ये कंपनी दे रही है सिर्फ 30 हजार रुपए इन्वेस्ट करके हर महीने एक लाख रुपए कमाने का मौका

अगर आप कम निवेश में बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो आपके लिए सुनहरा मौका है। आप सिर्फ 30 हजार रुपए के निवेश में महीने में 50 हजार रुपए से एक लाख रुपए तक कमा सकते हैं। आजकल टेक्नोलॉजी की दुनिया में बिजनेस के एक से बढ़कर एक अवसर पैदा हो रहे हैं। ऐसे में टेक्नोलॉजी पर आधारित काम करने वाली होम ऑटोमेशन कंपनी पोंगो होम (PongoHome) के साथ बतौर डीलर जुड़कर आप भी काम कर सकते हैं।

डीलरशिप लेने के बाद आप अपने शहर में भी बिजनेस शुरू कर सकते हैं। अगर आप थोड़ा बोलने में माहिर हैं तो आपके लिए और अच्छा होगा। हम आपको बता रहे हैं कि आप किस तरह इस कंपनी की डीलरशिप लेकर काम शुरू कर सकते हैं और हर महीने अच्छी इनकम कर सकते हैं।

पोंगो होम दे रही है डीलरशिप

होम ऑटोमेशन कंपनी PongoHome अपने नेटवर्क का विस्तार करने जा रही है। ऐसे में कंपनी की डीलरशिप लेने का मौका है। कंपनी की डीलरशिप लेकर आप अपने शहर में बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

सिर्फ 30 हजार में लें डीलरशिप

पोंगो टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर महादेव कुरहाडे का कहना है कि, जो लोग बिजनेस करना चाहते हैं उनके लिए कंपनी अच्छा ऑफर दे रही है। पहले हम कंपनी की डीलरशिप 60 हजार रुपए में दे रहे थे।

लेकिन लोगों को कम निवेश में बिजनेस करने का मौका देना चाहते हैं इसलिए अब कंपनी की डीलरशिप 50 फीसदी डिस्काउंट के साथ सिर्फ 30 हजार रुपए में दे रहे हैं।  वहीं कंपनी 5.50 लाख रुपए में डिस्ट्रीब्यूटरशिप दे रही है।

क्या है बिजनेस मॉड्यूल

पोंगो होम एक होम ऑटोमेशन कंपनी है जो आपको घर को स्मार्ट होम बना देती है। कंपनी आपके रूम के स्विच बोर्ड में एक इक्विपमेंट फिट करती है। इसके जरिए आप अपने मोबाइल से रूम की लाइट्स को ऑन या ऑफ कर सकते हैं। साथ ही रूम के पंखे की स्पीड को मोबाइल के जरिए ही धीमा या तेज कर सकते हैं। डीलरशिप लेने वाले शख्स को ये प्रोडक्ट्स बेचने हैं।

कैसे होगी कमाई

महादेव के मुताबिक, डीलरशिप लेने वाले शख्स को हर महीने कम से कम 1 लाख रुपए तक इनकम हो सकती है। होम ऑटोमेशन में कई तरह के कैटगरी हैं। आप 4 हजार रुपए में भी होम ऑटोमेशन करा सकते हैं और 30 हजार रुपए में भी कर सकते हैं. थोड़ा आप मेहनत करें तो महीने में लाख रुपये से ज्यादा की भी इनकम हो सकती है।

अगर आप इसकी डीलरशिप के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो कंपनी की वेबसाइट पर जाकर दिए गए कॉन्टैक्ट नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। एक बेडरूम हॉल किचन वाले घर को स्मार्ट होम बनाने पर 8 से 10 हजार का खर्च आता है।

वहीं केवल एक रूम में अगर लाइट और पंखे को कंट्रोल करना है तो इस पर 3200 रुपए तक खर्च आएगा। यदि आप महीने में ऐसे 10 से 15 क्लाइंट बना लेते है, तो आप आसानी से 30 से 40 हजार रुपए तक महीने में कमा सकते हैं। अगर आप इसकी डीलरशिप के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो pongohome की वेबसाइट पर जाकर पार्टनर बनने के लिए संपर्क हैं।

इन 5 छोटी बचत स्कीम में आपको मिलेगा बेहतरीन रिटर्न, साथ ही टैक्स सेविंग का लाभ

ज्‍यादा रिटर्न के लिए निवेश पर ज्‍यादा जोखिम भी उठाना पड़ता है। अगर आप निवेश के ऐसे विकल्‍प की तलाश कर रहे हैं जहां आपकी पूंजी भी सुरक्षित रहे साथ ही अच्‍छा ब्‍याज भी मिले तो ऐसे कई ऑप्‍शंस है। आज हम विशेष रूप से उन निवेश योजनाओं की चर्चा करेंगे जो सुरक्षित हैं और जिन पर एक तय रिटर्न तो मिलता है साथ ही आपको इनकम टैक्‍स बचाने का फायदा भी मिलता है। आइए, ऐसे ही पांच विकल्‍पों की चर्चा करते हैं।

किसान विकास पत्र 

पोस्ट ऑफिस की तरफ से पेश की जाने वाली किसान विकास पत्र सेविंग स्कीम में 112 माह या 9 सालों में पैसा डबल हो जाता है। इस पर वर्तमान में 7.7 फीसद की दर से ब्याज मिल रहा है, जो कि सरकार की तरफ से हर तिमाही पर तय किया जाता है। इस स्कीम में न्यूनतम 1000 रुपये और अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है।

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड

पीपीएफ बिना जोखिम वाला ऐसा निवेश है, जिसमें लंबी अवधि में गारंटीड रिटर्न मिलता है। पीपीएफ पर ब्याज दर हर तिमाही पर सरकार की तरफ से तय की जाती है। वर्तमान में पीपीएफ पर 8 फीसद की दर से ब्याज मिल रहा है। पीपीएफ में एक वित्त वर्ष के दौरान अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक ही निवेश किया जा सकता है। जो लोग एक साल में 1.5 लाख रुपये से अधिक निवेश करना चाहते हैं तो उन्हें इंवेस्टमेंट के लिए अन्य ऑप्शन का चयन करना होगा।

बैंक फिक्स डिपॉजिट

भारतीय नागरिकों में एफडी सबसे ज्यादा लोकप्रिय निवेश है। सभी सरकारी बैंक और प्राइवेट बैंक अलग-अलग ब्याज दर की पेशकश करते हैं। वर्तमान में बैंकों की तरफ से पेश ब्याज दर 6-8.25फीसद के बीच है। 5 साल या उससे अधिक अवधि की एफडी टैक्स में छूट के लिए फिट बैठती है, जिस पर सेक्शन 80सी के तहत छूट में आवेदन किया जा सकता है।

सुकन्या समृद्धि अकाउंट 

सुकन्या समृद्धि अकाउंट पर वर्तमान में 8.5 फीसद की दर से ब्याज मिल रहा है। इस सेविंग स्कीम को माता-पिता या कानूनी अभिभावक अपनी गर्ल चाइल्ड के नाम से खुलवा सकते हैं, इस स्कीम के लिए बच्ची की उम्र 10 वर्ष से कम होनी चाहिए। यह सेविंग स्कीम 21 साल बाद मैच्योर होती है।

एक अभिभावक अपनी दो गर्ल चाइल्ड के नाम से इस स्कीम को खरीद सकता है। इस स्कीम में अधिकतम 1.5 लाख और न्यूनतम 1000 रुपये प्रति वर्ष जमा किए जा सकते हैं। इस स्कीम पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स में छूट मिलती है। इस स्कीम में बीच में गर्ल चाइल्ड के 18 वर्ष की आयु के बाद 50 फीसद पैसा निकाला जा सकता है।

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट 

वर्तमान में पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट में 7.8 फीसद की दर से ब्याज मिल रहा है। यह 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल की अवधि के ऑप्शन में आते हैं। 5 साल की स्कीम में सेक्शन 80सी के तहत टैक्स में छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है। इस स्कीम में तिमाही पर ब्याज दर सरकार की तरफ से तय की जाती हैं और वार्षिक आधार पर मिलती हैं।

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट 

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट एक ऐसी टैक्स सेविंग स्कीम है, जो कि पोस्ट ऑफिस से खरीदी जाती है। 5 साल की अवधि वाली एनएससी स्कीम पर वर्तमान में 8 फीसद की दर से ब्याज मिल रहा है, जो कि मैच्योरिटी के वक्त मिलता है। इस स्कीम में न्यूनतम 100 रुपये और अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। इस स्कीम पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है।

क्या आपने इस अभिनेता को पहचाना?, इस अभिनेता का नई फिल्म से नया लुक आया सामने

तस्वीर को देखकर अगर आप नहीं पहचान पाए हैं तो हम आपको बता देते हैं कि यह कोई और नहीं बल्कि सदी के महानयाक अमिताभ बच्चन हैं। दरअसल, अमिताभ बच्चन ने हाल ही में अपनी अगली फिल्म गुलाबो सिताबो की शूटिंग लखनऊ में शुरू कर दी थी। इस फिल्म से ही उनका यह नया लुक सामने आया है।

अमिताभ बच्चन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर खुद इस बारे में जानकारी दी थी कि उन्होंने लखनऊ में अपनी अगली फिल्म गुलाबो सिताबो की शूटिंग शुरू कर दी है। फिल्म का निर्देशन शूजित सरकार कर रहे हैं। फिल्म 24 अप्रैल 2020 को रिलीज होगी। अब फिल्म से Amitabh Bachchan का नया लुका सामने आ गया है जिसमें वे बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं।

अमिताभ बच्चन हर बार कुछ न कुछ नया करते हैं और कभी भी ऐसा करने से पीछे नहीं हटते। किरदार के मुताबिक वे खुद तैयारी करते हैं। ऐसा ही इस फिल्म में उनके लुक को देखकर लग रहा है। आपको बता दें कि इस फिल्म में आयुष्मान खुराना की भी अहम भूमिका है। बिग बी के साथ काम करने को लेकर आयुष्मान खुराना ने हाल ही में कहा कि ”मैं सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ काम करने को लेकर उत्साहित और बेचैन भी हूंl

उनके साथ काम करने की बात सोचते ही मेरे पेट में तितलियां उड़ने लगती हैंl मुझे इस बात कि समझ ही नहीं आ रही कि जब मैं पहली बार अमिताभ बच्चन के साथ एक फ्रेम में आउंगा तब मैं कैसा महसूस करूंगाl मैं हालांकि ऐसा करने के लिए उत्सुक हूं क्योंकि सुजीत सरकार और जूही चतुर्वेदी की कमाल जोड़ी ‘विकी डोनर’ और ‘पिकू’ के बाद एक बार फिर साथ आ रही हैंl”

इस फिल्म से पहले आयुष्मान शूजीत सरकार के साथ ‘विक्की डोनर’ में साथ काम कर चुके हैं और अमिताभ बच्चन के साथ शूजीत सरकार ने ‘पीकू’ जैसी सफल फिल्म में काम किया था। ‘गुलाबो सिताबो’ के जरिए अमिताभ और आयुष्मान पहली बार बड़े पर्दे पर साथ काम करते दिखाई देंगे। आयुष्मान की आने वाली फिल्मों की बात करें तो ‘बाला’, ‘आर्टिकल 15’ और शुभ मंगल ज्यादा सावधान ‘आने वाली हैं। वहीं अमिताभ फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ और ‘ झुंड ‘में अहम भूमिका निभाते दिखाई देंगे।

इस एक गलती से सड़क हादसों में होती है सबसे ज्यादा मौत, ये हैं 5 बड़े कारण

Maruti Suzuki की तरफ से किए गए एक सर्वे में हैरान करने वाली बात सामने आई है। दिल्ली में हर साल 1600 लोगों की मौत सड़क हादसे में होती है?  भारत में 80 फीसद सड़क हादसे ड्राइवर की गलती की वजह से होते हैं,

जिनमें मौत का एक बड़ा कारण सीट बेल्ट न लगाना है। ऐसे में आज हम आपको Maruti Suzuki की तरफ से किए गए सर्वे के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां लोगों ने बताया कि वो क्यों यात्रा के दौरान सीट बेल्ट नहीं पहनते हैं। तो जानते हैं इन कारणों के बारे में, जिनकी लापरवाही से सबसे ज्यादा नुकसान होता है,

क्या डरपोक पहनते हैं सीटबेल्ट?

Maruti Suzuki के सर्वे में 40 फीसद लोगों का मानना रहा कि उनकी इमेज पर सीट बेल्ट अच्छा नहीं लगता है। इसमें से कई लोगों का यह भी मानना था कि डरने वाले लोग सीट बेल्ट बांधते हैं या सीट बेल्ट बांधने से लोग उन्हें डरपोक समझेंगे।

क्या होता है सीटबेल्ट से?

Maruti Suzuki के सर्वे में 34 फीसद लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं लगता है कि हादसे के दौरान सीट बेल्ट उनका बचाव कर सकता है। यहां हैरान करने वाली बात यह भी है कि ज्यादा तर लोगों को यह भी नहीं पता कि सीट बेल्ट कैसे काम करता है और हादसे के दौरान यह उनकी कैसे रक्षा कर सकता है।

जबकि, इसका सीधा सा जवाब है यह है कि हादसे के दौरान सीट बेल्ट आपको बांधे रखता है। इससे हादसे के दौरान आपका सर डैशबोर्ड से नहीं टकराता है। अगर आप सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं, तो हादसे के दौरान आप डैशबोड से टकरा सकते हैं। इसके अलावा आप शीशे से बाहर भी गिर सकते हैं।

पसंद नहीं है सीट बेल्ट पहनना

सर्वे के मुकाबिक युवा वर्ग को सीट बेल्ट पहनना पसंद नहीं है। सर्वे में 80 फीसद सिंगल लोगों ने माना कि उन्हें सीट बेल्ट पहनना पसंद नहीं है। वहीं, 66 फीसद शादीशुदा लोगों को सीट बेल्ट पहनना पसंद नहीं है। इस कड़ी में 50 फीसद ऐसे शादीशुदा लोग हैं जिनके बच्चे नहीं हैं।

क्या सीट बेल्ट से कपड़े खराब होते हैं?

सर्वे के मुताबिक करीब 32 फीसद लोग कपड़ों में सिलवट के डर से सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं। हालांकि, इसके लिए ग्राहक सीटबेल्ट में कुशन कवर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे उनके कपड़ों में सिलवटें नहीं आएंगी। ऐसे में यह कभी न भूलें कि फैशन से ज्यादा आपकी जान कीमती है।

अब प्राइवेट कंपनियां चलाएंगी ट्रेन, सरकार कर रही है यह तैयारी

अब निजी कंपनियों को पैसेंजर और टूरिस्ट ट्रेन संचालन का मौका मिल सकता है , यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए सरकार एक नई योजना पर काम कर रही है। रेलवे बोर्ड सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार 100 दिनों में कुछ रूट्स पर ट्रेन चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों से बोलियां मंगवा सकती है।

सरकार ने यह योजना कम भीड़भाड़ वाले रूट पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेन और पर्यटन के लिहाज से कुछ महत्वपूर्ण रूटों के लिए बनाई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निजी कंपनियों द्वारा आपरेट होने वाले रूट पर टिकटिंग का काम आईआरसीटीसी को सौंपा जा सकता है।

टिकट के साथ ट्रेनों के अंदर सेवाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी भी आईआरसीटीसी को दी जाएगी और बदले में रेलवे को एक तय रकम मिलेगी। ये ट्रेनें बड़े-बड़े शहरों को जोड़ते हुए कई मार्गों पर चलेंगी। सूत्रों के मुताबिक रेलवे रैक की जिम्मेदारी भी आईआरसीटीसी की होगी।

इसके बदले में रेलवे की वित्तीय शाखा भारतीय रेलवे वित्तीय प्राधिकरण (आईआरएफसी) को सालाना लीज चार्ज चुकाया जाएगा। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव के मुताबिक , ‘रेलवे की ओर से निजी कंपनियों को बोली लगाने का मौका दिया जाएगा।

इससे इस बात का पता चलेगा कि कौन सी निजी कंपनी महत्वपूर्ण शहरों में 24 घंटे चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों के संचालन का अधिकार हासिल करने के लिए आगे आ सकती हैं।’ हालांकि निजी कंपनियों से संपर्क करने से पहले रेलवे ट्रेड यूनियनों से भी संपर्क करेगा।

विशाल अभियान शुरू करने जा रहा है रेलवे

इसके अलावा रेलवे यात्रियों से टिकट की कीमत पर मिलने वाली सब्सिडी को छोड़ने की अपील का विशाल अभियान शुरू करने जा रहा है। इसके तहत टिकट बुक करते समय लोगों को सब्सिडी छोड़ने का विकल्प दिया जाएगा। रेलवे सूत्रों की मानें तो उसे यात्री परिवहन कारोबार की लागत का महज 53 फीसदी हिस्सा ही हासिल होता है।

सरकार देगी किसानों को झटका, खाते में से कट जाएंगे इतने रुपए

पीएम किसान पेंशन योजना के लिए किसानों को अलग से नकद प्रीमियम देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  पीएम सम्मान निधि से पेंशन योजना को लिंंक कर दिया जाएगा, जिससे तय समय पर पेंशन योजना की प्रीमियम स्वत: ही खाते से कट जाएगा।

सरकार ने इसके लिए कार्ययोजना शुरू कर दी है। किसानों के लिए शुरू की जा रही पेंशन योजना को दो माह में लॉन्च करने की तैयारी है। मंत्रालय में इस संबंध में आयोजित बैठक में यह बात सामने आई है कि बैंक आदि किसानों के घर से काफी दूर होते हैं,

इस वजह से वे ऐसी योजनाओं के प्रति लापरवाही बरतते हैं, जिसमें गांव से दूर जाना होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय खाता लिंक करने की तैयारी कर रहा है।कृषि मंत्रालय ने अगस्त तक देशभर के सभी 14 करोड़ छोटे बड़े किसानों को पीएम किसान सम्मान योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा है।

फिलहाल अभी तक 3.11 करोड़ किसानों को भुगतान किया जा चुका है जबकि 80 लाख के करीब किसानों के डाटा की जांच की जा रही है जिन्हें इसी माह भुगतान कर दिया जाएगा। इसके अलावा अगस्त तक सरकार पीएम किसान पेंशन योजना लांच कर सकती है।

इस योजना के लिए किसानों की आयु 18 से 40 के बीच होनी चाहिए। औसतन साल भर में 1200 रुपए किसान का योगदान होगा। पीएम सम्मान निधि से 6000 सालाना से 1200 रुपए प्रीमियम कट जाएगा। इस तरह किसान को 4800 रुपए ही मिलेंगे।

औसत आयु 29 साल के अनुसार 100 रुपए प्रति माह देना होगा। उम्र कम होने पर योगदान कम और ज्यादा होने पर अधिक योगदान देना होगा। इतना ही अंशदान सरकार भी करेगी। 60 साल पूरे होने पर 3000 रुपए सालाना किसान काे पेंशन मिलेगी।

इस तरह करे धान में सरसों की खली का उपयोग, 7 क्विंटल उत्पादन में होगी बढ़ोतरी

सरसों का तेल निकालने के बाद जो अवशेष प्राप्त होता है उसको खली कहते हैं । इसका प्रयोग धान के साथ साथ अन्य फसलों में करने से काफी मात्रा में तत्वों के प्राप्त होने के साथ ही साथ मृदा में पनपने वाले हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करते हैं । फसल की आवश्यकतानुसार इनका प्रयोग करना चाहिए ।

धान में सरसों की खली का उपयोग बहुत फायदेमंद है। यह एक जैविक तरीका है जिसके साथ हम धान की उपज बढ़ा कर सकते हैं। इसके परिणाम धान के पौधे की ग्रोथ के लिए बहुत अच्छे हैं। 2006 में, बांग्लादेश विश्वविद्यालय ने धान में सरसों की खली के उपयोग के संबंधित एक ट्रायल लगाया था, जिसमें बहुत अच्छे परिणाम आये थे। परीक्षणों के बाद, धान उपज में प्रति हेक्टेयर 7 क्विंटल की पैदावार में बढ़ोतरी हुई थी।

रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि सरसों की खली के उपयोग से चावल के अनाज की मोटाई बड़ी है, धान की बाली की संख्या बड़ी है और अनाज के वजन में बढ़ोतरी हुई है। फसल की उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है, धान उपज बढ़ने का कारण सरसों की खली में पाए गए छह मुख्य तत्व हैं। विशेष रूप से, नाइट्रोजन, पोटेशियम और फास्फोरस के साथ-साथ सल्फर, ज़िंक और ब्रोन भी पाए जाते हैं। इन तत्वों के लिए, हमें खेतों में यूरिया, डीएपी और अन्य की आवश्यकता होती है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक एकड़ में 32 किलोग्राम खल का उपयोग किया गया था , लेकिन मिट्टी अच्छी होने के कारण, हम एक एकड़ में केवल 16 किलोग्राम का उपयोग कर सकते हैं।  मिटटी अच्छी नहीं है वहाँ 20 किलोग्राम उपयोग कर सकते हैं। धान में खली का उपयोग करने के दो तरीके हैं। पहली विधि ड्रम में लगातार 5-6 दिनों तक रखे और जब ये पानी मे घुल जाए तब इसे खेत मे पानी लगाते समय डाल दे। दूसरा तरीका है आप इसे सूखा ही खेत मे डाल सकते हैं। जब धान की फसल 15-20 दिन की होती है तो इसका उपयोग करने का सही समय होता है,

टीम इंडिया को लगा बड़ा झटका, विश्व कप से बाहर हुआ भारत का ये धाकड़ बल्लेबाज

आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 में टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है. भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन चोट के चलते पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं. शिखर धवन की जगह ऋषभ पंत को टीम में शामिल किया गया है.

बता दें कि शिखर धवन को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में अंगूठे में चोट लग गई थी. जिसके बाद धवन को शुरुआत में पहले 10 दिनों के लिए आराम दिया गया था, लेकिन उनके समय पर इस चोट से न उबर पाने के बाद अब उन्हें स्वदेश लौटना होगा.

शिखर धवन को ये चोट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी 117 गेंदों की 109 रन की तूफानी पारी के दौरान लगी थी. पैट कमिंस की एक उठती हुई गेंद शिखर के अंगूठे पर लग गई थी. बाद में हुए स्कैन में धवन के अंगूठे में हेयरलाइन फ्रैक्चर की पुष्टि हुई थी. इस चोट की वजह से धवन न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ मैचों में टीम इंडिया का हिस्सा नहीं थे.

 ऋषभ पंत को मिला मौका

शिखर धवन की जगह ऋषभ पंत को टीम में शामिल किया गया है. उन्होंने अबतक केवल पांच वनडे मैच खेले हैं. पांच मैचों में ऋषभ पंत ने 93 रन बनाए हैं. हालांकि साल 2016 के अंडर 19 विश्वकप में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था और तभी वह क्रिकेट जगत की नजर में आ गए थे. पंत के टेस्ट करियर की बात करें तो अबतक उन्होंने 9 मैच खेले हैं जिसमें 696 रन बनाए हैं.

उनके नाम टेस्ट में दो शतक और दो अर्धशतक शामिल है. उनका सर्वाधिक स्कोर 159 है. पंत ने भारतीय टीम के लिए 15 टी-20 मैच भी खेले हैं. उन्होंने टी-20 में 233 रन बनाए हैं जिसमें एक अर्धशतक शामिल है.ऋषभ पंत का प्रदर्शन आईपीएल में शानदार रहा है. 54 मैचों में उन्होंने 1736 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने 1 शतक और 11 अर्धशतक भी लगाए हैं. उनका ब्ल्लेबाजी औसत 36.17 और स्ट्राइक रेट 162.7 का रहा है.

जानिए सड़क पर गाड़ी चलाने के नए नियम, ट्रैफिक नियम तोड़ने पर कटेगा 10 गुना ज्यादा चालान

भारत में जल्द ही ड्राइविंग का स्टाइल बदलने वाला है। इसकी वजह है कि अगर ड्राइविंग के दौरान जरा सी भी लापरवाही की, तो तकरीबन 10 गुना तक जुर्माना चुकाना पड़ सकता है। दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक सड़क परिवहन मंत्रालय की तरफ से Motor Vehicles के अमेंडेंट बिल को जल्द राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। अगर यह बिल पास हो जाता है तो चालान के सभी नियम बदल जाएंगे।

नय बिल में जिन बातों पर जोर दिया गया है उनमें पहले के मुकाबले 10 गुना ज्यादा जुर्माना, पीड़ितों को ज्यादा मुआवजा और चुनिंदा मामलों में कार के मालिक के खिलाफ क्रिमिनल केस शामिल हैं। तो जानते हैं कि पीएम मोदी की अगुवाई वाली Modi 2.0 में सड़क नियमों को लेकर क्या बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं,दरअसल Motor Vehicles Act, 1988 के अमेंड बिल को सरकार जल्द राज्यसभा में पेश कर सकती है।

यह बिल पहले ही लोकसभा में पास हो चुका है। हालांकि, इसे राज्यसभा में पास कराने को लेकर सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें सबसे बड़ी चुनौती बिल को बहुमत से पास कराने की है।ET Auto की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में पास हुआ बिल ही राज्यसभा में लाया जाएगा, रिपोर्ट के मुताबिक अगर यह बिल पास होता है, तो फाइन की सीमा 1 लाख रुपये तक जा सकती है,

जिसे राज्य सरकारों की तरफ से 10 गुना तक बढ़ाया जा सकता है।कार के खराब पार्ट को ठीक करने के लिए कंपनियों को कार वापस लेना होगा और फिर वापस लौटाना होगा।खराब क्वालिटी के लिए कार कंपनियां जिम्मेदार होंगी।

बिल में क्या है खास?

  • सरकार की तरफ से ‘हिट एंड रन’ मामले में पीड़ित परिवार को 25,000 रुपये की जगह 2 लाख रुपये मुआवजा देने का प्लान
  • अगर नाबालिग अपने वाहन से किसी भी ट्रैफिक नियम को तोड़ता पाया गया या किसी दुर्घटना का कारण बनते हुए पाया गया, तो उस कार के मालिक के खिलाफ क्रिमिनल केस चलने का प्रावधान है। हालांकि, कार मालिक को उस समय माफ किया जा सकता है,

अगर वो साबित कर सके कि उसकी जानकारी के बगैर उसके वाहन का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, नाबालिग पर Juvenile Justice Act के दौरान कार्रवाई होगी। इसके साथ ही वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा।

  • शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 2,000 रुपये की जगह 10,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
  • रैश ड्राइविंग पर 1,000 से 5,000 रुपये चालान का प्रावधान है।
  • बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने पर 500 रुपये की जगह 5,000 रुपये का चालान कटेगा।
  • स्पीड लिमिट पार करने पर 400 रुपये की जगह 1,000 से 2,000 रुपये का चालान कटेगा।
  • बिना सीट बेल्ट गाड़ी चलाने पर 100 रुपये की जगह 1000 रुपये का चालान कटेगा।
  • लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए आधार (Aadhaar) को अनिवार्य किया जाएगा।
    जरूरी स्टैंडर्ड को पूरा न कर पाने पर कार कंपनियों को 500 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना होगा।

सालों पुराने पेड़ों को उखाड़कर दूसरे जगह रोपता है ये मशीन, इन खास तकनीक से है लैस

अब भारत के बड़े बड़े शहरों में कम से कम उन पेड़ों को काटने की जरूरत नहीं रह गई, जो 20 साल तक पुराने हैं, या जिनकी जड़े 6-7 फुट गहराई तक ही गई हैं। अलग-अलग प्रोजेक्ट में रुकावट बन रहे पेड़ों को काटना नहीं पड़ेगा।

बल्कि जर्मनी की एक मशीन के जरिए इन्हें उखाड़कर दूसरी जगह लगा दिया सकते है। दिलचस्प बात ये है कि जिन पेड़ों का पता बदला है, उसमें से 99 फीसदी लहलहा रहे हैं। लगाए जाने के बाद हल्की बारिश ने इन पेड़ों में फिर से जान फूंक दी है।

जर्मनी तकनीक से है लैस

जर्मनी से आयातित इस मशीन को ट्री ट्रांसप्लांटर मशीन कहते है । भारत में यह मशीन जर्मनी से मंगवाई है। खास किस्म के बुलडोजर जैसी दिखने वाली एक मशीन 1.75 करोड़ रुपए की है। दरअसल पूरा सिस्टम एक भारी वाहन के रूप में असेंबल्ड है। एक्सपर्ट ने बताया कि सिर्फ 10 लीटर डीजल में यह मशीन एक घंटे में एक पेड़ उखाड़कर इसे दूसरी जगह लगा देती है।

 फीट मोटे पेड़ पर सफल

ट्री ट्रांसप्लांटर मशीन से 36 इंच (तीन फीट चौड़ाई ) वाले पेड़ को आसानी से उखाड़ा जा सकता है। मशीन को आपरेट करने वाले इश्तियाक अहमद ने बताया कि इससे 15-20 साल पुराने पेड़ को आसानी से उखाड़कर शिफ्ट किया जा सकता है। ऐसा हर पेड़ इस मशीन की जद में है, जिसकी जड़ें 6-7 फीट गहराई तक हों।