आने वाले दिनों में इन 10 राज्यों में होगी भारी बारिश

मानसून ने इस बार धीमी शुरूआत की है। धीमी रफ्तार की वजह से मानसून के अन्य राज्यों में करीब 10 दिन के देरी से पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा था। हालांकि, मानसून ने बड़ी राहत देते हुए अपनी रफ्तार बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार धीमी गति से बढ़ रहे मानसून की रफ्तार अचानक बढ़ गई है।

आलम ये है कि मानसून ने पिछले चार दिनों (19 जून तक) में 10 राज्यों में उपस्थिति दर्ज करा दी है। इसके अलावा मानसून दो अन्य राज्यों में भी प्रवेश कर रहा है। उत्तर भारत की ओर बढ़ रहे मानसून ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी दस्तक दे दी है। रविवार को मानसून ने वाराणसी में भी दस्तक दे दी है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार निम्न दबाव क्षेत्र की वजह से मानसून ने अच्छी रफ्तार पकड़ ली है। यही वजह है कि मानसून ने करीब चार दिनों में 700 किलोमीटर की दूरी तय कर ली है। उम्मीद है कि मानसून एक-दो दिन में मुंबई पहुंच जाएगा। इसके साथ ही मानसून महाराष्ट्र के ज्यादातर क्षेत्र में 25 जून तक पूरी तरह फैल जाएगा।

हालांकि मानसून की मौजूदा तेज प्रगति सूखे की स्थिति से जूझ रहे मध्य भारत और दक्षिणी भारत के लिए अच्छी खबर है। बिहार में हो रही बारिश की वजह से राज्य के लोगों को भी काफी राहत मिली है। बारिश की वजह से बिहार में चमकी बुखार (Acute Encephalitis) से जूझ रहे लोगों की संख्या में भी कमी आयी है।

इस गर्मी में भीषण जल संकट का सामना करने वाले मराठवाड़ा और विदर्भ में भी रविवार को अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश, रायलसीमा, आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून सक्रिय है। कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिमी मध्य प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर के कुछ इलाकों में भी रविवार को बारिश ने लोगों को राहत प्रदान की है।

महाराष्ट्र की तरफ बढ रहा मानसून अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश और दक्षिणी गुजरात में भी दस्तक देने वाला है।  मानसून की आगे की चाल, विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों में, बंगाल की खाड़ी से उठने वाले एक और निम्न दबाव क्षेत्र सिस्टम पर निर्भर करेगी।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अभी बंगाल की खाड़ी के ऊपर कोई निम्न दबाव क्षेत्र नहीं दिख रहा है। अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत के ज्यादातर एरिया में लोगों को तेज हवाओं और गरज-चमक का सामना करना पड़ सकता है। लिहाजा, अभी ये कहना मुश्किल है कि मानसून दिल्ली और आसपास के एरिया में कब तक दस्तक देगा।

जब दिवालिया होने के कगार पर थी इकोनॉमी, तो इस तरह से पटरी पर ले आए थे मनमोहन सिंह

देश का बजट पेश होने में अब कुछ ही दिन और बचे हैं।  जब बजट और अर्थव्यवस्था की बात हो तो डॉ मनमोहन सिंह का जिक्र होना भी लाजमी ही है। भारत के वित्तमंत्री और प्रधानमंत्री के पद पर रहे मनमोहन सिंह भारत में आर्थिक उदारीकरण के प्रणेता के तौर पर जाने जाते हैं।

कैंब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी. फिल. करने वाले मनमोहन सिंह ने कभी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन विभिन्न पदों पर रहते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था में उनका योगदान महत्वपूर्ण है।

इन पदों पर रहे हैं डॉ मनमोहन सिंह

साल 1985 में राजीव गांधी के शासन काल में मनमोहन सिंह को भारतीय योजना आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। वे इस पद पर पांच सालों तक रहे जिसके बाद उन्हें 1990 में प्रधानमंत्री का आर्थिक सलाहकार बना दिया गया।

इसके बाद जब पी वी नरसिंहराव पीएम बनें, तो उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह को 1991 में वित्त मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंप दिया। मनमोहन सिंह वित्त मंत्रालय के सचिव, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे। साल 2004 से 2014 के बीच यूपीए-1 और यूपीए-2 सरकार में वे प्रधानमंत्री पद पर रहे।

इन आर्थिक सुधारों में है मनमोहन सिंह का योगदान

वित्त मंत्रालय का कामकाज देखते हुए सिंह ने 1991 से 1996 के बीच कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके पदभार संभालने से पहले देश बड़ी आर्थिक मंदी झेल रहा था। देश की अर्थव्यवस्था दिवालिया होने के कगार पर थी।  विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 110 करोड़ डॉलर बचे थे।

जब देश का राजकोषिय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 8.5 फीसदी के आस-पास था, तब सिंह ने उसे सिर्फ एक साल के अंदर 5.9 फीसदी तक ला दिया था। देश में ग्लोबलाइजेशन की शुरुआत 1991 में सिंह ने ही की थी।  उन्होंने भारत को दुनिया के बाजार के लिए तो खोला ही, बल्कि निर्यात और आयात के नियमों को भी सरल बनाया। यही नहीं, उन्होंने घाटे में चल रहे पीएसयू के लिए भिन्न नीतियां बनाने का काम किया था।

मनमोहन सिंह का प्रधानमंत्री कार्यकाल

साल 2004 से 2014 के बीच अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान मनमोहन सिंह ने कई उतार-चढ़ाव देखे। अपने कार्यकाल में उन्होंने मनरेगा, शिक्षा का अधिकार और आधार कार्ड योजना जैसे कुछ अच्छे कदम उठाए। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु समझौता।

18 जुलाई 2006 में मनमोहन सिंह और जार्ज बुश ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। दूसरी तरफ महंगाई और घोटालों ने जनता को उनके कार्यकाल का सबसे बुरा दौर भी दिखाया। सिंह के कार्यकाल में महंगाई का सबसे बुरा दौर चल रहा था। इस महंगाई से अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह पार नहीं पा सके और अर्थव्यवस्था भी क्षीण होती गई।

किसानों को मालामाल करेगी आम की ये किस्म, एक आम की कीमत है 1200 रूपये

गर्मी के मौसम में हर किसी को आम का बेसब्री से इंतजार होता है। पोषक तत्वों से भरपूर आम एक ऐसा फल है जो ज्यादातर लोगों को पसंद होता है। आम को ‘फलों का राजा’ भी कहा जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि एक ऐसा आम है जिसे ‘आमों की मलिका’ कहा जाता है और उसका दाम 1200 रुपये है।

हम बात कर रहे हैं मशहूर ‘नूरजहां’ की, जो अफगानिस्तानी मूल की मानी जाने वाली आम प्रजाति है। बता दें कि ये आम सिर्फ मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। आइए जानते हैं कि 1200 रुपये के इस आम की खासियत क्या है।

इस आम की सबसे खास बात ये है कि इसकी गुठली का वजन ही 150 से 200 ग्राम के बीच होता है। इतना ही नहीं, ये आम एक फुट तक लंबे होते हैं। बतादें कि इस आम की बुकिंग तभी हो जाती है जब ये ठीक से पके भी नहीं होते।

इन्हीं खासियत की वजह से इसके नार्मल वज़न वाले आम करीब 7-800 और ज़्यादा वज़न वाले आम का दाम 1200 रुपये तक पहुंच जाता है। इस एक आम का वजन 2.5 किलोग्राम के आस-पास होता है। हालांकि पहले के जमाने में इसका वजन 3.5 से 3.75 किलोग्राम के बीच होता था।

आम का वजन प्राकृतिक कारणों के चलते कम हुआ है। बारिश में देरी, अल्पवर्षा और अतिवर्षा इसका मुख्य कारण है। ‘नूरजहां’ की फसल पिछले साल इल्लियों के भीषण प्रकोप के चलते बर्बाद हो गई थी लेकिन आम की इस दुर्लभ किस्म के मुरीदों के लिए अच्छी खबर है

कि मौजूदा मौसम में इसके पेड़ों पर फलों की बहार आ गई है। आम के उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का सरताज है. दुनियाभर में आम की करीब 1400 किस्में पाई जाती हैं, इनमें से 1 हजार किस्में भारत में पैदा होती हैं.

जाने आने वाले पूरे हफ्ते में कहाँ कहाँ होगी भारी बारिश

पिछले हफ्ते पश्चिमी हरियाणा और उत्तर राजस्थान में अच्छी बारिश हुई थी तो वही पूर्वी हरियाणा  ,पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली में हल्की बारिश या बूंदाबांदी ही हुई थी। लेकिन इस बार पुर्वी हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में अच्छी बारिश होगी और पश्चिमी हरियाणा, उत्तर व पूर्वी राजस्थान में बूंदाबांदी हो सकती है तो कुछ जगहों पर बारिश होगी ही नही।

24_जून:-पश्चिमी विक्षोभ जम्मु कश्मीर के पास बना हुआ होगा। और परिसंचरण क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान पर बना हुआ होगा। कल जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अनेकों जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी। कई जगहों पर भारी बारिश भी होने की प्रबल संभावना है। पंजाब-हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

कुछ जगहों पर बूंदाबांदी या सिर्फ मेघ गर्जना भी देखने को मिल सकती है। लेकिन पूर्वी हरियाणा, दिल्ली और पश्चिम उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश तो संभव है ही। साथ में अनेकों जगहों पर भारी बारिश की प्रबल संभावना बनी हुई।कल अवध या मध्य उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, मराठवाड़ा, उत्तर मध्य महाराष्ट्र में मध्यम से भारी बारिश संभव है। कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश भी हो सकती है।

दक्षिणी राजस्थान, गुजरात ( कच्छ को छोड़कर), पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी अनेकों जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। कुछ जगहों पर भारी बारिश देखने को मिल सकती है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में लगभग सभी जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश संभव है। कुछेक जगहों पर भारी बारिश से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

तटीय महाराष्ट्र, गोवा, संपूर्ण कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अनेकों जगहों पर मध्यम से भारी होगी, कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश तो कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश भी संभव है।

25 तारिख को पश्चिमी विक्षोभ जम्मू कश्मीर पर आ जाएगा और परिसंचरण क्षेत्र मध्य राजस्थान पर बना हुआ होगा। कम दबाव का क्षेत्र अब कमजोर होने लगेगा। जो कि पूर्वी हरियाणा व साथ लगते उत्तर प्रदेश पर बना हुआ होगा। पश्चिमी विक्षोभ से आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण पश्चिमी पंजाब और उत्तर पश्चिमी राजस्थान में मौसम साफ होने लगेगा।

इस दिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अनेकों जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश संभव है कुछ जगहों पर भारी बारिश भी देखने को मिल सकती है।  पूर्वी पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है तो कुछ जगहों पर बूंदाबांदी या मेघगर्जना होने की भी संभावना है।पश्चिमी पंजाब, पश्चिमी हरियाणा और उत्तर पूर्वी राजस्थान में मेघ गर्जना के साथ बूंदाबांदी की संभावना है।

गुजरात(कच्छ को छोड़कर), मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में लगभग सभी जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है।बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में हल्की बारिश की संभावना है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में अनेकों जगहों पर मध्यम से भारी बारिश होगी।

26_जून:-इस दिन पश्चिमी विक्षोभ जम्मू कश्मीर से आगे निकल जाएगा और परिसंचरण क्षेत्र पूर्वी राजस्थान पर पहुंच जाएगा पश्चिमी विक्षोभ के आगे निकलने के साथ उत्तर भारत में मौसम साफ होने लगेगा। जिससे आने वाले 4 से 5 दिनों के लिए एक बार फिर से लू जैसी स्थिति देखने को मिलेगी।

इस दिन जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी हिस्सो में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। तो निचले इलाकों में बूंदाबांदी की सम्भावना हैं। उत्तराखंड में लगभग सभी जगहो पर हल्की से मध्यम बारिश होगी।

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरपुर्वी व पश्चिमी राजस्थान में साफ मौसम रहेगा। दिन में कुछ जगहों पर बूंदाबांदी होने की उम्मीद है। आमतौर पर गर्म मौसम ही रहेगा। दक्षिण व पुर्वी राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेघगर्जन के साथ बूंदाबांदी/हल्की बारिश होने की सम्भावना हैं।

गुजरात, मध्यप्रदेश, बुंदेलखंड, अवध, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल में अनेको जगहो पर हल्की से मध्यम बारिश होगी। कई जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है। झारखंड, छत्तीसगढ़, ओड़िशा में हल्की बारिश की उम्मीद है।

27_जून:- इस दिन पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और कच्छ को छोड़कर देश मे बाकी सभी हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश तो कई जगहों पर भारी बारिश भी होगी।
उत्तर भारत मे कुछ एक इलाको में मेघगर्जन के साथ बूंदाबांदी हो सकती है।

28 जून से 1 जुलाई तक उत्तर भारत में मौसम साफरहेगा। सिर्फ एकादुका जगहो पर मेघगर्जन के साथ बूंदाबांदी हो सकती है।

उत्तरी मध्यप्रदेश, उत्तर छत्तीसगढ़, उत्तर ओडिसा, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में हल्की बारिश/बूंदाबांदी होने की उम्मीद है। सम्पूर्ण गुजरात मे बूंदाबांदी/हल्की बारिश, मध्यप्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओड़िशा में मध्यम से भारी बारिश होने को उम्मीद है।

29_जून:- बंगाल की खाड़ी में अति निम्न दबाव का क्षेत्र बनेगा। जो ओड़िशा की तरफ बढेगा। जिससे ओड़िशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, पश्चिम बंगाल में बहुत भारी बारिश की सम्भावना हैं।

1 जुलाई से इसका असर भारत के पुर्वी राज्यो सहित मध्य व मध्य पुर्वी भागों पर पड़ेगा। 2 जुलाई के बाद आने वाले दिनों में उत्तर भारत मे एक बार फिर से मौसम बदलेगा।

‘ग्लोबल वार्मिंग’ भारत के लिए बनेगी वरदान, बशर्ते रोक लें पानी की बर्बादी’

जलवायु परिवर्तन और वैश्विक ताप वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) समूचे विश्व के लिये चिंता का विषय है. मौसम विभाग के महानिदेशक के जे रमेश का कहना है कि दक्षिण एशिया, खासकर भारतीय उपमहाद्वीप क्षेत्र, बारिश की मात्रा के लिहाज से ग्लोबल वार्मिंग से बहुत अधिक प्रभावित नहीं होगा. यह स्थिति भारत के लिये वरदान साबित हो सकती है बशर्ते जल प्रबंधन को दुरुस्त किया जाये. पेश हैं दुनिया की इस आसन्न चुनौती पर डॉ रमेश से ‘भाषा’ के पांच सवाल और उनके

सवाल : जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का भारत में क्या असर है?

जवाब : पिछली एक सदी में हुयी बारिश और दैनिक तापमान के केन्द्रीय जल आयोग को हाल ही में मौसम विभाग की ओर से मुहैया कराये गये आंकड़ों पर आधारित अध्ययन रिपोर्ट बताती है कि भारत के औसत तापमान में मामूली बढ़ेातरी जरूर हुई, लेकिन बारिश अपने सामान्य स्तर पर बरकरार है. जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव के कारण बारिश के क्षेत्रीय वितरण में बदलाव आया है.

मसलन, अधिक वर्षा वाले पूर्वोत्तर क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में बारिश की मात्रा में मामूली कमी आयी तो राजस्थान जैसे सूखे इलाकों में बारिश की मात्रा अपेक्षाकृत बढ़ी है. राष्ट्रीय स्तर पर वर्षाजल की उपलब्धता यथावत है. भारत में जलवायु परिवर्तन की वजह से चक्रवाती तूफान, वज्रपात, अधिक बर्फबारी, भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड जैसी मौसमी गतिविधियां बढ़ी हैं.

सवाल : मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुये क्या इसे भारत के लिये भविष्य की गंभीर चुनौती माना जाये?

जवाब : यह स्थिति भारत के लिये चुनौती भी है, अवसर भी है और वरदान भी है. वैश्विक स्तर पर गठित जलवायु परिवर्तन संबंधी अंतर सरकारी समूह (आईपीसीसी) का अनुमान है कि दक्षिण एशिया, खासकर भारतीय उपमहाद्वीप में अगले 50 सालों में कार्बन उत्सर्जन घटे या बढ़े,

बारिश की मात्रा स्थिर रहेगी, इसमें कमी नहीं होगी. इसलिये भारत के लिये यह वरदान है और एक अवसर भी है कि तत्काल प्रभाव से जल प्रबंधन को दुरुस्त कर पानी के उपयोग को नियंत्रित एवं संतुलित वितरण के दायरे में लाया जाये. ऐसा करना भारत के लिये सबसे बड़ी चुनौती भी है.

सवाल : भारत के लिये भविष्य के इस वरदान की क्या वजह है?

जवाब : विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियां इसकी वजह हैं. भारत में 2000 से 2018 तक ग्लोबल वार्मिंग के कारण गर्मी बढ़ी, लेकिन रेगिस्तान, हिमालय और समुद्र से घिरे इस भूभाग में बढ़ते तापमान के साथ वायुमंडल की नमी के मिश्रण ने बारिश के लिये कम दबाव के क्षेत्र और विक्षोभ की घटनाओं को भी बढ़ाया जिससे चक्रवात, हिमपात, वज्रपात, मूसलाधार बारिश, भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड जैसी मौसम की चरम गतिविधियां भी बढ़ीं. इससे वर्षा जल की मात्रा में कमी नहीं आई. कम से कम बारिश के मामले में यह स्थिति भविष्य में भी बरकरार रहेगी.

सवाल : भारत के लिये अगर ग्लोबल वार्मिंग वरदान हो सकती है तो चेन्नई में इस साल जलसंकट गहराने को क्या माना जाये?

जवाब : चेन्नई में जल संकट गहरा गया है. वहां दफ्तरों में कर्मचारियों को अपना पेयजल लाने और कर्मचारियों को घर से ही विभागीय काम करने के लिये कहना पड़ा. पिछले साल हिमाचल प्रदेश के शिमला में भी पानी के लिये हाहाकार मचा था.

यह बारिश की कमी का परिणाम नहीं है. यह सिर्फ और सिर्फ पानी के असमान वितरण, बेतहाशा अनियंत्रित दोहन या सीधे शब्दों में कहें तो जल कुप्रबंधन का नतीजा है. बेहतर जल प्रबंधन कर पानी के असमान वितरण को तत्काल नहीं रोका गया तो आने वाले समय में यह संकट व्यापक पैमाने पर गहरायेगा.

सवाल : भारत में वर्षाजल की मात्रा में कमी नहीं आने के दावे का पुख्ता आधार क्या हो सकता है, जबकि देश में सर्दी, गर्मी और बारिश का मौसम चक्र पिछले कुछ सालों से लगातार अनियमित है?

जवाब : केन्द्रीय जल आयोग के सात दशक के आंकड़े बताते हैं कि हमारे जलाशयों के जलस्तर में कोई कमी नहीं आयी है. भारत में 50 से 60 प्रतिशत फसलें वर्षा आधारित हैं और कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इन फसलों का उत्पादन भी स्थिर है. देश की आबादी 50 साल में दोगुने से अधिक होने के बावजूद जलाशयों का जलस्तर और कृषि उपज में कमी नहीं आने से स्पष्ट है कि वर्षाजल की उपलब्धता में कोई कमी नहीं आयी है,

जबकि पानी का उपभोग और दोहन लगातार बढ़ा है. बारिश के दिन घटे हैं लेकिन कम दिनों में तेज बारिश ने वर्षाजल की मात्रा कम नहीं होने दी. हां, तेज बारिश के कारण बाढ़ में पानी बर्बाद होने की स्थिति गहरायी है. इसीलिये जल प्रबंधन की तत्काल जरूरत है. यह काम सिर्फ केन्द्र सरकार का नहीं है बल्कि राज्य सरकारों को और लोगों को जागरुकता के माध्यम से वर्षा जल संचय एवं जल संरक्षण की कारगर पहल करनी होगी.

Jio GigaFiber की कीमत हुई लीक, जानें कितने से शुरू हो सकते हैं प्लान

भारत में टेक्नोलॉजी की दुनिया में जिस चीज के आने का बहुत बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है वो जियो गीगाफाइबर है. ये जियो की ओर से ब्रॉडबैंड सेवा है, इसकी घोषणा कंपनी ने पिछले साल AGM (एनुअल जनरल मीटिंग) के दौरान की थी. तब से लेकर अब तक ये टेस्टिंग में ही है.

इसकी टेस्टिंग भारत में 100 से भी ज्यादा शहरों में की जा रही है. जियो ने टेलीकॉम सेक्टर में कदम रखते ही भारत में मोबाइल इंटरनेट के पूरे ईकोसिस्टम को ही बदल दिया है. ऐसे में अब लोगों को ब्रॉडबैंड की दुनिया में भी जियो से ऐसी ही किसी मैजिक की उम्मीद है.

आपको बता दें जियो गीगाफाइबर फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क पर चलेगा, इस वजह से इसमें स्टेबल और फास्ट इंटरनेट मिलेगा. चूंकि ये सेवा जियो के हिस्से से आ रही है ऐसे में इसकी कीमत भी काफी कम होने की उम्मीद है. हालांकि जियो की ओर से आधिकारिक तौर पर इसकी कीमत को लेकर कुछ भी नहीं कहा गया है. लेकिन हर थोड़े दिन में इसकी कीमत को लेकर कोई ना कोई लीक सामने आते ही रहती है.

अब एक ताजा लीक से पता चला है कि इसके बेस प्लान में 50Mbps की स्पीड मिलेगी और इसे 600 रुपये प्रति महीने की दर से उपलब्ध कराया जाएगा. वहीं दूसरी तरफ प्रीव्यू के लिए उलपलब्ध कराए गए 100Mbps स्पीड वाले प्लान की कीमत प्रति महीने 1,000 रुपये होगी. ध्यान रहे ये कीमतें केवल अफवाह भी हो सकती हैं. क्योंकि कंपनी ने अभी भी इन कीमतों की पुष्टि नहीं की है.

फिलहाल जुलाई के महीने में कंपनी अपने AGM (एनुअल जनरल मीटिंग) का आयोजन करेगी, उम्मीद है कि इस बार कीमतों की घोषणा और इस नई सेवा की कमर्शियल लॉन्चिंग कर दी जाएगी. ऐसा लग रहा है कि कंपनी 50Mbps और 100Mbps की स्पीड वाले प्लान्स के साथ ही अपनी शुरुआत कर सकती है.

कुछ समय पहले एक और लीक से ये जानकारी मिली थी कि जियो गीगाफाइबर के हर महीने के प्लान की कीमत महज 600 रुपये होगी और इसमें ग्राहकों को एक महीने के लिए 100GB डेटा 100Mbps की स्पीड से दिया जाएगा. एक और बात ये भी सामने आई थी कि ब्रॉडबैंड के साथ ही जियो की ओर से जियो होमटीवी और लैंडलाइन कनेक्शन भी दिया जा सकता है.

सरकार बंद कर सकती है 150cc से नीचे के बाइक व स्कूटर, जानिये क्या है वजह

मोदी सरकार की थिंकटैंक नीति आयोग इलेक्ट्रिक वाहन को लेकर लगातार काम कर रही है। ऐसे में अगर आपसे कहा जाए कि 6 साल में सभी सस्ती पेट्रोल बाइक और स्कूटर बंद हो जाएंगी, तो आपका जवाब क्या होगा?

दरअसल भारत सरकार की तरफ से साल 2025 तक 150cc से कम वाले सभी वाहन को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने का प्लान है। ऐसे में रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दिशा में नीति आयोग ने दो-पहिया और तीन पहिया वाहन निर्माताओं को दो सप्ताह के अंदर अपने प्लान के साथ आने को कहा है।

क्यों बंद होंगे पेट्रोल वाहन?

दरअसल बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में लगातार तेजी आ रही है। इसको लेकर सरकार से 2025 तक वाहन निर्माताओं को डेडलाइन दे दी है। इनमें साल 2025 तक 150cc से कम वाले सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलना शामिल है।

कोर्ट का सता रहा है डर

दरअसल ऑटो इंडस्ट्री को इस बात का अंदाजा है कि अगर समय रहते कुछ नहीं किया गया, तो बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कोर्ट कोई कड़ा कदम उठा सकती है। शुक्रवार को नीति आयोग की तरफ से बुलाई गई बैठक में वाहन निर्माता और इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली स्टार्ट-अप कंपनियां शामिल थी।

बैठक में कौन-कौन था शामिल?

नीति आयोग की तरफ से बुलाई गए बैठक में टू-व्हीलर निर्माताओं में Bajaj Auto के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज, TVS Motor के को-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, Honda Motorcycle and Scooter India (HMSI) के प्रेसिडेंट और सीईओ मिनोरू काटो, SIAM के डायरेटर-जनरल विष्णु माथुर और ACMA के डायरेक्टर जनरल विनी मेहता के साथ कई और लोग भी शामिल थे।

नीति आयोग का लक्ष्य

नीति आयोग का लक्ष्य साल 2023 तक सभी तीन-पहिया वाहन को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलना है। वहीं, 2025 तक 150सीसी से कम वाली बाइक या स्कूटर को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलना है।

Start-up क्यों हैं अहम?

सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक और सेमी-कंडक्टर क्रांति में भले ही पीछे था, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति में ऐसा नहीं होगा। ऐसे में अगर बड़ी कंपनियां पीछे रहती हैं, तो उनका यह काम स्टार्ट-अप करेंगे।

5 जुलाई को मोदी सरकार पेश करेगी अपना पहला बजट, किसानों के लिए होगी ये बड़ी घोषणा

मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 5 जुलाई को पेश करेगी। इस बार के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए कई नए उपाए किए जा सकता हैं। मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है।

आगामी बजट में किसानों के लिए एक बार फिर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। भारत के किसानों को निवेश के लिए एग्री टर्म लोन के लिए इंसेंटिव मुहैया कराने की भी जरूरत है। इससे उनको खेती में काफी पायदा होगा।

SBI की इकोरैप रिसर्च रिपोर्ट में हुआ खुलासा

आपको बता दें कि यह बात SBI की इकोरैप रिसर्च रिपोर्ट में कही गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, एग्री टर्म लोन के लिए इंसेंटिव या तो ब्याज सब्सिडी या फिर क्रेडिट गारंटी फंड के लिए मैकेनिज्म बनाकर उपलब्ध कराया जा सकता है।

इसके अलावा किसानों को लंबे समय तक फायदा पहुंचाने के लिए सरकार 6,000 रुपए वाली आर्थिक मदद को बढ़ाकर 8,000 रुपए तक कर सकती है। सरकार के अगर किसानों के आर्थिक मदद देती है तो देश के 14 करोड़ किसानों को फायदा मिलेगा।

इकोरैप रिपोर्ट की कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर वक्त-वक्त पर बढ़ोत्तरी कर किसानों की आर्थिक मदद की राशि को 6000 रूपए से बढ़ाकर 8000 रूपए कर दिया जाता है और वित्तीय घाटा में घटकर जीडीपी का 3 फीसदी हो जाता है तो 14 करोड़ गरीब किसानों के लिए अतिरिक्त लागत 12000 करोड़ सालाना ही बैठेगी।

पीएम मोदी की योजनाओं का फायदा उठा रहे किसान

इसके अलावा किसानों को अपनी फसल को बढ़ाने के लिए मार्केट सपोर्ट की भी जरूरत है, जिससे किसानों को बाजार में उनकी फसल का अच्छा मूल्य मिल सकता है। पीएम मोदी सरकार ने किसानों को लेकर कई योजनाएं भी चला रखी हैं। इन योजनाओं से भी किसानों को काफी लाभ मिल रहा है।

ऐसे बने Lic एजेंट, हर महीने 12000 कमाने का मौका

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) महत्वाकांक्षी, ईमानदार और कठिन परिश्रम करने वाले लोगों को अर्बन करियर एजेंट के रूप में कार्य करने का मौका दे रहा है। इसके लिए एलआईसी ने आवेदन मांगे हैं। खास बात यह है कि इन करियर एजेंट को हर महीने 12 हजार रुपए तक का स्टाइपेंड भी दिया जाएगा।

एलआईसी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 21 से 35 वर्ष तक की आयु वाला कोई भी व्यक्ति अर्बन करियर एजेंट पद के लिए आवेदन कर सकता है। अनुसूचित जाति/जनजाति, भूतपूर्व सैनिक, सेल्स एवं मार्केटिंग में अनुभव रखने वालों को आयुसीमा में 40 वर्ष तक की छूट दी जा सकती है।

मेट्रो शहरों के लिए शैक्षणिक योग्यता स्नातक है और अन्य सेंटरों के लिए बारहवीं पास भी आवेदन कर सकते हैं। आप जिस सेंटर के लिए आवेदन कर रहे हैं उसके क्षेत्राधिकार के भीतर आप कम से कम एक साल से निवास कर रहे हों।

प्रतिमाह का मिलेगा स्टाइपेंड 

एलआईसी के अनुसार, अर्बन करियर एजेंट को मेट्रो शहरों में पहले वर्ष 12 हजार रुपए प्रतिमाह, दूसरे वर्ष 11 हजार रुपए प्रतिमाह और तीसरे वर्ष 10 हजार रुपए प्रतिमाह का स्टाइपेंड मिलेगा। अन्य सेंटरों के लिए पहले वर्ष 10 हजार रुपए प्रतिमाह, दूसरे वर्ष 9 हजार रुपए प्रतिमाह, तीसरे वर्ष 8 हजार रुपए प्रतिमाह का स्टाइपेंड मिलेगा। इसके अलावा कार्य के अनुसार, अतिरिक्त कमीशन भी करियर एजेंट को दिया जाएगा।

यह नहीं कर सकते आवेदन

अर्बन करियर एजेंट पद के लिए एलआईसी के कर्मचारी, एजेंट, केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारी के पति या पत्नी आवेदन नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा एलआईसी के विकास अधिकारी, एजेंट या कर्मचारियों के सगे संबंधी भी आवेदन के लिए पात्र नहीं है। इन पदों के लिए 6 जुलाई 2019 तक आवेदन किया जा सकता है। लिखित परीक्षा 13 जुलाई को होगी।

यहां करें संपर्क

  •  वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, एलआईसी शाखा नंबर 11सी , एफ-19 यूनाइटेड इंश्योरेंस बिल्डिंग, तीसरा तल, कनाट सर्कस नई दिल्ली-110001
  •  शाखा प्रबंधक, एलआईसी शाखा नंबर 320 लक्ष्मी इंश्योरेंस बिल्डिंग, दूसरा तल आसफ अली रोड नई दिल्ली-110002
  •  शाखा प्रबंधक, एलआईसी शाखा नंबर 31 डी, 3सी/2 न्यू रोहतक रोड लिबर्टी सिनेमा के सामने करोल बाग, नई दिल्ली 110005
  • शाखा प्रबंधक एलआईसी शाखा नंबर 1021, भगत सिंह पार्क के सामने 18/60 गीता कॉलोनी नई दिल्ली 110031
  •  शाखा प्रबंधक एलआईसी शाखा नंबर 33 बी, दूसरा तल, जीवन प्रवाह टावर, डिस्ट्रिक्ट सेंटर जनकपुरी नई दिल्ली 110058
  • शाखा प्रबंधक एलआईसी शाखा नंबर 1181, आरके टावर, सागर विला के नजदीक रोहतक 124001

रोज सुबह पीएं काले नमक वाला पानी, मिलते हैं ये बड़े फायदे

रोज़ सुबह सुबह काले नमक का सेवन सेहत के लिए आवश्यक होता है। काले नमक को ‘सोल वाटर’ भी कहा जाता है। काले नमक से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, उर्जा मे वृद्धी और अन्य तरह की बीमारियों को ठीक करने मे भी मददगार है।काले नमक मे 80% खनिज लवण होते

जो शरीर के लिए जरूरी होते है। काले नमक मे मेग्निशयम, विटामिन,आयरन, सल्फोइड,सोडियम क्लोराइड आदि गुण होते है। सलाद, चटनी, आचार, दही, लस्सी, पानी, उबले अंडे आदि मे इसका उपयोग किया जाता है।

लिवर रहेगा स्वस्थ

लिवर से संबंधित परेशानी से छुटकारा पाने के लिए नमक वाला पानी पीएं। रोजाना यह पानी पीने से लिवर के डैमज सैल्स दोबारा सही होने लगते हैं। इसके साथ ही नमक का पानी शरीर से टॉक्सिन दूर करता है।

पाचन क्रिया को करें दुरुस्त

यदि आपको पेट की समस्या अक्सर बनी रहती है या पेटदर्द से परेशान हैं तो काला नमक आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। काला नमक को पानी में मिलाकर पीने से मुंह में लार वाली ग्रंथी को सक्रिय करने में तो मदद करता ही है साथ ही अपच होने पर जल्द आराम पहुंचाता है।

मोटापे को करें कम

काला नमक स्वाद को बढ़ाने के अलावा मोटापा कम करने में भी सहायक होता है। काला नमक को एक कप या गिलास में पानी का घोल बनाएं, फिर एक चम्मच नींबू के रस को मिलाएं। प्यास लगने पर दिन में कई बार इसका घोल पिएं,

ऐसा करने से आपके पेट में वसा एकत्रित नहीं होने देगा और न सिर्फ मोटापा रोकता है बल्कि वजन भी कम करता है। इतना ही नहीं, बल्कि पाचन को दुरुस्त कर शरीर की कोशिकाओं को पोषक तत्व पहुंचाता है। यदि आप साधारण नमक यूज करते है तो साथ ही इस नमक का भी यूज करना चाहिए।

जोड़ों का दर्द

यदि आपके शरीर की मासपेशियों में अक्सर दर्द या फिर जोड़ों में दर्द बना रहता है तो काला नमक आपको जल्द आराम दिला सकता है। जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए कपड़े में एक कप काला नमक डाल कर उसे बांध कर पोटली बनानी है। इसके बाद उसे किसी पैन में गरम करें और उससे जोड़ों की सिकाई करें। इसे दिन में 2 से 3 बार गरम करके सिकाई करना चाहिए।

दिल को रखें सेहतमंद

काला नमक खराब कोलेस्ट्रोल को कम करता है। कोलेस्ट्रोल कम होने से दिल का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इसमें सामान्य नमक से कम सोडियम होता है जो दिल को सेहतमंद बनाता है।

नींद

काले नमक के उपयोग से नींद अच्छी आती है। यह कार्टिसोल तथा एड्रेनलिन हार्मोन का स्तर कम करता है जिसके कारण नींद आने में मदद मिलती है। ये हार्मोन शरीर से तनाव की स्थिति में स्रावित होते हैं जिनकी अधिकता शरीर पर बुरा असर डालती है।