इन विशेषता के साथ अगले महीने आ रहा है 100 रुपये का नया नोट

अब आपकी जेब में 100 रुपए का नया नोट जल्द ही पहुंचने वाला है। डीबी की रिपोर्ट के मुताबिक 100 रुपए के नए नोट की देवास की बैंक नोट प्रेस में छपाई होने लगी है। ये नोट बैंगनी रंग होगा और अगस्त से सितंबर तक आपकी जेब में पहुंच जाएगा।

इस नोट में गुजरात के पाटण स्थित रानी की बाव का फोटो होने की खबरें हैं। ये बावड़ी यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल है। नोटबंदी के बाद से रिजर्व बैंक ने अब तक 10 रुपए, 50 रुपए, 200 रुपए, 500 रुपए और 2000 रुपए के नए नोट प्रिंट किए हैं।इस नोट के आने के बाद भी पुराने नोट चलते रहेंगे। इस नोट में देशी स्याही और पेपर का प्रयोग किया गया है।

रिजर्व बैंक ने नए नोट में कई सुरक्षा फीचर भी जोड़े हैं। रिजर्व बैंक के इस नए नोट के बाद मौजूदा करेंसी के सभी नोट बदल जाएंगे। नोटबंदी के दौरान मोदी सरकार ने 1000 और 500 रुपए के पुराने नोट बंद कर दिए थे। इन नोटों के बदले 2000 और 500 रुपए के नोट छापे गए। लोगों के पास पर्याप्त पैसा हो इसलिए सरकार 2000 रुपए के नोट लाई थी।

इन नोटों के बाद रिजर्व बैंक ने 200, 50 और 10 रुपए के नए नोट छापे। इसके अलावा 1 रुपए के नए नोट भी छापे गए। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 18.5 लाख करोड़ रुपए की करेंसी सर्कुलेशन में है। नोटबंदी के दौरान लोगों के पास सिर्फ 7.8 लाख करोड़ रुपए थे। नोटबंदी के दौरान 1000 और 500 रुपए की अधिकतर करेंसी बैंकों में जमा हो गई थी।

रिजर्व बैंक ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें पूरे देश में 19.3 लाख करोड़ रुपए होने की बात कही गई थी। जनता के पास अभी अधिकतर 2000 और 500 के नए नोट हैं। बीच में नकदी की दिक्कत होने के कारण सरकार ने नए नोट छापे।

ऐसे शुरू करें टी बैग बनाने का बिजनेस

ग्रामीण इलाकों में निवासित व्यक्ति शायद Tea Bag नामक इस शब्द से कम ही परिचित होंगे क्योंकि आज भी ग्रामीण इलाकों में ही नहीं अपितु शहरों में भी अधिकतर घरों में चाय बनाने के लिए पारम्परिक विधि अर्थात जिसमे बर्तन में पानी रखकर चूल्हे पर रख दिया जाता है | और उसके बाद उस खौलते पानी में चाय की पत्तियों को डाला जाता है का उपयोग ही सर्वाधिक तौर पर किया जाता है | लेकिन बढ़ते शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण ने चाय बनाने की एक नई प्रणाली को जन्म दिया है जिसमे Tea Bag का इस्तेमाल चाय बनाने के लिए किया जाता है |

अक्सर बड़े बड़े कार्यालयों में चाय बनाने के लिए Tea Vending Machine का उपयोग किया जाता है जिनमे लगभग हर प्रकार की चाय बनाने के लिए Tea Bag का इस्तेमाल होता है | इसलिए कहा जा सकता है की इस प्रकार के उत्पाद की मांग ज्यादातर तौर पर भारत के शहरी भागों में एवं अंतराष्ट्रीय बाजार में हमेशा विद्यमान रहती है |

इसलिए इस व्यापार को कोई भी व्यक्ति बेहद कम निवेश के साथ शुरू कर सकता है क्योंकि Tea bag Making Business को शुरू करने के लिए चाय उद्योग से जुड़ी कोई बहुत अधिक जानकारी की आवश्यकता नहीं होती है | हालांकि उद्यमी को इस तरह के बिज़नेस को शुरू करने के लिए बेहद कम निवेश की आवश्यकता होती है और उद्यमी चाहे तो शुरूआती दौर में इसे घर से भी शुरू कर सकता है | इसलिए कोई भी उत्साही एवं इच्छुक व्यक्ति इस व्यापार को आसानी से इसलिए शुरू कर सकता है क्योंकि Tea Bag making Process को समझना बेहद आसान प्रक्रिया है |

 

Tea Bag की उपयोगिता:

यह सर्वविदित है की भारत में चाय सबसे ज्यादा प्रचलित पेय पदार्थ है जबकि पूरे विश्व में चाय कॉफ़ी के बाद दूसरा सबसे प्रचलित पेय पदार्थ है इसलिए घरेलू बाजार में तो इसके बिकने की संभावनाएं हैं ही अंतराष्ट्रीय बाजार में भी इसके बिकने की संभावनाएं पर्याप्त रूप से व्याप्त हैं | हालांकि जैसा की हमने बताया की चाय को साधारणतया उबलते हुए पानी में चाय की पत्तियां डालकर बनाया जाता है | लेकिन Tea Bag चाय बनाने की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाने का कार्य करते हैं | टी बैग के माध्यम से चाय उबले हुए पानी में टी बैग डालकर बनायीं जाती है |

कहने का आशय यह है की चाय बनाते समय उबले हुए पानी में Tea Bag को डुबाया जाता है और कुछ मिनटों के बाद ही इसे इस पर लगे धागे की मदद से चाय से निकाल दिया जाता है | Tea Bag को अनेकों फ्लेवर जैसे Cardamom Tea, Lemon Tea इत्यादि में तैयार किया जाता है | टी बैग को मूल रूप से फ़िल्टर पेपर से तैयार किया जाता है जिसे आंशिक रूप से सब्जी फाइबर एवं लकड़ी से तैयार किया जाता है | कभी कभी इनको रेशम से भी बनाया जाता है |

Tea bag की बिकने की संभावनाएं:

यदि कोई व्यक्ति अपने Tea bag Manufacturing Business को अच्छी योजना एवं तैयारी के साथ शुरू करे तो वह इस व्यापार से बड़ा प्रॉफिट कमा सकता है | क्योंकि बड़े होटल, रेस्टोरेंट, कॉफ़ी की दुकानें, भारतीय रेलवे, सभी प्रकार के कार्यालय Tea bag के बड़े उपभोक्ता हैं | इसके अलावा कुछ घरों में भी लोग टी बैग का इस्तेमाल करने लगे हैं |

हालांकि स्थानीय मार्केट में इस उत्पाद की बिकने की संभावनाओं को तलाशने के लिए उद्यमी को उस क्षेत्र में स्थित व्यवसायिक गतिविधियों का आकलन करना होगा और यह भी पता करना होगा की उस क्षेत्र विशेष में Tea Vending machine का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या कितनी है |

टी बैग बनाने का बिज़नेस कैसे करें?

मार्केट रिसर्च है जरुरी :

यह व्यापार शुरू करने से पहले व्यक्ति को चाहिए की वह मार्केट रिसर्च करे क्योंकि यह उत्पाद एक ऐसा उत्पाद है जो लोगों की दैनिक आवश्यकता से जुड़ा हुआ नहीं है | बल्कि कुछ घरों एवं कार्यालयों में ही अभी तक इसका इस्तेमाल देखा गया है | इसलिए उद्यमी को यह पता करना होता है की कौन कौन सी ऐसी कम्पनियाँ हैं जो उसके उत्पाद को खरीद सकती हैं | इस रिसर्च में कंपनीयों सम्बन्धी सभी डिटेल्स शामिल होनी चाहिए और यह भी शामिल होना चाहिए की उद्यमी इन कंपनियों को अपना उत्पाद खरीदने के लिए कैसे राजी करेगा |

Tea Bag Making Business हेतु आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन:

जहाँ तक Tea bag Making Business शुरू करने के लिए स्थानीय नियमों की बात है यह राज्य एवं शहर के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं | लेकिन शुरूआती तौर पर उद्यमी चाहे तो अपने बिज़नेस को One Person Company के तहत रजिस्टर कर सकता है | जानिए भारत में अपनी कंपनी कैसे खोलें? अपने बिज़नेस को रजिस्ट्रेशन करा लेने के बाद उद्यमी को अपने व्यापार को वर्तमान कर प्रणाली के अंतर्गत भी पंजीकृत कराना पड़ सकता है |

जानिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई कैसे कर सकते हैं | हालांकि यह सब करने से पहले उद्यमी को अपने व्यापार के नाम से पैन कार्ड एवं चालू खाता खोलना पड़ सकता है | जानिए किसी भी बिज़नेस के लिए चालू खाता कैसे खोलें? इन सबके अलावा उद्यमी चाहे तो अपने Tea bag making Business को उद्योग आधार के तहत भी पंजीकृत करा सकता है |

टी बैग बनाने के लिए आवश्यक मशीनरी उपकरण एवं कच्चा माल:

Tea Bag making Business में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की बात करें तो इसके मुख्य रूप से दो अवयव होते हैं इनमे एक तो खुली चाय पत्तियां होती हैं दूसरा कच्चा माल खाद्य वर्ग से सम्बंधित प्लास्टिक, पेपर फ़िल्टर बैग होते हैं | उद्यमी को चाहिए की वह Tea bag का निर्माण करने के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त चाय की खरीदारी करे इसके लिए उद्यमी चाहे तो सीधे चाय की नीलामी में जाकर चाय खरीद सकता है या फिर किसी ऐसे चाय प्रसंस्कृत इकाई से चाय खरीद सकता है जो किफायती दरों पर उसे चाय बेच दे |

यह चाय अनेकों प्रकार जैसे दार्जीलिंग टी, ग्रीन टी, हर्बल टी में आती है | इसलिए उद्यमी को स्थानीय मांगों को आधार मानकर चाय का चुनाव करना चाहिए | Tea Bag बनाने वाली मशीन जिन्हें Tea bag making machine के नाम से जाना जाता है ये मार्केट में मैन्युअल से लेकर आटोमेटिक कार्यशैली के साथ उपलब्ध है शुरूआती दौर में उद्यमी चाहे तो किसी सस्ती सी Tea Bag making Business का चुनाव अपने व्यापार के लिए कर सकता है | हालांकि कच्चे माल के तौर पर उद्यमी को पैकेजिंग मटेरियल की भी आवश्यकता होगी |

ऐसे बहुत ही कम ख़र्च पर शुरू करे अपनी आइस फैकट्री

आइस फैक्ट्री स्थापित करने से पहले समबन्धित क्षेत्र में इसकी डिमांड का जायजा लेना अति आवश्यक है | क्योकि आइस को काफी लम्बे समय तक सामान्य तापमान में रख पाना संभव नहीं होता है | इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह उस क्षेत्र विशेष में स्थित होटल ढाबों,

आइस क्रीम पार्लर एवं जूस की दुकानों का मुआयना कर ले, क्योकि बर्फ का उपयोग कुल्फी बेचने वाले दुकानदारों, जूस बेचने वाले उद्यमियों एवं होटल ढाबों में अधिकतर तौर पर किया जाता है इसके अलावा शराब पीने के स्थानों जैसे Bar इत्यादि में भी गर्मियों में Ice यानिकी बर्फ की अच्छी खपत होती है |

बर्फ का उपयोग बहुत जल्दी से खराब होने वाली खाद्य पदार्थों जैसे समुद्री खाद्य पदार्थो, ताजे मांस, पोल्ट्री प्रोडक्ट्स, डेरी उत्पादों एवं फलों और सब्जियों के भंडारण हेतु भी किया जाता है | इन सभी उत्पादों को Ice के साथ लगभग दो तीन दिनों तक रखा जा सकता है | इस प्रकार का यह कारक इन उत्पादों को अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने में मदद करता है | फार्मास्यूटिकल, डिब्बा बंदी एवं फ्रीजिंग, केमिकल इत्यादि उद्योगों द्वारा भी ice अर्थात बर्फ का उपयोग किया जाता है |

आइस फैक्ट्री बिज़नेस-फाइनल

सामान्य भाषा में Ice Factory का अर्थ ऐसे स्थान से लगाया जाता है जहाँ बर्फ बनायीं जाती है | लेकिन यदि हम इसे थोड़े अच्छे ढंग से समझने की कोशिश करेंगे तो हम पाएंगे की एक ऐसा स्थान जहाँ Ice Manufacturing के लिए पूर्ण रूप से मशीनरी को Installed किया गया हो इसमें आइस मेकर से लेकर Refrigerated मशीनरी वो सभी प्रकार के उपकरण जो पानी को बर्फ के रूप में परिवर्तित करने में सहायक होते हैं लगे होते हैं |

यद्यपि आइस फैक्ट्री को उसके द्वारा उत्पादित उत्पाद के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है जैसे ब्लॉक आइस प्लांट, फ्लैक आइस प्लांट, tube, Slice इत्यादि | लेकिन सच्चाई यह है की इन सबको सामान्य बोल चाल की भाषा में बोला Ice Factory ही जाता है | एक ऐसा स्थान जहाँ विभिन्न मशीनरी एवं उपकरणों द्वारा पानी को बर्फ में परिवर्तित किया जाता है Ice Factory कहलाती है |

Market Potential in Ice Making Business:

जहाँ तक Ice का घरेलू तौर पर उपयोग में लाये जाने की बात है इसमें हम ऐसे परिवारों जिनके पास घरों में अपना रेफ्रीजिरेटर होता है को अलग रख सकते हैं | लेकिन जिन घरों में अपना रेफ्रीजिरेटर नहीं होता वे गर्मियों में अधिकतर तौर पर बर्फ अर्थात Ice का उपयोग मार्किट से खरीदकर करते हैं | घरेलु उपयोग होने के अलावा Ice के औद्योगिक उपयोग भी होते हैं |

व्यवसायिक संस्थानों जैसे होटल ढाबों, चाय की दुकानों, क्लब, जूस की दुकानों इत्यादि में भी आइस यानिकी बर्फ का उपयोग वस्तुओं को भंडारित करने में किया जाता है | संक्षेप में हम कह सकते हैं की बर्फ यानिकी आइस का उपयोग गर्मियों में हर तरह के भौगौलिक, आर्थिक, सामाजिक परिवेश शहरों, नगरों एवं ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर किया जाता है | इसलिए कहा जा सकता है की एक ऐसे नगर जिसकी कम से कम जनसँख्या 20 हज़ार तक हो में एक आइस फैक्ट्री की स्थापना करना बिज़नेस की दृष्टि से फायदेमंद हो सकता है |

Required Machinery and raw Materials for Ice Factory:

आइस फैक्ट्री में काम आने वाली कुछ प्रमुख मशीनरी की लिस्ट निम्नवत है |

  • हैवी ड्यूटी, डबल सिलेंडर अमोनिया रेसिप्रोकेटिंग कंप्रेसर |
  • Slipping induction meter, complete with starter and capacitor
  • Ammonia oil separator with flanges, oil drain value
  • Atmosphere type ammonia condensers having pipes
  • अमोनिया रिसीवर |
  • फ्रीजिंग टैंक |
  • रेफिरीजरेशन coil |
  • Brine agitator with induction meter
  • Low pressure rotary air blower
  • Condenser water circulating pump
  • Seam welded ice cans
  • Air fittings consisting of tubes brackets, elbows, hoses And supply headers
  • Thermos foam insulation false ceiling
  • Hand Hoist with crane ends; beam rail and can dump for Single can
  • First charge of refrigerant & salt
  • हाइड्रोमीटर, थर्मामीटर, टूल किट इत्यादि |
  • Ice Factory में मुख्य रूप से काम आने वाला Raw Materials पानी अर्थात water है इसके
    अलावा अमोनिया गैस एवं नमक को भी कच्चे माल के रूप में उपयोग में लाया जाता है |

Manufacturing Process of Ice:

Ice manufacturing process में Cooling Coil से धीमे तापमान में अमोनिया गैस निकलती है, और दबाव के चलते इसका तरल में संकुचन हो जाता है | इसके बाद इसे फ्रीजिंग टैंक में लगे Cooling Coil के माध्यम से पास कराया जाता है | अमोनिया में कम उबलते बिंदु के कारण वह इसका आकार तरल से वाष्प में परिवर्तित कर देता है और कंडेस्नर की साइड में इसे गाढ़ा करते जाता है टैंक में 30% तक नमक का खारापन रहता है |

टैंक में समान रूप से तापमान बनाये रखने के लिए ठन्डे खारे को Agitation के माध्यम से टैंक में फैलाया जाता है | आर्द्रता का तापमान को कम से कम 15 F तक लाना होता है यह प्रक्रिया पूर्ण होने में 24 घंटे तक का समय ले सकती है | जब आर्द्रता कार्यशील तापमान पर पहुँच जाती है तो Ice Cans में पानी भर लिया जाता है और इन Ice Cans को Brine Tank के अन्दर इस तरह से रख दिया जाता है ताकि आर्द्रता का स्तर Ice Cans के स्तर से नीचे रहे |

पानी की उच्च हिमांक क्षमता होने के कारण यह 30 F तापमान में ही जाम जाता है, पानी को सपष्ट रूप से ज़माने के लिए Ice Cans में थोड़ी बहुत हवा पास करायी जाती है | यह प्रक्रिया पूर्ण होने में लगभग 18 घंटे तक का समय ले सकती है हालांकि इसमें लगने वाला समय बर्फ (Ice) की मात्रा के अनुसार अंतरित हो सकता है |

मारुति सजुकी जल्द ही पेश करेगी ALTO से भी छोटी कार, कीमत नैनो से भी कम

देश की हर दूसरी कार की विक्रेता मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने दो दशकों से अधिक समय में भारत में पहली बार अपनी पहली एंट्री लेवल कार पेश करने की योजना बनाई है. इसकी कीमत अल्टो से कम भी होगी, जिसे हर आम व्यक्ति ख़रीद सकेगा ।

कंपनी को लगता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में ऐसे वाहनों की मांग बढ़ सकती है.नैनो के बाद, मारुति एक ऐसी कार पेश करना चाहती है जो नैनो की तुलना में अधिक किफायती हो.

भारत में बनाई गई यह कार, कोड-नामित वाई 1 के रोहतक में कंपनी के नए अनुसंधान और विकास केंद्र में बन रही है. मिंट में छपी एक खबर बताती है कि मारुति का नया उत्पाद में 800 सीसी और 1,000 सीसी के बीच पेट्रोल इंजन के साथ पेश होगा. हालांकि 2020 विनियामक मानदंडों के साथ इसे बाजार में लाना बड़ी चुनौती होगी.

इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि कार भारत में नया बेंचमार्क स्थापित कर सकती है. हालांकि अभी तक कार के आकार और कीमत का खुलासा नहीं हो पाया है. हालांकि मारुति सुजुकी के प्रवक्ता ने भविष्य के उत्पादों और प्रौद्योगिकी पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. मारुति की नई एंट्री लेवल कार को पेश करने की उस वक्त हो रही है. जब ऐसी छोटी कारों का बाजार हिस्सा घट रहा है.

कुल यात्री वाहनों की बिक्री में अल्टो और इयोन जैसी छोटी कारों का हिस्सा 31 मार्च 2018 को समाप्त वित्त वर्ष में 35 फीसदी से घटकर 18 फीसदी रह गया है. टाटा की नैनो की असफलता को भी इससे जोड़ कर देखा जा सकता है, जो अब लगभग बंद होने की कगार पर है.

5100 रु. में मिल रहा है 15,600 रु. का स्‍मार्टफोन, 67% तक है डिस्‍काउंट

इस वक्‍त स्‍नैपडील, टाटा क्लिक, पेटीएम मॉल, फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म पर स्‍मार्टफोन पर अच्‍छा डिस्‍काउंट मिल रहा है। आप 67 फीसदी छूट के साथ 16000 का स्‍मार्टफोन केवल 5000 रुपए में खरीद सकते हैं।

वहीं फ्लिपकार्ट, अमेजन पर चल रही सेल के चलते एक्‍सचेंज ऑफर और पेटीएम मॉल पर कैशबैक की भी सुविधा है। आइए आपको बताते हैं कि कौन सा ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म मार्केट से कितने सस्‍ते में स्‍मार्टफोन उपलब्ध करा रहा है

अमेजन

अमेजन पर इस वक्‍त प्राइम मेंबर्स के लिए अमेजन प्राइम सेल चल रही है। इसके तहत आप 30 फीसदी की छूट पर स्‍मार्टफोन खरीद सकते हैं।

साथ ही एक्‍सचेंज ऑफर यानी पुराने फोन के बदले नया फोन लेने पर भी आपको डिस्‍काउंट भी दिया जा रहा है, जो 14000 रुपए तक है। वहीं अगर आप प्राइम मेंबर नहीं हैं तो भी अमेजन पर स्‍मार्टफोन्‍स पर 30 फीसदी तक का डिस्‍काउंट मौजूद है।

ब्रांड- ऑनर, मोटोरोला, सैमसंग, Mi, जियोनी, एप्‍पल, इंटेक्‍स, लेनोवो, माइक्रोमैक्‍स, वन प्‍लस आदि

फ्लिपकार्ट

फ्लिपकार्ट पर इस वक्‍त बिग शॉपिंग डेज सेल चल रही है, जो 19 जुलाई तक रहेगी। इस सेल के चलते फ्लिपकार्ट स्‍मार्टफोन्‍स पर 39 फीसदी तक का डिस्‍काउंट दे रही है।

आपके पास 70000 रुपए वाला पिक्‍सल 2 केवल 42999 रुपए में और 17900 रुपए वाला सैमसंग गैलेक्‍सी ऑन नेक्‍स्‍ट केवल 10900 रुपए में खरीदने का मौका है। इसके अलावा फ्लिपकार्ट पर भी इस सेल के तहत एक्‍सचेंज ऑफर मौजूद हैं, जिसमें आप 20,000 रुपए तक का डिस्‍काउंट पा सकते हैं।

ब्रांड- सैमसंग, एप्‍पल, मोटोरोला, माइक्रोमैक्‍स, पैनासोनिक, Mi, हेयर, ऑनर, आईबॉल आदि

स्‍नैपडील

  • यहां आपको 15599 रुपए वाला LG Spirit H442 (Black, 8GB) – 1GB RAM स्‍मार्टफोन केवल 5100 रुपए में मिल जाएगा।
  • छूट- 67% तक
  • ब्रांड- एप्‍पल, ब्‍लैकबेरी, जियोनी, HTC, LG, माइक्रोमैक्‍स आदि

टाटा क्लिक

  • छूट- 57% तक
  • ब्रांड- जियोनी, लेनोवो, आसुस, कूलपैड, एचटीसी, ऑनर, इंटेक्‍स, हुआवेई, लाइफ, माइक्रोमैक्‍स, ओप्‍पो आदि

पेटीएम मॉल

  • छूट- 47% तक
  • कैशबैक- 9500 रुपए तक
  • ब्रांड- सैमसंग, मोटोरोला, वीवो, ओप्‍पो, र्का‍बन, लेनोवो, एप्‍पल, एलजी, ऑनर आदि

10 से 25 लाख में खरीद सकते हैं प्‍लॉट और फ्लैट, सरकारी बैंक कर रहे नीलामी, दिल्‍ली सहित 3 राज्‍यों में हैं ऑप्‍शन

इंडियन ओवरसीज बैंक सहित 3 बैंकों ने लोन न लौटाने वाले लोगों की प्रॉपर्टी को कब्‍जे में लेकर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की है। ये बैंक दिल्‍ली सहित 3 राज्‍यों में प्‍लॉट व फ्लैट की नीलामी कर रहे हैं। ई-नीलामी की इस प्रक्रिया में कोई भी भाग ले सकता है।

दिलचस्‍प बात यह है कि इन प्रॉपर्टी का रिजर्व प्राइस 10 से 25 लाख रुपए तक है। मात्र 10 फीसदी अर्नेस्‍ट मनी डिपॉजिट कर कोई भी व्‍यक्ति इस नीलामी में अपनी बोली लगा सकता है।

दिल्‍ली में 16 लाख में घर

इंडियन ओवरसीज बैंक द्वारा भोगल, जंगपुरा स्थित मौजा अलीगंज में एक घर की नीलामी की जा रही है। यह एक बेसमेंट है, जिसका साइज 52.5 वर्ग गज है। इसका रिजर्व प्राइज 16.60 लाख रुपए रखा गया है। आपको कम से कम 50 हजार रुपए अधिक की बोली लगानी होगी और अर्नेस्‍ट मनी डिपॉजिट 1.70 लाख रुपए है।

अगर आप बोली में भाग लेना चाहते हैं तो आपको 26 जुलाई तक ऑनलाइन एप्‍लीकेशन सबमिट करनी होगी। बोली 27 जुलाई को दोपहर 11 से 1 बजे के बीच लगाई जाएगी। अगर आप बोली लगाने चाहते हैं तो आप http://iob.foreclosureindia.com पर सबमिट कर सकते हैं।

20 लाख में दिल्‍ली में फ्लैट

इंडियन ओवरसीज बैंक दिल्‍ली के नरेला स्थित डीडीए फ्लैट की नीलामी कर रहा है। सेक्‍टर बी-2 स्थित इस फ्लैट का साइज 452 वर्ग फुट है। फ्री होल्ड एलआईजी फ्लैट का रिजर्व प्राइस 19.71 लाख रुपए रखा गया है।

इसकी नीलामी 27 जुलाई को सुबह 11 से दोपहर 1 बजे के बीच होगी। बोली में शामिल होने के लिए आपको 26 जुलाई पांच बजे तक अप्‍लाई करना होगा। आप ई ऑक्‍शन के लिए http://wwe.iob.in/e-auctions.aspx पर अप्‍लाई कर सकते हैं।

दिल्‍ली में 22.50 लाख में 84 गज का प्‍लॉट

डेट रिकवरी ट्रिब्‍यूनल, दिल्‍ली के कैलाश पुरी स्थित नसीरपुर गांव में लगभग 83.61 वर्ग मीटर का प्‍लॉट की नीलामी कर रहा है। इसका रिजर्व प्राइस 22.50 लाख रुपए रखा गया है। नीलामी 13 अगस्‍त दोपहर 3 से 4 बजे के बीच होगी।

एप्‍लीकेशन स‍बमिट कराने की डेडलाइन 10 अगस्‍त 5 बजे तक रखी गई है। अगर आप एप्‍लीकेशन सबमिट करना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें।https://bankauctions.in/listing-details/land-at-revenue-estate-of-village-nasirpur-kailashpuri-new-delhi/

यहां मिल रहा है 11 लाख में प्‍लॉट

इंडियन ओवरसीज बैंक, मंडी गोविंद गढ़ में नसराली गांव में 2 बिसवा साइज के प्‍लॉट की नीलामी कर रहा है। इसका रिजर्व प्राइस 10.93 लाख रुपए रखा गया है। इसकी नीलामी 13 अगस्‍त को 11 से 1 बजे के बीच होगी। 12 अगस्‍त 5 बजे तक अप्‍लाई करना होगा। आपको अपनी बिड  http://iob.foreclosureindia.com पर करनी होगी।

24 लाख में 215 वर्ग मीटर का प्‍लॉट

कॉरपोरेशन बैंक द्वारा महाराष्‍ट्र के सांगली जिले में मिराज इलाके में 215.30 वर्ग मीटर का प्‍लॉट की नीलामी की जा रही है। इसका रिजर्व प्राइज 23.82 लाख रुपए रखा गया है। ऑक्‍शन का टाइम 20 अगस्‍त को 11.45 बजे से लेकर 1.15 बजे तक का रखा गया है। जबकि आप 18 अगस्‍त 5 बजे तक एप्‍लीकेशन सबमिट कर सकते हैं।

इसका लिंक है – https://bankauctions.in/listing-details/plot-at-parshwanath-jain-mandir-kaman-dhamani-road-sangli-tal-miraj-district-sangli/

ठेले पर पकौड़े बेचने वाला चांद बिहारी बन गया करोड़पति, पटना में खड़ा किया 20 करोड़ का कारोबार

आमतौर पर सुनने को मिलता है कि मेहनत का फल मीठा होता है। इस कहावत को चरितार्थ किया है चांद बिहारी अग्रवाल ने। परिवार के भरण-पोषण के लिए कभी सड़कों पर पकौड़े और फुटपाथ पर साड़ियां बेचने वाले चांद बिहारी आज पटना के एक जाने-माने चांद बिहारी अग्रवाल Gold Jewellery शॉप के मालिक हैं।

जिसका सालाना टर्नओवर 20 करोड़ रुपए है। हालांकि उनको इस मुकाम तक पहुंचने में पांच दशक लग गए। इसके साथ ही वो सैंकड़ों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

ठेले पर बेचे पकौड़े

चांद बिहारी ने बताया कि वह जिंदगी के शुरुआती दिनों को कभी भूल नहीं सकते। बचपन में हमने काफी मुश्किलों का सामना किया। उनके पिता सट्टा लगाते थे। सट्टेबाजी में पिता ने बहुत पैसे कमाए भी। लेकिन भाग्य हमेशा एक जैसा नहीं रहता। एक दिन पिताजी सट्टेबाजी में सारे पैसे हार गए और घर की हालत खराब हो गई।

घर की खस्ताहाल के चलते वो कभी स्कूल नहीं गए। 10 साल के होने पर घर की जिम्मेदारी में हाथ बटाने के लिए चांद बिहारी ने ठेले पर पकौड़े बेचे। 100 रुपए कमाने के लिए वह 12 से 14 घंटे काम करते थे, ताकि घर को रोटी नसीब हो सके।

300 रु मंथली सैलरी की मिली जॉब

12 वर्ष की उम्र में चांद बिहारी को जयपुर में एक साड़ी शॉप में 300 रुपए मासिक वेतन की नौकरी मिली। यह नौकरी उनके बड़े भाई ने दिलाई थी। वह बताते हैं कि उस समय के हिसाब से सैलरी अच्छी थी और हम जैसे गरीब परिवार के लिए इतना काफी था।

एक डकैती ने कर दिया कंगाल

चांद बिहारी ने बड़े भाई की शादी में मिले गिफ्ट से 5,000 रुपए बचाए। इस बचत से उन्होंने 18 रुपए प्रति साड़ी के हिसाब से कुछ साड़ियां खरीद जयपुर से पटना पहुंच गए। फिर यहां उन्होंने साड़ी बेचने का काम शुरू किया।

साड़ी का बिजनेस अच्छा चल रहा था और महीने बिक्री 80,000-90,000 रुपए तक पहुंच गई थी। लेकिन उनके दुकान में डकैती हो गई और उसी समय उनकी शादी हुई थी। उनके दुकान से 4 लाख रुपए के सामान की चोरी हुई थी। इन दोनों वजहों से वह एक बार फिर उसी राह पर खड़े हो गए।

रत्न ने चमकाई किस्मत

साड़ी का बिजनेस खत्म होने के बाद चांद बिहारी ने अपने बड़े भाई के सहयोग से रत्न बेचने में हाथ आजमाया। उन्होंने घूम-घूम कर रत्न बेचे और करीब 500 दुकानों को संपर्क किया। रत्न बेचकर उन्होंने 10 लाख रुपए जमा किए और इस जमा पूंजी से उन्होंने 2002 में 350 वर्गफुट की शॉप में चांद बिहारी अग्रवाल ज्वैलरी हाउस की नींव रखी। जिसका सालाना टर्नओवर 20 करोड़ रुपए है।

अगर आपकी कार में भी रहती है बदबू तो अपनाये ये 5 तरीके, खुशबू से महकेगी आपकी कार

आजकल लाइफ इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि लोगों की पर्सनल लाइफ कहीं न किसी डिस्टर्ब हो रही है, लोगों के पास खाना-खाने का भी टाइम नहीं है, लोग अपनी कार में ही खाना-पीना करते हैं,

कई बार कार में खाना कार में ही रख दिया जाता है और सफाई तक करने का समय नहीं होता जिसकी वजह से कार में बदबू आने लगती है ऐसे में कई बार दोस्तों के सामने शर्मिदा भी होना पड़ता है। कार में बदबू आने के कई और भी कारण होते हैं। ऐसे में हम आपको 5 ऐसे तरीके बता रहे हैं जिनकी वजह से आपकी कार में खुशुबू रहेगी।

अपनी कार को रखें साफ: कोशिश कीजिये की आप अपनी कार को रोज साफ करें और कार में किसी भी तरह का कोई कचरा न रहने दें। क्योकिं अक्सर कार की ठीक से सफाई नहीं हो पाती और ड्रिंक केन्स या रेपर्स से कार में गंध पैदा होती है जिसकी वजह से कार में रखा परफ्यूम भी ठीक से काम नहीं कर पाता।

गंदे जूते पहन कर कार में न बैठे: हफ्ते में 1 बार अपनी कार के कार्पेट और सीट्स को वैक्यूम करें। ऐसा करने से जमी हुई मिट्टी निकल जाएगी। इतना ही नहीं गंदे जूते लेकर भी कार में न बैठें इससे इन्फेक्शन के साथ स्मेल भी कार में पैदा होने लती है।

अच्छी क्वालिटी का कार परफ्यूम रखें: इस समय मार्किट में कई अच्छी क्वालिटी के परफ्यूम आसानी से मिल जाते हैं ऐसे में आप अपनी कार में सॉफ्ट स्मेल वाला परफ्यूम खरीद सकते हैं। आप स्प्रे वाला परफ्यूम भी रख सकते हैं। स्प्रे वाले परफ्यूम को आप कार के कोने-कोने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

स्मोकिंग न करें: अक्सर कार में लोग स्मोकिंग करते नजर आते हैं ऐसे में कार में बदूब रहती है। ऐसे में कोशिश कीजिये कि कार में बिलकुल भी स्मोकिंग न करें।

ओडोर्स का इस्तेमाल एसी सिस्टम की तरफ: कार में ओडोर्स का इस्तेमाल एसी सिस्टम की तरफ करना चाइये क्योकिं ज्यादातर स्मेल यहीं से आती है। बीच-बीच और लगातर ऐसा करने से बाहर से आने वाली बदबू को मिटाया जा सकता है।

14 बार फेल होने के बाद खड़ी की कंपनी, अमेरिका भी हो गया मुरीद, ऐसी है ShareChat की कहानी

बार-बार असफलता के बाद की जाने वाली कोशिशें सफलता की नई कहानी गढ़ती हैं। ऐसा ही भारत के तीन दोस्तों के साथ हुआ, जिनके 14 प्रोजेक्ट फेल हुए और फिर उनके हाथ ऐसी सफलता लगी कि इंडियंस ही नहीं करोड़ों अमेरिकी भी उसके मुरीद हो गए।

हम IIT में पढ़ाई कर चुके तीन दोस्त भानू, फरीद और अंकुश की बात कर रहे हैं, जिन्होंने कई कोशिशों के बाद ShareChat की शुरुआत की। इसके भारत ही नहीं अमेरिका में भी करोड़ों सब्सक्राइबर हैं। इसकी सफलता इस बात से भी जाहिर होती है कि इसे फेसबुक और वाट्सऐप का इंडियन वर्जन बताया जा रहा है।

क्या है शेयरचैट

शेयर चैट फ्री एंड्रायड ऐप है जो 10 इंडियन भाषा में है। यह अंग्रेजी में नहीं है, बल्कि इसके प्लेटफॉर्म पर भोजपुरी, छत्तीसगढ़ी जैसी भाषाओं में भी पोस्ट शेयर कर सकते हैं। शेयर चैट की शुरुआत साल 2015 में हुई थी।

उनके करीब 40 लाख एक्टिव यूजर्स हैं जो रोजाना 2 लाख पोस्ट डेली शेयर करते हैं। इसमें गुड मॉर्निंग मैसेज, जोक्स और कोट्स शामिल हैं। उनके पोस्ट में वीडियो, न्यूज आदि भी शामिल रहता है। उनके पास 36 करोड़ रुपए की फंडिंग मिल चुकी है। अब वह दूसरे राउंड की फंडिंग जुटाने की योजना बना रहे हैं।

तीन दोस्तों ने शुरू किया शेयर चैट

शेयर चैट को 3 दोस्तों ने मिलकर शुरू किया था। 25 साल के फरीद ने अपने आईआईटी के दोस्त भानु सिंह और अंकुश सचदेवा के साथ इसे शुरू किया था। वह इंडिया का अपना सोशल नेटवर्क खड़ा करना चाहते थे।

शेयरचैट में भानू प्रताप सिंह सीटीओ, फरीद अहसाान सीईओ और अंकुश सचदेवा चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर की पोस्ट पर हैं। अब शेयर चैट की 50 लोगों की टीम है जिसमें से 18 डेवलपर्स हैं। शेयरचैट का ऑफिस बेंगलुरू में है। उन्होंने शेयरचैट साल 2015 में शुरू किया था।

फेसबुक है बड़ा कॉम्पिटिटर

इंडिया में फेसबुक के करीब 24 करोड़ एक्टिव यूजर्स हैं और 24 करोड़ यूजर्स अमेरिका में है। तो क्या फेसबुक उनके सपनों को खत्म कर सकता है। इस पर उन तीनों का मानना था कि फेसबुक के पास लोकल लैग्वेंज में बहुत अधिक ऑप्शन नहीं है इस वजह से वह सरवाइव कर सकते हैं।

17 में से 14 प्रोजेक्ट हुए फेल

उन तीनों को फोर्ब्स ने अंडर 30 लिस्ट में भी जगह मिली है। वेे तीनों बीते छह साल से काम कर रहे हैं। वह पहले बिजनेस पार्टनर बने और उसके बाद उनकी दोस्ती गहरी होती गई। उन तीनों ने एक साथ 17 प्रोजेक्ट पर काम किया, जिनमें से 14 फेल हो गए। 15वें प्रोजेक्ट पर उनका एक प्लान चल निकला। उससे पहले उन्होंने एक ‘चैट फाइट’ शुरू किया, जिसमें वह इस पर बहस करवाना चाहते थे कि बॉलीवुड में कौन नंबर 1 खान है लेकिन उनका ये प्रोजेक्ट भी नहीं चला।

चैट फाइट ने दिया आइडिया

इसी चैट फाइट के दौरान उन्हें 32,000 ऐसे लोग मिले जो सिर्फ अपनी लोकल लैंग्वेज में चैट करना चाहते थे। उन्होंने देखा कि मिदनापुर में रिटायर्ड प्रोफेसर एक ऐसा प्लेटफॉर्म खोज रहे थे जहां वह अपनी भाषा में कम्यूनिकेट कर सकेंं। उनके जैसे लाखों की संख्या में लोग थे जो अपनी भाषा में बात करना चाहते थे। इंडिया में लोकल लैंग्वेज के प्लेटफॉर्म की डिमांड भी बढ़ रही है।

Jio से मिला फायदा

जियो की शुरुआत के साथ ही फ्री डेटा और सस्ते एंड्रॉयड फोन के आने से इंटरनेट की दुनिया में पहली बार आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। रूरल और सेमी अर्बन लोगों के लिए लोकल लैंग्वेज में कंटेंट उपलब्ध नहीं था और इस ग्रुप में लोकल लैंग्वेज की डिमांड लगातार बढ़ रही थी। तब 2014 में उन्होंने इंगलिश भाषा को ही हटा दिया। वह यूजर जेनरेटेड कंटेट सिस्टम बनाने लगे।

बनाया यूजर बेस्ड प्लेटफॉर्म

ऐसे लोग इंस्टाग्राम या ट्विटर, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर नहीं जाना चाहते क्योंकि इससे उन्हें जज होने का डर था कि वह किस तरह क कंटेंट कन्जयूम कर रहे हैं। शेयरचैट ने उन्हें ऐसा प्लेटफॉर्म दिया जहां वह बिना किसी डर के पोस्ट कर सकते हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर प्राइवेसी नहीं होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

ज्यादा तेजी से बढ़ेंगे हिंदी यूजर्स…

केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 तक इंडिया के 75 फीसदी लोग इंटरनेट यूज करने वाले होंगे। तब 2021 में अंग्रेजी से ज्यादा हिंदी में पढ़ने वाले यूजर्स ज्यादा होंगे। इसमें बंगाली और मराठी पढ़ने वालों की संख्या भी ज्यादा बढ़ेगी। इसी सर्वे को बेस मानकर तीनों दोस्तों ने अपनी स्ट्रैटजी बनाई।

छोटे शहरों में है ज्यादा शेयरचैट के यूजर्स

अभी उनके 70 फीसदी से ज्यादा यूजर्स12 से 25 साल और 70 साल से अधिक उम्र के हैं। इनमें से 86 फीसदी आबाजी टियर II और टियर III शहरों से है। उनका 5 फीसदी ऑडियंस बांग्लादेश, कनाडा और दुबई में भी है। रोजाना उनके करीब 35 लाख कंटेंट व्हाट्ऐप पर भी शेयर होते हैं।

जेब होगी नीचे, अब चला उल्टी जींस का अनोखा फैशन,देखें तस्वीरें

फैशन की दुनिया में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं. आजकल ये पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है कि फैशन आखिर है क्या? कई डिजाइनर बड़े ही अजीबोगरीब तरीके से कपड़े डिजाइन कर रहे हैं जिन्हें देखकर समझना थोड़ा मुश्किल होता है.

एक ब्रांड ने जींस को उल्टे तरीके से डिजाइन किया है. सोशल मीडिया पर जींस का ये उल्टा डिजाइन काफी सुर्खियों में हैं. आइए जानें, इस जींस में आखिर क्या खास है.

न्यूयॉर्क के CIE Denim नाम के एक ब्रांड ने हाई राइज जींस डिजाइन की है. ये जींस उल्टी तरह से डिजाइन की गई हैं.

इन जींस में बेल्ट और पॉकेट कमर के बजाए ऐड़ी की जगह है.

बता दें, इन जींस का डिजाइन अमेरिका की हॉरर वेब टीवी सीरीज ‘स्ट्रेंजर थिंग्स’ से प्रेरित है.

इन इनवर्टेड या अपसाइड डाउन डेनिम जींस को ‘Will’ नाम दिया गया है.

वहीं डबल बैक पैनल वाले डेनिम शॉर्ट्स का नाम ‘EI’ रखा गया है.

इसके अलावा कुछ इनवर्टेड जींस का नाम Lucas, Mike, Nancy और Maxine है.

इन डेनिम इनवर्टेड जींस की कीमत $ 495 यानी 33,905 के आस-पास है.

इन अपसाइड डाउन शार्ट्स की कीमत $ 385 यानी 26,370 बताई जा रही है.

इन इनवर्टेड जींस के डिजाइन सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं. कई लोग जींस के उल्टे डिजाइन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. आइए जानें, लोगों का क्या कहना है इन उल्टी तरह से डिजाइन की गईं जींस के बारे में…

एक यूजर ने ट्वीट किया, अपसाइड डाउन डेनिम शॉर्ट्स? दुनिया का अंत करीब है.

वहीं एक यूजर ने लिखा, मैं माफी चाहता हूं, लेकिन आपको ये देखना चाहिए.

भले ही इस जींस में 20 ग्राम फैब्रिक का इस्तेमाल किया गया है लेकिन इस जींस की कीमत 12,000-20,000 रुपए तक है.

इससे पहले ‘एक्सट्रीम कट आउट जींस’ खूब चर्चा में थी जिसमें सिर्फ कतरनें और जेब ही नजर आती हैं.