टाटा कंपनी का धमाका, 1 लीटर पेट्रोल में 100 किमी का माइलेज देगी टाटा की ये कार

आजकल कार मैनुफैक्चरिंग कंपनियां कम से कम कीमत में ज्यादा से ज्यादा माइलेज वाली कारों को लॉन्च कर रही हैं और ये कंप्टीशन अब सिर्फ डीजल और पेट्रोल कार नहीं बल्कि इलेक्ट्रिक कारों में भी होने लगा है। खबरों के मुताबिक टाटा मोटर्स छोटी इलेक्ट्रिक कार लाने वाला है जो ऑल्टो और सैंट्रो जैसी कारों को कंप्टीशन देगी।

टाटा ने अपने फ्यूचर प्रोडक्ट्स के लिए दो अल्फा और ओमेगा प्लेटफॉर्म्स लाने का एलान किया है। यानी कि टाटा भविष्य में इन्ही प्लेटफॉर्म्स पर कारों का निर्माण करेगी। अल्फा प्लेटफार्म्स पर 4.3 मीटर से छोटी कारों को बनाया जाएगा।

दरअसल टाटा मोटर इलेक्ट्रिक वाहनों पर भारी निवेश कर रही है। वहीं एंट्री लेवल और बजट कार सेगमेंट में इलेक्ट्रिक कारों के लिए अच्छा खासा स्कोप है, क्योंकि केवल शहर में घूमने-फिरने के लिए इलेक्ट्रिक कारें बेहतरीन विकल्प हैं।

टाटा मोटर मोटर पिक्सल और मेगापिक्सल कॉन्सैप्ट्स में भी अपनी रूचि जता चुकी है। टाटा मेगापिक्सल 1 लीटर पेट्रोल में 100 किमी का माइलेज देगी और एक बार टंकी फुल भरवाने पर यह कार 900 किलोमीटर तक चलाई जा सकेगी। वहीं इसमें एक लिथियम आयन फॉस्फेट बैटरी और चलती कार में रिचार्ज के लिये पेट्रोल इंजन जेनरेटर भी लगा होगा।

लेक्चरर की नौकरी छोड़ी, अब डेयरी से 1 लाख महीना कमा रही कुलदीप

दो विषयों में एमए आैर एमएड कुलदीप काैर ने कोटकपूरा के एक निजी काॅलेज में मिली नौकरी छोड़ स्वरोजगार को चुना। आज वह खुद दूसरों को रोजगार दे रही है। कोटकपूरा की बीड रोड पर सेखों डेयरी के नाम से करीब दो दर्जन गायों का फार्म चला रहीं कुलदीप कौर ने बताया कि उसने एमए के बाद एमएड की।

2010-11 में काॅलेज में लेक्चरर की नौकरी की। कुछ अलग करने की चाहत में नौकरी छोड़ दी। महिलाओं को डेयरी का धंधा अपनाने पर मिलने वाली सहूलियतों की जानकारी मिली तो उसने डेयरी का धंधा अपनाया।

2014 में महिला सशक्तिकरण अभियान के तहत प्रशिक्षण लिया। 2015 में तीन लाख इनवेस्ट कर डेयरी के धंधे में किस्मत अाजमाई। डेयरी प्रशिक्षण के आधार पर डेयरी विकास विभाग से 50 फीसदी सब्सिडी पर 17.5 लाख का कर्ज लेकर दो कनाल में आधुनिक डेयरी फार्म बनाया।

तीन साल में उसके पास 20 दूध देने वाली अमेरिकन नस्ल की हालिस्टर फ्रोजियन गायें व अपनी ही गायों के उच्च नस्ल के करीब 24 बछड़े पल रहे हैं।

एक गाय पर डेली खर्च 100 रुपए, उत्पादन 20 लीटर

कुलदीप कौर ने बताया कि एक गाय का डेली खर्च 100 रुपए है। उनके फार्म में दूध का कुल उत्पादन 200 लीटर है। दो कर्मचारी भी रखे हैं। ऐसे में सारा खर्च निकालने के बाद वह एक लाख रुपए प्रति महीना तक कमाे लेती हंै।

डेयरी खोलने के बाद कभी फसल के अवशेष जलाने नहीं पड़े

कोटकपूरा के ऋषि हाई स्कूल में बतौर शिक्षक कुलदीप कौर के पति गुरजिंदर सिंह ने बताया कि डेयरी फार्म खोलने के बाद उन्हें कभी भी खेतों में फसल के अवशेषों को जलाने की जरूरत नहीं पड़ी। गेहूं के अवशेष से तूड़ी तैयार करने के साथ-साथ अपने खेतों में बोई बासमती की पराली को काटकर पशुओं को डालते हैं।चिकित्सकों के अनुसार सर्दी में पराली पुशओं के लिए काफी लाभदायक रहती है।

अपने खेतों में वह बिना कीटनाशक मकई से पशु पालन विभाग द्वारा बताई तकनीक से आचार तैयार कर लेते हैं जो पूरा साल काम आता है। उन्होंने बताया कि वह स्कूल से वापस लौटने के बाद डेयरी के कार्य में हाथ बंटाते हैं।

घर का चारा व प्रदूषण से भी राहत

आगे दुग्ध उत्पादों पनीर, देसी घी बनाकर बेचने पर विचार है। फिलहाल दूध का उत्पादन सीमित होने के चलते उनका मंडीकरण का कार्य मात्र दूध बेचने तक सीमित है। उच्च गुणवत्ता व शुद्धता की गारंटी के चलते शहर के परिवारों में उनकी डेयरी के दूध की काफी डिमांड है लेकिन आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे दूध उत्पादन बढ़ेगा आैर काम बढ़ाएंगी।

आ गई पानी से चलने वाली बाइक, 1 लीटर में 500 किमी की दूरी तय करेगी

फ्यूल के लिए कई देश एक दूसरे से लड़ रहे हैं। आने वाले समय में तेल के कुयें खत्‍म होने के कगार पर है। ऐसे में बढ़ती फ्यूल प्रॉब्लम किसी से छिपी नहीं है। पर आप को चिंता करने की कोई जरूरत नही है। आप की बाइक पैट्रोल से नहीं पानी से भी सड़कों पर फर्राटा भरेगी। अब आप सोच रहे होंगे कि मै मजाक कर रहा हूं पर यही सच है।

1– जनाब ब्राजील के एक पब्लिक ऑफिसर रिकार्डो अजेवेडो ने ऐसी बाइक बनाई है जो फ्यूल की समस्‍या को ही जड़ से खत्‍म कर देगी। सालों की रिसर्च के बाद रिकार्डो ने पानी से चलने वाली बाइक बनाई है।

2– सबसे खास बात ये है कि ये बाइक एक लीटर पानी में 500 किलोमीटर तक चलाई जा सकती है। उसमें भी ये जरूरी नही हैं कि पानी ऑरो या वाटर प्‍यूरी फायर का ही हो। नदी तालाब नाले के गंदे मटमैले पानी से भी चलाई जा सकती है।

3– T पावर H20 नाम की यह मोटरसाइकिल दिखने में किसी सुपरबाइक से कम नहीं नजर आती है। आम बाइकों में अगर रास्‍ते में पैट्रोल खत्‍म हो जाये तो आपको पैदल पैट्रोलपंप पर जाना पड़ता है। इस बाइक को चलाने के लिए पैट्रोल की जरूरत ही नही है। ये पानी से भी दौड़ेगी।

4– इसे चलाने के लिए किसी खास किस्म के पानी की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। बाइक का डिजाइन सिर्फ पानी और एक कार बैटरी से बना हुआ है। बैटरी से इलेक्ट्रिसिटी प्रोड्यूस होती है। ये पानी से हाइड्रोजन के मॉलिक्यूल्स को अलग कर देती है।

5– एक पाइप के जरिए ये हाइड्रोजन इंजन में जाती है और उसे चलने लायक पावर देती है। इस बाइक में एक और खास बात है यह मोटरसाइकिल पर्यावरण को नुकसान ही जगह फायदा पहुंचाती है। ऐसे में यह बाइक बेहद किफायती होने के साथ ही एन्वायरमेंटल प्रॉब्लम से भी निजात दिलाएगी।

वीडियो भी देखें

चारा मिलाने से डालने तक 4 लोगों का काम अकेले करती है यह मशीन

डेरी फार्मिंग में हर दिन नई से नई मशीन आ रही है जो डेरी के काम को और आसान कर रही है अब सिर्फ 2 -3 आदमी बड़े से बड़ा डेरी फार्म संभाल सकते है ।

आज हम जिस मशीन की बात कर रहे है वो भी 4 काम कर देती है ।इस मशीन का नाम JF Mix 2000 है यह मशीन काटने और मिक्सिंग करने का काम करती है ।

यह मशीन भूसे को फीड के साथ अपने आप ही मिक्स कर देती है और उसके बाद इस मशीन की सहयता से आप पशुओं को चारा सीधे ही उनकी नांद में डाल सकते है ।

यह मशीन वहां पर ज्यादा कामयाब है जहाँ पर काफी ज्यादा पशु होते है और लेबर की कमी हो । इस मशीन को ट्रेक्टर के साथ चलाया जाता है और आप इस मशीन को कहीं भी लेकर जा सकते है । इस मशीन को खरीदने के लिए आप नीचे दी हुए नंबर पर क्लिक करें ।

और ज्यादा जानकारी के लिए वीडियो देखें

भारत में भी आ गईं शुगर बेबीज,अमीरों के खास शोक में हैं शामिल

अमीरों के इस नए गेम में अब डेटिंग का रूप बदल रहा है। इस गेम में भारत के बड़े शहरों की युवा लड़कियों की भी एंट्री हो गई हैं। रिपोर्ट की मानें तो अमीरों के इस गेम में दिन प्रति दिन 20 से 25 साल की लड़कियों की संख्‍या बढ़ रही है। इसके बदले इन्हें न केवल लाखों रुपयों की फाइनेंशियल हेल्प मिल रही है, बल्कि ये अपने सारे शौक पूरी कर रही हैं,

ग्लैमरस लाइफ जी रही हैं, वहीं बहुतों को अपने करियर में भी इसका लाभ मिल रहा है। बस इसके लिए इन्हें अमीरों या अमीर प्रोफेशनल से एक खास रिलेशनशिप करनी होती है, जिसे शुगर रिलेशनशिप का नाम दिया जा रहा है।

जिसमें कोई युवा लड़की किसी ज्यादा उम्र के अमीर या प्रोफेशनल के साथ जुड़ती है। वह उनके साथ बिजनेस टूर से लेकर हॉलीडे टूर में साथ होती है, दोनों के बीच कुछ शर्तो के साथ एक इंटेमेसी भी होती है, जिसके बदल अमीर पुरूष की ओर से शुगर बेबीज को मोटी रकम दी जाती है। उसके सारे खर्चों का भी ध्‍यान रखा जाता है।

विदेशी महिला ने भी किया ब्लॉग में जिक्र

शुगर रिलेशनशिप का ट्रेंड ज्यादातर भारतीयों के लिए अनजान है। बेंगलुरू जैसे मेट्रो शहरों में ये ट्रेंड बढ़ रहा है। इस बारे में अमेरिका से भारत आई एक महिला एंजेला कारसॉन ने अपने ब्लॉग में भी जिक्र किया है।

उनके अनुसार शुगर बेबीज और शुगर डैडी का ट्रेंड अब भारत में भी आ चुका है। उन्होंने खुद ऐसी पार्टियों का जिक्र किया है, जहां से यंग गर्ल्स और मिडिल एज वाले अमीर पुरूषों के बीच यह रिश्‍ता शुरू होता है। हालांकि उन्होंने भारत में भी ऐसे ट्रेंड को देखकर हैरानी भी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में भी हुआ जिक्र

एक मीडिया रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र हुआ है कि भारत में भी शुगर बेबीज का ट्रेंड शुरू हो गया है, जिसमें इंटरनेट का खास योगदान है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरू जैसे शहरों में 21-22 साल से 24-25 साल की तमाम मॉडर्न लड़कियां अब शुगर बेबीज बनने से परहेज नहीं कर रही हैं। वहीं, इनके शुगर डैडी के रूप में बन रहे पार्टनर 39 साल से 45 या इससे ज्यादा उम्र के अमीर पुरूष हैं। वैसे आईटी इंडस्ट्री में यह ट्रेंड ज्यादा होने की भी बात कही गई है।

अमीरों से कर रही हैं ये डील

शुगर रिलेशनशिप विदेश में नया ट्रेंड नहीं है। यूएस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कॉलेज जाने वाली तमाम लड़कियां एक वेबसाइट के जरिए इस ट्रेंड में शामिल हो रही हैं। इसे नई जेनरेशन की लड़कियों में बोल्डनेस के रूप में देखा जा रहा है। ये लड़कियां भी खुलकर सामने आ रही हैं और बता रही हैं कि वे बड़े शहर में रहकर पढ़ने या खर्च चलाने के लिए इस गेम का हिस्सा बन रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार 28 साल की क्रिस्टिना अमेरिका के किसी बड़े शहर में रहकर टॉप कॉलेज से मैनेजमेंट की पढ़ाई करना चाहती थी। लाखों की फीस के साथ बड़े शहर में रहने का खर्च उसके पास नहीं था। उसने ऐसा रास्ता चुना, जिससे उसे सिर्फ 2 साल में 60 लाख रुपए मिल गए। इससे न सिर्फ पढ़ाई पूरी हुई, बल्कि ऐशो-आराम की जिंदगी भी बिताई। क्रिस्टिना ने शुगर बेबी बनने का फैसला किया।

एससी टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार शुगर बेबीज के गेम में कॉलेज स्टूडेंट्स की संख्‍या एक साल में 60 फीसदी बढ़ी है। इसके बदले हर एक को औसतन साल भर में 1.7 करोड़ रुपए तक पे किया जा रहा है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार उनके लुक पर अरबपति साल में 15 लाख तक खर्च कर दे रहे हैं।

रिलेशन को लेकर कोई बंधन नहीं

  • शुगर बेबी एक ही समय में 1 से ज्यादा अमीर पुरुषों के साथ ऐसा रिलेशन बना सकती हैं।
  • इस रिलेशनशिप में एक दूसरे का सम्मान करना जरूरी होती है। फिजिकल रिलेशन बनाना जरूरी नहीं है।
  • अक्सर शुगर डैडीज अपने बिजनेस टूर या वैकेशन टूर में शुगर बेबीज को साथ ले जाते हैं। वे अमीर पुरुषों के साथ उनकी लग्जरी लाइफ का पार्ट भी बनती हैं।
  • वेबसाइट सीकिंग अरेंजमेंटडॉटकॉम के अनुसार शुगर डैडीज में 26 फीसदी कारोबारी हैं।
  • 31 फीसदी प्रोफेशनल या एग्जीक्यूटिव हैं। शुगर बेबीज स्टूडेंट्स से लेकर नौकरीपेशा भी हो सकती हैं।

ये है भारत में चलने वाली एक ऐसी ट्रेन जिसमें मिलती हैं 5 स्टार होटल जैसी सुविधाएं, सोने के बर्तनों में परोसा जाता है खाना

यदि आप रेलवे की लग्जरी महाराज एक्सप्रेस में सफर करना चाहते हैं तो अभी अच्छा मौका है। रेलवे इसमें बुकिंग पर 50 परसेंट डिस्काउंट का ऑफर लाया है। ट्रेन में कुल 23 डिब्बे हैं। देखने में यह बिल्कुल चलते-फिरते होटल की तरह है। इस ट्रेन में 88 यात्री आराम से सफर कर सकते हैं। यह दुनिया की 25 लक्जरी ट्रेनों में से एक हैं।

महाराजा एक्सप्रेस ट्रेन का टूर

  • हेरिटेज ऑफ इंडिया- 8 दिन/7 रातें- मुंबई- अजन्ता- उदयपुर- जोधपुर- बीकानेर- जयपुर- रणथम्भोर- आगरा- दिल्ली।
  • ट्रेजर्स ऑफ़ इंडिया- 4 दिन/ 3 रातें- दिल्ली- आगरा- रणथम्भोर- जयपुर- दिल्ली
  • जेम्स ऑफ़ इंडिया- 4 दिन/ 3 रातें- दिल्ली- आगरा- रणथम्भोर- जयपुर- दिल्ली
  • साउदर्न सुजोर्न- 8 दिन/7 रातें- मुंबई- रत्नागिरी- गोवा- हम्पी- मैसूर- एर्नाकुलम- त्रिवेन्द्रम
  • साउदर्न ज्वेल- 8 दिन/7 रातें- तिवेंद्रम- चेटीनाड- महाबलीपुरम- मैसूर- हाम्पी- गोवा- रत्नागिरी- मुंबई
  • इंडियन स्प्लेंडर- 8 दिन/7 रातें- दिल्ली- आगरा- रणथम्भोर- जयपुर- बीकानेर- जोधपुर- उदयपुर- बालासिनोर- मुंबई

महाराजा एक्सप्रेस ट्रेन के कमरे

  • डीलक्स केबिन- इसमें सभी तरह की सुविधाएं यात्रियों को दी जाती हैं। इसमें बड़ा डबलबेड के साथ LCD टीवी , इंनरनेशनल फोन सुविधा, एसी, अलमारी, बाथरूम में ठंडा और गर्म पानी। इस ट्रेन में 20 डीलक्स केबिन बने हुए हैं।
  • जूनियर सूइट- इसमें बड़ी खिड़कियां लगी हैं जिससे यात्री बाहर का नजारा देख सकते हैं। ट्रेन में 18 जूनियर सूइट हैं। इसमें डबल बेड के साथ LCD टीवी, इंटरनेशनल फोन सुविधा, अलमारी, ऐसी, बाथरूम में ठंडा गर्म पानी जैसी सुविधा है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरा लगा हुआ है।
  • सूइट- ट्रेन में 4 सूइट हैं। इसके साथ ही इसमें बेड, LCD टीवी, यात्रियों की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरा लगा हुआ है। साथ में स्मोक अलार्म और डॉक्टर की सुविधा भी है। इसमें मिनी बार और बाथटब भी है।
  • प्रेसिडेंशियल सूइट- इस ट्रेन में एक प्रेसिडेंशियल सूइट है। जिसका नाम नवरत्न है। यह काफी बड़ा और आलिशान है। इसमें 2 बेडरूम और बाथरूम है। साथ ही LCD टीवी, बटलर, इंटरनेट, DVD प्लेयर, इंटरनेशनल फोन सुविधा, अलमारी, ऐसी, बाथरूम में ठंडा गर्म पानी जैसी सुविधा है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरा लगा हुआ है। साथ में स्मोक अलार्म और डॉक्टर की सुविधा भी है।

महाराजा एक्सप्रेस में मिलने वाली सुविधाएं

  • इसमें यात्री अपनी पसंद का खाना खा सकता है।
  •  इस ट्रेन में कई ब्रांडेड शराब भी रखी हुई है आपका मन जो पीने का करे आप मंगवा सकते हैं।
  •  यहां के बर्तनों में 24 कैरेट सोने की परत चढ़ी हुई है। और तो और चम्मच और कांटे में भी सोने की परत चढ़ी है।
  •  अगर ट्रेन में आप बोर हो रहे हौ तो इसमें “सफारी बार” नाम का एक डिब्बा है। इसमें खेलने के लिए कैरम, चेस, और कई तरह के गेम्स हैं।
  • यहां पर मोर महल और रंग महल के नाम से दो रेस्त्रां भी हैं।

क्या हैं ऑफर की नियम और शर्तें

  •  ऑफर डिपार्चर डेट तक वैलिड होगा। हालांकि केबिन की बुकिंग अवेलिबिलिटी पर डिपेंड करेगी।
  • फर्स्ट एडल्ट का पेमेंट नॉर्मल टर्म्स और कंडीशंस के हिसाब से ही होगा। सेकंड एडल्ट को 50 परसेंट का डिस्काउंट मिलेगा।
  • यह ऑफर ट्रांसफेरेबल नहीं है।
  • ऑफर का फायदा पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगा।
  • बुकिंग के लिए www.themaharajatrain.com पर विजिट कर सकते हैं।

यह गन्ना किसान एक एकड़ से कमाता है 2 लाख 80 हज़ार रुपए

युवाओं का कृषि के प्रति बढ़ते रुझान की मिसाल उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में रहने वाले किसान अचल मिश्रा ने पेश की है। इन्होंने गन्ने की आधुनिक तरीके से खेती करते हुए कई बार प्रदेश स्तरीय व जिला स्तरीय पुरुस्कार प्राप्त किए हैं। इस वर्ष भी इन्होंने गन्ना के अच्छे उत्पादन के मद्देनज़र जिले में प्रथम पुरुस्कार प्राप्त किया है।

उनका मानना है कि गन्ने की खेती के लिए उन्होंने केंद्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ व कोयबंटूर स्थिति अनुसंधान केंद्रों से सफल खेती की जानकारी प्राप्त की है। यदि उनकी शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो वह लखनऊ विश्वविद्दालय से एल.एल.बी की डिग्री हासिल की है।

वर्ष 2005 से खेती प्रारंभ करने वाले अचल ने साल 2007-08 में गन्ना की खेती से सर्वाधिक उत्पादन के पैमानों पर खरा उतरते हुए उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस वर्ष भी उन्होंने गन्ने की COO- 238 किस्म से प्रति बीघे लगभग 250 क्विंटल से ऊपर की उपज प्राप्त की है। जिस दौरान गन्ने की लंबाई लगभग 18.5 फीट प्राप्त की साथ ही वजन भी अच्छा आंका गया।

बताते चलें कि गन्ने की खेती में वह गोबर की खाद, हरी खाद आदि का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही कीटनाशकों आदि का इस्तेमाल कम से कम करते हैं। पेड़ी की फसल के दौरान वह गन्ने की पत्ती को सड़ाकर एक बेहतर खाद के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। यूरिया का इस्तेमाल वह स्प्रे के तौर पर करते हैं। जिस दौरान उसकी 2 से 3 किलोग्राम की मात्रा प्रति एकड़ स्प्रे करते हैं। तो वहीं उनका मानना है यह भी है कि गन्ने की खेती विशेषकर पानी पर निर्भर करती है।

उन्होंने 12 बीघे की खेती से यह साबित कर दिया कि कम रकबे में अच्छी खेती के द्वारा अच्छी कमाई की जा सकती है। शुरुआती दौर में उन्होंने खेती की अधिक जानकारी न होने के कारण महाराष्ट्र के किसानों से भी मुलाकात कर जानकारी ली और गन्ने की अच्छी खेती के गुर सीखे। एक एकड़ की खेती से अचल ने अब 2 लाख 80 हजार रुपए की शुद्ध बचत प्राप्त की।

ग्रेनेड के हमले को भी झेल सकती है ये SUV, मशीन गन से है लैस

देश की प्रमुख एसयूवी वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा के डिफेंस विंग ने एक बेहद ही शानदार बख्तरबंद एसयूवी ‘Marksman’ का निर्माण किया है। इस एसयूवी को दिल्ली के इंदिरा गांधरी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात सेंट्रल इंडस्ट्रीयल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) को सौंपा ​गया है।

ये एसयूवी सीआईएसएफ के क्वीक रिएक्शल टीम को दी गई है ताकि वो तत्काल किसी भी तरह के आपात स्थिति से निपट सकें। प्राप्त जानकारी के अनुसार CISF को कुल 6 मार्क्समैन एसयूवी दी गई है। इस एसयूवी को किसी भी तरह के आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसमें एक साथ कुल 6 जवान आसानी से बैठ सकते हैं।

ये एक बुलेटप्रूफ एसयूवी है और इसे ‘Level B6’ के स्तर से सशस्त्र किया गया है। इसमें एक कपोला मशीन गन को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा ये पांचों तरफ से किसी बुलेटप्रूफ बॉडी से ढका हुआ है। इस एसयूवी को भीतर से दो हिस्सों में बांटा गया है। आगे वाले केबिन में चालक और सहचालक को बैठने की व्यवस्था की गई है।

वहीं इसके पिछले हिस्से में दोनों साइड पर सीट लगाए गए है। जिस पर जवान आसानी से बैठ सकते हैं। इसके अलावा इसमें बैलिस्टिक स्टील इंटीरियर फ़्रेम लगाया गया है जो कि विंडो आदि की सुरक्षा को और भी पुख्ता करता है। महिंद्रा मार्क्समैन में फ्लोर ब्लास्ट प्रोटेक्शन भी दिया गया है। जिससे ये एसयूवी दो डीएम -51 जर्मन ऑर्डनेंस हैंड ग्रेनेड या उनके समकक्ष धमाकों को भी आसानी से झेल सकता है।

इसके पिछले हिस्से के दरवाजे को बख्तरबंद स्वींग डोर्स से लैस किया गया है। इसमें गनपोर्ट और व्यू ग्लॅास भी दिया गया है। इस एसयूवी में कंपनी ने दो अलग अलग इंजन आप्सन दिया है। एक में कंपनी ने 2.2 लीटर की क्षमता का m-hawk CRDe इंजन का प्रयोग किया है। जो कि एसयूवी को 120 bhp की पॉवर और 280 Nm का टॉर्क प्रदान करता है।

वहीं दूसरे वैरिएंट में कंपनी ने 2.6 लीटर की क्षमता का DI इंजन प्रयोग किया है। जो कि 115 bhp का पावर और 228 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है। दोनो ही वैरिएंट में 5 स्पीड गियरबॉक्स को शामिल किया गया है।

रूसी विज्ञानिकों ने 4000 फीट की गहराई तक खोदा और फिर उन्हें मिल गया नर्क का द्वार

रूस में एक ऐसी जगह है जहां दुनिया का सबसे गहरा गड्ढा (बोरहोल) है। कोला सुपरडीप बोरहोल नाम के इस होल को 1970 में रूस के वैज्ञानिकों ने खोदना शुरू किया था। अमेरिकी वैज्ञानिकों को चुनौती देने के लिए वे ज्यादा से ज्यादा गहरा खोदना चाहते थे।

लगातार 19 साल की खुदाई के बाद साइंटिस्ट 12.24 किमी गहराई (40,230 फीट) तक पहुंच चुके थे। ये इतनी गहराई है, जिसमें 240 फीट के 167 कुतुब मीनार समा जाएं। इस गहराई पर जाकर साइंटिस्ट्स को खुदाई रोकनी पड़ी थी।

इस वजह से रोक दी थी खुदाई

इस खुदाई के लिए Uralmash नामक भीमकाय ड्रिलिंग मशीन बनाई गई थी, जो किसी भी परिस्थित में ड्रिल करने में सक्षम थी। मल्टी लेयर ड्रिलिंग सिस्टम वाली इस मशीन की टारगेट डेप्थ 15000 मीटर (49000 फीट) थी।

सालों की कड़ी मेहनत के बाद जब रूसी वैज्ञानिक 262 मीटर (40,230 फीट) की गहराई पर पहुंचे, तब मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। उस वक्त जमीन का तापमान 180 डिग्री सेलसियस से भी ज्यादा मापा गया।

इतना ही नहीं तापमान तेजी से बढ़ने भी लगा था। इसे देख तत्काल काम रोक दिया गया। तब साइंटिस्ट्स ने इस होल का नाम Door to Hell (नर्क का दरवाजा) रख दिया। इसके बाद सोवियत संघ के विघटन के बाद इसकी खुदाई दोबारा शुरू नहीं की गई।

सतह से 0.2% ही हुई खुदाई

जमीन में 12 किलोमीटर की खुदाई करना अपने आप में के किसी अजूबे से कम नहीं है पर आपको जानकर हैरानी होगी कि सतह से लेकर धरती के कोर तक जितनी गहराई है ये उसका 0.2 पर्सेंट भी नहीं है। साइंटिसट के मुताबिक धरती का तल 6371 किलोमीटर नीचे है, जहां पहुंचने का सोचा भी नहीं जा सकता।

अगर सेकंड हैंड कार में दि‍खें ये 5 चीजें, तो समझ लें हो रहा है धोखा

जब आप डीलर से नई कार खरीदते हैं तो आपको कंपनी की ओर से क्‍वालि‍टी को लेकर पूरा भरोसा और हर तरह की गारंटी मि‍लती है। लेकि‍न अगर आप सेकंड हैंड कार खरीद रहे हैं तो आप उस तरह की गारंटी की उम्मीद भी नहीं कर सकते। इसलिए पुरानी कार खरीदते समय आपको अलर्ट रहना चाहिए और कुछ खास चीजों पर तो जरूर ध्यान देना चाहिए।

गौर से देखें कार का लुक

आपको कार के एक्‍सटीरि‍यर लुक को ध्‍यान से देखना होगा। अगर कार पर एक समान पेंट नजर आ रहा है और पेंट की चमक अच्‍छी है तो आप कह सकते हैं कि‍ कार को सही ढंग से मेनटेन रखा गया है।हमेशा चेक करें कि‍ कार की अलग-अलग बॉडी पैनल के पेंट कलर में कि‍तना फर्क है। अगर आपको किसी भी जगह पर पेंट के कलर में अंतर दि‍खे तो समझ जाएं कि‍ इसे स्‍क्रैच या डेंट से छिपाने के लि‍ए ठीक कि‍या गया है।

टायरों को करें चेक

टायर को ध्‍यान से देखें और देखें कि‍ क्‍या टायर्स एक समान घि‍से हुए हैं। टायर के बाहरी और अंदर के हि‍स्‍से को चेक करें। टायर्स थ्रेडिंग पर्याप्‍त है या नहीं, इसे चेक करने के लि‍ए एक सि‍क्‍के को उसमें डालें और देखें कि‍ वह कि‍तना अंदर तक जाता है।अगर वह ज्‍यादा अंदर तक नहीं जाता है तो इसका मतलब है कि‍ कार में नए टायर को लगाने की जरूरत है।

इंजन की सफाई

आपको इंजन भी चेक करना होगा। बोनट को खोलें और देखें कि‍ इंजन के आसपास के एरि‍या कि‍तना साफ है। अगर आपको ऑयल की लीकेज दिखती है तो इसका मतलब है कि‍ यह अंडर मैनटेनेंस है।

चेक करें कि‍ इंजन बेल्‍ट सही ढंग से फि‍ट है और घि‍सी हुई तो नहीं है।यह भी चेक करें कि‍ फ्यूड्स पर्याप्‍त लेवल पर है या नहीं। इंजन के ऑयल का कलर चेक करें, अगर वह काला और गंदा है तो इसका मतलब है कि‍ कार सही ढंग से मेनटेन नहीं की गई है।

इंटीरि‍यर चेक करें

आपको इंटीरि‍यर फि‍टिंग और सभी स्‍वि‍च को भी चेक करना चाहिए। सुनि‍श्‍चि‍त करें कि‍ सभी फीचर्स काम कर रहे हैं। इंफोटेनमेंट सि‍स्‍टम के साथ-साथ स्‍पीकर्स भी चेक करें।

टेस्‍ट ड्राइव

कार को अच्‍छी तरह से देखने के बाद आपको कार की टेस्‍ट ड्राइव करनी चाहि‍ए। चेक करें कि‍ कार आसानी से स्‍टार्ट हो रही है और रुक भी रही है। इंजन की आवाज को ध्‍यान से सुनें। चेक करें कि‍ आवाज खराब है या नहीं। कार को चलाते हुए ब्रेक को भी चेक करें।

अगर ब्रेक लगाते वक्‍त कार में वाइब्रेशन आ रहा है तो इसका मतलब है कि‍ ब्रेक पैड्स घि‍सने शुरू हो गए हैं। खराब सड़क पर कार चलाकर चेक करें कि‍ केबि‍न से ज्‍यादा आवाज तो नहीं आ रही। अगर आवाज ज्‍यादा आ रही है तो इसका मतलब है कि‍ बॉडी पैनल और डोर फि‍टिंग ढीली हो गई है।