अंबानी के साथ जुड़कर लाखों कमाने का मौका

अगर आप बिजनेस करने की सोच रहे हैं और ज्यादा पैसे भी इन्वेंस्ट नहीं करना चाहते हैं तो आपके लिए यह खबर काम की है। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के जुड़कर कमाई करने का मौका है। इसके लिए आपका लाखों नहीं बल्कि सिर्फ 35 हजार रुपए निवेश करने हैं। आइए जानते हैं कैसे अंबानी से जुड़कर कर सकते हैं लाखों में कमाई…

रिलायंस सिक्युरिटीज के साथ मिलाएं हाथ

बेहतर रिटर्न की वजह से शेयर बाजार औऱ म्युचुअल फंड्स ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। शेयर बाजार में बढ़ते रुझान को देखते हुए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस सिक्युरिटीज को निवेशकों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए पार्टनर्स की जरूरत है। इसके लिए वो सिर्फ मामूली फीस चार्ज कर रहे हैं। ऐसे में आप भी उनके साथ जुड़कर महीने में लाखों रुपए कमा सकते हैं।

35 हजार निवेश कर बने पार्टनर कंपनी के दिल्ली रिजन के रिजनल चैनेल मैनेजर नीरज कुमार कवि ने बताया कि रिलायंस सिक्युरिटीज का पार्टनर बनने के लिए ज्यादा फीस नहीं ली जा रही है। कोई भी व्यक्ति 35 हजार रुपए के निवेश में हमसे जुड़ सकता है। इसमें से 25 हजार रुपए रिफंडेबल डिपॉजिट के तौर पर लिए जा रहे हैं।

इसके अलावा वन टाइम नॉन-रिफंडेबल के रूप में 7140 रुपए पेय करने होंगे। वहीं 1500 रुपए प्रोसेसिंग फी लगेगा। इस तरह कुल मिलाकर करीब 35 हजार रुपए का खर्च बैठता है। इसमें ऑफिस सेटअप का खर्चा शामिल नहीं है। इसके अलावा आवेदक का आधार कार्ड, पैन कार्ड, 4 फोटो, 100 रुपए वाला 5 स्टाम्प पेपर एग्रीमेंट के लिए जरूरी होंगे। आगे भी पढ़ें,

पार्टनर कोड जेनरेट होने के बाद शुरू करें काम

उन्होंने बताया कि एग्रीमेंट बनने के बाद एक पार्टनर कोड जेनरेट होता है। पार्टनर कोड जेनरेट होने के बाद आपका डिजिटल अकाउंट ओपन हो जाएगा। टर्मिनल आईडी मिलने के बाद आप काम शुरू कर सकते हैं।

कितनी होगी कमाई

रिलायंस सिक्युरिटीज के साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन मॉड्यूल के जरिए जुड़ सकते हैं। ऑफलाइन मोड में आपको एक ऑफिस सेटअप करना होगा। लेकिन यहां कमिशन भी ज्यादा मिलेगा। ब्रोकिंग पर 50 से 70 फीसदी शेयरिंग का मॉडल है।

वहीं ऑनलाइन बिजनेस पर 20 से 30 फीसदी शेयरिंग हैं। कमाई आपकी कार्यक्षमता पर निर्भर करेगी। हालांकि आप महीने में 50 हजार से 1 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप कंपनी की वेबसाइट पर जाकर संपर्क कर सकते हैं।

पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 5500 रु मंथली इनकम की है गारंटी

अगर आप रेग्युलर मंथली इनकम या एक्स्ट्रा इनकम का कोई उपाय खोज रहे हैं पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम आपकी मदद कर सकती है। बस इसके लिए आपको एक बार इस स्कीम के तहत पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाना पड़ेगा।

इस स्कीम के तहत 5500 रुपए मंथली तक इनकम की गारंटी है। वहीं, आपके द्वारा खाते में जमा हर एक पैसे पर सुरक्षा की भी गारंटी है। खास बात है कि इस अकाउंट को आप मिनिमम 1500 रुपए से भी खुलवा सकते हैं।

यह अकाउंट उनके लिए भी बेहतर है, जिनके पास कुछ पैसे एकमुश्‍त पड़े हों। उन पैसों को किसी रिस्की निवेश या बैंक के बचते खाते में डालने की बजाए, पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में जमा करा दें तो यह आपके लिए हर महीने इनकम देने की गारंटी बन जाएगी।

हर महीने आपको कमाई कराती भी रहेगी और स्कीम का समय पूरा होने के बाद पोस्ट ऑफिस के खाते में जमा पूरे पैसे भी आपको मिल जाएंगे। खास बात यह है कि इस स्कीम को हर 5 साल बाद उसी खाते के जरिए आगे भी जबतक चाहें बढ़ा सकते हैं। यानी यह सालों तक आपके लिए इनकम की गारंटी साबित होगी।

क्या है ये स्कीम

पोस्ट ऑफिस की मंथली इन्वेस्टमेंट स्कीम यानी पीओएमआईएस आपको मंथली इनकम करने का मौका देती है। यह एक ऐसी सरकारी योजना है जिसमें एक बार पैसा निवेश करने पर हर महीने तय आय होती रहती है। एक्सपर्ट्स इस योजना को निवेश के सबसे अच्छे विकल्पों में से एक मानते हैं, क्योंकि इसमें 4 बड़े फायदे हैं।

  •  इसे कोई भी खोल सकता है और आपकी जमा-पूंजी हमेशा बरकरार रहती है।
  • बैंक एफडी या डेट इंस्ट्रूमेंट की तुलना में आपको बेहतर रिटर्न मिलता है।
  • हर महीने एक निश्चित आय आपको होती रहती है।
  • स्कीम पूरी होने पर आपकी पूरी जमा पूंजी मिल जाती है जिसे आप दोबारा इस योजना में निवेश कर मंथली आय का साधन बनाए रख सकते हैं।

कितना कर सकते हैं निवेश –

अगर आपका अकाउंट सिंगल है तो आप 4.5 लाख रुपए तक अधिकतम जमा कर सकते हैं। कम से कम 1500 रुपए की राशि जमा की जा सकती है। वहीं अगर आपका अकाउंट ज्वॉइंट है तो इसमें अधिकतम 9 लाख रुपए जमा किए जा सकते हैं। एक शख्‍स पोस्ट ऑफिस द्वारा तय लिमिट के अनुसार अकाउंट खोल सकता है। मेच्योरिटी पीरियड 5 साल है। 5 साल बाद अपनी पूंजी को फिर योजना में निवेश कर सकते हैं।

ऐसे होगी मंथली इनकम

  • मंथली इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत 7.3 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है।
  • इस सालाना ब्याज को 12 महीनों में बांट दिया जाता है जो आपको मंथली बेसिस पर मिलता रहता है।
  • अगर आपने 9 लाख रुपए जमा किए हैं तो आपका सालाना ब्याज करीब 65700 रुपए होगा। इस लिहाज से आपको हर महीने करीब 5500 रुपए की आय होगी।
  • 5500 रुपए आपको हर महीने मिलेंगे, वहीं आपका 9 लाख रुपए मेच्योरिटी पीरियड के बाद कुछ और बोनस जोड़कर वापस मिल जाएगा। अगर आप मंथली पैसा न निकालें अगर आप मंथली पैसा न निकालें तो वह आपके पोस्ट ऑफिस सेविंग अकाउंट में रहेगी और मूलधन के साथ इस धन को भी जोड़कर आपको आगे ब्याज मिलेगा।

मेच्योरिटी के पहले पैसा निकालें तो……

अगर किसी जरूरत पर आपको मेच्योरिटी से पहले ही पूरा पैसा निकालना पड़ गया तो यह सुविधा आपको अकाउंट के 1 साल पूरा होने पर मिल जाती है। अकाउंट खोलने की तारीख से 1 साल से 3 साल तक पुराने अकाउंट होने पर, उसमें जमा रकम में से 2% काटकर बाकी रकम आपको वापस मिलती है। साल से ज्यादा पुराना अकाउंट होने पर, उसमें जमा रकम में से 1 फीसदी काटकर बाकी रकम आपको वापस मिलती है।

कौन खोल सकता है अकाउंट –

पोस्ट ऑफिस की मंथली इन्वेस्टमेंट स्कीम कोई भी खोल सकता है चाहे वह एडल्ट हो या माइनर। – आप अपने बच्चे के नाम से भी अकाउंट खोल सकते हैं। अगर बच्चा 10 साल से कम उम्र का है तो उसके नाम पर उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक की ओर से अकाउंट खोला जा सकता है। बच्चे की उम्र 10 साल होने पर वह खुद भी अकाउंट के संचालन का अधिकार पा सकता है।

कैसे खुलेगा अकाउंट

आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी पोस्ट ऑफिस में जाकर अकाउंट खुलवा सकते हैं। इसके लिए आपको आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस में से किसी एक की फोटो कॉपी जमा करनी होगी। इसके अलावा एड्रेस प्रूफ जमा करना होगा, जिसमें आपका पहचान पत्र भी काम आ सकता है। इसके अलावा आपको 2 पासपोर्ट साइज के फोटोग्राफ जमा करने होंगे।

टैक्स छूट का लाभ नहीं

इसमें जमा की जाने वाली रकम पर और उससे आपको मिलने वाली ब्याज पर किसी तरह की टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलता है। हालांकि इससे आपको होने वाली कमाई पर डाकघर किसी तरह का TDS नहीं काटता, लेकिन जो ब्याज आपको मंथली मिलती है, उसके एनुअल टोटल पर आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल किया जाता है।

जानिए कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कैसे दर्ज कराएं…

आप अपने लिए या अपने घर के लिए कोई न कोई सामान लेते ही होंगे. जैसे कपड़ों से लेकर कई अन्य चीजें, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपको कोई चीज खराब या घटिया क्वालिटी की दे दी जाती हैं. इसके बाद जब आप उसे वापस करने जाते हैं तो कंपनी उसे लेने से मना करती है. ऐसी हालत में आप कंज्यूमर कोर्ट का सहारा ले सकते हैं.

जीहां उपभोक्ता अपने हितों की रक्षा के लिए कंज्यूमर कोर्ट को सहारा ले सकता है, जिसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत बनाया गया है.

हालांकि हमारे पास कुछ कानून हैं तो कुछ हद तक उपभोक्ताओं की रक्षा करते हैं, जोकि निम्नलिखित हैं.

  • भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872
  • वस्तुओं की ब्रिक्री अधिनियम, 1936
  • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006
  • वजन और माप अधिनियम, 1976
  • खतरनाक ड्रग्स एक्ट, 1952
  • कृषि उत्पाद अधिनियम, 1937
  • भारतीय मानक संस्थान (ISI) अधिनियम, 1952

आपको बता दें कि इन कानूनों में सिविल सूट दाखिल करना बहुत महंगा पड़ता है और निर्णय आने में समय भी लगता है. इसलिए इस समस्या के समाधान के रूप मे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को बनाया गया.

  • उपभोक्ता वह है, जिसने रुपयों का भुगतान कर कुछ खरीदा हो.
  • एक व्यक्ति जिसने खुद कोई सामान खरीदा नहीं है, लेकिन खरीदार की अनुमति के सामान का उपयोग करता है.
  • जो व्यक्ति सामान को बेचने के उद्देश्य से खरीदता है.
  • स्वरोजगार के लिए सामान खरीदने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता है.
  • वह व्यक्ति जो कि वस्तु या सेवा का लाभार्थी हो.
  • मृतक उपभोक्ता के कानूनी वारिस
  • उपभोक्ता के पति या पत्नी
  • उपभोक्ता के रिश्तेदार
  • सबसे पहले आप फोरम के न्यायक्षेत्र की पहचान कर लें, जहां शिकायत दर्ज करनी है. इसका निर्धारण करने के दो तरीके हैं.
  • वस्तु या सेवा प्रदाता की दुकान या सेंटर किश क्षेत्र में है.
  • वस्तु या सेवा की कीमत कितनी है.

इसके आधार पर उपभोक्ता मंचों का आर्थिक क्षेत्राधिकार इस प्रकार है

  • जिला मंच – 20 लाख रुपये तक का केस
  • राज्य आयोग – 20 लाख से 1 करोड़ तक का केस
  • राष्ट्रीय आयोग – 1 करोड़ से अधिक का केस
  • आपको अपने केस के अनुसार, जिला फोरम, राज्य फोरम और राष्ट्रीय आयोग के समक्ष अपनी शिकायत के साथ एक निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा.
  • इसके बाद आपको अपनी शिकायत का ड्राफ्ट तैयार करना होगा, जिसमें य बताना जरूरी है कि आप केस क्यों दाखिल करना चाहते हैं.
  • इस शिकायत में बताएं कि मामला इस मंच या फोरम के क्षेत्राधिकार में कैसे आता है.
  • शिकायच पत्र में अंत में आपको अपने हस्ताक्षर करने जरूरी है. अगर आप किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं तो शिकायत पत्र के साथ एक प्राधिकरण पत्र लगाना होगा.
  • शिकायतकर्ता का नाम, पता, शिकायत का विषय, विपक्षी या पार्टिंयों के नाम, उत्पाद का विवरण, पता, क्षति पूर्ति राशि का दावा इत्यादि का उल्लेख करना न भूलें.

  • अपने आरोपों का समर्थन करने वाले सभी दस्तावेजों की प्रतियां, जैसे खरीदे गए सामान का बिल, वॉरंटी और गारंटी कार्ड, कंपनी या व्यापारी को की गई लिखित शिकायत और उत्पाद को सुधारने का अनुरोध करने के लिए व्यापारी को भेजे गए नोटिस की कॉपी भी लगाई जाएगी.
  • आप अपनी शिकायत में क्षतिपूर्ति के अलावा, धनवापसी, मुकदमेबाजी में आई लागत और ब्याज, उत्पाद की टूट-फूट और मरम्मत में आने वाली लागत का पूरा खर्चा मांग सकते हैं. ध्यान देने वाली बात ये है कि आपको इन सभी खर्चों को अलग-अलग मद में लिखना होगा.
  • अधिनियम में शिकायत करने की अवधि घटना घटने के बाद से 2 साल तक है. अगर शिकायत दाखिल करने में देरी हो तो इसके साथ देरी होने का कारण भी देना होता है.
  • आपको शिकायत के साथ एक हलफनामा दर्ज करने की जरूरत होगी कि शिकायच में बताए गए तथ्य सही हैं.
  • शिकायतकर्ता किसी भी वकील के बिना किसी व्यक्ति या उसके अपने अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा शिकायत पेश कर सकता है. शिकायत पंजीकृत डाक द्वारा भेजी जा सकती है. शिकायत की कम से कम 5 प्रतियों को फोरम में दाखिल करना होता है. इसके अलावा आपको विपरीत पक्ष के लिए अतिरिक्त प्रतियां भी जमा करनी होती हैं.

कचरे से पैसे कमा रहा है ये शख्स

क्या आपने कभी सोचा है जिस कूड़े को हम और आप फेंक देते हैं उससे भी पैसा कमाया जा सकता है. आज एक ऐसे शख्स के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने कचरे से पैसे कमाना शुरू किया.

बेंगलुरु के रहने वाले नवीन मरियन अपना खुद का बिजनेस खोलना चाहते थे. जिसके लिए उन्होंने रीसाइकलिंग बिजनेस को चुना काम करना शुरू किया. नवीन का मानना था कि जिस कूड़े-कचरे को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं उससे भी पैसा कमाया जा सकता है.

बता दें, नवीन मरियन ने अपने करियर की शुरूआत होटल इंडस्ट्री में बतौर शेफ से की थी. 2013 में उन्होंने अपनी खुद की केटरिंग सर्विस (प्लेट अप) शुरू की और कॉर्पोरेट इवेंट्स का कॉन्ट्रैक्ट लेने लगे. पर उनका ये बिजनेस ज्यादा समय तक चल नहीं पाया. जिसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि नया बिजनेस शुरू किया.

ऐसे शुरू किया बिजनेस

रीसाइकलिंग बिजनेस शुरू करने के लिए उन्होंने ‘खाली बॉटल’ के नाम से एक वेबसाइट बनाई. जहां पर ग्राहक (कोई व्यक्ति या कॉर्पोरेट हाउस) अपने पते से रीसाइकलिंग के लिए कूड़ा-कचरा आदि जमा करवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं.

रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ‘खाली बॉटल’ के पास उन लोगों के कॉल और मैसेज आते हैं. फिर उनकी टीम ग्राहकों के पते से कूड़ा-कचरा इकट्ठा करके लाती है. बता दें, टीम के पास वेइंग मशीन होती है और वे एक प्रोफेशनल ड्रेस कोड में होते हैं. इसके बाद संबद्ध और प्रमाणित रीसाइकलिंग प्लांट को यह माल भेज दिया जाता है.

वहीं कूड़ा घर से ले जाने के लिअ ग्राहक पेमेंट करते हैं जिसके लिए कई विकल्प दिए गए है. आपको बता दें टीम खाली बोतल सिर्फ सूखा कूड़ा ही जमा करती है. इसी के साथ नवीन कहते है इस बिजनेस से उन्हें फायदा तो हो ही रहा है साथ शहर की गंदगी भी साफ हो रही है. बता दें, खाली बॉटल के पास फिलहाल 15 कर्मचारियों की टीम है, जिसमें इंजीनियर्स से लेकर ड्राइवर तक सभी शामिल हैं.

ये हैं 2017-18 की टॉप सेलिंग SUV

इंडि‍यन ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री में 2017-18 के दौरान बड़ा बदलाव देखा गया जहां लोगों का रुझान छोटी कारों की बजाए कॉम्‍पैक्‍ट एसयूवी या यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल सेगमेंट पर बढ़ा है। यही वजह है कि‍ पैसेंजर व्‍हीकल्‍स में सबसे ज्‍यादा ग्रोथ यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल सेगमेंट की रही है।

इस सेगमेंट में मारुति‍ सुजुकी की वि‍टारा ब्रीजा ने लेकर टोयोटा इनोवा का नाम है। कंपनि‍यों का भी कहना है कि‍ भारत में कार खरीदने का ट्रेंड धीरे-धीरे शि‍फ्ट हो रहा है। यही वजह है कि‍ कंपनि‍यां अपने पोर्टफोलि‍यो में ज्यादा से ज्‍यादा यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल्‍स को शामि‍ल कर रही हैं।

यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल सेगमेंट में सबसे ज्‍यादा ग्रोथ

सोसाइटी ऑफ इंडि‍यन ऑटोमोबाइल मैन्‍युफैक्‍चरर्स (सि‍आम) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबि‍क, 2017-18 में यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल्‍स की सेल्‍स 9,21,780 यूनि‍ट्स रहा जोकि‍ पिछले साल 7,61,998 यूनि‍ट्स था। इस सेगमेंट की सेल्‍स ग्रोथ 20.97 फीसदी रही है। वहीं, पैसेंजर कार सेल्‍स 2017-18 में 3.33 फीसदी बढ़कर 21,73,950 यूनि‍ट्स रही जोकि‍ 2016-17 में 21,03,847 यूनि‍ट्स थी।

मारुति‍ की ब्रीजा बनी किंग

मारुति‍ सुजुकी ने वि‍टारा ब्रीजा के साथ स्‍पोर्ट्स यूटि‍लि‍टी सेगमेंट पर अपना नाम दर्ज कराया है। वि‍टारा ब्रीजा सबसे ज्‍यादा बि‍कने वाली यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल बन गई है। कंपनी ने 2017-18 में वि‍टारा ब्रीजा की 1,48,400 यूनि‍ट्स को बेचा है जबकि‍ पि‍छले साल यह आंकड़ा 1,08,640 यूनि‍ट्स का था। इसकी सेल्‍स में 36.27 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई।

ह्युंडई की क्रेटा दे रही है कड़ी टक्‍कर

ह्युंडई की क्रेटा एसयूवी सेगमेंट की पॉपुलर कार है। यह दूसरी सबसे ज्‍यादा बि‍कने वाली एसयूवी भी है। कंपनी ने क्रेटा की 1,07,100 यूनि‍ट्स को बेचा जबकि‍ पि‍छले साल यह कार लि‍स्‍ट में भी नहीं थी। 2016-17 में कंपनी ने क्रेटा की 96,899 यूनि‍ट्स को बेचा था।

बोलेरो का नाम भी हुआ शामि‍ल

साल 2017-18 में महिंद्रा एंड महिंद्रा की पॉपुलर एसयूवी बोलेरो ने बाजी कार ली है। बलेनो ने टोयोटा इनोवा को पीछे करते हुए इस लि‍स्‍ट में तीसरा नंबर हासि‍ल कि‍या है। महिंद्रा ने फाइनेंशि‍यल ईयर के दौरान 85,368 यूनि‍ट्स को बेचा है जबकि‍ पि‍छले साल यह आंकड़ा 69,328 यूनि‍ट्स का था। इसमें 23.13 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है।

एमएंडएम के ऑटोमोटि‍व डि‍वि‍जन के चीफ ऑफ सेल्‍स एंड मार्केटिंग वि‍जय राम नाकरा ने कहा कि बोलेरो ने दोबारा भारत में टॉप 10 पैसेंजर व्‍हीकल्‍स में अपनी पॉजि‍शन हासि‍ल की है, जोकि‍ यह दर्शाता है कि‍ इस ब्रांड पर सेमी उर्बन और रूरल इंडि‍या में कंज्‍यूमर्स का वि‍श्‍वास बढ़ा है। नाकरा ने यह भी कहा कि‍ बोलेरो प्‍लस को लॉन्‍च ने 10 लाख सेल्‍स का आंकड़ा हासि‍ल करने में अहम भूमि‍का नि‍भाई है। कंपनी को भरोसा है कि‍ बोलेरो आगे भी पॉपुलर एसयूवी बनी रहेगी।

टोयोटा इनोवा एक पायदान नीचे

टोयोटा की इनोवा इस बार एक पायदान नीचे आ गई है। भारत में टोयोटा की सबसे ज्‍यादा बि‍कने वाली कार भी इनोवा ही है। 2017-18 में कंपनी ने इनोवा की 74,137 यूनि‍ट्स को बेचा है जबकि‍ 2016-17 में यह आंकड़ा 79,092 यूनि‍ट्स का था। इसकी सेल्‍स में 6 फीसदी की गि‍रावट आई है।

मारुति‍ की अर्टि‍गा भी लि‍स्‍ट में

मारुति‍ सुजुकी की एमपीवी अर्टि‍गा भी काफी पॉपुलर है। कंपनी ने हाल ही में इंडोनेशि‍या इंटरनेशनल मोटर शो में अर्टि‍गा के नए जेनरेशन को पेश कि‍या है। मारुति‍ ने 2017-18 में इसकी 66,141 यूनि‍ट्स को बेचा है जबकि‍ पि‍छले साल यह आंकड़ा 63,527 यूनि‍ट्स था।

लोन लेकर शुरू किया कारोबार

खेती-बाड़ी से जुड़कर कमाई करने के अनेक विकल्प मौजूद हैं। बस जरूरत है अवसर को पहचानने औऱ उस पर अमल करने की। उत्तराखंड के रहने वाले इस शख्स ने किसानों की परेशानियों को समझा और उसके हल के लिए मिले आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार।

उसके बिजनेस की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज तीन साल में ही वह करोड़पति बन गया। आइए जानते हैं हरेंद्र की सफलता के बारे में…

ऐसे मिला आइडिया

खूबसूरत वादियों के शहर उत्तराखंड के अधमसिंह जिले के रहने वाले हरेंद्र सिंह ने बताया कि कैसे उनको खेती से जुड़े बिजनेस का आइडिया मिला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अक्सर भूस्खलन की घटानएं होती रहती है।

भूस्खलन की वजह से रास्ते टूट जाते हैं और यातायात बाधित हो जाता है। किसानों को इससे काफी परेशानी होती होगी जब वो खेती के लिए सीड्स खरीदने कई दिनों तक बाजार नहीं पहुंच पाते होंगे। इस बात को ध्यान में रख डिमांड को देखते हुए हरेंद्र ने किसानों तक पहुंच बनाई और तराई फार्म सीड़्स की नींव रखी।

65 लाख लोन लेकर की शुरुआत

हरेंद्र ने कहा कि एग्रीकल्चर में बीएससी करने के बाद एमबीए किया। इसके बाद मुरादाबाद से एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर से कोर्स किया। कोर्स पूरा होने के बाद उत्तराखंड के किसानों को सीड्स की समस्याओं को देखते हुए एक प्रोजेक्ट बनाया। लोन के लिए नैनीताल बैंक प्राइवेट लिमिटेड को एक करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट सौंपा। फिर उन्हें बैंक से 65 लाख रुपए लोन पास हुआ।

वहीं हिल एरिया में आने की वजह से उनको नाबार्ड की तरफ से 44 फीसदी की सब्सिडी भी मिली। क्या है बिजनेस मॉड्यूल उनका कहना है कि वो सीड्स के ब्रिडर खरीदते हैं। फिर उसे किसानों को देकर फसल तैयार करवाते हैं। तराई की निगरानी में सभी कार्य संपन्न होते हैं। हारवेस्टिंग के बाद उसे क्लिन और ग्रेडेड किया जाता है। फिर सर्टिफिकेशन स्टैंडर्ड्स के मुताबिक, सीड्स को पैकेजिंग कर बेचा जाता है।

कंपनी का टर्नओवर हुआ 8 करोड़ रु

हरेंद्र के मुताबिक, तराई फार्म सीड्स एंड कंपनी का सालना टर्नओवर पिछले साल 8 करोड़ रुपए था। उन्होंने इसकी शुरुआत 2014 में की थी। गेहूं, सरसों, चावल और मटर सीड्स का उनका बिजनेस है।

वो किसानों से 18,00 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से सीड्स खरीदते हैं और बाजार में 2200 से 2400 रुपए प्रति क्विंटल बेचते हैं। उनका कहना है कि सालान टर्नओवर पर 25 फीसदी का प्रॉफिट हो जाता है। यह भी पढ़ें, 2 महीने के कोर्स ने बदली जिंदगी, हर महीने कर रहे 1 लाख रु की कमाई

अब 2 मई से इस तरह बनेंगे आपके ड्राइविंग लाइसेंस

ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया 2 मई से ऑनलाइन शुरू हो जाएगी. अप्लीकेंट्स ऑनलाइन आवेदन के साथ ही फीस भी घर बैठे जमा कर सकेंगे. नई सुविधा के बाद मैनुअली आवेदन एक्सेप्ट नहीं किए जाएंगे. अप्लीकेंट्स को फोटो, सिग्नेचर, बर्थ और एड्रेस का सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा. जिसके बाद लाइसेंस बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

समय और डेट चुनने का ऑप्शन

नई व्यवस्था के तहत अपनी सुविधा के मुताबिक, समय भी बुक कराया जा सकता है. अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन के समय ही टेस्ट के लिए डेट भी फाइनल हो जाएगी. निर्धारित डेट और समय पर अप्लीकेंट्स आरटीओ जाकर थम्ब इम्प्रेशन, आई स्कैन सहित अन्य प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. इससे एक फायदा यह होगा कि बेवजह अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. समय की बर्बादी नहीं होगी.

26 अप्रैल तक पेंडिंग काम पूरा करें

एआरटीओ प्रशासन आरपी सिंह ने बताया कि वर्तमान काम सारथी-2 सॉफ्टवेयर पर हो रहा है. नई सुविधा सारथी-4 के तहत लोगों को मिलेगी. ऐसे में जिन लोगों के काम पेंडिंग पड़े हैं वह अपना काम 26 अप्रैल तक करा लें. अन्यथा पुराने सॉफ्टवेयर पर जमा फीस नए सॉफ्टवेयर पर मान्य नहीं होगी.

4 दिन तक नहीं होगा कोई काम

नई व्यवस्था शुरू करने से पहले सॉफ्टवेयर अपडेट करने के लिए 27 अप्रैल से 1 मई तक आरटीओ में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ा कोई काम नहीं होगा. लर्निग, परमानेंट लाइसेंस सहित अन्य कार्य बंद रहेगा.

लर्निग लाइसेंस फीस

  • 350 रुपए कार व बाइक दोनों का बनवाने पर.
  • 200 रुपए किसी एक का बनवाने पर.
  • 50 रुपए प्रति टेस्ट का यदि एक बार फेल होने पर दोबारा टेस्ट दे रहे हैं, तो.

परमानेंट लाइसेंस फीस

  • 700 रुपए कार या बाइक का लाइसेंस बनवाने पर.
  • 1,000 रुपए कार व बाइक दोनों का लाइसेंस बनवाने पर.

करेक्शन फीस

  • लर्निग में एक भी रुपए नहीं.
  • 400 रुपए परमानेंट लाइसेंस में.
  • 200 रुपए कार्ड और 200 रुपए करेक्शन फीस.
  • 150 से 200 लर्निग लाइसेंस रोजाना बनते हैं.
  • 100 से 125 परमानेंट लाइसेंस रोजाना बनते हैं.

अप्लीकेंट्स की सुविधा के लिए 2 मई से ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. आवेदन और फीस जमा करने के लिए लोगों को ऑफिस आने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

बेटी के जन्म पर 11 हजार रु देगी ये कंपनी

देश में लिंग असमानता की खाई को भरने के लिए देश की सबसे बड़ी हेल्थकेयर नेटवर्क ऑक्सी भारत में पैदा होने वाली हर बेटी को 11 हजार रुपए देगी। कंपनी के मुताबिक, ऑक्सी गर्ल चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत रजिस्ट्रेशन कराने वाले पैरेंट्स को बेटी के जन्म पर 11 हजार रुपए मिलेंगे। कंपनी बेटी के नाम पर इस रकम को फिक्स्ड डिपॉजिट करेगी। कंपनी का मकसद बेटियों को फाइनेंशियल रूप से स्वतंत्र बना है।

कंपनी ऐसे देती है ये रुपए

इस प्रोग्राम के तहत बेटी का जन्‍म होने के तुरंत बाद उसके नाम पर 11 हजार रुपए बैंक में जमा किए जाते हैं। कंपनी बेटी के नाम पर सेविंग्‍स अकाउंट खुलवाती है और उसमें पैसे जमा करवाती है। इन पैसों को बेटी 18 साल के होने पर निकाल सकती है। इसके अलावा कंपनी मां और बेटी के स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल करने की जिम्‍मेदारी भी लेती है।

ऐसे करें अप्‍लाई

ऑक्‍सी गर्ल डेवलपमेंट प्रोग्राम में इस बेनेफिट को हासिल करने के लिए मां को 3 महीने की प्रेग्‍नेंसी के दौरान ही खुद को रजिस्‍टर करना होगा। प्ले स्टोर पर मौजूद ऑक्सी हेल्थ ऐप पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। बेटी पैदा होने के बाद कंपनी नवजात के स्‍वास्‍थ्‍य की जांच कराएगी। इसके बाद बेटी के नाम पर 11 हजार रुपए बैंक अकाउंट खुलाकर उसमें जमा कर देगी जो आधार से लिंक होगा।

1500 शहरों में है कंपनी का नेटवर्क

1500 शहरों में ऑक्सी हेल्थकेयर के 2 लाख से ज्यादा सेंटर्स मौजूद हैं। 1.5 लाख हेल्थकेयर नेटवर्क पार्टनर्स के जरिए कंपनी फंड जुटाती है।

2 लाख से घटकर 50,000 रह गई मशरूम उगाने की लागत

उत्‍तराखंड के देहरादून में एक महिला किसान सरल और इनो‍वेटिव तरीकों के इस्‍तेमाल से मशरूम उगा रही है। ऐसा करके उन्‍होंने अपनी खेती की लागत को काफी घटा लिया है।

यह किसान हैं सौम्‍या फूड्स की फाउंडर दिव्‍या रावत। ANI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 26 वर्षीय दिव्‍या ने इनोवेशन के जरिए खुद तो फायदा कमाया ही है साथ ही वे इसे प्रमोट भी कर रही हैं। इसके जरिए वे उत्‍तराखंड के कई लोगों को आजीविका कमाने में मदद भी कर रही हैं।

क्‍यों शुरू की थी मशरूम की खेती

आय का कोई फिक्‍स्‍ड सोर्स न होने और धान व सब्जियों की परंपरागत खेती में अच्‍छा भविष्‍य न दिखने के चलते उत्‍तराखंड के लोग रोजगार की तलाश में अपना गांव छोड़कर शहरों में जा रहे हैं। इसी समस्‍या का हल ढूंढने के लिए रावत ने मशरूम की खेती शुरू की। इसका आइडिया उन्‍हें देहरादून के होलसेल मार्केट्स में मिला।

उन्‍होंने पाया कि मशरूम की कीमत अन्‍य सब्जियों की तुलना में कहीं ज्‍यादा है। इसे 200 रुपए प्रति किलो पर बेचा जाता है और हर साल कीमतें 200 रुपए से लेकर 400 रुपए तक जाती हैं। यह जानकर उन्‍होंने इसी पर काम करने का सोचा। चूंकि मशरूम को घर के अंदर भी उगाया जा सकता है, इसलिए प्राकृतिक आपदाओं या जंगली जानवरों से उपज खराब होने का खतरा भी नहीं रहता है। इसके बाद रावत ने सोलन के इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्‍चरल रिसर्च (ICAR)- डायरेक्‍टोरेट ऑफ मशरूम रिसर्च से मशरूम फार्मिंग की ट्रेनिंग ली और खुद की मशरूम कल्‍टीवेशन यूनिट शुरू की।

इनोवेशन से कैसे घटाई

लागत इसमें आई लागत पर रावत ने बताया कि यूनिट लगाने में लागत ज्‍यादा थी। इसलिए मैंने कुछ बदलाव किए ताकि पूरी प्रोसेस को कम लागत पर किया जा सके। मैंने वर्टिकल मशरूम कल्‍टीवेशन के लिए एल्‍यूमीनियम/स्‍टील रैक्‍स को बांस की रैक से बदल दिया।

साथ ही हैंगिग मेथड से मशरूम कल्‍टीवेशन के लिए नायलॉन की रस्‍सी का इस्‍तेमाल किया। इससे मशरूम उगाने पर आने वाली लागत घटकर 40-50 हजार रुपए पर आ गई, जो पहले 2 लाख रुपए से भी ज्‍यादा थी। आगे पढ़ें- सीजन और टेंपरेचर के हिसाब से उगाई मशरूम

टेंपरेचर के हिसाब से उगाईं अलग-अलग वैरायटी

रावत ने इन बदलावों के अलावा भी एक बदलाव किया। उन्‍होंने सीजन और उत्‍तराखंड नैचुरल क्‍लाइमेटिक कंडीशंस के हिसाब से तीन अलग-अलग तरह की मशरूम उगाना शुरू किया। ऐसा करके उन्‍होंने अलग-अलग टेंपरेचर का फायदा लिया।

इससे फसल के लिए एयरकंडीशनर्स, ह्यूमीडिफायर्स या अन्‍य टेंपरेचर कंट्रोलर्स की जरूरत खत्‍म हो गई। रावत के मुताबिक, हमने गर्मी में मिल्‍की मशरूम उगाया, इसके लिए 30-40 डिग्री सेल्सियस टेंपरेचर चाहिए होता है। उसके बाद जब टेंपरेचर थोड़ा कम होने का सीजन होता है, तब हमने ओइस्‍टर मशरूम उगाया और सर्दियों में विंटर बटन मशरूम उगाया। आगे पढ़ें- आ रहा है बदलाव

दिखने लगा है बदलाव

मशरूम फार्मिंग में आया हालिया तेज उछाल कैसे लोगों की जिंदगी प्रभावित कर रहा है, इस पर रावत ने कहा कि इस ग्रोथ से मेरे गांव में बड़ा बदलाव आया है। अब ये बदलाव राज्‍य के अन्‍य हिस्‍सों में भी आ रहा है। लोग गांव वापस आ रहे हैं लेकिन ऐसा बड़े पैमाने पर दिखने में अभी थोड़ा वक्‍त लगेगा। आगे पढ़ें- आगे के लिए क्‍या है कहना

अभी तय करना है लंबा सफर

रावत का कहना है कि फिलहाल मैं हमसे जुड़े किसानों को सही टेक्निकल और इंप्‍लीमेंटेशन को लेकर मार्गदर्शन उपलब्‍ध करा रही हूं। हम हर रोज तेजी से आगे बढ़ रहे हैं लेकिन यहां डायरेक्‍टोरेट ऑफ मशरूम लाने और उत्‍तराखंड को भारत की मशरूम कैपिटल बनाने के अपने लक्ष्‍य को पाने के लिए अभी हमें लंबा सफर तय करना है।

इन देशों की करेंसी इंडियन्स के लिए है सस्ती

डॉलर,पाउंड और यूरो जैसी मुद्राओं के मुकाबले भारतीय रुपए के कमजोर या मजबूत होने की खबर अक्‍सर देखते-सुनते हैं। हालांकि दुनिया में कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां की मुद्रा भारतीय रुपए के मुकाबले काफी कमजोर है। मतलब भारतीय कंरसी इन देशों के मुकाबले काफी महंगी है। इन देशों में घूमने के दौरान आपको करेंसी एक्सचेंज करने पर उनकी करेंसी के ज्यादा या लगभग बराबर नोट मिलेंगे। अधिकांश देशों में इन्फलेशन बहुत कम है या सामान्य है। आइए जानते हैं ऐसे देशों के बारे में..

थाईलैंड

2रुपए = एक थाई बाट

भारतीयों के बीच थाईलैंड का बैंकॉक शॉपिंग और घूमने के लिए सबसे ज्यादा फेमस है। थाईलैंड को टूरिस्ट डेस्टिनेशन माना जाता है इसलिए यहां होटल सस्ते होटल से लेकर लग्जरी होटल मिल जाएंगे। थाईलैंड की करेंसी बाट ज्यादा महंगी नहीं है। इंडिया के 2 रुपए एक थाई बाट के बराबर है। यहां महंगाई नहीं होने के कारण यहां बजट में ब्यूटी प्रोडक्ट से लेकर बैग, कपड़े, शूज खरीद सकते हैं। यहां भारतीय रूपए में 125 रुपए से लेकर 500 रुपए में अच्छे बैग मिल जाएंगे। लेकिन यहां बारगेन करना न भूले।

श्रीलंका

1 रुपए = 2 श्रीलंकाई रुपए

भारतीयों के बीच घूमने के लिए श्रीलंका काफी फेमस है। श्रीलंका के बीच बहुत खूबसूरत हैं। यहां आपको एक रात के लिए बजट होटल और बेड एंड ब्रेकफास्ट टाइप अकमडेशन 800 रुपए से लेकर 4,000रुपए के बजट में आसानी से मिल जाएंगे। यहां ठहरने के कई विकल्प हैं और चार सितारा होटल भी अपने बजट के मुताबिक बुक कर सकते हैं। श्रीलंका की करेंसी ज्यादा महंगी नहीं है। इंडिया का 1 रुपए 2 श्रीलंकाई रुपए के बराबर है। यहां महंगाई अधिक नहीं है।

वियतनाम

1 रुपए = 332.70 वियतनाम डॉन्ग

वियतनाम बहूत खूबसूरत देश है। वियतनाम अपने खास व्‍यंजनों और मंदिरों के लिए फेसम है। वियतनाम में घूमना बहुत सस्ता है, क्योंकि वहां भारत का 1 रुपया 332.70 वियतनाम डॉन्ग (वियतनाम की करेंसी) के बराबर है। यहां इन्फलेशन है लेकिन इंडियन के लिए तब भी यहां घूमना सस्ता पड़ेगा।

भूटान

1 रुपए = 1 भूटानी रुपए

भारतीयों को भूटान जाने के लिए पासपोर्ट और वीजा की जरुरत नहीं है। यहां आप भारतीय आईडी प्रूफ के साथ ट्रैवल कर सकते हैं। यहां गेस्ट हाउस और बजट होटल 1,000 रुपए में भी मिल जाएंगे। भूटान में इंडियन करेंसी भी चल जाती है। यहां भारतीय नोट को शॉपिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे एक रुपए 1 भूटानी रुपए के बराबर हैं। यहां महंगाई अधिक नहीं है इसलिए यहां बजट में आसानी से शॉपिंग कर सकते हैं।

नेपाल

1 रुपए = 1.60 नेपाली रुपए

भारतीयों को नेपाल जाने के लिए पासपोर्ट और वीजा की जरुरत नहीं है। यहां आप भारतीय आईडी प्रूफ के साथ ट्रैवल कर सकते हैं। यहां बजट होटल बजट होटल 1,000 रुपए से लेकर 3,500 रुपए में मिल जाएंगे। नेपाल घूमने में एक फायदा है कि वहां की करेंसी इंडिया के मुकाबले सस्ती है लेकिन यहां महंगाई है। नेपाल में इंडियन शॉपिंग कर सकते हैं लेकिन क्योंकि इंडिया और नेपाल में शॉपिंग करना प्राइस के मामले में लगभग एक जैसा है।