नई खोज अब पराली से बनेगे कप और प्लेटें

धान की पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कई उपाय किये जा रहे हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़े एक स्टार्टअप ने अब फसल अपशिष्टों से ईको-फ्रेंडली कप और प्लेट जैसे उत्पाद बनाने की पद्धति विकसित की है।

क्रिया लैब्स नामक स्टार्टअप के मुख्य संचालन अधिकारी अंकुर कुमार ने बताया, “इस तकनीक की मदद से किसी भी कृषि अपशिष्ट या लिग्नोसेल्यूलोसिक द्रव्यमान को होलोसेल्यूलोस फाइबर या लुगदी और लिग्निन में परिवर्तित कर सकते हैं।

लिग्निन को सीमेंट और सिरेमिक उद्योगों में बाइंडर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल, हम धान के पुआल से बनी लुगदी से टेबल वेयर बना रहे हैं।

इस पहल की शुरुआत आईआईटी-दिल्ली के छात्र अंकुर कुमार, कनिका प्रजापति और प्रचीर दत्ता ने मई 2014 में ग्रीष्मकालीन परियोजना के रूप में शुरू की थी, जब वे बीटेक कर रहे थे। उनका विचार था कि फसल अपशिष्टों से जैविक रूप से अपघटित होने योग्य बर्तन बनाने की तकनीक विकसित हो जाए

तो प्लास्टिक से बने प्लेट तथा कपों का इस्तेमाल कम किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने एक प्रक्रिया और उससे संबंधित मशीन विकसित की और पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया। अंकुर कुमार ने बताया, “जल्दी ही हमें यह एहसास हो गया कि मुख्य समस्या कृषि कचरे से लुगदी बनाने की है, न कि लुगदी को टेबल वेयर में परिवर्तित करना।”

लगभग उसी समय, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या उभरी और पराली जलाने से इसका संबंध एक बड़ा मुद्दा बन गया। उसी दौरान हमने इस नयी परियोजना पर काम करना शुरू किया था। हमारी कोशिश कृषि अपशिष्टों से लुगदी बनाना और उससे लिग्निन-सिलिका के रूप में सह-उत्पाद को अलग करने की थी।

क्रिया के संस्थापकों का कहना है कि अब वे इससे जुड़ा पायलट प्लांट स्थापित करने के लिए तैयार हैं, जिसकी मदद से प्रतिदिन तीन टन फसल अवशेषों का प्रसंस्करण करके दो टन लुगदी बनायी जा सकेगी। इस तरह के प्लांट उन सभी क्षेत्रों में लगाए जा सकते हैं,

जहां फसल अवशेष उपलब्ध हैं। अंकुर के अनुसार, “अगर रणनीतिक पार्टनर और निवेश मिलता है तो बाजार की मांग के अनुसार हम उत्पादन इकाइयों में परिवर्तन करके उसे फाइबर और बायो-एथेनॉल जैसे उत्पाद बनाने के लिए भी अनुकूलित कर सकते हैं।”

अमृतसर हादसे में शामिल दोनों ट्रेनों में थी यह खास तकनीक, ड्राइवर ध्यान देते तो नहीं मरते इतने लोग

अमृतसर में 61 से ज्यादा लोगों के टुकड़े करने वाली दोनों गाड़ियों में न्यूमेटिक एयरब्रेक सिस्टम लगा था। अगर ड्राइवर थोड़ी भी सावधानी बरतते तो इतनी बड़ी संख्या में लोग न मरते। न्यूमेटिक एयरब्रेक सिस्टम, भारतीय रेलवे की नवीनतम तकनीक मानी जाती है।

न्यूमेटिक एयरब्रेक सिस्टम की खासियत

ट्रैक क्षमता के विशेषज्ञ एक अधिकारी का कहना है कि न्यूमेटिक एयरब्रेक सिस्टम की खासियत यह है कि इनके इस्तेमाल से गाड़ी के डीरेलमेंट (यानी गाड़ी का पटरी से उतर जाना) की संभावना न के बराबर होती है। पहले गाड़ियों में वैक्यूम ब्रेक होते थे, जिसे लगाने के बाद गाड़ी साढ़े तीन सौ मीटर दूरी पर जाकर रूकती थी। इसमें कई बार गाड़ी के डीरेलमेंट होने का खतरा बना रहता था।

जब यह हादसा हुआ तो जालंधर-अमृतसर डीएमयू नम्बर 74643 की स्पीड सौ से अधिक थी। हादसे के वक्त दूसरी गाड़ी 13006 अमृतसर-हावड़ा एक्सप्रेस भी फुल स्पीड पर चल रही थी।

ड्राइवर बरतते सावधानी तो नहीं जाती इतनी जान

रेलवे एक्सपर्ट का कहना है कि दोनों गाड़ियों के लिए वहां पर कोई कॉशन नहीं लगा था, इसलिए वे फुल स्पीड पर थी। अगर चालक 150-200 मीटर पहले न्यूमेटिक एयरब्रेक सिस्टम का इस्तेमाल करते तो गाड़ी रुक सकती थी। दोनों गाड़ियों के ड्राइवरों में से किसी ने भी स्पीड कम नहीं की और न ही इमर्जेंसी ब्रेक लगाने का प्रयास किया, जबकि उन्हें ट्रैक के आसपास भीड़ दिखाई दे रही थी।

ट्रेन ड्राइवर ने की यह दूसरी गलती

रेलवे एक्सपर्ट कहते हैं कि ट्रेन ड्राइवर ने दूसरी बड़ी गलती यह कर दी कि उन्होंने हादसे की सूचना अगले स्टेशन पर नहीं दी। पहले रेलवे में यही नियम था। अगर कोई ऐसा हादसा होता है और ड्राइवर को पता है तो वह अगले स्टेशन पर गाड़ी रोक कर उसकी सूचना देता था।

बाद में यह नियम बना कि अगर कोई छोटा-बड़ा हादसा होता है तो ट्रेन ड्राइवर और गार्ड तुरंत गाड़ी रोककर मौके पर जाएंगे। आरपीएफ को सूचना देंगे। अमृतसर ट्रेन हादसे में दोनों गाड़ियों के ड्राइवर लापरवाह दिखे हैं। उन्होंने नियम के मुताबिक अगले स्टेशन पर हादसे की सूचना नहीं दी।

अपने खेत में लगाएं पोली हाउस, सरकार देगी आधा पैसा, पारम्परिक खेती से 10 गुना ज्यादा होगी कमाई

अगर आपके पास खेती करने के लिए जमीन कम है और आप खेती को प्रोफेशन के तौर पर अपनाना चाहते हैं तो पॉलीहाउस आपके लिए शानदार विकल्प है। पॉलीहाउस लगाकर आप कम जमीन में भी सालाना लाखों रुपए की कमाई कर सकते हैं।

पॉलीहाउस का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि खराब मौसम, बारिश या दूसरे जानवरों से आपकी फसल पूरी तरह से सुरक्षित रहती है। इसके अलावा पॉलीहाउस में फसल की उत्पादकता पारंपरिक खेती की तुलना में 10 गुना तक अधिक होती है।

साथ पॉलीहाउस में सब्जी या फल जो भी आप उगाते हैं उसकी क्वालिटी भी काफी अच्छी होती है। इसकी वजह से पॉलीहाउस में उगाए गए उत्पाद की बाजार में बेहतर कीमत मिलती है।

कितनी आती है लागत

बरेली में पॉलीहाउस में खेती करने वाले युवा और प्रगितशाल किसान पंकज चौधरी ने बताया कि पॉलीहाउस में खेती एक शानदार विकल्प है। पॉलीहाउस लगाने में लागत जरूर अधिक आती है लेकिन इससे किसान को फायदा भी ज्यादा होता है।

पंकज चौधरी ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति 4,000 वर्ग मीटर में पॉलीहाउस लगाता है तो इस पर लगभग 35 लाख रुपए लागत आती है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार पॉलीहाउस लगाने पर आने वाली लागत का 50 फीसदी सब्सिडी देती है। कोई भी व्यक्ति केंद्र सरकार से या राज्य सरका से यह सब्सिडी ले सकता है।

बेमौसमी सब्जी की होती है खेती

पॉलीहाउस में आम तौर पर बेमौसमी सब्जियों की खेती की जाती है। पॉलीहाउस में लगभग पूरे साल खीरा और शिमला मिर्च की खेती की जा सकती है। इसके अलावा पॉलीहाउस में ऐसी सब्जियों की खेती भी कर सकते हैं जिनको ठंड से नुकसान होता है।

पंकज चौधरी ने बताया कि इस बार बारिश ज्यादा होने की वजह से खेतों में पानी भर गया था। इससे पारंपरिक खेती करने वाले किसानों की फसलों को काफी नुकसान हुआ। लेकिन मेरे पॉलीहाउस में खीरे के उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा और बाजार में खीरा कम आने से मुझे खीरे की कीमत भी ज्यादा मिली।

बैंक भी देते हैं पॉलीहाउस लगाने के लिए लोन

अगर आपके पास पॉलीहाउस लगाने के लिए पैसा नहीं है तो आप बैंक से लोन भी ले सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया सहित ज्यादातर पीएसयू और प्राइवेट सेक्टर के बैंक पॉलीहाउस लगाने के लिए पॉलीहाउस की लागत का 80 फीसदी तक लोन देते हैं। यानी आपको लागत का सिर्फ 20 फीसदी निवेश करना होगा।

अगर दोगुना तेजी से कम करना है वजन तो इस तरह करें जीरे के पानी का प्रयोग

खाने के स्वाद को बढ़ाने वाला जीरा सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वजन कम करने के लिए जीरे का पानी एक बेहतरीन ऑप्शन है. जी हां, सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाने वाला जीरा वजन को कम करने में भी मददगार साबित होता है.

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, सुबह खाली पेट जीरे का पानी पीने से वजन तेजी से कम होता है. अगर आप भी बेली फैट से परेशान हैं और चाहते हैं कि बिना कुछ ज्यादा प्रयास के ये कम हो जाए तो जीरे का इस्तेमाल आपके लिए काफी कारगर साबित हो सकता है.

इसके अलावा जीरे के सेवन से कब्ज, इंसुलिन, मेटाबॉलिज्म और डाइजेस्टिव सिस्टम भी मजबूत होता है. हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि रोजाना खाली पेट जीरे के पानी का सेवन करने से 20 दिन में ही वजन कम होने लगता है.

कई स्टडी में बताया गया है कि जीरे में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं. इसके अलावा इसमें कॉपर, मैंगनीज, मिनरल्स भी पाए जाते हैं. ये सभी शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले रेडिकल्स से सुरक्षित रखते हैं और उन्हें शरीर से बाहर निकालने का काम करते हैं.

बता दें, एक चम्मच जीरे में सिर्फ 7 कैलोरी होती है. रोजाना एक गिलास जीरे का पानी पीने से वजन तेजी से कम होता है.

डाइजेशन- जीरे का पानी पीने से डाइजेस्टिव सिस्टम बेहतर होता है. ये शरीर में मौजूद फैट और कार्बोहाइड्रेट को ब्रेक करता है, जिससे आंतें स्वस्थ रहती हैं. अगर डाइजेस्टिव सिस्टम मजबूत होता है, तो वजन को भी तेजी से कम किया जा सकता है.

भूख कम लगना- जीरे का पानी पीने से भूख कम लगती है. सुबह एक गिलास जीरे का पानी पीने से दिनभर आपका पेट भरा हुआ रहता है. इस कारण आप जंक और ऑयली फूड से दूर रहते हैं और वजन कम होने में मदद मिलती है.

डीटॉक्सीफाई- जीरे का पानी शरीर से सभी टॉक्सिंस को बाहर निकालकर शरीर को डीटॉक्सीफाई करने में मददगार साबित होता है. इसके अलावा इस पानी से शरीर में नई और हेल्दी कोशिकाएं बनती हैं. ये डाइजेशन को बेहतर करता है और शरीर के मेटाबॉलिज्म रेट को बढ़ाता है.

यहां जानें जीरे का पानी बनाने की विधि- जीरे का पानी बनाने के लिए एक चम्मच जीरे को एक गिलास पानी में रातभर भिगोकर रख दें. सुबह उठकर ये पानी छान कर पीएं. इसके लिए तांबे के बर्तन को ही इस्तेमाल करने की कोशिश करें, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि तांबे के बर्तन में पानी पीने से भी वजन कम होता है. जीरे का पीने के साथ-साथ हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज पर भी ध्यान दें. आप चाहें तो अपने डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते हैं.

मकान किराये पर देते समय जरूर कर लें यह काम, नहीं तो सारी ज़िंदगी पड़ेगा पछताना

एक्स्ट्रा इनकम के लिए अक्सर लोग अपना मकान अंजान लोगों को किराए पर देते हैं। कई बार मकान मालिक मकान किराए पर देने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान नहीं रखते। इससे बाद में वे ही मुश्किल में पड़ते हैं। मकान मालिक की 1 गलती उसे भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

जैसे आपने जिस व्यक्ति को घर किराये पर दिया है और उसका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं करवाया और संबंधित व्यक्ति अपराधी निकला तो आप भी कानूनी शिकंजे में फंस सकते हैं।

कौन सी बातें ध्यान रखना ही चाहिए…

  • मकान को किराए पर देने से पहले किराएदार की पूरी जांच करनी चाहिए।
  • किराएदार का पुलिस वेरिफिकेशन करवाना भी जरूरी होता है।
  • पुलिस वेरिफिकेशन का फॉर्म संबंधित राज्य की पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध होता है।
  • किराएदार की पुलिस वेरिफिकेशन न करवाने की स्थिति में मकान मालिक जुर्माना देना पड़ सकता है।
  • मकान मालिक को किराएदार के काम और उसके ऑफिस के बारे में भी जानकारी इकट्ठी करनी चाहिए।

रेंट एग्रीमेंट

    • घर किराए पर देने से पहले मौखिक आधार पर रेंट एग्रीमेंट न बनवाएं बल्कि इसके लिए प्रॉपर नियम को फॉलो करें। हमारे यहां रेंट के पेपर 11 महीने के आधार पर बनाए जाते हैं क्योंकि 12 महीने या उससे अधिक समय वाले रेंट एग्रीमेंट कराने पर किराए की दर राज्य सरकार तय करती है।
  •  रेंट एग्रीमेंट में सिक्योरिटी डिपॉजिट, पेमेंट साइकल, किराया देने की आखिरी तारीख, लेट पेमेंट पर जुर्माना, जानवरों से जुड़े नियम, घर खाली कराने संबंधी नियम और घर के बेहतर रख-रखाव के लिए जरूरी नियमों का उल्लेख अवश्य करें।
  •  इसके अलावा मकान मालिक की तरफ से किराएदार को क्या-क्या सुविधाएं दी जा रही हैं एग्रीमेंट में उसका भी उल्लेख करना बेहद जरूरी है।
  • रेंट एग्रीमेंट में मकान मालिक और किराएदार का नाम एकदम साफ लिखा होना चाहिए। साथ ही दोंनों के हस्ताक्षर ही होने चाहिए।
  •  इसके अलावा किराए पर दी जाने वाली जगह का भी उल्लेख करना जरूरी होता है।
  •  यदि किराए में बिजली और पानी के बिल का भुगतान शामिल नहीं है, तो एग्रीमेंट में इसका जिक्र भी आवश्यक करें।
  •  इसके साथ ही घर में लगे लाइट्स, पंखे या बाकी के सामान चेक कर लें और किराएदार को भी अवगत करा दें। इससे बाद में सामान खराब होने पर आप नुकसान से बच सकते हैं। जरूरी हो तो समान और घर की फोटो भी ले लें।
  • एक बार रेंट एग्रीमेंट पूरा होने के बाद नया एग्रीमेंट तैयार करते समय मकान मालिक किराए में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है।
  • रेंट एग्रीमेंट के बावजूद भी किराएदार को घर छोड़ने या मकान मालिक द्वारा घर छुड़वाने से एक महीने पहले नोटिस देना जरूरी होता है।

सिर्फ 7 दिन में तैयार होगा यह घर, कीमत सिर्फ 2 लाख कहीं भी ले जा सकते हैं आप

अगर आप कम जगह में ज्यादा से ज्यादा सुविधाओं में रहना चाहते हैं और वह भी कम दाम में, तो यह घर आपके लिए हैं। इनकी खासियत यह है कि ये आपकी जरूरत के मुताबिक डिजायन होते हैं और आप इन्हें कभी भी कहीं भी शिफ्ट कर सकते हैं।

ये हैं पोर्टेबल यानी मोबाइल होम्स जिनकी कीमत लाख रुपए से भी कम से शुरू है। इंडियामार्ट (IndiaMart) वेबसाइट पर एेसी कई कंपनियां हैं जो आपको ये घर बनाकर देंगी, जो पोर्टेबल होने के साथ ईको-फ्रेंडली भी होंगे।

7 दिन में हो जाएगा तैयार

मुंबई की Zigma Cabin Private Limited कंपनी के खान ने बताया कि 1Bhk दो लाख रुपए में तैयार हो जाएगा। इसकी कीमत 1000 रुपए प्रति square feet रहेगी। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी पूरी देश में ऐसे घर और अन्य स्ट्रक्चर बनाकर ट्रांसपोर्ट करती है।

उन्होंने कहा कि ये घर लोगों की जरूरत के मुताबिक घर का साइज कितना भी बढ़ाया जा सकता है और इसे सही सलामत डिलीवर करना कंपनी की जिम्मेदारी होगी।

जैसी जरूरत वैसा घर

IndiaMart पर देशभर की कई कंपनियां रजिस्टर्ड है जो आपको देश के किसी भी कोने में आपकी मर्जी के मुाताबिक घर डिलीवर कर सकती हैं। ये घर आपकी जरूरतों के हिसाब से सस्ते और महंगे हो सकते हैं। नई दिल्ली की एक कंपनी जगदंबे प्री फैब सिर्फ 3.75 लाख रुपए में हाउस ऑन व्हील्स बनाकर दे रही है। यह घर वेदरप्रूफ होने के साथ दिखने में भी बेहद खूबसूरत हैं।

मिलेंगी सब सुविधाएं

अहमदाबाद की कंपनी आकाश इंटरप्राइज की नेहा रोहिरा ने बताया कि उनकी कंपनी 20 गुणा 12 से लेकर 40 गुणा 12 तक के घर बनाती है। इसकी कीमत 1500 रुपए square feet है। कस्टमर की जरूरत के मुताबिक घरों में डायनिंग हॉल, लिविंग रूम, फर्नीचर और अन्य लक्जरी सुविधाएं के अलग-अलग रेट्स हैं।

यह घर 30 से 35 दिनों में तैयार हो जाते हैं। कंपनी इन्हें कस्टमर की बताई हुई लोकेशन पर ट्रांसपोर्ट करती है। इसके बाद कस्टमर इन्हें अपनी मर्जी से कहीं भी ट्रांसपोर्ट कर सकते हैं।

लोगों को भा रहे हैं मोबाइल होम

मोबाइल होम्स का कॉन्सेप्ट लोगों को काफी पसंद आ रहा है। नेहा ने बताया कि फिलहाल हर महीने लगभग 200 मोबाइल होम्स और ऑफिस, केबिन और दुकानें बनाने के लिए उनके पास ऑर्डर आते हैं।

पिछले साल के मुकाबले 300 महंगा बिक रहा है 1121 बासमती जाने हरियाणा की मंडिओं में 1121 बासमती के भाव

उचाना -उचाना अनाज मंडी में इन दिनों किसानों को 1121 धान के भाव बीते साल से अधिक मिल रहे हैं। इन दिनों 1121 की आवक होनी शुरू हो गई है। मार्केट कमेटी सचिव जोगिंद्र सिंह ने बताया कि इस बार 1121 का भाव 3350 रुपये प्रति क्विंटल तक टॉप पर रहा है तो बीते साल ये भाव 3000 हजार रुपये प्रति क्विंटल इन दिनों मिल रहे थे।

सचिव ने बताया कि 1509 धान के भाव 2846 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं। बीते साल भी 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव इस समय मिल रहे थे। अब 39 हजार 540 क्विंटल 1121 धान मंडी में आ चुकी है।

पूंडरी-अनाज मंडी में शनिवार को 1121 धान की बोली करवाई गई। जिसके कारण मंडी में 1121 के धान में 100 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी रही। इससे किसानों में खुशी का माहौल बना है। मंडी में बोली पर धान 3250 रुपए से लेकर 3581 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका। मंडी में लगभग 3 हजार बोरी 1121 धान की आवक थी।

अलेवा– अलेवा अनाज मंडी में पिछले कई दिनों सेे धान की किस्म 1509 के भावों में आए दिन पचास से सौ रुपए तक की बढ़ोतरी हो रही है। गुरूवार को धान की किस्म 1509 के भाव में 50रुपए तक का इजाफा हुआ है।

बुधवार को एजेंसियों ने हाथ से कटाई वाली धान की किस्म 1509 को प्रति क्विंटल 2900 रुपए व पूसा 1121 को 3250 रुपए प्रति क्ंिवटल तक की खरीदा। मंगलवार को इसके भाव 2900 रुपए प्रति क्ंिवटल तक पहुंच गए है।

साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च कर यहां के 850 किसानों का कर्ज चुकाएंगे अमिताभ बच्चन

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने घोषणा की है कि वह उत्तर प्रदेश के 850 से ज्यादा किसानों का कर्ज चुकाएंगे. उन्होंने पहले भी महाराष्ट्र के 350 से ज्यादा किसानों को ऋण चुकाने में मदद की थी. इसके लिए वह 5.5 करोड़ रुपये खर्च करेंगे.

वह जिन किसानों की मदद करेंगे, उनकी पहचान कर ली गई है. बच्चन ने अपने ब्लॉग में कहा कि 350 से ज्यादा किसानों को कर्ज चुकाने में दिक्कत हो रही थी. उन्हें खुदकुशी से रोकने के लिए कुछ दिन पहले उनका ऋण चुकाया गया है.

इससे पहले आंध्र और विदर्भ के किसानों का कर्ज चुकाया गया था. अब उत्तर प्रदेश के 850 से ज्यादा किसानों की पहचान की गई है और उनके 5.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज को चुकाने में मदद की जाएगी.

76 वर्षीय अभिनेता ने अपने ब्लॉग पर लिखा, “उत्तर प्रदेश के 850 किसानों की सूची तैयार कर ली गई है और उनके 5.5 करोड़ के कर्ज चुकाने का इंतजाम किया जाएगा. इसके लिए संबंधित बैंक से बात कर ली गई है.”

अभिनेता ने यह साझा किया कि वह अजीत सिंह की भी मदद करेंगे जो केबीसी कर्मवीर में दिखे थे.

अमिताभ ने हाल ही में सरकारी एजेंसियों के माध्यम से 44 ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता की थी, जिनके परिवार के सदस्यों ने देश के लिए अपनी जान दी थी. अमिताभ ने इस अनुभव को बहुत संतोषजनक बताया था.

अगर आपके पास भी हैं सालों पुराने नोट व सिक्के, तो ऐसे हो सकते हैं मालामाल

अगर आपके पास भी पुराने नोट रखे हैं तो आप उनसे हजारों और लाखों रुपए भी कमा सकते हैं। ई-कॉमर्स साइट ईबे पर 1969 में छपा एक रुपए का नोट 699 डॉलर यानी लगभग 51 हजार रुपए में नीलाम हो रहा है।

इस तरह के एंटीक और रेयर नोट व सिक्के इकट्‌ठे करने वाले लोग इन्हें बड़ी कीमतों पर खरीदते हैं। इस साइट पर पुराने भारतीय नोट व सिक्के कई गुना अधिक दाम में बिक रहे हैं। ऐसे में अगर आपके पास भी पुराने दुर्लभ नोट या सिक्के हैं तो आप उनसें लाखों की कमाई कर सकते हैं।

इनकी भी लगी बड़ी कीमत

41 साल पुराना 100 रुपए का नोट :इस नोट के लिए शुरुआती बोली 100 डॉलर यानी कि 7300 रुपए लगाई गई है। इस लिहाज से इसकी कीमत 70 गुना से भी ज्यादा हो गई है।

2 रुपए का नोट : दो रुपए का नोट 19.99 डॉलर यानी 1460 रुपए में नीलाम हो रहा है।

10 रुपए का नोट : एस वेंकटरमन का हस्ताक्षर किया हुआ यह नोट 2190 रुपए में मिल रहा है। इसके शिपिंग चार्जेस अतिरिक्त 20 डॉलर यानी 1460 रुपए हैं।

सिक्के भी हो रहे बड़े दामों में नीलाम

एक रुपए का सिक्का : 1981/1982 के एक-एक रुपए के दो सिक्कों की कीमत 1241 रुपए लगाई गई है। इसमें शिपिंग चार्ज 1095 रुपए लगेगा।

पुराने सिक्के व दस का नोट : 1917 का एक पैसा, 1945 का एक पैसा समेत कई पुराने सिक्कों और एक दस के नोट की कीमत 1900 रुपए लगाई गई है।

सिक्कों से बनी ज्वेलरी भी शामिल

मूंगे व पुराने सिक्कों से सजा राजस्थानी गले का हार 14,235 रुपए में नीलाम हो रहा है। यह नीलामी अमेरिका से हो रही है।

नोटों की गड्डियां : पांच रुपए व दो रुपए के नोटों की गड्डियां भी 1900 और 2200 रुपए तक में नीलाम हो रही हैं। हाल ही में बंद हुए पांच सौ के नोट भी इस नीलामी में शामिल हैं।

60 लोगों को मौत के घाट उतारने वाली ट्रेन के ड्राइवर ने दी यह सफाई

अमृतसर में जिस वक्त ट्रेन हादसा हुआ, उस समय जोड़ा फाटक के पास रेल पटरियों पर खड़े होकर लोग रावण दहन देख रहे थे. इस वक्त तक लगभग अंधेरा छा चुका था. जैसे ही रावण जलना शुरू हुआ आस-पास धुआं छा गया.

तेज आतिशबाजी होने लगी. इस दौरान यहां से होकर ट्रेन गुजरी. सवाल उठता है कि क्या आखिर लोगों की इतनी भीड़ क्या रेल ड्राइवर को नहीं दिखाई दी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रेल ड्राइवर ने कहा कि रावण जलने की वजह से आसपास काफी धुआं था, घटनास्थल पर रोशनी की भी व्यवस्था नहीं थी, इसलिए उसे कुछ दिखाई नहीं दिया. रेल अधिकारी का भी कहना है कि वहां काफी धुआं था,

जिसकी वजह से ड्राइवर कुछ भी देखने में असमर्थ था, इसके अलावा ट्रेन भी घुमावदार मोड़ पर थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रेल ड्राइवर की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया गया है, रेल अधिकारी उससे पूछताछ कर रहे हैं.

इधर रेलवे का कहना है कि रावण दहन देखने के लिए लोगों का वहां पटरियों पर इकट्ठा होना “साफ तौर पर अतिक्रमण का मामला” था और इस कार्यक्रम के लिये रेलवे द्वारा कोई मंजूरी नहीं दी गई थी.

अमृतसर प्रशासन पर इस हादसे की जिम्मेदारी डालते हुए आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों को दशहरा कार्यक्रम की जानकारी थी और इसमें नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी ने भी शिरकत की थी.

रेलवे अधिकारियों ने कहा, “हमें इस बारे में जानकारी नहीं दी गई थी और हमारी तरफ से कार्यक्रम के लिये कोई मंजूरी नहीं दी गई थी, यह अतिक्रमण का स्पष्ट मामला है और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदारी लेनी चाहिए. इधर केन्द्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा है कि स्थानीय प्रशासन ने कार्यक्रम की सूचना रेलवे विभाग को नहीं दी थी.

उन्होंने कहा कि अगर रेलवे को जानकारी दी जाती तो उनके विभाग की ओर से गाइडलाइंस निश्चित रूप से जारी किये जाते. ट्रेन की तेज रफ्तार के बारे में मनोज सिन्हा ने कहा कि स्पीड पर नियंत्रण ट्रैक की स्थिति के आधार पर लगाया जाता है, ना कि भीड़ को देखते हुए. उन्होंने कहा कि अभी उनकी प्राथमिकता घायलों को ज्यादा से ज्यादा चिकित्सा और दूसरी सुविधाएं मुहैया कराना है.