ऐसे करें धान की खेती, 70 फीसद पानी और 90 प्रतिशत मिहनत की होगी बचत

धान की बेहतर पैदावार के लिए पानी की सर्वाधिक जरूरत होती है। लेकिन एक ऐसी तरकीब है जिसके तहत 70 फीसद पानी और 90 प्रतिशत मानव श्रम की बचत कर उच्‍छी उपज ली जा सकती है।

अमूममन माना जाता है कि एक किलो धान उगाने के लिए कम से कम तीन से चार हजार लीटर पानी की जरूरती होती है, जबकि हर्बल हाइड्रोजन तकनीक में धान के बीज पर गोंद-कतीरे व गुड़ का लेप लगाकर बुआई करने से 70 प्रतिशत कम पानी में भी धान की खेती की जा सकती है।

प्रदेश में पहली बार इस तकनीक का सफल प्रयोग

करनाल रिसर्च सेंटर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर की तकनीक को नैनीताल जिले के गौलापार निवासी प्रगतिशील किसान नरेंद्र मेहरा ने इस बार अपनी पंद्रह बीघा भूमि में आजमाया तो लागत में कमी के साथ ही लगभग 90 प्रतिशत पानी की बचत हुई।

गोंद कतीरा से ऐसे तैयार होता है बीज

50 किलोग्राम बीज के लिए एक लीटर उबले पानी में ढाई सौ ग्राम गुड़ व दो सौ ग्राम कीकर बबूल की गोंद या फिर गोंद कतीरा डालकर एक तार की चासनी बनाई जाती है, चासनी को ठंडा कर व छानकर धान के बीजों पर छिड़का जाता है।

इससे बीजों की जलधारण क्षमता बढ़ जाती है। एक ग्राम गोंद कतीरा लगभग सौ एमएल पानी सोख लेता है। इसके बाद तैयार बीजों से बुआई की जा सकती है।

90 प्रतिशत पानी और 90 प्रतिशत मानव श्रम की बचत

किसान अधिक उत्पादन करने की बजाए लागत कम करने की नई तकनीक विकसित कर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं। प्रगतिशील किसान नरेंद्र मेहरा मानते हैं कि जब-जब किसान ने बंपर पैदावार की उसे लागत भी नहीं मिली, इसी सोच को साकार करने के लिए मैंने धान की एक हेक्टेयर फसल की बुआई नई तकनीक विकसित करके की।

जिसमें मात्र छह हजार रुपये खर्चा आया, जबकि आमतौर पर एक हेक्टेयर बुआई में 30-32 हजार रुपये की लागत आती है। वर्षा आधारित इस तकनीक में 90 प्रतिशत पानी और 90 प्रतिशत मानव श्रम की बचत होती है।

गौंद कतीरा लेपित तकनीक पर्वतीय किसानों के लिए वरदान साबित होगी। गोंद कतीरे से खेती पंजाब, राजस्थान व हरियाणा के कम पानी वाले स्थानों पर की जा रही है।