Jio लगाएगी देशभर में मोबाइल टावर, आपके पास कमाई का अच्छा मौका

अगर आपके पास अपना छत या 500 वर्गफुट की जगह है तो एक्स्ट्रा इनकम करने का एक बेहतर विकल्प यह हो सकता है कि आप मोबाइल टावर के लिए किसी टेलिकॉम कंपनी से संपर्क करें। कंपनियां अपना नेटवर्क मजबूत करने के लिए मोबाइल टावर लगाती हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में तो आपके पास बेहतर मौका भी आने वाला है। देश की बड़ी टेलिकॉम कंपनियां जल्द ही अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और कॉलड्रॉप को रोकने के लिए 74 हजार करोड़ रुपए खर्च करने जा रही हैं। इसमें मोबाइल टावर लगवाना भी शामिल है।

जियो लगाएगी और 1 लाख टावर

इसी क्रम में रिलायंस जियो की प्लानिंग है कि वह नेटवर्क को मजबूत बनाने और डाटा स्पीड बढ़ाने के लिए अगले वित्त वर्ष से यानी अप्रैल 2018 से देशभर में करीब 1 लाख मोबाइल टावर और लगाएगी। इसके पहले भी कंपनी ने पहले चरण में टावर लगाए हैं।

रिलायंस जियो ने पिछले साल ही इस बात का एलान किया था, जिसके बारे में फिर इस साल टेलिकॉम मिनिस्ट्री को यह जानकारी दी है। जानकारी के अनुसार जियो 1 लाख टावर लगाने के लिए 50 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। ऐसे में आपको भी इनकम करने का अच्छा मौका है।

टावर लगाने वाली कंपनी को दें पूरी डिटेल

टेलिकॉम कंपनियां प्राइवेट कंपनियों को मोबाइल टावर लगवाने का कांट्रैक्ट देती हैं। इनमें इंडस टावर्स, अमेरिकन टॉवर कॉरपोरेशन, भारती-इन्फ्राटेल, एटीसी, वायोम, जीटीएल अलग-अलग लोकेशंस पर टावर लगाने का काम करती हैं।

आपको इन कंपनियों की वेबसाइट पर जाना होगा, जहां एक लिंक मिलेगा, जिसमें अपने नाम और एड्रेस के साथ प्रॉपर्टी की पूरी डिटेल देनी होगी। बताना होगा कि आपका प्लॉट है या छत, ओनरशिप आपके नाम से है या ज्वॉइंट, प्रॉपर्टी रेजिडेंशियल है या कमर्शियल। इसके बाद अपने राज्य और शहर की जानकारी देनी होगी।

सीधे टेलिकॉम कंपनी को कर सकते हैं कांट्रैक्ट

आप सीधे रिलायंस जियो टीम या अन्य ऑपरेटर्स को मोबाइल टावर के लिए कॉन्टैक्ट कर सकते हैं। इसमें भी आपको अपनी और प्रॉपर्टी की पूरी डिटेल देनी होगी। मोबाइल ऑपरेटर टीम खुद यह तय करती है कि किन लोकेशन में टावर लगवाने की जरूरत है। इसके बाद वे जगह का चुनाव करते हैं। अगर चुनी हुई लोकेशन में आपकी प्रॉपर्टी है तो आप इसका बेनेफिट ले सकते हैं।

चाहिए कितना स्‍पेस

अगर आपके पास छत है तो टावर लगवाने के लिए आपको कम से कम 500 वर्ग फुट की जगह देनी होगी। वहीं, अगर आपके पास प्लॉट है तो इसके लिए कम से कम 2000 वर्ग फुट की जगह होनी जरूरी है।

ये डाक्‍युमेंट हैं जरूरी

  • लैंड पेपर की फोटोकॉपी, जहां टावर लगना है
  • सिविक बॉडी से एनओसी के पेपर
  • लैंड सर्वे रिपोर्ट
  • अपना आईडीप्रूफ

25 हजार तक मिल सकता है रेंट

  • मोबाइल टावर लगवाने पर मोबाइल ऑपरेटर कंपनियां एक फिक्स रेंट देती हैं।
  • मंथली रेंट अमूमन शहरों में 25 से 30 हजार रुपए तक होता है। मेट्रो सिटीज में बेहतर लोकेशंस में रेंट और ज्यादा हो सकता है। वहीं, छोटे शहरों में कुछ कम हो सकता है।
  • रेंट अलग-अलग लोकेशंस के हिसाब से तय होता है, जिसकी जानकारी खुद कंपनी सर्वे के बाद देती है। जहां टावर लगना होता है, वहां का रेंट कंपनी तय करती है।

नहीं होगा आपका खर्च

अगर आपकी प्रॉपर्टी पर मोबाइल टावर लग रहा है तो इसके लिए आपको अपनी ओर से कोई खर्च नहीं करना होगा। यह बिल्कुल फ्री है, सारा काम मोबाइल टावर लगाने वाली कंपनी को होगा।

LIC की ये 4 पॉलिसी देंगी डबल बेनिफिट, सिर्फ एक बार लगाना होगा पैसा

LIC देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा ढेर सारी योजनाएं चलाती है, लेकिन इसके कुछ प्‍लान ऐसे में जिनमें डबल फायदा होता है। एक तो इनमें निवेश पर इनकम टैक्‍स बचता है दूसरा फायदा है कि इनमें एक बार ही निवेश करना होता है।

इसके चलते LIC के ये प्‍लान काफी पापुलर हो रहे हैं। LIC के कानपुर क्षेत्र में डेवलपमेंट अफसर अवधेश कुमार राजपूत के अनुसार 31 मार्च के पहले लोग इन सिंगल प्रीमियम प्‍लान में निवेश करके पूरा फायदा उठा सकते हैं।

सिंगल इनडाउमेंट प्‍लान

LIC की इस योजना में केवल एक बार ही प्रीमियम देना होता है। इस योजना को 90 दिन के बच्‍चे से लेकर 65 वर्ष की उम्र के लोग ले सकते हैं। यह प्‍लान 10 साल के लिए मिलता है। इसमें न्‍यूनतम 50 हजार का बीमा लिया जा सकता है, लेकिन अधिकतम की कोई सीमा नहीं है।

अगर कोई व्‍यक्ति न्‍यूनतम 50 हजार का बीमा लेता है तो उसे 40 हजार रुपए का प्रीमियम देना होगा। दस साल बाद पॉलिसी पूरी होने पर 75 से 80 हजार रुपए के करीब उसे वापस मिल जाता है। अगर बीच में बीमित व्‍यक्ति की मृत्‍यु होती है तो नॉमिनी को 50 हजार रुपए मिलेगा।

जीवन अक्षय पेंशन प्‍लान

इस प्‍लान के तहत लोग जीवन भर पेंशन पा सकते हैं और बाद में नॉमिनी को प्रीमियम के रूप में जमा पैसा वापस मिल जाएगा। इस स्‍कीम में 30 साल से लेकर 85 साल के बीच के व्‍यक्ति शामिल हो सकते हैं। इस योजना में न्‍यूनतम 1 लाख का निवेश करना जरूरी है। निवेश के एक माह बाद ही इस योजना के तहत हर साल 6500 रुपए की पेंशन शुरू हो जाएगी।

यह पेंशन व्‍यक्ति मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक के रूप में ले सकता है। इस योजना में अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। यह पेंशन व्‍यक्ति को जीवन भर मिलेगी और बाद में उसके नॉमिनी को जितना भी पैसा प्रीमियम के रूप में दिया है वह वापस हो जाएगा।

सिंगल मनी बैक पॉलिसी

LIC की इस योजना में तीन विकल्‍प के साथ्‍ा निवेश किया जा सकता है। इसमें निवेशक को 9 साल, 12 साल और 15 साल का विकल्‍प मिलता है। इन सभी विकल्‍पों में न्‍यूनतम बीमा लेना जरूरी होता है, लेकिन अधिकतम की कोई सीमा नहीं है।

9 साल के विकल्‍प का विवरण

इस विकल्‍प में निवेश करने वाले को न्‍यूनतम 28 हजार रुपए का प्रीमियम देना होगा और उसे 40 हजार रुपए का बीमा मिलता है। इस योजना के तहत तीसरे और छठवें साल में 15-15 फीसदी पैसा मनी बैंक के रूप में वापस मिलता है। यह पैसा करीब 6-6 हजार रुपए होता है। 9वें साल में 16 हजार रुपए और बोनस मिलता है। औसतन यह बीमा लेने वाले को कुल मिलाकर करीब 45 हजार रुपए वापस मिलता है।

12 साल का विकल्‍प

इस विकल्‍प में न्‍यूनतम 50 हजार रुपए का बीमा मिलता है, जिसके लिए 40 हजार रुपए प्रीमियम देना होता है। इसमें 3-6-9वें साल में मनी बैंक के रूप में 15 फीसदी पैसा वापस मिलता है। 12वें साल में पूरा पैसा वापस मिल जाता है। इस योजना में लोगों को अंत तक करीब 80 से 85 रुपए वापस मिलता है।

15 साल का विकल्‍प

इस योजना में न्‍यूनतम 70 हजार रुपए का बीमा लेना होता है, जिसके लिए 50 हजार रुपए का प्रीमियम देना होता है। इस योजना में 3-6-9 और 12वें वर्ष में हर बार 15-15 फीसदी पैसा वापस मिलता है। अंत में 15वें साल में बचा हुआ पैसा वापस मिल जाता है। निवेशक को कुल मिला कर अंत तक करीब 1.40 लाख रुपए मिल जाता है।

जीवन उत्‍कर्ष सिंगल प्रीमियम प्‍लान

LIC ने जीवन उत्‍कर्ष नाम से सिंगल प्रीमियम प्‍लान जारी किया है। इस प्‍लान की सबसे बड़ी खासियत इसका 12 साल में मैच्‍योर हो जाना है। 12 साल के बाद पूर्ण लाभ के साथ पैसा वापस मिल जाएगा। इस प्‍लान को न्‍यूनतम 6 साल की उम्र के बच्‍चे के नाम के लिए भी जा सकता है और अधिकतम 47 साल तक का व्‍यक्ति भी इस प्‍लान को ले सकता है।

कितने का मिलेगा न्‍यूनतम सम एश्‍योर्ड

इसमें पैसा लगाने वालों को न्‍यूनतम 75 हजार रुपए का सम एश्‍योर्ड मिलेगा। हालांकि अधिकतम सम एश्‍योर्ड लेने की कोई सीमा नहीं है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार इसका चयन कर सकते हैं। यही नहीं अगर किसी को लगता है कि उसे बाद में पैसे की जरूरत है तो सरेंडर वैल्‍यू की गणना का तरीका काफी अासान है।

अगर कोई इसको एक साल के अंदर सरेंडर करता है तो उसे 70 फीसदी वैल्‍यू वापस मिल जाएगी। लेकिन अगर कोई एक साल के बाद इसे सरेंडर करता है तो उसे 90 फीसदी वैल्‍यू वापस मिलेगी।

लोन भी ले सकते हैं इसके बदले

यही नहीं अगर किसी को लगता है कि उसे पैसों की जरूरत है और वह अपना बीमा भी वापस नहीं करना चाहता है तो उसके लिए भी LIC ने व्‍यवस्‍था की है। LIC इस बीमा पॉलिसी के बदले लोन भी देगी। हालांकि यह लोन शुरू के तीन महीने नहीं मिलेगा। इसके बाद यह पूरी पॉलिसी टर्म में कभी भी लिया जा सकता है।

फ्री लुक पीरियड का लाभ मिलेगा

अगर किसी को लगता है कि उसने गलत पॉलिसी चुन ली है तो वह इसे 15 दिन के फ्री लुक पीरियड के दौरान वापस कर सकता है। यह 15 दिन पॉलिसी मिलने के बाद से गिने जाते हैं। हालांकि अगर कोई पॉलिसी वापस करना चाहता है तो उसे उचित कारण बताना पड़ता है।

फायदा एक नजर में

अगर कोई स्‍वथ्‍य व्‍यक्ति 25 साल की उम्र में इस प्‍लान को लेता है और न्‍यूनतम 75 हजार रुपए का बेसिक सम एश्‍योर्ड लेता है तो उसे 41242 रुपए प्रीमियम देना होगा। यह प्‍लान उसे 12 साल के लिए मिलेगा। इस प्‍लान में उसे मृत्‍यु की दशा में उसके घरवालों को 412420 रुपए मिलेंगे। यह लाभ पूरे पॉलिसी टर्म के दौरान मिलेगा। अगर किसी भी प्रकार की दुर्घटना नहीं होती है तो 79875 रुपए वापस मिलेगा।

31 मार्च का न करें इंतजार

कई बार लोग समय से निवेश का फैसला नहीं ले पाते हैं और वित्‍तीय साल के अंत में जाकर निवेश करते हैं। इस हड़बड़ी में कई बार उनका फार्म इनकंप्‍लीट रह जाता है या कई बार विभिन्‍न कारणों से चेक बाउंस हो जाता है। ऐसे में न तो समय से निवेश हो पाता है और न ही इनकम टैक्‍स की रिबेट मिल पाती है। ऐसे में जरूरी है कि निवेश का फैसला जल्‍दी कर लेना चाहिए, जिससे इस तरह की दिक्‍कतें न आएं।

गर्मी शुरू होने से पहले करें यह काम, बिजली जाने पर भी घर रहेगा ठंडा

गर्मी पड़ने लगी है, लेकिन यह पूरे तेवर के साथ नहीं आई है। इसलिए अभी भी मौका है कि घर में कुछ मामूली बदलाव कर लिए जाएं, जिससे गर्मी में काफी आराम हो सकता है। देश के बड़े हिस्‍से में अभी भी बिजली 24 घंटे नहीं आती है, और सभी घरों में इनवर्टर जैसी सुविधाएं भी नहीं होती हैं। यह ऊपाए काफी मामूली हैं, जिन्‍हें अपनाने से गर्मी में जब घर में बिजली नहीं होगी, उस वक्‍त भी घर के अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले काफी कम रहेगा।

छत में कराएं हीट प्रूफिंग पेंट

कई कंपनियां हीट प्रूफिंग पेंट बनाती हैं। इनको छत पर कराने से घर की गर्मी को 10 से 15 फीसदी तक कम किया जा सकता है। इस पेंट को करने से छत कम गर्म होती है। इसी के चलते गर्मी घर के अंदर नहीं आती है। इससे घर का तापमान कम रखने में मदद होती है।

घर के अंदर कराएं सही पेंट

आमतौर पर लोग पसंद के अनुसार घर में पेंट करवाते हैं। इस चक्कर में ज्यादातर लोग पेंट की क्वालिटी से समझौता कर लेते हैं। हालांकि पेंट का घर को इकोफ्रेंडली बनाने और घर के तापमान को नियंत्रित करने में बड़ा रोल होता है। ज्यादातर लोग घर में ऑयल-बेस्ड पेंट करवाना पसंद करते हैं, जो महंगा भी पड़ता है। तापमान को कम रखने के लिए वाटर बेस्ड पेंट का इस्तेमाल करना चाहिए। वाटर बेस्ड पेंट ऊर्जा को रिफलेक्ट करता है। जिससे भी घर को कूल रखने में मदद मिलती है।

सही लाइट और इलेक्ट्रॉनिक सामान का करें इस्तेमाल

घर के अंदर गर्मी बढ़ाने में लाइट्स का अहम रोल होता है। गर्मी कम करने के लिए घर के अदंर कम से कम बल्ब का इस्तेमाल करें। मरकरी या बड़े झूमर के बदले सीएफएल या एलईडी का इस्तेमाल करें। इनसे कम गर्मी का निकलती है, जिससे घर को ठंडा रखने में मदद मिलेगी। कंप्यूटर, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स सामान घर के अंदर गर्मी बढ़ाते हैं। इसलिए जब ये चल नहीं रहा हों तो इन्हें अनप्लग कर दें।

घर की बाहरी दीवार पर कराएं सही पेंट

दीवार पर धूप पड़ने से घर के अंदर का तापमान बढ़ता है। अगर, दीवार ठंडी रहे तो आसानी से घर को ठंडा रखा जा सकता है। इसके लिए घर की बाहरी दीवार पर हीट-रिफ्लेक्टिव पेंट करवाएं। इससे बाहरी गर्मी के असर को काफी कम किया जा सकेगा।

अंडर फ्लोर हीटिंग का करें इस्तेमाल

घर के अंदर तापमान को कम करने के लिए फर्श पर इन्फ्रारेड अंडरफ्लोर हीटिंग का इस्तेमाल करें। यह घर के फर्श को ठंडा रखने के साथ ही घर के तापमान को नियंत्रित करेगा। इससे घर को ठंडा रखने में कम से कम एसी चलाने की जरूरत पड़ती है, वहीं प्राकृतिक ठंडक का अहसास भी होता है।

घर के अंदर और बाहर पेड़-पौधे लगाएं

घर को प्राकृतिक तरीके से ठंडा रखने के लिए बाहर और अंदर पेड़ लगाएं। अगर, हो सके तो घर के बाहर पेड़ दक्षिण और पश्चिम दिशा में लगाएं। घर के अंदर इंडोर प्लांट लगाएं। मार्केट में कई ऐसे इंडोर प्लांट मिल जाएंगे जो घर को ठंडा करने में मदद करते हैं। एक रिसर्च के अनुसार घर के आसपास पेड़ हों तो अंदर का तापमान सामान्य से 10 से 15 डिग्री तक कम होता है।

घर की गर्मी बाहर निकालें

घर के अंदर की गर्मी को बाहर निकालने के लिए किचन में चिमनी का इस्तेमाल करें। बेडरूम और डाइनिंग रूम में प्रॉपर वेंटिलेशन हो। बाहर से गर्मी प्रवेश करने वाले प्वाइंट्स को ब्लॉक करें। दरवाजों पर परदों का इस्तेमाल करें। इस उपयों से घर के अंदर गर्मी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

खिड़की के लिए क्‍या है सही दिशा

खिड़कियों को हरदम दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही रखें हालांकि हर घर में खिडि़कियों की दिशा को बदलना कठिन है, लेकिन जो लोग घर बनवाने जा रहे हैं उनको खिड़कियों को लेकर जानकारी होना जरूरी है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार सही दिशा में खिड़कियां हो तो घर के अंदर की 77 फीसदी गर्मी को कम किया जा सकता है।

खिड़की के छज्जे को सीमेंट से न बनाकर लकड़ी से बनवाना चाहिए। खिड़कियों के शीशे पर एनर्जी सेविंग फिल्म लगाएं। खिड़कियां ऐसी जगह पर हों, जहां से हवा घर के अंदर प्रवेश कर सके। इसलिए घर में गर्मी कम करने के लिए खिड़कियों को हमेशा दक्षिण और पश्चिम दिशा में रखें।

ऐसा इसलिए की सूर्य पूर्व दिशा में उगता और पश्चिम में अस्त होता है। इन दोनों दिशा में खिड़की होने पर घर के अंदर गर्मी काफी प्रवेश करेगी। दक्षिण और पश्चिम दिशा खिड़की होने पर सूर्य की रोशनी नहीं आएगी।

सिर्फ 18 सेकंड में ये कार बन जाती है ऐसी

जगुआर लैंड रोवर अपनी नई रेंज रोवर इवोक (Evoque) को 27 मार्च को इंडिया लॉन्च करेगी। ये कंपनी की कन्वर्टेबल SUV है। दूसरे देशों में इस मॉडल को पहले से ही सेल किया जा रहा है।

कंपनी ने इस कार को 2015 के लॉस एंजिलस मोटर शो में ग्लोबल किया था। इस कार की खास बात है कि महज 18 सेकंड में इस कार का रूफ हाइड हो जाता है। जिसके बाद ये इसका लुक पूरी तरह बदल जाता है।

2 लीटर का होगा इंजन

लेंड रोवर की इंडिया वेबसाइट के मुताबिक इस SUV में JLR का लेटेस्ट 2 लीटर का Ingenium पेट्रोल इंजन होगा। ये चार सिलेंडर से लैस होगा, जो 240hp पीक पर 340Nm टॉर्क जनरेट करता है। इसमें 9 स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन चैनल्स दिए हैं।

ये SUV सिर्फ 8.1 सेकंड में 100 किलोमीटर की स्पीड पकड़ लेती है। वहीं, कार की टॉप स्पीड 217km प्रति घंटा है। रेंज रोवर इवोक फुली-लोडेड HSE डायनामिक कार है। इसमें LED हेडलाइट्स, लेदर सीट्स, नेविगेशन और एंबीएंट लाइट दी गई है।

18 सेकंड में कन्वर्ट

इस SUV को कन्वर्ट करने के लिए एक स्विच दिया है। जिसे दबाते हैं सिर्फ 18 सेकंड में ये पूरी तरह कन्वर्ट हो जाती है। यानी इस कार का रूफ पीछे की तरफ शिफ्ट हो जाता है।

फिलहाल कंपनी ने इस SUV की प्राइस के बारे में कोई डिटेल नहीं दी है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसकी एक्स-शोरूम प्राइस 80-85 लाख रुपए हो सकती है।

सब्जियां और फल नहीं यहां लगता है पैसों का बाजार, टूरिज्म पर टिका है पूरा देश

अगर आपसे कहा जाए कि दुनिया में एक ऐसा देश है, जहां पर बाजार में सब्जियां या फल नहीं बल्कि पैसे बिकते हैं, तो शायद आपको यकीन न हो. आइए, हम आपको बताते हैं ऐसे देश के बारे में जहां पर टूरिज्म पर आधी अर्थव्यवस्था टिकी हुई है.

यहां पूरी अर्थव्यवस्था है कैशलैस

उत्तरी अफ्रीका में अदन की खाड़ी के पास स्थित सोमालीलैंड 1991 में सोमालिया से अलग होकर नया देश बना था. हालांकि, अब तक किसी देश ने इसे मान्यता नहीं दी है. मगर करीब 40 लाख की आबादी वाला ये देश खुदमुख्तार जम्हूरियत का दावा करता है. सोमालीलैंड बेहद गरीब देश है.

यहां से सबसे बड़ा निर्यात ऊंटों का होता है. आधा इलाका रेतीला है. बाकी हिस्सा अक्सर सूखे का शिकार रहता है. नतीजा, सोमालीलैंड में भयंकर गरीबी है. यहां की करेंसी शिलिंग है, जिसकी किसी भी देश में कोई वैल्यू नहीं है. एक अमरीकी डॉलर के लिए आपको 9 हजार शिलिंग के नोट देने होंगे. सोमालीलैंड की शिलिंग के 500 और 1000 के नोट चलन में हैं.

बाजार में बिकते हैं नोट

आप को एक सिगरेट भी लेनी होगी, तो 500 या हजार का नोट चाहिए होगा. थैला भर सब्जी खरीदने के लिए झोला भरकर नोट ले जाने होंगे. अगर सोमालीलैंड कोई कीमती गहने खरीदना चाहता है तो गाड़ी में लादकर शिलिंग के नोट ले जाने होंगे. मुद्रा के अवमूल्यन और करेंसी के रद्दी में तब्दील होने की वजह से सोमालीलैंड में ज्यादातर लोग कैशलेस लेन-देन करते दिखेंगे.

आपको सिगरेट लेनी हो या शराब आप हर चीज का पेमेंट मोबाइल से कर सकते हैं. सोमालीलैंड में आपको भिखारी भी मोबाइल से लेन-देन करते दिखेंगे. वजह ये है कि छोटी-मोटी खरीदारी के लिए भी आपको झोला भर कर नोट चाहिए. जिसे आसानी से ले जाना मुमकिन नहीं है, इसलिए सोमालीलैंड में आज फीसदी कारोबार कैशलेस हो गया है.

टूरिज्म पर टिकी है अर्थव्यवस्था

वैसे तो इस छोटे से देश में रोजगार एक बड़ी समस्या है. यहां पर लोग मछली पालन और छोटे-छोटे कामों में लगे हुए हैं. यहां टूरिज्म पर देश चलता है. सोमालिया में बीच और यहां काफी रहस्यमय गुफाएं और जंगल हैं, जिसपर रिसर्च करने के लिए शोर्ध से जुड़े हुए लोग आते हैं.

SBI कार्ड से मुंबई के एक आदमी ने की 9 करोड़ की खरीदारी

मुंबई में एक हैरान वाला मामला सामने आया है। दरअसल मुंबई के एक व्यक्ति ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ट्रैवल कार्ड (फॉरेन ट्रैवल कार्ड) की मदद से ब्रिटिश ई-कॉमर्स वेबसाइट पर 9.1 करोड़ रुपए की शॉपिंग कर डाली, जबकि इस कार्ड की लिमिट सिर्फ 200 डॉलर (यानी तकरीबन 13,000 रुपए) की ही थी। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए सीबीआई ने मामला दर्ज कर लिया है।

एसबीआई ने इस संबंध में सीबाआई में मामला दर्ज कराया है। एसबीआई ने आरोप लगाया है कि उसकी नवी मुंबई स्थित एनआरआई सीवुड शाखा ने ये फॉरेन ट्रैल कार्ड जारी किए थे जिसके लिए आवेदन यलामांचिलि सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स लिमिटेड की तरफ से आए थे। इस शिकायत में कहा गया, “28 फरवरी 2017 को यलामांचिलि सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स लिमिटेड की ओर से इस मामले की जानकारी बैंक को दी गई।”

इस शिकायत में कहा गया, “ऑथराइजेशन मुख्य रूप से चार व्यापारियों की ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर हुआ है, जिसमें 374 बार लेन-देन किया गया जिसकी कुल राशि करीब 1.41 मिलियन डॉलर है। ये सभी लेन-देन तीन महीने के दौरान ही किए गए, 8 नवंबर 2016 से 12 फरवरी 2017 तक।”

बैंक का आरोप है कि वह कार्ड एनआरआई सीवुड शाखा से 7 नवंबर 2016 को जारी किया गया था, जिस पर 2 और कार्ड कार्ड होल्डर को जारी किए गए थे। इसमें कहा गया, “यह कार्ड संदीप कुमार रधु पुजारी के नाम पर जारी किया गया था जो कि 200 डॉलर के लिए था।”

5 लाख की कार सिर्फ 60 हजार में, ये है इंडिया का सस्ता सेकंड हैंड कार मार्केट

यदि आप कार खरीदना चाहते हैं, लेकिन बजट किसी बाइक की कीमत के बराबर भी नहीं है, तब भी इसे खरीद सकते हैं। दरअसल, इंडिया में कई जगहों पर सेकंड हैंड कार के मार्केट हैं।

जहां पर लाखों की कार हजारों में मिल जाती है। ऐसा ही एक मार्केट दिल्ली के करोल बाग पर है। यहां से सेकंड हैंड मारुति वैगनआर को सिर्फ 60 हजार में खरीद सकते हैं। बता दें, कि वैगनआर के टॉप मॉडल की ओनरोड प्राइस 5 लाख 6 हजार रुपए है।

यहां पर हैं ये मार्केट

दिल्ली में सेकंड हैंड बाइक का सबसे बड़ा मार्केट करोल बाग पर हैं। जो जल बोर्ड के पास है। यहां पर मारुति से लेकर महिंद्रा, फोर्ड, हुंडई, वोक्सवैगन समेत कई ब्रांड की कार मौजूद हैं। देखने में इन कार की कंडीशन बेहतर होती है।

यानी इन पर किसी तरह का डेंट नहीं होता और ये चमचमाती नजर आती हैं। कार का मॉडल जितना पुराना होगा, उतनी ज्यादा उसकी प्राइस कम होगी। यानी 2005 मॉडल वाली वैगनआर को 60 हजार में खरीदा जा सकता है।

फाइनेंस की सुविधा भी मौजूद

सेकंड हैंड कार के इस मार्केट में हमने S.S.S Ji Car Bike & Properties डीलर से बात की। तब उन्होंने बताया कि यहां पर सेकंड हैंड कार 60 हजार से मिलना शुरू हो जाती हैं।

वहीं, इस अमाउंट को फाइनेंस भी कराया जा सकता है। कार के साथ उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी दिया जाता है। यानी इन कार में किसी तरह के फ्रॉड होने की संभावना नहीं होती। वैसे, कार की प्राइस पर आप बारगेनिंग भी कर सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

यदि आप इस मार्केट में कार खरीदने जाने वाले हैं तब इस बात का ध्यान रखें की आपको कार के सभी पार्ट्स की नॉलेज हो। खासकर, कार के इंजन में खराबी हो सकती है। साथ ही, कोई पार्ट नकली भी हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप किसी कार एक्सपर्ट या मैकेनिक को साथ लेकर जाएं।

नोट – खबर में दिखाई जा रही कार की कीमत इस मार्केट में कम-ज्यादा भी हो सकती है। इतना ही नहीं, जो कीमत दिखाई जा रही है आप बारगेनिंग करके उससे भी कम कीमत पर खरीद सकते हैं।

दुनिया की 8 सबसे घटिया जॉब्स, जिन्हें करना सबके बस की बात नहीं

दुनिया में ऐसे कई काम हैं जो बहुत ही खतरनाक या घिनौने हैं लेकिन फिर भी लोग उन्हें अपना पेशा बनाते हैं। इसकी वजह यह है कि उस पेशे में वह बढ़िया पैसे कमाते हैं। हालांकि, इनमें से कुछ कामों में खतरा इतना ज्यादा होता है कि लोगों की जान भी जा सकती है लेकिन फिर भी लोग इन्हें करते हैं और इसकी वजह रोमांच या अच्छा पैसा है।

तो चलिए जानते हैं डेलीमेल और द रिचेस्ट वेबसाइट की ओर से लिस्टेड दुनियाभर के ऐसे ही कुछ प्रोफेशन्स के बारे में, जिन्हें घटिया करार दिया गया है। इनके बारे में जानने के बाद शायद आपको अपनी खराब लगती नौकरी अच्छी लगने लगे।

आर्मपिट सूंघने की नौकरी

सुनने और पढ़ने में भले ही ये अजीब लगे, लेकिन असल में ये एक तरह की जॉब है। विदेशों में जो भी डियोड्रेंट और परफ्यूम बनाने वाली कंपनीज है, वो ऐसे लोगों को नौकरी देती हैं। ताकि ये आर्मपिट सूंघकर ये बता सकें, कि परफ्यूम और डियो की खुशबू कैसी हैं और ये लोगों को कितनी देर तक फ्रेश रखेगी। हालांकि, भारत में ऐसी कोई नौकरी नहीं है।

मैन्योर (जानवरों का मल) इंस्पेक्टर

मैन्युर जानवरों के वेस्ट या मल को कहते हैं, जो फर्टिलाइजर के तौर पर इस्तेमाल होता है। मैन्युर इन्सपेक्टर का काम ये चेक करना होता है कि जानवरों के वेस्ट में कोई दूषित चीज तो नहीं है, जो फर्टिलाइजर्स के साथ जमीन में फैल जाए और उसका असर फसल खाने वाले इंसान पर भी हो।

इसके अलावा कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के एनिमल साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर ट्रिसा बर्गर का कहना है कि जानवरों पर रिसर्च करने वाले लोग अक्सर ये काम करते हैं या फिर इस काम के लिए वो दूसरों को भी हायर कर सकते है।

क्राइम सीन क्लीनर

सड़ी लाशें उठाने और क्राइम सीन को साफ करने का भी काम होता और बकायदा इसके लिए लोग हायर किए जाते हैं। ये उन जगहों पर भी काम करते हैं जहां पर खड़े होकर सांस लेना तो दूर, वहां का सीन देखने पर भी लोग घबरा जाते हैं।

ऑस्ट्रेलियन फॉरेंसिक क्लीनिंग के एमडी जोश मार्सदन ने बताया था कि सिर्फ अंदाजा ही लगा लें कि किसी व्यक्ति का शव एक-दो महीने तक एक कमरे में पड़ा रहे तो वहां की क्या हालत होगी। हमारे कर्मचारियों को वहां की सफाई पूरी सतर्कता से करनी होती है।

सीमेन (वीर्य) कलेक्टर

ये भी एक बड़ी अजीबोगरीब जॉब है। असल में जानवरों पर रिसर्च करने वालों को कई बार रिसर्च के लिए पशुओं के (सीमेन) वीर्य की जरूरत होती है। तो ऐसे लोग महंगी कीमत पर पशुओं का सीमेन खरीदते हैं।

इसके अलावा जानवरों की जनन प्रक्रिया और कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को भी जानवरों के सीमेन की जरूरत होती है। ऐसे में विदेशों के इसके लिए भी नौकरी है। इजराइल, कुवैत, दुबई जैसे अधिकतर खाड़ी देशों में ऐसी नौकरियां सबसे ज्यादा मिलती हैं।

क्रोकोडाइल ट्रेनर

आपको अगर किसी मगरमच्छ के मुंह में अपना सिर डालने को कहा जाए और इसके बदले में आपको 2000 रुपए ऑफर किए जाएं, तो आपका रिएक्शन क्या होगा? लेकिन कमाल की बात है कि चीन और जापान सहित दुनिया के कई देशों में एडवेंचरेस जगहों पर और चिड़ियाघरों में इसकी नौकरी हैं। इन नौकरियों में मगरमच्छ जैसे खतरनाक जानवरों के मुंह में अपना सिर डालकर लोगों को एंटरटेन करना होता है। हालांकि, भारत में इस तरह की नौकरियां नहीं हैं।

क्वालिटी टेस्टर (फूड)

अगर आपसे कोई बिल्ली का खाना खाने को कहे तो निश्चित तौर पर ये मुश्किल काम हैं और कोई भी इस पर नाक-भौंहे सिकोड़ लेगा। पर बहुत से लोग हैं, जो जानवरों का खाना छूकर, सूंघकर और खाकर चेक करने का काम करते हैं।

ये काम रिसर्च और स्टडीज का हिस्सा होती है। इसमें ये देखा जाता है कि जानवर को खाने में जिस मात्रा में न्यूट्रिएंट्स चाहिए, वो हैं या नहीं। मार्क एंड स्पेंसर्स जैसी कंपनीज में इसके लिए अच्छी-खासी रकम भी मिलती है।

बकिंघम पैलेस में गार्ड की नौकरी

ब्रिटेन के बकिंघम पैलेस में गार्ड की जॉब को वाहियात नौकरियों में एक माना जाता है। इस नौकरी में व्यक्ति को घंटों तक बिना हिले-डुले, बिना मुस्कराए, बिना बात किए एक ही जगह खड़े रहना पड़ता है। अगर कोई गार्ड बोलता, हंसता या अपनी जगह से हिल जाता है, तो उसे बेहद सख्त सजा दी जाती है। इन्हें यहां आने वाले टूरिस्ट्स की भी छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ता है।

ऊंची इमारतों की खिड़कियां साफ करना

दोस्तों बड़ी बड़ी बहुमंजिला इमारतों के बाहर एक पतली रस्सी के सहारे से खुद को लटकाकर खिड़कियों को साफ करना बेहद जोखिमभरा काम है। जरा सी चूक से इसमें व्यक्ति की जान भी जा सकती है लेकिन दुनियाभर की बड़ी-बड़ी कंपनियों से जुड़ी House Keeping फर्म इस तरह के काम करवाती हैं। इस काम के लिए कर्मचारियों को 1000 रुपए तक दिन भर के मिल जाते हैं।

कोई दुकानदार ठगे तो फोन से ही ऐसे करें शिकायत, करोड़ों का ले सकते हैं हर्जाना

एक कंज्यूमर के तौर पर आपको यदि किसी ब्रांड, प्रोडक्ट और सर्विस से शिकायत है तो आप कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कर सकते हैं। अलग-अलग इश्यूज के हिसाब से कम्पलेंड कोर्ट मे फाइल की जाती हैं। आप अपने स्मार्टफोन के जरिए ही सेकंड्स में कंज्यूमर ऑनलाइन रिसोर्स एंड इम्पावरमेंट (Core Centre) में ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

गवर्नमेंट कंज्यूमर ऑनलाइन रिसोर्स एंड एम्पॉवरमेंट सेंटर (https://corecentre.org/) से पोर्टल रन करती है। यहां शिकायत करने के लिए किसी भी कंज्यूमर को सबसे पहले खुद को रजिस्टर करना होगा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होगा। इसमें नाम, ईमेल, एड्रेस और फोन नंबर डालना होगा। इससे एक यूजर आईडी और पासवर्ड क्रिएट हो जाएगा।

किसी भी रजिस्टर्ड ब्रांड के खिलाफ की जा सकती है शिकायत

आप किसी भी रजिस्टर्ड ब्रांड या सर्विस प्रोवाइड के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं। वेबसाइट पर आपको ऐसे सेग्मेंट्स और ब्रांड्स की डिटेल भी मिल जाएगी जो डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स से रजिस्टर्ड हैं। जिसके खिलाफ शिकायत की जा रही है उसकी डिेटेल, शिकायत से रिलेटेड डॉक्युमेंट्स भी शिकायतकर्ता को ऑनलाइन अपलोड करना होते हैं।

स्टेट्स भी चल जाता है पता

कम्पलेंट सबमिट होते ही एक ऑटोमैटिक नंबर जनरेट होता है। यह शिकायतकर्ता को असाइन किया जाता है। इस नंबर के जरिए शिकायत का स्टेट्स पता किया जा सकता है। शिकायतकर्ता एक से ज्यादा कम्पलेंड भी कर सकता है और इनका स्टेट्स भी ट्रैक कर सकता है।

मैसेज भेजकर भी कर सकते हैं शिकायत

आप इस वेबसाइट पर मैसेज करके भी शिकायत कर सकते हैं। वेबसाइट तीन तरह से शिकायत करने का ऑप्शन देती है। पहला ऑनलाइन, दूसरा मैसेज के जरिए और तीसरा, हार्ड कॉपी भेजकर शिकायत की जा सकती है।

इसके अलावा आप कंज्यूमर कोर्ट में भी शिकायत कर सकते हैं

  •  इंडिया में तीन तरह की कंज्युमर कोर्ट हैं। पहली वे जो डिस्ट्रिक्ट लेवल पर समस्याओं का निराकरण करती हैं। हर राज्य में इस तरह की कोर्ट होती है। यह 20 लाख रुपए तक के मामले की सुनवाई करती हैं।
  • इसके बाद स्टेट कंज्युमर कोर्ट होती हैं। यह स्टेट लेवल पर कंज्युमर्स की शिकायतों का निराकरण करती हैं। यह कोर्ट 1 करोड़ रुपए तक के मामले में डील करती हैं।
  • तीसरे नंबर पर नेशनल लेवल की कोर्ट होती हैं। यह देशभर के मामले देखती हैं। यहां 1 करोड़ से ज्यादा अमाउंट के जो मामले हैं, वे भी देखे जाते हैं। कंज्युमर कोर्ट में शिकायत के लिए कंज्युमर को कोई लॉयर करने की जरूरत नहीं। आप खुद ही शिकायत कर सकते हैं।

कैसे करें कम्पलेंड…

  • जिस फोरम में आप कम्पलेंड करना चाहते हैं, पहले उसके ज्युरिडिक्शन के बारे में पता करें। आप जिस क्षेत्र में रहते हैं, वहां की फोरम के ज्युरिडिक्शन में ही आप शिकायत कर सकते हैं।
  • ज्युरिडिक्शन पता करके सही फोरम पर पहुंचे। कंज्युमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत कम्पलेंड करने का फॉर्मेट तय है। इस फॉर्म को आप डाउनलोड कर सकते हैं।

एडवोकेट की जरूरत नहीं होती

  • आपकी शिकायत से जुड़े सपोर्टिंग डॉक्युमेंट्स अटैच करें। इसमें आप संबंधित प्रोडक्ट खरीदने पर मिला बिल, वॉरंटी-गारंटी डॉक्युमेंट लगा सकते है इसके साथ में आपको एक एफिडेविट भी लगाना होगा। जो इस बात की पुष्टि करेगा कि आपने जो शिकायत की है, वो सही है।
  • यह शिकायत आप खुद कर सकते हैं, इसके लिए आपको किसी एडवोकेट की जरूरत नहीं। कम्पलेंट रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए भी भेजी जा सकती है। कम्पलेंड की अतिरिक्त कॉपी भी आपको अपने साथ रखनी होगी, क्योंकि यह कई जगह बाद में काम आती है।

स्मार्टफोन से चलेगा यह कूलर, कम कीमत में मिल रहे हैरान करने वाले फीचर्स

अब तक आपने कई अलग-अलग तरह के होम गैजेट्स के बारे में सुना होगा, जो इंटरनेट के जरिए कनेक्ट किये जा सकते हैं। लेकिन इस बार बजाज ने कुछ लगा सोचा है। बजाज कंपनी ने एक ऐसा कूलर लॉन्च किया है, जो मोबाइल एप और वाई-फाई के जरिए चलता है। भारतीय कंपनी बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए एयर कूलर लॉन्च किया है।

क्या है कूलर की खासियत :

यह कूलर किसी भी सामान्य कूलर से बिलकुल अलग है। यह एक स्मार्ट कूलर है। इस कूलर को आप अपने फोन से भी कंट्रोल कर सकते हैं। फोन में एप के जरिए इसे संचालित किया जा सकता है। कंपनी ने इसके लिए एक एंड्रायड एप डेवलप की है। बजाज ने अपने इस स्मार्ट कूलर को Cool.iNXT का नाम दिया है। इसे मात्र 15999 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया है।

कूलर के खास फीचर्स:

  • स्मार्टफोन में एप के अलावा इस कूलर को रिमोट और डिजिटल कंट्रोल पैनल से भी संचालित किया जा सकता है।
  • कलर को ऑटो मोड में भी चलाया जा सकता है। इस मोड में कूलर के फैन और कूलिंग की स्पीड अपने आप एडजस्ट हो जाती है।
  • इसी के साथ इस कूलर में तापमान और नमी मापने के सेंसर्स लगाए हैं। इसे अपनी जरुरत के अनुसार सेट किया जा सकता है।
  • कूलर में लाइट इंडीकेटर्स भी दिए गए हैं। इससे पता chal जाएगा की कब उसमे पानी खत्म हो गया है।
  • इसी के साथ यह कूलर 5 तरह की फैन स्पीेड और 4 स्तगर की कूलिंग के साथ आता है।

अपने आप में अनोखा और नया यह कूलर गर्मियों में लोगों का ध्यान जरूर आकर्षित कर सकता है।