इस राज्य में दूध से महंगा बिक रहा है गौमूत्र, किसानों को बढ़ सकता है मुनाफा

किसानों के लिए डेयरी उद्दोग भी एक अच्छी आमदनी का जरिया बनता जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में किसानों के बीच डेयरी उद्दोग रफतार पकड़ता दिखाई दिया है.

एसे कई उदाहरण देखन को मिले हैं जिसमें युवाओं ने मल्टीनेश्नल कंपनी की जॉब छोड़कर डेयरी उद्दोग को व्यवसाय के तौर पर अपनाया है. वहीं डेयरी किसान गायों के जरिए कई तरह से कमाई कर सकते हैं यह बात तो लगभग सभी डेयरी किसानों ने सुना है. और यह बात सच भी साबित हो रही है.

राजस्थान के डेयरी किसान अब गाय के दूध को नहीं बल्कि गौमूत्र को भी अपनी मुनाफे का जरिया बना रहे हैं… गौमूत्र की मांग इतनी ज्यादा बढ़ रही है कि किसान थोक बाजार में गिर और थारपारकर जैसी हाई ब्रीड गायों के मूत्र को बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं.

किसान गौमूत्र को 15 से 30 रुपए प्रति लीटर पर बेच रहे हैं. वहीं राज्य में गाय के दूध की कीमत 22 से 25 रुपए प्रति लीटर ही है. किसान गौमूत्र उन किसानों को बेच रहे हैं जो किसान जैविक खेती करते हैं. किसान ऐसा मान रहे हैं कि जब से वह गौमूत्र बेच रहे हैं तब से उनकी कमाई लगभग 30 प्रतिशत बढ़ गई है.

जैविक खेती करने वाले किसान गौमूत्र का प्रयोग कीटनाशकों के विकल्प में करते हैं… इसके साथ ही लोग औषधिक उद्देश्यों और अनुष्ठानों में भी इसका उपयोग करते हैं. राज्य में ऐसे एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी भी हैं जो गौमूत्र का प्रयोग अपने ऑर्गेनिक फार्मिंग प्रोजेकेट के लिए करती हैं और लगभग हर महीने 300 से 500 लीटर गौमूत्र का प्रयोग करते हैं.

खुशखबरी ! इस राज्य सरकार ने किसानों को बिजली बिल में बड़ी राहत देने का किया ऐलान

किसानों को राहत और फसल के उत्पादन में बढ़ावा देने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर से समय -समय पर विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कृषि से जुड़ी सुविधाओं में सब्सिडी दी जाती है. इसी कड़ी में दिल्ली के किसानों को दिल्ली सरकार की ओर से बिजली बिल में बड़ी रहत देने की घोषणा की गई है.

दरअसल केजरीवाल कैबिनेट के ऊर्जा मंत्री ने बताया है कि राज्य के किसानों के फिक्स चार्ज पर 100 रुपये प्रति किलोवाट की सब्सिडी दी जाएगी. गौरतलब है कि किसानों के द्वारा लंबे समय से यह मांग की जा रही थी. दिल्ली में वर्तमान समय में तक़रीबन 20,000 किसान है. जिन्हे अब सरकार के इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी.

बता दे कि विधानसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार को आम आदमी पार्टी के विधायक गुलाब सिंह ने यह मामला उठाते हुए कहा कि ‘राजधानी के किसानों को बिजली बिल से राहत देने के लिए नलकूप के कनेक्शन पर सब्सिडी दी जानी चाहिए. जो कि अभी नलकूप के कनेक्शन पर 120 रुपये प्रति किलोवाट का फिक्स चार्ज लिया जाता है.

गुलाब सिंह ने आगे कहा कि पहले से परेशान किसानों पर बिजली बिल की बड़ी मार है. इसके बाद दिल्ली सरकार में ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने सदन को बताया कि ‘किसानों को प्रति किलोवाट 100 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इसका शासनादेश 10 दिनों के अंदर जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में किसानों को इसका लाभ मिलेगा.

सरकारी आकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में 20497 किसान परिवार है इनमे से तक़रीबन 15,000 किसान लघु और सीमांत किसान है. राजधानी में 5 किलोवाट से ज्यादा भर पर नलकूप का कनेक्शन दिया जाता है.

मशरुम गर्ल ने उत्तराखंड में ऐसे खड़ी की करोड़ों रुपए की कंपनी, हजारों महिलाओं को दिया रोजगार

हिला किसान की बात करने पर लोगों के जेहन में अभी तक सिर्फ महिला मजदूरों की तस्वीर आती थी, लेकिन कुछ महिलाएं सफल किसान बनकर इस भ्रम को तोड़ रही है। उत्तराखंड की दिव्या रावत मशरूम की खेती से सालाना एक करोड़ से ज्यादा की कमाई करती है, उनकी बदौलत पहाड़ों की हजारों महिलाओं को रोजागार भी मिला है।

पलायन रोकने के लिए दिल्ली से लौटी उत्तराखंड

उत्तराखंड राज्य के चमोली (गढ़वाल) जिले से 25 किलोमीटर दूर कोट कंडारा गाँव की रहने वाली दिव्या रावत दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही थी, लेकिन पहाड़ों से पलायन उन्हें परेशान कर रहा था, इसलिए 2013 में वापस उत्तराखंड लौटीं और यहां मशरूम उत्पादन शुरु किया।

दिव्या फोन पर गांव कनेक्शन को बताती हैं, “मैंने उत्तराखंड के ज्यादातर घरों में ताला लगा देखा।चार-पांच हजार रुपए के लिए यहां के लोग घरों को खाली कर पलायन कर रहे थे जिसकी मुख्य वजह रोजगार न होना था। मैंने ठान लिया था कुछ ऐसा प्रयास जरुर करूंगी जिससे लोगों को पहाड़ों में रोजगार मिल सके।

करोड़ों का टर्नओवर करती है दिव्या की कंपनी

दिव्या रावत बताती हैं, “वर्ष 2013 में तीन लाख का मुनाफा हुआ, जो लगातार कई गुना बढ़ा है। किसी भी साधारण परिवार का व्यक्ति इस व्यवसाय की शुरुवात कर सकता हैं । अभी तक 50 से ज्यादा यूनिट लग चुकी हैं जिसमे महिलाएं और युवा ज्यादा हैं जो इस व्यवसाय को कर रहे हैं ।”

मशरूम की बिक्री और लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए दिव्या ने मशरूम कम्पनी ‘सौम्या फ़ूड प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी’ भी बनाई है। इसका टर्नओवर इस साल के अंत तक करीब एक करोड़ रुपए सालाना का हो जाएगा।दिव्या खुद तो आगे बढ़ी ही हजारों और लोगों को मशरूम की खेती के लिए प्रेरित भी किया। उन्होंने लोगों को भी मशरूम का बाजार दिलवाया।

पहाड़ों पर मशरुम 150 से 200 रुपये में फुटकर में बिकता है। ये लोग अब सर्दियों में बटन, मिड सीजन में ओएस्टर और गर्मियों में मिल्की मशरूम का उत्पादन करते हैं। बटन मशरूम एक महीने में ओएस्टर 15 दिन में और मिल्की मशरूम 45 दिन में तैयार हो जाता है।

पहाड़ों के जिन घरों में लटके थे ताले अब वहां उग रहे हैं मशरूम

स्थानीय लोग 4000 से 5000 की नौकरी के लिए  दिल्ली जैसे शहर भाग रहे थे। दिव्या की बातों में दम भी है। रोजगार के लिए पहाड़ों से पलायन करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट की माने तो पिछले 17 वर्षों में करीब 20 लाख लोग उत्तराखंड को छोड़कर बड़े शहरों में रोजी-रोटी तलाश रहे हैं।

दिव्या की बदौलत अब इनमें से हजारों घरों में लोग 10-15 हजार रुपये की कमाई करते हैं। मशरूम ऐसी फसल है जिसमें लागत काफी कम आती है। 20 दिन में उत्पादन शुरु हो जाता है और करीब 45 दिन में ही लागत निकल आती है। दिव्या ने मशरूम की खेती को इतना सरल कर दिया है कि हर व्यक्ति इसे कर सकता है। पहाड़ों की हजारों महिलाएं उगाने लगी हैं मशरुम।

उत्तराखंड सरकार ने बनाया मशरुम की ब्रांड अंबेसडर

उत्तराखंड सरकार ने दिव्या के इस सराहनीय प्रयास के लिए उसे ‘मशरूम की ब्रांड एम्बेसडर’ घोषित किया। दिव्या और उनकी कंपनी अब तक उत्तराखंड के 10 जिलों में मशरूम उत्पादन की 53 यूनिट लगा चुके हैं।

एक स्टेंडर्ड यूनिट की शुरुवात 30 हजार रुपये में हो जाती है जिसमे 15 हजार इन्फ्रास्ट्रक्चर में खर्च होता है जो दसियों साल चलता है, 15 हजार इसकी प्रोडक्शन कास्ट होती है।दिव्या कहती हैं, हम लोग, लोगों को रोजगार नहीं देते बल्कि उन्हें सक्षम बनाते हैं गांव-गांव जाकर लोगों को ट्रेनिंग दी है। अब इन यूनिट की संख्या करीब 500 पहुंच जाएगी।”

सड़क पर खुद खड़ी होकर बेचती हैं मशरुम

ब्रांड अम्बेसडर होने के बावजूद वो रोड खड़े होकर खुद मशरूम बेचती हैं, जिससे वहां की महिलाओं की झिझक दूर हो और वो खुद मशरूम बेंच सके।

ये महिलाएं अंडे के छिलके से कर रही है लाखों की कमाई ,अपनाया ये तरीका

अंडा खाने के बाद अक्सर हम छिलके फेंक देते हैं क्योंकि इसे किसी काम का नहीं माना जाता है. वहीं छत्तीसगढ़ की महिलाएं बेकार समझकर फेंक दिए जाने वाले अंडे के छिलके से हर साल लाखों कमा रहीं हैं… आइए जानते हैं कैसे..

ये बात जानकर आप जरूर हैरान रहे गए होंगे कि आखिर कैसे ये महिलाएं अंडे के छिलके से अपनी मोटी कमाई कर रही है. बता दें, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की ये महिलाएं इन अंडे के छिलकों को खाद के रूप में बदलकर मोटा पैसा कमा रही हैं. आय के लिए उनका निकाला हुआ ये तरीका बेमिसाल है.

ऐसे करती हैं अंडे का छिलके का प्रयोग

जब महिलाओं ने देखा कि अंडे के छिलकों को लोग फेंक देते हैं तो उन्होंने इनका रिसाइकल करने के बारे में सोचा. आज ये महिलाएं अंडे के छिलकों से ‘कैल्शियम पाउडर’ और ‘खाद’ बना रही है. इसकी ट्रेनिंग उन्हें पर्यावरणविद सी. श्रीनिवासन दे रहे हैं. आपको बता दें, श्रीनिवासन एक ऐसे पर्यावरणविद हैं जो पिछले कई सालों से अपशिष्ट पदार्थों को रिसाइकल कर उन्हें काम का बनाने का काम कर रहे हैं.

कैसा होता है अंडे के छिलके से बना पाउडर

जो पाउडर अंडे के छिलकों से तैयार किया जाता है वह मुर्गियों के खाने में मिला दिया है. जिससे उनके भोजन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है साथ मुर्गियां तंदरुस्त रहती हैं. वहीं पोल्ट्री सेंटर के मैनेजर का कहना है कि महिलाओं के इस काम से पशुपालन में काफी मदद मिल रही है. जहां महिलाएं ऐसा करके पैसे कमा रही है वहीं बेकार पड़ी चीजों का सही निपटान हो रहा है.

वहीं एक ओर अंडे के छिलके से खाद बनाई जा रही है. श्रीनिवासन ने बताया- बेकार पड़ी सब्जियों और हरे कचरे से खाद बनाना आसान होता है, लेकिन अंडे के छिलकों से खाद बनने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है. वहीं उन्होंने बताया कि अंडे के छिलके 95 प्रतिशत कैल्शियम कार्बोनेट के बने होते हैं. इनसे बनी खाद पेड़- पौधों को काफी लाभ पहुंचाते हैं. बता दें,

अगर ये महिलाएं 50-60 किलो अंडे के छिलके को रिसाइकल करती हैं. और वहीं मुर्गियों के खाने की कीमत 500 से 600 रुपये प्रति किलो के आस-पास होती है तो ‘स्वयं सहायता समूह’ में काम कर रही ये महिलाएं ये हर महीने 15,000 से 30,000 रुपये तक कमाई करती होंगी.

फ्री में पानी और बिजली का उपयोग कर रहा है बैंगलोर का वैज्ञानिक

गर्मी की शुरुआत होते ही देश के कई क्षेत्रों में पानी की किल्लत शुरू हो जाती है । पीने के साफ पानी के साथ ही दैनिक दिनचर्या के लिए पानी की कमी महसूस की जाती है । देश में पिछले कई वर्षों से औसत से अधिक वर्षा होती है लेकिन गर्मी के सीजन में लगभग 30 % जनसँख्या को पीने का साफ़ पानी नहीं मिलता है ।

जल सरंक्षण एवं सवर्धन अभी भी आम भारतीयों से दूर है और इसके चलते कई लोगों को पीने का पानी लाने के लिए भी कई किलोमीटर का फासला तय करना पड़ता है । इन सब के बीच कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में रहने वाले एक वैज्ञानिक ने जल सरंक्षण के लिए राह दिखाई है । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पिछले लगभग 23 वर्षों में उन्होंने पानी का बिल नहीं भरा है । उनके घर में लगे बारिश के पानी के सरंक्षण के सिस्टम के चलते उन्हें बाहर से पानी मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ी ।

पिछले कुछ वर्षों में बेंगलुरु शहर में बहुत ज्यादा विकास हुआ है जिसके चलते इस शहर में सामान्य से अधिक बारिश होने के बावजूद गर्मी के मौसम में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है । अपनी धरातलीय एवं भौगोलिक स्थिति के कारण बेंगलुरु में जमीन से पानी निकालना भी महंगा साबित होता है ।

इसके साथ ही कावेरी नदी भी शहर से 100 से ज्यादा किलोमीटर दूर है तथा जमीन से लगभग 1000 फ़ीट ऊँचा होने के कारण पम्पिंग एवं पाइप लाइन में काफी पैसे खर्च करने पड़ते है । इस शहर में झीलों का नेटवर्क बना हुआ था लेकिन बेतहाशा विकास एवं घटते जंगल एवं झीलों का क्षेत्रफल पानी की समस्या का मुख्य कारण बन चूका है ।

शिवकुमार (AR Shivakumar) जो कि कर्नाटक स्टेट कौंसिल ऑफ़ साइंस एंड टेक्नॉलजी (KSCST) में सीनियर साइंटिस्ट के पद पर कार्यरत है । उनके घर पर अभी कावेरी वाटर पाइपलाइन का कनेक्शन नहीं है और अपने घर की जरूरत के लिए पानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग से पूरी करते है । IISc में नौकरी लगने के बाद उन्होंने 1995 में अपना घर बनवाया ।

घर बनवाने के दौरान शिवकुमार ने अपने परिवार के लिए पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए बहुत रिसर्च किया । वो चाहते थे कि पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए अपनी जरूरत पूरी की जाये । इसके लिए सबसे पहले उन्होंने अपने आसपास के घरों एवं अपार्टमेंट्स के वाटर बिल का अध्ययन किया और उससे उन्हें एक परिवार के लिए महीने भर में जरूरत का पानी और बिल का पता चला ।

शिवकुमार का बेंगलुरु स्थित घर 

अपने रिसर्च से उन्होंने पाया कि एक परिवार को प्रतिदिन अपनी जरूरत के लिए 500 लीटर पानी की आवश्यकता होती है । उसके बाद उन्होंने पिछले 100 वर्षों के मानसून एवं बारिश के डाटा का गहन अध्ययन किया और पाया कि अकाल एवं कम बारिश के दौरान भी इतना पानी तो बरसता ही है जिससे इस शहर के सभी रहवासियों के लिए पुरे वर्ष पानी की उपलब्धता हो सके ।

शिवकुमार (AR Shivakumar) के सामने केवल एक ही समस्या थी कि बारिश सामान्यतया 60-70 दिन होती है लेकिन पानी की जरूरत पुरे 365 दिन पड़ती है । इसके लिए उन्होंने 45000 कैपेसिटी के कुछ वाटर टैंक बनवाये । मोटर एवं बिजली पर निर्भरता घटाने के लिए उन्होंने घर की छत पर ही यह टैंक बनवाने का काम किया । सभी टैंक्स में शिवकुमार के द्वारा अविष्कृत फ़िल्टर टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया जिससे पानी को शुद्ध किया जा सकता है ।

टैंक में पानी भरने के बाद उन्होंने पानी को वेस्ट होने से बचाने के लिए घर में ही गार्डन बनवाया और अतिरिक्त पानी को जमीन में रिचार्ज कर दिया । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कुछ ही वर्षों में शिवकुमार के घर के आसपास ग्राउंड वाटर लेवल 200 फ़ीट से घटकर 40 फ़ीट रह गया ।

शिवकुमार के द्वारा विकसित फ़िल्टरिंग सिस्टम 

शिवकुमार पानी का इस्तेमाल पेट्रोल एवं डीजल से भी ज्यादा सतर्कता से करते है । पानी के सरंक्षण के साथ ही शिवकुमार ने घर पर इस्तेमाल हो रहे पानी को भी रीसायकल करने के लिए सिस्टम लगा रखा है । उसके लिए उन्होंने सेपरेट टैंक्स बना रखे है जैसे कि वाशिंग मशीन से निकला सारा अपनी एक टैंक में जमा होता है जो टॉयलेट के फ्लश में इस्तेमाल होता है । इसके साथ ही किचन से निकला पानी गार्डन में इस्तेमाल होता है ।

इसके साथ ही शिवकुमार ने अपने घर में बहुत सारे परिवर्तन किये है और अपने घर को इको-फ्रेंडली बना रखा है । सोलर वाटर हीटर से निकले गर्म पानी को पुरे दिन गर्म रखने के लिए चावल के भूसे का इस्तेमाल किया है । इसके साथ ही घर पर उपयोग में आने वाली LED लाइट्स भी सोलर पावर से ही जलती है । घर की छत पर बने वाटर टैंक्स और गार्डन के चलते उनका घर प्राकृतिक रूप से ठंडा भी रहता है ।

पिछले कुछ वर्षों में शिवकुमार ने अपनी तकनीक से कई रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से युक्त घर एवं बिल्डिंग्स बनवाये है जिनमे सरकारी और गैर सरकारी अपार्टमेंट्स भी शामिल है । इनमे कर्नाटक विधान सभा , हाई कोर्ट और कुछ कॉर्पोरेट ऑफीस जैसे इंटेल एवं अरविन्द मिल्स भी शिवकुमार की तकनीक का इस्तेमाल कर रहे है ।

शिवकुमार पिछले कई वर्षों से आर्किटेक्ट , बिल्डर्स एवं सरकारी अधिकारीयों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग की निशुल्क ट्रेनिंग दे रहे है । इनकी तकनीक का इस्तेमाल भारत के साथ ही कुछ अफ्रीकन एवं यूरोपियन देशों में हो रहा है । प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग एवं समाज की समस्याओं को सुलझाने के लिए कई संस्थाओं के द्वारा शिवकुमार का सम्मान किया गया है ।

मुफ्त में कराएं मारुति कार के AC की सर्विस, इस तारीख तक है स्कीम

अगर आपके पास मारुती सुजुकी (Maruti Suzuki) की कार है तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है. कंपनी की तरफ से स्पेशल कैम्पेन, “Summer Ready Vehicle Health Check” की शुरुआत की गई है.

इस कैम्पेन का फायदा उठाकर आप अपनी गाड़ी की मुफ्त में सर्विस करवा सकते हैं. कैम्पेन की शुरुआत 15 अप्रैल से हो चुकी है जो 30 अप्रैल तक चलेगी. आप किसी भी सर्विस सेंटर में जाकर मुफ्त सर्विस का फायदा उठा सकते हैं. बता दें, मारुति का पूरे देश में 2200 से ज्यादा डीलर वर्कशॉप हैं.

इस कैम्पेन के तहत आपकी गाड़ी की एयर कंडीशनिंग (AC), ऑयल एंड कूलेंट चेक, बैटरी, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और टायर की मुफ्त में जांच की जाएगी. गर्मी की शुरुआत हो चुकी है. ऐसे में ज्यादातर गाड़ी में एसी और कूलेंट संबंधी समस्या रहती है.

ठंड के मौसम में एसी का इस्तेमाल नहीं होने की वजह से कई बार एसी फिल्टर पर डस्ट जमा हो जाता है. ऐसे में इस स्पेशल कैम्पैन का फायदा उठा कर गाड़ी की मुफ्त में जांच करवा सकते हैं.

इससे पहले हुंडई (Hyundai) ने फ्री सर्विस कैम्पेन की शुरुआत की थी. हालांकि, यह कैम्पेन खत्म हो चुका है. इस कैम्पेन की आखिरी तारीख 21 अप्रैल थी. इसमें भी सभी सेवाओं पर भारी डिस्काउंट दिया जा रहा था.

हर कोई करना चाहता है दुनिया की यह 10 सब से आसान और मज़ेदार नौकरियां

दुनिया में 10 ऐसे अजीब नौकरी भी हैं जो सभी लोग करना चाहते हैं लेकिन वह नौकरी बस किस्मत वालों को ही मिल पाती है तो चलिए जानते हैं कौन सी है ऐसी 10 सबसे आसान नौकरी |

वाटर स्लाइड

दुनिया में ऐसी भी नौकरी है जिनमें आपको बस वॉटर स्लाइड्स पर स्लाइड करना होता है  और उसके बदले में आपको पैसे मिलते हैं, बड़ी-बड़ी कंपनियां वॉटर स्लाइड बनाने के बाद ऐसे लोगों को नौकरी देती है जो वॉटर स्लाइड पर स्लाइड टेस्ट कर सके इससे पता चल जाएगा यह लोगों के लिए सुरक्षित है या नहीं

नेटफ्लिक्स शो देखने वाला जॉब

आप भी नेटफ्लिक्स देखते होंगे लेकिन नेटफ्लिक्स का यूज तो हम अपने मनोरंजन के लिए करते हैं ,उसे देख कर पैसे कैसे कमाए जा सकते हैं ? नेटफ्लिक्स टिग्गर की जॉब करके नेटफ्लिक्स टिग्गर में नेटफ्लिक्स के शो को देखना और सही सही डाटा कलेक्ट करना है

जिसका इस्तेमाल नेटफ्लिक्स की कैटेगरी के सर्विस में किया जाएगा, इन लोगों का काम यह भी होता है कि कोनसी फिल्म कोनसे उम्र के लोग देख सकते हैं

चिंगम चबाना

क्या आपको चिंगम खाना पसंद है, बहुत से लोगों को होता है, कुछ ऐसे नौकरी भी हैं जिनमें आप दिन भर चिंगम खाकर पैसे कमा सकते हैं यह लोग कैंडी कंपनी के लिए काम करता है चिंगम खा कर उन पर रिव्यू दिया करते हैं और इनकी इनकम भी काफी ज्यादा होती है |

चॉकलेट टेस्ट

इस नौकरी में भी आपको तरह-तरह के चॉकलेट टेस्ट करने होते हैं, उसके बाद उस पर अपना विचार रखने होते हैं

तस्वीरें को वेबसाइट पर सेल करके

बहुत से लोगों को अच्छी तस्वीरें लेना पसंद होती है यह उनका जुनून होता है, मगर कुछ ऐसे भी लोग हैं जो थोड़ी-सी क्रिएटिविटी दिखाते हैं और तरह-तरह के तस्वीरें को खींचने के बाद उन्हें वेबसाइट पर बेच देते हैं और जिन कस्टमर को वह फोटोस पसंद आते हैं वह लोग उन तस्वीरों को खरीद लेते हैं .

कुछ समय के लिए दोस्त या कुछ समय के लिए माता पिता बनना

हमारे कोई ना कोई दोस्त होते है लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनका कोई दोस्त नहीं होता  जापान में लोगों को कुछ वक्त के लिए कंपनी दे कर उनके साथ समय बिता कर भी पैसे कमा सकते हैं ,फ्रेंडडेट, एक्सटेंडफ्रेंड नाम की वेबसाइट है उस वेबसाइट पर आप रजिस्टर करके थोड़े समय के लिए किसी को दोस्त बना सकते हैं |

शादी में मेहमान बनकर

बहुत से शादियों या ज्यादातर विदेशों में मेहमान ज्यादातर नहीं आते और ऐसे में कुछ लोग ज्यादा मेहमान बुलाना चाहते हैं तो वह लोग अस्थायी मेहमान को बुलाते हैं जो कि सिर्फ 2 या 3 घंटे के मेहमान होते हैं | बहुत सारी कंपनी होती है जहां से ऐसे लोगों को hire किया जा सकता है | कुछ देशों में तो मरने के बाद भी रोने के लिए लोगों को बुलाया जाता है

सोने का जॉब

क्या आपने कभी सोचा है कि सोने के भी पैसे मिल सकते हैं ? बड़ी-बड़ी साइंस एजेंसी और रिसर्च आर्गेनाईजेशन स्लिप पर रिचार्ज करने के लिए लोगों को नौकरी पर रखते है और उसके लिए उन्हें अच्छे खासे पैसे मिलते भी हैं कुछ कंपनी अपने बिस्तर को टेस्ट करने के लिए लोगों को नौकरी देती है ताकि वह सो कर बता सके वह बिस्तर कैसा है |

गाने सुन कर

क्या आपने सोचा है कभी आप गाने सुनकर भी पैसे कमा सकते हैं ? आप गाने के बारे में लिखकर और वीडियो देखकर भी काफी आसानी से पैसे कमा सकते हैं, काम बस इतना होता हैं की गाना सुन ने के बाद आपको वो गाने के बारे में रिव्यु देना होता हैं |

रोज़ कसरत करके

कसरत करते हुए भी आप पैसे कमा सकते हैं आपको करना होगा जिम ट्रेनर का काम, जिम ट्रेनर के बारे में तो आप जानते होंगे ऐसे नौकरी में तो आप खुद को फिट रखते ही हैं और दूसरों को फिट रहना सिखाते भी हैं जिससे आपकी नौकरी काफी आसान बन जाती है

अब आप भी खोल सकते हैं अपनी गैस एजेंसी, बिना सिक्योरिटी डिपॉजिट के होगी लाखों की कमाई

अगर आप अपना नया बिजनेस शुरू करने के बारे में विचार कर रहे हैं तो हम मोटी कमाई करने वाला एक बिजनेस आपके लिए लेकर आए हैं। आपके पास दिल्ली में lpg गैस एजेंसी खोलने का मौका है। आपको बता दें कि Go Gas कंपनी ने इसके लिए विज्ञापन जारी किया है। इस ऑफर की खास बात यह है कि कंपनी एंजेसी खोलने के लिए सिक्योरिटी डिपॉडिट नहीं लेगी।

नहीं देना होगा कोई भी पैसा

आपको बता दें कि अगर आप इस गैस एजेंसी को खोलने के लिए रजिस्ट्रेशन कराते हैं तो आपको डीलरशिप और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए किसी भी तरह का डिपॉजिट नहीं जमा करना होगा, लेकिन आपको एजेंसी के लिए बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।

बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर में गोदाम, डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर और ऑफिस के लिए जमीन आती है, जिसकी जरूरत आपको एजेंसी खोलने के लिए होती है। इसके अलावा गैस सिलेंडर की डिलीवरी और डीलरशिप स्टोर पर भी इनवेस्टमेंट करना होगा।

इन शर्तों को करना होगा पूरा

  • आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र 21 से 60 साल के बीच होनी चाहिए।
  • इसके अलावा आवेदक के पास भारतीय नागरिकता होगी चाहिए।
  • आवेदन ने 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की हो।
  • आवेदक शारीरिक रुपए से विकलांग नहीं होना चाहिए।

ऐसे कर सकते हैं संपर्क

आपके पास कॉमर्शियल और नॉन कॉमर्शियल दोनों तरह के गैस सिलेंडर के डिस्ट्रीब्यूशन का मौका होगा। आपको बता दें कि कंपनी जिला और तहसील स्तर पर आवेदन मांग रही है। अगर आप Go Gas एजेंसी की डीलरशिप लेना चाहते हैं तो आप 7666555560 इस नंबर पर संपर्क भी कर सकते हैं।

इसके साथ ही आप [email protected] पर भी संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा रीजनल ऑफिस 515 A अंसल चेंबर 2 भीकाजी कामा प्लेस नई दिल्ली से भी इस बारे में जानकारी हासिल किया जा सकता है।

आपको इन डॉक्यूमेंट की होगी जरूरत

  • आपके पास निवास और जाति प्रमाण पत्र होना चाहिए।
  • इसके अलावा आपके पास पैन और आधार कार्ड भी होना चाहिए।
  • आपके पास आपका जीएसटी नंबर भी होना चाहिए।
  • साथ ही जमीन के डॉक्यूमेंट या फिर लीज का सर्टिफिकेट भी होना जरूरी है।

देश के सबसे अमीर नहीं बल्कि सबसे ज्यादा कर्जदार भी हैं मुकेश अंबानी आंकड़े जान हो जाएंगे हैरान

देश के सबसे अमीर इंसान रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी , एशिया में भी उनसे ज्यादा दौलत भी किसी के पास नहीं है। दुनिया में मुकेश अंबानी 13 वें सबसे अमीर आदमी है। उनकी दौलत और लाइफ स्टाइल की हमेशा चर्चा होती है। अगर हम हम कहें कि वो भारत के सबसे ज्यादा कर्जदार आदमी हैं तो आप क्या सोचेंगे या कहेंगे? जी हां, यह बात पूरी तरह से सही है।

ताज्जुब की बात तो ये है कि बीते दस सालों में उन पर कर्ज साढ़े चार गुना तक बढ़ गया है। आइए आपको भी बताते हैं कि उनके पर कितना कर्ज है अपनी स्पेशल रिपोर्ट में…

2010 से 2014 तक इस तरह से बढ़ा मुकेश अंबानी पर कर्ज

वित्तीय वर्ष 2010 में रिलायंस पर 64,606 करोड़ रुपए था। अगले वित्तीय वर्ष में मुकेश अंबानी के कर्ज में 20 हजार करोड़ रुपए के इजाफे के साथ कर्ज 84,152 करोड़ रुपए हो गया। उसके अगले वित्तीय वर्ष में करीब 8 हजार करोड़ रुपए के इजाफे के साथ कर्ज 92,447 करोड़ रुपए हो गया।

इसी तरह से 2014 तक रिलायंस इंडस्ट्री का कर्ज 1,38,758 करोड़ रुपए हो गया। इसका मतलब ये हुआ कि 2010 के बाद के पांच सालों में मुकेश अंबानी के कर्ज में 2 गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ है।

जानकारों की मानें तो पूरे देश में किसी भी कंपनी पर इतना कर्ज नहीं है कि जितना मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज पर है। लेकिन इस कर्ज के माध्यम से देश में नई-नई इंडस्ट्रीज की स्थापना हुई है। जिसकी वजह से देश में रोजगार पैदा हुए हैं। ऐसे में बैंक और सरकार दोनों मुकेश अंबानी की कंपनी पर भारोसा दिखा रही हैं।

2015 से 2019 तक इस तरह से बढ़ा मुकेश अंबानी पर कर्ज

आखिरी पांच सालों की बात करें तो 2015 में 2014 के मुकाबले करीब 22 हजार करोड़ रुपए कर्ज का इजाफा हुआ जो बढ़कर 1,60,863 करोड़ रुपए हो गया। उसके बाद कर्ज में 20 हजार करोड़ रुपए का आैर ज्यादा इजाफा हुआ। वित्तीय वर्ष 2019 में मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 2,87,505 करोड़ रुपए कर्ज हो चुका है। 2015 में यह कर्ज 1.78 गुना की वृद्घि  है।

मौजूदा समय में मुकेश अंबानी के पास है इतनी है दौलत

मौजूदा समय में रिलायंस इंडस्ट्रीज को छोड़ दें तो मुकेश अंबानी के पास ही 55.3 बिलियन डाॅलर (3.83 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति है। खास बात ये है कि मुकेश अंबानी की संपत्ति में 2010 से लेकर 2014 तक गिरावट के देखने को मिली थी।

उसके बाद 2015 से लेकर 2019 तक मुकेश अंबानी की संपत्ति में बेतहाशा वृद्घि देखने को मिली है। आने वाले दिनों में मुकेश अंबानी र्इ-काॅमर्स सेक्टर में कदम रखने जा रहे हैं। एेसे में उनकी संपत्ति में तो इजाफा होने की उम्मीद लगार्इ जा रही है। वहीं कर्ज में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

बहुत तेजी से बढ़ रहा है धरती का तापमान, नासा ने बताया कि क्या है इसकी असल वजह …..

धरती का टेम्परेचर दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। पिछले 15 वर्षों से बढ़ रहे टेम्परेचर का अध्ययन नासा कई समय से कर रहा था। शोधकर्ताओं ने 2003 से लेकर 2007 तक उपग्रह पर आधारित इन्फ्रारेड मेजरमेंट सिस्टम एआईआरएस (ऐटमॉसफेरिक इन्फ्रा रेड साउन्डर)की मदद से धरती के टेम्परेचर का आकलन किया।

(amrica ) के नासा ( nasa ) के अध्ययन कर रही टीम ने इन आकड़ों को गोडार्ड इन्स्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज सरफेस टेम्परेचर एनालाइसिस (जीआईएसटीईएमपी) से मिलाया। जिसके बाद अध्ययन किए गए डाटा ( data ) को नवायरनमेंटल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित किया गया। 15 वर्ष का डाटा और दूसरे डाटा को इक्कठा करने के बाद उनके बीच काफी समानता देखी गई।

जब इस बारे में अमरीका में स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के जोएल सुसकिंड ने बताया कि एआईआरएस और जीआईएसटीईएमपी का डाटा एक दूसरे के समान है। जीआईएसटीईएमपी के मुकाबले एआईआरएस का दायरा ज्यादा बड़ा होने के काऱण यह पूरी दुनिया को शामिल कर पाया था।

वहीं सुसकिंड ने यह भी कहा,’डाटा के दोनों सेट से पता चला कि धरती की सतह इस अवधि में गर्म हुई और 2016, 2017 और 2015 क्रम से सबसे गर्म साल रहा।’

गौरतलब है कि एआईआरएस का डाटा समुद्र, भूमि और बर्फ से कवर हुए क्षेत्र की सतह के टेम्परेचर को भी दर्शाता है। शोध के नतीजों के आधार पर नासा से जुड़े एक अन्‍य वैज्ञानिक ( scientist ) ने कहा कि इससे जाहिर होता है कि टेम्परेचर में बढ़ोतरी काफी पहले से होती रही है।