-8 डिग्री टेम्प्रेचर में रात भर घर के बाहर पड़ी रही ये बच्ची, इस वजह से हुआ इस मासूम के साथ हादसा

अमेरिका में कड़कड़ाती ठंड में दो साल की बच्ची रात भर घर से पिछले गार्डन में पड़ी और ठंड में जमकर उसने दम तोड़ दिया। पड़ोसियों को उसकी बॉडी अगले दिन सुबह घर के बाहर माइनस 8 डिग्री टेम्प्रेचर में मिली। उसके शरीर पर गर्म कपड़े भी नहीं थे। सुबह पड़ोसियों को बच्ची की बॉडी घर के बाहर पड़ी मिली। बच्ची अपनी प्रग्नेंट मां और दो जुड़वा भाइयों के साथ कुछ दिन पहले ही इस घर में शिफ्ट हुई थी।

आधी रात गार्डन में पहुंच गई बच्ची

  • घटना न्यू हैम्पशायर के न्यूपोर्ट की है। 2 साल की सोफिया वान के दादा ने बताया कि वो बहुत ही इन्डिपेंडेंट बच्ची थी। ऐसा लगता है कि वो रात में अपना नया घर देखने के लिए बाहर निकली होगी और बाहर ही बंद हो गई।
  • पड़ोसियों को सोफिया की बॉडी सुबह घर के बाहर पड़ी मिली। उसके शरीर पर गर्म कपड़े नहीं थे। पड़ोसी शेन रॉव ने सोफिया की डेडबॉडी मिलने की पूरी कहानी सुनाई।

पड़ोसियों ने बताई पूरी कहानी

  •  शेन ने कहा कि उनकी गर्लफ्रेंड ने रात में करीब 4 बजे किसी के रोने की आवाज सुनी थी लेकिन जब उन्हें कोई नजर नहीं आया तो वो दोबारा अपने बेड पर चली गईं।
  •  उन्होंने बताया कि सुबह के वक्त जब रोशनी हुई बर्फबारी का असर कम हुआ, तब घर की सीढ़ियों के नीचे एक छोटी सी बच्ची नजर आई। उसे देखकर पहले लगा कि ये कोई डॉल है।
  •  शेन के मुताबिक जब उन्होंने करीब से देखा तो वो पड़ोस में रहने वाली सोफिया निकली। इसके बाद तुरंत उन्होंने उसकी फैमिली को बुलाया और उसकी हालत से वाकिफ कराया।

ठंड ने ले ली जान

  • सोफिया की मां उसे कंबल में लपेटा और इमरजेंसी सर्विस को फोन किया। बच्ची को हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन बच्ची तब तक जिंदगी की जंग हार चुकी थी।
  • डॉक्टर्स ने उसकी मौत के लिए ठंड को ही जिम्मेदार बताया है। सोफिया की आंटी का कहना है कि उसकी मां इस घटना के लिए बस खुद को जिम्मेदार बता रही है।

जाने क्यों इस लड़की के पैरों के इतने दीवाने हैं लोग, बेच देती है अपनी पूरानी गंदी सॉक्स

आपने कमाई के अजीबोगरीब तरीकों के बारे में सुना होगा, लेकिन एक लड़की ऐसी है, जो बिना किसी मेहनत के ही घर बैठे करोड़ों रुपये काम लेती है. ये सुनने में भले ही आपको अजीब लगे, लेकिन यह सच है. दरअसल ये लड़की अपने खूबसूरत पैर और लोगों की उसके पैरों के प्रति दीवानगी से वो कमाई कर रही है.

यह कमाई किसी और से नहीं बल्कि उसके इस्तेमाल किए गए गंदे मोजे और जूतों से होती है. जी हां, रॉक्सी साइक्स नाम की इस लड़की के इस्तेमाल किए गए गए मोजों को भी लोग हमेशा खरीदने को तैयार रहते हैं और इनकी कीमत भी वाकई चौंका देने वाली है.

रोक्सी साइक्स ने अपनी कमाई का खुलासा करते हुए बताया कि अपने खूबसूरत पैरों के बदौलत वह साल में करीब 1 लाख पाउंड कमा लेती है. भारतीय रुपयों के अनुसार करीब 73 लाख रुपये कमा रही है.

द सन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 33 साल की रॉक्सी ने एक बार अपने साथी से पैरों की तारीफ सुनने के बाद इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था और अपनी तस्वीरें उसपर अपलोड करती थी.उनके खूबसूरत पैरों के लोग इतने दीवाने हो गए कि कुछ दिनों में रॉक्सी के फॉलोवर्स की संख्या 10 हजार पहुंच गई.

फिर सोशल मीडिया के जरिए लंदन के रहने वाले एक प्रॉपर्टी निवेशक ने उनसे संपर्क किया और मोजे बेचने का व्यापार शुरू किया. वो अपने एक जोड़ी मोजे के लिए 20 पाउंड और एक जोड़ी जूते के लिए 200 पाउंड रुपये लेती हैं.वो अब हर महीने अपने मोजे और जूतों से 8000 पाउंड कमा लेती हैं. यानी उनकी मासिक कमाई करीब साढ़े सात 7 लाख रुपये है.वो अब दूसरी मॉडल्स को भी ट्रेनिंग दे रही है और अपने जैसे पांव करने में दूसरी मॉडल्स की मदद कर रही है.

जानें कितना पावरफुल है इंडिया का पासपोर्ट, इन 61 देशों में मिलती है फ्री एंट्री

सभी देशों को पछाड़ते हुए दुसरी बार जापान का पासपोर्ट दुनिया का सबसे पावरफुल पासपोर्ट बन गया है। दुनियाभर के पासपोर्ट पर नजर रखने वाली फर्म हैनले एंड पार्टनर ने साल 2019 की पावरफुल पासपोर्ट की लिस्ट जारी की है।

हैनले पासपोर्ट इंडेक्स में जापान के पासपोर्ट को 190 वीजा फ्री स्कोर दिया है।  वहीं, भारत की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है और वह 79 रैंक पर आ गया है। भारत के नागरिक 61 डेस्टिनेशन पर वीजा फ्री एक्सेस कर सकते हैं।

इंडेक्स में भारत की 79वीं रैंक

हैनले एंड पार्टनर पासपोर्ट इंडेक्‍स में भारत बीते साल 81 वीं रैंक पर था लेकिन इस साल इंडियन पासपोर्ट को 79 रैंक पर रखा गया है। इंडियन पासपोर्ट के साथ 61 देशों में वीजा फ्री एंट्री कर सकते हैं। वहीं अफगानिस्तान, पाकिस्तान और नेपाल को क्रमश: 104, 102 और 94 रैंक पर रखा गया है।

इन देशों में मिलती है बिना वीज़ा के एन्ट्री

भूटान, ग्रेनेडा, हांगकांग, जमैका, माइक्रोनेशि‍या, नेपाल, नेऊ, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, कुक आइलैंड, डोमनि‍क, अल सल्वाडोर, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट विन्सेट एंड द ग्रेनाडाइन्स, समाओ सेशेल्‍स, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, टर्क्स एंड काइकोस, वनुआटू.

इन देशों में वीजा ऑन अराइवल

कम्बोडिया, जॉर्डन, केन्या, लाओस, मेडागास्कर, मालदीव, मॉरीशस, पलाउ, थाईलैंड,टुवालू, युगांडा, केप वर्डे, कोमरोस, इक्वाडोर, इथोपिया, फि‍जी, इंडोनेशिया.

इन 5 देशों में भारतीयों के लिए है सबसे कम वीजा फीस

भारतीय टूरिस्‍ट के लिए हांगकांग, थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया और श्रीलंका में सबसे कम वीजा फीस है। ये पांचों देश भारतीयों को वीजा ऑन अराइवल भी देते हैं। इसके चलते इन देशों में भारतीयों के लिए यात्रा करना आसान और किफायती है।

19 साल की इस लड़की ने बनाई ‘रेप प्रूफ पैंटी’

19 साल की सीनू कुमारी ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो रेप और जबरदस्ती जैसी घटनाओं से महिलाओं और बच्चियों को बचा सकती हैं. सात साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसके बाद उसकी हत्या के बाद बीएससी स्टूडेंट सीनू को झकझोर कर रख दिया था. जिसके बाद उन्होंने ठान लिया की वह महिलाओं और बच्चियों के लिए कुछ ऐसा करेंगी जिसके बाद भविष्य में रेप और जबरदस्ती की घटना ना हो. इसी जज्बे के साथ सीनू ने रेप प्रूफ पैंटी तैयार की.

मेनका गांधी ने की तारीफ

आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक जब केंद्रीय बाल एवं महिला विकास मंत्री मेनका गांधी तक बात पहुंची, तो उन्होंने सीनू के इस मॉडल को सराहा और उन्हें भविष्य में ऐसे अविष्कारों के लिए शुभकामनाएं दीं.

जाने कैसे करती है काम

आपको पढ़कर और सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लग रहा होगा कि भला ये रेप प्रूफ पैंटी कैसे रेप जैसी घटनाएं रोक सकती हैं. बता दें, ये कोई आम पैंटी नहीं है. बल्कि नई इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से लैस पैंटी है, जिसमें स्मार्टलॉक लगा है, जो पासवर्ड से ही खुल सकता है. लोकेशन की सही जानकारी बताने के लिए इसमें जीपीआरएस सिस्टम है और घटनास्थल की बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए रिकॉर्डर भी लगा है.

इस तरह आया रेप प्रूफ पैंटी बनाने का ख्याल

सीनू बीएससी थर्ड ईयर की स्टूडेंट हैं और इस तरह के कई मॉडल बनाती रहती हैं. वह रोजाना हो रही रेप की घटनाओं से दुखी थी, एक दिन सात साल की बच्ची से रेप और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या की खबर पढ़कर मैं अंदर तक हिल गई थी. जिसके बाद उन्होंने रेप से बचाने वाला मॉडल तैयार किया.

ब्लेडप्रूफ कपड़े और रिकॉर्डर के साथ तैयार हुई पैंटी

इस पैंटी को तैयार करने के लिए खास मेहनत की गई है. पैंटी में एक स्मार्टलॉक लगा है, जो पासवर्ड के बिना नहीं खुल सकता. यह पैंटी ब्लेडप्रूफ कपड़े की बनी है, जिसे चाकू या किसी भी धारदार हथियार से काटा नहीं जा सकता और न ही जलाया जा सकता है. इसमें एक बटन लगा है, जिसे दबाने पर 100 या 1090 नंबर पर ऑटोमैटिकली कॉल चला जाएगा और जीपीआरएस सिस्टम की मदद से पुलिस घटनास्थल पर पहुंच जाएगी. पैंटी में रिकॉर्डर भी लगा है, जिसमें घटनास्थल की सारी बातें रिकॉर्ड हो जाएंगी.

मॉडल और हो सकता है बेहतर

इस मॉडल को बनाने के लिए सीनू की कोशिश सराहनीय हैं. लेकिन अभी इस मॉडल को बेहतर करने के लिए पैंटी का पेटेंट कराने के लिए आवेदन इलाहाबाद स्थित नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) के पास भेजा गया है. सीनू ने बताया कि इस पैंटी मॉडल को तैयार करने में 5,000 रुपये तक का खर्च आया. वहीं सीनू रेल दुर्घटना से बचने में सहायक एक उपकरण पर भी काम कर रही हैं, जो बढ़ रही रेल दुर्घटनाओं को रोकने में कारगर साबित हो सकता है.

किसी भी गाड़ी Vehicle के नंबर से Owners का Name और Address कैसे मालूम करे

अब आप सोच रहे होंगे की Mobile के जरिये किसी भी Bike ,Car और किसी भी प्रकार की गाड़ी के Number से मालिक का नाम और पता कैसे लगाया जा सकता है । लेकिन ये बिलकुल एक दम सच है आप किसी भी गाड़ी के number को आप अपने Mobile से एक Minute में गाड़ी के मालिक के नाम के साथ पता और भी जानकारी पता लगा सकते है , तो अब में आपका ज्यादा Time वेस्ट नहीं करूँगा और सीधा topic पर आता हूं और जानते है कि कैसे आप किसी भी गाड़ी के number से मालिक का नाम और address पता कैसे लगाते है , तो चलिए Start करते है ।

तो सबसे पहले आपको अपने Android Smartphon से Google Play Store में जाकर RTO Vehicle Information नाम की Application अपने Device में Install करनी होगी । ये Application बिलकुल Free है । और आप इस Application का लोगो नीचे देख सकते है ।

जैसा की आप देख सकते है RTO Vehicle Information Application को अब तक 5 Million से ज्यादा लोगो ने इसको Play Store से Download किया है और इस App की Rating View देखि जाये तो 4.5 की जबरदस्त रेटिंग है ।

RTO Vehicle Information App को Install करने के बाद इसको Open करे ।और Open करने के बाद इसका जो Interface Open होगा जिसमे आपको Search Vehicle Number पर Click करना है जैसा की आप नीचे देख सकते है।

तो अब आपके सामने जो interface Open होगा इनमे आपको अपना या किसी का Vehicle Numbar डालना है जिसका आपको नाम और पता मालूम करना है ।

अब आप देख सकते है जो आपने Vehicle Number Enter किया था उसका पूरा डेटा आपके Mobile Display पर शो हो जाएगा , जिसमे आप ये भी देख सकते है कि Vehicle कोनसे शोरूम से ख़रीदा गया है और इसका Engine नंबर क्या है और ये Vehicle कोनसी Year में ख़रीदा गया है इस प्रकार की सभी जानकारी आप इस Application से 1 Minute में पता कर सकते है ।

दोस्तों ऐसा करके आप किसी भी vehicle के बारे में 1 minutes के अंदर आप उसकी पूरी जानकारी मालूम कर सकते है ।

दोस्तों मुझे उम्मीद है आपको ये जानकारी पसंद आई होगी तो plzz इस पोस्ट को Facebook पर जरूर शेयर करे

जींस की जिप पर आखिर क्यों लिखा होता है YKK?

इस दुनिया में जो कुछ भी होता है उसका कोई न कोई मतलब ज़रूर होता है लेकिन दौड़ भाग भरी इस ज़िंदगी में लोगों का ध्यान बड़ी-बड़ी चीजों पर नहीं जाता तो छोटी-मोटी चीजों पर ध्यान कहां से जाएगा लेकिन कई बातें ऐसी भी हैं जिनके बारे पता होना ज़रूरी होता है।

हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में ऐसी कई चीजें हैं जिन पर हमारा कभी ध्यान नहीं जाता। आज हम बात करेंगे जींस की जिसे मर्द से लेकर औरत तक हर कोई पहनता है। रोज़ पहनने वाली इस चीज की जिप पर आपने कभी ध्यान दिया है? ज्यादातर जींस की जिप पर YKK क्यों लिखा होता है।

करीब 71 देशों में इसी नाम की जींस की जिप देखने को मिलती हैं। असल में YKK का फुलफॉर्म Yoshida Kogyo Kabushikigaisha होता है। यह दुनिया की सबसे पहली ज़िप निर्माता कंपनी है। इस कंपनी का पूरी दुनिया में लगभग आधे जिप बनाने के योगदान है।

YKK के मालिक टोक्यो के एक व्यापारी हैं। Tadao Yoshida नाम के शख्स ने ही इस कंपनी को बनाया था।दिखने में छोटी यह चीज लोगों के लिए इतनी उपयोगी होगी इस बात का अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता।

ता दें कि चेन के अलावा YKK कपड़ों और बैग में लगने वाले और भी उत्पाद बनाती है। 1934 में जिप के मार्किट में आने की वजह से लाखों लोगों के रोज़गार भी मिला। YKK की सबसे बड़ी फैक्ट्री जॉर्जिया, अमरीका में स्थापित की गई है। यहां हर रोज़ 70 लाख ज़िप बनकर तैयार होती हैं।

इस तकनीक से आप भी बिना मिट्टी के कर सकते खेती, हर महीने 50 हजार तक हो रही है कमाई

भारत किसानों का देश है। लेकिन शायद ही कोई मां-बाप या उनके लाडले यह कहते हैं कि वह किसान बनना चाहते हैं। ऐसा इसलिए कि देश में खेती और किसानों की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। सरकारी मदद और घोषणाएं अपनी जगह आती और जाती रहती हैं। लेकिन 21 साल के विपिन राव यादव के लिए ऐसा नहीं है। विपिन राव सब छोड़कर आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। वह भी बिना मिट्टी के!

ना मिट्टी की चिंता,ना बारिश की

खेती हर किसानों की सबसे बड़ी समस्‍या है खेती योग्‍य भूमि की कमी। रसायनों के भारी उपयोग के कारण उपजाऊ ताकत खो रही जमीन और बेमौसम बरसात। लेकिन विपिन जिस आधुनिक तकनीक से खेती करते हैं, उसमें ये तीनों ही समस्‍याएं नहीं हैं। हाइड्रोपोनिक्स के जरिए विपिन मिट्टी के बिना एक पॉलीहाउस में खेती करते हैं।

कंप्‍यूटर साइंस की पढ़ाई कर चुके हैं विपिन

हरियाणा के सैयदपुर गांव में किसान परिवार में पैदा हुए विपिन राव यादव ने गुरुग्राम में पढ़ाई की है। बड़े भाई ने बी. टेक की डिग्री ली, तो विपिन ने भी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की। 2015 में बीएससी कंप्यूटर्स में डिग्री लेने के बाद एक कंपनी में नौकरी भी करने लगे।

हालांकि, वेतन कम होने के कारण महंगे शहर में गुजारा मुश्‍क‍िल हो रहा था। विपिन को खेती से लगाव था। बचपन से खेत और खलिहान ही देखते आ रहे थे। ऐसे में एक दोस्‍त ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवि‍के) जाने का सुझाव दिया। केविके में फल और फूलों की सुरक्षात्मक खेती में प्रशिक्षण के लिए इंटरव्यू चल रहे थे।

 एक महीने की ट्रेनिंग ने बदल दी जिंदगी

विपिन का सेलेक्‍शन हो गया। एक महीने में 200 घंटे की ट्रेनिंग हुई और यहीं से विपिन की जिंदगी बदल गई। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने देशभर के कई सफल किसानों से मुलाकात की। उन्‍हें हाइड्रोपोनिक्स और अन्य नई तकनीकों के बारे में जानकारी मिली। नौकरी छोड़ 2016 में गांव लौट गए। सैयदपुर में पिता के 8 एकड़ खेत में से 100 वर्गफुट क्षेत्र में एक पॉलीहाउस बनाया। 50 ग्रो ट्रे (हाइड्रोपोनिक खेती के लिए उपयोग की जाने वाली) और फूलों के बीज खरीदे।

डेढ़ लाख रुपये की लागत से की शुरुआत

विपिन कहते हैं, ‘नौकरी के दौरान की गई बचत के लगभग डेढ़-दो लाख रुपये के शुरुआती निवेश से मैंने यह सब शुरू किया। बहुत से लोगों ने तब मजाक बनाया। बिना मिट्टी की खेती के बारे कोई नहीं जानता था। इसलिए सब मेरी हंसी उड़ाते थे। एक महीने के भीतर ग्रो ट्रे में मैंने करीब 102 फूलों की खेती की। यह देख सब दंग रह गए। हाइड्रोपोनिक्स के जरिए हम फलों, सब्जियों और फूलों की स्‍वच्‍छ तरीके से खेती कर सकते हैं।’

ग्रो ट्रे में खेती

बता दें कि इस खेती के तहत ग्रो ट्रे में कोको-पिट, वर्मीक्युलाइट और परलाइट का उपयोग किया जाता है। ट्रे में दिए गए छ‍िद्रों में बीज डाले जाते हैं। बीजों को अंकुरित होने तक पानी दिया जाता है। मिट्टी की तरह कीट यहां नहीं होते हैं। विशेष तापमान पर फल या सब्जी की आवश्यकता अनुसार खेती जाती है। उतरते-चढ़ते तापमान के कारण कोई कीट पेड़ों को खराब नहीं करता है।

कोई भी कर सकता है तापमान नियंत्रित

ग्रो ट्रे में मिश्रण का अनुपात हमेशा पोषक तत्वों के अनुसार बदला जा सकता है। विपिन दावा करते हैं कि यह फल और सब्जियां बहुत पौष्टिक हैं, क्योंकि पौधे के विकास के लिए हाल ही में खोजे गए कोबाल्ट समेत सभी 17 पोषक तत्व, उन्हें विकसित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले मिश्रण में मौजूद हैं। इसके अलावा, कोई भी पॉलीहाउस में तापमान को नियंत्रित कर सकता है और बिना मौसम वाली फसल भी उगा सकता है।

हर महीने उगाते हैं 2.5 लाख फूल

विपिन कहते हैं, ‘मैंने शुरुआत में कई गलतियां कीं, लेकिन फिर उचित मार्गदर्शन और इंटरनेट पर रिसर्च ने मुझे सफल होने में मदद की। विपिन ने गुरुग्राम में 1800 वर्गफुट किराए पर लिया और पॉलीहाउस बनाया है। अब वह 2500 ग्रो ट्रे के मालिक हैं, जहां हर महीने लगभग 2.5 लाख फूल उगाए जाते हैं। मात्र 21 साल की उम्र में खेती को एक नई दिशा दिखाने वाले विपिन हर महीने 40,000-50,000 रुपये कमा रहा हैं।

नॉवेल से लेकर स्कूली किताबें भी वेबसाइट पर उपलब्ध

22-23 साल की उम्र में युवा अपने करियर के बारे में सोचना शुरू करते हैं कि वो क्या करें लेकिन इलाहाबाद की रहने वाली 23 साल की रितिका श्रीवास्तव ने कम उम्र में ही एक क्रिएटिव बिजनेस शुरू करके सबको ये साबित कर दिया कि उम्र प्रतिभा की मोहताज नहीं होती।

रितिका ने सेंकेड हैंड किताबें बेचने के लिए एक वेबसाइट http://www.bookthela.com की शुरूआत की जहां पुरानी किताबें सस्ते दामों पर आसानी से मिल जाती है। यह साइट किताबों को पसंद करने वालों के लिए काफी फायदे वाली है।

रीतिका बताती हैं, मुझे बचपन से ही पढ़ने का शौक था, “मैं घंटों किताबें पढ़ती थीं। हम जब हॉस्टल में थे तो हमारे साथ यही दिक्कतें आती थी कि टीवी होती नहीं थी, खाली समय में हम किताबें पढ़ते थे लेकिन किताबें भी बहुत मंहगी होती थीं जो सभी छात्रों की पहुंच से दूर थी।” रीतिका के पास खुद की एक लाइब्रेरी है जिसमें 1000 से ज्यादा किताबें हैं।

पापा ने की मदद

मैं ग्रेजुएशन लास्ट सेमेस्टर में थी और इंटर्नशिप करने के लिए कंपनी ढूंढ रही थी। तभी मेरे पिताजी जो खुद एक लेखक हैं उन्होंने मुझे सेकेंड हैंड बुक्स ऑनलाइन बेचने का आईडिया बताया जो कि मुझे बहुत पसंद आया। रीतिका आगे कहती हैं, मेरा शुरूआत से मन था कि मैं खुद का कोई काम शुरू करुं। इसपर मेरे पिता ने मुझे सलाह दी कि मैं अपने शौक को करियर में बदल सकती हूं और 2017 में मैंने नींव रखी बुकठेला डॉट कॉम की।

दोस्तों का भी मिला साथ

मेरे परिवार के साथ मेरे दोस्तों ने भी मेरा साथ दिया। मैंने जब अपना ये आइडिया बताया तो लोगों ने काफी सराहा और हर संभव मदद करने को भी ये कहा। इससे मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया।

नॉवेल से लेकर स्कूली किताबें भी उपलब्ध

इस वेबसाइट पर फ्रिक्शन, नॉनफ्रिक्शन किताबें ज्यादा हैं। इसके साथ ही कुछ एकडेमिक किताबें भी हैं, जो इस प्लेटफार्म पर आपको अपने पसंद की किताबें सस्ते दामों में तो मिल ही सकती हैं साथ ही जो किताबें आप पढ़ना चाहते हैं, उसे विशलिस्ट में भी डाल सकते हैं।

सक्सेस मंत्र

रीतिका ने हमें बताया कि मेरे हिसाब से एक सफल उद्यमी बनने के लिए हमारे अंदर काम के प्रति दृढ़ संकल्प और धीरज होना चाहिए। अपने काम या बिजनेस के लिए जुनून होना जरूरी है। इसके साथ ही आपके पास लोगों का समर्थन भी होना चाहिए जो आपके आइडिया को सराहे इससे आपका मनोबल बढ़ता है। आजकल क्रिएटिव लोगों की जरूरत है आप जितना नया सोचगें उतना आगे बढ़ेंगें।

अगर आपके पास भी हैं फटे नोट तो घबराएं नहीं, यहां कराएं जमा

अगर आपके पास भी हैं फटे नोट हैं तो आप इन्हे जमा करा के बदल सकते हैं.. ऐसा बहुत बार होता है जब सामान खरीदते समय या पैसे खुल्ले कराते वक्त आपके पास गलती से कोई फटा हुआ नोट आ जाता है। इस नोट को कोई और लेता नहीं है जिससे यह लंबे समय तक आपके पास ही पड़ा रहता है।

फटे होने कारण ऐसा लगता है कि आपका पैसा बेकार हो गया है लेकिन अब यदि आपके पास कभी भी कोई फटा हुआ नोट आता है तो इसके लिए आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। आप से आसानी से बदलवा सकते हैं और इसके बदले में नया नोट ले सकते हैं। अगर आपके पास भी कोई 500 या 2000 का फटा हुआ नोट है तो यह खबर आपके लिए काफी महत्वपूर्ण है।

बैंक करेगा आपके फटे हुए नोटों को स्वीकार

अब आप इन फटे हुए नोटों का इस्तेमाल कई जगहों पर कर सकते हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं कि इन फटे हुए नोटों को कहां बदल सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, यदि कोई ग्राहक बैंको के पास फटे हुए नोटों के लेकर जाए तो बैंक को उसे स्वीकार करना पड़ेगा।

ऐसे में अब आपको फटे हुए नोटों की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है आप इन्हें अपने नजदीकी बैंकों में जाकर बदल सकते हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं यह नहीं पता कि इन कटे-फटे नोटों का इस्तेमाल आप बैंक में बिल और टैक्स देने के लिए कर सकते हैं।

अकाउंट में भी जमा कर सकते हैं फटे हुए नोटों को

इसके अलावा इन फटे कटे-फटे नोटों को आप अपने अकाउंट में भी जमा कर सकते हैं। आरबीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक, इन नोटों को दोबारा लोगों को री-इश्यू नहीं किया जा सकता है। इसके सआथ ही ग्राहकों को इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है

कि अगर बैंक के अधिकारी को शक होता है कि आपने अपने नोटों को जानबूझकर फाड़ दिया है, तो उसे जमा करने या बदलने से मना कर दिया जाएगा।

अब मछली खाने से भी हो रहा है कैंसर, मछली खाने के शौक़ीन एक बार यह खबर जरूर पढ़ें

अब मछली खाने से भी हो रहा है कैंसर.. मछली बहुत पौष्टिक और स्वादिष्ट होती है इसलिए लोग इसे चाव से खाते हैं। मछली में कई ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्व होते हैं, जो अन्य फूड्स में नहीं पाए जाते हैं। लेकिन अगर आप भी पौष्टिक होने के कारण मछली खाते हैं, तो सावाधान हो जाएं। हाल में मछली के कुछ ऐसे सैंपल पाए गए हैं, जिन्हें खाने से आपको कैंसर हो सकता है।

इसका कारण यह है कि इन मछलियों में फर्मलीन, कैडमियम और फॉर्मल डिहाइड (खतरनाक केमिकल्स) की घातक मात्रा पाई गई है। यह केमिकल मछलियों को संरक्षित (प्रिजर्व) करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, ताकि मछलियां लंबे समय तक खराब न हों।

 फर्मलीन वाली मछली का सेवन खतरनाक है 

अगर आप भी बाजार से मछली लाकर चाव से बनाते और खाते हैं तो आपको सावधान रहना चाहिए। बाजार में मछलियों को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए इसपर कई हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है,

जिनके सेवन से आपको कैंसर और किडनी रोगों का खतरा होता है। इसके अलावा फर्मलीन वाली मछलियों को खाने से बैक्टीरियल इंफेक्शन खा भी खतरा होता है।

भेजे गए सैंपल

सरकार को ऐसी सूचना मिली थी कि आंध्र से आयातित मछली में बड़ी मात्रा में फर्मलीन को प्रयोग किया जा रहा है, जिससे कैंसर होने का खतरा है। इसकी पुष्टि के लिए अक्टूबर महीने में 10 स्थानों से मछलियों के सैंपल लेकर कोलकाता की एक लैब को भेजे गए थे।

सरकार को अब सैंपल जांच रिपोर्ट मिल गई हैं, जिसका अध्ययन पशुपालन विभाग की टीम कर रही है। सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि रिपोर्ट में फर्मलीन की पुष्टि कर दी गई है।