ऐसे निकालें इंटरनेट से खसरा खतौनी

अगर आप को अपनी जमीन से संबंधित कोई कागजात चाहिए, जैसे खतरा खतौनी और नक्शा आदि तो तहसील कचहेरी जाना पड़ता है। लेकिन अगर आप इसमें लगने वाले समय और पैसे को बचाना चाहते हैं तो आपके पास दो विकल्प है।

पहला अपने घर के पास के जनसुविधा केंद्र में जाकर कुछ पैसे देकर इसे निकलवा सकते हैं, दूसरा की आप खुद भी इंटरनेट पर अपने राज्य की राजस्व विभाग संबंधी वेबसाइट पर जाकर खसरा-खतौनी निकाल सकते हैं। आज कल जमीन की रजिस्ट्री करानी हो या उस पर किसान क्रेडिट कार्ड बनवाना हो, या फिर कोई सरकारी योजना का लाभ लेना हो खसरा-खतौनी जरुरी है।

ये जमीन के वो कागज़ हैं जो न सिर्फ कई योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करते हैं बल्कि जमीन पर आप के मालिकाना हक का भी सबूत होती हैं। लेकिन इन्हें लेने के लिए लोगों को अक्सर बहुत परेशान होना पड़ता है। इंटरनेट से भूलेख निकलवाने की सुुविधा की राज्यों में है लेकिन कई लोगों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि ज़मीन के कागजा़त यानि भूलेख हासिल करने की प्रक्रिया अब बहुत आसान हो चुकी है।

इंटरनेट पर ही अब ये सारी जानकारियां मौजूद हैं। लोग इस तरह से अपना काफी समय और पैसा बचा सकते हैं,  देशभर में पढ़े जाने वाले सेक्शन ‘बात पते की’ में समझिए पूरा तरीका। (ये तरीके नीचे वीडियो में दिया गया है।)

कैसे मिलेगी जानकारी

  • उदाहरण के लिए अगर आपको उत्तर प्रदेश में जमीन से संबंधित कागज चाहिए तो सबसे पहले यूपी सरकार की वेबसाइट भूलेख http://upbhulekh.gov.in/ पर जाएं।
  • वेबसाइट के बाईं तरफ से चौथे ऑप्सन “खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल देखें” पर क्लिक करें।
  • फिर आपके सामने एक छोटा से बॉक्स दिखेगा जिसमें आपको बांए तरफ एक छोटे से बॉक्स में दिए गए कोड को दाएं तरफ खाली बॉक्स में भरें। बॉक्स में दिए गए कोड को भरने के बाद ‘सबमिट’ बटन पर क्लिक करें।
  • अब आपके सामने एक नया पेज खुलकर आ जाएगा जिसमें जिलों के नाम लिखे होंगे।
  • अब आपको कॉलम में दिए गए जिलों में अपने जिले के नाम पर क्लिक करें।

  • जिले की सूची के बाद बनी तहसीलों की सूची से अपनी तहसील के नाम पर क्लिक करें।
  • इसके बाद सबसे दाईं ओर बनी सूची में अपने गाँव के नाम पर क्लिक करें और फिर उसके ठीक ऊपर लिखे आगे पर क्लिक करें।
  • अब एक नया पेज खुलेगा। अपनी खसरा खतौनी या खाता संख्या याद हो तो इस पेज पर इनके आगे बने गोलाकार बिंदुओं पर क्लिक करके खोजें पर क्लिक करें, आप चाहें तो अपने नाम से भी अपने भूलेख का खोज सकते हैं। खसरा संख्या और खाता संख्या के लिये दी गई जगह पर लिखने के लिए नीचे दिए गए अंकों वाले बॉक्स पर क्लिक करें और नाम से खोजने के लिये नीचे दिये गये अक्षरों पर क्लिक करके अपना नाम लिखें।
  • आपकी ज़मीन के भूलेख अब आपके सामने हैं। आप इसका प्रिंट आउट भी ले सकते हैं।

नोट : खसरा खतौनी निकालने का यह उदाहरण उत्तर प्रदेश भूलेख के लिए है। ऐसे ही आप भारत के किसी भी राज्य के भूलेख में जाकर अपने जमीन संबंधित कागजात डाउनलोड कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए नीचे तीन राज्यों  का लिंक है.

हरियाणा से संबंधित जमीन के कागजात के लिए वहां की वेबसाइट हलरिस  हरियाणा  http://jamabandi.nic.in/land records/querylink.aspx पर क्लिक करें..

मध्य प्रदेश में जमीन, नक्शा और दूसरे कागजातों के लिए ये आयुक्त- भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त, मध्य प्रदेश की वेबसाइट https://mpbhulekh.gov.in/Login.do# पर क्लिक करें..

बिहार के लोग जमीन संबंधित जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.. http://164.100.150.10/biharbhumi/

गाजर घास से ऐसे त्यार करें यूरिया जैसी ताकतवर खाद

गाजर घास का वैज्ञानिक नाम पार्थेनियम हिस्टोफोरस है, इसमें प्रचुर मात्रा में नाइट्रोजन होती है। वैसे तो इसका पौधा इंसानों ही नहीं, जानवरों को भी कई तरह के रोग दे सकता है लेकिन इसके पौधे से अच्छी किस्म की कंपोस्ट खाद भी बनाई जा सकती है। यूपी समेत देश के अलग-अलग कृषि विज्ञान केंद्रों में इसके उपयोग के तरीके सिखाए जा रहे हैं।

इसी बीच कुछ किसानों ने इसके तरल खाद बनानी भी शुरू कर दी है। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के करताज में रहने वाले प्रगतिशील किसान राकेश दुबे ने गोमूत्र और गाजर खास के स्वरस से तरल खाद बनानी शुरू की है, जो यूरिया का अच्छा विकल्प बन रही है।

राकेश दुबे बताते हैं, “कांग्रेस या गाजर खास किसानों को एलर्जी समेत कई बीमारियां दे रही है, इसकी रोकथाम भी बहुत मुश्किल है, खासकर जैविक खेती करने वाले किसान काफी परेशान रहते हैं, मगर ये किसान गाजर घास और गोमूत्र के स्वरस के जरिए अच्छी जैविक खाद बना सके हैं,

जो गेहूं, मक्का से लेकर कई फसलों में काम आएगी। जहर मुक्त खेती में नाइट्रोजन की आपूर्ति हमेशा समस्या रही है। कुछ किसान आंवला और मट्टा मिलाकर छिड़काव करते हैं, कुछ घनजीवामृत से लेकर वेस्टडीकंपोजर तक। लेकिन राकेश दुबे अब गाजर घास का रस छिड़क रहे हैं।

देश के अलग-अलग हिस्सों के किसान भी गाजर घास का सदुपयोग कर सकें, इसके लिए राकेश दुबे ने स्वरस बनाने का एक वीडियो और पूरी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की है। जिसमें बनाने की पूरी विधि और छिड़काव के तरीके बताए गए हैं।

गाजर स्वरस बनाने की विधि आठ एकड़ मक्के के लिए राकेश दुबे की विधि:

30 किलो गाजर घास को बारीक काटकर 60 किलो गौमूत्र में मिला दिया। फिर उसमें 100 फिटकरी को 3-4 लीटर के गोमूत्र में घोलकर अच्छी तरह मिलाने के बाद गोमूत्र और गाजर घास वाले ड्रम में डाल देंगे। फिर इसे पूरे 3 दिन के लिए ड्रम में रख दिया जाएगा और जिसे समय-समय पर चलाना पड़ेगा। बाद में इसे महीन कपड़े से छानकर अलग कर लिया जाएगा। जिसे बाद फसल पर छिड़काव किया जा सकता है।

प्रति टंकी (20 लीटर वाली) में 2 लीटर गाजर घास स्वरस मिलाना है। इसे सुबह 10 बजे से पहले ही खेतों में छिड़काव करना चाहिए क्योंकि नाइट्रोजन उठाने और स्टोमेटा खुलने का ये उपयुक्त समय होता है।

एक एकड़ की विधि:

चार किलो गाजर घास, 8 लीटर गोमूत्र और 10 ग्राम फिटकरी के जरिए आप स्वरस बना सकते हैं

पाया जाता है विषाक्त रसायन

गाजर घास में रेस्क्युपटरपिन नामका विषाक्त रसायन पाया जाता है। जो फसलों की अंकुरण क्षमता पर विपरीत असर डालता है। इसे पराकरण अगर फसलों में ज्यादा पड़ जाएं तो उनमें दाना बनने की क्षमता कम हो जाती है। इनका दुष्प्रभाव इतना ज्यादा होता है कि दहलनी फसलों में नाइट्रोजन सोखने की जो क्षमता होती है ये उसे भी प्रभावित करते हैं। इसके संपर्क में आने पर किसानों को एग्जिमा, एलर्जी, बुखार और नजला जैसी बीमारियां हो जाती है।

अगर पशु इनके लपेटे में आ जाएं तो या दूसरी घास के साथ इसे खा जाएं तो उनके थनों और नथुनों में सूजन आ सकता है, समस्या ज्यादा गंभीर होने पर मौत भी हो सकती है।

रासायनिक तरीकों से रोकथाम के उपाय

गाजर घास को खत्म करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन लगातार अगर कोशिश की जाए तो इसे नष्ट कर सकते है। सबसे जरुरी है इसके पौधों में फूल आने से पहले इन्हें काटकर जलाया जाए। या फिर उनकी खाद बनाई। तीसरा तरीका है।

खरपतवार नाशक का छिड़काव करें? गाजर घास के ऊपर 20 प्रतिशत साधारण नमक का घोल बनाकर छिड़काव करें। हर्बीसाइड जैसे शाकनाशी रसायनों में ग्लाईफोसेट, 2, 4-डी, मेट्रीब्युजिन, एट्राजीन, सिमेजिन, एलाक्लोर और डाइयूरान आदि प्रमुख हैं। अगर घास कुल की वनस्पतियों को बचाते हुए केवल गाजर घास को ही नष्ट करना है तो मेट्रीब्युजिन का उपयोग करना चाहिए।

मैक्सिकन बीटल (जाइगोग्रामा बाईकोलोराटा) जो इस खरपतवार को बहुत मजे से खाता है, इसके ऊपर छोड़ देना चाहिए। इस कीट के लार्वा और वयस्क पत्तियों को चटकर गाजर घास को सुखाकर मार देते हैं।

ज्यादा जानकारी के लिए वीडियो देखे

गाजर घास से कंपोस्ट बनाने के उपाय

जौनपुर के बक्शा कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप कन्नोजिया हैं,”इस घास से यदि किसान खाद बना लें तो उनकी परेशानी का हल निकल आएगा। गाजर घास से खाद बनाने के लिए किसानों को एक गड्ढा खोदना होता है। गड्ढे की लम्बाई 12 फीट, चौड़ाई चार फीट और घहराई पांच फीट होनी चाहिए। इस गड्ढे में नौ इंच चौड़ी की दीवार बनानी होगी। इसे सीधा जोड़ेंगे। जब तीन स्टेप तीन रदृा ईंट रखने के बाद सात इंच चारों ओर जाली बनाई जाएगी।

इसी तरह ईंट की जोड़ाई सीधी और जालीदार करते रहेंगे। इसके बाद सूखी गाजर घास को अलग और हरी गाजर घास को अलग रख लेंगे। छह इंच तक हरा और सूखा वाला डंठल नीचे भर देंगे। इसके बाद 5 किलो गोबर पानी में ढीला घोलकर इसमें डाल देंगे। साथ में 2 इंच मिट्टी भी डालेंगे। भराई करने के बाद उसके ऊपर से मुलायम वाला डंठल डाला जाएगा। फिर पांच किलो गोबर पानी के साथ मिक्स करके तर करेंगे। इसी तरह गड्ढे को उपर तक भरना होगा।”. संदीप कन्नोजिया कहते हैं, “गाजर घास से बनी 20 टन खाद एक हेक्टेयर खेत के लिए मुफीद है।

news sources: gaonconnection.

अंडा ट्रे के इस्तेमाल से आप भी ऐसे ले सकते है सड़े हुए प्याज़ से मुनाफा

आपकी जेब ढीली कर देने वाली प्याज कभी-कभी कौड़ियों के दाम पर बिकने को मजबूर हो जाती है जिससे किसानों को काफी सही मुनाफा नहीं मिल पाता। किसानों को उनके प्याज की सही कीमत मिले इसके लिए राजविंदर सिंह राना ने एक नई तकनीक इजाद की है। राजविंदर पंजाब के लुधियाना जिले के मदियानी गांव में रहते हैं।

उन्होंने यह देखा कि कई बार जब प्याज हल्का सड़ने लगता हैं तो किसानों को उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता। राजविंदर ने समस्या का हल निकालने के लिए इस विषय शोध किया। उन्होंने ‘एग ट्रे’ में प्याज रखकर सप्ताह में दो बार पानी का छिड़काव किया। इसके बाद उससे हरी पत्ती वाला प्याज निकलने लगा।

राजविंदर बताते हैं कि एक किलो प्याज में जितने गुण पाए जाते हैं, उतने ही गुण एक हरे पत्ती वाले प्याज में पाए जाते हैं। वैसे तो इस इस तकनीक का इस्तेमाल हम उस समय कर सकते हैं जब हमारे पास मिट्टी का कोई साधन न हो लेकिन अभी मैंने इसका इस्तेमाल अपनी किचेन में किया है।

इस प्याज का इस्तेमाल हम रोजाना कर सकते हैं। ये वर्षों चलने वाली प्रक्रिया है, इससे हमारे घर में हल्का खराब हो रहा प्याज प्रयोग में आ जाएगा। राजविंदर आगे बताते हैं कि इस प्रक्रिया से किसानों के प्याज का उन्हें सही दाम भी मिलेगा। साथ ही अगर कोई इस हरे प्याज एग ट्रे को बाजार में बेचना चाहेगा तो उस समय बाजार भाव के हिसाब से 40-60 रुपए आसानी से कमाए जा सकते हैं।

आप भी अपनी रसोई में खाली एग ट्रे में घर में हल्के खराब हो रहे प्याज को एग ट्रे के खानों में भरकर रख सकते हैं। सप्ताह में दो बार हल्के पानी का इसमें छिड़काव करें। इसमें हर सप्ताह में दो बार पानी डालते रहें जिससे ये हरा बना रहेगा। इस तकनीक से घर में खराब हो रहे प्याज का हम सही से प्रयोग कर सकते हैं।

बाबा रामदेव की पतंजलि अब बेचेगी सस्ता गाय का दूध, लॉन्च किए ये पांच नए प्रोडक्ट

योग गुरू बाबा रामदेव के आयुर्वेद और सोशल मीडिया में अपना हाथ आजमाने के बाद अब पतंजलि डेयरी सेक्टर में भी अपने पांव पसारने की तैयारी कर ली है. पतंजलि आयुर्वेद डेयरी सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए गुरुवार को गाय के दूध और उनसे बने उत्पादों को लॉन्च किया.

पतंजलि ने अब दूध, दही, छाछ और पनीर की इंडस्ट्री में भी कदम रख दिया है. योगगुरु रामदेव ने गुरुवार को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में इसका ऐलान किया. गाय के दूध के दाम 40 रुपये प्रति लीटर होंगे, इस तरह यह 2 रुपये प्रति लीटर सस्ता होगा.

पतंजलि आयुर्वेद ने इसके अलावा फ्रोजन मटर, मिक्स वेज, स्वीट कॉर्न और फ्रेंच फ्राइज भी लॉन्च किए. ये सभी फ्रोजन प्रोडक्ट हैं. कंपनी पहले दिन से ही 4 लाख लीटर गाय के दूध से शुरुआत कर रही है. दिल्ली NCR में 30 हजार लीटर,

राजस्थान में 8 हजार लीटर, मुंबई में 10 हजार लीटर और पुणे में 8 हजार रिटेलर्स इसकी सप्लाई करेंगे. इसके अलावा टेट्रा पैक में दूध, काऊ टेबल बटर, फ्लेवर्ड दूश की पूरी रैंज भी उतारेगी. कंपनी ने इसके जरिए 1 हजार करोड़ का लक्ष्य है। कंपनी 1 लीटर दूध को 40 रुपए में बेचेगी.

ये सभी प्रोडक्ट इसी रैंज के दूसरे प्रोडक्ट से 50 फीसदी सस्ते होंगे। कंपनी ने इसके अलावा दुधारू पशुओं के लिए पतंजलि दुग्धामृत ब्रांड का यूरिया रहित कैटल फीड और फीड सप्लीमेंट भी लॉन्च किया। पशुओं के आहार में यूरिया और कई हानिकारक प्रोडक्ट मिलाकर किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है।

पतंजलि आयुर्वेद ने दिव्य जल भी लॉन्च किया है। ये 250 ml, 500 ml, 1 लीटर, 2 लीटर, 5 लीटर और 20 लीटर के विकल्प में मिलेगा। जल्दी ही कंपनी नेचुरल मिनरल वाटर और हर्ब इन्फ्यूज्ड वाटर के वैरियंट भी लॉन्च करेगी। इसके साथ ही बाबा रामदेव नें 6 मेगावॉट का सोलर पैनल प्लांट भी शुरू कर दिया है।

कंपनी सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर हाइब्रिड इनवर्टर, सोलर वारट पम्प जैसे प्रोडक्ट बनाए हैं। पतंजलि लगातार अपने FMCG प्रोडक्ट की रैंज को बढ़ा रही है। पतंजलि HUL और कोलगेट जैसी बड़ी कंपनियों को टक्कर दे रही है। हाल ही में पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने कहा था कि पतंजलि को लिस्ट करवाने की योजना नहीं है।

राजस्थान में 38 रुपये लीटर होगा गाय का दूध

पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र में इनकी बिक्री शुरू हो रही है। बाकी राज्यों में धीरे-धीरे इनकी बिक्री शुरू होगी। पतंजलि की योजना आइसक्रीम और दूसरे डेयरी प्रॉडक्ट्स को भी बाजार में उतारने की है।

राजस्थान में एक लीटर गाय का दूध 38 रुपये में मिलेगा तो वहीं दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य शहरों में 40 रुपये लीटर होगा. आधा लीटर 20 रुपये और 200 एमएल 10 रुपये का होगा.

1 किलो दही 50 रुपये का

पतंजलि के गाय का दही 50 रुपये किलो होगा. 400 ग्राम पाउच 25 रुपये, 200 ग्राम पाउच 15 रुपये और 400 ग्राम कप 40 रुपये, 200 ग्राम कप 20 रुपये और 85 ग्राम कप 10 रुपये का होगा. छाछ की बात करें तो 500 एमएल 10 रुपये का और मसाला छाछ 200 एमएल 5 रुपये और 400 एमएल 10 रुपये की होगी.

गाय के दूध का पनीर का होगा इतना दाम

गाय के दूध का बना पतंजलि का 1 किलो पनीर 280 रुपये का होगा. वहीं 200 ग्राम 65 रुपये का होगा.

खुशखबरी ! पेट्रोल भरवाने पर मिल रहा है 40 रुपये का डिस्काउंट, यह है ऑफर

वैसे तो पेट्रोल की कीमतों आसमान पर हैं। पूरे देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर रोज बवाल हो रहा है। धरना-प्रदर्शन और भारत बंद तक हो चुका है लेकिन कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। आज सुबह ही एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा हुआ है।

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 28 पैसे बढ़ाए गए हैं, जबकि डीजल में 22 पैसे बढ़े हैं। अब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 81.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 73.30 रुपये प्रति लीटर है।

वहीं इसी बीच राहत की खबर यह है कि आप 100 रुपये का पेट्रोल भरवाकर 40 रुपये का डिस्काउंट ले सकते हैं। तो आइए जानते हैं कैसे मिलेगा 40 रुपये का डिस्काउंट?

100 रुपये या इससे ज्यादा का पेट्रोल भरवाने पर मिलेगा कैशबैक

सबसे पहले आपको बता दें कि यह ऑफर इंडियन ऑयल की ओर से मिल रहा है, हालांकि कई रिपोर्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि सभी पेट्रोल पंप पर यह ऑफर मिल रहा है। दरअसल यह ऑफर डिजिटल वॉलेट फोनपे एप की ओर से मिल रहा है। इस ऑफर के तहत पेट्रोल भरवाकर आपको फोनपे ऐप से पेमेंट करना होगा।

इसके बाद आपको 100 रुपये या इससे ज्यादा के पेमेंट पर 40 रुपये का कैशबैक मिलेगा। यह कैशबैक आपको 10 बार पेट्रोल भरवाने पर मिलेगा यानि अगर आप 10 बार तक फोनपे पेमेंट करते हैं तो आपको कैशबैक मिलेगा। इसके बाद नहीं मिलेगा। यह ऑफर 30 सितंबर 2018 तक है। साथ ही इसकी शर्त यह भी है आप 1 दिन में एक में एक बार ही कैशबैक ले सकेंगे।

ये है बैलों से चलने वाला ‘पंचाल पंप’, एक घंटे में निकालता है 25 हजार लीटर पानी

बिजली संकट, डीजल के बढ़ते मूल्य, रासायनिक खादों से बंजर होती खेती, जमीन की घटती उर्वरा शक्ति ने खेती पर संकट खड़ा कर दिया है। काफी लंबे समय तक शोध और प्रयोगों के बाद खेती बिना बिजली, डीजल खर्च के कृषि आधारित सभी कामों के लिए एनीमल एनर्जी (पशु शक्ति) से चलने वाले स्क्रू पंप का अविष्कार कर तमाम झंझावातों से जूझ रहे किसान को नया मुकाम मिल गया है।

यह सब साकार किया है कि मलवां ब्लाक के मुरादीपुर गांव के रहने वाले पुरुषोत्तम लाल शर्मा ने। मैकेनिकल ट्रेड से इंजीनियर श्री शर्मा ने बिजली संकट, डीजल के संकट को देखते हुए वर्ष 2003-04 में बगैर पैसे के खेती प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। बकौल श्री शर्मा महाराष्ट्र में खेती और किसानी के लिए काम करने वाले सुभाष पाले से उनको इस क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली।

एनीमल एनर्जी के उपयोग को लेकर पांचाल पंप सिस्टम तैयार किया। यह एक ऐसा पंप है जिसे बैल, ऊंट, खच्चर चरखी की तरह खीचते हैं। पंप जमीन की सतह पर लगाया जाता है। इसके बाद इसी से चारा कटाई, आटा चक्की, धान थ्रेसरिंग, गेहूं थ्रेसरिंग, ग्राडिंग मशीन आदि चलती है जो एक हार्स पावर क्षमता की हो, बैट्री चार्जिग भी की जा सकती है।

डीजल, बिजली बिल, पेट्रोल का कुछ खर्च नहीं है। पंप से एक घंटे में 25 हजार लीटर पानी निकलता है। माडल के तौर पर यह पंप (पूरा सिस्टम) महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, झारखण्ड, बिहार के अलावा अमेरिका के फ्लोरिडा व अफ्रीका में चल रहे हैं।

आईआईटी कानपुर, लखनऊ, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय रूटक (रूरल टेक्नालॉजी एक्शन ग्रुप) ने अप्रूव्ड कर दिया है। इस अविष्कार के चलते ही आईसीएआर भारत सरकार (इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च) का सदस्य बनाया गया है। गांव में भी बिन पैसे खेती का बड़ा माडल तैयार कर रहे हैं।

यह पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

यह पंप को खरीदने के लिए आप निचे दिए हुए पते और नंबर पर संपर्क कर सकते है

Address: Panchal Pumps & Systems,
F-77, Udyougkunj, Road No. 7, Site – 5 Panki Industrial Area, Kanpur – 208022, Uttar Pradesh, India
Call Us: 08079452237
Send SMS Mobile:+91-9451447491, +91-7852090091
Telephone:+91-512-2233631, +91-512-2071807
Website: http://www.panchalpumps.com/

आप भी शुरू कर सकते हैं अपना डेयरी बिजनेस, मोदी सरकार देगी 1.75 लाख की सब्सिडी

डेयरी सेक्टर में रोजगार की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए मोदी सरकार ने डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) शुरू की है। अगर आप भी मिल्क डेयरी खोलकर पैसा कमाना चाहते हैं तो यह स्कीम आप जैसे लोगों के लिए ही है। इस स्कीम के लिए केंद्र सरकार ने साल 2018-19 में 323 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। इससे आपको डेयरी खोलने पर 25 से 33 फीसदी तक की सब्सिडी दी जाएगी।

1.75 लाख रु की सब्सिडी मिलेगी

अगर आप भी डेयरी बिजनेस की शुरुआत करना चाहते हैं तो सरकार की इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। अगर आप 10 दुधारू पशुओं की डेयरी खोलते हैं तो आपके प्रोजेक्‍ट की लागत करीब 7 लाख रुपए तक आती है। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही इस योजना में आपको लगभग 1.75 लाख रुपए की सब्सिडी मिलेगी।

दो पशु से भी शुरू कर सकते हैं डेयरी

डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत दो दुधारू पशु से भी डेयरी यूनिट शुरू की जा सकती है। अगर आप कम पूंजी से डेयरी कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो यह विकल्प भी मौजूद है। अगर आप 2 दुधारू पशु वाली डेयरी यूनिट शुरू करते हैं तो आपके प्रोजेक्ट की कॉस्ट लगभग 1.40 लाख रुपए होगी, जबकि आपको 35 हजार रुपए तक की सब्सिडी मिल सकती है। अगर आप एससी/एसटी कैटेगरी में आते हैं तो आपको दो पशु वाली डेयरी पर 46,600 रुपए की सब्सिडी मिल सकती है।

क्रॉसब्रीड की होंगी गाय

केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा यह सब्सिडी राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के माध्‍यम से दी जाती है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, अगर आप एक छोटी डेयरी खोलना चाहते हैं तो उसमें आपको क्रॉसब्रीड गाय (औसत से अधिक दूध देने वाली) जैसे साहीवाल, रेड सिंधी, गिर, राठी या भैंस रखनी होंगी। आप इस डेयरी में 10 दुधारू पशु रख सकते हैं।

कितनी सब्सिडी मिलेगी?

डेयरी उद्यमिता विकास योजना के मुताबिक आपको डेयरी लगाने में आने वाले खर्च का 25 फीसदी कैपिटल सब्सिडी मिलेगी। अगर आप अनुसूचित जाति/जनजाति की कैटेगरी में आते हैं तो आपको 33 फीसदी सब्सिडी मिल सकती है। यह सब्सिडी आपको अधिकतम 10 दुधारू पशुओं के लिए ही दी जाएगी। ए

क पशु के लिए केंद्र सरकार 17,750 रुपए की सब्सिडी देती है। अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों के लिए यह सब्सिडी 23,300 रुपए प्रति पशु हो जाती है। इसका मतलब यह है कि एक सामान्य जाति के व्यक्ति को 10 दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने पर 1.77 लाख रुपए की सब्सिडी मिल सकती है।

उपकरण पर भी सब्सिडी

डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत दुग्ध उत्पाद (मिल्‍क प्रोडक्‍ट) बनाने की यूनिट शुरू करने के लिए भी सब्सिडी दी जाती है. योजना के तहत आप दुग्ध उत्पाद की प्रोसेसिंग के लिए उपकरण खरीद सकते हैं।

अगर आप इस तरह की मशीन खरीदते हैं और उसकी कीमत 13.20 लाख रुपए आती है तो आपको इस पर 25 फीसदी (3.30 लाख रुपए) की कैपिटल सब्सिडी मिल सकती है। अगर आप एससी/एसटी कैटेगरी से आते हैं तो आपको इसके लिए 4.40 लाख रुपए की सब्सिडी मिल सकती है।

बना सकते हैं मिल्क कोल्ड स्टोरेज

मिल्‍क कोल्‍ड स्‍टोरेज भी बना सकते हैं आप डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत दूध और दूधे से बने उत्पाद के संरक्षण के लिए कोल्‍ड स्‍टोरेज यूनिट शुरू कर सकते हैं। इस तरह का कोल्ड स्टोरेज बनाने में अगर आपकी लागत 33 लाख रुपये आती है तो इसके लिए सरकार सामान्‍य वर्ग के आवेदक को 8.25 लाख रुपये और एससी/एसटी वर्ग के लोगों को 11 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।

और क्या होंगे फायदें ?

नाबार्ड की तरफ से डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत पशु खरीदने, बछड़ा पालन, वर्मी कंपोस्ट, डेयरी पार्लर, दुग्ध शीतलन व अन्य कार्यों के लिए लघु व सीमांत किसानों सहित समूहों को प्राथमिकता दी जाती है।

इस योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं:

https://www.nabard.org/auth/writereaddata/File/Circular-DEDS%202018-19.pdf

नौकरी छोड़ बंजर जमीन पर शुरू की कीवी की खेती , ऑनलाइन बिक्री से कमा रहे लाखों

हिमाचल के जिला सोलन के शिल्ली गांव में तैयार कीवी का स्वाद पूरे देश को लुभा रहा है। हिमाचल से एक्सपोर्ट क्वालिटी की कीवी तैयार कर देशभर में मिसाल बन रहे मनदीप वर्मा की करामात कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

खाने में लजीज और पाचन तंत्र समेत शारीरिक ऊर्जा देने वाले फल को अपनी सफलता का नया आधार बनाने वाले मनदीप एमबीए करने के बाद विप्रो कंपनी में मैनेजर पद पर कार्यरत थे।

नौकरी छोड़ बंजर जमीन पर कीवी की पैदावार में जुट गए। परिवार सदस्यों और बागवानी विशेषज्ञों के सहयोग से आज मनदीप वेबसाइट से देशभर में कीवी बेच रहे हैं।

14 लाख से बंजर जमीन पर तैयार किया बगीचा

उनकी पत्नी सुचेता वर्मा कंपनी सचिव हैं। साढ़े सात वर्ष पहले उन्होंने घर के पास बंजर जमीन पर बागवानी का विचार किया। इसके लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी और गांव लौट आए। उनके पिता राजेंद्र वर्मा, माता राधा वर्मा ने कीवी की खेती में उनका पूरा सहयोग दिया।

सोलन के बागवानी विभाग और डा. यशवंत सिंह परमार यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों से बात करने के बाद उन्होंने विशेषज्ञों की सलाह पर मध्यपर्वतीय क्षेत्र में कीवी का बाग तैयार करने का मन बना लिया। उन्होंने 14 बीघा जमीन पर कीवी का बगीचा लगाया।

कीवी की उन्नत किस्में एलिसन और हैबर्ड के पौधे ही लगाए। करीब 14 लाख रुपये से बगीचा तैयार करने के बाद मनदीप ने वेबसाइट बनाई। मनदीप के मुताबिक बाग से उत्पाद सीधे उपभोक्ता तक पहुंचाने की उनकी कोशिश कारगर साबित हुई।

350 रुपये प्रति बॉक्स बिक रहा कीवी

कीवी की सप्लाई वेबसाइट पर ऑनलाइन बुकिंग के बाद की जाती है। कीवी ऑनलाइन हैदराबाद, बंगलूरू, दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बेचा जा रहा है।

डिब्बे पर कब फल टूटा, कब डिब्बा पैक हुआ सारी डिटेल दी जा रही है। एक डिब्बे में एक किलो किवी पैक होती है और इसके दाम 350 रुपये प्रति बॉक्स है। जबकि सोलन में कीवी 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है।

हिमाचल में है कीवी की अपार संभावना

डा. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी नौणी में कीवी पर दशकों से काम कर रहे विशेषज्ञ डा. विशाल राणा ने बताया कि शिल्ली गांव के मनदीप वर्मा कीवी की ऑनलाइन बिक्री कर रहे हैं। उनकी पैकिंग और ग्रेडिंग भी एक्सपोर्ट क्वालिटी की है।

उन्होंने कहा कि देश में कीवी की शुरुआत हिमाचल प्रदेश से हुई है। आज देश के कुल कीवी उत्पादन का 60 फीसदी कीवी अरुणाचल प्रदेश तैयार कर रहा है।

सिक्किम, मेघालय में भी कीवी की बागवानी की जा रही है। हिमाचल में कीवी उत्पादन की अपार संभावना है। सरकार कीवी को बढ़ावा देने के लिए 50 फीसदी सब्सिडी दे रही है। हिमाचल में अभी करीब 150 हेक्टेयर भूमि पर ही कीवी उगाई जा रही है।

15 मिनट में 1 ट्राली भूसा भर देती है ये भूसा भरने वाली मशीन ,यहाँ से खरीदें

तमाम फसलों में कटाई व मड़ाई करने के बाद निकले भूसे को भरने में बहुत समय लगता है और तकलीफ भी बहुत होती है. हाथ से भरने और ज्यादा समय लगने के कारण लागत भी बढ़ जाती है. कई बार तो समय पर भूसा न भर पाने के कारण खेत पर ही काफी भूसा हवाओं द्वारा उड़ा दिया जाता है या फिर बरसात की चपेट में आने के कारण बुरी तरह से भीग जाता है.

मगर अब चिंता करने की बात नहीं है, क्योंकि भूसा भरने वाली खास मशीन बाजार में आ चुकी है. इसे मध्य प्रदेश की एक निजी कंपनी ने ईजाद किया है. यह मशीन स्ट्रा ब्लोअर के नाम से बाजार में आ गई है.

स्ट्रा ब्लोअर से संबंधित जानकारियां इस तरह हैं :

  •  यह मशीन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है. ट्रैक्टर चालित इस मशीन को किसी भी कंपनी के ट्रैक्टर के सहारे आसानी से चलाया जा सकता है. इस का आकार देखने में तोपनुमा होता है.
  • भूसा भरने और निकालने के लिए इस मशीन में 6-6 इंच लंबाई के 2 पाइप लगाए जाते हैं, जिन्हें सुविधा और जरूरत के मुताबिक घटायाबढ़ाया जा सकता है.
  • भूसा भरने वाले पाइप को सक्सन पाइप और भूसा बाहर निकालने वाले पाइप को डिलीवरी पाइप कहा जाता है.

  • इस मशीन से 15 मिनट में 1 ट्राली भूसा भरा जा सकता है.
  • इस के जरीए 20 फुट ऊंचाई तक भूसा भर सकते हैं.
  • अगर भूसा गीला हो तो भी इस मशीन से भूसा भरने में कोई परेशानी नहीं होती है.
  • कंपनी सीधे बिक्री का काम करती है, जिस से देश भर में कहीं इस के डीलर नहीं हैं. इस की बुकिंग कर के इसे हासिल कर सकते हैं.
  • सीधे बिक्री के पीछे कंपनी का मानना है कि इस से किसानों को सस्ती दर पर मशीनें मिल जाती हैं.

ज्यादा जानकारी के लिए कंपनी के प्रबंध संचालक भगवान दास विश्वकर्मा के मोबाइल नंबर 09425483416 पर संपर्क किया जा सकता है.

कंपनी का पूरा पता इस प्रकार है :

भारत कृषि यंत्र उद्योग, उदय नगर कालोनी, सागर रोड, विदिशा (मध्य प्रदेश)

फोन नंबर : 07592-250216, 09826294216

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अब भारत में करें काले टमाटर की खेती ,शुगर के मरीजों के लिए है रामबाण

आगर आपसे कोई पूछे कि क्या आपने काले टमाटर के बारे में सुना है, तो ज्यादातर लोगों का जवाब नहीं में होगा। अपने आप में खास इस टमाटर को काफी पसंद किया जा रहा है और अब इसके बीज भारत में भी उपलब्ध हैं। अंग्रेजी में इसे इंडि‍गो रोज़ टोमेटो कहा जाता है।

हिमांचल प्रदेश के सोलन जिले के ठाकुर अर्जुन चौधरी बीज विक्रेता हैं। अर्जुन चौधरी के पास काले टमाटर के बीज उपलब्द हैं। उन्होंने बताया, ”मैने काले टमाटर के बीज ऑस्ट्रेलिया से मंगवाए हैं। इसकी खेती भी लाल टमाटर की तरह ही होती है। इसके लिए कुछ अलग से करने की जरूरत नहीं होगी।” काले टमाटर के बीज का एक पैकेट जिसमें 130 बीज होते हैं 110 रुपए का मिलता है।

यह टमाटर भारत में पहली बार उगया जाएगा।

काला टमाटर की नर्सरी सबसे पहले ब्रिटेन में तैयार की गई थी, लेकिन आब इसके बीज भारत में भी उपल्बध हैं। किसान इसके बीज ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं।

अर्जुन चौधरी ने इसकी खासियत बताते हुए कहा, ”इसकी खास बात यह है कि इसकों शुगर और दिल के मरीज भी खा सकते हैं।” यह बाहर से काला और अंदर से लाल होता है। इसको कच्‍चा खाने में न ज्यादा खट्टा है न ज्यादा मीठा, इसका स्वाद नमकीन जैसा है।

यह बाहर से काला और अंदर से लाल होता है।

”यह टमाटर गर्म क्षेत्रों के लिए अच्छे से उगाया जा सकता है। ठंढे क्षेत्रों में इसे पकने में दिक्कत होती है,” अर्जुन चौधरी बताते हैं, ”क्योंकि यह टमाटर भारत में पहली बार उगया जा रहा है इस लिए इसके रेट भी अच्छे मिलेंगे।”

इसको पकने में करीब चार महीने का समय लगता है।

उन्होंने बताया कि जनवरी महीने में इसकी नर्सरी की बुवाई की जा सकती है और मार्च के अंत तक इसकी नर्सरी की रोपाई की जा सकती है। यहा टमाटर लाल टमाटर के मुकाबले थोड़ा देर से होता है। लाल टमाटर करीब तीन महीने में पक कर निकलना शुरू हो जाता है और इसको पकने में करीब चार महीने का समय लगता है।

शुगर के मरीजों के लिए है रामबाण

अगर आप शुगर से लड़कर थक चुके हैं तो काला टमाटर आपके लिए रामबाण साबित हो सकता है। इस टमाटर को जेनेटिक म्यूटेशन के द्वारा बनाया गया है। काले टमाटर में फ्री रेडिकल्स से लड़ने की क्षमता होती है। फ्री रेडिकल्स बहुत ज्यादा सक्रिय सेल्स होते हैं जो स्वस्थ सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं। इस तरह ये टमाटर कैंसर से रोकथाम करने में सक्षम है।

ये टमाटर आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद हैं। ये शरीर की विटामिन ए और विटामिन सी की जरुरत को पूरा करता है। विटामिन ए आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।अगर आप नियमित रूप से काले टमाटरों का सेवन करते हैं तो आप दिल से जुड़ी बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं। इसमें पाया जाने वाले एंथोसाइनिन आपको हार्ट अटैक से बचाता है और आपके दिल को सुरक्षा प्रदान करता है।