युवा किसान का कमाल 550 रुपये किलो की दर से बेच रहा है अमरूद

अमरूद एक ऐसा फल है जो मात्र दो-तीन दिन तक ही ताज़ा रह सकता है। बासी होने पर खाना तो दूर उसे घर में रखना भी मुश्किल है। ऐसे फल को ऑनलाइन 550 रुपए किलो के हिसाब से बेचकर इंजीनियर से किसानी को अपनाने वाले नीरज ढांडा के बारे में भला कौन नहीं जानना चाहेगा जिन्होंने असंभव काम को संभव कर दिखाया। लेकिन इंजीनियर के करियर को अलविदा कर खेती-किसानी से कामयाबी की कहानी लिखना इतना आसान नहीं था।

नीरज ने इंजीनियरिंग के बाद नौकरी करके कुछ पैसा बचाया और जींद से 7 किलोमीटर आगे संगतपुरा में अपने 7 एकड़ खेतों में चेरी की खेती करने का मन बनाया। पहले प्रयास में असफल होने पर परिवार वालों ने उन्हें नौकरी ही करने की सलाह दी। लेकिन उनके मन में तो कुछ और ही चल रहा था। कुछ समय बाद नीरज ने इलाहाबाद के कायमगंज की नर्सरी से अमरूद के कुछ पौधे खरीदें और अपने खेतों में लगाए। अमरूद की काफी अच्छी फसल हुई।

मंडी में जब वह अपनी फसल लेकर पहुंचे तो सभी बिचौलिये एक हो गए और 7 रुपए किलो का दाम लगाया। नीरज भी अपनी जिद पर अड़ गए उन्होंने गांव की चौपालों और गांव से सटे शहर के चौराहों पर कुल मिलाकर 6 काउंटर बनाए और मंडी से दोगुने दामों में इन अमरूदों को बेचा। काफी थोक विक्रेता भी इन काउंटरों के जरिए नीरज के खेतों तक पहुंचे। अब नीरज को इस बात का अंदाजा हो गया था कि जल्दी खराब होने वाले फल यदि जल्दी नहीं बिके तो लाभ होना बहुत मुश्किल है।

उन्होंने अपने आगे के सफर के लिए छत्तीसगढ़ का रुख किया। वहां एक नर्सरी से थाईलैंड के जम्‍बो ग्‍वावा के कुछ पौधे खरीद कर लाए और उसे अपने खेतों में रोपा। डेढ़ किलो तक के अमरूदों की बंपर फसल का तोहफा नीरज को अपनी मेहनत के रूप में मिला। अपने ही खेतों के वेस्ट से बनी ऑर्गेनिक खाद के कारण अमरूदों में इलाहाबाद के अमरूद जैसी मिठास बनी रही। फिर नीरज ने अपनी कंपनी बनाई और हाईवे बेल्ट पर अमरूदों की ऑनलाइन डिलीवरी की शुरुआत की।

जम्‍बो अमरूद की खास बात यह है कि इनकी ताजगी 10 से 15 दिन तक बनी रहती है। नीरज ने अपनी वेबसाइट पर ऑर्डर देने से डिलीवरी मिलने तक ग्राहकों के लिए ट्रैकिंग की व्यवस्था भी की जिससे वह पता लगा सकते हैं कि अमरूद किस दिन बाग से टूटा और उन तक कब पहुंचा है। इंजीनियर किसान की हाईटैक किसानी के अंतर्गत 36 घंटे की डिलीवरी का टारगेट सेट किया गया है।

आजकल नीरज जिस समस्या से जूझ रहे हैं उसका हल भी उन्‍होंने निकाल लिया है। दरअसल मशहूर होने के कारण दूर-दूर से लोग उनके अमरूद के बाग देखने आ रहे हैं। कुछ किसान यह तकनीक सीखना भी चाहते हैं।

इसके लिए अब उन्होंने एक समय सारणी बनाकर मूल्‍य निर्धारित कर दिया है, जिसे लेकर वह यह तकनीक किसानों को सिखाएंगे। अब पर्यटन खेती के माध्यम से भी नीरज अपनी कमाई में इजाफा करेंगे। इतना ही नहीं भविष्य में नीरज ने ग्रीन टी, आर्गेनिक गुड और शक्‍कर भी ऑनलाइन बेचने की योजना पूरी कर ली है जिसे वह जल्द ही शुरू करने वाले हैं।

कबाड़ से तैयार किया ट्रैक्टर, इंजन ऑटो का और टायर मारुति के

अाम तौर पर एक ट्रैक्टर एक लीटर डीजल में 12 किलोमीटर दौड़ता है। लेकिन हरियाणा के हिसार के मिस्त्री कृष्ण जांगड़ा ने ऐसा ट्रैक्टर तैयार किया है, जो एक लीटर में 22 किलोमीटर दौड़ता है। इसकी स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटा है।

खास बात है कि इस छुटकू ट्रैक्टर की सामने आैर पीछे दोनों तरफ की स्पीड की एवरेज भी एक समान है। कृष्ण को इसे तैयार करने में डेढ़ महीना ही लगा।यह ट्रैक्टर 100 रुपये के खर्च में ही एक एकड़ गेहूं की कटाई कर देता है।

कृष्ण का मिनी ट्रैक्टर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मात्र 45 हजार रुपए की लागत से तैयार इस मिनी ट्रैक्टर में पीटीओ सिस्टम सहित वे सभी खासियत हैं जो नामी कंपनियों के बड़े ट्रैक्टरों में होती है।

कबाड़ के सामान से बनाया जुगाड़

कृष्ण का कहना है कि मिनी ट्रैक्टर में इंजन पुराने ऑटो का लगाया गया है, वहीं टायर और स्टेयरिंग मारुति कार के हैं। अन्य स्पेयर पार्ट्स भी कबाड़ से ही एकत्रित किए गए हैं।

तीन घंटे में करेगा एक एकड़ फसल की कटाई

मिनी ट्रैक्टर मात्र तीन घंटे में एक एकड़ की गेहूं की फसल की कटाई कर देता है। तीन घंटे में केवल 100 रुपए का डीजल खर्च होता है। कृष्ण का कहना है कि बड़े ट्रैक्टरों से एक एकड़ की गेहूं की कटाई पर करीब 300 से 400 रुपए प्रति एकड़ के तेल का खर्च हो जाता है। छोटी रिपर मशीन भी कृष्ण ने खुद ही तैयार की है।

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ये है दुनिया की अजब-गजब नौकरियां, जहां काम करने के लिए उतारने पड़ते हैं कपड़े

दुनिया में कई अजीबोगरीब नौकरियां है। कुछ गंदी नौकरियां भी हैं लेकिन क्या आपने कुछ ऐसी नोकरियों के बारे में सुना है जिनमें लोग बिना कपड़े पहने काम करते हैं। जी हां कुछ नौकरियां ऐसी हैं जहां लोगों को कपड़े पहनना सख्त मना है। आइए जानते हैं कौन सी हैं ये न्यूड नौकरियां।

न्यूड गार्डनिंग

यूएस, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप की कुछ जगहों पर न्यूड पुरुष गार्डनिंग का काम करते हैं। ये एक अजीब तरह का बिजनेस है। इसे करने के लिए पुरुषों को अपने कपड़े उतारने पड़ते हैं।

नेकेड रेस्तरां

लंदन के बुनियादी नामक इस रेस्तरां में लोगों को कपड़े उतारकर जाना पड़ता है। सिर्फ ग्राहक ही नहीं यहां काम करने वाले कर्मचारी भी बिना कपड़ों के ग्राहकों को खाना सर्व करते हैं।

न्यूड बरिस्ता

वॉशिंगटन में बने इस न्यूड बरिस्ता में कॉफी प्रेमियों को न्यूड वेटर कॉफी सर्व करते हैं। वेटरस भी बिकिनी में कॉफी सर्व करती है।

न्यूड योगा स्टूडियो

चेलसी में स्थित न्यूड योगा स्टूडियो में कपड़े उतारकर योगा क्लासेस कराई जाती है। इन क्लासेस के दौरान योगा सीखने वाले बिना कपड़ों के रहते हैं। यहां तक की योगा सिखाने वाले भी न्यूड रहते हैं।

न्यूड ब्रिटिश सॉफ्टवेयर कंपनी

यूके के बकिंगहमशायर में स्थित एक कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनी में उन महिलाओं को रखा जाता है जो काम के समय न्यूड रह सकती हों। इसं कंपनी में काम करने वाली महिला कोडर्स का न्यूड रहना अनिवार्य है।

न्यूड ऑनलाइन थेरापिस्ट

एक अज्ञात महिला नेकेड शेरापिस्ट नाम से ऑनलाइन लोगों की काउंसलिंग करती है। वह वेब कैम के जरिए लोगों से बातचीत कर न्यूड थैरेपी देती है जिसके चलते कई बीमारियों की काउंसिलिंग होती है।

टॉपलेस हाउसमेड

लॉस एंजलेस के कई इलाकों में टॉपलेस हाउसमेड रखने का बिजनेस चलता है। उन इलाकों में ज्यादातर घरों में टॉपलेस हाउसमेड काम करती हैं। ये वहां का एक शानदार बिजनेस है।

गोबर भी बन सकता है आपकी कमाई का जरिया, जानिए कैसे ?

गोबर से खाद और बायो गैस बनने के बारे में तो सभी ने सुना होगा, लेकिन आज हम आपको गोबर से बने गमले और अगरबत्ती के बारे में बताएंगे, कि कैसे गोबर आपकी कमाई का बेहतर जरिया बन सकता है।

इलाहाबाद जिले के कौड़िहार ब्लॉक के श्रींगवेरपुर में स्थित बायोवेद कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान शोध संस्थान में गोबर से बने उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। उत्तर प्रदेश ही नहीं दूसरे प्रदेशों के भी कई लोग इसका प्रशिक्षण ले चुके हैं।

प्रबंध निदेशक डॉ. हिमांशू द्विवेदी बताते हैं, “हमारे यहां गोबर की लकड़ी भी बनाई जाती है, इसका हम प्रशिक्षण भी देते हैं, इसे गोकाष्ठ कहते हैं। इसमें लैकमड मिलाया गया है, इससे ये ज्यादा समय तक जलती है, गोकाष्ठ के बाद अब गोबर का गमला भी काफी लोकप्रिय हो रहा है। गोबर से गमला बनने के बाद उसपर लाख की कोटिंग की जाती है। ये काफी प्रभावशाली है।”

जब कोई पौधा नर्सरी से लाते हैं तो वह प्लास्टिक की थैली में दिया जाता है और थैली हटाने में थोड़ी भी लापरवाही की जाए तो पौधे की जड़ें खराब हो जाती हैं और मिट्टी में लगाने पर पौधा पनप नहीं पाता। इस स्थिति से बचने के लिए गोबर का गमला काफी उपयोगी है। गमले को मशीन से तैयार किया जाता है।

इसमें मिट्टी भरकर पौधा लगाइए और जब इस पौधे को जमीन की मिट्टी में लगाना हो तो गड्ढा कर इस गमले को ही मिट्टी में दबा दीजिए। इससे पौधा खराब नहीं होगा और पौधे को गोबर की खाद भी मिल जाएगी। पौधा आसानी से पनप जाएगा।

संस्थान में केले के तने का भी अच्छा प्रयोग किया जा रहा है, प्रबंध निदेशक डॉ. हिमांशू द्विवेदी बताते हैं, “केले के तने से साड़ियां भी बनती हैं, इसी तरह से गोबर से एनर्जी केक बनाया जाता है, जो अंगीठी में तीन-चार घंटे तक आसानी से जल जाता है। ये गैस की तरह ही जलाया जाता है। इसी तरह स्टिकलेस अगरबत्ती भी बनाई जाती है।”

बायोवेद शोध संस्थान लाख के कई तरह के के मूल्यवर्धित वस्तुओं के निर्माण का प्रशिक्षण देकर कई हजार परिवारों को रोजगार के साथ अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध करा रहा है। संस्थान के निदेशक डॉ. बी.के. द्विवेदी बताते हैं, “जानवरों के गोबर, मूत्र में लाख के प्रयोग से कई मूल्यवर्धित वस्तुएं बनाई जा रही हैं।

गोबर का गमला, लक्ष्मी-गणेश, कलमदान, कूड़ादान, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती, जैव रसायनों का निर्माण, मोमबत्ती एवं अगरबत्ती स्टैण्ड व पुरस्कार में दी जाने वाली ट्रॉफियों का निर्माण आदि शामिल हैं। इन सभी वस्तुओं का निर्माण बायोवेद शोध संस्थान करा रहा है।”

साइकिल के पहिए में से जंगली जानवरों को भागने के लिए किसान ने बनया अनोखा जुगाड़

मध्यप्रदेश समेत देश में नील गाय, जंगली जानवर खेतों में खड़ी फसलों को नष्ट कर देते हैं। किसानों के लिए जंगली जानवर हमेशा चिंता का विषय बना रहता है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने सोलर पॉवर फेंसिंग मशीन योजना लेकर आई है,

लेकिन प्रदेश के कुछ किसानों के पास सोलर पॉवर फेंसिंग लगाने के लिए पर्याप्त रुपए नहीं रहते हैं, इस कारण वे इसे लगाने में समर्थ रहते हैं, लेकिन धार जिले के खिलेड़ी गांव के किसान विनोद खोकर ने एक नया नवाचार किया है। उन्होंने एक ऐसा यंत्र बनाया है, जिसकी आवाज से जंगली जानवर भाग जाए।

हवा चलित पंखे लगने के बाद खेत के आसपास अब कोई नहीं आता

किसान विनोद खोखर ने खेत में मक्का लगा रखी है। इसमें अब भुट्‌टे भी आ गए हैं। ऐसे में जंगली जानवर रात और दिन फसल को नुकसान पहुंचाने खेतों में घुस जाते हैं, ये हवा चलित पंखे लगने के बाद खेत के आसपास कोई नहीं आता है।

किसान खोखर ने भंगार को ऐसा निर्मित किया है, जिससे वह उपयोगी यंत्र बन सके। उन्होंने भंगार में रखी साइकिल का पहिया और एक्सल लिया।

पुराने कूलर की पंखुड़ी के ठीक पीछे एक डिब्बा लगाकर उसे नट से पैक कर दिया। जिससे वह चलित हवा पंखा तैयार कर इसे खेत में लगाया। जैसे ही तेज हवा चलती है तो पंखा चलता है तो नट डिब्बे से टकराते रहते हैं और जोर-जोर से आवाज आती है।

आवाज आने से खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले पक्षी और खासकर घोड़ा भाग जाते हैं। यानी भंगार के सामान से तैयार यह पंखे खेत में कांग भगोड़ा की काम कर रहे है।

महिला किसानों ने बनाया देसी कोल्ड स्टोर, ऐसे करता है काम

आलू-टमाटर जैसी सब्जियों को सड़क पर फेंकने को मजबूर किसानों के लिए बांस से बना देसी कोल्ड स्टोरेज किसी राहत से कम नहीं है। यह कोल्ड स्टोरेज हजारीबाग के टाटीझरिया प्रखंड की महिलाओं की देन है।

झारखंड के लगभग हर इलाके में कोल्ड स्टोरेज की समस्या आम है, देश के बाकी हिस्सों में भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। फेडरेशन ऑफ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कोल्ड स्टोरेज की उचित व्यवस्था नहीं होने से देश में 40 प्रतिशत फसल, सब्जियां, फल-फूल, दूध-मछली व अन्य उत्पाद बर्बाद हो जाते हैं।

टाटीझरिया प्रखंड के गांवों की महिलाओं ने बांस के बेंत से देसी कोल्ड स्टोरेज तैयार कर इस समस्या का हल ढूंढ लिया है। पहली बार बनाए गए इस तरह के कोल्ड स्टोरेज क्षेत्र के दर्जनों गांवों में खुशहाली का मंत्र लेकर आए हैं।

हजारीबाग का यह इलाका महिला समूहों द्वारा की जा रही सामूहिक खेती के कारण भी जाना जाता है। ऐसे में किसान महिलाओं द्वारा देसी कोल्ड स्टोरेज तैयार करना उनकी दोहरी उपलब्धि है।

खराब नहीं होगा आलू-प्याज

बांस के बेत से बने इस कोल्ड स्टोरेज की खासियत यह है कि इसमें पूरे एक सीजन तक आलू, प्याज, लहसुन आदि को सुरक्षित रख सकते हैं।

कम लागत में उत्पादों की बर्बादी रोककर बेहतर मुनाफा दिलाने वाला यह देसी कोल्ड स्टोरेज स्थानीय किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। टाटीझरिया प्रखंड के एक दर्जन गांवों में अब घर-घर ऐसे कोल्ड स्टोरेज बनाए जा रहे हैं। आलू-प्याज के इस सीजन में इसकी मांग भी खासी है।

देसी कोल्ड स्टोरेज की खासियत

  • यह पूरी तरह से सुरक्षित है। यह किसी भी हवादार कमरे में तैयार किया जा सकता है।
  • यह आलू-प्याज को नमी से बचाता है।
  • बांस में फंगस नहीं लगता है, यही वजह है कि सब्जियां सड़ती नहीं है।

बदलाव की कहानी लिख रहीं महिलाएं

कोल्ड स्टोरेज के इस देसी स्वरूप का मॉडल डिजिटल ग्रीन संस्था के डॉ. रवि ने तैयार किया है। इसे दिल्ली में भी प्रदर्शित किया गया था। वर्तमान में खैरा,अमनारी, फुरुका, बरकाखुर्द, रतनपुर सहित अन्य गांवों में 100 से अधिक कोल्ड स्टोरेज बन चुके हैं। सृजन फाउंडेशन द्वारा महिला किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी भी अब इस अभियान से जुड़कर महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण देकर ऐसे मॉडल बनवा रही है। इस मुहिम से जुड़कर ऐसे मॉडल तैयार करनेवाली महिलाएं अच्छी-खासी आमदनी भी पैदा रही हैं।

सिर्फ 10 रुपए के टूथपेस्ट से नई जैसी चमक उठेगी आपकी पुरानी Bike, ऐसे करें इस्तेमाल

दुनिया में सभी चाहते हैं कि उनकी बाइक हमेशा नई जैसी चमकती रहे, लेकिन ऐसा होना तभी मुमकिन होता है जब ठीक प्रकार से देखभाल की जाए।

अगर आप बाइक का ठीक प्रकार से ख्याल नहीं रखेंगे तो कुछ ही दिनों में नई बाइक भी पुरानी लगने लगेगी। अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी बाइक हमेशा नई जैसी रहे तो आज हम आपको कुछ आसान टिप्स बता रहे हैं, जिसकी मदद से ये संभव हो जाएगा।

सड़कों पर इतनी ज्यादा धूल मिट्टी होती है कि बाहर निकलते है कि बाइक गंदी हो जाती है और धीरे-धीरे बाइक का पेंट हल्का होने लगता है और चमक खत्म हो जाती है। कुछ लोग क्या करते हैं कि अपनी बाइक को साबुन से धोने लगते हैं और जिससे बाइक का पेंट खराब हो जाता है।

बाइक को धोने के बाद हमेशा सूखे कपड़े से ही अच्छी प्रकार से साफ करना चाहिए। इससे क्या होता है कि कहीं भी पानी नहीं रहता है और जंग लगने का खतरा नहीं रहता है। बाइक के टायरों को भी ठीक से साफ करना चाहिए, क्योंकि सड़क पर गंदगी चिपक जाती है और उसकी वजह से टायर अच्छे नहीं लगते हैं।

बाइक की चमक को बरकरार रखने के लिए टूथपेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। आप बाजार से किसी भी ब्रांड का सस्ता सा सफेद टूथपेस्ट खरीद सकते हैं और उसके बाद की प्रकिया कुछ इस प्रकार है…

बाइक को पहले किसी साफ कपड़ से पूरी तरह साफ कर लीजिए और उसके बाद बाइक की बॉडी पर अलग-अलग जगह टूथपेस्ट लगाना है। टूथपेस्ट लगाने के बाद कुछ मिनट इंतजार करना है और साफ कपड़ा लेकर टूथपेस्ट को रगड़ना है।

जब टूथपेस्ट पूरी बॉडी पर फैल जाए तो उसके बाद करीब 15 मिनट तक इंतजार करना है। उसके बाद साफ कपड़े को पानी में भिगा कर टूथपेस्ट को बॉडी से हटाइए। जब टूथपेस्ट बॉडी से पूरी तरह हट जाए तो एक सूखा साफ कपड़ लीजिए और बाइक की बॉडी को दोबारा हल्के हाथों से साफ कीजिए। अब आपकी पुरानी बाइक भी नई बाइक की तरह चमकने लगेगी।

11वीं फेल किसान ने बनाया अपना मिल्क एटीएम

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के एक किसान हैं, नीलेश गुस्सर। 11वीं फेल नीलेश ने पिछले साल ऑटोमेटिक एटीएम मिल्क मशीन बनाई थीं। इस साल उन्होंने इसे और भी ज्यादा हाइटेक बना दिया है।

उन्होंने इस मशीन में बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंटिंग, आईडी और पासवर्ड, प्रीपेड कार्ड जैसे फीचर जोड़ दिए हैं। अब इस मशीन से कैशलेस तरीके से दूध निकाला जा सकेगा। 28 साल के नीलेश ने पिछले साल 30 एटीम मिल्क मशीन किसानों को बेची थीं। इस मशीन में 20, 50 और 100 रुपये के नोटों से दूध निकाला जा सकता है।

इस मशीन से किसानों को काफी फायदा हो रहा है। वे किसान जो कॉओपरेटिव या दूध डेयरी को अपना दूध नहीं बेचना चाहते वे अपने मन मुताबिक दाम पर मिल्क एटीएम लगाकर दूध बेच रहे हैं। कॉओपरेटिव या डेयरी को दूध बेचने पर उन्हें बिचौलियों को कमीशन देना पड़ता है जिससे उन्हें नुकसान होता है।

गिर जिले के तलाला इलाके से 7 किलोमीटर स्थित गांव खिरधर के रहने वाले नीलेश ने पिछले साल मिल्क एटीएम मशीन बनाई थी। वे अब तक गुजरात के जामनगर, द्वारका, पोरबंदर जैसे इलाकों के साथ ही महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के किसानों को लगभग 30 मशीनें बेच चुके हैं।

नीलेश ने बताया कि पहले उनके पास 6 गायें थीं। जिनका दूध निकालकर वे सहकारी मंडी में बेचने के लिए ले जाते थे, लेकिन उन्हें अच्छा दाम नहीं मिलता था। वे देखते थे कि उनसे तो सिर्फ 25 रुपये प्रति लीटर में दूध बेचा जा रहा है जबकि शहर में दूध 50 रुपये में मिलता है।

उन्होंने इसके बाद एटीएम मिल्क मशीन बनाने का फैसला कर लिया। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर थोड़ा सा रिसर्च भी किया और मुंबई, राजकोट, अहमदाबाद से मशीन बनाने के पुर्जे मंगवाए। उन्होंने नोट के सेंसर और फिंगरप्रिंट की मशीन ताइवान से मंगवाई।

नीलेश ने हमसे बात करते हुए बताया, ‘मैं बिचौलियों का काम खत्म करना चाहता था। वे किसान और कस्टमर के बीच में आकर कमीशन खाते थे। जब मैं नजदीक की कॉओपरेटिव डेयरी में दूध बेचता था तो वहां भी मुझे दूध का सही दाम नहीं मिलता था।

इसलिए मैंने ये मशीन बनाई।’ आपको जानकर हैरानी होगी कि नीलेश 11वीं फेल हैं। उन्होंने कोई इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग नहीं ली है। वे बताते हैं कि उन्हें मशीनों को बनाने का शौक रहा है। नीलेश बताते हैं कि इस मशीन की बदौलत किसान को दूध की डेढ़ गुना ज्यादा कीमत मिलती है। किसान सिर्फ एक साल में ही इस मशीन का दाम रिकवर कर सकते हैं।

बनकर तैयार है मिल्क एटीएम

जिन किसानों के पास तीन से ज्यादा गाय या भैंसे होती हैं उनके लिए ये मशीन काफी फायदेमंद है। नीलेश ने बताया, ‘इस बार मैंने मशीन को पूरी तरह से कैशलेस बना दिया है। अब मशीन में पैसे नहीं डालने पड़ेंगे। जिस भी ग्राहक को दूध लेना होगा उसे अपना फिंगरप्रिंट इस मशीन में रजिस्टर करवाना होगा उसके बाद वह एक निश्चित मात्रा में दूध निकाल सकेगा।’

इसके साथ ही यूजरनेम और पासवर्ड के जरिए भी प्रीपेड कार्ड द्वारा दूध निकाल सकेंगे। नीलेश ने इस तरह की अभी पांच कैशलेस मशीनें बनाई हैं। जिन्हें वे तमिलनाडु, उड़ीसा और राजस्थान के किसानों को बेच चुके हैं।

मशीन की कीमत 75 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक है। इसमें 50 से लेकर 250 लीटर तक दूध स्टोर किया जा सकता है। इसमें फ्रिज के साथ ही पावर बैकअप की सुविधा भी है। जिससे लाइट चली जाने की स्थिति में दूध को खराब होने से बचाया जा सकेगा।

नीलेश ने सबसे पहले कच्छ के एक किसान वेलाजी भुइदिया को यह मशीन बेची थी। उन्होंने अपनी गायों का दूध बेचने के लिए मशीन खरीदी थी। इस मशीन को कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है। अब वेलाजी दूसरी मशीन खरीदने की योजना बना रहे हैं।

यहां सिर्फ 14,999 रुपये में मिल रहा 1 लाख रुपये वाला iPhone X

हर किसी का सपना  होता है उसके पास एप्पल का iPhone हो। वहीं, अगर बात iPhone X की हो तो इस डिवाइस को हर कोई खरीदना चाहता है। लेकिन, इसकी कीमत ज्यादा होने के कारण लोग इसे खरीद नहीं पाते हैं।

ऐसे में अगर यह फोन कम किमत में मिले तो कोई भी इसे बिना सोचे उसे खरीद लेगा। लेकिन, जब किमत बहुत ही कम हो तब सोचना जरूरी हो जाता है। क्योंकि, जिस iPhone X को आप सिर्फ 14,999 रुपये में खरीद रहे हैं वो डुप्लिकेट आईफोन भी हो सकता है।

iPhone X सिर्फ 14,999 रुपये में

दिल्ली की गफ्फार मार्केट सेकेंड हैंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। यहां iPhone के लगभग सभी मॉडल कई गुना सस्ते दाम पर मिल जाते हैं। ठीक ऐसा ही iPhone X के साथ भी है।इसके दो वेरिएंट हैं जिसमें एक 64GB और दूसरा 256GB मेमोरी वाला है।

256GB मेमोरी वाले फोन की कीमत 1,02,000 रुपए है, लेकिन इस मार्केट में इस फोन को सिर्फ 10 हजार या उससे भी कम में खरीदा जा सकता है। दरअसल, ये iPhone X का डुप्लिकेट मॉडल है। जो देखने में पूरी तरह ऑरिजनल के जैसा नजर आता है।

यहां पर जो इलेक्ट्रॉनिक मार्केट है वो डुप्लिकेट प्रोडक्ट या क्लोन प्रोडक्ट को सेल करती है। इस मार्केट में आईफोन, सैमसंग, वीवो, ओप्पो समेत कई चाइनीज कंपनियों के फोन काफी कम कीमत पर मिल जाते हैं। हालांकि, ये फोन ऑरिजनल होंगे इसकी गारंटी नहीं है।

यहां की मार्केट में कई फोन्स की दुकानें हैं, जहां पर आईफोन मिलता है। इन दुकानों पर आप बारगेनिंग भी कर सकते हैं। ध्यान रहें, जब भी आप इस मार्केट से किसी प्रोडक्ट की खरीदारी कर रहे हैं तो आपको उसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए।

iPhone X स्पेसिफिकेशंस और कैमरा

iPhone X में 5.8 इंच का बिना बेजल वाला डिस्प्ले दिया गया है जिसका रेजॉलूशन (1125×2436 पिक्सल) है। इसके दो स्टोरेज वेरिएंट 64 जीबी और 256 जीबी में उपलब्ध हैं। फोटोग्राफी के लिए इसमें 12 मेगापिक्सल के दो रियर कैमरे दिए गए हैं।

पहले वाले का अपर्चर f/1.8 है और दूसरे का f/2.4 है। इसके साथ ही सेल्फी के लिए 7 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। iPhone X में कोई होम बटन नहीं है। इसमें स्क्रीन पर नीचे से ऊपर की ओर स्वाइप कर होम पर जा सकते हैं।

जापान का पासपोर्ट बना दुनिया में सबसे ‘पावरफुल’, जानें किस पायदान पर है भारत

किसी भी देश का पासपोर्ट दुनिया में उस देश की साख को प्रस्तुत करता है. और पॉवरफुल पासपोर्ट का मतलब ये है कि आप कितने अधिक देशों की यात्रा बिना वीजा के कर सकते हैं. यानी पावरफुल पासपोर्ट पर वीजा ऑन अराइवल की सुविधा दी जाती है.

अगर आपके पास जापान का पासपोर्ट है तो आप खुद को सबसे पावरफुल कह सकते हैं, क्योंकि पूरी दुनिया में जापान के पासपोर्ट को सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट का दर्जा दिया गया है. पासपोर्ट की ग्लोबल इंडेक्स रैंकिंग को जापान के पासपोर्ट को सबसे ज्यादा वजनी यानी पावरफुल बताया गया है.

इस लिस्ट में हमेशा से यूरोपीय देशों का दबदबा रहा है, लेकिन पिछले दो साल से एशिया के देशों ने इस पर कब्जा जमा लिया है.

हैनले (Henley) पासपोर्ट इंडेक्स ने वर्ष 2018 के पावरफुल वीजा की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट के मुताबिक, जापान के पासपोर्ट इस इंडेक्स में शीर्ष स्थान पर रखा गया है. जापान के पासपोर्ट को 190 देशों से वीजा ऑन अराइवल का दर्जा मिला हुआ है.

जापान यह टॉप पोजीशन सिंगापुर को पछाड़ कर हासिल की है. बीते साल सिंगापुर इस लिस्ट में शीर्ष पर था. सिंगापुर के पासपोर्ट पर बिना पूर्व वीजा के 189 देशों की यात्रा कर सकते हैं. जापान की रैंकिंग में इस साल म्यांमार से अराइल ऑन वीजा की सुविधा मिलने के बाद सुधार हुआ है.

इस तरह सिंगापुर इस लिस्ट में अब पहले स्थान से खिसककर दूसरे स्थान पर और जर्मनी दूसरे स्थान से नीचे आकर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. तीसरे स्थान पर जर्मनी के साथ दक्षिण कोरिया और फ्रांस भी शामिल हो गए हैं. तीसरे स्थान के पासपोर्ट धारक 188 देशों की यात्रा कर सकते हैं. फ्रांस और दक्षिण कोरिया को म्यांमार और उज़्बेकिस्तान ने अराइवल की सुविधा दी है.

बीते साल सिंगापुर इस लिस्ट में टॉप पर था और उसके बाद दूसरे नंबर पर जर्मनी, तीसरे नंबर पर स्वीडन और दक्षिण कोरिया थे. भारत 75वें स्थान पर था और भारत का वीजा फ्री स्कोर 51 था. अफगानिस्तान इस लिस्ट में सबसे नीचे था. उसके पास सिर्फ 22 अंक थे.

भारत 81वें स्थान पर

इस इंडेक्स में भारत को 81वीं रैंक पर रखा गया है. भारत के पासपोर्ट पर 60 देशों की यात्रा की अनुमति है. वहीं अगर पाकिस्तान की बात की जाए वह 104वें स्थान पर है. पाकिस्तानी पासपोर्ट होल्डर 33 देशों की यात्रा कर सकता है.

अमेरिका और ब्रिटेन, दोनों ही देशों के पासपोर्ट 186 देशों की यात्रा के साथ इस इंडेक्स में 5वें स्थान पर है. इंडेक्स के अंतिम पायदान पर अफगानिस्तान और इराक को जगह दी गई है. इन देशों के पासपोर्ट पर केवल 30 देशों के यात्रा की अनुमति मिली हुई है.

रूस और चीन की बात की जाए तो दोनों ही देश अपनी बॉडर लाइन को पकड़े हुए हैं. रूस एक अंक गिरकर 46 से 47वें स्थान पर पहुंच गया है. चीन की रैंकिंग में भी दो अंक गिरे हैं और इस तरह चीन 71वें स्थान पर पहुंच गया है.

हैनले पासपोर्ट इंडेक्स दुनियाभर के देशों के पासपोर्ट को उनकी देशों की वैधता के स्थान पर रैंकिंग देता है. ये आंकड़े इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन से इकट्ठा किए जाते हैं.