Reliance Jio लॉन्च करने जा रहा है सबसे सस्ता 4G स्मार्टफोन, जाने फीचर

Realiance कंपनी ने Jio फीचर फोन की लोकप्रियता को देखते हुए साल 2018 में Jio 2 को लॉन्च किया. अब कंपनी Jio फोन सीरीज़ का अगला फोन Jio 3 लॉन्च करने वाली है. Beetelbite की रिपोर्ट के मुताबिक Jio 3 को टचस्क्रीन के साथ लॉन्च किया जा सकता है. जियो फोन 3, जियो फोन से काफी अलग है क्योंकि ये एक स्मार्टफोन होगा. Jio फोन में जहां साधारण कीपैड है, वहीं Jio 2 में क्वॉर्टी कीबोर्ड है.

Jio 3 के संभावित फीचर्स

Beetelbite की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का अगला स्मार्टफोन jio Phone 3 में 5 इंच की फुल टचस्क्रीन डिस्पले के साथ लॉन्च हो सकता है. फोन में 2 GB RAM और 64GB की इंटरनल स्टोरेज दी जा सकती है.फोन में 5 MP का रियर कैमरा और 2 MP का सेल्फी कैमरा दिया जा सकता है.

फिलहाल कंपनी की तरफ से इस फोन के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. लेकिन लीक रिपोर्ट के मुताबिक jio 3 Android Go ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ आ सकता है. जिसकी सीधी टक्कर सैमसंग गैलेक्सी J2 Core (Go Edition) और रेडमी गो स्मार्टफोन से होगी.

Jio 3 की इतनी होगी कीमत

Jio 3 में QWERTY कीपैड भी दिया जा सकता है जिसे फीचर फोन की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक Jio 3 सस्ता 4G स्मार्टफोन हो सकता है. इसकी कीमत लगभग 4,500 रुपये हो सकती है.

रिपोर्ट में एक Jio executive के हवाले से कहा गया है कि jio 3 को जुलाई या अगस्त 2019 तक सेल के लिए उपलब्ध किया जा सकता है. इस फोन को Jio stores, Reliance Digital stores और Jio की अधिकारिक वेबसाइट से खरीद सकते हैं.

इस जगह पे गेहूं और धान बेचने पर मिलेगी डबल कीमत, किसान हो जायेंगे मालामाल

दिल्ली सरकार किसानों से केंद्र के प्रस्तावित न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब दोगुने दर पर अनाज खरीदेगी। सरकार ने राज्य में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का ऐलान किया है। इसके तहत किसानों की लागत पर आने वाले खर्च का 50 फीसदी ज्यादा दाम दिया जाएगा।

इसके तहत गेंहू को 2616 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य के हिसाब से खरीदा जाएगा। वहीं धान के लिए 2667 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रस्तावित किया गया है।

धान की फसल पर आने वाली लागत

दिल्ली में प्रति हेक्टयेर धान की फसल पर 67328 रुपए लागत आती है। इसके अलावा प्रति हेक्टेयर फसल की मजदूरी लागत 15602 रुपए होती है। इन दोनों खर्च में 8 प्रतिशत सालान दर से 6 माह का ब्याज जोड़ दें,

तो कुल फसल उगाने में कुल खर्च 86247 रुपए आएगा, जबकि दिल्ली में प्रति हेक्टेयर धान की पैदावार 48.5 क्विंटल है। इस हिसाब से प्रति क्विंटल धान के पैदावार पर 1778 रुपए लागत आएगी।

धान की तय कीमत– दिल्ली सरकार प्रति क्विंटल धान के प्रस्तावित समर्थन मूल्य (1778) रुपए में 50 फीसदी फायदा देकर 2667 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीद करेगी।

गेंहू की फसल पर आने वाली लागत

दिल्ली में प्रति हेक्टयेर गेहूं की फसल पर 60418 रुपए लागत आती है। इसके अलावा प्रति हेक्टेयर फसल की मजदूरी लागत 2152 रुपए होती है। इन दोनों खर्च में 8 प्रतिशत सालान दर से 6 माह का ब्याज जोड़ दें,

तो कुल फसल उगाने में कुल खर्च 78501 रुपए आएगा, जबकि दिल्ली में प्रति हेक्टेयर धान की पैदावार 45 क्विंटल है। इस हिसाब से प्रति क्विंटल गेंहू के पैदावार पर 1744 रुपए लागत आएगी।

गेंहू की तय कीमत– दिल्ली सरकार प्रति क्विंटल गेंहू के प्रस्तावित समर्थन मूल्य (1744) रुपए में 50 फीसदी फायदा देकर 2616 रुपए प्रति क्विंटल की दस से गेंहू की खरीद करेगी।

छोटे किसानो के लिए खुशखबरी, SBI बैंक किसानो को जमीन खरीदने के लिए दे रहा है लोन

किसानों की मदद करने के हिसाब से भारतीय स्‍टेट बैंक लोगों को खेती की जमीन खरीदने के लिए लोन दे रहा है। जी हां यदि आप खेती करना चाहते हैं लेकिन आपके पास पर्याप्‍त जमीन नहीं है तो एसबीआई के लैण्‍ड परचेज स्‍कीम का फायदा उठा सकते हैं।एसबीआई के लोन की राशि चुकाने के लिए 7 से 10 साल का समय मिल सकता है। तो आइए इसके बारे में आपको विस्‍तार से बताते हैं।

लैण्‍ड परचेज स्‍कीम

एसबीआई वास्‍तव में खेती की जमीन खरीदने के लिए जमीन की कीमत का 85% तक लोन दे रही है। इसमें लोन की राशि वापसी की अवधि 1 से 2 साल मे शुरु होगी।

लैण्‍ड परचेज स्‍कीम का उद्देश्‍य

एसबीआई की लैण्‍ड परचेज स्‍कीम का उद्देश्‍य छोटे और सीमांत किसानों की जमीन खरीदने में मदद करना है। इसके साथ ही खेती करने वाले ऐसे लोग भी एसबीआई की LPS स्‍कीम के तहत लोन लेकर जमीन खरीद सकते हैं जिनके पास पहले से खेती के लिए कृषि योग्‍य जमीन नहीं है।

LPS के तहत कौन कर सकता है आवेदन

स्‍कीम के तहत जमीन खरीदने के लिए छोटे और सीमांत किसान आवेदने कर सकते हैं जिनके पास 5 एकड़ से कम असिंचित जमीन है। यदि किसी किसान के पास 2.5 एकड़ से कम सिंचित जमीन है तो वह भी LPS की मदद से खेती की जमीन खरीद सकता है। इसके साथ ही खेती का काम करने वाले भूमिहीन मजदूर भी एलपीएस योजना के तहत जमीन खरीदने के लिए लोन ले सकते हैं।

इस योजना के तहत खेत खरीदने के लिए लोन लेने का आवेदन करने वाले व्‍यक्ति का कम से कम दो साल का लोन रीपेमेंट का रिकॉर्ड होना चाहिए। एसबीआई कृषि भूमि खरीदने के लिए दूसरे बैंक से लिए गए लोन के ग्राहकों के आवेदन पर विचार कर सकता है। एसबीआई के एलपीएस योजना में खेत खरीदने के लिए लोन देने की एकमात्र शर्त यह है कि आवेदक पर किसी और बैंक का लोन बकाया नहीं होना चाहिए।

SBI के एलपीएस योजना में कितना मिल सकता है लोन

इस योजना के तहत खेती की जमीन खरीदने के लिए लोन के आवेदन पर स्‍टेट बैंक उस जमीन की कीमत का आंकलन करेगा। इसके बाद कृषि भूमि की कुल कीमत का 85 प्रतिशत तक लोन लिया जा सकता है। बता दें कि एलपीएस के तहत लोन लेकर खरीदी जाने वाली कृषि भूमि लोन की राशि वापस करने तक बैंक के पास बंधक रहेगी। जब आवेदक लोन की राशि का रीपमेंट कर देता है तो उस जमीन को बैंक से मुक्‍त करा सकता है।

लोन की राशि चुकाने की अवधि

योजना के तहत लोन लेने पर आपको 1 से 2 साल का फ्री समय मिलता है। यदि जमीन की खेती के हिसाब से सही करना है तो उसके लिए दो साल और यदि पहले से ही विकसित भूमि है तो उसके लिए एसबीआई आपको एक साल का फ्री समय देता है। यह समय पूरा होने के बाद आपको छमाही किश्‍त के जरिए एलपीएस के तहत लिए गए लोन का रीपमेंट करना पड़ता है। लोने लेने वाला व्‍यक्ति 9-10 साल में एलपीएस का रीमेंट कर सकता है।

भारत में इस जगह खुला ये अनोखा बार, कचरा जमा कराइये और ले जाइये फ्री बीयर

अगर आप गोवा जाने का प्लान बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। गोवा में अब आप फ्री बीयर का लुत्फ उठा सकते हैं। यहां के एक बार ने ऐसा ऑफर शुरू किया है। लेकिन इस फ्री बीयर के बदले में आपको गोवा के बीच पर पड़े कचरे को साफ करना होगा।

यानी बीच पर पड़ी सिगरेट बट, बॉटल कैप और प्लास्टिक स्ट्रॉ इकठ्‌ठा करके यहां जमा कराने पर आपको इसके बदले में बीयर मिलेगी। यह कैंपेन गोवा सरकार ने एक स्थानीय एजेंसी की मदद से शुरू किया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे गोवा के बीच पर कचरे की समस्या कम होगी।

तेरा मेरा बीच

इस अभियान का नाम है ‘तेरा मेरा बीच’। इसे गोवा की एक प्राइवेट बीच मैनेजमेंट एजेंसी Drishri Marine ने 30 जनवरी को शुरू किया था। इसके तहत अगर आप 10 बीयर बॉटल कैप, 20 सिगरेट बट और 5 इस्तेमाल किए हुए स्ट्रॉ बीच से इकठ्‌ठा करके जमा कराते हैं

तो इसके बदले में आप Waste Bar से एक बीयर या कॉकटेल ले सकते हैं। इस अभियान की शुरुआत नॉर्थ गोवा के बीच पर बसे Baga से हुई थी, लेकिन अब कई और बीच पर ऐसे बार शुरू होने जा रहे हैं।

लोगों की मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया

Drishri Marine के साथ मिलकर यह अभियान शुरू करने वाली Noreen Van Holstein ने बताया कि लोग गोवा में दो चीजों के लिए आते हैं- बार और बीच। इसलिए हमने सोचा कि उन्हें वहीं दिया जाए जिसके लिए वे आते हैं- कचरे के बदले में फ्री ड्रिंक्स।

इससे लोगों को समझ आएगा कि बीच पर कितना कचरा फैला है और इस कचरे की भी कुछ कीमत हो सकती है। जब वे गोवा से जाएंगे तो खुश होकर जाएंगे और बीच भी साफ होंगी।

गोवा सरकार बना रही है सख्त कानून

हाल ही में में बीच पर बैठकर शराब पीने, खुले में खाना पकाने और खुले में कचरा फेंकने को सरकार ने अपराध की श्रेणी में शामिल कर लिया है। अगर अब आपने गोवा जाकर इन तीनों में से कुछ भी किया तो आप पर जुर्माना भी लगेगा और सरकार आपको जेल में भी डाल सकती है। अगर आप अकेले ये अपराध करते पकड़े गए तो दो हजार रुपए जुर्माने के तौर पर देने होंगे और अगर दोस्तों के साथ पकड़े गए तो पूरे ग्रुप को दस हजार रुपए का जुर्माना देना होगा।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, ट्राई के DTH नियम बदलने से 25% तक TV देखना हो जाएगा महंगा

ट्राई ने 1 फरवरी 2019 से DTH व केबल नेटवर्क नियमों में बदलाव किया है, जो लागू हो चुका है. ट्राई का कहना था कि इससे केबल टीवी व DTH ग्राहकों को न सिर्फ सस्‍ता केबल मिलेगा बल्कि अपनी पसंद के चैनल चुनने की छूट भी मिलेगी. हालांकि रेटिंग एजेंसी CRISIL की रिपोर्ट में कुछ और ही दावा किया गया है. उसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि नए नियम आने से ग्राहकों का बिल कम नहीं होगा.

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ट्राई के DTH नियम बदलने से ग्राहकों का मंथली बिल बढ़ेगा. मसलन अगर ग्राहक फ्री टू एयर के साथ-साथ टॉप 10 चैनल चुनता है तो उसका बिल अपने आप बढ़ जाएगा.

क्रिसिल के सीनियर डायरेक्‍टर सचिन गुप्‍ता ने कहा कि हमारा आकलन दर्शाता है कि अब कैसे ग्राहक का DTH या केबल टीवी बिल बढ़ेगा. अगर मौजूदा कीमतों के आधार पर गणना करें तो जिन ग्राहकों का मौजूदा बिल 230 से 240 रुपए प्रति महीना है, वह नई व्‍यवस्‍था से 25% बढ़कर 300 रुपए महीना तक चला जाएगा.

ट्राई के नियम बदलने से सिर्फ उन्‍हीं ग्राहकों को फायदा होगा जो सिर्फ टॉप 5 चैनल ही अपने बकेट में चुनेंगे. हालांकि ट्राई ने नए नियम लागू करते वक्‍त साफ किया था कि किसी भी चैनल की कीमत 19 रुपए से अधिक नहीं हो सकती.

इससे पहले दूरसंचार नियामक ने ऐलान किया था कि अगर TV कनेक्‍शन में दिक्‍कत आ रही है तो कॉल सेंटर का प्रावधान होना चाहिए ताकि ग्राहक अपनी शिकायत दर्ज करा सके. साथ ही यह भी निर्देशित किया कि अगर केबल ऑपरेटर और DTH सर्विस प्रोवाइडर शिकायत को 72 घंटे में दुरुस्‍त नहीं कर पाएंगे तो उन्‍हें सर्विस फ्री में देनी हागी.

फॉल्‍टी कनेक्‍शन एक आम समस्‍या है. यह तब आती है जब टीवी ग्राहक 1 DTH कंपनी से किसी अन्‍य कंपनी की सेवा सबस्‍क्राइब कराता है या सेट टॉप बॉक्‍स बदलता है.

11वीं फेल किसान ने बनाया अपना मिल्क एटीएम, अब मन मुताबिक दाम पर बेच रहे है दूध

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के एक किसान हैं, नीलेश गुस्सर। 11वीं फेल नीलेश ने पिछले साल ऑटोमेटिक एटीएम मिल्क मशीन बनाई थीं। इस साल उन्होंने इसे और भी ज्यादा हाइटेक बना दिया है।उन्होंने इस मशीन में बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंटिंग, आईडी और पासवर्ड, प्रीपेड कार्ड जैसे फीचर जोड़ दिए हैं। अब इस मशीन से कैशलेस तरीके से दूध निकाला जा सकेगा।  इस मशीन में 20, 50 और 100 रुपये के नोटों से दूध निकाला जा सकता है।

इस मशीन से किसानों को काफी फायदा हो रहा है। वे किसान जो कॉओपरेटिव या दूध डेयरी को अपना दूध नहीं बेचना चाहते वे अपने मन मुताबिक दाम पर मिल्क एटीएम लगाकर दूध बेच रहे हैं। कॉओपरेटिव या डेयरी को दूध बेचने पर उन्हें बिचौलियों को कमीशन देना पड़ता है जिससे उन्हें नुकसान होता है।

गिर जिले के तलाला इलाके से 7 किलोमीटर स्थित गांव खिरधर के रहने वाले नीलेश ने पिछले साल मिल्क एटीएम मशीन बनाई थी। वे अब तक गुजरात के जामनगर, द्वारका, पोरबंदर जैसे इलाकों के साथ ही महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के किसानों को लगभग 30 मशीनें बेच चुके हैं।नीलेश ने बताया कि पहले उनके पास 6 गायें थीं। जिनका दूध निकालकर वे सहकारी मंडी में बेचने के लिए ले जाते थे, लेकिन उन्हें अच्छा दाम नहीं मिलता था।

उन्होंने इसके बाद एटीएम मिल्क मशीन बनाने का फैसला कर लिया। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर थोड़ा सा रिसर्च भी किया और मुंबई, राजकोट, अहमदाबाद से मशीन बनाने के पुर्जे मंगवाए। उन्होंने नोट के सेंसर और फिंगरप्रिंट की मशीन ताइवान से मंगवाई।

नीलेश ने बताया, ‘मैं बिचौलियों का काम खत्म करना चाहता था। वे किसान और कस्टमर के बीच में आकर कमीशन खाते थे। जब मैं नजदीक की कॉओपरेटिव डेयरी में दूध बेचता था तो वहां भी मुझे दूध का सही दाम नहीं मिलता था।

इसलिए मैंने ये मशीन बनाई।’ आपको जानकर हैरानी होगी कि नीलेश 11वीं फेल हैं। उन्होंने कोई इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग नहीं ली है। वे बताते हैं कि उन्हें मशीनों को बनाने का शौक रहा है। इस मशीन की बदौलत किसान को दूध की डेढ़ गुना ज्यादा कीमत मिलती है। किसान सिर्फ एक साल में ही इस मशीन का दाम रिकवर कर सकते हैं।

बनकर तैयार है मिल्क एटीएम

जिन किसानों के पास तीन से ज्यादा गाय या भैंसे होती हैं उनके लिए ये मशीन काफी फायदेमंद है। नीलेश ने बताया, ‘इस बार मैंने मशीन को पूरी तरह से कैशलेस बना दिया है। अब मशीन में पैसे नहीं डालने पड़ेंगे। जिस भी ग्राहक को दूध लेना होगा उसे अपना फिंगरप्रिंट इस मशीन में रजिस्टर करवाना होगा उसके बाद वह एक निश्चित मात्रा में दूध निकाल सकेगा।’ इसके साथ ही यूजरनेम और पासवर्ड के जरिए भी प्रीपेड कार्ड द्वारा दूध निकाल सकेंगे।

नीलेश ने इस तरह की अभी पांच कैशलेस मशीनें बनाई हैं। जिन्हें वे तमिलनाडु, उड़ीसा और राजस्थान के किसानों को बेच चुके हैं। मशीन की कीमत 75 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक है। इसमें 50 से लेकर 250 लीटर तक दूध स्टोर किया जा सकता है। इसमें फ्रिज के साथ ही पावर बैकअप की सुविधा भी है। जिससे लाइट चली जाने की स्थिति में दूध को खराब होने से बचाया जा सकेगा।

एलोवेरा की खेती से 50 हजार इन्वेस्ट कर 10 लाख तक कमाने का मौका

एलोवेरा के नाम और इसके गुणों से आज लगभग हर कोई वाकिफ हो चुका है। देश के लघु उद्योगों व कंपनियों से लेकर बड़ी-बड़ी मल्टिनेशनल कंपनियां इसके नाम से प्रोडक्‍ट बेचकर करोड़ों कमा रही हैं। ऐसे में भी एलोवेरा के बिजनेस से 8 से 10 लाख रुपए की कमाई कर सकते हैं। इसके अलावा आप कमाई को 20 लाख रुपए से 1 करोड़ रुपए तक भी ले जा सकते हैं।

एलोवेरा का बिजनेस

आप खेती से कर सकते हैं इस‍के लिए 1 हेक्‍टेयर जमीन में केवल 50 हजार रुपए खर्च कर आप 5 साल तक हर साल 8 से 10 लाख रुपए कमा सकते हैं। एलोवेरा की प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर जूस बेचकर मोटी कमाई कर सकते हैं। इसके लिए 6 से 7 लाख रुपए इन्‍वेस्‍टमेंट करना होगा और कमाई 20 लाख रुपए से 1 करोड़ रुपए तक हो सकती है।

खेत में एक बार प्‍लांटेशन करने के बाद आप 3 साल तक इसकी फसल ले सकते हैं। वर्तमान में आईसी111271, आईसी111269 और एएल-1 हाईब्रिड प्रजाति के एलोवेरा को देश के हर क्षेत्र में उगाया जा सकता है। इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च (आईसीएआर) के अनुसार एक हेक्‍टेयर में प्‍लांटेशन का खर्च लगभग 27500 रुपए आता है। जबकि, मजदूरी, खेत तैयारी, खाद आदि जोड़कर पहले साल यह खर्च 50000 रुपए पहुंच जाता है।

पहले साल होगी 10 लाख रुपए कमाई…

एलोवेरा की एक हेक्‍टेयर में खेती से लगभग 40 से 45 टन मोटी पत्तियां प्राप्त होती हैं। मोटी पत्तियों की देश की विभिन्‍न मंडियों में कीमत लगभग 15000 से 25000 रुपए प्रति टन होती है।

इस हिसाब से यदि आप अपनी फसल को बेचते हैं तो आप आराम से 8 से 10 लाख रुपए कमा सकते हैं। इसके अलावा दूसरे और तीसरे साल में पत्तियां 60 टन तक हो जाती हैं।

जूस बनाकर कर सकते कमाई

एलोवेरा की पत्तियां या तो आयुर्वेदिक कंपनियां खरीदती हैं या फिर देश की कृषि मंडियों में भी इसे बेचा जा सकता है। अगर आप खुद का जूस बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आप 7 से 8 लाख रुपए के इन्‍वेस्‍टमेंट से इसे शुरू कर सकते हैं।

प्रतिदिन 150 लीटर जूस तैयार करने की क्षमता की मशीन की बाजार में कीमत लगभग 7 लाख रुपए है। एक लीटर जूस बनाने में लगभग 40 रुपए का खर्च आता है। यदि इस जूस को सीधे बिना किसी ब्रांड नेम के कंपनियों को सप्‍लाई करें तो इसका दाम 150 रुपए प्रति लीटर मिलता है। ऐसे में आप प्रतिदिन 22500 रुपए का जूस तैयार कर सकते हैं।

कौन खरीदेगा फसल 

हर्बल प्रोडक्‍ट बनाने वाली कई कंपनियां (पतंजलि, हिमालया, इपगा लैब आदि ) और थर्ड पार्टी फर्म बाय बैक गारंटी के साथ कांट्रेक्‍ट फार्मिंग करा रही हैं। इससे किसान को फसल के बिकने की चिंता तो होती ही नहीं है साथ ही साथ वह इन कंपनियों की ट्रेनिंग से बेहतर पैदावार भी ले सकते हैं।राजस्‍थान की एक कंपनी ग्रो फरदर एक ऐसी कंपनी है जो देशभर के किसानों के साथ (जो इच्‍छुक हों) कांट्रेक्‍ट फार्मिंग कर रही है।

वर्तमान में कई वेबसाइट्स ऐसी हैं जिन पर बॉयर्स अपनी डिमांड भेजते हैं। इनमें एक्‍सपोर्ट इंडिया डॉट कॉम, ई-वर्ल्‍ड ट्रेड फेयर डॉट कॉम, गो फोर,अली बाबा,  वर्ल्‍ड बिजनेस आदि वेबसाइट्स हैं जिन पर विभिन्‍न औषिधीय फसलों की बॉयर्स की डिमांड हर समय रहती है।

 ऐसे करें एक करोड़ रुपए तक कमाई…

इतना जूस बनाने आपको आधा टन पत्तियों की जरूरत होती है। यानी आप अपने एक हेक्‍टेयर के माल से 90 दिनों तक माल तैयार कर सकते हैं और आराम से 20 लाख रुपए कमा सकते हैं। इसके अलावा आप आसपास के किसानो से भी एलोवेरा पत्तियां खरीदकर जूस तैयार कर सकते हैं। इस तरह आप कमाई को 20 लाख रुपए तक ही सीमित न करके इसे 50 लाख या 1 करोड़ रुपए भी कर सकते हैं।

90 फीसदी तक मिलता है लोन

एलोवेरा जूस बनाने के प्‍लांट एसएमई श्रेणी में आता है। सरकार की तमाम योजनाओं में इसके बिजनेस के लिए सरकार 90 फीसदी तक लोन देती है। खादी ग्रामोद्योग लोन देने के बाद इस पर लगभग 25 फीसदी की सब्सिडी देता है। इसके अलावा 3 साल तक रक ब्‍याज मुक्‍त होती है।

आप भी ऐसे कर सकते हैं चंदन की खेती, एक किलो लकड़ी की कीमत है 6000 रुपए

चंदन की खेती आपको शेयर मार्केट या मच्यूल फंड से भी ज्यादा इनकम दे सकती है वो भी गारंटी और
बिना रिस्क के। इसके लिए कम से कम 20 साल जमीन बाउंड करके चलना पड़ेगा क्योंकि सागवान की तरह ही चंदन के पेड़ को तैयार होने में 15 से 20 साल लग जाते हैं।

कर्नाटक में तो इसके भरपूर जंगल हैं लेकिन धीरे-धीरे इसे और किसान भी उगाने लगे हैं। गुजरात के भरूच के एक किसान ने 10 लाख लगाकर चंदन की खेती स्टार्ट की थी। 15 से 20 साल में उसने 15 करोड़ की कमाई की थी।

यानी इस हिसाब से प्रति 1 लाख रु का इन्वेस्टमेंट करके 1.5 करोड़ रु का रिटर्न मिला। इसकी लकड़ी 6000 रुपए किलो तक बिक जाती है। आप भी चंदन की खेती कर लाखों-करोड़ों रुपए कमा सकते हैं। यह सामान्य तापमान में पैदा हो सकता है।

चंदन 6000 रुपए किलो बिकता है यानी आम लकड़ी से 15000% ज्यादा

खेती – नर्सरी से पौधे लाकर या फिर बीज डालकर चंदन की खेती की जा सकती है। चंदन का पेड़ लाल दोमट मिट्टी में अच्छा उगता है। यह चट्टानी मैदान, पथरीली मिट्टी में भी हो सकता हैं। गिली मिट्टी में इसकी ग्रोथ कम होती है।

बुवाई- मानसून में इसके पेड़ तेजी से ग्रोथ करते हैं, लेकिन गर्मियों में इन्हें इरीगेशन (सिंचाई) की जरूरत होती है।

सिंचाई – इसमें ड्रिप प्रॉसेस से इरीगेशन किया जाता है। चंदन के पेड़ को 5 से 50 डिग्री सेल्सियस टेम्प्रेचर वाले इलाके में लगाना सही माना जाता है। इसके लिए 7 से 8.5 पीएच वाली मिट्टी परफेक्ट होती है। यानी पंजाब में किसान इसकी खेती का एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं। एक एकड़ में औसत 400 पेड़ लगाए जा सकते हैं।

एक पेड़ की जड़ से 3 लीटर तक निकलता है तेल

कितने समय में बढ़ते हैं पेड़-चंदन लगाने के बाद 5वें साल से लकड़ी रसदार बनना शुरू हो जाती है। 12 से 15 साल के बीच यह बिकने के लिए तैयार हो जाता है। चंदन के पेड़ की जड़ से सुगंधित प्रोडक्ट्स बनते हैं। इसलिए पेड़ को काटने के बजाए जड़ से ही उखाड़ा जाता है।

उखाड़ने के बाद इसे टुकड़ों में काटा जाता है। ऐसा करके रसदार लकड़ी को कर लिया जाता है। एवरेज कंडीशन में एक चंदन के पेड़ से करीब 40 किलो तक अच्छी लकड़ी निकल जाती है। चंदन के पेड़ में सबसे महंगी चीज इसका तेल होता है।

एक पेड़ की जड़ से करीब पौने 3 लीटर तक तेल निकलता है। चंदन की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई प्रदेशों में यह प्रावधान किया गया है कि चंदन उगाने वाले किसान उसे काट सकेंगे लेकिन इसकी परमिशन लेनी जरूरी होगी।

इन्वेस्टमेंट – एक पौधा 40-50 रुपए में मिलता है। एक एकड़ में 400 पेड़ पर 20 हजार खर्च होंगे। चंदन के पेड़ों का इंश्योरेंस भी करवाया जाता है, क्योंकि इन पेड़ों के चोरी का डर होता है। आप खुद भी इसकी देखरेख कर सकते हैं। इन सबके अलावा सिंचाई पर भी खर्च करना होगा।

यहां सिर्फ 60 सेकंड में बेचे अपना पुराने मोबाइल फ़ोन

अगर आपके भी घर में पुराना मोबाइल फोन पड़ा है जो आपके किसी काम का नहीं है, तो आप उसे बेचकर नकदी कमा सकते हैं। दिल्ली में कई जगहों पर Cashify नाम से कई कियोस्क सेट अप किए गए हैं जहां आपको फोन के बदरले तुरंत कैश मिलेगा। यह कियोस्क राजीव चौक, साकेत, केंद्रीय सचिवालय और लक्ष्मी नगर में खुले हैं। कई मेट्रो स्टेशन्स पर भी Cashify ने अपने स्टॉल लगाए हैं।

सिर्फ एक शर्त

इस कंपनी की सिर्फ एक शर्त है- आपका फोन या लैपटॉप जो भी आप बेचना चाहते हैं, वह चालू होना चाहिए। यानी वह काम करता हो। ऐसी किसी भी पुरानी डिवाइस के बदले में कंपनी आपको अच्छा पैसा देगी। ऐसे फोन जो बहुत ज्यादा पुराने नहीं हैं, लेकिन जिनका आपके लिए कोई इस्तेमाल भी नहीं है, उन्हें आप यहां बेचकर कुछ पैसे कमा सकते हैं। यह कियोस्क उन लोगों के लिए खोले गए हैं जो ऑनलाइन फोन नहीं बेचना चाहते।

इन डॉक्युमेंट्स की पड़ेगी जरूरत

फोन बेचने वाले को अपना ओरिजिनल आइडेंटिटी कार्ड साथ रखना होगा। बिना आईडी कार्ड के कंपनी फोन नहीं खरीदेगी। दरअसल कंपनी ने सरकार के साथ टाई-अप किया है। कंपनी इस फोन और लैपटॉप को आगे बेचती है और इसकी जानकारी सरकार से साझा करती है। ऐसे में कंपनी सेफ बिजनेस के लिए फोन या लैपटाॅप बेचने वाले की ऑरिजनल आइडी की काॅपी लेती है।

Cashify की वेबसाइट पर भी बेच सकते हैं फोन

आप कंपनी की वेबसाइट पर भी अपनी पुरानी डिवाइसेज बेच सकते हैं। वेबसाइट के मुताबिक यहां आप महज 60 सेकंड में अपना फोन बेचकर पैसे पा सकते हैं। यहां तीन स्टेप्स में आप फोन बेच सकते हैं। सबसे पहले आपको अपनी डिवाइस की जानकारी वेबसाइट पर देना होगी,

जिसके मुताबिक कंपनी आपकी डिवाइस का प्राइस बताएगी। इसके बाद आपको फ्री पिकअप के लिए दिन और समय तय करना पड़ेगा। तीसरे और आखिरी स्टेप में आपके घर से फोन पिकअप किया जाएगा और आपको हाथों-हाथ कैश दिया जाएगा।

सिर्फ 20 दिनों में थायराइड की समस्या से निजात पाने के लिए करें इन चीजों का इस्तेमाल

अगर आपको लगातार थकान, सिर चकराना, वजन बढ़ना और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है तो ये थायराइड के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में फाइबर युक्त आहार का सेवन कर इस बीमारी से बचा जा सकता है।

इन चीजों का करें इस्तेमाल :

गाजर में ऐंटीऑक्सिडेंट्स और बीटा कैरोटीन तत्व होते हैं जो थाइरॉइड के हार्मोंस को नियंत्रित करते हैं। दिनभर में एक गाजर खाना जरूरी है। इसमें आयरन और फाइबर की अधिकता होती है जो थाइरॉइड में फायदेमंद है। अगर आप रोज सुबह खाली पेट एक गाजर को धोकर उसे कच्चा खाएंगे तो 20 दिन के अंदर अंदर आपकी थाइराइड ठीक होने लगेगी।

इसके साथ ही  दिन में एक बार एक कच्चा चुकंदर जरूर खाएं। अनानास भी ऐंटीऑक्सिडेंट्स और एंटी इन्फ्लेमेट्री तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। ऐपल में फाइबर और पेक्टिन होता है। यह शरीर के जहरीले पदार्थों को बाहर निकालता है। इसमें थाइरॉइड को नियंत्रित करने के गुण मौजूद हैं। इससे इम्यून सिस्टम बेहतर होता है और थाइरॉइड हार्मोन नियंत्रित रहता है।

इन चीजों के इस्तेमाल से बचें :

जिन लोगों का थाइरॉइड बढ़ा हो उन्हें गन्ना, डेक्सट्रोस, हाई फ्रूटस कॉर्न सिरप आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इनमें मौजूद कैलरी और शुगर से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। सॉफ्ट ड्रिंक, पैन केक, जैम/जेली, कुकीज़, केक, पेस्ट्री, कैंडी, दही, इन सबका भी सेवन नहीं करना चाहिए।

ज्यादा नमक वाले आहार :

नमक से थाइरॉइड ग्रंथि ज्यादा प्रभावित होती है इसलिए हाइपोथाइरॉडिज्म से ग्रसित लोगों को ज्यादा नमक का खाना नहीं खाना चाहिए। समुद्री शैवाल, कैल्प और ऐसा कोई भी सी-फूड न लें जिसमें आयोडीन ज्यादा होता है। हाइपोथाइरॉडिज्म में शुद्ध दूध नहीं लेना चाहिए।

मलाई या क्रीम निकला हुआ दूध लें जो पचाने में आसान और फायदेमंद होता है। अगर आप पहले से ही हाइपोथाइरॉडिज्म से पीड़ित हैं तो आपको कॉफी, शुगर और अन्य उत्तेजक पदार्थों को नहीं लेना चाहिए क्योंकि इनसे थाइरॉक्सिन ज्यादा पैदा होता है।