ऐसे शुरू करें सजावटी मछलियों का बिज़नेस

हम से कई सारे लोग है जो अपना बिजनेस करना चाहते है लेकिन कई बार हमें समझ नहीं आता कि किस चीज का बिजनेस किया जाए। इसलिए आज हम आपको बता रहे है कुछ एेसे बिजनेस के बारे में जिनमें कम लागत से भी आप हर महीने लाखों  रुपए कमा सकते हैं । एक्वेरियम में अठखेलियां करती रंग-बिरंगी मछलियां सभी को अच्छी लगती हैं।

कुछ खास रंग जैसे गोल्ड और प्रजाति जैसे मोली आदि को सौभाग्य के लिए भी रखा जाता है। इसलिए सजावटी मछलियों के कारोबार  करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है । गोल्ड फिश और कई सजावटी मछलियों की कीमत 2500 रुपए से 28 हजार रुपए तक होती है। ऐसे में आप एक बार में महज 1 से 1.5 लाख रुपए खर्च कर हर महीने 2 लाख रुपए तक कमा सकते हैं।

एेसे शुरु करें गोल्ड फिश का बिजनेस 

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि गोल्ड एरवॉन जैसी सजावटी मछलियों की तो लोग बोली लगाते हैं। बड़े-बड़े शहरों में बोली में इसकी कीमत 50 हजार रुपए से भी उपर चली जाती है। यही नहीं, एक बार आप अच्छी मछलियों का उत्पादन करने लगे तो आपके पास विदेशों से भी आर्डर आने लगेंगे। इसके लिए आपको वेबसाइट या किसी अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म पर अपना प्रचार करना होगा। इन दिनों सजावटी मछलियों का ऑनलाइन बाजार भी बहुत बड़ा है।

इतनी लगेगी शुरुआती लागत 

सजावटी मछलियों की फार्मिंग और इसके बिजनेस के लिए शुरआत में आपको एक से डेढ़ लाख रुपए खर्च करने होते हैं। इसमें लगभग 50 हजार रुपए 100 वर्गफुट के एक्वेरियम पर खर्च करने होंगे और लगभग इतने ही अन्य सामान के लिए। इसके अलावा कुछ मुख्य प्रजातियों के मछली सीड 100 रुपए से 500 प्रति पीस होता है। सीड आप अपनी जरूरत के हिसाब से खरीद सकते हैं। इसके लिए फीमेल और मेल का अनुपात 4:1 रखना होता है।

कितने प्रकार की होती हैं सजावटी मछलियां

दुनियाभर में लगभग 600 प्रकार की सजावटी मछलियां पाई जाती हैं। इनमें से 200 से अधिक भारत में भी मिलती हैं। लेकिन, इसमें से कुछ चुनिंदा प्रजातियां ही हैं जिनके दाम हजारों में होते हैं। इनमें गोल्डन एरवॉन, चाईनीज फ्लॉवर हॉर्न, इंडियन फ्लॉवर हॉर्न, डिस्कन और पेस्ट फिश आदि मुख्य हैं।

इनके लिए सीड चेन्नई, कोलकाता, चीन और हांगकांग से मंगाए जाते हैं। जो भारत में भी विभिन्न डीलरों के माध्यम से उपलब्ध हो जाते हैं। इन मछलियों के दाम ही 2500 रुपए से 28000 रुपए तक होती है। इनमें से महंगी गोल्डन एरवॉन होती है, जो 28 हजार रुपए से भी महंगी होती है।

4 से 6 महीने के बाद शुरू करें कमाई 

राजस्थान की राजधानी जयपुर में ग्लोबल राजस्थान एग्रोटेक मीट में आए मतस्य पालन विशेषज्ञों के अनुसार एक्वेरियम में सीड डालने के बाद 4 से 6 महीने बाद इन्हें बेचा जा सकता है। लेकिन, ध्यान रखना होता है कि एक एक्वेरियम में फार्मिंग के लिए एक ही प्रकार की मछलियां रखी जाएं। मसलन अगर आप गोल्डन एरवॉन प्रजाति की मछलियों की फॉर्मिंग करना चाहते हैं तो इसमें क्षमता के अनुसार हर महीने सीड डालें। ताकि आप हर 5 महीने के बाद हर महीने बेच सकें।

हर महीने 10 मछलियां बेचकर भी कमाएं लाखों

आप अगर अपने फार्मिंग एक्वेरियम में हर महीने 20 गोल्डन फिश भी तैयार करते हैं और इनमें से 10 भी बेच देते हैं तो आप लाखों रुपए कमा सकते हैं। यदि कम कम से कम कीमत भी लगाई जाए तो गोल्डन फिश 15 हजार रुपए में बिक जाती है। ऐसे में आप डेढ़ लाख रुपए और इससे अधिक कमा सकते हैं। लेकिन, इसके लिए जरूरी है कि आप पहले किसी फिश फार्मिंग एक्सपर्ट से सलाह और प्रशिक्षण लें। ताकि, आपकी लागत बेकार न जाएं।

अब मिलेगी पूरे घर को बिजली, सिर्फ एक फोन की कीमत में

भारत के कई भाग अभी भी अंधेरे में रहते हैं. भारतीय आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए बिजली अभी भी सपना बनी हुई है. बिजली के इस संकट को दूर करने के लिए दो भाईयों ने एक कमाल का तरीका इजादा किया है. जिससे बेहद कम कीमत में आप पूरे घर के लिए खुद बिजली पैदा कर सकते हैं.

दो भाई अरुण और अनूप जॉर्ज ने बिजली संकट को दूर करने के लिए छोटे विंड टरबाइन (पवन चक्की) को तैयार किया है. जिसकी कीमत 750 अमरीकी डॉलर (करीब 50,000 रुपये) है जोकि एक आईफोन की कीमत कीमत से भी सस्ता कहा जा सकता है. अरुण का कहना है कि इससे जरा भी पारिस्थितिकी संतुलन पर असर नहीं पड़ेगा.

एवांट ग्रेड इनोवेशन के मुताबिक केरल के रहने वाले भाईयों ने बेहद कम लागत वाली ‌विंड टरबाइन तैयार की है जो पर्याप्त बिजली उत्पन्न कर सकती है. इससे जीवन भर के लिए पूरे घर में बिजली मिल सकती है. एक छत के पंखा के आकार की यह विंड टरबाइन प्रति दिन 3 से 5 किलोवाट/घंटा बिजली पैदा कर सकती है.

अरुण का कहना है कि जब छोटी विंड टरबाइन 1 किलोवाट ऊर्जा पैदा करती है जो इसका खर्च करीब 3-7 लाख रुपये (4,000-10,000 यूएस डॉलर) होता है. वह इस विंड टरबाइन को बाजार में लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं. 750 डॉलर (करीब 50 हजार रुपये) की कीमत कई भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक किफायती विकल्प हो सकता है.

बहरहाल अरुण का छोटा विंड टरबाइन प्रोजक्ट अभी शुरुआती दौर में है. अगर यह हकीकत का रूप लेकर बाजार में आता है तो निश्चित ही बिजली की एक बड़ी समस्या को दूर कर सकता है.
ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल के अनुसार भारत वैश्विक पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के मामले में चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद चौथे स्थान पर है.

और ज्यादा जानकारी के लिए आप इन से संपर्क करना चाहते है तो 9995099488 पर कर सकते है आप इनकी वेबसाइट http://www.avantgardeinnovations.com/ पर visit कर सकते है

जाने देश के सबसे अमीर आदमी बनने की प्रेरणात्मक कहानी

28 दिसंबर 1933 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ जिले में जन्मे धीरूभाई ने अपनी मेहनत और लगन से साबित किया कि साधारण से साधारण व्यक्ति भी बड़े से बड़ा सपना देख सकता है और उन्हें साकार कर सकता है। एक मामूली व्यक्ति से देश की प्रमुख औद्योगिक कंपनी रिलायंस के सिरमौर बनने का उनका सफर काफी संघर्षशील है।

वो कहते है ना की…आसान नहीं ज़िंदगी को मंजिल तक ले जाना, क्योंकि…कभी राहे साथ नही देती…तो….कभी जिंदगी साथ नही देती…। वैसे तो धीरूभाई अंबानी के बारे में कुछ भी बताना सूरज को दीया दिखाने जैसा होगा, लेकिन फिर भी आइए बताते है, अपनी काबिलियत के बूते पर बुलंदियों पर अपना नाम लिखने वाले इस दिग्गज के बारे में कुछ खास बातें…।

छोटी उम्र में भजिया-पकोड़े बेचा:-

धीरूभाई के पिता एक स्कूल टीचर थे और वे पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर के थे। बचपन से ही उनका ध्यान पढ़ाई के बजाय पैसा कमाने में था। वे स्कूल से बंक मारकर गलियों में घूमते और लोगों को पैसा कमाते हुए देखते। घर की आर्थिक तंगी के कारण धीरूभाई को हाईस्कूल के बाद ही पढ़ाई छोड़ना पड़ गई। धीरूभाई ने बालपन में ही घर की आर्थिक मदद करनी शुरू कर दी थी। ऐसा कहा जाता है कि महज 16 साल की उम्र में उन्‍होंने बिजनेस की दुनिया में बहुत छोटी शुरुआत की थी उन दिनों वे गिरनार की पहाडियों पर तीर्थयात्रियों को पकौड़े बेचा करते थे।

पहली पगार मात्र 300 रुपये

 

सन 1948 में 16 साल की उम्र में धीरूभाई अम्बानी अपने बड़े भाई रमणिकलाल की मदद से यमन के एडेन शहर पहुंच गए. ‘ए. बेस्सी और कंपनी’ में उन्होंने पूरी ईमानदारी और कड़ी मेहनत से अपना कार्य करते थे. धीरूभाई में कुछ बड़ा करने की बहुत लगन थी. उस समय उन्हें वेतन के रूप में 300 रूपये मिलते थे. करीब दो वर्ष के बाद ‘ए. बेस्सी और कंपनी’ जब ‘शेल’ नामक कंपनी के उत्पादों के वितरक बन गए तब धीरुभाई को एडेन बंदरगाह पर कम्पनी के एक फिलिंग स्टेशन में प्रबंधक की नौकरी मिली। वहीँ से धीरुभाई के मन में व्यवसाय की छोटी बड़ी चीजो और जानकारियो का ज्ञान हुआ. धीरूभाई अम्बानी ने वही से लेखा जोखा, वित्तीय विभाग का काम और शिपिंग पेपर्स तैयार करना सीखा.

500 रुपए लेकर पहुंचे मुंबई

धीरूभाई के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। इसलिए 1954 में वे वतन वापस आ गए। सन् 1955 में जेब में 500 रुपए रखकर किस्मत आजमाने मुंबई पहुंच गए। और यहीं से शुरू हुई उनकी व्यावसायिक यात्रा। यमन से लौटने के बाद धीरूभाई ने चचेरे भाई चंपकलाल दिमानी की मदद से रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन कंपनी बनाई। इस कंपनी के जरिए धीरूभाई ने शुरुआत में पश्चिमी देशों में अदरक, हल्दी और अन्य मसालों का निर्यात किया। यहां से धीरूभाई अंबानी ने ऐसे कदम बढ़ाए कि फिर कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। उन्होंने एक के बाद एक कंपनी खड़ी की। धीरूभाई देखते ही देखते करोड़पति बन गए। उनका नाम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हुआ।

50 हजार रुपए की लागत से शुरू किया था बिजनेस

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 1958 में 50 हजार रुपए की लागत से धीरूभाई ने पॉलिएस्टर धागे के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट का धंधा शुरू किया था। बाद में 15 हजार रुपए का निवेश कर रिलांयस कमर्शियल कॉरपोरेशन की नींव रखी। उन दिनों एशिया में पॉलिएस्टर की काफी डिमांड थी। इसके चलते जल्द ही उनका मुनाफा बढ़ गया। बावजूद इसके अपनी पत्नी कोकिलाबेन और बच्चों के साथ एक दशक तक वे केवल एक बेडरूम के फ्लैट में रहे।

सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले सीईओ

धीरूभाई अंबानी भारत में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले सीईओ थे। धीरूभाई वेतन के तौर पर अपनी कंपनी से एक साल में 8.85 करोड़ रुपए लेते थे, जो उस समय देश की सबसे अमीर कंपनी विप्रो के अजीम प्रेमजी को मिलने वाले वेतन 4.28 करोड़ रुपए से लगभग दोगुना था। 2000-01 में धीरूभाई अंबानी को 8.85 करोड़ रुपए का सालाना वेतन दिया गया, जो 1999-2000 के उनके वेतन की तुलना में 73.87 प्रतिशत अधिक था।

धीरुभाई अम्बानी की कुछ प्रेरक उपलब्धियां:-

* वर्तमान में रिलायंस देश ही नही बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है.
* रिलायंस भारत की पहली और एकमात्र ऐसी कंपनी थी जिसे फोर्ब्स ने वर्ल्ड की सबसे सफल 500 कंपनियों की सूची में शामिल किया था.
* धीरूभाई अम्बानी कभी न हार मानने वाले स्वभाव के दम बल पर कई सम्मानीय पुरस्कार प्राप्त किये, इनमे से मैन ऑफ़ द 20 सेंचुरी, डीन मैडल और कॉर्पोरेट एक्सीलेंस का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार सबसे प्रमुख हैं.
* धीरूभाई को ए.बी.एल.एफ. (एशियन बिज़नस लीडरशिप फोरम) द्वारा भी ए बी एल एफ ग्लोबल एशियन अवार्ड प्रदान किया गया था.

धीरूभाई अम्बानी 6 जुलाई 2002 को दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन विश्व में अपनी जिंदगी की कहानी छोड़ गए जो करोड़ों लोगों को प्रेरित करती रहेगी. कहते है की ‘कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती है’ धीरू भाई अम्बानी के ऊपर यह लाइन बिलकुल फिट बैठती है. यदि एक छोटे से गाँव का लड़का अपने आत्मविश्वास और प्रभावशाली फैसले के दम पर करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकता है तो इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं.

ये है पानी से जुड़े हुए 5 बिज़नेस , हर महीने लाखों कमायें

शहरों में पानी एक बड़ा बिजनेस बनता जा रहा है। आप लोगों को साफ पानी उपलब्‍ध कराने का अच्‍छा खासा बिजनेस शुरू कर सकते हैं। इसमें कई बड़ी कंपनियों की फ्रेंचाइजी से लेकर खुद का बिजनेस शुरू करने के मौके हैं। इसके लिए ज्‍यादा इन्‍वेस्‍टमेंट की भी जरूरत नहीं है, जबकि आप महीने में अच्‍छी खासी कमाई कर सकते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं, क्‍या हैं पानी से जुड़े बिजनेस आइडिया और इसके लिए कितने इन्‍वेस्‍टमेंट की जरूरत पड़ सकती है।

ऐसे लगाएं वाटर प्‍लांट:

लगभग हर शहर-कस्‍बे में लोकल बॉडी द्वारा सप्‍लाई किया जा रहा पानी साफ नहीं होता और पानी की क्‍वालिटी ठीक नहीं होती, जिस कारण लोग प्राइवेट आरओ ट्रीटमेंट प्‍लांट से बोतलबंद पानी मंगा कर पीते हैं। लगभग हर शहर में ऐसे ट्रीटमेंट प्‍लांट की जरूरत होती है। आप भी यह प्‍लांट लगाकर अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आपको ऐसी जगह चुननी होगी, जहां पानी का टीडीएस लेवल अधिक न हो।

इसके बाद आपको प्रशासान से लाइसेंस और आईएसआई नंबर लेना होगा। कई कंपनियां कॉमर्शियल आरओ प्‍लांट बना रही हैं। जो 50 हजार रुपए से लेकर 2 लाख रुपए तक के हैं। इसके साथ ही आपको कम से कम 100 जार ( 20 लीटर कैपेसिटी) खरीदने होंगे। इन सब में 4 से 5 लाख रुपए का खर्चा आएगा, आप बैंक से लोन के लिए अप्‍लाई भी कर सकते हैं। अगर आप ऐसा प्‍लांट लगाते हैं, जहां 1000 लीटर प्रति घंटा पानी का प्रोडक्‍शन होता है तो आप कम से कम 30 से 50 हजार रुपए कमा सकते हैं।

चीलिंग प्‍लांट लगाकर शुरू करें बिजनेस:

शहरों में बोतल के अलावा 10 से 15 लीटर के जग में भी पानी की सप्‍लाई की जाती है। यह पानी चीलिंग प्‍लांट से लाया जाता है। आरओ प्‍लांट की तरह ही एक अच्‍छी ग्राउंड वाटर क्‍वालिटी वाली जगह पर चीलिंग प्‍लांट लगाए जाते हैं। चीलिंग प्‍लांट में पानी को इस स्‍तर पर ठंडा किया जाता है कि उसके बैक्‍टीरिया मर जाते हैं। फिर इस ठंडे पानी को जग ( मयूर जग या अन्‍य ब्रांड) में घरों या दुकानों में रोजाना सप्‍लाई किया जाता है। इस प्‍लांट को लगाने में 2 से 4 लाख रुपए तक का खर्च आता है और एक बार काम चल निकले तो 30 से 40 हजार रुपए कमाए जा सकते हैं।

आइस क्‍यूब बनाने का बिजनेस कर सकते हैं:

पानी से बर्फ बनाने का बिजनेस गर्मियों में खूब चलता है, लेकिन यह बिजनेस नॉर्मल डेज में भी किया जा सकता है। इसके अलावा आइस-क्‍यूब बनाने का बिजनेस भी खूब बढ़ता जा रहा है। इसके लिए आपको सबसे पहले साफ और अच्‍छी क्‍वालिटी के पानी का इंतजाम करना होगा। इसके बाद आपको डीप-फ्रिजर लगाने होंगे।

बाजार में अलग अलग रेंज के डीप-फ्रेजर उपलब्‍ध हैं। जिनकी कीमत 50 हजार रुपए से शुरू होती है। डीप-फ्रिजर में अलग अलग साइज के ब्‍लॉकस का भी इंतजाम करना होगा। अनुमान है कि आप 1 लाख रुपए में यह बिजनेस आसानी से शुरू कर सकते हैं और 20 से 30 हजार रुपए आसानी से कमा सकते हैं। गर्मियों के दिनों में तो कई गुणा अधिक मुनाफा बढ़ सकता है।

बड़ी कंपनियों के डीलरशिप लेकर करें बिजनेस:

देश में बोतलबंद पानी का बिजनेस कई बड़ी कंपनियां कर रही हैं। बिसलरी, एक्‍वाफीना, किनले ऐसे ब्रांड हैं, जिनकी 200 एमएल से लेकर एक लीटर तक की पानी की बोतलों को बहुत डिमांड है। इसके अलावा ये 20 लीटर का जार भी सप्‍लाई करते हैं। आप इन कंपनियों से डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप ले सकते हैं। इस पर आपको 5 से 10 लाख रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट करना पड़ेगा। आप अपना इन्‍वेस्‍टमेंट भी बढ़ा सकते हैं।

वाटर एटीएम लगाकर शुरू करें बिजनेस:

इसके अलावा कई ऐसी कंपनियां वाटर एटीएम बनाती है, जिसे आप खरीदकर अलग अलग जगह पर इंस्‍टॉल कर सकते हैं। आप इस कंपनी की फ्रेंचाइजी भी ले सकते हैं। पीरामल सर्वजल नाम की यह कंपनी वाटर एटीएम की फ्रेंचाइजी देती है। इसमें कंपनी की ओर से इंस्‍टॉलेशन, मेंटनेंस, रिप्‍लेसमेंट जैसी सर्विसेज भी दी जाती है। ऐसे एटीएम लगा कर आप 25 से 50 हजार रुपए तक कमा सकते हैं।

ऐसे शुरू करें सोलर लैम्‍प लगाने की फैक्ट्री , सालाना 20 लाख कमाने का मौका

आज कल नई तरह के बिज़नेस शुरू हो रहे है जिनसे आप थोड़े समय में अच्छा लाभ भी कमा सकते है और साथ में सरकार भी इस काम में आपकी मदद करेगी ।ऐसा ही बिज़नेस है सोलर लैम्‍प बनाने का बिज़नेस । सरकार की वजह से बैंक भी ऐसे बिजनेस को लोन देने में काफी इंटरेस्‍ट दिखा रहे हैं, इसलिए आपके लिए यह एक अच्‍छा मौका हो सकता है।

आज हम आपको इस बिजनेस के बारे में विस्‍तार से बताएंगे कि सोलर लैम्‍प बनाने का प्‍लांट कैसे और कितने इन्‍वेस्‍टमेंट में लग सकता है। साथ ही, यह भी बताएंगे कि इस बिजनेस से आपको कितना प्रॉफिट होगा।

कितना करना होगा इन्‍वेस्‍टमेंट

माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट की प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, वहीं पहले महीने वर्किंग कैपिटल के तौर पर 1 लाख 50 हजार रुपए की जरूरत होगी। साथ ही, आपको फिक्‍सड कैपिटल के तौर पर मशीनरी एवं इक्विपमेंट पर 3.50 लाख रुपए में खर्च करने होंगे।

इसमें आपको ड्रिल मशीन, ग्राइंडर, हाई वोल्‍टेज ब्रेक डाउन टेस्‍टर, ऑटो ट्रांसफार्मर, इंसुलेशन टेस्‍टर, टेस्टिंग सेटअप, डिजिटल मल्‍टीमीटर, वोल्टेज स्‍टबलाइजर, कंप्‍यूटर, प्रिंटर आदि शामिल है। इनके इंस्‍टॉलेशन पर लगभग 1 लाख 5 हजार रुपए खर्च होंगे। यानी कि 5 लाख 30 हजार रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट फिक्‍सड कैपिटल पर करना होगा।

 रॉ-मैटिरियल पर कितना होगा खर्च

इसके अलावा पहले 1000 सोलर लैम्‍प बनाने के लिए आपको लगभग 17 लाख रुपए के रॉ-मैटिरियल की जरूरत पड़ेगी। इसमें सोलर पीवी मॉड्यूल, बैटरी, एलईडी, स्विच, इनपुट कनेक्‍टर, मॉडर्न प्‍लास्टिक कैबिनेट, फ्यूज, केबल, पीसीबी, सेमी कंडक्‍टर्स, रेसिसटर्स, कैपसिटर्स, ट्रांसिसटर्स, इलेक्‍ट्रो मैकेनिकल कंपोनेंट आदि शामिल है। प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, एक सोलर लैंप्‍ पर लगभग 1700 रुपए का रॉ-मैटिरियल यूज होगा।

 सरकार से लें सपोर्ट

आप यह फैक्‍ट्री लगाने के लिए केंद्र सरकार का सपोर्ट भी ले सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 करोड़ रुपए तक के लोन बिना किसी सिक्‍योरिटी के दिलवाया जाता है। आप इसके लिए जिला उद्योग केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

या लोन के लिए अप्‍लाई करते वक्‍त आप बैंक से कह सकते हैं कि आपको केंद्र सरकार की क्रेडिट गारंटी स्‍कीम के तहत लोन दें। आप बैंकों द्वारा एमएसएमई कैटेगिरी को दिए जाने वाले लोन के लिए अप्‍लाई कर सकते हैं। इस स्‍कीम के तहत आपको 80 फीसदी तक लोन भी मिल सकता है।

 कितनी होगी इनकम  

एमएसएमई डीआई की प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, यदि आप साल भर में 12000 सोलर लैम्‍प बनाते हैं तो आपका सारा खर्च मिलाकर 2 करोड़ 43 लाख 66 हजार रुपए खर्च होंगे। जिसमें डेप्रिसिएशन और इंटरेस्‍ट भी शामिल हैं। जबकि यदि आप एक लैंप 2200 रुपए के रेट से बेचते हैं तो आपका सालाना टर्नओवर 2 करोड़ 64 लाख रुपए होगा और आपकी कुल बचत 20 लाख 33 हजार रुपए होगी।

News Source -MONEY BHASKAR 

20 से 40 हजार रुपए में शुरू करें ये 5 बिजनेस, 90% पैसा सपोर्ट करेगी सरकार.

कई ऐसे छोटे-छोटे बिजनेस हैं, जिन्‍हें आप काफी कम पैसा लगाकर भी शुरू कर सकते हैं। ऐसे बिजनेस को सरकार भी पूरा सपोर्ट करती है। प्राइम मिनिस्‍टर इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम के तहत इन बिजनेस को करने पर लोन के साथ-साथ सब्सिडी भी दी जाती है। पीएमईजीपी का मकसद देश में एंटरप्रेन्‍योरशिप को बढ़ावा देना है। इस बारे में जागरूकता न होने के कारण ज्‍यादा लोग फायदा नहीं उठा पाते, ज‍बकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद लोगों से ऐसी स्‍कीम का फायदा उठाने की अपील करते रहे हैं।

आज हम आपको ऐसे पांच बिजनेस के बारे में विस्‍तृत जानकारी देंगे, जिनकी लागत 2 से 4 लाख रुपए के बीच में है और पीएमईजीपी के तहत आपको 90 फीसदी लोन मिल सकता है। इस स्‍कीम की खूबी यह है कि स्‍कीम के तहत 30 फीसदी सब्सिडी भी दी जाती है। हम यह भी बताएंगे कि आप कैसे पीएमईजीपी स्‍कीम के लिए अप्‍लाई कर सकते हैं।

कैसे बनेगा कॉम्‍ब फाउंडेशन यूनिट

शहद के उत्‍पादन के लिए कॉम्‍ब फाउंडेशन यूनिट का इस्‍तेमाल करना पड़ता है। अगर आप कॉम्‍ब फाउंडेशन यूनिट लगाना चाहते हैं तो कुल लागत 3 लाख 51 हजार रुपए होगी। इस प्रोजेक्‍ट को प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत 90 फीसदी लोन मिल जाएगा। आपकी कुल सेल 4 लाख 50 हजार रुपए होगी। यानी कि आप लगभग एक लाख रुपए कमा सकते हैं।

कितने में लग जाएगी इलेक्‍ट्रॉनिक रिपेयर यूनिट 

प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत आप इलेक्‍ट्रॉनिक रिपेयर यूनिट भी लगा सकते हैं। इसके लिए आपको लगभग 12 हजार रुपए का इंतजाम करना होगा, क्‍योंकि मॉडल प्रोजेक्‍ट के मुताबिक आपको 1 लाख 2 हजार रुपए की प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस प्रोजेक्‍ट के मुताबिक आपकी कमाई लगभग 1 लाख 50 हजार रुपए की सेल होगी और आप पहली बार में लगभग 48 हजार रुपए बचा सकते हैं।

 2.40 लाख में शुरू होगा कौन सा बिजनेस

गांवों और शहरों में पावर आटा चक्‍की की खासी डिमांड रहती है। अगर आप पावर चक्‍की लगाना चाहते हैं तो आपको लगभग 2 लाख 38 हजार रुपए का प्रोजेक्‍ट तैयार करना होगा। इसमें से 90 फीसदी पीएमईजीपी के तहत लोन मिल जाएगा। एक साल में आपकी कमाई 3 लाख रुपए होगी और कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्‍शन हटा दें तो आपकी बचत 61 हजार रुपए से ऊपर होगी।

 3.44 लाख रुपए में शुरू होगा यह बिजनेस

अगर आप गास्‍केट सीमेंट यूनिट शुरू करना चाहते हैं तो पीएमईजीपी की प्रोफाइल रिपोर्ट के मुताबिक कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्‍शन 3 लाख 44 हजार रुपए आएगी, इसमें वर्किंग कैपिटल, रॉ-मैटीरियल, इक्विपमेंट आदि का खर्च शामिल है और आप की कुल सेल्‍स 4 लाख रुपए होगी तो आपको पहली बार में 60 हजार रुपए की बचत होगी, जो आगे लगातार बढ़ती जाएगी।

फिनाइल की गोली बनाने की यूनिट लगाएं

प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत आप फिनाइल की गोली बनाने का कारखाना भी लगा सकते हैं। इसकी कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्शन 3 लाख 34 हजार रुपए आएगा, जबकि कुल सेल्‍स 5 लाख रुपए होगी। बचत 1 लाख 65 हजार रुपए होगी। प्रोजेक्‍ट की फिक्‍सड कॉस्‍ट 1 लाख 44 हजार रुपए होगी और वेरिएबल कॉस्‍ट 1 लाख 90 हजार रुपए होगी।

हौंडा मोटरसाइकि‍ल खोलेगा छोटे शहरों में 500 आउटलेट ,आप भी कर सकते हैं अप्‍लाई

होंडा मोटरसाइकि‍ल एंड स्‍कूटर्स इंडिया (एचएमएसआई) आपको बिजनेस का मौका देने जा रही है। कंपनी देश भर में 500 आउटलेट खोलने जा रही है। इसके लिए आप भी अप्‍लाई कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि इनमें ज्‍यादातर आउटलेट छोटे शहरों या रूरल मार्केट में होंगे।

यानी कि आपको कम इन्‍वेस्‍टमेंट करना होगा। अभी कंपनी के देश भर में 5200 आउटलेट हैं। कंपनी का दावा है कि इसे बढ़ाकर 5700 किया जाएगा। कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (सेल्‍स एंड मार्केटिंग) यादवेंद्र सिंह गुलेरिया ने यह जानकारी दी।

क्या है योजना

कंपनी के अनुसार होंडा ने अपने बाइक सैगमेंट पर फोकस बढ़ा दिया है। अभी इंडियन मार्केट में  होंडा बाइक का शेयर लगभग 17 फीसदी है। कंपनी इसे और बढ़ाना चाहती है। इसलिए अब छोटे शहरों और रूरल मार्केट पर ध्‍यान दिया जा रहा है। इस फिसकल में कंपनी ने 60 लाख टू-व्‍हीलर्स बेचने का टारगेट रखा है।

डीलर बनने के लिए क्या है जरूरी

डीलर बनाने में कंपनी किन बातों का ध्यान रखती है इस पर  से मिली जानकारी के अनुसार जब भी कोई आवेदन आता है, तो कंपनी सबसे पहले यह देखने की कोशिश करती है कि जिस एरिया के लिए आवेदन आया है वहां क्या संभावनाएं हैं। इसके अलावा डीलर बनने के लिए जिसने आवेदन किया है, उसकी फाइनेंशियल स्थिति कैसी है। जिन चीजों की परख के बाद ही कंपनी डीलरशिप देती है।

डीलर बनने के लिए आपको क्या देनी होगी जानकारी

कंपनी को आवेदन के समय जिस साइट पर आप डीलरशिप खोलना चाहते हैं, उसकी फोटोग्राफ के अलावा, साइट किस एरिया में स्थित है, वहां दूसरे कौन से डीलर हैं, उस क्षेत्र के बड़े रेजिडेंशियल और इंडस्ट्रियल क्षेत्र कौन हैं, उसका नक्शा देना होता है।

लोकेशन के बाद आपको कंपनी को अपनी फाइनेंशियल डिटेल देनी होती है। जिसमें यदि आपका कोई मौजूदा कारोबार है, तो उसका पूरा विवरण, कारोबार में शेयर होल्डिंग पैटर्न क्या है, इसके अलावा आवेदक को अपनी संपत्ति और देनदारियों की जानकारी भी देनी पड़ती है।

 कैसे मिलेगी डीलरशिप?

कंपनी की वेबसाइट www.honda2wheelersindia.com पर एफएक्‍यू में डीलर बनने के बारे में बताया गया है। इसके लिए आप https://www.honda2wheelersindia.com/network/become-a-honda-dealer लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

देखें कैसे गन्ना लगाने वाले किसान के छोटे से आईडिया ने बदली उसकी किस्मत

कौड़ियों से करोड़पति बनने वाले कई किसानों की कहानियाँ हमने अबतक पढ़ी लेकिन आज की कहानी सबसे भिन्न है। यह कहानी एक ऐसे किसान की है जिन्होंने गन्ने से ही एक बिज़नेस आइडिया निकाला। और फिर गांव में ही अपने कारोबार की नींव रखी। करोड़ों का साम्राज्य स्थापित करते हुए पूरे गांव के लोगों के लिए तरक्की का रास्ता खोल दिया।

राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर बस्ती से 55 किलो मीटर दूरी पर बसा गांव केसवापुर कई दशकों से बुनियादी जरूरतों के अभाव में जूझ रहा था। यहां के लोग रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की तरफ पलायन कर रहे थे। तभी सभापति शुक्ला नाम के एक किसान की सोच ने पूरे गांव के लोगों के लिए तरक्की का रास्ता खोल दिया।

क्या था सभापति शुक्ला का आइडिया

साल 2001 में पारिवारिक कलह की वजह से सभापति शुक्ला घर से अलग होने का निश्चय किया। पुस्तैनी जमीन में एक छोटी सी झोपड़ी डाल नए सिरे से अपनी जिंदगी की शुरुआत की। रोजी-रोटी के लिए शहर की ओर पलायन करने की बजाय शुक्ला जी ने ग्रामीण बैंक से लोन लेकर एक गन्ने का क्रशर लगाया।

2003 तक तो उनका व्यवसाय ठीक से चला लेकिन उसके बाद उन्हें दोगुनी हानि होने लगी। हताशा के इन्हीं दिनों में एक रात उन्होंने अपनी पत्नी को गन्ने की बोझ में आग लगाने के लिए कहा। गन्ने को आग लगाने वाली बात से उनकी पत्नी ने उन्हें कहा गन्ना को जलाने की बजाय उसके रस से सिरका बनाकर लोगों में बांट देना उचित होगा।किसी के काम तो आएगा। उन्होंने वैसा ही किया, गन्ने का सिरका बनाकर बाँट दिया ।

घर में बनें सिरके का स्वाद लोगों को इतना पसंद आया कि सब दोबारा डिमांड करने लगे। तभी शुक्ला जी को इसमें एक बड़ी कारोबारी संभावना दिखी और उन्होंने अपनी ढृढ़ इच्छा शक्ति से व्यापक पैमाने पर सिरका बनाने का फैसला किया।

एक लीटर सिरके से शुरू होकर हो रहा करोड़ों का टर्नओवर

सभापति ने बिज़नेस की शुरुआत अपने एक पुराने क्लाइंट के पास एक लीटर सिरका बेचकर किया। उसके बाद उन्होंने आस-पास के छोटे दुकानों तक अपने कारोबार का विस्तार किया। धीरे-धीरे जिन दुकानों में सिरका गया वहां से उसकी डिमांड बढ़ती गई। बस फिर क्या था, वह जब इस व्यवसाय से जुड़े तो उन्‍होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

आज वह लाखों लीटर सिरके का निर्माण कर उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब, बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्य में सप्लाई करते हैं और इससे उन्हें करोड़ों रुपये का वार्षिक टर्न ओवर हो रहा है।

सभापति शुक्ला ने अपने इस कारोबार में गांव के सभी बेरोजगार लोगों को रोजगार दिया है और दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करने वाले ग्रामवासी आज फक्र से सिर ऊंचा कर जीवन जी रहे हैं।

इतना ही नहीं आज राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर उनके दस हजार स्क्वायर फिट की जमीन में फैक्ट्री चलती है। फैक्ट्री के पीछे के एक टुकड़े में वे खेती भी करते हैं। आधा दर्जन दुधारू पशुओं की एक छोटी सी डेयरी भी है। अब उनकी योजना हाईवे पर एक रेस्टोरेंट खोलने की है।

सभापति शुक्ला की सफलता पर गौर करें तो हमें यह सीखने को मिलता है कि हमारे आस-पास ही वो तमाम संभावनाएं मौजूद है जो हमारी किस्मत बदलने की ताकत रखती है। बुलंद हौसला और संभावनाओं को परखने की काबिलियत हो तो इस दुनिया में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

महाशय धर्मपाल की एक तांगा चलाने से अरबपति बनने की कहानी

जमीन से आसमान तक  सीरीज में मैं आज आपके सामने पेश कर रहा हूँ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जिन्होंने बहुत सी विपरीत परिस्तिथियों  के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और मुश्किलों , विपरीत परिस्तिथियों को हराकर आसमान की बुलंदियों को छुआ |

उस व्यक्ति का नाम है महाशय धर्मपाल गुलाटी | महाशय धर्मपाल किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं | महाशय धर्मपाल मसालों की सबसे बड़ी कंपनी M.D.H. (जिसका पूरा नाम महाशियाँ दी हट्टी है ) के चेयरमैन तथा विश्व प्रसिद्ध समाज सेवी हैं और इनकी गिनती आज देश के बड़े अरबपतियों में होती है | लेकिन ये शुरुआत से ही अमीर नहीं हैं | इन्होने यह मुकाम बड़े ही संघर्ष के बाद हासिल किया है |

महाशय धर्मपाल का जन्म 27 मार्च 1923 में पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था | उनके पिता का नाम महाशय चुन्नी लाल तथा माता का नाम चनन देवी है | महाशय धर्मपाल सिर्फ 5वीं  तक पढ़े हैं | इनके पिता सियालकोट में मिर्च मसालों की दुकान चलाते थे | 5वीं के बाद इनके पिता ने रोजगार के लिए इन्हे कभी साबुन की फैक्ट्री तो कभी चावल की फैक्ट्री में, कभी कपडे के काम में लगाया तो कभी हार्डवेयर के काम में लगाया लेकिन इनका मन कहीं नहीं लगा | तब हारकर इनके पिता ने इन्हे अपनी दुकान पर लगा लिया |

इसके बाद 1947 में देश विभाजन के समय ये पाकिस्तान में अपना सब कुछ छोड़कर दिल्ली आ गए और दिल्ली कैंट क्षेत्र में पूरे परिवार के साथ एक शरणार्थी कैंप में रहे | उस समय इनके पास मात्र 1500 रूपए थे | वक्त की मार और बेरोजगारी से, तथा अपना घर न होने से भी धर्मपाल टूटे नहीं और अपने तथा अपने परिवार के भरण पोषण के लिए काम ढूँढने चाँदनी चौक गए |

 

वहाँ कम पढ़ा लिखा होने तथा मन का काम ना मिलने के बाद इन्होने 650 रूपए में एक घोडा तांगा खरीदा | कुछ समय तक उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर दो आने प्रति सवारी की दर पर तांगा चलाया | वो नियमित रूप से आते और 2 आना सवारी, 2 आना सवारी चिल्लाते, लेकिन उन्हें लोगों को अपने तांगे में बिठाने में सफलता नहीं मिली | उल्टा आलम यह था की लोग उन पर हँसते और मजाक उड़ाते थे |

फिर उन्होंने सोचा की लोगो का इतना अपमान सहने, और इतनी मेहनत करने के बावजूद मैं अपने परिवार का पेट भरने में असमर्थ हूँ | तो क्यों न इस तांगे को छोड़कर अपना खानदानी बिज़नेस मसाला उद्योग का काम किया जाय | और इन्होने तांगा बेचकर एक लकड़ी का खोखा खरीद लिया और अपना पुश्तैनी मसालों का धँधा शुरू किया तथा उसका नाम रखा सियालकोट वाले महाशियाँ दी हट्टी देगी मिर्च वाले |

ऐसे हुई MDH की शुरुआत

महाशियन दी हट्टी (MDH) जो कभी ब्रिटिश इंडिया में पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ करती थी | अब उसकी शुरुआत दिल्ली से होने जा रही थी | उसके बाद महाशय जी ने दिल्ली के करोल बाग में ही अजमल खान रोड पर, एक लकड़ी का खोखा (14×9’’) का ख़रीदा | और अपने खानदानी बिज़नेस मसालों का व्यापार शुरू कर दिया |

उनकी सादगी, ईमानदारी और मसालों की गुणवत्ता के कारण, उनका मसाला उद्योग चलने लगा | अब उनके सिर से अपने परिवार का पेट भरने की चिंता खत्म हो चुकी थी | यही वजह है की अब उनका पूरा ध्यान अपने बिज़नेस को विस्तृत करने में लगने लगा | और वर्ष 1953 में महाशय धर्मपाल गुलाटी ने एक दूसरी दुकान चांदनी चौक में किराए पर ली |

फिर धीरे धीरे दुकान से फैक्ट्री, फैक्ट्री से कंपनी बन गयी और आज महाशियाँ दी हट्टी मसालों के क्षेत्र में एक ब्रांड बन गयी जिसने आज M.D.H के नाम से देश दुनियाँ में अपनी अलग पहचान बना ली है | M.D.H. मसालों के क्षेत्र में सबसे बड़ी कम्पनी है जिसके मसालों की धूम ना केवल भारत में बल्कि दुनियाँ के हर देश में है |

आज M.D.H. के ऑफिस तथा Outlets भारत के हर शहर के अलावा लंदन,  दुबई , U.S. , U.K. , कनाडा , यूरोप , ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड , हांगकांग, सिंगापुर, चीन, जापान समेत दुनियाँ के ज्यादातर देशो में हैं | अब वो 1500 करोड़ के मालिक है और पिशले साल उनकी कंपनी का टर्न ओवर 120 करोड़ रुपए था |

महाशय धर्मपाल ने कभी किसी काम को छोटा नहीं समझा और हर काम को मेहनत से किया | इसी मेहनत की बदौलत महाशय धर्मपाल आज 92 वर्ष की उम्र में भी उनमे जवानो वाला जोश है | उनकी दिनचर्या सुबह 4:30 से शुरू हो जाती है जो रात लगभग 11 बजे तक चलती है |

दोस्तों जब अपना घरबार सब कुछ छोड़ने के बाद, बेरोजगार और अपना घर ना होने पर भी एक शख्स नहीं टूटा और जब एक तांगा चलाने वाला शख्स , एक 5वीं पास शख्स अपनी मेहनत और लगन से अरबपति बन सकता है, देश दुनियाँ में ना कमा सकता है, आसमान की बुलंदियों को छू सकता है तो फिर आप क्यों नहीं |

 

सिर्फ 12000 रुपए में भर सकेंगे यूरोप की उड़ान, खाना-पीना भी मुफ्त

सिंगापुर की सबसे कम खर्च वाली एयरलाइन्स स्कूट इंडिया जल्द ही लोगों को सिर्फ 12000 रुपए में लोगों को यूरोप की यात्रा करने का ऑफर देने जा रही है। इस खर्च में खाने-पीने का खर्च भी शामिल है साथ ही यात्रा में साथ जाने वाला 20 किलो तक का बैग भी फ्री है।

भारत और यूरोप के बीच सीधे विमान सेवा उपलब्ध कराती है। कंपनी ने मीडिया को जानकारी दी 12-13 हजार रुपए की टिकट सिर्फ एक ओर से उड़ान भरने के लिए होगी जिसमें बाकी खर्च भी शामिल होगा।

स्कूट इंडिया के प्रमुख भारत महादेवन ने बताया कि दोनों आने-आने का किराया करीब 26 हजार रुपए पड़ेगा। अभी यह किराया भारत से यूरोप जाने के लिए कम से कम 45 हजार रुपए है। इसके अलावा कंपनी ने बताया कि स्कूट के बाद यूरोप की दूसरी फ्लाइट पकड़ने पर भी सबसे सस्ता किराया देना होगा।

कंपनी ने बताया कि उन्हें अधिकार है कि फिफ्त फ्रीडम के तहत वह किसी भी दो देशों के बीच सीधे फ्लाइट चला सकते हैं। इसलिए वह ऐसा करने जा रहे हैं जिसमें लोगों को कम से कम किराया देना होगा। कंपनी के फ्लाइट्स अभी मुंबई, दिल्ली और कोलकाता से कोपेनहेगेन, वियना और मैनचेस्टर के लिए उड़ान भरते हैं।

लंबी उड़ान की है डिमांड

कंपनी ने मीडिया को जानकारी दी कि लोग बिना बीच में रुके सीधे लंबी उड़ान भरना चाहते हैं। इससे उनका समय बचता है साथ ही बीच में फ्लाइट बदलने का खर्च भी बचता है। कुछ आंकड़े बताते हैं कि जून 2017 में लंबी दूरी की फ्लाइट बुक कराने वाले लोगों की संख्या 500000 प्रति सप्ताह से ज्यादा हो गई है।

स्कूट के ऐलान के बाद कई और कंपनियों ने यूरोप के लिए सीधे उड़ान भरने के लिए किराया सस्ता करने का ऐलान किया है। माना जा रहा है कि यात्रा के लिए बुकिंग अगले महीने से शुरू हो जाएगी और मार्च 2018 तक लोग यात्रा का लाभ ले पाएंगे।