मुकेश अंबानी जिस होटल में देने जा रहे है बेटी की शादी की प्री-वेडिंग पार्टी, आइए जानते हैं कैसा है ये होटल

मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी की शादी 12 दिसंबर को मुंबई में होने वाली है। हालांकि शादी से पहले प्री-वेडिंग पार्टी उदयपुर में होगी। इसके लिए 8-10 दिसंबर तक के लिए होटल ओबेरॉय उदयविलास को बुक किया गया है।

आइए जानते हैं कैसा है ये होटल

  • होटल ओबेरॉय उदयविलास करीब 50 एकड़ में फैला है। इसे इसकी सुंदरता के लिए 2015 में दुनिया के बेस्ट होटल में रखा जा चुका है।
  • इसका आर्किटेक्चर राजस्थानी संस्कृति की झलक दिखती है। ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण उसी जगह हुआ है जहां मेवाड़ के महाराणा करीब 200 साल पहले शिकार किया करते थे। इसका 40 प्रतिशत हिस्सा वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में आता है। इसमें कुल 87 कमरे हैं, 1 कोहिनूर सुइट और 4 लग्जरी सुइट हैं।

  • पिछोला झील के किनारे बने इस होटल में तीन रेस्त्रां, दो पूल और लग्जरी स्पा है। साथ ही सभी कमरे फ्री वाई-फाई से लेस हैं।
  • सुंदर गलियारों, फव्वारों और गार्डन वाले होटल ओबेरॉय उदयविलास की उदयपुर रेलवे स्टेशन से दूरी करीब 6 किमी. है। उदयपुर एयरपोर्ट से ड्राइव करते हुए इस 5 स्टार होटल तक सिर्फ 45 मिनट में पहुंचा जा सकता है।

जानें किस रंग का अंडा खाना है ज्यादा फायदेमंद, भूरा या सफेद

बचपन से आपने कई बार लोगों को ये कहते, सुनते और गुनगुनाते भी सुना होगा कि संडे हो या मंडे रोज खाएं अंडे। हालांकि अंड़ों को लेकर युवाओं के मन को एक नया सवाल परेशान कर रहा है; और ये सवाल है कि भूरा अंडा या सफेद अंडा; कौन सा अंडा सेहत के लिए बेहतर है। आइए जानते हैं किस रंग का अंडा आपकी सेहत के लिए वरदान हो सकता है।

आपको बता दें कि अंडे में प्रोटीन के अलावा कैल्शियम और विटामिन डी भी मौजूद होता है जो हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि ब्राउन या व्हाइट कौन सा अंडा खरीदना चाहिए और कौन सा हमारी सेहत के लिए बेस्ट होता है। अक्सर कहा जाता है कि दोनों तरह के अंडों में पैसों के सिवा किसी और चीज का फर्क नहीं होता है।

डाइटिशियन का कहना है कि “अंडा 2 तरह का होता है देसी और दूसरा पोल्ट्री। देसी अंडे थोड़े मटमैले यानी कि ब्राउन रंग के होते है। जबकि पोल्ट्री के अंडे सफेद रंग के होते है। ब्राउन अंडा, व्हाइट अंडे से ज्यादा हेल्दी होता है, इसलिए लोग इन्हें खाना ज्यादा पसंद करते हैं।

यही वजह है कि सफेद अंडे की तुलना में ब्राउन अंडा ज्यादा महंगा मिलता है। इसके अलावा ब्राउन अंडे में प्रोटीन, कोलेस्टॉल और कैलोरी की मात्रा सफेद अंडे की तुलना में ज्यादा होती है। हालांकि हाल ही में हुई रिसर्च का तो कुछ और ही कहना है।जानते हैं क्या कहती है ये नई रिसर्च।

हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार, सभी अंडे साइज और कलर में अलग होने के बावजूद पौष्टिक रूप से एक जैसे होते हैं। सभी अंडों में लगभग उसी मात्रा में विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और कैलोरी मौजूद होती है। अंडे के रंग से उसके पौष्टिक तत्वों पर कोई असर नहीं पड़ता है।

अंडों के रंग से नहीं बल्कि मुर्गियों की डाइट से अंडों की पौष्टिकता पर असर पड़ता है। जो मुर्गियां हमेशा सूर्य के संपर्क में रहती हैं और अच्छा खाना खाती हैं उनके अंडों में सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं और वो ज्यादा हेल्दी होते हैं। वहीं ऐसी मुर्गियां जो किसी बंद कमरे में रहती हैं और जिन्हें खाने के लिए अच्छा आहार नहीं मिलता। उनके अंडे ज्यादा हल्दी नहीं होते हैं।

दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है ये, खाएंगे तो शरीर बन जाएगा फौलादी

आजकल के दौर में जंक फूड का इतना क्रेज बढ़ चुका है कि लोग अपने शरीर को जरूरी ताकत देनी वाली सब्जी, दाल का सेवन कम ही करते हैं. लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ सबज्यिां ऐसी होती हैं, जिन्हें कुछ दिन खाने पर ही इसका फायदा मिल जाता है.

ऐसी ही एक सब्जी है कंटोला. यह दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है. इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. इस सब्जी में इतनी ताकत होती है कि महज कुछ दिन के सेवन से ही आपका शरीर तंदुरुस्त बन जाता है या यूं कहें कि फौलादी बन जाता है. कंटोला को ककोड़े और मीठा करेला नाम से भी जाना जाता है.

कंटोला आमतौर पर मॉनसून के मौसम में भारतीय बाजारों में देखा जाता है. इसमें कई स्वास्थ्य लाभ है जिसकी वजह से इसकी खेती दुनियाभर में शुरू हो गई है. इसकी मुख्य रूप से भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती की जाती है.

यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूर होती है. इसे रोज खाने से आपका शरीर ताकतवर बनता है. इसके लिए कहा जाता है कि इसमें मीट से 50 गुना ज्यादा ताकत और प्रोटीन होता है. कंटोल में मौजूद फाइटोकेमिकल्स स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में काफी मदद करता है. यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्जी है. यह शरीर को साफ रखने में भी काफी सहायक है.

अगर आप भी अपनी रोजाना डाइट में इसे शामिल करते हैं तो दूसरे तत्वों और फाइबर की कमी को भी यह पूरी करती है. ककोड़े यानी मीठा करेला को सेहतमंद माना जाता है. आयुर्वेद में भी इसे सबसे ताकतवर सब्जी के रूप में माना गया है.

एंटी एलर्जिक : कंटोल में एंटी-एलर्जन और एनाल्जेसिक सर्दी खांसी से राहत प्रदान करने और इस रोकन में काफी सहायक है.

हाई ब्लड प्रेशर होगा दूर : कंटोला में मौजूद मोमोरडीसिन तत्व और फाइबर की अधिक मात्रा शरीर के लिए रामबाण हैं. मोमोरेडीसिन तत्व एंटीऑक्सीडेंट, एंटीडायबिटीज और एंटीस्टे्रस की तरह काम करता है और वजन और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है.

पाचन क्रिया होगी दुरुस्त : अगर आप इसकी सब्जी नहीं खाना चाहते तो अचार बनाकर भी सेवन कर सकते हैं. आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज के लिए इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं. यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

कैंसर से बचाए : कंटोला में में मौजूद ल्युटेन जैसे केरोटोनोइडस विभिन्न नेत्र रोग, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर की रोकथाम में सहायक है.

वजन घटाने में सक्षम: कंटोला में प्रोटीन और आयरन भरपूर होता है जबकि कैलोरी कम मात्रा में होती है. यदि 100 ग्राम कंटोला की सब्जी का सेवन करते हैं तो 17 कैलोरी प्राप्त होती है. जिससे वजन घटाने वाले लोगों के लिए यह बेहतर विकल्प है.

कुछ खास नहीं बस बदला खेती करने का तरीका और अब होती है 30 लाख की कमाई

परंपरागत खेती छोटे किसानों के लिए तो घाटे का सौदा थी ही लेकिन बड़े किसान भी सदैव कर्ज में डूबे रहते थे। मो. बड़ोदिया ब्लाक के गांव मोरटा मलोथर के 40 बीघा जमीन के बड़े किसान ओमप्रकाश पंवार ने परंपरागत खेती में कुछ इसी तरह महसूस किया।

कर्ज से तंग आकर इस किसान ने उद्यानिकी के साथ मिश्रित खेती को अपनाया और देखते ही देखते खेती को लाभ का धंधा बनाकर दिखा दिया। पिछले पांच सालों से यह किसान अपनी 40 बीघा जमीन में मिश्रित खेती कर सालाना 30 लाख से भी अधिक की कमाई कर पा रहे हैं।

किसान ने इस बार भी गेहूं, चना, मसूर, मेथी, रायड़ा, कलौंजी, चंद्रसुर, संतरा, आलू, प्याज, लहसुन, नीबू, मूंग, उड़द, मक्का व हरी सब्जी के साथ दर्जनभर से अधिक तरह की फसल उगाई है। इसके अलावा पूरी जमीन में रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का उपयोग किया गया है।

मोरटा मलोथर के किसान ओमप्रकाश पंवार ने 6 बीघा जमीन में संतरा व औषधि फसल चंद्रसुर की एक साथ पैदावारी ली। रबी की फसल की बोवनी के समय के पूर्व किसान ने संतरे के बगीचे में एक किलो प्रति बीघा के हिसाब से खेत में 6 किलो चंद्रसुर की बोवनी कर दी। कम सिंचाई व 1300 रुपए प्रति बीघा की लागत लगाकर किसान ने इस जमीन से 4 क्विंटल प्रति बीघा के मान से 24 क्विंटल चंद्रसुर की पैदावारी ली है।

वर्तमान बाजार भाव के हिसाब से जिसकी कीमत सवा लाख रुपए के करीब है। इसी खेत में लगे संतरे के पेड़ भी संतरे के फलों से लदालद हो रहे हैं। करीब 150 क्विंटल से अधिक संतरे की फसल की पैदावारी आने का अनुमान है। संतरे की फसल से भी किसान को लगभग साढ़े 7 लाख रुपए से अधिक की कमाई होगी। इस तरह किसान को 6 बीघा जमीन की एक साथ की गई दोनों फसलों से 9 लाख रुपए की आमदनी होगी।

ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी, मो. बड़ोदिया बीसी सौराष्ट्रीय का कहना है मो. बड़ोदिया विकासखंड में 5 वर्ष पहले कुछ चुनिंदा किसान ही 5 हेक्टेयर जमीन के रकबे में उद्यानिकी व औषधी खेती करते थे, लेकिन अब विकासखंड में 150 किसान 55 से 60 हेक्टेयर जमीन में उद्यानिकी के साथ तुलसी, अश्वगंधा, इसबगोल, चंद्रसुर, कालमेद, सफेद मूसली, एपल बैर, पुष्प व सीताफल के साथ कई प्रकार की औषधीय खेती कर रहे हैं।

विकासखंड में पांच सालों में उद्यानिकी व औषधि खेती का रकबा 10 गुना से भी अधिक बढ़ गया है। इसी बीच इस विकासखंड में नेट हाउस की संख्या भी बढ़कर 15 हो गई है।

पौधों को जल्दी बड़ा करने के लिए ऐसे करें डिस्प्रीन का प्रयोग

दोस्तों आप ने एस्प्रिन का पौधों पर इस्तेमाल सुना ही होगा आज हम आपको बताएँगे की सच्च में एस्प्रिन डालने से पौधे तेज़ी से बढ़ते है जा नहीं। उसके लिए हम एक छोटा सा प्रयोग करेंगे ।

इसमें हम दो गमले लेंगे । एक गमले में हम बीज डिस्प्रीन में भिगो कर लगाएंगे और दूसरी तरफ पानी में भिगो कर लगाएंगे । भारत में एस्प्रिन की टेबलेट अब डिस्प्रीन के नाम से मिलती है ।

डिस्प्रीन को पानी में घोलने के बाद उसमे बीज कुछ घंटो के लिए भिगो कर लगाना है । बीज लगाने के बाद आप देख सकते है की कैसे डिस्प्रीन में भिगो कर लगाने वाले बीज बड़ी तेज़ी से बढ़ते है और दूसरे गमले वाले बीज बहुत धीरे ग्रोथ करते है तो इस से ये साबित होता है की एस्प्रिन पौधों की ग्रोथ के बढ़ाती है ।

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इसके इलावा कई बार होता है कि हमारे बगीचे के पौधों में फंगस लग जाती है जिसके कारण पौधे मुरझा जाते हैं व उनकी चमक भी खो जाती है । इस कमी को दूर करने के लिए आप एक गैलन पानी में एक डिस्प्रीन मिला दें जिसके कारण पौधों में फंगस नहीं लगेगा और आपके बगीचे की ताजगी बरकरार रहेगी।

यह गन्ना किसान एक एकड़ से कमाता है 2 लाख 80 हज़ार रुपए

युवाओं का कृषि के प्रति बढ़ते रुझान की मिसाल उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में रहने वाले किसान अचल मिश्रा ने पेश की है। इन्होंने गन्ने की आधुनिक तरीके से खेती करते हुए कई बार प्रदेश स्तरीय व जिला स्तरीय पुरुस्कार प्राप्त किए हैं। इस वर्ष भी इन्होंने गन्ना के अच्छे उत्पादन के मद्देनज़र जिले में प्रथम पुरुस्कार प्राप्त किया है।

उनका मानना है कि गन्ने की खेती के लिए उन्होंने केंद्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ व कोयबंटूर स्थिति अनुसंधान केंद्रों से सफल खेती की जानकारी प्राप्त की है। यदि उनकी शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो वह लखनऊ विश्वविद्दालय से एल.एल.बी की डिग्री हासिल की है।

वर्ष 2005 से खेती प्रारंभ करने वाले अचल ने साल 2007-08 में गन्ना की खेती से सर्वाधिक उत्पादन के पैमानों पर खरा उतरते हुए उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस वर्ष भी उन्होंने गन्ने की COO- 238 किस्म से प्रति बीघे लगभग 250 क्विंटल से ऊपर की उपज प्राप्त की है। जिस दौरान गन्ने की लंबाई लगभग 18.5 फीट प्राप्त की साथ ही वजन भी अच्छा आंका गया।

बताते चलें कि गन्ने की खेती में वह गोबर की खाद, हरी खाद आदि का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही कीटनाशकों आदि का इस्तेमाल कम से कम करते हैं। पेड़ी की फसल के दौरान वह गन्ने की पत्ती को सड़ाकर एक बेहतर खाद के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। यूरिया का इस्तेमाल वह स्प्रे के तौर पर करते हैं। जिस दौरान उसकी 2 से 3 किलोग्राम की मात्रा प्रति एकड़ स्प्रे करते हैं। तो वहीं उनका मानना है यह भी है कि गन्ने की खेती विशेषकर पानी पर निर्भर करती है।

उन्होंने 12 बीघे की खेती से यह साबित कर दिया कि कम रकबे में अच्छी खेती के द्वारा अच्छी कमाई की जा सकती है। शुरुआती दौर में उन्होंने खेती की अधिक जानकारी न होने के कारण महाराष्ट्र के किसानों से भी मुलाकात कर जानकारी ली और गन्ने की अच्छी खेती के गुर सीखे। एक एकड़ की खेती से अचल ने अब 2 लाख 80 हजार रुपए की शुद्ध बचत प्राप्त की।

भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा ये नया फल चीनी से ज्यादा मीठा फिर भी शुगर फ्री

चीनी भले ही आपका स्वाद बढ़ा देती हैं लेकिन इसके नुकसान भी बहुत है और अगर इसकी जगह कोई ऐसा फल हो जो मीठे होने के साथ ही साथ कम कैलोरी वाला हो तो कितनी मुश्किलें आसान हो जाएगीं। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक बार फिर करिश्मा कर दिखाया है।

आईएचबीटी और CSIR के वैज्ञानिकों की टीम ने मिलकर पालमपुर में सफलतापूर्वक एक ऐसा चीनी मॉन्क फल उगाया है जो चीनी से कहीं ज्यादा मीठा है और शुगर फ्री भी है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि बहुत ही जल्द इस फल से बने स्वीटनर्स बाजार में मिलने लगेंगे।

भारत में करीब 62.4 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं जो अपने आप में एक बड़ी संख्या है। ऐसे में ये फल कितना फायदेमंद हो सकता है ये आगे के रिजल्ट से ही पता चलेगा। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है।

डायबिटीज मरीजों के लिए फायदेमंद होगा ये फल

डेली पायनियर से बताचीत के समय, हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ संजय कुमार ने कहा, ‘भारत में 62.4 मिलियन लोगों को टाइप4 का मधुमेह है, ऐसे में यह फल उनके लिए वरदान साबित होगा। हमने जो प्रयोग किए हैं वो सफल हो गए हैं। ये फल चीनी से 300गुना ज्यादा मीठा है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालया बॉयो रिसोर्स टेक्नोलॉजी (IHBT) और कांउसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंड्रस्टीरियल रिसर्च (CSIR) के लैब मिलकर अब इस फल को मार्केट में लाने की तैयारी कर रहे हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए तो ये फल फायदेमंद है ही इसके अलावा यह कैलोरी वाले उत्पादों का निर्माण करने वाले खाद्य उत्पादकों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

मॉन्क फल को उगाने के लिये अलग कृषि-तकनीक के साथ उपयुक्त पौध और वैज्ञानिक तकनीकों की जरूरत होती है और ये अभी तक चीन में ही हो रहा है, इस फल की व्यवसायिक खेती कहीं और नहीं होती है।

Jio Phone को टक्कर देने के लिए मार्केट में आया यह 4जी फोन, कीमत सिर्फ 500 रु.

रिलायंस के Jio Phone को टक्कर देने के लिए मशहूर सर्च इंजन कंपनी गूगल ने बाजार में अपना 4जी फोन लॉन्च किया है। खबरों के अनुसार, गूगल ने लिजफोन डब्ल्यू पी006 लॉन्च किया है। इस फोन को इंडोनेशिया में लॅान्च किया गया है।

इसे जल्द ही भारत में भी उतारा जा सकता है। इस फोन में केएआईओस (KaiOS) लगा हुआ है। इसके जरिए कॉलिंग, म्यूजिक या वीडियो और यहां तक की मैसेज भी किए जा सकते हैं। इसके अलावा वॉट्सएेप, फेसबुक और यूट्यूब का आनंद भी लिया जा सकता है।

इंडोनेशिया में इसकी कीमत IDR 99,000 है। ये भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 500 रुपए होती है। माना जा रहा है कि अगर इस फोन को भारत में उतारा जाएगा तो यह रिलांयस के जिओ फोन को कड़ी टक्कर दे सकती है। गूगल के लिजफोन डब्ल्यू पी006 (Google WizPhone WP006) और Jio फोन में काफी कुछ समानताएं हैं। लुक के मामले में दोनो फोन लगभग एक जैसा ही है।

जानें क्या है Google WizPhone WP006 की खासियत

2.4 इंच का डिसप्ले स्क्रीन है। इसमें आपको 4GB इंटरनल स्टोरेज के साथ 512MB की रैम भी मिलेगी। इसमें 1,800 MAH की बैटरी लगी है, यह फोन को पॉवर देने के लिए पर्याप्त कही जा सकती है। गूगल का यह फोन जियो फोन की तरह ही KaiOS पर चलता है।

इस फोन को पावर देने के लिए 1800 एमएच की बैटरी दी गई है। फोटोग्राफी के लिए फोन के बैक में 2 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। वहीं अगर आप सेल्फी के शौकीन हैं तो इस फोन में आपको VGA कैमरा भी मिलेगा।

अगले हफ्ते से देश के इन हिस्सों में होगी बारिश…

देश को एक साथ कई मौसमी प्रणाली प्रभावित करेंगी। जिसके कारण उत्तरी, मध्यी, दक्षिणी और पुर्वी भागों में बारिश होगी। सिर्फ पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी गुजरात, दक्षिणी राजस्थान और उत्तरपश्चिमी महाराष्ट्र में मौसम साफ रहेगा। बाकी बचे देश के सभी हिस्सों में कही हल्की तो कही मध्यम बारिश की संभावना हैं।

शुरुआत उत्तर भारत से, कल से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ् जम्मू कश्मीर को प्रभावित करेगा जो 8 दिसंबर तक अपना प्रभाव दिखाएगा, जिसके कारण सिर्फ़ जम्मु कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश और हल्की बर्फबारी दर्ज की जाएगी।

कल पंजाब के पूर्वी और उत्तरी भागों में कुछ जगहों पर मेघगर्जन के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। कल हरियाणा, उत्तर राजस्थान, दिल्ली-NCR, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिन के समय हल्के बादल छाए रहेंगें।

  • 9 दिसंबर को जम्मु कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के ऊपरी इलाको में हल्की बारिश और बर्फबारी शुरु हो जाएगी।
  • 10 दिसंबर को  जम्मु कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश और ऊपरी हिस्सो में हल्की बर्फ़बारी होना शुरू हो जाएगी। साथ ही पंजाब, पश्चिमी हरियाणा, उत्तरी व मध्यपश्चिमी राजस्थान, कच्छ, उत्तरी तटिय गुजरात में कही हल्की तो कही मध्यम दर्ज़े की बारिश की संभावना है।
  • 11 दिसंबर को प०वि०(पश्चिमी विक्षोभ) जम्मु कश्मीर पर होगा। जिसके कारण जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में ज्यादातर इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और एक या दो जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। उत्तराखंड में भी हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान हैं।

उत्तरी मैदानी राज्यों जिनमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-NCR में लगभग सभी हिस्सो में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। पंजाब और उत्तरी हरियाणा में कुछ जगहों पर अच्छी-खासी बारिश भी हो सकती है। उत्तरी व मध्यी राजस्थान और पश्चिमी उत्तरप्रदेश में हल्की बारिश हो सकती है।

  • 12 दिसंबर को जम्मु कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड मे हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ कुछ जगहों पर भारी बारिश भी होने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-NCR, उत्तरपश्चिमी उत्तरप्रदेश, उत्तरपूर्वी व पुर्वी राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश में हल्की बारिश होने का अनुमान है।
  • 13 दिसंबर की शाम तक पश्चिमी विक्षोभ जम्मु कश्मीर से आगे निकल जायेगा लेकिन मैदानी क्षेत्रों पर बना चक्रवाती हवाओ का क्षेत्र बहुत सक्रीय रहेगा। जिसके चलते जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मध्यम से भारी बारिश और बर्फबारी का एक और झोका दस्तक़ देगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तरपूर्वी राजस्थान, दिल्ली-NCR, पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे भी हल्की से मध्यम बारिश फिर से दस्तक़ देगी।
  • 14 दिसंबर को प०वि० जम्मू कश्मीर के पूर्व में तिब्बत की तरफ चला जायेगा। लेकिन पहाड़ी राज्यों में छिटपुट बारिश और बर्फबारी होती रहेगी। मैदानी राज्यों में धुंध और ठंड की ज़ोरदार वापसी होगी। उत्तर भारत शीत लहर की चपेट मे आना शुरु हो जाएगा।
  • 9 दिसंबर को हवाओं की दिशा में बदलाव होगा। मध्य भारत में बंगाल की खाड़ी की पूर्वी हवाओं और प०वि० के कारण उत्तरपश्चिमी हवाओ का टकराव होगा। जिसके कारण मध्य प्रदेश और द० छत्तीसगढ़ में हल्की बारिश होगी।

  • 10 दिसंबर को बुंदेलखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिण पश्चिमी उड़ीसा, पश्चिमी झारखंड, दक्षिण पश्चिम बिहार, दक्षिण पूर्वी उत्तर प्रदेश में हल्की बारिश होगी। पूर्वी मध्य प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश भी हो सकती है।
  • 11 दिसंबर को उत्तरी ओडिशा, उत्तरी छत्तीसगढ़, दक्षिणी झारखंड में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
  • 12 दिसंबर को बारिश में थोड़ी कमी आएगी। सिर्फ बिहार, झारखंड में कही कही और ओड़िशा, द० छत्तीसगढ़, विदर्भ में हल्की बारिश होने की संभावना है।
  • 13  दिसंबर को विदर्भ, द०पू० मध्य प्रदेश और मध्यी छत्तीसगढ़ में मध्यम बारिश हो सकती हैं।
  • शेष पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओड़िशा, झारखंड, उत्तरपूर्वी मध्य प्रदेश, दक्षिणी उत्तर प्रदेश में हल्की बारिश का अनुमान हैं।
  • 14 दिसंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश, बुंदेलखंड, द० यूपी, द० बिहार, विदर्भ में हल्की बारिश औऱ उत्तरी छत्तीसगढ़ और मध्यी झारखंड में भारी बारिश की संभावना है।

इन खेतों में काम करने वाले मजदूरों के कपड़े बिकते है 10000 में, जाने भारत में अफीम की खेती से जुड़ी रोचक बातें

उत्तर प्रदेश की राजधानी से महज 20 किमी. दूर स्थित बाराबंकी जिला अपनी उन्नत खेती के लिए मशहूर है। ऐसा कहते हैं कि यहां के खेत कभी खाली नहीं रहते हैं।  इस इलाके में गेहूं, चावल से लेकर मेंथा ऑयल और अफीम की खेती होती है। बाराबंकी में अफीम की खेती करने वाले राकेश पांडे ने इस खेती के बारे में बताया।

5 से 10 हजार में बिक जाते हैं मजदूरों के कपड़ें

राकेश पांडे के मुताबिक अफीम की खेती मजदूरों पर निर्भर रहना होता है। ऐसे में मजदूर इसकी ब्लैक मार्केटिंग का अहम जरिया होते हैं। दरअसल अफीम के पौधे से चीरा लगाकर दूध निकला जाता है। इसे ही इकट्‌ठा करके अफीम तैयार की जाती है।

मजदूर शाम को पोस्ते में कट लगाते हैं और अगली सुबह पोस्ते से रिसे हुए दूध को निकाला जाता है। यह एक पेस्ट जैसा होता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसानों के कपड़ों में इस पेस्ट का कुछ हिस्सा चिपक जाता है। इन पेस्ट लगे कपड़ों की ब्लैक मार्केट में 5 से 10 हजार रुपए में बिक्री हो जाती है।

बाकी फसलों की तरह अफीम की लागत में हुआ है इजाफा

अफीम की खेती में बाकी फसलों के मुकाबले ज्यादा लागत आती है। साथ ही इसकी देखरेख पर भी काफी खर्च आता है। अगर खेती किसी वजह से खराब हो गई है, तो उसकी जानकारी प्रशासन को देनी होती है। इसके बाद प्रशासन अफीम की पूरी फसल को नष्ट कर देता है।

अफीम की खेती में प्रति हेक्टेयर की दर से अफीम के उत्पादन में कमी आई है। ऐसा पर्यावरण में बदलाव जैसी कई वजहों से हुआ है । साथ ही लागत के हिसाब से कीमत में बढ़ोतरी नहीं हुई है। राकेश का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मजदूरी समेत अफीम उत्पादन की लागत में इजाफा हुआ है।

लाइसेंस मिलने पर ही की जा सकती है अफीम की खेती

अफीम की खेती बाराबंकी के अलावा उसके पड़ोस के जिलों फैज़ाबाद, लखनऊ, रायबरेली, गाज़ीपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर में भी होती है। इस खेती की हमेशा डिमांड रहती है। लेकिन सरकार के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से सीमित लाइसेंस जारी किए जाते हैं। हर कोई अफीम की खेती नहीं कर सकता है। साथ ही इसकी खरीददारी भी सरकार की ओर से की जाती है।

सरकार ने अफीम के प्रति एक किग्रा की कीमत 3 से चार हजार रुपए निर्धारित किया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफीम 12 से 15 हजार रुपए प्रति किग्रा. की दर से बिकती है। वहीं ब्लैक मार्केट में एक किग्रा. अफीम के लाखों रुपए तक मिल सकते हैं। हर एक काश्तकार को औसतन प्रति हेक्टेअर 54 किलो अफीम देनी होती है। इस तय सीमा से 10 ग्राम कम अफीम स्वीकार नहीं की जाती है और संबंधित किसान का लाइसेंस कट जाता है। हालांकि इसे कम करने करी मांग की जा रही है।

अफीम की बड़े मात्रा में होती है सप्लाई

अफीम ऐसी खेती है, जिसके हर एक फूल से लेकर, दाने, छिलके समेत सभी प्रोडक्ट की बिक्री हो जाती है और इससे काफी कमाई होती है। सरकार के अलावा ब्लैक मार्केट में पोस्ते के किसी भी प्रोडक्ट की बिक्री करने पर सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद काफी बड़ी मात्रा में अफीम की तस्करी की जाती है, जो नेपाल और बांग्लादेश से होते हुए विदेश भेजी जाती है।