पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 5500 रु मंथली इनकम की है गारंटी

अगर आप रेग्युलर मंथली इनकम या एक्स्ट्रा इनकम का कोई उपाय खोज रहे हैं पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम आपकी मदद कर सकती है। बस इसके लिए आपको एक बार इस स्कीम के तहत पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाना पड़ेगा।

इस स्कीम के तहत 5500 रुपए मंथली तक इनकम की गारंटी है। वहीं, आपके द्वारा खाते में जमा हर एक पैसे पर सुरक्षा की भी गारंटी है। खास बात है कि इस अकाउंट को आप मिनिमम 1500 रुपए से भी खुलवा सकते हैं।

यह अकाउंट उनके लिए भी बेहतर है, जिनके पास कुछ पैसे एकमुश्‍त पड़े हों। उन पैसों को किसी रिस्की निवेश या बैंक के बचते खाते में डालने की बजाए, पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में जमा करा दें तो यह आपके लिए हर महीने इनकम देने की गारंटी बन जाएगी।

हर महीने आपको कमाई कराती भी रहेगी और स्कीम का समय पूरा होने के बाद पोस्ट ऑफिस के खाते में जमा पूरे पैसे भी आपको मिल जाएंगे। खास बात यह है कि इस स्कीम को हर 5 साल बाद उसी खाते के जरिए आगे भी जबतक चाहें बढ़ा सकते हैं। यानी यह सालों तक आपके लिए इनकम की गारंटी साबित होगी।

क्या है ये स्कीम

पोस्ट ऑफिस की मंथली इन्वेस्टमेंट स्कीम यानी पीओएमआईएस आपको मंथली इनकम करने का मौका देती है। यह एक ऐसी सरकारी योजना है जिसमें एक बार पैसा निवेश करने पर हर महीने तय आय होती रहती है। एक्सपर्ट्स इस योजना को निवेश के सबसे अच्छे विकल्पों में से एक मानते हैं, क्योंकि इसमें 4 बड़े फायदे हैं।

  •  इसे कोई भी खोल सकता है और आपकी जमा-पूंजी हमेशा बरकरार रहती है।
  • बैंक एफडी या डेट इंस्ट्रूमेंट की तुलना में आपको बेहतर रिटर्न मिलता है।
  • हर महीने एक निश्चित आय आपको होती रहती है।
  • स्कीम पूरी होने पर आपकी पूरी जमा पूंजी मिल जाती है जिसे आप दोबारा इस योजना में निवेश कर मंथली आय का साधन बनाए रख सकते हैं।

कितना कर सकते हैं निवेश –

अगर आपका अकाउंट सिंगल है तो आप 4.5 लाख रुपए तक अधिकतम जमा कर सकते हैं। कम से कम 1500 रुपए की राशि जमा की जा सकती है। वहीं अगर आपका अकाउंट ज्वॉइंट है तो इसमें अधिकतम 9 लाख रुपए जमा किए जा सकते हैं। एक शख्‍स पोस्ट ऑफिस द्वारा तय लिमिट के अनुसार अकाउंट खोल सकता है। मेच्योरिटी पीरियड 5 साल है। 5 साल बाद अपनी पूंजी को फिर योजना में निवेश कर सकते हैं।

ऐसे होगी मंथली इनकम

  • मंथली इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत 7.3 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है।
  • इस सालाना ब्याज को 12 महीनों में बांट दिया जाता है जो आपको मंथली बेसिस पर मिलता रहता है।
  • अगर आपने 9 लाख रुपए जमा किए हैं तो आपका सालाना ब्याज करीब 65700 रुपए होगा। इस लिहाज से आपको हर महीने करीब 5500 रुपए की आय होगी।
  • 5500 रुपए आपको हर महीने मिलेंगे, वहीं आपका 9 लाख रुपए मेच्योरिटी पीरियड के बाद कुछ और बोनस जोड़कर वापस मिल जाएगा। अगर आप मंथली पैसा न निकालें अगर आप मंथली पैसा न निकालें तो वह आपके पोस्ट ऑफिस सेविंग अकाउंट में रहेगी और मूलधन के साथ इस धन को भी जोड़कर आपको आगे ब्याज मिलेगा।

मेच्योरिटी के पहले पैसा निकालें तो……

अगर किसी जरूरत पर आपको मेच्योरिटी से पहले ही पूरा पैसा निकालना पड़ गया तो यह सुविधा आपको अकाउंट के 1 साल पूरा होने पर मिल जाती है। अकाउंट खोलने की तारीख से 1 साल से 3 साल तक पुराने अकाउंट होने पर, उसमें जमा रकम में से 2% काटकर बाकी रकम आपको वापस मिलती है। साल से ज्यादा पुराना अकाउंट होने पर, उसमें जमा रकम में से 1 फीसदी काटकर बाकी रकम आपको वापस मिलती है।

कौन खोल सकता है अकाउंट –

पोस्ट ऑफिस की मंथली इन्वेस्टमेंट स्कीम कोई भी खोल सकता है चाहे वह एडल्ट हो या माइनर। – आप अपने बच्चे के नाम से भी अकाउंट खोल सकते हैं। अगर बच्चा 10 साल से कम उम्र का है तो उसके नाम पर उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक की ओर से अकाउंट खोला जा सकता है। बच्चे की उम्र 10 साल होने पर वह खुद भी अकाउंट के संचालन का अधिकार पा सकता है।

कैसे खुलेगा अकाउंट

आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी पोस्ट ऑफिस में जाकर अकाउंट खुलवा सकते हैं। इसके लिए आपको आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस में से किसी एक की फोटो कॉपी जमा करनी होगी। इसके अलावा एड्रेस प्रूफ जमा करना होगा, जिसमें आपका पहचान पत्र भी काम आ सकता है। इसके अलावा आपको 2 पासपोर्ट साइज के फोटोग्राफ जमा करने होंगे।

टैक्स छूट का लाभ नहीं

इसमें जमा की जाने वाली रकम पर और उससे आपको मिलने वाली ब्याज पर किसी तरह की टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलता है। हालांकि इससे आपको होने वाली कमाई पर डाकघर किसी तरह का TDS नहीं काटता, लेकिन जो ब्याज आपको मंथली मिलती है, उसके एनुअल टोटल पर आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल किया जाता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों लगी है आग?

पेट्रोल-डीजल की कीमतें अबतक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं. बढ़ी कीमतों ने चारों ओर हाहाकार मचा दिया है. पेट्रोल की कीमतें रोज नए रिकॉर्ड बना रही हैं. देश की राजधानी दिल्ली में इस समय पेट्रोल 74 रुपये 8 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है, जो सितंबर 2014 के बाद से सबसे ज्यादा है.

वहीं डीजल का भाव 65 रुपये 31 पैसे है, जो अब तक के इतिहास में इतना महंगा कभी नहीं हुआ. बढ़ी कीमतों ने सबसे ज्यादा असर किसानों पर डाला है. फसलों की सिचाई में महंगाई ने खलल डाल दिया है. कीमतों को बढ़ाने का नायाब तरीका डेढ़ साल पहले शुरू किया गया था. दरअसल, उस वक्त भाव बढ़ाने की तरकीब को न जनता भाप पाई और न ही तेल वितरण कंपनियां.

पेट्रो पदार्थों के दाम रोजाना लागू करने से सरकार को तो खूब फायदा हो रहा है, मगर डायनामिक प्राइसिंग सिस्टम योजना की आड़ में उपभोक्ताओं की जेब काटनी शुरू हो गई है. योजना को लागू हुए करीब डेढ़ साल हो गया. इसी बीच पेट्रोल-डीजल में तकरीबन रोजाना बढ़ोतरी की जा रही है. नियम लागू से अभी तक पेट्रोल-डीजलों के दाम लगातर बढ़ रहे हैं.

खास बात यह है कि इसमें ज्यादातर कीमतें कम नहीं हुई, बल्कि बढ़ी हैं. चुपके-चुपके कीमतें बढ़ाई जा रही है. सिलसिला अगर यूं ही जारी रहा तो दिसंबर तक पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर की दर को भी पार कर जाएगा. कीमतों में बढ़ोतरी के मुद्दे ने अभी तूल नहीं पकड़ा है, इसलिए मामला शांत है.

पेट्रोलियम उत्पादों के रोजाना मूल्य निर्धारण की व्यवस्था का केंद्र सरकार को प्रत्यक्ष फायदा यह हो रहा है कि दाम भी लगातर बढ़ रहे हैं और हो-हल्ला भी नहीं हो रहा है. पिछले दो माह के भीतर ही पेट्रोल की कीमत में 11 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है, जो इस समय पेट्रोल की कीमत पिछले एक दशक के उच्चतम स्तर पर जा पहुंची है.

पेट्रोल-डीजल के खुदरा बिक्री मूल्य यानी आरएसपी के रोजाना मूल्य की इस नई तरकीब का फायदा सरकार को प्रत्येक्ष रूप से हो रहा है. तेल कंपनियां भी परेशान हैं। उनको भी कुछ समझ नहीं आ रहा. पिछले साल 16 जून से कीमतें घटने की वजय लगातार बढ़ रही हैं। बढ़ी कीमतों की खबरे मीडिया में   नहीं आ पा रही हैं.

गांव में एक शख्स ने छत पर रखता है एनफील्ड

फगवाड़ा रोड पर कुलदीप सिंह जौहल 1983 में जब लंदन गए थे तो पंजाबी विरासत से अपना प्यार भी साथ ले गए।

जब कभी पंजाब लौटते तो देखते पंजाब तेजी से बदल रहा है, लोग आधुनिकता की दौड़ में विरासत को तो बिल्कुल भूलते जा रहे हैं।ऐसे में उन्होंने अपने घर में ही पुराना पंजाब संजोकर रखना शुरू किया।

खेती से लगाव था तो उन्होंने पुराने पंजाब में खेती के प्रयोग किए जाने वाले औजार घर में इकट्‌ठा करने शुरू किए। जो विलुप्त हो गए थे उन्हें विशेष तौर पर बनवाया।

कुलदीप सिंह उनके पास पहले दो घोड़ियां भी थीं लेकिन उनकी देखभाल सही से नहीं कर पाने के कारण दोनों को उन्होंने किसी को दे दिया। यही नहीं वे जब भी घर आते हैं तो कार की बजाए ट्रैक्टर पर घूमना पसंद करते हैं।

पहले पैसा नहीं था पर लोगों में प्यार बहुत था

कुलदीप सिंह जौहल ने कहा कि पहले लोगों के पास पैसा चाहे नहीं था पर आपसी प्यार बहुत था। अब लोगों के पास पैसा तो है पर प्यार कहीं खो गया है। लोगों को मॉडर्न जरूर होना चाहिए लेकिन अपनी विरासत को नहीं भूलना चाहिए।

लड़की ने ट्वीट कर लिखा आपकी साईट पर सब मिलता है मुझे ब्वॉयफ्रेंड चाहिए

अपने ग्राहक से जुड़े रहने और उन्हें आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट ट्विटर का सहारा लेती हैं, जिससे उनके कस्टमर हमेशा उनसे खुश रहें। हाल ही में अपनी एक कस्टमर को खुश करने के लिए कुछ ऐसा कर दिया जिसके चर्चे ट्विटर पर हर और हो रहे हैं।

हाल ही में एक लड़की ने अमेजन को टैग करते हुए ट्वीट कर लिखा, हाय अमेजन इंडिया, तुम खुद को दुनिया की सबसे बड़ी इ-कॉमर्स वेबसाइट बताते हो, लेकिन घंटों तक खोजने के बाद भी मुझे वो नहीं मिला जिसकी मुझे तलाश है।’

लड़की के सवाल पर अमेजन ने जवाब देते हुए लिखा कि वह अपने कस्टमर्स की जरूरतें जानकर उसकी दिशा में हर वक्त प्रयास कर रहे हैं। क्या हमें बता सकती हैं कि आप हमारी वेबसाइट पर क्या तलाश रही हैं। इसके जवाब में लड़की ने कुछ ऐसी डिमांड कर दी जो न बेची जा सकती है और न खरीदी। लड़की ने ट्वीट कर लिखा,’आशिकी के लिए एक सनम चाहिए’

लड़की की इस फरमाइश के बाद अमेजन ने भी लड़की की भाषा में ही उसे जवाब देकर उसकी डिमांड पूरी कर दी। अमेजन ने जवाब में लिखा, ‘ये अक्खा इंडिया जानता है, हम तुम पे मरता है। दिल क्या चीज है जानम, अपनी जान तेरे नाम करता है।’

लड़की और अमेजन के बीच हुई ये बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। लोगों को अमेजन का जवाब काफी अच्छा लगा। लोग इस पर तरह-तरह के कमेंट लिख रहे हैं।

बता सकते आप, पत्‍नी की इस बेडरूम की तस्वीर में क्‍या है ऐसा जो पति ने मांगा तलाक

फोटो देख हुआ हैरान

इन दिनों सोशल मीडिया पर यह मामला काफी तेजी से ट्रेंड हो रहा है। जिसमें इस तस्‍वीर को अब तक बड़ी संख्‍या में लोग देख चुके हैं। यही वह तस्‍वीर है। जिसे देखने के बाद पति जॉन ने पत्‍नी से तलाक की मांग कर दी। ऐसे में आप भी आगे दिमाग लगाने की बजाय पहले यह पूरा मामला समझ लें। हुआ ये कि तस्‍वीर में दिख रही महिला का पति काम के सिलसिले में बाहर गया था।

उसने होटल से रात में पत्‍नी को कई बार कॉल की लेकिन उसने पहले तो फोन नहीं उठाया। उसके बाद जब काफी देर बाद दोनों की बात हुई तो पति ने पत्‍नी से बेडरूम और उसकी फोटो मांगी। महिला ने बड़े ही प्‍यार से उसे अपनी व अपने बेडरूम की फोटो भी दे दी। फोटो देख कर पति काफी खुश हुआ लेकिन उसके बाद उसने बेड के करीब कुछ अजीब सा देखा। वह गुस्‍से से लाल हो गया।

यही है तलाक की वजह

क्‍या हुआ अब आप तस्‍वीर से को ध्‍यान से देख रहे हैं। शायद आपको अभी भी समझ नहीं आ रहा है कि पति ने क्‍या देखकर तलाक मांग लिया। कोई बात नहीं अब आपको बतादें कि तस्‍वीर में क्‍या है तलाक की वजह। पति को तस्‍वीर में जिस बेड पर उसकी पत्‍नी बैठी है

उसके नीचे एक हाथ दिखाई दे रहा है। जिससे उसे समझ में आ गया कि उसकी पत्‍नी बेडरूम में किसी और के साथ है। वह उसकी गैरमौजूदगी का गलत फायदा उठा रही है। इसी लिए वह उसका फोन भी नहीं उठा रही थी। ऐसे में उसने पत्‍नी से सीधे तलाक की मांग कर दी।

30 साल तक ये ब्रांडेड AC फ्री देगा ठंडी हवा

इन दिनों मार्केट में एयर कंडीशनर (AC) की बड़ी रेंड आ चुकी है। इनमें कई नई कंपनियां भी शामिल हो चुकी हैं। इनमें 2 स्टार से 5 स्टार तक के AC शामिल हैं। एयर कंडीशनर के इस्तेमाल से बिजली बिल सबसे ज्यादा आता है।

यदि उसकी रेटिंग 5 स्टार भी है तब भी बिजली बिल में बहुत ज्यादा फर्क नहीं आता। इलेक्ट्रिक AC के बीच वीडियोकॉन अपना हाईब्रिड सोलर AC लेकर आई है। कंपनी का दावा है कि इससे किसी तरह का बिजली बिल नहीं आता है।

नहीं आएगा बिजली बिल

कंपनी का ऐसा दावा है कि ये एयर कंडीशनर पूरी तरह हाईब्रिड और सोलर एनर्जी पर चलता है। यानी इस AC से बिजली का बिल नहीं आएगा। कंपनी AC के साथ सोलर पैनल प्लेट और DC से AC कन्वर्टर साथ में देगी। यानी इसके लिए आपको अलग से पैसे खर्च नहीं करने होंगे।

ये पैनल किसी भी क्लाइमेट कंडीशन में काम करेंगे और इनका मेंटेनेंस खर्च भी बेहद कम है। कंपनी ने इन एयर कंडीशनर को 2 अलग-अलग कैपेसिटी में निकाला है। इनमें 1 टन और 1.5 टन AC शामिल हैं।

इतनी है कीमत

वीडियोकॉन ने 1 टन और 1.5 टन कैपेसिटी वाले AC निकाले हैं। इसमें 1 टन वाले एयर कंडीशनर की कीमत 99 हजार और 1.5 टन वाले AC की कीमत 1.39 लाख रुपए है। कंपनी इस कीमत में आपको सोलर पैनल प्लेट और DC से AC कन्वर्टर देती है। ये AC उस वक्त ही काम करेगा जब धूप होगी।

रात में ये काम नहीं करेगा। ऐसे में इसके लिए आपको 1 लाख रुपए की बैटरी अलग से खरीदना होगी। जो पूरी रात आपके एयर कंडीशनर को चालू रखेंगी। कंपनी का कहना है कि इतने खर्च पर आप 25 से 30 साल तक फ्री में ठंडी हवा ले सकते हैं।

जानिए कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कैसे दर्ज कराएं…

आप अपने लिए या अपने घर के लिए कोई न कोई सामान लेते ही होंगे. जैसे कपड़ों से लेकर कई अन्य चीजें, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपको कोई चीज खराब या घटिया क्वालिटी की दे दी जाती हैं. इसके बाद जब आप उसे वापस करने जाते हैं तो कंपनी उसे लेने से मना करती है. ऐसी हालत में आप कंज्यूमर कोर्ट का सहारा ले सकते हैं.

जीहां उपभोक्ता अपने हितों की रक्षा के लिए कंज्यूमर कोर्ट को सहारा ले सकता है, जिसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत बनाया गया है.

हालांकि हमारे पास कुछ कानून हैं तो कुछ हद तक उपभोक्ताओं की रक्षा करते हैं, जोकि निम्नलिखित हैं.

  • भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872
  • वस्तुओं की ब्रिक्री अधिनियम, 1936
  • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006
  • वजन और माप अधिनियम, 1976
  • खतरनाक ड्रग्स एक्ट, 1952
  • कृषि उत्पाद अधिनियम, 1937
  • भारतीय मानक संस्थान (ISI) अधिनियम, 1952

आपको बता दें कि इन कानूनों में सिविल सूट दाखिल करना बहुत महंगा पड़ता है और निर्णय आने में समय भी लगता है. इसलिए इस समस्या के समाधान के रूप मे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को बनाया गया.

  • उपभोक्ता वह है, जिसने रुपयों का भुगतान कर कुछ खरीदा हो.
  • एक व्यक्ति जिसने खुद कोई सामान खरीदा नहीं है, लेकिन खरीदार की अनुमति के सामान का उपयोग करता है.
  • जो व्यक्ति सामान को बेचने के उद्देश्य से खरीदता है.
  • स्वरोजगार के लिए सामान खरीदने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता है.
  • वह व्यक्ति जो कि वस्तु या सेवा का लाभार्थी हो.
  • मृतक उपभोक्ता के कानूनी वारिस
  • उपभोक्ता के पति या पत्नी
  • उपभोक्ता के रिश्तेदार
  • सबसे पहले आप फोरम के न्यायक्षेत्र की पहचान कर लें, जहां शिकायत दर्ज करनी है. इसका निर्धारण करने के दो तरीके हैं.
  • वस्तु या सेवा प्रदाता की दुकान या सेंटर किश क्षेत्र में है.
  • वस्तु या सेवा की कीमत कितनी है.

इसके आधार पर उपभोक्ता मंचों का आर्थिक क्षेत्राधिकार इस प्रकार है

  • जिला मंच – 20 लाख रुपये तक का केस
  • राज्य आयोग – 20 लाख से 1 करोड़ तक का केस
  • राष्ट्रीय आयोग – 1 करोड़ से अधिक का केस
  • आपको अपने केस के अनुसार, जिला फोरम, राज्य फोरम और राष्ट्रीय आयोग के समक्ष अपनी शिकायत के साथ एक निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा.
  • इसके बाद आपको अपनी शिकायत का ड्राफ्ट तैयार करना होगा, जिसमें य बताना जरूरी है कि आप केस क्यों दाखिल करना चाहते हैं.
  • इस शिकायत में बताएं कि मामला इस मंच या फोरम के क्षेत्राधिकार में कैसे आता है.
  • शिकायच पत्र में अंत में आपको अपने हस्ताक्षर करने जरूरी है. अगर आप किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं तो शिकायत पत्र के साथ एक प्राधिकरण पत्र लगाना होगा.
  • शिकायतकर्ता का नाम, पता, शिकायत का विषय, विपक्षी या पार्टिंयों के नाम, उत्पाद का विवरण, पता, क्षति पूर्ति राशि का दावा इत्यादि का उल्लेख करना न भूलें.

  • अपने आरोपों का समर्थन करने वाले सभी दस्तावेजों की प्रतियां, जैसे खरीदे गए सामान का बिल, वॉरंटी और गारंटी कार्ड, कंपनी या व्यापारी को की गई लिखित शिकायत और उत्पाद को सुधारने का अनुरोध करने के लिए व्यापारी को भेजे गए नोटिस की कॉपी भी लगाई जाएगी.
  • आप अपनी शिकायत में क्षतिपूर्ति के अलावा, धनवापसी, मुकदमेबाजी में आई लागत और ब्याज, उत्पाद की टूट-फूट और मरम्मत में आने वाली लागत का पूरा खर्चा मांग सकते हैं. ध्यान देने वाली बात ये है कि आपको इन सभी खर्चों को अलग-अलग मद में लिखना होगा.
  • अधिनियम में शिकायत करने की अवधि घटना घटने के बाद से 2 साल तक है. अगर शिकायत दाखिल करने में देरी हो तो इसके साथ देरी होने का कारण भी देना होता है.
  • आपको शिकायत के साथ एक हलफनामा दर्ज करने की जरूरत होगी कि शिकायच में बताए गए तथ्य सही हैं.
  • शिकायतकर्ता किसी भी वकील के बिना किसी व्यक्ति या उसके अपने अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा शिकायत पेश कर सकता है. शिकायत पंजीकृत डाक द्वारा भेजी जा सकती है. शिकायत की कम से कम 5 प्रतियों को फोरम में दाखिल करना होता है. इसके अलावा आपको विपरीत पक्ष के लिए अतिरिक्त प्रतियां भी जमा करनी होती हैं.

कचरे से पैसे कमा रहा है ये शख्स

क्या आपने कभी सोचा है जिस कूड़े को हम और आप फेंक देते हैं उससे भी पैसा कमाया जा सकता है. आज एक ऐसे शख्स के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने कचरे से पैसे कमाना शुरू किया.

बेंगलुरु के रहने वाले नवीन मरियन अपना खुद का बिजनेस खोलना चाहते थे. जिसके लिए उन्होंने रीसाइकलिंग बिजनेस को चुना काम करना शुरू किया. नवीन का मानना था कि जिस कूड़े-कचरे को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं उससे भी पैसा कमाया जा सकता है.

बता दें, नवीन मरियन ने अपने करियर की शुरूआत होटल इंडस्ट्री में बतौर शेफ से की थी. 2013 में उन्होंने अपनी खुद की केटरिंग सर्विस (प्लेट अप) शुरू की और कॉर्पोरेट इवेंट्स का कॉन्ट्रैक्ट लेने लगे. पर उनका ये बिजनेस ज्यादा समय तक चल नहीं पाया. जिसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि नया बिजनेस शुरू किया.

ऐसे शुरू किया बिजनेस

रीसाइकलिंग बिजनेस शुरू करने के लिए उन्होंने ‘खाली बॉटल’ के नाम से एक वेबसाइट बनाई. जहां पर ग्राहक (कोई व्यक्ति या कॉर्पोरेट हाउस) अपने पते से रीसाइकलिंग के लिए कूड़ा-कचरा आदि जमा करवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं.

रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ‘खाली बॉटल’ के पास उन लोगों के कॉल और मैसेज आते हैं. फिर उनकी टीम ग्राहकों के पते से कूड़ा-कचरा इकट्ठा करके लाती है. बता दें, टीम के पास वेइंग मशीन होती है और वे एक प्रोफेशनल ड्रेस कोड में होते हैं. इसके बाद संबद्ध और प्रमाणित रीसाइकलिंग प्लांट को यह माल भेज दिया जाता है.

वहीं कूड़ा घर से ले जाने के लिअ ग्राहक पेमेंट करते हैं जिसके लिए कई विकल्प दिए गए है. आपको बता दें टीम खाली बोतल सिर्फ सूखा कूड़ा ही जमा करती है. इसी के साथ नवीन कहते है इस बिजनेस से उन्हें फायदा तो हो ही रहा है साथ शहर की गंदगी भी साफ हो रही है. बता दें, खाली बॉटल के पास फिलहाल 15 कर्मचारियों की टीम है, जिसमें इंजीनियर्स से लेकर ड्राइवर तक सभी शामिल हैं.

इस गांव में ऐसा क्या है जो ये बन चुका है देश का सबसे आदर्श गांव

देश के कई गांव और शहर पानी, बिजली व सड़क जैसी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं लेकिन गुजरात का पुंसरी गांव सुविधाओं की वजह से देश के सात लाख गांवों के लिए आदर्श बन गया है। सीसीटीवी, वाई-फाई, कम्यूनिटी रेडियो, सफाई व्यवस्था, अपनी बस सेवा और आरओ वाटर प्लांट केकारण पुंसरी शहरों को भी मात दे रहा है।

प्रधानमंत्री ने जिस पुंसरी गांव का जिक्र किया वह गुजरात की राजधानी गांधीनगर से 35 किमी दूर साबरकांठा जिले में हैं। उस गांव में देशभर से आला अधिकारियों, सामाजिक संगठनों व ग्रामीण विकास में रुचि रखने वाली एजेंसियों का आना जाना बढ़ गया है। कुछ साल पहले पुसंरी भी आम गांवों जैसा ही था लेकिन युवा सरपंच हिमांशु पटेल के कुछ कर गुजरने की जिद ने आज गांव की सूरत व सीरत दोनों बदल दी है।

केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं से हर ग्राम पंचायत को तीन से पांच करोड़ रुपये मिलते हैं लेकिन कुछ गांव ही उस पैसे का सदुपयोग कर पाते हैं। पुंसरी पंचायत के पास पांच साल पहले 30 लाख 40 हजार रुपये की जमा पूंजी थी। अब उसके खाते में 45 लाख रुपये हैं। इसके अलावा गांव में सीसी रोड, चार रुपये में 20 लीटर मिनरल वाटर, कम्यूनिटी रेडियो जिस पर आवश्यसक सूचना के साथ सुबह शाम भजन सुनाए जाते हैं। गांव से बाहर स्कूूल जाने वाले बच्चों , दूध बेचने वाले पशुपालकों के लिए पंचायत की बस सेवा भी है।

सरपंच हिमांशु भाई ने पद संभालते ही सबसे पहले सेनीटेशन सुविधा पर जोर दिया इसके साथ सुरक्षा व मॉनिटरिंग के लिए सीसीटीवी लगाए। बिजली के खंभों पर नंबर डाल दिए ताकि जहां भी तकनीकी खराबी हो शिकायत में नंबर लिखने पर समस्याद का समाधान तुरंत हो सके। शिक्षा, सफाई व्यवस्था, महिला जागरुकता में भी पुंसरी खूब आगे है।

ईको फ्रेंडली इलेक्ट्रिसिटी

पंचायत ईको फ्रेंडली इलेक्ट्रिसिटी जेनरेशन के लिए बायो इलेक्ट्रिसिटी प्लांट लगा रही है जिससे गांव के 12 सौ घरों में से 250 को बिजली मिल सकेगी। राज्य सरकार ने प्लांट के लिए 40 लाख रुपये मंजूर कर दिए हैं।

एलईडी स्ट्रीट लाइट से घटेगा बिल

छह हजार की आबादी वाले गांव में 22 लाख रु की लागत से 450 एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी। इससे दो माह का बिजली बिल 55 हजार से घटकर 22 हजार रुपये होने की उम्मीद है।

ये हैं 2017-18 की टॉप सेलिंग SUV

इंडि‍यन ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री में 2017-18 के दौरान बड़ा बदलाव देखा गया जहां लोगों का रुझान छोटी कारों की बजाए कॉम्‍पैक्‍ट एसयूवी या यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल सेगमेंट पर बढ़ा है। यही वजह है कि‍ पैसेंजर व्‍हीकल्‍स में सबसे ज्‍यादा ग्रोथ यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल सेगमेंट की रही है।

इस सेगमेंट में मारुति‍ सुजुकी की वि‍टारा ब्रीजा ने लेकर टोयोटा इनोवा का नाम है। कंपनि‍यों का भी कहना है कि‍ भारत में कार खरीदने का ट्रेंड धीरे-धीरे शि‍फ्ट हो रहा है। यही वजह है कि‍ कंपनि‍यां अपने पोर्टफोलि‍यो में ज्यादा से ज्‍यादा यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल्‍स को शामि‍ल कर रही हैं।

यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल सेगमेंट में सबसे ज्‍यादा ग्रोथ

सोसाइटी ऑफ इंडि‍यन ऑटोमोबाइल मैन्‍युफैक्‍चरर्स (सि‍आम) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबि‍क, 2017-18 में यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल्‍स की सेल्‍स 9,21,780 यूनि‍ट्स रहा जोकि‍ पिछले साल 7,61,998 यूनि‍ट्स था। इस सेगमेंट की सेल्‍स ग्रोथ 20.97 फीसदी रही है। वहीं, पैसेंजर कार सेल्‍स 2017-18 में 3.33 फीसदी बढ़कर 21,73,950 यूनि‍ट्स रही जोकि‍ 2016-17 में 21,03,847 यूनि‍ट्स थी।

मारुति‍ की ब्रीजा बनी किंग

मारुति‍ सुजुकी ने वि‍टारा ब्रीजा के साथ स्‍पोर्ट्स यूटि‍लि‍टी सेगमेंट पर अपना नाम दर्ज कराया है। वि‍टारा ब्रीजा सबसे ज्‍यादा बि‍कने वाली यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल बन गई है। कंपनी ने 2017-18 में वि‍टारा ब्रीजा की 1,48,400 यूनि‍ट्स को बेचा है जबकि‍ पि‍छले साल यह आंकड़ा 1,08,640 यूनि‍ट्स का था। इसकी सेल्‍स में 36.27 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई।

ह्युंडई की क्रेटा दे रही है कड़ी टक्‍कर

ह्युंडई की क्रेटा एसयूवी सेगमेंट की पॉपुलर कार है। यह दूसरी सबसे ज्‍यादा बि‍कने वाली एसयूवी भी है। कंपनी ने क्रेटा की 1,07,100 यूनि‍ट्स को बेचा जबकि‍ पि‍छले साल यह कार लि‍स्‍ट में भी नहीं थी। 2016-17 में कंपनी ने क्रेटा की 96,899 यूनि‍ट्स को बेचा था।

बोलेरो का नाम भी हुआ शामि‍ल

साल 2017-18 में महिंद्रा एंड महिंद्रा की पॉपुलर एसयूवी बोलेरो ने बाजी कार ली है। बलेनो ने टोयोटा इनोवा को पीछे करते हुए इस लि‍स्‍ट में तीसरा नंबर हासि‍ल कि‍या है। महिंद्रा ने फाइनेंशि‍यल ईयर के दौरान 85,368 यूनि‍ट्स को बेचा है जबकि‍ पि‍छले साल यह आंकड़ा 69,328 यूनि‍ट्स का था। इसमें 23.13 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है।

एमएंडएम के ऑटोमोटि‍व डि‍वि‍जन के चीफ ऑफ सेल्‍स एंड मार्केटिंग वि‍जय राम नाकरा ने कहा कि बोलेरो ने दोबारा भारत में टॉप 10 पैसेंजर व्‍हीकल्‍स में अपनी पॉजि‍शन हासि‍ल की है, जोकि‍ यह दर्शाता है कि‍ इस ब्रांड पर सेमी उर्बन और रूरल इंडि‍या में कंज्‍यूमर्स का वि‍श्‍वास बढ़ा है। नाकरा ने यह भी कहा कि‍ बोलेरो प्‍लस को लॉन्‍च ने 10 लाख सेल्‍स का आंकड़ा हासि‍ल करने में अहम भूमि‍का नि‍भाई है। कंपनी को भरोसा है कि‍ बोलेरो आगे भी पॉपुलर एसयूवी बनी रहेगी।

टोयोटा इनोवा एक पायदान नीचे

टोयोटा की इनोवा इस बार एक पायदान नीचे आ गई है। भारत में टोयोटा की सबसे ज्‍यादा बि‍कने वाली कार भी इनोवा ही है। 2017-18 में कंपनी ने इनोवा की 74,137 यूनि‍ट्स को बेचा है जबकि‍ 2016-17 में यह आंकड़ा 79,092 यूनि‍ट्स का था। इसकी सेल्‍स में 6 फीसदी की गि‍रावट आई है।

मारुति‍ की अर्टि‍गा भी लि‍स्‍ट में

मारुति‍ सुजुकी की एमपीवी अर्टि‍गा भी काफी पॉपुलर है। कंपनी ने हाल ही में इंडोनेशि‍या इंटरनेशनल मोटर शो में अर्टि‍गा के नए जेनरेशन को पेश कि‍या है। मारुति‍ ने 2017-18 में इसकी 66,141 यूनि‍ट्स को बेचा है जबकि‍ पि‍छले साल यह आंकड़ा 63,527 यूनि‍ट्स था।