इस तकनीक से आप भी बिना मिट्टी के कर सकते खेती, हर महीने 50 हजार तक हो रही है कमाई

भारत किसानों का देश है। लेकिन शायद ही कोई मां-बाप या उनके लाडले यह कहते हैं कि वह किसान बनना चाहते हैं। ऐसा इसलिए कि देश में खेती और किसानों की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। सरकारी मदद और घोषणाएं अपनी जगह आती और जाती रहती हैं। लेकिन 21 साल के विपिन राव यादव के लिए ऐसा नहीं है। विपिन राव सब छोड़कर आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। वह भी बिना मिट्टी के!

ना मिट्टी की चिंता,ना बारिश की

खेती हर किसानों की सबसे बड़ी समस्‍या है खेती योग्‍य भूमि की कमी। रसायनों के भारी उपयोग के कारण उपजाऊ ताकत खो रही जमीन और बेमौसम बरसात। लेकिन विपिन जिस आधुनिक तकनीक से खेती करते हैं, उसमें ये तीनों ही समस्‍याएं नहीं हैं। हाइड्रोपोनिक्स के जरिए विपिन मिट्टी के बिना एक पॉलीहाउस में खेती करते हैं।

कंप्‍यूटर साइंस की पढ़ाई कर चुके हैं विपिन

हरियाणा के सैयदपुर गांव में किसान परिवार में पैदा हुए विपिन राव यादव ने गुरुग्राम में पढ़ाई की है। बड़े भाई ने बी. टेक की डिग्री ली, तो विपिन ने भी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की। 2015 में बीएससी कंप्यूटर्स में डिग्री लेने के बाद एक कंपनी में नौकरी भी करने लगे।

हालांकि, वेतन कम होने के कारण महंगे शहर में गुजारा मुश्‍क‍िल हो रहा था। विपिन को खेती से लगाव था। बचपन से खेत और खलिहान ही देखते आ रहे थे। ऐसे में एक दोस्‍त ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवि‍के) जाने का सुझाव दिया। केविके में फल और फूलों की सुरक्षात्मक खेती में प्रशिक्षण के लिए इंटरव्यू चल रहे थे।

 एक महीने की ट्रेनिंग ने बदल दी जिंदगी

विपिन का सेलेक्‍शन हो गया। एक महीने में 200 घंटे की ट्रेनिंग हुई और यहीं से विपिन की जिंदगी बदल गई। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने देशभर के कई सफल किसानों से मुलाकात की। उन्‍हें हाइड्रोपोनिक्स और अन्य नई तकनीकों के बारे में जानकारी मिली। नौकरी छोड़ 2016 में गांव लौट गए। सैयदपुर में पिता के 8 एकड़ खेत में से 100 वर्गफुट क्षेत्र में एक पॉलीहाउस बनाया। 50 ग्रो ट्रे (हाइड्रोपोनिक खेती के लिए उपयोग की जाने वाली) और फूलों के बीज खरीदे।

डेढ़ लाख रुपये की लागत से की शुरुआत

विपिन कहते हैं, ‘नौकरी के दौरान की गई बचत के लगभग डेढ़-दो लाख रुपये के शुरुआती निवेश से मैंने यह सब शुरू किया। बहुत से लोगों ने तब मजाक बनाया। बिना मिट्टी की खेती के बारे कोई नहीं जानता था। इसलिए सब मेरी हंसी उड़ाते थे। एक महीने के भीतर ग्रो ट्रे में मैंने करीब 102 फूलों की खेती की। यह देख सब दंग रह गए। हाइड्रोपोनिक्स के जरिए हम फलों, सब्जियों और फूलों की स्‍वच्‍छ तरीके से खेती कर सकते हैं।’

ग्रो ट्रे में खेती

बता दें कि इस खेती के तहत ग्रो ट्रे में कोको-पिट, वर्मीक्युलाइट और परलाइट का उपयोग किया जाता है। ट्रे में दिए गए छ‍िद्रों में बीज डाले जाते हैं। बीजों को अंकुरित होने तक पानी दिया जाता है। मिट्टी की तरह कीट यहां नहीं होते हैं। विशेष तापमान पर फल या सब्जी की आवश्यकता अनुसार खेती जाती है। उतरते-चढ़ते तापमान के कारण कोई कीट पेड़ों को खराब नहीं करता है।

कोई भी कर सकता है तापमान नियंत्रित

ग्रो ट्रे में मिश्रण का अनुपात हमेशा पोषक तत्वों के अनुसार बदला जा सकता है। विपिन दावा करते हैं कि यह फल और सब्जियां बहुत पौष्टिक हैं, क्योंकि पौधे के विकास के लिए हाल ही में खोजे गए कोबाल्ट समेत सभी 17 पोषक तत्व, उन्हें विकसित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले मिश्रण में मौजूद हैं। इसके अलावा, कोई भी पॉलीहाउस में तापमान को नियंत्रित कर सकता है और बिना मौसम वाली फसल भी उगा सकता है।

हर महीने उगाते हैं 2.5 लाख फूल

विपिन कहते हैं, ‘मैंने शुरुआत में कई गलतियां कीं, लेकिन फिर उचित मार्गदर्शन और इंटरनेट पर रिसर्च ने मुझे सफल होने में मदद की। विपिन ने गुरुग्राम में 1800 वर्गफुट किराए पर लिया और पॉलीहाउस बनाया है। अब वह 2500 ग्रो ट्रे के मालिक हैं, जहां हर महीने लगभग 2.5 लाख फूल उगाए जाते हैं। मात्र 21 साल की उम्र में खेती को एक नई दिशा दिखाने वाले विपिन हर महीने 40,000-50,000 रुपये कमा रहा हैं।