अपने आप आने लगे किसानों के बैंक खातों में पैसे, देख कर किसानों के चेहरों पर आई खुशी

किसानों के बैंक खातों में अपने आप पैसे आने लगे है, अपने खाते में पैसा जमा होने से किसानों के चेहरों पर खुशी छा गई, महाराष्ट्र के बीड में एक अजीब मामला सामने आया है. वहां के लोगों के बैंक अकाउंट में अचानक से पैसे जमा होने लगे.

किसानों के बैंक अकाउंट में 500 से 2000 रुपये अचानक जमा हुए। ये बात अलग है कि अभी तक तक ये पता नहीं चल सका है कि खातों में पैसा किसने जमा कराए। बीड जिले के दासखेड गांव के किसानों के बैंक खाते में 500 रुपये,1000 और 2000 रुपये जमा कराने की खबर आई।

किसानों ने पहले सोचा की यह पैसा किसी सरकारी स्कीम का होगा या फिर फसल बीमा का है, लेकिन अब यह पैसा उस व्यक्ति के बैंक खाते में भी जमा किया जा रहा है जिसके पास कोई खेत नहीं है। अचानक अपने खाते में पैसा जमा होने से किसानों के चेहरों पर खुशी छा गई तो इससे साथ ही उनके दिल और दिमाग में तरह तरह की बातें आने लगी कि आखिर वो दिलदार शख्स या संस्था कौन जो उनके लिए मेहरबान हो गई।

कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने बयान दिया था कि, “मोदी सरकार हर एक व्यक्ति के बैंक खाते में 15 लाख रुपये जमा करेंगें | पैसे आने के बाद लोगों के बीच इस बात की अफवाह भी फैल गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पैसे खाते में भेजकर अपना चुनावी वादा पूरा कर रहे हैं. जिन लोगों के खाते में पैसे आए हैं वह काफी खुश दिखाई दे रहैं हैं.

मुफ्त में 25000 रुपए का पेट्रोल जीतने का मौका, बस करना होगा यह काम

 

अगर आप पेट्रोल के बढ़ते दामों से परेशान हैं तो अपको अब बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी आईओसीएल आपके लिए एक खास ऑफर लेकर आ रही है। देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) देशभर के लोगों के लिए एक नया कांटेस्ट लेकर आई है। इस कांटेस्ट में हिस्सा लेकर देश का कोई भी व्यक्ति मुफ्त में 25 हजार रुपए का पेट्रोल जीत सकता है।

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, लोगों के भरोसे, निष्ठा और विश्वास को धन्यवाद देने के लिए यह कांटेस्ट शुरू किया गया है। कंपनी के अनुसार, इस कांटेस्ट में हिस्सा लेने वाले लोगों को 5 लाख रुपए तक के फ्यूल वाउचर दिए जाएंगे।

3 जनवरी से शुरू हो रही प्रतियोगिता

IOCL की ओर से इस कांटेस्ट को ‘आई लव इंडियन ऑयल’ नाम दिया गया है। इसमें भाग लेने वालों को #ILoveIndianOil को साथ जवाब देने होंगे। इस कांटेस्ट में 3 से 9 जनवरी तक हिस्सा लिया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए इंडियन ऑयल की शर्तों का पालन करना होगा।

इस कांटेस्ट में ट्वीटर और फेसबुक के सभी यूजर हिस्सा ले सकते हैं। इस कांटेस्ट में इंडियन ऑयल कर्मचारी और कंपनी से जुड़े एजेंट और कर्मचारियों के परिवार भी हिस्सा ले सकते हैं। सही जवाबों को कांटेस्ट में शामिल किया जाएगा। फेसबुक, ट्वीटर और अन्य सभी प्लेटफॉर्म पर विनर की घोषणा की जाएगी।

सभी को मिलेगा स्पेशल गिफ्ट कूपन

इस कॉन्टेस्ट में फर्स्ट प्राइज के लिए 5 विजेताओं का चयान किया जाएगा। फर्स्ट प्राइज वाले विजेताओं को 25 हजार रुपए का इंडियन ऑयल फ्यूल वाउचर दिया जाएगा। सेकेंड प्राइज के लिए 10 लोगों का चयन किया जाएगा और उनको इनाम के रुप में 10-10 हजार के फ्यूल वाउचर दिए जाएंगे। साथ ही थर्ड प्राइज के रुप में 30 विजेताओं को 5-5 हजार रुपए का वाउचर दिया जाएंगे। इसके साथ ही इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले 60 प्रतिभागियों को 2-2 हजार रुपए के सांत्वना पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

सभी विजेताओं को पहले कंपनी की ओर से मैसेज भेजा जाएगा। बाद में ट्वीटर और फेसबुक पर विजेताओं के नाम की घोषणा की जाएगी। इस कांटेस्ट के बारे में अधिक जानकारी https://www.facebook.com/notes/indian-oil-corporation-ltd/i-love-indianoil-contest-terms-conditions/2249355335089423/ से ली जा सकती है।

मोदी सरकार देगी किसानों को ये बड़ा तोहफा, हर किसान को प्रति एकड़ मिलेगी 4000 रुपए की मदद और इतने लाख का ब्याज मुक्त कर्ज

2019 साल मोदी सरकार के लिए काफी अहम माना जा रहा है. दरअसल, कुछ ही महीनों में  लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और यह मोदी सरकार के लिए किसी अग्‍निपरीक्षा से कम नहीं है. ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार अन्नदाताओं को बड़ा तोहफा देने की विचार कर रही है। सरकार किसानों को बड़ी राहत की योजना रही है। मोदी सरकार किसानों को 4, 000 प्रति एकड़ रुपए आर्थिक सहायदा देने जा रही है।

मोदी सरकार खेती के लिए हर सीजन में 4000 रुपए प्रति एकड़ की दर से आर्थिक मदद करेगी। यह पैसा सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक सरकार किसानों का एक लाख तक ब्याज मुक्त करने की भी घोषणा करेगी। इसी हफ्ते इसका ऐलान किया जाएगा। योजना पर सालाना खर्च 2.3 लाख करोड़ का होगा।

किसानों के लिए योजनाएं लाने पर विचार

पिछले महीने केंद्र सरकार देश के किसानों को राहत देने पर विचार करने वाली खबरें आई थी । सरकार सही समय पर कर्ज भुगतान करने वाले किसानों की ब्याज माफ कर सकती है। इसके लिए सरकार लगातार उच्चस्तरीय बैठकें कर रही हैं।

अगर ऐसा होता है तो ये किसानों के लिए बड़ी राहत होगी। दरअसल तीन राज्यों में हार के बाद मोदी सरकार किसानों को लेकर ज्यादा चिंतित दिख रही है। लगातार किसानों के लिए की योजनाएं लाने पर विचार कर रही है। साथ ही मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में काम कर रही है। 2018 में सरकार ने किसानों को रबी फसल पर एमएसपी बढ़ा दी थी।

पश्चिम बंगाल सरकार ने भी की घोषणा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रदेश के किसानों के लिए बड़ा पिटारा खोला था। किसानों को ऋण मुक्त और 5 हजार रुपए प्रति एकड़ देने की घोषणा की थी। इससे पहले कांग्रेस ने तीन राज्यों में जीत के बाद किसानों का कर्ज माफ कर दिया है।

कांग्रेस ने चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि सरकार अगर आएगी तो पार्टी किसनों का कर्जमाफ कर देगी। इससे पहले यूपी में योगी सरकार ने भी किसानों की कर्जमाफी की थी।

कंपनियों में कार सर्विस के नाम पे इस तरह ठगे जाते हैं कस्टमर्स से हजारों रूपए

कार सर्विस के नाम पर कंपनियों द्वारा आजकल कस्टमर्स से हजारों रूपए ठगे जाते हैं, आइए जानते हैं कैसे आप इस ठगी का पता लगा सकते हैं..कार के मालिकों को कार की सर्विस तो कभी न कभी करानी पड़ती है, लेकिन अक्सर आपने लोगों को लोकल सर्विसिंग सेंटर की जगह ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर पर जाते देखा होगा।

दरअसल लोगों को भरोसा होता है कि ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर में उनकी गाड़ी सेफ होगी और उसकी ठीक तरह से सर्विसिंग होगी लेकिन आपको बता दें कि आपका ये सोचना भी गलत है।अक्सर ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर लोगों से पैसा ऐंठने के लिए तरह के तरह के फ्रॉड करते हैं जिनका पता आम आदमी को नहीं चल पाता लेकिन उनकी जेब पर इसका असर जरूर दिखता है।

तो चलिए आज हम आपको बताते हैं उन धोखों के बारे में जो ये सर्विस सेंटर पर दिये जाते हैं। सर्विसिंग में कम से कम 1 पूरा दिन लग जाता है और आजकल इतना वक्त किसी के पास नहीं होता।इसी बात का सर्विस सेंटर वाले फायदा उठाते हैं।

इंजन ऑइल बदलने में करते हैं कोताही- इंजन ऑइल को सर्विस सेंटर पर सही तरीके से बदला नहीं जाता या तो टॉप कर दिया जाता है या बिना सफाई के भर दिया जाता है इसके अलावा ऑइल फ़िल्टर को न बदलना, जरूरत के हिसाब से टायर्स को रोटेशन न करना।

इससे कार के इंजन पर बुरा असर पड़ता है और इंजन खराब होने का मतलब होता है भारी नुकसान।सही पार्ट्स को बताते हैं खराब- ये लोग जिस पार्ट की जरूरत भी नहीं होती उसको भी खराब बता देते हैं,

हममें से काफी लोग इन पर भरोसा कर अपनी कार सर्विस सेंटर छोड़ कर अपने घर या दफ्तर चले जाते हैं, ज्यादातर मामलों में सर्विस के नाम पर गाड़ियों को धो कर, साफ़ करके पकड़ा दी जाती है और बेचारा ग्राहक ठगा जाता है।बिना बदले ही ये लोग पार्ट्स के पैसे ले लेते हैं।यानि कस्टमर्स को चूना लगाते हैं।

ऐसे शुरू करें सेनेटरी नैपकिन बनाने का बिजनेस

ऐसे शुरू करें सेनेटरी नैपकिन बनाने का बिजनेस …क्या आप भी अक्षय कुमार मूवी की तरह पैड बेच कर मुनाफा कामना चाहते है तो आप भी सेनेटरी नैपकिन बनाने का काम शुरू कर सकते है । जिसके लिए आप को सिर्फ 15000 रुपये का जुगाड़ करना होगा ।

उसके बाद आप भी छोटे शहरों और गांव में पैड बेच कर मुनाफे के साथ साथ समाज सेवा का काम भी कर सकते है ।जिस रफ्तार से भारत विकास की ओर बढ़ रहा है, उसी रफ्तार से इस बिजनेस के बढ़ने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। चलिये जानते हैं कैसे?

सैनिटरी नैपकिन ब्रांड इप्सॉस और स्वतंत्र शोधकर्ताओं ने भारत के ग्रामीण इलाकों में सर्वे किया और पाया कि 66 प्रतिशत लड़कियां पीरियड्स के समय सावधानियों और साफ-सफाई के बारे में नहीं जानती हैं। वहीं 12 फीसदी लड़कियों तक सैनिटरी पैड पहुंचता ही नहीं है। पैड के बारे में मालूम भी हो, तो भी 67 प्रतिशत महिलाएं इसका इस्तेमाल नहीं करतीं। इसका मात्र एक कारण है पैड का महंगा होना।

ऐसे में यदि आप किसी गांव या छोटे कस्बे में अपना उद्योग शुरू करते हैं और कम कीमत के पैड बनाते हैं, तो आपका बिजनेस जमकर चलेगा। और तो और चूंकि यह स्वच्छता से जुड़ा बिजनेस है, इसलिये स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, ग्रामीण मंत्रालय और समाजसेवी संगठन भी आपके उद्योग को बढ़ावा दे सकते हैं।यह स‍ब कैसे संभव होगा, उसके लिये हम आपको ले चलते हैं कर्नाटक के तोरणगल्लू।

यह एक छोटा सा कस्बा है बेल्लारी और होस्पेट के बीच। यहां पर सुरक्षा सैनिटरी नैपकिन प्रोडक्शन एवं ट्रेनिंग सेंटर में चार से पांच लोगों का स्टाफ है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिये सस्ती दरों पर सैनिटरी पैड बनाता है। यह केंद्र जेएसडब्ल्यू की सोशल सर्विस के तहत संचालित है।

बिज़नेस  की  लागत और बचत

इस बिज़नेस को 15000 रुपये की निजी लागत से भी शुरू किया जा सकता है. भारत सरकार द्वारा स्वच्छता पर अधिक ध्यान दिए जाने के कारण इस बिज़नेस में और भी चमक आ गयी है .

  • स्वयं की लागत: 15,000 रुपये
  • सरकारी मदद: 1.50 लाख रुपये
  • वार्षिक कमाई : 1.8 लाख रुपये

इस व्यापार को शुरू करने के लिए आपको लगभग 1.5 लाख रुपये की जरुरत होगी जिसमे 1.35 लाख का लोन प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिल जायेगा . यदि आप 1440 सेनेटरी नैपकिन एक दिन में तैयार करते हैं और एक पैकेट में 8 नैपकिन भी रखी जाती हैं तो एक साल में 54000 पैकेट तैयार किये जा सकते हैं .

यदि एक पैकेट की कीमत 13 रुपये रखी जाती है तो आप साल भर में लगभग 7 लाख रुपये की बिक्री के सकते हैं . और यदि इस आय में से पूरी लागत को निकाल दिया जाये तो साल में 2 लाख रुपये तक की बचत की जा सकती है .

कॉटन नहीं पल्प से बनते हैं पैड

ये सैनिटरी पैड कॉटन यानी रुई नहीं पल्प से बनते हैं, जो सोखने की क्षमता ज्यादा रखता है।कई सामाजिक संगठन ग्रामीण महिलाओं को कपड़े से मुक्त‍ि दिलाने की दिशा में कार्यरत हैं।अगर सस्ती दरों में पैड बनने लगे तो भारत के ग्रामीण इलाके और ज्यादा हाईजीनिक होंगे।अगर बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो दो मशीनों से शुरुआत कर सकते हैं।

अगर आपका बिजनेस ग्रामीण महिलाओं को मदद पहुंचाता है, तो सरकार भी आपकी मदद करेगी।कोई भी इस सेंटर में आकर ट्रेनिंग प्राप्त कर सकता है। यह सेंटर जिंदल स्टील वर्ल्ड द्वारा संचालित है।

ये मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

लेक्चरर की नौकरी छोड़ी, अब डेयरी से 1 लाख महीना कमा रही कुलदीप

दो विषयों में एमए आैर एमएड कुलदीप काैर ने कोटकपूरा के एक निजी काॅलेज में मिली नौकरी छोड़ स्वरोजगार को चुना। आज वह खुद दूसरों को रोजगार दे रही है। कोटकपूरा की बीड रोड पर सेखों डेयरी के नाम से करीब दो दर्जन गायों का फार्म चला रहीं कुलदीप कौर ने बताया कि उसने एमए के बाद एमएड की।

2010-11 में काॅलेज में लेक्चरर की नौकरी की। कुछ अलग करने की चाहत में नौकरी छोड़ दी। महिलाओं को डेयरी का धंधा अपनाने पर मिलने वाली सहूलियतों की जानकारी मिली तो उसने डेयरी का धंधा अपनाया।

2014 में महिला सशक्तिकरण अभियान के तहत प्रशिक्षण लिया। 2015 में तीन लाख इनवेस्ट कर डेयरी के धंधे में किस्मत अाजमाई। डेयरी प्रशिक्षण के आधार पर डेयरी विकास विभाग से 50 फीसदी सब्सिडी पर 17.5 लाख का कर्ज लेकर दो कनाल में आधुनिक डेयरी फार्म बनाया।

तीन साल में उसके पास 20 दूध देने वाली अमेरिकन नस्ल की हालिस्टर फ्रोजियन गायें व अपनी ही गायों के उच्च नस्ल के करीब 24 बछड़े पल रहे हैं।

एक गाय पर डेली खर्च 100 रुपए, उत्पादन 20 लीटर

कुलदीप कौर ने बताया कि एक गाय का डेली खर्च 100 रुपए है। उनके फार्म में दूध का कुल उत्पादन 200 लीटर है। दो कर्मचारी भी रखे हैं। ऐसे में सारा खर्च निकालने के बाद वह एक लाख रुपए प्रति महीना तक कमाे लेती हंै।

डेयरी खोलने के बाद कभी फसल के अवशेष जलाने नहीं पड़े

कोटकपूरा के ऋषि हाई स्कूल में बतौर शिक्षक कुलदीप कौर के पति गुरजिंदर सिंह ने बताया कि डेयरी फार्म खोलने के बाद उन्हें कभी भी खेतों में फसल के अवशेषों को जलाने की जरूरत नहीं पड़ी। गेहूं के अवशेष से तूड़ी तैयार करने के साथ-साथ अपने खेतों में बोई बासमती की पराली को काटकर पशुओं को डालते हैं।चिकित्सकों के अनुसार सर्दी में पराली पुशओं के लिए काफी लाभदायक रहती है।

अपने खेतों में वह बिना कीटनाशक मकई से पशु पालन विभाग द्वारा बताई तकनीक से आचार तैयार कर लेते हैं जो पूरा साल काम आता है। उन्होंने बताया कि वह स्कूल से वापस लौटने के बाद डेयरी के कार्य में हाथ बंटाते हैं।

 

घर का चारा व प्रदूषण से भी राहत

आगे दुग्ध उत्पादों पनीर, देसी घी बनाकर बेचने पर विचार है। फिलहाल दूध का उत्पादन सीमित होने के चलते उनका मंडीकरण का कार्य मात्र दूध बेचने तक सीमित है। उच्च गुणवत्ता व शुद्धता की गारंटी के चलते शहर के परिवारों में उनकी डेयरी के दूध की काफी डिमांड है लेकिन आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे दूध उत्पादन बढ़ेगा आैर काम बढ़ाएंगी।

5.5 लाख की इस मशीन से शुरू करें पेपर बैग बनाने का बिज़नेस

आज हर शहर में प्लास्टिक बैग पर बैन लगा दिया गया है जो वातावरण के लिए काफी नुकसानदयाक था । ऐसे में आप पेपर बैग का बिजनेस कर के काफी अच्छा इनकम कर सकते हैं ।

पेपर बैग आम तौर पैकेजिंग की सामग्री है जो आज हर बेकरी स्टोर, ग्रोसरी स्टोर, मॉल शॉप, बड़ी से बड़ी ब्रांडेड कपड़े की कंपनी पेपर पैग का इस्तेमाल करते हैं ।पेपर बैग काफी यूजफुल रहता है और स्टाइलिश भी होता है जो बड़े बड़े ब्रांडेड कंपनियां आजकल यूज करते हैं । इस लिए इसके बिजनेस बहुत तेजी से बढ़ने की सम्भावना है ।

पेपर बैग के बिजनेस को स्टार्ट करने के लिए आपके पास आप को नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा और इसके साथ साथ उद्योग आधार नंबर भी लेना होगा । कच्चे मॉल के लिए आप को पेपर रोल ,प्रिंटिंग इंक आदि की जरूरत पड़ेगी जिसे आप आसानी से खरीद सकते है । सरकार इस बिजनेस के लिए फंड भी प्रोवाइड करवाती है ।

पेपर बैग को बनाने के लिए आपको एक मशीन खरीदना होगा । जो पेपर बैग बनाने का काम करती है । वैसे तो आप को मार्किट में बहुत सी मशीन मिल जायँगी और आप अपने हिसाब से किसी भी कंपनी की मशीन ले सकते है । लेकिन आज हम किसी एक कंपनी की मशीन के बारे बता रहे है ।

आज हम जिस कंपनी के बारे में बता रहे है उसका नाम है मोहिंद्रा इंजीनिरिंग कंपनी। यह कंपनी कई तरह की मशीन त्यार करती है जिसमे पेपर बैग मेकिंग मशीन भी है । इस मशीन से आप एक घंटे में 10000 बैग बना सकते है । बैग की चौड़ाई 100 से 430 मिलीमीटर तक हो और चौड़ाई 180 से 690 मिलीमीटर तक हो सकती है । इस मशीन की कीमत 5.5 लाख रुपये है।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

इस मशीन को खरीदने के लिए जा और जानकारी के लिए निचे दिए हुए पते पर सम्पर्क करें

Address:Mohindra Engineering Company
Azad Vinder Singh(Owner)
RZ- 73, Nursing Garden, Near Khyala Village, New Delhi – 110018, Delhi, India
Call Us:08071807710
Send SMS Mobile:+91-9999778804,+91-9212658395

नोट : कृपया कोई भी मशीन खरीदने से पहले अपनी तसल्ली कर लें यह पोस्ट सिर्फ जानकरी देने के लिए ही डाली गई है ।

पानी की कमी से परेशान किसान ने किया केसर की खेती का रुख

क्षेत्र में पानी की कमी से भले ही किसान परेशान हो लेकिन राजस्थान के बसवा तहसील क्षेत्र के गांव झूथाहेड़ा में एक किसान ने इस परेशानी को दूर कर कम पानी व कम खर्च में अच्छा मुनाफा कमाने के लिए केसर की खेती को अपनाया है।

किसान को उम्मीद है कि इस खेती को करने के बाद उसे खर्च से तीन गुना मुनाफा मिलेगा। झूथाहेड़ा गांव निवासी किसान श्री मोहन मीना ने बताया कि उनके गांव सहित आसपास के क्षेत्र में वर्षों से पानी की कमी से किसान परेशान हैं।

फसलों में पानी की अधिकता को लेकर कई किसानों ने तो खेती बाड़ी भी करना बंद कर दिया हैं। ऐसे में उन्होंने जानकारी लेकर अपने आधा बीघा खेत में इस बार केसर की फसल की पैदावार की हैं।किसान ने बताया कि इस फसल में पानी की आवश्यकता कम है। उनके द्वारा बीज लगाए गए थे जिस पर अब खेत में 720 केसर के पौधे उग आए है ।

उन्होंने बताया कि केसर के पौधों में 15-20 दिन के अंतराल में पानी देना पड़ता हैं। वर्तमान में पौधे बड़े हो गए है तथा उनमें डोडी भी उग आई हैं। 15 दिन बाद इसमें केसर आना शुरु हो जाएगी।

मुनाफा तीन गुना मिलने की उम्मीद

किसान ने बताया कि केसर की खेती में उन्होंने करीब ढाई लाख रुपए का खर्च आया हैं। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि केसर को बेचने के दौरान तीन गुना मुनाफा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि केसर बेचने के लिए उन्होंने जम्मू में केसर का कारोबार करने वाले व्यापारियों से संपर्क किया था।जहां व्यापारियों ने एक किलो केसर दो लाख रुपए में खरीदने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने बताया कि उनको अपने खेत में करीब चार किलो केसर आने की उम्मीद है।

नेट बना सबसे बड़ा सहयोगी

किसान श्री मोहन मीना ने बताया कि पानी की कमी के कारण वह खेती करने को लेकर लंबे समय से परेशान था। एक दिन टेलीविजन पर उन्होंने केसर की खेती के बारे में देखा। इसके बाद उनके मन में केसर की खेती करने को लेकर उम्मीद जगी। नेट पर केसर की खेती कैसे करते है इस बारे में जानकारी ली।

इसके बाद जम्मू से बीज लाकर इस खेती को शुरु कर दिया। उन्होंने बताया कि अभी भी वे इस फसल में किसी प्रकार की परेशानी आने पर नेट पर सर्च कर उस परेशानी को दूर कर देते है।

इस एक Idea से चमकी किसान की किस्मत, हर साल कमा रहा है इतने लाख रुपए

लेट्यूस (सलाद पत्ता), गांठ गोभी, पत्ता गोभी, नारंगी हरे रंग की (ब्रोकली) गोभी, पुदीना, पालक, हल्दी, दो-तीन किस्म की मिर्च, टमाटर, बेलदार सब्जियों के अलावा कुष्मांड कुल की सब्जियां।बैंगन, प्याज, मिर्च, गोभी, गेंदा, गुलाब, टमाटर सहित अनेक सब्जियों एवं फुलवारी के पौधों की नर्सरी।

क्या आप सोच सकते हैं यह सारा काम कितने बीघा में होगा? महज दो बीघा में कई तरह की सब्जियों के साथ पौध तैयार कर बेचकर एक परिवार साल में 5 लाख रुपए कमाई करता है।

  • इतने छोटे से खेत में पानी संग्रह के लिए छोटी सी पक्की डिग्गी, स्प्रिंकलर, मिनी स्प्रिंकल, पाइप्स के जरिए पौधों की बूंद-बूंद सिंचाई करते हैं चक दो ई छोटी के ओमप्रकाश घोड़ेला और उनका परिवार।

  •  डिग्गी पर सोलर पंप, केंचुआ खाद तैयार करने का अलग से प्लांट। भूमि भी सबसे अलग, निराली। खेत का एक इंच भी बेकार नहीं जाने देते ओमप्रकाश। वे उन किसानों के लिए प्रेरणा दायक हैं जिनके पास बहुत छोटी जोत है।

बेलदार सब्जियां भूमि से ऊपर

ओमप्रकाश अपने खेत में बेलदार सब्जियाें का उत्पादन जमीन से ऊपर लेते हैं। खेत की क्यारियों की मेड़ पर बांस-बल्लियां लगाकर बेलें उपर चढ़ा देते हैं। हरा पत्ता, सुगंधित पत्ता, सेलरी पत्ता, ब्रोकली जैसी महंगी सब्जियाें की उपज का हुनर ओमप्रकाश ने पिता से सीखा। उनके खेत में मार्च-अप्रैल में पालक, दिसंबर-जनवरी में टिंडे और बारहमास पुदीना रहता है।

पौध तैयार करने का नायाब तरीका

  •  वे खेत में पौध तैयार कर किसानों को बेचते हैं। उनकी नर्सरी में मिर्च, गोभी, टमाटर आदि की पौध तैयार की जाती है। इसके लिए वे प्लास्टिक की ट्रे में कोकोपिट डालते हैं। प्रत्येक खाने में एक या दो बीज डालते हैं।
  • ओमप्रकाश के मुताबिक, कोकोपिट ऐसा चूर्ण है जिसमें पौध अंकुरण शीघ्र होती है।

छत पर लगाइए टाटा का यह प्रोडक्ट, 12.5 लाख तक हो सकती है कमाई

अपनी छत को कमाई का जरिया बनाने का सपना देने वालों के लिए टाटा ने खास ऑफर पेश किया है। कंपनी का दावा है कि आप टाटा पॉवर का खास सोलर प्रोडक्ट अपनी छत पर लगाते हैं, तो आपको करीब 12.5 लाख रुपए की कमाई हो सकती है। कंपनी का दावा यह है कि यह इनकम 25 साल तक रेग्युलर होगी।

टाटा ने पेश किया रेसिडेंसियल रूफटॉप सॉल्यूशन

देश में बढ़ते सोलर एनर्जी के प्रयोग को देखते हुए टाटा पॉवर सोलर ने मुंबई में सोलर एजर्नी से जुड़ा रेसिडेंसियल रूफटॉप सॉल्यूशन पेश किया है। ‘अपनी छत को बनाइए अपना सेविंग अकाउंट’ टैग लाइन से लॉन्च किए गए इस प्रोडक्ट पर आकर्षक स्कीम लेकर आई है। कंपनी का दावा है कि इससे आपके बिजली बिल में आने वाले 25 साल तक कटौती कर सकते हैं।

ऐसे बचेंगे 12.5 लाख

कंपनी का दावा है कि रेसिडेंसियल रूफटॉप सॉल्यूशन छत पर लगाने के बाद एक कस्टमर अपने बिल में सालाना 25 हजार रुपए की बचत कर सकता है। क्योंकि इस प्रोडक्ट की उम्र 25 साल बताई जा रही है, ऐसे में इस अवधि के दौरान आपके करीब 12.5 लाख रुपए बचेंगे। सेविंग इज अर्निंग के हिसाब से कहें तो आप घर बैठे 25 साल में 12.5 लाख रुपए कमा सकते हैं। वह भी 50,000 रुपए सलाना की दर से।

क्या होगा इस प्रोडक्ट का प्राइस

कंपनी सोलर पैनल का पूरा सॉल्यूशन देगी और मेंटेनेंस का भी ख्याल रखेगी। बिजली बचाओ और साथ में कमाओ भी, टाटा पावर की रिन्यूएबल एनर्जी सब्सिडियरी टाटा सोलर आपके लिए यही प्लान लेकर आई है।

कंपनी ने फिलहाल इस रूफटॉप सॉल्यूशन के प्राइस का खुलासा तो नहीं किया है, अन्य वेबसाइट्स (इंडिया मार्ट) पर दी गई जानकारी के मुताबिक, इसे 1 किलोवाट की क्षमता वाला प्रोडक्ट लगवाने का खर्च करीब 45 हजार रुपए बैठ रहा है। साथ ही इसपर सरकारों की ओर से मिलने वाली सब्सिडी भी हासिल की जा सकती है।

सरकार देती है सब्सिडी

राजधानी दिल्ली में जोल्ड एनर्जी एजर्नी के फाउंडर अभिषेक डबास के मुताबिक, आम तौर पर अगर आपके पास 100 स्क्वॉयर फीट की छत है तो इस पर आप 1 किलोवॉट की यूनिट लगा सकते हैं। इस पर करीब 60 हजार रुपए का खर्च आता है।

मौजूदा समय में इस पर सरकार करीब 30 फीसदी सब्सिडी देती है। इसके चलते एक किलोवाट की यूनिट का इफेक्टिव प्राइस करीब 42 हजार के आस पास आता है।