गोशाला में बन रही गोबर से लकड़ी, रोजाना 5 क्विंटल गोबर से बन रही 1.25 क्विंटल लकड़ी

मथुरा काॅलोनी स्थित बाबा मगनी राम गौशाला में निस्वार्थ पशु सेवा सोसायटी मेंबर्स गाय के गोबर से लकड़ी बना रहे है । यह लकड़ी श्मशानघाट, बॉयलर्स या ईंट-भट्टों में इस्तेमाल की जा सकती है और इससे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा।

सोसायटी मेंबर  ने बताया कि गौशाला में पड़े गोबर से मच्छर-मक्खी व बदबू से किसी को परेशानी न आए इसलिए कमेटी मेंबर्स ने लकड़ी बनाने का फैसला लिया। 20 साल पहले मथुरा काॅलोनी में बाबा मगनी राम गौशाला की स्थापना की गई। तब से यहां बीमार गौधन की सेवा हो रही है।

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सोशल मीडिया पर गोबर से लकड़ी बनाने वाली मशीन देखी तो फोकल प्वाइंट में टोका मशीन, जनरेटर बनाने वाले दोस्त बीएस पाल से इस संबंधी बात की। फोकल प्वाइंट में सी-55,56 में सनी इंजीनियरिंग वर्कस के नाम से फैक्ट्री चला रहे भजन पिछले 2 साल से इस मशीन को बना रहे हैं। इसलिए उन्होंने एक मशीन गौशाला के लिए सोसायटी मेंबर्स को दी।

रजनीश ने कहा कि इलाके में स्वच्छता के लिए वह गौशाला में पड़े गोबर से लकड़ी बनाकर इसे खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने अपील की कि कोई वाॅलंटियर गौशाला में आकर यह सेवा करना चाहता है तो उनसे संपर्क कर सकता है। इस लकड़ी को वह श्मशानघाट में देंगे, जिसके लिए बीर जी श्मशानघाट कमेटी व त्रिपड़ी श्मशानघाट कमेटी से बात की गई है। अभी लकड़ी का रेट तय किया जाना है इसलिए बेची नहीं जा रही। गौशाला में 100 गाएं हैं। रोजाना 5 क्विंटल गोबर इक्ट्ठा होता है जिससे 1.25 क्विंटल लकड़ी बन सकती है।

हरियाणा गोशाला आयोग खरीद रहा

बीर जी श्मशानघाट कमेटी मेंबर कुंदन गोगिया ने बताया कि संस्कार में 3 क्विंटल लकड़ी लगती है। इसके लिए वह 2500 रुपए चार्ज करते हैं। सर्दियों में रोजाना 8 से 10 शव संस्कार के लिए आते हैं। रोजाना औसतन 20 क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। अगर गोबर की लकड़ी मिलना शुरू हो जाए तो इससे पॉल्यूशन कम होगा।

ऐसे आया आइडिया

बीएस पाल के बेटे कार्तिक पाल ने इस आइडिया पर काम किया और मशीन बनाई। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ने बताया कि पंजाब में सिर्फ वह ही इस मशीन का निर्माण कर रहे हैं। कम से कम दाम पर मशीन बनाने के लिए उन्होंने इसमें स्क्रियू व मोटर का इस्तेमाल किया। वह गौशाला रोड स्थित सरकारी गौशाला में गए थे, वहां एक व्यक्ति ने उन्हें गोबर से निजात पाने की बात कही। वहीं पर सेवियां बनाने वाली मशीन खड़ी थी।

उन्होंने सोचा कि अगर आटे से सेवियां बन सकती हैं, तो गोबर से लकड़ी क्यों नहीं? इसके बाद उन्होंने मशीन बनाने को लेकर काम शुरू किया। यह मशीन सेवियां बनाने वाली मशीन की तरह ही काम करती है। गोबर से बनी लकड़ी आसानी से जल जाए इसके लिए उन्होंने मशीन में पाइप लगा दी, जिससे लकड़ी में होल हो जाता है।  मशीन बनाने में 45 हजार रुपए खर्च आता है और 18 प्रतिशत जीएसटी लगाकर यह 53 हजार में पड़ती है।