ये लक्षण बताते है की आपके शरीर में है खून की कमी, ना करें नजरंदाज

अगर किसी व्‍यक्ति के शरीर में आयरन की कमी हो जाए, तो इससे उसे कई परेशानियां हो सकती हैं। दिन भर थकान और किसी काम में मन न लगना भी कहीं न कहीं इस बात का इशारा हो सकता है कि व्‍यक्ति के शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में आयरन नहीं है। अगर यह रोग अधिक गम्‍भीर न हो, तो इसके लक्षण नजर भी नहीं आते। आयरन डेफिशिएंसी अनीमिया के कई लक्षण सभी प्रकार के अनीमिया में नजर आते हैं-

ऐसे पहचाने शरीर में खून की कमी को :-

बालो का झड़ना :-

जब कभी खून की कमी शरीर में होती हैं, तो आपके बालों पर इसका असर साफ दिखने लगता हैं और आपके बाल गिरने लगते हैं ।

सांसे फूलना :-

जरा सी दूर चलने पर कभी आपकी साँसे फुल जाती हैं , थोडा़ सा काम करने पर ही आप थक जाते हैं , तो ये लक्षण हैं। आपके शरीर में खून की कमी होने के जो आपके लिए परेशानी खड़ा कर देते हैं ।

सिरदर्द :-

काम के दवाब और सर्दी जुखाम में तो सभी को सर दर्द हो जाता हैं , लेकिन सर्दी झुकाम या इन्फेक्शन ना होने के बजाये आपको लगातार सिरदर्द जैसे समस्या हो रही हैं, तो पहचान लीजिये आपको भी खून की कमी होने लगी हैं ।

पीरियड्स में अधिक दर्द होना :-

अगर आपको पीरियड्स में अधिक दर्द होता हैं , और कभी कभी इनके बीच गैप भी ज्यादा हो जाता हैं , जिससे आपको चक्कर आना , सिरदर्द और घबराहट भी होने लगती है ,तो ये वजह है आपके शरीर में खून की कमी होने की ।

छाती में जलन :-

अक्सर ऐसा पाया गया हैं की जिन लोगों को सीने में जलन काफी समय तक रहती हैं, उनको खून की कमी के कारण ये समस्या होने लगती हैं ।

बच्‍चों के लिए अधिक खतरा :-

बच्‍चों में आयरन डेफिशियंसी अधिक खतरनाक होती है। जिन बच्‍चों को यह परेशानी होती है, उन्‍हें पॉयजनिंग और संक्रमण की भी परेशानी हो सकती है। नवजात शिशुओं और बढ़ते बच्चों में अनीमिया के लक्षणों में भूख में कमी, धीमा विकास और व्य्वहारगत समस्यालयें हो सकती हैं। ऐसे में माता-पिता को चाहिये कि अपने बच्‍चों के आहार का पूरा ध्‍यान रखें।

आयरन की कमी को दूर करने के उपाय :-

  • हरी सब्जियो में पालक, मेथी, गोभी, पत्तागोभी, शलजम, शंकरकंद, गुड़, अंडा, चुकंदर, सेम, का सेवन करे।
  • मसूर, टोफू, छिलका युक्त आलू, ब्रोकली, साबुत अनाज, ब्रेड, जौ और आयरन फोर्टीफाइड अनाज आदि के सेवन से भी आयरन की कमी को पूरा किया जा सकता है।
  • नियमित रूप से बादाम, खजूर, किशमिश, अंगूर, अनार, अंजीर, खुबानी खाने से आयरन की कमी पूरी होती है।

शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए डाइट में शामिल करें ये 4 आहार,

हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करने के सबसे अच्छे तरीकों में अपने डाइट में सुधार करना सबसे महत्वपूर्ण है। हालांकि ऐसा कोई जादुई कोलेस्ट्रॉल डाइट नहीं है लेकिन कुछ ऐसे चुनिंदा फूड हैं,

जो एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल के स्तर के कम और एचडीएल (अच्छे) कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाकर ह्रदय संबंधी रोगों के जोखिम को कम करतें है। इन्हीं में से कुछ डाइट हम आपके साथ साझा कर रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप भी अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर को संतुलित रख सकते हैं।

बादाम

पर्ड्यू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि 23 सप्ताह तक दिन में 2 औंस (किसी चीज का बहुत छोटा सा हिस्सा ) बादाम खाने वाले व्यक्तियों के वजन में कोई इजाफा नहीं हुआ और तो और उनके लिपिड मेटाबोलिज्म व कोलेस्ट्रॉल के स्तर जैसे हृदय संबंधी कारकों में भी सुधार हुआ।

अंडा भुर्जी

जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन के एक अध्ययन में पाया गया कि अंडे खाने से अच्छा (एचडीएल) कॉलेस्ट्रॉल बढ़ता है न कि खराब (एलडीएल) कॉलेस्ट्रॉल इसलिए अंडे वास्तव में आपकी धमनियों को साफ रखते हैं। जो लोग, जरदी सहित अंडे खाते हैं उनका ऊर्जा स्तर अधिक पाया जाता है और वह 65 फीसदी तक अपना वजन कम कर सकते हैं। इसके अलावा उनके कॉलेस्ट्रॉल स्तर पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

डार्क चॉक्लेट

शोध से पता चला है कि डार्क चॉकलेट सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। यह हृदय स्वास्थ्य में सुधार, उच्च रक्तचाप को कम करने, एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल को कम करने, रक्त के थक्कों के जोखिम को घटाने और मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

राजमा

राजमा में काफी पोषक तत्व होते हैं, जिनके सेवन से आपके शरीर को ऊर्जा मिलती है। राजमा में कैलोरी की मात्रा संतुलित होती है, जो कि सभी उम्र के लोगों के लिए लाभकारी है। इसके अलावा इसे खाने से वजन भी नहीं बढ़ता है। राजमा में ढेर सारे प्रोटीन्स होते हैं,जो आमतौर पर मांसाहार से ही मिलते हैं। राजमा में मौजूद फेजोलिन नाम के प्रोटीन से एलर्जी से बचाव होता है।

चेहरे के सालों पुराने डार्क सर्कल को भी दूर करता है आलू-बादाम का पेस्ट, इस तरह करें इस्तेमाल

आंखें न सिर्फ जीवन के लिए अनमोल हैं बल्की सुंदरता की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन जब आंखो के नीचे काले धब्बे बन जाते हैं तो यह सुंदरता को बिगाड़ कर रख देते हैं। आंखों के नीचे काले घेरे होने के कई कारण हो सकते हैं।

आंखों के नीचे पड़े काले घेरे एक आम समस्या है। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है जैसे शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना, नींद न आना, मानसिक तनाव या फिर बहुत ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करने आदि से।

आंखों से नीचे काले घेरे हो जाने के कारण व्यक्ति थका हुआ और उम्रदराज नजर आता है,  इन डार्क सर्कल की वजह से व्यक्ति थका हुआ और उम्रदराज भी नजर आता है। आज हम आपको इनसे छुटकारा पाने का एक जबरदस्त नुस्खा बता रहे हैं।

आलू और बादाम का पेस्ट

जिन लोगों के शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है, उनकी आंखों के नीचे ऐसे लक्षण दिखाए देते हैं।  हालांकि घी-तेल, मैदा, मक्खन और नॉनवेज का सेवन सीमित मात्रा में करने से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। आलू और बादाम का पेस्ट के दाग धब्बे और डार्क सर्कल दूर के लिए रामबाण इलाज है।

इसे बनाने के लिए करीब 4 रातभर भीगे हुए बादाम का पेस्ट बना लें। अब इसमें करीब आधा चम्मच आलू का रस डालें। आप इसमें 1 से 2 चुटकी चंदन पाउडर भी डाल सकते हैं। अब इस मिश्रण को अपने डार्क सर्कल पर लगाकर करीब आधे घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें। सूखने के बाद आखों को ठंडे पानी से धो लें। कुछ दिनों से ऐसा करने से आपको अंतर खुद ही दिख जाएगा।

चेहरे के तिल और मस्सों को 1 रात में दूर करेगा ये घरेलू नुस्खे , जानें इस्तेमाल करने का तरीका

चेहरे पर तिल, मस्से, दाग धब्बे या टैनिंग किसी भी व्यक्ति को पसंद नहीं होती हैं। चाहे पुरुष हो या महिला हर कोई चाहता है कि उसका चेहरा साफ और हमेशा तचमकदार रहे।

लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो नेचुरल होती हैं या फिर वक्त के साथ चेहरे पर कुछ ऐसी चीजें आ जाती हैं जिनसे बचना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसी ही एक समस्या है चेहरे के तिल और मस्से। कई बार यह चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने के बजाय चेहरे पर धब्बे की तरह दिखते हैं।

आज हम आपको मस्से हटाने के ऐसे अचूक उपाय बता रहे हैं जिससे आपकी समस्या चुटकी बजाते ही सही हो जाएगी। आज हम आपको जो घरेलू नुस्खे बताने जा रहे हैं उन्हें ट्राई करें। आपको कुछ ही दिनों में आश्यर्चजनक लाभ हो जाएंगे।

बेकिंग सोडा और अरंडी का तेल

बेकिंग सोडा और अरंडी के तेल का मिश्रण को रात में मस्सों लगाकर सो जाइए, ऎसा करने से मस्‍से धीरे-धीरे मस्‍से समाप्‍त हो जाते हैं। इतना ही नहीं, रूई में नींबू का रस निचोड़ें और इसे मस्से पर लगा दें। कुछ देर बाद इसे पानी से साफ करें। लगातार दो-तीन सप्ताह तक ऎसा करने पर आप महसूस करेंगे कि मस्सा गल चुका है।

मस्से दूर करता है केला

केला स्वास्थ्य लाभ देने के साथ ही मस्सों का भी सफाया करता है।  केले के छिलके से मस्सों को हटाने के लिए अपने मस्से को केले के छिलके के साथ अच्छी तरह बांध लें। ध्यान रहें इसे इस तरह बांधें कि यह लंबे समय तक टिक सके। करीब 24 घंटे तक मस्से को बंधा रहने दें। कुछ ही दिनों तक ऐसा करने से मस्सा हमेशा के लिए झड़ जाएगा।

सेब का सिरका है बहुत फायदेमंद

सेब का सिरका भी मस्सों को छूमंतर करने का एक अचूक उपाय है। बस फर्क यह है कि इससे मस्सा झड़ता नहीं है बल्कि मस्सा धीरे-धीरे जलने लगता है। दरअसल, सेब के सिरके में मस्से के जीवाणुओं को मारने की शक्ति होती है। साथ ही सेब का सिरका मस्सों को फैलने से भी बचाता है। रोजाना कॉटन या किसी सूती कपड़े में सिरके को रखें और इसे मस्से पर लगाएं। हफ्तेभर तक ऐसा करने से ही मस्से की समस्या से छुटकारा मिलता है।

शहद भी है असरकारी

त्वचा पर चमक और निखार लाने के साथ ही शहद की मदद से मस्सों से भी छुटकारा पाया जा सकता है।। मस्से पर शहद लगातर इसे डॉक्टर टेप से कवर कर दें। इसे करीब 10 से 12 घंटे तक ऐसे ही ढ़के रहने दें। लगभग 15 दिन तक ऐसा करने से काफी अच्छा रिजल्ट देखने को मिलता है।

आलू और प्याज का रस

आलू को छीलकर काट लीजिए, उसके कटे हुए हिस्‍से को मस्‍सों पर रगडिए, ऎसा करने से कुछ दिनों में मस्‍से समाप्‍त हो जाते हैं। मस्‍से को समाप्‍त करने के लिए प्‍याज भी फायदेमंद है। एक प्याज को लेकर उसके रस को दिन में एक बार नियमित रूप से लगाने से मस्‍से समाप्‍त होते हैं।

सालों से गर्मी में गला तर करने वाला रूह अफजा शर्बत बाजार से गायब, ये है वजह

सॉफ्ट ड्रिंक, आइसक्रीम समेत कई नए ऑप्शन आने के बाद भी गुजिश्ता कई सालों से एक ब्रांड भारत में लोकप्रिय बना हुआ है। यह ब्रांड है हमदर्द का रूह-अफजा शर्बत। आजकल बाजार से रूह-अफजा शर्बत गायब है।

कंपनी ने कच्चे माल की कमी बताकर कुछ ही वक्त में सप्लाई बढ़ाने की बात कही है तो शर्बते-आजम कहने जाने वाले रूह-अफजा के बाजार से गायब होने से इसके शौकीन परेशान हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा है कि ऐसे कैसे गर्मी कटेगी।

रिटेलर भी नहीं बता पा रहे शर्बत की सप्लाई न होने का कारण

दिल्ली-एनसीआर में किराने की दुकानों में रूह-अफजा नहीं मिल रहा है। रिटेलर बता रहे हैं कि इस साल की शुरुआत में ही सप्लाई बंद हो गई, लेकिन तब सर्दियां चल रही थीं इसलिए किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब गर्मी आने पर मांग बढ़ने पर भी सप्लाई नहीं होने पर लगता है कि कंपनी में कुछ गड़बड़ है, जिसकी वजह से सप्लाई नहीं हो रही है।

दिल्ली-एनसीआर के अलावा यूपी के दूसरे शहरों और दक्षिण में हैदराबाद में भी रूह-अफजा नहीं मिलने की शिकायत आ रही हैं। जहां रूह-अफजा मिल रहा है, वो जुलाई का स्टॉक है। यानी इस साल रूह-अफजा की सप्लाई नहीं हुई है।

क्या है वजह

सभी जानना चाहते हैं कि इतना लोकप्रिय शर्बत होने और ऑन-सीजन होने के बावजूद रूह-अफजा की सप्लाई क्यों नहीं हो रही है। इस बारे में सोशल मीडिया में रहे कमेंट की माने तो रूह-अफजा बनाने वाली कंपनी हमदर्द के पार्टनर्स के बीच संपत्ति विवाद के चलते इस शर्बत का उत्पादन बंद हो गया है। रूह-अफजा के बाजार से गायब होने की वजह चाहें जो हो, लेकिन इस शर्बत के चाहने वाले बहुत परेशान हैं।

एक यूजर ने लिखा, ‘बताइये रूह अफज़ा ही नहीं है किसी भी दुकान, मेगा स्टोर में। ऐसे कैसे कटेगी गर्मियां’ हालांकि रूह-अफजा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मालिकों के बीच किसी संपत्ति विवाद से इनकार किया है। उनका कहना है कि कच्चे माल की कमी के चलते रूह-अफजा का उत्पादन बंद करना पड़ा था, हालांकि अगले 1-2 सप्ताह में स्थिति सामान्य हो जाएगी।

शरीर के टॉक्सिन निकालने के लिए मददगार है ये 5 चीजें, आज ही करें अपनी डाइट में शामिल

गलत खान-पान की आदतें और खराब लाइफस्टाइल हमारी सेहत पर बुरा असर डालते हैं। यही वजह है कि हमारे शरीर में विषैले तत्व बनने लगते हैं जो हमें बीमार बना देते हैं। इन्हें शरीर से बाहर निकालना अति आवश्यक होता है।

इसके लिए हमें ऐसी आदतें डालनी होंगी जिससे शरीर डिटॉक्सिफाई (दूषित चीजें बाहर) हो जाए। सबसे पहले एक प्लान बना लें। इसके लिए आपको कुछ चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना होगा।

खीरा

खीरे में 96 प्रतिशत पानी और फाइबर पाया जाता है जो हमारे शरीर से खतरनाक केमिकल्स और एसिडिक पदार्थों को बाहर कर डायजेस्टिव सिस्टम को बेहतर बनाता है। इसे खाने से हमारी स्किन पर ग्लो भी साफ दिखता है।

हरा धनिया

धनिये में एंटी फंगल और एंटीसेप्टिक तत्व पाए जाते हैं जो हमारे शरीर में नुकसानदायक तत्वों को सेल्स से दूर रखते हैं। इसके अलावा यह हमारे शरीर की सफाई करने वाले एंजाइम्स को बढ़ाते हैं और शरीर से सारे विषैले पदार्थों को बाहर निकालते हैं।

हरी प्याज

हरी प्याज भी हमारे शरीर से विषैले तत्वों को खत्म करने में मदद करती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और सल्फर शरीर को डिटॉक्स करने वाले एंजाइम्स को सक्रिय कर देते हैं। हरी प्याज के सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम होता है, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी कम रहता है।

अखरोट

अखरोट हमारे दिल को हेल्दी रखता है, इस बारे में तो आपने बहुत सुना होगा, लेकिन इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होता है। इसके सेवन से शरीर में विषाक्त पदार्थ जिससे स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां पैदा होती हैं वो सब धीरे धीरे बाहर हो जाते हैं। शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन के लिए अखरोट वरदान समान है।

सनफ्लॉवर के बीज

सनफ्लॉवर के बीज में सेलेनियम केमिकल और विटामिन-ई पाए जाते हैैं, जो हमारे लिवर के काम करने की क्षमता को बढ़ाते हैं। इसके अलावा ये हमारे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बनने से भी रोकते हैं।

सिर्फ 10 रुपये में हर स्टेज का कैंसर खत्म करने का दावा, घर में ही मौजूद है इलाज

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के लिए लोग लाखों करोड़ों रुपए मिटा देते हैं पर एक डॉक्टर का दावा है कि 2 रुपए की एक चीज से आप इसे रोक सकते हैं। इटली के जानेमाने डॉक्टर टूलिओ सिमोनचिनी का दावा है कि किचन में रखा बेकिंग सोडा कैंसर के इलाज के लिए काफी है।

उन्होंने कहा कि वे इससे सैकड़ों मरीजों का इलाज कर चुके हैं। उनका दावा है कि इस तरीके के उपायोग से वो अब तक सभी स्टेज के कैंसर मरीजों का इलाज कर चुके हैं और सभी लोगों पर यह दवा 100 फीसदी प्रभावी रही है। उनका मानना है कि सिर्फ बेकिंग सोडा पीकर है कैंसर को रोका जा सकता है।

बेकिंग सोडा ऐसे रोक सकता है कैंसर

हमारे घर में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कैंसर को खत्म करने के लिए रामबाण है।
2 से 10 रुपए की कीमत पर मिलने वाले बेकिंग सोडा की मदद से इटली के डॉक्टर टूलिओ सिमोनचिनी सैकड़ों मरीजों का इलाज कर चुके हैं।
उन्होंने कहा, बेकिंग सोडा की मदद से हम जो इलाज कर रहे हैं उससे 10 दिन में किसी भी स्टेज के कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है।
डॉ. टूलिओ का मानना है कि कई मामलों में फंगस कैंसर को पैदा करते हैं, जिसे बेकिंग सोडा से रोका जा सकता है।
बाहरी घाव जहां कैंसर होने का डर हो उसमें बेकिंग सोडा लगाया जा सकता है। इसके अलावा इसे पीकर भी बहुत से फायदे हो सकते हैं

ऐसे कर सकते हैं इस्तेमाल

डॉ. टूलिओ की स्टडी के मुताबिक जब शरीर का पीएच लेवल लगातार एसिडिक हो जाता है, उससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में बेकिंग सोडा शरीर में पीएच लेवल को कम करने में मदद कर सकता है।

एक आम इंसान बेकिंग सोडा की ड्रिंक बनाकर इसे पी सकता है और समय-समय पर शरीर का पीएच लेवल कम कर सकता है। धीरे-धीरे ये शरीर का पीएच लेवल कम करेगा, जिससे ट्यूमर्स बढ़ने से रुक जाते हैं।

हालांकि, इस्तेमाल के लिए इसमें डॉक्टरी सलाह लेनी जरूरी है। यूरिन के माध्यम से जांचा जाना चाहिए कि शरीर का पीएच लेवल क्या है। ये 7 से 8 के बीच होना चाहिए। अगर ये 8 से ऊपर पहुंच जाए, तो बेकिंग सोडा लेना बंद कर देना चाहिए।

कैंसर पैदा करने वाले फंगस को रोकता है

दरअसल फंगस इम्यून सिस्टम को कमजोर करते हैं और इसके बाद पूरे शरीर पर हमला करते हैं। हर तरह का कैंसर कैंडिडा फंगस की वजह से ही होता है। इसकी कई अध्ययनों से पुष्टि भी हो चुकी है। समय के साथ-साथ हमारी कोशिकाएं कमजोर और थकी हुई हो जाती हैं और अज्ञात कोशिकाओं बनाना शुरू कर देती हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर एक अल्सर है, जिसमें विकृत कोशिकाएं जमा होती हैं और कॉलोनीज बना लेती हैं।

एंटी फंगल दवाएं कैंसर नहीं रोक पातीं

डॉ. टूलिओ ने कहा कि सामान्य एंटी फंगल दवाएं कैंसर के खिलाफ अप्रभावी होती हैं क्योंकि वे केवल कोशिकाओं की सतह पर ही काम करती हैं। मुख्य इंफेक्शन एक बैक्टीरिया से अधिक शक्तिशाली है। यही कारण है कि फंगल इंफेक्शन इतने लंबे समय तक शरीर में बना रहता है।

आयोडीन टिंचर भी करता है मदद

डॉ. टूलिओ का दावा है कि उन्होंने उन चीजों की पहचान की है, जो फंगस की कॉलोनीज पर हमला कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्किन कैंसर के लिए बेकिंग सोडा और आयोडीन टिंचर सबसे अच्छा पदार्थ है। कई अध्ययनों में यह बात साबित हुई है कि कैंसर के खिलाफ बेकिंग सोडा ने इंट्रासेल्यूलर एक्शन किया है।

उन्होंने कहा कि मैंने 20 से अधिक वर्षों से अपने मरीजों पर इलाज का उपयोग किया है। इन रोगियों में से कई ऐसे रोगी भी थे, जिन्हें डॉक्टरों ने कहा था कि उनकी बीमारी लाइलाज है, लेकिन वे पूरी तरह से ठीक हो गए। ट्यूमर को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करना।

तांबे के जग में पानी पीने से मिलेगा कैंसर से छुटकारा छुटकारा, पेट की दिक्क्तों के लिए है रामबाण

तांबे के जग में पानी पीने से पेट को फायदा होता है। इससे पेट फूलना एवं गैस्ट्रिक आदि परेशानियों से छुटकारा मिलता है। मगर क्या आपको पता है इससे कैंसर की रोकथाम भी हो सकती है। ये अन्य बीमारियों से लड़ने में भी सक्षम है।

  • तांबे के बर्तन में रातभर पानी भरकर रखें और उसे सुबह पीने से पेट को सबसे ज्यादा फायदा होता है। क्योंकि तांबा पानी में मौजूद बैक्टीरिया, कीटाणु और फंगस को नष्ट कर देता है। इसे पीने से पाचन तंत्र ठीक रहता है।
  • हिंदू धर्म में भी तांबे को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। पुराणों के अनुसार तांबे के कलश से सूर्य को जल चढ़ाने से भाग्य मजबूत होता है। वहीं इसमें पानी पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है।

  • तांबे में एंटी इंफलामेटरी तत्व होते हैं। ये शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसमें रखा पानी पीने से गैस, कब्ज, पेट साफ न होना आदि की दिक्कतें दूर होती है।
  • कुछ रिसर्च के मुताबिक तांबे के जग में रखा पानी पीने से कैंसर की रोकथाम में भी मदद मिलती है। क्योंकि ये इसके जीवाणुओं को खत्म कर देता है। जिसके चलते बैक्टीरिया फैल नहीं पाते हैं।
  • तांबे में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होने के कारण शरीर में दर्द, ऐंठन और सूजन की समस्या से छुटकारा मिलता है। इससे हड्डियों की दिक्कत भी दूर होती है।
  • तांबे में एंटी-बैक्‍टीरियल, एंटीवायरल और एंटी इंफ्लेमेट्री गुण होते हैं। ये चोट लग जाने पर इसे ठीक करने में भी मदद करता है।
  • तांबे में मौजूद रसायन बैक्टीरिया को दूर करते हैं। जिससे किडनी और लीवर की दिक्कत नहीं होती है।
  • तांबे में भरपूर मात्रा में मौजूद मिनरल्स थॉयराइड ग्रंथि में आई दिक्कत को दूर करता है। इससे सूजन और दर्द से भी छुटकारा मिलता है।

  • तांबे में मौजूद एंटी आॅक्सिडेंट्स बुढ़ापे के असर को रोकने में भी मदद करता है। इससे झुर्रियां, दाग-धब्बे और कील-मुंहासे आदि दूर होते हैं।
  • तांबे में मौजूद गुणकारी तत्व त्वचा में मौजूद मेलेनिन की संख्या को कम करके रंगत को निखारने का भी काम करता है। इससे स्किन चमकदार और गोरी बनती है।

सिर्फ 20 दिनों में थायराइड की समस्या से निजात पाने के लिए करें इन चीजों का इस्तेमाल

अगर आपको लगातार थकान, सिर चकराना, वजन बढ़ना और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है तो ये थायराइड के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में फाइबर युक्त आहार का सेवन कर इस बीमारी से बचा जा सकता है।

इन चीजों का करें इस्तेमाल :

गाजर में ऐंटीऑक्सिडेंट्स और बीटा कैरोटीन तत्व होते हैं जो थाइरॉइड के हार्मोंस को नियंत्रित करते हैं। दिनभर में एक गाजर खाना जरूरी है। इसमें आयरन और फाइबर की अधिकता होती है जो थाइरॉइड में फायदेमंद है। अगर आप रोज सुबह खाली पेट एक गाजर को धोकर उसे कच्चा खाएंगे तो 20 दिन के अंदर अंदर आपकी थाइराइड ठीक होने लगेगी।

इसके साथ ही  दिन में एक बार एक कच्चा चुकंदर जरूर खाएं। अनानास भी ऐंटीऑक्सिडेंट्स और एंटी इन्फ्लेमेट्री तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। ऐपल में फाइबर और पेक्टिन होता है। यह शरीर के जहरीले पदार्थों को बाहर निकालता है। इसमें थाइरॉइड को नियंत्रित करने के गुण मौजूद हैं। इससे इम्यून सिस्टम बेहतर होता है और थाइरॉइड हार्मोन नियंत्रित रहता है।

इन चीजों के इस्तेमाल से बचें :

जिन लोगों का थाइरॉइड बढ़ा हो उन्हें गन्ना, डेक्सट्रोस, हाई फ्रूटस कॉर्न सिरप आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इनमें मौजूद कैलरी और शुगर से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। सॉफ्ट ड्रिंक, पैन केक, जैम/जेली, कुकीज़, केक, पेस्ट्री, कैंडी, दही, इन सबका भी सेवन नहीं करना चाहिए।

ज्यादा नमक वाले आहार :

नमक से थाइरॉइड ग्रंथि ज्यादा प्रभावित होती है इसलिए हाइपोथाइरॉडिज्म से ग्रसित लोगों को ज्यादा नमक का खाना नहीं खाना चाहिए। समुद्री शैवाल, कैल्प और ऐसा कोई भी सी-फूड न लें जिसमें आयोडीन ज्यादा होता है। हाइपोथाइरॉडिज्म में शुद्ध दूध नहीं लेना चाहिए।

मलाई या क्रीम निकला हुआ दूध लें जो पचाने में आसान और फायदेमंद होता है। अगर आप पहले से ही हाइपोथाइरॉडिज्म से पीड़ित हैं तो आपको कॉफी, शुगर और अन्य उत्तेजक पदार्थों को नहीं लेना चाहिए क्योंकि इनसे थाइरॉक्सिन ज्यादा पैदा होता है।

रोज़ाना इतनी मात्रा में खाली पेट खाएं अंकुरित चने, बीमारियाँ रहेंगी कोसों दूर

चने खाना शरीर के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। इससे शरीर चुस्त और दुरुस्त रहता है और कोई भी बीमारी आपके नज़दीक नहीं आती है। वहीं बात करें अंकुरित चने खाने की तो इसे चीनी के साथ खाने से शरीर में प्रोटीन का अच्छा लेवल पहुँचता है।

अंकुरित चने खाने से मांसपेशियाँ मजबूत होती है और कई प्रकार से अन्य स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। अंकुरित चने का किसी भी रुप में इस्तेमाल किया जाए इससे केवल फायदा ही मिलेगा।

  • अंकुरित चना खाने से शरीर में फाइबर की अच्छी मात्रा पहुँचती है और साथ ही पेट संबंधित दिक्कतें नहीं रहती हैं। यह कब्ज में राहत दिलाते हैं।
  • जो लोग बार-बार यूरिन आने की समस्या के कारण परेशान रहते हैं उन्हे अंकुरित चने खाने चाहिए इससे जल्दी ही फायदा मिलता है।
  • खाली पेट चने खाने से शरीर में ग्लूकोज की अतिरिक्त मात्रा नहीं बनती है और साथ ही डायबिटीज़ को कंट्रोल में रखा जा सकता है।
  • अंकुरित चने खाने वाले व्यक्ति को मानसिक तनाव में राहत मिलती है वहीं पीलिया के रोगियों को इसका सेवन लाभ पहुँचाता है।
  • रोज़ाना अंकुरित चने खाने वाले व्यक्ति को कुछ ही समय में शरीर में भरपूर एनर्जी का एहसास होने लगता है और कमज़ोरी पर रोक लगती है।

  • जो लोग जिम जाते हैं उनके लिए अंकुरित चने लाभकारी माने जाते हैं क्योंकि यह बॉडी बनाने में अत्यधिक मदद करते हैं।
  • नियमित रूप से अंकुरित चने खाने वाले लोगों के शरीर में खून की कमी नहीं रहती है और साथ ही आयरन भी प्रचुर मात्रा में मिलता है।
  • अंकुरित चने खाने से चेहरे का निखार बढ़ता है और स्किन फ्रेश रहती है साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
  • अंकुरित चने कोलेस्ट्रोल को कम करते हैं जिससे हार्ट अटैक का ख़तरा नहीं रहता है और अन्य प्रकार की हार्ट प्रॉबल्म भी नहीं होती हैं।
  • पथरी के कारण परेशान लोगों को रोज़ाना 100 ग्राम अंकुरित चने शहद के साथ खाने चाहिए इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है।