पोस्ट ऑफिस से हर माह 2700 रु की होगी तय इनकम

अगर आप रेग्युलर मंथली इनकम या एक्स्ट्रा इनकम का कोई उपाय खोज रहे हैं पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम आपकी मदद कर सकती है। बस इसके लिए आपको एक बार इस स्कीम के तहत पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाना पड़ेगा।

इस स्कीम के तहत सिंगल अकाउंट पर 2737 रुपए मंथली तक इनकम की गारंटी है। वहीं, आपके द्वारा खाते में जमा हर एक पैसे पर सुरक्षा की भी गारंटी है। खास बात है कि इस अकाउंट को आप मिनिमम 1500 रुपए से भी खुलवा सकते हैं।

क्या है ये स्कीम

हम यहां बात कर रहे हैं पोस्ट ऑफिस की मंथली इन्वेस्टमेंट स्कीम यानी पीओएमआईएस की, जो आपको मंथली इनकम करने का मौका देती है। यह एक ऐसी सरकारी योजना है जिसमें एक बार पैसा निवेश करने पर हर महीने तय आय होती रहती है।

खास बात यह है कि इस स्कीम को हर 5 साल बाद उसी खाते के जरिए आगे भी जबतक चाहें बढ़ा सकते हैं। यानी यह सालों तक आपके लिए इनकम की गारंटी साबित होगी। एक्सपर्ट्स इस योजना को निवेश के सबसे अच्छे विकल्पों में से एक मानते हैं, क्योंकि इसमें 4 बड़े फायदे हैं।

  • इसे कोई भी खोल सकता है और आपकी जमा-पूंजी हमेशा बरकरार रहती है।
  • बैंक एफडी या डेट इंस्ट्रूमेंट की तुलना में आपको बेहतर रिटर्न मिलता है।
  • हर महीने एक निश्चित आय आपको होती रहती है।
  • स्कीम पूरी होने पर आपकी पूरी जमा पूंजी मिल जाती है जिसे आप दोबारा इस योजना में निवेश कर मंथली आय का साधन बनाए रख सकते हैं।

कितना कर सकते हैं निवेश

अगर आपका अकाउंट सिंगल है तो आप 4.5 लाख रुपए तक अधिकतम जमा कर सकते हैं। कम से कम 1500 रुपए की राशि जमा की जा सकती है। एक शख्‍स पोस्ट ऑफिस द्वारा तय लिमिट के अनुसार अकाउंट खोल सकता है। मेच्योरिटी पीरियड 5 साल है। 5 साल बाद अपनी पूंजी को फिर योजना में निवेश कर सकते हैं।

ऐसे होगी मंथली इनकम

  • मंथली इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत 7.3 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है।
  • इस सालाना ब्याज को 12 महीनों में बांट दिया जाता है जो आपको मंथली बेसिस पर मिलता रहता है।
  • अगर आपने 4.5 लाख रुपए जमा किए हैं तो आपका सालाना ब्याज करीब 32850 रुपए होगा। इस लिहाज से आपको हर महीने करीब 2730 रुपए की आय होगी।
  • 2730 रुपए आपको हर महीने मिलेंगे, वहीं आपका 4.5 लाख रुपए मेच्योरिटी पीरियड के बाद कुछ और बोनस जोड़कर वापस मिल जाएगा।

ज्वॉइंट अकाउंट भी खोल सकते हैं

स्कीम के तहत ज्वॉइंट अकाउंट भी खोला जा सकता है। वहीं अगर आपका अकाउंट ज्वॉइंट है तो इसमें अधिकतम 9 लाख रुपए जमा किए जा सकते हैं। इस लिहाज से आपका सालाना ब्याज 65700 रुपए होगा। यानी इस केस में आपको हर महीने करीब करीब 5500 रुपए की आय होगी।

मंथली पैसा न निकालें तो

अगर आप मंथली पैसा न निकालें तो वह आपके पोस्ट ऑफिस सेविंग अकाउंट में रहेगी और मूलधन के साथ इस धन को भी जोड़कर आपको आगे ब्याज मिलेगा।

मेच्योरिटी के पहले पैसा निकालें तो……

अगर किसी जरूरत पर आपको मेच्योरिटी से पहले ही पूरा पैसा निकालना पड़ गया तो यह सुविधा आपको अकाउंट के 1 साल पूरा होने पर मिल जाती है। अकाउंट खोलने की तारीख से 1 साल से 3 साल तक पुराने अकाउंट होने पर, उसमें जमा रकम में से 2% काटकर बाकी रकम आपको वापस मिलती है। साल से ज्यादा पुराना अकाउंट होने पर, उसमें जमा रकम में से 1 फीसदी काटकर बाकी रकम आपको वापस मिलती है।

कौन खोल सकता है अकाउंट

  • पोस्ट ऑफिस की मंथली इन्वेस्टमेंट स्कीम कोई भी खोल सकता है चाहे वह एडल्ट हो या माइनर।
  • आप अपने बच्चे के नाम से भी अकाउंट खोल सकते हैं। अगर बच्चा 10 साल से कम उम्र का है तो उसके नाम पर उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक की ओर से अकाउंट खोला जा सकता है। बच्चे की उम्र 10 साल होने पर वह खुद भी अकाउंट के संचालन का अधिकार पा सकता है।

कैसे खुलेगा अकाउंट

आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी पोस्ट ऑफिस में जाकर अकाउंट खुलवा सकते हैं। इसके लिए आपको आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस में से किसी एक की फोटो कॉपी जमा करनी होगी। इसके अलावा एड्रेस प्रूफ जमा करना होगा, जिसमें आपका पहचान पत्र भी काम आ सकता है। इसके अलावा आपको 2 पासपोर्ट साइज के फोटोग्राफ जमा करने होंगे।

टैक्स छूट का लाभ नहीं

इसमें जमा की जाने वाली रकम पर और उससे आपको मिलने वाली ब्याज पर किसी तरह की टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलता है। हालांकि इससे आपको होने वाली कमाई पर डाकघर किसी तरह का TDS नहीं काटता, लेकिन जो ब्याज आपको मंथली मिलती है, उसके एनुअल टोटल पर आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल किया जाता है।

टाटा ने ARMY के लिए तैयार की SUV सफारी स्टोर्म

देश की अग्रणी वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स (tata motors) ने भारतीय सेना के लिए सफारी स्टोर्म (Safari Storme) की डिलीवरी शुरू कर दी है. करीब एक साल पहले सफारी स्टोर्म को फील्ड ट्रायल के बाद भारतीय सेना के लिए चुना गया था.

अब कंपनी की तरफ से इसकी 3192 यूनिट की डिलीवरी शुरू कर दी गई है. इतनी संख्या में कारों की डिलीवरी कई चरण में की जाएगी. टाटा की नई कार भारतीय सेना अब तक चल रही मारुति की जिप्सी को रिप्लेस करेगी. जिप्सी कई दशकों से आर्मी मूवमेंट में काम आ रही है.

सफारी स्टोर्म भारतीय सेना की तरफ से तय किए गए पैमानों पर खरी उतरी है. 800 किलोग्राम की लोडिंग कैपेसिटी वाली टाटा सफारी में एयर कंडीशनर भी है. इस पर आर्मी का मैट ग्रीन पेंट किया गया है. साधारण सफारी स्टोर्म और ‘आर्मड फोर्सेज’ वेरिएंट में कलर के अलावा भी कई बदलाव किए गए हैं. विशेष रूप से भारतीय सेना के लिए तैयार की गई सफारी स्टोर्म पर चमक रोकने के लिए मैट ग्रीन कलर किया गया है.

कार के फ्रंट और रियर बंपर पर ब्लैक आउट लैंप लगाए गए हैं. ताकि युद्ध के समय दुश्मन की सेना इंडियन आर्मी के वाहन को पहचान न सके. रियर बंपर पर हुक भी लगाए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से टोइंग की जा सके.

इसके अलावा भी टाटा ने सफारी स्टोर्म में कई ऐसे बदलाव किए हैं, जो सेना के वाहन के हिसाब से जरूरी हैं. ऐसे ही बदलावों के साथ इसमें बेहतर अंडरबॉडी सुरक्षा और मजबूत सस्पेंशन दिया गया है. कार में एक्ट्रा फ्यूल रखने का इंतजाम भी दिया गया है.

इन बदलावों के अलावा टाटा की तरफ से भारतीय सेना के लिए तैयार की गई सफारी स्टोर्म में साधारण सफारी स्टोर्म की तरह ही 2.2 लीटर का टर्बोचार्जड डीजल इंजन दिया गया है. यह इंजन 154 bhp की अधिकतर पावर और 400 न्यूटन मीटर का टॉर्क जेरनेट करता है. फोर व्हील ड्राइव (4×4) वर्जन में आने वाली टाटा की इस एसयूवी में 6 स्पीड मैन्युअल गियरबॉक्स दिया गया है.

40 हजार से शुरू करें बेडशीट-कुशन कवर का बिजनेस

इंडियन हैंडीक्राफ्ट की डिमांड न सिर्फ इंडिया बल्कि विदेशों में भी बढ़ रही है। हैंडमेड लिफाफे, कुशन कवर, बेडशीट, करटेन, पेपर मैशी प्रोडक्ट, डेकोरेटिव पीस और घर सजाने का सजावटी आइटम बनाने का शौक रखने वाली महिलाएं भी हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट को शॉपिंग वेबसाइट पर बेचकर घर बैठे 20 हजार रुपए से 50 हजार रुपए महीना कमा सकती हैं। आप घर बैठे ही हैंडीक्राफ्ट कारोबार शुरू कर सकते हैं।

घर बैठे शुरू कर सकते हैं हैंडीक्राफ्ट कारोबार

पेपर से डेकोरेटिव पीस बनाने के शौक को कारोबार मे तब्दील करने वाली दिल्ली की हैंडीक्राफ्ट कारोबारी ऑर्टइफेक्ट की को डायरेक्टर सविना शरण ने बताया उन्होंने घर से ही हैंडीक्राफ्ट कारोबार शुरू किया था क्योंकि उनका इसमें इंटरेस्ट था। उन्हें घर सजाने का सामान बनाना पसंद था।

अब वह एक्सपोर्ट के साथ ई-कॉमर्स पोर्टल पर अपने प्रोडक्ट बेचती हैं। ई-कॉमर्स पोर्टल पर सेल करने से प्रत्येक प्रोडक्ट पर 10 से 15 फीसदी का प्रॉफिट मार्जिन मिल जाता है। वहीं एक्सपोर्ट वॉल्यूम बेस्ड होने के कारण सिर्फ 2 से 5 फीसदी तक का ही मार्जिन मिलता है। सविना पेपर के लिफाफे, गिफ्ट और होम डेकोरेशन प्रोडक्ट बनाती हैं।

घर से कर सकते हैं शुरूआत

ये कारोबार छोटे लेवल पर न्यूनतम 40 हजार रुपए से शुरू किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर आपको कुशन कवर बनाने का ही बिजनेस शुरू करना है तो अपने एरिया की होलसेल मार्केट से रॉ मैटिरियल जैसे कपड़ा, लेस, बटन, डेकोरेटिव सैंपल लाकर घर में सिल सकती हैं। अगर काम ज्यादा है तो एक या दो टेलर को जॉब पर रख सकती हैं। इसके लिए आपको सिलाई मशीन खरीदनी होगी।

कहां से खरीदे फिनिश्ड प्रोडक्ट

एशियन हैंडीक्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन और ईपीसीएच के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार मल्होत्रा ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, जयपुर, गुजरात, यूपी और मध्यप्रदेश में हैंडीक्राफ्ट क्ल्सटर हैं। यहां से हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट खरीद सकते हैं। इनकी जानकारी वेबसाइट से मिल जाएगी। यहां से बल्क ऑर्डर खरीद सकते हैं। आपको बनाने का शौक है तो शुरआत घर से भी कर सकती हैं लेकिन ऑर्डर की संख्या बढ़ जाए तो इन क्लस्टर से खरीद सकते हैं।

क्या बिकता है ज्यादा

हैंडमेड लिफाफे, कुशन कवर, बेडशीट, करटेन, पेपर मैशी प्रोडक्ट, डेकोरेटिव पीस, होमफरनिशिंग, लाइफस्टाइल, बाथटब, आर्टिफिशल और जंक ज्वैलरी, फैशन और फर्नीचर सबसे अधिक बिकते हैं।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म दे रहा है मार्केट

ई-कॉमर्स शॉपिंग वेबसाइट हैंडीक्राफ्ट कारोबारियों को घरेलू और इंटरनेशनल मार्केट का रिटेल कस्टमर दे रहा है। अरबन लैदर, स्नैपडील, पेपरफ्राई, क्राफ्टविला, अमेजन जैसी ई-कॉमर्स शॉपिंग कंपनियों के साथ जुड़कर घरेलू बाजार में कारोबार बढ़ा रहे हैं।

ऑनलाइन कैसे बेचें प्रोडक्ट

कैसे जुड़ सकते हैं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कारोबारी को रजिस्टर कराना होगा
  • कारोबारी को पैन, जीएसटी और बैंक अकाउंट की डिटेल देनी होगी
  • कंपनी सेलर के साथ एमओयू या करार भी करती है
  • करार के बाद आप हैंडीक्राफ्ट कारोबारी वेबसाइट पर अपने प्रोडक्ट को अपलोड कर सकते हैं।
  • वेरिफिकेशन के बाद प्रोडक्ट साइट पर दिखने लगते हैं।
  • ज्यादातर कंपनियां सेलर से प्रोडक्ट ऑनलाइन बिकने के बाद कारोबारी से 1 से 9 फीसदी कमीशन लेती हैं।
  • ऑनलाइन पेमेंट में प्रोडक्ट कस्टमर के पास पहुंचने के बाद सेलर यानी कारोबारी के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

हैंडीक्राफ्ट का एक्सपोर्ट में भी है बड़ा बाजार

एक्सपोर्ट प्रमोशन कांउसिल ऑफ हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) के एक्जक्यूटिव डायरेक्टर राकेश कुमार ने बताया कि अमेरिका, अफ्रीकी, यूरोपीय देश जर्मनी, इटली, फ्रांस, हांगकांग, नीदरलैंड, डेनमार्क, स्पेन, फ्रांस, चीन, वियतनाम और बेल्जियम में हैंडीक्राफ्ट का बड़ा बाजार है। ईपीसीएच के फेयर में हिस्सा लेकर हैंडीक्राफ्ट कारोबारी अपने लिए एक्सपोर्ट की मार्केट खोल सकते हैं। यहां विदेशी बायर आते हैं जो बल्क में ऑर्डर देकर जाते हैं।

कैसे करे हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट

हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट करने कि लिए बेहतर होगा आप एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट से जुड़़े। इनकी वेबसाइट पर जाकर अपने आप को रजिस्टर करवाएं और मेंबरशिप लें। मेंबरशिप लेने की फीस है लेकिन इससे आपको इंडस्ट्री के अपडेट मिलेंगे। नए एक्सपोर्टर को कारोबार कैसे और कहां से शुरू करना है, इसमें काउंसिल मदद करता है।

सरकार देती है एक्सपोर्टर्स को बेनेफिट

सरकार एक्सपोर्टर को क्या बेनेफिट दे रही है और कैसे इसका फायदा उठाए जाए। एक्सपोर्ट में काउंसिल बी2बी बिजनेस के साथ बी2सी कारोबार के लिए फेयर आयोजित करता है। विदेशों में होने वाले लेदर फेयर में एक्सपोर्टर को लेकर जाती है।

इसमें मेंबर को पहले तरजीह दी जाती है। ईबे, फ्लिपकार्ट, पेपरफ्राई, अरबन लैदर, क्राफ्टविला जैसी 10 से 15 ईकॉमर्स शॉपिंग वेबसाइट हिस्सा लेती हैं। आपको भी ऐसे इवेंट के साथ जुड़कर बायर्स मिल सकते हैं। गुजरात, राजस्थान, हिमाचल की राज्य सरकार भी ईबे, स्नैपडील जैसी कंपनियां हैंडीक्राफ्ट के लिए समझौते कर रही है।

रीटेल और होलसेल बाजार में कर सकते हैं सप्लाई

विल्स लाइफस्टाइल, ईजी डे, इवोक जैसे रीटेल स्टोर के अलावा रीटेल और होलसेल बाजार में हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट सप्लाई कर सकते हैं। फेसबुक, गूगल प्लस, ब्लॉग के जरिए भी कर सकते हैं प्रचार आप अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आजकल बहुत सारे सेलर्स बिक्री बढ़ाने के लिए फेसबुक पेज बना रहे हैं। अब सोशल मीडिया माउथ टू माउथ प्रमोशन का काम करता है।

1299 रुपए में मि‍ल रहे हैं 3200 रु वाले शूज

गर्मी का मौसम अलग ही फैशन लेकर आता है। यही कारण है कि‍ ई-काॅमर्स कंपनि‍यां लगातार छूट दे रही हैं। ऐसे में TataCliq पर शुरू हुुुई है शूज की सेल। इस सेल में आप अपनी पसंद के शूज खरीद सकते हैं। क्‍योंकि‍ यहां हर शूज पर मि‍ल रही है 71% तक की छूट। इस सेल मेें puma और redtape के शूज पर मि‍ल रही है भारी छूट।

इसके अलावा ऑनलाइन साइट से शॉपि‍ंग करने का एक फायदा और है कि‍ इसके लि‍ए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे या ऑफि‍स में बैठे ही ऑर्डर कर सकते हैं।

Puma Velocity IDP White & Black Running Shoes

कहां – Tatacliq.com

क्‍या है डील

  • MRP – 3,299 रुपए
  • डील प्राइस – 1,299 रुपए
  • डि‍स्‍काउंट – 61%

Bond Street by Red Tape Brown Derby Shoes

कहां – Tatacliq.com

क्‍या है डील

  • MRP – 2,895 रुपए
  • डील प्राइस – 1,157 रुपए
  • डि‍स्‍काउंट – 61%

Red Tape Dark Brown Derby Shoes

कहां – Tatacliq.com

क्‍या है डील

  • MRP – 4,195 रुपए
  • डील प्राइस – 1,258 रुपए
  • डि‍स्‍काउंट – 71%

Red Tape Navy Athleisure Walking & Running Shoes

कहां – Tatacliq.com

क्‍या है डील

  • MRP – 3,995 रुपए
  • डील प्राइस – 1,997 रुपए
  • डि‍स्‍काउंट – 51%

Red Tape Dark Brown Loafers

कहां – Tatacliq.com

क्‍या है डील

  • MRP – 4,495 रुपए
  • डील प्राइस – 1,348 रुपए
  • डि‍स्‍काउंट – 71%

आम आदमी क्यों सहे पेट्रोल-डीजल का सारा बोझ, जब सरकार के पास है रास्ता

पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। राजधानी दिल्‍ली में मंगलवार को पेट्रोल 76.87 रुपए और डीजल 68.08 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। ऊंची कीमतों के चलते सरकार पर लगातार इस बात का दबाव है कि वह कीमतों में कटौती करे। हाल में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान से संकेत मिला है कि वह एक्‍साइज ड्यूटी घटाकर थोड़ी राहत दे सकती है।

अक्‍टूबर 2017 में सरकार ऐसा कर भी चुकी है। 2014 में क्रूड की कीमतें नीचे जाने के बाद मोदी सरकार ने 1 दर्जन से ज्‍यादा बार पेट्रोल-डीजल पर एक्‍साइज ड्यूटी बढ़ाई थी। अब कीमतें ऊपर जाने के बाद वह खामोश है। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कीमतों का सारा बोझ उपभोक्‍ताओं पर डालना सही नहीं है।

एक्‍साइज ड्यूटी कम करने का यही समय है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि ऐसे समय में जब सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की जीतोड़ कोशिश कर रही है तो एक्‍साइज ड्यूटी कम करने की गुंजाइश कहां तक है। एक विकल्‍प यह हो सकता है कि सरकार बैठकर क्रूड की कीमतें कम होने का इंतजार करे। पर क्‍या अंतराष्‍ट्रीय हालात ऐसे हैं कि इंतजार किया जा सकता है।

ऐसा पहली बार भी नहीं हुआ जब सरकार के सामने इस तरह का संकट आया है, उसके पास आखिर लॉन्‍च टर्म का प्‍लान क्‍या होना चाहिए। पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट की बड़ी कीमतों ने आम लोगों के मन में कई सवाल पैदा कर दिए हैं। मनीभास्‍कर की खास खबर में पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और इससे अन्‍य पहलुओं की पड़ताल करते हैं।

3 महीने में कहां पहुंची कीमत ?

रिटेल प्राइस

अगर बीते 3 महीनों की बात करें तो पेट्रोल की खुदरा कीमतों में करीब 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक, 1 मार्च को राजधानी दिल्‍ली में पेट्रोल की कीमतें 71.57 रुपए प्रति लीटर पर थीं, ये अब बढ़कर 76.87 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच चुकी हैं। 1 मार्च को डीजल की कीमतें 62.25 रुपए प्रति लीटर पर थीं, जो अब बढ़कर 67.82 रुपए प्रति लीटर के लेवल पर आ गई हैं।

इंटरनेशनल प्राइस

क्रूड की कीमतों में भी लगातार तेजी देखी गई है। मार्च की शुरुआत में कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। तेजी से बदले अंतरराष्‍ट्रीय हालात, कोरिया संकट, ट्रेड वॉर, ईरान संकट के चलते बढ़ी डिमांग, ओपेक और गैर ओपेक देशों की ओर से एक साथ प्रोडक्‍शन कट के चलते कीमतें लगातार बढ़ती गई। यह मई के दूसरे हफ्ते में 80 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया, इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा।

कंपनियां क्यों तेजी से बढ़ा रही हैं दाम ?

असल में तेल कंपनियों ने कर्नाटक चुनाव के लिए मतदान होने से पहले करीब तीन हफ्ते से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा था। 12 मई को कर्नाटक में मतदान हुआ। उसके बाद 14 मई को तेल कंपनियों ने फिर से कीमतों की रोज समीक्षा शुरू कर दी।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 19 दिन तक बदलाव नहीं करने से तेल कंपनियों को करीब 500 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। क्‍योंकि, अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से उनकी लागत में इजाफा हुआ। ऐसे में कर्नाटक चुनाव के पहले वाले मार्जिन पर जाने के लिए तेल कंपनियां तेजी से दाम बढ़ा सकती हैं।

कैसे 39 का पेट्रोल हो जाता है 76 रुपए लीटर

पेट्रोल-डीजल की बात करें तो उस पर लगने वाला टैक्स उसकी वास्तविक कीमत से ज्यादा होता है। मसलन अगर 78-79 डॉलर प्रति बैरल क्रूड का प्राइस है और डॉलर के मुकाबले रुपया 68 की रेंज में है तो 1 लीटर पेट्रोल की कीमत दिल्ली में करीब 39-40 रुपए होगी।

इसमें डीलर कमीशन भी शामिल है। वहीं, इस पर 27 फीसदी वैट यानी 11 रुपए रु का टैक्स इसके अलावा 23.40 रुपए के आस-पास एक्साइज ड्यूटी लगेगी। यानी कुल टैक्स का 60 फीसदी एक्साइज ड्यूटी होगी। इस तरह से 39 रुपए का पेट्रोल करीब 76 रुपए का हो जाएगा। इसी तरह से डीजल के मामले में भी आम आदमी को वास्तविक के बराबर ही टैक्स देना होता है जो सरकार के खजाने में जाता है।

कितना बढ़ा टैक्‍स ?

अगर सितंबर 2014 के बाद से बात करें तो अब तक सिर्फ डीजल पर 17.33 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्‍त टैक्‍स बढ़ाया जा चुका है। इसमें पिछले साल अक्‍टूबर में मात्र 2 रुपए की कमी की गई है। टैक्‍स में यह कमी पेट्रोल में भी की गई थी।

माना जा रहा है कि मात्र 2 रुपए की इस कमी से सरकारी खजाने को 26,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। अब भी जितनी कीमत पर पेट्रोल बिक रहा है, उसमें आधे से ज्‍यादा हिस्‍सा टैक्‍स का ही है, जो सरकार वसूलती है। अगर दिल्‍ली की बात करे कि बिना टैक्‍स के 19 अप्रैल को पेट्रोल की कीमतें मात्र 35.20 रुपए पड़ रही हैं, जबकि यह 74.10 रुपए के आसपास बिक रहा था।

कीमतों में कमी करने के विकल्‍प

लॉन्‍ग टर्म

सरकार एनर्जी के सस्‍ते, लंबे और टिकाऊ श्रोतों जैसे सोलर, विंड और न्‍यूक्लियर एनर्जी के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हो। इससे एक ओर जहां पेट्रोलियम की डिमांड कम होगी, वहीं दूसरी ओर इम्‍पोर्ट पर निर्भरता कम होगी।

मिड टर्म

बॉयोफ्यूल (एथेनॉल) का ज्‍यादा से ज्‍यादा यूज। भारत में अब भी 2 फीसदी के आसपास एथेनॉल पेट्रोल-डीजल में मिलाया जा रहा है। जबकि सरकारी मंजूरी 10 फीसदी है। अमेरिका जैसे देश में करीब 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाया जाता है। हालांकि भारत में इससे जुड़ी इंडस्‍ट्री नहीं होने के कारण इस दिशा में खास प्रगति नहीं हो पाई है।

शार्ट टर्म

सरकार एक्‍साइज ड्यूटी में कमी करे। राज्‍य सरकारें वैट घटाएं या फिर ऑयल कंपनियां घाटा सहें। या फिर सरकार सब्सिडी के पुराने फार्मूले को फिर से लागू करे। मौजूदा समय में सबसे ज्‍यादा इसी की उम्‍मीद की जा रही है।

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट

उपभोक्‍ता पर नहीं डाल सकते पूरा बोझ

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के चीएफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी ने बताया कि ऐसे समय में जब तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं तो सरकार इसका पूरा बोझ उपभोक्‍ताओं पर नहीं डाल सकती है। सरकार को डीजल पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती करनी चाहिए।

जब अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें गिर रहीं थी तब सरकार ने एक्‍साइज ड्यूटी बढ़ाई थी। अब जब कीमतें बढ़ रही है तो सरकार को एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती करके उपभोक्‍ताओं को राहत देनी चाहिए। हालांकि सरकार के सामने इससे वित्‍तीय मोर्च पर चुनौतियां खड़ी होंगी।

इससे सरकार के लिए वित्‍तीय घाटे को नियंत्रित करना मुश्किल होगा। अब यह सरकार पर है कि वह इसे कैसे मैनेज करती है। सरकार को उपभोक्‍ताओं को राहत देने के लिए कहीं न कहीं तो सैक्रीफाइस करना ही होगा।

इन वजहों से बढ़ रही कीमतें

ईरान संकट

अमेरिका ने ईरान के साथ 2015 में की गई परमाणु डील तोड़ ली है। इसके चलते सप्‍लाई में अवरोध का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते क्रूड की कीमतें ऊपर जा रही हैं। इसका असर भारत में दिख रहा है।

अमेरिका का रुख

चीन के साथ ट्रेड वॉर, सीरिया में जारी तनाव, रूस के साथ अनबन जैसे अमेरिका के कई कदमों के चलते अंतराष्‍ट्रीय स्‍तर पर जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने का खतरा हो गया है। सप्‍लाई बाधित होने की आशंका लगातार क्रूड की कीमतों को बढ़ा रही है। यहां तक की ईरान के साथ परमाणु डील तोड़ने का कसूरवार भी कहीं न कहीं पश्चिमी देश अमेरिका को ही मान रहे हैं। एनर्जी एक्‍सपर्ट नरेंद्र तनेजा भी मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी का कूसरवार अमेरिका को ही मान रहे हैं।

ओपोक और रूस का प्रोडक्‍शन कट

कीमतें 50 डॉलर से नीचे जानें के बाद से ही ओपेके और अन्‍य देश कीमतों को ऊपर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि के दिनों में इसमें सहमति बन गई है। इसके चलते जहां एक तरफ जहां क्रूड के प्रोडक्‍शन में कमी आ रही है तो वहीं दूसरी ओर जियो पॉलिटिकल टेंशन डिमांड में कमी नहीं होने दे रहा है। कमजोर प्रोडक्‍शन और मजबूत डिमांड कीमतों को नीचे नहीं आने दे रहे हैं।

भविष्‍य के क्‍या हैं संकेत ?

क्रूड

  • 85 डॉलर का बैरियर पार कर सकता है क्रूड

एक्‍सपर्ट का मानना है कि क्रूड की कीमतें मौजूदा के 80 डॉलर प्रति डॉलर के लेवल से आगे बढ़कर 85 डॉलर का बैरियर तोड़ सकता है। केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, आने वाले दिनों में क्रूड 85 से 86 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।

ग्लोबल एजेंसी मॉर्गन स्टैनली के अनुसार क्रूड का कंसर्न अभी 2 साल और बना रहेगा और 2020 में यह 90 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर सकता है। मतलब साफ है, पेट्रोलियम को लेकर मोदी सरकार पर दबाव आगे भी बना रहेगा।

पेट्रोल-डीजल

  • 90 रुपए प्रति लीटर पार हो सकता है पेट्रोल

अजय केडिया का कहना है कि क्रूड मौजूदा लेवल से आगे कम से कम 7 से 8 फीसदी महंगा हो सकता है। वहीं, कंसर्न बढ़ा तो 10 फीसदी महंगा हो सकता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के भाव 6 रुपए से 8 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं।

अगर पेट्रोल में 6 से 8 रुपए की बढ़ोत्तरी होती है तो मुंबई में इसकी कीमतें 90 रुपए प्रति लीटर के पार जा सकती हैं। मुंबई में अभी पेट्रोल 84.70 रुपए प्रति लीटर है। वहीं, दिल्ली में पेट्रोल 80 रुपए प्रति लीटर पार कर जाएगा। दिल्ली में अभी पेट्रोल की कीमत 76.87 रुपए प्रति लीटर है।

कीमतें बढ़ने का असर

  • आम लोगों की जेब होगी ढ़ीली

दरअसल पेट्रोल की कीमतों से आम लोगों की जेब सीधी ढ़ीली होती है। मौजूदा समय में करीब 80 फीसदी यात्री वाहन पेट्रोल से चलते हैं। ऐसे में रोजाना आधार पर इसका उसर उनकी जेब पर पड़ना तय होता है।

ज्‍यादातर चीजों के कीमतें बढ़ सकती हैं

डीजल की कीमतें सीधा जरूरी चीजों को महंगा कर सकती है। देश में करीब 80 फीसदी माल ढुलाई अब भी ट्रकों के जरिए होती है। ट्रकों में ईंधन का एक मात्र विकल्‍प डीजल है। बीते 4 महीनों की बात करें तो अब तक यह करीब 10 रुपए प्रति लीटर महंगा हो चुका है। कीमतें नहीं कम हुई तो ट्रांसपोर्ट कॉस्‍ट बढ़ेगी और इसका सीधा असर वस्‍तुओं की कीमतों पर पड़ना तय है।

गर्मी से है परेशान तो यहां से खरीदे 5 स्टार AC मात्र 15000 रुपए में

अगर आप अपनी पुरानी एयर कंडिशनर (AC) से परेशान हो गए है या फिर उसमे बार-बार दिक्कत आ रही है तो यह खबर जरूर पढ़ें, क्योंकि आज हम आपको एक ऐसी स्कीम के बारे में बताने जा रहे हैं जहां से पुरानी एसी के बदले नई एसी 47 फीसदी डिस्काउंट पर ले सकते हैं।

दरअसल बिजली कंपनी BSES ने एक स्कीम चलाई है, जहां पुरानी एसी बदलने पर आपको 47 फीसदी डिस्काउंट दिया जा रहा है। तो देर किस बात की जल्दी करिए।

दरअसल, पुरानी एसी में बिजली की खपत बहुत ज्यादा होती है और यही वजह है कि इसे रोकने के लिए BSES ने नई एसी देने की योजना शुरू की है। फिलहाल इसका लाभ सिर्फ वेस्ट दिल्ली के लोग ही उठा सकते हैं। हालांकि इस स्कीम को BYPL के ईस्ट और सेंट्रल दिल्ली के इलाकों में भी शुरू किया जाएगा।

इन कंपनी के एसी पर मिलेगा डिस्काउंट

इस योजना के तहत वोल्टास, एलजी और गोदरेज ब्रैंड के एसी पर ही डिस्काउंट दिया जाएगा। यानी अगर 5 स्टार रेटिंग वाला एसी बाजार में 30000 रुपए का मिल रहा है तो वहीं एसी BSES सिर्फ 15,900 रुपए में आपको देगा।

हालांकि इस स्कीम का लाभ लेने के लिए सबसे पहले ग्राहक को बिजली कंपनी में अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए कंपनी के हेल्पलाइन 0113999970 या टोल फ्री नंबर 19123 करके रजिस्ट्रेशम करा सकते हैं।

बता दें कि कंपनी पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू में 10000 ही एसी बांटेगी। कंपनी का कहना है कि इस योजना के जरिए सालाना 7,500 रुपए की बचत होगी। तो देर किस बात कि आज ही इस स्कीम का लाभ उठाएं और इस तपती गर्मी से राहत पाए।

गोबर से साबुन-तेल बनाता है यह शख्स

गाय का घी, दूध सेहत के लिए अच्छा होता है, इससे तो सभी वाकिफ हैं। वहीं गोबर से खाद और बायो गैस बनाने के बारे में भी सुना होगा। पर आपने कभी सोचा होगा कि आप गोबर औऱ गोमूत्र से बने साबुन से स्नान भी कर सकते हैं।

नहीं तो आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बता रहे हैं, जिसने कचरा और गंदगी समझने वाले गोबर का इस्तेमाल कर करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी है। मुंबई की यह कंपनी गाय के गोबर औऱ गोमूत्र से साबुन, टूथपेस्ट, क्रीम, फेस वॉश के अलावा अन्य कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स बनाती है।

गाय के गोबर-गोमूत्र से बनाते हैं प्रोडक्ट

काउपैथी के फाउंडर उमेश सोनी ने बातचीत में बताया कि गाय के गोबर और गोमूत्र में बीमारियों से लड़ने से कई गुण मौजूद है। आयुर्वेद में भी पंचगाव्य यानी गोमूत्र, गाय का गोबर, दूध, दही और घी से बने प्रोडक्ट से बीमारी को ठीक किए जाने का जिक्र है।

इस महत्व को देखते हुए उन्होंने गाय के गोबर और गोमूत्र से साबुन समेत कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे लोगों में जागरूकता बढ़ने से प्रोडक्ट की मांग बढ़ रही है, जिससे उनका बिजनेस भी ग्रो कर रहा है।

10 लाख रु से की शुरुआत

सोनी ने कहा कि साल 2012 में 10 लाख रुपए के निवेश से काउपैथी की शुरुआत की। यह रकम एक्सपोर्ट के बिजनेस से हुई कमाई की थी। काउपैथी को शुरू करने से पहले उन्होंने एक दोस्त के साथ मिलकर एक्सपोर्ट का बिजनेस शुरू किया था। इसके तहत वो कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करते थे।

गोबर से साबुन बनाने का क्या है प्रोसेस

गाय के गोबर से बनने वाले प्रोडक्ट के बनाए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि हम पहले तेज तापमान में गोबर को सुखाते हैं। गोबर की गंध को मिटाने के लिए उसमें एसेंस ऑयल डालते हैं ताकि उसमें खुशबू आए। ऐसा ही गोमूत्र को उबाल कर अन्य प्रोडक्ट में इस्तेमाल करते हैं।

13 देशों में होता है एक्सपोर्ट

गाय के गोबर से बने साबुन का सोनी ने पेटेंट करा रखा है। उन्होंने कुल चार पेटेंट कर रखे हैं। काउपैथी के गोबर से बने साबुन की कीमत 35 रुपए है। इस साबुन की भारत समेत 13 देशों में एक्सपोर्ट किया जाता है। इसमें यूक्रेन, रूस, अमेरिका, सिंगापुर शामिल है। उनका कहना है कि उनका प्रोडक्ट सभी मानदंडों पर खड़ा उतरता है। एफडीए अप्रूवल के बाद वो प्रोडक्ट मैन्युफैक्चर करते हैं।

5 करोड़ है कंपनी का टर्नओवर

सोनी कहते हैं कि उनकी कंपनी का कुल टर्नओवर 4 से 5 करोड़ रुपए का है। जिसमें काउपैथी का सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपए शामिल है। उनका प्रोडक्ट्स ऑनलाइन भी बिक्री के लिए उपलब्ध है। उन्होंने इसके लिए बिग बास्केट के साथ टाइअप किया है।

वहीं हाईपर सिटी के साथ करार होना था लेकिन इन्वेस्टमेंट ज्यादा होने की वजह से फिलहाल टाल दिया है। उनका लक्ष्य कुछ सालों में कुछ औऱ नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करना है। साथ ही वो अपने बिजनेस में प्रत्येक साल 40 फीसदी ग्रोथ दर्ज करना चाहते हैं।

इस दिन से बेकार हो जाएगा आपका आधार कार्ड

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण(UIDAI) ने आधार को लेकर एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में हैं। यूआईडएआई के इस फैसले के बाद अब आपको आधार कार्ड जेब में लेकर चलने की कोर्इ जरूरत नहीं होगी। क्योंकि अब आपका आधार वर्चुअल पहचान के तौर पर भी उपलब्ध होगा।

कैशलेस अर्थव्यवस्था के बाद अब सरकार वर्चुअल आईडी के इस्तेमाल जोर देने वाल देने जा रही है। सरकार ये कदम आधार की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए ले रही है। सरकार वर्चुअल आधार की सुविधा को 1 जून 2018 से लाने जा रही।

इसके बाद आपकी जेब में पड़ा आधार कार्ड एक तरह से बेकार हो जाएगा यानि आपका काम वर्चुअल आईडी से ही जाएगा। हालांकि आपका आधार पहले की तरह ही वैलिड रहेगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर क्या होता है वर्चुअल आधार और इसके क्या फायदे होंगे। साथ में आगे हम आपको ये भी बताएंगे की कैसे आप अपने आधार को जेनरेट कर सकते है?

क्या होता है वर्चुअल आधार ?

वर्चुअन आधार आपके मौजूदा आधार का डिजिटल फाॅर्म होगा। यह 16 अंकों का एक नंबर होता है। यूआईडीएआई आपको अपने आधार का एक वर्चुअल आईडी तैयार करने का मौका देगी।

यदि आपको कहीं अपना आधार डिटेल देने की आवश्यकता होती है तो आप अपने आधार नंबर की जगह 16 अंकों का वर्चुअल आधार आईडी दे सकते हैं। इसे जनरेट करने की सुविधा आपको 1 जून से मिलेगी।

ऐसे जेनरेट कर सकते हैं अपना वर्चुअल आधार आईडी

इसे आप यूआईडीएआई के पोर्टल से जेनरेट कर सकते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार यदि आप अपना वर्चुअल आधार का जेनरेट करते हैं तो ये एक दिन के लिए ही वैलिड होता है। अगले दिन प्रयोग करने के लिए इसे आपको फिर से जेनरेट करना होगा।

आपको बता दें कि ये सिर्फ यूआईडीएआई के पोर्टल से ही जेनरेट किया जा सकता है। आपको यूआईडीएआई के पोर्टल पर जाकर अपना आधा नंबर डालना होगा जिसके बाद आपके फोन पर एक वन टाइम पासवड यानि की ओटीपी आएगा।

इस ओटीपी को रिक्त स्थान पर भरने के बाद आपको अपना वर्चुअल आधार जेनरेट करने को विकल्प मिलेगा। इसके जेनरेट होने के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर 16 अंकों का एक कोड मिलेगा। ये कोड ही आपका वर्चुअल आधार आईडी होगी।

वर्चुअल आधार आईडी के क्या होंगे फायदे

यदि कहीं आपको अपने आधार नंबर के सत्यापन की आवश्यकता होती है तो आप इसे 16 अंकों के कोड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस नए आईडी से आपका नाम, पता और फोटोग्राफ जैसी कई चीजों का सत्यापन भी हो जाएगा। यदि आप एक से अधिक बार अपना वर्चुअल आईडी जेनरेट करते हैं तो पुरानी आईडी अपने आप ही कैंसिल हो जाएगी।

भूखों को हर रोज़ खाना खिलाता है ये शख्‍स, कहता है- ‘भूख का कोई मजहब नहीं होता’

फ्लाईओवर के नीचे थालियां लेकर चटाई पर बैठे बेघरों, भिखारियों, कचरा बीनने वालों और मजदूरों को रोज दोपहर किसी के आने का इंतजार रहता है. जैसे ही 12:30 बजता है एक दुबला-पतला आदमी वहां आता है और सबकी थाली में गरम-गरम चावल और दाल परोसना शुरू कर देता है.

हैदराबाद के दबीरपुरा फ्लाईओरवर के पास रोज यह नजारा 2012 से देखा जा रहा है. ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरता है जब शहर के इस फ्लाईओवर के नीचे खड़ी इस भीड़ को दोपहर का खाना नहीं मिलता हो और यह आदमी उन्हें भोजन नहीं परोसता हो.

यह आदमी कोई और नहीं बल्कि सैयद उस्मान अजहर मकसुसी हैं जिन्होंने पिछले छह साल से भूखों और जरूरतमंदों की भूख मिटाना अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया है. इनका एक नारा है कि भूखों का कोई मजहब नहीं होता है.

चार साल की उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ जाने के पाद खुद भूखे रहने की पीड़ा झेल चुके अजहर भूखों का दर्द समझते हैं. इसलिए वह उनके कष्टों को दूर करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं.

इसी फ्लाईओवर के नीचे छह साल पहले एक दिन उन्हें एक बेघर औरत मिली जिनसे भूखों को खाना खिलाने का काम शुरू करने की प्रेरणा मिली.

36 साल के अजहर ने उस वाकये को याद करते हुए कहा, ‘लक्ष्मी भूख से छटपटा रही थी. वह बिलख-बिलख कर रो रही थी. मैंने उसे खाना खिलाया और तभी फैसला किया कि मेरे पास जो सीमित संसाधन है उससे मैं भूखों की भूख मिटाऊंगा.’

शुरुआत में उनकी पत्नी घर में ही खाना पकाती थीं और वह फ्लाईओवर के पास खाना लाकर भूखे लोगों को परोसते थे. बाद में उन्होंने वहीं खाना तैयार करना शुरू कर दिया. इससे किराये की बचत हुई.

अजहर ने कहा, ‘शुरुआत में 30-35 लोग यहां होते थे मगर आज 150 से ज्यादा हैं, जिन्हें मैं रोज खाना खिलाता हूं. अजहर की एक संस्था है जो अब इस काम का संचालन करती है. संस्था का नाम है ‘सनी वेल्फेयर फाउंडेशन’. संस्था ने आज खाना पकाने के लिए दो रसोइयों को रखा है.’

तीन साल पहले उन्होंने यहां के अलावा सिकंदराबाद स्थित गांधी अस्पताल में भी भूखों को खाना खिलाने का काम शुरू कर दिया. फाउंडेशन की वैन में रोज 150-200 लोगों का खाना यहां से जाता है. फाउंडेशन कुछ एनजीओ के साथ मिलकर बेंगलुरु, गुवाहाटी, रायचूर और तांदुर शहर में रोजाना आहार कार्यक्रम का संचालन करता है.

अजहर को खुशी है कि जो काम उन्होंने अकेले शुरू किया था आज उसके साथ कारवां सज गया है और अनेक लोग व संगठन उनके काम से प्रेरित हुए हैं. अजहर को इससे अपनी कामयाबी का अहसास होता है. हालांकि उनका मानना है कि सपना तभी साकार होगा जब इस देश से और दुनिया से भूख मिट जाएगी. भूख नाम की कोई चीज नहीं होनी चाहिए.

दबीरपुरा फ्लाईओवर के पास उनकी प्लास्टर ऑफ पेरिस की दुकान है जहां वह हर दिन सुबह और शाम कुछ घंटे बिताते हैं. उन्होंने कहा, ‘बाकी समय मैं दोनों जगहों पर भोजन की व्यवस्था में लगा रहता हूं. अजहर को इस काम में उनके भाई और परिवार के अन्य सदस्यों के अलावा कुछ कार्यकर्ता वीकऐंड में उनका हाथ बंटाते हैं.

अजहर अपनी दुकान में बैठे थे तभी एक दानदाता तीन बोरी चावल लेकर एक दोपहिया वाहन से उतरे. अजहर ने खुद वाहन से बोरियां उतारीं.

पिछले महीने उनको बॉलीवुड अभिनेता सलमान ने अपने कार्यक्रम ‘बीइंग ह्यूमन’ में हिस्सा लेने के लिए मुंबई बुलाया था. उनका चयन देशभर के छह ऐसे लोगों में किया गया था, जो वास्तविक जीवन में नायक हैं. अजहर ने सलमान के साथ बातचीत की और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई.

इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता अजहर ‘आज की रात है जिंदगी’ में शामिल हुए थे जिसकी मेजबानी मेगास्टार अमिताभ बच्चन कर रहे थे. विभिन्न संगठनों ने भी उनको सम्मानित किया है. हालांकि अजहर आज भी जमीन से जुड़े हैं और कहते हैं, ‘मुझे कोई दफ्तर या कर्मचारी की जरूरत नहीं है. मेरे लाइफस्‍टइाल में कोई बदलाव नहीं आया है.’

अजहर किसी से पैसे नहीं मांगते हैं. उन्होंने कहा, ‘जो लोग चावल और दाल लेकर आते हैं उनका दान मैं स्वीकार कर लेता हूं. मैं किसी से नकद में पैसे नहीं लेता बशर्ते कि दानदाता चावल या दाल देने की स्थिति में न हो.’

अजहर के पिता ऑटो चलाते थे. उन्होंने कहा, ‘जब मैं महज चार साल का था तभी मेरे पिता चल बसे. चार भाई-बहनों में मैं तीसरे नंबर पर हूं.’

उन्होंने पांचवी कक्षा में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और मजदूरी करने लगे थे.

अजहर ने कहा, ‘हम अपने दादा के घर रहते थे. उनको बड़े परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती थी. हमें दिन में एक बार खाना मिलता था. कभी-कभी वह भी नहीं मिलता था. लेकिन परिस्थितियां जो भी हों हमें अल्लाह का शुक्रगुजार बने रहना चाहिए.’

अजहर को सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां से मिली. वह मानते हैं कि अल्लाह ही गरीबों के लिए उनके मार्फत भोजन की व्यवस्था करता है.

टिप्पणियां अजहर ने कहा, ‘मैं यह नहीं देखता कि कौन खाने को आ रहा है. मैं बस यही जानता हूं कि सभी भूखे हैं. यही उनका ठिकाना है. दाने दाने पे लिखा है खाने वाले का नाम.’

कार के अंदर लॉक हो गया है कोई तो इस ट्रिक से एक मिनट में अनलॉक करें दरवाजे

अभी हाल ही में देश से एक ऐसी घटना सामने आयी थी जिसने कार चलाने वाले सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया था। बता दें कि एक शख्स के दो मासूम बच्चे कार के अंदर अनलॉक हो गए थे बाद में दम घुटने से इनकी मौत हो गयी थी।

कोई भी बाहर से इन दरवाजों को नहीं खोल पाया था क्योंकि ये लॉक थे। आज हम आपको ऐसी किसी दुर्घटना से बचने का उपाय बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप बिना कांच तोड़े बस एक मिनट में कार का दरवाजा खोल सकते हैं।

ऐसा आपके साथ कई बार हुआ होगा जब आप अपनी कार की चाभी कार के अंदर ही भूल जाते हैं और तब तक दरवाजा लॉक हो जाता है। ऐसी किसी भी अवांछनीय स्थिति से निपटने के लिए आज हम आपको एक कमल की तरकीब के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप अपनी कार को सिर्फ एक मिनट में अनलॉक कर सकते हैं।

ऐसे अनलॉक करें कार के डोर

इसके लिए आपको पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। आपको करना बस ये है कि अगर आपकी कार का दरवाजा लॉक हो जाता है तो सबसे पहले घर में पड़ी हुई एक बड़ी स्टील वाली स्केल ले आइये अब आपको इसे थोड़ा सा मोड़ना है जिससे ये थोड़ी से कर्व शेप की हो जाए। इसके बाद आपको कुछ नहीं करना है बस अपनी कार के दरवाजे शीशे की तरफ से इस स्केल को कार के लॉक तक नीचे धकेलना है।

यह काम आपको बस एक मिनट तक करना होगा और बस जैसे ही ये स्केल कार के लॉक से टच होगी आपकी कार का लॉक खुल जाएगा फिर आप कार के अंदर फंसे हुए अपने करीबी या किसी रिश्तेदार को बाहर निकाल सकते हैं। यह तकनीक इतनी कारगर है कि इसे करने में एक मिनट से भी कम का समय लगता है लेकिन इस तरकीब से आप किसी की जान भी बचा सकते हैं।