अब ATM से मुफ्त में निकलेगी दवा…..

ATM से आप पैसा तो निकालते हैं लेकिन अब एटीएम से दवा भी निकलेगी. सरकार हर जिले में ऐसा एटीएम लगाने पर विचार कर रही है जिससे आप मुफ्त में दवा निकाल पाएंगे.

आंध्र प्रदेश में हुए प्रयोग से उत्साहित होकर केंद्र सरकार अब बड़े पैमाने पर दवा वाले एटीएम लगाने पर विचार कर रही है. इस एटीएम का पूरा नाम है एनी टाइम मेडिसिन जिसमें ब्रांडेड और जेनरिक दवा उपलब्ध होगी. इस एटीएम से टैबलेट के साथ ही सिरप भी मिलेगा.

300 से अधिक दवाएं NLEM में मौजूद

नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन लिस्ट में मौजूद अधिकतर दवाएं इस एटीएम में होंगी. बता दें कि सामान्य रोगों के लिए सभी जरूरी दवाएं नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन लिस्ट में मौजूद हैं. इसमें 300 से अधिक जरूरी दवाएं हैं. ब्रांडेड और जेनरिक दोनों तरह की दवाएं एटीएम में होंगी. गोली के साथ ही सिरप भी एटीएम मशीन से मिलेगा.

एटीएम मशीन से दवा निकलेगी

आंध्र में सफल प्रयोग के बाद देशभर में इस योजना को लागू करने की तैयारी है. आंध्र प्रदेश में 15 जगहों पर दवा वाले एटीएम लगे हैं. ये एटीएम सामान्य प्रिस्क्रिप्शन को स्कैन करने पर दवा देगा. फोन कॉल करके भी इस एटीएम से दवाएं ली जा सकेंगी. इसके लिए मरीज दूर बैठे डॉक्टर को तकलीफ बताएगा. डॉक्टर दवा लिखकर एटीएम किओस्क को कमांड भेजेगा, कमांड मिलते ही एटीएम मशीन से दवा निकलेगी.

ग्रामीण इलाकों में लगेंगे ATM

एटीएम खरीद के लिए नेशनल रुरल हेल्थ मिशन के पैसे का इस्तेमाल होगा. पहले चरण में ये एटीएम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, ग्रामीण क्षेत्रों में लगेंगे.

कम बजट में चाहते हैं विदेश घूमना तो यह हैं 5 बेस्ट देश, सिर्फ 20 हज़ार आएगा खर्च

अगर आप कम बजट में विदेश घूमना चाहते हैं तो अब आपके सामने काफी विकल्प हैं। इन पांच देशों में घूमने के लिए बहुत कम खर्चा करना पड़ेगा, कई बार होता है कि हमें घूमना तो होता है लेकिन हमें पता नहीं होता कि कौन सी जगह घूमने के लिए सही है। हम आपको सबसे सस्ते इंटरनेशनल टूर के बारे में बता रहे हैं, जो आपके बजट में होंगे।

भूटान: अगर आप शांत और हरियाली भरी जगह पर जाना चाहते हैं तो भूटान सबसे सही जगह है। यहां की हवाओं में आपको भगवान बुद्ध के विचार महसूस होंगे।

रोड़ ट्रिप: बस का किराया 1900 रुपए है और 5 घंटे में आप भारत से भूटान पहुंच जाएंगे।
स्टे: आपको यहां पर 500 रुपए में अच्छे होटल मिल जाएंगे।
खाना: 480 रुपए में यहां पर दो लोग आराम से खाना खा सकते हैं।
जगहें: पारो, थिम्पू, पुनाखा, मंदिर, फार्म हाउस, तकिन ज़ू।
बजट: चार दिन के लिए 20000 रुपए।

सिंगापुर: अगर आप नाइट लाइफ के शौकीन हैं तो आपके लिए सिंगापुर सबसे अच्छी जगह है। यहां पर आप सबसे पहला कसिनो देख सकते हैं।

किराया: 27,877 रुपए।
स्टे: 4 दिन के लिए अगर आप यहां रहते हैं तो आपको 2 से 3 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ेंगे।
जगहे: नेशनल म्यूजियम ऑफ सिंगापुर, अंडरवाटर वर्ल्ड, डॉलफिन लगुन।
बजट: 55 से 60 हजार।

वियतनाम: घूमने के लिए वियतनाम भी एक अच्छी जगह है। यहां आकर आपको ना केवल शांति मिलेगी साथ ही एक तरह की संतुष्टि भी मिलेगी।

फ्लाइट टिकट: 16 हजार रुपए।
स्टे: एक दिन के 400 से 700 रुपए तक लगेंगे।
जगहे: हनोई, हा लॉन्ग वे, न्हा ट्रैंग, हो ची मिन सिटी।
बजट: 40 हजार रुपए

चीन: अगर तेजी से बसे हुए शहरों को देखना चाहते हैं तो चीन से बेहतर कोई जगह नहीं है।

किराया: 17,000 रुपए।
स्टे: एक रात का 500 रुपए।
जगहें: चीन की दीवार, शंघाई बंड्स, फोरबिडन सिटी, टेराकोटा आर्मी, वेस्ट लेक।
बजट: 40,000 रुपए।

श्रीलंका : यह बेस्टपैकिंग डेस्टिनेशन के नाम से जाना जाता है।

किराया: दिल्ली से 20 हजार रुपए और चेन्नई से 8000 रुपए।
स्टे: एक रात का के लिए 600 से 1000 रुपए तक।
जगहें: कोलम्बो, केंडी, नुवारा इल्लैया, टीफैक्ट्री।
बजट: 35,000 रुपए

कभी 350 रु दिहाड़ी कमाने वाला भारतीय, ऐसे बन गया 18 करोड़ का मालिक

चाय बेचकर प्रधानमंत्री बनने के किस्से आपने अकसर सुने होंगे, लेकिन क्या आपने कभी किसी भारतीय के विदेश में चाय बेचकर करोड़पति बनते देखा या सुना है। शायद नहीं। लेकिन 39 वर्षीय केरल निवासी रूपेश थॉमस लंदन में चाय बेचकर करोड़पति बन गए हैं।

उन्होंने लंदन में ‘टुक टुक चाय’ नाम से बिजनेस शुरू किया, जिसका मार्केट वैल्यू 18 करोड़ रुपए हो गया है। वो रेडी ब्रूड चाय बेचते हैं। उनकी चाय की सप्लाई लंदन की लग्जरी डिपार्टमेंटल स्टोर हार्वे निकोल्स में हो रही है।

सपने को दिया पंख

केरल में जन्मे रूपेश का बचपन गरीबी में गुजरा। उनके परिवार में अकसर पैसे की दिक्कत होती थी। वित्तीय परेशानियों के बावजूद रूपेश ने पढ़ाई नहीं छोड़ी और उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उनको विदेश में नौकरी करने का सपना था। सपने को पूरा करने के लिए साल 2002 उम्र में 795 डॉलर यानी करीब 55 हजार रुपए लेकर लंदन पहुंच गए।

मैकडॉनल्ड्स में की नौकरी

लंदन पहुंचने के बाद रूपेश को मैकडॉनल्ड्स में नौकरी मिली। लंदन में काम को लेकर उत्साहित रूपेश को यह नौकरी अच्छी लगी। यहां उनको 5.30 डॉलर प्रति घंटे के हिसाब से पेमेंट मिलती थी। एक हफ्ते के अंदर उन्होंने दूसरा पार्ट टाइम जॉब ढूंढ लिया, जो डोर-टू-डोर सेल्समैन का था।

ऐसे आया चाय बेचने का आइडिया

दिसंबर 2014 में अपनी पत्नी अलेक्जेंडर के साथ स्वदेश लौटे रूपेश को अपने गांव से चाय बेचने का आइडिया मिला। रूपेश की पत्नी को दूध वाली चाय अच्छी लगी। यहीं रूपेश को टुक टुक चाय का बिजनेस शुरू करने का आइडिया आया।

करीब 2 लाख डॉलर से शुरू किया बिजनेस

रूपेश ने 2 लाख डॉलर से अपने बिजनेस की शुरुआत की। उन्होंने अपनी बचत पूंजी बिजनेस शुरू करने में लगा दिया।

मेहनत से मिली सफलता

रूपेश का कहना है कि मैंने लंदन में चाय बिजनेस पर एक दांव लगाया था। जिसमें उनको सफलता मिली। रूपेश के मुताबिक, अमीर बनने के पीछे कोई मैजिक फॉर्मूला नहीं है। मैंने यह सफलता मेहनत और लगन से पाई है। मेरे अंदर सफल बनने की भूख है और मैंने इसे हासिल में कोई कसर नहीं छोड़ी।

इस देश की महिलाएं होती हैं सबसे खूबसूरत

कई देशों की महिलाएं अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में जानी जाती हैं। इन देशों की आम लड़कियां भी इतनी खूबसूरत होती हैं कि आप बड़ी बड़ी हीरोइनों को भूल जाएंगे। देखना नहीं चाहेंगे आखिर वो कौन से दस देश हैं जहां सबसे सुंदर औरतें रहती हैं?

रैंडम स्टोरी. कॉम के मुताबिक इस लिस्ट में सबसे पहला नाम आता है लातविया का। लातविया में रहने वाली औरतों को खूबसूरत ब्लॉन्ड भी कहा जाता है। उन्हें उनके बोलने के भी अंदाज से सुंदर के श्रेणी में रखा जाता है।

स्वीडन की औरतों को उनके दमदार व्यक्तित्व की वजह से सुंदर कहा जाता है। लंबा कद, स्लिम फिगर, भूरे बाल और नीली आंखें भी बड़ी वजह हैं।

ब्राजीलियाई औरतों को उनके स्पोर्टी लुक के लिए खास पसंद किया जाता है। इस देश में आपके हल्के और गहरे दोनों ही रंगों की औरतें मिल जाएंगी। ब्राजील की औरतों ने हमेशा से ब्यूटी कॉन्टेस्ट के अयोजनों में बड़े-बड़े खिताब हासिल किए हैं।

स्पेन की औरतें दोस्ताना व्यवहार के लिए पसंद की जाती हैं। वो ड्रेसअप सही ढंग से होती हैं। हल्की सी टैन चमड़ी लिए ये औरतें फिगर से भी फिट होती हैं।

रूस की औरतें अपनी आंखें और सुंदर शरीर के लिए जानी मानी जाती हैं।

इस लिस्ट में फ्रांस की औरतों का भी नाम आता है। उनके बर्हिमुखी एटिट्यूड और सकारात्मक ऊर्जा लिए चलने के लिए उन्हें पसंद किया जाता है।

इस मामले भारत भी पीछे नहीं है। भारत में हर रंग और हर तरह के फीचर्स वाली महिलाएं यहां मिलती हैं। खास तौर पर हमारे देश की औरतों को आकर्षक दिखने के लिए पसंद किया जाता है।

इटली की औरतों को बेला भी कहा जाता है। वो दिखने में गजब की सुंदर होती हैं और उन्हें उनके फैशन सेंस के लिए मानते हैं।

अर्जेंटीना की औरतों को रोमांटिक कल्चर का माना जाता है। वो लंबी होती है और हल्की सांवली भी। ब्यूटी पेजेंट प्रतियोगिता में यहां की महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।

साउथ अफ्रीका की महिलाएं काफी खूबसूरत और स्पोर्टी बॉडी वाली होती हैं।

70 साल में 35 की लगती है ये महिला, जवानी का सीक्रेट बताया तो लोगो ने दी गालियां

ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर की रहने वाली ये हैं कैरोलिन हर्ट्ज। वह तीन बच्चों की मां हैं। देखने में वह 35 साल की लगती हैं। लेकिन कैरोलिन 70 साल की हैं। उन्होंने अपनी खूबसूरती और जवां लुक के राज बताए हैं, लेकिन बहुत-से लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं और उन्हें धोखेबाज बता रहे हैं। ये हैं 70 की उम्र में जवानी का राज…

  • कैरोलिन अपने यूथ लुक का सबसे बड़ा राज शक्कर न खाने को बताती हैं। उनका कहना है कि 41 साल की उम्र में अपने प्री-डायबिटीक होने का पता चलने के बाद उन्होंने शुगर नहीं ली है।
  • 28 वर्षों से वे शुगर से दूर हैं। इसकी जगह वे जाइलिटॉल का प्रयोग करती हैं, जो उनके खानपान में शक्कर की कमी को दूर करता है।

  • इसके अलावा कैरोलिन ने बताया कि वे नियमित रूप से एक्सरसाइज करती हैं और बास्केटबॉल खेती हैं। उन्होंने 45 की उम्र में बास्केटबॉल खेलना शुरू किया था। कैरोलिन का कहना है कि वे पर्याप्त नींद लेती हैं। यह भी उनकी खूबसूरती और फिट बॉडी में मददगार रहा।

इसलिए हो रही है आलोचना

  • कैरोलिन आंत्रप्रेन्योर भी हैं। वे स्वीटलाइफ नामक कंपनी चलाती हैं, जो स्वीटनर बनाती है। कैरोलिन ने शक्कर की जगह जाइलिटॉल लेने की बात की है। उनकी कंपनी के स्वीटनर में जाइलिटॉल का इस्तेमाल होता है।
  • लोग इसे सामान्य शक्कर से ज्यादा नुकसानदेह बता रहे हैं। उनका कहना है कि अपने लुक्स के राज बताने के बहाने कैरोलिन अपनी कंपनी के प्रॉडक्ट का विज्ञापन कर रही हैं।

  • कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि ऐशो-आराम भरी लाइफ हो और खुद को संवारने के अलावा कोई काम न हो, तो कोई भी बेहतर दिख सकता है।
  • कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें नसीहत भी दी है कि इस तरह की कवायद के बजाय उन्हें जिंदगी का आनंद लेना चाहिए।

किसान ने विकसित की वो तकनीक,जिससे हर घर कमा सकता है महीने के 50 हजार रु

तकनीकी के मामले में इजरायल दुनिया का सबसे हाईटेक देश माना जाता है। भारत समेत दुनिया के कई देश इस छोटे से देश से सीखने जाते हैं। लेकिन भारत का एक किसान है, इजरायल के लोग उससे सीखने आते हैं। इस किसान ने जो तकनीकी विकसित की है अब वो इजरायल में लागू की जा रही है।

इस हाईटेक तकनीकी का नाम ‘चोका सिस्टम’ है। यह एक ऐसी तकनीकी है जिसे देश के हर कोने, हर गांव का किसान अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकता है। शायद यही वजह है कि इजरायल में भी लोकप्रिय हो रही है। ये तकनीक है किसान को कमाई कराने की, उसे गांव में ही रोजगार देने, पानी बचाने की और जमीन को सही रखने की। इस किसान की माने तो यही तो तकनीकी है जिसके सहारे गायों को लाभकारी बनाने हुए उन्हें बचाया भी जा सकता है।

‘चोका सिस्टम’ की जिस गांव से शुरुआत हुई है वहां हर घर सिर्फ दूध के कारोबार से हर महीने 10 से 50 हजार रुपए कमाता है।इजरायल को ज्ञान देने वाले इस किसान का नाम है लक्ष्मण सिंह। 62 साल के लक्ष्णम सिंह राजस्थान के जयपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर लाहोडिया गांव के रहने वाले हैं।

ये गांव कभी भीषण सूखे का शिकार था।गरीबी और जागरुकता की कमी के चलते यहां आए दिन लड़ाई दंगे होते रहते हैं, युवा गांव छोड़-छोड़ शहर में मजदूरी करने को मजबूर हो रहे थे।

करीब 40 साल पहले लक्ष्मण सिंह ने अपने गांव को बचाने के लिए मुहिम शुरु की। बदलाव रंग भी लाया कि आज इजरायल जैसा देश इस गांव का मुरीद है। आज लापोडि़या समेत राजस्थान के 58 गांव चोका सिस्टम की बदौलत तरक्की की ओर है। यहां पानी की समस्या काफी हद तक कम हुई है। किसान साल में कई फसलें उगाते हैं। पशुपालन करते हैं। और पैसा कमाते हैं। 350 घर वाले इस गांव में आज 2000 के करीब आबादी रहती है।

चोका सिस्टम से पशुओं को घास मिलती है और जलस्तर ठीक रहता है

गांव के विकास के लिए रुपयों की कम से कम जरुरत पड़े इसके लिए श्रमदान का सहारा लिया गया। गांव के लोगों को इससे जोड़ने के लिए 1977 में उन्होंने ग्राम विकास नवयुवक मंडल लापोडिया रखा। इस समूह को ये जिम्मेदारी दी गयी कि गांव के हर किसी व्यक्ति में ये भाव पैदा करना है कि वो अपने गांव का मजदूर नहीं बल्कि मालिक है।

ऐसे बनता है ‘चोका सिस्टम’

चोका सिस्टम हर पंचायत की सार्वजनिक जमीनों पर बनता है। एक ग्राम पंचायत में 400 से 1,000 बीघा जमीन खाली पड़ी रहती है, इस खाली जमीन में चोका सिस्टम ग्राम पंचायत की सहभागिता से बनाया जाता है। खाली पड़ी जमीन में जहां बरसात का नौ इंच पानी रुक सके वहां तीन चौड़ी मेड (दीवार) बनाते हैं, मुख्य मेड 220 फिट लम्बाई की होती है और दोनों साइड की दीवारे 150-150 फिट लम्बी होती हैं।

इस गांव में अब नहीं होती है अब कभी पानी की कमी

भूमि का लेवल नौ इंच का करते हैं जिससे नौ इंच ही पानी रुक सके इससे घास नहीं सड़ेगी। इससे ज्यादा अगर पानी रुका तो घास जमेगी नहीं। हर दो बीघा में एक चोका सिस्टम बनता है, एक हेक्टेयर में दो से तीन चोका बन सकते हैं। एक बारिश के बाद धामन घास का बीज इस चोका में डाल देते हैं इसके बाद ट्रैक्टर से दो जुताई कर दी जाती है।

सालभर इसमें पशुओं के चरने की घास रहती है। इस घास के बीज के अलावा देसी बबूल, खेजड़ी, बेर जैसे कई और पेड़ों के भी बीज डाल जाते हैं। चोका सिस्टम के आसपास कई नालियां बना दी जाती हैं। जिसमें बरसात का पानी रुक सके। जिससे मवेशी चोका में चरकर नालियों में पानी पी सकें।

एक बिहारी पड़ा थाइलैंड और जापान पर भारी

एक बिहारी सब पर भारी वाली कहावत तो आप ने सुनी होगी वहीं एक बिहारी किसान ने गन्ने के उत्पादन का रिकॉर्ड तोड़ा जिसका लोहा आज थाइलैंड और जापान भी मान रहे हैं। वैसे ये यकीन करना थोड़ा मुश्किल है क्यूंकि जहां गन्ने का प्रति एकड़ औसत उत्पादन 250 से 500 क्विंटल तक हो, वहां कोई 1018 क्विंटल गन्ने का उत्पादन कर सकता है। पर ऐसा एक बिहारी किसान ने कर दिखाया

दो दशक पूर्व मैट्रिक पास करने के बाद जिसे रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा था आज उसके खेतों की फल-सब्जियां बिक्री के लिए सीधे मॉल जा रही हैं। अपनी दो दशकों की मेहनत से उन्होंने न केवल अपनी बल्कि गांव के लोगों की जीवन दशा में बदलाव की पटकथा भी लिखी है।

इस बिहारी किसान की थाईलैंड-जापान यात्रा वाया हरियाणा शुरू हुई। मुजफ्फरपुर के छोटे से कस्बे सकरा के रहने वाले दिनेश प्रसाद ने मैट्रिक तक चंदनपट्टी हाईस्कूल में पढ़ाई की। बात 1996 की है। बिहारी मजदूरों का पलायन हो रहा था।

दिनेश भी गांव के लोगों के साथ रोजगार की तलाश में हरियाणा पहुंच गए। वहां के खेतों में बिहारी मजदूरों की तरह काम करने की बजाय उन्होंने बटाई पर खेती शुरू की। जैविक उर्वरक, जीरो टिलेज और सीड ट्रांसप्लांट तकनीक के इस्तेमाल से आधुनिक खेती की।

आरंभ में पांच एकड़ खेती के मुनाफे ने मनोबल बढ़ाया। आज हरियाणा में करीब 125 एकड़ और अपने गांव में 138 एकड़ भूमि पर खेती कर रहे हैं। गांव में तो उनकी मात्र आठ एकड़ भूमि है लेकिन 130 एकड़ जमीन लीज पर लेकर फलों और सब्जियों की आधुनिक और जैविक खेती से पैदावार का रिकॉर्ड बनाया। छह वर्षों के दौरान दिनेश प्रसाद ने हरियाणा में उन्नत खेती का ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया कि वे राज्य सरकार की नजर में आ गए।

दरअसल 2001 में हरियाणा सरकार ने चीनी मिलों से किसानों की सूची मंगाई थी। उस सूची में दिनेश प्रसाद एकलौते किसान थे जिन्होंने एक एकड़ में 1018 क्विंटल गन्ना उपजाकर चीनी मिल को बेचा था।

हरियाणा सरकार के नुमाइंदे दिनेश के खेत पहुंचे। उन्हें मंच पर आमंत्रित कर वहां के मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। इसके बाद फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने गांव सकरा में हरियाणा पैटर्न पर पहले अपनी जमीन पर ही खेती शुरू की।

पड़ोसी किसानों से बातचीत कर उन्हें भी आधुनिक कृषि के लिए प्रेरित किया। अब गांव में अपनी आठ एकड़ भूमि के अलावा करीब 130 एकड़ लीज जमीन पर फल- सब्जी उपजा रहे हैं। आधुनिक और जैविक खेती की शोहरत फैली तो रिलायंस फ्रेश सहित अन्य कृषि उत्पाद का कारोबार करने वाली कंपनियों ने दिनेश प्रसाद से उनकी उपज खरीदने का करार कर लिया। अब इनके खेत की सब्जी और फल सीधे एग्री-मार्केट और मॉल में पहुंच रहे हैं।

तीन महीने जापान में रहे : हरियाणा सरकार से सम्मान मिलने के बाद दिनेश प्रसाद पर केंद्र सरकार की नजर भी गई। 2003 में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने उन्हें कृषि के क्षेत्र में अपने अनुभव व शोध साझा करने के लिए जापान भेजा।

करीब तीन माह तक दोभाषिये (ट्रांसलेटर) के साथ जापान में कृषि विकास का अध्ययन किया। 2006 में थाइलैंड जाकर उन्होंने वहां खेती के आधुनिक तौर तरीकों का अध्ययन किया। अमरूद, केला, पपीता, कंद, पुदीना, धनिया, गेहूं, गन्ना, बाजरा से लेकर वे ऐसी सब्जियों की खेती कर रहे हैं।

किसानो को लखपति बना रही है अमरुद की यह नई किसम VNR BIHI

इन दि‍नों इंसान के सि‍र जि‍तने मोटे अमरूद ने बाजार में काफी हलचल मचा रखी है। एक अमरूद का वजन डेढ़ कि‍लो तक पहुंच जाता है और इसकी पैदावार करने वाले कि‍सानों का माल हाथोंहाथ बि‍क रहा है।

यह भारी भरकम अमरूद न केवल देखने में सुंदर लगता है बल्‍कि इसका टेस्‍ट भी बेहतरीन है। अमरूद की इस कि‍स्‍म का नाम है VNR BIHI जि‍सने कई कि‍सानों को मालामाल कर दि‍या है। जि‍न भी इलाकों में यह पैदा हो रहा है वहां इसकी काफी मांग है। इसकी कीमत 150 रुपए से लेकर 370 रुपए कि‍लो तक है।

प्राइवेट जॉब छोड़ शुरू की खेती

नीरज एक सॉफ्टवेयर इंजीनि‍यर थे मगर अब वह जींद के संगतपुरा गांव में खेतीबाड़ी करते हैं। वह इस अमरूद की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। इन्‍होंने अमरूद के करीब 1600 पेड़ लगाए हैं और साल में दो बार फसल लेते हैं।

एक पेड़ पूरे साल में 75 से 100 कि‍लो अमरूद देता है। नीरज ऑनलाइन इनकी सप्‍लाई करते हैं। वह एक पैकेट 555 रुपए में देते हैं जि‍समें आमतौर पर तीन अमरूद होते हैं, जि‍नका कुल वजन 1600 ग्राम से 1800 ग्राम होता है।

कैसे की जाती है इसकी खेती

इसकी खेती करना आसान काम नहीं है। काफी रखरखाव करना होगा। जब फल आते हैं तब खासतौर पर देखभाल करनी होती है। फलों की बैगिंग करनी होती है। एक पेड़ से दूसरे पेड़ के बीच में 12 फुट सामने और आठ फुट की दूरी पर बगल में होनी चाहि‍ए। नीरज कि‍सानों को इस पौधे को लगाने और रखरखाव की ट्रेनिंग भी देते हैं, मगर ये फ्री नहीं है। वह इसके लि‍ए फीस लेते हैं। ट्रेनिंग आमतौर पर दो दि‍न की होती है।

कहां से मि‍ल सकता है पौधा

अमरूद की यह प्रजाति वैसे तो थाईलैंड से आई है। यहां अभी इसकी पौध मि‍लती है। इसे आप डायरेक्‍ट VNR की नर्सरी से खरीद सकते हैं। कंपनी की वेबसाइट पर रेट सहि‍त इसकी पूरी जानकारी दी गई है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबि‍क, अगर आप 1 से 10 पौधे लेते हैं तो प्रति पौधा इसकी कीमत 330 रुपए है। पौधों की गि‍नती बढ़ने पर रेट कम हो जाते हैं।

इस राज्य के लोगों के खाते में पीएम मोदी ने भेजे 25-25 हजार रुपए, बैंकों में लोगों की लंबी लाइनें लगनी शुरू

हाल ही में पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में कुछ ऐसा हुआ है जिसपर किसी को यकीन नहीं हो पा रहा। यहां लोगों के बैंक खाते में दो बार पैसे आने से लोग हैरान हो गए हैं। हालांकि अभी तक किसी को भी नहीं पता है कि उनके अकाउंट में पैसे कहां से आए।

हैरानी की बात यह है कि पूर्वी बर्धमान जिले की केतुग्राम 2 नंबर पंचायत समिति के शिबलून, बेलून, टोलाबाड़ी, सेनपाड़ा, अम्बालग्राम, नबग्राम और गंगाटीकुरी जैसे कई इलाकों में लोगों के बैंक खातों में 2 बार पैसे आ चुके हैं।

लोगों की लंबी लाइनें लगनी शुरू

जितने भी लोगों को पैसे मिले हैं उनके खातों में 10 हजार या 25 हजार तक की रकम आई है। यह पैसे केवल उन ही लोगों के खातों में आ रहे हैं जिनका अकाउंट यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और एसबीआई में है।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, बैंकों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में कुछ भी बताना संभव नहीं हो पाएगा। जब से खातों में पैसे आए हैं तभी से बैंकों में पैसे निकालने के लिए लोगों की लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गई हैं।

बैंक खातों में NEFT के जरिए आए पैसे

लोगों के बैंक खातों में पैसे NEFT के जरिए आए हैं ऐसे में केतुग्राम के विधायक शेख शाहनवाज ने तंज कसते हुए कहा कि ‘प्रधानमंत्री ने कहा था की पैसे आएंगे हो सकता है ये वहीं पैसे हो’। ऐसे में कुछ गांव वाले इस बात को सच मान गए हैं कि उनके अकाउंट में पैसा सरकार ने डाला है।

चल रही है जांच

प्रशासन भी इस बात से अंजान है कि लोगों के खातों में पैसे कौन डाल रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि इसे लेकर जांच चल रही है।

Amazon पर 1400 रुपये में बिक रहा है नारियल का ऊपरी हिस्सा,इस व्यक्ति ने कह दी ये बड़ी बात……….

इंटरनेट पर कब क्या ट्रेंड करने लगे इसका आप अंदाजा नहीं लगा सकते. कई चीजें ऐसी वायरल होती हैं कि वो सेलेब्रिटी को भी टक्कर देने लगे. तो अगर आपको लगता है कि इंस्टाग्राम पर सिर्फ एक अंडा ही वायरल हो रहा है तो आप गलत है क्योंकि अब नारियल की बारी है.

जी हां दरअसल इंटरनेट पर नारियल अब वायरल हो रहा है. कारण है, एमेजन नारियल के ऊपरी हिस्से यानी की शेल को जो काफी हार्ड होता है उसे 1400 रुपये की कीमत पर बेच रहा है.आज कल चीजें बेचने के लिए जिस चीज का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है वो है ऑर्गेनिक और नेचुरल.

यानी की अगर आपको कुछ बिल्कुल प्यूर चाहिए तो आपको उसकी कीमत चुकानी होगी. चाहे वो आपके गार्डन में ही क्यों न पाया जाता हो. एमेजन भी कुछ ऐसा ही कर रहा है और नारियल के शेल को नेचुरल बताकर 1400 रुपये की कीमत पर बेच रहा है.

सिर्फ इतना ही नहीं एमेजन ने लोगों को चेतावनी भी दी है कि ये बिल्कुल नेचुरल है तो इसमें क्रैक्स और डेंट भी हो सकते हैं. क्योंकि ये एक ओरिजिनल नारियल है. वहीं इस नारियल को लेने के लिए ऑफर की भी सुविधा दी गई है यानी की आप इसे खरीदने के लिए EMI ऑप्शन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

लेकिन इसे देखने के बाद कई भारतीय शॉक में हैं क्योंकि एक तरफ जहां वो फल खरीदने के लिए सिर्फ 40 रुपये देते हैं तो वहीं शेल के लिए 1400 रुपये देना किस हिसाब से सही है. हालांकि अब इस नारियल के शेल की कीमत 999 रुपये हो गई है. शायद लोगों के रिएक्शन के बाद इसकी कीमत को घटा दिया गया है. तो वहीं आनेवाले समय में भी इसकी कीमत को और कम किया जा सकता है.