यहां सिर्फ 60 हजार में मिल जाएगी 5 लाख की WagonR, ये कारें भी हैं इतनी सस्ती

यदि आप कार खरीदना चाहते हैं, लेकिन बजट किसी बाइक की कीमत के बराबर भी नहीं है, तब भी इसे खरीद सकते हैं। दरअसल, इंडिया में कई जगहों पर सेकंड हैंड कार के मार्केट हैं। जहां पर लाखों की कार हजारों में मिल जाती है। ऐसा ही एक मार्केट दिल्ली के करोल बाग पर है। यहां से सेकंड हैंड मारुति वैगनआर को सिर्फ 60 हजार में खरीद सकते हैं। बता दें, कि वैगनआर के टॉप मॉडल की ओनरोड प्राइस 5 लाख 6 हजार रुपए है।

यहां पर हैं ये मार्केट

दिल्ली में सेकंड हैंड बाइक का सबसे बड़ा मार्केट करोल बाग पर हैं। जो जल बोर्ड के पास है। यहां पर मारुति से लेकर महिंद्रा, फोर्ड, हुंडई, वोक्सवैगन समेत कई ब्रांड की कार मौजूद हैं। देखने में इन कार की कंडीशन बेहतर होती है। यानी इन पर किसी तरह का डेंट नहीं होता और ये चमचमाती नजर आती हैं। कार का मॉडल जितना पुराना होगा, उतनी ज्यादा उसकी प्राइस कम होगी। यानी 2005 मॉडल वाली वैगनआर को 60 हजार में खरीदा जा सकता है।

फाइनेंस की सुविधा भी मौजूद

सेकंड हैंड कार के इस मार्केट में हमने S.S.S Ji Car Bike & Properties डीलर से बात की। तब उन्होंने बताया कि यहां पर सेकंड हैंड कार 60 हजार से मिलना शुरू हो जाती हैं। वहीं, इस अमाउंट को फाइनेंस भी कराया जा सकता है। कार के साथ उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी दिया जाता है। यानी इन कार में किसी तरह के फ्रॉड होने की संभावना नहीं होती। वैसे, कार की प्राइस पर आप बारगेनिंग भी कर सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

यदि आप इस मार्केट में कार खरीदने जाने वाले हैं तब इस बात का ध्यान रखें की आपको कार के सभी पार्ट्स की नॉलेज हो। खासकर, कार के इंजन में खराबी हो सकती है। साथ ही, कोई पार्ट नकली भी हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप किसी कार एक्सपर्ट या मैकेनिक को साथ लेकर जाएं।

नोट :खबर में दिखाई जा रही कार की कीमत इस मार्केट में कम-ज्यादा भी हो सकती है। इतना ही नहीं, जो कीमत दिखाई जा रही है आप बारगेनिंग करके उससे भी कम कीमत पर खरीद सकते हैं।

इस सरदार ने उधार के पैसों और 10 लोगों के साथ शुरू की कंपनी

पश्चिमी देशों में अन्य देशों के शरणार्थियों अलावा भारतीय मूल के कई शरणार्थियों ने भी सफलता के झंडे गाड़े हैं और इन्‍हीं में से एक हैं सुखपाल सिंह अहलुवालिया। उन्‍होंने मेअपनी हनत के दम पर अरबपति बनने की यात्रा तय की। उनका परिवार अच्‍छी नौकरी की तलाश में भारत से युगांडा चला गया था। उस वक्‍त वह ब्रिटेन का उपनिवेश था। सुखपाल का जन्‍म वर्ष 1959 में युगांडा में ही हुआ था। आर्मी कमांडर ईदी अमीन तख्‍ता पलट के जरिए वर्ष 1971 में सत्‍ता में आए थे।

उन्‍होंने दक्षिण एशिया से आए शरणार्थियों को एक महीने के अंदर देश छोड़ने का फरमान सुनाया था। इसके बाद सुखपाल के परिवार को भी अन्‍य लोगों की तरह ब्रिटेन में शरण लेना पड़ा था। यह उनके लिए वरदान साबित हुआ। सुखपाल ने 19 वर्ष की उम्र (1978) पिता और बार्कलेज बैंक से पांच हजार पाउंड (4.5 लाख रुपए) का कर्ज लिया था।

सुखपाल ने कर्ज के पैसों से उत्‍तरी लंदन में स्थित ‘हाईवे ऑटोज’ को खरीदा था। उन्‍होंने इसका नाम बदलकर ‘यूरो कार पार्ट्स’ कर दिया था। सुखपाल बताते हैं क‍ि उन्‍हें उस वक्‍त कार पार्ट्स के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। कंपनी को सफल बनाने के लिए उन्‍होंने कड़ी मेहनत की। वह सुबह 7 बजे पहुंच जाते थे और तब तक डटे रहते थे जब तक ग्राहकों को उनकी जरूरत होती थी।

उनका प्रयास रंग लाया और यूरो कार पार्ट्स का लंदन के अलावा यूनाइटेड किंगडम के कई हिस्‍सों (200 लोकेशन) तक विस्‍तार हो गया। सुखपाल ने जिस कंपनी को रोजी-रोटी के लिए 10 लोगों के साथ शुरू किया था, उसमें 10,000 लोग नौकरी करने लगे।

सुखपाल ने वर्ष 2011 में यूरो कार पार्ट्स को अमरीकी ऑटो पार्ट्स कंपनी ‘एलकेक्‍यू कॉरपोरेशन’ के हाथों 255 मिलियन पाउंड (2,282 करोड़ रुपए) में बेच दिया था। इसके साथ ही वह शिकागो स्थित कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर्स के सदस्‍य भी हो गए। एलकेक्‍यू कॉरपोरेशन कंपनी का कुल मूल्‍य 13 अरब डॉलर (83,570 करोड़ रुपए) है। कंपनी बेचने के कदम का बचाव करते हुए सुखपाल ने कहा, ‘मैं इस फैसले के बाद कई और काम भी कर पाया।

मैंने छह-सात कंपनियों में निवेश भी कर रखा है। मैं अब सीरियल एंटरप्रेन्‍योर हूं।’उन्‍होंने बताया कि प्रवासी इस देश (ब्रिटेन) की रीढ़ हैं और इसे कभी नहीं भूलना चाहिए। वह चैरिटी में भी सक्रिय हैं। अपने व्‍यस्‍ततम समय में से इसके लिए कुछ वक्‍त निकाल लेते हैं। सुखपाल लंदन में आश्रयहीन लोगों को सहारा देने के साथ ही भारत में सुविधा विहीन बच्‍चों को शिक्षा भी मुहैया करा रहे हैं। उनका उद्देश्‍य एक ऐसी विरासत खड़ी करना है, जिससे हर कोई प्रेरणा ले सके।

केरल के इस व्यापारी ने बनाया धुआं मुकत स्टोव

47 वर्षीय जयप्रकाश सिर्फ 12वीं कक्षा तक पढ़े हैं, लेकिन उन्होंने अपने ईको-फ्रेंडली स्टोव के आविष्कार से सभी को चौंका दिया। वह अभी तक 8 हजार स्टोव्स बेच चुके हैं। जयप्रकाश स्कूल में होने वाले साइंस एग्जिबिशन्स में भी हिस्सा लेते रहते थे। 12वीं के बाद उन्हें आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी।

महिलाओं का संघर्ष देख मिली प्रेरणा

जयप्रकाश ने बताया कि जब वह छोटे थे, तब उनकी मां कोयंबटूर से स्टोव खरीदकर लाती थीं और बेचती थीं। जयप्रकाश इस काम में अपनी मां का हाथ बंटाया करते थे। चूल्हे से निकलने वाला धुंआ, महिलाओं की सेहत के लिए खतरनाक होता है और यह चिंता जयप्रकाश को अक्सर सताया करती थी।

इसलिए उन्होंने एक छोटा सा पाइप स्टोव के पीछे लगाने के बारे में सोचा, जो एक चिमनी की तरह काम करे। जयप्रकाश को आज भी वह समय याद है, जब उन्हें शुरूआती सफलता मिली और उन्होंने अपने आइडिया पर और अधिक काम करना शुरू किया।

जयप्रकाश के बनाए स्टोव में क्या है खास?

जयप्रकाश ने समझाया कि स्टेनलेस स्टील और कास्ट आयरन से बने उनके स्टोव मॉडल में, जलने की प्रक्रिया दो चरणों में होती है (बर्निंग का टू-टियर सिस्टम), ताकि कम से कम धुंआ पैदा हो और प्रदूषण न फैले।

जयप्रकाश ने बताया कि किस तरह अनगिनत प्रयोगों के बाद वह अपने फाइनल मॉडल तक पहुंचे, जिसमें सेरेमिक पाइप में छेद किए गए ताकि पर्याप्त आक्सीजन उपल्बध हो और दूसरे चरण में कार्बन पार्टिकल्स पूरी तरह से जल सकें। बता दें, कि जलने की प्रक्रिया में ऑक्सीजन गैस सहायक होती है। ऐसा करने से कम धुआं पैदा होता है और स्टोव भी किफायती ढंग से काम करता है।

बहुत ही कम खर्च में करता है काम

जयप्रकाश ने अपनी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बड़े-बड़े कम्युनिटी स्टोव्स भी बनाने शुरू किए। एएनईआरटी के विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि कोझिकोड में एक होटल है, जहां पर जयप्रकाश द्वारा बनाए गए कम्युनिटी स्टोव की मदद से सिर्फ 75 नारियल खोलों (लागत लगभग 75 रुपए) को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करके 40किलो तक चावल पकाया जा रहा है।

जबकि इससे पहले इस काम के लिए 10 किलो एलपीजी खर्च होती थी, जिसकी लागत 4 हजार रुपए तक आती थी।दोनों ही तरह के स्टोव्स का पेटेंट जयप्रकाश के पास है। इसके अलावा वह जेपी टेक नाम से एक क्लीन एनर्जी स्टार्टअप भी चला रहे हैं और ईको-फ्रेंडली स्टोव्स के बड़े ऑर्डर ले रहे हैं।

जयप्रकाश ने अभी तक केरल के घरों में 7,500 ईको-फ्रेंडली स्टोव्स पहुंचाए हैं। इतना ही नहीं, राज्य के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के लिए जयप्रकाश के बनाए 200 कम्युनिटी स्टोव्स इस्तेमाल हो रहे हैं।

इनकी सप्लाई यूनाइटेड नेशन्स डिवेलपमेंट फंड के सहयोग से की गई। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक से जयप्रकाश को लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं और वह अभी तक 1 हजार कम्युनिटी स्टोव्स की बिक्री कर चुके हैं।

किफायती हैं ये स्टोव्स

जयप्रकाश की कोयंबटूर स्थित छोटी सी फैक्ट्री के जरिए 6-7 परिवारों को रोजगार मिल रह है और जयप्रकाश इस बात से बेहद खुश हैं। जयप्रकाश के स्टोव्स कारगर होने के साथ-साथ किफायती भी हैं।

1 किलो वाले स्टोव की कीमत है सिर्फ 4 हजार रुपए, जबकि 10 किलो वाले की कीमत है 15 हजार रुपए। सबसे बड़ा स्टोव है 100 किलो का, जिसकी कीमत है 65 हजार रुपए। जयप्रकाश अपने स्टोव की तकनीक को अभी और बेहतर करने की जुगत में हैं।

कभी मजदूरी करने को था मजबूर

राजस्‍थान के भीलवाड़ा के गरीब परि‍वार में पैदा हुए राजेश कुमार अर्जि‍या अब एक सफल एग्री बि‍जनेसमैन के तौर पर जाने जाते हैं। वह विजयनगर में दीपक फि‍श एंड फि‍श सीड्स के नाम से कंपनी चलाते हैं। उनके पास करीब 20 तलाब हैं और वह बि‍जनेस का लगातार वि‍स्‍तार कर रहे हैं। मगर यहां तक सफर तय करने के लि‍ए राजेश ने काफी मेहनत की है।

सन 1994 में वि‍जयनगर आकर बसे राजेश कॉलेज ड्रॉप आउट हैं। कमाई का कोई जरि‍या न होने के चलते वह दि‍हाड़ी मजदूर का काम करने लगे। करीब 10 साल तक उनका गुजर बसर माल की ढुलाई जैसे कामों से होने वाली मामूली आय पर ही चलता रहा। मगर तंगहाली में मछली पकड़ने के एक अनुभव ने उन्‍हें आज फि‍श कंपनी का मालि‍क बना दि‍या, जि‍सका टर्नओवर करीब 40 से 50 लाख रुपए सालाना है।

घर में बचे थे 50 रुपए

राजेश ने बताया, कि‍ मजदूरी करते करते मुझे शराब पीने की लत भी लग गई थी। एक दि‍न की बात है मेरे घर में केवल 50 रुपए थे। मैंने सोचा अगर इन पैसों की भी शराब पी ली तो खाने को कुछ नहीं बचेगा।

ऐसे में मैंने अपने बेटे को साथ लि‍या और हम नदी पर मछली पकड़ने गए। यहां हमने खूब मछि‍लयां पकड़ीं और करीब 800 रुपए में बाजार में बेच दीं। यहीं से मुझे कमाई का दूसरा आइडि‍या आया। मैं घूम घूम कर मछि‍लयां पकड़ने और बेचने का काम करने लगा। मैंने उसी दि‍न शराब पीना छोड़ दि‍या था।

11 हजार में लि‍या ग्रामीण तलाब

इसके बाद मैंने 11000 रुपए के ठेके पर ग्रामीण तलाब ले लि‍या। मछली पालन के बारे में पूरी जानकारी हासि‍ल करने के लि‍ए मैंने मत्‍सय वि‍भाग से संपर्क कि‍या और वहां से ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग की कोई फीस नहीं थी बल्‍कि‍ 50 रुपए का स्‍टाइफंड भी मि‍लता था।

जानकारी बढ़ी तो आत्‍मवि‍श्‍वास भी बढ़ा और फि‍र मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैंने अपने बेटों, बेटी और पत्‍नी को भी ट्रेनिंग दि‍लवाई ताकि‍ सभी लोग मि‍लकर बिजनेस का हि‍स्‍सा बन सकें। धीरे-धीरे मैं अपने कारोबार को बढ़ाता चला गया।

शुरुआत ग्रामीण तालाब से करें

आज राजेश की इलाके में अपनी एक पहचान है। मत्‍स्‍य वि‍भाग उन्‍हें अलग अलग राज्‍यों में नि‍शुल्‍क भेजता है ताकि‍ वह यह सीख सकें कि‍ बाकी राज्‍यों के लोग मछली पालन में कि‍स तरह के नए प्रयोग कर रहे हैं।

उनका अगला मकसद मत्‍स्‍य बीज उत्‍पादन व चारा उत्‍पादन शुरू करना है, जि‍से वह अगले साल शुरू कर देंगे। अगर कोई मछली पालन करना चाहता तो राजेश उसी यही सलाह देते हैं कि‍ शुरुआत ग्रामीण तलाब को ठेके या पट्टे या कि‍राये पर लेकर करें या फि‍र अगर आपकी जमीन डूब में है तो वहां आप इसे ट्रार्इ कर सकते हैं।

जाने क्या होगा आपके एक्सिस बैंक के खाते का

जापान की ब्रोकरेज फर्म नोमुरा की रिपोर्ट के बाद एक्सिस बैंक के बिकने की खबरें तेज हो गई हैं. कोटक महिंद्रा बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और एशिया के सबसे बड़े बैंकर उदय कोटक इस बैंक को खरीद सकते हैं. नोमुरा ने दावा किया है कि उदय कोटक के पास यह शानदार मौका है क्योंकि, बैंक की सीईओ का कार्यकाल अब सिर्फ 8 महीने का बचा है. इसके बाद उनका उत्तराधिकारी कौन होगा अभी तय नहीं है. लेकिन, अगर एक्सिस बैंक बिक गया तो ऐसी स्थिति में मौजूदा खाताधारकों के खाते का क्या होगा.

अगर एक्सिस बैंक बिकता है तो उसका मर्जर कोटक महिंद्रा बैंक में होगा. मौजूदा स्थिति में एक्सिस बैंक के पास कोटक महिंद्रा बैंक की तुलना में दोगुनी लोक बुक है. उसके एटीएम भी ज्यादा और एसेट के लिहाज से वह तीसरा सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक है. अगर आपका भी खाता है एक्सिस बैंक में है तो मर्जर से आपको कोई नुकसान नहीं बल्कि फायदा ही होगा.

एक्सिस बैंक के खाताधारकों के लिए थोड़ी परेशानी यह होगी कि उन्हें अपनी चेक बुक, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या और कोई बैंक डाक्यूमेंट डील पूरी होने के बाद बैंक में बदलवाना होगा. मतलब यह अगर मर्जर होता है तो एक्सिस बैंक का अस्तित्व खत्म होगा और कोटक महिंद्रा बैंक ही आपका नया बैंक होगा.

बैंकिंग एक्सपर्ट विवेक मित्तल के मुताबिक, एक्सिस बैंक के खाताधारकों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि, उनका खाता बिल्कुल वैसे ही चलता रहेगा जैसे पहले चलता था. शेयर बाजार में लिस्ट होने से दोनों बैंकों के बीच डील की प्रक्रिया काफी लंबी होगी है. पहले बैंक की कुछ हिस्सेदारी ट्रांसफर होगी. बाद में बैंक का नाम, ब्रांच और एटीएम में बदलाव किया जाता है. हालांकि, अभी बहुत शरुआती स्टेज है इसलिए इस डील पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा.

अगर दोनों बैंकों का मर्जर होता है तो उसके बाद बनने वाले बैंक के पास 5,760 ब्रांच होंगी. इतनी ब्रांच देश के किसी प्राइवेट सेक्टर बैंक के पास नहीं है. ICICI बैंक के पास 4,860 ब्रांच हैं. मर्जर के बाद बैंक की लोन बुक 6.16 लाख करोड़ रुपए हो जाएगी, जो HDFC बैंक की 6.31 लाख करोड़ की लोन बुक से कुछ ही कम होगी. ऐसी स्थिति में बैंक के पास गुंजाइश रहेगी कि वह होम लोन को सस्ती दर पर दे सके.

बैंकर्स के मुताबिक, अगर बैंकों का मर्जर होता है तो एक्सिस बैंक का मैनेजमेंट भी बदल जाएगा. हालांकि, मैनजमेंट बदलने से ग्राहकों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. मैनेजमेंट में बदलाव शेयर बाजार के लेवल पर असर डालता है. आम आदमी को अपने पैसे और बाकी डीलिंग से मतलब होता है. आम आदमी को एफडी या आरडी पर ब्याज ज्यादा मिल सकता है.

नोमुरा का कहना है कि मौजूदा शेयर प्राइस पर 2.15 का स्वाप रेशियो ठीक होगा. अगर दोनों बैंकों के बीच डील होती है तो इसका मतलब यह है कि एक्सिस बैंक के 2.15 शेयरों के लिए कोटक महिंद्रा बैंक का एक शेयर मिलना चाहिए. ऐसी स्थिति में अगर कोई खाताधारक एक्सिस बैंक में शेयर हैं तो उसे कोटक के शेयर मिल जाएंगे.

हर रास्ते पर सरपट दौड़ेगी मारुति की ये स्टाइलिश SUV

मारुति सुजुकी की पावरफुल गाड़ियों में शुमार जिप्सी अब नया रंग ले चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुजुकी ने अपनी 4th जनरेशन 2018 मॉडल सुजुकी जिम्नी (Jimny) को मार्केट में लाने की तैयारी कर ली है।

ये SUV अगले महीने इंटरनेशनल मार्केट में आ सकती है। सबसे पहले इसे जापान में लॉन्च किया जाएगा। वहीं, साल के आखिर तक इंडिया में भी इसे लॉन्च किया जा सकता है। ये पुरानी जिप्सी से ज्यादा पावरफुल और स्टाइलिश भी नजर आ रही है।

हर रास्ते पर दौड़ेगी

कंपनी ने नई जिम्नी के एक्सटीरियर और इंटीरियर के कुछ फोटो रिलीज किए हैं, जिन्हें देखकर पता चलता है कि ये कितनी ज्यादा स्टाइलिश है। इन फोटो के मुताबिक इस SUV को पत्थर वाले रास्ते से लेकर बर्फीले रास्ते तक कहीं भी दौड़ाया जा सकता है। इसकी लंबाई पुरानी जिप्सी की तुलना में ज्यादा है। नई जि‍म्‍नी की लंबाई 3.91 मीटर तक होगी। वहीं, पुराने वर्जन की लंबाई 3.69 मीटर है।

इतनी दमदार होगी जिम्नी

जिम्नी में 1 लीटर और 3 सिलेंडर टर्बोचार्ज्‍ड पेट्रोल इंजन का यूज किया गया है। जो‍ 100 बीएचपी से ज्‍यादा पावर और करीब 170 एनएम टॉर्क को जेनरेट कर सकता है। यानी पुरानी जिप्सी से ज्यादा पावरफुल है। इसमें 5 स्‍पीड मैनुअल और 6 स्‍पीड टॉर्क कन्‍वर्टर ऑटोमैटि‍क गि‍यरबॉक्‍स का ऑप्‍शन शामि‍ल हो सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी इस बारे में जानकारी नहीं दी है।

 ऐसा है इंटीरियर

इसके इंटीरियर की बात करें तो इसमें 5 लोगों के बैठने की जगह दी है। जो बड़े बूट स्पेस के साथ आता है। हालांकि, लगेज के लिए स्पेस थोड़ा कम नजर आ रहा है। इसके अलावा, स्‍टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल और ऑटोमैटि‍क एयर कंडीशनिंग जैसे फीचर्स हैं। इसमें FM, USB स्टीरियो सिस्टम के साथ AC, पावरविंडो मिलेगा। सेफ्टी के लिए इसमें ABS और एयरबैग भी दिए हैं।

इस कूलर में AC जैसी ठंडी हवा के लिए लगा है कम्प्रेसर

गर्मी में ठंडी हवा सबसे ज्यादा राहत देने का काम करती है, और इसके लिए एयर कंडीशनर बेस्ट ऑप्शन होता है। हालांकि, जब बात AC की कीमत और उसके बिजली बिल की आती है तब इसे खरीदना हर किसी के हाथ में नहीं रह जाता।

ऐसे में जिन यूजर्स को AC जैसी ठंडी हवा का मजा कम बिजली बिल में लेना है उनके लिए वायु बेस्ट ऑप्शन बन सकता है। इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि इसका बिल AC से 90% कम आता है, वहीं हवा AC जैसी ठंडी होती है।

एमपी की इनोवेटिव कंपनी

AC की तरह ठंडी हवा देने वाले कूलर को बनाने वाली कंपनी वायु होम अप्लायंस मध्य प्रदेश की है। इस कंपनी को डायरेक्टर प्रणव मोक्षमार का कहना है कि उनकी कंपनी को एमपी से बेस्ट स्टार्टअप कंपनी का अवॉर्ड मिल चुका है। उनकी कंपनी का प्रोडक्ट AC का बेस्ट सब्सिट्यूट है। इसका पावर कंजप्शन कूलर की तरह है। वहीं, परफॉर्मेंस एयर कंडीशनर की तरह है।

कूलर में लगा है कम्प्रेसर

कूलर AC की तरह ठंडी हवा दे इसके लिए कंपनी ने इसमें कम्प्रेसर लगाया है। ये कम्प्रेसर कूलर के पानी को ठंडा करता है और वो पानी कूलर के पैड पर जाता है, जिससे नॉर्मल हवा भी AC के जैसी ठंडी हो जाती है। ये कम्प्रेसर बहुत कम पावर यूज करता है। AC की तुलना में ये सिर्फ 10% पावर कंजप्शन करता है।

इतनी है कीमत

वायु कंपनी का सबसे छोटा प्रोडक्ट दो सौ वर्ग मीटर को आसानी के ठंडा कर देता है। इसमें 250 वॉट बिजली की खपत होती है। वहीं, इस काम के लिए AC 2100 वॉट बिजली खर्च करता है। इन प्रोडक्ट की कीमत 22,500 रुपए से शुरू है।

MIG 24 नाम का प्रोडक्ट 1000 स्क्वॉयर फीट एरिया को आसानी से ठंडा करता है, इसकी कीमत करीब 85,000 रुपए है। कंपनी का सबसे बड़ा एयर कंडीशनर 1.25 लाख रुपए का है।

क्या होता है समन और वॉरंट

समन और वॉरंट, इनका नाम तो आपने सुना ही होगा. अदालती शब्दावली में ये नाम इस्तेमाल किये जाते हैं. लेकिन आमतौर पर इन में क्या अंतर होता है, ये लोगों को नहीं पता होता है. तो आज हम आपको बता रहे हैं कि समन और वॉरंट क्या होते हैं और इनमें क्या अंतर होता है?

क्या होते है समन और वॉरंट और इनमें क्या है अंतर

समन

जब कोई अदालती कार्यवाही किसी पीड़ित की ओर से किसी प्रतिवादी के खिलाफ शुरू की जाती है तो बोलचाल की भाषा में इसे समन कहा जाता है. यह सिविल या आपराधिक कार्यवाही के मामले में जारी किया जाता है. इसमें किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत तौर पर अदालत में उपस्थित होने या किसी तरह के दस्तावेज पेश करने का आदेश होता है.

वॉरंट

वॉरंट एक कानूनी आदेश होता है, जिसे जज या मजिस्ट्रेट के द्वारा जारी किया जाता है. इसमें पुलिस को ये आदेश दिया जाता है कि वह किसी व्यक्ति को पकड़े या उसके घर को जब्त करे, उसके घर की तलाशी ले और अन्य तरह के जरूरी कदम उठा सके. अगर पुलिस किसी व्यक्ति के घर में बिना वॉरंट के तलाशी लेती है तो ये उस व्यक्ति के मूल अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है.

कैसे इस्तेमाल होता है समन और वॉरंट

हम आपको बता दें कि अदालत की कार्रवाही के तहत किसी भी अपराधी या अभियुक्त को पहले समन भेजा जाता है और उसमें कहा जाता है कि निर्धारित तारीख और समय पर उसे अदालत में पेश होना है.

लेकिन जब वो व्यक्ति अदालत के आदेश को अनसुना कर देता है और अदालत में उपस्थित नहीं होता है तो उसके खिलाफ वॉरंट निकाला जाता है, जिसके तहत पुलिस अधिकारी कार्रवाही करते हैं और अभियुक्त को पकड़ने के लिए घर, दुकान और अन्य जगहों पर छापे डालते हैं.

इस गांव का हर कुत्ता है ‘करोड़पति’

भाई क्या कहने! अब तो हमारे देश में कुत्ते भी करोड़पति होने लगे हैं. चौंकिए नहीं, यह सच है. गुजरात के मेहसाणा जिले के पंचोत गांव में एक ट्रस्ट की देखरेख में 70 कुत्ते रहते हैं और सभी करोड़पति हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, गांव में कुत्तों के कल्याण के लिए एक संस्था ‘मध नी पती कुतरिया’ बनाई गई है. इस संस्था के पास 21 बीघा जमीन है. मेहसाणा बाईपास के बनने की वजह से यहां जमीन की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. जमीन का रेट 3.5 करोड़ रुपये प्रति बीघा पहुंच गया है.

इस तरह संस्था की 21 बीघा जमीन की कीमत 70 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इस जमीन से होने वाले पूरी आय कुत्तों के लिए ही है. इस तरह संस्था की देखरेख में रहने वाला प्रत्येक कुत्ता करीब एक करोड़ रुपये का मालिक है.

कुत्तों के कल्याण के लिए जमीन दान देने की यह परंपरा ‘कुतारियु’ कहलाती है. ट्रस्ट के अध्यक्ष छगनभाई पटेल ने कहा कि गांव में जीवदया का लंबा इतिहास है. इसकी शुरुआत अमीर परिवारों द्वारा ऐसे जमीन के दान से हुई, जिनकी देखरेख वे नहीं कर पाते थे. पटेल ने कहा कि पहले जमीन इतने महंगे नहीं थे, लेकिन हाल में बाईपास के निर्माण शुरू होने के बाद यहां जमीन की कीमतें काफी बढ़ गईं.

कुत्तों के लिए दान में मिली इस जमीन की करीब 80 साल पहले कुछ पटेल किसानों ने देखभाल शुरू की थी. हर साल बुवाई के सीजन से पहले जमीन की नीलामी की जाती है और जो सबसे ज्यादा रकम देने को तैयार होता है,

उसे एक साल तक इस जमीन पर खेती करने का अधिकार मिल जाता है. इससे होने वाली कमाई से कुत्तों की देखभाल की जाती है. ट्रस्ट ने कुत्तों के खाने-पीने की व्यवस्था के लिए एक ‘रोतला घर’ बनाया है, जहां दो महिलाओं द्वारा कुत्तों के खाने के लिए रोतला तैयार किए जाते हैं. हर दिन इसके लिए 20 से 30 किलो आटे की खपत होती है.

पंजाब के MLA ने टोल बूथ के बगल से बना दी 2.5 किमी लंबी टोल फ्री रोड

अक्सर ही पंजाब की सड़कों पर लोगों को भारी टोल चुका कर अपनी जेब हल्की करनी पड़ रही है लेकिन अब पंजाब के जिला संगरूर के धूरी से कांग्रेस के विधायक ने टोल के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए टोल के बराबर एक टोल फ्री रोड बना दी है जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है और लोग भी विधायक के इस प्रयास को सोशल मीडिया पर खूब शेयर भी कर रहे हैं.

पंजाब की सड़कों पर बढ़ रहे टोल प्लाजा अक्सर ही लोगों की आंखों में खटकते हैं और इन टोल प्लाजा पर लोगों को अपनी जेब खाली करनी पड़ती है, लेकिन संगरूर के धूरी से विधायक दलबीर गोल्डी ने लुधियाना-संगरूर स्टेट हाईवे पर धूरी में लगे टोल के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए टोल के बराबर ही एक टोल फ्री रोड बना दी है.

विधायक की ओर से किए इस कार्य की यहां सोशल मीडिया पर खूब प्रशंसा हो रही है. वहीं, इस सड़क का वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है.

ढाई किलो मीटर लंबी इस सड़क पर विधायक ने अपनी जेब से ही पैसे खर्च किए हैं, यही नहीं, धूरी के साथ-साथ मलेरकोटला, अमरगढ़ और अहमदगढ़ विधानसभा इलाकों के लोगों को भी संगरूर ही जिला हेडक्वॉटर पड़ता है और उन्हें इसी रास्ते से आना जाना पड़ता है जिसके चलते उनकी जेब ढीली होती थी.