इस तरीके से 20 से 22 रुपए सस्ता पेट्रोल खरीद रहे असम के लोग

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आम के साथ-साथ खास आदमी भी परेशान है। इस समय देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर चल रही हैं। इस कारण लोगों का मासिक बजट गड़बड़ा गया है। दिल्ली में इस समय पेट्रोल की कीमतें 77.97 रुपए प्रति लीटर चल रही हैं जबकि डीजल 68.90 रुपए प्रति लीटर पर बिक रहा है।

लेकिन देश का एक राज्य एेसा भी है जिन्होंने महंगे पेट्रोल- डीजल को मात दे दी है। यह लोग एक छोटा सा जुगाड़ कर 20 से 22 रुपए सस्ता पेट्रोल-डीजल खरीद रहे हैं। खास बात यह है कि इसके लिए लोगों को कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ रही है। इस जुगाड़ के जरिए आप भी सस्ता पेट्रोल-डीजल खरीद सकते हैं।

ये है जुगाड़

हम बात कर रहे हैं देश की राजधानी से 1897 किमी दूर बसे असम के बकसा जिले की। यहां के लोगों को देश में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से कोई परेशानी नहीं है। यहां के लोग दिल्ली के मुकाबले 20 से 22 रुपए सस्ता पेट्रोल-डीजल खरीद रहे हैं।

दरअसल बकसा जिला भूटान से लगता हुआ है। भूटान में पेट्रोल-डीजल की कीमत भारत की तुलना में 20 से 22 रुपए कम हैं। एेसे में बकसा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के लोग भूटान में जाकर अपनी गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल भरवा रहे हैं। यहां के लोग बिना किसी रोकटोक के भूटान के सैमड्रप जोंगखार पहुंच जाते हैं और यहां से तेल भरवाकर भारत लौट आते हैं।

नेशनल हाइवे 127 ने आसान बनाई राह

असम के बकसा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की भूटान जाने की राह को नेशनल हाइवे 127 आसान बना देता है। दरअसल भारत और भूटान के आपसी संबंध दशकों से बेहतर हैं। इसका फायदा भूटान के सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों को भी मिलता है।

असम के लोग आसानी से सस्ते पेट्रोल-डीजल खरीद लाते हैं। असम में इस समय पेट्रोल की कीमत 76 रुपए प्रति लीटर हैं जबकि भूटान में यह 52 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। बकसा जिले को लोगों को मात्र आधा किलोमीटर की दूरी तय करने पर ही सस्ता पेट्रोल-डीजल मिल जाता है।

भारत से ही सप्लाई होता है तेल

भूटान में पेट्रोल और डीजल की अापूर्ति भारत से ही की जाती है। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि फिर वहां तेल इतना सस्ता क्यों मिलती हैं। यहां हम आपको बता दें कि जीएसटी लागू होने के बाद भारत से भूटान को जीरो रेटेड पर निर्यात होता है।

यानी भूटान से जो एक्साइड ड्यूटी ली जाती है वह उसे लौटा दी जाती है। भूटान की सरकार भी अपने देश के लोगों को फायदा पहुंचाना चाहती है। इसलिए पेट्रोल-डीजल सस्ती दरों पर बेचा जा रहा है। इसका फायदा भारत के लोगों को भी मिल रहा है। यदि आप भी असम की यात्रा पर जा रहे हैं तो सस्ते पेट्रोल-डीजल का लाभ ले सकते हैं।

कार को धूप से बचाता है ये हाईटेक टैंट

गर्मी के मौसम में कार अंदर से कूल रहे इसके लिए उसे ऐसी जगह पर खड़ी करना जरूरी है जहां धूप नहीं आती हो। घर पर तो इसका इंतजार हो जाता है, लेकिन बाहर कार के लिए ऐसी पार्किंग ढूंढना मुश्किल काम होता है।

ऐसी स्थित के लिए lanmodo कंपनी ने एक ऐसा टैंट तैयार किया है जिससे पूरी कार कवर हो जाती है। इसे कार का छाता भी कहा जा सकता है। ये दुनिया का पहला ऐसा ऑटोमैटिक टैंट हैं जो एक बटन दबाते ही पूरी कार को कवर कर लेता है।

ऑटोमैटिक कार टैंट

  • ये ऑटोमैटिक टैंट है जो वायरलेस कनेक्टिविटी पर काम करता है। यानी एक बटन दबाते ही ये पूरी कार कवर कर लेता है।
  • कंपनी ने इस टैंट को 2 अलग-अलग साइज में तैयार किया है। आप अपनी कार के साइज के हिसाब से इसे सिलेक्ट कर सकते हैं।
  • एक साइज 3.5M x 2.1M और दूसरा 4.8M x 2.3M है। इसे ब्लू, ब्लैक और सिल्वर कलर में खरीद सकते हैं।

  • इस टैंट की छोटे साइज की कीमत करीब 16 हजार रुपए है। कंपनी इस टैंट की दुनिया के किसी भी कौने में फ्री डिलिवरी देगी।
  • इस टैंट के अंदर एक चार्जेबल बैटरी दी है जिसे एक बार चार्ज करके टैंट 45 दिन तक यूज कर सकते हैं। इसे पूरा ओपन होने में 30 सेकंड का वक्त लगता है।
  • कंपनी का दावा है कि इस टैंट की मदद से कार के अंदर का तापमान आधा हो जाता है।

7 लोगों का टैंट

  • इसकी दूसरी खास बात है कि इसे कार के साथ लोगों के रुकने वाला टैंट के तौर पर भी यूज कर सकते हैं।
  • यदि आप कहीं पिकनिक पर जाते हैं या फिर नाइट स्टे करना चाहते हैं तब इसमें 7 लोग आसानी से ठहर सकते हैं।
  • इसके लिए कंपनी टैंट से जुड़ी फुल एक्सेसरीज देती है। साथ ही, इसमें लगी बैटरी से टैंट के अंदर LED बल्ब भी ऑन कर सकते हैं।

पत्थर समझकर सालों से मछुआरा कर रहा था अनदेखी

कहते हैं देने वाला जब भी देता है छप्पड़ फाड़ कर देता है। इंसान के किस्मत को बदलने में देर नहीं लगती। वक्त अच्छा हो तो पत्थर भी सोना बन जाता है।अब आप इस शख्स को ही ले लीजिए जिसकी किस्मत रातोंरात ऐसी पल्टी कि देखते ही देखते वो करोड़पति बन गया। ये बात है फिलीपींस के पवाना आइलैंड के मछुआरे की।

अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को चलाने के लिए ये मछुआरा रोज मछली पकड़ने के लिए समंदर में जाता था। एकदिन मछली पकड़ने के दौरान वो समुद्री तूफान में फंस गया। खूद को उस तूफान से बचाने के लिए मछुआरे ने एक पत्थर का सहारा लिया और तूफान के जाने का इंतजार करने लगा।

थोड़ी देर बाद जब तूफान थम गई तो उसकी जान बचाने के लिए वो उस पत्थर को अपना लकी चार्म मानने लगा और उसे अपने साथ अपने घर ले आया। घर आकर उसने इस पत्थर को एक मामूली पत्थ्र समझकर पलंग के नीचे रख दिया।

लेकिन किस्मत को शायद उस पत्थर का पलंग के नीचे बेकार पड़े रहना रास नहीं आया। एक दिन मछुआरे के घर पर आग लगी। उस दौरान एक टूरिस्ट ऑफिसर एलीन सिंथिया मगैय की नजर पलंग के नीचे रखे इस पत्थर पर पड़ी। पत्थर को देखते ही वो समझ गया कि ये कोई साधारण पत्थर नहीं है।

एलीन ने बिना देर किए तुरंत ये बात मछुआरे को बताई। एलिन ने मछुआरे को बताया कि ये कोई साधारण पत्थर नहीं है बल्कि ये एक विशालकाय मोती है जिसकी बाजार में कीमत करीब 6 अरब 53 करोड़ रुपए आंकी गई। बता दें इस मोती का वजन 34 किलोग्राम है। देखते ही देखते गरीब मछुआरे की किस्मत बदल गई और वो सड़क से महल पर आ गया।

शायद इसी वजह से कहा जाता है कि कभी भी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए या किसी के साथ भेदभाव की नीति नहीं अपनानी चाहिए क्योंकि किस्मत बदलते देर नहीं लगती। इंसान का भाग्य उसे राजा से रंक और रंक से राजा बनाने की क्षमता रखता है।

अब लीजिए ‘तंदूरी चाय’ की चुस्‍की

अगर खाने-पीने के शौकीन हैं तो तंदूरी चिकन या तंदूरी रोटी का नाम जरूर सुना होगा, लेकिन पुणे स्थित एक चाय वाला अपनी खास तंदूरी चाय (tandoori chai) से लोगों को अपनी ओर अट्रैक्‍ट कर रहा है। यह चाय एक खास रेसिपी की मदद से तैयार होती है। इसके बाद इसमें गर्म कुल्‍लह का तड़का दिया जाता है। खास जायका और बनाने के खास तरीके की वजह से यह चाय आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

पुणे के खराडी इलाके में खुली इस ‘टी स्‍टॉल’ का नाम चाय ला (‘Chai-La) है। इस यूनीक चाय की दुकान को शुरू करने वाले प्रमोद बैंकर और अमोल राजदेव ग्रेजुएट और युवा आंत्रप्रेन्‍योर हैं। इसमें से अमोल B.Sc पास हैं, जबकि प्रमोद ने फार्मेसी में ग्रेजुएशन किया है।

दुनिया में यह पहला प्रयोग

दोनों का दावा है कि तंदूर के जरिए चाय बनाने का दुनिया में यह पहला प्रयोग उन्‍हीं ने किया है। गांव में दादी मां के द्वारा मिट्टी के बर्तन में दूध उबालते देख कर उन्‍हें इस खास तंदूरी चाय का आइडिया आया।

प्रमोद और अमोल दावा करते हैं कि उनकी तंदूरी चाय ग्राहकों को खास अहसास कराती है। जब इस चाय को गर्म कल्‍हड़ में खास तरीके से तड़का दिया जाता है तो इसमें मिट्टी की सोंधी खुशबू आती है। साथ ही लोगों को गांव की मिट्टी का अहसास होता है। अमोल पहले से ही खाने पीने के कारोबार से जुड़े हैं। वही पुणे में ही एक महाराष्‍ट्री खानों से जुड़ा एक रेस्‍टोरेंट चला रहे हैं।

कैसे बनती है यह चाय?

अमोल के मुताबिक, इसे बनाने का एक खास तरीका है। कुल्‍हड़ को पहले से ही गर्म तंजूर की भट्टी में गर्म किया जाता है। इसके पहले से ही थोड़ा कम पकी चाय को तपते कुल्‍हड में डाला जाता है।

चाय को गर्म कुल्‍हड़ में डालते ही बुलबुला उठता है और इसी के साथ चाय सर्व के लिए तैयार हो जाती है। गर्म कुल्‍हड़ में चाय सोंधी खुशबू भर देता है। जैसे यह प्रक्रिया पूरी होती है चाय को सामान्‍य कुल्‍हड़ में डाला जाता है और ग्राहकों के सामने बन मस्‍का या बिस्किट के साथ परोसा जाता है।

इस कूलर के सामने फेल हैं सारे AC

गर्मियों का मौसम इस समय अपने चरम पर है। पारा रोजाना 43 डिग्री को पार कर रहा है। एेसे में लोग घर में AC या कूलर लगाने को लेकर असमंजस में हैं। कई लोग बिजली बिल को देखते हुए AC लगवाने से कतरा रहे हैं तो कई लोग कम ठंडक को देखते हुए कूलर के बजाए AC को प्राथमिकता दे रहे हैं।

लेकिन आज हम आपको एक एेसे कूलर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके आगे अच्छे से अच्छा AC भी फेल है। खास बात यह है कि इस कूलर के लगाने के बाद आपके बिजली बिल पर भी कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। कहने का मतलब यह है कि इस कूलर के लगाने के बाद आपका खर्च पहले से आधा हो जाएगा, लेकिन घर में ठंडक AC के जितनी ही रहेगी।

सभी कमरों को ठंडा करेगा एक ही कूलर

आज हम आपको जिस कूलर के बारे में बताने जा रहे हैं उसे Evaporative कूलर कहा जाता है। इस कूलर की कीमत वैसे तो 39 हजार से शुरू होती है लेकिन इसके फायदे इतने हैं कि यह AC से भी सस्ता पड़ता है।

आमतौर पर 1 से 1.5 टन का AC तीस हजार रुपए का मिलता है जबकि Evaporative कूलर की शुरुआती कीमत 39 हजार रुपए है। लेकिन एक AC जहां केवल 1 कमरे को ही ठंडा कर पाता है वहीं Evaporative कूलर कई कमरों को ठंडा कर सकता है। इस तरह से आप अलग-अलग कमरे में लगने वाले कई AC की बचत कर सकते हैं।

बिजली बिल में भी होगी बचत

Evaporative कूलर की बिजली खपत AC की तुलना में काफी कम है। इस कारण इसके संचालन का खर्च कम ही पड़ता है। Evaporative कूलर को घर में लगाकर आप AC के मुकाबले बिजली के बिल में भी बचत कर सकते हैं। बाजार में इसकी विस्तृत रेंज उपलब्ध है। जानकारों के अनुसार विदेशों में इस कूलर का इस्तेमाल काफी ज्यादा है। आप Evaporative कूलर को साइड डिस्चार्ज, डाउन डिस्चार्ज, बॉटम डिस्चार्ज और विंडो स्टाइल मॉडल में खरीद सकते हैं।

पुरे घर को चिल्ड कर देती है ये पॉलीथीन शीट दाम 1 रुपए से भी कम

अमेरिका में जितनी भी बिजली का निर्माण किया जाता है उसका 6 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका के एयर कंडीशनिंग सिस्टम को चलाने के लिए इस्तेमाल होता है। 6 प्रतिशत सुनने में तो बेहद कम लगता है लेकिन ये एक बड़ा आंकड़ा है।

आपको बता दें कि भारत, ब्राजील और चीन में बनाई जाने वाली बिजली का भी एक बड़ा हिस्सा एयर कंडीशनर्स को चलाने में खर्च होता है। इससे ना सिर्फ बिजली की खपत होती है बल्कि ग्रीन हाउस गैसों (कार्बन दाई ऑक्साइड) का उत्सर्जन भी बढ़ रहा है। लेकिन अब इससे निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने ऐसी चीज बनाई है जिससे एयर कंडीशनर्स की जरूरत ही समाप्त हो जाएगी।

बता दें कि गर्मियों के दिनों में एयर कंडीशनर्स का इस्तेमाल बढ़ जाता है। लोग अपने घरों में एयर कंडीशनर लगवाते हैं साथ ही दफ्तरों में सेन्ट्रल एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगा होता है जिससे काफी मारता में ग्रीन हाउस गैसें निकलती है।

लेकिन अब लोगों को अपने घरों में एयर कंडीशनर लगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि चीन के दो वैज्ञानिकों रौंगी यैंग और शाओबो यिन ने एक ऐसी पॉलीथिन शीट बनाई है जिसे दीवार पर लगाने पर घर पूरी तरह से ठंडा रहता है।

यह चौंकाने वाला आविष्कार हाल ही में किया गया है। आपको बता दें कि अपने घर को ठंडा रखने के लिए आपको बस इस शीट को अपने घर की दीवारों पर लगाना होता है। इसके बाद चाहे कितनी भी गर्मी हो जाए आपका घर एकदम कूल बना रहता है।

दाम में बेहद ही सस्ती

इस चमत्कारी प्लास्टिक शीट के बारे में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इसके 1 स्क्वायर मीटर की कीमत एक रुपये से भी कम है। जी हां ये बिलकुल सच है। अब आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर इतनी कम कीमत में आपका घर आखिर ठंडा कैसे रह सकता है।

आपको बता दें कि यह फिल्म रेडिएटिव कूलिंग सिस्टम पर काम करती है। यह फिल्म वातावरण में मौजूद गर्मी को ठंडक में बदलने की क्षमता रखती है। यह बाकी की ऊर्जा को तरंगों को सोख लेती है और ठंडी रहती है। साथ ही यह ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भी नहीं करती है जिससे यह पूरी तरह से ईको फ्रेंडली बन जाती है।

ये है सिर्फ आधे ग्लास पानी में बाइक, स्कूटर और कार चमकाने का तरीका

बाइक, स्कूटर और कार डेली लाइफ का जरूरी हिस्सा है। ऑफिस जाना हो या मार्केट, इनकी जरूरत हमेशा होती है। इनका जितना ज्यादा यूज होता है उतनी जल्दी गंदी भी होती हैं।

खासकर, कार गंदी हो जाए तब उसे धोने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है। इससे पानी की बर्बादी भी ज्यादा होती है। हालांकि, एक सॉल्यूशन ऐसा भी है जिसकी मदद से पूरी कार सिर्फ आधा ग्लास पानी से साफ की जा सकती है।

599 रुपए के सॉल्यूशन से 50 बार चमकेगी कार

  • इस सॉल्यूशन को वाटरलेस कार वॉश किट कहा जाता है। इसे कई चाइनीज कंपनियां बनाती है।
  • इस सॉल्यूशन की मदद से किसी भी कार, बाइक या स्कूटर के मैटेलिक पार्ट को चमकाया जा सकता है। साथ ही, इससे दूसरे पार्ट भी आसानी साफ हो जाते हैं।
  • खास बात है कि पूरी कार सिर्फ 5ml सॉल्यूशन से चमकने लगती है। यानी 250ml से आप 50 बार कार साफ कर सकते हैं।

कार साफ करने का तरीका

  • इस सॉल्यूशन को 5ml आधा ग्लास पानी में मिलाकर लिक्विड तैयार कर लें।
  • अब कार, बाइक या स्कूटर जिसे भी साफ करना है एक सूखे कपड़े से उसके ऊपर की धूल हटा लें।
  • अब एक कॉटन के कपड़े को इस लिक्विड को लगाकर कार पर लगाएं। उसके दाग-धब्बे साफ हो जाएंगे और चमकने लगेगी।

इस ब्राण्ड का पानी पीते हैं कोहली

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली अपनी मेहनत और फिटनेस की वजह से आज इस मुकाम को हासिल कर पाए हैं. खुद को फिट रखने के लिए विराट कोहली काफी मेहनत करते हैं.

अपनी फिटनेस के लिए वो सुबह-शाम जिम तो जाते ही हैं साथ ही अपने खाने-पीने का बहुत ध्यान रखते हैं. विराट खाने-पीने में कोई लापरवाही नहीं करते और हमेशा संतुलित आहार लेते हैं. विराट जंक फूड खाना पसंद नहीं करते. उन्हें घर का हेल्दी खाना बहुत अच्छा लगता है.

विराट अपनी फिटनेस के लिए सिर्फ बाहर के खाने से ही नहीं, बल्कि पानी से भी परहेज करते हैं. वो अच्छी कम्पनी का पानी पीते हैं. ऐसा बताया जाता है कि वो एवियन ब्राण्ड का पानी पीते हैं. यह एक खास तरह का पानी है जो काफी महंगा है और इसे फ्रांस से मंगवाया जाता है.

इस पानी की कीमत 600 रुपए प्रति लीटर है. कोहली दुनिया में जहां भी जाते हैं, मात्र यही पानी पीते हैं. जबकि दुनिया में जहां भी इस पानी के मिलने की संभावना नहीं होती, वहां इस पानी को अपने साथ ले जाते हैं.

हम आपको बता दें कि इस तरह का पानी एक विशेष प्रकार का पानी होता है जो वजन घटाने और तनाव दूर रखने आदि में मददगार साबित होता है.यह अकेले ही नहीं है और भी ऐसे कई सेलिब्रिटी हैं जो कि एक लीटर पानी की बोतल पर लगभग 36 हजार रुपए तक का खर्च कर देते हैं.

कोहली खुद भी हेल्दी फूड खाते हैं और दूसरों को भी खाने के लिए कहते हैं. इसके अलावा दूसरों को जंक फूड से दूर रहने की सलाह देते हैं. विराट फ्राइड चिप्स की जगह वीट क्रैकर्स या इसी तरह की हेल्दी चीजें खाना पसंद करते हैं. उन्हें फ्राइड चिकन बिलकुल पसंद नहीं है. लेकिन उन्हें चॉकलेट ब्राउनी बहुत पसंद है इसे देखकर विराट अपने आपको खाने से रोक नहीं पाते.

36 रुपये का पेट्रोल बिकता है 77 रुपये में, आखिर कहां जाते हैं 41 रुपये?

सोमवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में 33 रुपये प्रति लीटर की दर से इजाफा किया। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 77.14 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं मुंबई में महज एक लीटर पेट्रोल के लिए लोगों को 84.40 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। पेट्रोल पर मची हाय तौबा के बीच हर कोई इन तीन सवालों के जवाब जानना चाहता हौ-

  • जो पेट्रोल उपभोक्ता को करीब 77 रुपये में मिल रहा है, उसे तेल कंपनिया सिर्फ 36 रुपये में खरीदती हैं। तो 41 रुपये किसकी जेब में गए?
  • जब अंतरर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमत घट रही है, तो फिर हमारे देश में पेट्रोल महंगा क्यों हो रहा है?
  • जिस देश को भारत तेल बेच रहा है वहां पेट्रोल सस्ता है, तो फिर खुद भारत में इसकी कीमत इतनी ज्यादा क्यों है?

कच्चा तेल महंगा होने पर भी कम थी पेट्रोल की कीमत

आमतौर पर दलील दी जाती है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमत बढ़ने की वजह से देश में पेट्रोल महंगा हो रहा है। आपके ज्ञानवर्धन के लिए बता दें कि साल 2013 में जब कच्चा तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी जा पहुंची थी, तब पेट्रोल की कीमत अधिकतम 71.31 रुपये प्रति लीटर थी। मगर अब जब कच्चा तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से भी कम है, तो भी खुदरा बाजार में पेट्रोल 76.57 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। ऐसा कैसे हो सकता है भला?

टैक्स का खेल

भले ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हो, मगर इसे भारत लाने के लिए तेल कंपनियों को भारी एक्साइज ड्यूटी चुकानी पड़ती है। साल 2014 से लगातार ड्यूटी बढाई जा रही है। नवंबर 2014 से जनवरी 2016 तक एक्साइस ड्यूटी में करीब 9 गुना बढ़ोतरी की गई। सिर्फ एक बार, अक्टूबर 2017 में इसमें कमी की गई। बजट 2018 में भी भले ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइस ड्यूटी 2 रुपये प्रति लीटर की दर से घटाया गया, मगर दूसरी तरफ रोड सेस आठ फीसदी बढ़ने से बात घुमा फिराकर वहीं पहुंच गई।

ऐसे तय होती है एक लीटर पेट्रोल की कीमत

23 मई, 2018 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में तेल की कीमत इस आधार पर तय की गई है-

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमत 86.28 डॉलर प्रति बैरल है। वहीं, डॉलर की मौजूदा एक्सचेंज रेट 67.45 रुपये है। इस लिहाज से एक बैरल के लिए तेल कंपनियों को 86.28x 67.45 यानी 5819.58 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
  • एक बैरल में 159 लीटर पेट्रोल होता है। इस हिसाब से एक लीटर पेट्रोल की कीमत 36.60 रुपये हुई। बीपीसीएल के मुताबिक इस तेल को रिफाइन करने के बाद कंपनियां डीलर को 37.63 प्रति लीटर की दर से पेट्रोल बेचती हैं।
  • मौजूदा नियम के अनुसार, भारत में एक लीटर पेट्रोल लाने के लिए डीलरों को 19.48 रुपये केंद्र सरकार को देना पड़ता है।
  • वहीं, यानी डीलर तक पहुंचते पहुंचते पेट्रोल की कुल कीमत कुल 57.11 (19.48+37.63) रुपये प्रति लीटर हो जाती है।

राज्य सरकारें अलग से लगाती हैं टैक्स

पेट्रल और डीजल वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत नहीं आते। राज्य सरकारें इस पर वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट) वसूलती हैं। यही वजह है कि हर राज्य में पेट्रोल की कीमत में फर्क होता है। दिल्ली में पेट्रोल पर 27 फीसदी टैक्स लगा है। यानी प्रति लीटर 16.40 रुपये टैक्स लगता है। इसके अलवा डीलर का कमीशन 3.63 प्रति लीटर तय किया गया है।यानी पेट्रोल की कुल कीमत हुई- 57.11 +16.40 +3.63 = 77.14 रुपये प्रति लीटर

बेहद जरुरी खबर-इन 3 फलों से फैल रहा है खतरनाक निपाह वायरस, भूलकर भी न खाएं

केरल से शुरू हुए निपाह वायरस का खौफ पूरे भारत में है. दिल्ली-एनसीआर के लोगों को भी अलर्ट कर दिया गया है. इस अज्ञात इन्फेक्शन के चलते हाई अलर्ट घोषित किया गया है. केरल में हुई रहस्यमयी मौतों का कारण ‘निपाह वायरस (NiV)’ को बताया गया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने निपाह को एक उभरती बीमारी करार दे चुका है. WHO के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ की एक नस्ल में पाया जाता है. यह वायरस उनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है.

चमगादड़ जिस फल को खाती है, उनके अपशिष्ट जैसी चीजों के संपर्क में आने पर यह वायरस किसी भी अन्य जीव या इंसान को प्रभावित कर सकता है. ऐसा होने पर ये जानलेवा बीमारी का रूप ले लेता है. ये वायरस तीन फलों में हो सकता है. ऐसे में इन्हें भूलकर भी न खाएं.

केरल से आने वाले फल

केरल में फैले निपाह वायरस से फिलहाल दिल्ली में कोई खतरा नहीं है. लेकिन, चिकित्सकों का कहना है कि लोगों को बचाव के उपाय जरूर कर लेने चाहिए. केरल से जो केले आ रहे हैं, उनको खाने से बचें. अगर खाना ही है तो अच्छे से धोकर खाएं. क्योंकि, उत्तर भारत में ज्यादातर केले, केरल से आते हैं. ऐसे में इन्हें खाना सेहत के लिए सही नहीं है.

धोकर खाएं खजूर और आम

खजूर और आम को भी धोकर खाएं. रमजान के महीने में खजूर सबसे ज्यादा खाए जाते हैं. दिल्ली में बड़ी मात्रा में केले और खजूर केरल से मंगाए जाते हैं. निपाह वायरस से प्रभावित केरल के कालीकट और मल्लापुरम जिले में केले और खजूर की बड़ी मात्रा है. एम्स के डॉक्टर्स की टीम यहां जांच कर रही है. ऐसे में यहां से आने वाले फलों को ध्यान से खाना चाहिए.

क्या हैं निपाह (NiV) के लक्षण

मनुष्‍यों में निपाह वायरस, encephalitis से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है. बुखार, सिरदर्द, चक्‍कर, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत, इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं. 24-28 घंटे में यदि लक्षण बढ़ जाए तो इंसान को कोमा में जाना पड़ सकता है. कुछ केस में रोगी को सांस संबंधित समस्‍या का भी सामना करना पड़ सकता है.

भारतीय सेना भी चिंतित

केरल के कोजिकोडे जिले में फैले निपाह वायरस ने भारतीय सेना को भी चिंता में डाल दिया है. निपाह वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सेना के डायरेक्‍टर जनरल आफ मेडिकल सर्विसेस की तरफ से एक एडवाइजरी आर्मी के सभी छह कमांड हेडक्‍वाटर्स को भेजी गई है. सेना की एडवाइजरी में बताया गया है कि निपाह वायरस के संक्रमण से अब तक केरल के कोजिकोडे जिले में अब तक तीन मौतें हो चुकी है. हालांकि केरल सरकार ने निपाह वायरस से दस लोगों के मौत की पुष्टि की है.

सेना ने दी जवानों को सलाह

केरल सहित भारत में इस वायरस को पहली बार डि‍टेक्‍ट किया गया है. सेना ने अपने सभी सैनिकों और अधिकारियों को सलाह दी है कि इस संक्रमण से बचने के लिए चमगादड़ और सुअर से दूरी बनाकर रखें. सेना ने खास तौर पर अपने सैनिकों को ताकीत किया है कि संक्रमित इलाकों में पेड़ो से जमीन पर गिरे फलों का सेवन बिल्‍कुल भी न करें. इन फलों के खाने से वे संक्रमण का शिकार हो सकते हैं.