभाई ने शुरुआत में पश्चिमी देशों में अदरक, हल्दी और अन्य मसालों का निर्यात किया। यहां से धीरूभाई अंबानी ने ऐसे कदम बढ़ाए कि फिर कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। उन्होंने एक के बाद एक कंपनी खड़ी की। धीरूभाई देखते ही देखते करोड़पति बन गए। उनका नाम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हुआ।

50 हजार रुपए की लागत से शुरू किया था बिजनेस

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 1958 में 50 हजार रुपए की लागत से धीरूभाई ने पॉलिएस्टर धागे के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट का धंधा शुरू किया था। बाद में 15 हजार रुपए का निवेश कर रिलांयस कमर्शियल कॉरपोरेशन की नींव रखी। उन दिनों एशिया में पॉलिएस्टर की काफी डिमांड थी। इसके चलते जल्द ही उनका मुनाफा बढ़ गया। बावजूद इसके अपनी पत्नी कोकिलाबेन और बच्चों के साथ एक दशक तक वे केवल एक बेडरूम के फ्लैट में रहे।

सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले सीईओ

धीरूभाई अंबानी भारत में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले सीईओ थे। धीरूभाई वेतन के तौर पर अपनी कंपनी से एक साल में 8.85 करोड़ रुपए लेते थे, जो उस समय देश की सबसे अमीर कंपनी विप्रो के अजीम प्रेमजी को मिलने वाले वेतन 4.28 करोड़ रुपए से लगभग दोगुना था। 2000-01 में धीरूभाई अंबानी को 8.85 करोड़ रुपए का सालाना वेतन दिया गया, जो 1999-2000 के उनके वेतन की तुलना में 73.87 प्रतिशत अधिक था।

धीरुभाई अम्बानी की कुछ प्रेरक उपलब्धियां:-

* वर्तमान में रिलायंस देश ही नही बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है.
* रिलायंस भारत की पहली और एकमात्र ऐसी कंपनी थी जिसे फोर्ब्स ने वर्ल्ड की सबसे सफल 500 कंपनियों की सूची में शामिल किया था.
* धीरूभाई अम्बानी कभी न हार मानने वाले स्वभाव के दम बल पर कई सम्मानीय पुरस्कार प्राप्त किये, इनमे से मैन ऑफ़ द 20 सेंचुरी, डीन मैडल और कॉर्पोरेट एक्सीलेंस का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार सबसे प्रमुख हैं.
* धीरूभाई को ए.बी.एल.एफ. (एशियन बिज़नस लीडरशिप फोरम) द्वारा भी ए बी एल एफ ग्लोबल एशियन अवार्ड प्रदान किया गया था.

धीरूभाई अम्बानी 6 जुलाई 2002 को दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन विश्व में अपनी जिंदगी की कहानी छोड़ गए जो करोड़ों लोगों को प्रेरित करती रहेगी. कहते है की ‘कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती है’ धीरू भाई अम्बानी के ऊपर यह लाइन बिलकुल फिट बैठती है. यदि एक छोटे से गाँव का लड़का अपने आत्मविश्वास और प्रभावशाली फैसले के दम पर करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकता है तो इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं.