अगर AC, TV,मोबाइल खरीदने का मन लेकिन पुराने को लेकर हैं परेशान, तो यहां पर मिल रहा है एक्सचेंज ऑफर

अगर इस त्योहार में नया एसी, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन या फर्नीचर खरीदने के प्लान कर रहे हैं लेकिन नया खरीदने से पहले पुराना बेचने की टेंशन आपको हो रही है? ई-कॉमर्स कंपनियां और वेबसाइट आपके लिए इस प्रॉब्लम का सॉल्युशन भी है।

क्या है एक्सचेंज ऑफर

ई-कॉमर्स कंपनियां स्नैपडील, अमेजन और फ्लिपकार्ट आदि एक्सचेंज ऑफर चला रही हैं।  इन ऑफर्स में आप टीवी के बदले टीवी ही एक्सचेंज कर सकते हैं। मोबाइल के बदले मोबाइल एक्सचेंज कर सकते हैं।

टीवी पर क्या है एक्सचेंज ऑफर

अगर इस बार आप अपना पुराना टीवी बेचकर एलईडी टीवी खरीदना चाहते हैं तो ऑनलाइन अच्छी एक्सचेंज ऑफर डील मिल जाएगी। स्नैपडील, अमेजन और फ्लिपकार्ट सभी एक्सचेंज ऑफर चला रही हैं। इसमें आप अपने किसी भी पुराने टीवी को बेचकर नया खरीद सकते हैं। पुराना टीवी ये कंपनियां 1,400 से 6,000 रुपए में ले रही हैं। पुराने टीवी की कीमत ब्रांड और टीवी के साइज पर निर्भर करती है।

मोबाइल

अगर आप नया मोबाइल खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो पुराना मोबाइल बेचकर आपको अच्छी डील मिल जाएगी। पुराना मोबाइल ई-कॉमर्स कंपनी 1,600 रुपए से लेकर 15,360 रुपए में ले रही है। मोबाइल की ये वैल्यू आपके पुराने मोबाइल के ब्रांड और मॉडल पर निर्भर करती है।

फ्रिज पर एक्सचेंज ऑफर

अगर आप पुराने फ्रिज के बदले नया फ्रिज खरीदना चाहते हैं तो आपके लिए ऑनलाइन खरीदने पर अच्छी डील मिल रही है। ई-कॉमर्स कंपनियां पुराना फ्रिज 1,600 रुपए से लेकर 9,750 रुपए में ले रही हैं। पुराने फ्रिज की कीमत ब्रांड, सिंगल डोर, डबल डोर, ट्रिपल डोर जैसे फैक्टर पर निर्भर करती है।

वाशिंग मशीन

नई वाशिंग मशीन खरीदने पर पुरानी निकालना चाहते हैं तो वह ई-कॉमर्स कंपनियां पर डील मौजूद है। कंपनी पुरानी वाशिंग मशीन 550 रुपए से लेकर 3,300 रुपए में ले रही है। पुरान वाशिंग मशीन की कीमत इस पर निर्भर करती है आपकी वाशिंग मशीन ऑटोमेटिक है या सेमीऑटोमिटक।  इन्ही सभी फैक्टर पर आपकी वाशिंग मशीन की कीमत निर्भर करती है।

एसी

ई-कॉमर्स कंपनियां पुराने एसी को 1,000 रुपए से लेकर 1,700 रुपए में ले रही है। पुराने एसी की कीमत उसके ब्रांड, वजन और इस पर निर्भर करती है कि पुराना एसी स्प्लिट है या विंडो।

इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करने के लिए विराट कोहली को मिलते है 88 लाख रुपए, जाने कैसे लोग इंस्टाग्राम से कमा रहे है करोड़ों रुपए

क्रिकेट में अपना जादू चलाने के साथ ही इंस्टाग्राम पर भी विराट कोहली की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में इंस्टाग्राम सेलेब्रिटी की लिस्ट में विराट कोहली का नाम भी शुमार है।

विराट को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करने के लिए 88 लाख रुपए मिलते हैं। उसी प्रकार से बिजनेसवुमेन कायली जेनर इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करके 7.4 करोड़ रु तक कमा लेती हैं। इसी के चलते जेनर इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली सेलेब्रिटी हैं।

बता दें कि जुलाई में, जेनर अमेरिका की फोर्ब्स की लिस्ट में आने वाली सबसे कम उम्र की महिला थी। उनके पास लगभग 900 मिलियन डॉलर की संपत्ति है। आज हम आपको दुनिया के उन 5 लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने साल 2018 में इंस्टाग्राम से सबसे ज्यादा कमाई की है।

बियोंसे नोल्स:

बियोंसे नोल्स ब्यूटी विथ द वॉयस के नाम से भी जाना जाता है। वह अमेरिकी सिंगर हैं। बियोंसे ने साल 2018 में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करके 700,000 (15800000 रुपए) डॉलर की कमाई की। वहीं, साल 2017 में कायली को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करने के 400,000 डॉलर मिले थे। उनके इंस्टाग्राम पर 116 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

किम कार्दशियन:

किम एक अमेरिकी मॉडल और व्यवसायी हैं। किम ने साल 2018 में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करके 720,000 (53280000 रुपए)डॉलर की कमाई की। वहीं, साल 2017 में कायली को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करने के 500,000 डॉलर मिले थे। उनके इंस्टाग्राम पर 114 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

क्रिस्टियानो रोनाल्डो:

रोनाल्डो पुर्तगाल के फुटबॉल प्लेयर हैं। रोनाल्डो ने साल 2018 में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करके 750,000 (55500000 रुपए)डॉलर की कमाई की। वहीं, साल 2017 में कायली को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करने के 400,000 डॉलर मिले थे। उनके इंस्टाग्राम पर 137 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

सेलेना गोमेज:

सेलेना गोमेज अमेरिकी सिंगर है। सेलेना ने साल 2018 में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करके 800,000 (59200000 रुपए)डॉलर की कमाई की। वहीं, साल 2017 में कायली को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करने के 550,000 डॉलर मिले थे। उनके इंस्टाग्राम पर 139 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

लुधियाना के एक पकौड़ावाले की कमाई सुनकर आप दंग, इनकम टैक्स विभाग ने वसूले 60 लाख रूपए

पकौड़ा बेचने को रोजगार बताने पर कांग्रेस पार्टी सत्ताधारी बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाती है, लेकिन लुधियाना के एक पकौड़ावाले की कमाई सुनकर आप दंग रहे जाएंगे और मान लेंगे कि चाय-पकौड़े की दुकान का कोई जोड़ नहीं.

आयकर विभाग ने पान सिंह पकौड़ा शॉप पर छाप मारा और दुकान के मालिक पन्नू सिंह पकौड़ेवाले से 60 लाख रुपये वसूल किए.

दिन भर गिने पकौड़े

पान सिंह पकौड़ा शॉप अपने स्वाद के लिए सिर्फ लुधियाना ही नहीं, बल्कि पूरे पंजाब में मशहूर है. आयकर विभाग ने उनकी दो दुकानों पर छापा मारा. आयकर विभाग को खबर मिली थी कि दुकान मालिक रिटर्न में अपनी वास्तविक आमदनी को छुपा रहा है.

इसके बाद प्रधान आयुक्त डीएस चौधरी के निर्देशन में छाप मारा गया. आयकर विभाग की टीम ने हिसाब किताब रखने वाले सभी रजिस्टर को जब्त किया ही, साथ ही दिन भर दुकान में बैठकर बिक्री का जायजा भी लिया.

सच्चाई का पता चला

आयकर विभाग ने दुकान से बिक रहे एक-एक पकौड़े को गिना और उसके आधार पर पन्नू पकौड़ेवाले की वार्षिक आमदनी का अंदाज लगाया. इस आमदनी का उनके वार्षिक रिटर्न से मिलान किया गया तो पता चला कि आमदनी को बहुत कम दिखाया जा रहा है.

ये सर्वे गुरुवार को शुरू होकर शुक्रवार तक चला. कार्रवाई गिल रोड और मॉडल टाउन स्थित दोनों दुकानों पर की गई. विभाग इसके बाद यदि जरूरत पड़ी तो आगे की कार्रवाई करेगा.

बढ़ती गई शोहरत

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पन्ना सिंह ने गिल रोड पर 1952 में एक छोटी सी दुकान शुरू की थी. यहां बने पकौड़े इतने मशहूर हुए कि इस दुकान का नाम और शौहरत दिन दूनी और रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ते गए और इसका दूसरा आउटलेट भी खोल दिया गया.

कहते हैं जो भी लुधियाना आता है तो एक बार पन्नू पकौड़े वाले के पकौड़े जरूर खाता है. लोगों का कहना है कि छापे के दौरान कई लोगों ने दुकान पर जाने से परहेज किया और केवल वही लोग गए जिन्हें छापे की जानकारी नहीं थी. यानी दुकान की आमदनी आयकर विभाग के अनुमान से भी अधिक हो सकती है.

इन देशी नुस्खों द्वारा मिंटो में मरते है कीट

आधुनिक युग में कीटनाशकों का नाम मात्र भी इस्तेमाल न करते हुए खेतीबाड़ी करना थोड़ा कठिन है, लेकिन देशी तरीकों से खेतीबाड़ी में खर्च भी बहुत कम आता है।

यह देशी चीजें आप को आपके इर्द –गिर्द ही मिल जाती हैं, बगैर किसी भाग दौड़ के, चाहे आप की फसल सब्जी की हो या अनाज की फसल हो,बगैर किसी रसायन के तैयार की जा सकती है। जिससे मानव जीवन पर कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होता है, तथा उसकी कीमत भी रासायनिक फसलों से ज़्यादा मिलती है।

देशी नुस्खा (क):- सफ़ेद फिटकरी-

जब भी कोई फसल ऊपर से लेकर नीचे तक सूखने लगती है, तो समझना चाहिए कि इसकी जड़ों पर फफूंद का हमला हो चुका है। इससे बचने के लिए खेत में पानी लगाते समय ट्यूबवेल के गड्ढे में 1 किलो ग्राम सफ़ेद फिटकरी का टुकड़ा रख दें और पानी देना शुरू कर दें। वह फिटकरीयुक्त पानीपौधों कि जड़ों में लग जाएगा तथा पौधे पुनः स्वस्थ हो जाएंगे।

देशी नुस्खा (ख):- उपले कि राख तथा बुझा चूना-

उपले या चूल्हे कि राख तथा बुझा चूना, एक किलो ग्राम प्रति 25 लीटर पानी में डाल कर 5-6 घंटे के लिए रख दें, तद्उपरांत इस घोल को जितनी भी बेल (जायद) प्रजाति कि फसलों जैसे:- कद्दू, खीरा, घिया, तोरी आदि पर, इसका छिड़काव करने से लाल सूड़ी, कीड़े-मकौड़ों से छुटकारा मिल जाएगा।

देशी नुस्खा (ग):- गोमूत्र, जंगली तंबाकू,ऑक, नीम के पत्ते तथा धतूरा:-

किसी भी प्रकार कि फसल के लिए कीटनाशक कि जगह इन पाँच चीजों (प्रति 500 ग्राम) का घोल बनाकर, इन सभी को 15-20 दिन के लिए एक बर्तन में (चाहे प्लास्टिक का टब या मिट्टी का घड़ा) 20-25 लीटर पानी डाल कर रख देतें हैं। बाद में इस घोल को कपड़े से छान कर किसी भी प्रकार कि फसल के लिए कीटनाशक की जगह छिड़काव कर सकतें हैं।

देशी नुस्खा (घ):- खट्टी लस्सी, गलगल और गोबर के उपले:-

खट्टी लस्सी दो किलो, गलगल (नींबू प्रजाति) एक, गोबर के उपले तीन किलो। उपले जीतने पुरानें होंगे उतना ही अच्छा होगा। इन उपलों को 6 दिन के लिए 10-12 लीटर पानी में डाल कर रख देना चाहिए।

उसके बाद इन उपलों को अलग निकाल दें, और उपले वाले पानी में दो किलो खट्टी लस्सी जो कि 15 दिन पुरानी हो तथा एक गलगल पीस कर या निचोड़ कर सारे घोल को कपड़े से छान कर एक घोलक तैयार करके,पीलिया रोग से ग्रसित फसल के ऊपर छिड़काव कर देंगे। कुछ दिनों के बाद फसल का रंग रूप देखने लायक होगा।

माइक्रो एटीएम लगा करें कमाई, 35 हजार बैंक मित्र बना रही है यह कंपनी, ऐसे करे अप्लाई

फिनटेक फर्म महाग्राम ने कोटक महिंद्रा बैंक से समझौता किया है, जिसके मुताबिक कंपनी में देश में लगभग 35 हजार बैंक मित्र बनाएगी, जो अपने यहां माइक्रो एटीएम लगाएंगे।

साथ ही, वे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी बेच सकेंगे। महाग्राम के फाउंडर व सीईओ राम श्रीराम ने कहा कि बैंक मित्र के लिए कोई भी ऑनलाइन अप्लाई कर सकता है।

कौन बन सकता है बैंक मित्र

  • अगर आप 10वीं पास भी हैं, तो बैंक मित्र बन सकते हैं।
  • आपको कम्प्यूटर और इंटरनेट की बेसिक नॉलेज होनी चाहिए।
  • आपकी उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए।
  • आपके पास एक ऑफिस स्पेस होना चाहिए, या आप किराये पर भी ले सकते हैं।
  •  अगर आप पोस्टल या बैंक से रिटायर हैं तो आपको वरीयता मिलेगी।

कौन-कौन से काम करने होंगे

  • माइक्रो एटीएम होने के कारण कैश विदड्रॉल और कैश डिपोजिट की सुविधा होगी।
  •  बैंक खाता खोल सकेंगे
  • लोन देने की सुविधा मिलेगी
  • पैन कार्ड भी बना सकते हैं
  • इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेच सकते हैं
  • आप कॉमन सर्विस सेंटर की तरह कई तरह की सरकारी कामकाज के लिए ऑनलाइन सर्विसेज भी दे सकते हैं
  • सेविंग्स स्कीम्स, एफडी आदि भी बेच सकते हैं

कैसे करें अप्लाई

अगर आप बैंक मित्र बनना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। महाग्राम की वेबसाइट पर सारी जानकारी उपलब्ध है। ऑनलाइन अप्लाई के लिए आप https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLScytPPDjpNiYaKsR3OP1iPtmgRrHlb9Zq5veMqn7K2f2FY9Ow/viewform?c=0&w=1पर क्लिक करके अप्लाई कर सकते हैं।

 

कैसे आएगा कैश

आप यदि महाग्राम के बैंक मित्र बन जाते हैं और आपको माइक्रो एटीएम मिल जाता है तो लोग आपके पास रखी पीओएस मशीन (माइक्रो एटीएम) में कार्ड से स्वैप करके पैसा निकाल सकते हैं। इसके लिए आपके पास कैश का होना जरूरी है। आपको कंपनी की ओर से कैश नहीं दिया जाएगा, बल्कि आप अपने पास रखे कैश से ही लेनदेन करेंगे।

ऐसी स्थिति में आप यदि अपना पैसा इस्तेमाल करते हैं तो कंपनी साथ के साथ आपके अकाउंट में पैसा जमा कराएगी। इतना ही नहीं, यदि आप कोई फाइनेंशियल प्रोडक्ट बेचते हैं तो आप उस पैसे का  इस्तेमाल भी कर सकते हैं। या कोई आपके पास कैश जमा कराता है तो विदड्रॉल के वक्त आप यह पैसा दे सकते हैं।

कितनी होगी कमाई

श्रीराम ने कहा कि आपको कितनी कमाई होगी, यह आपकी लोकेशन और ट्रांजैक्शन पर निर्भर करता है। वैसे शुरुआती कमाई 7 से 8000 रुपए तक हो सकती है। इतना पैसा पार्टटाईम से कमा सकते हैं। यदि आप फुलटाइम काम करते हैं तो आप दो से तीन गुणा अधिक कमा सकते हैं।

ये हैं देश के 5 सस्ते फर्नीचर मार्केट, आधे दाम में मिलता है सामान

अगर इन त्योहारों में फर्नीचर खरीदने का प्लान कर रहे हैं लेकिन आपको ये समझ में नहीं आ रहा है कि कहां से बजट में फर्नीचर की शॉपिंग करें। तो यहां आपको ऐसे बाजारों के बारे में बता रहे हैं जहां से आप रिटेल फर्नीचर दुकान की तुलना में आधे दाम में फर्नीचर खरीद सकते हैं। आइए जानते हैं इन बाजारों के बारे में..

कीर्ति नगर मार्केट, दिल्ली

कीर्ति नगर मार्केट दिल्ली का सबसे बड़ा फर्नीचर मार्केट है। यहां 2,000 से अधिक फर्नीचर की दुकानें हैं। यहां आपको घर से लेकर ऑफिस तक का फर्नीचर आसानी से मिल जाएगा।

यहां फर्नीचर मैन्युफेक्चर ज्यादा है जिसके कारण यहां महंगा फर्नीचर भी रिटेल मार्केट की तुलना में 30 से 40 फीसदी कम दाम में मिल जाएगा। इस मार्केट में जाने के लिए आप अपनी गाड़ी लेकर जा सकते हैं। यहां पार्किंग मिल जाएगी।

पंचकुईयां मार्केट, दिल्ली

दिल्ली की पंचकुईयां मार्केट फर्नीचर की होलसेल मार्केट है। यहां आपको बेड, ड्रेसिंग टेबल, सोफा सेट, टेबल, एंटरटेनमेंट यूनिट, डाइनिंग टेबल, कॉर्नर टेबल, चेयर सब मिल जाएगा। यहां फर्नीचर की करीब 1,000 से अधिक दुकानें हैं।

यहां फर्नीचर मैन्युफैक्‍चरर ज्यादा है जिसके कारण यहा फर्नीचर रिटेल मार्केट और फर्नीचर शोरूम की तुलना में आधे दाम में मिल जाएगा। इस मार्केट में जाने के लिए मेट्रो से जाना बेहतर होगा क्योंकि यहां पार्किंग मिलने में थोड़ी परेशानी होती है

मुंबई चोर बाजार

मुंबई का चोर बाजार दक्षिणी मुंबई के मटन स्ट्रीट मोहम्मद अली रोड के पास है। ये मार्केट करीब 150 साल पुराना है। ये बाजार पहले ‘शोर बाजार’ के नाम से शुरू हुआ था क्योंकि यहां दुकानदार तेज आवाज लगाकर सामान बेचते थे, तो यहां काफी शोर रहता था।

लेकिन अंग्रेज लोगों के ‘शोर’ को गलत बोलने के कारण इसका नाम ‘चोर’ बाजार पड़ गया। यहां सेकंड हैंड कपड़े, फर्नीचर, एंटीक घड़ियां और ब्रांडेड घड़ियों की रेप्लिका, एंटीक सजावटी सामान मिलता हैं। यहां जेबकाटने वालों से सावधान रहें

बाजीराव रोड, पुणे

पुणे की बाजीराव मार्केट में बेड, डाइनिंग टेबल, अलमारी जैसा तमाम फर्नीचर सही दाम में मिल जाएगा। इस मार्केट में महंगे ब्रांड की तुलना में आधे दाम में फर्नीचर मिल जाएगा।

यहां आप ऑर्डर देकर फर्नीचर भी बनवा सकते हैं। अपने बजट में रहते हुए फर्नीचर खरीदने के लिए ये बेस्ट मार्केट है। इस मार्केट में आप अपनी गाड़ी लेकर जा सकते हैं।

बंजारा मार्केट, गुरुग्राम, हरियाणा

गुरुग्राम के लोगों के बीच बन्जारा फर्नीचर मार्केट काफी फेमस है। यहां आपको नए फर्नीचर से लेकर पुराना फर्नीचर मिल जाएगा। यहां बार, डाइनिंग टेबल, कैबिनेट, सोफा सेट, वुडन फ्रेम्स और बेड सही दाम पर मिला जाएगा।

यहां मिलने वाला फर्नीचर होमसेंटर और फैब इंडिया की तरह होता है। ये फर्नीचर होमसेंटर और फैब इंडिया की तुलना में आधे दाम में मिल जाता है।

जानें अनूप जलोटा समेत Big Boss 12 में आए हुए बाकी कंटेस्टेंट ले रहे हैं कितनी फीस

भजन गायक अनूप जलोटा और सिंगर जसलीन मथारू ‘बिग बॉस’ सीजन 12 की सबसे एंटरटेनिंग जोड़ी है। हाल ही में बिग बॉस के घर में एक टास्क के दौरान दोनों के ब्रेकअप की खबरें आईं। लेकिन दो दिन बाद ही अनूप जलोटा खुद से 37 साल छोटी जसलीन के साथ रोमांटिक डेट पर जाते दिखे।

वैसे, अनूप जलोटा शो की शुरुआत में कह चुके थे कि वो ‘बिग बॉस’ का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। ऐसे में जाहिर है कि मेकर्स ने उन्हें मोटी रकम देकर मनाया होगा। करीबी सूत्रों के मुताबिक, जलोटा ‘बिग बॉस 12’ के सबसे ज्यादा फीस पाने वाले कंटस्टेंट हैं।

उन्हें इस शो के लिए हर हफ्ते 40 लाख रुपए मिलते हैं। उनके बाद दूसरे नंबर पर हैं दीपिका कक्कड़। दीपिका को हर हफ्ते 16 लाख रुपए मिलते हैं…

दीपिका कक्कड़ को मेकर्स हर हफ्ते 16 लाख रुपए देते हैं। वहीं, बिग बॉस के घर में टास्क में पार्टिसिपेट न करने वाले श्रीसंथ हर हफ्ते के 10 लाख रुपए लेते हैं। करणवीर वोहरा 10 लाख रूपये,नेहा पेंडसे 6 लाख रूपये और सृष्टि रोड़े 5 लाख रूपये हर हफ्ते के ले रहे हैं ।

अगर कॉमनर्स की बात करें तो इन्हें हर हफ्ते 15 हजार से लेकर 50 हजार रुपए तक मिलते हैं। कंटेस्टेंट को मिलने वाली इस रकम में सर्विस टैक्स काटकर ही उन्हें पैसा दिया जाता है।

ऐसे करें काजू की खेती , एक पेड़ से एक बार में होगी 12000 रु की फसल

काजू का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है ।काजू को ड्राई फ्रूट्स का राजा कहा जाए तो गलत नहीं होगा ।काजू बहुत तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है इसमे पौधारोपन के तीन साल बाद फूल आने लगते हैं और उसके दो महीने के भीतर पककर तैयार हो जाता है। काजू की उत्पत्ति ब्राजील से हुआ है।

हालांकि आजकल इसकी खेती दुनिया के अधिकाश देशों में की जाती है। सामान्य तौर पर काजू का पेड़ 13 से 14 मीटर तक बढ़ता है। हालांकि काजू की बौना कल्टीवर प्रजाति जो 6 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है, जल्दी तैयार होने और ज्यादा उपज देने की वजह से बहुत फायदेमंद व्यावसायिक उत्पादकों के लिए साबित हो सकती है ।

काजू कुछ मशहूर किस्में-

काजू की कई उन्नत और हाइब्रिड या वर्णसंकर किस्मे उपलब्ध हैं। अपने क्षेत्र के स्थानीय कृषि, बागबानी या वन विभाग से काजू की उपयुक्त किस्मों का चुनाव करें।

Kaju वेनगुर्ला- 1 एम वेनगुर्ला- 2, वेनगुर्ला-3, वेनगुर्ला-4, वेनगुर्ला-5, वृर्धाचलम-1, वृर्धाचलम-2, चिंतामणि-1,एनआरसीसी-1, एनआरसीसी-2, उलाल-1, उलाल-2, उलाल-3, उलाल-4, यूएन-50, वृद्धाचलम-3, वीआआई(सीडब्लू) एचवन, बीपीपी-1, अक्षय(एच-7-6),अमृता(एच-1597), अन्घा(एच-8-1), अनाक्कयाम-1 (बीएलए-139), धना(एच 1608), धाराश्री(एच-3-17), बीपीपी-2, बीपीपी-3, बीपीपीपी-4, बीपीपीपी-5, बीपीपीपी-6,बीपीपीपी-8,(एच2/16).

काजू की खेती के लिए आवश्यक जलवायु-

काजू मुख्यत: उष्णकटिबंधीय फसल है और उच्च तापमान में भी अच्छी तरह बढ़ता है। इसका नया या छोटा पौधा तेज ठंड या पाला के सामने बेहद संवेदनशील होता है। समुद्र तल से 750 मीटर की ऊंचाई तक काजू की खेती जा सकती है। काजू की खेती के लिए आदर्श तापमान 20 से 35 डिग्री के बीच होता है।

इसकी वृद्धि के लिए सालाना 1000 से 2000 मिमी की बारिश आदर्श मानी जाती है। अच्छी पैदावार के लिए काजू को तीन से चार महीने तक पूरी तरह शुष्क मौसम चाहिए। फूल आने और फल के विकसित होने के दौरान अगर तापमान 36 डिग्री सेंटीग्रेड के उपर रहा तो इससे पैदावार प्रभावित होती है।

मिट्टी की किस्में-

काजू की खेती कई तरह की मिट्टी में हो सकती है क्योंकि यह अलग-अलग प्रकार की मिट्टी में खुद को समायोजित कर लेती है और वो भी बिना पैदावार को प्रभावित किये। हालांकि काजू की खेती के लिए लाल बलुई दोमट (चिकनी बलुई मिट्टी) मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। मैदानी इलाके के साथ-साथ600 से 750 मीटर ऊंचाई वाले ढलवां पहाड़ी इलाके भी इसकी खेती के लिए अनुकूल है।

काजू की खेती के लिए कार्बनिक पदार्थ से भरपूर गहरी और अच्छी सूखी हुई मिट्टी चाहिए। व्यावसायिक उत्पादकों को काजू की खेती के लिए उर्वरता का पता लगाने के लिए मिट्टी की जांच करानी चाहिए। मिट्टी में किसी पोषक अथवा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर की जानी चाहिए। 5.0 से 6.5 तक के पीएच वाली बलुई मिट्टी काजू की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

काजू के पौधारोपन का मौसम-

जून से दिसंबर तक दक्षिण एशियाई क्षेत्र में इसकी खेती सबसे ज्यादा होती है। हालांकि, अच्छी सिंचाई की व्यवस्था होने पर इसकी खेती पूरे साल भर की जा सकती है।

जमीन की तैयारी और पौधारोपन-

जमीन की अच्छी तरह जुताई कर उसे बराबर कर देना चाहिए और समान ऊंचाई में क्यारियां खोदनी चाहिए। मृत पेड़, घास-फूस और सूखी टहनियों को हटा दें। सामान्य पौधारोपन पद्धति में प्रति हेक्टेयर 200 पौधे और सघन घनत्व में प्रति हेक्टेयर 500 पौधे (5मीटर गुना 4 मीटर की दूरी) लगाए जाने चाहिए। एक ही क्षेत्र में उच्च घनत्व पौधारोपन में ज्यादा पौधे की वजह से ज्यादा पैदावार होती है।

खेत की तैयारी और पौधों के बीच दूरी क्या हो ?

सबसे पहले 45 सेमी गुना 45 सेमी गुना 45 सेमी की ऊंचाई, लंबाई और गहराई वाले गड्ढे खोदें और इन गड्ढों को 8 से 10 किलो के अपघटित (अच्छी तरह से घुला हुआ) फार्म यार्ड खाद और एक किलो नीम केक से मिली मिट्टी के मिश्रण से भर दें। यहां 7 से 8 मीटर की दूरी भी अपनाई जाती है।

काजू खेती के लिए सिंचाई के तरीके-

आमतौर पर काजू की फसल वर्षा आधारित मजबूत फसल है। हालांकि, किसी भी फसल में वक्त पर सिंचाई से अच्छा उत्पादन होता है। पौधारोपन के शुरुआती एक दो साल में मिट्टी में अच्छी तरह से जड़ जमाने तक सिंचाई की जरूरत पड़ती है। फल के गिरने को रोकने के लिए सिंचाई का अगला चरण पल्लवन और फल लगने के दौरान चलाया जाता है।

काजू की खेती में अंतर फसल-

काजू की खेती में अंतर फसल के द्वारा किसान अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। अंतर फसल मिट्टी की ऊर्वरता को भी बढ़ाता है। ऐसा शुरुआती सालों में ही संभव है जब तक कि काजू के पौधे का छत्र कोने तक न पहुंच जाए और पूरी तरह छा न जाए। बरसात के मौसम में अंदर की जगह की अच्छी तरह जुताई कर देनी चाहिए और मूंगफली, दाल या फलियां या जौ-बाजरा या सामान्य रक्ताम्र (कोकुम) जैसी अंतर फसलों को लगाना चाहिए।

प्रशिक्षण और कटाई-छंटाई-

काजू के पेड़ को अच्छी तरह से लगाने या स्थापित करने के लिए लिए ट्रेनिंग के साथ-साथ पेड़ की कटाई-छंटाई की जरूरत होती है। पेड़ के तने को एक मीटर तक विकसित करने के लिए नीचे वाली शाखाओं या टहनियों को हटा दें। जरूरत के हिसाब से सूखी और मृत टहनियों और शाखाओं को हटा देना चाहिए।

जंगली घास-फूस पर निंयत्रण का तरीका-

काजू के पौधे की अच्छी बढ़त और अच्छी फसल के लिए घास-फूस पर नियंत्रण करना बागबानी प्रबंधन के कार्य का ही एक हिस्सा है। ऊर्वरक और खाद की पहली मात्रा डालने से पहले घास-फूस को निकालने की पहली प्रक्रिया जरूर पूरी कर लें। घास-फूस निकालने की दूसरी प्रक्रिया मॉनसून के मौसम के बाद की जानी चाहिए। दूसरे तृणनाशक तरीकों में मल्चिंग यानी पलवार घास-फूस पर नियंत्रण करने का अगला तरीका है।

काजू उत्पादन की मात्रा

फसल की पैदावार कई तत्वों, जैसे कि बीज के प्रकार, पेड़ की उम्र, बागबानी प्रबंध के तौर-तरीके, पौधारोपन के तरीके, मिट्टी के प्रकार और जलवायु की स्थिति पर निर्भर करता है। हालांकि कोई भी एक पेड़ से औसतन 8 से 10 किलो काजू के पैदावार की उम्मीद कर सकता है।

हाइब्रिड या संकर और उच्च घनत्व वाले पौधारोपन की स्थिति में और भी ज्यादा पैदावार की संभावना होती है।एक पौधे से 10 किल्लो की फसल होती है तो 1000-1200 रु किल्लो के हिसाब से एक पौधे से एक बार में 12000 रुपये की फसल होगी ।

अब सिर्फ 7 दिन में घर पर त्यार करें पौष्टिक हाइड्रोपोनिक्स चारा

वैज्ञानिकों ने एेसा चारा उगाया है, जिसे खाकर पशु 15 से 20 फीसदी तक ज्यादा दूध देने लगेंगे। इस विधि को हाइड्रोपोनिक्स कहते हैं। इसे अपनाकर कम लागत में चारा तैयार किया जा सकता है।

पशुओं की अच्छी नस्ल होने के बाद भी उत्पादन कम रह जाता है। पशुओं के लिए उचित आहार का प्रबंधन कर उत्पादकता के साथ ही आर्थिक स्थिति में भी सुधार लाया जा सकता है। जिले में पानी की कमी के कारण हरा चारे की फसल नहीं ले पाते हैं।

हाइड्रोपोनिक्स विधि से कम पानी में हरा चारा तैयार किया जा सकता है। इस विधि में हम कम पानी में दुधारु पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा तैयार करने की यह मशीन किसानों के प्रदर्शन के लिए स्थापित की है।

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक पशुपालन डॉ.रुपेश जैन ने बताया हाइड्रोपोनिक्स विधि से मक्का, ज्वार, बाजरा से हरे चारे को तैयार किया जा सकता है। इस विधि से तैयार चारे में पौष्टिक तत्वों की मात्रा परंपरागत चारे की तुलना में ज्यादा होती है। इसमें जगह भी कम लगती है।

ऐसे बनाए हाइड्रोपोनिक्स चारा

इस विधि से हरे चारे को तैयार करने के लिए सबसे पहले मक्का, ज्वार व बाजरा के दानों को 24 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखा जाता है। इसके बाद जूट के बोरे में ढककर अंकुरण के लिए रखा जाता है। अंकुरण निकलने के बाद इसे हाइड्रोपोनिक्स मशीन की ट्रे (2 बाय 1.5 फीट) में बराबर मात्रा में फैलाया जाता है। चौथे से दसवें दिन तक इसमें वृद्धि होती है।

इस दौरान ट्रे में 7 दिनों तक फौव्वारा के द्वारा दिन में 8 से 10 बार सिंचाई की जाती है। दसवें दिन एक ट्रे में लगभग 10 किलो तक हरा चारा तैयार हो जाता है। चारे की हाइट भी 6 से 8 इंच तक की हो जाती है।

इस विधि से तैयार चारे को 15 से 20 किलो तक दूध देने वाले पशुओं को खिलाया जा सकता है। पशुओं को खिलाने से दूध उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि के साथ ही दूध में वसा की 10 से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी होती है।

18-20 हजार होंगे खर्च

इस विधि को अपनाने के ज्यादा रुपए भी नहीं चुकाने होंगे। 50 ट्रे वाली मशीन के लिए 18 से 20 हजार रुपए का खर्च आएगा। जिसमें 5 ट्रेे प्रतिदिन 50 किलो हरा चारा निकलेगा। इससे 5 पशुओं को आहार दिया जा सकता है।

परंपरागत तरीके से चारा तैयार करने में 25 से 30 लीटर पानी की खपत होती है। वहीं इस विधि को अपनाकर 2 से 3 लीटर प्रतिदिन पानी में ही सिंचाई हो जाएगी।

हाइड्रोपोनिक्स चारा त्यार करने की जानकारी के लिए वीडियो भी देखें

किसानो को लखपति बना रही है अमरुद की यह नई किसम VNR BIHI

इन दि‍नों इंसान के सि‍र जि‍तने मोटे अमरूद ने बाजार में काफी हलचल मचा रखी है। एक अमरूद का वजन डेढ़ कि‍लो तक पहुंच जाता है और इसकी पैदावार करने वाले कि‍सानों का माल हाथोंहाथ बि‍क रहा है।

यह भारी भरकम अमरूद न केवल देखने में सुंदर लगता है बल्‍कि इसका टेस्‍ट भी बेहतरीन है। अमरूद की इस कि‍स्‍म का नाम है VNR BIHI जि‍सने कई कि‍सानों को मालामाल कर दि‍या है। जि‍न भी इलाकों में यह पैदा हो रहा है वहां इसकी काफी मांग है। इसकी कीमत 150 रुपए से लेकर 370 रुपए कि‍लो तक है।

प्राइवेट जॉब छोड़ शुरू की खेती

नीरज एक सॉफ्टवेयर इंजीनि‍यर थे मगर अब वह जींद के संगतपुरा गांव में खेतीबाड़ी करते हैं। वह इस अमरूद की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। इन्‍होंने अमरूद के करीब 1600 पेड़ लगाए हैं और साल में दो बार फसल लेते हैं।

एक पेड़ पूरे साल में 75 से 100 कि‍लो अमरूद देता है। नीरज ऑनलाइन इनकी सप्‍लाई करते हैं। वह एक पैकेट 555 रुपए में देते हैं जि‍समें आमतौर पर तीन अमरूद होते हैं, जि‍नका कुल वजन 1600 ग्राम से 1800 ग्राम होता है।

कैसे की जाती है इसकी खेती

इसकी खेती करना आसान काम नहीं है। काफी रखरखाव करना होगा। जब फल आते हैं तब खासतौर पर देखभाल करनी होती है। फलों की बैगिंग करनी होती है। एक पेड़ से दूसरे पेड़ के बीच में 12 फुट सामने और आठ फुट की दूरी पर बगल में होनी चाहि‍ए। नीरज कि‍सानों को इस पौधे को लगाने और रखरखाव की ट्रेनिंग भी देते हैं, मगर ये फ्री नहीं है। वह इसके लि‍ए फीस लेते हैं। ट्रेनिंग आमतौर पर दो दि‍न की होती है।

कहां से मि‍ल सकता है पौधा

अमरूद की यह प्रजाति वैसे तो थाईलैंड से आई है। यहां अभी इसकी पौध मि‍लती है। इसे आप डायरेक्‍ट VNR की नर्सरी से खरीद सकते हैं। कंपनी की वेबसाइट पर रेट सहि‍त इसकी पूरी जानकारी दी गई है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबि‍क, अगर आप 1 से 10 पौधे लेते हैं तो प्रति पौधा इसकी कीमत 330 रुपए है। पौधों की गि‍नती बढ़ने पर रेट कम हो जाते हैं।