ऐसे शुरू करें अपना फर्नीचर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट

हम ऐसे ही एक बिजनेस के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिसकी ना सिर्फ डिमांड सालों भर रहती हैं, बल्कि इसे शुरू करने लिए आपको सिर्फ 2 लाख रुपए का इन्वेस्टमेंट करना होगा। बिजनेस के एस्टीमेट के हिसाब से सभी खर्च काटने के बाद आप मंथली 50 हजार रुपए तक की कमाई कर सकते हैं।

शुरू करें वुडन फर्नीचर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट

देश में वुडन फर्नीचर जैसे कुर्सी, कोट, खिड़कियां और दरवाजे की डिमांड सालों भर रहती है। लकड़ी से बनी अलग-अलग डिजाइन की कुर्सियां, दरवाजे और पलंगें डिमांड बढ़ी है। यही नहीं, बढ़ती डिमांड को देखते हुए अब फॉरेन कंपनियां अपने अनोखे डिजाइन के साथ इस बिजनेस में उतरी हैं।

ऐसे में बेहतर क्वालिटी और आकर्षक डिजाइन का प्रोडक्ट तैयार कर आप अपनी मार्केट बना सकते हैं। मांग बनी रहने से आपका कारोबार सफल होने की उम्मीद भी ज्यादा है। खास बात है कि इस बिजनेस के लिए सरकार अपनी मुद्रा स्कीम के तहत सपोर्ट भी कर रही है।

कितना होगा खर्च  कुल खर्च

इस बिजनेस शुरू होने में पूरा खर्च 9.35 लाख रुपए लगेगा, लेकिन इसमें से आपको खुद के पास से करीब 2 लाख रुपए ही निवेश करना होगा। बाकी खर्च के लिए योजना के तहत सरकार आपको सपोर्ट करेगी।

  • प्लांट एंड मशीनरी पर खर्च– 3.55 लाख रुपए
  • फर्नीचर एक्सपेंस- 10,000 रुपए
  • लैंड एंड बिल्डिंग– 2,000 रुपए
  • वर्किंग कैपिटल– 1.90 लाख रुपए
  • फिक्सड कैपिटल– 3.65 लाख रुपए

वर्किंग कैपिटल में एक महीने का रॉ मैटेरियल खर्च, वेजेज और सैलरी के अलावा यूटिलिटज और कन्टिन्जन्सीज खर्च शामिल है।

सरकार से कितनी मदद मिल सकती है?

बिजनेस शुरू करने के लिए आपको प्रोजेक्ट कॉस्ट का 20 फीसदी यानी 1.87 लाख रुपए अपने पास से लगाने होंगे। बैंक से कम्पोजिट लोन-7,48,600 रुपए मदद मिल सकती है । ये लोन मुद्रा स्कीम के तहत किसी भी बैंक से आसानी से मिल जाएगा।

ऐसे होगी 50 हजार तक मंथली इनकम

9.35 लाख रुपए के निवेश पर जो एस्टीमेट तैयार किया गया है, उसमें सालाना 12 लाख रुपए का फर्नीचर में कोट और 18.10 लाख रुपए की खिड़कियां, दरवाजे और कुर्सियों का प्रोडक्शन हो सकता है।

  • सालाना टर्नओवर- 30.10 लाख रुपए
  • कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन- 2.42 लाख रुपए
  • नेट प्रॉफिट-5.82 लाख रुपए (टैक्स रहित)

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत करें अप्लाई

इसके लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत आप किसी भी बैंक में अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक फॉर्म भरना होगा, जिसमें ये डिटेल देनी होगी.. नाम, पता, बिजनेस शुरू करने का एड्रेस, एजुकेशन, मौजूदा इनकम और कि‍तना लोन चाहिए। इसमें किसी तरह की प्रोसेसिंग फीस या गारंटी फीस भी नहीं देनी होती।

ऐसे जानें, कितना माइलेज देती है आपकी कार या बाइक

कार और बाइक का माइलेज यूं करें पता

आप बाइक या कार खरीदने जाते हैं तो सबसे पहले गाड़ी की माइलेज के बारे में ही पूछते हैं। भारत में लोगों की कोशिश होती है कि ज्यादा से ज्यादा माइलेज वाली कार खरीदी जाए। अगर आप यह नहीं जानते कि कार या बाइक की माइलेज कैसे पता की जा सकती है तो हम आपको उसका तरीका बता रहे हैं…

सबसे पहले कार का टैंक फुल कराएं

माइलेज पता करने के लिए सबसे पहले आपको अपनी गाड़ी(कार या बाइक) का टैंक फुल कराना होगा। ध्यान रहे कि आप हर बार एक ही ब्रैंड का फ्यूल भराएं, इसे चेंज करते रहने से भी माइलेज में अंतर आता है। गाड़ी में तेल भरते समय ट्रिप मीटर को जीरो पर फिक्स करें। फिर जब फ्यूल आधा रह जाए तो फिर से टैंक फुल करा लें। आपको नोट करना होगा कि पिछली बार कार कितने किलोमीटर चली है और दूसरी बार में कितने लीटर फ्यूल डाला गया है।

ऐसे कैलकुलेट करें माइलेज

आपकी कार की चली गई दूरी को दूसरी बार भराए गए फ्यूल से डिवाइड करें, तो आपकी कार की माइलेज निकल आएगी। उदाहरण के लिए अगर आपकी कार 660 किमी. चली है और आपने 22 लीटर पेट्रोल डाला है तो आपकी कार की माइलेज होगी 30 किमी/ लीटर होगी।

इस प्रक्रिया को 5-6 बार दोहराएं

इसी तरह आपको कई बार करना होगा और डेटा नोट करना होगा। कार की माइलेज इस बात पर भी डिपेंड करती है कि वह किस तरह की सड़क पर चली है। इसलिए 5-6 बार माइलेज निकालकर आप औसत माइलेज निकाल लीजिए। वही आपकी कार की माइलेज होगी।

कई ऐप भी बताते हैं माइलेज

ऐसे कई ऐप भी हैं, जिनकी मदद से आप अपनी गाड़ी का माइलेज पता लगा सकते हैं। ये ऐप जीपीएस के जरिए आपकी गाड़ी का सही माइलेज बता देते हैं।

गाड़ी तेज स्पीड में चलाने से बचें

ज्यादातर कारें सबसे बढ़िया माइलेज तभी देती हैं जब उन्हें 60-80 किलोमीटर की स्पीड से चलाया जाए इसलिए गाड़ी को इससे तेज चलाने से बचें। फ्यूल बचाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप बार-बार गियर न बदलें। जितनी स्मूथ ड्राइविंग करेंगे, फ्यूल उतना ही कम खर्च होगा।

5 लाख में शुरू हो जाएगा पॉल्‍ट्री बिजनेस, सरकार करेगी 75% पैसे का सपोर्ट

विंटर सीजन शुरू हो चुका है। इस सीजन में अंडे और चिकन की डिमांड बढ़ जाती है। यही वजह है कि पॉल्‍ट्री बिजनेस करने का भी यह बहुत सही समय है। अगर आप बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो पॉल्‍ट्री बिजनेस शुरू कर सकते हैं। यह ऐसा बिजनेस है, जिसमें सरकार भी पूरा सपोर्ट करती है। सरकारी एजेंसी (नाबार्ड नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्‍चर एंड रूरल डेवलपमेंट) द्वारा पॉल्‍ट्री बिजनेस का पूरा सपोर्ट किया जाता है। बस आपको इसके बारे में कुछ बारीकियां पता होनी चाहिए। हम आपको न केवल यह बताएंगे कि यह बिजनेस कैसे किया जा सकता है, बल्कि यह भी बताएंगे कि कैसे आप नाबार्ड से सपोर्ट भी ले सकते हैं।

सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि पॉल्‍ट्री बिजनेस दो तरह का होता है। यदि आप अंडों का बिजनेस करना चाहते हैं या चिकन का। यदि आप अंडे का बिजनेस करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी होगी और आप चिकन का बिजनेस करना चाहते हैं तो आपको ब्रायलर मुर्गियां पालनी होंगी।

 कितने में शुरू होगा यह बिजनेस

नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्‍चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) द्वारा तैयार किए गए मॉडल प्रोजेक्‍ट्स के मुताबिक यदि आप पॉल्‍ट्री ब्रायलर फार्मिंग करना चाहते हैं और कम से कम 10 हजार मुर्गियों से बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख रुपए का इंतजाम करना होगा, जबकि बैंक आपको लगभग 75 फीसदी यानी कि 27 लाख रुपए तक का लोन मिल जाएगा। यदि आप 10 हजार मुर्गियों से पॉल्‍ट्री लेयर फार्मिंग करना चाहते हैं तो आपको 10 से 12 लाख रुपए का इंतजाम करना होगा और बैंक आपको 40 से 42 लाख रुपए तक का लोन दे सकता है। बैंक से आसानी से लोन लेने के लिए नाबार्ड कंसलटेंसी सर्विस की सहायता भी ली जा सकती है।

कितनी होगी कमाई

नाबार्ड के मुताबिक, एक स्‍वस्‍थ चूजा 16 से 18 रुपए में मिल जाता है। और ब्रायलर चूजा अच्‍छा व पौष्टिक आहार मिलने पर 40 दिन में एक किलोग्राम हो जाता है, जबकि लेयर ब्रिड के चूजे 4 से 5 महीने में अंडे देना शुरू कर देते हैं और औसतन डेढ़ साल तक लगभग 300 अंडे देते हैं। नाबार्ड के मॉडल प्रोजेक्‍ट के मुताबिक ब्रायलर फार्मिंग में आप लगभग 70 लाख रुपए तक कमाई कर सकते हैं, जबकि आपका कुल खर्च 64 से 65 लाख रुपए तक हो सकता है, जिसमें चूजे की खरीद, दाना, दवाइयां, इंश्‍योरेंस, शेड का किराया, बिजली का बिल, ट्रांसपोर्टेशन आदि शामिल है। यानी कि आप 4 से 5 महीने में लगभग 15 लाख रुपए कमाई कर सकते हैं।

कितनी होगी अंडों से कमाई

 

यदि आप 10 हजार मुर्गियों से ब्रायलर फार्मिंग का बिजनेस शुरू करते हैं तो आप पहले साल में लगभग 35 लाख रुपए का अंडे बेच सकते हैं। साथ ही, एक साल बाद मुर्गियों को चिकन के लिए बेच दिया जाता है। इससे लगभग 5 से 7 लाख रुपए की आमदनी होगी। जबकि कुल खर्च लगभग 25 से 28 लाख रुपए होगी और साल भर में 12 से 15 लाख रुपए प्रॉफिट कमा सकते हैं। आगे के सालों में आपकी कैपिटल कॉस्‍ट कम हो जाती है।

बिजनेस के लिए कितने स्‍पेस की जरूरत होगी

पॉल्‍ट्री फार्मिंग के लिए स्‍पेस की खास जरूरत होती है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि आप किसी विकसित इलाके में ही पॉल्‍टी फार्मिंग करें, क्‍योंकि यह आपके लिए महंगा साबित हो सकता है, लेकिन इतना जरूर है कि पॉल्‍ट्री फार्म शहर के निकट ही हो और वहां तक वाहनों का आना जाना आसान हो। कितने स्‍पेस की जरूरत पड़ेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी मुर्गियों से अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। माना जाता है कि एक मुर्गी को कम से कम 1 वर्ग फुट की जरूरत पड़ती है और यदि यह स्‍पेस 1.5 वर्ग फुट हो तो अंडों या चूजों के नुकसान की आशंका काफी कम हो जाती है। इसके अलावा फार्मिंग ऐसी जगह पर करनी चाहिए, जहां बिजली का पर्याप्‍त इंतजाम होना चाहिए।

अब धान की भूसी से बनेगी इमारत, कम आएगी लागत

बिलासपुर (विकास पांडेय)। रेत और सीमेंट की जगह अब धान की भूसी का इस्तेमाल किया जा सकेगा। जी हां, धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग के छात्रों ने यह कारनामा कर दिखाया है। इससे कंक्रीट में पड़ने वाली रेत और सीमेंट की मात्र घटाई जा सकेगी। निर्माण में मजबूती उतनी ही दमदार रहेगी और लागत 20 फीसद तक घट जाएगी।

आइटी कॉलेज कोरबा में सिविल इंजीनियरिंग के इन छात्र-छात्राओं ने दरअसल धान की भूसी और संयंत्रों की भट्ठी से निकलने वाली राख को गारे के रूप में इस्तेमाल कर कंक्रीट का नया फॉर्मूला ईजाद किया है। धान की भूसी से अब तक बिजली, तेल, लकड़ी, बोर्ड, ईंट और सिलिका आदि बनाए जा रहे हैं। यह शोध एक नया विकल्प जोड़ रहा है।

निर्माण में कारगर है थ्योरी

कॉलेज के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर विजय कुमार केडिया ने बताया कि छात्रों द्वारा तैयार की गई कंक्रीट पारंपरिक कंक्रीट की तुलना में उतनी ही मजबूत है। इस विधि में रेत और सीमेंट की मात्र कम करके इनकी जगह धान की भूसी और संयंत्रों से निकलने वाली राख का इस्तेमाल किया गया। गारे में भूसी और राख को बराबर मात्र में मिलाया गया।

दोनों का हिस्सा 10-10 फीसद रखा गया। साथ ही ईंट के टुकड़े मिलाए गए। इससे गारे में पड़ने वाली रेत और सीमेंट की मात्र 10-10 फीसद कम हो गई। प्रो. केडिया का दावा है कि इस विधि के इस्तेमाल से निर्माण की लागत परंपरागत विधि के मुकाबले करीब 20 फीसद तक कम हो गई। छात्रों ने फिलहाल इस क्रांकीट का इस्तेमाल कर ऐसे ढांचे बनाए हैं, जिन्हें जोड़कर दीवार, पार्टीशन आदि बनाए जा सकते हैं।

काम की भूसी

बिजली: धान की भूसी से भाप संयत्र चलाये जाते हैं। जिनसे टरबाईन को चला कर बिजली प्राप्त की जाती है। छोटे राइस मिल धान की भूसी से 100 हार्स पावर बिजली तैयार कर सकते हैं।

सिलिका: धान की भूसी से बिजली बनाने पर इस प्रक्रिया में निकलने वाली राख से सिलिका भी तैयार की जा रही है। जिसका इस्तेमाल टायर बनाने में किया जाता है।

लकड़ी: धान की भूसी और देवदार के काँटों से लकड़ी बनाने की तकनीक विकसित की गई है। भूसी को लकड़ी में बदलने के लिए पहले से बने खाँचे में उच्च दाब की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक से बनी लकड़ी का इस्तेमाल आम लकड़ी की तरह किया जा सकता है।

ईंट: धान की भूसी का उपयोग ईंट बनाने में बहुतायत होता है।1बोर्ड : भूसी से वाटरप्रूफ तख्ता (बोर्ड) बनाया जाता है।

तेल: धान की भूसी-कनकी से तेल भी बनाया जाता है।

 

आपके पास है गैस एजेंसी खोलने का मौका, ऐसे करें आवेदन

भारतीय सरकारी तेल कंपनियां देश में एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती मांग को देखते हुए देश के कई जिलों में पांच हजार गैस एजेंसी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में खोलने का निर्णय लिया है। आप को जानकारी के लिए बता दें कि पिछले तीन सालों में रसोई गैस उपभोक्ताओं में तेजी से वृद्धि से हुई है। लेकिन इसकी तुलना में एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूशन नेटवर्क में कोई इजाफा नहीं दिखा।

घरेलू गैस उपभोक्ताओं की संख्या में बढ़ोतरी

1 अप्रैल, 2015 और 30 सितंबर 2017 के बीच घरेलू गैस उपभोक्ताओं की संख्या में 44% की फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जबकि जबकि एलपीजी वितरकों की संख्या सिर्फ फीसदी बढ़कर 19,200 ही हुई है। तेल मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, सरकार ने तेल कंपनियों को आदेश दिया है कि एलपीजी वितरकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी की जाए।

मार्च, 2019 तक होंगे 5000 नए एलपीजी वितरक

इस अधिकारी ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार मार्च 2019 तक 5000 से अधिक नए एलपीजी वितरक होंगे।

इन राज्यों से होंगे ज्यादा नए एलपीजी वितरक

एलपीजी के नए वितरक मुख्यरूप से उन क्षेत्रों से आ रहे हैं, जहां रसाई गैस के नए उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। नए एलपीजी वितरकों की संख्या विशेषरूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से बनाई जानी तय है, क्योंकि इन्हीं राज्यों में रसाई गैस इस्तेमाल करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा देखा गया है।

तेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस बार हमनें एलपीजी वितरकों को जोड़ने का एक खाका तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा कि केवल जरूरतमंदों जगहों से एलपीजी वितरक जोड़ें जाएंगे, हम उन स्थानों से एक एलपीजी वितरक नहीं जोड़ेंगे जहां एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स पहले से मौजूद हैं।

पिछड़े ग्रामीण इलाकों के लिए आसानी

नए एलपीजी उपभोक्ता ज्यादातर ग्रामीण इलाकों तथा पिछड़ी पृष्ठभूमि से संबद्ध हैं, ऐसे में यह उपभोक्ता गैस खत्म होने के बाद होम डिलिवरी तो दूर की बात है, दूर दराज इलाकों में मौजूद एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स तक जल्दी पहुंच नहीं पाते हैं। ताकि खाना बनाने के लिए सिलेंडरों में गैस भरवा सकें।

ऐसे करें गैस एजेंसी लेने की तैयारी

एलपीजी डीलरशिप हासिल करने के कड़े नियम और शर्तें हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस साल जब गैस कंपनियां डीलरशिप के लिए आवेदन आमंत्रित करें तो आपके पास तैयारी पूरी होनी चाहिए। हम आपको बताने जा रहे हैं डीलरशिप हासिल करने के नियम, शर्तों और प्रक्रिया के बारे में। यह जानकारी पिछली आवेदन प्रक्रिया पर आधारित है, नए एप्‍लीकेशन में इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं।

गैस डीलर बनाने की प्रक्रिया

देश की तीनों सरकारी कंपनियां इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस समय-समय पर नए डीलर बनाने के लिए आवेदन आमंत्रित करती हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में गैस वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार की राजीव गांधी ग्रामीण एलपीजी वितरक योजना(आरजीजीएलवी) के तहत भी आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। इसमें गैस कंपनियां एजेंसी और गोदाम की जमीन के लिए कंपनियां वार्ड, मुहल्‍ला या निश्चित स्‍थान विज्ञापन या नोटिफिकेशन में बताती हैं। एप्‍लीकेशन भेजने के बाद एक निर्धारित तिथि पर आवेदक का इंटरव्‍यू किया जाता है। इसमें विभिन्‍न आधार पर नंबर दिए जाते हैं। इन्‍हीं नंबरों के आधार पर आवेदक का चयन किया जाता है।

फील्‍ड वैरिफिकेशन

हाईस्कूल में अंकों के प्रदर्शित होने के बाद गैस कंपनी का एक पैनल सभी कैंडिडेट की दी गई डिटेल के संबंध में फील्‍ड वैरिफिकेशन करता है। इसमें जमीन से लेकर सभी अन्‍य बातों की गहन पड़ताल की जाती है। इसके बाद ही गैस एजेंसी अलॉट की जाती है। इसके लिए कैंडिडेट को एक तय समय सीमा दी जाती है। इसके भीतर ही उसे गैस एजेंसी शुरू करनी होती है।

एजेंसी हासिल करने के लिए जरूरी शर्तें

गैस एजेंसी या डीलरशिप लेने के लिए सबसे जरूरी शर्त पर्मानेंट एड्रेस और जमीन की होती है। कैंडिडेट के पास पर्मानेंट रेजिडेंस एड्रेस होना चाहिए। इसके अलावा उसके पास गैस एजेंसी ऑफिस और गोदाम के लिए पर्याप्‍त जमीन या स्‍थान भी होना चाहिए। जमीन किस मुहल्‍ले, वार्ड या स्‍थान पर होनी चाहिए, इसकी जानकारी विज्ञापन में दी जाती है। इसके अलावा कैंडिडेट 10वी पास अवश्‍य होना चाहिए। साथ उसकी उम्र 21 साल होनी चाहिए। इसके साथ ही आपके पास बैंक बैलेंस और डिपॉजिट राशि भी होनी चाहिए।

सरकार द्वारा तय मानकों पर मिलता है रिजर्वेशन

गैस एजेंसी के लिए सरकार द्वारा तय मानकों के आधार पर रिजर्वेशन दिया जाता है। 50 फीसदी रिजर्वेशन सामान्‍य श्रेणी के लिए होता है। वहीं अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के साथ ही सामाजिक रूप से अक्षम लोगों, भूतपूर्व सैनिक, स्‍वतंत्रता सेनानी, खिलाड़ी, सशस्‍त्र बल, पुलिस या सरकारी कर्मचारियों को भी आरक्षण दिया जाता है।

जमीन और डिस्ट्रिब्‍यूशन चैनल जरूरी

गैस एजेंसी हासिल करने के लिए सबसे जरूरी यह है कि आपके पास पर्याप्‍त जमीन और सिलेंडर डिलिवरी के लिए पर्याप्‍त स्‍टाफ होना चाहिए। गोदाम के लिए गैस कंपनी निर्धारित मानक तय करती है। सभी गोदाम का आकार, उसमें सुरक्षा के इंतजाम आदि इसी पर आधारित होते हैं।

ऑनलाइन जितना चाहें खरीदें किराने का सामान, महीने के अंत में दीजिए पैसे

जितना चाहिए उतना किराने का सामान खरीदिए और महीने के अंत में पैसे चुकाइए. ऑनलाइन ग्रोसरी शॉपिंग पोर्टल ग्रोफर्स ने नई पोस्टपेड सेवा शुरू की है. इसके तहत आप महीने में जितना चाहें, उतनी राशन खरीद सकते हैं और महीने के अंत में इसके बिल का एक साथ भुगतान कर सकते हैं. ग्रोफर्स ने ग्राहकों को इस सेवा का लाभ देने के लिए ऑनलाइन लेंडिंग प्लैटफॉर्म सिंपल के साथ साझेदारी की है.

एकमुश्त भुगतान की सुविधा मिलेगी

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक कोई भी ग्राहक सिंपल के जरिये महीने में किसी भी समय किराने का सामान समेत अन्य चीजें खरीद सकता है. महीने भर खरीदारी करने के बाद अंत में इसका एकमुश्त बिल देना होगा.

आम लोगों को होगा फायदा

ग्रोफर्स के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अलबिंदर ढींढसा ने कहा कि इस नई सेवा से ग्राहकों को काफी फायदा मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह एक अनूठी सेवा है. सिंपल के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अध‍िकारी नित्या शर्मा ने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य किराने की खरीदारी केा आम लोगों के लिए सुगम बनाना है.

नहीं करनी होगी हर दिन बिल भरने की चिंता

उन्होंने कहा कि ग्रोफर्स के ग्राहक अब महीने में जितना चाहें, उतना किराने का सामान खरीद सकते हैं और फिर एक ही साथ पूरे बिल का भुगतान कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह कुछ उसी तरह ही है जैसे आप अपने मोहल्ले की किराना की दुकान से महीने भर सामान लेते हैं और महीने की आख‍िर में उसका हिसाब करते हैं.

फिलहाल इनके लिए है यह सुविधा

ग्रोफर्स के मुताबिक शुरुआत में यह सुविधा ग्रोफर्स के नियमित ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगी. बाद में इसे ऑनलाइन ग्रोसरी शॉपिंग दूसरे ग्राहकों के लिए भी शुरू करेगा.

11 दिसंबर को शुरू हो रही है मोबाइल, AC, एलईडी की सरकारी ट्रेनिंग , जाने पूरी जानकारी

भारत में इलेक्‍ट्रॉनिक आयटम्‍स का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। बात स्‍मार्ट फोन की हो, या एसी, एलईडी, एलसीडी, टैब आदि की। इन सभी आयटम्‍स का इस्‍तेमाल बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि दुनिया की शायद ही कोई ऐसी इलेक्‍ट्रॉनिक कंपनी होगी, जो भारत में अपना एक्‍सपेंशन नहीं कर रही है।

लेकिन इन कंपनियों की दिक्‍कत यह है कि उन्‍हें अनुभवी लोग नहीं मिलते। सरकार भी इस बात को मानती है और यही वजह है कि सरकार देश में बेरोजगारी की समस्‍या को कम करने के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक आयटम्‍स ट्रेनिंग दे रही है। यह ट्रेनिंग दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनी सैमसंग के साथ मिलकर दी जा रही है।

11 दिसंबर से होगा शुरू

यह ट्रेनिंग 11 दिसंबर से शुरू होगी। इसलिए यदि आप इस ट्रेनिंग का हिस्‍सा बनना चाहते हैं तो 11 दिसंबर से पहले आपको आवेदन करना होगा। आवेदन फार्म कनॉट प्‍लेस, नई दिल्‍ली स्थित एमएसएमई एक्‍सटेंशन सेंटर पर मिलेंगे। इस बारे में विस्‍तृत जानकारी के लिए आप 9999948317, 9773830870, 011-23412611 पर संपर्क कर सकते हैं।

सैमसंग के एक्‍सपर्ट्स देंगे ट्रेनिंग

आज हम आपको इस ट्रेनिंग के बारे में विस्‍तार से बताएंगे। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम मिनिस्‍ट्री ऑफ माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के इलेक्‍ट्रॉनिकी सर्विस एंड ट्रेनिंग सेंटर द्वारा चलाया जा रहा है। इस प्रोग्राम में सैमसंग के एक्‍सपर्ट्स द्वारा ट्रेनिंग दी जाती है। आइए जानते हैं, क्‍या इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की खासियत

ये ट्रेनिंग ले सकते हैं आप

सेंटर द्वारा 7 तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है। पहली में एलईडी, एलसीडी, प्‍लाजमा टीवी, होम थियेटर (ऑडियो-वीडियो) और दूसरी में टैबलेट, मोबाइल फोन, स्‍मार्ट फोन, हैंडहेल्‍ड प्रोडक्‍ट्स-एचएचपी) की ट्रेनिंग दी जाएगी। ये दोनों ट्रेनिंग तीन माह की है। आप अगर बारहवीं पास, आईटीआई, ग्रेज्‍युएट, इंजीनियरिंग में डिप्‍लोमा या डिग्री धारक हैं तो आप यह ट्रेनिंग ले सकते हैं। इसकी फीस 15 हजार रुपए है।

एसी, वाशिंग मशीन की ट्रेनिंग

आप अगर रूम एयरकंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, माइक्रोवेव, ओवन, आरएसी एंड होम एप्‍लाइन्‍सेस की ट्रेनिंग़ लेना चाहते हैं तो आप को भी 11 दिसंबर से पहले अप्‍लाई करना होगा। यह चार माह का कोर्स है। इसकी फीस 20 हजार रुपए है। यदि आप अप्‍लाई करना चाहते हैं तो आपका बारहवीं पास, आईटीआई, ग्रेज्‍युएट, इंजीनियरिंग में डिप्‍लोमा या डिग्री धारक में से कोई एक होना जरूरी है।

5000 रुपए में करें ये कोर्स

अगर आप कम पैसे में कोई ऐसा कोर्स करना चाहते हैं, जिसकी मार्केट में डिमांड भी हो तो आप केवल 5000 रुपए में आटो कैड या पीएलसी प्रोग्रामिंग का कोर्स भी कर सकते हैं। यह कोर्स 4 सप्‍ताह का है। इसके लिए आपके पास डिग्री, डिप्‍लोमा या आईटीआई सर्टिफिकेट होना जरूरी है।

कम्‍प्‍यूटर कोर्स भी कर सकते हैं आप

आप इस सेंटर में निलिट ओ लेवल कम्‍प्‍यूटर कोर्स भी कर सकते हैं। यह कोर्स एआईसीटीआई द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त है। यह एक साल का कोर्स है, जिसकी फीस 20 हजार रुपए है। आपका कम से कम 12वीं पास होना जरूरी है। अगर आपने दसवीं के बाद आईटीआई किया है तो आप यह कोर्स कर सकते हैं।

गोबर से बनाई गैस, अब भरकर बेचेंगे सिलेंडर

औरैया (हरेंद्र प्रताप सिंह)। नौकरी के लिए दर-दर भटकने के बाद स्वरोजगार की ओर रुख किया और सफलता हासिल की। अब दूसरे के लिए प्रेरणा भी बने हैं। पहले पशुपालन कर दूध का कारोबार किया। गोबर गैस प्लांट लगा कर घरेलू उपयोग के लिए ईंधन की व्यवस्था की। अब उसे छोटे सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी है।

यह कहानी है उप्र के औरैया जिर्लािस्थत कटिघरा ब्रह्मनान गांव के किसान कविंद्र सिंह की। कविंद्र को जब नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने परिवार के भरण पोषण के लिए शहर के लिए पलायन नहीं किया। पशुपालन कर पहले दुग्ध उत्पादन से आय बढ़ाई। अब पशुओं के गोबर से गैस बनाकर उसे सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी में जुटे हैं। इससे उनकी आय और बढ़ेगी। अभी वह जरूरतमंद लोगों को छोटे सिलेंडर में गैस भरकर मुफ्त में दे रहे हैं।

कविंद्र ने तीन वर्ष पूर्व नौ नवंबर 2014 को खेती में पैदा हुए अनाज को बेचकर जुटाए एक लाख रुपये से तीन पशु खरीदे। दूध बेचकर उन्होंने पशुओं की संख्या बढ़ा ली है। अब उनके पास आठ भैंसें व 10 गाय हैं। इनका दूध बेचकर वह प्रतिमाह 30 हजार की बचत करते हैं। गोबर का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने तीन टन का गोबर गैस प्लांट बनाया। इससे रोजाना करीब 30 किलोग्राम गोबर गैस मिलती है। इसका इस्तेमाल वह घर में खाना बनाने के लिए करते हैं।

जरूरतमंद लोगों को छोटे सिलेंडर में कंप्रेशर से गैस भरकर मुफ्त में देते हैं, लेकिन अब वह मुफ्त में गैस को नहीं बांटेंगे। उन्होंने गैस को सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी कर ली है। इसके लिए 10 टन का गोबर गैस प्लांट बनवाने की भी तैयारी है। इससे रोजाना करीब 200 किलोग्राम गैस का उत्पादन होगा। जिससे 14 बड़े एलपीजी सिलेंडर भरे जा सकेंगे। वह एक सिलेंडर सिर्फ 400 रुपये में भरेंगे। इसके लिए उन्होंने कंप्रेशर मशीन खरीद ली है।

25 किलोग्राम गैस से चार घंटे चलता है नलकूप

कविंद्र गोबर गैस से ही पंपसेट भी चलाते हैं। 25 किलोग्राम गैस से उनका दस हार्सपावर का इंजन चार घंटे चलता है। इससे वह अपने खेतों की सिंचाई कर लेते हैं। इंजन को चालू करते समय उन्हें थोड़ा डीजल खर्च करना पड़ता है।

कैसे भरते हैं सिलेंडर में गैस

गोबर गैस प्लांट से निकलने वाली गैस के पाइप को वह कंप्रेशन मशीन से जोड़ देते हैं। कंप्रेशर मशीन के दूसरे हिस्से से निकलने वाले पाइप को सिलेंडर से जोड़ देते हैं। इसके बाद मशीन को बिजली या बैटरी से चालू कर देते हैं। कुछ ही देर में छोटा गैस सिलेंडर भर जाता है।

अब नहीं डिश एंटीना की जरूरत

फतेहगढ़ साहिब, [प्रदीप शाही]। विज्ञान में नित होते आविष्कार इंसान के जीवन को सुखद बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक जमाना था जब छतों पर लगे टीवी एंटीना के घूम जाने मात्र से ही सिग्नल समाप्त हो जाता था। इसके बाद छतों पर से पाइप वाले एंटीना गायब हो गए।

इनके स्थान पर तश्तरीनुमा डीटीएच छतरी आ गई। अब जल्द ही ये तश्तरीनुमा डीटीएच छतरी भी छतों पर से उड़नछू हो जाएंगी। जो नया एंटीना आने वाला है, उसे छत की दरकार नहीं। न छत चाहिए, न लंबा तार।

सीधे सेट टॉप बॉक्स में कनेक्ट कर दीजिए और टेलीविजन का मजा लीजिए। दुनिया माइक्रो स्ट्रिप एंटीना की ओर बढ़ रही है। भारत में भी स्वदेशी माइक्रो स्ट्रिप एंटीना तैयार कर लिया गया है।

भारतीय वैज्ञानिक ने बनाया सस्ता-टिकाऊ स्वदेशी माइक्रो एंटीना

यह माइक्रो स्ट्रिप एंटीना पंजाब फतेहगढ़ साहिब स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर जसपाल सिंह ने तैयार किया है।

सेट अप बॉक्स से होगा कनेक्ट

दो से तीन सेंटीमीटर आकार के चिपनुमा माइक्रो स्ट्रिप एंटीना को कमरे के अंदर रखे सर्विस बॉक्स में लगाया जा सकेगा। यह बॉक्स फिलहाल घर के बाहर या छत पर लगे डिश एंटीना से तार के जरिये कनेक्ट होता है, जबकि दूसरी ओर टीवी सेट से। अब डिश एंटीना केस्थान पर इसमें माइक्रो स्ट्रिप एंटीना को कनेक्ट कर सब्सक्राइब्ड चैनलों को देखा जा सकेगा।

पंजाब फतेहगढ़ साहिब स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर जसपाल सिंह ने स्वदेशी माइक्रो स्ट्रिप एंटीना बनाने में सफलता हासिल की है। प्रोफेसर जसपाल सिंह ने बताया कि शोध कार्य को पूरा करने में पांच साल लग गए। इसे पेटेंट के लिए इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया ने स्वीकार कर लिया है।

लागत मात्र 50 रुपये

माइक्रो स्ट्रिप एंटीना से उपभोक्ता ही नहीं कंपनियों को भी लाभ होगा। इसके निर्माण में समय व कीमत दोनों में बचत होगी। इस एंटीना को बनाने में अधिकतम 50 रुपये तक का खर्च आएगा।

इसके लिए किसी लेबोरेट्री की आवश्यकता नहीं होगी। चिप को प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) पर ही बनाया जा सकेगा। इसका आकार दो सेंटीमीटर से लेकर तीन सेंटीमीटर तक रहेगा। साथ ही इससे सिग्नल भी बेहतर हो जाएगा।

नॉवेल से लेकर स्कूली किताबें भी वेबसाइट पर उपलब्ध

22-23 साल की उम्र में युवा अपने करियर के बारे में सोचना शुरू करते हैं कि वो क्या करें लेकिन इलाहाबाद की रहने वाली 23 साल की रितिका श्रीवास्तव ने कम उम्र में ही एक क्रिएटिव बिजनेस शुरू करके सबको ये साबित कर दिया कि उम्र प्रतिभा की मोहताज नहीं होती।

रितिका ने सेंकेड हैंड किताबें बेचने के लिए एक वेबसाइट http://www.bookthela.com की शुरूआत की जहां पुरानी किताबें सस्ते दामों पर आसानी से मिल जाती है। यह साइट किताबों को पसंद करने वालों के लिए काफी फायदे वाली है।

रीतिका बताती हैं, मुझे बचपन से ही पढ़ने का शौक था, “मैं घंटों किताबें पढ़ती थीं। हम जब हॉस्टल में थे तो हमारे साथ यही दिक्कतें आती थी कि टीवी होती नहीं थी, खाली समय में हम किताबें पढ़ते थे लेकिन किताबें भी बहुत मंहगी होती थीं जो सभी छात्रों की पहुंच से दूर थी।” रीतिका के पास खुद की एक लाइब्रेरी है जिसमें 1000 से ज्यादा किताबें हैं।

पापा ने की मदद

मैं ग्रेजुएशन लास्ट सेमेस्टर में थी और इंटर्नशिप करने के लिए कंपनी ढूंढ रही थी। तभी मेरे पिताजी जो खुद एक लेखक हैं उन्होंने मुझे सेकेंड हैंड बुक्स ऑनलाइन बेचने का आईडिया बताया जो कि मुझे बहुत पसंद आया। रीतिका आगे कहती हैं, मेरा शुरूआत से मन था कि मैं खुद का कोई काम शुरू करुं। इसपर मेरे पिता ने मुझे सलाह दी कि मैं अपने शौक को करियर में बदल सकती हूं और 2017 में मैंने नींव रखी बुकठेला डॉट कॉम की।

दोस्तों का भी मिला साथ

मेरे परिवार के साथ मेरे दोस्तों ने भी मेरा साथ दिया। मैंने जब अपना ये आइडिया बताया तो लोगों ने काफी सराहा और हर संभव मदद करने को भी ये कहा। इससे मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया।

नॉवेल से लेकर स्कूली किताबें भी उपलब्ध

इस वेबसाइट पर फ्रिक्शन, नॉनफ्रिक्शन किताबें ज्यादा हैं। इसके साथ ही कुछ एकडेमिक किताबें भी हैं, जो इस प्लेटफार्म पर आपको अपने पसंद की किताबें सस्ते दामों में तो मिल ही सकती हैं साथ ही जो किताबें आप पढ़ना चाहते हैं, उसे विशलिस्ट में भी डाल सकते हैं।

सक्सेस मंत्र

रीतिका ने हमें बताया कि मेरे हिसाब से एक सफल उद्यमी बनने के लिए हमारे अंदर काम के प्रति दृढ़ संकल्प और धीरज होना चाहिए। अपने काम या बिजनेस के लिए जुनून होना जरूरी है। इसके साथ ही आपके पास लोगों का समर्थन भी होना चाहिए जो आपके आइडिया को सराहे इससे आपका मनोबल बढ़ता है। आजकल क्रिएटिव लोगों की जरूरत है आप जितना नया सोचगें उतना आगे बढ़ेंगें।