रोज सुबह पीएं काले नमक वाला पानी, मिलते हैं ये बड़े फायदे

रोज़ सुबह सुबह काले नमक का सेवन सेहत के लिए आवश्यक होता है। काले नमक को ‘सोल वाटर’ भी कहा जाता है। काले नमक से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, उर्जा मे वृद्धी और अन्य तरह की बीमारियों को ठीक करने मे भी मददगार है।काले नमक मे 80% खनिज लवण होते

जो शरीर के लिए जरूरी होते है। काले नमक मे मेग्निशयम, विटामिन,आयरन, सल्फोइड,सोडियम क्लोराइड आदि गुण होते है। सलाद, चटनी, आचार, दही, लस्सी, पानी, उबले अंडे आदि मे इसका उपयोग किया जाता है।

लिवर रहेगा स्वस्थ

लिवर से संबंधित परेशानी से छुटकारा पाने के लिए नमक वाला पानी पीएं। रोजाना यह पानी पीने से लिवर के डैमज सैल्स दोबारा सही होने लगते हैं। इसके साथ ही नमक का पानी शरीर से टॉक्सिन दूर करता है।

पाचन क्रिया को करें दुरुस्त

यदि आपको पेट की समस्या अक्सर बनी रहती है या पेटदर्द से परेशान हैं तो काला नमक आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। काला नमक को पानी में मिलाकर पीने से मुंह में लार वाली ग्रंथी को सक्रिय करने में तो मदद करता ही है साथ ही अपच होने पर जल्द आराम पहुंचाता है।

मोटापे को करें कम

काला नमक स्वाद को बढ़ाने के अलावा मोटापा कम करने में भी सहायक होता है। काला नमक को एक कप या गिलास में पानी का घोल बनाएं, फिर एक चम्मच नींबू के रस को मिलाएं। प्यास लगने पर दिन में कई बार इसका घोल पिएं,

ऐसा करने से आपके पेट में वसा एकत्रित नहीं होने देगा और न सिर्फ मोटापा रोकता है बल्कि वजन भी कम करता है। इतना ही नहीं, बल्कि पाचन को दुरुस्त कर शरीर की कोशिकाओं को पोषक तत्व पहुंचाता है। यदि आप साधारण नमक यूज करते है तो साथ ही इस नमक का भी यूज करना चाहिए।

जोड़ों का दर्द

यदि आपके शरीर की मासपेशियों में अक्सर दर्द या फिर जोड़ों में दर्द बना रहता है तो काला नमक आपको जल्द आराम दिला सकता है। जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए कपड़े में एक कप काला नमक डाल कर उसे बांध कर पोटली बनानी है। इसके बाद उसे किसी पैन में गरम करें और उससे जोड़ों की सिकाई करें। इसे दिन में 2 से 3 बार गरम करके सिकाई करना चाहिए।

दिल को रखें सेहतमंद

काला नमक खराब कोलेस्ट्रोल को कम करता है। कोलेस्ट्रोल कम होने से दिल का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इसमें सामान्य नमक से कम सोडियम होता है जो दिल को सेहतमंद बनाता है।

नींद

काले नमक के उपयोग से नींद अच्छी आती है। यह कार्टिसोल तथा एड्रेनलिन हार्मोन का स्तर कम करता है जिसके कारण नींद आने में मदद मिलती है। ये हार्मोन शरीर से तनाव की स्थिति में स्रावित होते हैं जिनकी अधिकता शरीर पर बुरा असर डालती है।

भारत में हर 20 सेकंड में 1 व्यक्ति हो रहा हैं ब्रेन स्ट्रोक का शिकार,जानें बचाव का तरीका

हर तीन मिनट में 20 सेकंड के अंतराल पर एक भारतीय ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित होता है और बदलती जीवनशैली के कारण इस संख्या का बढ़ना खतरे की घंटी बजा रहा है। इस दर के मुताबिक करीब 15.4 लाख भारतीय प्रत्येक वर्ष स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं और इन सबमें सबसे खराब बात ये है कि स्ट्रोक के 90 फीसदी मरीज समय पर अस्पताल तक पहुंच नहीं पाते।

स्ट्रोक का जोखिम 55 साल की उम्र के बाद पांच में से एक महिला को होता है जबकि छह में से एक पुरुष 55 साल की उम्र के बाद इस बीमारी से पीड़ित होता है।कांग्रेस ऑफ सोसाइटी ऑफ न्यूरो वैस्कुलर इंटरवेंशन मुंबई 2019 के चल रहे तीन दिवसीय सम्मेलन में इस बात का खुलासा हुआ है।

सम्मेलन के प्रमुख वक्ताओं ने कहा कि भारत में संदेश स्पष्ट लेकिन खतरे की घंटी बजा रहा है। ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है और यह कहना गलत नहीं होगा कि ये बदलती जीवनशैली से जुड़ा हुआ है।

बॉलीवुड के दो बड़े कलाकार जैकी श्रॉफ और संजय दत्त ‘स्ट्रोक इज बीटेबल’ की जागरूकता फैलाने व संदेश देने के लिए भारत के न्यूरोलॉजिकल जगत के समर्थन में उतरें।

ब्रीच कैंडी अस्पताल के सीनियर कंस्लटेंट न्यूरोसर्जन व इंटरवेंशनल न्यूरोसर्जन डॉ. अनिल पी. करापुरकर ने कहा कि स्वस्थ दिल की तरह स्वस्थ मस्तिष्क भी बेहद जरूरी है, जिसके लिए उपाय किए जाने की जरूरत है।

डॉ. अनिल ने चेतावनी दी, ”दिल के दौरे के मामले में या तो आपकी मौत हो जाती है या आप रिकवर कर सकते हैं। जबकि ब्रेन स्ट्रोक के मामले में या तो आपकी मौत हो सकती है, आप ठीक हो सकते हैं और सामान्य स्थिति में लौट सकते हैं, या आप जीवन भर के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर हो जाते हैं।”

उन्होंने बताया कि दिल के दौरे के मामले में आधा दर्जन से ज्यादा लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे सीने में दर्द,सांस लेने में दिक्कत, बाएं कंधे में दर्द आदि। जबकि स्ट्रोक के मामले में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं क्योंकि यह जिस तरफ का मस्तिष्क प्रभावित है उस हिस्से पर निर्भर करता है।

उन्होंने सलाह देते हुए कहा, ”स्ट्रोक हमारे शरीर के किसी हिस्से की गतिविधियां अचानक बंद होने के बाद पड़ता है। यह किसी भी तरीके से हो सकता है। स्ट्रोक होने पर आसान शब्दों में कहें तो आपको हर मामले में संतुलन, आंखों, चेहरे, बाहें, उच्चारण और समय को लेकर तेज होना पड़ेगा।”

उन्होंने कहा, ”अगर किसी व्यक्ति को संतुलन में समस्या का सामना करना, आवाज में कर्कशता, देखने में अचानक दिक्कत, वस्तु का अचानक हाथ से गिरना जैसे संकेत दिखाई देते हैं तो सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि वह बिना समय बर्बाद किए अस्पताल जाए।”

रात को नींद नहीं आती तो इंटरनेट पर देखें ये 6 चीजें, झट से आने लगेगी नींद

अनिद्रा एक ऐसा विकार है, जिसमें या तो आपको नींद नहीं आती या फिर आप ज्यादा देर तक सोने में सक्षम नहीं हैं। अनिद्रा किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन यह बुजुर्गों में आम है। हम आपको ऐसे कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं, जिसके जरिए आपको आसानी से नींद आ जाएगी।

खाने को सजाते हुए देखना

खाने तैयार किए जा रहे वीडियो को देखकर किसको भूख नहीं लग सकती हालांकि खाने को बनते हुए देखने में आराम नहीं मिल सकता। लेकिन खाने को सजाने के लिए पनीर के छिड़काव, चॉकलेट पिघलाने और डेसर्ट पर आइसिंग शुगर को देख वास्तव में आराम मिलता है। केक को सजाने के लिए तैयार किए मिश्रण के वीडियो विशेष रूप से आराम देते हैं।

छोटे मेकअप वीडियो देखिए

हम केवल तभी सो सकते हैं जब हम तनाव मुक्त होकर सोने की कोशिश कर रहे हों। इंटरनेट पर अरबों क्विक ब्यूटी वीडियो मौजूद हैं और यकीन मानिए इन शांत और खूबसूरत वीडियो को देखने से आपको सोने में मदद मिल सकती है।

इतिहास के पाठों को याद कीजिए

क्या आपको याद है कि आप कक्षाओं में बैठकर इतिहास के अध्याय या निबंधों को पढ़ते-पढ़ते सो जाया करते थे। कुछ इस तरह के ही पाठ अपने फोन पर खोलें और इसे पढ़ना शुरू करें। इसके साथ आने वाली नींद का आनंद लें।

पानी गिरने की आवाज सुनें

सही आवाज आपको शांत महसूस कराएगी और वास्तव में आपको नींद आएगी। रात को सोने से पहले इंटरनेट पर कुछ इस तरह के शांत स्वभाव वाला संगीत सुनिए। या फिर धीमी आवाज पर संगीत सुनते हुए अपनी आंखों को बंद कीजिए और फिर देखिए कैसे आपको जल्दी नींद आती है।

पॉडकास्ट और कहानियां सुनें

अगर आप हर दिन किसी विशेष पॉडकास्ट को सुनते हैं तो सोने से पहले रात में इसे सुनना शुरू करें। आप ऑडियो कहानियां भी सुन सकते हैं, जो आपके दिमाग पर शांत प्रभाव डाल सकती हैं।

बचपन के दिनों को याद कीजिए

आप लोरियां सुनने का प्रयास कर सकते हैं। लोरियां शांत, कोमल और अपने सामान्य संगीत में बिना बदलाव किए कोई शोर नहीं करती हैं, जो नहीं सो पाने वाले लोगों के लिए बिल्कुल परफेक्ट हो सकती हैं।

कभी भी न खाएं बिना घी की रोटी, शरीर को होते हैं ये बड़े नुक्सान

दोस्तों, घी को मना करना सीधा सेहत को मना करना है. पहले के जमाने में लोग रोजमर्रा के खानों में घी का इस्तेमाल करते थे. घी का मतलब देसी गाय का शुद्द देशी घी. घी को अच्छा माना जाता था. और कोलेस्ट्रोल और हार्ट अटैक जैसी बीमारियाँ कभी सुनने में भी नही आती थी.

लेकिन फिर शुरू हुई घी की गलत पब्लिसिटी, बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर अपने बेकार और यूजलेस प्रोडक्ट को सेल करने के लिए लोगों में घी के प्रति नेगेटिव पब्लिसिटी शुरू की. जबकि रिफाइंड और दुसरे वनस्पति तेल और घी इन सब रोगों का कारण है.

घी न खाने में प्राउड फील करने लगे कि वो हेल्थ कांसियंस है. क्योकि जब आप एक ही चीज झूठ को बार बार टीवी पर दिखाओगे तो वो लोगो को सच लगने लगता है. जबकि घी खाना नुकसानदायक नही बहुत ही फायदेमंद है. घी हजारों गुणों से भरपूर है, खासकर गाय का घी तो खुद में ही अमृत है.

घी हमारे शरीर में कोलेस्ट्रोल को बढाता नही बल्कि कम करता है. घी मोटापे को बढाता नही बल्कि शरीर के ख़राब फैट को कम करता है. घी एंटीवायरल है और शरीर में होने वाले किसी भी इन्फेक्शन को आने से रोकता है. घी का नियमित सेवन ब्रेन टोनिक का काम करता है. खासकर बढ़ते बच्चों की फिजिकल और मेंटली ग्रोथ के लिए ये बहुत ही जरुरी है.

घी हमारे इम्यून सिस्टम को बढाता है. और बिमारियों से लड़ने में आपकी मदद करता है. घी हमारे डाइजेस्टीव सिस्टम को भी ठीक रखता है जो आजकल सबसे बड़ी प्रॉब्लम है. आज हर दूसरा व्यक्ति कब्ज का मरीज है. दिन में कई कई बार शोचालय जाता है

अब हम बात करते है कि घी को कितना और कैसे खाए

एक नार्मल इन्सान के लिए 4 चम्मच घी काफी है. घी को पका कर या बिना पकाए दोनों तरीके से खा सकते है. चाहे तो इसमें खाना पका लें या फिर बाद में खाने के ऊपर डालकर खा लें. दोनों ही तरीके से घी बहुत ही फायदेमंद है. और सबसे जरुरी बात अगर आप सबसे ग्लोइंग, शाइनिंग और यंग दिखना चाहते हैं तो घी जरुर खाएं क्योंकि घी एंटीओक्सिडेंट जोकि आपकी स्किन को हमेशा चमकदार और सॉफ्ट रखता है

अच्छी नींद पाने के लिए अपनाएं ये 10 घरेलू नुस्खे

अच्छे खान-पान के साथ ही ये भी बेहद जरूरी है कि आप अच्छी नींद लें. नींद नहीं पूरी होने पर एक ओर जहां इंसान के स्वभाव पर असर पड़ता है वहीं उसकी सेहत पर भी बुरा असर होता है.ऐसे में स्वस्थ जीवन जीने के लिए जरूरी है कि एक इंसान अच्छे पोषण के साथ ही अच्छी नींद भी ले. नींद केवल शारीरिक नहीं बल्क‍ि मानसिक जरूरत भी है.

नींद नहीं आना , अनिद्रा के कई कारण हो सकते हैं। सुबह बिस्तर से उठने के बाद यदि फ्रेश व तरोताजा महसूस नहीं करते हो। दिन भर थकान , उनींदापन और चिड़चिड़ाहट रहती हो। रात को सोने के लिए लेटने पर नींद नहीं आती हो।

अच्छी नींद आना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि इससे थकान दूर होकर शरीर ऊर्जा , शक्ति और ताकत से भर जाता है। आप तरोताजा होकर नए दिन की शुरुआत जोश के साथ कर पाते है। इससे याददाश्त और एकाग्रता बढ़ती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।

नींद नहीं आने की वजह / अनिद्रा के कारण :-

अनिद्रा की समस्या ज्यादातर मानसिक तनाव यानि टेंशन , खाने पीने की गलत आदतें व शारीरिक गतिविधि कम होने के कारण होती है। किसी रोग या बीमारी के कारण नींद बहुत प्रभावित होती है।

शारीरिक गतिविधि के कम होने से भी नींद नहीं आती क्योंकि शरीर थकता नहीं है तो उसे आराम की आवश्यकता महसूस नहीं होती ।ये भी नींद न आने का कारण बन सकता है।

अच्छी नींद पाने के लिए 13 घरेलू नुस्खे /अनिंद्रा दूर करने के उपाय

  • अच्छी नींद के लिए रात को सोने से पहले 20 ग्राम चमेली के फूलों की 600 मि.ली. पानी में उबालें और फिर उसको पानी में मिलाकर नहाएं, इससे अच्छी नींद आएगी और मस्तिष्क फ्रेश रहता है।
  • सोने से पहले सेब का मुरब्बा खाए यह गहरी नींद लाने में बहुत सहायक होता है ।
  • एक सेब के टुकडो को दो गिलास पानी में उबाले फिर ठंडा करके सेब को मसल कर पानी को छान ले फिर अपने स्वाद के अनुसार नमक मिला कर पियें ।
  • अनिंद्रा के रोगियों को सोते समय नींबू (Lemon) , शहद (Honey) को एक गिलास पानी में मिलाकर पिए अच्छी नींद आएगी।
  • रात को सिर पर लौकी के तेल की मालिश करने से अच्छी नींद आती है |यह नींद के लिए अच्छा घरेलू नुस्खा है ।

  • अनिंद्रा दूर करने के उपाय –अनिंद्रा के रोगियों को दाना मेथी का एक इंच मोटा तकिया बनाकर अपने तकिये पर यह तकिया रखे और इस पर सिर रखकर सोने से गहरी नींद आयेगी।
  • 30 ग्राम ताजा अनार के पत्ते धोकर आधा लिटर पानी में उबाल कर जब इसमें आधा पानी शेष बचे तब इतना ही दूध मिलाकर पीने से मानसिक तथा शारीरिक थकान मिटती है और नींद गहरी आती है।
  • अनिंद्रा के रोगियों को सोते समय गर्म दूध में केसर की तो तीन पत्तीयां डालकर पीना चाहिए यह अच्छी नींद पाने के लिए बेहतरीन उपाय है।
  • दही में पीसी हुई काली मिर्च सौंफ तथा चीनी मिलाकर पियें, गहरी नींद के लिए दही का सेवन बहुत लाभकारी होता है।
  • सोने से पहले गर्म दूध पीने से भी अच्छी नींद आती है, अगर दूध में थोड़ा-सा शहद मिला लिया जाए तो और भी अच्छा है। शाम के समय चाय, कॉफी और अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • इन सब के अलावा चेरी , केला , बादाम हर्बल टी आदि का सेवन भी गहरी नींद लेन में सहायक होते है।

कभी भूलकर भी ना करें ये 10 गलतियां, जवानी में ही दिखने लगेंगे बूढ़े

सुबह से शाम तक हम कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जिनका हमारी हेल्थ पर बुरा असर पड़ने लगता है। अगर इन पर ध्यान देकर सॉल्यूशन निकाला जाए तो हम कम उम्र में बूढ़ा दिखने की प्रॉब्लम से बच सकते हैं। मैक्स हेल्थ केयर के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अपूर्व जैन बता रहे हैं जवानी में बूढ़ा बनाने वाली 10 गलतियों के बारे में।

आगे जानिए समय से पहले बूढ़ा बनाने वाली गलतियों के बारे में …

रिश्वतों में तनाव – लगातार रिश्तो में तनाव रहने से बॉडी में कुछ ऐसे हार्मोन बनने लगते हैं जो बॉडी पर बुरा असर डालते हैं इससे चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां आने लगती हैं.

नाश्ता ना करना – सुबह का नाश्ता ना करने से दिन भर थकान और कमजोरी की प्रॉब्लम रहती है इसका स्क्रीन पर भी बुरा असर पड़ता है साथ ही हम समय से पहले गुड नजर आने लगते हैं

लगातार बैठे रहना – लगातार कई घंटों तक एक जगह बैठ कर काम करने से खाना ठीक तरीके से डाइजेस्ट नहीं हो पाता है ऐसे में समय से पहले मोटापा बढ़ने लगता है जिसका हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है

पानी कम पीना – दिनभर में 7 या 8 गिलास से कम पानी पीने से बॉडी हाईड्रेट नहीं हो पाती है. ऐसे में स्किन ड्राय होने लगती है. जिससे झुरियाँ होने लगती है

नशे की लत – शराब, गांजा, सिगरेट और ड्रग्स का नशा करने से बॉडी में कोर्टीसोल नमक हारमोंस बनने लगता है. यह स्ट्रेस बढ़ता है और समय से पहले बुढा बनाता है

एक साथ कई काम करना – एक साथ कई सारे काम करने से एनर्जी तो लगती है साथ ही स्ट्रेस भी बढ़ता है. इससे ब्रेन और हार्ट पर बुरा असर पड़ता है\

पूरी नींद न लेना – कई रिसर्च में यह साबित हुआ है कि अगर हम रात में 7 से 8 घंटे की नींद नहीं लेते है तो इससे स्ट्रेस, हार्ट डिजीज और हाई बीपी की प्रॉब्लम होती है. यह गलती समय से पहले बुढा बना सकती है

अन्हेल्दी डाइट लेना – डाइट में दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां जैसी चीजें न लेने से बॉडी को जरुरी न्यूट्रीशन नहीं मिल पाते है. इससे व्यक्ति उम्र से पहले ही बुढा होने लगता है

एक्सरसाइज न करना – रोज सुबह एक्सरसाइज न करने से बॉडी फिट नही रहती है. इससे मोटापा, इनडाइजेशन, एसिडिटी और कब्ज की प्रॉब्लम होने लगती है. ऐसे में समय से पहले बूढ़े होने लगते है

रिफाइंड तेल का प्रयोग करना – खाने में कभी भी रिफाइंड तेल का प्रयोग ना करे, इससे घुटने में दर्द और मर्दों में नपुंसकता आती है, सरसों का, तिल का, नारियल का, मूंगफली आदि का तेल ही इस्तेमाल करे

लकवा (Paralysis) का अटैक आते ही करें ये उपाय, बच जायेंगे लकवे से

लकवा (Paralysis) एक प्रकार से गंभीर बीमारी है जिससे मरीज के किसी अंग शून्य हो जाता है। लकवा को अंग्रेजी में पैरालिसिस भी कहते हैं, जो अधिकतर 50 वर्ष से अधिक उम्र के इंसान को होता है। ऐसा नहीं है कि यह केवल 50 वर्ष की उम्र में ही हो बल्कि अगर कुछ सावधानी न बरती जाये तो लकवा किसी भी उम्र के मनुष्य को हो सकती है।

लकवा (पेरालाइसिस) होने का 3 प्रमुख कारण :-

किसी अंग का दबना :-

शरीर के किसी अंग का लगातार अधिक समय तक दबे रहने से भी लकवा हो सकता है। दरअसल किसी अंग के लगातार दबने से उस हिस्से पर रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता, जिसकी वजह से हमारा दिमाग उस हिस्से पर रक्तसंचालन को रोक देता है। रक्तसंचालन रुकने के बाद उस हिस्से पर तंत्रिका तंत्र भी शून्य हो जाता है और हमें लकवाग्रस्त जगह शून्य होने की वजह से एकदम भारीपन लगता है।

अम्लीय पदार्थ का सेवन :-

अम्लीय पदार्थ के सेवन से रक्त पर अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी अशुद्धियाँ धमनियों रुक जाती है और उनमें रक्त प्रवाह बाधित होता है और लकवा हो जाता है।

ज्यादा तनाव में रहने से :-

कभी-कभी ज्यादा तनाव में रहने से मस्तिष्क में खून जम जाता है, जिसके कारण पैरालिसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए ज्यादा चिंता या तनाव में नहीं रहना चाहिए।

लकवा (पेरालाइसिस) होने पर तुरंत करें ये उपाय :-

  • लकवा होने पर मरीज को तुरंत एक चम्मच शहद में 2 लहसुन मिलकर खिलाये. इससे लकवा से छुटकारा मिल सकता है।
  • कलौंजी के तेल से लकवे वाली जगह पर मालिश करें।

लकवा (पेरालाइसिस) की पहचान :-

जैसे किसी का मुह टेढ़ा हो जाना, आँख का टेढ़ा हो जाना, हाथ या पैर का टेढ़ा हो जाना, या शरीर किसी एक साइड से बिलकुल काम करना बंद कर दे, ये सामान्यतया पक्षाघात की पहचान है।

लकवा (पेरालाइसिस) का एकदम प्रमाणिक और राम-बाण इलाज़ :-

अगर शरीर का कोई अंग या शरीर दायीं तरफ से लकवाग्रस्त है तो उसके लिए व्रहतवातचिंतामणि रस (वैदनाथ फार्मेसी) की ले ले। उसमे छोटी-छोटी गोली (बाजरे के दाने से थोड़ी सी बड़ी) मिलेंगी। उसमे से एक गोली सुबह ओर एक गोली साँय को शुद्ध शहद से लेवें।

अगर कोई बायीं तरफ से लकवाग्रस्त है उसको वीर-योगेन्द्र रस (वैदनाथ फार्मेसी) की सुबह साँय एक एक गोली शहद के साथ लेनी है। अब गोली को शहद से कैसे ले..? उसके लिए गोली को एक चम्मच मे रखकर दूसरे चम्मच से पीस ले, उसके बाद उसमे शहद मिलकर चाट लें। ये दवा निरंतर लेते रहना है, जब तक पीड़ित स्वस्थ न हो जाए।

पीड़ित व्यक्ति को मिस्सी रोटी (चने का आटा) और शुद्ध घी (मक्खन नहीं) का प्रयोग प्रचुर मात्र मे करना है। शहद का प्रयोग भी ज्यादा से ज्यादा अच्छा रहेगा। लाल मिर्च, गुड़-शक्कर, कोई भी अचार, दही, छाछ, कोई भी सिरका, उड़द की दाल पूर्णतया वर्जित है। फल मे सिर्फ चीकू ओर पपीता ही लेना है, अन्य सभी फल वर्जित हैं।

शुरुआती दिनों मे किसी भी मालिस से परहेज रखें। तब तक कोई मालिस न करें जब तक पीड़ित कम से कम 60% तक स्वस्थ न हो जाए। ये दवा लाखों पीड़ित व्यक्तियों के लिए जीवनदायिनी रही है। जो आज स्वस्थ जीवन जी रहे है।

कौन से महीने में क्या खाएं और क्या नहीं, आयुर्वेद ने भोजन के लिए बनाये हैं ये नियम

मौसम के अनुकूल अगर आप भोजन करते है। या फिर खाना-पीना खाते है तो अक्सर आप बड़े-बुजुर्गों के मुख ये शब्द जरूर सुने होंगे। चौते गुड़, वैशाखे तेल, जेठ के पंथ, अषाढ़े बेल। सावन साग, भादो मही, कुवांर करेला, कार्तिक दही। अगहन जीरा, पूसै धना, माघै मिश्री, फाल्गुन चना।

हिन्दू धर्मशास्त्र के जानकार आज भी कहते है कि आयुर्वेद में भोजन के संबंध में बहुत कुछ लिखा है। जैसे किस सप्ताह में क्या खाना है क्या नहीं। किस तिथि को क्या खाना चाहिए अथवा क्या नहीं। किस महीने में क्या भोजन सही है और क्या नहीं। दरअसल, इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। प्रत्येक सप्ताह, तिथि या महीने में मौसम में बदलाव होता है। इस बदलाव को समझकर ही खाना जरूरी है।

ऐसे समझे किस माह में क्या न खाएं

चैत्र माह: चैत्र माह में गुड़ खाना मना है। चना खा सकते हैं।
वैशाख: तेल व तली-भुनी चीजों से परहेज करना चाहिए। बेल खा सकते हैं।
ज्येष्ठ: इस माह भी बेल खाना मना है। इन महीनों में गर्मीं का प्रकोप रहता है अत: ज्यादा घूमना-फिरना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अधिक से अधिक शयन करना चाहिए।

आषाढ़: आषाढ़ में पका बेल न खाना मना है। इस माह में हरी सब्जियों के सेवन से भी बचें। लेकिन इस माह में खूब खेल खेलना चाहिए। कसरत करना चाहिए।
श्रावण: सावन माह में साग खाना मना है। साग अर्थात हरी पत्तेदार सब्जियां और दूध व दूध से बनी चीजों को भी खाने से मना किया गया है। इस माह में हर्रे खाना चाहिए जिसे हरिद्रा या हरडा कहते हैं।
भाद्रपद: भादो माह में दही खाना मना है। इन दो महीनों में छाछ, दही और इससे बनी चीजें नहीं खाना चाहिए। भादो में तिल का उपयोग करना चाहिए।

आश्विन: क्वार माह में करेला खाना मना है। इस माह में नित्य गुड़ खाना चाहिए।
कार्तिक: कार्तिक माह में बैंगन, दही और जीरा बिल्कुल भी नहीं खाना मना है। इस माह में मूली खाना चाहिए।
मार्गशीर्ष: अगहन में भोजन में जीरे का उपयोग नहीं करना चाहिए। तेल का उपयोग कर सकते हैं।

पौष: पूस मास में दूध पी सकते हैं लेकिन धनिया नहीं खाना चाहिए क्योंकि धनिए की प्रवृति ठंडी मानी गई है और सामान्यत: इस मौसम में बहुत ठंड होती है। इस मौसम में दूध पीना चाहिए।
माघ: माघ माह में मूली और धनिया खाना मना है। मिश्री नहीं खाना चाहिए। इस माह में घी-खिचड़ी खाना चाहिए।
फाल्गुन: फागुन माह में सुबह जल्दी उठना चाहिए। इस माह में में चना खाना मना।

यूं ही नहीं 100 साल से अधिक उम्र तक जीते जापान के लोग, ये हैं उनकी लम्बी उम्र के राज़

हाल ही में जापान की केन तनाका ने 116 साल की उम्र में कैंसर को मात देकर दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला बनीं और उन्हें गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया। इससे पहले भी यह रिकॉर्ड जापान की ही चियो मियाको के नाम पर था, लेकिन 117 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया।

जापान एक ऐसा देश है जहां लोग काफी लंबे समय तक जीते हैं और इनका हेल्थ भी काफी अच्छा होता है। जहां दूसरे देशों में लोग 40 साल तक आते-आते कई बीमारियों से घिर जाते हैं वहीं जापानी बीमार भी बहुत कम पड़ते हैं। अब सवाल यह आता है कि आखिर इस लंबी उम्र का राज क्या है? किस तरह से ये अपनी जिंदगी को जीते हैं? क्या खाते हैं? आइए जानते हैं।

1. जापानी चाय का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं। हालांकि यह चाय दूध या चीनी से नहीं बनती है बल्कि यह एक हर्बल टी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अधिक होने के चलते ये शरीर में रोग प्रतिरोधक की क्षमता को बढ़ाते हैं। एक विशेष तरह की पत्तियों को पीसकर इस हर्बल टी को बनाया जाता है जिसे ‘माका’ कहते हैं।

2. जापान में लोगों का सोशल लाइफ काफी अच्छा होता है। एक साथ मिलकर सभी खूब गप्पे लड़ाते हैं, हंसी-मजाक करते हैं और इस तरह से तनाव को दूर रखने में ही ये अपनी भलाई समझते हैं।

3. जापानियों को गंदगी बिल्कुल पसंद नहीं। गर्मियों के मौसम में यहां के लोग दिन में दो बार नहाते हैं।

4. जापान के लोग फिटनेस पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि इनका अधिकतर समय जिम में ही गुजरता है।

5. यहां के लोग बैठकर काम करने की अपेक्षा खड़े रहकर काम करना ज्यादा पसंद करते हैं। इनकी बॉडी हमेशा मूव करती रहती है। घर से स्टेशन या बस स्टॉप तक ये पैदल ही जाते हैं। ट्रेन में भी सीट के लिए मारामारी करने के बजाय ये आराम से खड़े रहकर अपनी यात्रा करते हैं।

6. रेडियो टेसो जापान की मॉर्निंग एक्सरसाइज है। जापान में सुबह के वक्त रेडियो पर इसकी धुन को टेलीकास्ट किया जाता है और वॉयस ओवर के अनुसार लोग वर्कआउट करते हैं।

7. जापानियों का खाना भी बिल्कुल अलग होता है जिसे यहां के लोग बोरिंग समझ सकते हैं। जबकि यही खाना उनके स्वस्थ रहने का राज है।

8. जापानी ज्यादातर उबला और भाप में पकाया हुआ खाना ही खाते हैं। डीप फ्राइड फूड इन्हें उतना पसंद नहीं है।

9. तेल और मसालों से ये कोसों दूर रहते हैं और ताजी हरी पत्तेदार और लोकल फूड को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। ये लोग खाना भी छोटी प्लेट य बाउल में खाते हैं और चम्मच की जगह ये चॉपस्टिक का इस्तेमाल करते हैं।

10. छोटी मछलियों को यहां लोग काफी अधिक मात्रा में खाते हैं। इन्हें ताजा खाना ही पसंद हैं और बासी भोजन को ये छूकर देखते तक नहीं हैं।

बिना बिजली के चलती है ये मच्छर भगाने वाली मशीन, 90 दिन तक मच्छर आपसे रहेंगे दूर

गर्मी के मौसम में मच्छर काफी संख्या में पैदा हो जाते हैं। इनसे होने वाली बीमारियों में डेंगू और चिकनगुनिया जैसे रोग हर साल हज़ारों लोग की मौत का कारण बनते हैं। वैसे तो मच्छरों से बचने के काफी तरीके है और मार्किट में भी कई तरह प्रोडक्ट आसानी से उपलब्ध हैं, जो मच्छरों को मारने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं।

लेकिन,ऐसे में यदि आप भी मच्छरों से परेशान है तब आपके लिए Xiaomi Mijia मॉस्किटो रिप्लेंट एक ऑप्शन बन सकता है। इसके अंदर मच्छर भगाने वाली टैबलेट दी है। इस टैबलेट में कई तरह के कैमिकल होते हैं, जो मशीन के अंदर लगे फैन से हवा में फैल जाते हैं।

गैजेट के अंदर इस टैबलेट को इन्स्टॉल किया जाता है। वहीं, बैक साइड में सेल लगाए जाते हैं। मशीन को ऑन-ऑफ करने के लिए स्विच होता है। इसी स्विच को 2 बार दबाने पर 10 घंटे का टाइमर लग जाता है। मॉस्किटो टैबलेट की लाइफ 90 दिन होती है। वहीं इस गैजेट की ऑनलाइन कीमत 1256 रुपए है।

वीडियो में देखें ये कैसे काम करता है.