रेमंड दे रही 1200 स्‍टोर खोलने का मौका, हर माह होगी लाखों की कमाई

देश्‍ा की सबसे बड़ी गारमेंट कंपनियों में शुमार रेमंड अब छोटे शहरों में स्‍टोर खोल रही है। इसका इरादा देश के उन 1200 शहरों में स्‍टोर खोलने का है, जहां की आबादी 50 हजार से ज्‍यादा है। कंपनी की ब्रांड वैल्‍यू की वहज से इसके ग्राहकों एक बड़ा तबका इन छोटे शहरों में रहता है,

जो इसके कपड़े खरीदने के लिए बड़े शहरों की तरफ जाता है। कंपनी का इरादा इन्‍हीं ग्राहकों की मांग को पूरा करने के लिए इन जगहों पर स्‍टोर खोलने की है। कंपनी का दावा है कि सालाना दो करोड़ रुपए से भी ज्‍यादा की इनकम ऐसे स्‍टोर्स से हो सकती है।

कारोबार बढ़ाने की रणनीति

कंपनी के रिटेल डायरेक्‍टर मोहित धंजाल के अनुसार इन स्‍टोर के खुलने के बाद कंपनी के कारोबार में करीब 10 फीसदी की बढोत्‍तरी होगी। कंपनी का इरादा टाइप चार, पांच और छह शहराें में मिनी रेमंड शॉप खोलने का है। यह स्‍टोर्स फ्रैंचाइजी मॉडल पर खोले जाएंगे।

40 स्‍टोर खुल भी चुके

उनके अनुसार कंपनी अभी तक 40 मिनी रेमंड शॉप खोल चुकी है। यही नहीं कंपनी का इरादा मार्च तक 60 और ऐसी शॉप खोलने का है। बाकी अगले वित्‍तीय वर्ष में खोले जाएंगे। उनके अनुसार कपंनी का इरादा छोटे स्‍टोर खोल कर ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को जोड़ना है। इन स्‍टोर को खोलने में निवेश भी कम चाहिए होता है।

1 करोड़ रुपए तक की कमाई वाले स्‍टोर

मिनी रेमंड शाॅप खोलकर लोग आराम से एक करोड़ रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। इन स्‍टोर को शुरू करने में 50 लाख रुपए तक की लागत आती है।

2 करोड़ रुपए तक की कमाई वाले स्‍टोर

कंपनी मिनी से थोड़ा स्‍टोर खोलने की भी फ्रैंचाइजी दे रही है। इन स्‍टोर को खोलने के लिए करीब 2500 वर्ग फीट जगह की जरूरत होती है। इन स्‍टोर को शुरू करने में 1.5 से 2 करोड़ तक की लागत आती है। यह लागत एक बार लगानी होती है। इन स्‍टोर से दो करोड़ रुपए से ज्‍यादा की कमाई आराम से की जा सकती है।

कंपनी की वेबसाइट पर मिलेगी जानकारी

कंपनी की वेबसाइट पर इस संबंध में जानकारी ली जा सकती है। रेमंड के अभी देश में 767 स्‍टोर हैं। इनमें से ज्‍यादातर फ्रैंचाइजी मॉडल पर हैं। यह स्‍टोर 416 शहरों में स्थित हैं। इसके अलावा कंपनी के उत्‍पाद 3500 मल्‍टी ब्रांड स्‍टोर पर भी उपलब्‍ध हैं। कंपनी का मानना है कि स्‍टोर और ज्‍यादा शहरों तक पहुुंच से बिक्री में अच्‍छी बढ़ोत्‍तरी होगी।

85 हजार की नौकरी छोड़ शुरू किया डेयरी फार्म, 2 साल में किया 2 करोड़ का बिजनेस

चाह हो तो राह मिल ही जाती है। ये साबित कर दिखाया है झारखंड के संतोष शर्मा ने। कुछ करने की चाहत रखने वाले शर्मा ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से प्रभावित होकर 85 हजार रुपए की अच्छी खासी नौकरी छोड़ नक्सल प्रभावित गांव में डेयरी फार्म शुरू किया और मजह दो वर्षों में उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए के पार हो गया।

नक्सल प्रभावित गांव में शुरू किया कारोबार

झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले शर्मा ने नक्सल प्रभावित दलमा गांव के आदिवासी गांव में जिस डेयरी बिजनेस की शुरुआत की थी, आज वह सिर्फ डेयरी न रहकर ऑर्गेनिक फूड, हेल्दी मिल्क बनाने की फैक्‍ट्री शुरू करने तक पहुंच गया है।

अपने इस बिजनेस के बूते वह न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल रहे हैं, बल्कि इसके जरिए वह आदिवासी लोगों को गांव में रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। अपने काम के लिए सुर्खियां बटोर चुके शर्मा ने एयर इंडिया से सफल बिजनेसमैन बनने की कहानी साझा की।

जन्म लेने के एक साल बाद पापा हुए रिटायर

शर्मा ने बताया कि उनके पिता टाटा मोटर्स में नौकरी करते थे और परिवार चलाने के लिए उनकी आय पर्याप्त नहीं थी। संतोष के पैदा होने के एक साल बाद ही उनके पिता रिटायर हो गए थे। पिता के रिटायरमेंट के बाद मां ने परिवार की जिम्मेदारी संभालने का जिम्मा लिया और पड़ोसी से मिले एक गाय को उन्होंने पालना शुरू किया।

उन्होंने गाय का दूध बेचना शुरू कर दिया। वह भी अपनी माता और भाइयों के साथ लोगों के घरों पर जाकर दूध बेचा करते थे। दूध बेचने का यह कारोबार चल निकला और परिवार की हालत भी सुधरने लगी।धीरे-धीरे गाय की संख्या बढ़कर 25 हो गई।

एयर इंडिया की नौकरी छोड़ी

कॉमर्स से 12वीं करने के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.कॉम में ग्रैजुएशन किया। इसके साथ उन्होंने कॉस्ट अकाउंटिंग का कोर्स भी किया। शर्मा की पहली नौकरी मारुति में लगी। यहां उन्होंने 6 महीने तक 4800 रुपए के स्टाइपंड पर काम किया। 2000 में इर्नेस्ट एंड यंग में 18000 रुपए महीने की सैलरी पर नौकरी लगी।

2003 में नौकरी छोड़ सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते शर्मा ने 2004 में जमशेदपुर स्थित एक मल्टीनैशनल बैंक में बतौर ब्रांच मैनेजर ज्वाइन कर लिया। 6 महीने बाद शर्मा ने दूसरा बैंक ज्वाइन किया। इसके बाद 2007 में वह एयर इंडिया से बतौर असिस्टेंट मैनेजर (कोलकाता) जुड़े।

यहां पर उनकी मंथली सैलरी 85,000 रुपए थी। फिर एक दिन उनकी मुलाकात कलाम साहब से हुई और उनसे प्रेरित होकर उन्होंने एयर इंडिया से तीन साल की छुट्टी लेकर छोड़ डेयरी फार्म की नींव रखी।

डेयरी फर्म की शुरुआत

शर्मा ने बताया कि उन्होंने डेयरी फर्म की शुरुआत के लिए अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी। डेयरी फर्म खोलने में उनके 80 लाख रुपए लग गए और 8 जानवरों के साथ अपने डेयरी फार्म की शुरूआत की थी, जिनकी संख्या अब बढ़कर 100 तक पहुंच गई है।

सिर्फ डेयरी नहीं चलाते शर्मा

शर्मा न सिर्फ अपने डेयरी स्टार्टअप के बिजनेस को बढ़ा रहे हैं, बल्कि वह लेखन और मोटिवेशनल स्पीकिंग का काम भी करते हैं। शर्मा अभी तक दो किताबें नेक्स्ट वॉट इज इन और डिजॉल्व द बॉक्स भी लिख चुके हैं। वह आईआईएम जैसे शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में जाकर स्टूडेंट्स को प्रेरित करते हैं।

डेयरी में 100 से ज्यादा लोग कर रहे हैं काम

2014 में उन्होंने दलमा वाइल्डलाइफ अभ्यारण्य में पार्टनरशिप में 30 हजार रुपए महीने पर जमीन ली। कुछ रिसर्च करने के बाद उन्होंने 2016 में मम्मा डेयरी फर्म की शुरुआत की। इस डेयरी में फिलहाल 100 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकतर कम उम्र के युवा और नक्सल प्रभावित दलमा गांव के आदिवासी हैं। उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए हुआ।

ये प्रोडक्ट्स हैं मार्केट में मौजूद

मम्मा डेयरी जमशेदपुर में ऑर्गेनिक दूध सप्लाई करती है। गायों को चारा भी ऑर्गेनिक दिया जाता है। उन्होंने ऑर्गेनिक मिल्क के अलावा पनीर, बटर और घी भी बेचना शुरू किया है। शर्मा अगले कुछ महीने में वो फ्लेवर्ड मिल्क भी मार्केट में उतारने की तैयारी में हैं।

ऐसे शुरू करें आलू पाउडर बनाने की फैक्ट्ररी, कई गुना बढ़ जाएगा मुनाफा

बाजार में आलू के भाव काफी कम है जिस कारण किसनो को हर साल बहुत नुकसान उठाना पड़ता है .कई बार तो किसानो की लाखों टन फसल सड़ जाती है इस लिए उन्हें इसे कचरे में फेकना पड़ता है .लेकिन अब आपको अपने आलूओं को कचरे में फेंकने की जरूरत नहीं , इसे पाेटैटाे पाउडर प्रोसेसिंग की कोशिश करें. इससे आलू का भाव सोने के माेल के बराबर हो सकता है.

आलू पाउडर मुख्य रूप से भोजन में एक मोटा एजेंट (thickening agent) के रूप में प्रयोग किया जाता है, किसी भी आलू पाउडर प्रसंस्करण कंपनी के लिए उचित आय प्रदान करने वाले घटक के रूप में हालिया समय में इस की लोकप्रियता बढ़ गई है।इसके कई खाद्य अनुप्रयोगों के कारण आलू एक महत्वपूर्ण खाद्य फसल है, आलू को आटा, पेस्ट, पकाया, उबला हुआ या तली में संसाधित किया जा सकता है जिससे इस फसल को बहुत मूल्यवान बनाया जा सकता है।

आलू के अन्य उपयोग मांस के व्यंजन, पिज्जा, आलू के चिप्स और सूप्स जैसे स्नैक्स में हाेता है। आलू की पोषण संबंधी संरचना में वसा, कच्चे फाइबर, राख, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का भार शामिल होता है। विनिर्माण कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि आलू आसानी से खराब हो जाते हैं और इसे उचित भंडारण और हैंडलिंग की आवश्यकता होती है। आलू की अलग-अलग किस्में हैं और ये अलग-अलग आकृति, आकार, स्वाद और सुगंध में आते हैं।

निर्माता को आलू के उत्पादन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों और पारिस्थितिकी के मूल स्रोत की जरूरत है। अपना प्रसंस्करण संयंत्र शुरू करने से पहले आपको व्यवसाय योजना लिखनी होगी।
औद्योगिक रुझानों का अध्ययन करने की कोशिश करें, एक व्यापक सर्वेक्षण करें और विपणन अनुसंधान करें। अन्य बातों में आवश्यक कार्यशील पूंजी की राशि, उपकरण, संयंत्र आकार, लाभ अनुपात, लागत और राजस्व शामिल हैं । इन सभी प्रावधानों का कार्य करना स्टार्टअप एंटरप्राइज़ के लिए एक ठोस व्यवसाय टेम्पलेट प्रदान करेगा।

आलू, पाउडर उत्पादन में प्रयु्त किए जाने वाले प्राथमिक कच्चा माल है। आलू केवल कुछ क्षेत्रों और दुनिया के निश्चित भौगोलिक क्षेत्रों में उगाए जाते हैं। यदि आप इस श्रेणी में आते हैं तो आप आलू पाउडर प्रसंस्करण कंपनी शुरू कर सकते हैं। आपके कारखाने के लिए एक अच्छा स्थान कच्चा माल के स्रोत के करीब हाेना चाहिए।

बड़े आलू बाजार या खेत के करीब उद्यम का पता लगाएं। यह रणनीति परिवहन लागत, हैंडलिंग और ईंधन को घटा देती है। यह प्रचुर मात्रा में कच्चे माल के लिए आसान और त्वरित पहुंच प्रदान करता है। आपके द्वारा चुने जाने वाले स्थान में जल, बिजली और अच्छे जल निकासी प्रणाली जैसी उपयोगिताएं होनी चाहिए।

कच्चा माल

अधिकांश पौधों की तरह ही आलू की फसल नें भी अपनी वृद्धि और फसल उपज एवं कटनी का मौसम हाेता है। इससे संयंत्र की उत्पादन क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है। कुछ कंपनियां आलू को लंबे समय तक शेल्फ लाइफ के लिए निर्जलीकृत करती हैं या आलू की छोटी गिरावट( short fall) की भरपाई के लिए आयात करती है

आलू पाउडर प्रसंस्करण के लिए इस्तेमाल मशीनरी

आलू पाउडर प्रसंस्करण कंपनियां समान उपकरण का उपयोग करती हैं उपकरण मैनुअल, अर्ध स्वचालित या पूरी तरह से स्वचालित मशीनरी हैं।कई मशीनरी स्थानीय रूप से निर्मित मशीनरी और कई शीर्ष श्रेणी के ब्रांडेड उपकरण हैं। वित्तीय क्षमता और पौधे की क्षमता के आधार पर उस प्रकार की मशीनरी खरीदी जाती है।

आलू पाउडर कंपनियां में मुख्यत

आने वाले सामान्य उपकरण जैसे भाप बॉयलर, प्यूवरइज़, ड्रायर और वजनी स्केल पर ही आधारित हाेता हैं। अन्य उपकरण आलू छीलने की मशीन, टुकड़ा करने की मशीन और सीलिंग मशीन हैं। एक मध्यम आकार की मशीनरी स्थापना से कम-से-कम रोजाना 500 किलोग्राम उत्पाद का उत्पादन होना चाहिए।

कैसे आलू पाउडर बनाए

आलू पाउडर बनाने के दो तरीके हैं पहली विधि आलू धाेना, छीलना और फिर छीलने या पीसने के लिए भट्ठी का इस्तेमाल करना है। इस विधि में उबलते पानी के बड़े ड्रम में प्रकाश से वंचित कर के सफ़ेद (Blanch)किया जाता है और डिहाइडेटर को पेश किया जाता है। एक बार डिहाइडेटर के माध्यम से आलू को कुचल दें और फिर पाउडर बनाने के लिए मिश्रण करें। पाउडर तब जाकर वायुरोधी कंटेनर में पैकेज होता है और मुहरबंद होता है।

दूसरी विधि में आलू धोने, छीलने, उबलते और मैश करना शामिल है। वे तब dehydrator के पास जाते हैं और बाद में पाउडर बनाने के लिए कुचल या मिश्रित होते हैं। निर्जलीकरण की प्रक्रिया बहुत लंबी है और इसमें कई घंटों लगते हैं।

आलू पाउडर को बेच कहाँ सकते हैं ?

आलू पाउडर निर्माताओं के लिए विशाल स्थानीय बाजार के बावजूद उत्पाद को निर्यात करना पसंद करते हैं। वे निर्यात आलू पाउडर से विदेशी मुद्रा में भारी लाभ कमाते हैं। आलू पाउडर के लिए प्रमुख आउटलेट हैं होटल, रेस्तरां, फास्ट फूड आउटलेट और खानपान स्कूल निर्माताओं क्षेत्र में सुपरमार्केट, शॉपिंग मॉल और किराने की दुकानों को बेच सकते हैं।आप अपने उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऑनलाइन बेच सकते हैं। एक वेबसाइट बनाएं और कीमतें सहित आपके उत्पाद की छवियां जोड़ें

कंपनी को पंजीकृत करें

कंपनी को पंजीकृत करें और एक व्यवसाय नाम चुनें। मानकीकरण परीक्षण के लिए अपने उत्पाद का विषय और क्लीयरेंस प्रमाणपत्र प्राप्त करें । व्यापार लाइसेंस और निर्यात लाइसेंस के लिए आवेदन करें। आपको हेथ और सुरक्षा आवश्यकताएं और खाद्य प्रहस्तक के प्रमाणन को पास करना होगा।आपके उत्पाद को मूल्य वर्धित कर के अधीन किया जा सकता है और बीमा कवर को मत भूलना हाेगा। अपने देश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए परमिट और कानूनों का पता लगाएं।

इस काम को शुरू करने के लिए मोदी सरकार आपको देगी 2.5 लाख रुपए, हर महीने होगी मोटी कमाई

मोदी सरकार देश में व्यापार वर्ग को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की योजनाएं लाती रहती है। इन योजनाओ में से प्रधानमंत्री भारतीय जनओषधि परियोजना (PMBJP) भी एक है। सरकारी आकड़ो के मुताबिक इस योजना के तहत अब तक कुल 3600 जनओषधि स्टोर खाेले जा चुके हैं।

इन स्टोर्स पर 700 जेनेरिक दवाओं के साथ-साथ 154 छोटे-बड़े मेडिकल उपरकरण आसानी से उपलब्ध होते हैं। दरअसल, इस परियोजना के तहत सरकार जेनेरिक दवाओं को बेहद ही कम कीमत में आसानी से उपलब्ध कराना चाहती है। इन स्टोर्स पर बाजार की तुलना में 80-85 फीसदी तक सस्ती दवाएं उपलब्ध होती हैं। सरकार ने इस साल देशभर में जनओषधि केंद्र की संख्या बढ़ाकर 5,000 करने का लक्ष्य रखा है।

इस योजना के तहत सरकार देगी 2.5 लाख 

अगर आप भी इस योजना के तहत सरकार की मदद से स्टोर खोलते हैं तो आपको दवाओं पर 20 मार्जिन के अतिरिक्त 15 फीसदी इंसेटिव भी मिलेगा। आपको अधिकतम 10,000 रुपए का इंसेटिव दिया जाएगा। साथ ही, सरकार आपको इस योजना के तहत तब तक इंसेटिव देती रहेगी जब तक की यह रकम 2.50 लाख रुपए न हो जाए।

इस योजना के तहत स्टोर खोलने पर भी आपको करीब 2.5 लाख रुपए खर्च करना हाेगा। यदि आप उत्तरी-पूर्व भारत में या नक्सल प्रभावित इलाकों में रहते हैं तो सरकार इंसेटिव की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 15 हजार रुपए कर देगी। साथ ही, कमजोर तबके के लेागों के लिए सरकार ने 50,000 रुपए एडवांस के रूप में देने का प्रावधान रखा है।

तीन तरह की बनाई है कैटेगरी 

इसके लिए सरकार तीन तरह की कैटेगरी बनाई है। पहले कैटेगरी में बेरोजगार फार्मासिस्ट, डाॅक्टर, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर जैसे लोगों के लिए है। दूसरी कैटेगरी में ट्रस्ट, गैर-सरकारी संस्था, नीजि अस्पताल, सेल्फ हेल्प ग्रुप इस योजना के तहत जनओषधिक खोल सकते हैं।

तीसरे कैटेगरी में वो एजेंसियां होंगी जो राज्य सरकारों की तरफ से नाॅमिनेट की गई हैं। इस योजना के तहत खुद का स्टोर खोलने के लिए आपको 120 वर्गफुट की जमीन होनी चाहिए जहां आप अपनी दुकान खोल सकें। सरकार आपको 700 दवाएं उपलब्ध कराएगी।

किन कागजातों की होगी हो जरूरत 

इसके लिए आपके पास रिटेल ड्रग सेल्स का लाइसेंस होने अनिवार्य है। आवेदन के लिए आधार कार्ड  और पैन कार्ड की भी जरूरत होगी। यदि आप अपने संस्था, एनजीओ, हाॅस्पिटल या चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए आवेदन कर रहे हैं तो इसके लिए भी आपके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड और पंजीयन प्रामण पत्र देना अनवार्य होगा।

आवेदन के लिए आप जनओषधि की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। आप अपना आवेदन ब्यूरो ऑफ फाॅर्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर के नाम पर भेज सकते हैं। इस वेबसाइट पर आपको कई जरूरी जानकारियां आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी। आप ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।

सिर्फ 2 लाख में शुरू करें LED बल्ब बनाने का बिज़नेस ,हर महीने होगी 50000 की कमाई

एलईडी का पूरा नाम लाइट एमिटिंग डायोड है. इससे बने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बिजली की खूब बचत होती है. इसी वजह से भारत सरकार देश में एलईडी को बढ़ावा देना चाह रही है. गत वर्ष सरकार ने देश भर में डोमेस्टिक एफिसिएंट लाइटिंग प्रोग्राम (DEPL) की शुरुआत की थी.

इस समय इसी योजना का नाम भारत सरकार द्वारा बदल कर उजाला कर दिया गया है. अब तक देश के कई हिस्सों में इस योजना का पालन हुआ और यह योजना काफ़ी सफल रही. उजाला के सफ़ल होने से देश में एलईडी के व्यापार की संभावनाएं बढती जा रही हैं. एलईडी व्यापार को आसानी से बेहद कम पैसे में शुरू किया जा सकता है. यहाँ पर इस व्यापार से सम्बंधित विशेष कड़ियों का वर्णन किया जा रहा है.

एलईडी लाइट का व्यापार करने के लिए स्थान

एलईडी लाइट का व्यापार कई तरह से किया जा सकता है. इसकी ट्रेडिंग से भी अच्छा ख़ासा लाभ कमाया जा सकता है. इसके लिए आपको सबसे पहले किसी इलेक्ट्रोनिक अथवा जनरल मार्केट में एक दूकान किराए पर लेना पड़ेगा. यदि आपके पास कोई ऐसी जगह है, जो दूकान बन सकती है, तो किराए का पैसा बचाने के लिए उस जगह पर ही दूकान कर लें. इस स्थान की आवश्यक फर्निशिंग के बाद आप यहाँ पर एलईडी बेचने का काम शुरू कर सकते हैं. यहाँ पर एलईडी बेचने के लिए आप किसी होलसेलर या सप्लायर से एलईडी प्राप्त कर सकते हैं.

न्यूनतम लागत पर एलईडी लाइट के व्यापार का आरम्भ

इस तरह के व्यापार को शुरू करने के लिए कम से कम 1.5 से 2 लाख रुपए की आवश्यकता पड़ती है. हालाँकि दूकान अच्छे से चलने पर इससे प्रति महीने 20,000 से 3,00,000 का मुनाफा प्राप्त हो सकता है, अतः 2 लाख के निवेश से प्रति महीने कम से कम 20,000 कमाने का ये एक उत्तम व्यापार है.

एलईडी सप्लायर के रूप में करें व्यापार

यदि आप एलईडी की दूकान नहीं करना चाहते तो, आपके पास एलईडी सप्लायर बनने का भी विकल्प है. विभिन्न दुकानों के लिए सप्लायर का काम करते हुए भी आप एलईडी की सहायता से अच्छा लाभ उठा सकते हैं. हालाँकि सप्लायर बनने के लिए आपको रिटेल से अधिक पैसा निवेश करना पड़ेगा. सप्लायर बनने के लिए कम से कम 2 से 3 लाख रूपए की लागत आती है. हालाँकि इसके लिए भी आपको गोडाउन अथवा किसी बड़े स्टोर के लिए जगह किराए पर लेने की आवश्यकता पड़ेगी.

स्थान की व्यवस्था हो जाने के बाद आपको लाइट असेम्बल करने वाले व्यापारी तथा विभिन्न मैन्युफैकचर्स कंपनियों से संपर्क करना होगा. चूँकि यहाँ से रिटेलर एलईडी उठाएंगे, अतः एक सप्लायर के रूप में आपको विभिन्न तरह के एलईडी लाइट अपने स्टोर में रखना होगा, ताकि रिटेल की मांग के अनुसार एलईडी दे सकें. एक सप्लायर के रूप में काम करने के लिए आपको एक सुरक्षित ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की आवश्यकता होती है.

असेम्बलिंग यूनिट स्थापित करके एलईडी लाइट का व्यापार करें

आप एक असेम्बलिंग यूनिट की स्थापना करके भी एलईडी से पैसा कमा सकते हैं. एक छोटे से असेम्बलिंग यूनिट की स्थापना करने के लिए 5 से 7 लाख रूपए की लागत आती है. हालाँकि इसके लिए सरकार ऋण देती है और प्रधानमन्त्री रोज़गार योजना के अंतर्गत यह ऋण प्राप्त किया जा सकता है.

ऐसे त्यार किआ जाता है लेम्प

यहाँ पर एक असेम्बलिंग यूनिट स्थापित करने के लिए मशीनरी, रॉ मटेरियल आदि का वर्णन किया जा रहा है.

मशीनरी : एलईडी असेम्बलिंग यूनिट के लिए आवश्यक मशीनरी उसकी कीमत और उसे ऑनलाइन खरीदने के बारे में नीचे दर्शाया जा रहा है.

  • कॉम्पोनेन्ट फोर्मिंग : क़ीमत : रू 85,000
  • सोल्डरिंग मशीन : क़ीमत : रू 300
  • डिजिटल मल्टीमीटर : क़ीमत : रू 551
  • टेस्टर : क़ीमत : रू 565
  • सीलिंग मशीन : क़ीमत : रू 1350
  • एलसीआर मीटर : क़ीमत : रू 2400
  • स्माल ड्रिलिंग मशीन : क़ीमत : रू 1800
  • लक्स मीटर : क़ीमत : रू 1200

रॉ मटेरियल : इसके लिए आवश्यक रॉ मटेरियल उसकी कीमत और उसे ऑनलाइन खरीदने के बारे में नीचे दर्शाया जा रहा है.

  • लेड चिप्स : क़ीमत : रू 1200
  • रेक्टिफिएर मशीन : क़ीमत : रू 9/ प्रति इकाई
  • हीट सिंक डिवाइस : क़ीमत : रू 400
  • मेटलिक कैप होल्डर
  • प्लास्टिक बॉडी : क़ीमत : रू 50 प्रति इकाई
  • रिफ्लेक्टर प्लास्टिक ग्लास : क़ीमत : रू 3 प्रति इकाई
  • कनेक्टिंग वायर : क़ीमत : रू 480
  • सोल्डरिंग फ्लक्स : क़ीमत : 80 रू

इन सभी मशीनों एवं सामग्रियों को आप निम्न वेबसाईट से ऑनलाइन माध्यम से खरीद सकते हैं :

कॉम्पोनेन्ट बना कर एलईडी लाइट का व्यापार करें

एलईडी की मांग बढ़ने से कई बड़ी कम्पनियों ने एलईडी बनानी शुरू कर दी है. अतः कम लागत के व्यापारी लैंप कॉम्पोनेन्ट बनाने का व्यापार कर सकते है. एक छोटे से वर्कशॉप तैयार करने के लिए कम से कम 5 लाख की लागत आती है. इसके लिए सबसे पहले एमएसएमई द्वारा भारत सरकार के अधीन अपने वर्कशॉप का पंजीकरण कराना होता है. इस पंजीकरण के बाद सरकार द्वारा ऋण भी प्राप्त किया जा सकता है. एक अनुमान के तहत इसके अंतर्गत प्रति महीने रू 50,000 से 70,000 तक कमाया जा सकता है.

एलईडी लाइट का व्यापार शुरू करने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रशिक्षण

भारत सरकार देश में एलईडी का प्रसार करने के लिए विभिन्न तरह की एलईडी सम्बंधित ट्रेनिंग भी दे रही है. यह प्रशिक्षण कौशल विकास योजना तथा एमएसएमई मंत्रालय की तरफ़ से दिया जा रहा है. कौशल विकास योजना के अंतर्गत निसबड और खादी ग्रामोद्योग आयोग की तरह से समय समय पर विभिन्न स्थानों में ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाये जाते हैं. इस प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रशिक्षण लेने वाले को एलईडी सम्बंधित सारी जानकारियाँ दी जाती हैं. विशेष जानकारी के लिए नीचे दिए गये लिंक पर विजिट कर सकते हैं.

http://niesbud.nic.in/training.htm

http://msme.gov.in

ऐसे शुरू करें डिटर्जेंट पाउडर बनाने का बिज़नेस

डिटर्जेंट पाउडर साफ़ सफाई के लिए बहुत ही आवश्यक वस्तु है. इसका प्रयोग साधारण तौर पर कपडे धोने के लिए किया जाता है. बाज़ार में विभिन्न तरह के ब्रांड ऐसे डिटर्जेंट बेच कर बहुत अच्छा लाभ कमा रहे हैं. बाजारों की दुकानों में कई ऐसे डिटर्जेंट हैं,

जिनकी कीमत बहुत अधिक है. बड़ी बड़ी कम्पनियाँ अपने ब्रांड का डिटर्जेंट बहुत आसानी से बेच रही हैं. आप भी अपने ब्रांड का डिटर्जेंट बहुत ही सरलता से बना कर बाज़ार में बेच सकते हैं. इस व्यवसाय में आपको बहुत अच्छा मुनाफा प्राप्त होगा.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए कई तरह के आवश्यक रासायनिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. यहाँ पर इसके लिए काम आने वाले आवश्यक रासायनिक सामग्री के विषय में दिया जा रहा है.

  • ट्राईसोडियम फॉस्फेट: (रू 27 प्रति किलो)
  • ट्राईपोली फॉस्फेट: (रू 78 प्रति किलोग्राम)
  • कार्बोक्सी मिथाइल सेल्यूलोस : (रू 100 प्रति किलोग्राम)
  • फ्राग्रांस (सुगंध) : (रू 600 प्रति किलोग्राम)
  • एसिड स्लरी :(रू 84/ लीटर)
  • सोडा ऐश : (रू 21 प्रति किलोग्राम)
  • ग्लौबेर साल्ट: (रू 15 प्रति किलोग्राम)
  • रंग : (रू 6 प्रति किलोग्राम)
  • CBX :
  • एओएस : (रू 45 प्रति किलोग्राम)
  • डोलोमाइट : (रू 3 प्रति किलोग्राम)
  • डी कोल: (रू 85 प्रति किलोग्राम)

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए मशीनरी

डिटर्जेंट बनाने के लिए तीन तरह के मशीन की आवश्यकता पड़ती है. इन तीन तरह के मशीनों मे मिक्सर मशीन, स्क्रेमिंग मशीन और सीलिंग मशीन है. इन तीनों के कार्य का वर्णन नीचे किया जा रहा है.

  • मिक्सर मशीन: यह ग्लौबर साल्ट, सोडा ऐश, रंग आदि को मिलाने के काम में आता है.
  • स्क्रेमिंग मशीन : इसकी सहयता से बने हुए डिटर्जेंट को और भी बारीक़ बनाया जाता है.
  • सीलिंग मशीन : इसकी सहयता से पैकेट्स को सील किया जाता है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए मशीनरी में कुल खर्च

इसके लिए रू 45,000 से लेकर रू 3,00,000 तक के मशीन उपलब्ध हैं. यदि आप 45000 के रेंज का डिटर्जेंट मेकिंग मशीन लेते हैं, तो उससे आप डिटर्जेंट पाउडर बना तो लेंगे किन्तु, पैकेजिंग के दौरान आपको मशीन की सुविधा नहीं मिल पाएगी. 75000 के मशीन के साथ आपको अलग से एक सीलिंग मशीन दिया जाता है और 3,00,000 रू की मशीन में पूरा सेट मिल जाता है, जिसमे मिक्सर से सीलिंग तक सभी तरह की मशीन उपलब्ध हो जाती है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के व्यापार स्थापित करने के लिए कुल खर्च 

व्यापार स्थापित करने के लिए कुल खर्च कम से कम 5 लाख रूपए का आता है. ये आंकड़ा आपके मशीन की कीमतों पर भी निर्भर करता है. यदि आप मशीन कम क़ीमत की जैसे 75000 रू के आस पास की लेते हैं, तो ये आंकड़ा 2.5 से 3 लाख का हो जाता है,.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने की प्रक्रिया 

  • सबसे पहले एसिड स्लरी लें और इसमें एओएस डालें. इसके बाद इसमें डी कोल डालें.
  • डी कोल डालने की वजह इसके निर्माण में इस्तेमाल किये गये रसायनों का नकारात्मक प्रभाव कम करना है.
  • इसके बाद इसमें cbs x डाला जाता है. इस तीनों को एक साथ कंटेनर में अच्छे से मिलाएं. इसमें cbs- x अच्छे से मिलाना होता है.
  • इसके बाद सारे पाउडर फॉर्म डालने के लिए मिक्सर मशीन का प्रयोग करें. इस मिक्सर मशीन में 35 किलो ग्लौबेर साल्ट, 5 किलो सोडा ऐश, 5 किलो डोलोमाइट, ट्राई सोडियम फॉस्फेट, कलर साल्ट डाल के मिलाएं. इस मिक्सर को डायरेक्ट और रिवर्स दोनों तरह से चलायें ताकि तीनों सही से मिक्स हो सके.
  • इसके बाद इसमें कलर साल्ट, व्हाइटनर और परफ्यूम डालें. कलर साल्ट डालने से डिटर्जेंट का रंग आकर्षक और परफ्यूम से इसमें सुगंध आ जाती है.
  • इसके बाद इसी मशीन में पहले से बनाए गये एसिड स्लरी घोल को डालें. इसी समय इसमें सोडियम ट्राई पोली फॉस्फेट और कार्बोक्ज़ी मिथाइल सेल्युलोस भी मिश्रित करें.
  • एक बार सारे रसायन अच्छे से मिक्स हो जाने के बाद इसे 12 घंटे के लिए सूखने को छोड़ दें. जब ये पूरी तरह सूख जायेंगा तो आप पायेंगे कि ये मोटा यानि ढेले जैसा हो गया है. इसे बारीक करने के लिए आप स्क्रीमिंग मशीन की सहयता लें और उसमे इसे डाल कर बारीक बना लें.
  • इस तरह आपका डिटर्जेंट बन कर तैयार हो जाता है और आप इसे बाज़ार के लिए पैक भी कर सकते हैं.

डिटर्जेंट पाउडर की पैकेजिंग

  • पैकेजिंग के लिए अपने ब्रांड का पैकेट इस्तेमाल करें. यदि आपको किसी कंपनी से पहले से काम मिला हुआ है, तो आपको उसी कम्पनी के ब्रांड का पैकेट इस्तेमाल करना होगा. अन्यतः आप अपना ब्रांड्स इस्तेमाल कर सकते हैं. पैकेजिंग के लिए निम्न बातों पर ध्यान दें.
  • पैकेजिंग करने के पहले इस बात का ख्याल रखें कि एक पैकेट में कितना डिटर्जेंट पाउडर देना है. आप एक किलो का पैकेट बना रहे हैं या आधे किलो का इसका ध्यान रखना ज़रूरी है.
  • अपने ब्रांड को प्रमोट करने के लिए आकर्षक पैकेट बनाएं. पैकेट पर नीम्बू आदि की तस्वीर हो तो और भी बेहतर है.
  • पैकेजिंग करने के लिए ‘सीलिंग मशीन’ का इस्तेमाल करें. इस मशीन से पैकेट बहुत अच्छे से बनता है और देखने में आकर्षक लगता है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के व्यापार के लिए लाइसेंस

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के लिए आपको अपने फर्म को एलएलपी, ओपीसी आदि के अंतर्गत पंजीकृत कराना पड़ता है. आपके फर्म का एक बैंक अकाउंट होना बहुत ज़रूरी है. इसके साथ पोल्यूशन कण्ट्रोल बोर्ड की तरफ से भी ‘कंसेंट टू एस्टब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ दोनों तरह के लाइसेंस प्राप्त करने की आवाश्यक्ता होती है. क्वालिटी कण्ट्रोल के लिए बीआईएस रजिस्ट्रेशन करवाना होता है. आपको अपने ब्रांड अथवा ट्रेडमार्क का भी रजिस्ट्रेशन करवाना होता है.

डिटर्जेंट पाउडर बनाने के व्यापार की मार्केटिंग

मार्केटिंग के लिए आप रिटेल और होलसेल दोनों तरह के मार्केट का इस्तेमाल कर सकते हैं. आप अपने मार्केटिंग स्ट्रेटेजी में उन सभी दुकानों को ला सकते हैं, जो रिटेल में सामान बेचते हैं. इस तरह के दुकानों में अपना बनाया सामान बेचने पर लाभ अधिक होता है. इसके अलावा आप होलसेल के तहत बड़े दुकानों को भी डिटर्जेंट बेच देते हैं, जहाँ से रिटेलर अक्सर अपने दूकान के लिए खरीदते हैं. ब्रांड के प्रचार के लिये होर्डिंग वैगेरह का इस्तेमाल कर सकते हैं. यदि आप शुरू में अपने प्रोडक्ट पर किसी तरह का ऑफर दें तो वो भी कारगर होगा.

इस तरह से आप 4 से 5 लाख के अन्दर एक ऐसा व्यापार स्थापित कर सकते हैं, जो लॉन्ग टर्म बिज़नस साबित हो सकता है और आपको लम्बे समय तक भरपूर लाभ दे सकता है.

और ज्यादा जानकारी के लिए Sweta Tech Tips का वीडियो देखें

सिर्फ 50 हज़ार में शुरू करें पेपर प्लेट बनाने का बिज़नेस

दोस्तों आप जब भी शादी पार्टी या किसी फंक्शन में जाते होंगे तो आप ने डिस्पोजल प्लेट का उपयोग जरूर किया होगा। यह प्लेट मार्किट में डझन से मिलती है। आप ने भी कई बार इसके ख़रीदा होगा। आज हम इसी बिज़नस के बारे में बात करने वाले है।

डिस्पोजल पेपर प्लेट , छोटी कटोरी , जिसे द्रोन भी कहा जाता है। और बड़ी प्लेट जिसमे आराम से खाना खाए जा सकता है। यह बिज़नस बहोत कम इन्वेस्टमेंट में शुरू होता है। और आप अपने घर से ही इसे शुरू कर सकते है। तो चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते है।

यह बिज़नस बहुत ही आसान है और कोई भी इसे शुरू कर सकता है। डिस्पोजल पेपर प्लेट मशीन को इस्तेमाल करना भी बहुत ही आसान है। कोई भी इसे 10 -15 मिनट में सिख सकता है। जब भी कोई नया बिज़नस स्टार्ट करता है तो पैसे की सबसे पहली प्रॉब्लम होती है।

इसलिए यह मशीन लगभग कोई भी खरीद सकता है। क्योंकि इसकी कीमत सिर्फ 40 हज़ार से शुरू हो जाती है । आप पहले सेमी पेपर प्लेट मेकिंग मशीन से शुरुवात कर कर सकते है। और धीरे -धीरे आप आटोमेटिक मशीन थर्मोकोल प्लेट , प्लास्टिक कप आदि के यूनिट शुरू कर सकते है।

पेपर प्लेट उद्योग शुरू करने के लिए जरूरी सामान

  • डिस्पोजल पेपर प्लेट मशीन
  • 400 -500 sqft जगह
  • बिजली की सप्लाई
  • 80 gsm paper ( raw material )
  • लेबर
  • कच्चा माल (Raw material )

Raw material मतलब वह पेपर जिससे आप प्लेट , कटोरी बनायेगे। यह पेपर 80 gsm से लेकर 200 gsm तक रहता है। gsm का मतलब होता है gram per square meter मतलब जितना ज्यादा gsm होगा उतना अच्छा आप का पेपर होगा और उतनी अच्छी क्वालिटी की आप की प्लेट होगी।

आप को अपने शहर के मार्केट में देखना होगा की वहाँ किस क्वालिटी की प्लेट चलती है , और फिर उस हिसाब से आप पेपर ले सकते हो। यह पेपर साधारण 40 से 50 kg मिलता है। अब आप सोच रहे होंगे की raw material हमे कहा मिलेगा ? raw material भी को मशीन सप्लायर दे देगा। उसकी quality और भाव देखकर आप रॉ मटेरियल का चयन कर सकते है।

मशीन की जानकारी

अब आप सोच रहे होंगे यह मशीन कितने की होगी तो जैसे की मैंने कहा था की यह कोई भी खरीद सकता है आटोमेटिक मशीन केवल 40 हजार से 75 हजार तक आप को मिल जाएगी। यदि आप फुल्ली आटोमेटिक लेगे तो या थोड़ी मंहगी होगी 1 लाख के उप्पर आप को यह मिल जाएगी। आप को एक die वाली भी मशीन मिल जाएगी। पर उसमे आप का वक़्त ज्यादा जायेगा । डबल die वाली भी मशीन में काम वक़्त में ज्यादा प्लेट बना सकते है

आप indimart नाम की वेबसाइट पर इसका कोटशन देख सकते है। वहा आप को अलग अलग prize में यह मशीन आप को मिल जाएगी। आप सब से पहले सोच ले की कोनसी मशीन आपको लेनी है उसके बाद आप अलग अलग जगह के कोटेशन निकल ले और जहा आप को इसकी कीमत ठीक लगे वहा से आर्डर कर ले। indimart वेबसाइट पर बाकि पेपर प्लेट मेकिंग मशीन की कीमत जानने के लिए निचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करें

https://dir.indiamart.com/impcat/fully-automatic-paper-plate-machine.html

आज हम आपको एक मशीन का वीडियो भी दिखयँगे इस वीडियो में आपको ‘Metro Machinery Pvt. Ltd.’ नाम की कंपनी की फुल्ली आटोमेटिक मशीन के बारे में जानकरी दी गई है । यह मशीन 2000 से 2400 प्लेट एक घंटे में त्यार कर देती है ।

इस मशीन से आप 12 से 16 इंच के साइज की प्लेट त्यार कर सकते है । इस मशीन को चलने के लिए 2 HP की मोटर लगी होती है । अगर आप ‘Metro Machinery Pvt. Ltd.’ कंपनी से संपर्क करना चाहते है तो 08071675481 नंबर पर संपर्क कर सकते है । इस मशीन की कीमत 2 लाख 60 हज़ार है।

यह मशीन कैसे काम करती है इसके लिए वीडियो भी देखें

Siyaram’s गारमेंट कंपनी दे रही है स्टोर खोलने का मौका,

अगर आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन किसी फील्‍ड के एक्‍सपर्ट नहीं हैं तो आपको बिजनेस शुरू करने में दिक्‍कत हो सकती है। यहां एक बिजनेस ऐसा भी है, जिसके लिए एक्‍सपर्ट होना जरूरी नहीं है।

यह बिजनेस है रेडीमेड गारमेंट का। एक रेडीमेड गारमेंट बनाने वाली कंपनी आपको अपना स्टोल खोलने का मौका दे रही है। आप रेडीमेड गारमेंट बनाने वाली इस कंपनी की फ्रेंचाइजी लेकर हर महीने अच्छी कमाई कर सकते हैं।

सियाराम सिल्क दे रही है अपनी फ्रेंचाइजी

सियाराम के कपड़े को अच्‍छी क्‍वालिटी और स्‍टेटस सिंबल के रूप में देखा जाता है। सियाराम ब्रांड्स में सियाराम शूटिंग एंड शर्टिंग, J. Hampstead फैब्रिक एंड अपैरेल, ओग्जेमबर्ग, मिस्टेयर, मोरेटी, रॉयल लिनेन और मिनिएच्योर शामिल हैं। कंपनी अपना देश के सभी राज्यों में विस्तार करने जा रही है। ऐसे में आपके पास सियाराम सिल्क की फ्रेंचाइजी लेने का मौका है।

कितना करना हो इन्वेस्ट

20-30 लाख रु में मिलेगी फ्रेंचाइजी कंपनी विस्तार प्रोग्राम के तहत देश भर में फ्रेंचाइजी खोलने का मौका दे रही है। कंपनी 20 से 30 लाख रुपए में फ्रेंचाइजी खोलने का मौका दे रही है। फ्रेंचाइजी को स्टोर शुरू करने के लिए पूरा सपोर्ट कंपनी करेगी।

कुछ शर्तों को करना होगा पूरा सियाराम की फ्रेंचाइजी लेने के लिए कंपनी की कुछ शर्तों को पूरा करना पड़ेगा। – प्राइम मार्केट में आपके पास 500-1200 वर्ग फुट की शॉप होनी चाहिए। यह शॉप अपनी, किराए या लीज पर भी हो सकती है। – शॉप के साथ कम से कम 15 फुट का फ्रंटेज होना चाहिए।

कैसे होगी इनकम

60 हजार से ज्यादा होगी मंथली इनकम फ्रेंचाइजी इंडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार, सियाराम के फ्रेंचाइजी ओनर को उनको इन्वेस्टमेंट पर सालाना 25 से 36 फीसदी का रिटर्न मिल सकता है। फ्रेंचाइजी ओनर को उनके निवेश पर प्रॉफिट मिलने में 3 से 4 साल का वक्त लग सकता है। यह कमाई शोरूम के लोकेशन और शहर पर डिपेंड होगा।

ऐसे करें कंपनी से सम्‍पर्क

यदि आप सियाराम शॉप फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कंपनी की वेबसाइट पर जाकर संपर्क करना होगा। इसके अलावा, आप अपना प्रपोजल jasvinder.arora@siyaram.com पर भेज सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी आप इस नंबर 02230400500/602 पर फोन कर प्राप्त कर सकते हैं।

कमाल की है यह डोसा बनाने वाली मशीन ,एक घंटे में त्यार करती सकती है 500 डोसा

कमाल की है यह डोसा बनाने वाली मशीन ,एक घंटे में त्यार करती सकती है 500 डोसा डोसा साउथ इंडिया का मुख्या पकवान है ।

साउथ इंडिया के इलावा नार्थ इंडिया में भी इसकी बहुत डिमांड है । हमारे यहाँ हर शादी में डोसा की एक स्टाल होती ही है इसके इलावा भी होटल्स में डोसा लोग बहुत शोक से कहते है ।

अगर कहीं पर डोसा की ज्यादा लागत हो तो डोसा बनाने के एक ऐसी मशीन आई है जिससे आप की लागत बहुत ही कम हो जाती है ।डोसा बनाने की इस मशीन को गैस और बिजली दोनों से चलना पड़ता है। यह मशीन बहुत सफाई से डोसा त्यार करती है ।

ये मशीन एक घंटे मे 500 से 800 पीस त्यार करती है| ये मशीन गैस और बिजली से चलती है इस मशीन को 1 HP से 1.5 HP पावर पर चलती है । इस मशीन की कीमत 1 .5 से 2 लाख तक है |

इस मशीन को खरीदने के लिए निचे दिए हुए लिंक पर क्लीक करें

http://www.svind.in/kitchen-equipments.htm

5 लाख में शुरू हो जाएगा पॉल्‍ट्री बिजनेस, सरकार करेगी 75% पैसे का सपोर्ट

विंटर सीजन शुरू हो चुका है। इस सीजन में अंडे और चिकन की डिमांड बढ़ जाती है। यही वजह है कि पॉल्‍ट्री बिजनेस करने का भी यह बहुत सही समय है। अगर आप बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो पॉल्‍ट्री बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

यह ऐसा बिजनेस है, जिसमें सरकार भी पूरा सपोर्ट करती है। सरकारी एजेंसी  द्वारा पॉल्‍ट्री बिजनेस का पूरा सपोर्ट किया जाता है। बस आपको इसके बारे में कुछ बारीकियां पता होनी चाहिए। हम आपको न केवल यह बताएंगे कि यह बिजनेस कैसे किया जा सकता है, बल्कि यह भी बताएंगे कि कैसे आप नाबार्ड से सपोर्ट भी ले सकते हैं।

सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि पॉल्‍ट्री बिजनेस दो तरह का होता है। यदि आप अंडों का बिजनेस करना चाहते हैं या चिकन का। यदि आप अंडे का बिजनेस करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी होगी और आप चिकन का बिजनेस करना चाहते हैं तो आपको ब्रायलर मुर्गियां पालनी होंगी।

कितने में शुरू होगा यह बिजनेस

नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्‍चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) द्वारा तैयार किए गए मॉडल प्रोजेक्‍ट्स के मुताबिक यदि आप पॉल्‍ट्री ब्रायलर फार्मिंग करना चाहते हैं और कम से कम 10 हजार मुर्गियों से बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख रुपए का इंतजाम करना होगा, जबकि बैंक आपको लगभग 75 फीसदी यानी कि 27 लाख रुपए तक का लोन मिल जाएगा।

यदि आप 10 हजार मुर्गियों से पॉल्‍ट्री लेयर फार्मिंग करना चाहते हैं तो आपको 10 से 12 लाख रुपए का इंतजाम करना होगा और बैंक आपको 40 से 42 लाख रुपए तक का लोन दे सकता है। बैंक से आसानी से लोन लेने के लिए नाबार्ड कंसलटेंसी सर्विस की सहायता भी ली जा सकती है।

कितनी होगी कमाई

नाबार्ड के मुताबिक, एक स्‍वस्‍थ चूजा 16 से 18 रुपए में मिल जाता है। और ब्रायलर चूजा अच्‍छा व पौष्टिक आहार मिलने पर 40 दिन में एक किलोग्राम हो जाता है, जबकि लेयर ब्रिड के चूजे 4 से 5 महीने में अंडे देना शुरू कर देते हैं और औसतन डेढ़ साल तक लगभग 300 अंडे देते हैं।

नाबार्ड के मॉडल प्रोजेक्‍ट के मुताबिक ब्रायलर फार्मिंग में आप लगभग 70 लाख रुपए तक कमाई कर सकते हैं, जबकि आपका कुल खर्च 64 से 65 लाख रुपए तक हो सकता है, जिसमें चूजे की खरीद, दाना, दवाइयां, इंश्‍योरेंस, शेड का किराया, बिजली का बिल, ट्रांसपोर्टेशन आदि शामिल है। यानी कि आप 4 से 5 महीने में लगभग 15 लाख रुपए कमाई कर सकते हैं।

 अंडों से कमाई

यदि आप 10 हजार मुर्गियों से ब्रायलर फार्मिंग का बिजनेस शुरू करते हैं तो आप पहले साल में लगभग 35 लाख रुपए का अंडे बेच सकते हैं। साथ ही, एक साल बाद मुर्गियों को चिकन के लिए बेच दिया जाता है। इससे लगभग 5 से 7 लाख रुपए की आमदनी होगी। जबकि कुल खर्च लगभग 25 से 28 लाख रुपए होगी और साल भर में 12 से 15 लाख रुपए प्रॉफिट कमा सकते हैं। आगे के सालों में आपकी कैपिटल कॉस्‍ट कम हो जाती है।

बिजनेस के लिए कितने स्‍पेस की जरूरत होगी

पॉल्‍ट्री फार्मिंग के लिए स्‍पेस की खास जरूरत होती है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि आप किसी विकसित इलाके में ही पॉल्‍टी फार्मिंग करें, क्‍योंकि यह आपके लिए महंगा साबित हो सकता है, लेकिन इतना जरूर है कि पॉल्‍ट्री फार्म शहर के निकट ही हो और वहां तक वाहनों का आना जाना आसान हो। कितने स्‍पेस की जरूरत पड़ेगी,

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी मुर्गियों से अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। माना जाता है कि एक मुर्गी को कम से कम 1 वर्ग फुट की जरूरत पड़ती है और यदि यह स्‍पेस 1.5 वर्ग फुट हो तो अंडों या चूजों के नुकसान की आशंका काफी कम हो जाती है। इसके अलावा फार्मिंग ऐसी जगह पर करनी चाहिए, जहां बिजली का पर्याप्‍त इंतजाम होना चाहिए।