इस स्प्रे से नईं जैसी चमकने लगेगी आपकी पुराणी कार और बाइक, सिर्फ 250 रुपए में यहां से खरीदें

बाइक या स्कूटर पर स्क्रैच आने की प्रॉब्लम आम है। कई बार स्क्रैच आपकी, तो कई बार दूसरी की गलती से भी आ जाता है। वहीं, एक समय के बाद गाड़ी के कलर की साइनिंग कम हो जाती है। ऐसे में वो पुरानी नजर आने लगती है।

लेकिन गाड़ी को फिर से सिर्फ 250 रुपए खर्च करके नए जैसा चमकाया जा सकता है। इसके लिए सिर्फ आपको क्लियर लीकर की जरूरत होगी। गाड़ी को चमकाने का काम आप घर पर ही आसानी से कर सकते हैं।

चमकाने का सस्ता तरीका

बाइक या स्कूटर को चमकाने का ये सबसे सस्ता तरीका है। अगर आप बाजार या कंपनी के शोरूम जाते हैं तब खर्चा ज्यादा आता है। कई बार इसके लिए आपको नए सिरे से पेंट लगवाना होता है। साथ ही, ग्राफिक्स की भी जरूरत पड़ती है। लेकिन इस प्रॉसेस से दोनों काम कम कीमत में एक साथ हो जाते हैं।

सबसे पहले बाइक-स्कूटर को धो लें

सबसे पहले अपने स्कूटर या बाइक को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके लिए आप शैम्पू में कॉलगेट और ईनो का यूज करें। इस कॉम्बिनेश से सभी तरह का दाग गाड़ी से साफ हो जाएंगे। इसके बाद गाड़ी को सुखा लें। बाद में सूखे कपड़े से उसकी नमी पूरी तरह सोख लें।

आपको गाड़ी के जिस पार्ट को चमकाना है फिर चाहे वो लोहा या उसे आप गाड़ी से अलग भी कर सकते हैं। यदि गाड़ी के साथ ही उस पर क्लियर लीकर को स्प्रे करना है तब सीट या दूसरी पार्ट को कवर कर लें।

इस स्प्रे से गाड़ी पर लगी ग्राफिक्स भी चमक उठती है। इस स्प्रे की ऑनलाइन प्राइस 250 रुपए है। जिसे अमेजन इंडिया से खरीद सकते हैं। स्प्रे करने के बाद कम से कम 4 घंटे तक गाड़ी का यूज नहीं करें। इसे पूरी तरह सूखा लेना चाहिए।

ये है इतिहास का सबसे अमीर ड्रग स्मगलर, इसके पास थी इतनी दौलत कि हर साल अरबों रुपए तो चूहे ही खा जाते थे

अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए दुनिया के सबसे खूंखार ड्रग लॉर्ड रहे पाब्लो एस्कोबर का खजाना तलाशेगी। सीआईए के एजेंट्स ने वो जगह भी तलाश ली है, जहां उसकी करोड़ों के खजाने से भरी सबमरीन डूबी थी। करीब दो दशक पहले दुनियाभर में ड्रग लॉर्ड पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया का नाम चलता था।

  •  पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया एक कोलंबियाई ड्रग माफिया था, जो कोकीन का काला कारोबार करता था।
  • पाब्लो के भाई रॉबर्टो एस्कोबार की किताब ‘द एकाउंट्स स्टोरी’ के मुताबिक, वो कई बार एक दिन में 15 टन कोकीन की तस्करी करता था।
  • 1989 में फोर्ब्स मैगजीन ने एस्कोबार को दुनिया का 7वां सबसे अमीर शख्स बताया था। उसकी अनुमानित निजी संपत्ति 30 बिलियन डॉलर यानी 16 खरब रुपए थी। उसके पास कई लग्जरी मकान और गाड़ियां थीं।

चूहे खा जाते थे नोट

पाब्लो के भाई रॉबर्टो ने बताया था कि जिस वक्त पाब्लो का सालाना मुनाफा 126988 करोड़ रुपए था, उस वक्त उसके गोदाम में रखी इस रकम का 10 फीसदी हिस्सा तो चूहे खा जाते थे। या फिर पानी और अन्य वजहों से ये खराब हो जाता था।

रॉबर्टो के मुताबिक, वो एक लाख 67 हजार रुपए (2,500 डॉलर) हर महीने नोट की गड्डियां बांधने के लिए रबर बैंड पर खर्च कर देता था। 1986 में उसने कोलंबिया की पॉलिटिक्स में घुसने की कोशिश की। इसके लिए उसने देश के 10 बिलियन डॉलर (5.4 खरब रुपये) के राष्ट्रीय कर्ज को चुकाने की पेशकश भी रखी।

गरीबों का मसीहा

  •  पाब्लो कोलंबियाई सरकारों और अमेरिका का एक बड़ा दुश्मन था। इसके बावजूद उसे मेडेलिन में गरीबों का मसीहा माना जाता था।
  •  पाब्लो ने कई चर्च भी बनवाए, जिसने उसे लोकल रोमन कैथोलिक समाज में काफी लोकप्रियता दिलाई। ‘रॉबिन हुड’ की छवि पाने के लिए उसने बहुत मेहनत की।

15 साल की लड़की से की थी शादी

  • 1976 में 26 साल की उम्र में पाब्लो ने 15 साल की मारिया विक्टोरिया से शादी की। उनके दो बच्चे जुआन पाब्लो और मैनुएला थे।
  • एस्कोबार ने 5000 एकड़ में फैला हैसियेंदा नैपोलेस (नेपल्स एस्टेट) नाम का एक आलीशान स्टेट तैयार किया था। उसका परिवार इसी में रहता था।
  • इसके साथ ही उसने इसके पास ग्रीक शैली के एक किले के कंस्ट्रक्शन की योजना बनाई थी। किले का कंस्ट्रक्शन शुरू भी कर दिया गया था, लेकिन यह कभी पूरा नहीं हो पाया।
  • उसके खेत, चिड़ियाघर और किले को सरकार ने जब्त कर लिया और 1990 में इसे एक्सटिंक्शन दे डोमिनो नाम के एक कानून के तहत कम आमदनी वाले परिवारों को दे दिया गया।

माैसम अपडेट: दिल्ली समेत इन राज्यों में बिगड़ेगा मौसम, भारी बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना

इन दिनों पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) है। इसकी वजह से आज उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में माैसम का मिजाज बदला-बदला रहेगा।

इसके साथ ही उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, मध्य भारत और पूर्वोत्तर भारत में भी लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है।  भारतीय माैसम विभाग के वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले 24 घंटे में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और इसके आसपास के इलाकों में कहीं भारी तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।

आज इन राज्यों का ऐसा रहेगा हाल

आज जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली और उत्तरी राजस्थान के माैसम की बात करें तो यहां अलर्ट रहने की जरूरत है। अधिकांश इलाकों में तेज हवाएं चलेंगी। बादल गरजने के साथ कई इलाकों में ओले गिरने की भी आशंका हैं।

इसके अलावा मध्य प्रदेश, पूर्व मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम और ओडिशा में आज आंधी चलेगी। इसके अलावा कुछ जगहों पर बाैछारें भी पड़ सकती हैं।

20 लाख वाली नौकरी छोड़ यह शख्स कर रहा है खेती, सिर्फ 2 एकड़ में 30 लाख रु. से ज्यादा कमाई होने की उम्मीद

इंदौर. महाराष्ट्र के महाबलेश्वर और हिल स्टेशन का फल माने जाने वाली स्ट्रॉबेरी अब मालवा के खेतों में भी उग रही है। यह कारनामा कर दिखाया है निजी बैंक की 20 लाख रुपए सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ किसान बने इंदौर के सुरेश शर्मा ने। उनका दावा है कि जिस तरह से फसल आ रही है, उससे वे दो एकड़ में लगाए पौधों से इस साल 30 लाख रुपए से ज्यादा की स्ट्रॉबेरी पैदा करेंगे।

 महाबलेश्वर के किसानों से समझी ये पद्धति

गेहूं, चने और सोयाबीन की रिकॉर्ड खेती वाले इलाके में स्ट्रॉबेरी की खेती का आइडिया शर्मा को अपनी पिछले साल की महाबलेश्वर की यात्रा से मिला। वहां घूमने के दौरान जगह-जगह इसकी बिक्री के साथ उन्होंने कई सौ एकड़ के खेत देखे, जहां इसे उगाया जा रहा था। वहीं मन में विचार आया कि कैसे भी हो, इसकी खेती इंदौर में भी करेंगे। चूंकि यह फसल पूरी तरह मौसम पर निर्भर होती है, शर्मा ने इसका विस्तृत अध्ययन किया और वहां के किसानों से इसकी खेती की पद्धति भी समझी।

इस साल करीब 30 लाख की स्ट्रॉबेरी

इंदौर में सांवेर बायपास के पास जमीन खरीदी और दो एकड़ में महाबलेश्वर से लाए करीब 50 पौधे रोपे। शर्मा बताते हैं, महाबलेश्वर क्षेत्र में किसान एक से डेढ़ किलो प्रति पौधा उत्पादन लेते हैं। यहां 700 ग्राम प्रति पौधा उत्पादन होने का अनुमान है। मौसम में आए उतार-चढ़ाव के चलते स्ट्रॉबेरी में समय से पहले फल आ गए हैं, जिससे वे थोड़ा चिंतित भी हैं। फिर भी अनुमान है कि वे इस साल करीब 30 लाख की स्ट्रॉबेरी उगा लेंगे।

यह आशंका… रतलाम में सफल नहीं

मूलतः उत्तर अमेरिका और यूरोप में होने वाली स्ट्रॉबेरी भारत में अभी तक देहरादून, नैनीताल, दार्जिलिंग, झारखंड, पंजाब, महाराष्ट्र के महाबलेश्वर या कश्मीर क्षेत्र में ही होती थी। कुछ साल पहले रतलाम, मंदसौर में किसानों ने इसके पौधे रोपे थे, लेकिन प्रयोग सफल नहीं हुआ। शर्मा इस लिहाज से खुद को सफल मान रहे हैं।

व्यावसायिक उत्पादन में यह है समस्या

व्यावसायिक उत्पादन में समस्या यह है कि अच्छे आकार के फल तो बाजार में खप सकते हैं, छोटे आकार की स्ट्रॉबेरी के लिए कोई प्रोसेसिंग सेंटर ही नहीं है। शर्मा कहते हैं इंदौर में अच्छा फूड प्रोसेसिंग सेंटर बन जाए तो स्ट्रॉबेरी के कारण मालवा के किसानों की हालत बदल सकती है।

बोइंग 737 विमानों पर लग रही है पूरी दुनिया में रोक, जानें इसके बारे में जरूरी और खास बातें

पिछले रविवार को इथोपियन एयरलाइंस का एक विमान बोइंग 737 मैक्स 8 दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जहाज में सवार सभी लोगों की हादसे में मौत हो गई। विमान क्रैश होने के कारणों की जांच की जा रही है। लेकिन मैक्स 8 विमान की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

इसके बाद भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए बोइंग 737 मैक्स 8 विमान पर रोक लगा दी है।भारत में स्पाइस जेट और जेट एयरवेज बोइंग के 737 मैक्स मॉडल का इस्तेमाल करती हैं। स्पाइस जेट के पास करीब 12 ऐसे विमान हैं, जबकि जेट एयरवेज के पास ऐसे पांच विमान हैं।

​​क्या है ख़ासियत?

37 मैक्स के पंखों की डिजाइनिंग के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें इंधन कम खर्च होता है। यात्रियों के लिए भी यह सुविधाजनक है। उनको यात्रा के दौरान ज्यादा झटके महसूस नहीं होते हैं। बोइंग का इस विमान में पायलटों के लिए काफी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। बोइंग की नई डिस्पले टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया गया है।

15 ईंच की बड़ी स्क्रीन लगाई गई है जिससे पायलटों को कम मेहनत में ज्यादा सूचना मिल जाती है। इसमें बड़ा और खास इंजन लगाया गया है। यह इंजन पर्यावरण मैत्री हैं यानी कम शोर करने के साथ-साथ यह हानिकारक गैसों का कम उत्सर्जन करता है।

​क्या है इसमें समस्या?

बोइंग में समस्या की बात करें तो इसके इंजन, सॉफ्टवेयर में समस्या है और पायलटों के बीच प्रशिक्षण का अभाव है। इसके इंजन में दिक्कत के कारण कई बार जहाज की रफ्तार खुद से कम हो जाती है और जहाज बंद हो जाता है।

इस समस्या से निपटने के लिए बोइंग ने MCAS नाम का एक सॉफ्टवेयर इसमें लगाया है। लेकिन इस सॉफ्टवेयर में भी दिक्कत है और कई बार गलत निर्देश देता है। दुनिया भर में मुठ्ठी भर पायलटों को ही बी737 मैक्स के सिम्युलेटर पर प्रशिक्षण दिया गया है। पायलटों की बड़ी संख्या ऐसी है जिनको प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।

​बोइंग 737 मैक्स की मांग

इथोपियन एयरलाइंस का जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है वह बोइंग 737 मैक्स 8 है। यह 737 मैक्स सीरीज का सबसे लेटेस्ट विमान है। बोइंग के 737 मैक्स विमान की दुनिया भर में काफी मांग है। 31 जनवरी, 2019 तक कंपनी को 4,661 विमानों का ऑर्डर मिल चुका है।

इससे पहली भी हुआ हादसा

एक बोइंग 737 मैक्स 8 पिछले साल दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। 29 अक्टूबर, 2018 को जकार्ता से उड़ान भरने के कुछ समय के अंदर ही जहाज जावा सागर में गिर गया था। इस दुर्घटना में पायलट समेत 189 यात्रियों की मौत हो गई थी। दोनों दुर्घटना में अब तक कुल 346 यात्रियों और पायलटों की मौत हो गई है।

ये कूलर देता है AC जैसी ठंडी हवा, 90% बचाता है बिजली, कीमत भी है बिलकुल कम

गर्मी में ठंडी हवा सबसे ज्यादा राहत देती है। इसके लिए एयर कंडीशनर बेस्ट ऑप्शन होता है। हालांकि, जब बात AC की कीमत और उसके बिजली बिल की आती है तब इसे खरीदना हर किसी के हाथ में नहीं रह जाता।

ऐसे में जिन यूजर्स को AC जैसी ठंडी हवा का मजा कम बिजली बिल में लेना है उनके लिए वायु बेस्ट ऑप्शन बन सकता है। इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि इसका बिल AC से 90% कम आता है, वहीं हवा AC जैसी ठंडी होती है।

एमपी की इनोवेटिव कंपनी

AC की तरह ठंडी हवा देने वाले कूलर को बनाने वाली कंपनी वायु होम अप्लायंस मध्य प्रदेश की है। इस कंपनी को डायरेक्टर प्रणव मोक्षमार का कहना है कि उनकी कंपनी को एमपी से बेस्ट स्टार्टअप कंपनी का अवॉर्ड मिल चुका है। उनकी कंपनी का प्रोडक्ट AC का बेस्ट सब्सिट्यूट है। इसका पावर कंजप्शन कूलर की तरह है। वहीं, परफॉर्मेंस एयर कंडीशनर की तरह है।

कूलर में लगा है कम्प्रेसर

कूलर में कम्प्रेसर लगा है जिसके चलते वो AC जैसी ठंडी हवा देता है। ये कम्प्रेसर कूलर के पानी को ठंडा करता है और वो पानी कूलर के पैड पर जाता है, जिससे नॉर्मल हवा भी AC के जैसी ठंडी हो जाती है। ये कम्प्रेसर बहुत कम पावर यूज करता है। AC की तुलना में ये सिर्फ 10% पावर कंजप्शन करता है। यानी 90% बिजली की सेविंग होती है।

इतनी है कीमत

वायु कंपनी का सबसे छोटा प्रोडक्ट दो सौ वर्ग मीटर को आसानी के ठंडा कर देता है। इसमें 250 वॉट बिजली की खपत होती है। वहीं, इस काम के लिए AC 2100 वॉट बिजली खर्च करता है। इन प्रोडक्ट की कीमत 22,500 रुपए से शुरू है।

MIG 24 नाम का प्रोडक्ट 1000 स्क्वॉयर फीट एरिया को आसानी से ठंडा करता है, इसकी कीमत करीब 85,000 रुपए है। कंपनी का सबसे बड़ा एयर कंडीशनर 1.25 लाख रुपए का है। इन कूलर को कंपनी की वेबसाइट से खरीद सकते हैं।

ये था दुनिया का सबसे अमीर इंसान, अम्बानी की कुल दौलत से ज्यादा एक दिन में कर देता था सोना दान

आपने बहुत से अमीर राजाओं और लोगों की कहानियां सुनी और पढ़ी होंगी, लेकिन ये कहानी है दुनिया के सबसे अमीर राजा की, जिसके उपहारों ने एक देश की अर्थव्यवस्था चौपट कर दी। हालांकि, उस राजा का देश अब खुद आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वर्तमान में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति जेफ बेजोस, जिनकी संपत्ति 99 बिलियन पाउंड (9028 अरब रुपये से भी ज्यादा) है, वह भी इस राजा के आसपास नहीं टिकते।

ये कहानी है, 14वीं सदी में माली देश के राजा रहे मनसा मूसा की। मनसा मूसा इतिहास के सबसे उदार राजाओं में से एक थे। वह जहां जाते, वहां आम लोगों को इतना उपहार देते थे कि उस देश की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगती थी।

विरासत में मिला था शासन

मनसा मूसा का जन्म 1280 के एक शासक परिवार में हुआ था। उनके भाई मनसा अबु-बकर जब एक समुद्री अभियान से वापस लौटने में असफल रहे तब उनके भाई मनसा मूसा को स्वर्ण समृद्ध साम्राज्य विरासत में मिला था।

दुनिया के लगभग आधे सोने का भंडार

सोने और अन्य सामानों का व्यापार करने वाले प्रमुख व्यापारिक केंद्र भी मनसा मूसा के राज्य में ही थे, जिसके व्यापार से उन्हें काफी मुनाफा मिलता था , उस दौर में माली के पास पूरी दुनिया के सोने का लगभग आधा हिस्सा था, जिस पर वहां के शासक मनसा मूसा का एकाधिकार था।

हज यात्रा से पूरे मिडिल ईस्ट में आ गया था आर्थिक संकट

मूसा धार्मिक प्रवृत्ति के मुसलमान थे। एक बार उन्होंने सहारा रेगिस्तान और मिस्र से होते हुए मक्का में हज यात्रा पर जाने का फैसला लिया। माली से हज के लिए निकलते वक्त उनके कारवां में 60,000 से ज्यादा लोग, हाथी, घोड़े, ऊंट व अन्य कई तरह के जानवर और भारी मात्रा में साजो-सामान शामिल था। यात्रा के दौरान उन्होंने काहिरा में अपने लाव-लश्कर के साथ तीन महीने का प्रवास किया था।

इस दौरान उन्होंने वहां के लोगों को तोहफे में इतना सोना दे दिया कि मिस्र की अर्थव्यवस्था बैठ गई। मूसा के स्वर्ण उपहारों की वजह से पूरे 10 साल तक मिस्र में सोने की कीमतें औंधे मुंह गिरी रही। तीर्थ यात्रा के दौरान मूसा ने इतने स्वर्ण उपहार बांटे कि पूरे मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) क्षेत्र को लगभग 1.1 बिलियन पाउंड (100 अरब रुपये से ज्यादा) का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था।

पश्चिमी अफ्रीका में शिक्षा की परंपरा शुरू की

माना जाता है मनसा मूसा ने ही पश्चिमी अफ्रीका में शिक्षा की परंपरा शुरू की थी। उन्होंने साहित्य, कला और वास्तुकला को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया। साथ ही स्कूल, पुस्तकालयों और मस्जिदों को इसके लिए वित्त पोषित किया। हज यात्रा से वापसी करते वक्त वह मिस्र से होकर गुजरे और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उन्होंने सोने को प्रचलन से बाहर करने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने सोने को ब्याज पर वापस लेना शुरू कर दिया था।

आर्थिक इतिहासकार भी मानते हैं कि पर्याप्त दस्तावेजों के अभाव में मनसा मूसा के पास कितना धन था, इसका सही-सही अंदाजा लगाना असंभव है।

शरीर में दिखने लगें ये बदलाव, तो समझ जाइए खराब होने लगी हैं आपकी किडनी

हम सभी जानते हैं कि किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है। अगर किडनी में किसी तरह की गड़बड़ी हो जाए तो हानिकारक पदार्थ शरीर से बाहर नहीं निकल पाते और इसका सीधा असर हमारे लिवर और दिल पर पड़ता है। आजकल लोगों में क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी गुर्दे खराब होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है।

अगर वक्त रहते हमें किडनी की परेशानी का मालूम हो जाए तो इसका इलाज कराके ठीक कराया जा सकता है। आज हम आपको इसके लक्षण बताएंगे, जिससे आप वक्त रहते इस बीमारी को पहचान कर इलाज करवा सकते हैं। किडनी खराब होने पर शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे हाथों और पैरों में सूजन आने लगती है।

यूरिन से भी किडनी की परेशानी का पता चलता है। यूरिन का रंग गाढ़ा होना या रंग में बदलाव भी इसका इशारा हो सकता है। अगर आपके पेट के बांयीं या दांयीं ओर असहनीय दर्द हो रहा हो, तो इसे कतई हल्के में ना लें, क्योंकि यह किडनी में परेशानी की हिंट हो सकती है। इस बीमारी में पेशाब आने की मात्रा बढ़ती या कम होती है।

इसके अलावा बार-बार पेशाब आने का एहसास होना मगर करने पर पेशाब का न आना भी किडनी फेल का लक्षण है। अगर आपको मूत्र के दौरान खून आए तो ऐसे में आपको बिल्कुल लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। आपको तुरंत किसी यूरोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए। अगर आपको अचानक कई बार पेशाब आ रहा है तो यह किडनी में किसी तरह की बीमारी का इशारा है।

ऐसे हालात में जानने की कोशिश करें कि बार-बार पेशाब आने की वजह क्या किडनी की कोई बीमारी तो नहीं। पेशाब ज्यादा आना या कम आना दोनों ही अच्छा नहीं माना जाता है। अगर आपको पेशाब का एहसास होता है और जाने पर आपको पेशाब नहीं आता तो यह भी किडनी फेल का लक्षण है।

अगर आपके पेशाब करते वक्त किसी तरह की जलन महसूस हो या बेचैनी हो तो इसका मतलब यह है कि या तो आपको यूरिन इन्फेक्शन हुआ है या फिर आपकी किडनी में कोई परेशानी है।ऐसे में आप एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें। छोटे-मोटे काम करने के बाद कमजोरी, थकान महसूस होना या हार्मोन का स्तर गिरना किडनी फेल का लक्षण है।

किडनी के काम न करने के कारण शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण सांस लेने में तकलाफ होने लगती है। इस बीमारी के कारण आपकी आंखो में दर्द और दिमाग पर प्रैशर पड़ने लगता है जिससे आप किसी भी चीज पर ध्यान नहीं लगा पाते।

21 करोड़ का सुल्तान, रोज खाता है 15 किलो, सेब-10 किलो गाजर

भारत में गायों की तरह ही सांड की काफी ज्यादा देखरेख की जाती. लेकिन हरियाणा का ये सांड अपने अजीबो गरीब शौक के लिए सोशल मीडीया पर खूब छाया हुआ है। तकरीबन 21 करोड़ का सांड रोजाना शाम को व्हिस्की पीता है लेकिन सांड की इस आदत से उसका मालिक बिल्कुल भी परेशान नहीं।

इस सांड का नाम ‘सुल्तान’ है और इसकी आदत पर उसके मालिक का कहना है कि वो शराब पीना काफी पसंद करता है और उसके ऐसा करने से उसे सुकून मिलता है।

ये है सुलतान की खुराक

  • नरेश ने बताया कि सुलतान का वजन 16.5 क्विंटल है। उसकी खुराक में 15 किलो सेब, 10 किलो गाजर और 10 किलो दूध शामिल है। इनके अलावा हरा चारा और 10 किलो दाना उसकी खुराक में शामिल है।
  • सुलतान की खुराक पर खास ध्यान रखा जाता है। नरेश का कहना है कि यदि खुराक पर ध्यान नहीं रखा गया तो उसकी सेहत पर इसका सीधा असर होगा।
  • खुराक के अलावा उसकी साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखा जाता है, सुलतान रोज शैम्पू से नहाता है और तेल की मालिश कराता है।

शराब का शौकीन

वह कोई राजा महाराजा नहीं है लेकिन उसके शौक किसी राजा महाराजा से कम नहीं है। इक्कीस करोड़ रुपए कीमत का सुल्तान मात्र सात साल और 10 माह का है, लेकिन रोज शाम को खाने से पहले अलग-अलग ब्रांड की शराब पीता है।

प्रति सप्ताह में छ: दिन शाम के खाने से पहले शराब पीता है लेकिन मंगलवार का दिन सुल्तान का ड्राई डे होता है। हरियाणा के कैथल जिले में मुर्रा नस्ल का भैंसा सुल्तान इन दिनों शराब का शौकीन हो गया है।

सुल्तान की उम्र आठ साल की भी नहीं है और अब से पांच साल पहले नरेश ने उसे रोहतक से 2 लाख 40 हजार रुपए में खरीदा था। एक विदेशी ने पिछले दिनों इसकी कीमत 21 करोड़ रुपए लगाई थी। सुबह के नाश्ते में सुल्तान देशी घी का मलीदा और दूध पीता है।

सुल्तान सोमवार को ब्लैक डॉग, बुधवार को 100 पाइपर, गुरुवार को बेलेनटाइन, शनिवार को ब्लैकलेबल या शिवास रीगल, रविवार को टीचर्स पीता है। कैथल के बूढ़ाखेड़ा गांव के रहने वाले सुल्तान के मालिक नरेश ने बताया कि वे सीमन बढ़ाने के लिए सुल्तान को शराब पिलाते हैं।यह दवाई की तरह दी जाती है। सुल्तान सालभर में 30 हजार सीमन (वीर्य) की डोज देता है जो 300 रुपए प्रति डोज बिकती है।

कूलर-पंखों में रहता है सुलतान

  •  सुलतान को गर्मी से बचाने के लिए उसके पास पंखे और कूलर लगाए जाते हैं। गर्मी के दिनों में सुबह और शाम दो बार उसे नहलाया जाता है।
  •  दो मजदूर दिनभर उसकी देखभाल में लगाए जाते हैं, जो उसके खाने पीने के अलावा साफ सफाई और मालिश आदि करते हैं।
  •  हरियाणा के कैथल जिले के रहने वाले नरेश बैनिवाल ने बताया कि सुलतान नेशनल लेवल पर अवॉर्ड जीत चुका है। उसका यह भैंसा मुर्रा नस्ल का है।

इस हिसाब से वह सालाना 90 लाख रुपए कमा लेता है। सुल्तान वर्ष 2013 में हुई राष्ट्रीय पशु सौंदर्य प्रतियोगिता में झज्जर, करनाल और हिसार में राष्ट्रीय विजेता भी रह चुका है।

राजस्थान के पुष्कर मेले में एक पशु प्रेमी ने सुल्तान की कीमत 21 करोड़ रुपए लगाई थी, लेकिन नरेश ने कहा कि सुल्तान उसका बेटा है और कोई अपना बेटा कैसे बेच सकता है।

अब नहीं डिश एंटीना की जरूरत

विज्ञान में नित होते आविष्कार इंसान के जीवन को सुखद बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक जमाना था जब छतों पर लगे टीवी एंटीना के घूम जाने मात्र से ही सिग्नल समाप्त हो जाता था। इसके बाद छतों पर से पाइप वाले एंटीना गायब हो गए। इनके स्थान पर तश्तरीनुमा डीटीएच छतरी आ गई।

अब जल्द ही ये तश्तरीनुमा डीटीएच छतरी भी छतों पर से उड़नछू हो जाएंगी। जो नया एंटीना आने वाला है, उसे छत की दरकार नहीं। न छत चाहिए, न लंबा तार। सीधे सेट टॉप बॉक्स में कनेक्ट कर दीजिए और टेलीविजन का मजा लीजिए। दुनिया माइक्रो स्ट्रिप एंटीना की ओर बढ़ रही है। भारत में भी स्वदेशी माइक्रो स्ट्रिप एंटीना तैयार कर लिया गया है।

भारतीय वैज्ञानिक ने बनाया सस्ता-टिकाऊ स्वदेशी माइक्रो एंटीना

यह माइक्रो स्ट्रिप एंटीना पंजाब फतेहगढ़ साहिब स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर जसपाल सिंह ने तैयार किया है।

सेट अप बॉक्स से होगा कनेक्ट

दो से तीन सेंटीमीटर आकार के चिपनुमा माइक्रो स्ट्रिप एंटीना को कमरे के अंदर रखे सर्विस बॉक्स में लगाया जा सकेगा। यह बॉक्स फिलहाल घर के बाहर या छत पर लगे डिश एंटीना से तार के जरिये कनेक्ट होता है, जबकि दूसरी ओर टीवी सेट से। अब डिश एंटीना केस्थान पर इसमें माइक्रो स्ट्रिप एंटीना को कनेक्ट कर सब्सक्राइब्ड चैनलों को देखा जा सकेगा।

पंजाब फतेहगढ़ साहिब स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर जसपाल सिंह ने स्वदेशी माइक्रो स्ट्रिप एंटीना बनाने में सफलता हासिल की है। प्रोफेसर जसपाल सिंह ने बताया कि शोध कार्य को पूरा करने में पांच साल लग गए। इसे पेटेंट के लिए इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया ने स्वीकार कर लिया है।

लागत मात्र 50 रुपये

माइक्रो स्ट्रिप एंटीना से उपभोक्ता ही नहीं कंपनियों को भी लाभ होगा। इसके निर्माण में समय व कीमत दोनों में बचत होगी। इस एंटीना को बनाने में अधिकतम 50 रुपये तक का खर्च आएगा। इसके लिए किसी लेबोरेट्री की आवश्यकता नहीं होगी। चिप को प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) पर ही बनाया जा सकेगा। इसका आकार दो सेंटीमीटर से लेकर तीन सेंटीमीटर तक रहेगा। साथ ही इससे सिग्नल भी बेहतर हो जाएगा।