मिट्टी के तेल का रंग क्यों होता है नीला? पीछे छिपा है सरकार का शातिर दिमाग

हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी में ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनका जवाब हमें नहीं पता होता, ये चीज़ें हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती तो हैं लेकिन वो क्यों और कैसे होती हैं ये बहुत से लोगों को नहीं पता होती।

अब यही सवाल ले लीजिए कि, मिट्टी का तेल यानि केरोसिन का रंग नीला क्यों होता है जबकि वो तो रंगहीन तरल खनिज है। आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देंगे कि केरोसिन का रंग नीला क्यों होता है।आपको जानकारी के लिए बता दें कि, इसके पीछे सरकार का शातिर दिमाग है जिससे केरोसिन की कालाबाजारी रोकी जा सके।

यह बात तो हम सब जानते हैं कि गरीबों को हर महीने राशन कार्ड पर मिट्टी का तेल मुहैया कराने का प्रावधान है लेकिन इसी बीच कुछ बिचौलिए केरोसिन की कालाबाजारी करते हैं। हर महीने हजारों लीटर मिट्टी के तेल (केरोसिन) की कालाबाजारी होती है। यही कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने ऐसा तरीका निकाला जिससे उसपर अंकुश लगाया जा सके।

ये था सरकार का उदेश्य…

जानकारी के लिए बता दें कि शासन से सफेद रंग के केरोसिन की मांग इसलिए की गई है ताकि राशन के तेल का उपयोग कसी गैर कामों में न हो सके। दरअसल, राशन उपभोक्ताओं को रियायती दर पर जो तेल दिया जाता है, वह नीले रंग है।

ऐसा करने के पीछे प्रशासन की कोशिश थी कि रंग अलग-अलग होने से राशन के तेल की कालाबाजारी नहीं हो सकेगी और जो तेल जिस उदेश्य से लिया जाएगा वो उसी दिशा में खर्च किया जाएगा। बता दें कि, ऐसा करने के पीछे व्यावसायिक दर पर सफेद रंग के मिट्टी के तेल का आवंटन करने से सभी का फायदा होता है।

मिली जानकारी के अनुसार, इससे तेल कंपनियों को मुनाफा मिलेगा और राज्य सरकार को भी टैक्स के रूप में कुछ मुनाफा मिलेगा। यही वजह है कि खुला कैरोसिन नीला नहीं सफेद रंग का होता है।