आखिरकार आज लॉन्च हो ही गई नई सैंट्रो , जाने कीमत और विशेषताए

Hyundai की बहुप्रतीक्षित कार सैंट्रो की आज ग्लोबल लॉन्चिंग हुई। कार की टॉल बॉय डिजाइन है। इसकी शुरुआती कीमत 3.89 लाख रुपए है, जो कि पेट्रोल और सीएनजी वेरियंट में उपलब्ध रहेगी। सैंट्रो पहले के मुकाबले बड़ी और मजबूत है। इसकी लॉन्चिंग के वक्त बॉलीवुड एक्टर शहरुख खान मौजूद रहे।

23 हजार से ज्यादा बुकिंग

सैंट्रो कार की 13 दिनों में 23500 प्रीबुकिंग हुई है। Hyundai ने इन कार के निर्माण पर 100 मिलियन डॉलर यानी 730 करोड़ का बजट खर्च किया है। कार सात एक्सटीरियर कलर में मौजूद रहेगी। इसमें पहली बार इंपीरियल बीज, डायना ग्रीन को शामिल किया गया है।

सैंट्रो की कीमत
TRIMS           PETROL         AMT          CNG

  • d-lite          3,89,900
  • Era               4,24,900
  • magna-     4,57,900      5,18,900     5,23,900
  • sportz         4,99,900    5,44,900    5,84,900
  • Asta             5,45,900

इंजन और सेफ्टी फीचर

कार पेट्रोल और सीएनजी वेरियंट में है। इसमें 1086 सीसी का इंजन है। इसका 1.1 लीटर का 4 Cylinder पेट्रोल इंजन 69ps/5500rpm का पॉवर जनरेट करेगा। इसका माइलेज 20.3 किमी. प्रति लीटर होगा। पेट्रोल वेरियंट मैनुअल के साथ ऑटोमेटिक होगा। हालांकि सीएनजी वेरियंट मैनुअल होगा।

सीएनजी वर्जन में 1.1 लीटर का 4 सिलेंडर इंजन 69ps और 5500rpm पॉवर उत्पन्न करेगी। इसका माइलेज 30.5 किमीं. प्रति लीटर होगा। कार में सेफ्टी फीचर के तौर पर ब्रेकिंग के लिए एबीएस तकनीक का प्रयोग किया गया है। ड्राइवर सीट के लिए एयरबैग होगा और रियर पार्किंग कैमरा होगा।

इंटीरियर

इंटीरियर में फोल्डेबल सीट, स्पेसियस ग्लोब बॉक्स, अफोर्डेबल रियर सीट समेत कई तरह के फीचर दिए गए हैं। कार में सुपीरियर एसी परफार्मेंस, इको कोटिंग टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है।

कार में 1,00,000 किलोमीटर की वारंटी और 3 साल की रोड साइड असिसटेंस सर्विस मिलेगी। इंटरनेटमेंट के लिए 17.64 सेमी. यानी 7 इंच की डिसप्ले स्क्रीन होगी। साथ ही इसमें स्मार्टफोन कनेक्टिविटी होगी। इसे Apple CarPlay और एंड्राइड और ब्लूटूथ से कनेक्ट किया जा सकेगा।

2 महीने कोर्स के बाद शुरू किया खेतीबाड़ी बिजनेस, अब हर महीने होती है एक लाख की कमाई

अब एग्रीकल्चर में करियर सिर्फ खेती-बाड़ी तक ही सीमित नहीं रह गया है। एग्रीकल्चर सेक्टर के बदले माहौल का परिणाम है कि अन्य सेक्टरों की ही तरह एग्रीकल्चर सेक्टर भी लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है।

किसानों की आमदनी बढ़ाने और एग्रीकल्चर को एक करियर के रूप में बनाने के लिए सरकार कुछ कोर्स भी कराती है जिसका फायदा उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले धन प्रकाश शर्मा ने भी उठाया। एग्रीकल्चर में बीएससी करने के बाद उन्होंने सरकार द्वारा कराए जा रहे कोर्स किया और आज वो हर महीने 1 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।

2 महीने के कोर्स ने बदली जिंदगी

धन प्रकाश शर्मा ने बातचीत में बताया कि उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में बीएससी किया है। एग्रीकल्चर में डिग्री लेने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में मार्केट की नौकरी लगी। नौकरी में उनको मन नहीं लगा और एक एग्रीकल्चर में अपना कुछ करने का विचार आया।

इसमें सरकार द्वारा चलाए जा रहे एग्री क्लिनिक एग्री बिजनेस सेंटर ने उनकी मदद की। उन्होंने दो महीने का कोर्स किया जिसके बाद उनकी जिंदगी बदल गई।उन्होंने 12 साल नौकरी की और बाद में 15 हजार की नौकरी छोड़ उन्होंने लो कॉस्ट फार्म मशीनरी की शुरुआत की।

21.5 लाख रुपए का लोन लिया

शर्मा ने लो कॉस्ट मशीनरी की शुरुआत करने लिए 21.5 लाख रुपए यूनाइटेड बैंक से लोन लिया। इसके बाद उन्होंने ‘नैपसैक स्प्रेयर’ की मैन्युफैक्चरिंग शुरू। यह एक स्प्रेयर मशीन है जिसके जरिए किसान के लिए केमिकल्स के छिड़काव में बहुत मददगार है।

3 महीने 5.5 लाख का हुआ नेट प्रॉफिट

3 महीने में 5.5 लाख रुपए का नेट प्रॉफिट इस बात का सबूत है कि उनके नैपसैक स्प्रेयर किसानों का मददगार साबित हुआ। वो किसानों के काम को आसान बनाने के लिए स्प्रेयर को रिडिजाइन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वो बैट्री चालित स्प्रेयर भी बनाए हैं जो किसानों की मेहनत को कम करता है।

3 साल में खड़ा किया 1 करोड़ का बिजनेस

धन प्रकाश ने 2015 में पशुपति एग्रोटेक की नींव रखी थी। तीन साल में ही उनकी कंपनी का टर्नओवर 1 करोड़ रुपए हो गया। इसमें से 10-12 फीसदी का प्रॉफिट हो जाता है। उनका बिजनेस 3-4 राज्यों में फैला है और उन्होंने अपने यहां 6 लोगों को रोजगार मुहैया करवाया है।

हजार रुपए से शुरू होता है प्रोडक्ट

उनके प्रोडक्ट्स की कीमत 1 हजार रुपए से शुरू होती और 3 हजार रुपए तक जाती है। उन्होंने एक स्प्रेयर डेवलप किया है जो ट्रैक्टर के साथ काम करता है जिसकी कीमत 36 हजार रुपए है।

बिजनेस बढ़ाने का है प्लान

धन प्रकाश अपने बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं। उनका कहना है कि वो सीड्स और पेस्टिसाइड्स के फील्ड में कदम रखना चाहते हैं। इसके अलावा लो कॉस्ट और एनर्जी इफिशन्ट्ली सोलर ड्रायर, सीड्स ड्रिल, मल्टीपर्सपस सिकलर्स, प्लांटर्स मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बढ़ा है।

सोमवार को देश की अलग-अलग मंडियों में इस भाव बिका बासमती

हरियाणा की मंडियों में अब पूसा 1509 का आम भाव 3000 रुपए हो चुका है। सोमवार को भी 1509 में तेजी बरकरार रही। कुछ मंडियों में यह 3100 रुपए तक भी बिक गया। वहीं दूसरी ओर बासमती 1121 में भी ग्राहकी मजबूत दिखी।

पूंडरी में 1121 3717 रुपए बिका तो जींद में यह 3700 रुपए बोला गया। 1121 का आम भाव अब 3625 रुपए हो गया है। पीबी 1 के भावों में स्थिरता है और ये 3000 हजार के आसपास टिका हुआ है।

पंजाब बासमती धान भाव,

पंजाब की फाजिल्का में सोमवार को बासमती 1121 का रेट 3281 रुपये क्विंटल रहा।पंजाब के अमृतसर में 1509 का शुरुआती भाव 3040 और परमल का 1550 से 1690 रहा। बुढलाडा में बासमती 1121 3350, पूसा 1509 2990 और डीबी 3050 रुपए बिका। फरीदकोट में बासमती 1121 3442 और 1509 3002 रुपए बिका।

हरियाणा बासमती धान भाव,

सोमवार को टोहाना में बासमती 1121 3500 रुपए और डीपी 1401 3100 रुपए बिका।रोहतक की बेरी मंडी में बासमती 1121 3600, पूसा 1509 3050 और शरबती 2315 रुपए बिका। खरखोदा में 1509 का भाव 3011 और पानीपत में 3041 रुपए क्विंटल रहा।

समालखा में बासमती 1121 3681 और 1509 का रेट 3061 रुपए रहा। अलेवा मंडी में 1509 का भाव सोमवार को 3095 रुपए और बासमती 1121 का भाव 3634 रुपए रहा। कैथल मंडी में बासमती 1121 3610 रुपए बिका। फतेहाबाद में बासमती 1121 का रेट 3400, पूसा 1509 का भाव 3120 और डीपी 1401 का रेट 3344 रुपए रहा।

सिरसा में पीबी 1 3085, 1509 3000 और डीपी 1401 3071 रुपए बिका। रानियां में पीबी वन 3031 रुपए बिका। ऐलनाबाद में पीबी 1 3170, डीपी 1401 3200 और 1509 3000 रुपए बिका। रतिया में पीबी 1 3045 रुपए क्विटल बिका।कैथल में बासमती 1121 3350 से 3685 रुपए तक बिका। 1509 का भाव 2950 से 3100 रुपए तक रहा। डीपी 3250 रुपए तक बिका।

उत्‍तर प्रदेश बासमती धान भाव,

यूपी की खैर मंडी में पूसा 1509 2900 ओर सुगंध 2431 रुपये बिका। राजस्थान की बूंदी मंडी में 2509 का भाव 2500 से 2961 ओर सुगंध का 2200 से 2400 रुपये रहा। नरेला में 1121 का रेट 3661, 1509 का 2981 ओर शरबती का 2260 रहा।

मध्‍यप्रदेश बासमती धान भाव,

मध्य प्रदेश की डबरा मंडी में पूसा 1509 2300 से 2700, सुगंध 1950 से 2200 रुपए बिका। आवक करीब 28 हजार बोरी रही। दतिया में 1509 का भाव 2480 से 2790 रुपए रहा। पिपरिया में पूसा 2905, 1509 2660 और बासमती 1121 2960 रुपए बिका। रायसेन में पीबी 1 का भाव 2700 से 3000 रुपए रहा।

बड़ी खबर: फ्री ऐप का गया जमाना, गूगल अब एक मोबाइल से वसूलेगा 2,937 रुपये

यह बात तो आप भी जानते हैं कि एंड्रॉयड फोन में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को गूगल फ्री में देता है। मोबाइल कंपनियों से एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए गूगल पैसे नहीं लेता, इसके बदले में मोबाइल कंपनियों को एंड्रॉयड फोन में गूगल के जीमेल, गूगल म्यूजिक, गूगल फोटोज, मैप्स आदि ऐप अनिवार्य से फोन के साथ ही देना होता है।

अभी कुछ महीने पहले ही गूगल पर इसी के लिए 5.1 बिलियन यूरो यानि करीब 344 अरब रुपये का जुर्माना भी लगा था। गूगल पर आरोप था कि उसने एंड्रॉयड फोन में अपने ऐप को जबरदस्ती इंस्टॉल करवाए हैं और गलत तरीके से सर्च इंजन को पहले के मुकाबले मजबूत बनाया है।

वहीं अब गूगल ने अपनी शर्तों में कुछ बदलाव किए हैं जिसके बाद वह मोबाइल कंपनियों से अपने ऐप के बदले पैसे लेगा। अल्फाबेट गूगल ने मोबाइल कंपनियों से अपने ऐप के लिए प्रति मोबाइल 40 डॉलर यानि करीब 2,900 रुपये वसूल करेगा।

गूगल की यह नई शर्त इसी महीने 29 अक्टूबर से लागू हो जाएगी यानि 29 अक्टूबर के बाद लांच होने वाले सभी एंड्रॉयड स्मार्टफोन और टैबलेट में ऐप के बदले हैंडसेट निर्माता कंपनियों को पैसे देने होंगे।

हालांकि गूगल की यह नई शर्त यूरोपियन देशों में लागू होगी ना कि भारत में। यह फीस अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग भी हो सकती है। गूगल प्ले-स्टोर, जीमेल, गूगल मैप्स जैसे ऐप के लिए पैसे लेने के बदले गूगल मोबाइल निर्माता कंपनियों को विज्ञापन से होने वाली कमाई का एक हिस्सा देगा। गूगल अपने क्रोम ब्राउजर जैसे ऐप में विज्ञापन दिखाएगा।

बता दें कि इसी साल जुलाई में गूगल पर यूरोपियन यूनियन ने 5.1 बिलियन यूरो यानि करीब 344 अरब रुपये का जुर्माना लगाया था जो कि गूगल के इतिहास में उसपर लगने वाला अबतक का सबसे बड़ा जुर्माना था।

गूगल के खिलाफ अप्रैल 2015 में फेयरसर्च’ नाम के एक बिजनेस ग्रुप ने यूरोपियन यूनियन में शिकायत की थी और कहा था कि गूगल अपने ऐप के जरिए एंड्रॉयड स्मार्टफोन में अधिकार जमा रहा है। इस ग्रुप में नोकिया, माइक्रोसॉफ्ट और ओरेकल जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।

यूरिया, शैंपू और रिफाइंड से इस तरह बनती हैं रसगुल्ले, मिल्क केक जैसी कई नकली मिठाइयां

त्योहारों के साथ ही शादियों का सीजन भी शुरू हो गया है। ऐसे में दूध, घी, मावा और मिठाइयों की खपत सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सब आपको शुद्ध मिल पाता है? अगर आपको मिलावट की आशंका होती है तो क्या आप कहीं शिकायत कर पाएंगे?

दूध में यूरिया, मावे में आलू और मिल्क केक में मिलाते हैं गीला ग्लूकोज

  •  दूध, यूरिया, शैंपू और रिफाइंड आइल मिलाकर सेंथेटिक दूध तैयार किया जाता है। ऐसा 10 किलो दूध 200 रुपए में तैयार हो जाता है। जबकि असली दूध 50 से 60 रुपए प्रति लीटर है।

  • मावा- सिंथेटिक दूध, सूजी, तेल और रंगों का इस्तेमाल करके नकली मावा बनता है। आलू, शंकरकद की भी मिलावाट की जाती है। 1 किलो नकली मावा बनाने पर 60 से 70 रुपए खर्च आता है। बाद में असली बता 200 से 300 रुपए प्रति किलो तक बेचा जाता है।
  •  रसगुल्ला- सिंथेटिक दूध, स्टार्च (आरारोट) का उपयोग करके रेडीमेड रसगुल्ला तैयार किया जाता है। होलसेल रेट में 80 रुपए प्रति किलो बिकता है। रिटेल में 200 रुपए में बेचा जाता है।
  •  मिल्क केक- सिंथेटिक दूध, सूजी, गीला ग्लूकोज (वजन बढ़ाने के लिए ) से नकली मिल्क केक तैयार करते हैं। होलसेल में कीमत 140 रुपए प्रति किलो होती है। बाद में दुकानदार दोगुनी कीमत पर बेचते हैं।

नकली मिल्क केक और रसगुल्ला बनाने के अवैध कारखाने नांगलोई, निहाल विहार और पूर्वी दिल्ली के करावलनगर इलाके में चल रहे हैं। इसमें संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों की मिलीभगत है। इसलिए इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।

मिलावटी मिठाई खाने से फूड प्वॉइजिनिंग, उल्टी-दस्त, बुखार की समस्या हो सकती है। ज्यादा सीरियस होने पर शरीर में पानी की कमी होने से समस्या बढ़ सकती है। इलाज में देरी से जान भी जा सकती है। मिठाई में केमिकल और दूध में साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग ज्यादा होने से कैंसर की बीमारी तक हो सकती है।

क्या है एफएसएसएआई सर्टिफिकेट

एफएसएफएआई (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी) सर्टिफिकेट में खाने-पीने का व्यवसाय करने वालों को 14 डिजिट का नंबर जारी किया जाता है। इसे अथॉरिटी जारी करती है। इसके लिए आवेदन में हाइजेनिक सहित सभी जरूरी जानकारी भरकर देना होता है।

इसके बाद स्थानीय एजेंसी के अधिकारी उसका निरीक्षण कर रिपोर्ट फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी को देते है। इसके आधार पर रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस होता है। इसमें खाद्य व्यवसाय, स्टोरेज या टांसपोर्टेशन करने वाले के लिए जरूरी है।

जुर्माने और जेल का है प्रावधान

खाद्य सुरक्षा मानक कानून-2006 के तहत मिलावटी खाद्य सामग्री की ब्रिकी पर सेक्शन 59 के तहत अधिकतम 7 साल की करावास की सजा और 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।

अमृतसर रेल हादसा: तो क्या झूठ बोल रहा है ट्रेन का ड्राइवर, चश्मदीदों से जानिए क्या हुआ था दशहरे की उस रात

दशहरे के दिन जोड़ा फाटक पर हुए ट्रेन हादसे को लेकर लोको पायलट ने बयान दिया था कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने गाड़ी पर पथराव किया था। जिसके बाद वह ट्रेन में बैठे पैसेंजर की सुरक्षा को देखते हुए धीरे-धीरे ट्रेन को आगे बढ़ाता रहा। जबकि चश्मदीद इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ड्राइवर सरासर झूठ बोल रहा है।

ऐसा कुछ नहीं हुआ था, ट्रेन तेज रफ्तार से वहां से गुजरी थी। शुक्रवार को हुए इस हादसे में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 62 हो गया है, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हैं। अब तक 36 लोगों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।

क्या था ड्राइवर का बयान ?

लोको पायलट अरविंद ने अपने स्टेटमेंट में बताया, ‘मैंने 19 अक्टूबर को शाम 5 बजे ट्रेन नंबर डीपीसी 11091 का चार्ज लिया और जालंधर के प्लेटफॉर्म 1 से 5:10 पर लेकर चला। शाम 6:44 बजे मानांवाला पहुंचकर 6:46 बजे येलो सिग्नल और ग्रीन सिग्नल मिलने पर अमृतसर के लिए चला। मानांवाला और अमृतसर के बीच गेट सं. 28 का डिस्टेंट और गेट सिग्नल ग्रीन पास किया। इसके बाद गेट सं. 27 के अंतराल और दोनों गेट सिग्नल को डबल येलो में लगातार हॉर्न बजाते हुए पास किया।’

घटनास्थल पर पहुंचने की स्थिति पर अरविंद का कहना है, जैसे ही ट्रेन केएम नंबर 508/11 के करीब पहुंची तो सामने से गाड़ी सं. 13006 डीएन आ रही थी। अचानक लोगों का हुजूम ट्रैक के पास दिखाई दिया, तो मैंने तुरंत हॉर्न बजाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया।

इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर भी मेरी गाड़ी की चपेट में कई लोग आ गए। गाड़ी की स्पीड लगभग रुकने के करीब थी तो बड़ी संख्या में लोगों ने मेरी गाड़ी पर पथराव शुरू कर दिया। मैंने मेरी गाड़ी में बैठी सवारियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन को आगे बढ़ाया और होम सिग्नल की स्थिति में अमृतसर स्टेशन पर आ गया। इसकी सूचना मैंने सभी संबंधित अधिकारियों को भी दे दी।’

चश्मदीदों का क्या कहना है?

अमृतसर के वार्ड नंबर 46 के पार्ष शैलेंद्र सिंह शली का कहना है, मैं तब घटनास्थल पर ही था। ट्रेन रोकना तो दूर उसकी स्पीड भी कम नहीं हुई ।ऐसा लगा कि लोको पायलट तो हमें भी कुचलते हुए निकल जाता। सेकंडों में ट्रेन हमारे पास से गुजर गई।

उन्होंने कहा, क्या लॉजिकली ऐसे में हमारे लिए ट्रेन पर पत्थर फेंकना मुमकिन है। वो भी तब जब हमारे आसपास मृत और जख्मी लोग पड़े हों। पायलट झूठ बोल रहा है। वहीं, मौके पर मौजूद परमजीत सिंह का कहना है, ट्रेन इतनी तेज रफ्तार में थी कि कुछ ही सेकंड में हादसा हो गया।

इंटरनेट पर सैकड़ों वीडियो हैं जिनसे पता चलता है कि ट्रेन कितनी स्पीड से गुजरी थी। हम केवल लोगों की चीखें ही सुन सकते थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, घटनास्थल मोहकमपुरा पुलिस थाना क्षेत्र में है। वहां के एसएचओ सुखमिंदर सिंह का कहना है कि जहां तक उनकी जांच में पता चला है कि ट्रेन के गुजरने के दौरान किसी तरह का पथराव नहीं हुआ था।

राजस्थान के किसान ने अपने गांव को बना दिया मिनी इजरायल , सालाना 1 करोड़ की कमाई

खेती किसानी के मामले में इजरायल को दुनिया का सबसे हाईटेक देश माना जाता है। वहां रेगिस्तान में ओस से सिंचाई होती है, दीवारों पर गेहूं, धान उगाए जाते हैं, भारत के लाखों लोगों के लिए ये एक सपना ही है। इजरायल की तर्ज पर राजस्थान के एक किसान ने खेती शुरू की और आज उनका सालाना टर्नओवर सुन कर आप उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाएंगे।

दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर दूर राजस्थान के जयपुर जिले में एक गांव है गुड़ा कुमावतान। ये किसान खेमाराम चौधरी (45 वर्ष) का गांव है। खेमाराम ने तकनीकी और अपने ज्ञान का ऐसा तालमेल भिड़ाया कि वो लाखों किसानों के लिए उदाहरण बन गए हैं। आज उनका मुनाफा लाखों रुपए में है। खेमाराम चौधरी ने इजरायल के तर्ज पर चार साल पहले संरक्षित खेती (पॉली हाउस) करने की शुरुआत की थी। आज इनके देखादेखी आसपास लगभग 200 पॉली हाउस बन गये हैं, लोग अब इस क्षेत्र को मिनी इजरायल के नाम से जानते हैं। खेमाराम अपनी खेती से सलाना एक करोड़ का टर्नओवर ले रहे हैं।

सरकार की तरफ से इजरायल जाने का मिला मौका

राजस्थान के जयपुर जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर गुड़ा कुमावतान गांव है। इस गाँव के किसान खेमाराम चौधरी (45 वर्ष) को सरकार की तरफ से इजरायल जाने का मौका मिला। इजरायल से वापसी के बाद इनके पास कोई जमा पूंजी नहीं थी लेकिन वहां की कृषि की तकनीक को देखकर इन्होंने ठान लिया कि उन तकनीकाें को अपने खेत में भी लागू करेंगे।

सरकारी सब्सिडी से लगाया पहला पॉली हाउस

चार हजार वर्गमीटर में इन्होने पहला पॉली हाउस सरकार की सब्सिडी से लगाया। खेमाराम चौधरी गाँव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, “एक पॉली हाउस लगाने में 33 लाख का खर्चा आया, जिसमे नौ लाख मुझे देना पड़ा जो मैंने बैंक से लोन लिया था, बाकी सब्सिडी मिल गयी थी। पहली बार खीरा बोए करीब डेढ़ लाख रूपए इसमे खर्च हुए।

चार महीने में ही 12 लाख रुपए का खीरा बेचा, ये खेती को लेकर मेरा पहला अनुभव था।” वो आगे बताते हैं, “इतनी जल्दी मै बैंक का कर्ज चुका पाऊंगा ऐसा मैंने सोचा नहीं था पर जैसे ही चार महीने में ही अच्छा मुनाफा मिला, मैंने तुरंत बैंक का कर्जा अदा कर दिया। चार हजार वर्ग मीटर से शुरुआत की थी आज तीस हजार वर्ग मीटर में पॉली हाउस लगाया है।”

मिनी इजरायल के नाम से मशहूर है क्षेत्र

खेमाराम चौधरी राजस्थान के पहले किसान थे जिन्होंने इजरायल के इस माडल की शुरुआत की थी। आज इनके पास खुद के सात पॉली हाउस हैं, दो तालाब हैं, चार हजार वर्ग मीटर में फैन पैड है, 40 किलोवाट का सोलर पैनल है। इनके देखादेखी आज आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में लगभग 200 पॉली हाउस बन गये हैं।

इस जिले के किसान संरक्षित खेती करके अब अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। पॉली हाउस लगे इस पूरे क्षेत्र को लोग अब मिनी इजरायल के नाम से जानते हैं। खेमाराम का कहना है, “अगर किसान को कृषि के नये तौर तरीके पता हों और किसान मेहनत कर ले जाए तो उसकी आय 2019 में दोगुनी नहीं बल्कि दस गुनी बढ़ जाएगी।”

मुनाफे का सौदा है खेती

अपनी बढ़ी आय का अनुभव साझा करते हुए बताते हैं, “आज से पांच साल पहले हमारे पास एक रुपए भी जमा पूंजी नहीं थी, इस खेती से परिवार का साल भर खर्चा निकालना ही मुश्किल पड़ता था। हर समय खेती घाटे का सौदा लगती थी, लेकिन जबसे मैं इजरायल से वापस आया और अपनी खेती में नये तौर-तरीके अपनाए, तबसे मुझे लगता है खेती मुनाफे का सौदा है, आज तीन हेक्टयर जमीन से ही सलाना एक करोड़ का टर्नओवर निकल आता है।”

खेमाराम ने अपनी खेती में 2006-07 से ड्रिप इरीगेशन 18 बीघा खेती में लगा लिया था। इससे फसल को जरूरत के हिसाब से पानी मिलता है और लागत कम आती है। ड्रिप इरीगेशन से खेती करने की वजह से जयपुर जिले से इन्हें ही सरकारी खर्चे पर इजरायल जाने का मौका मिला था जहाँ से ये खेती की नई तकनीक सीख आयें हैं।

इजरायल मॉडल पर खेती करने से दस गुना मुनाफा

जयपुर जिले के बसेड़ी और गुढ़ा कुमावतान गाँव के किसानों ने इजरायल में इस्तेमाल होने वाली पॉली हाउस आधारित खेती को यहां साकार किया है। नौवीं पास खेमाराम की स्तिथि आज से पांच साल पहले बाकी आम किसानों की ही तरह थी। आज से 15 साल पहले उनके पिता कर्ज से डूबे थे। ज्यादा पढ़ाई न कर पाने की वजह से परिवार के गुजर-बसर के लिए इनका खेती करना ही आमदनी का मुख्य जरिया था। ये खेती में ही बदलाव चाहते थे, शुरुआत इन्होने ड्रिप इरीगेशन से की थी। इजरायल जाने के बाद ये वहां का माडल अपनाना चाहते थे।

कृषि विभाग के सहयोग और बैंक के लोंन लेने के बाद इन्होने शुरुआत की। चार महीने में 12 लाख के खीर बेचे, इससे इनका आत्मविश्वास बढ़ा। देखते ही देखते खेमाराम ने सात पॉली हाउस लगाकर सलाना का टर्नओवर एक करोड़ का लेने लगे हैं। खेमाराम ने बताया, “मैंने सात अपने पॉली हाउस लगाये और अपने भाइयों को भी पॉली हाउस लगवाए, पहले हमने सरकार की सब्सिडी से पॉली हाउस लगवाए लेकिन अब सीधे लगवा लेते हैं, वही एवरेज आता है, पहले लोग पॉली हाउस लगाने से कतराते थे अभी दो हजार फाइलें सब्सिडी के लिए पड़ी हैं।”

इनके खेत में राजस्थान का पहला फैन पैड

फैन पैड (वातानुकूलित) का मतलब पूरे साल जब चाहें जो फसल ले सकते हैं। इसकी लागत बहुत ज्यादा है इसलिए इसकी लगाने की हिम्मत एक आम किसान की नहीं हैं। 80 लाख की लागत में 10 हजार वर्गमीटर में फैन पैड लगाने वाले खेमाराम ने बताया, “पूरे साल इसकी आक्सीजन में जिस तापमान पर जो फसल लेना चाहें ले सकते हैं, मै खरबूजा और खीरा ही लेता हूँ, इसमे लागत ज्यादा आती है लेकिन मुनाफा भी चार गुना होता है।

डेढ़ महीने बाद इस खेत से खीरा निकलने लगेगा, जब खरबूजा कहीं नहीं उगता उस समय फैन पैड में इसकी अच्छी उपज और अच्छा भाव ले लेते हैं।” वो आगे बताते हैं, “खीरा और खरबूजा का बहुत अच्छा मुनाफा मिलता है, इसमें एक तरफ 23 पंखे लगें हैं दूसरी तरफ फब्बारे से पानी चलता रहता है ,गर्मी में जब तापमान ज्यादा रहता है तो सोलर से ये पंखा चलते हैं,फसल की जरूरत के हिसाब से वातावरण मिलता है, जिससे पैदावार अच्छी होती है।”

ड्रिप इरीगेशन और मल्च पद्धति है उपयोगी

ड्रिप से सिंचाई में बहुत पैसा बच जाता है और मल्च पद्धति से फसल मौसम की मार, खरपतवार से बच जाती है जिससे अच्छी पैदावार होती है। तरबूज, ककड़ी, टिंडे और फूलों की खेती में अच्छा मुनाफा है। सरकार इसमे अच्छी सब्सिडी देती है, एक बार लागत लगाने के बाद इससे अच्छी उपज ली जा सकती है।

तालाब के पानी से करते हैं छह महीने सिंचाई

खेमाराम ने अपनी आधी हेक्टेयर जमीन में दो तालाब बनाए हैं, जिसमें बरसात का पानी एकत्रित हो जाता है। इस पानी से छह महीने तक सिंचाई की जा सकती है। ड्रिप इरीगेशन और तालाब के पानी से ही पूरी सिंचाई होती है। ये सिर्फ खेमाराम ही नहीं बल्कि यहाँ के ज्यादातर किसान पानी ऐसे ही संरक्षित करते हैं। पॉली हाउस की छत पर लगे माइक्रो स्प्रिंकलर भीतर तापमान कम रखते हैं। दस फीट पर लगे फव्वारे फसल में नमी बनाए रखते हैं।

सौर्य ऊर्जा से बिजली कटौती को दे रहे मात

हर समय बिजली नहीं रहती है, इसलिए खेमाराम ने अपने खेत में सरकारी सब्सिडी की मदद से 15 वाट का सोलर पैनल लगवाया और खुद से 25 वाट का लगवाया। इनके पास 40 वाट का सोलर पैनल लगा है। ये अपना अनुभव बताते हैं, “अगर एक किसान को अपनी आमदनी बढ़ानी है तो थोड़ा जागरूक होना पड़ेगा।

खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी रखनी पड़ेगी, थोड़ा रिस्क लेना पड़ेगा, तभी किसान अपनी कई गुना आमदनी बढ़ा सकता है।” वो आगे बताते हैं, “सोलर पैनल लगाने से फसल को समय से पानी मिल पाता है, फैन पैड भी इसी की मदद से चलता है, इसे लगाने में पैसा तो एक बार खर्च हुआ ही है लेकिन पैदावार भी कई गुना बढ़ी है जिससे अच्छा मुनाफा मिल रहा है, सोलर पैनल से हम बिजली कटौती को मात दे रहे हैं।”

रोजाना इनके मिनी इजरायल को देखने आते हैं किसान

राजस्थान के इस मिनी इजरायल की चर्चा पूरे राज्य के साथ कई अन्य प्रदेशों और विदेश के भी कई हिस्सों में है। खेती के इस बेहतरीन माडल को देखने यहाँ किसान हर दिन आते रहते हैं। खेमाराम ने कहा, “आज इस बात की मुझे बेहद खुशी है कि हमारे देखादेखी ही सही पर किसानों ने खेती के ढंग में बदलाव लाना शुरू किया है। इजरायल माडल की शुरुआत राजस्थान में हमने की थी आज ये संख्या सैकड़ों में पहुंच गयी है, किसान लगातार इसी ढंग से खेती करने की कोशिश में लगे हैं।”

(साभार-गांव कनेक्शन)

शारीरिक कमजोरी दूर कर शरीर को फौलाद बना देती हैं ये 5 चीजें, आजमाकर देखिए

शरीर में कमजोरी की वजह से व्यक्ति किसी भी काम को ठीक ढंग से करने पर अपना ध्यान नहीं लगा पाता है। जिसकी वजह से वो बीमार दिखने लगता है।सुखी और स्वस्थ जीवन के लिए ये बेहद जरुरी है कि व्यक्ति शारीरिक रूप से शक्तिशाली बना रहे।

शरीर में किसी भी प्रकार की कमजोरी होने से जीवन में दुख और समस्याओं को बढ़ावा मिलता है।यदि किसी पुरुष में कमजोरी हो तो उसका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रह सकता है। ऐसे में जानते हैं पांच ऐसे घरेलू उपाय जो शारीरिक कमजोरी दूर कर शरीर को फौलाद बना देते हैं।

नींबू

नींबू शरीर में शक्ति के लिए बेहद जरूरी है। इससे कमजोरी दूर होती है और शरीर में नई स्फूर्ति पैदा होती है। इसे नमक या चीनी के साथ मिलाकर गुनगुने पानी के साथ पिएं।

केला

केला कमजोर शरीर को मोटा और पुष्ट बनाता है। कहते हैं कि शाम के समय खाने के बाद दो केले खाने से यौन दुर्बलता खत्म होती है और शरीर को बल मिलता है। केले को सुबह खाली पेट नहीं खाना चाहिए।

आंवला

ताकत के लिए आंवला चमत्कारी उपाय है। लगभग 10 ग्राम हरे और कच्चे आंवला को शहद के साथ खाएं। इसे रोज सुबह किसी खट्टे फल की तरह शहद लगाकर खाएंगे तो यौन बल बढेगा और शरीर कसरती हो जाएगा।

घी

घी हर रूप में सेहत के लिए अच्छा होता है। अगर शरीर में कमजोरी या यौन दुर्बलता महसूस हो रही हो तो घी का सेवन करें। रोज शाम का भोजन करने के बाद घी और शहद को मिलाकर इसका सेवन करें। इससे याददाश्त के साथ ही साथ शरीर की ताकत और वीर्य बढ़ता है।

तुलसी

यूं तो तुलसी के बीज और पत्ते हर रूप में लाभकारी हैं लेकिन शारीरिक दुर्बलता को दूर करने के लिए और वीर्य, बल और खून में वृद्धि के लिए आधा ग्राम तुलसी के पीसे हुए बीजों को सादे या कत्था लगे पान के साथ सुबह और शाम को चबा चबा कर खाएं।

मुनक्का

लगभग 60 ग्राम मुनक्का को धोकर भिगो दें। 12 घण्टे के बाद भीगे हुए मुनक्के खाने से पेट के रोग दूर होते है और शरीर में खून और वीर्य बढ़ जाता है। मुनक्का की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाकर 200 ग्राम तक सेवन करने से लाभ मिलता हैं। मुनक्का को गर्म पानी से धोकर रात को भिगो दें। प्रात: समय उसके पानी को पीलें तथा दानों को खालें। ऐसा रोजाना करने से शारीरिक कमजोरी दूर हो जाती हैं।

राजस्थान में क्या सच में पिता ने सरेआम बच्चे की बलि दे दी?

सोशल मीडिया पर कुछ फोटोज और एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें एक बच्चे का कटे हुए सिर को किसी अर्थी पर ले जाया जा रहा है. साथ में पूरी भीड़ चल रही है. एक आदमी आगे तलवार लेकर चल रहा है जिस पर खून लगा हुआ है.

वीडियो के साथ में लिखा है कि राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गंगापुर थाना क्षेत्र के खाकरा गांव में एक बच्चे की बलि दी गई. दी विलेज न्यूज़ नाम के एक पेज ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा-

घटना: राजस्थान भीलवाड़ा जिले में एक मासूम बालक की बलि चढ़ा कर जुलूस निकाला गया… बालक का चेहरा देखकर आपको रोना आ जायेगा…

फेसबुक पर वायरल हो रहा वीडियो.

राजस्थान के भीलवाड़ा में मासूम बच्चे की बलि दे दी भीड़ ने। इन अंधविश्वासियों से कोई पूछे, इस बेचारे बच्चे का क्या कसूर था

सच्चाई क्या है?

इस घटना की सच्चाई जानने के लिए हमने भीलवाड़ा में इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार दिविर जोशी से बात की. उन्होंने बताया-

यह ऐसी कोई घटना नहीं है बल्कि थाना गंगापुर के खाकरा गांव में हर साल की तरह इस साल भी नवरात्रि के दिनों में जादू और करतब से गांववालों का मनोरंजन करने के लिए नाटकीय रूप से जुलूस निकाला गया था. इसमें किसी बच्चे की बलि नहीं दी गई है.

यह जुलूस हर नवरात्रि में मां चामुंडा के मंदिर से शुरू होता है जिसमें मुख्य रूप से गले में छुरा डालना, पेट में छुरा डालना, गले का कटा हुआ होना, तलवार की नोक पर पत्थर का उडना जैसे करतब किए जाते हैं. इसे देखने आसपास के हजारों लोग देखने आते हैं. इस प्रोग्राम के लिए ये गांव फेमस है. इस बच्चे का नाम भावेश जोशी है. ये जिंदा है. बस करतब दिखाने के लिए ऐसा किया गया. तलवार और उस पर लगा खून नकली है.

भीलवाड़ा पुलिस ने भी ट्विटर पर इस घटना के बारे में जानकारी दी.

हमारी पड़ताल में यह पोस्ट एकदम झूठा निकला. एक नाटक के फोटो का असली बताकर उसे वायरल किया जा रहा है

चीन को होन्ग कोंग से जोड़ने वाला दुनिया का सबसे लंबा ब्रिज बन कर तैयार, जाने इसकी लंबाई और विशेषता

चीन अपनी अद्भुत इमारतों और बेजोड़ निर्माण परियोजनाओं के लिए जाना जाता है। दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्कोप यहीं है, मॉल यहीं है, दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट यहां बन रहा है।

अब इस सूची में दुनिया का सबसे बड़ा sea bridge भी शामिल होने जा रहा है। 55 किमी लंबा यह ब्रिज दक्षिण चीन में बहने वाली पर्ल नदी के डेल्टा पर स्थित हांगकांग, झुहाई और मकाऊ को जोड़ेगा। इसका निर्माण दिसंबर, 2009 में शुरू हुआ था और अब लगभग नौ साल बाद इसे 24 अक्टूबर को लोगों के लिए खोला जाएगा।

आधा रह जाएगा ट्रैवल टाइम

इस ब्रिज के चलते हांगकांग से मकाऊ के बीच आने जाने का समय आधा रह जाएगा। एक किनारे से दूसरे किनारे जाने में लोगों को सिर्फ एक घंटे का समय लगेगा। रोजाना इसपर से 40,000 वाहन गुजरेंगे,

इस परियोजना की अनुमानित लागत 15 अरब डॉलर बताई जाती है। इसे बनाने में 4,20,000 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है। इतनी स्टील से 60 Eiffel Tower बनाए जा सकते हैं। चीनी अधिकारियों का कहना है कि यह ब्रिज 120 वर्षों तक सही सलामत रहेगा।

इस ब्रिज में छह लेन और चार टनल हैं, जिनमें से एक पानी के नीचे बनाया गया है। इस पूरे स्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के लिए चीन ने समंदर में चार artificial islands भी बनाए हैं। इसे ऐसे डिजायन किया गया है कि यह इस क्षेत्र में आने वाले भूकंप और मौसमी तूफाप का सामना कर सके।

कंर्टोवर्सी भी खूब हुई

भारी-भरकम लागत, निर्माण में देरी, भ्रष्टाचार की शिकायतों और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर यह परियोजना विवादों के घेरे में रही। ब्रिज के निर्माण के दौरान दो मजदूर मारे गए और 19 के खिलाफ झूठी कंक्रीट टेस्ट रिपोर्ट पेश करने का मामला दायर किया गया।

निर्माण के शीर्ष चरण में इस ब्रिज पर 14,000 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे थे और समुद्र में 300 से ज्यादा जहाज तैनात किए गए थे,

दुनिया का दूसरा सबसे लंबा sea bridge भी यहीं

42.33 किमी लंबा दुनिया का दूसरा सबसे लंबा sea bridge भी चीन में है। 2011 में बनकर तैयार हुए इस ब्रिज की लागत 1.5 अरब डॉलर रही। यह चीन के पूर्वी तटीय शहर Qingdao और Huangdao उपनगर को जोड़ता है।

रेल नेटवर्क को बढ़ा रहा चीन

यह ब्रिज चीन के दो बड़े ट्रांसपोर्टेशन प्रोजेक्ट में से एक है। दूसरा प्रोजेक्ट है चीन का high-speed rail system, जिसके तहत हाल ही में हांगकांग से चीन के मुख्य क्षेत्र के बीच पहली बुलेट ट्रेन चली है। यह ट्रेन दक्षिण चीन से बीजिंग के बीच की दूरी 24 घंटों से घटाकर सिर्फ 9 घंटे कर देगी। 2019 तक चीन अपने high-speed rail system को 3500 किमी बढ़ाने की परियोजना पर काम कर रहा है।