ऐसे शुरू करें डिटर्जेंट पाउडर बनाने का बिज़नेस

डिटर्जेंट पाउडर साफ़ सफाई के लिए बहुत ही आवश्यक वस्तु है. इसका प्रयोग साधारण तौर पर कपडे धोने के लिए किया जाता है. बाज़ार में विभिन्न तरह के ब्रांड ऐसे डिटर्जेंट बेच कर बहुत अच्छा लाभ कमा रहे हैं. बाजारों की दुकानों में कई ऐसे डिटर्जेंट हैं, जिनकी कीमत बहुत अधिक है. बड़ी बड़ी कम्पनियाँ अपने ब्रांड का डिटर्जेंट बहुत आसानी से बेच रही हैं. आप भी अपने ब्रांड का डिटर्जेंट बहुत ही सरलता से बना कर बाज़ार में बेच सकते हैं. इस व्यवसाय में आपको बहुत अच्छा मुनाफा प्राप्त होगा.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री (Raw Material List)

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए कई तरह के आवश्यक रासायनिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. यहाँ पर इसके लिए काम आने वाले आवश्यक रासायनिक सामग्री के विषय में दिया जा रहा है.

  • ट्राईसोडियम फॉस्फेट: (रू 27 प्रति किलो)
  • ट्राईपोली फॉस्फेट: (रू 78 प्रति किलोग्राम)
  • कार्बोक्सी मिथाइल सेल्यूलोस : (रू 100 प्रति किलोग्राम)
  • फ्राग्रांस (सुगंध) :  (रू 600 प्रति किलोग्राम)
  • एसिड स्लरी :(रू 84/ लीटर)
  • सोडा ऐश :  (रू 21 प्रति किलोग्राम)
  • ग्लौबेर साल्ट: (रू 15 प्रति किलोग्राम)
  • रंग :  (रू 6 प्रति किलोग्राम)
  • CBX :
  • एओएस : (रू 45 प्रति किलोग्राम)
  • डोलोमाइट :  (रू 3 प्रति किलोग्राम)
  • डी कोल: (रू 85 प्रति किलोग्राम)

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए मशीनरी 

डिटर्जेंट बनाने के लिए तीन तरह के मशीन की आवश्यकता पड़ती है. इन तीन तरह के मशीनों मे मिक्सर मशीन, स्क्रेमिंग मशीन और सीलिंग मशीन है. इन तीनों के कार्य का वर्णन नीचे किया जा रहा है.

  • मिक्सर मशीन: यह ग्लौबर साल्ट, सोडा ऐश, रंग आदि को मिलाने के काम में आता है.
  • स्क्रेमिंग मशीन : इसकी सहयता से बने हुए डिटर्जेंट को और भी बारीक़ बनाया जाता है.
  • सीलिंग मशीन : इसकी सहयता से पैकेट्स को सील किया जाता है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए मशीनरी में कुल खर्च (Detergent Powder Making Machine Price)

इसके लिए रू 45,000 से लेकर रू 3,00,000 तक के मशीन उपलब्ध हैं. यदि आप 45000 के रेंज का डिटर्जेंट मेकिंग मशीन लेते हैं, तो उससे आप डिटर्जेंट पाउडर बना तो लेंगे किन्तु, पैकेजिंग के दौरान आपको मशीन की सुविधा नहीं मिल पाएगी. 75000 के मशीन के साथ आपको अलग से एक सीलिंग मशीन दिया जाता है और 3,00,000 रू की मशीन में पूरा सेट मिल जाता है, जिसमे मिक्सर से सीलिंग तक सभी तरह की मशीन उपलब्ध हो जाती है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के व्यापार स्थापित करने के लिए कुल खर्च (Detergent Powder Making Business Cost)

व्यापार स्थापित करने के लिए कुल खर्च कम से कम 5 लाख रूपए का आता है. ये आंकड़ा आपके मशीन की कीमतों पर भी निर्भर करता है. यदि आप मशीन कम क़ीमत की जैसे 75000 रू के आस पास की लेते हैं, तो ये आंकड़ा 2.5 से 3 लाख का हो जाता है,.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने की प्रक्रिया (Detergent Powder Making Process)

  • सबसे पहले एसिड स्लरी लें और इसमें एओएस डालें. इसके बाद इसमें डी कोल डालें.
    डी कोल डालने की वजह इसके निर्माण में इस्तेमाल किये गये रसायनों का नकारात्मक प्रभाव कम करना है.
  • इसके बाद इसमें cbs x डाला जाता है. इस तीनों को एक साथ कंटेनर में अच्छे से मिलाएं. इसमें cbs- x अच्छे से मिलाना होता है.
  • इसके बाद सारे पाउडर फॉर्म डालने के लिए मिक्सर मशीन का प्रयोग करें. इस मिक्सर मशीन में 35 किलो ग्लौबेर साल्ट, 5 किलो सोडा ऐश, 5 किलो डोलोमाइट, ट्राई सोडियम फॉस्फेट, कलर साल्ट डाल के मिलाएं. इस मिक्सर को डायरेक्ट और रिवर्स दोनों तरह से चलायें ताकि तीनों सही से मिक्स हो सके.
  • इसके बाद इसमें कलर साल्ट, व्हाइटनर और परफ्यूम डालें. कलर साल्ट डालने से डिटर्जेंट का रंग आकर्षक और परफ्यूम से इसमें सुगंध आ जाती है.
  • इसके बाद इसी मशीन में पहले से बनाए गये एसिड स्लरी घोल को डालें. इसी समय इसमें सोडियम ट्राई पोली फॉस्फेट और कार्बोक्ज़ी मिथाइल सेल्युलोस भी मिश्रित करें.
  • एक बार सारे रसायन अच्छे से मिक्स हो जाने के बाद इसे 12 घंटे के लिए सूखने को छोड़ दें. जब ये पूरी तरह सूख जायेंगा तो आप पायेंगे कि ये मोटा यानि ढेले जैसा हो गया है. इसे बारीक करने के लिए आप स्क्रीमिंग मशीन की सहयता लें और उसमे इसे डाल कर बारीक बना लें.
  • इस तरह आपका डिटर्जेंट बन कर तैयार हो जाता है और आप इसे बाज़ार के लिए पैक भी कर सकते हैं.

डिटर्जेंट पाउडर की पैकेजिंग (Detergent Powder Packaging)

  • पैकेजिंग के लिए अपने ब्रांड का पैकेट इस्तेमाल करें. यदि आपको किसी कंपनी से पहले से काम मिला हुआ है, तो आपको उसी कम्पनी के ब्रांड का पैकेट इस्तेमाल करना होगा. अन्यतः आप अपना ब्रांड्स इस्तेमाल कर सकते हैं. पैकेजिंग के लिए निम्न बातों पर ध्यान दें.
  • पैकेजिंग करने के पहले इस बात का ख्याल रखें कि एक पैकेट में कितना डिटर्जेंट पाउडर देना है. आप एक किलो का पैकेट बना रहे हैं या आधे किलो का इसका ध्यान रखना ज़रूरी है.
  • अपने ब्रांड को प्रमोट करने के लिए आकर्षक पैकेट बनाएं. पैकेट पर नीम्बू आदि की तस्वीर हो तो और भी बेहतर है.
  • पैकेजिंग करने के लिए ‘सीलिंग मशीन’ का इस्तेमाल करें. इस मशीन से पैकेट बहुत अच्छे से बनता है और देखने में आकर्षक लगता है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के व्यापार के लिए लाइसेंस 

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए आपको अपने फर्म को एलएलपी, ओपीसी आदि के अंतर्गत पंजीकृत कराना पड़ता है. आपके फर्म का एक बैंक अकाउंट होना बहुत ज़रूरी है. इसके साथ पोल्यूशन कण्ट्रोल बोर्ड की तरफ से भी ‘कंसेंट टू एस्टब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ दोनों तरह के लाइसेंस प्राप्त करने की आवाश्यक्ता होती है. क्वालिटी कण्ट्रोल के लिए बीआईएस रजिस्ट्रेशन करवाना होता है. आपको अपने ब्रांड अथवा ट्रेडमार्क का भी रजिस्ट्रेशन करवाना होता है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के व्यापार की मार्केटिंग 

मार्केटिंग के लिए आप रिटेल और होलसेल दोनों तरह के मार्केट का इस्तेमाल कर सकते हैं. आप अपने मार्केटिंग स्ट्रेटेजी में उन सभी दुकानों को ला सकते हैं, जो रिटेल में सामान बेचते हैं. इस तरह के दुकानों में अपना बनाया सामान बेचने पर लाभ अधिक होता है. इसके अलावा आप होलसेल के तहत बड़े दुकानों को भी डिटर्जेंट बेच देते हैं, जहाँ से रिटेलर अक्सर अपने दूकान के लिए खरीदते हैं. ब्रांड के प्रचार के लिये होर्डिंग वैगेरह का इस्तेमाल कर सकते हैं. यदि आप शुरू में अपने प्रोडक्ट पर किसी तरह का ऑफर दें तो वो भी कारगर होगा.

इस तरह से आप 4 से 5 लाख के अन्दर एक ऐसा व्यापार स्थापित कर सकते हैं, जो लॉन्ग टर्म बिज़नस साबित हो सकता है और आपको लम्बे समय तक भरपूर लाभ दे सकता है.

और ज्यादा जानकारी के लिए Sweta Tech Tips का वीडियो देखें

यह है हाथ से चलने वाली ईंटें बनाने वाली मशीन,जाने पूरी जानकारी

ईटें बनाने का काम काफी मुश्किल भरा है क्योंकि आज तक कोई भी ऐसी मशीन नहीं आयी है जो इस काम को अच्छे तरिके से कर सके।

लेकिन अब एक ऐसी मशीन आयी है जिस से आप ईंटें बनाने का काम बड़ी ही तेज़ी से कर सकते है ।

यह मशीन की सबसे अच्छी बात यह है के इस मशीन पर काम करने के लिए आप को डीज़ल जा बिजली की जरूरत नहीं पड़ती।

यह मशीन एक दिन में 400 -500 ईटें बना देती है ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसकी वीडियो देखें

इस मशीन की पूरी जानकारी और खरीदने के लिए निचे दिए हुए अड्रेस पर संपर्क कर सकते है । इस कंपनी के इलावा भी आप इस मशीन को कहीं से भी खरीद सकते है ।

Address: Rajkumar Agro Engineers Pvt Ltd
Naresh Gambhir(Director)
Near Union Bank Of India, Ghat Road, Nagpur – 440018, Maharashtra, India
Call Us: 08048719491

सेवई और नूडल्स बनाने का व्यापार कैसे शुरू करें

Zसेवई और नूडल्स मेकिंग बिज़नस एक आसान व्यापार है, जिसे कम स्थान में और कम पैसे में शुरू किया जा सकता है. नूडल्स इस समय बच्चों और युवाओं में अतिलोकप्रिय नाश्ता है. ये बहुत कम समय में बन कर तैयार हो जाता है और लोग बड़े चाव से इसे खाते भी हैं.

बाज़ार में कई तरह के नूडल्स बेचे जा रहे हैं. आप भी अपने ब्रांड के साथ नूडल्स मार्केट में बेच सकते हैं. इसके लिये नीचे दिए गये निर्देशों पर ध्यान दें. यहाँ पर नूडल्स और सेवई बनाने से मार्केटिंग तक की सभी आवश्यक जानकारियां दी जा रही हैं.

सेवई और नूडल्स बनाने के लिए आवश्यक रॉ मटेरियल

इसके लिए आवश्यक रॉ मटेरियल में सिर्फ एक ही रॉ मटेरियल की आवश्यकता होती है. इसके रॉ मटेरियल में सबसे छोटे दाने वाली रवा और साफ़ पानी की ज़रुरत होती है.

कहाँ से ख़रीदें : https://trade.indiamart.com/search.mp?search=rava
कीमत : आमतौर पर छोटे दाने वाली रवा की कीमत रू 26 प्रति किलोग्राम है.

सेवई और नूडल्स बनाने के लिए मशीनरी (Noodles and Sevai making machines)

इसकी मशीनरी पार्ट बहुत आसान है, जिसे कम से कम जगहों पर स्थापित किया जा सकता है और जिसे कोई भी आसानी से नियंत्रित करके चला सकते है. नूडल्स या सेवई दोनों ही एक ही तरह के मशीन से बन सकते हैं. इस मशीन में नूडल्स बनाने की डाई बदलने की सुविधा होती है, जिसकी सहायता से अलग अलग मोटाई वाले नूडल्स बनाए जा सकते हैं. यह मशीन पूरी तरह स्वचालित है, जो बिजली से चलती है.

कहाँ से ख़रीदें : https://dir.indiamart.com/impcat/noodle-machine.html
कीमत : नूडल्स मेकिंग मशीन की कीमत कम से कम रू 35,000 से शुरू होती है.
सेवई और नूडल्स बनाने की प्रक्रिया (Noodles and Sewai making process)

  • नूडल्स मेकिंग प्रक्रिया बहुत आसान होती है. सेवई बनाने की प्रक्रिया भी इसी तरह की होती है. यहाँ पर इस आसान प्रक्रिया का वर्णन किया जा रहा है.
  • सबसे पहले रवा को अच्छी तरह से साफ़ कर मिला लें. इसे जितना बारीक उपयोग करें, उतना अच्छा है.
  • इसके बाद मशीन में दिए गये स्थान पर थोडा थोडा करके इस बारीक रवा को डालते रहें.
  • मशीन की दूसरी तरफ से नूडल्स या सेवई बन कर निकलने लगते हैं.
  • इस तरह से इस पूरी प्रक्रिया में बहुत कम समय में बहुत सारे नूडल्स बनकर तैयार हो जाते हैं.
    सेवई और नूडल्स बनाने के व्यापार के लिए कुल ख़र्च (Noodles and Sewai making business total cost)

सेवई और नूडल्स बनाने के व्यापार की स्थापना करने के लिए कुल लागत कम से कम रू 35000 से रू 40000 के बीच होती है. इतने पैसे में मशीन और रॉ मटेरियल दोनों आ जाते हैं और व्यापार शुरू हो जाता है. इस व्यापार के लिए 1000 स्क्वायर फिट के कमरे की आवश्यकता पड़ सकती है.

सेवई और नूडल्स बनाने के व्यापार के लिए लाइसेंस

लाइसेंस के लिए फूड्स और एनवायर्नमेंटल हाइजीन डिपार्टमेंट में आवेदन देना पड़ता है. यहाँ से लाइसेंस लेना अतिअनिवार्य है. इससे पहले अपने लोकल अथॉरिटी से अनुमति लेकर आप व्यापार शुरू कर सकते हैं, क्योंकि फूड्स डिपार्टमेंट से लाइसेंस लेने में समय लग सकता है.

सेवई और नूडल्स की पैकेजिंग 

पैकेजिंग के समय प्रति पैकेट की मात्रा का ध्यान रखें. यदि आप पांच रू का पैकेट बना रहे हैं तो आम तौर पर इसके लिए 35 ग्रा नूडल्स पैकेट में भरने होते है. सेवई के पैकेट्स मुख्यतः 10 रू के होते हैं. अतः अपनी लागत और लाभ की आशा रखते हुए पैकेजिंग करें. इसके बाद नूडल्स में डाले जाने वाले मसाले का भी पैकेट इस नूडल्स के पैकेट में डाल दें. ये मसाला या तो आप बाज़ार से खुला ख़रीद कर पैकेट बना कर बेच सकते हैं या किसी मसाले की फैक्ट्री से बात करके अपने नूडल्स के स्वाद के मुताबिक़ मसाले बनवा सकते हैं.

सेवई और नूडल्स बनाने के व्यापार की मार्केटिंग 

नूडल्स और सेवई बच्चो में खूब पसंद की जाती है. अतः इसकी पैकेजिंग ऐसी करनी चाहिए जिससे कि बच्चे इसकी तरफ आकर्षित हों. आप अपने ब्रांड का पैकेट इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा. सेवई में ऐसी किसी तरह की नूडल्स की आवश्यकता नहीं पड़ती है. अतः सेवई के लिए सिर्फ पैकेट बनाने की ज़रुरत है. इसके बाद व्होल सेल मार्केट में आराम से अपने नूडल्स बेचें.

वीडियो भी देखें

पेपर कप बनाने वाली मशीन ,एक घंटे में त्यार करती है 4000 कप

आजकल हर शहर में अब उपभोक्ता ज्यादा से ज्यादा कागज के कप का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते शहर में कागज के कप की कमी आ गई। बाहर से सप्लाई भी कम हो रही है। अगर कोई 10 से 12 लाख रुपए में कागज के कप बनाने की फैक्ट्री लगा सकता है।

बस थोड़ी से 200 से 300 गज की जगह चाहिए। कप बना कर बेचने पर प्रति कम से कम कप 25 से 30 पैसे की बचत है।जिस से हर महीने आप 2.5 लाख महीना तक कमा सकते है ।

शहर के होलसेल विक्रेताओं के अनुसार इस समय शहर में रोजाना जहां चार लाख कप बिकते हैं। उनमें से 75 प्रतिशत कागज के कप बिक रहे हैं। बाकी 25 प्रतिशत ही प्लास्टिक के डिस्पोजेबल कप बिक रहे हैं।

कैसे लगाएं कागज का कप बनाने का उद्योग: इंटरनेट पर कागज का कप बनाने की मशीन निर्माताओं की जानकारी मिल जाएगी। जिस तरह की मशीन आपको लगानी है, उसकी डिटेल एवं विक्रेता के कॉन्टैक्ट नंबर और मशीन का आकार, उत्पादन क्षमता आदि सब लिखी होती है।

उद्योग लगाने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट बना लें। अगर आपको अपने उद्योग के लिए बैंक से फाइनेंस कराना है तो एमएसएमई (माइक्रो स्माल मीडियम एंटरप्राइजेज) की वेबसाइट पर अपने उद्योग का रजिस्ट्रेशन करा लें। इसके बाद बैंक में फाइनेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे लोन मिलने में आसानी होगी।

मशीन की जानकारी
इस मशीन को बनाने वाली कंपनी का नाम -सिद्धि इंजीनियरिंग वर्क्स
कीमत :Rs 5.25 लाख

इस मशीन की पूरी जानकारी के लिए शक्ति मिश्रा की वीडियो देखें

Contact Details
Address:Siddhi Engineering Works
Ahmedabad – 382443, Gujarat, India
Call :08071678524 ,9375036032

नोट: इसमें दी हुई मशीन की जानकारी आपको अनुमान लगाने के लिए दी गई है आप कहीं से भी मशीन खरीद सकते है कृपया कोई भी मशीन खरीदने से पहले मार्किट रिसर्च जरूर कर लें

अब अबूधाबी और दुबई में दो दिन फ्री रुक सकेंगे अब भारतीय, UAE सरकार का बड़ा फैसला

यूएई सरकार ने दुनिया भर के पर्यटकों को लुभाने के लिए एक बड़ा फैसला किया है. अब दुबई और अबुधाबी होते हुए दुनिया के दूसरे देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों को दुबई और अबुधाबी में 48 घंटे तक रुकने के लिए पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे.

यूएई के शहरों में भारतीय पर्यटकों और यात्रियों की संख्या सबसे ज्यादा होती है, इसलिए इसका बड़ा फायदा यहां पहुंचने वाले भारत के यात्रियों को मिलेगा. युनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) कैबिनेट ने यह फैसला किया है.

यूएई की कैबिनेट ने बुधवार को जो बड़े फैसले लिए, उसमें से एक ये भी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रांजिट पैसेंजर्स को 48 घंटे के लिए फ्री वीजा मिलेगा. अगर वह इसके बाद कुछ और समय के लिए वीजा बढ़वाने चाहते हैं तो इसके लिए भी बहुत कम फीस रखी गई है.

अगर यात्री दो दिन और अपनी वीजा अवधि बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए सिर्फ 50 दिरहम यानी 930 रुपए देने होंगे. यात्री इन ट्रांजिट वीजा को सभी यूएई एयरपोर्ट पर बने पासपोर्ट कंट्रोल हॉल में एक्‍सप्रेस काउंटर्स से प्राप्‍त कर पाएंगे.

हालांकि ये नहीं वीजा पॉलिसी अभी लागू नहीं हो पाई है. इसके जल्द ही लागू होने की संभावना है. माना जा रहा है कि यूएई सरकार का फैसला ज्यादा से ज्यादा भारतीय लोगों का आकर्षित करने के लिए है. भारत में यूएई सबसे ज्यादा पॅापुलर डेस्टीनेशन है.

करीब 25 फीसदी भारतीय भारत से खाड़ी के आबूधाबी, दुबई और दूसरे देशों की यात्रा करते हैं. भारत की ट्रेवल इंडस्ट्री के अनुसार, यूएई सरकार का ये कदम गेमचेंजर के रूप में देख रहे हैं. यूएई की कैबिनेट ने रोजगार चाहने वालों को एक नया 6 माह का वीजा देने का भी फैसला किया है.

2017 में 3.60 लाख भारतीय पर्यटक अबुधाबी गए. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो यह संख्‍या इससे पिछले साल से 11 फीसदी ज्यादा है. इसके अलावा कैबिनेट ने प्राइवेट सेक्‍टर में फॉरेन वर्कर्स इंश्‍योरेंस और वीजा सुविधा के लिए लेजिसलेटिव पैकेज देने का भी निर्णय लिया है.

अब कूलर की कीमत में पाएं AC का मजा, बिजली के बिल की नहीं होगी चिंता

गर्मी से बचने के लिए लोग कूलर या एसी का सहारा लेते हैं। लेकिन एसी महंगा होने के कारण हर कोई इसे अफोर्ड नहीं कर सकता है। इसी के चलते हम आपको एक ऐसे एसी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे 5,757 रुपये में खरीदा जा सकता है।

यह कूलिंग फैन के नाम से मशहूर है। इसका नाम Ivation GDM20 Thermo-Electric Dehumidifier है। इस एसी की कीमत भले ही कम है लेकिन यह गर्मी से राहत दिलाने में कारगर साबित होता है।

जानें इस छोटे एसी के बारे में

यह मशीन से नहीं बल्कि आइस ट्रे से चलता है। इसमें आइस ट्रे लगाई जाती है जिसमें आइस क्यूब्स रखे जाते हैं। इसमें ब्लेडलेस विंग्स लगे हुए हैं जिससे चार से पांच फीट की दूरी तक हवा पहुंच सकती है। साथ ही इसमें एक और खूबी भी है।

इस एसी को यूएसबी की मदद से भी चलाया जा सकता है। इसे आप मोबाइल चार्जर, लैपटॉप, कंप्यूटर और पावर बैंक की सहायता से भी चला सकते हैं। लोग इसे अपने साथ कहीं भी ले जा सकते हैं। इसे ऑनलाइन अमेजन इंडिया और ऑफलाइन खरीदा जा सकता है।

अगर आप एसी नहीं खरीदना चाहते तो घर पर पड़े बेकार सामान की मदद से कूलर भी बना सकते हैं। इसके लिए आपको महज 30 मिनट का समय लगेगा। इसके लिए आपको ज्यादातर सामान घर पर ही मिल जाएगा।

कूलर बनाने के लिए आपको ये सामान चाहिए

  • 2V DC Motors X2, mini submersible cooler pump
  • थर्माकॉल की शीट
  • ग्लू
  • झाड़ू
  • फेन ब्लैड
  • कटर
  • चाकू
  • मेटल वायर
  • सर्जिकल IV set
  • मार्कर पेन
  • आइसक्रीम स्टिक
  • इसके लिए सबसे पहले आपको थर्माकॉल की शीट को 27cmX19cm , 27cmX21cm के दो और 27cmX23cm के दो टुकड़े काटने होंगे।

  • इसके बाद थर्माकॉल के छोटे टुकड़ों पर पेंसिल से गोल निशान बना लें। अब कटर की मदद से उस गोले को काट लें। इसके बाद तीन टुकड़ों को बीच से चौकोर काट लें।

  • अब इन सभी टुकड़ों को कूलर की शेप में चिपका लें।
  • ऐसा करने से आपके कूलर के ऊपर का हिस्सा तैयार हो जाएगा। अब इसके अंदर थर्माकॉल का टुकड़ा रखें। इस पर डीसी मोटर को रखा जाएगा।

  • इसके बाद मोटर में पंखुड़ी को लगाएं और टुकड़े के ऊपर रख दें।

  • अब आइसक्रीम स्टिक लें और उस पर ग्लू लगाएं। इन्हें चौकोर आकार के हिस्से पर चिपका दें। अब इन पर कॉपर वायर लगा दें।

  • अब झाड़ू को काटकर इसे घास की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे वायर से चिपका दें।

  • इसके बाद मार्कर लें और उसकी निडल को रीमूव करें। अब इस पर 6 छेद बनाएं और इन्हें सर्जिकल सेट से अटैच कर दें। आपको ऐसे ही तीन सेट बनाने हैं।

  • इन तीनों को सबमर्सिबल पंप में फिक्स कर दें। अब इसे तैयार हुए कूलर में फिक्स कर दें। अब पाइप में लगे वायर को मोटर में लगे वायर से अटैच करें।

  • अब जैसा फोटो में दिखाया गया है मार्कर को वैसे फिक्स करें और वायर से लॉक कर दें।

  • अब इसमें पानी डालें। अब वायर को पावर के साथ लगाएं। इससे आपका कूलर काम करना शुरु कर देगा।

सरकार की नई योजना, अब 24 डिग्री से कम नहीं कर सकते AC का तापमान

अगर आप किसी होटल या शॉपिंग मॉल जाते हैं तो आपने कई बार वहां एसी के कम तापमान के चलते ठंड और दिक्कत महसूस की होगी. अगर सरकार की चली तो अब ऐसा नहीं होगा. मोदी सरकार का मानना है कि एसी का इतना कम तापमान न तो स्वास्थ्य के लिए ठीक है और न ही बिजली के ख़र्चे के नज़रिए से.

इसके लिए मोदी सरकार ने अब एक नायाब तरीका अपनाने का फ़ैसला किया है . बिजली मंत्रालय ने फैसला किया है कि वो एसी बनाने वाली सभी कम्पनियों और उन्हें इस्तेमाल करने वाले बड़ी इमारतों को एक एडवाइज़री जारी करेगी . इस एडवाइज़री में एसी का डिफॉल्ट तापमान 24 डिग्री रखने की सलाह दी जाएगी .

फिलहाल जागरूकता अभियान चलेगा

फिलहाल ये एडवाइज़री केवल सलाह के तौर पर जारी की जाएगी . बिजली मंत्रालय का कहना है कि इसे जागरूकता अभियान के तौर पर चलाया जाएगा जिसे 4 – 6 महीने तक जारी रखा जाएगा . इसके बाद सरकार का इरादा लोगों से राय लेने के बाद इसे नियम बनाकर अनिवार्य बनाने का है .

अनिवार्य बनाए जाने के बाद कोई भी एसी निर्माता एसी का डिफॉल्ट तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं रख पायेगा. सरकार जागरूकता अभियान के दौरान लोगों से भी अपील करेगी कि अपने अपने घरों में लगे एसी का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं रखें .

कहां कहां लागू होगा नियम ?

एसी का तापमान 24 डिग्री अनिवार्य रखने का नियम बनने के बाद इसे बड़े इमारतों जैसे एयरपोर्ट , होटल , शॉपिंग मॉल और केंद्र और राज्य सरकारों के साथ साथ सरकारी क्षेत्र के सभी उपक्रमों जैसे बैंकों में लागू कर दिया जाएगा . हालांकि नियम बनने के बाद भी हमारे आपके घरों में पहले से लगे एसी काम करते रहेंगे हालांकि सरकार लोगों से तापमान 24 डिग्री रखने की अपील करेगी .

क्यों पड़ी है इस पहल की ज़रूरत ?

बिजली मंत्रालय ने ये नायाब तरीका निकाला है ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी ( बीईईई) की सिफारिशों के आधार पर . अपनी सिफारिश में बीईईई ने कहा था कि फिलहाल जो एसी का डिफॉल्ट तापमान है वो बिजली की खपत और स्वास्थ्य दोनों के लिए ठीक नहीं है . मनुष्य के शरीर का औसत आंतरिक तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस रहता है .

वहीं एसी का तापमान काफी कम रखने पर बिजली की खपत भी ज़्यादा होती है . एक अनुमान के मुताबिक अगर एसी का तापमान 1 डिग्री बढ़ाया जाता है तो इससे बिजली की खपत करीब 6 फ़ीसदी घट जाती है . एक अनुमान के मुताबिक ऐसा करने से देश में हर साल 20 अरब यूनिट की बिजली बचाई जा सकेगी.

बाइक देगी 150 km का माइलेज, आज ही लगवाएं 500 रुपये का ये छोटा सा डिवाइस

आज जिस गति से ईंधन के दाम बढ़ते जा रहे हैं ये देखते हुए तो लग रहा है कि भविष्य में बाइक चलाना मुश्किल हो जाएगा। सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को आती है जो रोजाना बाइक से लंबी दूरी तय करते हैं, उनकी बाइक ज्यादा चलती है इसलिए पेट्रोल की खपत भी ज्यादा होती है। अगर आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं तो ये खबर पढ़ने के बाद आप जरूर राहत की सांस लेने वाले हैं।

माइलेज डबल से ज्यादा

सामान्य बाइक प्रति लीटर में ज्यादा से ज्यादा 50-60 किमी का माइलेज देती है। अगर हम आपसे कहें कि आपकी यही बाइक 150 किमी का माइलेज देने लगेगी तो आपको इस बात पर शायद यकीन नहीं होगा, लेकिन ये बात बिल्कुल सच है। जी हां महज कुछ रुपये खर्च करके आपकी बाइक माइलेज में सबसे आगे निकल जाएगी और बार-बार पेट्रोल भरवाने की टेंशन से आप मुक्त हो जाएंगे।

विज्ञान के इस दौर में अब कुछ भी नामुमकिन नहीं रहा है और इसी विज्ञान के कमाल से एक स्टूडेंट ने फिजिक्स के फॉर्मूले के बल पर ये कर दिखाया है। स्टूडेंट को श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर ने इस कार्य की शुरुआत में मदद के लिए 75 लाख रुपये की मदद धनराशि भी मंजूर की है।

सिर्फ 500 रुपये का खर्च

इस स्टूडेंट ने खुद एक कार्बोरेटर बनाया है, जिसे बाइक में फिट करने के बाद बाइक का माइलेज डबल से भी ज्यादा हो जाता है। इस कार्बोरेटर पर सिर्फ 500 रुपये का खर्च आता है। इस कार्बोरेटर को बनाने वाला स्टूडेंट विवेक कुमार कौशांबी का रहने वाला है।

विवेक ने 2001 में 12वीं कक्षा में फिजिक्स पढ़ी थी, जिसके फॉर्मूले के दम पर ये अनोखा कार्बोरेटर बना कर तैयार कर दिया है। ये कार्बोरेटर माइलेज को डबल से भी अधिक करने में सक्षम है, जिसकी मदद से बाइक प्रति लीटर में 153 किमी का माइलेज दे सकती है। इस टेकनोलॉजी का इस्तेमाल बाइक से साथ जनरेटर में भी किया जा सकता है।

मानव जाति के लिए अमृत है इस केकड़े का खून, 10 लाख रु है प्रति लीटर है कीमत

क्या किसी जानवर का खून हमारे लिए अमृत हो सकता है? सुनने में थोड़ा अजीब लगे, लेकिन ये हकीकत है। नॉर्थ अमेरिका के समुद्र में पाए जाने वाले एक केकड़े का खून अमृत माना जाताहै। इस केकड़े को हॉर्सशू कहा जाता है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये खून लाल नहीं बल्कि नीला होता है।

45 करोड़ सालों से धरती पर मौजूद है केकड़ा

  • ये बिल्कुल घोड़े की नाल की तरह दिखाई देता है, इसलिए इसका नाम हॉर्सशू क्रैब रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, केकड़े की ये प्रजाति करीब 45 करोड़ (450 million years) सालों के पृथ्वी पर है।
  • हालांकि केकड़े का नीला खून ही अब उसके अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है। मेडिकल साइंस में इस केकड़े का खून इसकी एंटी बैक्टीरियल प्रॉपर्टी की वजह से इस्तेमाल किया जाता है।

हीमोग्लोबिन की जगह होता है हीमोस्याइनिन

जैसा की इंसानों और अन्य जीवों में लाल खून होता है और हीमोग्लोबिन पाया जाता है, ठीक उसी तरह इस केकड़े का खून नीला होता है। खून में कॉपर बेस्ड हीमोस्याइनिन (Hemocyanin) होता है, जो ऑक्सीजन को शरीर के सारे हिस्सों में ले जाता है।

10 लाख रुपए/लीटर बिकता है खून

शरीर के अंदर इंजेक्ट कर खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान करने वाली दवाओं में केकड़े के नीले खून का प्रयोग किया जाता है। ये खतरनाक बैक्टीरिया के बारे में सटीक जानकारी देता है। यही वजह है कि इसकी कीमत करीब 10 लाख रुपए प्रति लीटर है। रिपोर्ट के मुताबिक, खून के लिए ही हर साल 5 लाख से भी ज्यादा केकड़ों को मार दिया जाता है।

कैसे निकालते हैं खून

इन केकड़ों को अलग-अलग जगह से पकड़ा जाता है। उनकी अच्छे से धुलाई और सफाई की जाती है और फिर इन्हें लैब में ले जाया जाता है। केकड़ों को जिंदा ही स्टैंड पर फिट कर उनके मुंह के पास नस में सिरिंज लगाकर नीचे बॉटल रख दी जाती है। धीरे धीरे बॉटल में खून इकट्ठा होता जाता है।

खाली वक्त में करें ये 5 साइड बिजनेस, कमाई में माने गए हैं बेहतर

खाली समय का सही इस्तेमाल सभी करना चाहते। वहीं लोग ये भी चाहते हैं कि समय का इस्तेमाल इस तरह किया जाए कि इनकम में भी फायदा हो। आज हम आपको बता रहे हैं 5 साइड बिजनेस जो आपकी ये दोनो इच्छाएं पूरी करेंगे। इन 5 साइड बिजनेस को कमाई के हिसाब से कई औसत फुल टाइम नौकरियों से बेहतर मान गया है।

पार्ट-टाइम जॉब ऑफर करने वाली कंपनी फ्लैक्सीजॉब ने इन जॉब को अपनी टॉप जॉब लिस्ट में शामिल किया है।अमेरिकी कंपनी फ्लैक्सीजॉब भारत के लिए भी जॉब ऑफर करती है। अगस्त के महीने में कंपनी ने भारतीयों के लिए 10 कैटेगरी में पार्ट-टाईम जॉब ऑफर किए हैं।

फ्लैक्सी जॉब के मुताबिक लिस्ट में सिर्फ उन साइड बिजनेस को शामिल किया गया है, जिसमें होने वाली हर घंटे की औसत कमाई अमेरिकी सरकार द्वारा तय न्यूनतम प्रति घंटे आय (7 डॉलर) का कम से कम दोगुना हो।

ग्रुप फिटनेस इंस्ट्रक्टर

फ्लैक्सी जॉब की लिस्ट में सबसे ऊपर ग्रुप फिटनेस इंस्ट्रक्टर हैं। वेबसाइट्स के मुताबिक योग, फिटनेस, साइकलिंग, इस सेग्मेंट में आते हैं। वेबसाइट के मुताबिक इस जॉब की सबसे खास बात ये है लोग पहले खुद अपने खाली समय में इन एक्टिविटी को सीखते हैं, बाद में वो खुद इस सर्विस को ऑफर करने लगते हैं। यानि अपने खाली समय के इस्तेमाल में ये सबसे अच्छा ऑप्शन है।

अमेरिकी में इस जॉब के लिए कम से कम 40 डॉलर प्रति घंटे तक मिल जाते हैं। वहीं दिल्ली में एक से दो घंटे हर दिन के योग सेशन के लिए औसत फीस 2000 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति माह है। अगर टीचर फेमस है या सिखाई जा रही एक्टिविटी खास है तो कमाई कई गुना ज्यादा हो सकती है।

स्पेशल एजुकेशन ट्यूटर

बुजुर्ग हो या किसी परेशानी से जूझ रहा बच्चा- स्पेशल एजेकुशन ट्यूटर की जरूरत हर जगह बढ़ रही है। स्पेशल ट्यूटर उन लोगों को कहते हैं जो किसी खास जरूरत के हिसाब से सिखाने में मदद करते हैं। इन जॉब में साइन लैंग्वेज सिखाने वालों से लेकर, किसी अक्षमता के शिकार लोगों के ट्यूटर शामिल हैं।

फ्लैक्सी जॉब के मुताबिक अक्सर अवेयरनेस बढ़ाने के लिए सरकारें, इंस्टीट्यूशन, कंपनियां या स्कूल इस तरह के प्रोग्राम चलाती हैं जहां वो ट्यूटर को पार्ट टाइम जॉब ऑफर करते हैं। अमेरिका में एक साइन लैंग्वेज सिखाने वाले को हर घंटे 35 डॉलर तक मिल सकते हैं।

दो या दो से ज्यादा भाषाओं के जानकार

अगर आप एक से ज्यादा भाषाएं जानते हैं तो आपके पास अवसरों की कमी नहीं, खास तौर पर भारत जैसे देश में जहां कई तरह की भाषाएं हैं। फ्लैक्सी जॉब के मुताबिक कंटेट का ट्रांसलेशन हो या किसी कंपनी के अधिकारी का दुभाषिया बनना, या फिर एक से ज्यादा भाषाओं में माहिर होना काफी फायदे मंद जॉब है। सबसे खास बात ये है कि अगर आप कोई दूसरी भाषा नहीं जानते तो आप अपने खाली समय का इस्तेमाल कर इसे सीख सकते हैं और बाद में इसका इस्तेमाल दूसरों को सिखाने में कर सकते हैं।

इवेंट/ प्रोडक्ट फोटोग्राफर

खाली समय में फोटोग्राफी करना कई लोगों का शौक होता है, वहीं दूसरी तरफ कई कंपनियां ऐसे लोगो की तलाश करती हैं जो उनके लिए किसी खास इवेंट में जाकर पूरे इवेंट या फिर किसी प्रोडक्ट की फोटोग्राफी कर सकें। मीडिया हाउस भी बेहतर फोटोग्राफ्स की तलाश करते रहते हैं। इस जॉब में फोटोग्राफी के साथ एडिटिंग की जानकारी होना जरूरी माना जाता है।

कई लोग फोटोग्राफी की मदद से फोटो फीचर भी पोस्ट करते हैं, जो किसी इवेंट, प्रोडक्ट या किसी टूर का हिस्सा हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक राइटिंग के मुकाबले फोटो फीचर ज्यादा देखे जाते हैं ऐसे में इन पोस्ट्स के हिट होने की संभावना भी ज्यादा होती है। फ्लैक्सी जॉब के मुताबिक प्रोडक्ट फोटोग्राफर हर घंटे कम से कम 20 डॉलर कमा लेते हैं।

रिज्यूम राइटर

फ्लैक्सीजॉब के मुताबिक आपको जॉब ऑफर होने में सबसे अहम रोल दिलाता है आपका बायोडाटा या रिज्यूम या सीवी, लेकिन खास बात ये है अधिकांश लोग नहीं जानते है कि बायोडाटा, या रिज्यूम कैसे तैयार किया जाए। यहीं पर रिज्यूम राइटर की मदद ली जाती है। रिज्यूम राइटर बनने के लिए आपको सिर्फ भाषा पर पकड़ और प्रजेंटेशन स्किल चाहिए। फ्लैक्सीजॉब के मुताबिक इस जॉब में कमाई इस बात पर निर्भर होती है कि आप कितने एक्सपीरियंस वाले प्रोफेश्नल के लिए के लिए रिज्यूम बना रहे हैं।

अक्सर मिडिल मैनेजमेंट से टॉप जॉब के लिए एप्लाई करने वाले एग्जीक्यूटिव फ्रीलांसर एक्सपर्ट्स के साथ काम करते हैं। दरअसल ऊपरी लेवल के जॉब एप्लीकेशन में औपचारिकताएं और प्रजेंटेशन काफी अहम होता है। भारत में फ्रीलांसर रिज्यूम राइटर 500 से 3000 रुपए प्रति रिज्यूम फीस चार्ज करते हैं।

साइड बिजनेस पाने के दो तरीके हैं इसमें फ्लैक्सिबल जॉब ऑफर करने वेबसाइट्स हैं। वहीं डायरेक्ट अप्रोच से भी काम किया जाता है।फ्रीलांसर डॉट कॉम और फ्लैक्सी जॉब भारतीयों के लिए भी साइड बिजनेस ऑफर करती हैं। आपको जॉब ऑफर करने के बदले ये आपसे फीस लेती हैं।इसके अलावा कई कंपनियां सीधे शॉर्ट टर्म प्रोजेक्ट्स निकालती हैं। लोग सोशल मीडिया के जरिए भी बिजनेस पाने की कोशिश करते हैं।

खास बात ध्यान रखें कि साइड बिजनेस कमाई का बड़ा जरिया है और लोग लगातार अवसरों की तलाश में लगे रहते हैं। इससे इन जॉब्स में जालसाजी का खतरा भी उतना ज्यादा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सभी जेनुइन कंपनियां जॉब मिलने से पहले आपसे फीस नहीं मांगती। वहीं स्थापित हो चुकी कंपनियां अगर फीस लेती हैं तो वो भी काफी मामूली।